NCERT Solutions Class 11 Biology Chapter 10 Cell Cycle and Cell Division (कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन) in Hindi

NCERT Solutions for Class 11 Biology: Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

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Practice Class 11 Biology Solutions: Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

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Question 1: स्तनधारियों की कोशिकाओं की औसत कोशिका चक्र अवधि कितनी होती है?

Answer:

स्तनधारी कोशिकाओं के लिए औसत कोशिका चक्र की अवधि लगभग 24 घंटे होती है। हालांकि, यह अवधि विभिन्न जीवों और कोशिका के प्रकार के आधार पर भिन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए, यीस्ट की कोशिका का चक्र पूरा होने में केवल लगभग 90 मिनट लगते हैं। कोशिका चक्र में मुख्य रूप से दो चरण होते हैं: अंतरावस्था (Interphase) और सूत्री विभाजन (M-Phase)।

मुख्य बिंदु:

• स्तनधारी कोशिकाओं में कोशिका चक्र की कुल अवधि लगभग 24 घंटे होती है।
• चक्र की अवधि विभिन्न कोशिकाओं के प्रकार और जीवों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
• इस 24 घंटे की अवधि का अधिकांश समय (लगभग 95 प्रतिशत) अंतरावस्था में व्यतीत होता है।

आम गलतियाँ:

• सभी जीवों में कोशिका चक्र की अवधि को एक समान 24 घंटे मानना।
• अंतरावस्था और विभाजन प्रावस्था के समय के अनुपात को गलत समझना।
• यीस्ट और स्तनधारी कोशिकाओं की अवधि को मिला देना।

Exam Tips:

• स्तनधारी कोशिका की अवधि (24 घंटे) को याद रखें क्योंकि यह बहुविकल्पीय प्रश्नों में पूछा जा सकता है।
• यह ध्यान रखें कि विभाजन प्रावस्था अंतरावस्था की तुलना में बहुत कम समय लेती है।
• उत्तर लिखते समय समय के साथ-साथ चरणों का भी संक्षिप्त उल्लेख करें।

 

Question 2: जीवद्रव्य विभाजन व केंद्रक विभाजन में क्या अंतर है?

Answer:

केंद्रक विभाजन (Karyokinesis) वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिका के केंद्रक का विभाजन होता है और अनुवांशिक पदार्थ बराबर भागों में बंटता है। इसके विपरीत, जीवद्रव्य विभाजन (Cytokinesis) वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रक विभाजन के पश्चात कोशिका के संपूर्ण जीवद्रव्य (Cytoplasm) का विभाजन होता है, जिससे दो स्वतंत्र संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है। समसूत्री विभाजन या अर्धसूत्री विभाजन के दौरान हमेशा पहले केंद्रक विभाजन होता है और उसके बाद जीवद्रव्य विभाजन होता है। पादप और जंतु कोशिकाओं में जीवद्रव्य विभाजन की विधि भी अलग-अलग होती है।

मुख्य बिंदु:

• केंद्रक विभाजन में आनुवंशिक सामग्री (गुणसूत्र) और केंद्रक का विभाजन होता है।
• जीवद्रव्य विभाजन में कोशिका द्रव्य का विभाजन होकर दो नई कोशिकाएँ बनती हैं।
• केंद्रक विभाजन हमेशा जीवद्रव्य विभाजन से पहले संपन्न होता है।

आम गलतियाँ:

• जीवद्रव्य विभाजन और केंद्रक विभाजन को एक ही प्रक्रिया समझ लेना।
• यह मानना कि दोनों विभाजन एक ही समय पर साथ-साथ शुरू होते हैं।
• पादप और जंतु कोशिकाओं में जीवद्रव्य विभाजन के अंतर को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

• दोनों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए हमेशा दो कॉलम वाली तालिका का उपयोग करें।
• यह क्रम याद रखें: पहले केंद्रक विभाजन (Karyokinesis) फिर जीवद्रव्य विभाजन (Cytokinesis)।
• परिभाषा के साथ-साथ इनके होने का सही समय भी उल्लेखित करें।

 

Question 3: अंतरावस्था में होने वाली घटनाओं का वर्णन कीजिए।

Answer:

अंतरावस्था (Interphase) वह अवधि है जिसमें कोशिका विभाजन के लिए तैयार होती है और डीएनए प्रतिकृति (DNA replication) तथा वृद्धि का अनुभव करती है। इस अवस्था को तीन मुख्य चरणों में बांटा गया है: (i) G₁ चरण (Gap 1): इस दौरान कोशिका उपापचयी रूप से सक्रिय रहती है, बढ़ती है और प्रोटीन तथा आरएनए का संश्लेषण करती है। (ii) S चरण (Synthesis phase): इस चरण के दौरान डीएनए का द्विगुणन होता है, जिससे डीएनए की मात्रा दोगुनी हो जाती है लेकिन गुणसूत्रों की संख्या समान रहती है। (iii) G₂ चरण (Gap 2): इस चरण में कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण जारी रहता है और कोशिका सूत्री विभाजन के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।

मुख्य बिंदु:

• अंतरावस्था कोशिका चक्र की सबसे लंबी अवस्था है, जिसमें कोशिका विभाजन की तैयारी करती है।
• G₁ चरण में कोशिका वृद्धि और आरएनए/प्रोटीन संश्लेषण होता है।
• S चरण में डीएनए का द्विगुणन होता है तथा G₂ चरण में विभाजन के लिए आवश्यक प्रोटीन बनते हैं।

आम गलतियाँ:

• S चरण में गुणसूत्रों की संख्या दोगुनी होना मान लेना (केवल डीएनए की मात्रा दोगुनी होती है)।
• अंतरावस्था को विश्राम अवस्था समझना, जबकि यह सबसे अधिक सक्रिय अवस्था है।
• G₁ और G₂ चरणों के कार्यों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

• अंतरावस्था के तीनों चरणों (G₁, S, G₂) के विशिष्ट कार्यों को अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
• S चरण में डीएनए की मात्रा doubling (दोगुनी) होने के तथ्य को विशेष रूप से रेखांकित करें।
• चक्र का एक नामांकित आरेख बनाकर इन चरणों को दर्शाने का अभ्यास करें।

 

Question 4: कोशिका चक्र का G₀ (प्रशांत प्रावस्था) क्या है?

Answer:

कोशिका चक्र की G₀ प्रावस्था, जिसे प्रशांत प्रावस्था (Quiescent stage) भी कहते हैं, वह अवस्था है जिसमें कुछ कोशिकाएं आगे विभाजित नहीं होती हैं और G₁ चरण से निकलकर एक निष्क्रिय अवस्था में प्रवेश कर जाती हैं। इस अवस्था में कोशिकाएं उपापचयी रूप से सक्रिय बनी रहती हैं, लेकिन वे तब तक विभाजित नहीं होती जब तक कि जीव को उनकी आवश्यकता न हो। यह अवस्था उन ऊतकों में देखी जाती है जहाँ कोशिकाओं को चोट लगने या ऊतक क्षति की भरपाई के लिए पुनः विभाजन की आवश्यकता होती है।

मुख्य बिंदु:

• G₀ अवस्था में कोशिकाएं उपापचयी रूप से सक्रिय रहती हैं पर डीएनए प्रतिकृति या विभाजन नहीं करतीं।
• यह कोशिका चक्र के G₁ चरण से अलग होकर एक शांत अवस्था के रूप में शुरू होती है।
• आवश्यकता पड़ने पर ये कोशिकाएं पुनः चक्र में प्रवेश कर सकती हैं (जैसे चोट या क्षति पर)।

आम गलतियाँ:

• G₀ अवस्था की कोशिकाओं को मृत या निष्क्रिय मान लेना।
• यह सोचना कि G₀ अवस्था में कोशिका कभी भी विभाजित नहीं हो सकती।
• इसे अंतरावस्था के सामान्य चरणों का हिस्सा समझना।

Exam Tips:

• प्रशांत प्रावस्था (G₀) को परिभाषित करते समय "उपापचयी रूप से सक्रिय" शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
• इसका उदाहरण दें कि शरीर में सभी कोशिकाएं निरंतर विभाजित नहीं होतीं।
• यह स्पष्ट करें कि यह अवस्था कब और क्यों उत्पन्न होती है।

 

Question 5: सूत्री विभाजन को सम विभाजन क्यों कहते हैं?

