CBSE Class 12 Hindi Elective Reading Skills Assignment

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अपठित बोध

गद्यांश (10 अंक), काव्यांश (5 अंक)

निर्देश:
1. दिए गए गद्यांश को पढ़कर मूल भाव समझने का प्रयास करें।
2. मूलभाव समझने के उपरान्त छात्र संभावित उत्तरों को रेखांकित करें।
3. सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए गद्यांश/पद्यांश पर आधारित हो।
4. छात्र प्रश्नों के उत्तर सामान्य, सरल भाषा में लिखें।
5. उत्तर का अनावश्यक विस्तार न करें।
6. काव्यांश के प्रश्नों का उत्तर कविता की पंक्तियों में न देकर छात्र सामान्य सरल भाषा में लिखें।
7. गद्यांश का शीर्षक संक्षिप्त एवं सार्थक हो।

 

अभ्यास कार्य

(क)

Question 1. गद्यांश में 'मैं' किस के लिए प्रयुक्त हुआ है? और उसकी तुलना अहिल्या से क्यों की गई है?
Answer: गद्यांश में 'मैं' शब्द सड़क के लिए प्रयुक्त हुआ है। उसकी तुलना अहिल्या से इसलिए की गई है क्योंकि जिस प्रकार पौराणिक कथा में अहिल्या मुनि के शाप के कारण पाषाण (पत्थर) बन गई थी और युगों तक एक ही अवस्था में स्थिर रही थी, उसी प्रकार सड़क भी शाप के समान अपनी जड़-निद्रा में पर्वतों, पेड़ों और दूर-देशान्तरों के बीच अचल और स्थिर पड़ी हुई है।
In simple words: गद्यांश में 'मैं' सड़क है, जिसकी तुलना अहिल्या से उसकी स्थिरता और पाषाणवत अवस्था के कारण की गई है।

Exam Tip: उत्तर लिखते समय रूपक अलंकार और पौराणिक संदर्भ (अहिल्या का शाप) का संक्षिप्त उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 2. चरणों के स्पर्श से सड़क क्या-क्या जान पाती है?
Answer: चरणों के स्पर्श से सड़क लोगों के हृदयों को पढ़ लेती है और यह जान लेती है कि कौन घर जा रहा है, कौन काम पर जा रहा है, कौन विश्राम के लिए जा रहा है, कौन उत्सव में जा रहा है और कौन श्मशान की ओर जा रहा है। इसके अतिरिक्त वह सुखी गृहस्थी वाले मनुष्यों के सुख और आश्रयहीन लोगों की पीड़ा को भी महसूस कर लेती है।
In simple words: सड़क पैरों के स्पर्श मात्र से राहगीर की मनोदशा, उसके गंतव्य (घर, काम, उत्सव या श्मशान) और उसके जीवन के सुख-दुख को पहचान लेती है।

Exam Tip: विभिन्न प्रकार के गंतव्यों (घर, काम, उत्सव, श्मशान) का उल्लेख उत्तर को सटीक बनाता है।

 

Question 3. सड़क ने अपने स्वरूप के विषय में क्या कहा है?
Answer: सड़क ने अपने स्वरूप के विषय में कहा है कि वह अहिल्या की तरह शाप के कारण पाषाण बनी हुई है जो पर्वतों, पेड़ों की छाया और विस्तृत प्रांतों के ऊपर से गुजरती हुई देश-देशान्तरों को वेष्टित किए हुए है। वह हमेशा से स्थिर, अचल और एक ही करवट से सोने वाली है जिसे एक पल का भी विश्राम नहीं मिलता।
In simple words: सड़क ने खुद को अचल, स्थिर और बिना विश्राम के निरंतर पड़ी रहने वाली एक मार्गदर्शिका के रूप में चित्रित किया है।

Exam Tip: सड़क की विवशता और उसकी निरंतरता को दर्शाने वाले विशेषणों (स्थिर, अचल, विश्रामहीन) को उत्तर में शामिल करें।

 

Question 4. सड़क दुनिया की कोई भी बात पूरी क्यों नहीं सुन पाती?
Answer: सड़क दुनिया की कोई भी बात पूरी इसलिए नहीं सुन पाती क्योंकि उसके पास से गुजरने वाले लाखों-करोड़ों लोगों की अनगिनत बातें, हँसी और बिखरे हुए गाने उसकी धूल के साथ मिलकर उड़ जाते हैं। लोगों के आवागमन की गति इतनी तीव्र होती है कि वह केवल उनके संवादों के कुछ अंश ही सुन पाती है, पूरी बात उसके कानों तक नहीं पहुँच पाती।
In simple words: राहगीरों के निरंतर आते-जाते रहने और उनकी बातें बीच में ही छूट जाने के कारण सड़क पूरी बात नहीं सुन पाती।

