Class 12 Hindi Practice Assignments: CBSE Class 12 Hindi Core Vitaan Assignment
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प्रश्न 1. श्रम विभाजन किसे कहते हैं ?
Answer: श्रम विभाजन का अर्थ है - मानवोपयोगी कार्यों का वर्गीकरण करना। प्रत्येक कार्य को कुशलता से करने के लिए योग्यता के अनुसार विभिन्न कामों को आपस में बाँट लेना। कर्म और मानव-क्षमता पर आधारित यह विभाजन सभ्य समाज के लिए आवश्यक है।
In simple words: श्रम विभाजन का अर्थ अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार कार्यों को आपस में बाँटना है, जो कि सभ्य समाज के लिए आवश्यक है।
Exam Tip: उत्तर लिखते समय 'मानवोपयोगी कार्यों का वर्गीकरण' और 'क्षमता के अनुसार काम का बँटवारा' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
प्रश्न 2. श्रम विभाजन और श्रमिक-विभाजन का अंतर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: श्रम विभाजन में क्षमता और कार्य-कुशलता के आधार पर काम का बँटवारा होता है, जबकि श्रमिक-विभाजन में लोगों को जन्म के आधार पर बाँटकर पैतृक पेशे को अपनाने के लिए बाध्य किया जाता है। श्रम-विभाजन में व्यक्ति अपनी रुचि के अनुरूप व्यवसाय का चयन करता है। श्रमिक-विभाजन में व्यवसाय का चयन और व्यवसाय-परिवर्तन की भी अनुमति नहीं होती, जिससे समाज में ऊँच नीच का भेदभाव पैदा करता है, यह अस्वाभाविक विभाजन है।
In simple words: श्रम विभाजन योग्यता पर आधारित होता है जबकि श्रमिक-विभाजन जन्म पर आधारित और जबरन थोपा गया विभाजन है।
Exam Tip: दोनों में मुख्य अंतर 'योग्यता/रुचि' (श्रम विभाजन) और 'जन्म/विवशता' (श्रमिक-विभाजन) का है, इसे स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।
प्रश्न 3. लेखक ने किस बात को विडम्बना कहा है ?
Answer: लेखक कहते हैं कि आज के वैज्ञानिक युग में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो जातिवाद का समर्थन करते हैं और उसको सभ्य समाज के लिए उचित मानकर उसका पोषण करते हैं। यह बात आधुनिक सभ्य और लोकतांत्रिक समाज के लिए विडम्बना है।
In simple words: आज के आधुनिक और वैज्ञानिक युग में भी जातिवाद का समर्थन किया जाना ही लेखक की दृष्टि में सबसे बड़ी विडम्बना है।
Exam Tip: 'वैज्ञानिक युग' और 'जातिवाद का समर्थन' इन दो मुख्य बिंदुओं के आधार पर उत्तर को प्रभावी बनाएँ।
प्रश्न 4. भारत में ऐसी कौन-सी व्यवस्था है जो पूरे विश्व में और कहीं नहीं है ?
Answer: लेखक के अनुसार जन्म के आधार पर किसी का पेशा तय कर देना, जीवनभर एक ही पेशे से बँधे रहना, जाति के आधार पर ऊँच-नीच का भेदभाव करना तथा बेरोजगारी तथा भुखमरी की स्थिति में भी पेशा बदलने की अनुमति न होना ऐसी व्यवस्था है जो विश्व में कहीं नहीं है।
In simple words: भारत में जाति के आधार पर जन्म से ही पेशा तय कर देने और संकट के समय भी उसे बदलने की अनुमति न देने की अनोखी और अस्वाभाविक व्यवस्था है।
Exam Tip: उत्तर में 'जन्म के आधार पर पेशा तय करना' और 'पेशा बदलने की अनुमति न होना' बिंदुओं को अवश्य शामिल करें।
पाठ 1. सिल्वर वेडिंग - मनोहर श्याम जोशी
प्रश्न 1. अपने घर और विद्यालय के आस-पास हो रहे उन बदलावों के बारे में लिखें जो सुविधाजनक और आधुनिक होते हुए भी बुजुर्गों को अच्छे नहीं लगते। अच्छा न लगने के क्या कारण हो सकते हैं ?
Answer: आधुनिक युग परिवर्तनशील एवं अधिक सुविधाजनक है। आज के युवा, आधुनिकता और परिवर्तनशीलता को महत्व देते हैं इसीलिए वे नई तकनीक और फैशन की ओर आकर्षित होते हैं। वे तत्काल नयी जानकारियाँ चाहते हैं, जिसके लिए उनके पास कम्प्यूटर, इण्टरनेट एवं मोबाइल जैसे आधुनिक तकनीकी साधन हैं। इनके माध्यम से वे कम समय में ज्यादा जानकारी एकत्र कर लेते हैं। घर से विद्यालय जाने के लिए अब उनके पास बढ़िया साईकिलें एवं मोटर साईकिलें हैं। आज युवा लड़के और लड़कियों के बीच का अन्तराल काफी कम हो गया है। पुराने जमाने में लड़कियाँ-लड़कों के साथ पढ़ना और मिलना-जुलना ठीक नहीं माना जाता था जैसे आज के परिवेश में है। युवा लड़कों और लड़कियों द्वारा अंग प्रदर्शन आज आम बात हो गई है। वे एक साथ देर रात तक पार्टियाँ करते हैं। इण्टरनेट के माध्यम से असभ्य जानकारियाँ प्राप्त करते हैं। ये सारी बातें उन्हें आधुनिक एवं सुविधाजनक लगती हैं।
दूसरी ओर इस तरह की आधुनिकता बुजुर्गों को रास नहीं आतीं क्योंकि वे जब युवा थे, उस समय संचार के साधनों की कमी थी। पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण वे युवावस्था में अपनी भावनाओं को काबू में रखते थे और अधिक जिम्मेदार होते थे। अपने से बड़ों का आदर करते थे और परंपराओं के अनुसार चलते थे। आधुनिक परिवेश के युवा बड़े-बूढ़ों के साथ बहुत कम समय व्यतीत करते हैं इसलिए सोच एवं दृष्टिकोण में बहुत अन्तर आ गया है। इसी अन्तर को ‘पीढ़ी का अन्तर’ कहते हैं। युवा पीढ़ी की यही नई सोच बुजुर्गों को अच्छी नहीं लगती।
In simple words: आधुनिक समय की तेज जीवनशैली, नई तकनीक और बदलती संस्कृति युवाओं को अच्छी लगती है, जबकि बुजुर्ग अपनी पुरानी परंपराओं और संस्कारों से जुड़े होने के कारण इसे पसंद नहीं करते।
Exam Tip: इस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में 'पीढ़ी के अंतराल' (Generation Gap) की अवधारणा और आधुनिक जीवनशैली के प्रभावों का तार्किक विश्लेषण करें।
प्रश्न 2. यशोदर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है, लेकिन यशोदर बाबू असफल रहते हैं, ऐसा क्यों ?
