Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Biology Chapter 08 कोशिका जीवन की इकाई
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Question 1: इनमें कौन सा सही नहीं है?
(अ) कोशिका की खोज रार्बट ब्राउन ने की थी।
(ब) श्लाइडेन व श्वान ने कोशिका सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
(स) वर्चोव के अनुसार कोशिका पूर्वस्थित कोशिका से बनती है।
(द) एक कोशिकीय जीव अपने जीवन के कार्य एक कोशिका के भीतर करते हैं।
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (अ) है। कोशिका की खोज रॉबर्ट हूक ने वर्ष 1665 में कॉर्क की पतली काट में की थी, न कि रॉबर्ट ब्राउन ने। रॉबर्ट ब्राउन ने वर्ष 1831 में कोशिका के केंद्रक (nucleus) की खोज की थी। बाकी सभी कथन सही हैं; श्लाइडेन और श्वान ने कोशिका सिद्धांत (cell theory) दिया था, वर्चोव ने स्पष्ट किया था कि नई कोशिकाएँ पूर्वस्थित कोशिकाओं से बनती हैं, और एककोशिकीय जीव अपने सभी जैविक कार्य एक ही कोशिका के भीतर संपन्न करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• कोशिका की खोज रॉबर्ट हूक ने की थी, जबकि रॉबर्ट ब्राउन ने केंद्रक की खोज की थी।
• श्लाइडेन और श्वान ने संयुक्त रूप से कोशिका सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
• रूडोल्फ वर्चोव ने 'ओम्नीस सेल्युला ई सेल्युला' सिद्धांत दिया था।
आम गलतियाँ:
• रॉबर्ट हूक और रॉबर्ट ब्राउन के नामों में भ्रमित होना।
• कोशिका सिद्धांत के प्रतिपादकों को गलत याद रखना।
• कथन आधारित प्रश्नों को बिना पढ़े जल्दी में उत्तर देना।
Exam Tips:
a) वैज्ञानिकों के नाम और उनके योगदान की एक सूची बनाकर याद करें।
b) रॉबर्ट हूक (कोशिका) और रॉबर्ट ब्राउन (केंद्रक) का अंतर हमेशा स्पष्ट रखें।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ने के बाद ही सही उत्तर चुनें।
Question 2: नई कोशिका का निर्माण होता है:
(अ) जीवाणु किण्वन से
(ब) पुरानी कोशिकाओं के पुनरुत्पादन से
(स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से
(द) अजैविक पदार्थों से
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से है। कोशिका सिद्धांत के आधुनिक रूपांतरण के अनुसार, जिसे रूडोल्फ वर्चोव ने प्रतिपादित किया था, सभी नई कोशिकाएँ पहले से मौजूद (पूर्वस्थित) कोशिकाओं के विभाजन से ही उत्पन्न होती हैं। पुरानी कोशिकाएँ विभाजित होकर नई संतति कोशिकाओं को जन्म देती हैं, जिससे जीवों में वृद्धि, विकास और मरम्मत संभव होती है।
मुख्य बिंदु:
• नई कोशिकाओं का निर्माण हमेशा पूर्वस्थित कोशिकाओं के विभाजन द्वारा होता है।
• इस अवधारणा को रूडोल्फ वर्चोव ने प्रस्तुत किया था।
• यह आधुनिक कोशिका सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आम गलतियाँ:
• जीवाणु किण्वन या पुनरुत्पादन को नई कोशिकाओं के निर्माण का मुख्य स्रोत समझना।
• अजैविक पदार्थों से जीवन की उत्पत्ति के सिद्धांत को कोशिका विभाजन से मिला देना।
• वर्चोव के योगदान को भूल जाना।
Exam Tips:
a) कोशिका सिद्धांत के मुख्य बिंदुओं को उनके वैज्ञानिकों के साथ याद रखें।
b) 'पूर्वस्थित कोशिकाओं से निर्माण' वाली पंक्ति को अच्छी तरह समझ लें।
c) यह प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बार-बार पूछा जाता है।
Question 3: निम्न के जोड़े बनाइए:
स्तंभ I स्तंभ II
(अ) क्रिस्टी (i) पीठिका में चपटे कलामय थैली
(ब) कुंडिका (ii) सूत्रकणिका में अंतर्वलन
(स) थाइलेकोइड (iii) गॉल्जी उपकरण में बिंब आकार की थैली
Answer:
इस मिलान प्रश्न का सही जोड़ा इस प्रकार है: (अ) क्रिस्टी का संबंध (ii) सूत्रकणिका में अंतर्वलन से है, क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली के अंगुलियों जैसे प्रवर्ध को क्रिस्टी कहते हैं। (ब) कुंडिका (सिस्टर्नी) का संबंध (iii) गॉल्जी उपकरण में बिंब आकार की थैली से है, जो गॉल्जी बॉडी के निर्माण में मुख्य इकाइयाँ होती हैं। (स) थाइलेकोइड का संबंध (i) पीठिका (स्ट्रोमा) में चपटे कलामय थैली से है, जो क्लोरोप्लास्ट के भीतर पाए जाते हैं। सही मिलान है: (अ)-(ii), (ब)-(iii), (स)-(i)।
