Official NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 10 ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 10 ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
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Question 1: कौन-सा अवलोकन इस विचार का सर्वोत्तम समर्थन करता है कि ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है?
(i) ध्वनि परावर्तन प्रदर्शित करती है।
(ii) ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।
(iii) ध्वनि की आवृत्ति होती है।
(iv) ध्वनि ऊर्जा वहन करती है।
Answer:
सही विकल्प (ii) है: ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।
व्याख्या: यांत्रिक तरंगों के संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) का होना आवश्यक होता है। ध्वनि तरंगे भी बिना माध्यम के संचरित नहीं हो सकती हैं, इसलिए ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है।
मुख्य बिंदु:
• यांत्रिक तरंगों को आगे बढ़ने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
• निर्वात में ध्वनि का संचरण संभव नहीं है।
• परावर्तन और ऊर्जा वहन सभी तरंगों के सामान्य गुण हैं।
आम गलतियाँ:
• विद्यार्थी परावर्तन के गुण को यांत्रिक तरंग का प्रमाण मान लेते हैं।
• माध्यम की अनिवार्यता को नजरअंदाज करना।
• विकल्पों को बिना समझे केवल याद करना।
Exam Tips:
a) परिभाषाओं को ध्यान से पढ़ें और समझें कि कौन सा गुण यांत्रिक प्रकृति को दर्शाता है।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों का विश्लेषण अवश्य करें।
c) मुख्य अवधारणा पर ध्यान दें कि ध्वनि को माध्यम चाहिए।
Question 2: किसी माध्यम में संचरित हो रही ध्वनि तरंग की आवृत्ति बढ़ाने पर क्या बढ़ेगा?
(i) तरंगदैर्ध्य
(ii) चाल
(iii) प्रति सेकंड संपीडनों की संख्या
(iv) आवर्तकाल
Answer:
सही विकल्प (iii) है: प्रति सेकंड संपीडनों की संख्या।
व्याख्या: आवृत्ति की परिभाषा प्रति सेकंड होने वाले संपीडनों या कंपनों की संख्या होती है। इसलिए आवृत्ति बढ़ने पर प्रति सेकंड संपीडनों की संख्या बढ़ती है। समान माध्यम में चाल नियत रहती है, जबकि तरंगदैर्ध्य घटती है और आवर्तकाल भी कम हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• आवृत्ति और प्रति सेकंड संपीडन एक-दूसरे के पर्याय हैं।
• \( \text{आवृत्ति} = \frac{1}{\text{आवर्तकाल}} \)
• माध्यम के भौतिक गुण समान रहने पर ध्वनि की चाल नहीं बदलती।
आम गलतियाँ:
• आवृत्ति बढ़ाने पर तरंग की चाल बढ़ने का भ्रम होना।
• तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति के व्युत्क्रम संबंध को भूल जाना।
• संपीडनों की संख्या और तरंग की लंबाई में संभ्रम होना।
Exam Tips:
a) आवृत्ति की मूल परिभाषा याद रखें।
b) संबंध \( v = \nu \lambda \) का उपयोग करके अन्य राशियों पर प्रभाव समझें।
c) प्रश्न ध्यान से पढ़ें कि क्या बढ़ाने पर क्या प्रभावित होता है।
Question 3: यदि किसी बिंदु से 4 सेकंड में 20 संपीडन गुजरते हैं तो आवृत्ति होगी –
(i) 80 Hz
(ii) 5 Hz
(iii) 10 Hz
(iv) 0.2 Hz
Answer:
सही विकल्प (ii) 5 हर्ट्ज़ है।
व्याख्या:
आवृत्ति = प्रति सेकंड संपीडनों की संख्या