Answer: यशोदर बाबू अपने आदर्श किशनदा से अधिक प्रभावित हैं और आधुनिक परिवेश में बदलते हुए जीवन-मूल्यों और संस्कारों के विरुद्ध हैं। जबकि उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ खड़ी दिखाई देती है। वह अपने बच्चों के आधुनिक दृष्टिकोण से प्रभावित है। इसलिए यशोदर बाबू की पत्नी समय के साथ परिवर्तित होती है, लेकिन यशोदर बाबू अभी भी किशनदा के संस्कारों और परंपराओं से चिपके हुए हैं।
In simple words: यशोदर बाबू अपने पुराने आदर्शों और संस्कारों को नहीं छोड़ पाए, जबकि उनकी पत्नी ने बच्चों की खुशी के लिए खुद को आधुनिक समय के अनुसार ढाल लिया।
Exam Tip: यशोदर बाबू के 'किशनदा के संस्कारों से जुड़ाव' और पत्नी के 'बच्चों के प्रति लचीले रुख' के बिंदुओं के साथ उत्तर दें।
प्रश्न 3. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के आधार पर पीढ़ी के अंतराल से होने वाले पारिवारिक अलगाव पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: सांस्कृतिक संरक्षण के लिए स्वस्थ परंपराओं की सुरक्षा आवश्यक है, किंतु बदलते समय और परिवेश से सामंजस्य की भी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए, अन्यथा सिल्वर वेडिंग के पात्रों की तरह बिखराव होने लगता है।
In simple words: पुरानी परंपराओं और नई आधुनिक सोच के बीच संतुलन न होने पर परिवार के सदस्यों में दूरियाँ और अलगाव बढ़ने लगता है।
Exam Tip: पारिवारिक सामंजस्य और पीढ़ी के अंतराल के दुष्परिणामों को संक्षेप में स्पष्ट करें।
प्रश्न 4. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी को ध्यान में रखते हुए परंपराओं और सांस्कृतिक संरक्षकों की वर्तमान में उपादेयता पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: परंपराओं और संस्कृति से ही किसी देश की पहचान कायम रहती है। सादगी से जीकर गृहस्थी को बचाया जा सकता है। यदि ऐसा न होता तो शायद यशोदर बाबू की संतानें पढ़-लिखकर योग्य न बनतीं।
In simple words: हमारी संस्कृति और परंपराएँ हमें नैतिक मूल्य और पहचान देती हैं, इसलिए उनका संरक्षण वर्तमान समय में भी बेहद जरूरी है।
Exam Tip: संस्कृति की महत्ता और आधुनिकता के बीच समन्वय पर जोर देते हुए उत्तर लिखें।
प्रश्न 5. “सिल्वर वैडिंग के कथानायक यशोदर बाबू एक आदर्श व्यक्ति हैं और नई पीढ़ी द्वारा उनके विचारों को अपनाना ही उचित है।” इस कथन के पक्ष-विपक्ष में तर्क दीजिए।
Answer: पक्ष: नयी पीढ़ी के युवा उनकी सादगी और व्यक्तित्व के कुछेक प्रेरक पहलुओं को लेकर सफल व संस्कारी नागरिक बन सकते हैं अन्यथा वे अपनी पहचान खो बैठेंगे।
विपक्ष: पुरानी रूढ़ियों को छोड़कर ही नए समाज व नई पीढ़ी के साथ सामंजस्य बिठाया जा सकता है अन्यथा विलगन निश्चित है।
In simple words: यशोदर बाबू के चरित्र में सादगी और कर्तव्यनिष्ठा सराहनीय है, लेकिन अत्यधिक कठोरता और बदलाव न स्वीकारना व्यावहारिक नहीं है।
Exam Tip: प्रश्न के दोनों पक्षों (पक्ष और विपक्ष) का संतुलित मूल्यांकन प्रस्तुत करें।
प्रश्न 6. सिल्वर वेडिंग कहानी की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए।
Answer: संकेत-बिंदु - पीढ़ी के अन्तराल से पैदा हुई बिखराव की पीड़ा।
In simple words: आधुनिकता की दौड़ में परिवार के भीतर बुजुर्गों और युवाओं की सोच में आए अंतर और अकेलेपन की पीड़ा ही इस कहानी की मूल संवेदना है।
Exam Tip: मूल संवेदना में 'पीढ़ी का अंतराल' और 'पारिवारिक विघटन' मुख्य बिंदु होने चाहिए।
प्रश्न 7. किशनदा की कौन-si छवि यशोदर बाबू के मन में बसी हुई थी ?
Answer: संकेत बिंदु - 1. उनकी दफ्तर में विभिन्न रूपों की छवि,
2. सैर पर निकलने वाली छवि,
3. एक आदर्शवादी व्यक्ति के रूप में,
4. परोपकारी व्यक्ति।
In simple words: यशोदर बाबू के मन में किशनदा की एक आदर्शवादी, परोपकारी, मिलनसार और मार्गदर्शक के रूप में गहरी छवि बसी थी।
Exam Tip: बिंदुओं के माध्यम से किशनदा के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को दर्शाएँ।
प्रश्न 8. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी का प्रमुख पात्र बार-बार किशनदा को क्यों याद करता है? इसे आप क्या मानते हैं उसकी सामर्थ्य या कमजोरी? और क्यों ?
Answer: सामर्थ्य मानते हैं, वे उनके प्रेरक थे, उनसे अलग अपने को सोचना भी यशोदर बाबू के लिए मुश्किल था। जीवन का प्रेरणा-स्रोतः तो सदा शक्ति एवं सामर्थ्यका सर्जक होता है।
In simple words: किशनदा की यादें यशोदर बाबू को नैतिक बल और मार्गदर्शन देती हैं, इसलिए यह उनकी कमजोरी नहीं बल्कि उनका मानसिक संबल (सामर्थ्य) है।
Exam Tip: किशनदा के स्मरण को प्रेरणास्रोतः और सामर्थ्य के रूप में सिद्ध करें।
प्रश्न 9. पाठ में ‘जो हुआ होगा’ वाक्य की कितनी अर्थ छवियाँ आप खोज सकते हैं ?
Answer: यशोदर बाबू यही विचार करते हैं कि जिनके बाल-बच्चे ही नहीं होते,वे व्यक्ति अकेलेपन के कारण स्वस्थ दिखने के बाद भी बीमार-से हो जाते हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है। जिसप्रकार यशोदर बाबू अपने आपको परिवार से कटा और अकेला पाते हैं उसीप्रकार अकेलेपन से ग्रस्त होकर उनकी मृत्यु हुई होगी। यह भी कारण हो सकता है कि उनकी बिरादरी से घोर उपेक्षा मिली, इस कारण वे सूख-सूख कर मर गए। किशनदा की मृत्यु के सही कारणों का पता नहीं चल सका। बस यशोदर बाबू यही सोचते रह गए कि किशनदा की मृत्यु कैसे हुई?जिसका उत्तर किसी के पास नहीं था।
In simple words: 'जो हुआ होगा' वाक्य किशनदा की रहस्यमयी मृत्यु और अकेलेपन की त्रासदी की ओर संकेत करता है।
Exam Tip: अकेलेपन, उपेक्षा और रहस्यमय परिस्थितियों को इस वाक्य के संदर्भ में स्पष्ट करें।
प्रश्न 10. वर्तमान समय में परिवार की संरचना,स्वरूप से जुड़े आपके अनुभव इस कहानी से कहाँ तक सामंजस्य बिठा पाते हैं ?