Answer:

सूत्री विभाजन (Mitosis) को सम विभाजन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान जनक कोशिका (Parent cell) में जितने गुणसूत्र होते हैं, संतति कोशिकाओं (Daughter cells) में भी गुणसूत्रों की संख्या उतनी ही समान रहती है। इसमें गुणसूत्रों का द्विगुणन होने के बाद उनका समान रूप से दो संतति कोशिकाओं में वितरण हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, बनने वाली दोनों संतति कोशिकाएं आनुवंशिक रूप से जनक कोशिका के बिल्कुल समान होती हैं।

मुख्य बिंदु:

• सूत्री विभाजन में संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका के समान (द्विगुणित) रहती है।
• गुणसूत्रों की संख्या में कोई कमी या वृद्धि नहीं होती, इसलिए इसे सम विभाजन कहते हैं।
• यह प्रक्रिया शरीर की वृद्धि, विकास और मरम्मत के लिए अत्यंत आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• सूत्री विभाजन को अर्धसूत्री विभाजन (न्यूनकारी विभाजन) समझ लेना।
• यह सोचना कि सम विभाजन में गुणसूत्र आधे हो जाते हैं।
• जनक और संतति कोशिकाओं के आनुवंशिक अंतर को गलत बताना।

Exam Tips:

• 'सम' शब्द का अर्थ स्पष्ट करें कि यह गुणसूत्रों की संख्या की समानता को दर्शाता है।
• इसे 'माइटोसिस' (Mitosis) नाम से भी याद रखें जिसका अर्थ समान विभाजन है।
• उत्तर में जनक और संतति कोशिका की ploidy (जैसे 2n से 2n) का उल्लेख करें।

 

Question 6: कोशिका चक्र की उस अवस्था का नाम बताएं, जिसमें निम्न घटनाएं संपन्न होती हैं:
(i) गुणसूत्र तर्कू मध्यरेखा की तरफ गति करते हैं।
(ii) गुणसूत्रबिंदु का टूटना व अर्धगुणसूत्र का पृथक होना।
(iii) समजात गुणसूत्रों का आपस में युग्मन होना।
(iv) समजात गुणसूत्रों के बीच विनिमय का होना।

Answer:

विभिन्न जैविक घटनाओं से संबंधित कोशिका चक्र की अवस्थाएं निम्नलिखित हैं: (i) गुणसूत्र तर्कू मध्यरेखा की तरफ गति करते हैं - यह घटना मध्यावस्था (Metaphase) में होती है जहाँ गुणसूत्र भूमध्य रेखा पर व्यवस्थित होते हैं। (ii) गुणसूत्रबिंदु का टूटना व अर्धगुणसूत्र का पृथक होना - यह पश्चावस्था (Anaphase) के दौरान होता है। (iii) समजात गुणसूत्रों का आपस में युग्मन होना - यह अर्धसूत्री विभाजन-I की पूर्वावस्था के जायगोटीन (Zygotene) उप-चरण में होता है जिसे सूत्रयुग्मन कहते हैं। (iv) समजात गुणसूत्रों के बीच विनिमय का होना - यह अर्धसूत्री विभाजन-I की पूर्वावस्था के पैकीटीन (Pachytene) उप-चरण में होता है जिसे विनिमय (Crossing over) कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• मध्यावस्था में गुणसूत्र कोशिका की मध्यरेखा पर संरेखित होते हैं।
• पश्चावस्था में सेंट्रोमियर (गुणसूत्रबिंदु) के टूटने से सिस्टर क्रूमाटिड अलग होते हैं।
• युग्मन (जायगोटीन) और विनिमय (पैकीटीन) अर्धसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था-I की विशिष्ट घटनाएं हैं।

आम गलतियाँ:

• मध्यावस्था और पश्चावस्था की घटनाओं को आपस में मिला देना।
• जायगोटीन और पैकीटीन के उप-चरणों के क्रम को भूल जाना।
• सूत्री और अर्धसूत्री विभाजन की अवस्थाओं में भ्रमित होना।

Exam Tips:

• प्रत्येक उप-प्रश्न का उत्तर स्पष्ट रूप से अवस्था का नाम लिखकर दें।
• अर्धसूत्री विभाजन के पाँचों उप-चरणों (Leptotene, Zygotene, Pachytene, Diplotene, Diakinesis) को क्रम से याद रखें।
• घटनाओं और उनकी संबंधित अवस्थाओं की एक छोटी सूची बनाकर अभ्यास करें।

 

Question 7: निम्न के बारे में वर्णन करें:
(i) सूत्रयुग्मन
(ii) युग्ली
(iii) काइऐज़मेटा

Answer:

इन जैविक प्रक्रियाओं का विवरण इस प्रकार है: (i) सूत्रयुग्मन (Synapsis): अर्धसूत्री विभाजन-I की पूर्वावस्था के जायगोटीन चरण के दौरान समजात गुणसूत्र आपस में जोड़े बनाते हैं, इस प्रक्रिया को सूत्रयुग्मन कहते हैं। (ii) युग्ली (Bivalent): सूत्रयुग्मन के दौरान बनने वाले समजात गुणसूत्रों के जोड़े को युग्ली या बाइवैलेन्ट कहते हैं, जो वास्तव में चार क्रोमैटिड्स (चतुष्क) संरचना के रूप में दिखाई देते हैं। (iii) काइऐज़मेटा (Chiasmata): डिप्लोटीन चरण के दौरान समजात गुणसूत्र अलग होने लगते हैं लेकिन वे उस बिंदु पर जुड़े रहते हैं जहाँ विनिमय (Crossing over) हुआ था, एक्स (X) आकार की इस संरचना को काइऐज़मेटा कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• सूत्रयुग्मन अर्धसूत्री विभाजन-I के जायगोटीन चरण में समजात गुणसूत्रों के पास आने की प्रक्रिया है।
• युग्ली समजात गुणसूत्रों का जोड़ा है जो पैकीटीन चरण में अधिक स्पष्ट होता है।
• काइऐज़मेटा डिप्लोटीन चरण में दिखने वाली एक्स-आकार की संरचना है जो विनिमय का स्थान दर्शाती है।

आम गलतियाँ:

• सूत्रयुग्मन और विनिमय को एक ही घटना मान लेना।
• युग्ली (बाइवैलेन्ट) और चतुष्क (टेट्राड) की संख्या में भ्रमित होना।
• काइऐज़मेटा के बनने के सही चरण (डिप्लोटीन) को भूल जाना।

Exam Tips:

• तीनों शब्दावलियां अर्धसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था-I से संबंधित हैं, इन्हें चरणवार याद रखें।
• प्रत्येक शब्द की सटीक परिभाषा और उसका सही प्रावस्था/चरण अवश्य उल्लेख करें।
• चित्र की सहायता से काइऐज़मेटा और युग्ली को समझने का प्रयास करें।

 

Question 8: पादप व प्राणी कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य विभाजन में क्या अंतर है?

Answer:

पादप कोशिका और प्राणी कोशिका दोनों में केंद्रक विभाजन के बाद कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cytokinesis) होता है, लेकिन इनकी विधियां भिन्न होती हैं। प्राणी कोशिका में कोशिकाद्रव्य विभाजन प्लाज्मा झिल्ली में एक खांच (Furrow) बनने से संपन्न होता है जो धीरे-धीरे गहरी होती जाती है और अंत में केंद्र में आपस में मिलकर कोशिका को दो भागों में बांट देती है। इसके विपरीत, पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति दृढ़ होने के कारण खांच नहीं बन सकती; अतः इनमें कोशिका के केंद्र में सेल प्लेट (Cell plate) या कोशिका पट्टिका का निर्माण होता है जो धीरे-धीरे परिधि की ओर बढ़कर पादप कोशिका को दो भागों में विभाजित करती है।

मुख्य बिंदु:

• प्राणी कोशिकाओं में जीवद्रव्य विभाजन खांच (Cleavage furrow) विधि द्वारा होता है।
• पादप कोशिकाओं में कठोर भित्ति के कारण सेल प्लेट (Cell plate) निर्माण द्वारा विभाजन होता है।
• प्राणी कोशिका में विभाजन बाहर से अंदर की ओर, जबकि पादप कोशिका में अंदर से बाहर की ओर होता है।

आम गलतियाँ:

• पादप कोशिकाओं में भी जंतुओं की तरह खांच बनने की बात लिखना।
• सेल प्लेट के निर्माण की प्रक्रिया और उसके स्थान को गलत बताना।
• दोनों प्रकार की कोशिकाओं की भित्ति की प्रकृति को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

• उत्तर को अंतर तालिका (Table format) में लिखें जिससे स्पष्टता बनी रहे।
• 'खांच निर्माण' (Furrow method) और 'सेल प्लेट विधि' (Cell plate method) शब्दों का मुख्य रूप से प्रयोग करें।
• यह अंतर पादप और जंतु शरीर रचना के मूलभूत अंतर से जुड़ा है, इसे समझकर याद रखें।

 

Question 9: अर्धसूत्री विभाजन के बाद बनने वाली चार संतति कोशिकाएँ कहाँ आकार में समान व कहाँ भिन्न आकार की होती हैं?

