School Assignments for Class 12 Hindi: Antra
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Practice Class 12 Hindi Assignments: Antra
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गद्य-खण्ड
प्रेमघन की छाया-स्मृति - आचार्य रामचंद्र शुक्ल
अभ्यास कार्य
Question 1. लेखक ने अपने पिता जी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
Answer: आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पिता फारसी के अच्छे ज्ञाता और पुरानी हिंदी कविता के प्रेमी थे। उन्हें फारसी कवियों की उक्तियों को हिंदी कवियों की उक्तियों के साथ मिलाने में बड़ा आनंद आता था। वे प्रायः रात को घर के सभी लोगों को एकत्र करके रामचरितमानस और रामचंद्रिका पढ़कर सुनाया करते थे।
In simple words: लेखक के पिता फारसी के विद्वान और पुरानी हिंदी कविता के प्रेमी थे, जो रोज रात को रामचरितमानस और रामचंद्रिका पढ़कर सुनाते थे।
Exam Tip: पिता के साहित्यिक स्वभाव और रूचि का उल्लेख करते समय रामचरितमानस और रामचंद्रिका का विशेष रूप से उल्लेख करें।
Question 2. उपाध्याय बदरीनाथ चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?
Answer: जब आचार्य रामचंद्र शुक्ल आठ वर्ष के थे, तब उनका तबादला राठ तहसील से मिर्जापुर हो गया। उन्हें पता चला कि भारतेंदु मंडल के प्रसिद्ध कवि बदरीनाथ चौधरी 'प्रेमघन' पास ही कहीं रहते हैं। शुक्ल जी अपने साथियों के साथ डेढ़ मील का सफर तय करके उनके मकान के सामने पहुँचे। चौधरी साहब के मकान का ऊपर का बरमंडा सघन लताओं के जाल से ढँका हुआ था। काफी इंतजार के बाद चौधरी साहब की एक झलक दिखाई दी, जिनके बाल बिखरे हुए थे तथा एक हाथ खंभे पर था।
In simple words: लेखक अपने मित्रों के साथ डेढ़ मील पैदल चलकर चौधरी साहब के घर गए और सघन लताओं के बीच उनकी पहली झलक देखी।
Exam Tip: उत्तर में डेढ़ मील की दूरी, लताओं से ढँका बरामदा और बिखरे बालों वाली छवि का वर्णन अवश्य करें।
Question 3. आचार्य रामचंद्र शुक्ल का हिन्दी साहित्य के प्रति झुकाव किस तरह बढ़ता गया?
Answer: समय के साथ-साथ हिंदी के नूतन साहित्य की ओर लेखक का रुझान बढ़ता गया। उनके घर में जीवन भारत प्रेस की पुस्तकें आती थीं। वे पं. केदारनाथ जी पाठक के पुस्तकालय से लाकर पुस्तकें पढ़ा करते थे। काशी में पंडित केदारनाथ जी से मुलाकात और भारतेंदु जी के मकान को देखने के बाद उनकी हिंदी और साहित्य के प्रति रुचि और अधिक प्रगाढ़ हो गई।
In simple words: घर पर आने वाली पुस्तकों और पुस्तकालय से किताबें पढ़ने के कारण लेखक का झुकाव हिंदी साहित्य की ओर निरंतर बढ़ता गया।
Exam Tip: पुस्तकालयों, पत्र-पत्रिकाओं और प्रेरणा स्रोतों का जिक्र करना न भूलें।
Question 4. लेखक की मित्र मंडली का नाम निस्संदेह किसने तथा क्यों रखा?
Answer: लेखक की मित्र मंडली की बातचीत प्रायः लिखने-पढ़ाने की हिंदी में हुआ करती थी, जिसमें निस्संदेह इत्यादि शब्द आया करते थे। बस्ती के उर्दूभाषी लोगों को उनकी बोलचाल अनोखी लगती थी, इसलिए उन्होंने इस मंडली का नाम 'निस्संदेह' रख दिया था।
In simple words: लेखक की मंडली के लोग अपनी बातचीत में 'निस्संदेह' शब्द का बार-बार प्रयोग करते थे, जिसे देखकर बस्ती के उर्दूभाषियों ने इसका यह नाम रख दिया।
Exam Tip: बस्ती के उर्दूभाषी लोगों द्वारा दिए गए इस व्यंग्यात्मक किंतु स्नेहपूर्ण नाम के कारण को स्पष्ट करें।
Question 5. लेखक के समवयस्क हिंदी प्रेमियों की मंडली में कौन-2 से लेखक थे?
Answer: लेखक की समवयस्क हिंदी-प्रेमियों की मंडली में प्रमुख रूप से श्रीयुत काशीप्रसाद जी जायसवाल, बाबू भगवानदास जी हालना, पं. बदरीनाथ गौंड और पं. उमाशंकर द्विवेदी शामिल थे।
In simple words: इस मंडली में काशीप्रसाद जायसवाल, भगवानदास हालना, बदरीनाथ गौंड और उमाशंकर द्विवेदी जैसे हिंदी प्रेमी शामिल थे।
Exam Tip: सभी प्रमुख साथियों के नाम सही वर्तनी के साथ लिखें।
Question 6. 'प्रेमघन की छाया-स्मृति' के आधार पर चौधरी साहब के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: चौधरी बदरीनाथ 'प्रेमघन' भारतेंदु मंडल के प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित कवियों में से थे। उनके रहन-सहन और व्यवहार से उनकी रईसी प्रकट होती थी। उनके संवाद सुनने लायक होते थे और उनकी बातचीत का अंदाज निराला था। वे एक हिंदुस्तानी रईस थे जो वसंत-पंचमी और होली जैसे त्योहारों पर उत्सव आयोजित करते थे। वे बहुत विनोदप्रिय और हाजिरजवाब व्यक्ति थे।
In simple words: चौधरी साहब एक रईस और विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे जिनका उठना-बैठना, बोलचाल और उत्सवप्रियता अनोखी थी।
Exam Tip: उनके व्यक्तित्व के मुख्य बिंदु जैसे रईसी, विनोदप्रियता और अनूठे संवाद शैली को बिंदुओं में दर्शाएँ।
Question 7. 'भारतेंदु जी के मकान के नीचे का यह हृदय-परिचय बहुत शीघ्र गहरी मैत्री में परिणत हो गया।' - आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन का आशय यह है कि जब लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र जी के मकान को बड़े प्रेम और कुतूहल से देख रहे थे, तब पंडित केदारनाथ जी पाठक ने उनकी इस श्रद्धा और प्रेम को देख लिया। पाठक जी बहुत प्रसन्न हुए और दूर तक उनके साथ बातचीत करते हुए गए। इसी पहली मुलाकात और हृदय के मेल से दोनों के बीच प्रगाढ़ मित्रता स्थापित हो गई।
In simple words: भारतेंदु जी के घर के पास केदारनाथ पाठक से हुई पहली मुलाकात लेखक के लिए श्रद्धा का केंद्र बनी और शीघ्र ही गहरी दोस्ती में बदल गई।
Exam Tip: 'हृदय-परिचय' और 'गहरी मैत्री' के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करें।
Question 8. 'इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का अद्भुत मिश्रण रहता था।' इस कथन से लेखक का क्या अभिप्राय है?
Answer: लेखक का अभिप्राय यह है कि चौधरी बदरीनाथ 'प्रेमघन' पुराने और प्रतिष्ठित कवियों में से एक थे। लेखक उन्हें और उनके परिवेश को एक पुरानी चीज या धरोहर की तरह देखता था। उनके प्रति लेखक के मन में अगाध प्रेम और आदर के साथ-साथ उनके अनोखे व्यक्तित्व को जानने का कुतूहल भी बना रहता था। इसलिए उनके प्रति दृष्टिकोण में पुरातत्व की भावना, प्रेम और कुतूहल का अनूठा संगम था।
In simple words: पुराने कवियों के प्रति आदरभाव और उनके अनूठे जीवन को जानने की उत्सुकता ही 'पुरातत्व की दृष्टि' और 'प्रेम-कुतूहल' का मिश्रण है।
Exam Tip: 'पुरातत्व की दृष्टि' शब्द का प्रयोग चौधरी साहब की प्राचीन शैली और व्यक्तित्व के संदर्भ में किया गया है, इसे स्पष्ट करें।
सुमिरिनी के मनके - पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी
(क) बालक बच गया
अभ्यास कार्य
Question 1. बालक से कौन - 2 से प्रश्न पूछे गए?
Answer: बालक से धर्म के दस लक्षण, नौ रसों के उदाहरण, चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान, इंग्लैंड के राजा आठवें हेनरी की पतियों के नाम तथा पेशवाओं के शासनकाल के विषय में प्रश्न पूछे गए थे।
In simple words: बालक से धर्म, इतिहास, विज्ञान और साहित्य से जुड़े कई कठिन और रटे-रटाए प्रश्न पूछे गए थे।
Exam Tip: प्रश्नों के विभिन्न विषयों (धर्म, रस, विज्ञान, इतिहास) के उदाहरण दें।
Question 2. “मै यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा।” किसने कहा तथा क्यों कहा?
Answer: यह वाक्य वार्षिक उत्सव पर उपस्थित उस आठ वर्षीय बालक ने पूछा जाने पर कहा था। उसने यह रटा-रटाया उत्तर इसलिए दिया क्योंकि उसके पिता और अध्यापकों ने उसे इसी प्रकार की बातें सिखाकर और रटाकर मंच पर प्रदर्शन के लिए तैयार किया था।
In simple words: यह बात उस छोटे बालक ने अधिकारियों या आगंतुकों द्वारा पूछे जाने पर रटी-रटाई भाषा में कही थी।
Exam Tip: बालक की यांत्रिक शिक्षा और उसके पिता की मानसिकता पर प्रकाश डालें।
Question 3. बालक द्वारा इनाम में लड्डू माँगने पर लेखक ने सुख की साँस क्यों भरी?
