Official NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
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Question 1: निम्नलिखित मिश्रणों में से कौन-से मिश्रण सही रूप से समांगी और विषमांगी मिश्रणों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं? सही विकल्प चुनिए।
(i) वायु — समांगी, दुग्ध — विषमांगी, चीनी का विलयन — समांगी, धुआँ — समांगी
(ii) पीतल — विषमांगी, कोहरा — विषमांगी, सिरका — विषमांगी, पंकिल जल — समांगी
(iii) कॉपर सल्फेट का विलयन — समांगी, नमक का विलयन — समांगी, दुग्ध — समांगी, काँसा — समांगी
(iv) पंकिल जल — विषमांगी, दुग्ध — विषमांगी, रक्त — विषमांगी, पीतल — समांगी
Answer:
सही विकल्प (iv) है।
स्पष्टीकरण:
पंकिल जल, दुग्ध और रक्त सभी विषमांगी या कोलॉइडी प्रकृति के मिश्रण हैं, जबकि पीतल एक मिश्रधातु है जो एक समांगी मिश्रण बनाती है।
मुख्य बिंदु:
• समांगी मिश्रण का संगठन पूरे मिश्रण में एकसमान होता है (जैसे पीतल)।
• विषमांगी मिश्रण में विभिन्न घटक अलग-अलग दिखाई देते हैं (जैसे पंकिल जल)।
• दुग्ध और रक्त देखने में समांगी लगते हैं परंतु सूक्ष्मदर्शी से देखने पर विषमांगी (कोलॉइड) पाए जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• दुग्ध और रक्त को गलती से समांगी मिश्रण मान लेना।
• मिश्रधातुओं को विषमांगी मिश्रण समझ लेना।
• कोहरा और धुआँ की अवस्था को ठीक से न पहचान पाना।
Exam Tips:
a) सभी प्रमुख मिश्रधातुओं (जैसे पीतल, काँसा) को हमेशा समांगी मिश्रण की श्रेणी में रखें।
b) कोलॉइडी विलयनों जैसे दूध, रक्त और कोहरा को विषमांगी मिश्रण के रूप में याद रखें।
c) विकल्पों को ध्यान से पढ़कर ही सही संयोजन का चुनाव करें।
Question 2: सही विकल्पों का चयन कीजिए तथा सही और गलत विकल्पों के कारण स्पष्ट कीजिए। निम्नलिखित में से कौन-से मिश्रण टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं?
(क) वायु और धूल के कणों का मिश्रण
(ख) कॉपर सल्फेट और जल का मिश्रण
(ग) स्टार्च और जल का मिश्रण
(घ) ऐसीटोन और जल का मिश्रण
(i) क और ख
(ii) ख और घ
(iii) क और ग
(iv) ग और घ
Answer:
सही विकल्प (iii) क और ग है।
स्पष्टीकरण:
(क) वायु और धूल के कणों का मिश्रण एक निलंबन जैसा मिश्रण है, जिसके कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं और टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं।
(ख) कॉपर सल्फेट और जल का मिश्रण एक सच्चा विलयन है, जिसके कण बहुत छोटे होते हैं और वे टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते।
(ग) स्टार्च और जल का मिश्रण एक कोलॉइड है, इसके कण प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं अतः टिंडल प्रभाव दर्शाता है।
(घ) ऐसीटोन और जल दोनों मिश्रणीय द्रव हैं जो एक सच्चा विलयन बनाते हैं, इसलिए यह टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाता।
मुख्य बिंदु:
• केवल कोलॉइड और निलंबन ही टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं।
• सच्चे विलयन के कण प्रकाश का प्रकीर्णन करने के लिए बहुत छोटे होते हैं।
• धूल के कण और स्टार्च के कण प्रकाश की किरण को फैला देते हैं।
आम गलतियाँ:
• सभी प्रकार के तरल मिश्रणों को टिंडल प्रभाव दर्शाने वाला समझ लेना।
• सच्चे विलयन और कोलॉइड के कणों के आकार के अंतर को भूल जाना।
Exam Tips:
a) याद रखें कि सच्चे विलयन कभी भी टिंडल प्रभाव नहीं दिखाते हैं।
b) कोलॉइडी विलयन और निलंबन हमेशा टिंडल प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।
c) कारण सहित स्पष्टीकरण देते समय कणों के आकार का उल्लेख अवश्य करें।