Answer: यशोदर बाबू और उनके बच्चों की सोच में पीढ़ीजन्य अंतराल आ गया है। यशोदर संस्कारों से जुड़ना चाहते हैं और संयुक्त परिवार की संवेदनाओं का अनुभव करते हैं जबकि उनके बच्चे अपने आप में जीना चाहते हैं। अतः जरूरत इस बात की है कि यशोदर बाबू को अपने बच्चों की सकारात्मक नई सोच का स्वागत करना चाहिए, परन्तु यह भी अनिवार्य है कि आधुनिक पीढ़ी के युवा भी वर्तमान बेतुके संस्कार और जीवन मूल्यों के प्रति आकर्षित न हों तथा पुरानी पीढ़ी की अच्छाइयों को ग्रहण करें। यह शुरुआत दोनों तरफ से होनी चाहिए ताकि एक नए एवं संस्कारी समाज की स्थापना की जा सके।
In simple words: आज के एकल परिवारों में भी माता-पिता और बच्चों की सोच का यह टकराव और पीढ़ी का अंतराल आम देखने को मिलता है।
Exam Tip: वर्तमान पारिवारिक परिवेश और कहानी के संघर्ष का तुलनात्मक निष्कर्ष लिखें।
प्रश्न 11. यशोदर बाबू के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: 1. कर्मठ एवं परिश्रमी - सेक्शन ऑफिसर होने के बावजूद दफ्तर में देर तक काम करते थे | वे अन्य कर्मचारियों से अधिक कार्य करते थे।
2. संवेदनशील - यशोदर बाबू अत्यधिक संवेदनशील थे | वे यह बात स्वीकार नहीं कर पाते कि उनका बेटा उनकी इजाजत लिए बिना ही घर का सोफा सेट आदि खरीद लाता है, उनका साईकिल से दफ्तर जाने पर ऐतराज करता है, उन्हें दूध लेने में असुविधा न हो इसलिए ड्रेसिंग गाउन भेंट करता है। पत्नी उनकी बात न मानकर बच्चों के कहे अनुसार चलती है | बेटी विवाह के बंधन में बंधने से इंकार करती है और उसके वस्त्रों में शालीनता नहीं झलकती। परिवारवालों से तालमेल न बैठने के कारण वे अपना अधिकांश समय घर से बाहर मंदिर में तथा सब्जीमंडी में सब्जी खरीदते बिताते हैं।
3. परंपरावादी - वे परंपरावादी थे |आधुनिक समाज में बदलते समीकरणों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे इसलिए परिवार के अन्य सदस्यों से उनका तालमेल नहीं बैठ पा रहा था।
४. धार्मिक व्यक्ति-यशोदर बाबू एक धार्मिक व्यक्ति थे। वे अपना अधिकांश समय पूजा-पाठ और मंदिर में बिताते थे।
In simple words: यशोदर बाबू एक अत्यंत ईमानदार, परिश्रमी, परंपरावादी और संवेदनशील इंसान थे जो आधुनिक बदलावों के बीच खुद को अकेला पाते हैं।
Exam Tip: चारों प्रमुख बिंदुओं (कर्मठता, संवेदनशीलता, परंपरावादिता, धार्मिकता) को अलग-अलग हेडिंग के साथ लिखें।
प्रश्न 12. यशोदर बाबू जैसे लोग समय के साथ ढलने में असफल क्यों होते हैं ?
Answer: ऐसे लोग साधारणतया किसी न किसी से प्रभावित होते हैं, जैसे यशोदर बाबू किशन दा से। ये परंपरागत डर्े पर चलना पसंद करते हैं तथा बदलाव पसंद नहीं करते। अतः समय के साथ ढलने में असफल होते हैं।
In simple words: पुराने संस्कारों से अत्यधिक जुड़ाव और वैचारिक जड़ता के कारण ऐसे लोग बदलते समय के साथ खुद को नहीं बदल पाते।
Exam Tip: 'परंपरागत ढर्रे' और 'बलाव के प्रति अरुचि' को कारण के रूप में दर्शाएँ।
प्रश्न 13. भरे-पूरे परिवार में यशोदर बाबू स्वयं को अधूरा-सा क्यों अनुभव करते हैं ?
Answer: संकेत बिंदु - अपने प्राचीन दायरे से बाहर न निकल सकने के कारण वे स्वयं को अधूरा अनुभव करते हैं।
In simple words: परिवार के सदस्यों के साथ वैचारिक तालमेल न बैठ पाने के कारण वे भरे-पूरे परिवार में भी अकेलापन महसूस करते हैं।
Exam Tip: वैचारिक अलगाव और प्राचीन दायरे से बाहर न आ पाने की विवशता को लिखें।
प्रश्न 14. “अभी तुम्हारे अक्का की इतनी साख है कि सौ रुपए उधार ले सकें।” किन परिस्थितियों में यशोदर बाबू को यह कहना पड़ा?
Answer: संकेत बिंदु - पुत्र द्वारा उनके निकट संबंधी की आर्थिक सहायता के लिए मनाही से आहत होकर ऐसा कहना पड़ा।
In simple words: जब उनके बेटे ने किसी गरीब रिश्तेदार की मदद करने से मना कर दिया, तब अपने आत्मसम्मान और पुराने मूल्यों की रक्षा के लिए उन्हें यह बात कहनी पड़ी।
Exam Tip: पारिवारिक संवेदनहीनता और पिता के आहत आत्मसम्मान को संदर्भ के रूप में प्रस्तुत करें।
प्रश्न 15. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के तथ्य का विश्लेषण कीजिए।
Answer: संकेत बिंदु - पीढ़ी के अंतराल को उजागर कर, वर्तमान समाज की इस प्रकार की सच्चाई से पर्दा उठाया गया है।
In simple words: कहानी का मुख्य तथ्य आधुनिक शहरी जीवन में परिवारों के टूटने और वैचारिक दूरियों की यथार्थ तस्वीर पेश करना है।
Exam Tip: समाज की वास्तविक स्थिति और पीढ़ी के अंतराल को विश्लेषण का आधार बनाएँ।
प्रश्न 16. अपने बच्चों की तरक्की से खुश होने के बाद भी यशोदर बाबू क्या महसूस करते हैं ?
Answer: उनके बच्चे गरीब रिश्तेदारों के प्रति उपेक्षा का भाव रखते हैं। उनकी यह खुशहाली अपनों के बीच परायापन पैदा कर रही है, जो उन्हें अच्छा नहीं लगता।
In simple words: बच्चों की आर्थिक उन्नति के साथ उनके मानवीय मूल्यों में आई गिरावट और अपनों से दूरी यशोदर बाबू को दुखी करती है।
Exam Tip: बच्चों की भौतिक उन्नति बनाम मानवीय मूल्यों के ह्रास की बात लिखें।
प्रश्न 17. आजकल किशनदा जैसी जीवन-शैली अपनाने वाले बहुत कम लोग मिलते हैं, क्यों ?
