NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 09 Atomic Foundations of Matter (द्रव्य का परमाण्विक आधार) Long Answer Questions in Hindi

NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 09 द्रव्य का परमाण्विक आधार

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Practice Class 9 Science Solutions: Chapter 09 द्रव्य का परमाण्विक आधार

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Question 1: द्रव्यमान संरक्षण के नियम की जाँच हेतु सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड की अभिक्रिया (क्रियाकलाप 9.3) का वर्णन कीजिए।

Answer:

इस क्रियाकलाप में दो स्वच्छ शंक्वाकार फ्लास्क ‘क’ और ‘ख’ लेकर भौतिक तुला के पाठ्यांक को शून्य किया जाता है। फ्लास्क ‘क’ में 1% सोडियम सल्फेट का \( 10 \text{ mL} \) विलयन और फ्लास्क ‘ख’ में 1% बेरियम क्लोराइड का \( 10 \text{ mL} \) विलयन लिया जाता है। दोनों फ्लास्कों को तुला पर रखकर कुल द्रव्यमान अभिलेखित किया जाता है। इसके पश्चात दोनों विलयनों को मिश्रित करने पर सोडियम क्लोराइड के साथ बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है:
सोडियम सल्फेट + बेरियम क्लोराइड \( \rightarrow \) बेरियम सल्फेट + सोडियम क्लोराइड
जब दोनों फ्लास्कों को पुनः तोला जाता है, तो पाठ्यांक अपरिवर्तित रहता है, जिससे यह स्थापित हो जाता है कि किसी रासायनिक परिवर्तन के समय कुल भार व द्रव्यमान संरक्षित रहता है।

मुख्य बिंदु:

• रासायनिक अभिक्रिया से पहले और बाद का कुल द्रव्यमान समान रहता है।
• फ्लास्क ‘क’ में सोडियम सल्फेट तथा फ्लास्क ‘ख’ में बेरियम क्लोराइड का विलयन लिया जाता है।
• अभिक्रिया के फलस्वरूप बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप बनता है।
• यह क्रियाकलाप द्रव्यमान संरक्षण के नियम की पुष्टि करता है।

आम गलतियाँ:

• छात्रों द्वारा अभिकर्मकों के आयतन या सांद्रता को गलत लिखना।
• तुला के पाठ्यांक को प्रारंभिक अवस्था में शून्य न करना।
• रासायनिक समीकरण को संतुलित रूप में न दर्शाना।

Exam Tips:

a) क्रियाकलाप आधारित प्रश्न में अभिकर्मकों के नाम और उनके रंग (जैसे श्वेत अवक्षेप) स्पष्ट लिखें।
b) रासायनिक समीकरण को शब्द रूप या सूत्र रूप में अवश्य दर्शाएं।
c) उत्तर में नियम का निष्कर्ष लिखना न भूलें।

 

Question 2: जल के अणु \( (\text{H}_2\text{O}) \) के निर्माण की प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर चरणबद्ध रूप से समझाइए।

Answer:

हाइड्रोजन का परमाणु क्रमांक 1 होता है, अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1 (K-कोश में एक इलेक्ट्रॉन) है। ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक 8 होता है, अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 6 है (संयोजकता कोश में छह इलेक्ट्रॉन हैं)।
स्थाई इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (अष्टक या द्विक नियम) प्राप्त करने के लिए हाइड्रोजन को केवल एक और ऑक्सीजन को दो इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए दो हाइड्रोजन परमाणु अपने एक-एक इलेक्ट्रॉन को एक ऑक्सीजन परमाणु के साथ साझा करते हैं।
इस प्रकार दो सहसंयोजी आबंध बनते हैं और जल का अणु \( \text{H}_2\text{O} \) के रूप में बनता है, जो दो हाइड्रोजन परमाणुओं और एक ऑक्सीजन परमाणु की उपस्थिति को इंगित करता है तथा अपने सभी संघटक परमाणुओं से भिन्न रासायनिक गुणधर्म प्रदर्शित करता है।

मुख्य बिंदु:

• हाइड्रोजन का विन्यास 1 तथा ऑक्सीजन का विन्यास 2, 6 होता है।
• हाइड्रोजन को द्विक और ऑक्सीजन को अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
• इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा सहसंयोजी आबंध का निर्माण होता है।
• जल का अणु अपने घटक तत्वों से बिल्कुल भिन्न गुणधर्म दर्शाता है।