Question 3: किसी मिश्रण को विलयन, निलंबन अथवा कोलॉइड के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है जिनमें से प्रत्येक के अपने विशिष्ट गुणधर्म होते हैं। बॉक्स में दिए गए शब्दों अथवा वाक्यांशों का उपयोग करके तालिका 5.2 को पूर्ण कीजिए। शब्दों और वाक्यांशों का एक से अधिक बार उपयोग किया जा सकता है।
Answer:
तालिका के विभिन्न भागों के लिए सही शब्द और वाक्यांश नीचे दिए गए हैं:
विलयन के गुणधर्म:
\( \bullet \) छोटे आकार के कण (\( 1\text{ nm} \) से कम व्यास)
\( \bullet \) पारदर्शी
\( \bullet \) प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं करते
\( \bullet \) निस्यंदन द्वारा पृथक नहीं किए जा सकते
\( \bullet \) कण समान रूप से वितरित रहते हैं
\( \bullet \) नीचे नहीं बैठते
विलयन के उदाहरण: नमक का विलयन, पीतल
निलंबन के गुणधर्म:
\( \bullet \) बड़े आकार के कण (\( 1000\text{ nm} \) से अधिक व्यास)
\( \bullet \) स्थिर रखने पर नीचे बैठ जाते हैं
\( \bullet \) निस्यंदन पर पृथक हो जाते हैं
\( \bullet \) प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं
निलंबन के उदाहरण: जल में रेत, कीचड़
कोलॉइड के गुणधर्म:
\( \bullet \) मध्यम आकार के कण (\( 1-1000\text{ nm} \))
\( \bullet \) प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं
\( \bullet \) निस्यंदन द्वारा पृथक नहीं किए जा सकते
\( \bullet \) नीचे नहीं बैठते
कोलॉइड के उदाहरण: दूध, धुआँ, मक्खन
मुख्य बिंदु:
• विलयन के कण सबसे छोटे होते हैं और यह पारदर्शी होता है।
• निलंबन के कण बड़े होते हैं और ये नीचे बैठ जाते हैं।
• कोलॉइड के कण मध्यम आकार के होते हैं और ये प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं।
आम गलतियाँ:
• विलयन और कोलॉइड के कणों के आकार के परास में भ्रमित होना।
• निस्यंदन विधि द्वारा विलयन और कोलॉइड के पृथक्करण में गलती करना।
Exam Tips:
, , आदि के स्थान पर तीनों प्रकार के मिश्रणों के आकार, पारदर्शिता और स्थिरता के गुणों को स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) प्रत्येक प्रकार के मिश्रण के कम से कम दो उदाहरण अवश्य याद रखें।
c) परीक्षा में अंतर स्पष्ट करने वाली तालिका बनाते समय सभी गुणों का सही मिलान करें।
Question 4: निम्नलिखित प्रश्नों को हल कीजिए –
(i) केक बनाने की किसी विधि में \( 420\text{ g} \) मैदा, \( 75\text{ g} \) चीनी और \( 5\text{ g} \) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट का उपयोग सूखी सामग्री के रूप में किया जाता है। उपयुक्त विधि के उपयोग द्वारा मिश्रण के प्रत्येक घटक की सांद्रता व्यक्त कीजिए।
(ii) किसी पीतल मिश्रधातु में द्रव्यमान के अनुसार \( 70\% \) ताँबा (कॉपर) है। \( 120\text{ g} \) पीतल में उपस्थित कॉपर और जिंक की मात्रा परिकलित कीजिए।
Answer:
(i) कुल मिश्रण का द्रव्यमान = \( 420 + 75 + 5 = 500\text{ g} \)
मैदा का द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत (\( \% \text{ m/m} \)) = \( \left(\frac{420}{500}\right) \times 100 = 84\% \)
चीनी का द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत (\( \% \text{ m/m} \)) = \( \left(\frac{75}{500}\right) \times 100 = 15\% \)
सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट का प्रतिशत = \( \left(\frac{5}{500}\right) \times 100 = 1\% \)
(ii) पीतल में कॉपर का प्रतिशत = \( 70\% \), अतः जिंक का प्रतिशत = \( 30\% \)
कॉपर की मात्रा = \( \left(\frac{70}{100}\right) \times 120\text{ g} = 84\text{ g} \)
जिंक की मात्रा = \( \left(\frac{30}{100}\right) \times 120\text{ g} = 36\text{ g} \)
मुख्य बिंदु:
• किसी घटक का द्रव्यमान प्रतिशत = \( \left(\frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}}\right) \times 100 \)
• कुल मिश्रण का द्रव्यमान सभी घटकों के द्रव्यमान का योग होता है।