Answer: किशन दा जैसे लोग मस्ती से जीते हैं, निःस्वार्थ दूसरों की सहायता करते हैं, जबकि आजकल सभी सहायता के बदले कुछ न कुछ पाने की आशा रखते हैं, बिना कुछ पाने की आशा रखे सहायता करने वाले विरले ही होते हैं।
In simple words: आधुनिक युग में स्वार्थ और भौतिकता बढ़ गई है, इसलिए किशनदा जैसे परोपकारी और सादा जीवन जीने वाले लोग अब शायद ही मिलते हैं।
Exam Tip: आज के युग के स्वार्थी परिवेश और किशनदा के निस्वार्थ स्वभाव की तुलना करें।
प्रश्न 18. यशोदर बाबू के बच्चों की कौन-सी बातें प्रशंसनीय हैं और कौन-सा पक्ष आपतिजनक है?
Answer: प्रशंसनीय बातें - १) महत्वाकांक्षी और प्रगतिशील होना | २)जीवन में उन्नति करना | 3)समय और सामर्थ्य के अनुसार घर में आधुनिक सुविधाएँ जुटाना|
आपत्तिजनक बातें - १) व्यवहार, २) पिता, रिश्तेदारों, धर्म और समाज के प्रति नकारात्मक भाव 3) मानवीय सम्बन्धों की गरिमा और संस्कारों में रुचि न लेना |
In simple words: बच्चों की तरक्की और आधुनिक सोच अच्छी है, लेकिन उनका अपने संस्कारों, बड़ों और रिश्तेदारों के प्रति संवेदनहीन व्यवहार आपत्तिजनक है।
प्रश्न 19. आपकी दृष्टि में (पाठ से अलग) सिल्वर वेडिंग मनाने के और कौन से तरीके हो सकते हैं जो यशोदर बाबू को अच्छे लगते?
Answer: मंदिर जाकर,परिवार के साथ कहीं घूमने जाकर,पुत्र-पुत्रियों द्वारा माता-पिता को उपहार देकर आदि।
In simple words: पारिवारिक मेल-मिलाप, धार्मिक अनुष्ठान या सादगीपूर्ण आयोजनों के जरिए भी सिल्वर वेडिंग मनाई जा सकती थी जो उन्हें पसंद आती।
प्रश्न 20. सिल्वर वेडिंग में चटाई का लहँगा किसे कहा गया है ?
Answer: यह एक प्रतीकात्मक प्रयोग है जिसे यशोदर बाबू अपनी पत्नी के लिए प्रयोग करते हैं। उनकी पत्नी पुरानी परंपराओं को छोड़ आधुनिकता में ढल गई है, स्वयं को मॉडर्न समझती है, इसलिए यशोदर बाबू ने उन्हें यह नाम दिया है। वे उन्हें ‘सान्याल बुढ़िया’ तथा ‘बूढ़ी मुँह मुहाँसें, लोग करें तमाशा’ कह कर भी चिढ़ाते हैं।
In simple words: उम्रदराज होने पर भी आधुनिक फैशन अपनाने वाली पत्नी के लिए यशोदर बाबू ने उपहास में 'चटाई का लहँगा' शब्द का प्रयोग किया है।
प्रश्न 21. यशोदर बाबू परिवार के बावजूद स्वयं को अधूरा क्यों मानते हैं ?
Answer: यशोदर बाबू पुरानी परंपराओं को मानने वाले हैं, जबकि उनका सारा परिवार आधुनिक विचारधारा का है। पीढ़ीगत अंतराल के कारण परिवार के साथ ताल-मेल न बिठा पाने के कारण वे स्वयं को अधूरा समझते हैं।
In simple words: वैचारिक मतभेदों और परिवार के बीच अकेलापन महसूस करने के कारण वे खुद को अधूरा मानते हैं।
पाठ 2. जूझ - आनंद यादव
प्रश्न 1. जूझ कहानी के आधार पर दत्ता जी राव देसाई का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: 1. समझदार व्यक्ति – दत्ता जी राव ने छोटे से बालक आनंद की बातों को सुना| फिर आनंद के दादा को बुलाया और आनंद को विद्यालय भेजने पर जोर दिया| उन्होंने दादा से इस प्रकार बातें की कि उन्हें शक ही नहीं हुआ कि ये सब उन्हें आनंद ने बताया है|
2. ग्रामीणों के मददगार – दत्ता जी गाँव के प्रतिष्ठित एवम प्रभावशाली व्यक्ति थे किंतु उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा का दुरुपयोग नहीं किया| ग्रामीण उनके पास अपनी समस्याएँ लेकर आते थे | दत्ता जी उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करते थे|
3. प्रभावशाली व्यक्तित्व– दत्ता जी गाँव के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे | सभी उन्हें बहुत मान देते थे | उनका व्यक्तित्व रौबदार था और ग्रामीण उनकी बात मान जाते थे|
In simple words: दत्ता जी राव एक समझदार, न्यायप्रिय और प्रभावशाली व्यक्ति थे जिन्होंने बालक आनंद की पढ़ाई में मदद की।
प्रश्न 2. जूझ कहानी का उद्देश्य क्या है ? अथवा ‘विषम परिस्थितियों में भी विकास संभव है।’ ‘जूझ’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए|
Answer: इस कहानी का मुख्य उद्देश्य है कि मनुष्य को संघर्ष करते रहना चाहिए| कहानी में लेखक के जीवन के संघर्ष को, उसके परिवेश के साथ दिखलाया गया है। लेखक का शिक्षा-प्राप्ति हेतु पिता से संघर्ष,कक्षा में संघर्ष,खेती में संघर्ष और अंत में उसकी सफलता कहानी के उद्देश्य को स्पष्ट करते हैं। अतः समस्याओं से भागना नहीं चाहिए| पूरे आत्मविश्वास से उनका मुकाबला करना चाहिए| संघर्ष करने वाले को सफलता अवश्य मिलती है।
In simple words: कहानी का संदेश है कि विपरीत परिस्थितियों से घबराए बिना निरंतर संघर्ष करने से ही सफलता मिलती है।
प्रश्न 3. ‘जूझ’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: जूझका अर्थ है –संघर्ष| यह कथा,कथानायक के जीवन भर के संघर्ष को दर्शाती है| बचपन से अभावों में पला बालक, विपरीत परिस्थितियों पर विजय हासिल कर सका|अतः यदि मन में लगन हो, भरपूर आत्मविश्वास हो तो सफलता कदम चूमती है|
In simple words: 'जूझ' शीर्षक पूरी तरह सार्थक है क्योंकि यह नायक के जीवनभर के कड़े संघर्ष और जिजीविषा को व्यक्त करता है।
प्रश्न 4. ‘जूझ’ कहानी के आधार पर आनंदा के चरित्र की विशेषताएँ बताइए। अथवा ‘जूझ’ शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथानायक की किसी केन्द्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?