Answer: लेखक को ऐसा इसलिए लगा क्योंकि लड्डू की माँग उस बालक के बालमन की स्वाभाविक माँग थी। इससे सिद्ध हुआ कि कठिन और कृत्रिम शिक्षा के बावजूद उस बच्चे के अंदर का बचपन और बाल-भावनाएँ अभी भी जीवित थीं। लेखक उस बच्चे को यंत्र बनने से बचता देख प्रसन्न हुआ।
In simple words: लड्डू माँगकर बालक ने यह साबित कर दिया कि उसका असली बचपन और स्वाभाविकता अभी मरी नहीं है, जिससे लेखक को राहत मिली।
Exam Tip: बालमन की सहजता और कृत्रिमता के संघर्ष को उत्तर का आधार बनाएँ।
Question 4. “बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह लड्डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मरमर था, मेरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।” कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए?
Answer: इस कथन के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि बालक द्वारा इनाम में लड्डू माँगना उसकी सहज, जीवित और स्वाभाविक बाल-प्रवृत्ति का परिचायक है। जिस प्रकार हरे-भरे पत्ते जीवन का संगीत और शीतलता देते हैं, वैसे ही बच्चे की यह माँग उसके जीवित मन का प्रतीक है। इसके विपरीत, रटे-रटाए कठिन उत्तर किसी सूखी लकड़ी या काठ की अलमारी की तरह निर्जीव और सिर दर्द पैदा करने वाले होते हैं।
In simple words: लड्डू माँगना बच्चे की स्वाभाविक और जीवित प्रवृत्ति है, जबकि रटे-रटाए उत्तर देना यंत्रवत जीवन है।
Exam Tip: जीवित वृक्ष के हरे पत्तों और काठ की अलमारी के प्रतीकात्मक अर्थ को भली-भांति समझाएँ।
(ख) घड़ी के पुर्जे
अभ्यास कार्य
Question 1. “धर्म का रहस्य जानना वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।” इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
Answer: हम इस कथन से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। जिस प्रकार घड़ी को खोलकर सुधारना केवल किसी विशेष व्यक्ति का ही एकाधिकार नहीं है, आम आदमी भी इसे सीख सकता है, उसी प्रकार धर्म और उसके सत्यों को जानने का अधिकार प्रत्येक मनुष्य को है। धर्म के नाम पर कुछ लोगों का एकाधिकार समाज में पाखंड और अज्ञान को बढ़ावा देता है।
In simple words: हम इस बात से सहमत नहीं हैं क्योंकि धर्म और उसके ज्ञान पर केवल कुछ विशेष धर्माचार्यों का ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का अधिकार है।
Exam Tip: धर्म के रहस्यों पर आम आदमी के अधिकार को तर्क सहित प्रस्तुत करें।
Question 2. धर्म का रहस्य जानने के लिए लेखक ने 'घड़ी के पुर्जे' का दृष्टांत क्यों दिया है?
*Answer: धर्मोपदेशक यह तर्क देते हैं कि आम आदमी को धर्म की गहराई में नहीं जाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे आम आदमी को घड़ी के पुर्जे खोलने की अनुमति नहीं होती। लेखक ने इस दम्भपूर्ण विचार का खंडन करने के लिए घड़ी का दृष्टांत दिया है ताकि यह समझाया जा सके कि जिस प्रकार घड़ी सुधारना कोई भी सीख सकता है, उसी प्रकार धर्म का ज्ञान भी हर व्यक्ति प्राप्त कर सकता है।
In simple words: धर्म के ठेकेदारों की इस बात को गलत साबित करने के लिए लेखक ने घड़ी का उदाहरण दिया कि ज्ञान पर किसी एक वर्ग का हक नहीं होता।
Exam Tip: दृष्टांत के मूल उद्देश्य यानी धर्म के रहस्यों के सरलीकरण और सुलभता को स्पष्ट करें।
Question 3. “अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाजी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।” - आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन का आशय यह है कि भले ही बिना जानकारी वाले व्यक्ति को धर्म रूपी घड़ी के साथ खिलवाड़ करने की छूट न हो, किंतु जो व्यक्ति योग्यता और अध्ययन की परीक्षा पास करके आया है, उसे धर्म के रहस्यों की खोज करने और जनता को शिक्षित करने से नहीं रोकना चाहिए।
In simple words: अयोग्य व्यक्ति को भले ही अधिकार न मिले, लेकिन जो समझदार और योग्य है, उसे धर्म को जानने और समझाने की पूरी छूट होनी चाहिए।
Exam Tip: 'अनाड़ी' और 'घड़ीसाजी की परीक्षा पास करने वाले' के प्रतीकात्मक अर्थ को समझाएँ।
Question 4. लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि - “हमें तो धोखा होता है कि परदादा की घड़ी जेब में डाले फिरते हो, वह बंद हो गई है तुम्हें न चाबी देना आता है न पुर्जे सुधारना, तो भी दूसरों को हाथ नहीं लगाने देते।”
Answer: लेखक ने यह व्यंग्य उन धर्माचार्यों पर किया है जो खुद को धर्म का एकमात्र ठेकेदार मानते हैं। वे दूसरों को धर्म के बारे में जानने से इसलिए रोकते हैं क्योंकि वे खुद धर्म के वास्तविक रहस्यों से अनजान हैं। उन्हें डर रहता है कि यदि दूसरे लोग धर्म को समझ गए तो उनकी अपनी पोल खुल जाएगी।
In simple words: धर्म के ठेकेदार खुद अज्ञानी होते हैं और अपनी पोल खुलने के डर से दूसरों को धर्म की सच्ची बातें जानने से रोकते हैं।
Exam Tip: धर्माचार्यों के पाखंड और उनके स्वार्थ पर लेखक के व्यंग्य को स्पष्ट करें।
Question 5. 'जहाँ धर्म पर कुछ मुट्ठी भर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है वहीं धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।' तर्क सहित व्याख्या कीजिए।
Answer: जब धर्म कुछ विशेष धर्मगुरुओं या पंडितों तक सीमित हो जाता है, तो वह संकीर्ण और रूढ़िवादी बन जाता है। इसके विपरीत, जब आम आदमी धर्म के वास्तविक मर्म, नैतिकता और मानवता को समझता है, तो धर्म का दायरा विस्तृत होता है। इससे समाज में भाईचारा, विवेक और मानवता का विकास होता है।
In simple words: कुछ लोगों के हाथ में धर्म रहने से वह संकुचित हो जाता है, जबकि आम जनता तक उसकी पहुँच से समाज और धर्म दोनों का विस्तार होता है।
Exam Tip: धर्म के संकुचित स्वरूप और विस्तृत लोक-कल्याणकारी रूप में अंतर स्पष्ट करें।
(ग) ढेले चुन लो
अभ्यास कार्य
Question 1. वैदिककाल में हिंदुओं में जीवनसाथी के चुनाव के संबंध में क्या प्रथा प्रचलित थी?
Answer: वैदिककाल में जीवनसाथी चुनने के लिए मिट्टी के ढेलों की लॉटरी की प्रथा थी। विवाह का इच्छुक युवक कन्या के घर गाय भेंट करने के बाद जाता था और कन्या के सामने कुछ मिट्टी के ढेले रखकर उनमें से एक ढेला चुनने को कहता था। कन्या द्वारा चुने गए ढेले (जैसे वेदी की मिट्टी, गोबर, खेत की मिट्टी आदि) के आधार पर उसका भविष्य और जीवनसाथी तय होता था।
In simple words: प्राचीन काल में युवक द्वारा लाए गए मिट्टी के विभिन्न ढेलों में से कन्या जो ढेला चुनती थी, उसी से उसका भविष्य और वर तय होता था।
Exam Tip: वैदिककालीन विवाह परंपरा और ढेला चुनने की विधि का संक्षिप्त विवरण दें।
Question 2. “अपनी आँखों से जगह देखकर, अपने हाथों से चुने हुए मिट्टी के डगलों पर भरोसा करना क्यों बुरा है और लाखों करोड़ों कोस दूर बैठे बड़े-बड़े मिट्टी और आग के ढेलों, मंगल, शनिचर और बृहस्पति की कल्पित चाल के कल्पित हिसाब का भरोसा करना क्यों अच्छा है?” से लेखक का क्या अभिप्राय है?
Answer: लेखक का अभिप्राय यह है कि लोग अपने सामने की वास्तविक परिस्थितियों और अपने द्वारा चुने गए विकल्पों पर भरोसा न करके दूर आकाश के ग्रहों-नक्षत्रों की काल्पनिक चाल और ज्योतिषियों की गणना पर अंधविश्वास रखते हैं, जो पूरी तरह तर्कहीन है। अपने अनुभव और प्रत्यक्ष प्रमाण को छोड़कर कल्पना पर भरोसा करना मूर्खता है।
In simple words: प्रत्यक्ष और वास्तविक चीजों को छोड़कर दूर के ग्रहों और ज्योतिषीय गणनाओं पर आँख मूँदकर विश्वास करना सरासर अंधविश्वास है।
Exam Tip: लेखक के इस व्यंग्य का मुख्य उद्देश्य ज्योतिषीय अंधविश्वासों पर प्रहार करना है।
Question 3. जीवनसाथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ने से कौन-कौन से फल प्राप्त होती है?
Answer: मिट्टी के ढेलों के चुनाव के अनुसार यह माना जाता था कि यदि कन्या वेदी का ढेला उठाए तो संतान 'वैदिक पंडित', गोबर चुने तो 'पशुओं का धनी', और खेत की मिट्टी छुए तो 'जमींदार पुत्र' होगी। मसान की मिट्टी को अशुभ माना जाता था, किंतु उस पर भी यदि अन्य युवक के सामने दूसरा ढेला उठाया जाए तो विवाह हो जाता था।
In simple words: ढेलों के चुनाव से यह मान्यता थी कि होने वाली संतान पंडित, पशुओं का स्वामी या जमींदार बनेगी।
Exam Tip: विभिन्न प्रकार की मिट्टी और उनसे जुड़े परिणामों को क्रमबद्ध लिखें।
Question 4. “आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल की मोहर से। आँखो देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस के तेजपिंड से।” - इस कथन से लेखक का क्या अभिप्राय है?