\( = \frac{\text{संपीडनों की कुल संख्या}}{\text{कुल समय (सेकंड में)}} \)
\( = \frac{20}{4} \)
\( = 5 \text{ हर्ट्ज़ (Hz)} \)
मुख्य बिंदु:
• आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) होता है।
• प्रति सेकंड होने वाले कंपनों या संपीडनों की गणना से आवृत्ति निकलती है।
• सूत्र \( \nu = \frac{n}{t} \) का सीधा प्रयोग किया गया है।
आम गलतियाँ:
• समय और संपीडनों की संख्या को आपस में भाग देने में गलती करना (जैसे \( 4 \div 20 \))।
• मात्रक लिखना भूल जाना।
• गणना में गलत मान रखना।
Exam Tips:
a) संख्यात्मक प्रश्नों में सबसे पहले दिए गए मान (given values) लिखें।
b) सही सूत्र का चयन करें।
c) अंतिम उत्तर के साथ उचित मात्रक अवश्य लिखें।
Question 4: किसी कक्ष में परावर्तित ध्वनि उत्पन्न होने के 0.05 सेकंड पश्चात कान तक पहुँचती है। क्या यह प्रतिध्वनि उत्पन्न करेगी या अनुरणन? कारण सहित बताइए।
Answer:
यह अनुरणन उत्पन्न करेगी।
व्याख्या: स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच कम-से-कम 0.05 या मानक रूप से 0.1 सेकंड का समय अंतराल होना चाहिए। यहाँ परावर्तित ध्वनि केवल 0.05 सेकंड बाद पहुँच रही है, जो 0.1 सेकंड से बहुत कम है। अतः यह मूल ध्वनि से अलग सुनाई नहीं देगी और दोनों ध्वनियाँ मिलकर अनुरणन (ਗूँज) उत्पन्न करेंगी।
मुख्य बिंदु:
• स्पष्ट प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम समय अंतराल \( 0.1 \text{ s} \) आवश्यक है।
• \( 0.1 \text{ s} \) से कम समय होने पर मूल और परावर्तित ध्वनि मिल जाती हैं।
• इस परिघटना को अनुरणन कहा जाता है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिध्वनि और अनुरणन की शर्तों में भ्रमित होना।
• 0.1 सेकंड के मानक समय को भूल जाना।
• कारण को स्पष्ट रूप से न लिखना।
Exam Tips:
a) प्रतिध्वनि के लिए आवश्यक समय अंतराल का मान हमेशा याद रखें।
b) अंतर स्पष्ट करने के लिए मुख्य कारण को परिभाषा के साथ लिखें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तार्किक रखें।
Question 5: चित्र 10.30 में दो ध्वनि तरंगों के आलेखीय निरूपण दिए गए हैं। यदि क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर अक्षों के पैमाने समान हों तो बताइए –
(i) किस तरंग का तरंगदैर्ध्य अधिक है?
(ii) किस तरंग का आयाम कम है?
Answer:
(i) तरंग (क) का तरंगदैर्ध्य अधिक है।
व्याख्या: समान दूरी में तरंग (क) में कम दोलन हैं, जिसके कारण एक पूर्ण तरंग की लंबाई (तरंगदैर्ध्य) अधिक है।
(ii) तरंग (क) का आयाम कम है।
व्याख्या: आयाम माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन होता है। चित्र में तरंग (क) की ऊँचाई (शिखर की ऊँचाई) तरंग (ख) की अपेक्षा कम है, इसलिए तरंग (क) का आयाम कम है।
मुख्य बिंदु:
• तरंगदैर्ध्य दो क्रमागत शिखरों या गर्तों के बीच की दूरी होती है।
• आयाम तरंग की प्रबलता या ऊँचाई को दर्शाता है।
• आलेख देखकर ग्राफ की विशेषताओं की तुलना करना।
आम गलतियाँ:
• तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति में विपरीत संबंध को समझने में भूल करना।
• आयाम को पूरी तरंग की ऊँचाई मान लेना (जबकि यह माध्य स्थिति से ऊपर की दूरी है)।
