NCERT Solutions Class 12 Biology Chapter 12 Ecosystem (पारितंत्र) in Hindi

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Question 1: रिक्त स्थानों को भरो:
(क) पादपों को ...... कहते हैं; क्योंकि कार्बन डाईऑक्साइड का स्थिरीकरण करते हैं।
(ख) पादप द्वारा प्रमुख पारितंत्र का पिरामिड (सं० का) ...... प्रकार का है।
(ग) एक जलीय पारितंत्र में, उत्पादकता का सीमा कारक ...... है।
(घ) हमारे पारितंत्र में सामान्य अपरदन ...... हैं।
(च) पृथ्वी पर कार्बन का प्रमुख भण्डार ...... है।

Answer:

(क) स्वपोषी
(ख) उल्टा
(ग) प्रकाश
(घ) केंचुआ तथा सूक्ष्मजीव
(च) समुद्र

मुख्य बिंदु:

• पादप अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं इसलिए इन्हें स्वपोषी कहा जाता है।
• जलीय पारितंत्र में पादपप्लवक उत्पादक होते हैं और इनका संख्या पिरामिड उल्टा होता है।
• जलीय पारितंत्रों में प्रकाश की उपलब्धता प्राथमिक उत्पादकता को नियंत्रित करने वाला मुख्य कारक है।
• केंचुए को किसानों का मित्र और मुख्य अपरदहारी माना जाता है।

आम गलतियाँ:

• जलीय और स्थलीय पारितंत्र के पिरामिडों में भ्रमित होना।
• प्रकाश के स्थान पर तापमान को जलीय पारितंत्र का मुख्य सीमा कारक लिख देना।
• अपरदहारी जीवों के सही नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) रिक्त स्थानों को भरते समय पूरी वाक्य रचना को ध्यान से पढ़ें।
b) पारिस्थितिकी के मूल सिद्धांतों जैसे स्वपोषी और अपरदहारी की परिभाषा याद रखें।
c) पिरामिड के प्रकार (सीधा या उल्टा) से जुड़े प्रश्नों का अभ्यास करें।

 

Question 2: एक खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में सर्वाधिक संख्या किसकी होती है -
(क) उत्पादक
(ख) प्राथमिक उपभोक्ता
(ग) द्वितीयक उपभोक्ता
(घ) अपघटक

Answer:

(घ) अपघटक

मुख्य बिंदु:

• पारिस्थितिक तंत्र में अपघटक (कवक और जीवाणु) सभी पोषण स्तरों के मृत कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं।
• इनकी संख्या पारितंत्र में सबसे अधिक होती है क्योंकि ये हर मृत जीव पर आश्रित होते हैं।
• ऊर्जा प्रवाह और पोषण स्तरों के आधार पर अपघटक सभी स्तरों से जुड़े होते हैं।

आम गलतियाँ:

• उत्पादक को सर्वाधिक संख्या वाला समझ लेना।
• खाद्य श्रृंखला के पिरामिड में केवल पौधों और शाकाहारी जीवों पर ध्यान केंद्रित करना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़कर सही उत्तर चुनें।
b) अपघटकों की भूमिका पारितंत्र में सर्वव्यापी होती है, इसे समझें।
c) खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल के अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 3: एक झील में द्वितीय (दूसरी) पोषण स्तर होता है:
(क) पादपप्लवक
(ख) प्राणिप्लवक
(ग) नितलक (बेंथॉस)
(घ) मछलियाँ

Answer:

(ख) प्राणिप्लवक

मुख्य बिंदु:

• झील के पारितंत्र में प्रथम पोषण स्तर उत्पादक यानी पादपप्लवक होते हैं।
• पादपप्लवकों को खाने वाले प्राणिप्लवक द्वितीय पोषण स्तर (प्राथमिक उपभोक्ता) बनाते हैं।
• इसके बाद छोटी मछलियाँ तृतीय पोषण स्तर पर आती हैं।

आम गलतियाँ:

• पादपप्लवक को द्वितीय पोषण स्तर मान लेना, जबकि वे प्रथम पोषण स्तर बनाते हैं।
• जलीय जीवों के क्रम में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) पोषण स्तरों का क्रम याद रखें: उत्पादक (प्रथम) -> शाकाहारी/प्राणिप्लवक (द्वितीय) -> मांसाहारी (तृतीय)।
b) जलीय और स्थलीय पारितंत्र के उदाहरणों में अंतर करना सीखें।
c) परीक्षा में स्पष्ट लिखें कि प्राणिप्लवक प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं जो द्वितीय पोषण स्तर बनाते हैं।

 