Answer: लेखक का अभिप्राय यह है कि भविष्य की अनिश्चित संभावनाओं और कल्पनाओं की अपेक्षा वर्तमान की वास्तविक और सामने की वस्तु अधिक मूल्यवान होती है। ज्योतिष और ग्रहों की भविष्यवाणियों पर आँख मूँदकर भरोसा करने से बेहतर है कि हम अपने प्रत्यक्ष अनुभवों और वर्तमान पर विश्वास करें।
In simple words: दूर के भविष्य या ग्रहों के चक्कर में पड़ने से अच्छा है कि वर्तमान में जो हमारे पास वास्तविक है, उस पर विश्वास करें।
Exam Tip: वर्तमान की वास्तविकता और भविष्य की अनिश्चितता के बीच तुलनात्मक दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।
कच्चा चिट्ठार - ब्रजमोहन व्यास
अभ्यास कार्य
Question 1. लेखक पसोवा क्यों जाना चाहता था? पसोवा की प्रसिद्धि का क्या कारण था?
Answer: लेखक पुरातत्व महत्व की सामग्री की खोज में पासाओ (पसोवा) जाना चाहता था। पसोवा एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ है जहाँ प्राचीन काल से हर वर्ष जैनों का मेला लगता है। ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर बुद्धदेव व्यायाम करते थे और सम्राट अशोक ने एक स्तूप बनवाया था जिसमें बुद्ध के केश और नख रखे गए थे।
In simple words: ऐतिहासिक और पुरातत्व महत्व की वस्तुओं की तलाश में लेखक पसोवा गया था, जो एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ और बौद्ध स्थल है।
Exam Tip: पसोवा के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व (जैन तीर्थ, बौद्ध अवशेष) को उल्लेखित करें।
Question 2. 'मैं कहीं जाता हूँ तो 'छूँछे' हाथ नहीं लौटता।' लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?
Answer: लेखक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह जहाँ भी पुरातात्विक अन्वेषण या यात्रा के लिए जाता था, वहाँ से संग्रहालय के लिए मूर्तियाँ, सिक्के, मनके या अन्य प्राचीन वस्तुएँ अवश्य खोज कर लाता था। उसकी दृष्टि और खोजना का कौशल इतना तीव्र था कि वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता था।
In simple words: लेखक पुरातात्विक वस्तुओं को ढूँढने में इतना निपुण था कि हर यात्रा से संग्रहालय के लिए कुछ न कुछ बहुमूल्य वस्तुएँ जरूर लाता था।
Exam Tip: संग्रहालय के प्रति लेखक की निष्ठा और उसकी खोजबीन की सफलता को रेखांकित करें।
Question 3. “चांद्रायण व्रत करती हुई बिल्ली के सामने एक आत्मीय चूहा स्वयं आ जाए तो बेचारी को अपना कर्तव्य पालन करना ही पड़ता है।” यह वाक्य किस संदर्भ में कहा गया है और क्यों?
Answer: यह वाक्य लेखक ने तब कहा जब पसोवा से लौटते समय उन्हें रास्ते में बीस सेर वजनी शिव की एक चतुर्मुखी मूर्ति पेड़ के नीचे मिली और उनका मन उसे उठाने के लिए ललचा उठा। लेखक ने अपनी स्थिति की तुलना चांद्रायण व्रत करने वाली उस बिल्ली से की जिसके सामने अचानक चूहा आ जाए तो उसका व्रत टूटना स्वाभाविक है। मूर्ति को उठाना लेखक का पुरातात्विक कर्तव्य था।
In simple words: सुंदर पुरातात्विक मूर्ति को देखकर अपने कर्तव्य (संग्रहालय के लिए संग्रह) के आगे विवश हो जाने के संदर्भ में लेखक ने यह बात कही।
Exam Tip: बिल्ली और चूहे के हास्यपद दृष्टांत के पीछे छिपे लेखक के समर्पण और लालसा को स्पष्ट करें।
Question 4. “अपना सोना खोता तो परखवैये का कौन दोस?” से लेखक का क्या तात्पर्य है?
Answer: इस कहावत के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि जब कभी कौशांबी क्षेत्र से कोई मूर्ति गायब होती थी, तो ग्रामीणों का शक सीधा लेखक पर जाता था क्योंकि पूरे इलाके में मूर्तियाँ उठाने के लिए वह प्रसिद्ध था। और चूँकि 95 प्रतिशत मामलों में उनका संदेह सच भी निकलता था, इसलिए इसमें परखने वालों का कोई दोष नहीं था।
In simple words: इलाके से मूर्ति चोरी होने पर जब लोग लेखक पर शक करते थे, तो लेखक अपनी प्रसिद्धि के कारण इसे स्वाभाविक मानता था।
Exam Tip: लोकोक्ति के प्रयोग और उसके अंतर्निहित व्यंग्य को स्पष्ट करें।
Question 5. लेखक द्वारा प्रयाग संग्रहालय हेतु बोधिसत्व की मूर्ति प्राप्त करने का वर्णन कीजिए?
Answer: एक बार लेखक को कौशांबी में खेत की मेड पर बोधिसत्व की आठ फुट लंबी बिना सिर की मूर्ति मिली जो मथुरा के लाल पत्थर से बनी थी। जब लेखक पाँच-छह लोगों के साथ उसे उठाने लगा तो एक बुढ़िया ने रोक लिया। लेखक ने बुढ़िया को दो रुपये देकर उस अमूल्य मूर्ति को संग्रहालय में सुरक्षित पहुँचा दिया।
In simple words: लेखक ने खेत की मेड़ पर पड़ी बोधिसत्व की प्राचीन मूर्ति को एक बुढ़िया को दो रुपये देकर प्रयाग संग्रहालय के लिए प्राप्त किया था।
Exam Tip: मूर्ति की विशेषता (मथुरा का लाल पत्थर, कुषाण काल) और प्राप्ति के प्रसंग का वर्णन करें।
Question 6. “ईमान! ऐसी कोई चीज़ मेरे पास है ही नहीं तो उसके डिगने का कोई सवाल नहीं उठता। यदि होता तो इतना संग्रह बिना पैसा-कौड़ी के हो ही नहीं सकता।” - यह किसने कहा और क्यों कहा?
Answer: यह बात लेखक ने उस फ्रांसीसी डीलर से कही जो संग्रहालय देखने आया था और बोधिसत्व की मूर्ति का मूल्य दस हजार रुपये लगा रहा था। डीलर ने कहा था कि यदि संग्रहालय की कीमत रुपयों में बताई जाए तो लेखक का ईमान डगमगा सकता है। इस पर लेखक ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह उत्तर देकर संकेत किया कि उनके इस महान संग्रह में व्यक्तिगत स्वार्थ या बेईमानी का कोई लालच नहीं था।
In simple words: फ्रांसीसी डीलर के यह कहने पर कि इतने बड़े संग्रह को देखकर तुम्हारा ईमान डगमगा सकता है, लेखक ने मजाकिया अंदाज में यह जवाब दिया।
Exam Tip: लेखक की निष्काम सेवा और पुरातात्विक वस्तुओं के प्रति उनके प्रेम को इस प्रसंग से दर्शाएँ।
Question 7. फ्रांसीसी डीलर बोधिसत्व की मूर्ति के लिए दस हजार रुपये देने को क्यों तैयार था?
Answer: फ्रांसीसी डीलर प्राचीन कला वस्तुओं का व्यापारी था और वह समझता था कि वह मूर्ति अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है। वह बोधिसत्व की उस प्राचीन मूर्ति को खरीदना चाहता था जिसके पदस्थल पर कुषाण सम्राट कनिष्क के राज्यकाल के दूसरे वर्ष स्थापित होने का उल्लेख था।
In simple words: वह मूर्ति अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक और कुषाण कालीन थी, जिसकी कलात्मक और ऐतिहासिक कीमत बहुत अधिक थी।
Exam Tip: कनिष्क के राज्यकाल और मूर्ति के पुरातात्विक महत्व का उल्लेख करें।
Question 8. भद्रमथ शिलालेख की क्षतिपूर्ति किस प्रकार हुई? स्पष्ट कीजिए।
Answer: जब हाजीपुर गाँव में खुदाई के दौरान मिला भद्रमथ का भारी शिलालेख श्री मजूमदार को सौंपना पड़ा, तब लेखक ने उसी गाँव में अन्य शिलालेखों की खोज शुरू की। वह गुलजार मियाँ के घर के सामने एक कुँए पर पहुँचे जिसकी बंडेर (परिधि का पत्थर) पर ब्राह्मी अक्षरों में लेख खुदा हुआ था। गुलजार मियाँ ने तुरंत वह बंडेर संग्रहालय को सौंप दी, जिससे शिलालेख की क्षतिपूर्ति हो गई।
In simple words: मूल शिलालेख छिन जाने पर लेखक ने हाजीपुर में कुँए की मुंडेर पर लिखे ब्राह्मी लिपि वाले पत्थर को खोज निकाला और संग्रहालय ले आए।
Exam Tip: कुँए की बंडेर और ब्राह्मी लिपि वाले ऐतिहासिक साक्ष्य की खोज की घटना का वर्णन करें।
सवदिया - फणीश्वरनाथ 'रेणु'
अभ्यास कार्य
Question 1. एक अच्छे संवदिया की क्या विशेषता है? गाँवों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा है?