• दोनों भागों के उत्तर में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) ग्राफ आधारित प्रश्नों में अक्षों के पैमानों को ध्यान से देखें।
b) आयाम और तरंगदैर्ध्य की आलेखीय पहचान का अभ्यास करें।
c) दोनों उप-प्रश्नों के उत्तर अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 6: चित्र 10.31 में तीन स्रोत A, B और C द्वारा उत्पन्न ध्वनि तरंगें दर्शाई गई हैं। यदि A की आवृत्ति अधिकतम और C की न्यूनतम हो तो संबंधित वक्रों की पहचान कीजिए तथा उन पर A, B और C अंकित कीजिए।
Answer:
आवृत्ति अधिक होने पर समान दूरी में दोलनों की संख्या अधिक होती है तथा तरंगदैर्ध्य कम होता है।
चित्र के विश्लेषण से:
• हरे रंग की तरंग में दोलनों की संख्या सबसे अधिक है, अतः यह अधिकतम आवृत्ति वाली तरंग है और यह स्रोत A की तरंग है।
• लाल रंग की तरंग में दोलनों की संख्या हरी तरंग से कम और नीली तरंग से अधिक है, अतः यह स्रोत B की तरंग है।
• नीले रंग की तरंग में दोलनों की संख्या सबसे कम है, अतः यह न्यूनतम आवृत्ति वाली तरंग है और यह स्रोत C की तरंग है।
अतः सही पहचान इस प्रकार है:
हरा वक्र — A
लाल वक्र — B
नीला वक्र — C
मुख्य बिंदु:
• अधिक आवृत्ति = अधिक दोलन = कम तरंगदैर्ध्य।
• कम आवृत्ति = कम दोलन = अधिक तरंगदैर्ध्य।
• रंगों के आधार पर वक्रों की तुलना करना।
आम गलतियाँ:
• आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के संबंध को उल्टा समझ लेना।
• दोलनों की गिनती में गलती करना।
• सही वक्र के साथ सही अक्षर का मिलान न करना।
Exam Tips:
a) ग्राफ में प्रति इकाई लंबाई दोलनों की संख्या को ध्यान से गिनें।
b) उच्च आवृत्ति और दीर्घ तरंगदैर्ध्य के अंतर को समझें।
c) अंतिम उत्तर को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 7: ऐसी ध्वनि तरंग का आलेख बनाइए जिसका घनत्व आयाम 3 मात्रक तथा तरंगदैर्ध्य 4 cm हो।
Answer:
इस तरंग का आलेख बनाने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं –
• माध्य स्थिति के ऊपर अधिकतम घनत्व को \( +3 \) मात्रक पर अंकित कीजिए।
• माध्य स्थिति के नीचे न्यूनतम घनत्व को \( -3 \) मात्रक पर अंकित कीजिए।
• दो क्रमागत अधिकतम घनत्व वाले बिंदुओं के बीच की क्षैतिज दूरी \( 4 \text{ cm} \) रखिए।
• इसी प्रकार दो क्रमागत न्यूनतम घनत्व वाले बिंदुओं के बीच की दूरी भी \( 4 \text{ cm} \) होगी।
मुख्य बिंदु:
• घनत्व आयाम तरंग की ऊँचाई (\( +3 \) और \( -3 \)) निर्धारित करता है।
• तरंगदैर्ध्य एक पूर्ण तरंग की क्षैतिज लंबाई (\( 4 \text{ cm} \)) होती है।
• आलेख को मानक ज्यामितीय रूप में प्रदर्शित करना।
आम गलतियाँ:
• आयाम को केवल एक तरफ न बनाकर दोनों तरफ उचित मान न रखना।
• तरंगदैर्ध्य को गलत बिन्दुओं के बीच माप लेना।
• पैमाने का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) आलेख बनाते समय स्केल (पैमाने) का सही उपयोग करें।
b) अधिकतम और न्यूनतम बिंदुओं को साफ-साफ लेबल करें।
c) तरंगदैर्ध्य को तीर के निशान से स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 8: किसी फिल्म में अंतरिक्ष में हुए किसी अंतरिक्ष यान के विस्फोट में प्रकाश और ध्वनि दोनों का एक साथ एक ही समय पर उत्पन्न होना दर्शाया जाता है। बताइए कि इस चित्रण में क्या त्रुटियाँ हैं?
