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पाठ 11 - भक्तिन
प्रश्न 1. भक्तिन का वास्तविक नाम क्या था, वह अपने नाम को क्यों छुपाना चाहती थी?
Answer: भक्तिन का वास्तविक नाम लक्ष्मी था। हिन्दुओं के अनुसार लक्ष्मी धन की देवी है। चूकि भक्तिन गरीब थी। उसके वास्तविक नाम के अर्थ और उसके जीवन के यथार्थ में विरोधाभास है, निर्धन भक्तिन सबको अपना असली नाम लक्ष्मी बताकर उपहास का पात्र नहीं बनना चाहती थी इसलिए वह अपना असली नाम छुपाती थी।
In simple words: भक्तिन का असली नाम लक्ष्मी था, लेकिन गरीबी के कारण वह अपना नाम छुपाती थी क्योंकि नाम का अर्थ और उसकी वास्तविक स्थिति में अंतर था।
Exam Tip: 'विरोधाभास' शब्द और उसके कारण को स्पष्ट रूप से लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
प्रश्न 2. लेखिका ने लक्ष्मी का नाम भक्तिन क्यों रखा?
Answer: घुटा हुआ सिर, गले में कंठी माला और भक्तों की तरह सादगीपूर्ण वेशभूषा देखकर महादेवी वर्मा ने लक्ष्मी का नाम भक्तिन रख दिया। यह नाम उसके व्यक्तित्व से पूर्णतः मेल खाता था।
In simple words: उसकी भक्ति जैसी वेशभूषा और मुड़े हुए सिर को देखकर महादेवी जी ने उसका नाम भक्तिन रख दिया।
Exam Tip: भक्तिन की बाहरी वेशभूषा का वर्णन करना आवश्यक है।
प्रश्न 3. भक्तिन के जीवन को कितने परिच्छेदों में विभाजित किया गया है?
Answer: भक्तिन के जीवन को चार भागों में बाँटा गया है-
1. पहला परिच्छेद- भक्तिन का बचपन, माँ की मृत्यु, विमाता द्वारा भक्तिन का बाल-विवाह करा देना।
2. द्वितीय परिच्छेद- भक्तिन का वैवाहिक जीवन, सास तथा जिठानियों का अन्यायपूर्ण व्यवहार, परिवार से अलगोझा कर लेना।
3. तृतीय परिच्छेद- पति की मृत्यु, विधवा के रूप में संघर्षशील जीवन।
4. चतुर्थ परिच्छेद- महादेवी वर्मा की सेविका के रूप में।
In simple words: भक्तिन के जीवन को उनके जीवन के चार अलग-अलग चरणों (बचपन, ससुराल, विधवापन और लेखिका के यहाँ सेवा) में बांटा गया है।
Exam Tip: चारों चरणों के नाम क्रमानुसार लिखें।
प्रश्न 4. भक्ति पाठ के आधार पर भारतीय ग्रामीण समाज में लड़के-लड़कियों में किये जाने वाले भेदभाव का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय ग्रामीण समाज में लड़के-लड़कियों में भेदभाव किया जाता है। लड़कियों को खोटा सिक्का या पराया धन माना जाता है। भक्तिन ने तीन बेटियों को जन्म दिया, जिस कारण उसे सास और जिठानियों की उपेक्षा सहनी पड़ती थी। सास और जिठानियाँ आराम फरमाती थीं क्योंकि उन्होंने लड़के पैदा किए थे और भक्तिन तथा उसकी नन्हीं बेटियों को घर और खेतों का सारा काम करना पड़ता था। भक्तिन और उसकी बेटियों को रूखा-सूखा मोटा अनाज खाने को मिलता था जबकि उसकी जिठानियाँ और उनके काले-कलूट बेटे दूध-मलाई राब-चावल की दावत उड़ाते थे।
In simple words: समाज में लड़कों को महत्व और लड़कियों को बोझ माना जाता था, जिससे भक्तिन और उसकी बेटियों के साथ भेदभाव होता था।