Answer:

अर्धसूत्री विभाजन के परिणामस्वरूप बनने वाली चार संतति कोशिकाओं का आकार और रूप इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार के युग्मक जनन (Gametogenesis) में बन रही हैं। नर में शुक्रजनन (Spermatogenesis) के दौरान अर्धसूत्री विभाजन के फलस्वरूप बनने वाले चारों शुक्राणु आकार और रूप में बिल्कुल समान होते हैं। इसके विपरीत, मादा में अंडजनन (Oogenesis) या ऊजेनेसिस के दौरान जब अर्धसूत्री विभाजन होता है, तो बनने वाली चार संतति कोशिकाओं में से केवल एक बड़ी कार्यशील अंडाणु (Ovum) बनती है और शेष तीन छोटी ध्रुवीय काय (Polar bodies) होती हैं, जिससे वे आकार में असमान होती हैं।

मुख्य बिंदु:

• शुक्रजनन में बनने वाले चारों शुक्राणु आकार और संरचना में समान होते हैं।
• अंडजनन में एक बड़ा अंडाणु और तीन छोटी ध्रुवीय कोशिकाएं बनती हैं, जिससे वे असमान होती हैं।
• अर्धसूत्री विभाजन आनुवंशिक रूप से चारों कोशिकाओं को भिन्न बनाता है, भले ही आकार समान हो।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि सभी अर्धसूत्री विभाजनों में संतति कोशिकाएं हमेशा समान आकार की होती हैं।
• शुक्रजनन और अंडजनन की प्रक्रियाओं के परिणामों को आपस में मिला देना।
• ध्रुवीय कायों की भूमिका और आकार को भूल जाना।

Exam Tips:

• 'शुक्रजनन' (Spermatogenesis) और 'अंडजनन' (Oogenesis) का संदर्भ देकर उत्तर स्पष्ट करें।
• यह याद रखें कि आनुवंशिक भिन्नता दोनों में होती है, लेकिन आकार का अंतर केवल अंडजनन में दिखता है।
• उदाहरण सहित संक्षिप्त और सटीक उत्तर लिखें।

 

Question 10: सूत्री विभाजन की पश्चावस्था अर्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था-I में क्या अंतर है?

Answer:

सूत्री विभाजन की पश्चावस्था (Anaphase) और अर्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था-I (Anaphase-I) में मुख्य अंतर गुणसूत्रों के व्यवहार का होता है। सूत्री विभाजन की पश्चावस्था के दौरान प्रत्येक गुणसूत्र का गुणसूत्रबिंदु (Centromere) टूटता है और दोनों सिस्टर क्रूमाटिड (बहन क्रोमैटिड) अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं। इसके विपरीत, अर्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था-I के दौरान सेंट्रोमियर नहीं टूटता है, बल्कि पूरे समजात गुणसूत्र (जिनमें दो-दो क्रोमैटिड जुड़े होते हैं) एक-दूसरे से पृथक होकर विपरीत ध्रुवों की तरफ जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• सूत्री विभाजन की पश्चावस्था में सिस्टर क्रोमैटिड अलग होते हैं और गुणसूत्रबिंदु विभाजित होता है।
• अर्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था-I में समजात गुणसूत्र अलग होते हैं, सेंट्रोमियर नहीं टूटता।
• सूत्री पश्चावस्था में गुणसूत्रों की संख्या समान रहती है, जबकि पश्चावस्था-I में गुणसूत्र आधे हो जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• दोनों अवस्थाओं में सेंट्रोमियर के टूटने की प्रक्रिया को एक समान मान लेना।
• यह भ्रमित होना कि कौन सी अवस्था में समजात गुणसूत्र अलग होते हैं और किसमें क्रोमैटिड।
• ध्रुवों की तरफ जाने वाली आनुवंशिक सामग्री की स्थिति को गलत बताना।

Exam Tips:

• दोनों अवस्थाओं के अंतर को बिंदुवार या तालिका के रूप में प्रस्तुत करें।
• 'सेंट्रोमियर का विभाजन' शब्द का प्रयोग मुख्य अंतर के रूप में करें।
• यह प्रश्न अर्धसूत्री और सूत्री विभाजन की तुलना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 11: सूत्री व अर्धसूत्री विभाजन में प्रमुख अंतरों को सूचीबद्ध करें?