Exam Tip: यात्रियों की आवाजाही और अधूरे संवादों के प्रभाव को मुख्य बिंदु बनाएं।

 

Question 5. सड़क ने दुःस्वप्न किसे कहा है और क्यों?
Answer: सड़क ने अपनी इस जड़-निद्रा और स्थिरता के दौरान दिन-रात अपने ऊपर पड़ने वाले हजारों-लाखों चरणों के शब्दों और आहटों को दुःस्वप्न कहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये आहटें और चरण-चिह्न उसके शांत जीवन में एक डरावने और अंतहीन सपने की तरह लगातार घूमते रहते हैं, जिनसे उसे कोई मुक्ति नहीं मिलती।
In simple words: सड़क पर दिन-रात पड़ने वाले अनगिनत पैरों के शोर और उनकी आहटों को उसने दुःस्वप्न कहा है क्योंकि वे उसे चैन से नहीं रहने देते।

Exam Tip: 'जड़-निद्रा' और 'चरणों की आहट' के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 6. 'असीम' तथा 'पुष्पिट' शब्दों में से क्रमशः उपसर्ग-प्रत्यय अलग करें।
Answer: असीम - उपसर्ग: 'अ' (मूल शब्द: सीम)
पुष्पिट - प्रत्यय: 'इत' (मूल शब्द: पुष्प)
In simple words: 'असीम' में 'अ' उपसर्ग और 'पुष्पिट' में 'इत' प्रत्यय है।

Exam Tip: उपसर्ग शब्द के आगे और प्रत्यय शब्द के पीछे जुड़ता है, इसे ध्यान में रखें।

 

Question 7. गद्यांश में आए ऐसे दो शब्द लिखिए जिनका अर्थ क्रमशः 'पत्थर' और 'सहारा' है?
Answer: पत्थर - पाषाण
सहारा - आश्रय
In simple words: 'पत्थर' का पर्यायवाची 'पाषाण' और 'सहारा' का पर्यायवाची 'आश्रय' गद्यांश में प्रयुक्त हुआ है।

Exam Tip: गद्यांश से सटीक तत्सम या तद्भव शब्द ही चुनें जो पूछे गए अर्थ से मेल खाते हों।

 

Question 8. सड़क के लिए प्रयुक्त कोई दो विशेषण लिखिए।
Answer: 1. स्थिर
2. अचल (अन्य: पाषाण, विश्रामहीन)
In simple words: सड़क की विशेषता बताने वाले दो शब्द 'स्थिर' और 'अचल' हैं।

Exam Tip: गद्यांश में सड़क की स्थिति दर्शाने वाले शब्दों को विशेषण के रूप में लिखें।

 

Question 9. सड़क यात्री से क्या अनुरोध करती है?
Answer: सड़क यात्री से अनुरोध करती है कि वह थोड़ा ठहरे और उसके अधूरे गाने को पूरा कर जाए तथा उसकी अधूरी बात पूरी तरह सुन ले ताकि उसकी वर्षों की एकाुंतता और व्यथा कुछ कम हो सके।
In simple words: सड़क यात्री से रुककर उसके अधूरे गाने को पूरा करने की विनती करती है।

Exam Tip: गद्यांश की अंतिम पंक्तियों में निहित आग्रह को स्पष्ट करें।

 

Question 10. गद्यांश का उचित शीर्षक दें।
Answer: 'मैं सड़क हूँ' अथवा 'सड़क की आत्मकथा'।
In simple words: इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'मैं सड़क हूँ' है क्योंकि इसमें सड़क अपनी आत्मकथा बयान कर रही है।

Exam Tip: शीर्षक हमेशा संक्षिप्त, आकर्षक और गद्यांश के केंद्रीय भाव के अनुकूल होना चाहिए।

 

(ख)

Question 1. भाषा का सम्बन्ध किससे होता है और कैसे?
Answer: भाषा का संबंध हमारी भावनाओं और विचारों से होता है, क्योंकि भावनाएँ और विचार ही हमारे व्यक्तित्व के मुख्य आधार होते हैं। प्रत्येक भाषा अपने देश, काल और धर्म से परिचित होकर विकसित होती है तथा उस पर वहाँ के महापुरुषों और विचारकों का गहरा प्रभाव पड़ता है।
In simple words: भाषा का गहरा संबंध भावनाओं और विचारों से होता है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।

Exam Tip: भाषा, भावना और व्यक्तित्व के त्रिविध संबंध को उत्तर में रेखांकित करें।

 