Answer:
इस चित्रण में निम्नलिखित दो प्रमुख त्रुटियाँ हैं:
पहली त्रुटि: अंतरिक्ष में लगभग निर्वात होता है। ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है और इसके संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है, इसलिए अंतरिक्ष में विस्फोट की ध्वनि पृथ्वी या बाहर सुनाई नहीं देगी।
दूसरी त्रुटि: प्रकाश की चाल ध्वनि की चाल से बहुत अधिक होती है (\( c \approx 3 \times 10^8 \text{ m/s} \))। यदि किसी माध्यम में विस्फोट हो भी, तो प्रकाश बहुत पहले दिखाई देगा और ध्वनि काफी देर बाद सुनाई देगी। दोनों कभी भी एक साथ प्रेक्षक तक नहीं पहुँचेंगे।
मुख्य बिंदु:
• ध्वनि संचरण के लिए माध्यम अनिवार्य है, निर्वात में नहीं चल सकती।
• प्रकाश विद्युतचुंबकीय तरंग है जिसे माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
• प्रकाश की चाल ध्वनि की चाल से लाखों गुना अधिक होती है।
आम गलतियाँ:
• अंतरिक्ष में ध्वनि के चलने की आम धारणा पर विश्वास करना।
• प्रकाश और ध्वनि की चाल के अंतर को नजरअंदाज करना।
• केवल एक त्रुटि लिखकर उत्तर समाप्त कर देना।
Exam Tips:
a) वैज्ञानिक कारणों पर आधारित प्रश्नों में भौतिक सिद्धांतों का उल्लेख अवश्य करें।
b) दोनों बिंदुओं को अलग-अलग हेडिंग या पॉइंट में लिखें।
c) माध्यम और चाल के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 9: एक स्रोत 3.44 m तरंगदैर्ध्य वाली ध्वनि तरंग उत्पन्न करता है। यदि तरंग की चाल 344 \( \text{m s}^{-1} \) है तो उसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) = \( 3.44 \text{ m} \)
तरंग की चाल (\( v \)) = \( 344 \text{ m s}^{-1} \)
हम जानते हैं कि तरंग की चाल का सूत्र होता है:
\( v = \frac{\lambda}{T} \)
अतः आवर्तकाल (\( T \)) के लिए:
\( T = \frac{\lambda}{v} \)
\( T = \frac{3.44}{344} \)
\( T = 0.01 \text{ सेकंड} \)
अतः ध्वनि तरंग का आवर्तकाल 0.01 सेकंड है।
मुख्य बिंदु:
• तरंग की चाल, तरंगदैर्ध्य और आवर्तकाल में संबंध: \( v = \lambda \nu = \frac{\lambda}{T} \)
• गणना करते समय दशमलव का सही स्थान पर प्रयोग करें।
• समय का मात्रक सेकंड में लिखना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• चाल और तरंगदैर्ध्य को आपस में गुणा कर देना।
• सूत्र का गलत पक्षांतर (transposition) करना।
• दशमलव की गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) मान रखते समय इकाइयों की एकरूपता जांच लें।
b) सूत्र को पहले मूल रूप में लिखें फिर मान रखें।
c) गणना को चरणों में दिखाएं ताकि गलती की संभावना न रहे।
Question 10: किसी डूबे हुए जलयान की खोज के लिए किसी जलपोत से भेजे गए सोनार संकेत की प्रतिध्वनि 5 सेकंड पश्चात प्राप्त होती है। यदि समुद्री जल में पराश्रव्य तरंग की चाल 1525 \( \text{m s}^{-1} \) है तो डूबे हुए जहाज के भग्नावशेष समुद्र में लगभग कितनी गहराई पर स्थित हैं?
Answer:
दिया गया है:
प्रतिध्वनि आने में लगा कुल समय (\( t \)) = \( 5 \text{ सेकंड} \)
पराश्रव्य तरंग की चाल (\( v \)) = \( 1525 \text{ m s}^{-1} \)
यह समय संकेत के जलपोत से भग्नावशेष तक जाने और वापस लौटने (दोगुनी दूरी) का है।
कुल तय की गई दूरी = \( \text{चाल} \times \text{समय} \)
\( = 1525 \times 5 \)
\( = 7625 \text{ मीटर} \)