Exam Tip: खान-पान और कार्य विभाजन के अंतर को उदाहरण सहित बताएं।
प्रश्न 5. भक्तिन पाठ के आधार पर पंचायत के न्याय पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: भक्तिन की बेटी के सन्दर्भ में पंचायत द्वारा किया गया न्याय, तर्कहीन और अंधे कानून पर आधारित है। भक्तिन के जिठौत ने संपत्ति के लालच में षड्यंत्र कर भोली बच्ची को धोखे के जाल में फंसाया। पंचायत ने निर्दोष लड़की की कोई बात नहीं सुनी और एक तरफा फैसला देकर उसका विवाह जबरदस्ती जिठौत के निकम्मे तीतरबाज साले से कर दिया। पंचायत के अंधे कानून से दुष्टों को लाभ हुआ और निर्दोष को दंड मिला।
In simple words: पंचायत ने पक्षपातपूर्ण और गलत फैसला सुनाकर निर्दोष बेटी का जीवन बर्बाद कर दिया।
Exam Tip: पंचायत के फैसले के अनुचित और पक्षपाती होने पर जोर दें।
प्रश्न 6. भक्तिन की पाक-कला के बारे में टिप्पणी कीजिए।
Answer: भक्तिन को ठेठ देहाती, सादा भोजन पसंद था। रसोई में वह पाक छूत को बहुत महत्त्व देती थी। सुबह-सवेरे नहा-धोकर चौके की सफाई करके वह द्वार पर कोयले की मोटी रेखा खींच देती थी। किसी को रसोईघर में प्रवेश करने नहीं देती थी। उसे अपने बनाए भोजन पर बड़ा अभिमान था। वह अपने बनाए भोजन का तिरस्कार नहीं सह सकती थी।
In simple words: भक्तिन देहाती खाना बनाने में माहिर थी और रसोई की पवित्रता का बहुत ध्यान रखती थी।
Exam Tip: 'पाक-छूत' और 'कोयले की रेखा' जैसे विशेष शब्दों का उल्लेख करें।
प्रश्न 7. सिद्ध कीजिए कि भक्तिन तर्क-वितर्क करने में माहिर थी।
Answer: भक्तिन तर्कपटु थी। केश मुँडाने से मना किए जाने पर वह शास्त्रों का हवाला देते हुए कहती है 'तीरथ गए मुँडाए सिद्ध'। घर में इधर-उधर रखे गए पैसों को वह चुपचाप उठा कर छुपा लेती है, टोके जाने पर वह इसे चोरी नही मानती बल्कि वह इसे अपने घर में पड़े पैसों को सँभाकर रखना कहती है। पढ़ाई-लिखाई से बचने के लिए भी वह अचूक तर्क देती है कि अगर मैं भी पढ़ने लगूँ तो घर का काम कौन देखेगा?
In simple words: भक्तिन हर बात का जवाब देने के लिए कोई न कोई चतुर तर्क तैयार रखती थी।
Exam Tip: पाठ से मुँडाने और पैसों को संभालने के उदाहरण अवश्य दें।
प्रश्न 8. भक्तिन का दुर्भाग्य भी कम हठी नहीं था, लेखिका ने ऐसा क्यों कहा है?
Answer: भक्तिन का दुर्भाग्य उसका पीछा नहीं छोड़ता था-
1- बचपन में ही माँ की मृत्यु।
2- विमाता की उपेक्षा।
3- भक्तिन(लक्ष्मी) का बालिवावाह।
4- पिता का निधन।
5- तीन-तीन बेटियों को जन्म देने के कारण सास और जिठानियों द्वारा भक्तिन की उपेक्षा।
6- पति की असमय मृत्यु।
7- दामाद का निधन और पंचायत के द्वारा निकम्मे तीतरबाज युवक से भक्तिन की विधवा बेटी का जबरन विवाह।
8- लगान न चुका पाने पर जमींदार द्वारा भक्तिन का अपमान।
In simple words: भक्तिन के जीवन में एक के बाद एक कई दुखद और कठिन घटनाएँ आती ही रहीं।
Exam Tip: बिंदुओं के रूप में उत्तर लिखने से प्रभावशीलता बढ़ती है।
प्रश्न 9. भक्तिन ने महादेवी वर्मा के जीवन पर कैसे प्रभावित किया?