Answer: एक अच्छे संवदिया की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि उसे संवाद का प्रत्येक शब्द, सही सुर, स्वर और उचित उतार-चढ़ाव के साथ पूरी सटीकता से याद रखना होता है। इसके विपरीत, गाँवों के लोगों के मन में संवदिया के प्रति यह गलत अवधारणा थी कि वह कोई निठल्ला, पेटू और कामचोर व्यक्ति होता है जो बिना किसी पारिवारिक जिम्मेदारी के मुफ्त की रोटियां तोड़ता है।
In simple words: संवदिया को संवाद हूबहू याद रखने की कला आनी चाहिए, जबकि गाँव वाले उसे निकम्मा और कामचोर समझते थे।
Exam Tip: संवदिया की वास्तविक कला और ग्रामीण समाज की संकीर्ण सोच दोनों का अंतर स्पष्ट करें।
Question 2. बड़ी बहुरिया अपने मायके क्या संदेश भेजना चाहती थी?
Answer: बड़ी बहुरिया अपनी माँ के पास यह संदेश भेजना चाहती थी कि वह भाई-भाभियों की नौकरी करके, बच्चों की जूठन खाकर और किसी कोने में पड़कर जी लेगी, लेकिन अब वह बड़ी हवेली में और अपमान सहकर नहीं रह सकती। यदि उसकी माँ उसे यहाँ से नहीं ले गई तो वह आत्महत्या कर लेगी क्योंकि बथुआ-साग खाकर कब और किसके लिए जिए?
In simple words: बड़ी बहुरिया ने संदेश भेजा कि वह अपमान और कष्ट सहकर वहाँ नहीं रह सकती, अतः माँ उसे तुरंत अपने घर ले जाए अन्यथा वह आत्महत्या कर लेगी।
Exam Tip: बड़ी बहुरिया की विवशता, पीड़ा और संदेश के मार्मिक शब्दों को उत्तर में शामिल करें।
Question 3. बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन ने क्या सोचा?
Answer: बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन को बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि आज के समय में जब गाँव-गाँव में डाकघर खुल चुके हैं, तब बड़ी बहुरिया ने उसे क्यों बुलाया है? उसने अंदाजा लगाया कि अवश्य ही कोई अत्यंत गुप्त संदेश मायके ले जाना होगा जिसे डाक से नहीं भेजा जा सकता।
In simple words: डाकखाने के इस दौर में बुलावा आने पर हरगोबिन समझ गया कि जरूर कोई गोपनीय और गंभीर संदेश पहुँचाना है।
Exam Tip: आधुनिक संचार साधनों के बीच संवदिया की प्रासंगिकता और हरगोबिन के अनुमान का जिक्र करें।
Question 4. बड़ी हवेली पहुंचकर हरगोबिन किन यादों में खो गया?
Answer: बड़ी हवेली पहुँचकर हरगोबिन अतीत के दिनों में खो गया जब वहाँ नौकर-नौकरियों की भारी भीड़ हुआ करती थी और रौनक रहती थी। लेकिन समय कितना बदल गया था कि आज वही बड़ी बहुरिया सूप में अनाज फटक रही थी और परिवार बिखर चुका था।
In simple words: हवेली के पुराने वैभव और वर्तमान की दयनीय स्थिति की तुलना करके हरगोबिन अतीत की यादों में खो गया।
Exam Tip: हवेली के बदलते स्वरूप और बड़ी बहुरिया की दशा के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 5. गाड़ी पर सवार होने के बाद संवदिया के मन में काँटे की चुभन का अनुभव क्यों हो रहा था? उससे छुटकारा पाने का उसने क्या उपाय सोचा?
Answer: गाड़ी पर सवार होने के बाद हरगोबिन को बड़ी बहुरिया के संवाद का प्रत्येक शब्द काँटे की तरह चुभ रहा था क्योंकि उसके संवाद में उसकी असीम पीड़ा, विवशता और आत्महत्या जैसी बातें थीं। इस मानसिक चुभन और बेचैनी से छुटकारा पाने के लिए उसने अपने सहयात्री से बातचीत करने का उपाय सोचा।
In simple words: बड़ी बहुरिया के दर्दनाक संदेश को याद करके हरगोबिन का मन बेचैन हो गया और इस मानसिक पीड़ा को मिटाने के लिए उसने साथी से बात करने की कोशिश की।
Exam Tip: संवाद के दुखों का भार और उससे मुक्ति पाने के लिए सहयात्री से बातचीत के प्रयास को दर्शाएँ।
Question 6. बड़ी बहुरिया के द्वारा अपनी माँ को भेजा गया संदेश, हरगोबिन क्यों नही सुना सका?
*Answer: हरगोबिन के मन में अपने गाँव और बड़ी बहुरिया के प्रति बहुत सम्मान था। वह उसे 'गाँव की लक्ष्मी' मानता था। उसे लगा कि यदि यह संदेश उसने सुना दिया तो लोग उसके गाँव की बदनामी करेंगे और थूकेंगे। अपने गाँव की मान-मर्यादा और प्रतिष्ठा बचाने के कारण वह बड़ी बहुरिया का वास्तविक और दर्दनाक संदेश उसकी माँ को नहीं सुना सका।
In simple words: गाँव की बदनामी के डर से और उसे 'गाँव की लक्ष्मी' मानने के कारण हरगोबिन बड़ी बहुरिया का दुखद संदेश उसकी माँ तक नहीं पहुँचा पाया।
Exam Tip: ग्रामीण प्रतिष्ठा, लोक-लाज और हरगोबिन की दुविधा के द्वंद्व को स्पष्ट करें।
Question 7. “संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है।” -से क्या तात्पर्य है?
Answer: इस कथन से तात्पर्य यह है कि लोग संवदिया की बहुत खातिरदारी करते थे और उसे भरपेट भोजन कराते थे क्योंकि वह लंबी यात्रा करके उनके प्रियजनों का संदेश लाता था। भोजन करने के बाद थकान मिटाने के लिए वह गहरी नींद सोता था। ग्रामीण समाज की संवदिया के प्रति यह एक आम धारणा थी।
In simple words: संवदिया जब संदेश पहुँचाने जाता था तो लोग उसकी खूब आवभगत करते थे, जिसे लोग उसके खाने-सोने की आदत से जोड़ते थे।
Exam Tip: आदर-सत्कार और संवदिया के विश्राम के संदर्भ को स्पष्ट करें।
Question 8. जलालगढ़ पहुँचने के बाद हरगोबिन ने बड़ी बहुरिया से माफी क्यों माँगी तथा उसके सामने क्या संकल्प लिया?
Answer: जलालगढ़ पहुँचकर हरगोबिन ने बड़ी बहुरिया के पैर पकड़ लिए और सही संदेश न पहुँचा पाने के कारण माफी माँगी। उसने संकल्प लिया कि वह अब निठल्ला नहीं बैठेगा, बड़ी बहुरिया को कोई कष्ट नहीं होने देगा और उनके सारे काम खुद करेगा क्योंकि वह उन्हें अपनी और पूरे गाँव की माँ मानता है।
In simple words: सच्चाई न कह पाने के आत्मग्लानि के कारण हरगोबिन ने माफी माँगी और उनकी आजीवन सेवा करने का संकल्प लिया।
Exam Tip: हरगोबिन के प्रायश्चित भाव और कर्तव्य-बोध के संकल्प को रेखांकित करें।
गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफात - भीष्म साहनी
अभ्यास कार्य
Question 1. लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?
Answer: लेखक सन 1938 में सेवाग्राम गया था। लेखक के भाई बलराज साहनी सेवाग्राम में रहते थे और लेखक उन्हीं के पास कुछ दिन रहने के लिए गया था।
In simple words: लेखक अपने भाई बलराज साहनी से मिलने 1938 में सेवाग्राम गया था।
Exam Tip: वर्ष 1938 और भाई बलराज साहनी का संदर्भ अवश्य दें।
Question 2. गांधी जी के साथ प्रातः भ्रमण का लेखक का अनुभव कैसा रहा?
Answer: गांधी जी के साथ प्रातः भ्रमण का लेखक का अनुभव अत्यंत अद्भुत और रोमांचक रहा। गांधी जी को पहली बार सामने देखकर लेखक गदगद हो गया। उन्होंने बड़े प्रेम से लेखक से बात की, वे बहुत धीमी आवाज में बोलते थे और हमेशा हँसकर बात करते थे।
In simple words: गांधी जी के साथ टहलने का अनुभव बहुत सुखद रहा, उन्होंने बहुत स्नेह और सादगी के साथ लेखक से बात की।
Exam Tip: गांधी जी की सादगी, धीमी आवाज और प्रेमपूर्ण व्यवहार का उल्लेख करें।
Question 3. लेखक ने सेवाग्राम में किन-किन लोगों के आने का जिक्र किया है?
Answer: लेखक ने सेवाग्राम में कई जाने-माने व्यक्तित्वों का जिक्र किया है, जिनमें प्रमुख थे - पृथ्वी सिंह आजाद, मीरा बेन, खान अब्दुल गफ्फार खान तथा राजेंद्र बाबू।
In simple words: सेवाग्राम में लेखक की मुलाकात पृथ्वी सिंह आजाद, मीरा बेन, खान अब्दुल गफ्फार खान और राजेंद्र बाबू जैसे महान नेताओं से हुई।
Exam Tip: सभी prominent नेताओं के नाम सही-सही लिखें।
Question 4. रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार किस प्रकार था?
Answer: आश्रम के बाहर एक बालक पेट दर्द से छटपटा रहा था। गांधी जी ने उसकी परेशानी तुरंत समझ ली और स्वयं उसकी उल्टी कराई। जब तक वह उल्टी करता रहा, गांधी जी स्नेह पूर्वक उसकी पीठ पर हाथ रखे झुके रहे और बाद में उसे लेटने के लिए कहा।
In simple words: गांधी जी ने एक बीमार बच्चे की बड़े प्रेम और सेवा-भाव से खुद देखभाल की और उसकी उल्टी कराते समय उसकी पीठ सहलाते रहे।
Exam Tip: गांधी जी के सेवा-भाव और मानवीय संवेदना को दर्शाने वाली इस घटना का वर्णन करें।
Question 5. कश्मीर में नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया गया?