भग्नावशेष की वास्तविक गहराई (केवल एक तरफ की दूरी) = \( \frac{\text{कुल दूरी}}{2} \)
\( = \frac{7625}{2} \)
\( = 3812.5 \text{ m} \)
अतः डूबे हुए जहाज के भग्नावशेष समुद्र में लगभग 3812.5 मीटर की गहराई पर स्थित हैं।
मुख्य बिंदु:
• सोनार तकनीक प्रतिध्वनि के सिद्धांत पर कार्य करती है।
• कुल दूरी में जाने और आने दोनों की दूरी शामिल होती है, इसलिए 2 से भाग देते हैं।
• चाल, दूरी और समय के संबंध का अनुप्रयोग।
आम गलतियाँ:
• 2 से भाग देना भूल जाना और पूरी दूरी को ही गहराई मान लेना।
• गुणा या भाग में गणना संबंधी त्रुटि करना।
• मात्रक न लिखना।
Exam Tips:
a) प्रतिध्वनि वाले प्रश्नों में हमेशा यह याद रखें कि समय जाने और आने दोनों का होता है।
b) प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) अंत में उत्तर की इकाई (मीटर) अवश्य दर्ज करें।
Question 11: किसी वाहन में पार्किंग सहायता प्रणाली के एक भाग के रूप में पराश्रव्य दूरी संवेदक लगा हुआ है, जो प्रतिध्वनि निर्धारण तकनीक का उपयोग करता है। वाहन को पीछे करते समय (यह लगभग 40 kHz की) पराश्रव्य तरंगें उत्सर्जित करता है, जो अवरोध से परावर्तित होकर वापस आती हैं। यदि चेतावनी बीप अवरोध से 1.2 m दूरी पर बजना आरंभ होती है, तो पराश्रव्य तरंग को अवरोध तक जाकर वापस आने में कितना समय लगता है? मान लीजिए कि वायु में पराश्रव्य तरंग की चाल 345 \( \text{m s}^{-1} \) है।
Answer:
दिया गया है:
वाहन से अवरोध की दूरी (\( d \)) = \( 1.2 \text{ m} \)
पराश्रव्य तरंग की चाल (\( v \)) = \( 345 \text{ m s}^{-1} \)
तरंग द्वारा तय की गई कुल दूरी (जाने और वापस आने की कुल दूरी) = \( 2 \times d \)
\( = 2 \times 1.2 \)
\( = 2.4 \text{ मीटर} \)
समय (\( t \)) = \( \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{चाल}} \)
\( t = \frac{2.4}{345} \)
\( t \approx 0.00696 \text{ सेकंड} \) या लगभग \( 0.007 \text{ सेकंड} \)
अतः पराश्रव्य तरंग को अवरोध तक जाकर वापस आने में लगभग 0.007 सेकंड का समय लगता है।
मुख्य बिंदु:
• तरंग को अवरोध तक जाना है और फिर वापस आना है, इसलिए दूरी दोगुनी हो जाती है।
• \( \text{समय} = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} \) सूत्र का प्रयोग।
• आवृत्ति (\( 40 \text{ kHz} \)) यहाँ अतिरिक्त जानकारी है जिसकी सीधे गणना में आवश्यकता नहीं है।
आम गलतियाँ:
• केवल 1.2 मीटर दूरी लेकर समय की गणना कर देना।
• 40 kHz आवृत्ति को गलती से चाल या दूरी मान लेना।
• दशमलव के भाग में गलती करना।
Exam Tips:
a) प्रश्नों में दी गई सभी सूचनाओं में से आवश्यक डेटा छांटना सीखें।
b) प्रतिध्वनि के मामलों में दूरी को हमेशा दोगुना करना न भूलें।
c) उत्तर को उचित दशमलव स्थानों तक लिखकर छोड़ें।
Question 12: वायु में ध्वनि की चाल 0°C पर लगभग 331 \( \text{m s}^{-1} \) तथा 22°C पर लगभग 344 \( \text{m s}^{-1} \) है। यदि वायु का तापमान 22°C से घटकर 0°C हो जाए, तो 1720 m दूरी तय करने में मेघगर्जन की ध्वनि को लगभग कितना अतिरिक्त समय लगेगा? मान लीजिए कि अन्य सभी परिस्थितियाँ अपरिवर्तित रहती हैं।
Answer:
दिया गया है:
दूरी (\( d \)) = \( 1720 \text{ मीटर} \)
22° सेल्सियस पर ध्वनि की चाल (\( v_1 \)) = \( 344 \text{ m s}^{-1} \)
0° सेल्सियस पर ध्वनि की चाल (\( v_2 \)) = \( 331 \text{ m s}^{-1} \)