• मिश्रधातु के मामले में कुल प्रतिशत हमेशा \( 100\% \) होता है।
आम गलतियाँ:
• कुल द्रव्यमान निकालते समय किसी घटक को छोड़ देना।
• प्रतिशत निकालने के बाद मात्रक \( \% \) या \( \text{g} \) लिखना भूल जाना।
Exam Tips:
a) सांद्रता गणना के प्रश्नों में हमेशा सूत्र लिखकर हल करें।
b) दशमलव और भिन्न के भाग को ध्यानपूर्वक हल करें ताकि गणना की गलती न हो।
c) उत्तर के अंत में उपयुक्त इकाई अवश्य दर्शाएँ।
Question 5: खाद्य तेल के किसी पैकेट पर एक लीटर (\( 910\text{ g} \)) लिखा है। यदि इस तेल को जल के साथ मिश्रित किया जाए तो क्या यह अलग परत बनाएगा? यदि हाँ, तो कौन-सा पदार्थ ऊपर रहेगा? आप इन दो परतों को किस प्रकार पृथक करेंगे? प्रयुक्त उपकरण का चित्र भी बनाइए।
Answer:
हाँ, तेल और जल अलग परत बनाएँगे क्योंकि दोनों अमिश्रणीय द्रव हैं। तेल जल से हल्का (कम घनत्व वाला) होता है, इसलिए तेल ऊपर रहेगा और जल नीचे रहेगा।
पृथक्करण की विधि:
इन्हें पृथक्कारी कीप (Separating funnel) द्वारा पृथक किया जा सकता है। पृथक्कारी कीप के स्टॉपकॉक को खोलकर नीचे का जल निकाल लिया जाता है और तेल कीप में ही शेष रह जाता है।
मुख्य बिंदु:
• अमिश्रणीय द्रव अपने घनत्व के आधार पर अलग-अलग परत बनाते हैं।
• कम घनत्व वाला द्रव ऊपर और अधिक घनत्व वाला द्रव नीचे रहता है।
• पृथक्कारी कीप इस प्रकार के पृथक्करण के लिए मुख्य उपकरण है।
आम गलतियाँ:
• तेल और जल को मिश्रणीय समझ लेना।
• भारी द्रव को ऊपर मान लेना।
Exam Tips:
a) पृथक्कारी कीप के सिद्धांत में घनत्व के अंतर को मुख्य कारण के रूप में लिखें।
b) उपकरण का वर्णन करते समय स्टॉपकॉक और परतों के क्रम का उल्लेख करें।
c) अमिश्रणीय द्रवों के पृथक्करण का यह सबसे मानक उदाहरण है।
Question 6: नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए。
अभिकथन – विलयन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं।
कारण – विलयन के कणों का आकार \( 100\text{ nm} \) से बड़ा होता है, अत: वे प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं कर सकते。
(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।
(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
(iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।
(iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।
Answer:
सही विकल्प (iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।
स्पष्टीकरण:
अभिकथन सत्य है क्योंकि सच्चे विलयन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं। परंतु कारण असत्य है क्योंकि विलयन के कणों का आकार बहुत छोटा होता है (\( 1\text{ nm} \) से कम), न कि \( 100\text{ nm} \) से बड़ा।
मुख्य बिंदु:
• सच्चे विलयन के कणों का आकार अत्यंत सूक्ष्म होता है।
• कणों का आकार छोटा होने के कारण वे प्रकाश की किरणों को प्रकीर्णित नहीं कर पाते।
• \( 100\text{ nm} \) से बड़े आकार के कण निलंबन या कोलॉइड में पाए जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• अभिकथन और कारण दोनों को बिना पढ़े एक साथ सत्य मान लेना।
• कणों के आकार के सही माप को याद न रखना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में अभिकथन और कारण की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जाँच करें।
b) यदि कारण गलत है, तो सीधे विकल्प (iii) का चयन करें।
c) कणों के आकार की सीमा (\( \text{nm} \) में) को अच्छी तरह याद रखें।
Question 7: तालिका 5.3 में दिए गए मिश्रणों को आप किस प्रकार पृथक करेंगे? अपनी चयनित विधि के कारण का भी उल्लेख कीजिए। यदि किसी मिश्रण को पृथक नहीं किया जा सकता है तो उसके कारण की व्याख्या कीजिए।
Answer:
मिश्रणों को पृथक करने की विधियाँ और कारण निम्नलिखित हैं:
\( 1. \) पंकिल जल से पंख: विधि – अवसादन एवं निस्यंदन (या स्कंदन)। कारण – पंख के भारी कण नीचे बैठ जाते हैं; सूक्ष्म कणों के लिए फिटकरी से स्कंदन आवश्यक है।
\( 2. \) रक्त प्रतिदर्श में अन्य घटकों से प्लाज्मा: विधि – अपकेंद्रीकरण (Centrifugation)। कारण – रक्त एक कोलॉइड है; तीव्र चक्रण से भारी घटक (कोशिकाएँ) पृथक होते हैं।
\( 3. \) नैफ्थलीन और रेत: विधि – ऊर्ध्वपातन (Sublimation)। कारण – नैफ्थलीन ऊर्ध्वपातित हो जाता है जबकि रेत नहीं।
\( 4. \) चौक चूर्ण और साधारण नमक: विधि – जल में घोलकर निस्यंदन (चौक अघुलनशील, नमक घुलनशील)। कारण – चौक जल में अघुलनशील है, नमक घुलनशील; निस्यंदन के बाद नमक के विलयन को वाष्पीकरण से प्राप्त करें।
\( 5. \) साधारण नमक और जल: विधि – वाष्पीकरण/क्रिस्टलीकरण। कारण – नमक ठोस है, जल वाष्पित होकर नमक शेष रह जाता है।
\( 6. \) जल और तेल: विधि – पृथक्कारी कीप। कारण – दोनों अमिश्रणीय द्रव हैं, घनत्व भिन्न है।
\( 7. \) पुष्प के वर्णक: विधि – वर्णलेखिकी (क्रوماتोग्राफी)। कारण – विभिन्न वर्णकों की गति में अंतर के आधार पर पृथक होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रत्येक मिश्रण के भौतिक गुणों (जैसे विलेयता, घनत्व, क्वथनांक, ऊर्ध्वपातन) के आधार पर विधि चुनी जाती है।
• कोलॉइडी कणों को अलग करने के लिए अपकेंद्रीकरण का उपयोग किया जाता है।
• रंगीन घटकों के पृथक्करण के लिए क्रوماتोग्राफी सबसे उपयुक्त है।
आम गलतियाँ:
• घुलनशील और अघुलनशील पदार्थों के मिश्रण में गलत विधि चुन लेना।
• ऊर्ध्वपातन और वाष्पीकरण में अंतर न समझ पाना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक मिश्रण के लिए उसके विशिष्ट गुण को पहचानें।
b) विधि के साथ उसका वैज्ञानिक कारण संक्षिप्त रूप में लिखें।
c) पृथक्करण तकनीकों के नाम एनसीईआरटी शब्दावली के अनुसार ही लिखें।
Question 8: किसी मिश्रण में दो मिश्रणीय द्रव ‘क’ तथा ‘ख’ उपस्थित हैं। ‘क’ का क्वथनांक \( 60^\circ\text{C} \) तथा ‘ख’ का क्वथनांक \( 90^\circ\text{C} \) है। इन्हें पृथक करने की विधि सुझाइए। सुझाई गई विधि का नामांकित चित्र भी बनाइए।
Answer:
द्रव ‘क’ (क्वथनांक \( 60^\circ\text{C} \)) तथा द्रव ‘ख’ (क्वथनांक \( 90^\circ\text{C} \)) को पृथक करने की विधि – सरल आसवन (Simple Distillation)।
यह विधि उन दो मिश्रणीय द्रवों को अलग करने के लिए उपयुक्त है जिनके क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर हो (यहाँ अंतर \( 30^\circ\text{C} \) है)।
कार्यविधि:
मिश्रण को आसवन फ्लास्क में लिया जाता है और गर्म किया जाता है।
कम क्वथनांक वाला द्रव ‘क’ पहले वाष्पित होता है।
यह वाष्प लीबिग संघनक से गुजरकर ठंडी होती है और संघनित होकर द्रव के रूप में अलग पात्र में एकत्र कर ली जाती है।
फ्लास्क में केवल उच्च क्वथनांक वाला द्रव ‘ख’ शेष रह जाता है।
मुख्य बिंदु:
• सरल आसवन का उपयोग ऐसे मिश्रणीय द्रवों के लिए होता है जिनके क्वथनांकों में कम से कम \( 25^\circ\text{C} \) का अंतर हो।
• कम क्वथनांक वाला घटक पहले वाष्प में बदलता है।
• संघनक वाष्प को पुनः द्रव में बदल देता है।
आम गलतियाँ:
• मिश्रणीय और अमिश्रणीय द्रवों की विधियों में भ्रमित होना।
• संघनक की सही स्थिति और कार्य को न समझना।
Exam Tips:
a) आसवन फ्लास्क, बर्नर, थर्मामीटर और लीबिग संघनक के नाम सही जगह पर दर्शाएँ।
b) क्वथनांक के अंतर की शर्त (\( >25^\circ\text{C} \)) का उल्लेख अवश्य करें।
c) प्रक्रिया के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।
Question 9: वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और आसवन की तुलना कीजिए। आप किस स्थिति में एक विधि को दूसरी विधियों की अपेक्षा प्राथमिकता देंगे?