Question 4: द्वितीयक उत्पादक हैं:
(क) शाकाहारी (शाकभक्षी)
(ख) उत्पादक
(ग) मांसाहारी (मांसभक्षी)
(घ) उपरोक्त कोई भी नहीं।

Answer:

(क) शाकाहारी (शाकभक्षी)

मुख्य बिंदु:

• प्राथमिक उत्पादक हरे पौधे होते हैं जो सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
• शाकाहारी जीव (जैसे गाय, खरगोश) इन पौधों को खाते हैं और इन्हें द्वितीयक उत्पादक या प्राथमिक उपभोक्ता कहा जाता है।
• प्राथमिक उत्पादन की दर को उपयोग करने वाले जीव द्वितीयक उत्पादन करते हैं।

आम गलतियाँ:

• प्राथमिक उपभोक्ता और द्वितीयक उत्पादक शब्दों में भ्रमित होना।
• मांसाहारी जीवों को द्वितीयक उत्पादक समझ लेना।

Exam Tips:

a) प्राथमिक उत्पादक पौधे हैं, जबकि शाकाहारी जीव प्राथमिक उपभोक्ता और द्वितीयक उत्पादक दोनों संदर्भों में आते हैं।
b) NCERT की शब्दावली को सटीक रूप से याद रखें।
c) रीवाइज करते समय उत्पादकता के विभिन्न प्रकारों की सूची बनाएं।

 

Question 5: प्रासंगिक सौर विकिरण में प्रकाश संश्लेषण सक्रिय विकिरण का क्या प्रतिशत होता है?
(क) 100%
(ख) 50%
(ग) 1 - 5%
(घ) 2 - 10%

Answer:

(घ) 2 - 10%

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी पर पहुँचने वाले कुल सौर विकिरण का केवल एक छोटा हिस्सा ही प्रकाश संश्लेषण के लिए उपयोग होता है।
• प्रकाश संश्लेषण सक्रिय विकिरण (PAR) कुल आपतित सौर विकिरण का लगभग 50% होता है।
• पौधे इस PAR का मात्र 2 से 10 प्रतिशत भाग ही उपयोग कर पाते हैं।

आम गलतियाँ:

• कुल सौर विकिरण और PAR (Photosynthetically Active Radiation) के प्रतिशत में अंतर न समझना।
• 50% को पौधों द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा मान लेना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि PAR कुल सौर विकिरण का 50% होता है।
b) पौधे PAR का 2-10% ही सकल प्राथमिक उत्पादकता में बदलते हैं।
c) ऊर्जा प्रवाह से जुड़े इस आँकड़े को बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए तैयार रखें।

 

Question 6: निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट करें -
(क) चारण खाद्य श्रृंखला एवं अपरद खाद्य श्रृंखला
(ख) उत्पादन एवं अपघटन
(ग) ऊर्ध्ववर्ती (शिखरारोह) एवं अधोवर्ती पिरामिड

Answer:

(क) चारण खाद्य श्रृंखला एवं अपरद खाद्य श्रृंखला:
• चारण खाद्य श्रृंखला का प्राथमिक स्रोत सौर विकिरण और हरे पौधे होते हैं, जबकि अपरद खाद्य श्रृंखला का प्राथमिक स्रोत मृत कार्बनिक पदार्थ (अपरद) होता है।
• चारण खाद्य श्रृंखला में पहला पोषण स्तर शाकाहारी जीवों का होता है, जबकि अपरद खाद्य श्रृंखला में अपरदहारी और अपघटक आते हैं।
• चारण खाद्य श्रृंखला लंबी होती है, जबकि अपरद खाद्य श्रृंखला सामान्यतः छोटी होती है।

(ख) उत्पादन एवं अपघटन:
• उत्पादन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश संश्लेषण के द्वारा सरल कार्बनिक और अकार्बनिक यौगिकों से खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है।
• अपघटन वह प्रक्रिया है जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक तत्वों में तोड़ा जाता है।
• उत्पादन हरे पौधों द्वारा संपन्न होता है, जबकि अपघटन मुख्य रूप से जीवाणु और कवकों द्वारा किया जाता है।

(ग) ऊर्ध्ववर्ती एवं अधोवर्ती पिरामिड:
• ऊर्ध्ववर्ती पिरामिड सीधा होता है जिसमें आधार चौड़ा और शिखर संकरा होता है (जैसे घास स्थल का पारितंत्र)।
• अधोवर्ती पिरामिड उल्टा होता है जिसमें आधार संकरा और शिखर चौड़ा होता है (जैसे एक बड़े वृक्ष पर पक्षियों का पारितंत्र)।
• ऊर्ध्ववर्ती में उत्पादकों की संख्या या बायोमास सबसे अधिक होता है, जबकि अधोवर्ती में परजीवियों या आश्रित जीवों की संख्या अधिक होती है।