Answer:

सूत्री और अर्धसूत्री विभाजन में कई प्रमुख अंतर होते हैं। सूत्री विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है जबकि अर्धसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं में होता है। सूत्री विभाजन के परिणामस्वरूप एक जनक कोशिका से दो संतति कोशिकाएं बनती हैं, जो आनुवंशिक रूप से समान और द्विगुणित होती हैं; जबकि अर्धसूत्री विभाजन में दो क्रमिक विभाजनों से चार संतति कोशिकाएं बनती हैं जो अगुणित और आनुवंशिक रूप से भिन्न होती हैं। सूत्री विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या अपरिवर्तित रहती है (सम विभाजन), जबकि अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है (न्यूनकारी विभाजन)। इसके अलावा, अर्धसूत्री विभाजन में विनिमय (Crossing over) और आनुवंशिक पुनर्संयोजन होता है जो सूत्री विभाजन में नहीं पाया जाता।

मुख्य बिंदु:

• सूत्री विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है और 2 संतति कोशिकाएं (2n) बनाता है।
• अर्धसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं में होता है और 4 अगुणित (n) संतति कोशिकाएं बनाता है।
• अर्धसूत्री विभाजन में क्रॉसिंग ओवर से विभिन्नताएं आती हैं, जो सूत्री विभाजन में नहीं होतीं।

आम गलतियाँ:

• दोनों प्रकार के विभाजनों में बनने वाली संतति कोशिकाओं की संख्या और उनकी ploidy को गलत लिखना।
• विनिमय (Crossing over) की घटना को सूत्री विभाजन का हिस्सा बता देना।
• विभाजन के उद्देश्य (वृद्धि बनाम युग्मक निर्माण) को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

• कम से कम 4 से 5 स्पष्ट बिंदुओं या तालिका के रूप में अंतर लिखें।
• प्रमुख आधार जैसे- स्थान, संतति की संख्या, गुणसूत्र संख्या, और आनुवंशिक भिन्नता का उल्लेख करें।
• यह परीक्षा का एक दीर्घ उत्तरीय और बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 12: अर्धसूत्री विभाजन का क्या महत्व है?

Answer:

अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) जीवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है। इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों की प्रत्येक पीढ़ी में गुणसूत्रों की निश्चित संख्या (निसंदेह आधी होकर) को बनाए रखता है, जिससे निषेचन के बाद गुणसूत्रों की मूल द्विगुणित संख्या पुन: स्थापित हो जाती है। इसके अलावा, अर्धसूत्री विभाजन के दौरान होने वाले जीन विनिमय (Crossing over) के कारण संतति कोशिकाओं में आनुवंशिक विभिन्नताएं (Variations) उत्पन्न होती हैं, जो जैविक विकास (Evolution) और अनुकूलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

मुख्य बिंदु:

• यह प्रत्येक प्रजाति में पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्रों की संख्या को स्थिर बनाए रखता है।
• जीन विनिमय के माध्यम से जीवों में नई विभिन्नताएं उत्पन्न करता है जो विकास का आधार हैं।
• युग्मकों के निर्माण के लिए अर्धसूत्री विभाजन का होना अनिवार्य है।

आम गलतियाँ:

• अर्धसूत्री विभाजन के महत्व को केवल कोशिका विभाजन तक सीमित समझना, विभिन्नताओं को भूल जाना।
• गुणसूत्र संख्या स्थिर रखने की प्रक्रिया को गलत समझाना।
• विकास में इसके योगदान का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

• महत्व को दो मुख्य शीर्षकों में बांटकर लिखें: (1) गुणसूत्र संख्या की स्थिरता, (2) विभिन्नताएं व विकास।
• 'जीन विनिमय' और 'पुनर्संयोजन' शब्दों का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
• यह प्रश्न अक्सर कारणों के साथ पूछा जाता है, अतः वैज्ञानिक भाषा का प्रयोग करें।

 

Question 13: अपने शिक्षक की सहायता से निम्न के बारे में चर्चा करें:
(i) अगुणित कीटों व निम्न श्रेणी के पादपों में कोशिका विभाजन कहाँ होता है?
(ii) उच्च श्रेणी पादपों की कुछ अगुणित कोशिकाओं में कोशिका विभाजन कहीं नहीं होता है?

