NCERT Solutions Class 12 Political Science Contemporary World Politics Chapter 01 The End of Bipolarity (दो ध्रुवीयता का अंत) in Hindi

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Question 1: सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(क) सोवियत अर्थव्यवस्था में समाजवाद प्रभावी विचारधारा थी।
(ख) उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व/नियंत्रण होना।
(ग) जनता को आर्थिक आजादी थी।
(घ) अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियंत्रण राज्य करता था।

Answer:

(ग) जनता को आर्थिक आजादी थी।

मुख्य बिंदु:

• सोवियत अर्थव्यवस्था समाजवादी विचारधारा पर आधारित थी।
• वहाँ उत्पादन के सभी साधनों पर राज्य का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण था।
• व्यक्तिगत संपत्ति और आर्थिक स्वतंत्रता का वहाँ अभाव था।

आम गलतियाँ:

• छात्र अक्सर समाजवादी व्यवस्था में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बाजार आधारित आर्थिक आजादी समझ लेते हैं।
• विकल्पों को बिना ध्यान से पढ़े उत्तर का चयन करना।
• राज्य के नियंत्रण की प्रकृति को पूंजीवादी व्यवस्था जैसा समझना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
b) सोवियत संघ की केंद्रीय नियोजित अर्थव्यवस्था की विशेषताओं को हमेशा याद रखें।
c) ऐसे प्रश्नों में सीधे तथ्यात्मक उत्तर ही लिखें।

 

Question 2: निम्नलिखित को कालक्रमानुसार सजाएँ?
(क) अफ्गानिस्तान-संकट
(ख) बर्लिन-दीवार का गिरना
(ग) सोवियत संघ का विघटन
(घ) रूसी क्रांति

Answer:

घटनाओं का सही कालक्रम निम्नलिखित है:
1. (घ) रूसी क्रांति (वर्ष 1917)
2. (क) अफ्गानिस्तान-संकट (वर्ष 1979)
3. (ख) बर्लिन-दीवार का गिरना (वर्ष 1989)
4. (ग) सोवियत संघ का विघटन (वर्ष 1991)

मुख्य बिंदु:

• रूसी क्रांति 1917 में व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में हुई थी।
• सोवियत संघ ने 1979 में अफगानिस्तान में हस्तक्षेप किया था।
• बर्लिन की दीवार नवंबर 1989 में गिराई गई थी और दिसंबर 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ।

आम गलतियाँ:

• घटनाओं के वर्षों को आपस में भ्रमित कर देना।
• बर्लिन दीवार के गिरने और सोवियत संघ के विघटन के क्रम में गलती करना।

Exam Tips:

a) महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के सन (वर्ष) याद रखना बेहद जरूरी है।
b) कालक्रमानुसार प्रश्नों को हल करते समय पहले सभी घटनाओं के वर्ष किनारे पर लिख लें।
c) उत्तर को क्रमबद्ध तरीके से ही प्रस्तुत करें।

 

Question 3: निम्नलिखित में कौन-सा सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है?
(क) संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच विचारधारात्मक लड़ाई का अंत
(ख) स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) का जन्म
(ग) विश्व-व्यवस्था के शक्ति-संतुलन में बदलाव
(घ) मध्यपूर्व में संकट

Answer:

(घ) मध्यपूर्व में संकट

मुख्य बिंदु:

• सोवियत संघ के विघटन से शीत युद्ध की समाप्ति हुई और वैचारिक लड़ाई खत्म हुई।
• विघटन के बाद सोवियत संघ के उत्तराधिकारी के रूप में सीआईएस का गठन हुआ।
• अमेरिका की एकमात्र महाशक्ति बनने से वैश्विक शक्ति-संतुलन बदल गया।

आम गलतियाँ:

• सोवियत विघटन के प्रभावों और अन्य वैश्विक समस्याओं में अंतर न समझ पाना।
• मध्यपूर्व के संकट को सोवियत विघटन का परिणाम मान लेना।

Exam Tips:

a) प्रश्न में 'नहीं है' शब्द पर विशेष ध्यान दें।
b) सोवियत संघ के विघटन के परिणामों को बिंदुओं में याद रखें।
c) वैचारिक संघर्ष और शक्ति संतुलन पर इसके प्रभाव को स्पष्ट समझें।

