Official NCERT Solutions for Class 11 Biology: Chapter 07 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन
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Chapter-wise Solutions for Biology: Chapter 07 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन
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Question 1: बड़ी रक्त वाहिकाओं की भीतरी दीवारों के निर्माण में निम्नलिखित में से किस प्रकार की कोशिका शामिल होती है?
Answer:
बड़ी रक्त वाहिकाओं की भीतरी दीवारों का निर्माण शल्की उपकला ऊतक (Squamous Epithelium) की कोशिकाओं द्वारा होता है। इन कोशिकाओं को एंडोथीलियम भी कहा जाता है। ये बहुत चपटी और पतली होती हैं, जिससे रक्त वाहिकाओं की सतह चिकनी बनती है और रक्त का प्रवाह बिना किसी घर्षण के आसानी से हो पाता है। साथ ही, यह परत पदार्थों के आदान-प्रदान (विसरण) में भी मदद करती है।
मुख्य बिंदु:
• बड़ी रक्त वाहिकाओं की भीतरी सतह शल्की उपकला ऊतक से ढकी होती है।
• यह कोशिकाएँ चपटी और टाइल्स जैसी जुड़ी होती हैं।
• इनका मुख्य कार्य चिकनी सतह प्रदान करना और विसरण में सहायता करना है।
आम गलतियाँ:
• शल्की उपकला के स्थान पर घनाकार या स्तंभाकार उपकला लिख देना।
• रक्त वाहिकाओं की भीतरी दीवार और बाहरी दीवार के ऊतकों को मिला देना।
• ऊतक के प्रकार को केवल पेशीय ऊतक समझ लेना।
Exam Tips:
a) विभिन्न प्रकार की उपकला ऊतकों के कार्य और उनके स्थान की तालिका याद रखें।
b) 'शल्की उपकला' शब्द को रक्त वाहिकाओं और फेफड़ों की कूपिकाओं के साथ जोड़कर याद करें।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही ऊतक का नाम चुनते समय उसकी संरचना पर ध्यान दें।
Question 2: निम्नलिखित किस श्रेणी के साथ वसा ऊतक का संबंध है?
Answer:
वसा ऊतक (Adipose Tissue) का संबंध संयोजी ऊतक (Connective Tissue) श्रेणी से है। यह मुख्य रूप से त्वचा के नीचे पाया जाता है और इसकी कोशिकाएँ वसा (Fat) को संग्रहित करने का कार्य करती हैं। यह ऊतक शरीर के लिए कुशन या शॉक-एब्जॉर्बर का काम करता है तथा शरीर की गर्मी को बाहर जाने से रोककर तापरोधक (Insulator) के रूप में भी कार्य करता है।
मुख्य बिंदु:
• वसा ऊतक एक प्रकार का ढीला संयोजी ऊतक (Loose Connective Tissue) है।
• यह मुख्य रूप से वसा कोशिकाओं (एडिपोसाइट्स) से बना होता है।
• यह शरीर में ऊर्जा भंडारण और ताप नियमन का कार्य करता है।
आम गलतियाँ:
• वसा ऊतक को उपकला ऊतक या पेशीय ऊतक मान लेना।
• संयोजी ऊतक के अन्य प्रकारों (जैसे रक्त या अस्थि) के साथ भ्रमित होना।
• वसा ऊतक के कार्य को केवल चर्बी जमा करना समझना, तापरोधक भूमिका भूल जाना।
Exam Tips:
a) संयोजी ऊतकों के सभी प्रकार (ढीला, सघन, विशिष्ट) अच्छी तरह याद करें।
b) वसा ऊतक का मुख्य कार्य और स्थान एक लाइन में नोट करें।
c) ऐसे सरल बहुविकल्पीय प्रश्न परीक्षा में अंक पक्के करने के लिए होते हैं, इन्हें न भूलें।
Question 3: निम्नलिखित में से कौन एक संयोजी ऊतक नहीं है?