आम गलतियाँ:

• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखते समय कक्षकों के अंकों में भ्रम होना।
• आबंध के प्रकार (सहसंयोजी के स्थान पर आयनिक) को गलत लिखना।
• जल के अणु में परमाणुओं का सही अनुपात न दर्शाना।

Exam Tips:

a) इलेक्ट्रॉन डॉट संरचना (लुईस संरचना) बनाकर समझाने से अंक अच्छे मिलते हैं।
b) संयोजकता और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को अलग-अलग स्पष्ट करें।
c) रासायनिक सूत्र \( \text{H}_2\text{O} \) को स्पष्ट रूप से हाईलाइट करें।

 

Question 3: आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्मों में अंतर स्पष्ट कीजिए (विलेयता, विद्युत चालकता, गलनांक-क्वथनांक के आधार पर)।

Answer:

विलेयता के आधार पर:
आयनिक यौगिक (जैसे सोडियम क्लोराइड, कॉपर सल्फेट) सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं किंतु किरोसिन व पेट्रोल जैसे कार्बनिक विलायकों में अघुलनशील होते हैं। इसके विपरीत, अधिकांश सहसंयोजी यौगिक (जैसे कपूर, नैफ्थलीन) जल में अघुलनशील लेकिन कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं।
विद्युत चालकता के आधार पर:
आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि उनके आयन प्रबल स्थिरवैद्युत बलों द्वारा अपनी निश्चित स्थितियों में बँधे रहते हैं, परंतु जल में घोलने पर या गलित अवस्था में आयन मुक्त होकर गति करते हैं और विद्युत का चालन करते हैं। इसके विपरीत, सहसंयोजी यौगिक जल मेंुलकर भी आयन नहीं बनाते, इसलिए वे किसी भी अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते।
गलनांक और क्वथनांक के आधार पर:
प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बलों के कारण आयनिक यौगिकों के गलनांक व क्वथनांक प्रायः बहुत उच्च होते हैं, जबकि अणुओं के मध्य दुर्बल बलों के कारण सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक व क्वथनांक निम्न होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• आयनिक यौगिक जल में घुलनशील तथा सहसंयोजी यौगिक कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं।
• आयनिक यौगिक गलित या जलीय अवस्था में विद्युत चालन करते हैं, सहसंयोजी यौगिक नहीं।
• आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।

आम गलतियाँ:

• ठोस आयनिक यौगिकों को विद्युत का सुचालक बता देना।
• सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक उच्च लिख देना।
• विलेयता के नियमों में जल और किरोसिन की भूमिका को मिला देना।

Exam Tips:

a) अंतर स्पष्ट करते समय हमेशा तालिका (Table) या स्पष्ट शीर्षकों का प्रयोग करें।
b) प्रत्येक बिंदु के साथ एक उपयुक्त उदाहरण (जैसे NaCl और ग्लूकोज/कपूर) अवश्य दें।
c) 'प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण' शब्दावली का प्रयोग उत्तर में जरूर करें।

 

Question 4: डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अभिगृहीतों को विस्तार से लिखिए और बताइए कि इन्होंने द्रव्यमान संरक्षण व स्थिर अनुपात के नियमों को कैसे स्पष्ट किया।

Answer:

जॉन डाल्टन ने वर्ष 1808 में अपने परमाणु सिद्धांत में निम्नलिखित मुख्य अभिगृहीत प्रस्तावित किए:
• संपूर्ण द्रव्य परमाणु नामक अत्यंत सूक्ष्म कणों से बना होता है।
• परमाणु अविभाज्य हैं और किसी रासायनिक अभिक्रिया में न तो सृजित होते हैं और न ही नष्ट होते हैं।
• किसी एक ही तत्व के सभी परमाणुओं के द्रव्यमान व रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं, जबकि विभिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न-भिन्न होते हैं।
• भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु परस्पर छोटी पूर्ण संख्याओं के निश्चित अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
द्रव्यमान संरक्षण के नियम की व्याख्या:
इन अभिगृहीतों ने तार्किक रूप से स्पष्ट किया कि रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं, नए परमाणु बनते या नष्ट नहीं होते, जिससे कुल द्रव्यमान संरक्षित रहता है।
स्थिर अनुपात के नियम की व्याख्या:
चूँकि किसी यौगिक में विभिन्न तत्वों के परमाणु हमेशा निश्चित सरल पूर्णांक अनुपात में ही संयोजित होते हैं, इसलिए किसी भी यौगिक में तत्वों का द्रव्यमान अनुपात सदैव स्थिर रहता है। इस प्रकार डाल्टन के सिद्धांत ने पूर्व स्थापित दोनों नियमों का सैद्धांतिक आधार प्रदान किया।