मुख्य बिंदु:
• क्रिस्टी माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक वलन हैं जो सतह क्षेत्र बढ़ाते हैं।
• कुंडिकाएँ (Cisternae) गॉल्जी उपकरण की चपटी थैलीनुमा संरचनाएँ होती हैं।
• थाइलेकोइड हरित लवक के स्ट्रोमा में स्थित चपटी झिल्लियों की थैलियाँ हैं।
आम गलतियाँ:
• क्रिस्टी और थाइलेकोइड की संरचनाओं को आपस में बदल देना।
• कुंडिका शब्द को केवल अंतःद्रव्यी जालिका तक सीमित समझना।
• मिलान करते समय गलत क्रम अंकित करना।
Exam Tips:
a) कोशिका के विभिन्न अंगों की आंतरिक संरचनाओं के नाम चित्र सहित याद करें।
b) मिलान वाले प्रश्नों में उत्तर हमेशा स्पष्ट रूप से लिखकर दिखाएं।
c) माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय और क्लोरोप्लास्ट के मुख्य भागों के नाम न भूलें।
Question 4: इनमें से कौन सा सही है:
(अ) सभी जीव कोशिकाओं में केंद्रक मिलता है।
(ब) दोनों जंतु व पादप कोशिकाओं में स्पष्ट कोशिका भित्ति होती है।
(स) प्रोकैरियोटिक की झिल्ली में आवारित अंगक नहीं मिलते हैं।
(द) कोशिका का निर्माण अजैविक पदार्थों से नए सिरे से होता है।
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (स) है कि प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं की झिल्ली में आवारित (झिल्ली-बद्ध) अंगक नहीं मिलते हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट, गॉल्जीकाय जैसे झिल्ली-बद्ध कोशिकांग अनुपस्थित होते हैं। विकल्प (अ) गलत है क्योंकि प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता; विकल्प (ब) गलत है क्योंकि जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती; और विकल्प (द) गलत है क्योंकि नई कोशिकाएँ पूर्वस्थित कोशिकाओं से बनती हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में झिल्ली-बद्ध कोशिकांग और स्पष्ट केंद्रक नहीं होते हैं।
• पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होती है जबकि जंतु कोशिकाओं में यह अनुपस्थित होती है।
• सभी जीवित कोशिकाओं में केंद्रक होना आवश्यक नहीं है (जैसे स्तनधारियों की आरबीसी)।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि सभी कोशिकाओं में केंद्रक और कोशिका भित्ति समान रूप से होती है।
• प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाओं के अंतर को ठीक से न समझना।
• गलत विकल्पों को सही मान लेना।
Exam Tips:
a) प्रोकैरियोट और यूकैरियोट की मुख्य विशेषताओं की तालिका याद रखें।
b) जंतु और पादप कोशिका के अंतर को भली-भांति समझ लें।
c) विकल्पों में दिए गए अपवादों (जैसे आरबीसी या जीवाणु) पर विशेष ध्यान दें।
Question 5: प्रोकैरियोटिक कोशिका में क्या मीसोसोम होता है? इसके कार्य का वर्णन करें।
Answer:
हाँ, प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में मीसोसोम पाया जाता है। मीसोसोम प्लाज्मा झिल्ली का एक अंतःवलन (infolding) होता है जो कोशिका के अंदर पुटिका (vesicles), नलिका (tubules) या पटलिका (lamellae) के रूप में विकसित होता है। यह संरचना प्रोकैरियोटिक जीवों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मीसोसोम के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं: यह कोशिका भित्ति के निर्माण, डीएनए की प्रतिकृति (replication) और संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों के समान वितरण में सहायता करता है। इसके अलावा, यह श्वसन एंजाइमों को स्थान प्रदान करके प्लाज्मा झिल्ली के सतह क्षेत्र को बढ़ाता है जिससे कोशिका का श्वसन और स्रावण कार्य सुगम होता है.
