NCERT Solutions Class 11 Biology Chapter 09 Biomolecules (जैव अणु) in Hindi

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Question 1: वृहत् अणु क्या है? उदाहरण दीजिए।

Answer:

वृहत् अणु (Macromolecules) वे जटिल और बड़े जैविक अणु होते हैं जिनका आणविक भार अधिक (सामान्यतः 1000 डाल्टन या उससे अधिक) होता है। ये जीवंत ऊतकों के अम्ल-अविलेय अंश (Acid-insoluble fraction) में पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, प्रोटीन, पॉलसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) और लिपिड (यद्यपि लिपिड का आणविक भार 800 डाल्टन से कम होता है, फिर भी वे कोशिका झिल्ली टूटने पर अम्ल-अविलेय अंश में आते हैं)।

मुख्य बिंदु:

• वृहत् अणुओं का आणविक भार 1000 डाल्टन से अधिक होता है।
• ये अम्ल-अविलेय अंश में प्राप्त होते हैं।
• प्रोटीन, पॉलसैकेराइड और न्यूक्लिक अम्ल इसके मुख्य उदाहरण हैं।

आम गलतियाँ:

• लिपिड को पूर्ण रूप से वृहत् अणु मान लेना, जबकि इसका आणविक भार कम होता है।
• सूक्ष्म अणुओं और वृहत् अणुओं के आणविक भार की सीमा में भ्रमित होना।
• अम्ल-विलेय और अविलेय अंशों के वर्गीकरण को गलत याद रखना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय '1000 डाल्टन' और 'अम्ल-अविलेय अंश' जैसे मुख्य शब्दों का उल्लेख अवश्य करें।
b) उदाहरण देते समय प्रोटीन और पॉलसैकेराइड का नाम सबसे पहले लिखें।
c) लिपिड के अपवाद को स्पष्ट रूप से समझें कि यह बड़े आकार के कारण नहीं बल्कि झिल्ली के टुकड़ों के रूप में अविलेय होता है।

 

Question 2: प्रोटीन की तृतीयक संरचना से क्या तात्पर्य है?

Answer:

आकृति का विवरण: यह आरेख प्रोटीन की त्रि-आयामी (3D) तृतीयक संरचना को दर्शाता है जिसमें पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला आपस में कुंडलित होकर एक गोलाकार या जटिल रूप बनाती है।
प्रोटीन की तृतीयक संरचना (Tertiary structure) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के त्रि-आयामी रूप को प्रदर्शित करती है। जब प्रोटीन की लंबी श्रृंखला कुंडलित होती है और तह (folding) खाती है, तब यह एक खोखले गोले जैसी त्रि-आयामी आकृति बनाती है जिसे तृतीयक संरचना कहते हैं। यह संरचना प्रोटीन के जैविक कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। इसमें विभिन्न प्रकार के बंध जैसे हाइड्रोजन बंध, आयनिक बंध, डाइसल्फाइड बंध और हाइड्रोफोबिक अंतःक्रियाएँ इस संरचना को स्थायित्व प्रदान करती हैं।

मुख्य बिंदु:

• यह प्रोटीन की त्रि-आयामी (3D) संरचना को दर्शाती है।
• पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के मुड़ने और कुंडलित होने से बनती है।
• विभिन्न रासायनिक बंध (जैसे हाइड्रोजन और डाइसल्फाइड बंध) इसे स्थिर रखते हैं।

आम गलतियाँ:

• द्वितीयक और तृतीयक संरचना के बीच अंतर स्पष्ट न कर पाना।
• यह भूल जाना कि तृतीयक संरचना ही प्रोटीन को सक्रिय कार्य करने योग्य बनाती है।
• बंधों के प्रकारों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) तृतीयक संरचना के लिए 'त्रि-आयामी' और 'तह (folding)' शब्दों का प्रयोग जरूर करें।
b) स्पष्ट करें कि यह संरचना प्रोटीन के एंजाइमी और जैविक कार्यों के लिए जरूरी है।
c) चित्र आधारित प्रश्नों के लिए प्रोटीन की कुंडलित संरचना का अभ्यास करें।

 

Question 3: ऐसे रुचिकर सूक्ष्म जैव अणुओं का पता लगाइए जो कम अणुभार वाले होते हैं व इनकी संरचना बनाइए? ऐसे उद्योगों का पता लगाइए जो इन यौगिकों का निर्माण विलगन द्वारा करते हैं? इनको खरीदने वाले कौन हैं? मालूम कीजिए।

Answer:

कम अणुभार वाले सूक्ष्म जैव अणुओं में एडेनोसाइन, थाइमिडिन, ग्लूकोज, राइबोज़ और विभिन्न अमीनो अम्ल शामिल हैं। इनका अणुभार 18 से 800 डाल्टन के बीच होता है और ये अम्ल-विलेय अंश में पाए जाते हैं। रासायनिक उद्योगों और औषधि निर्माण कंपनियों (जैसे एम्पेक्स लिमिटेड, मरधर परिवहन आदि) द्वारा किण्वन (fermentation) और विलगन तकनीकों से इनका निर्माण किया जाता है। इन्हें अनुसंधान प्रयोगशालाएँ, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और दवा उद्योग खरीदते हैं जिनका उपयोग अनुसंधान, टीका निर्माण और चिकित्सा उपचार में किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• सूक्ष्म जैव अणुओं का अणुभार 1000 डाल्टन से कम होता है।
• एडेनोसाइन, ग्लूकोज और राइबोज़ इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
• इनका व्यावसायिक उत्पादन रासायनिक और औषधीय उद्योगों द्वारा किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• सूक्ष्म अणुओं को वृहत् अणुओं के साथ मिला देना।
• उनके व्यावसायिक उपयोग और खरीदारों को स्पष्ट न कर पाना।
• संरचनाओं में कार्बन और हाइड्रोजन की स्थिति को गलत बनाना।

Exam Tips:

a) एडेनोसाइन और ग्लूकोज जैसी सरल संरचनाओं का अभ्यास करें।
b) उद्योगों और खरीदारों के नाम सामान्य व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर सटीक लिखें।
c) अम्ल-विलेय और अम्ल-अविलेय का अंतर हमेशा ध्यान रखें।

 

Question 4: चिकित्सार्थ अभिकर्ता (therapeutic agents) के रूप में प्रयोग में आने वाले प्रोटीन का पता लगाइए व सूचीबद्ध कीजिए। प्रोटीन की अन्य उपयोगिताё को बताइए (जैसे सौंदर्य-प्रसाधन आदि)।

Answer:

चिकित्सकीय अभिकर्ताओं के रूप में उपयोग होने वाले प्रमुख प्रोटीन थ्रोम्बिन और फाइब्रिनोजेन हैं जो रक्त का थक्का जमाने में मदद करते हैं, एंटीबॉडी जो संक्रमण से बचाते हैं, इंसुलिन जो रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है, और रेनिन जो दूध के पाचन में सहायक है। इसके अतिरिक्त, प्रोटीन का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों, विषनाशक पदार्थों के निर्माण, खाद्य उद्योगों में स्टेबलाइजर और जैविक बफर के रूप में भी किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• थ्रोम्बिन और फाइब्रिनोजेन रक्त का थक्का जमाते हैं।
• इंसुलिन मधुमेह के उपचार में रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।
• इनका उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों और जैविक बफर के रूप में भी होता है।

आम गलतियाँ:

• चिकित्सकीय प्रोटीनों के कार्यों को आपस में मिला देना।
• केवल इंसुलिन का नाम लिखकर अन्य महत्वपूर्ण प्रोटीनों को छोड़ देना।
• सौंदर्य प्रसाधनों में प्रोटीन की भूमिका को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) इंसुलिन और थ्रोम्बिन के चिकित्सा क्षेत्र में योगदान को प्रमुखता से याद रखें।
b) उत्तर को बिंदुओं (bullet points) में लिखें ताकि जाँचने में आसानी हो।
c) प्रोटीन के बहुमुखी उपयोग (चिकित्सा, सौंदर्य, पोषण) को दर्शाएँ।

 

Question 5: ट्राइग्लिसराइड के संगठन का वर्णन कीजिए।

Answer:

आकृति का विवरण: यह आरेख ट्राइग्लिसराइड की रासायनिक संरचना को दर्शाता है जिसमें एक ग्लिसरोल अणु तीन फैटी एसिड अणुओं के साथ एस्टर बंध द्वारा जुड़ा होता है。
ट्राइग्लिसराइड एक प्रकार का लिपिड है जो एक ग्लिसरोल अणु और तीन फैटी एसिड अणुओं के मिलने से बनता है। ग्लिसरोल एक ट्राईहाइड्रिक अल्कोहल (प्रोपेन-1,2,3-ट्रायोल) है, जिसके तीनों हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह तीन फैटी एसिड अणुओं के कार्बोक्सिल (-COOH) समूहों के साथ एस्टर बंध (Ester bond) द्वारा जुड़े होते हैं। फैटी एसिड संतृप्त या असंतृप्त हो सकते हैं। ये मुख्य रूप से वनस्पति तेलों और जंतु वसा के रूप में ऊर्जा के संचय का कार्य करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• यह एक ग्लिसरोल और तीन फैटी एसिड से मिलकर बनता है।
• इसमें ग्लिसरोल और फैटी एसिड के बीच एस्टर बंध पाया जाता है।
• यह जंतुओं और पौधों में वसा या तेल के रूप में संचित रहता है।