मुख्य बिंदु:

• डाल्टन का सिद्धांत 1808 में प्रतिपादित किया गया था।
• परमाणु अविभाज्य कण हैं और रासायनिक परिवर्तन में नष्ट नहीं होते।
• रासायनिक अभिक्रिया केवल परमाणुओं का पुनर्व्यवस्थित होना है।
• यौगिकों में परमाणुओं का अनुपात निश्चित होता है।

आम गलतियाँ:

• डाल्टन के सभी अभिगृहीतों को एक ही वाक्य में लिख देना।
• द्रव्यमान संरक्षण और स्थिर अनुपात के नियमों के साथ सिद्धांत के जुड़ाव को स्पष्ट न करना।
• सन या वैज्ञानिक का नाम गलत लिखना।

Exam Tips:

a) अभिगृहीतों को बुलेट पॉइंट्स में लिखें ताकि परीक्षक को पढ़ने में आसानी हो।
b) नियमों की व्याख्या वाले भाग को अलग पैराग्राफ में समझाएं।
c) मुख्य शब्दों जैसे 'पुनर्व्यवस्थित', 'निश्चित अनुपात' और 'अविभाज्य' का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 5: आयनिक यौगिकों का रासायनिक सूत्र लिखने की विधि को कैल्सियम क्लोराइड और ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड के उदाहरण सहित समझाइए।

Answer:

किसी आयनिक यौगिक का रासायनिक सूत्र लिखने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:
1. सर्वप्रथम धनायन का प्रतीक, फिर ऋणायन का प्रतीक लिखा जाता है।
2. तत्पश्चात दोनों के आवेशों (केवल संख्यात्मक मान) को लिखकर उनका तिर्यक (Cross-over) गुणा किया जाता है जिससे सूत्र प्राप्त होता है।
कैल्सियम क्लोराइड का सूत्र:
कैल्सियम आयन \( (\text{Ca}^{2+}) \) और क्लोराइड आयन \( (\text{Cl}^-) \) के आवेशों का तिर्यक करने पर सूत्र \( \text{CaCl}_2 \) प्राप्त होता है, अर्थात प्रत्येक कैल्सियम आयन के लिए दो क्लोराइड आयन आवश्यक हैं ताकि संरचना विद्युत उदासीन रहे।
ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड का सूत्र:
ऐलुमिनियम आयन \( (\text{Al}^{3+}) \) और हाइड्रॉक्साइड बहुपरमाण्विक आयन \( (\text{OH}^-) \) के आवेशों का तिर्यक करने पर सूत्र \( \text{Al(OH)}_3 \) प्राप्त होता है। यहाँ चूँकि बहुपरमाण्विक आयन तीन बार आता है, इसलिए इसे कोष्ठक में लिखकर नीचे 3 लिखा जाता है (न कि \( \text{AlOH}_3 \)), जो यह दर्शाता है कि तीन हाइड्रॉक्साइड आयन एक ऐलुमिनियम आयन से बंधे हैं।

मुख्य बिंदु:

• सूत्र लिखते समय पहले धनायन और बाद में ऋणायन लिखा जाता है।
• आवेशों का तिर्यक गुणा करके यौगिक का सरलतम सूत्र प्राप्त किया जाता है।
• बहुपरमाण्विक आयनों को एक से अधिक बार आने पर कोष्ठक \( () \) में बंद किया जाता है।
• यौगिक समग्र रूप से विद्युत उदासीन होता है।

आम गलतियाँ:

• धन आवेश और ऋण आवेश के स्थान को आपस में बदल देना।
• बहुपरमाण्विक आयन को कोष्ठक में न लिखकर सीधे \( \text{AlOH}_3 \) लिख देना।
• आवेशों का तिर्यक करते समय संख्याओं का सही मिलान न करना।

Exam Tips:

a) दोनों उदाहरणों को अलग-अलग चरणबद्ध तरीके से हल करके दिखाएं।
b) बहुपरमाण्विक आयनों के लिए कोष्ठक के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित करें।
c) सूत्र के अंत में कुल आवेश शून्य (विद्युत उदासीनता) होने का तर्क जरूर दें।

 

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