Answer:

इस विषय पर चर्चा के बिंदु निम्नलिखित हैं: (i) अगुणित कीटों (जैसे नर मधुमक्खी) और निम्न श्रेणी के पादपों (जैसे कुछ शैवाल) में, जीव का मुख्य शरीर अगुणित (n) होता है। इनमें युग्मक का निर्माण समसूत्री विभाजन (Mitosis) द्वारा होता है क्योंकि उनके पास पहले से ही अगुणित गुणसूत्र होते हैं। हालांकि, जब निषेचन होता है तो द्विगुणित जाइगोट बनता है, जिसमें तुरंत अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) होता है ताकि अगुणित अवस्था पुनः आ सके। (ii) उच्च श्रेणी के पादपों में कुछ कोशिकाएं (जैसे परिपक्व वाहिकाएं, चालनी नलिकाएं या कुछ विभेदित स्थायी ऊतक कोशिकाएं) पूरी तरह से परिपक्व होने के बाद अपनी विभाजित होने की क्षमता खो देती हैं और G₀ अवस्था में स्थायी रूप से चली जाती हैं, जिससे उनमें आगे कोई कोशिका विभाजन नहीं होता है।

मुख्य बिंदु:

• अगुणित जीवों में युग्मक समसूत्री विभाजन से बनते हैं और जाइगोट में अर्धसूत्री विभाजन होता है।
• उच्च पादपों में विभेदित और परिपक्व कोशिकाएं (जैसे जाइलम वाहिकाएं) विभाजन क्षमता खो देती हैं।
• कोशिका चक्र का रुकना जीवों की विशेष शारीरिक संरचना और कार्य पर निर्भर करता है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि सभी जीवों में युग्मक हमेशा अर्धसूत्री विभाजन से ही बनते हैं।
• उच्च पादपों की सभी कोशिकाओं को लगातार विभाजित होने वाली मान लेना।
• अगुणित और द्विगुणित जीवन चक्र के अंतर को न समझ पाना।

Exam Tips:

• दोनों उप-प्रश्नों के उत्तर अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदुओं में दें।
• जीवन चक्र के प्रकार (जैसे हेप्लॉन्टिक) का हल्का संदर्भ दें।
• अवधारणा को स्पष्ट करने के लिए पादप ऊतकों का उदाहरण दें।

 

Question 14: क्या S प्रावस्था में बिना डीएनए प्रतिकृति के सूत्री विभाजन हो सकता है?

Answer:

नहीं, S प्रावस्था में डीएनए प्रतिकृति (DNA replication) के बिना सूत्री विभाजन संभव नहीं हो सकता है। S चरण कोशिका चक्र का वह महत्वपूर्ण चरण है जहाँ डीएनए का द्विगुणन होता है। यदि डीएनए का संश्लेषण नहीं होगा, तो संतति कोशिकाओं में आनुवंशिक सामग्री (डीएनए) की मात्रा आधी रह जाएगी और जनक कोशिका के समान आनुवंशिक रूप से पूर्ण संतति का निर्माण नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, कोशिका चक्र की अन्य घटनाएं भी डीएनए प्रतिकृति की सफलता पर निर्भर करती हैं।

मुख्य बिंदु:

• S प्रावस्था में डीएनए का द्विगुणन अनिवार्य रूप से होता है।
• बिना डीएनए प्रतिकृति के सूत्री विभाजन होने पर संतति कोशिकाओं में डीएनए अपर्याप्त होगा।
• यह कोशिका चक्र की सबसे मुख्य घटनाओं में से एक है जिसमें कोई समझौता नहीं हो सकता।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि बिना डीएनए डुप्लीकेशन के भी कोशिकाएं सीधे विभाजित हो सकती हैं।
• S चरण के महत्व को केवल सामान्य वृद्धि मानना।
• आनुवंशिक सामग्री की समानता के नियम की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

• उत्तर की शुरुआत स्पष्ट 'नहीं' शब्द से करें।
• कारण बताएं कि डीएनए का द्विगुणन क्यों आवश्यक है (संतति को समान आनुवंशिक सूचना देने के लिए)।
• यह तार्किक प्रश्न है, इसलिए वैज्ञानिक तर्क का प्रयोग करें।

 

Question 15: क्या बिना कोशिका विभाजन के डीएनए प्रतिकृति हो सकती है?

Answer:

हाँ, बिना कोशिका विभाजन के डीएनए प्रतिकृति (DNA replication) हो सकती है। यदि कोशिका विभाजन के बिना लगातार डीएनए की प्रतिकृति होती रहे, तो कोशिका के अंदर डीएनए की मात्रा अत्यधिक बढ़ती जाती है, जिससे कोशिका का आकार भी बढ़ जाता है। इस प्रकार की स्थिति का एक सामान्य उदाहरण ड्रोसोफिला (Drosophila) की लार ग्रंथियों में देखा जाता है, जहाँ पॉलीटेन क्रोमोसोम (Polytene chromosomes) पाए जाते हैं। ऐसी स्थिति बार-बार डीएनए प्रतिकृति और केंद्रक विभाजन या कोशिका विभाजन न होने के कारण उत्पन्न होती है, जिसे एंडोमाइटोसिस (Endomitosis) कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• डीएनए प्रतिकृति और कोशिका विभाजन दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं जो हमेशा साथ हों यह आवश्यक नहीं।
• लगातार डीएनए प्रतिकृति से कोशिका में डीएनए की मात्रा बहुत बढ़ जाती है (जैसे पॉलीटेन क्रोमोसोम)।
• इसका प्राकृतिक उदाहरण ड्रोसोफिला की लार ग्रंथियों में मिलता है।