मुख्य बिंदु:
• मीसोसोम प्लाज्मा झिल्ली के अंतःवलन से बनने वाली विशिष्ट संरचना है।
• यह डीएनए प्रतिकृति और कोशिका भित्ति के संश्लेषण में मदद करता है।
• यह प्रोकैरियोट्स में माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य (श्वसन) जैसा कार्य करता है।
आम गलतियाँ:
• मीसोसोम को यूकैरियोटिक कोशिका का अंग समझ लेना।
• इसके कार्यों में श्वसन और डीएनए प्रतिकृति का उल्लेख न करना।
• मीसोसोम की उत्पत्ति प्लाज्मा झिल्ली से न मानकर किसी अन्य जगह से मानना।
Exam Tips:
a) मीसोसोम की परिभाषा और उसके प्रकार (पुटिका, नलिका) को स्पष्ट लिखें।
b) इसके कार्यों को बिंदुओं में लिखकर समझाएँ ताकि उत्तर आकर्षक लगे।
c) इसे यूकैरियोट्स के माइटोकॉन्ड्रिया के समरूप मानकर याद रखें।
Question 6: कैसे उदासीन विलेय जीवद्रव्यझिल्ली से होकर गति करते हैं? क्या ध्रुवीय अणु उसी प्रकार से इससे होकर गति करते हैं? यदि नहीं तो इनका जीवद्रव्यझिल्ली से होकर परिवहन कैसे होता है?
Answer:
आकृति का विवरण: यहाँ जीवद्रव्यझिल्ली (प्लाज्मा झिल्ली) की संरचना और विलेय अणुओं के निष्क्रिय तथा सक्रिय परिवहन को दर्शाया गया है।
उदासीन विलेय अणु साधारण विसरण (simple diffusion) द्वारा सांद्रता प्रवणता के अनुदिश (अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर) जीवद्रव्यझिल्ली से होकर आसानी से गुजर जाते हैं। किंतु, ध्रुवीय अणु जो लिपिड की द्विपरत (lipid bilayer) में अघुलनशील होते हैं, वे इस प्रकार सीधे गति नहीं कर सकते। उन्हें झिल्ली से पार होने के लिए विशेष प्रोटीन वाहकों (carrier proteins) या परिवहन प्रोटीनों की आवश्यकता होती है। इन ध्रुवीय अणुओं और आयनों का परिवहन या तो विशिष्ट वाहक प्रोटीनों द्वारा सुसाध्य विसरण (facilitated diffusion) के माध्यम से होता है या फिर ऊर्जा (ATP) का उपयोग करके सक्रिय परिवहन (active transport) के द्वारा कम सांद्रता से अधिक सांद्रता की ओर कराया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• उदासीन अणु साधारण विसरण द्वारा झिल्ली को पार करते हैं।
• ध्रुवीय अणु लिपिड में अघुलनशील होने के कारण सीधे पार नहीं जा सकते।
• ध्रुवीय अणुओं के लिए वाहक प्रोटीन और सक्रिय परिवहन की आवश्यकता होती है।
आम गलतियाँ:
• सभी प्रकार के अणुओं के परिवहन को एक ही विधि (साधारण विसरण) मान लेना।
• ध्रुवीय और गैर-ध्रुवीय अणुओं के परिवहन के अंतर को स्पष्ट न करना।