Answer: 1. पढ़ने की लालसा- आनंदा पिता के साथ खेती का काम सँभालता था| लेकिन पढ़ने की तीव्र इच्छा ने उसे जीवन का एक उद्देश्य दे दिया और वह अपने भविष्य को एक सही दिशा देने में सफल होता है|
2 वचनबद्धता- आनंदा ने विद्यालय जाने के लिए पिता की जो शर्ते मानी थी उनका पालन हमेशा किया| वह विद्यालय जाने से पहले बस्ता लेकर खेतों में पानी देता| वह ढोर चराने भी जाता| पिता की बातों का अनुपालन करता|
3. आत्मविश्वासी एवं कर्मठ बालक–आनंदा के जीवन में अभाव ही थे| उसके पिता ने ही उसका पाठशाला जाना बंद करवा दिया था| किंतु उसने हिम्मत नहीं हारी, पूरे आत्मविश्वास के साथ योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा और सफल हुआ|
४ . कविता के प्रति झुकाव- आनंदा ने मास्टर सौंदलगेकर से प्रभावित होकर काव्य में रुचि लेनी प्रारम्भ की वह खेतों में पानी देता, भैंस चराते समय भी कविताओं में खोया रहता था| धीरे-धीरे वह स्वयं तुकबंदी करने लगा| कविताएँ लिखने से उसमें आत्मविश्वास बढ़ा|
In simple words: आनंदा एक जिद्दी, मेहनती, पढ़ने के प्रति समर्पित और संघर्षशील बालक था।
प्रश्न 5. आनंदा के पिता की भाँति आज भी अनेक गरीब व कामगार पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं, क्यों? आपकी दृष्टि में उन्हें किस प्रकार प्रेरित किया जा सकता है?
Answer: अधिकतर लोग अशिक्षित होने के कारण शिक्षा के महत्व को नहीं समझते| अधिक बच्चे, कम आमदनी, दो अतिरिक्त हाथों से कमाई की लालसा आदि इसके प्रमुख कारण हैं। उन्हें प्रेरित करने हेतु उन्हें जागरूक करना, शिक्षा का महत्व बताना,शिक्षित होकर जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
In simple words: गरीबी और अज्ञानता के कारण ऐसे माता-पिता बच्चों को काम में लगाना चाहते हैं, जिन्हें काउंसलिंग और शिक्षा के फायदे बताकर बदला जा सकता है।
प्रश्न 6. सकारात्मक सृजनात्मकता से आत्मविश्वास को दृढ़ता मिलती है। जूझ कहानी के आधार पर समझाइए।
Answer: लेखक ने पढ़ाई में स्वयं को पिछड़ता हुआ पाया| किंतु शिक्षक सौंदलगेकर से प्रेरित होकर लेखक कुछ तुकबंदी करने लगा| धीरे –धीरे उसमें आत्मविश्वास बढ़ने लगा| सृजनात्मकता ने उसके जीवन को नया मोड़ दिया| अतः लेखक के द्वारा कविता रच लेने से उसमें आत्मविश्वास का सृजन हुआ|
In simple words: कविता लिखने की कला ने लेखक के भीतर हीन भावना को खत्म कर उसके आत्मविश्वास को मजबूत किया।
प्रश्न 7. ‘जूझ’कहानी के आधार पर बताइए कि एक प्रभावशाली शिक्षक किस तरह अपने विद्यार्थी का भविष्य सँवार सकता है? अथवा आनंदा से कवि डॉ. आनन्द यादव बनने की यात्रा में मास्टर सौंदलगेकर की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
Answer: मास्टर सौंदलगेकर कुशल अध्यापक, मराठी के ज्ञाता व कवि,सुरीले ढंग से स्वयं कीव दूसरों की कविताएँ गाते थे| आनंदा को कविता या तुकबन्दी लिखने के प्रारम्भिक काल में उन्होंने उसका मार्गदर्शन व सुधार किया,उसका आत्मविश्वास बढ़ाया जिससे वह धीरे-धीरे कविताएँ लिखने में कुशल होकर प्रतिष्ठित कवि बन गया।
In simple words: एक अच्छे शिक्षक ने आनंदा की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानकर उसे तराशा और उसके जीवन को एक नई दिशा दी।
प्रश्न 8. आनंदा को पुनः स्कूल जाने पर क्या-क्या झेलना पड़ा ?
Answer: स्वयं से कम आयु के छात्रों के साथ बैठना पड़ा,वह अन्य छात्रों की हँसी का पात्र बना तथा उसे पिता की इच्छा के कारण घर व स्कूल दोनों में निरंतर काम करना पड़ा।
In simple words: बड़ी उम्र में छोटे बच्चों के साथ कक्षा में बैठने पर उसे साथी छात्रों के मजाक और तानों का सामना करना पड़ा।
प्रश्न 9. स्कूल में मानीटर ने आनंदा को सर्वाधिक प्रभावित किया और कैसे?
Answer: मानीटर बसंत पाटिल ने उसे सर्वाधिक प्रभावित किया|वह शांत व अध्ययनशील छात्र था| आनंदा उसकी नकल कर हर काम करने लगा,धीरे-धीरे एकाग्रचित व अध्ययनशील बनकर आनंदा भी कक्षा में सम्मान का पात्र बन गया|
In simple words: मेधावी और शांत स्वभाव के मॉनिटर बसंत पाटिल को देखकर आनंदा को भी मन लगाकर पढ़ाई करने की प्रेरणा मिली।
प्रश्न 10. आपके दृष्टि से पढ़ाई-लिखाई के सम्बन्ध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या लेखक के पिता का?तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Answer: लेखक का मत है कि जीवन भर खेतों में काम करके कुछ भी हाथ आने वाला नहीं है। पीढ़ी दर पीढ़ी खेतों में काम करके कुछ प्राप्त नहीं हो सका। वे मानते हैं कि यह खेती हमें गड्ढे में धकेल रही है। अगर मैं पढ़-लिख गया तो कहीं मेरी नौकरी लग जाएगी या कोई व्यापार करके अपने जीवन को सफल बनाया जा सकता है। माँ-बेेटा जब दत्ता जी राव के घर जाकर पूरी बात बताते हैं तब दत्ता जी राव पिता जी को बुलाकर खूब डाँटते हैं और कहते हैं कि तू सारा दिन क्या करता है। बेटे और पत्नी को खेतों में जोत कर तू सारा दिन साँड की तरह घूमता रहता है। कल से बेटे को स्कूल भेज, अगर पैसे नहीं हैं तो फीस मैं दूंगा। परंतु पिता जी को यह सब कुछ बुरा लगा। दत्ता जी राव के सामने ‘हाँ’ करने के बावजूद भी वे आनन्द को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं थे। इस प्रकार लेखक और उनके पिताजी की सोच में एक बड़ा अन्तर है। हमारे ख्याल से पढ़ाई-लिखाई के सम्बन्ध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया लेखक के पिता की सोच से ज्यादा ठीक है क्योंकि पढ़ने-लिखने से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है।
In simple words: शिक्षा मनुष्य का सर्वांगीण विकास करती है, इसलिए लेखक और दत्ता जी राव का शिक्षा के पक्ष में सोचना ही पूरी तरह उचित था।
पाठ 3. अतीत में दबे पाँव - ओम थानवी
प्रश्न 1. ‘सिन्धु सभ्यता साधन सम्पन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था।’ प्रस्तुत कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
Answer: दूसरी सभ्यताएँ राजतंत्र और धर्मतंत्र द्वारा संचालित थीं | वहाँ बड़े-बड़ें सुन्दर महल, पूजा स्थल, भव्य मूर्तियाँ, पिरामिड और मन्दिर मिले हैं। राजाओं, धर्माचार्यों की समाधियाँ भी मौजूद हैं। किंतु सिन्धु सभ्यता, एक साधन-सम्पन्न सभ्यता थी परन्तु उसमें राजसत्ता या धर्मसत्ता के चिह्न नहीं मिलते। वहाँ की नगर योजना,वास्तुकला,मुहरों,ठप्पों,जल-व्यवस्था,साफ-सफाई और सामाजिक व्यवस्था आदि की एकरूपताद्वारा उनमें अनुशासन देखा जा सकता है |सांस्कृतिक धरातलपर यह तथ्य सामने आता है कि सिन्धु घाटी की सभ्यता, दूसरीसभ्यताओं से अलग एवं स्वाभाविक, किसी प्रकार की कृत्रिमता एवं आडंबररहितथी जबकि अन्य सभ्यताओं में राजतंत्र और धर्मतंत्र की ताकत को दिखाते हुए भव्य महल , मंदिर और मूर्तियाँ बनाई गईं किंतु सिन्धु घाटी सभ्यता की खुदाई में छोटी-छोटी मूर्तियाँ, खिलौने, मृद-भांड, नावें मिली हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि सिन्धु सभ्यता सम्पन्न थी परन्तु उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था।
In simple words: सिन्धु सभ्यता आधुनिक सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण थी, लेकिन वहाँ राजाओं या महलों जैसा ढकोसला या आडंबर नहीं था।
प्रश्न 2. ‘सिन्धु सभ्यता की खूबी उसका सौन्दर्य बोध है जो राजपोषित न होकर समाज-पोषित था।’ ऐसा क्यों कहा गया है?