आम गलतियाँ:

• यह मानना कि डीएनए प्रतिकृति के तुरंत बाद कोशिका विभाजन होना अनिवार्य है।
• पॉलीटेन क्रोमोसोम जैसी असामान्य स्थितियों के बारे में न जानना।
• कोशिका के आकार और डीएनए मात्रा के संबंध को गलत समझना।

Exam Tips:

• उत्तर की शुरुआत स्पष्ट 'हाँ' से करें और ड्रोसोफिला का उदाहरण अवश्य दें।
• पॉलीटेन क्रोमोसोम शब्द का उल्लेख करके अपने उत्तर को प्रभावी बनाएं।
• यह एक उच्च-स्तरीय वैचारिक प्रश्न है, इसे सटीकता से लिखें।

 

Question 16: कोशिका विभाजन की प्रत्येक अवस्थाओं के दौरान होने वाली घटनाओं का विश्लेषण करें और ध्यान दें कि निम्न प्राचलों में कैसे परिवर्तन होता है?
(i) प्रत्येक कोशिका की गुणसूत्र संख्या (N)
(ii) प्रत्येक कोशिका में डीएनए की मात्रा (C)

Answer:

कोशिका विभाजन के दौरान गुणसूत्र संख्या (N) और डीएनए की मात्रा (C) में विशेष परिवर्तन होते हैं। (i) गुणसूत्र संख्या (N): समसूत्री विभाजन में गुणसूत्र संख्या हमेशा समान रहती है (जैसे 2n से शुरू होकर संतति में भी 2n रहती है)। अर्धसूत्री विभाजन में, पूर्वावस्था-I और मध्यावस्था-I में गुणसूत्र संख्या 2n ही रहती है, लेकिन पश्चावस्था-I के अंत में और अर्धसूत्री विभाजन-II के बाद गुणसूत्र संख्या घटकर आधी (अगुणित, N) हो जाती है। (ii) डीएनए की मात्रा (C): अंतरावस्था के S चरण में डीएनए की मात्रा दोगुनी हो जाती है (जैसे 2C से बढ़कर 4C हो जाती है)। समसूत्री विभाजन के अंत में यह वापस 2C हो जाती है। अर्धसूत्री विभाजन में, S चरण में 4C होने के बाद, अर्धसूत्री विभाजन-I और II के पूर्ण होने पर संतति कोशिकाओं में डीएनए की मात्रा घटकर वापस मूल मात्रा (C) रह जाती है।

मुख्य बिंदु:

• S चरण में डीएनए की मात्रा दोगुनी (2C से 4C) हो जाती है, लेकिन गुणसूत्र संख्या (N) वही रहती है।
• समसूत्री विभाजन में गुणसूत्र और डीएनए दोनों अंततः अपनी मूल मात्रा में आ जाते हैं।
• अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्र संख्या आधी (N) और डीएनए मात्रा भी संतति में मूल (C) हो जाती है।

आम गलतियाँ:

• S चरण में डीएनए के साथ-साथ गुणसूत्र संख्या भी दोगुनी मान लेना (गुणसूत्र संख्या समान रहती है)।
• अर्धसूत्री विभाजन के विभिन्न चरणों में N और C के मान में आए बदलावों को मिला देना।
• C और N का सही अर्थ (मात्रा बनाम संख्या) न समझ पाना।

Exam Tips:

• उत्तर को स्पष्ट रूप से (i) गुणसूत्र संख्या (N) और (ii) डीएनए की मात्रा (C) की हेडिंग के तहत लिखें।
• चक्र के विभिन्न चरणों (G₁, S, G₂, M) में 2N/4N और 2C/4C के मानों का चार्ट दिमाग में रखें।
• यह इस अध्याय का सबसे विश्लेषणात्मक प्रश्न है, इसे बहुत सावधानी से हल करें।

 

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