Answer: कश्मीर यात्रा पर पहुँचे पंडित जवाहरलाल नेहरू का भव्य स्वागत किया गया। शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी में, शहर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक, नावों में उनकी शानदार शोभायात्रा निकाली गई।
In simple words: शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी में नौकाओं द्वारा भव्य शोभायात्रा निकालकर नेहरू जी का स्वागत किया गया।
Exam Tip: शेख अब्दुल्ला और झेलम नदी की नौका-शोभायात्रा का उल्लेख करें।
Question 6. अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता प्रकट होती है?
Answer: अखबार वाली घटना से नेहरू जी की शालीनता, विनम्रता और शिष्टाचार प्रकट होता है। जब लेखक ने नेहरू जी से अखबार लेने के संकोच में चुपचाप इंतजार किया, तो नेहरू जी ने डाँटने के बजाय बड़े ही कोमल शब्दों में कहा - "आपने देख लिया हो तो क्या मैं भी एक नजर देख सकता हूँ?" इससे उनकी महानता झलकती है।
In simple words: नेहरू जी की शालीनता और बड़प्पन इस बात से झलकता है कि उन्होंने अखबार माँगने में भी लेखक को शर्मिंदा नहीं होने दिया और अत्यंत विनम्रता से बात की।
Exam Tip: नेहरू जी के लोकतांत्रिक और विनम्र स्वभाव को इस प्रसंग के माध्यम से समझाएँ।
Question 7. अराफात के आतिथ्य प्रेम की किन्हीं दो घटनाओं का वर्णन कीजिए?
Answer: यास्सेर अराफात के आतिथ्य प्रेम की दो प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित थीं: पहला, वे लेखक को अपने हाथों से फल छील-छीलकर खिला रहे थे और शहद की चाय बना रहे थे। दूसरा, जब भोजन के बाद लेखक हाथ धोने गया तो उसने देखा कि अराफात खुद गुसलखाने के बाहर तौलिया लिए खड़े हैं।
In simple words: अराफात ने स्वयं अपने हाथों से फल खिलाए और हाथ धोने के बाद तौलिया लेकर खड़े रहे, जो उनके असीम आतिथ्य प्रेम को दर्शाता है।
Exam Tip: फल छीलने और तौलिया लेकर खड़े रहने वाले दोनों प्रसंगों का उल्लेख करें।
Question 8. “वे आपके ही नहीं हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।” इस कथन से अराफात का क्या तात्पर्य है?
Answer: इस कथन से अराफात का तात्पर्य यह था कि महात्मा गांधी केवल भारत के ही नहीं बल्कि पूरी मानवता और स्वतंत्रता के प्रेरणास्रोत थे। उनके सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के आंदोलनों का सम्मान पूरा विश्व करता था। फिलिस्तीनी संघर्ष के लिए अहिंसक मार्ग अपनाने वाले अराफात के मन में गांधी जी के प्रति अगाध आदर था।
In simple words: अराफात ने कहा कि गांधी जी पूरी दुनिया और फिलिस्तीनियों के लिए भी उतने ही आदरणीय हैं जितने भारतीयों के लिए।
Exam Tip: गांधी जी के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और फिलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष से उसके संबंध को स्पष्ट करें।
लघुकथाएँ - असगर वजाहत
(क) शेर
अभ्यास कार्य
Question 1. 'शेर' कहानी में 'शेर' तथा 'जंग के जानवर' किस-2 के प्रतीक है?
Answer: 'शेर' कहानी में 'शेर' देश की निरंकुश और शोषक 'सत्ता' या शासन व्यवस्था का प्रतीक है, जबकि 'जंग के जानवर' समाज की 'सामान्य जनता' के प्रतीक हैं जो किसी न किसी प्रलोभन या भय में फँस जाते हैं।
In simple words: शेर सत्ता का प्रतीक है और जंगल के जानवर आम सीधी-साधी जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Exam Tip: प्रतीकात्मकता को स्पष्ट करते हुए लिखें कि शेर = सत्ता और जानवर = जनता।
Question 2. लोमड़ी स्वेच्छा से शेर के मुँह में क्यों जा रही थी?
Answer: लोमड़ी स्वेच्छा से शेर के मुँह में इसलिए जा रही थी क्योंकि उसे यह प्रलोभन और झाँसा दिया गया था कि शेर के मुँह के अंदर 'रोजगार का दफ्तर' है जहाँ उसे नौकरी मिल जाएगी।
In simple words: रोजगार मिलने के झूठे प्रलोभन के कारण लोमड़ी खुद चलकर शेर के मुँह में जा रही थी।
Exam Tip: सत्ता द्वारा दिए जाने वाले झूठे वादों और प्रलोभनों का उल्लेख करें।
Question 3. शेर के मुँह तथा रोजगार के दफ्तर के बीच क्या अंतर है?
Answer: शेर का मुँह और रोजगार का दफ्तर में यह अंतर है कि शेर का मुँह मात्र एक छलावा और जाल है जहाँ जनता को धोखा देकर समाप्त किया जाता है, जबकि वास्तविक रोजगार दफ्तर रोजगार प्राप्ति का एक माध्यम होता है।
In simple words: शेर का मुँह विनाश का धोखा है जबकि वास्तविक दफ्तर से काम मिलता है, सत्ता रोजगार के नाम पर सिर्फ छल करती है।
Exam Tip: छलावे और वास्तविकता के इस अंतर को तीखे व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 4. 'प्रमाण से अधिक महत्वपूर्ण है विश्वास।' - कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
*Answer: इस कथन के माध्यम से लेखक ने व्यवस्था और ठगों की उस मानसिकता पर प्रहार किया है जो जनता से अपनी बात के प्रमाण नहीं मांगते बल्कि आँख मूँदकर विश्वास करने का आग्रह करते हैं। सत्ताधारी लोग जनता को बिना किसी सबूत के अपनी झूठी बातों पर भरोसा करने के लिए मजबूर करते हैं और उनके इस अंधे विश्वास का अनुचित लाभ उठाते हैं।
In simple words: ठग और शोषक लोग सबूत मांगने के बजाय लोगों से आंख मूंदकर विश्वास करने को कहते हैं ताकि वे उनका शोषण कर सकें।
Exam Tip: सत्ता के पाखंड और तर्कों के अभाव को उजागर करें।
Question 5. राजा ने कौन-2 से हुक्म निकाले? ऐसे हुक्म निकालने के क्या कारण थे?
Answer: राजा ने देश में शांति, उत्पादन और तरक्की का हवाला देते हुए जनता को अपनी आँखें, कान और मुँह बंद रखने के हुक्म निकाले। ऐसे हुक्म निकालने का मुख्य कारण यह था कि जनता राजा के निरंकुश, स्वार्थी और अन्यायपूर्ण कार्यों को न देख सके, उनके खिलाफ आवाज न उठा सके और सत्ता का विरोध न कर सके।
In simple words: राजा ने जनता को अंधी, बहरी और गूंगी बनाने के फरमान इसलिए जारी किए ताकि उसकी तानाशाही के खिलाफ कोई सवाल न उठ सके।
Exam Tip: तानाशाही शासकों की दमनकारी नीतियों और जनता को चुप कराने के षड्यंत्र को स्पष्ट करें।
Question 6. यदि जनता राज्य की स्थिति की ओर से आँखें बंद कर ले तो उसका राज्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: यदि जनता राज्य की स्थिति के प्रति उदासीन हो जाती है और आँखें बंद कर लेती है, तो शासक वर्ग पूरी तरह निरंकुश हो जाता है। शासक अपनी व्यक्तिगत उन्नति तो खूब करता है किंतु राज्य की प्रगति रुक जाती है और वह राज्य के संसाधनों का प्रयोग केवल अपने स्वार्थ के लिए करता है।
In simple words: जनता के आँख मूंद लेने से शासक तानाशाह बन जाता है और जनता के अधिकारों का हनन करके केवल अपना विकास करता है।
Exam Tip: नागरिक जागरूकता के महत्व और शासक की निरंकुशता के परिणामों को दर्शाएँ।
Question 7. खैराती, रामू और छिद्दू ने जब आँखें खोली तो उन्हें सामने राजा ही क्यों दिखाई दिया?
Answer: खैराती, रामू और छिद्दू जैसी जागरूक जनता ने जब राजा के आदेश पर लंबे समय तक अपनी आँखें बंद रखीं और बाद में जब उन्होंने अपनी आँखें खोलीं, तब तक सत्ता इतनी शक्तिशाली और सर्वव्यापी हो चुकी थी कि उन्हें सिवाय राजा के और कुछ दिखाई नहीं दिया। प्रजा का अस्तित्व समाप्त हो चुका था और चारों ओर केवल सत्ता का प्रभुत्व था।
In simple words: लंबे समय तक अज्ञानता में रहने के कारण जब जनता ने आँखें खोलीं, तब तक तानाशाही इतनी हावी हो चुकी थी कि जनता मिट चुकी थी और केवल राजा बचा था।
Exam Tip: तानाशाही के अति विस्तार और जनता के अस्तित्व के विलोप को स्पष्ट करें।
Question 8. मुनाफा बढ़ाने के लिए मिल मालिक ने क्या उपाय सोचा?
Answer: मुनाफा बढ़ाने के लिए मिल मालिक ने पहले मजदूरों के चार हाथ लगाने की योजना बनाई, जिसमें असफल होने पर उसने यह सोचा कि मजदूरों का वेतन आधा कर दिया जाए और दुगुने मजदूर काम पर रख लिए जाएँ। इससे बिना किसी यंत्र के उसका मुनाफा अपने आप दुगुना हो जाएगा।
In simple words: मजदूरों के चार हाथ लगवाने की असफल कोशिश के बाद मालिक ने उनका वेतन आधा करके दुगुने मजदूर रखने का शोषक तरीका सोचा।
Exam Tip: पूँजीपति वर्ग द्वारा मजदूरों के भीषण आर्थिक शोषण की इस नीति को स्पष्ट करें।
Question 9. हाथी तथा किसान के बीच फसल का बँटवारा किस प्रकार हुआ?