Question 2. व्यक्तित्व का समुचित विकास किस प्रकार होता है?
Answer: व्यक्ति के व्यक्तित्व का समुचित विकास और उसकी शक्तियों को उचित गति उसकी अपनी मातृभाषा के पठन-पाठन से मिल सकती है। मातृभाषा में जितनी सहज गति और सुगमता संभव है तथा जितनी कम शक्ति और समय की आवश्यकता होती है, उतनी किसी विदेशी भाषा में नहीं।
In simple words: मातृभाषा के अध्ययन से ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का सही और पूर्ण विकास होता है।

Exam Tip: मातृभाषा के महत्व और ऊर्जा की बचत के बिंदु को प्रमुखता से लिखें।

 

Question 3. राष्ट्र की उन्नति किसमें निहित है?
Answer: राष्ट्र की उन्नति उसकी राष्ट्रभाषा और स्वदेशी संस्कृति के संवर्धन में निहित है। लेखक के अनुसार राष्ट्रभाषा ही देश की प्रगति की द्योतक होती है, क्योंकि इसके बिना देश का सर्वांगीण और मौलिक विकास संभव नहीं है।
In simple words: देश और राष्ट्र की उन्नति अपनी भाषा और संस्कृति के विकास में छिपी होती है।

Exam Tip: राष्ट्रभाषा और उन्नति के अन्योन्यासंबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 4. कवि के अनुसार सरोजिनी नायडू सर्वश्रेष्ठ कवयित्री क्यों नहीं बन पाहीं?
Answer: कवि/लेखक के अनुसार यदि श्रीमती सरोजिनी नायडू ने अपनी मातृभाषा में काव्य रचना की होती, तो उन्हें निस्संदेह सर्वश्रेष्ठ कवयित्री होने का गौरव प्राप्त होता, क्योंकि अंग्रेजी माध्यम में अपनी प्रतिभा का उपयोग करने के कारण वे अपनी मौलिक सर्वोच्चता उस रूप में स्थापित नहीं कर पाईं।
In simple words: मातृभाषा के स्थान पर अंग्रेजी में रचना करने के कारण सरोजिनी नायडू सर्वोच्च कवयित्री का वह मुकाम नहीं पा सकीं जिसकी वे हकदार थीं।

Exam Tip: सरोजिनी नायडू के उदाहरण के माध्यम से मातृभाषा की श्रेष्ठता सिद्ध करें।

 

Question 5. माइकल मधूसूदन का दृष्टांत क्या सिखाता है?
Answer: माइकल मधूसूदन दत्त का दृष्टांत यह सिखाता है कि विदेशी भाषा (अंग्रेजी) में की गई भारी मेहनत के बावजूद द्वितीय श्रेणी का लेखक बनकर रह जाने से बेहतर है कि अपनी मातृभाषा में रचना की जाए। जब उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ तब उन्होंने अपनी भाषा में लिखने का निर्णय किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मातृभाषा ही असली सृजन का आधार है।
In simple words: यह दृष्टांत सिखाता है कि पराई भाषा में ऊर्जा खपाने के बजाय अपनी मातृभाषा में काम करने से ही वास्तविक चमत्कार और सफलता मिलती है।

Exam Tip: माइकल मधूसूदन दत्त के जीवन के इस सत्य को उदाहरण सहित समझाइए।

 

Question 6. लेखक ने ज्ञान-विज्ञान के लिए सर्वश्रेष्ठ भाषा किसे माना है?
Answer: लेखक ने ज्ञान-विज्ञान और पठन-पाठन के लिए व्यक्ति की अपनी मातृभाषा को ही सर्वश्रेष्ठ भाषा माना है, क्योंकि इसमें अभिव्यक्ति की सहजता और सुगमता सबसे अधिक होती है।
In simple words: ज्ञान और विज्ञान के समुचित प्रसार के लिए मातृभाषा ही सबसे उत्तम माध्यम है।

Exam Tip: मातृभाषा की सहजता को ज्ञान-विज्ञान के संदर्भ में जोड़कर लिखें।

 

Question 7. 'कीर्ति' और उन्नति के विलोम शब्द लिखिए।
Answer: कीर्ति - अपकीर्ति (या कलंक)
उन्नति - अवनति (या पतन)
In simple words: 'कीर्ति' का विलोम 'अपकीर्ति' और 'उन्नति' का विलोम 'अवनति' होता है।

 

Question 8. 'राष्ट्रीय' शब्द में से प्रत्यय अलग कर उससे दो नवीन शब्द बनाइए।
Answer: 'राष्ट्रीय' शब्द में 'ईय' (या 'इय') प्रत्यय है (मूल शब्द: राष्ट्र)।
नवीन शब्द: 1. भारतीय 2. पदीय (या स्थानीय)
In simple words: 'राष्ट्रीय' से प्रत्यय अलग करने पर मूल शब्द 'राष्ट्र' और प्रत्यय 'ईय' बनता है। इसी प्रत्यय से बने अन्य शब्द 'भारतीय' और 'जातीय' हैं।