Answer:
वाष्पीकरण:
\( \bullet \) किसी द्रव में घुले ठोस को पृथक करने के लिए उपयोग किया जाता है।
\( \bullet \) विलायक नष्ट हो जाता है।
\( \bullet \) उदाहरण: समुद्री जल से नमक प्राप्त करना।
\( \bullet \) प्राथमिकता: तब दी जाती है जब शुद्धता मुख्य चिंता का विषय न हो और विलायक को बचाने की आवश्यकता न हो।
क्रिस्टलीकरण:
\( \bullet \) विलयन से शुद्ध ठोस क्रिस्टल प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।
\( \bullet \) अशुद्धियों को दूर करता है।
\( \bullet \) उदाहरण: कॉपर सल्फेट के शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करना।
\( \bullet \) प्राथमिकता: तब दी जाती है जब उच्च शुद्धता वाला ठोस आवश्यक हो (क्योंकि वाष्पीकरण में ठोस अपघटित हो सकता है या अशुद्धियाँ रह सकती हैं)।
आसवन:
\( \bullet \) द्रवों को पृथक करने या विलायक को पुनः प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।
\( \bullet \) क्वथनांकों में अंतर पर आधारित होता है।
\( \bullet \) उदाहरण: जल और ऐसीटोन का पृथक्करण।
\( \bullet \) प्राथमिकता: तब दी जाती है जब विलेय और विलायक दोनों की आवश्यकता हो या दो मिश्रणीय द्रवों को अलग करना हो।
मुख्य बिंदु:
• वाष्पीकरण में विलायक वाष्प बनकर उड़ जाता है।
• क्रिस्टलीकरण से अधिक शुद्ध ठोस प्राप्त होते हैं।
• आसवन में वाष्पीकरण और संघनन दोनों प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं।
आम गलतियाँ:
• वाष्पीकरण और क्रिस्टलीकरण को एक ही मान लेना।
• आसवन विधि का उपयोग ठोस-द्रव मिश्रण के लिए लिख देना।
Exam Tips:
a) तीनों विधियों की तुलना बिंदुओं के आधार पर करें ताकि उत्तर स्पष्ट लगे।
b) प्राथमिकता की शर्तों को स्पष्ट रूप से अलग से दर्शाएँ।
c) प्रत्येक विधि का एक उपयुक्त उदाहरण जरूर दें।
Question 10: रक्त कोलॉइडी मिश्रण का एक उदाहरण है। (i) क्या होगा यदि शरीर में रक्त एक शुद्ध निलंबन की भाँति व्यवहार करे? (ii) रक्त के किसी प्रतिदर्श में परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम की पहचान कीजिए।
Answer:
(i) यदि रक्त एक शुद्ध निलंबन की भाँति व्यवहार करे, तो रक्त कोशिकाएँ रक्त वाहिकाओं में स्थिर रहने पर नीचे बैठ जाएँगी और रक्त प्रवाह असमान हो जाएगा, जिससे शरीर के विभिन्न भागों तक ऑक्सीजन व पोषक तत्वों का उचित परिवहन बाधित हो जाएगा।
(ii) परिक्षिप्त प्रावस्था – रक्त कोशिकाएँ (लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ, प्लेटलेट्स); परिक्षेपण माध्यम – प्लाज्मा।
मुख्य बिंदु:
• कोलॉइड में कण पूरे माध्यम में समान रूप से वितरित रहते हैं और नीचे नहीं बैठते।
• निलंबन के कण भारी होने के कारण कुछ समय बाद नीचे बैठ जाते हैं।
• रक्त एक प्राकृतिक कोलॉइड है जो शरीर में निरंतर प्रवाहित होता रहता है।
आम गलतियाँ:
• निलंबन और कोलॉइड के गुणों में अंतर न समझ पाना।
• परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम के नाम उल्टे लिख देना।
Exam Tips:
a) जैविक प्रणालियों के संदर्भ में कोलॉइड की स्थिरता का महत्व समझें।
b) परिक्षिप्त प्रावस्था (विलेय जैसी) और परिक्षेपण माध्यम (विलायक जैसी) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