Answer: हाथी (पूँजीपति) ने किसान को साझे की खेती का प्रलोभन देकर राजी कर लिया और जब फसल तैयार हुई तो बँटवारे के समय उसने चालाकी और बल का प्रयोग करते हुए किसान की सारी फसल हड़प ली और किसान ठगा रह गया।
In simple words: पूँजीरूपी हाथी ने साझे की खेती के नाम पर भोले-भाले किसान की मेहनत की सारी फसल धोखे से अपने कब्जे में ले ली।
Exam Tip: पूँजीपतियों और किसानों के बीच के शोषणकारी संबंधों को रेखांकित करें।
Question 10. किसान साझे की खेती क्यों नही करना चाहता था?
Answer: किसान साझे की खेती इसलिए नहीं करना चाहता था क्योंकि उसके पूर्व में साझे की खेती के संबंध में बहुत कड़वे अनुभव थे। साझे की खेती से उसका भरण-पोषण नहीं होता था और पूँजीपति उसकी सारी फसल हड़प लेते थे।
In simple words: पिछले बुरे अनुभवों के कारण किसान जनता जानती थी कि साझे की खेती से गरीबों का पेट नहीं भरता बल्कि पूँजीपति सब लूट लेते हैं।
Exam Tip: किसानों के ऐतिहासिक अनुभवों और शोषण के भय को स्पष्ट करें।
जहाँ कोई वापसी नहीं - निर्मल वर्मा
अभ्यास कार्य
Question 1. अमझर से आप क्या समझते हैं? अमझर गाँव में सूनापन क्यों है?
Answer: 'अमझर' सिंगरौली क्षेत्र का एक ऐसा गाँव था जहाँ आम बहुत झड़ते थे अर्थात आमों की अत्यधिक पैदावार होती थी। अमझर गाँव में सूनापन इसलिए है क्योंकि जब से 'अमरोली प्रोजेक्ट' के अंतर्गत यह घोषणा हुई कि कई गाँव उजाड़ दिए जाएँगे, तब से वहाँ के पेड़ सूखने लगे और लोगों को जबरन विस्थापित कर दिया गया।
In simple words: अमझर वह गाँव है जहाँ आम खूब होते थे, लेकिन औद्योगिक प्रोजेक्ट के कारण उजाड़े जाने से अब वहाँ वीरानी छा गई है।
Exam Tip: अमझर के नाम के अर्थ और औद्योगिकीकरण से उपजे विस्थापन के दर्द को बताएं।
Question 2. आधुनिक भारत के 'नए शरणार्थी' किन्हें कहा गया है?
Answer: आधुनिक भारत के 'नए शरणार्थी' उन भोले-भाले ग्रामीण और आदिवासियों को कहा गया है जिन्हें औद्योगिक विकास, बड़े-बड़े बाँधों और कारखानों के निर्माण के नाम पर उनके अपने ही मूल निवास और जमीनों से हमेशा-हमेशा के लिए बेदखल कर दिया गया है।
In simple words: विकास के नाम पर अपने घरों और जंगलों से उजाड़ कर बेघर किए गए गरीबों को आधुनिक भारत का नया शरणार्थी कहा गया है।
Exam Tip: प्राकृतिक आपदा के शरणार्थियों और विकास के नाम पर उजाड़े गए शरणार्थियों का अंतर स्पष्ट करें।
Question 3. प्रकृति के कारण विस्थापन और औद्योगिकीकरण के कारण विस्थापन में क्या अंतर है?
Answer: प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूकम्प आदि) के कारण जिन लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ता है, वे आपदा टलते ही अपने जाने-पहचानी बस्तियों में वापस लौट आते हैं। इसके विपरीत, औद्योगिकीकरण और विकास के नाम पर जो विस्थापन होता है, उसमें लोग अपने मूल निवास से हमेशा के लिए कट जाते हैं और कभी वापस नहीं लौट सकते।
In simple words: प्राकृतिक आपदा वाले लोग वापस लौट आते हैं, लेकिन औद्योगिकीकरण से उजड़े लोग हमेशा के लिए बेघर हो जाते हैं।
Exam Tip: दोनों प्रकार के विस्थापनों की प्रकृति और वापसी की संभावनाओं पर प्रकाश डालें।
Question 4. लेखक के अनुसार स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी 'ट्रेजेडी' क्या है?
Answer: लेखक के अनुसार स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह है कि हमारे शासक वर्ग ने औद्योगिकीकरण की योजनाएँ बनाते समय पश्चिमी देशों को अपना आदर्श माना। वे प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच के नाजुक संतुलन को पूरी तरह भूल गए और पश्चिम का अंधानुकरण करने लगे।
In simple words: पश्चिमी देशों की नकल करते हुए प्रकृति और संस्कृति के संतुलन को नष्ट करके विकास करना ही आज़ाद भारत की सबसे बड़ी त्रासदी है।
Exam Tip: पश्चिमी अंधानुकरण और पर्यावरणीय असंतुलन को ट्रेजेडी का मुख्य कारण बताएं।
Question 5. औद्योगिकीकरण ने पर्यावरण का संकट पैदा कर दिया है, क्यों और कैसे?
Answer: औद्योगिकीकरण ने खनिज संपदा और कारखानों के नाम पर उपजाऊ भूमि, हरे-भरे जंगलों और पारंपरिक संस्कृतियों को नष्ट कर दिया है। सिंगरौली जैसे समृद्ध और सुंदर क्षेत्रों को 'बैकुंठ' से 'कालापानी' जैसी नरकीय बस्तियों में बदल दिया गया है, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है और जीवन संकट में आ गया है।
In simple words: अंधाधुंध कारखाने लगाने से जंगल, उपजाऊ जमीन और नदियां नष्ट हो गई हैं, जिससे पर्यावरण और मानवीय जीवन दोनों संकट में पड़ गए हैं।
Exam Tip: सिंगरौली का उदाहरण देते हुए पर्यावरण और संस्कृति के विनाश को समझाएँ।
यथास्मै रोचते विश्वम् - रामविलास शर्मा
अभ्यास कार्य
Question 1. लेखक ने कवि की तुलना प्रजापति से क्यों की है?
Answer: लेखक ने कवि की तुलना प्रजापति (ब्रह्मा) से इसलिए की है क्योंकि जिस प्रकार प्रजापति इस सृष्टि का सृजन करता है, उसी प्रकार कवि भी अपनी रचनाओं और कल्पना के बल पर एक नए संसार (साहित्यिक सृष्टि) की रचना करता है। ब्रह्मा द्वारा रचे गए समाज से असंतुष्ट होकर कवि अपने आदर्शों के अनुरूप नई दुनिया बनाता है।
In simple words: ब्रह्मा की तरह कवि भी अपनी कल्पना और कला से एक नए संसार की रचना करता है, इसलिए उसे प्रजापति कहा गया है।
Exam Tip: सृष्टिकर्ता और रचनाकार के रूप में कवि की सृजनात्मकता को स्पष्ट करें।
Question 2. 'साहित्य समाज का दर्पण है।' इस प्रचलित धारणा के विरोध में लेखक ने क्या तर्क दिए हैं?
Answer: लेखक का मानना है कि साहित्य केवल समाज का निर्जीव दर्पण मात्र नहीं है जो केवल यथास्थिति को प्रतिबिंबित करता रहे। कवि समाज के यथार्थ को ग्रहण जरूर करता है, लेकिन वह अपनी रुचि और आदर्शों के अनुसार एक नए समाज की रूपरेखा तैयार करता है। उसका उद्देश्य समाज को केवल दिखाना नहीं, बल्कि उसे बदलना और बेहतर बनाना है।
In simple words: साहित्य सिर्फ समाज की नकल (दर्पण) नहीं है, बल्कि कवि अपनी कल्पना से समाज को एक नई दिशा और नया रूप देता है।
Exam Tip: 'दर्पण' और 'सृष्टिकर्ता' के रूप में साहित्य की भूमिका के अंतर को समझाएँ।
Question 3. दुर्लभ गुणों को एक ही पात्र में दिखाने के पीछे कवि का क्या उद्देश्य है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: दुर्लभ गुणों को एक ही पात्र में दिखाने के पीछे कवि का मुख्य उद्देश्य समाज के सम्मुख एक आदर्श प्रस्तुत करना होता है, जिससे लोग प्रेरणा ले सकें। उदाहरण के लिए, वाल्मीकि ने राम के चरित्र में तमाम दुर्लभ औरोत्तम गुणों को समाहित किया ताकि समाज एक मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श का पालन कर सके।
In simple words: समाज के सामने एक प्रेरणादायक आदर्श स्थापित करने के लिए कवि राम जैसे पात्रों में सभी श्रेष्ठ गुणों का समावेश करता है।
Exam Tip: वाल्मीकि रामायण और भगवान राम के चरित्र का उदाहरण देते हुए उत्तर को परिपक्व बनाएँ।
Question 4. 'साहित्य थके हुए मनुष्य के लिए विश्राम ही नहीं है वह उसे आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित भी करता है।' स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन का आशय यह है कि साहित्य केवल निराशा और थकान में आराम देने वाला साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन के संघर्ष क्षेत्र में डटे रहने की प्रेरणा देता है। जिस प्रकार महाभारत में कृष्ण ने पाञ्चजन्य शंख बजाकर अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया था, उसी प्रकार साहित्यकार लोगों में उत्साह भरकर उन्हें कर्म और संघर्ष के लिए तैयार करता है।
In simple words: साहित्य सिर्फ आराम देने की चीज नहीं है, बल्कि यह मनुष्य में नया जोश भरकर उसे जीवन के संघर्षों से लड़ने की प्रेरणा देता है।
Exam Tip: कुरुक्षेत्र और पाञ्चजन्य शंख के पौराणिक संदर्भ का उपयोग करें।
Question 5. 'मानव संबंधों से परे साहित्य नहीं है।' - कथन की समीक्षा कीजिए।
Answer: साहित्य की रचना का मूल आधार मानव संबंध ही हैं। कवि के मन-मस्तिष्क में मानवीय संबंधों की भावना इतनी प्रबल होती है कि वह ईश्वर को भी मानवीय रूप में चित्रित करता है। समाज की रूढ़ियों और बंधनों से मुक्ति का प्रयास करने वाले साहित्य की जड़ें भी इन्हीं मानव संबंधों में निहित होती हैं।
In simple words: साहित्य का केंद्रबिंदु मनुष्य और उसके आपसी संबंध हैं, जिनके बिना किसी भी साहित्यिक रचना की कल्पना नहीं की जा सकती।
Exam Tip: मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक संबंधों के ताने-बाने को साहित्य का प्राण बताएं।
Question 6. पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी में हिंदी साहित्य ने मानव जीवन के विकास में क्या भूमिका निभाई?