 

Question 9. गद्यांश के लिए उचित शीर्षक लिखिए।
Answer: 'मातृभाषा और व्यक्तित्व विकास' अथवा 'मातृभाषा का महत्व'।
In simple words: इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'मातृभाषा का महत्व' है।

 

(ग)

Question 1. सत्संगति कुमार्गों को कैसे सुधारती है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Answer: सत्संगति कुमार्गों (बुरे रास्तों) पर चलने वाले व्यक्ति के कालुष या बुराई को स्वर्णमयी आभा में परिवर्तित कर देती है। जिस प्रकार पारस के स्पर्श मात्र से कठोर और काली लोहे जैसी धातु कोमलता और कमनीयता में बदल जाती है, उसी प्रकार अच्छी संगति से विचारों को नई दिशा मिलती है और व्यक्ति अच्छे कार्यों की ओर प्रेरित होता है।
In simple words: पारस पत्थर के उदाहरण की तरह सत्संगति बुरे इंसान के स्वभाव को भी स्वर्ण की तरह उत्तम बना देती है।

Exam Tip: पारस और लोहे का उदाहरण देकर उत्तर को प्रभावशाली बनाएं।

 

Question 2. चरित्र के बारे में विदुर के क्या विचार हैं?
Answer: विदुरजी की यह उक्ति सत्य है कि सुचर्त्र (उत्तम चरित्र) भले ही हमें वंश-परंपरा से प्राप्त हो सकते हैं, परंतु वास्तविक चरित्र-निर्माण व्यक्ति के अपने पुरुषार्थ और बलवूते पर निर्भर करता है। आनुवांशिक परंपरा या परिवेश केवल प्रेरणा दे सकते हैं, चरित्र को उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं किया जा सकता।
In simple words: विदुर के अनुसार चरित्र व्यक्ति के अपने कर्मों और पुरुष से बनता है, यह विरासत में नहीं मिलता।

Exam Tip: विदुर की उक्ति और 'स्वयं के बल' वाले तर्क को स्पष्ट करें।

 

Question 3. व्यक्ति विशेष का चरित्र समूचे राष्ट्र को कैसे प्रभावित करता है?
Answer: व्यक्ति पूरे राष्ट्र का एक घटक होता है। अनेक व्यक्तियों से परिवार, परिवारों से कुल, कुलों से समाज और समाजों से राष्ट्र बनता है। जब कोई व्यक्ति विशेष शिथिल चरित्र का हो जाता है, तो वह पूरे राष्ट्र पर चरित्र-संकट ले आता है क्योंकि राष्ट्र का निर्माण करने वाले नागरिक स्वयं उसके घटक हैं।
In simple words: एक व्यक्ति समाज और राष्ट्र की इकाई है, इसलिए एक का पतन पूरे राष्ट्र के चरित्र को संकट में डाल देता है।

Exam Tip: व्यक्ति से परिवार, कुल, समाज और राष्ट्र बनने की शृंखला को क्रमबद्ध लिखें।

 

Question 4. व्यक्ति के चरित्र-निर्माण में किस-किस का योगदान होता है?
Answer: व्यक्ति के चरित्र-निर्माण में पूर्व जीवन के सुसंस्कार, सत्संगति, आनुवांशिक परंपरा, परिवेश तथा स्वयं व्यक्ति के अपने पुरुषार्थ और बल-बूते का प्रमुख योगदान होता है।
In simple words: सुसंस्कार, अच्छी संगति और अपने खुद के प्रयास मिलकर चरित्र का निर्माण करते हैं।

Exam Tip: सुसंस्कार और सत्संगति जैसे स्तंभों का विशेष उल्लेख करें।

 

Question 5. संगति के संदर्भ में पारस के उल्लेख से लेखक क्या प्रतिपादित करना चाहता है?
Answer: पारस के उल्लेख के माध्यम से लेखक यह प्रतिपादित करना चाहता है कि जिस प्रकार पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, उसी प्रकार श्रेष्ठ और अच्छी संगति के संपर्क में आने से नीच या बुरे मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति भी गुणी और उत्तम चरित्र वाला बन जाता है।
In simple words: लेखक यह बताना चाहता है कि संगति का प्रभाव पारस मणि की तरह मनुष्य के जीवन को बदल देता है।

Exam Tip: पारस के प्रतीकात्मक अर्थ को मनुष्य के आचरण पर लागू करके समझाएं।

 