Answer: सिन्धु सभ्यता में औजार तो बहुत मिलें,परंतु हथियारों का भी प्रयोग होता रहा होगा , इसका कोई प्रमाण नहींहैं। वे लोग अनुशासनप्रिय थे परन्तु यह अनुशासन किसी ताकत के बल के द्वारा कायम नहीं किया गया,बल्कि लोग अपने मन और कर्म से ही अनुशासन प्रिय थे। मुअनजो-दड़ो की खुदाई में एक दाढ़ी वाले नरेश की छोटी मूर्ति मिली है परन्तु यह मूर्ति किसी राजतंत्र या धर्मतंत्र का प्रमाण नहीं कही जा सकती। विश्व की अन्य सभ्यताओं के साथ तुलनात्मक अध्ययन से भी यही अनुमान लगाया जा सकता है कि सिन्धु सभ्यता की खूबी उसका सौन्दर्यबोध है जो कि समाज पोषित है, राजपोषित या धर्मपोषित नहीं है।
In simple words: वहाँ कला और सौंदर्य राजाओं के दबाव में नहीं, बल्कि आम जनता की रुचि और स्वभाव से विकसित हुए थे।
प्रश्न 3. ‘यह सच है कि यहाँ किसी आँगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आप को कहीं नहीं ले जातीं,वे आकाश की तरफ अधूरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया की छत पर हैं, वहाँ से आप इतिहास को नहीं उस के पार झाँक रहे हैं।’ इसके पीछे लेखक का क्या आशय है?
Answer: इस कथन से लेखक का आशय है कि इन टूटे-फूटे घरों की सीढ़ियों पर खड़े होकर आप विश्व की सभ्यता के दर्शन कर सकते हैं क्योंकि सिन्धु सभ्यता विश्व की महान सभ्यताओं में से एक है। सिन्धु सभ्यता आडंबररहित एवं अनुशासनप्रिय है। खंडहरों से मिले अवशेषों और इन टूटे-फूटे घरों से केवल सिन्धु सभ्यता का इतिहास ही नहीं देखा जा सकता है बल्कि उससे कहीं आगे मानवता के चिह्न और मानवजाति के क्रमिक विकास को भी देखा जा सकता है। कई प्रश्न - ऐसे कौन से कारण रहे होंगे कि ये महानगर आज केवल खंडहर बन कर रह गए हैं?, वे बड़े महानगर क्यों उजड़ गए?, उस जमाने के लोगों की वास्तुकला, कला ओर ज्ञान में रुचि, समाज के लिए आवश्यक मूल्य - अनुशासन, सादगी, स्वच्छता, सहभागिता आदिमें मानवजाति के क्रमिक विकास पर पुनः चिंतन करने पर मजबूर कर देते हैं। इस प्रकार हम इन सीढ़ियों पर चढ़कर किसी इतिहास की ही खोज नहीं करना चाहते बल्कि सिन्धु सभ्यता के सभ्य मानवीय समाज को देखना चाहते हैं।
In simple words: खंडहर बन चुकी इन इमारतों के बीच खड़े होकर हम केवल बीता हुआ कल नहीं, बल्कि इंसानी सभ्यता के क्रमिक विकास को महसूस करते हैं।
प्रश्न 4. हम सिन्धु सभ्यता को जल-संस्कृति कैसे कह सकते हैं ?
Answer: सिन्धु सभ्यता एक जल-संस्कृति थी | प्रत्येक घर में एक स्नानघर था । घर के भीतर से पानी या मैला पानी नालियों के माध्यम से बाहर हौदी में आता है और फिर बड़ी नालियों में चला जाता है। कहीं-कहीं नालियाँ ऊपर से खुली हैं परन्तु अधिकतर नालियाँ ऊपर सेबंदहैं। इनकी जलनिकासी व्यवस्था बहुत ही ऊँचे दर्जे की थी | नगर में कुओं का प्रबंध था । ये कुएँ पक्की ईटों के बने थे। सिन्धु सभ्यता से जुड़े इतिहासकारों का मानना है कि यह सभ्यता विश्व में पहली ज्ञात संस्कृति है जो कुएँ खोदकर भू-जल तक पहुँची। अकेले मुअनजो-दड़ों नगर में सात सौ कुएँ हैं।यहाँ का महाकुंड लगभग चालीस फुट लम्बा ओर पच्चीस फुट चौड़ा हैइस प्रकार मुअनजो-दड़ों में पानी की व्यवस्था सभ्य समाज की पहचान है।
In simple words: जल प्रबंधन, स्नानागार, ढकी हुई नालियाँ और सैंकड़ों कुओं की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यह एक उन्नत जल-संस्कृति थी।
प्रश्न 5. मुअनजो-दड़ो की गृह-निर्माण योजना पर संक्षेप में प्रकाश डालिए|
Answer: मुअनजो-दड़ो नगर की मुख्य सड़क के दोनों ओर घर हैं परंतु किसी भी घर का दरवाजामुख्य सड़क पर नहीं खुलता। घर जाने के लिए मुख्य सड़क से गलियों में जाना पड़ता है,सभी घरों के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था है। घर पक्की ईंटों के बने हैं|छोटे घरों में खिड़कियाँ नहीं हैं किंतु बड़े घरों में आंगन के भीतर चारों तरफ बने कमरों में खिड़कियाँ हैं। घर छोटे हैं और बड़े भी किंतु सभी घर कतार में बने हैं|
In simple words: वहाँ के घर ग्रिड पद्धति पर योजनाबद्ध तरीके से पक्की ईंटों से बनाए गए थे जहाँ सुरक्षा और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता था।
प्रश्न 6. ‘सिन्धुसभ्यता ताकत से शासन होने की अपेक्षा समझ से अनुशासनित सभ्यता थी’- स्पष्ट कीजिए।
Answer: संकेत बिंदु - खुदाई से प्राप्त अवशेषों में औजार तो मिले हैं किंतु हथियार नहीं| कोई खड्ग,भाला, धनुष-बाण नहीं मिला|
तथा भव्य महलों व समाधिियों के न होने से कह सकते हैं कि सिन्धु सभ्यता ताकत से नहीं समझ से अनुशासनित थी।
In simple words: हथियारों और सैनिक शक्ति के अभाव से स्पष्ट होता है कि वहाँ के लोग भय या ताकत से नहीं बल्कि आपसी सूझबूझ और अनुशासन से रहते थे।
प्रश्न 7. संसार की मुख्य प्राचीन सभ्यताएँ कौन-कौन सी हैं?प्राचीनतम सभ्यता कौन-सी है उसकी प्रमाणिकता का आधार क्या है ?