Answer:
दिए गए विकल्पों में से तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) संयोजी ऊतक नहीं है, बल्कि यह एक स्वतंत्र प्राथमिक ऊतक है जो तंत्रिका तंत्र का निर्माण करता है। संयोजी ऊतकों के अंतर्गत रक्त, अस्थि, उपास्थि, कण्डरा (Tendon), स्नायु (Ligament) और वसा ऊतक आते हैं। तंत्रिका ऊतक का मुख्य कार्य उद्दीपनों को ग्रहण करना और उनकी अनुक्रिया करना है।
मुख्य बिंदु:
• तंत्रिका ऊतक न्यूरॉन और तंत्रिबंध कोशिकाओं से मिलकर बनता है।
• यह संयोजी ऊतक श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह शरीर का नियंत्रण तंत्र है।
• रक्त, अस्थि और उपास्थि संयोजी ऊतक के उदाहरण हैं।
आम गलतियाँ:
• रक्त को संयोजी ऊतक न मानकर द्रव समझ लेना।
• सभी प्रकार के ऊतकों के नाम और उनकी श्रेणियाँ याद न रखना।
• प्रश्न को ठीक से पढ़े बिना गलत विकल्प चुन लेना।
Exam Tips:
a) चारों मुख्य ऊतकों (उपकला, संयोजी, पेशीय, तंत्रिका) के नाम और उनके उदाहरण स्पष्ट रखें।
b) रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है - यह अपवाद हमेशा याद रखें।
c) नकारात्मक प्रश्न (कौन सा नहीं है) को हल करते समय सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
Question 4: केंचुए के शरीर में पर्याणिका एक अलग भाग होता है, यह पाया जाता है:
Answer:
केंचुए (Earthworm) के शरीर में पर्याणिका (Clitellum) एक विशिष्ट ग्रंथिल बैंड होता है, जो इसके शरीर के खंड संख्या 14, 15 और 16 पर पाया जाता है। यह वयस्क केंचुए में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है और इसका मुख्य कार्य जनन के दौरान कोकून (Cocoon) का निर्माण करना होता है। इसके आधार पर केंचुए के शरीर के अग्र, पश्च और पृष्ठीय भागों की पहचान की जाती है।
मुख्य बिंदु:
• पर्याणिका (क्लिटेलम) केंचुए के 14वें, 15वें और 16वें खंड पर स्थित होती है।
• यह एक ग्रंथिल और गहरे रंग की बैंड जैसी संरचना है।
• इसका प्रमुख कार्य निषेचन और कोकून निर्माण में सहायता करना है।
आम गलतियाँ:
• क्लीटेलम के खंडों की संख्या (14-16) में भ्रमित होना।
• इसे शरीर के मध्य या पिछले हिस्से में मान लेना।
• इसके कार्य को सही से न पहचान पाना।
Exam Tips:
a) केंचुए के शरीर की संरचना और खंडों की संख्या याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
b) क्लीटेलम के खंड नंबर (14, 15, 16) को अच्छी तरह रट लें।
c) प्राणी शरीर रचना के अंतर्गत केंचुए, कॉकरोच और मेंढक के विशिष्ट अंगों के स्थान याद रखें।
Question 5: शूक केंचुए को चलने में सहायता करता है परंतु यह सभी खंडों में उपस्थित नहीं रहता, निम्नलिखित में से कौन से शूकधारी खंड है:
Answer:
केंचुए में प्रचलन (Locomotion) के लिए शूक (Setae) पाए जाते हैं। ये शूक पहले खंड, अंतिम खंड और पर्याणिका (Clitellum) वाले खंडों को छोड़कर शरीर के अन्य सभी मध्यवर्ती खंडों में वलय के रूप में धंसे रहते हैं। केंचुआ इन शूक और पेशियों की सहायता से मिट्टी में आगे की गति करता है।
मुख्य बिंदु:
• शूक केंचुए के पहले, अंतिम और क्लीटेलम खंडों को छोड़कर शेष सभी खंडों में होते हैं.
• इनका मुख्य कार्य केंचुए को जमीन पर पकड़ मजबूत करने और चलने में मदद करना है.
• ये एस-आकार की chitinous संरचनाएँ होती हैं।
आम गलतियाँ:
• यह सोच लेना कि शूक केंचुए के हर एक खंड में पाए जाते हैं।
• पहले और अंतिम खंड में भी शूक होना मान लेना।
• प्रचलन अंग के रूप में शूक की सही स्थिति न समझना।
Exam Tips:
a) केंचुए के शरीर में शूक की उपस्थिति और अनुपस्थिति के अपवाद याद रखें।
b) खंडों का वर्गीकरण (पहले, क्लीटेलम, अंतिम) साफ-साफ याद करें।
c) एनसीईआरटी के तथ्यात्मक प्रश्नों को सीधे तौर पर याद करना परीक्षा में उपयोगी होता है।
Question 6: तिलचट्टे के लिए निम्नलिखित में-कौन-सा कथन सही नहीं है?
