Official NCERT Solutions for Class 12 Political Science: Chapter 01 राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
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Chapter-wise Solutions for Political Science: Chapter 01 राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
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Question 1: भारत विभाजन के बारे में निम्नलिखित कौन-सा कथन गलत है?
(क) भारत-विभाजन 'द्वि-राष्ट्र सिद्धांत' का परिणाम था।
(ख) धर्म के आधार पर दो प्रांतों-पंजाब और बंगाल का बँटवारा हुआ।
(ग) पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान में संगति नहीं थी।
(घ) विभाजन की योजना में यह बात भी शामिल थी कि दोनों देशों के बीच आबादी की अदला-बदली होगी।
Answer:
(घ) विभाजन की योजना में यह बात भी शामिल थी कि दोनों देशों के बीच आबादी की अदला-बदली होगी।
मुख्य बिंदु:
• भारत विभाजन 'द्वि-राष्ट्र सिद्धांत' का परिणाम था जिसे मुस्लिम लीग ने प्रतिपादित किया था।
• बंगाल और पंजाब का बँटवारा धार्मिक बहुसंख्या के आधार पर किया गया था।
• पाकिस्तान के दो हिस्से थे जो भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से दूर थे।
• विभाजन की मूल योजना में नागरिकों की बड़े पैमाने पर आबादी की अदला-बदली शामिल नहीं थी, यह बाद की हिंसक परिस्थितियों का परिणाम था।
आम गलतियाँ:
• कई छात्र द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को कांग्रेस की नीति मान लेते हैं जो गलत है।
• बंगाल और पंजाब के अलावा अन्य प्रांतों का धार्मिक आधार पर विभाजन मान लेना।
• यह सोचना कि योजनाबद्ध तरीके से आबादी की अदला-बदली हुई थी।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) कथन आधारित प्रश्नों में गलत कथन की पहचान करते समय ऐतिहासिक तथ्यों का स्मरण रखें।
c) उत्तर लिखते समय केवल सही विकल्प संख्या और कथन लिखें।
Question 2: निम्नलिखित सिद्धांतों के साथ उचित उदाहरणों का मेल करें:
(क) धर्म के आधार पर देश की सीमा का निर्धारण
(ख) विभिन्न भाषाओं के आधार पर देश की सीमा का निर्धारण
(ग) भौगोलिक आधार पर किसी देश के क्षेत्रों का सीमांकन
(घ) किसी देश के भीतर प्रशासनिक और राजनीतिक आधार पर क्षेत्रों का सीमांकन
Answer:
(क) धर्म के आधार पर देश की सीमा का निर्धारण - (2) भारत और पाकिस्तान
(ख) विभिन्न भाषाओं के आधार पर देश की सीमा का निर्धारण - (1) पाकिस्तान और बांग्लादेश
(ग) भौगोलिक आधार पर किसी देश के क्षेत्रों का सीमांकन - (4) हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड
(घ) किसी देश के भीतर प्रशासनिक और राजनीतिक आधार पर क्षेत्रों का सीमांकन - (3) झारखंड और छत्तीसगढ़
मुख्य बिंदु:
• भारत और पाकिस्तान का निर्माण धार्मिक आधार पर हुआ था।
• भाषा के आधार पर राज्यों और क्षेत्रों का पुनर्गठन बाद में किया गया।
• भौगोलिक और प्रशासनिक आवश्यकताएं नए राज्यों के निर्माण का आधार बनीं।
• छत्तीसगढ़ और झारखंड का गठन प्रशासनिक सुगमता के लिए हुआ।
आम गलतियाँ:
• भाषाई और भौगोलिक आधारों को आपस में मिला देना।
• प्रशासनिक राज्यों के गठन के कारणों को न समझ पाना।
• मिलान करते समय गलत क्रम लिखना।
Exam Tips:
a) मिलान करने वाले प्रश्नों में दोनों सूचियों को अच्छी तरह पढ़ लें।
b) सही मिलान को स्पष्ट रूप से आमने-सामने लिखें।
c) यदि संभव हो तो उत्तर के साथ कारण भी संक्षिप्त में समझें।