Answer: पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी में भक्ति कालीन हिंदी साहित्य ने समाज की रूढ़ियों और बंधनों में जकड़े हुए मानव जीवन को मुक्ति का संदेश दिया। उस दौर के साहित्यकारों ने जनता में आत्मविश्वास जगाया और उन्हें शासक वर्ग के अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने तथा मानवीय गरिमा को पहचानने की प्रेरणा दी।
In simple words: इस काल के साहित्य ने रूढ़ियों और गुलामी की जंजीरों को तोड़कर समाज को नई चेतना और स्वतंत्रता का मार्ग दिखाया।
Exam Tip: भक्तिकाल और लोक-जागरण के संदर्भ को उत्तर में समाहित करें।
Question 7. साहित्य के 'पाञ्चजन्य' से लेखक का क्या तात्पर्य है? साहित्य का पाञ्चजन्य मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है?
Answer: साहित्य के 'पाञ्चजन्य' से लेखक का तात्पर्य उस आह्वान से है जो लोगों को कर्मक्षेत्र में संघर्ष के लिए तैयार करता है। साहित्य का पाञ्चजन्य मनुष्य को यह प्रेरणा देता है कि वह अन्याय और अत्याचार के आगे घुटने न टेके, भाग्य के भरोसे न बैठे, बल्कि पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ समाज और जीवन को बदलने के लिए संघर्ष करे।
In simple words: 'पाञ्चजन्य' यानी संघर्ष का शंखनाद, जो इंसान को निराशा छोड़कर हक और न्याय के लिए लड़ने का जोश भरता है।
Exam Tip: पाञ्चजन्य शंख के प्रतीक के जरिए क्रांतिकारी चेतना को स्पष्ट करें।
Question 8. साहित्यकार के लिए सृष्टा और दृष्टा होना अत्यंत अनिवार्य है? क्यों और कैसे?
Answer: साहित्यकार के लिए 'सृष्टा' (रचनाकार) और 'दृष्टा' (दूरदर्शी/द्रष्टा) दोनों होना इसलिए अनिवार्य है क्योंकि केवल रचना करना पर्याप्त नहीं है; उसे समाज के भविष्य की सही दिशा देखने की दूरदृष्टि भी होनी चाहिए। जो साहित्यकार युग परिवर्तन की भूमिका को समझता है, वही जनता का सही मार्गदर्शक बन सकता है।
In simple words: लेखक को रचनाकार होने के साथ-साथ दूरदर्शी भी होना चाहिए ताकि वह समाज को भविष्य का सही रास्ता दिखा सके।
Exam Tip: सृष्टा (निर्माण) और दृष्टा (दूरदर्शिता) के शाब्दिक और वैचारिक अर्थ को समझाएँ।
Question 9. 'कवि-पुरोहित' के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'कवि-पुरोहित' के रूप में साहित्यकार की भूमिका यह है कि वह समाज को रूढ़ियों, अंधविश्वासों और गुलामी की मानसिकता से मुक्त कराए। वह जनता को सही दिशा दिखाए और उनमें स्वतंत्रता तथा आत्मसम्मान की अलख जगाए, न कि उन्हें भाग्यवादी बनाकर अत्याचार सहने का पाठ पढ़ाए।
In simple words: एक पुरोहित की तरह साहित्यकार समाज का मार्गदर्शक बनकर उसे कुप्रथाओं से बचाता है और प्रगति का पाठ पढ़ाता है।
Exam Tip: पुरोहित के वैचारिक नेतृत्व और साहित्यकार की सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़कर लिखें।
दूसरा देवदास - ममता कालिया
अभ्यास कार्य
Question 1. पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा जी की आरती या भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए?
Answer: संध्या के समय हर की पौड़ी पर गंगा जी की आरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी और भव्य होता है। हजारों भक्तों की भीड़ में सहस्र दीप प्रज्वलित हो उठते हैं। पंडित अपने आसन से उठकर हाथों में पाँच मंजिला नीलांजलि थामकर आरती शुरू करते हैं। घंटे-घड़ियाल गूँजते हैं और लोग अपनी मनोकामनाओं के फूल छोटी-कश्ती बनाकर गंगा की लहरों पर तैराते हैं।
In simple words: संध्या के समय हर की पौड़ी पर दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार, घंटियों की गूँज और तैरते फूलों के बीच गंगा आरती का दृश्य अद्भुत होता है।
Exam Tip: आरती के समय के वातावरण, दीपों और नीलांजलि के दृश्यों का सजीव वर्णन करें।
Question 2. 'गंगा पुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है।' इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन परिवेश की चर्चा कीजिए?
Answer: गंगा पुत्र उन गोताखोरों को कहा जाता है जो घाट पर हर समय तैनात रहते हैं और डूबते लोगों की जान बचाते हैं। उनकी जीविका का एकमात्र साधन श्रद्धालुओं द्वारा गंगा में अर्पित किया जाने वाला धन और सिक्के होते हैं, जिसे वे पानी से मुँह में उठाकर इकट्ठा करते हैं। उनका पूरा जीवन घाट पर ही बीतता है।
In simple words: गंगा पुत्र यानी गोताखोर घाट पर ही जीते हैं और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए पैसों से ही उनका पूरा परिवार अपनी रोजी-रोटी चलाता है।
Exam Tip: गंगा पुत्रों के संघर्षमय और घाट-केंद्रित जीवन का यथार्थ चित्रण करें।
Question 3. पुजारी ने लड़की के 'हम' को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की को अटपटा क्यों लगा?
Answer: पुजारी ने लड़की के 'हम कल आएंगे' वाले वाक्य में 'हम' शब्द को पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका के रूप में समझ लिया और आशीर्वाद दिया कि "खूब फलो-फुलो, जब भी आओ साथ आओ, गंगा मैया मनोकामना पूरी करे।" यह सुनकर लड़के और लड़की को अटपटा इसलिए लगा क्योंकि वे दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह अनजान थे और पुजारी की गलतफहमी के कारण असहज हो गए थे।
In simple words: पुजारी ने अनजान युवक-युवती को प्रेमी समझकर साथ आने का आशीर्वाद दे दिया, जिससे दोनों झेंप गए क्योंकि वे एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे।
Exam Tip: पुजारी की गलतफहमी और दोनों पात्रों की अनभिज्ञता के प्रसंग को स्पष्ट करें।
Question 4. उस छोटी-सी मुलाकात ने संभव के मन में जो उथल-पुथल उत्पन्न कर दी, उसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए?
Answer: उस अनजान लड़की के साथ हुई संक्षिप्त मुलाकात ने संभव के मन का चैन छीन लिया। वह खाना-पीना भूल गया और पूरी रात उसे नींद नहीं आई। उसकी आँखों में उस लड़की की छवि बस गई और वह उसी के बारे में सोचता रहा क्योंकि संभव के जीवन में आने वाली वह पहली लड़की थी।
In simple words: घाट पर हुई उस छोटी सी मुलाकात ने संभव के दिल में ऐसी हलचल मचाई कि उसकी रातों की नींद उड़ गई और वह उसी के ख्यालों में खो गया।
Exam Tip: युवा हृदय के आकर्षण और पहली प्रेम-भावना की कोमलता को दर्शाएँ।
Question 5. 'पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है ..... उसे भी मनोकामना का पीला लाल धागा और उसमें पड़ी गठान का मधुर स्मरण हो आया', कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए?
Answer: इस कथन का आशय यह है कि मंसा देवी के मंदिर में लाल-पीले धागे से मन्नत माँगने वाली पारो और संभव का मिलन किसी चमत्कार से कम नहीं था। मन्नत का धागा बाँधते समय पारो ने जिस अगाध विश्वास के साथ प्रार्थना की थी, वह इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी, इसका उसे विश्वास नहीं था। यह प्रेम और आस्था के संयोग को दर्शाता है।
In simple words: मंदिर में धागा बाँधते वक्त पारो ने जो मन्नत माँगी थी, वह इतनी जल्दी सच हो जाएगी, यह उसके लिए एक बहुत ही प्यारा और जादुई अनुभव था।
Exam Tip: मन्नत के धागे और संयोग के महत्व को कहानी के संदर्भ में समझाएँ।
Question 6. मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है :- कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन कीजिए?
Answer: इस कथन में पारो की अत्यधिक प्रसन्नता और आश्चर्यचकित मनोदशा का वर्णन है। भीड़-भाड़े वाले हरिद्वार में जिस युवक से उसकी मुलाकात हुई थी, उसी से दोबारा इतनी जल्दी मंसा देवी के मंदिर में भेंट हो जाना उसके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। वह फूली नहीं समा रही थी और खुद को दुनिया की सबसे भाग्यशाली लड़की मान रही थी।
In simple words: पारो मन ही मन बहुत खुश थी कि देवी ने उसकी मुराद इतनी जल्दी पूरी कर दी और जिसे ढूँढ रही थी वह सामने आ गया।
Exam Tip: पारो के उत्साह, आश्चर्य और प्रेम की आंतरिक भावनाओं को व्यक्त करें।
Question 7. दूसरा देवदास कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए?