Question 6. व्यक्ति सुसंस्कृत कैसे बनता है? स्पष्ट करें।
Answer: व्यक्ति पूर्व जन्म या पूर्व जीवन के सत्कर्मों, सुसंस्कारों और निरंतर मिलने वाली सत्संगति के प्रभाव से सुसंस्कृत बनता है।
In simple words: अच्छे संस्कारों और सत्संगति से मनुष्य सुसंस्कृत बनता है।

 

Question 7. आचरण उच्च बनाने के लिए व्यक्ति को क्या प्रयास करना चाहिए?
Answer: आचरण उच्च बनाने के लिए व्यक्ति को निरंतर अच्छी संगति अपनानी चाहिए और अपने सत्कर्मों तथा पुरुषार्थ पर ध्यान देना चाहिए।
In simple words: उच्च आचरण के लिए सत्संगति और अच्छे विचारों को जीवन में उतारना आवश्यक है।

 

Question 8. उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
Answer: 'सत्संगति और चरित्र-निर्माण'।
In simple words: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'चरित्र निर्माण में सत्संगति का महत्व' है।

 

Question 9. गद्यांश में से कुसंगति और सुलभ के विलोम छाँटिए।
Answer: कुसंगति - सत्संगति
सुलभ - दुर्लभ
In simple words: 'कुसंगति' का विलोम 'सत्संगति' और 'सुलभ' का विलोम 'दुर्लभ' है।

 

Question 10. 'चरित्रवान' और परिवेश में से क्रमशः प्रत्यय और उपसर्ग अलग करें।
Answer: चरित्रवान - प्रत्यय: 'वान' (मूल शब्द: चरित्र)
परिवेश - उपसर्ग: 'परि' (मूल शब्द: वेश)
In simple words: 'चरित्रवान' में 'वान' प्रत्यय तथा 'परिवेश' में 'परि' उपसर्ग है।

 

(घ)

Question 1. यांत्रिक नियम से कौन सा कारखाने नहीं खोलना पड़ा?
Answer: संस्कृति के रूप में देश के समस्त स्तरों को अभिषिक्त करने वाली विद्या की धारा के प्रवाह के लिए किसी यांत्रिक नियम से शिक्षा विभाग का कारखाना नहीं खोलना पड़ा था, क्योंकि यह समाज की स्वाभाविक प्राण-क्रिया के रूप में संचालित हुई थी।
In simple words: संस्कृति की धारा को प्रवाहित करने के लिए शिक्षा का कोई यांत्रिक कारखाना नहीं खोलना पड़ा था।

Exam Tip: 'यांत्रिक नियम' और 'शिक्षा विभाग का कारखाना' जैसे शब्दों का सटीक प्रयोग करें।

 

Question 2. आज देश में कैसी शिक्षा चल रही है?
Answer: आज देश में पाश्चात्य शिक्षा चल रही है, जो भूमि को अपने उपादानों से उपजाऊ नहीं बना पा रही है। देश अपनी शिक्षा की भूमिका बनाने के विषय में उदासीन है और यहाँ की शिक्षा तथा देश का विशाल हृदय एक-दूसरे से विच्छिन्न हैं।
In simple words: आज देश में पश्चिमी (पाश्चात्य) शिक्षा का प्रभाव है जो समाज और संस्कृति से कटी हुई है।

Exam Tip: पाश्चात्य शिक्षा और देश की उदासीनता के भाव को स्पष्ट करें।

 

Question 3. अरण्य के जीवित रह पाने का कारण क्या है?
Answer: अरण्य (जंगल) जिस मिट्टी से प्राण ग्रहण करके जीवित है, वह उसी मिट्टी को प्रतिदिन प्राणों का उपादान पर्याप्त रूप से लौटाता है और उसे बराबर प्राणमय बनाए रखता है।
In simple words: जंगल मिट्टी से पोषण लेकर बदले में उसे उपजाऊ और प्राणमय बनाए रखता है, यही उसके जीवित रहने का कारण है।

 

Question 4. निरक्षर शब्द में से उपसर्ग अलग कर उससे नवीन शब्द बनाइए।
Answer: 'निरक्षर' शब्द में 'निर्' (या निस्) उपसर्ग है (मूल शब्द: अक्षर)।
नवीन शब्द: 1. निरादर 2. निर्दोष
In simple words: 'निरक्षर' में 'निर्' उपसर्ग है। इसी से 'निरादर' और 'निर्दोष' शब्द बनते हैं।

 

Question 5. गद्यांश का उचित शीर्षक दें।
Answer: 'शिक्षा और भारतीय संस्कृति'।
In simple words: इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'शिक्षा और हमारी संस्कृति' है।

 