Question 3: भारत का कोई समकालीन राजनीतिक नक्शा लीजिए (जिसमें राज्यों की सीमाएँ दिखाई गई हों) और नीचे लिखी रियासतों के स्थान चिन्हित कीजिए:
(क) जूनागढ़
(ख) मणिपुर
(ग) मैसूर
(घ) ग्वालियर
Answer:
भारत के समकालीन राजनीतिक मानचित्र में इन रियासतों की स्थिति इस प्रकार है:
(क) जूनागढ़: यह वर्तमान गुजरात राज्य के दक्षिण-पश्चिम भाग (सौराष्ट्र क्षेत्र) में स्थित है।
(ख) मणिपुर: यह भारत के उत्तर-पूर्व क्षेत्र में स्थित एक राज्य है।
(ग) मैसूर: यह क्षेत्र वर्तमान कर्नाटक राज्य के दक्षिणी भाग के अंतर्गत आता है।
(घ) ग्वालियर: यह मध्य प्रदेश राज्य के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित है।
मुख्य बिंदु:
• जूनागढ़ का विलय जनमत संग्रह के माध्यम से भारत में हुआ था।
• मणिपुर भारत का वह पहला राज्य है जहाँ सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव हुए।
• मैसूर रियासत का विलय स्वतंत्र भारत में आसानी से हो गया था जो बाद में कर्नाटक का हिस्सा बना।
• ग्वालियर एक प्रमुख रियासत थी जो मध्य भारत में स्थित थी।
आम गलतियाँ:
• मानचित्र में राज्यों की गलत भौगोलिक स्थिति दर्शाना।
• रियासतों के आधुनिक राज्यों के साथ सही मिलान न कर पाना।
• उत्तर-पूर्वी राज्यों की स्थिति में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) मानचित्र कार्य के लिए नियमित रूप से भारत के राजनीतिक मानचित्र का अभ्यास करें।
b) प्रमुख रियाسतों और उनकी वर्तमान भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करें।
c) उत्तर पुस्तिका में मानचित्र को सही ढंग से नामांकित करें।
Question 4: नीचे दो तरह की राय लिखी गई हैं:
विस्मय: रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने से इन रियासतों की प्रजा तक लोकतंत्र का विस्तार हुआ।
इंद्रप्रीत: यह बात मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। इसमें बलप्रयोग भी हुआ था जबकि लोकतंत्र में आम सहमति से काम लिया जाता है।
देशी रियासतों के विलय और ऊपर के मशविरे के आलोक में इस घटनाक्रम पर आपकी क्या राय है?
Answer:
विस्मय की राय अधिक तर्कपूर्ण और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुकूल है। रियासतों का भारतीय संघ में विलय केवल सत्ता का हस्तांतरण नहीं था, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम लोकतांत्रिक थे।
भारत सरकार ने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए कुछ मामलों में कड़े कदम उठाए, जो राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य थे।
दीर्घकालिक दृष्टि से, इन रियाسतों के भारतीय संघ में शामिल होने से वहाँ के नागरिकों को भी देश के बाकी हिस्सों की तरह लोकतांत्रिक अधिकार, समानता और मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ।
मुख्य बिंदु:
• रियाسतों का विलय भारत की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक था।
• सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता और कूटनीति ने अधिकांश रियाسतों का शांतिपूर्ण विलय सुनिश्चित किया।
• कुछ स्थानों पर बलप्रयोग की स्थिति उत्पन्न हुई क्योंकि वहाँ के शासक जनता की इच्छा के विरुद्ध स्वतंत्र रहना चाहते थे।
• विलय के बाद उन क्षेत्रों में भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली लागू हुई।
आम गलतियाँ:
• केवल बलप्रयोग वाले पक्ष को देखना और व्यापक राष्ट्रीय हित की उपेक्षा करना।
• रियासतों के विलय के लोकतांत्रिक परिणामों को न समझ पाना।
• ऐतिहासिक परिस्थितियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन न करना।
Exam Tips:
a) ऐसे वैचारिक प्रश्नों में किसी एक पक्ष के साथ संतुलित और तार्किक दृष्टिकोण से उत्तर दें।
b) राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र दोनों के मूल्यों को अपने उत्तर में शामिल करें।
c) सरदार पटेल की भूमिका का विशेष उल्लेख करें।
Question 5: नीचे 1947 के अगस्त के कुछ बयान दिए गए हैं जो अपनी प्रकृति में अत्यंत भिन्न हैं:
आज आपने अपने सर पर काँटों का ताज पहना है सत्ता का आसन एक बुरी चीज है। इस आसन पर आपको बड़ा सचेत रहना होगा.... आपको और ज्यादा विनम्र और धैर्यवान बन्ना होगा... अब लगातार आपकी परीक्षा की जाएगी।
- मोहनदास करमचंद गाँधी
भारत आजादी की जिंदगी के लिए जागेगा.... हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाएँगे.....आज दुर्भाग्य के एक दौर का خاتमा होगा और हिंदुस्तान अपने को फिर से पा लेगा....आज हम जो जश्न मना रहे हैं वह एक कदम भर है, संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं...
- जवाहरलाल नेहरू
इन दो बयानों से राष्ट्र-निर्माण का जो एजेंडा ध्वनित होता है उसे लिखिए। आपको कौन-सा एजेंडा जंच रहा है और क्यों?
Answer:
महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू दोनों के बयानों से राष्ट्र-निर्माण का एक नया और समावेशी एजेंडा सामने आता है।
गाँधी जी का बयान देश के सामने आने वाली कठिनाइयों, सांप्रदायिक हिंसा, जिम्मेदारी और आत्मसंयम पर जोर देता है।
नेहरू जी का बयान स्वतंत्रता के बाद देश की उम्मीदों, संभावनाओं, उज्ज्वल भविष्य और आधुनिक भारत के निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
हमें दोनों के विचार प्रासंगिक लगते हैं क्योंकि एक ओर जहाँ हमें समस्याओं के प्रति सचेत और विनम्र रहने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर विकास और प्रगति के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण भी जरूरी है।
मुख्य बिंदु:
• गांधी जी का दृष्टिकोण यथार्थवादी, नैतिक और जनसेवा की भावना पर आधारित था।
• नेहरू जी का दृष्टिकोण आधुनिकता, वैज्ञानिक सोच और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों से भरा था।
• दोनों नेताओं का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत, अखंड और लोकतांत्रिक भारत का निर्माण करना था।
• राष्ट्र निर्माण में चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ विकास की गति को बनाए रखना भी जरूरी था।
आम गलतियाँ:
• दोनों बयानों को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में देखना जबकि वे एक-दूसरे के पूरक हैं।
• केवल एक नेता के दृष्टिकोण तक उत्तर को सीमित रखना।
• प्रश्न में पूछे गए 'कौन-सा एजेंडा जंच रहा है' का कारण सहित उत्तर न देना।
Exam Tips:
a) उद्धरण आधारित प्रश्नों में दोनों विचारकों के मूल भाव को समझकर उत्तर दें।
b) स्वतंत्रता के समय की परिस्थितियों का संक्षिप्त संदर्भ दें।
c) अपने उत्तर में संतुलन बनाए रखें।
Question 6: भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने के लिए नेहरू ने किन तर्कों का इस्तेमाल किया? क्या आपको लगता है कि वे केवल भावनात्मक और नैतिक तर्क हैं अथवा इनमें कोई तर्क युक्तिपरक भी है?