c) रक्त के घटकों (कोशिकाएँ और प्लाज्मा) के नाम सही-सही लिखें।
Question 11: आपको रेत, साधारण नमक और नैफ्थलीन का एक मिश्रण दिया गया है (चित्र 5.25 क)। चित्र 5.25 ख इस मिश्रण के घटकों को पृथक करने के विभिन्न चरणों को दर्शा रहा है। पृथक्करण तकनीकों के सही क्रम की पहचान कीजिए और उन्हें लिखिए।
Answer:
सही क्रम और तकनीकें निम्नलिखित हैं:
\( 1. \) ऊर्ध्वपातन (Sublimation) – सबसे पहले मिश्रण को गर्म करके नैफ्थलीन का ऊर्ध्वपातन करते हैं, जिससे नैफ्थलीन वाष्प बनकर उड़ जाती है और संघनित होकर अलग एकत्र हो जाती है।
\( 2. \) जल में घोलना और निस्यंदन (Filtration) – शेष मिश्रण (रेत + नमक) को जल में घोलते हैं जिससे नमक घुल जाता है और अघुलनशील रेत को निस्यंदन द्वारा अलग कर लेते हैं।
\( 3. \) वाष्पीकरण (Evaporation) – प्राप्त निस्यंद (नमक का विलयन) का वाष्पीकरण करके जल को उड़ा देते हैं और शुद्ध नमक प्राप्त करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• बहु-घटक मिश्रणों को अलग करने के लिए चरणों का सही क्रम चुनना बहुत आवश्यक है।
• नैफ्थलीन के गुण (ऊर्ध्वपातित होना) का उपयोग सबसे पहले किया जाता है।
• विलेयता और निस्यंदन का उपयोग बाद के चरणों में किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• चरणों के क्रम को उलट-पुलट कर देना।
• प्रत्येक चरण में प्रयुक्त वैज्ञानिक तकनीक का नाम न लिखना।
Exam Tips:
a) ऐसे बहु-चरणीय प्रश्नों में प्रत्येक घटक के भौतिक गुण पर विचार करें।
b) पहले उस घटक को अलग करें जो विशिष्ट गुण (जैसे ऊर्ध्वपातन) दर्शाता हो।
c) क्रम संख्या के साथ विधि का नाम स्पष्ट लिखें।
Question 12: जल और ऐसीटोन के मिश्रण को पृथक करने के लिए आसवन एक प्रभावी विधि क्यों है?
Answer:
जल (क्वथनांक \( 100^\circ\text{C} \)) और ऐसीटोन (क्वथनांक \( 56^\circ\text{C} \)) के क्वथनांकों में अंतर \( 44^\circ\text{C} \) है, जो \( 25^\circ\text{C} \) से अधिक है। इसलिए आसवन एक प्रभावी विधि है – गर्म करने पर कम क्वथनांक वाला ऐसीटोन पहले वाष्पित होकर संघनित हो जाता है और जल फ्लास्क में शेष रह जाता है, जिससे दोनों को शुद्ध रूप में पृथक किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• आसवन विधि की मुख्य शर्त है कि द्रवों के क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर (\( >25^\circ\text{C} \)) होना चाहिए।
• यहाँ जल और ऐसीटोन के क्वथनांकों का अंतर पर्याप्त है।
• कम क्वथनांक वाला द्रव पहले वाष्प में बदलता है।
आम गलतियाँ:
• क्वथनांकों के अंतर के मान की उपेक्षा करना।
• यह न बता पाना कि कौन सा द्रव पहले वाष्पित होगा।
Exam Tips:
a) उत्तर में दोनों द्रवों के क्वथनांक और उनके अंतर के आंकड़े जरूर लिखें।
b) यह स्पष्ट करें कि अधिक अंतर होने के कारण दोनों को आसानी से अलग किया जा सकता है।
c) वैज्ञानिक कारण स्पष्ट और संक्षिप्त रखें।
Question 13: तालिका 5.4 में दिए गए आँकड़ों की सहायता से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) \( 40^\circ\text{C} \) पर \( 50\text{ g} \) जल में पोटैशियम नाइट्रेट का संतृप्त विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी?