Answer: मिस्र की नील घाटी की सभ्यता, मेसोपोटामिया की सभ्यता, बेबीलोन की सभ्यता, सिन्धु घाटी की सभ्यता। सबसे प्राचीन है सिन्धु घाटी की सभ्यता। प्रमाण है 1922में मिले हड़प्पा व मुअनजो-दड़नगरों के अवशेष। ये नगर ईसा पूर्व के हैं।
In simple words: दुनिया की चार प्रमुख प्राचीन सभ्यताओं में सिन्धु घाटी सभ्यता भी शामिल है जिसके प्रमाण 1922 में हुई खुदाई से मिले हैं।
प्रश्न 8. सिन्धुघाटी की सभ्यता की विशिष्ट पहचान क्या है?
Answer: 1. एक जैसे आकार की पक्की ईंटों का प्रयोग, 2. जल निकासी की उत्कृष्ट व्यवस्था, 3. तत्कालीन वास्तुकला, 4. नगर का श्रेष्ठ नियोजन।
In simple words: उन्नत नगर नियोजन, उत्तम जल निकासी और एक जैसी ईंटों का प्रयोग इस सभ्यता की मुख्य पहचान है।
प्रश्न 9. मुअनजो-दड़ों में पर्यटक क्या-क्या देख सकते हैं?
Answer: 1.बौद्ध स्तूप 2. महाकुंड 3.अजायबघर आदि
In simple words: पर्यटक वहाँ विशाल महाकुंड, बौद्ध स्तूप, अजायबघर और प्राचीन घरों के अवशेष देख सकते हैं।
प्रश्न 10. सिन्धु सभ्यता व आजकल की नगर निर्माण योजनाओं में साम्य व अन्तर बताइए।
Answer: साम्य-1. अच्छी जल निकास योजना,ढकी हुई नालियाँ, 2. नौकरों के लिए अलग आवास व्यवस्था, 3. पक्की ईंटों का प्रयोग।
अन्तर- नगर योजना, आधुनिक तकनीक का प्रयोग, अत्याधुनिक भवन-निर्माण सामग्री का प्रयोग|
In simple words: जल निकासी और ईंटों का प्रयोग दोनों में समान है, लेकिन आधुनिक निर्माण में तकनीक और सामग्रियों में काफी बदलाव आ गया है।
प्रश्न 11. कुलधरा कहाँ है?मुअनजो-दड़ो के खंडहरों को देख कुलधरा की याद क्यों आती है?
Answer: कुलधरा जैसलमेर के मुहाने पर पीले पत्थरों से बने घरों वाला सुन्दर गाँव है। कुलधरा के निवासी 150 वर्ष पूर्व राजा से तकरार होने पर गाँव खाली करके चले गए। उनके घर अब खंडहर बन चुके हैं, परंतु ढहे नहीं घरों की दीवारें और खिड़कियाँ ऐसी हैं मानो सुबह लोग काम पर गए हैं और साँझ होते ही लौट आएंगे|मुअनजो-दड़ो के खंडहरों को देखकर कुछ ऐसा ही आभास होता है वहाँ घरों के खंडहरों में घूमते समय किसी अजनबी घर में अनधिकृत चहल-कदमी का अपराधबोध होता है। पुरातात्त्विक खुदाई अभियान की यह खूबी रही है कि सभी वस्तुओं को बड़े सहेज कर रखा गया | अतः कुलधरा की बस्ती और मुअनजो-दड़ो के खंडहर अपने काल के इतिहास का दर्शन कराते हैं।
In simple words: उजाड़ हो चुके कुलधरा गाँव के खंडहरों को देखकर बिल्कुल वैसी ही अनुभूति होती है जैसी मुअनजो-दड़ो के प्राचीन अवशेषों को देखकर होती है।
पाठ 4. डायरी के पन्ने - ऐन फ्रैंक
प्रश्न 1. “ऐन की डायरी अगर एक ऐतिहासिक दौर का जीवंत दस्तावेज है, तो साथ ही उसके निजी सुख-दुःख और भावनात्मक उथल-पुथल का भी। इन पृष्ठों में दोनों का फर्क मिट गया है।” इस कथन पर विचार करते हुए अपनी सहमति या असहमति तर्कपूर्वक व्यक्त करें।
Answer: ऐन की डायरी अगर एक ऐतिहासिक दौर का जीवंत दस्तावेज है, तो साथ ही उसके निजी सुख-दुःख और भावनात्मक उथल-पुथल का भी क्योंकि इसमें ऐन ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय हॉलैंड के यूहदियों परिवारों की अकल्पीय यंत्रणाओं का वर्णन करने के साथ-साथ, वहाँ की राजनैतिक स्थिति एवं युद्ध की विभीषिका का जीवंत वर्णन किया है।वायुยานों से तेज़ गोलाबारी, हज़ार गिल्डर के नोट अवैध घोषित किए गए, हिटलर के घायल सैनिकों में हिटलर से हाथ मिलाने का जोश , अराजकता का माहौलआदि। साथ हीयह डायरी, ऐन के पारिवारिक सुख-दुःख और भावनात्मक स्थिति को प्रकट करती है- गरीबी, भुखमरी,अज्ञातवास में जीवन व्यतीत करना, दुनिया से बिल्कुल कट जाना ,पकड़े जाने का डर, आतंक। यह डायरी एक ओर वहाँ के राजनैतिक वातावरण में सैनिकों की स्थिति, आचरण व जनता पर होने वाले अत्याचार दिखाती है तो दूसरी ओरएक तेरह वर्ष की किशोरी की मानसिकता, कल्पना का संसार और उलझन को भीदिखाती है जो ऐन की आपबीती है। इस तरह यह डायरी ऐतिहासिक दस्तावेज होने के साथ-साथ ऐन के जीवन के सुख-दुःख का चित्रण भी है।
In simple words: यह डायरी एक तरफ युद्धकालीन त्रासद इतिहास को दर्शाती है, तो दूसरी तरफ एक किशोरी के व्यक्तिगत संघर्ष और भावनाओं का सजीव दस्तावेज है।
प्रश्न 2. “यह साठ लाख लोगों की तरफ से बोलने वाली एक आवाज है। एक ऐसी आवाज जो किसी सन्त या कवि की नहीं, बल्कि एक साधारण-सी लड़की की है।” इल्या इहरनबुर्ग की इस टिप्पणी के संदर्भ में ऐन फ्रैंक की डायरी के पठित अंशों पर विचार करें।
Answer: उस समय यूरोप में लगभग साठ लाख यहूदी थे।द्वितीय विश्वयुद्ध में नीदरलैंड पर जर्मनी का कब्जा हो गया और हिटलर की नाजी फौज ने यहूदियों को विभिन्न प्रकार से यंत्रणाएं देने लगे | उन्हें तरह-तरह के भेदभाव पूर्ण और अपमानजनक नियम-कायदों को मानने के लिए बाध्य किया जाने लगा|गेस्टापो (हिटलर की खुफिया पुलिस) छापे मारकर यहूदियों को अज्ञातवास से ढूँढ निकालती ओर यातनागृह में भेज देती| अतः चारों तरफ अराजकता फैली हुई थी | यहूदी अज्ञातवास में निरंतर अंधेरे कमरों में जीने को मजबूरथे। उन्हें एक अमानवीय जीवन जीने को बाध्य होना पड़ा|हिटलर की नाजी फौज का खौफ उन्हें हरवकत आतंकित करता रहता था | ऐन ने डायरी के माध्यम से न केवलनिजी सुख-दुःख और भावनाओं को व्यक्त किया,बल्कि लगभग साठ लाख यहूदी समुदाय की दुख भरी जिन्दगी को लिपिबद्ध किया है। इसलिए इल्या इहरनबुर्ग की यह टिप्पणी कि “यह साठ लाख लोगों की तरफ से बोलने वाली एक आवाज है। एक ऐसी आवाज जो किसी संत या कवि की नहीं, बल्कि एक साधारण-सी लड़की की है।’सर्वमान्य एवं सत्य है।
In simple words: एक छोटी सी बच्ची की डायरी ने हिटलर के अत्याचारों से पीड़ित लाखों गूंगे-बहरे यहूदियों की पीड़ा को पूरी दुनिया के सामने ला दिया।
प्रश्न 3. ऐन फ्रैंक कौन थी?उसने अपनी डायरी में किस काल की घटनाओं का चित्रण किया है?यह क्यों महत्वपूर्ण है?