22°C पर लगा समय (\( t_1 \)) = \( \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} \)
\( t_1 = \frac{1720}{344} = 5 \text{ सेकंड} \)
0°C पर लगा समय (\( t_2 \)) = \( \frac{1720}{331} \)
\( t_2 \approx 5.196 \text{ सेकंड} \) (लगभग \( 5.20 \text{ सेकंड} \))
अतिरिक्त समय = \( t_2 - t_1 \)
\( = 5.20 - 5 = 0.20 \text{ सेकंड} \)
अतः तापमान घटकर 0°C होने पर मेघगर्जन की ध्वनि को लगभग 0.20 सेकंड अतिरिक्त समय लगेगा।
मुख्य बिंदु:
• तापमान घटने पर ध्वनि की चाल कम हो जाती है।
• कम चाल के कारण समान दूरी तय करने में अधिक समय लगता है।
• दोनों स्थितियों के समय का अंतर ही अतिरिक्त समय है।
आम गलतियाँ:
• चालों के अंतर को समय के अंतर से सीधे भाग देने की कोशिश करना।
• भाग देने में गणना त्रुटि करना।
• तापमान के प्रभाव को सूत्र में गलत तरीके से लगाना।
Exam Tips:
a) दोनों स्थितियों के समय को अलग-अलग निकालें।
b) बड़े समय में से छोटे समय को घटाएं।
c) चरणों को साफ-सुथरा प्रस्तुत करें।
Question 13: 340 \( \text{m s}^{-1} \) की चाल से संचरित हो रही एक ध्वनि तरंग के लिए माध्यम के घनत्व में परिवर्तन चित्र 10.32 में दर्शाया गया है। ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य तथा आवृत्ति का परिकलन कीजिए।
Answer:
चित्र के अनुसार, 8 सेंटीमीटर की कुल दूरी के भीतर दो पूर्ण तरंगदैर्ध्य (संपीडन और विरलन युग्म) दिखाई देते हैं।
अतः, \( 2 \times \text{तरंगदैर्ध्य} (\lambda) = 8 \text{ cm} \)
तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) = \( \frac{8}{2} = 4 \text{ cm} \)
मीटर में बदलने पर:
\( \lambda = \frac{4}{100} = 0.04 \text{ m} \)
अब, तरंग की चाल (\( v \)) = \( 340 \text{ m s}^{-1} \)
हम जानते हैं कि चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य में संबंध होता है:
\( v = \nu \times \lambda \)
अतः आवृत्ति (\( \nu \)) = \( \frac{v}{\lambda} \)
\( \nu = \frac{340}{0.04} \)
\( \nu = \frac{34000}{4} = 8500 \text{ Hz} \)
अतः ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य \( 4 \text{ cm} \) तथा आवृत्ति \( 8500 \text{ Hz} \) है।
मुख्य बिंदु:
• सेंटीमीटर को एसआई मात्रक (मीटर) में बदलना अनिवार्य है।
• ग्राफ से कुल तरंगों की संख्या गिनकर तरंगदैर्ध्य ज्ञात करना।
• \( v = \nu \lambda \) सूत्र का उपयोग।
आम गलतियाँ:
• सेंटीमीटर को मीटर में बदले बिना सीधे गणना करना।
• तरंगों की संख्या की गिनती में गलती करना।
• दशमलव हटाने में गलती करना।
Exam Tips:
a) इकाइयों का हमेशा एसआई प्रणाली में रूपांतरण करें।
b) ग्राफ वाले प्रश्नों में तरंगों की संख्या ध्यान से गिनें।
c) उत्तर के साथ उचित मात्रक (Hz और m) लिखें।
Question 14: 345 \( \text{m s}^{-1} \) की समान चाल से संचरित हो रही दो ध्वनि तरंगों A तथा B का आलेखीय निरूपण चित्र 10.33 में दर्शाया गया है। प्रत्येक तरंग का तरंगदैर्ध्य कितना है? इसके साथ ही उनकी आवृत्तियों का भी परिकलन कीजिए।
Answer:
चित्र के अनुसार:
तरंग A के दो क्रमागत शिखरों के बीच की दूरी = \( 2.5 \text{ cm} \)
अतः तरंग A का तरंगदैर्ध्य (\( \lambda_A \)) = \( 2.5 \text{ cm} = 0.025 \text{ m} \)
तरंग B के दो क्रमागत शिखरों के बीच की दूरी = \( 5 \text{ cm} \)
अतः तरंग B का तरंगदैर्ध्य (\( \lambda_B \)) = \( 5 \text{ cm} = 0.05 \text{ m} \)