Question 6. शिक्षा के विषय में उदासीनता का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: शिक्षा के विषय में उदासीनता के कारण देश की शिक्षा और देश का विशाल हृदय एक-दूसरे से विच्छिन्न (अलग) हो जाते हैं, जिससे हमारी सांस्कृतिक जड़ें कमजोर होने लगती हैं और समाज में वैचारिक भटकाव आता है।
In simple words: शिक्षा के प्रति उदासीनता समाज और संस्कृति के बीच की खाई को बढ़ा देती है।

 

Question 7. पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव बताइए।
Answer: पाश्चात्य शिक्षा हमारी भूमि को अपने उपादानों से उपजाऊ नहीं बना पा रही है। इसके प्रभाव से हमारी शिक्षा और समाज का मूल स्वभाव एक-दूसरे से कट गया है, जिससे जापान जैसे देशों की तुलना में हमारा पिछड़ना लज्जाजनक और दुःखद बन गया है।
In simple words: पाश्चात्य शिक्षा ने देश की उर्वर भूमि और सांस्कृतिक जड़ों को पोषित करने के बजाय उसे और उदासीन बना दिया है।

 

Question 8. अरण्य की विशेषता क्या है?
Answer: अरण्य की विशेषता यह है कि वह जिस मिट्टी से जीवन रस पाता है, अपनी डालियों के फल-फूलों के रूप में उस मिट्टी को पुनः समृद्ध और प्राणमय बना देता है। वह विदेशी मरुभूमि की तरह बंजर नहीं बल्कि सदाबहार और जीवंत रहता है।
In simple words: जंगल अपनी मिट्टी को लगातार पोषित करता है ताकि वह सदा हरी-भरी बनी रहे।

 

Question 9. विद्या की धारा ने संस्कृति का रूप कैसे धारण किया?
Answer: जिस प्रकार शरीर में प्राण शक्ति की प्रेरणा से धमनियों और शिराओं द्वारा रक्त समस्त अंगों में प्रवाहित होता रहता है, उसी प्रकार देश के संपूर्ण समाज-शरीर में शिक्षा की स्वाभाविक प्राण-क्रिया निरंतर संचालित होती रही, जिससे विद्या की धारा ने संस्कृति का रूप ले लिया।
In simple words: समाज के प्राण-तत्व के रूप में स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होकर शिक्षा ने संस्कृति का रूप ले लिया।

 

अपठित काव्यांश

अभ्यास कार्य

(क)

Question 1. 'सारा जीवन नुप चुका' से कवि का आशय क्या है?
Answer: 'सारा जीवन नुप चुका' (या नुप चुकने की बात कहने वाले) से कवि का आशय यह है कि जो लोग यह मानते हैं कि मनुष्य की प्रगति और स्वतंत्रता की सारी सीमाएँ तय हो चुकी हैं और अब जीवन में नया कुछ पाने की गुंजाइश नहीं बची है, वे वैचारिक रूप से दासता के समर्थक हैं।
In simple words: इस पंक्ति का आशय यह है कि जो व्यक्ति यह सोचता है कि जीवन का विकास रुक गया है, वह गुलामी का प्रचारक है।

Exam Tip: रूढ़िवादिता और स्वतंत्रता के हनन के संदर्भ में उत्तर लिखें।

 

Question 2. मनुज की मेधा का संहारक कौन है?
Answer: मनुष्य की बुद्धि और विवेक (मेधा) का संहारक वह व्यक्ति या विचारधारा है जो दासता का प्रचार करती है, मनुष्य को स्वतंत्र रूप से सोचने से रोकती है और उसे केवल वही मानने के लिए बाध्य करती है जो तय कर दिया गया है।
In simple words: स्वतंत्र चिंतन का विरोध करने वाली और गुलामी सिखाने वाली मानसिकता मनुष्य की बुद्धि की संहारक है।

 

Question 3. कवि के अनुसार अत्याचारी और कायर कौन है?
Answer: कवि के अनुसार जो व्यक्ति मनुष्य के स्वतंत्र चिंतन से डरता है, जो बुद्धि को बेड़ियाँ पहनाता है और जो लोगों को अपनी स्वतंत्र सोच का इस्तेमाल नहीं करने देता, वही सबसे बड़ा अत्याचारी और कायर है।
In simple words: जो दूसरों की बुद्धि पर पहरे लगाता है और स्वतंत्र सोच से डरता है, वह अत्याचारी है।

 

Question 4. अत्याचारी किसे कहा गया है?
Answer: अत्याचारी उसे कहा गया है जो मनुष्य की स्वतंत्रता का दमन करता है, उसकी बुद्धि को गुलाम बनाता है और स्वतंत्र विचारों के प्रवाह को रोकता है।
In simple words: स्वतंत्र सोच का दमन करने वाले को अत्याचारी कहा गया है।