Answer:
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने के लिए अत्यंत युक्तिपरक और तार्किक दृष्टिकोण अपनाया था।
उन्होंने माना कि आधुनिक और प्रगतिशील राज्य के लिए यह आवश्यक है कि वह किसी एक धर्म को राजकीय धर्म न बनाए और सभी नागरिकों को अपने धार्मिक विश्वास की पूरी स्वतंत्रता दे।
नेहरू जी के तर्क केवल भावनात्मक या नैतिक नहीं थे, बल्कि वे देश की विविधता, राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र की बुनियादी जरूरतों पर आधारित थे।
उनका मानना था कि बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक देश में सभी नागरिकों को समान अवसर और अधिकार दिए बिना लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता।
मुख्य बिंदु:
• नेहरू जी का दृष्टिकोण वैज्ञानिक और यथार्थवादी था जो सभी धर्मों के प्रति समान भाव पर आधारित था।
• धर्मनिरपेक्षता का अर्थ किसी भी धर्म के प्रति द्वेष न रखकर सभी को समान संरक्षण देना है।
• उन्होंने संकीर्णता और सांप्रदायिकता को राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़ी बाधा माना।
• राज्य का कोई अपना आधिकारिक धर्म नहीं होगा, यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की अनिवार्यता है।
आम गलतियाँ:
• धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्महीनता या नास्तिकता समझ लेना।
• नेहरू जी के तर्कों को केवल सैद्धांतिक मानकर व्यावहारिक पक्ष की उपेक्षा करना।
• उत्तर में केवल एक पक्ष (भावनात्मक या युक्तिपरक) का उल्लेख करना।
Exam Tips:
a) धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा स्पष्ट करते हुए नेहरू के विचारों को समझाइए।
b) तर्कों के युक्तिपरक स्वरूप को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
c) उत्तर में लोकतंत्र और विविधता के महत्व पर जोर दें।
Question 7: आजादी के समय देश के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में राष्ट्र निर्माण की चुनौती के लिहाज से दो मुख्य अंतर क्या थे?
Answer:
आजादी के समय देश के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में राष्ट्र निर्माण की चुनौतियों में निम्नलिखित दो मुख्य अंतर थे:
(1) भाषाई और सांस्कृतिक अंतर: पश्चिमी इलाके में मुख्य रूप से भाषाई और सांस्कृतिक एकरूपता थी जबकि धार्मिक आधार पर तीव्र विभाजन हुआ था। इसके विपरीत, पूर्वी इलाके में भाषा और संस्कृति की समानता होने के बावजूद धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बड़ी चुनौती थी।
(2) विस्थापन और हिंसा का स्वरूप: पश्चिमी सीमा पर बड़े पैमाने पर हिंसक विस्थापन और सांप्रदायिक दंगे हुए, जबकि पूर्वी हिस्से में शरणार्थियों का आना और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा अधिक लंबी और जटिल प्रक्रिया बनी रही।
मुख्य बिंदु:
• पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों और पंजाब-सिंध के विभाजन का दर्द अलग प्रकृति का था।
• पूर्वी बंगाल से विस्थापन की समस्या लंबे समय तक चलती रही।
• दोनों क्षेत्रों में भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियाँ भिन्न थीं।
• राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में क्षेत्रीय विविधताओं ने अलग-अलग प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न कीं।
आम गलतियाँ:
• दोनों क्षेत्रों की समस्याओं को एक समान मान लेना।
• केवल विस्थापन की बात करना और क्षेत्रीय सांस्कृतिक अंतर को छोड़ देना।
• सटीक दो अंतरों को स्पष्ट रूप से बिंदुवार न लिखना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करते समय तुलनात्मक भाषा का प्रयोग करें।
b) पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान/भारत के संदर्भ को स्पष्ट रखें।
c) उत्तर को दो स्पष्ट बिंदुओं में विभाजित करें।
Question 8: राज्य पुनर्गठन आयोग का काम क्या था? इसकी प्रमुख सिफारिश क्या थी?