 

Question 4: निम्नलिखित में मेल बैठाएँ-
(1) मिखाइल गोर्बाचिव      (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
(2) शॉक थेरेपी             (ख) सैन्य समझौता
(3) रूस                      (ग) सुधारों की शुरुआत
(4) बोरिस येल्तसिन         (घ) आर्थिक मॉडल
(5) वारसा                    (ङ) रूस के राष्ट्रपति

Answer:

सही मिलान निम्नलिखित है:
(1) मिखाइल गोर्बाचिव - (ग) सुधारों की शुरुआत
(2) शॉक थेरेपी - (घ) आर्थिक मॉडल
(3) रूस - (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
(4) बोरिस येल्तसिन - (ङ) रूस के राष्ट्रपति
(5) वारसा - (ख) सैन्य समझौता

मुख्य बिंदु:

• गोर्बाचिव ने ग्लास्नोस्त और पेरेस्त्रोइका सुधार शुरू किए थे।
• शॉक थेरेपी साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण का मॉडल था।
• रूस को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी देश माना गया।

आम गलतियाँ:

• मिलान करते समय रेखा खींचने से बचना चाहिए, आमने-सामने सही उत्तर लिखना बेहतर होता है।
• नामों और उनके कार्यों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) मिलान वाले प्रश्नों में सही उत्तर के सामने उसका सटीक विकल्प लिखें।
b) सभी प्रमुख नेताओं और उनकी नीतियों के नाम याद रखें।
c) परीक्षा में स्पष्ट हैंडराइटिंग में मिलान दर्शाएं।

 

Question 5: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
(क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली .......... की विचारधारा पर आधारित थी।
(ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबंधन .......... था।
(ग) .......... पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
(घ) .......... ने 1985 में सोवियत संघ के सुधारों की शुरुआत की।
(ङ) .......... का गिरना शीतयुद्ध के अंत का प्रतीक था।

Answer:

(क) समाजवाद
(ख) वारसा पैक्ट (या वारसा संधि)
(ग) कम्युनिस्ट
(घ) मिखाइल गोर्बाचिव
(ङ) बर्लिन की दीवार

मुख्य बिंदु:

• सोवियत संघ समाजवादी और साम्यवादी विचारधारा पर चलता था।
• कम्युनिस्ट पार्टी का देश की राजनीति पर एकाधिकार था।
• बर्लिन की दीवार का गिरना शीतयुद्ध के अंत और सोवियत खेमे के पतन का बड़ा संकेत था।

आम गलतियाँ:

• रिक्त स्थानों में अधूरे या गलत शब्द लिख देना।
• कम्युनिस्ट पार्टी के स्थान पर अन्य किसी पार्टी का नाम लिखना।

Exam Tips:

a) रिक्त स्थान के प्रश्नों को हल करने के लिए पाठ का गहन अध्ययन आवश्यक है।
b) सही वर्तनी (Spelling) का विशेष ध्यान रखें।
c) उत्तरपुस्तिका में केवल पूरा वाक्य लिखकर रिक्त स्थान को रेखांकित करें।

 

Question 6: सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र करें।

Answer:

सोवियत अर्थव्यवस्था को संयुक्त राज्य अमेरिका की पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. राज्य का नियंत्रण: सोवियत अर्थव्यवस्था में उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण के सभी साधनों पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण था, जबकि अमेरिका की पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में बाजार शक्तियों की मुख्य भूमिका होती है।
2. योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था: सोवियत संघ में अर्थव्यवस्था पूरी तरह से राज्य द्वारा नियोजित और निर्देशित थी, जबकि अमेरिका में निजी उद्यम और मुक्त बाजार व्यवस्था को अपनाया गया था।
3. व्यक्तिगत संपत्ति का अभाव: सोवियत प्रणाली में निजी संपत्ति का कोई विशेष स्थान नहीं था जबकि पूँजीवादी देशों में व्यक्तिगत संपत्ति के अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

मुख्य बिंदु:

• सोवियत अर्थव्यवस्था राज्य-नियंत्रित और पूँजीवादी व्यवस्था बाजार-आधारित थी।
• साम्यवादी व्यवस्था में व्यक्तिगत मुनाफे के बजाय सामाजिक कल्याण का उद्देश्य था।
• अमेरिका में निजी क्षेत्र की प्रमुखता थी जबकि सोवियत संघ में सार्वजनिक क्षेत्र सब कुछ था।

आम गलतियाँ:

• दोनों अर्थव्यवस्थाओं के अंतर को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
• केवल एक ही पक्ष का वर्णन करना और अमेरिका की व्यवस्था को न समझाना।

Exam Tips:

a) अंतर स्पष्ट करते समय बिंदुओं का प्रयोग करें।
b) राज्य नियंत्रण बनाम मुक्त बाजार की अवधारणा को स्पष्ट करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तथ्यात्मक रखें।

 

Question 7: किन बातों के कारण गोर्बाचिव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए?

Answer:

सन् 1985 में सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचिव द्वारा सुधार शुरू किए जाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
1. आर्थिक ठहराव: सोवियत अर्थव्यवस्था लंबे समय से गंभीर आर्थिक ठहराव, कुप्रबंधन और उपभोक्ता वस्तुओं की भारी कमी से जूझ रही थी।
2. प्रौद्योगिकीय पिछड़ापन: सोवियत संघ तकनीकी और प्रशासनिक मामलों में पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका) से काफी पिछड़ गया था।
3. नौकरशाही का प्रभाव: सोवियत राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था अत्यंत कठोर, दमनकारी और नौकरशाही के चंगुल में फँस चुकी थी जिससे जनजीवन कठिन हो गया था।

मुख्य बिंदु:

• गोर्बाचिव ने अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए 'ग्लास्नोस्त' (खुलापन) और 'पेरेस्त्रोइका' (पुनर्गठन) की नीति अपनाई।
• जनता की भागीदारी न होना और भ्रष्टाचार का बढ़ना भी सुधारों का मुख्य कारण था।
• पश्चिमी देशों के साथ हथियारों की होड़ ने सोवियत अर्थव्यवस्था को खोखला कर दिया था।

आम गलतियाँ:

• केवल गोर्बाचिव की नीतियों के नाम लिखना, उनके लागू होने के कारणों को छोड़ देना।
• आर्थिक कारणों की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) कारणों को हमेशा बिंदुओं के रूप में लिखें।
b) ग्लास्नोस्त और पेरेस्त्रोइका का उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तर में सोवियत संघ की आंतरिक कमजोरियों को स्पष्ट करें।

 

Question 8: भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए?

Answer:

भारत जैसे विकासशील देशों पर सोवियत संघ के विघटन के निम्नलिखित प्रमुख परिणाम पड़े:
1. विदेश नीति में बदलाव: भारत को अपनी विदेश नीति में परिवर्तन करके पश्चिमी देशों और अमेरिका के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करना पड़ा।
2. रक्षा और हथियारों की आपूर्ति: सोवियत संघ के विघटन के बाद भी रूस के साथ भारत के संबंध गहरे बने रहे, जिससे भारत को रक्षा उपकरणों और हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित होती रही।
3. बहुध्रुवीय विश्व का दृष्टिकोण: भारत और रूस दोनों का यह साझा सपना था कि विश्व व्यवस्था बहुध्रुवीय हो जिसमें किसी एक देश का एकाधिकार न हो।

मुख्य बिंदु:

• भारत ने संकट के समय रूस से हमेशा सहायता प्राप्त की।
• आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में भारत को अपनी नीतियों को वैश्विक बाजार के अनुकूल ढालना पड़ा।
• अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक स्थिति में बदलाव आया।

आम गलतियाँ:

• केवल रूस के विघटन को लिखना, भारत पर पड़े प्रभाव को भूल जाना।
• उत्तर को केवल एक पक्षीय (सकारात्मक या नकारात्मक) रखना।

Exam Tips:

a) भारत के परिप्रेक्ष्य में उत्तर लिखते समय रक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था का जिक्र करें।
b) भारत-रूस संबंधों की निरंतरता को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) संतुलित उत्तर प्रस्तुत करें।

 

Question 9: शॉक थेरेपी क्या थी? क्या साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का यह सबसे बेहतर तरीका था?