• वाहक प्रोटीन की भूमिका को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) विसरण, सुसाध्य विसरण और सक्रिय परिवहन की परिभाषा स्पष्ट रखें।
b) लिपिड द्विपरत की प्रकृति (जलविरागी केंद्र) का उल्लेख जरूर करें।
c) उत्तर को सरल चरणों में विभाजित करके लिखें।
Question 7: दो कोशिकीय अंगों का नाम बताइए जो द्विकला से घिरे होते हैं। इन दो अंगों की क्या विशेषताएँ हैं? इनका कार्य व रेखांकित चित्र बनाइए।
Answer:
आकृति का विवरण: यहाँ द्विकला (दोहरी झिल्ली) से घिरे दो प्रमुख कोशिकांगों - सूत्रकणिका (माइटोकॉन्ड्रिया) और हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) की आंतरिक संरचना को नामांकित चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
द्विकला से घिरे दो मुख्य कोशिकांग सूत्रकणिका (माइटोकॉन्ड्रिया) और हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) हैं। सूत्रकणिका की विशेषता यह है कि इसकी आंतरिक झिल्ली 'क्रिस्टी' नामक वलन बनाती है और इसके भीतर मैट्रिक्स होता है; यह कोशिकीय श्वसन का स्थल है और एटीपी के रूप में ऊर्जा उत्पन्न करता है, इसलिए इसे 'कोशिका का शक्ति गृह' कहते हैं। इसमें स्वयं का डीएनए और राइबोसोम होता है। हरित लवक पादप कोशिकाओं में पाया जाता है, जिसकी आंतरिक झिल्ली थाइलेकोइड और ग्रेना बनाती है; यह प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है और इसमें भी अपना डीएनए व राइबोसोम होता है।
मुख्य बिंदु:
• सूत्रकणिका और हरित लवक दोनों दोहरी झिल्ली वाले अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग हैं।
• सूत्रकणिका ऊर्जा (ATP) उत्पादन का केंद्र है, जबकि हरित लवक प्रकाश संश्लेषण करता है।
• दोनों के पास अपना स्वयं का वृत्ताकार डीएनए और 70S राइबोसोम होता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों अंगों के कार्यों को आपस में मिला देना (जैसे श्वसन और प्रकाश संश्लेषण का भ्रम)।
• दोहरी झिल्ली की संरचना (क्रिस्टी और ग्रेना) का सही वर्णन न करना।
• अर्ध-स्वायत्त प्रकृति का उल्लेख करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट का नामांकित चित्र बनाने का अभ्यास करें।
b) दोनों की आंतरिक संरचनाओं (मैट्रिक्स, स्ट्रोमा, क्रिस्टी, थाइलेकोइड) के नाम याद रखें।
c) इन्हें अर्ध-स्वायत्त (semi-autonomous) क्यों कहते हैं, इसका कारण जरूर लिखें।
Question 8: प्रोकैरियोटिक कोशिका की क्या विशेषताएँ हैं?