Answer:
राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्यों की सीमाओं का निर्धारण करना था ताकि भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की माँग पर विचार किया जा सके।
इस आयोग का गठन 1953 में किया गया था जिसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति फजल अली थे।
इसकी प्रमुख सिफारिश यह थी कि राज्यों की सीमाओं का निर्धारण वहाँ बोली जाने वाली भाषा के आधार पर होना चाहिए।
इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही 1956 में 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम' पास किया गया जिसके अंतर्गत भारत में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
मुख्य बिंदु:
• आंध्र प्रदेश के गठन और भाषाई आंदोलनों के बाद राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था।
• आयोग ने भाषाई विविधता को स्वीकार करते हुए राज्यों के पुनर्गठन का मार्ग प्रशस्त किया।
• त्रिस्तरीय राज्य प्रणाली को समाप्त कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की व्यवस्था की गई।
• इस पुनर्गठन से देश की राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिली न कि कमजोरी।
आम गलतियाँ:
• आयोग के अध्यक्ष का नाम या गठन वर्ष गलत लिखना।
• यह मान लेना कि आयोग ने भाषाई राज्यों का विरोध किया था।
• राज्यों की अंतिम संख्या (14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) आयोग के गठन का वर्ष और अध्यक्ष का नाम अवश्य लिखें।
b) प्रमुख सिफारिशों को स्पष्ट बुलेट पॉइंट्स में दर्शाएं।
c) अधिनियम के परिणामों का संक्षिप्त उल्लेख करें।
Question 9: कहा जाता है कि राष्ट्र एक व्यापक अर्थ में 'कल्पित समुदाय' होता है और सर्वसामान्य विश्वास, इतिहास, राजनीतिक आकांक्षा और कल्पनाओं से एकसूत्र में बँधा होता है। उन विशेषताओं की पहचान करें जिनके आधार पर भारत एक राष्ट्र है।
Answer:
भारत एक राष्ट्र के रूप में निम्नलिखित विशेषताओं और आधारों पर टिका है:
(1) भारतीय संस्कृति: विभिन्नताओं के बावजूद यहाँ एक साझा सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों का विकास हुआ है जो लोगों को जोड़ता है।
(2) अनेकता में एकता: विभिन्न जातियों, धर्मों और भाषाओं के होते हुए भी भारतीय समाज में एक गहरी भावनात्मक और राष्ट्रीय एकता विद्यमान है।
(3) ऐतिहासिक साझापन: स्वतंत्रता संग्राम का लंबा इतिहास और साझा संघर्ष राष्ट्र निर्माण का एक मजबूत आधार है।
(4) भौगोलिक और राजनीतिक एकता: संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं ने पूरे देश को एक राजनीतिक सूत्र में पिरोया है।
मुख्य बिंदु:
• राष्ट्र केवल भौगोलिक भूभाग नहीं बल्कि नागरिकों की साझा भावनाओं और आकांक्षाओं का परिणाम है।
• भारत की विविधता इसकी कमजोरी नहीं बल्कि इसकी सांस्कृतिक शक्ति है।
• राष्ट्रीय आंदोलन ने भारत के विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
• संवैधानिक मूल्य भारत की राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ बनाते हैं।
आम गलतियाँ:
• राष्ट्र की परिभाषा को केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित कर देना।
• अनेकता में एकता के महत्व को स्पष्ट न कर पाना।
• ऐतिहासिक संघर्षों की भूमिका की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) 'कल्पित समुदाय' और राष्ट्र निर्माण के वैचारिक पहलुओं को समझें।
b) भारत के संदर्भ में संस्कृति और इतिहास के बिंदुओं को प्रमुखता दें।
c) उत्तर को तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक बनाएँ।
Question 10: नीचे लिखे अवतरण को पढ़िए और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
राष्ट्र-निर्माण के इतिहास के लिहाज से सिर्फ सोवियत संघ में हुए प्रयोगों की तुलना भारत से की जा सकती है। सोवियत संघ में भी विभिन्न और परस्पर अलग-अलग जातीय समूह, धर्म, भाषाई समुदाय और सामाजिक वर्गों के बीच एकता का भाव कायम करना पड़ा। जिस पैमाने पर यह काम हुआ, चाहे भौगोलिक पैमाने के देखें या जनसंख्यागत वैविध्य के लिहाज से, वह अपने आप में बहुत व्यापक कहा जाएगा। दोनों ही जगह राज्य को जिस कच्ची सामग्री से राष्ट्र निर्माण की शुरुआत करनी थी वह समान रूप से दुष्कर थी। लोग धर्म के आधार पर बँटे हुए और कर्ज तथा बीमारी से दबे हुए थे।
(क) यहाँ लेखक ने भारत और सोवियत संघ के बीच जिन समानताओं का उल्लेख किया है, उनकी एक सूची बनाइए। इनमें से प्रत्येक के लिए भारत से एक उदाहरण दीजिए।
(ख) लेखक ने यहाँ भारत और सोवियत संघ में चली राष्ट्र निर्माण की प्रक्रियाओं के बीच की असमानता का उल्लेख नहीं किया है। क्या आप दो असमानताएँ बता सकते हैं?