Answer: ऐन फ्रैंक एक यहूदी लड़की थी | उसने अपनी डायरी में द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के दौरान हिटलर की नाजी फौज ने यहूदियों को विभिन्न प्रकार से यंत्रणाएं दीं| यह डायरी युद्ध के दौरान फैली अराजकता और राजनैतिक परिदृश्य को दर्शाती है| यह नाजियों द्वारा यहूदियों पर किए गए जुल्मों का एक प्रामाणिक दस्तावेज है और साथ ही साथ एक तेरह वर्षीय किशोरी की भावनाएँ और मानसिकता को समझाने में सहायक है।
In simple words: ऐन फ्रैंक एक यहूदी किशोरी थी जिसने अपनी डायरी में नाजी अत्याचारों और अपने अज्ञातवास के दिनों का जीवंत वर्णन किया है।
प्रश्न 4. डायरी के पन्ने पाठ में मि. डसेल एवं पीटर का नाम कई बार आया है। इन दोनों का विवरणात्मक परिचय दें।
Answer: मि.डसेल- ऐन के पिता के साथ काम करते थे। वे ऐन व परिवार के साथ अज्ञातवास में रहे थे। डसेल उबाऊ लंबे-लंबे भाषण देते थे और अपने जमाने के किस्से सुनाते रहते थे। ऐन को अक्सर डाँटते थे | वे चुगलखोर थे और ऐन की मम्मी से ऐन की सच्ची-झूठी शिकायतें करते थे ।
पीटर- मिस्टर और मिसेज वानदान का बेटा था |वह ऐन का हमउम्र था। ऐन का उसके प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था और वह यह मानने लगी थी कि वह उससे प्रेम करती है।ऐन के जन्मदिन पर पीटर ने उसे फूलों का गुलदस्ता भेंट किया था| किंतु पीटर सबके सामने प्रेम उजागर करने से डरता था| वह साधारणतया शांतिप्रिय, सहज व आत्मीय व्यवहार करने वाला था।
In simple words: मि. डसेल एक चिड़चिड़े दंत चिकित्सक थे जो अज्ञातवास में साथ रहे, जबकि पीटर वानदान एक किशोर था जिससे ऐन की गहरी मित्रता हो गई थी।
प्रश्न 5. किट्टी कौन थी?ऐनफ्रैंक ने किट्टी को संबोधित कर डायरी क्यों लिखी?
Answer: ‘किट्टी’ ऐन फ्रैंक की गुड़िया थी | गुड़िया को मित्र की भाँति संबोधित करने से गोपनीयता भंग होने का डर न था|अन्यथा नाजियों द्वारा अत्याचार बढ़ने का डर व उन्हें अज्ञातवास का पता लग सकता था || ऐन ने स्वयं (एक तेरह वर्षीय किशोरी) के मन की बेचैनी को भी व्यक्त करने का ज़रिया किट्टी को बनाया |वह हृदय में उठ रही कई भावनाओं को दूसरों के साथ बाँटना चाहती थी किंतु अज्ञातवास में उसके लिए किसी के पास समय नहीं था| मि. डसेल की डाँट-फटकार ओर उबाऊ भाषण ,दूसरों के द्वारा उसके बारे में सुनकर मम्मी (मिसेज फ्रैंक) का उसेडाँटना ओर उस पर विश्वास करना, बड़ों का उसे लापरवाह और तुनकमिराज मानना और उसे छोटी समझकर उसके विचारों को महत्व न देना , उसके हृदय को कचोटता था |अतः उसने किट्टी को अपना हमराज़ बनाकर डायरी में उसे ही संबोधित किया|
In simple words: अपनी गुड़िया 'किट्टी' को काल्पनिक मित्र मानकर ऐन ने अपनी डायरी लिखी क्योंकि वह अपने दिल की बातें किसी और से साझा नहीं कर सकती थी।
प्रश्न 6. ‘ऐन फ्रैंक की डायरी यहूदियों पर हुए जुल्मों का जीवंत दस्तावेज है’पाठ के आधार पर यहूदियों पर हुए अत्याचारों का विवरण दें।
Answer: हिटलर की नाजी सेना ने यहूदियों को कैद कर यातना शिविरों में डालकर यातनाएँ दीं। उन्हें गैस चैंबर में डालकर मौत के घाट उतार दिया जाता था। कई यहूदी भयग्रस्त होकर अज्ञातवास मेंचले गए जहाँ उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में जीना पड़ा| अज्ञातवास में उन्हें सेन्धिमारों से भी निबटना पड़ा।। उनकी यादी संस्कृति को भी कुचल डाला गया।
In simple words: नाजियों ने यहूदियों को गैस चैंबरों में झोंका, यातना शिविरों में प्रताड़ित किया और उन्हें भूमिगत जीवन जीने के लिए मजबूर किया।
प्रश्न 7. ‘डायरी के पन्ने’पाठ किस पुस्तक से लिया गया है?वह कब प्रकाशित हुई?किसने प्रकाशित कराई?
Answer: यह पाठ ऐनफ्रैंक द्वारा डच भाषा में लिखी गई ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ नामक पुस्तक से लिया गया है। यह १९४७ में ऐन फ्रैंक की मृत्यु के बाद उसके पिता मिस्टर ऑटो फ्रैंक ने प्रकाशित कराई।
In simple words: यह पाठ 'द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल' से है जिसे उनके पिता ने 1947 में प्रकाशित करवाया था।
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