Answer:
प्रोकैरियोटिक कोशिका एक अत्यंत सरल और आदिम प्रकार की कोशिका है, जिसमें कई विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं। सबसे मुख्य विशेषता यह है कि इनमें झिल्ली-बद्ध केंद्रक (nucleus) और अन्य झिल्ली-बद्ध कोशिकांग (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम) अनुपस्थित होते हैं। इनका आनुवंशिक पदार्थ (DNA) केंद्रक झिल्ली से परिबद्ध नहीं होता बल्कि कोशिकाद्रव्य में 'न्यूक्लियोइड' के रूप में खुला रहता है। इनमें 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अधिकांश प्रोकैरियोट्स में एक मजबूत कोशिका भित्ति होती है, और प्लाज्मा झिल्ली के अंतःवलन से 'मीसोसोम' का निर्माण होता है। जीवाणु, नीले-हरे शैवाल और माइकोप्लाज्मा इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध अंगक नहीं होते हैं।
• आनुवंशिक पदार्थ नग्न रूप में न्यूक्लियोइड के रूप में उपस्थित होता है।
• इनमें 70S राइबोसोम और मीसोसोम जैसी विशिष्ट संरचनाएँ मिलती हैं।
आम गलतियाँ:
• प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाओं के अंतर में भ्रमित होना।
• केंद्रक झिल्ली की अनुपस्थिति का उल्लेख करना भूल जाना।
• राइबोसोम के प्रकार (70S) को गलत लिखना।
Exam Tips:
a) प्रोकैरियोट की परिभाषा और मुख्य लक्षणों को बिंदुओं में याद रखें।
b) उदाहरण के रूप में बैक्टीरिया और सायनोबैक्टीरिया का नाम अवश्य दें।
c) 'न्यूक्लियोइड' शब्द का सही उपयोग करें।
Question 9: बहुकोशिकीय जीवों में श्रम विभाजन की व्याख्या कीजिए।
Answer:
बहुकोशिकीय जीवों का शरीर लाखों-کروड़ों कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। इन जीवों में सभी कोशिकाएँ एक समान कार्य नहीं करतीं, बल्कि विभिन्न कोशिकाओं के समूह विशिष्ट कार्य करने के लिए अनुकूलित होते हैं। शरीर में एक निश्चित स्थान पर कोशिकाओं का यह विशेष समूह मिलकर ऊतक (tissues), अंग और अंगतंत्र बनाता है, जिससे एक विशिष्ट कार्य कुशलतापूर्वक संपन्न होता है। उदाहरण के लिए, पेशी कोशिकाएँ संकुचन का कार्य करती हैं, तंत्रिका कोशिकाएँ संदेशों का संचरण करती हैं, और रक्त कोशिकाएँ पदार्थों का परिवहन करती हैं। श्रम विभाजन (division of labor) का अर्थ है कि शरीर के विभिन्न अंग और कोशिकाएँ अपने विशिष्ट कार्यों को आपस में बाँट लेते हैं, जिससे पूरा जीव सुचारू रूप से जीवित रहता है।
मुख्य बिंदु:
• बहुकोशिकीय जीवों में विभिन्न कोशिकाएँ अलग-अलग विशिष्ट कार्य करती हैं।
• कोशिकाओं के समूहीकरण से ऊतक, अंग और अंगतंत्र बनते हैं।
• श्रम विभाजन से जीव की कार्यक्षमता और उत्तरजीविता बढ़ती है।
आम गलतियाँ:
• श्रम विभाजन को केवल मानव शरीर तक सीमित समझना (यह सभी बहुकोशिकीय जीवों में होता है)।
• ऊतकों और अंगों की भूमिका को स्पष्ट न कर पाना।
• एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों के अंतर को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) श्रम विभाजन की परिभाषा सरल शब्दों में उदाहरण सहित दें।
b) कोशिका से ऊतक और अंग बनने के क्रम को समझाएँ।
c) यह प्रश्न अवधारणा पर आधारित है, इसलिए इसे अपने शब्दों में अच्छे से लिखें।