(ii) एक विद्यार्थी \( 80^\circ\text{C} \) पर पोटैशियम क्लोराइड का जल में संतृप्त विलयन बनाता है और विलयन को कक्ष के तापमान (\( 25^\circ\text{C} \)) पर ठंडा होने के लिए छोड़ देता है। जैसे-जैसे विलयन ठंडा होगा वह क्या अवलोकन करेगा? व्याख्या कीजिए।
(iii) लवणों की विलेयता पर तापमान के परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ता है? \( 10^\circ\text{C} \) से \( 80^\circ\text{C} \) तक तापमान में वृद्धि करने पर दिए गए चार लवणों की विलेयता में होने वाले परिवर्तनों की तुलना भी कीजिए।
Answer:
(i) तालिका के अनुसार, \( 40^\circ\text{C} \) पर \( 100\text{ g} \) जल में पोटैशियम नाइट्रेट की विलेयता = \( 62\text{ g} \)
\( 50\text{ g} \) जल के लिए आवश्यक मात्रा = \( \left(\frac{62}{100}\right) \times 50 = 31\text{ g} \)
(ii) जैसे-जैसे विलयन \( 80^\circ\text{C} \) से \( 25^\circ\text{C} \) तक ठंडा होगा, पोटैशियम क्लोराइड की विलेयता घटती जाएगी (\( 80^\circ\text{C} \) पर \( 54\text{ g} \) से घटकर लगभग \( 35^\circ\text{C} \) के आसपास)। चूँकि विलयन में विलेय की मात्रा नियत रहती है परंतु तापमान घटने पर विलेयता कम हो जाती है, इसलिए अतिरिक्त पोटैशियम क्लोराइड विलयन में नहीं रह पाएगा और ठोस क्रिस्टल के रूप में पृथक (क्रिस्टलीकृत) हो जाएगा।
(iii) सामान्यतः तापमान बढ़ने से लवणों की विलेयता बढ़ती है। तुलना:
\( \bullet \) पोटैशियम नाइट्रेट की विलेयता में सबसे अधिक वृद्धि होती है (\( 21\text{ g} \) से \( 167\text{ g} \), अर्थात लगभग \( 146\text{ g} \) की वृद्धि)।
\( \bullet \) पोटैशियम क्लोराइड और अमोनियम क्लोराइड में मध्यम वृद्धि होती है (क्रमशः \( 35 \to 54\text{ g} \) और \( 24 \to 66\text{ g} \))।
\( \bullet \) सोडियम क्लोराइड की विलेयता में सबसे कम वृद्धि होती है (\( 36\text{ g} \) से \( 37\text{ g} \), लगभग नगण्य वृद्धि)।
मुख्य बिंदु:
• विलेयता तापमान के साथ सामान्यतः बढ़ती है।
• तापमान घटाने पर संतृप्त विलयन से अतिरिक्त विलेय क्रिस्टल के रूप में बाहर आ जाता है।
• विभिन्न लवणों की विलेयता पर तापमान का प्रभाव अलग-अलग होता है।
आम गलतियाँ:
• \( 100\text{ g} \) जल के बजाय सीधे दिए गए मान को अन्य मात्राओं पर लागू कर देना।
• ठंडा होने पर होने वाले क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) तालिका आधारित प्रश्नों को हल करते समय आँकड़ों को सावधानीपूर्वक पढ़ें।
b) अनुपात और समानुपात के नियमों का सही उपयोग करके गणना करें।
c) विलेयता और तापमान के संबंध को सैद्धांतिक रूप से स्पष्ट करें।
Question 14: तीन विद्यार्थी ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ किसी प्रयोग के लिए चीनी का विलयन बना रहे हैं –
\( \bullet \) विद्यार्थी ‘क’ \( 80\text{ g} \) जल में \( 20\text{ g} \) चीनी घोलता है।
\( \bullet \) विद्यार्थी ‘ख’ \( 100\text{ g} \) जल में \( 20\text{ g} \) चीनी घोलता है।
\( \bullet \) विद्यार्थी ‘ग’ \( 80\text{ g} \) जल में \( 30\text{ g} \) चीनी घोलता है।
(i) प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा बनाए गए विलयन में चीनी की द्रव्यमान प्रतिशत (\% m/m) सांद्रता का परिकलन कीजिए।
(ii) इनमें से किस विद्यार्थी का विलयन सबसे अधिक सांद्र है? कारण सहित व्याख्या कीजिए।
Answer:
(i) विद्यार्थी ‘क’:
विलयन का द्रव्यमान = \( 80 + 20 = 100\text{ g} \)
द्रव्यमान प्रतिशत (\% m/m) = \( \left(\frac{20}{100}\right) \times 100 = 20\% \)
विद्यार्थी ‘ख’:
विलयन का द्रव्यमान = \( 100 + 20 = 120\text{ g} \)
द्रव्यमान प्रतिशत (\% m/m) = \( \left(\frac{20}{120}\right) \times 100 = 16.67\% \)
विद्यार्थी ‘ग’:
विलयन का द्रव्यमान = \( 80 + 30 = 110\text{ g} \)
द्रव्यमान प्रतिशत (\% m/m) = \( \left(\frac{30}{110}\right) \times 100 = 27.27\% \)
(ii) विद्यार्थी ‘ग’ का विलयन सबसे अधिक सांद्र है, क्योंकि उसके विलयन में चीनी की द्रव्यमान प्रतिशत सांद्रता (\( 27.27\% \)) सबसे अधिक है अर्थात प्रति ग्राम विलयन में सबसे अधिक चीनी घुली हुई है।
मुख्य बिंदु:
• विलयन का कुल द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान।
• द्रव्यमान प्रतिशत का सूत्र: \( \left(\frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का द्रव्यमान}}\right) \times 100 \)
• अधिक प्रतिशत वाला विलयन अधिक सांद्र होता है।
आम गलतियाँ:
• हर में केवल विलायक का द्रव्यमान (\( 80\text{ g} \) या \( 100\text{ g} \)) लिख देना, कुल विलयन का द्रव्यमान न जोड़ना।
• प्रतिशत की गणना में दशमलव की गलती करना।
Exam Tips:
a) हमेशा पहले कुल विलयन का द्रव्यमान निकालें और उसे स्पष्ट रूप से दिखाएं।
b) सांद्रता की तुलना करते समय उनके प्रतिशत मानों की स्पष्ट रूप से तुलना करें।
c) गणना के चरणों को क्रमबद्ध रूप से लिखें।
Question 15: चित्र 5.26 को ध्यानपूर्वक देखिए –
(i) ‘स’ द्वारा चिह्नित पृथक्करण तकनीक की पहचान कीजिए।
(ii) उपकरण क, ख और ग को नामांकित कीजिए।
(iii) निम्नलिखित में से किन मिश्रणों को उपर्युक्त पहचानी गई तकनीक द्वारा पृथक किया जा सकता है? तालिका 5.5 के आँकड़ों का उपयोग कीजिए। मिश्रण हैं –
(क) जल—ऐसीटोन
(ख) जल—नमक
(ग) ऐसीटोन—ऐल्कोहॉल
(घ) रेत—नमक
(ङ) ऐल्कोहॉल—क्लोरोफॉर्म
(च) ऐल्कोहॉल—बेंजीन
Answer:
(i) ‘स’ द्वारा चिह्नित तकनीक – आसवन (Distillation)
(ii) उपकरण नामांकन:
क – आसवन फ्लास्क (जिसमें मिश्रण गर्म किया जाता है)
ख – संघनित्र (Condenser)
ग – संग्रहण फ्लास्क (शंक्वाकार फ्लास्क)
(iii) तालिका के अनुसार, आसवन विधि तभी प्रभावी है जब घटकों के क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर (सामान्यतः \( 25^\circ\text{C} \) या अधिक) हो:
(क) जल (\( 100^\circ\text{C} \)) — ऐसीटोन (\( 56^\circ\text{C} \)): अंतर = \( 44^\circ\text{C} \) → आसवन द्वारा पृथक किया जा सकता है
(ख) जल — नमक: यह ठोस-द्रव मिश्रण है, आसवन द्वारा जल प्राप्त किया जा सकता है (नमक पीछे रह जाएगा) → हाँ, पृथक किया जा सकता है
(ग) ऐसीटोन (\( 56^\circ\text{C} \)) — ऐल्कोहॉल (\( 78^\circ\text{C} \)): अंतर = \( 22^\circ\text{C} \) → पृथक करना कठिन (अपर्याप्त अंतर)
(घ) रेत — नमक: यह दो ठोसों का मिश्रण है, आसवन विधि लागू नहीं होती → नहीं किया जा सकता
(ङ) ऐल्कोहॉल (\( 78^\circ\text{C} \)) — क्लोरोफॉर्म (\( 61^\circ\text{C} \)): अंतर = \( 17^\circ\text{C} \) → पृथक करना कठिन (अपर्याप्त अंतर)
(च) ऐल्कोहॉल (\( 78^\circ\text{C} \)) — बेंजीन (\( 80^\circ\text{C} \)): अंतर = \( 2^\circ\text{C} \) → पृथक करना कठिन (अपर्याप्त अंतर)
मुख्य बिंदु:
• आसवन उपकरण के प्रमुख अंगों की सही पहचान होना आवश्यक है।
• दो द्रवों के पृथक्करण के लिए क्वथनांकों का अंतर \( 25^\circ\text{C} \) या उससे अधिक होना चाहिए।
• ठोस-द्रव मिश्रण के मामले में विलायक को वाष्पीकृत करके आसवन द्वारा बचाया जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• कम क्वथनांक अंतर वाले द्रवों के लिए भी आसवन को पूरी तरह प्रभावी मान लेना।
• ठोस-द्रव और द्रव-द्रव मिश्रण के अंतर को न समझना।
Exam Tips:
a) नामांकित चित्रों से संबंधित प्रश्नों में अंगों के नाम सटीक लिखें।
b) क्वथनांकों के अंतर की गणना करके ही निष्कर्ष (\( >25^\circ\text{C} \) या \( \)
c) प्रत्येक भाग का उत्तर अलग-अलग बिंदुओं में दें।
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