[A]. प्रत्येक अंडाशय में अंडाशक की संख्या दस होती है।
[B]. डिंभक अवस्था इल्ली कहलाती है।
[C]. मादा में गुद शूक अनुपस्थित रहते हैं।
[D]. यह यूरिया उत्सर्गी होते हैं।
Answer:
दिए गए कथनों में से कथन [C] सही नहीं है, क्योंकि मादा तिलचट्टा (Cockroach) में गुद शूक (Anal Cerci) दोनों नर और मादा में उपस्थित होते हैं, जबकि गुद शूल (Anal Styles) केवल नर में होते हैं। तिलचट्टे के बारे में अन्य बातें जैसे प्रत्येक अंडाशय में 8 ओवेसियोल (अंडाशक) होते हैं (विकल्प A भी गलत हो सकता है यदि संख्या 10 दी गई हो, लेकिन [C] सबसे स्पष्ट रूप से गलत है क्योंकि गुद शूक दोनों में होते हैं), और कॉकरोच यूरिकोटेलिक (uricotelic) यानी यूरिक अम्ल उत्सर्गी होते हैं, यूरिया उत्सर्गी नहीं।
मुख्य बिंदु:
• नर और मादा दोनों तिलचट्टों में गुद शूक (Anal Cerci) पाए जाते हैं।
• तिलचट्टा यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करता है, अतः यह यूरिकोटेलिक है।
• कॉकरोच के जनन तंत्र और उत्सर्जन तंत्र की विशेषताएँ महत्वपूर्ण हैं।
आम गलतियाँ:
• गुद शूक (Anal Cerci) और गुद शूल (Anal Styles) में अंतर न समझ पाना।
• तिलचट्टे को यूरिया उत्सर्गी समझ लेना जबकि वे यूरिकोटेलिक होते हैं।
• विकल्पों को बिना गहराई से पढ़े उत्तर देना।
Exam Tips:
a) कॉकरोच के नर और मादा में अंतर (विशेषकर Anal Styles और Anal Cerci) को स्पष्ट याद रखें।
b) उत्सर्जी पदार्थों के नाम (अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल) जीवों के अनुसार याद करें।
c) ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों का विश्लेषण करना आवश्यक है।
Question 7: केंचुए में खंडों की संख्या बताएं जो एक प्रमुख डार्क बैंड या क्लीटेलम द्वारा कवर किए गए हैं।
Answer:
केंचुए के शरीर में क्लीटेलम (Clitellum) द्वारा कवर किए जाने वाले खंडों की संख्या कुल तीन होती है। ये खंड 14वें, 15वें और 16वें होते हैं। यह एक ग्रंथिल क्षेत्र है जो वयस्क केंचुए में स्पष्ट रूप से एक गहरे रंग के बैंड के रूप में दिखाई देता है और जनन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य बिंदु:
• क्लीटेलम ठीक तीन खंडों (14, 15, 16) को कवर करता है।
• यह केंचुए की शारीरिक पहचान का एक प्रमुख डार्क बैंड है।
• यह कोकून निर्माण में सहायक होता है।
आम गलतियाँ:
• खंडों की संख्या केवल एक या दो मान लेना।
• गलत खंड संख्या (जैसे 13-15) याद रखना।
• क्लीटेलम के कार्य और स्थिति को मिला देना।
Exam Tips:
a) केंचुए के शरीर के खंडों से जुड़े आंकड़े (जैसे कुल खंड, क्लीटेलम के खंड) एक जगह लिखकर याद करें।
b) यह प्रश्न एक अंक के अति लघु उत्तरीय प्रश्न के रूप में अक्सर पूछा जाता है।
c) संख्याएँ लिखते समय पूरी सटीकता बरतें।
Question 8: कॉकरोच में स्क्लेराइट कहाँ पाए जाते हैं?
Answer:
कॉकरोच (तिलचट्टा) के शरीर का बाहरी आवरण कवकित (Chitinous) होता है, जो प्रत्येक खंड पर ढके हुए पट्टों या प्लेटों के रूप में व्यवस्थित रहता है। इन कठोर काइटिनी प्लेटों को स्क्लेराइट (Sclerites) कहते हैं। पीठ की ओर इन्हें पृष्ठीय पट्ट (Tergites) और पेट की ओर इन्हें उदर पट्ट (Sternites) कहा जाता है, जो आपस में पतली और लचीली झिल्ली (Articular membrane) द्वारा जुड़े रहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• स्क्लेराइट कॉकरोच के बाहरी कंकाल (Exoskeleton) की काइटिनी प्लेटें होती हैं।
• ये शरीर को सुरक्षा प्रदान करती हैं और आपस में लचीली झिल्ली से जुड़ी होती हैं।
• इन्हें पृष्ठीय भाग में टर्गिट और ventral भाग में स्टर्निट कहा जाता है।
आम गलतियाँ:
• स्क्लेराइट को केवल आंतरिक अंगों का हिस्सा समझ लेना।
• टर्गिट और स्टर्निट की स्थिति (पृष्ठ और उदर) को आपस में उलटा कर देना।
• काइटिन की बनी प्लेटों की भूमिका को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) कॉकरोच की शारीरिक रचना (Morphology) में बाह्य कंकाल और स्क्लेराइट की परिभाषा याद रखें।