Question 10: कोशिका जीवन की मूल इकाई है, इसे संक्षिप्त में वर्णन करें।
Answer:
कोशिका को सभी सजीवों की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई कहा जाता है, क्योंकि किसी भी जीव का शरीर कोशिकाओं से ही निर्मित होता है और जीवन की सभी जैविक क्रियाएँ (जैसे श्वसन, पाचन, उत्सर्जन, और जनन) इन्हीं के भीतर संपन्न होती हैं। एक स्वतंत्र जीव के रूप में जीवित रहने के लिए जिन बुनियादी आवश्यकताओं की जरूरत होती है, वे सभी एक कोशिका में मौजूद होती हैं। चाहे वह एककोशिकीय अमीबा हो या बहुकोशिकीय मानव, सभी जीवों की मूल क्रियात्मक इकाई कोशिका ही है। इसलिए, रॉबर्ट हूक द्वारा खोजी गई और श्लाइडेन व श्वान द्वारा समर्थित यह इकाई जीवन का आधार मानी जाती है।
मुख्य बिंदु:
• कोशिका सभी जीवों की संरचनात्मक और सूक्ष्मतम कार्यात्मक इकाई है।
• यह जीवन की सभी आवश्यक जैविक प्रक्रियाओं को स्वतंत्र रूप से करने में सक्षम है।
• सभी सजीव कोशिकाओं से ही बने होते हैं (कोशिका सिद्धांत)।
आम गलतियाँ:
• केवल संरचनात्मक इकाई कहकर छोड़ देना, कार्यात्मक इकाई का उल्लेख न करना।
• एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों के संदर्भ को भूल जाना।
• उत्तर को बहुत अधिक लंबा या अप्रासंगिक बनाना।
Exam Tips:
a) 'संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई' इस मुख्य वाक्यांश को उत्तर में जरूर शामिल करें।
b) संक्षिप्त और स्पष्ट उत्तर लिखें जो मूल बात को पूरी तरह समझा दे।
c) कोशिका सिद्धांत के संदर्भ को संक्षिप्त में जोड़ सकते हैं।
Question 11: केंद्रक छिद्र क्या है? इनके कार्य को बताइए।
Answer:
केंद्रक छिद्र (Nuclear pores), केंद्रक आवरण (Nuclear membrane) पर मौजूद सूक्ष्म छिद्र होते हैं जो दोहरी झिल्ली के संलयन (fusion) से बनते हैं। ये छिद्र केंद्रक के भीतर और कोशिका के साइटोप्लाज्म (जीवद्रव्य) के बीच एक मार्ग का कार्य करते हैं। इनका मुख्य कार्य macromolecules जैसे आरएनए (RNA) और प्रोटीन अणुओं को केंद्रक से साइटोप्लाज्म में तथा साइटोप्लाज्म से केंद्रक में द्विदिशात्मक (two-way) रूप से आने-जाने की अनुमति देना है। इस प्रकार, केंद्रक छिद्र केंद्रक और कोशिकाद्रव्य के बीच रासायनिक सूचनाओं और पदार्थों के आदान-प्रदान को नियंत्रित करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• केंद्रक छिद्र केंद्रक आवरण की दोहरी झिल्ली के संलयन से बनते हैं।
• ये आरएनए और प्रोटीनों को केंद्रक और साइटोप्लाज्म के बीच आने-जाने देते हैं।
• यह अणुओं का आवागमन नियंत्रित और चयनात्मक होता है।
आम गलतियाँ:
• केंद्रक छिद्र को केवल खुला स्थान समझ लेना (जबकि यह प्रोटीन कॉम्प्लेक्स से नियंत्रित होता है)।
• आरएनए और प्रोटीन के परिवहन का उल्लेख न करना।
• केंद्रक आवरण की संरचना को गलत बताना।
Exam Tips:
a) केंद्रक छिद्र की संरचना (झिल्ली का संलयन) स्पष्ट करें।
b) इनके माध्यम से किन पदार्थों का परिवहन होता है (RNA और प्रोटीन), इसे अवश्य लिखें।
c) उत्तर को बिंदुवार लिखकर प्रभावकारी बनाएँ।
Question 12: लयनकाय व रसधानी दोनों अंतःझिल्लीमय संरचना हैं फिर भी कार्य की दृष्टि से ये अलग होते हैं। इस पर टिप्पणी लिखें।