मुख्य बिंदु:

• खाद्य श्रृंखलाओं के आधार उनके ऊर्जा स्रोत होते हैं।
• उत्पादन और अपघटन पारितंत्र के दो पूरक और महत्वपूर्ण प्रक्रम हैं।
• पिरामिड का आकार पारिस्थितिक तंत्र के प्रकार पर निर्भर करता है।

आम गलतियाँ:

• खाद्य श्रृंखलाओं के प्राथमिक स्रोतों को आपस में मिला देना।
• सीधे और उल्टे पिरामिड के उदाहरण गलत लिखना।

Exam Tips:

a) अंतर स्पष्ट करने वाले प्रश्नों को हमेशा तालिका (Table) बनाकर हल करें।
b) प्रत्येक अंतर के कम से कम 2-3 मुख्य बिंदु अवश्य लिखें।
c) उपयुक्त उदाहरण देना न भूलें।

 

Question 7: निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट करें -
(क) खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल (वेब)
(ख) लिटर (कर्कट) एवं अपरद
(ग) प्राथमिक एवं द्वितीयक उत्पादकता

Answer:

(क) खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल:
• खाद्य श्रृंखला जीवों के बीच ऊर्जा के रैखिक और एकदिशीय प्रवाह को दर्शाती है, जो हमेशा सीधी होती है।
• खाद्य जाल अनेक खाद्य श्रृंखलाओं का एक जटिल अंतःसंबद्ध नेटवर्क होता है जिसमें जीव एक से अधिक विकल्प चुन सकते हैं।
• खाद्य श्रृंखला में जीव एक ही विशिष्ट पथ का अनुसरण करते हैं, जबकि खाद्य जाल में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होते हैं।

(ख) लिटर एवं अपरद:
• लिटर पौधों द्वारा गिराए गए सूखे पत्ते, छाल, फूल और प्लास्टिक जैसे फेंके गए कचरे को कहा जाता है।
• अपरद पादपों के मृत अवशेष और मृत प्राणियों के अवशेष, मलमूत्र सहित सम्मिलित रूप को कहते हैं जिसका अपघटन होता है।
• लिटर का अपघटन तुरंत नहीं होता, जबकि अपरद का अपघटन संभव है।

(ग) प्राथमिक एवं द्वितीयक उत्पादकता:
• प्राथमिक उत्पादकता उत्पादकों (हरे पौधों) द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलने की दर है।
• द्वितीयक उत्पादकता उपभोक्ताओं के स्तर पर ऊर्जा के संचयन की दर को कहा जाता है।
• प्राथमिक उत्पादकता को सकल और शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता में विभाजित किया जा सकता है, जबकि द्वितीयक उत्पादकता में ऐसा विभाजन नहीं होता।

मुख्य बिंदु:

• खाद्य जाल पारितंत्र को अधिक स्थिरता प्रदान करता है।
• लिटर और अपरद दोनों मृत पदार्थों से संबंधित हैं लेकिन उनकी प्रकृति में अंतर है।
• उत्पादकता को प्रति इकाई समय और क्षेत्रफल में मापा जाता है।

आम गलतियाँ:

• खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल को एक ही मान लेना।
• प्राथमिक और द्वितीयक उत्पादकता की इकाइयों या परिभाषाओं में गड़बड़ी करना।

Exam Tips:

a) अंतर लिखते समय स्पष्ट और वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग करें।
b) तालिका प्रारूप का उपयोग करने से उत्तर अधिक आकर्षक लगता है।
c) परिभाषा के साथ-साथ उनकी माप की इकाई भी ध्यान रखें।

 

Question 8: पारिस्थितिक तंत्र के घटकों की व्याख्या करें।

Answer:

पारिस्थितिक तंत्र के मुख्य रूप से दो घटक होते हैं:
1. जैविक घटक:
• स्वपोषी घटक: हरे पौधे जो सौर ऊर्जा का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बनिक भोजन बनाते हैं।
• परपोषी घटक: ऐसे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों पर निर्भर रहते हैं (जैसे प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक उपभोक्ता)।
• अपघटक: ये जीव मृत कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक तत्वों में तोड़ते हैं (जैसे कवक और जीवाणु)।
2. अजैविक घटक:
• जलवायु कारक: जल, ताप, प्रकाश, वायु आदि।
• अकार्बनिक पदार्थ: C, O, N, CO2 आदि जो जैव-जगत में प्रवेश करते हैं।
• कार्बनिक पदार्थ: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा आदि।