 

Question 5. बुद्धि को बेड़ियाँ देने का क्या आशय है?
Answer: बुद्धि को बेड़ियाँ देने का आशय मनुष्य की विचार-शक्ति को बांध देना, उसे रूढ़ियों और आज्ञापालन के बंधनों में जकड़ लेना तथा उसकी तार्किक क्षमता को स्वतंत्र रूप से कार्य न करने देना है।
In simple words: मनुष्य की सोचने-समझने की शक्ति पर प्रतिबंध लगाना ही बुद्धि को बेड़ियाँ देना है।

 

(ख)

Question 1. कविता में पेड़ के विभिन्न अंग क्या कर रहें और क्यों?
Answer: कविता में पेड़ के विभिन्न अंग (पत्तियाँ आदि) मर्म-भरित स्वर में मरमर ध्वनि भरती हैं, हर वर्ष नूतन होकर पतझर के दुखों को सहती हैं और बहार में फूटकर पंथी के शाप-ताप को हरती हैं, क्योंकि वे संसार के कष्टों को दूर कर जीवन सौंदर्य बिखेरना चाहती हैं।
In simple words: पेड़ के अंग प्रकृति के नियमों के अनुसार अपने कर्तव्य निभाते हुए राहगीरों के कष्ट दूर करते हैं।

 

Question 2. फूल अपने आपको, डालियों से, पत्नियों से श्रेष्ठ क्यों मानता है?
Answer: फूल अपने आपको इसलिए श्रेष्ठ मानता है क्योंकि वह अपने खुले और खिले हुए स्वरूप में रंग, रस और पराग लिए रहता है, उसकी यश-गंध दूर-दूर तक फैलती है और भौंरे उसके पास आकर गुणगान करते हैं।
In simple words: अपने सौंदर्य, रंग, सुगंध और भौंरों के आकर्षण के कारण फूल स्वयं को श्रेष्ठ मानता है।

 

Question 3. फूल, पत्ते, किस सत्य से अनभिज्ञ हैं?
Answer: फूल और पत्ते इस सत्य से अनभिज्ञ हैं कि उनकी इस खूबसूरती और जीवन का आधार वह मौन और अचल 'जड़' है जो जमीन के भीतर रहकर सबका भार सहती है और उन्हें जीवन-रस प्रदान करती है।
In simple words: फूल और पत्ते उस 'जड़' के त्याग और महत्व से अनजान हैं जो उन्हें जीवन देती है।

 

Question 4. जड़ की मुस्कान का रहस्य क्या है?
Answer: जड़ की मुस्कान का रहस्य यह है कि उसने सबकी पुकार सुनी है, सबको जीवन दिया है और जमीन के भीतर रहकर भी पेड़ के खिलने और महकने में अपनी सार्थकन महसूस करती है।
In simple words: सबका पालन करने और सबको जीवन देने के संतोष में ही जड़ की मुस्कान का रहस्य छिपा है।

 

Question 5. "लेकिन हम हर-हर स्वर करती हैं" इस पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार का नाम बताइए।
Answer: इस पंक्ति में 'अनुप्रास अलंकार' है (जहाँ 'ह' वर्ण की आवृत्ति हुई है)।
In simple words: वर्णों की आवृत्ति के कारण यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

 

(ग)

Question 1. कविता में कवि ने मिट्टी के किस स्वरूप पर प्रकाश डाला है?
Answer: कवि ने मिट्टी के अमर, अविनाशर और सर्जनशील स्वरूप पर प्रकाश डाला है जो कुम्हार के चाक पर कुटकर-पिसाकर भले ही बिखर जाए, आंधी-पानी में नष्ट होने जैसी लगे, पर धरती के रूप में वह हमेशा उर्वर और अमर रहती है।
In simple words: कवि ने मिट्टी की अटूट जीवन-शक्ति और उसकी अमरता को दर्शाया है।

 

Question 2. मिट्टी की महिमा किसमें है और कैसे?
Answer: मिट्टी की महिमा इस बात में है कि वह आंधी और पानी के थपेड़ों से भले ही नष्ट होती दिखती है, पर उसकी गर्भ से फसलें उगती और कटती हैं। वह सैकड़ों बार बनकर मिटती है फिर भी अविनाशर बनी रहती है।
In simple words: तमाम आपदाओं को झेलकर भी जीवन उपजाने की क्षमता में ही मिट्टी की असली महिमा है।

 