Answer:

शॉक थेरेपी का शाब्दिक अर्थ 'आघात पहुँचाकर उपचार करना' है। साम्यवाद के पतन के बाद विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा निर्देशित साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर संक्रमण के मॉडल को 'शॉक थेरेपी' कहा गया। इसके तहत राज्य के नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से मुक्त बाजार व्यवस्था में बदलना था।
नहीं, यह साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का सबसे बेहतर तरीका नहीं था। इसके निम्नलिखित नकारात्मक परिणाम हुए:
1. अर्थव्यवस्था का विनाश: शॉक थेरेपी के कारण रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और अधिकांश उद्योगों को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ा जिसे 'इतिहास की सबसे बड़ी गराज सेल' कहा गया।
2. जनता की बर्बादी: मूल्य वृद्धि और मुद्रास्फीति के कारण आम जनता की जमापूँजी समाप्त हो गई और लोग गरीबी की ओर धकेल दिए गए।
3. सामाजिक कल्याण का पतन: समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था नष्ट हो गई जिससे भुखमरी और माफियाराज का उदय हुआ।

मुख्य बिंदु:

• शॉक थेरेपी ने रूस और पूर्ववर्ती सोवियत गणराज्यों की अर्थव्यवस्था को भारी आघात पहुँचाया।
• निजीकरण की इस प्रक्रिया से जनता को भारी आर्थिक कष्ट झेलने पड़े।
• यह तरीका धीरे-धीरे सुधार करने के बजाय अचानक सब कुछ बदलने पर आधारित था।

आम गलतियाँ:

• शॉक थेरेपी की परिभाषा केवल लिखकर छोड़ देना, उसके परिणामों का मूल्यांकन न करना।
• इसे एक सफल मॉडल के रूप में चित्रित करना।

Exam Tips:

a) शॉक थेरेपी का अर्थ और उसके परिणामों को अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदुओं में लिखें।
b) 'गराज सेल' जैसे ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करें।
c) अपने उत्तर में आलोचनात्मक दृष्टिकोण जरूर अपनाएँ।

 

Question 10: निम्नलिखित कथन के पक्ष या विपक्ष में एक लेख लिखें - "दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भारत को अपनी विदेश नीति बदलनी चाहिए और रूस जैसे पारंपरिक मित्र की जगह संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।"

Answer:

कथन के विपक्ष में तर्क:
सोवियत संघ (दूसरी दुनिया) के विघटन के बाद भी भारत को रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को कम नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें और मजबूत करना चाहिए। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
1. रणनीतिक और रक्षा सहयोग: भारत अपनी सैन्य जरूरतों और रक्षा उपकरणों के लिए आज भी बड़े पैमाने पर रूस पर निर्भर है। संकट के समय रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया है।
2. ऐतिहासिक मित्रता: कठिन समय में (जैसे 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान) सोवियत संघ/रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का समर्थन किया था।
3. बहुध्रुवीय विश्व: भारत की विदेश नीति हमेशा स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष रही है। किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलित संबंध रखना भारत के हित में है।

मुख्य बिंदु:

• भारत की विदेश नीति की मुख्य विशेषता रणनीतिक स्वायत्तता है।
• अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के बावजूद रूस को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
• यथार्थवादी कूटनीति दोनों महाशक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखने की मांग करती है।

आम गलतियाँ:

• किसी एक देश के पक्ष में अत्यधिक झुक जाना और कूटनीतिक संतुलन की अनदेखी करना।
• वैचारिक आधार पर उत्तर लिखना, राष्ट्रीय हितों को भूल जाना।

Exam Tips:

a) निबंधात्मक प्रश्नों में प्रस्तावना, मुख्य भाग और निष्कर्ष का प्रारूप अपनाएँ।
b) भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही अपना पक्ष रखें।
c) भाषा औपचारिक और विश्लेषणात्मक रखें।

 

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