Answer:
आकृति का विवरण: यहाँ पादप और जंतु कोशिकाओं में पाए जाने वाले लयनकाय (लाइसोसोम) और रसधानी (वैक्यूल) की अंतःझिल्लीमय संरचना तथा उनके कार्यों को आरेख के माध्यम से दर्शाया गया है।
लयनकाय (Lysosome) और रसधानी (Vacuole) दोनों ही अंतःझिल्लीमय तंत्र (endomembrane system) के अंग हैं और एकल झिल्ली से घिरे होते हैं, परंतु इनके कार्य पूरी तरह भिन्न होते हैं। लयनकाय में जलअपघट्य एंजाइम (हाइड्रॉलेस जैसे लाइपेस, प्रोटीज) भरे होते हैं जो विभिन्न प्रकार के कार्बनिक अणुओं, विदेशी खाद्य कणों और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं या अंगों का पाचन करने में सहायता करते हैं, इसलिए इन्हें 'आत्मघाती थैली' भी कहा जाता है। इसके विपरीत, रसधानी कोशिकाओं में जल, रस, उत्सर्जी पदार्थों और अन्य वज्र पदार्थों का संग्रह करती है। पादप कोशिकाओं में केंद्रीय रसधानी कोशिका को टिटनेस (स्फीति) प्रदान करती है और कुल आयतन का बड़ा हिस्सा घेरती है।
मुख्य बिंदु:
• दोनों एकल झिल्ली से घिरे अंतःझिल्लीमय अंगक हैं किंतु उनके कार्य अलग हैं।
• लयनकाय का मुख्य कार्य अंतःकोशिकीय पाचन और अपशिष्ट निपटान है।
• रसधानी का मुख्य कार्य जल, खनिजों और खाद्य पदार्थों का संग्रह करना है।
आम गलतियाँ:
• दोनों को समान कार्य करने वाला अंगक मान लेना।
• लयनकाय के पाचक एंजाइमों और रसधानी के संग्रह कार्य का अंतर न बताना।
• पादप रसधानी के महत्व को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) दोनों की झिल्ली की समानता (एकल झिल्ली) और कार्यों की भिन्नता को तुलनात्मक रूप से लिखें।
b) लयनकाय के लिए 'आत्मघाती थैली' और रसधानी के लिए 'टोनोप्लास्ट' शब्दों का सही प्रयोग करें।
c) पादप और जंतु कोशिका में इनकी उपस्थिति का अंतर स्पष्ट रखें।
Question 13: रेखांकित चित्र की सहायता से निम्न की संरचना का वर्णन करें:
(i) केंद्रक
(ii) तारककाय
Answer:
आकृति का विवरण: यहाँ केंद्रक (केंद्रक झिल्ली, क्रोमैटिन जालिका, केंद्रिका) तथा तारककाय (सेंट्रिओल और एस्टर किरणों) की सूक्ष्म संरचना को रेखांकित चित्रों द्वारा प्रदर्शित किया गया है।
(i) केंद्रक: केंद्रक एक दोहरी झिल्ली से घिरी हुई गोलाकार संरचना है जो कोशिका की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। इसमें केंद्रक झिल्ली (न्यूक्लियर मेंब्रेन) होती है जिसमें केंद्रक छिद्र होते हैं। इसके भीतर केंद्रकीय आधारी द्रव (न्यूक्लियोप्लाज्म) भरा होता है जिसमें सघन गोलाकार 'न्यूक्लियोलस' (केंद्रिका) और धागे जैसी क्रोमैटिन जालिका होती है, जो डीएनए और हिस्टोन प्रोटीन से बनी होती है।
(ii) तारककाय (Centrosome): तारककाय आमतौर पर दो बेलनाकार संरचनाओं से मिलकर बनता है जिन्हें सेंट्रिओल (तारक केंद्र) कहते हैं, जो एक दूसरे के लम्बवत स्थित होते हैं। प्रत्येक सेंट्रिओल बैलगाड़ी के पहिए जैसी व्यवस्था प्रदर्शित करता है जिसमें सूक्ष्म नलिकाएँ होती हैं। यह कोशिका विभाजन के समय तर्कतंतु (spindle fibers) का निर्माण करता है और पक्ष્माभ व कशाभ के आधारिक काय को बनाता है।
मुख्य बिंदु:
• केंद्रक में केंद्रक झिल्ली, न्यूक्लियोप्लाज्म, केंद्रिका और क्रोमैटिन जालिका मुख्य भाग हैं।