Question 3. कुम्हार के लिए निर्मम शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है?
Answer: कुम्हार के लिए 'निर्मम' शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि वह मिट्टी को चाक पर रखकर उसे पीटता है, विभिन्न रूपों में ढालता है और उसके मूल स्वरूप को बार-बार तोड़ता-मरोड़ता है।
In simple words: कुम्हार मिट्टी को कठोरता से गढ़ता है, इसलिए उसे निर्मम कहा गया है।

 

Question 4. "विश्वास अमर हो जाता है।" का आशय स्पष्ट करें।
Answer: इसका आशय यह है कि भौतिक रूप से भले ही मिट्टी गल जाए या नष्ट हो जाए, किंतु सृजन करने की उसकी शक्ति और जीवन का जो विश्वास है, वह शाश्वत और अमर रहता है।
In simple words: बाहरी रूप भले मिट जाए, पर जीवन और निर्माण का अटूट विश्वास हमेशा जीवित रहता है।

 

Question 5. कविता में आए उपमा अलंकार अथवा मानवीकरण का उदाहरण छाँटिए।
Answer: "यों तो बच्चों की गुड़िया-सी भोली मिट्टी की हस्ती क्या" - इस पंक्ति में 'बच्चों की गुड़िया-सी' के प्रयोग से उपमा अलंकार है।
In simple words: मिट्टी की तुलना बच्चों की गुड़िया से करने के कारण यहाँ उपमा अलंकार है।

 

(घ)

Question 1. कवि की छटपटाहट का कारण क्या है?
Answer: कवि की छटपटाहट का कारण यह है कि समाज में केवल अच्छी लगने वाली और कृत्रिम बातें हो रही हैं, जबकि उसके अलावा जीवन में घुटन, तनाव, पीड़ा, कुंठा और भूख जैसे कड़वे सच भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं और कोई उनकी सुध नहीं ले रहा है।
In simple words: जीवन के वास्तविक दुखों और बढ़ते तनाव के बीच केवल दिखावटी अच्छी बातें होने से कवि छटपटा रहा है।

 

Question 2. कवि कैसे दिन की प्रतीक्षा में है?
Answer: कवि ऐसे दिन की प्रतीक्षा में है जब भीड़ के शोर और कृत्रिम व्यवस्थाओं में इंसान के खोने से पहले कोई अपना ऐसा व्यक्ति आए जो जीवन के हर सच को आत्मीयता से स्वीकार कर सके।
In simple words: कवि उस आत्मीय दिन की प्रतीक्षा कर रहा है जब सच्ची और वास्तविक बातें सामने आ सकें।

 

Question 3. 'अर्थ से इति तक' कवि का क्या अभिप्राय है?
Answer: 'अर्थ से इति तक' से कवि का अभिप्राय शुरुआत से लेकर अंत तक अर्थात् जीवन के प्रारंभ से लेकर उसके पूर्ण होने तक की संपूर्ण यात्रा से है।
In simple words: इस वाक्यांश का अर्थ आरंभ से अंत तक की पूरी स्थिति से है।

 

Question 4. कवि क्या चाहता है उसने अपना भाव किन पंक्तियों में व्यक्त किया है?
Answer: कवि चाहता है कि जीवन में केवल दिखावटी अच्छी बातें ही नहीं बल्कि यथार्थ का सामना हो। उसने अपने इस भाव को "भीड़ के विस्फोट में गुम होने से पहले / आएगा क्या, कोई, ऐसा दिन एक / उसका अपने वाला भी?" इन पंक्तियों में व्यक्त किया है।
In simple words: कवि अपनेपन और सच्चाई से भरे दिन के आने की इच्छा व्यक्त करता है।

 

Question 5. "अच्छी लगने वाली बातों के अलावा और सब कुछ तो हो रहा है।" इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
Answer: इस पंक्ति का आशय यह है कि वर्तमान समय में समाज से सुख और शांति गायब हो चुकी है। लोग सिर्फ ऊपरी तौर पर अच्छी और मीठी बातें करते हैं, जबकि असलियत में चारों तरफ तनाव, पीड़ा, कुंठा, भुखमरी और बेचैनी का साम्राज्य फैला हुआ है।
In simple words: समाज में वास्तविक सुख गायब है और केवल पाखंडपूर्ण अच्छी बातें की जा रही हैं, जबकि अंदर से हर कोई पीड़ा में है।

 

CBSE Class 12 Hindi Assignments for Elective Reading Skills

Revision Assignment: Elective Reading Skills (CBSE)

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  2. Independent Attempt: Solve Elective Reading Skills questions on your own initially before cross-checking with expert solutions.
  3. Error Tracking: Record challenging concepts in a dedicated notebook and practice online MCQ tests for revision.

FAQs

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How can practicing Elective Reading Skills assignments help in Hindi preparation?

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