आम गलतियाँ:

• ग्लिसरोल के साथ फैटी एसिड की सही संख्या (तीन) न लिखना।
• एस्टर बंध के स्थान पर पेप्टाइड या ग्लाइकोसाइड बंध लिख देना।
• वसा और तेल की रासायनिक प्रकृति को भ्रमित करना।

Exam Tips:

a) ट्राइग्लिसराइड का सूत्र (R₂COO - CH₂CH(-OOCR₁)CR₂ - OOCR₃) और संरचना का अभ्यास करें।
b) स्पष्ट करें कि यह एक सरल लिपिड है।
c) इसके जैविक महत्व (ऊर्जा भंडारण) को अवश्य लिखें।

 

Question 6: क्या आप व्यापारिक दृष्टि से उपलब्ध परमाणु मॉडल (बल व स्टिक नमूना) का प्रयोग करते हुए जैव अणुओं के उन प्रारूपों को बना सकते हैं?

Answer:

हाँ, हम व्यापारिक रूप से उपलब्ध बॉल और स्टिक मॉडल (Ball and stick model) का उपयोग करके ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, न्यूक्लियोटाइड और अन्य जैव अणुओं की त्रि-आयामी संरचनाओं का सटीक प्रारूप बना सकते हैं। इस मॉडल में विभिन्न रंगों की गेंदें विभिन्न परमाणुओं को दर्शाती हैं (जैसे लाल गेंद ऑक्सीजन के लिए, ग्रे गेंद कार्बन के लिए और नीली गेंद हाइड्रोजन के लिए), तथा स्टिक या छड़ें उनके बीच के सहसंयोजक बंधों (Covalent bonds) को दर्शाती हैं। यह मॉडल अणुओं के आकार, बंध कोण और उनकी त्रि-आयामी ज्यामिति को समझने में अत्यंत सहायक होता है।

मुख्य बिंदु:

• बॉल और स्टिक मॉडल जैव अणुओं की 3D संरचना दर्शाने के काम आते हैं।
• विभिन्न रंग अलग-अलग परमाणुओं (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन) को दर्शाते हैं।
• छड़ें (Sticks) परमाणुओं के बीच के रासायनिक बंधों को प्रदर्शित करती हैं।

आम गलतियाँ:

• विभिन्न तत्वों के लिए रंगों के मानक निर्धारण को गलत समझना।
• एकल और डबल बॉन्ड को मॉडल में सही ढंग से प्रदर्शित न करना।
• इस मॉडल के उद्देश्य को केवल सजावटी मानना।

Exam Tips:

a) मॉडल के घटकों (गेंद = परमाणु, स्टिक = बंध) को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
b) कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के लिए सामान्य रंगों का उल्लेख करें।
c) इस प्रकार के प्रायोगिक प्रश्नों के वैचारिक आधार को समझें।

 

Question 7: ऐलेनीन अमीनो अम्ल की संरचना बताइए?

Answer:

आकृति का विवरण: यह आरेख ऐलेनीन (Alanine) अमीनो अम्ल की रासायनिक संरचना को दर्शाता है जिसमें केंद्रीय अल्फा-कार्बन से एक अमीनो समूह, एक कार्बोक्सिल समूह, एक हाइड्रोजन परमाणु और एक मेथिल पार्श्व श्रृंखला जुड़ी होती है。
ऐलेनीन एक सरल और प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला प्रोटीनोजेनिक अमीनो अम्ल है। इसकी रासायनिक संरचना में एक केंद्रीय अल्फा-कार्बन परमाणु होता है जिससे चार भिन्न समूह जुड़े होते हैं: एक अमीनो समूह (-NH₂), एक कार्बोक्सिल समूह (-COOH), एक हाइड्रोजन परमाणु (-H), और एक मेथिल समूह (-CH₃) जो इसकी पार्श्व श्रृंखला (R-group) के रूप में कार्य करता है। यह एक ध्रुवीय और सरल एलिफेटिक अमीनो अम्ल है।

मुख्य बिंदु:

• यह सबसे सरल अमीनो अम्ल में से एक है।
• इसके केंद्रीय कार्बन से -NH₂, -COOH, -H और -CH₃ समूह जुड़े होते हैं।
• यह प्रोटीन का एक आवश्यक घटक है।

आम गलतियाँ:

• पार्श्व श्रृंखला (R-group) के रूप में मेथिल समूह के स्थान पर कुछ और लिख देना।
• अमीनो और कार्बोक्सिल समूहों की स्थिति को गलत बनाना।
• ग्लाइसिन और ऐलेनीन की संरचना में अंतर न कर पाना।

Exam Tips:

a) ऐलेनीन की संरचना बनाते समय केंद्रीय कार्बन और उसके चार संयोजकता समूहों को स्पष्ट दिखाएँ।
b) याद रखें कि ग्लाइसिन में R समूह हाइड्रोजन होता है जबकि ऐलेनीन में मेथिल समूह होता है।
c) संरचना का अभ्यास बार-बार करें क्योंकि यह परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 8: गोंद किससे बने होते हैं? क्या फेविकोल इससे भिन्न है?

Answer:

प्राकृतिक गोंद (Gum) पादप उत्पादों से प्राप्त होने वाले जटिल हेटेरो-पॉलसैकेराइड (Heteropolysaccharides) होते हैं जो दो या दो से अधिक प्रकार के विभिन्न मोनोसैकेराइड इकाइयों के बहुलकीकरण से बनते हैं। दूसरी ओर, फेविकोल एक संश्लेषित (Synthetic) चिपकने वाला पदार्थ है जो पॉलीविनाइल अल्कोहल (PVA) या सिंथेटिक पॉलिमर पर आधारित होता है। अतः रासायनिक संगठन और स्रोत की दृष्टि से फेविकोल प्राकृतिक गोंद से पूरी तरह भिन्न होता है क्योंकि फेविकोल पॉलसैकेराइड नहीं है।

मुख्य बिंदु:

• प्राकृतिक गोंद जटिल हेटेरो-पॉलसैकेराइड होते हैं।
• फेविकोल एक कृत्रिम (संश्लेषित) पॉलीविनाइल उत्पाद है।
• दोनों के स्रोत और रासायनिक संगठन में भिन्नता होती है।

आम गलतियाँ:

• फेविकोल को प्राकृतिक पॉलसैकेराइड या गोंद मान लेना।
• हेटेरो-पॉलसैकेराइड और होमो-पॉलसैकेराइड में भ्रमित होना।
• गोंद के पादप स्रोत की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) प्राकृतिक गोंद और फेविकोल के बीच का मुख्य अंतर 'प्राकृतिक बनाम संश्लेषित' स्पष्ट करें।
b) यह बताएँ कि गोंद पॉलसैकेराइड है जबकि फेविकोल पॉलीमर है।
c) उत्तर को संक्षिप्त और वैज्ञानिक शब्दावली में लिखें।

 

Question 9: प्रोटीन, वसा व तेल अमीनो अम्लों का विश्लेषणत्मक परीक्षण बताइए एवं किसी भी फल के रस, लार, पसीना तथा मूत्र में इनका परीक्षण करें?

Answer:

प्रोटीन, वसा और अमीनो अम्लों का रासायनिक परीक्षण विभिन्न अभिकर््षकों द्वारा किया जाता है। प्रोटीन की उपस्थिति के लिए ब्रीन परीक्षण (Biuret test) किया जाता है जिसमें कॉपर सल्फेट और क्षार मिलाने पर रंग हल्का नीला से बैंगनी या जामुनी हो जाता है। वसा और तेल के लिए कागज़ पर धब्बा परीक्षण या घुलनशीलता परीक्षण किया जाता है जिससे पारभासी धब्बा बनता है। अमीनो अम्लों के लिए निनहाइड्रिन परीक्षण (Ninhydrin test) किया जाता है जिसमें निनहाइड्रिन मिलाने और उबालने पर घोल गुलाबी या बैंगनी रंग का हो जाता है। फल के रस में शर्करा और अमीनो अम्ल हो सकते हैं, लार में कुछ प्रोटीन व एंजाइम होते हैं, पसीने में यूरिया व लवण होते हैं, और मूत्र में यूरिया व अमीनो अम्ल के अंश मिल सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रोटीन के लिए ब्युरेट परीक्षण (बैंगनी रंग) किया जाता है।
• वसा के लिए पारभासी धब्बा परीक्षण उपयुक्त है।
• अमीनो अम्लों की पहचान के लिए निनहाइड्रिन परीक्षण किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• परीक्षणों के नाम और उनके रंग परिवर्तन को आपस में मिला देना।
• जैविक द्रवों (लार, मूत्र) में मिलने वाले घटकों को गलत बताना।
• परीक्षण की सही प्रक्रिया (जैसे उबालना या बूँद डालना) का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) परीक्षण के नाम, अभिकर्मक और परिणामी रंग को सारणीबद्ध (Table) रूप में याद रखें।
b) ब्युरेट और निनहाइड्रिन परीक्षण के रंगों को कभी न भूलें।
c) प्रायोगिक जैव रसायन से जुड़े इस प्रश्न को चरणबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 10: पता लगाइए कि जैव मंडल में सभी पादपों द्वारा कितने सेलुलोस का निर्माण होता है। इसकी तुलना मनुष्यों द्वारा उत्पादित कागज़ से करें। मान लीजिए द्वारा प्रतिवर्ष पादप पदार्थों की कितनी खपत की जाती है? इससे वनस्पतियों की कितनी हानि होती है?