ध्वनि की चाल (\( v \)) = \( 345 \text{ m s}^{-1} \)
आवृत्ति का सूत्र: \( \nu = \frac{v}{\lambda} \)
तरंग A की आवृत्ति (\( \nu_A \)) = \( \frac{345}{0.025} \)
\( \nu_A = 13800 \text{ Hz} \)
तरंग B की आवृत्ति (\( \nu_B \)) = \( \frac{345}{0.05} \)
\( \nu_B = 6900 \text{ Hz} \)
अतः,
• तरंग A का तरंगदैर्ध्य \( 2.5 \text{ cm} \) तथा आवृत्ति \( 13800 \text{ Hz} \) है।
• तरंग B का तरंगदैर्ध्य \( 5 \text{ cm} \) तथा आवृत्ति \( 6900 \text{ Hz} \) है।
मुख्य बिंदु:
• तरंगदैर्ध्य दो शिखरों के बीच की क्षैतिज दूरी होती है।
• \( \nu = \frac{v}{\lambda} \) सूत्र से दोनों तरंगों की आवृत्ति अलग-अलग निकाली जाती है।
• चाल नियत रहने पर तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
आम गलतियाँ:
• सेंटीमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना।
• दोनों तरंगों के मानों को आपस में मिला देना।
• भाग देने में अंकगणितीय त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक तरंग के डेटा को अलग-अलग साफ-सुथरा हल करें।
b) पैमाने की इकाइयों को ध्यान से परखें।
c) अंत में दोनों तरंगों के परिणाम अलग बिंदुओं में दर्शाएं।
Question 15: दो सर्वसम ध्वनि स्रोत बिंदु ‘क’ और ‘ख’ पर रखे गए हैं— इनमें से एक वायु में है और दूसरा जल में डुबोया गया है। (चित्र 10.34) दोनों स्रोत एक ही समय पर ध्वनि उत्पन्न करते हैं, जो क्षैतिज दिशा में चट्टान की ऊर्ध्वाधर सतह तक जाती है और वापस लौटती है। यदि A बिंदु तक ध्वनि के लौटने में लगा समय बिंदु B तक ध्वनि के लौटने में लगे समय का 4.5 गुना है, तो वायु और जल में ध्वनि के वेगों का अनुपात क्या है?
Answer:
दोनों ध्वनि स्रोत चट्टान से समान दूरी पर हैं। इसलिए दोनों ध्वनि तरंगों द्वारा तय की गई कुल दूरी समान है।
चाल का सूत्र होता है: \( \text{चाल} = \frac{\text{दूरी}}{\text{समय}} \)
चूँकि दूरी समान है, अतः चाल समय के व्युत्क्रमानुपाती होती है (\( v \propto \frac{1}{t} \))।
दिया गया है:
वायु में ध्वनि के लौटने का समय (\( t_{\text{वायु}} \)) = \( 4.5 \times \text{जल में ध्वनि के लौटने का समय } (t_{\text{जल}}) \)
अतः जल में ध्वनि की चाल और वायु में ध्वनि की चाल का संबंध:
\( v_{\text{जल}} = 4.5 \times v_{\text{वायु}} \)
इसलिए, वायु में ध्वनि की चाल तथा जल में ध्वनि की चाल का अनुपात:
\( \frac{v_{\text{वायु}}}{v_{\text{जल}}} = \frac{1}{4.5} \)
हर और अंश को 2 से गुणा करने पर:
\( = \frac{2}{9} \)
\( = 2 : 9 \)
अतः वायु और जल में ध्वनि के वेगों का अनुपात \( 2 : 9 \) है।
मुख्य बिंदु:
• दूरी समान होने पर चाल और समय का व्युत्क्रम संबंध होता है।
• \( v_{\text{वायु}} \times t_{\text{वायु}} = v_{\text{जल}} \times t_{\text{जल}} \)
• अनुपातों को सरलतम रूप में बदलना।
आम गलतियाँ:
• समय और चाल के व्युत्क्रम संबंध को सीधा मान लेना।
• अनुपात निकालते समय मानों को उल्टा रख देना (\( 9:2 \) लिख देना)।
• दशमलव भिन्न को सरल अनुपात में न बदलना।
Exam Tips:
a) आनुपातिक प्रश्नों में पहले मूल भौतिक नियम या संबंध लिखें।
b) मान रखते समय ध्यान रखें कि कौन सा समय किसका गुना है।
c) अनुपात को हमेशा सरलतम भिन्न रूप में प्रस्तुत करें।
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