b) Tergit (पृष्ठीय) और Sternite (उदरीय) शब्दों का सही अर्थ समझें।
c) आर्थोपोडा संघ के जीवों के बाह्य कंकाल की विशेषता को हमेशा ध्यान में रखें।
Question 9: मेंढक के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।
आकृति का विवरण: इस आरेख में मेंढक के संपूर्ण पाचन तंत्र को दर्शाया गया है जिसमें मुखगुहा, ग्रसिका, यकृत, पित्ताशय, आमाशय, अग्न्याशय, आंत्र, मलाशय और अवरोधी द्वार स्पष्ट रूप से नामांकित हैं।
Answer:
मेंढक का पाचन तंत्र एक पूर्ण और विकसित तंत्र है जो आहारनाल और पाचक ग्रंथियों से मिलकर बनता है। आहारनाल मुख से शुरू होकर ग्रसिका, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत (मलाशय) और अंत में अवरोधी (Cloaca) के माध्यम से बाहर खुलती है। मेंढक मांसाहारी होता है, इसलिए इसकी आंत की लंबाई शाकाहारी जीवों की तुलना में छोटी होती है। यकृत (Liver) सबसे बड़ी पाचक ग्रंथि है जो पित्त का स्राव करती है, और अग्न्याशय (Pancreas) पाचक रस उत्पन्न करता है जो भोजन को पचाने में मदद करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• मेंढक के पाचन तंत्र में आहारनाल और पाचक ग्रंथियाँ (यकृत, अग्न्याशय) शामिल होती हैं।
• यकृत पित्त रस का निर्माण करता है जो पित्ताशय में संग्रहित होता है।
• भोजन का अंतिम निष्कासन अवरोधी (Cloaca) द्वार से होता है।
आम गलतियाँ:
• चित्र बनाते समय अंगों के सही क्रम (जैसे ग्रसिका के बाद आमाशय, फिर आंत) को गलत दर्शाना।
• यकृत और पित्ताशय का सही नामांकन न करना।
• क्लोएका (अवरोधी) की स्थिति को स्पष्ट न कर पाना।
Exam Tips:
a) मेंढक के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाने का बार-बार अभ्यास करें।
b) यकृत, पित्ताशय और अग्न्याशय की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) वर्णनात्मक प्रश्नों में चित्र बनाने से अंक मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
Question 10: निम्न के कार्य बताइए:
(अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी
(ब) मेलपिगी नलिका
(स) केंचुए की देहभित्ति
Answer:
(अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी: नर मेंढक में यह मूत्र और शुक्राणु दोनों को ले जाने का कार्य करती है, इसलिए इसे मूत्रजनन वाहिनी (Urinogenital duct) कहते हैं। यह वृक्क से मूत्र और वृषण से शुक्राणु को लेकर अवरोधी (Cloaca) में पहुँचाती है।
(ब) मेलपिगी नलिका: यह कॉकरोच (तिलचट्टा) और अन्य कीटों का मुख्य उत्सर्जी अंग है। यह हीमोलिम्फ (रक्त) से नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थों को अवशोषित कर उन्हें यूरिक अम्ल के रूप में आंत में उत्सर्जित करती है।
(स) केंचुए की देहभित्ति: केंचुए की देहभित्ति पेशीय परतों से बनी होती है। यह शरीर को आकार देती है, आंतरिक अंगों की सुरक्षा करती है और केंचुए को मिट्टी में रेंगने, चलने तथा बिल बनाने में अत्यधिक सहायता करती है।
मुख्य बिंदु:
• मेंढक की मूत्रवाहिनी नर में मूत्रजनन वाहिनी के रूप में कार्य करती है।
• मेलपिगी नलिका कीटों में उत्सर्जन का प्रमुख कार्य करती है।
• केंचुए की देहभित्ति पेशीय और क्युटिकुलयुक्त होती है जो प्रचलन में सहायक है।
आम गलतियाँ:
• नर मेंढक की मूत्रवाहिनी को केवल मूत्र ले जाने वाला समझ लेना (शुक्राणु की भूमिका भूल जाना)।
• मेलपिगी नलिका को केंचुए का अंग मान लेना।
• देहभित्ति के कार्यों में पेशियों की भूमिका को न लिखना।
Exam Tips:
a) विभिन्न प्राणियों (केंचुआ, कॉकरोच, मेंढक) के अंगों और उनके कार्यों की एक संक्षिप्त सूची बना लें।
b) प्रत्येक उप-भाग (अ, ब, स) का उत्तर स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
c) उत्सर्जी अंगों (जैसे मेलपिगी नलिका) के नाम और कार्य परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण हैं।
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