Answer: 'देवदास' उस व्यक्ति का प्रतीक है जो अपनी प्रेमिका को पाने के लिए पागलपन की हद तक प्यार और प्रयास करता है। कहानी का नायक संभव भी पारो को पाने के लिए हरसंभव प्रयास करता है और उसके प्रेम में पूरी तरह समर्पित है। इसलिए 'दूसरा देवदास' शीर्षक इस कहानी की मूल भावना और नायक के चरित्र के अनुकूल पूर्णतया सार्थक है।
In simple words: प्रेम में दीवानेपन और समर्पण के प्रतीक के रूप में नायक का नाम 'दूसरा देवदास' रखना पूरी तरह उचित और सार्थक है।
Exam Tip: 'देवदास' के प्रतीकात्मक अर्थ और नायक संभव की प्रेम-साधना की तुलना करें।
Question 8. “हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा।” स्पष्ट कीजिए।
Answer: संभव मन में पारो से मिलने की तीव्र इच्छा लिए हुए था। उसे मिलने की आशा तो थी, किंतु इतनी जल्दी उसकी मनोकामना पूरी हो जाएगी, ऐसा उसने कभी नहीं सोचा था। जब अचानक मंदिर में पारो उसके सामने प्रकट हुई तो उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ और वह ईश्वर का धन्यवाद करने लगा।
In simple words: संभव ने कभी नहीं सोचा था कि उसकी मन्नत इतनी जल्दी रंग लाएगी और पारो से उसकी दोबारा भेंट इतनी आसानी से हो जाएगी।
Exam Tip: आकस्मिक मिलन और नायक के आश्चर्यमिश्रित आनंद को स्पष्ट करें।
कुटज - हजारी प्रसाद द्विवेदी
अभ्यास कार्य
Question 1. कुटज को गाढ़े का साथी क्यों कहा जाता है?
Answer: कुटज को गाढ़े का साथी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह संकट या कठिन समय में काम आता है। उदाहरण के लिए, जब कालिदास रामगिरि पहुँचे थे और उन्हें मेघ की अभ्यर्थना के लिए कोई फूल नहीं मिला था, तब इसी कुटज के फूलों ने उनके संतप्त चित्त को सहारा दिया था।
In simple words: बुरे वक्त या मुसीबत के समय जो साथ निभाए, उसे गाढ़े का साथी कहते हैं और कुटज ने कालिदास की कठिनाई में मदद की थी।
Exam Tip: कालिदास और मेघदूत के प्रसंग के साथ कुटज की उपयोगिता को दर्शाएँ।
Question 2. 'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए?
Answer: लेखक का मानना है कि नाम केवल एक शब्द नहीं होता। नाम इसलिए बड़ा होता है क्योंकि उसे सामाजिक स्वीकृति मिली होती है। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। समाज जिस वस्तु या व्यक्ति को मान्यता दे देता है, उसका नाम महत्वपूर्ण बन जाता है।
In simple words: नाम इसलिए बड़ा होता है क्योंकि उसे समाज द्वारा मान्यता और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
Exam Tip: सामाजिक स्वीकृति और नाम की महत्ता के संबंध को स्पष्ट करें।
Question 3. 'कुट' 'कुटज' और 'कुटनी' शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।
Answer: 'कुट' का अर्थ घड़ा या घर होता है। 'कुटज' का अर्थ है जो कुट (घड़े या चट्टान) से पैदा हुआ हो (जैसे अगस्त्य मुनि या कुटज का पौधा)। इसी मूल धातु से एक जरा गलत ढंग की दासी के अर्थ में 'कुटनी' शब्द बना है, जिसे संस्कृत में 'कुट्टनी' कहा जाता है। इन सभी शब्दों का मूल स्रोत 'कुट' है।
In simple words: 'कुट' (घड़े/घर) से ही 'कुटज' (घड़े से उत्पन्न) और 'कुटनी' जैसे शब्द बने हैं, जो भाषाई दृष्टि से जुड़े हैं।
Exam Tip: व्युत्पत्ति (Etymology) के आधार पर इन तीनों शब्दों के अंतःसंबंध को समझाएँ।
Question 4. कुटज किस प्रकार अपनी अपराजय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?
Answer: कुटज का पौधा हिमालय की सूखी और कठोर चट्टानों के बीच उगता है। वह धधकती लू में भी हरा-भरा रहता है और कठोर पाषाण को भेदकर पाताल से रस खींचकर जीवित रहता है। इस प्रकार वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी अजेय जीवन-शक्ति का परिचय देता है।
In simple words: सूखी चट्टानों और चिलचिलाती धूप में भी हरा-भरा रहकर कुटज अपनी कभी न हार मानने वाली जीवन-शक्ति दिखाता है।
Exam Tip: कुटज के संघर्ष और उसकी जिजीविषा के प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन करें।
Question 5. 'कुटज' हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।
Answer: कुटज हमें यह उपदेश देता है कि जीवन में चाहे जितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, हमें कभी घबराना नहीं चाहिए। हमें संघर्ष करते हुए अपनी शान और आत्मसम्मान के साथ जीना चाहिए। स्वार्थ के दायरे से ऊपर उठकर दूसरों के कल्याण के लिए जीना ही सच्ची जीवन-कला है।
In simple words: कुटज सिखाता है कि हर हाल में मस्त रहो, संघर्ष से डरो मत और अपने आत्मसम्मान से समझौता मत करो।
Exam Tip: कुटज के जीवन-दर्शन और मानवीय प्रेरणा के संदेश पर टिप्पणी लिखें।
Question 6. कुटज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?
Answer: कुटज के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हर हाल में और मस्तों की तरह जीना चाहिए। अपना आत्मसम्मान हमेशा बनाए रखना चाहिए, कभी किसी की चापलूसी नहीं करनी चाहिए और न ही जीवन में कभी हार माननी चाहिए।
In simple words: कठिनाइयों से लड्कर आत्मसम्मान के साथ जीने और कभी किसी के आगे न झुकने की सीख कुटज से मिलती है।
Exam Tip: आत्मसम्मान, निर्भयता और जिजीविषा को मुख्य सीख के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 7. कुटज क्या केवल जी रहा है - लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमजोरियों पर टिप्पणी की है?
Answer: यह प्रश्न उठाकर लेखक ने मनुष्य की उस कायरता और लाचारी पर प्रहार किया है जहाँ मनुष्य थोड़ी सी मुसीबत आने पर दूसरों के द्वार पर भीख माँगने या मदद के लिए हाथ फैलाने चला जाता है। इसके विपरीत कुटज किसी के सामने नहीं झुकता। आज का मानव स्वार्थी और आत्मविश्वासीहीन होता जा रहा है।
In simple words: इंसान थोड़ी सी मुसीबत में दूसरों के आगे हाथ फैला देता है, जबकि कुटज अपनी शान से खड़ा रहता है, यही मानवीय कमजोरी लेखक ने बताई है।
Exam Tip: मनुष्य की परमुखापेक्षी प्रवृत्ति और कुटज के स्वावलंबन की तुलना करें।
Question 8. लेखक क्यों मानता है कि स्वार्थ से भी बढ़कर जिजीविषा से भी प्रचंड कोई न कोई शक्ति अवश्य है? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।
*Answer: लेखक का मानना है कि केवल अपनी जान बचाना या स्वार्थी होना ही जीवन नहीं है; उससे बड़ी शक्ति 'आत्मा' और 'परमार्थ' है। याज्ञवल्क्य के अनुसार जब तक मनुष्य अपने में सबको और सब में अपने को (समष्टि बुद्धि) नहीं देखता, तब तक उसे पूर्ण सुख नहीं मिलता। अपने को न्योछावर कर देना ही सच्ची जिजीविषा है।
In simple words: सिर्फ अपने लिए जीना स्वार्थ है, लेकिन संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए खुद को समर्पित कर देना सबसे बड़ी शक्ति है।
Exam Tip: आत्मिक विस्तार, समष्टि बुद्धि और परमार्थ के दार्शनिक दृष्टिकोण को समझाएँ।
Question 9. 'कुटज' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं।
Answer: पाठ में बताया गया है कि सुख और दुख बाहरी परिस्थितियों से नहीं बल्कि हमारे मन की स्थिति पर निर्भर करते हैं। वास्तविक सुखी व्यक्ति वह है जिसका मन उसके वश में है, और दुखी वह है जिसका मन परवश (गुलाम) है। दूसरों की चाटुकारिता और खुशामद करने वाला व्यक्ति हमेशा दुखी रहता है।
In simple words: सुख और दुख मन के भ्रम हैं; जिसका मन अपने वश में है वही असली सुखी है, बाकी सब गुलाम हैं।
Exam Tip: मन की स्वाधीनता और परवशता के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 10. पाठ के आधार पर कुटज की विशेषताएँ बताइए।
Answer: कुटज की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: यह अत्यंत विषम परिस्थितियों (सूखी चट्टानों) में भी जीवित रहता है, यह स्वावलंबी और आत्मविश्वासी है, यह कभी किसी के आगे नहीं झुकता, यह अजेय जीवन-शक्ति (जिजीविषा) का प्रतीक है और यह सदा प्रसन्नचित्त रहकर दूसरों को प्रेरणा देता है।
In simple words: कुटज अडिग, स्वावलंबी, साहसी और विपरीत परिस्थितियों में भी शान से जीने वाला एक अनूठा पौधा है।
Exam Tip: कुटज की विशेषताओं को बिंदुओं के रूप में सुंदर ढंग से लिखें।
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