Answer:

जैवमंडल के सभी पौधों द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब टन सेलुलोस का संश्लेषण किया जाता है। केवल एक टन कागज़ का उत्पादन करने के लिए लगभग 17 पूर्ण विकसित पेड़ों की आवश्यकता होती है। मनुष्य अपनी विभिन्न आवश्यकताओं (जैसे इमारती लकड़ी, ईंधन, भोजन, और कागज़ उद्योग) के लिए पादप उत्पादों की बहुत बड़ी मात्रा की खपत करता है। इस भारी माँग के कारण वनों की कटाई हो रही है, जिससे वनस्पतियों को भारी क्षति पहुँचती है और पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होता है, हालाँकि सटीक वार्षिक खपत की गणना करना जटिल है क्योंकि यह विभिन्न उद्योगों और क्षेत्रों पर निर्भर करती है।

मुख्य बिंदु:

• पादप प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब टन सेलुलोस बनाते हैं।
• कागज़ निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होती है।
• मानव द्वारा पादपों की अत्यधिक खपत से वनस्पतियों को भारी हानि हो रही है।

आम गलतियाँ:

• सेलुलोस की वार्षिक मात्रा (100 अरब टन) के आंकड़े को भूल जाना।
• कागज़ उत्पादन और वनों की कटाई के संबंध को स्पष्ट न कर पाना।
• केवल अनुमानित आंकड़ों को निरपेक्ष मान लेना।

Exam Tips:

a) '100 अरब टन' का आंकड़ा मुख्य बिंदु के रूप में याद रखें।
b) वनों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन के दृष्टिकोण से उत्तर का समापन करें।
c) तार्किक और विश्लेषणात्मक शैली में उत्तर प्रस्तुत करें।

 

Question 11: एंजाइमों के महत्वपूर्ण गुणों का वर्णन कीजिए।

Answer:

एंजाइम (Enzymes) जैविक उत्प्रेरक (Biocatalysts) होते हैं जो प्रोटीन प्रकृति के होते हैं। इनके मुख्य गुण निम्नलिखित हैं: (1) ये उच्च आणविक भार वाले जटिल वृहत् अणु होते हैं। (2) ये जीवित कोशिकाओं की जैव रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को तीव्र करते हैं बिना स्वयं खर्च हुए। (3) अधिकांश एंजाइम अपनी क्रिया में अत्यंत विशिष्ट (Specific) होते हैं अर्थात् एक विशेष एंजाइम एक विशेष सबस्ट्रेट पर ही कार्य करता है। (4) तापमान और पीएच (pH) परिवर्तन के प्रति ये संवेदनशील होते हैं; अत्यधिक तापमान पर इनकी सक्रियता घट जाती है और एक इष्टतम (Optimum) पीएच पर ये अधिकतम सक्रियता दर्शाते हैं। (5) एंजाइमों की टर्नओवर संख्या (Turnover number) बहुत अधिक होती है, जिससे वे प्रति मिनट अणुओं की एक बड़ी संख्या को उत्पाद में बदल सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• एंजाइम प्रोटीन प्रकृति के जैव उत्प्रेरक होते हैं।
• ये रासायनिक अभिक्रिया की गति को बढ़ाते हैं और विशिष्ट होते हैं।
• तापमान और pH में बदलाव से इनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

आम गलतियाँ:

• एंजाइम को कार्बोहाइड्रेट या लिपिड मान लेना, जबकि वे प्रोटीन होते हैं।
• विशिष्टता (Specificity) के गुण को स्पष्ट न करना।
• तापमान और pH के प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) एंजाइम के गुणों को बिंदुओं (1, 2, 3...) में लिखें ताकि परीक्षक को स्पष्टता दिखे।
b) 'विशिष्ट प्रकृति' और 'इष्टतम तापमान/pH' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है, अतः इसके सभी बिंदुओं को अच्छे से तैयार करें।

 

Biology Class 11 Curriculum Solutions: Chapter 09 जैव अणु

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