(ग) अगर पीछे मुड़कर देखें तो आप क्या पाते हैं? राष्ट्र-निर्माण के इन दो प्रयोगों में किसने बेहतर काम किया और क्यों?
Answer:
(क) भारत और सोवियत संघ के बीच समानताएँ और उनके उदाहरण:
• विविध जातीय और धार्मिक समूहों का होना। उदाहरण: भारत में अनेक धर्मों, जातियों और संस्कृतियों का सह-अस्तित्व है।
• कठिन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में राष्ट्र निर्माण की शुरुआत। उदाहरण: गरीबी, अशिक्षा और बीमारी से ग्रस्त समाज में भारत ने विकास शुरू किया।
(ख) भारत और सोवियत संघ के बीच मुख्य असमानताएँ:
• राजनीतिक व्यवस्था: भारत में शुरू से ही बहुदलीय लोकतंत्र और स्वतंत्र शासन प्रणाली अपनाई गई जबकि सोवियत संघ में एकदलीय कम्युनिस्ट शासन व्यवस्था थी।
• राष्ट्र निर्माण का आधार: भारत में राष्ट्र का निर्माण लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के आधार पर हुआ, जबकि सोवियत संघ में साम्यवादी विचारधारा और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण से राष्ट्र निर्माण किया गया।
(ग) बेहतर प्रयोग का मूल्यांकन:
यदि पीछे मुड़कर देखें तो स्पष्ट होता है कि भारत का प्रयोग अधिक सफल और दीर्घकालिक साबित हुआ। 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया क्योंकि वह अपनी आंतरिक विविधताओं और आर्थिक समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से संभाल नहीं पाया, जबकि भारत आज भी दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र बना हुआ है।
मुख्य बिंदु:
• सोवियत संघ और भारत दोनों के सामने बहुसांस्कृतिक समाजों को एक सूत्र में बांधने की चुनौती थी।
• लोकतांत्रिक व्यवस्था ने भारत की विविधता को जोड़े रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
• सोवियत संघ का पतन सत्ता के केंद्रीकरण और अलोकतांत्रिक प्रणालियों का परिणाम था।
• भारत की विविधता में एकता का मॉडल अन्य देशों के लिए प्रेरणास्रोत है।
आम गलतियाँ:
• गद्यांश आधारित प्रश्नों में बिना गद्यांश को समझे अपने मन से उत्तर लिखना।
• सोवियत संघ और भारत की राजनीतिक प्रणालियों के अंतर को स्पष्ट न करना।
• तुलनात्मक निष्कर्ष लिखते समय ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी करना।
Exam Tips:
a) गद्यांश के तीनों उप-प्रश्नों (क, ख, ग) के उत्तर अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखें।
b) तुलना करते समय लोकतंत्र और तानाशाही शासन प्रणालियों के परिणामों को आधार बनाएँ।
c) सोवियत संघ के विघटन के ऐतिहासिक तथ्य को अपने उत्तर में जरूर शामिल करें।
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