मुख्य बिंदु:

• पारिस्थितिक तंत्र जैव और अजैविक घटकों की पारस्परिक क्रिया से बनता है।
• ऊर्जा का प्रवाह जैविक और अजैविक घटकों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
• ट्रांसले (Tansley) ने सबसे पहले पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का प्रयोग किया था।

आम गलतियाँ:

• केवल जैविक घटकों का वर्णन करना और अजैविक घटकों को छोड़ देना।
• उपभोक्ताओं के विभिन्न स्तरों (प्राथमिक, द्वितीयक) को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को फ्लोचार्ट या बिंदुओं के रूप में लिखें ताकि परीक्षक को आसानी हो।
b) जैविक और अजैविक दोनों घटकों के उप-भागों को स्पष्ट करें।
c) वैज्ञानिकों के नाम (जैसे टांसले) और मुख्य परिभाषाओं को रेखांकित करें।

 

Question 9: पारिस्थितिक पिरामिड को परिभाषित करें तथा जैवमात्रा या जैवभार तथा संख्या के पिरामिडों की उदाहरण सहित व्याख्या करें।

Answer:

पारिस्थितिक पिरामिड: पारितंत्र में खाद्य श्रृंखला के विभिन्न पोषण स्तरों पर जीवधारियों के संबंधों का रैखिक या आरेखीय चित्रण पारिस्थितिक पिरामिड कहलाता है।
(i) जैवभार का पिरामिड:
• जीव के ताजे अथवा शुष्क भार के रूप में प्रत्येक पोषण स्तर को मापा जाता है।
• स्थलीय पारितंत्र में उत्पादक का जैवभार सर्वाधिक होता है, अतः पिरामिड सीधा रहता है।
• जलीय पारितंत्र (जैसे तालाब) में उत्पादक (पादपप्लवक) का भार बहुत कम होता है, इसलिए जैवभार का पिरामिड उल्टा बनता है।
(ii) संख्या का पिरामिड:
• इसमें विभिन्न पोषण स्तर के जीवों की संख्या को प्रदर्शित किया जाता है।
• घास स्थल तथा तालाब पारितंत्र में संख्या का पिरामिड सीधा होता है क्योंकि उत्पादकों की संख्या सबसे अधिक होती है।
• इसके विपरीत, एक वृक्ष के पारितंत्र में उत्पादकों (एक वृक्ष) की संख्या सबसे कम होती है और उस पर आश्रित पक्षियों तथा परजीवियों की संख्या बढ़ती जाती है, जिससे पिरामिड उल्टा हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• पिरामिड का आधार हमेशा उत्पादकों को दर्शाता है।
• जैवभार को ग्राम प्रति वर्ग मीटर (\( g/m^2 \)) में मापा जाता है।
• कुछ पारितंत्रों में पिरामिड उल्टे भी हो सकते हैं।

आम गलतियाँ:

• जलीय पारितंत्र के जैवभार पिरामिड को सीधा लिख देना।
• वृक्ष के पारितंत्र के संख्या पिरामिड को गलत समझ लेना।

Exam Tips:

a) पिरामिड की परिभाषा लिखते समय पोषण स्तर और ऊर्जा/जैवभार संबंधों का उल्लेख अवश्य करें।
b) सीधे और उल्टे पिरामिड के सटीक उदाहरण (जैसे तालाब और वृक्ष) दें।
c) डायग्राम या रेखाचित्र बनाकर उत्तर को प्रभावशाली बनाएं।

 

Question 10: प्राथमिक उत्पादकता क्या है? उन कारकों की संक्षेप में चर्चा करें जो प्राथमिक उत्पादकता को प्रभावित करते हैं।

Answer:

प्राथमिक उत्पादकता: हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरित करके कार्बनिक पदार्थों में संचित कर लेते हैं। इसे प्राथमिक उत्पादकता कहते हैं। इसे \( g/m^2/yr \) या \( kcal/m^2/yr \) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
प्राथमिक उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारक:
• पादप प्रजातियाँ: किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली पादप जातियों की प्रकृति और उनकी कार्यक्षमता पर उत्पादकता निर्भर करती है।
• पर्यावरणीय कारक: प्रकाश, तापमान, वर्षा, आर्द्रता, वायु, वायुमंडलीय गैसें और मृदा का संगठन उत्पादकता को सीधे प्रभावित करते हैं।
• पोषक तत्वों की उपलब्धता: मृदा में आवश्यक पोषक तत्वों और खनिजों की मात्रा पौधों की वृद्धि को निर्धारित करती है।
• सौर ऊर्जा: तीव्र प्रकाश और उपयुक्त तापमान वाले क्षेत्रों में उत्पादकता अधिक होती है, जबकि कम प्रकाश या जल की कमी वाले क्षेत्रों में यह कम हो जाती है।