• तारककाय में दो लम्बवत सेंट्रिओल होते हैं जो पहिए जैसी संरचना बनाते हैं।
• केंद्रक आनुवंशिक नियंत्रण करता है और तारककाय कोशिका विभाजन में तर्कतंतु बनाता है।
आम गलतियाँ:
• केंद्रक और तारककाय की संरचनाओं के वर्णनों को मिला देना।
• सेंट्रिओल की 'कार्टव्हील' (पहिए जैसी) संरचना का उल्लेख न करना।
• क्रोमैटिन और क्रोमोसोम के अंतर को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) दोनों भागों (i) और (ii) की अलग-अलग हेडिंग डालकर स्पष्ट वर्णन करें।
b) केंद्रक के चारों घटकों और तारककाय के सेंट्रिओल का नामांकित चित्र जरूर बनाएँ।
c) कोशिका विभाजन में इनकी भूमिका को अंतिम पंक्ति में अवश्य लिखें।
Question 14: गुणसूत्रबिंदु क्या है? कैसे गुणसूत्रबिंदु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र का वर्गीकरण किस रूप में होता है? अपने उत्तर को देने हेतु विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों पर गुणसूत्रबिंदु की स्थिति को दर्शाने हेतु चित्र बनाइए।
Answer:
आकृति का विवरण: यहाँ गुणसूत्रबिंदु (सेंट्रोमियर) की स्थिति के आधार पर गुणसूत्रों के चार प्रमुख प्रकारों (मध्यांकी, उप-मध्यांकी, अग्रांकी और अंत्यांकी) को स्पष्ट रेखाचित्र द्वारा दर्शाया गया है।
गुणसूत्रबिंदु (Centromere) क्रोमोसोम पर वह संकीर्णन क्षेत्र है जहाँ दोनों क्रोमैटिड्स एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। सेंट्रोमियर की स्थिति के आधार पर गुणसूत्रों को चार प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है: (1) मध्यांकी (Metacentric) गुणसूत्र - इसमें सेंट्रोमियर ठीक बीच में होता है जिससे दोनों भुजाएँ बराबर लंबाई की होती हैं। (2) उप-मध्यांकी (Sub-metacentric) गुणसूत्र - इसमें सेंट्रोमियर मध्य क्षेत्र से थोड़ा दूर होता है जिससे एक भुजा थोड़ी लंबी और दूसरी थोड़ी छोटी होती है। (3) अग्रांकी (Acrocentric) गुणसूत्र - इसमें सेंट्रोमियर टर्मिनल सिरे के बहुत करीब होता है जिससे एक भुजा बेहद लंबी और दूसरी बहुत छोटी होती है। (4) अंत्यांकी (Telocentric) गुणसूत्र - इसमें सेंट्रोमियर बिल्कुल गुणसूत्र के शीर्ष पर स्थित होता है।
मुख्य बिंदु:
• गुणसूत्रबिंदु (सेंट्रोमियर) वह बिंदु है जहाँ क्रोमैटिड जुड़े होते हैं।
• सेंट्रोमियर की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र 4 प्रकार के होते हैं।
• चारों प्रकार: मध्यांकी, उप-मध्यांकी, अग्रांकी और अंत्यांकी हैं।
आम गलतियाँ:
• सेंट्रोमियर और सैटेलाइट को एक ही समझ लेना।
• चारों प्रकार के गुणसूत्रों में भुजाओं के छोटे-बड़े होने के क्रम को गलत लिखना।
• चित्र में सेंट्रोमियर की सही स्थिति को न दर्शाना।
Exam Tips:
a) चारों प्रकार के गुणसूत्रों के नाम और उनके चित्र का अभ्यास अच्छी तरह करें।
b) भुजाओं की लंबाई के आधार पर अंतर को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
c) सेंट्रोमियर (गुणसूत्रबिंदु) की परिभाषा से उत्तर की शुरुआत करें।
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FAQs
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