मुख्य बिंदु:

• सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) और शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP) इसके दो भाग हैं।
• यह पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवेश द्वार है।
• मरुस्थल की तुलना में उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में उत्पादकता सर्वाधिक होती है।

आम गलतियाँ:

• उत्पादकता की इकाई लिखना भूल जाना।
• केवल प्रकाश को एकमात्र प्रभावित करने वाला कारक मान लेना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय ऊर्जा रूपांतरण की प्रक्रिया का जिक्र जरूर करें।
b) प्रभावित करने वाले कारकों को हेडिंग बनाकर बुलेट पॉइंट्स में लिखें।
c) इकाई (\( g/m^2/yr \)) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 11: अपघटन की परिभाषा दें तथा अपघटन की प्रक्रिया एवं उसके उत्पादों की व्याख्या करें।

Answer:

अपघटन: मृत कार्बनिक पदार्थों (जैसे पादपों के मृत अवशेष, पत्तियाँ, छाल, फूल तथा जंतुओं के मृत अवशेष और मलमूत्र) को सरल अकार्बनिक पदार्थों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, जल एवं खनिज तत्वों) में विघटित करने की प्रक्रिया को अपघटन कहते हैं।
अपघटन की प्रक्रिया के मुख्य चरण:
• खण्डन: अपरदहारी (जैसे केंचुआ) अपरद को छोटे-छोटे कणों में खंडित करते हैं।
• निक्षालन: जल में घुलनशील अकार्बनिक पोषक मृदा में प्रवेश कर जाते हैं।
• अपचयन: जीवाणु और कवक एंजाइमों द्वारा अपरद को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदलते हैं।
• ह्यूमीकरण: इसके फलस्वरूप गहरे भूरे-काले रंग का अक्रिस्टलीय पदार्थ 'ह्यूमस' बनता है जो सूक्ष्मजीवों के लिए प्रतिरोधी होता है।
• खनिजीकरण: ह्यूमस का कुछ सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन होता है और खनिज तत्व मुक्त हो जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• अपघटन मुख्यतः कवक और जीवाणुओं द्वारा होता है।
• ह्यूमस मृदा की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है।
• यह प्रक्रिया गर्म और आर्द्र पर्यावरण में तीव्र होती है।

आम गलतियाँ:

• अपघटन के चरणों (खण्डन, निक्षालन आदि) के क्रम को बदल देना।
• ह्यूमीकरण और खनिजीकरण में अंतर न समझ पाना।

Exam Tips:

a) अपघटन के सभी पाँच चरणों के नाम सही क्रम में याद रखें।
b) प्रत्येक चरण की एक-एक पंक्ति में मुख्य विशेषता लिखें।
c) यह एक महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है, अतः सभी बिंदुओं को विस्तार से लिखें।

 

Question 12: एक पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह का वर्णन करें।

Answer:

पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह:
• पारितंत्र को ऊर्जा मुख्य रूप से सूर्य के द्वारा प्राप्त होती है। सौर ऊर्जा का उपयोग केवल हरे पौधे (उत्पादक) ही कर सकते हैं।
• पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर कार्बनिक पदार्थों के रूप में संचित करते हैं।
• खाद्य पदार्थ के रूप में ऊर्जा उत्पादक से विभिन्न स्तर के उपभोक्ताओं को प्राप्त होती है।
• पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशीय (Unidirectional) होता है।
• ऊर्जा एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर जाने पर घटती जाती है (लिंਡमैन का 10 प्रतिशत नियम)।

मुख्य बिंदु:

• ऊर्जा का प्रवाह ऊष्मागतिकी के नियमों का पालन करता है।
• सूर्य ऊर्जा का एकमात्र प्राथमिक स्रोत है।
• एकदिशीय प्रवाह का अर्थ है कि ऊर्जा वापस सूर्य की ओर नहीं जाती।

आम गलतियाँ:

• ऊर्जा प्रवाह को चक्रीय (Cyclic) लिख देना, जबकि यह एकदिशीय होता है।
• उत्पादकों की भूमिका को ऊर्जा प्रवाह में स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा प्रवाह के साथ 'एकदिशीय' शब्द का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
b) सौर ऊर्जा से लेकर उपभोक्ताओं तक ऊर्जा के संचरण को सरल शब्दों में समझाएं।
c) खाद्य श्रृंखला के विभिन्न स्तरों का उदाहरण दें।

 

Biology Class 12 Curriculum Solutions: Chapter 12 पारितंत्र

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