Answer: भक्तिन के साथ रहकर महादेवी की जीवन-शैली सरल हो गयी, वे अपनी सुविधाओं की चाह को छिपाने लगीं और असुविधाओं को सहने लगीं। भक्तिन ने उन्हें देहाती भोजन खिलाकर उनका स्वाद बदल दिया। भक्तिन मात्र एक सेविका न होकर महादेवी की अभिभावक और आत्मीय बन गयी। भक्तिन, महादेवी के जीवन पर छा जाने वाली एक ऐसी सेविका है जिसे लेखिका नहीं खोना चाहती।
In simple words: भक्तिन के आने से महादेवी जी का जीवन और खान-पान बहुत सरल तथा अनुशासित हो गया।
Exam Tip: लेखिका और सेविका के आत्मीय संबंध को स्पष्ट करें।
प्रश्न 10. भक्तिन के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: महादेवी वर्मा की सेविका भक्तिन के व्यक्तित्व की विशेषताएं निम्नांकित हैं-
- समर्पित सेविका
- स्वाभिमानी
- तर्कशीला
- परिश्रमी
- संघर्षशील
In simple words: भक्तिन एक मेहनती, वफादार, बुद्धिमान और हर परिस्थिति से लड़ने वाली महिला थी।
Exam Tip: मुख्य विशेषताओं के शीर्षक देकर संक्षिप्त व्याख्या करें।
प्रश्न 11. भक्तिन के दुर्गुणों का उल्लेख करें।
Answer: गुणों के साथ-साथ भक्तिन के व्यक्तित्व में अनेक दुर्गुण भी निहित हैं-
1. वह घर में इधर-उधर पड़े रुपये-पैसे को भंडार घर की मटकी में छुपा देती है और अपने इस कार्य को चोरी नहीं मानती।
2. महादेवी के क्रोध से बचने के लिए भक्तिन बात को इधर-उधर करके बताने को झूठ नही मानती। अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए वह तर्क-वितर्क भी करती है।
3. वह दूसरों को अपनी इच्छानुसार बदल देना चाहती है पर स्वयं बिल्कुल नही बदलती।
In simple words: भक्तिन में कुछ कमियाँ भी थीं जैसे पैसे छुपाना और अपनी बात मनवाने के लिए झूठ या तर्क देना।
Exam Tip: भक्तिन के सकारात्मक पक्षों के साथ उसकी कमियों को भी निष्पक्ष रूप से बताएं।
प्रश्न 12. निम्नांकित भाषा-प्रयोगों का अर्थ स्पष्ट कीजिए-
- पहली कन्या के दो और संस्करण कर डाले- भक्तिन ने अपनी पहली कन्या के बाद उसके जैसी दो और कन्याएँ पैदा कर दी अर्थात भक्तिन के एक के बाद एक तीन बेटियाँ पैदा हो गयीं।
- खोटे सिक्कों की टक्साल जैसी पत्नी- आज भी अशिक्षित ग्रामीण समाज में बेटियों को खोटा सिक्का कहा जाता है। भक्तिन ने एक के बाद एक तीन बेटियाँ पैदा कर दी इसलिए उसे खोटे सिक्के को डालने वाली मशीन कहा गया।
Answer: (उपर्युक्त दोनों वाक्यांशों के अर्थ दिए गए हैं जो ग्रामीण मानसिकता और व्यंग्य को दर्शाते हैं।)
In simple words: इन मुहावरों के माध्यम से लेखिका ने लगातार पुत्रियों के जन्म लेने पर समाज की सोच को दर्शाया है।
Exam Tip: लेखिका द्वारा प्रयुक्त व्यंग्यात्मक भाषा के मर्म को समझकर लिखें।
प्रश्न 13. भक्ति पाठ में लेखिका ने समाज की किन समस्याओं का उल्लेख किया है?
Answer: भक्ति पाठ के माध्यम से लेखिका ने भारतीय ग्रामीण समाज की अनेक समस्याओं का उल्लेख किया है-
1. लड़के-लड़कियों में किया जाने वाला भेदभाव
2. विधवाओं की समस्या
3. न्याय के नाम पर पंचायतों के द्वारा स्त्रियों के मानवाधिकार को कुचलना
4. अशिक्षा और अंधविश्वास
In simple words: पाठ में ग्रामीण समाज की कूरीतियों, जैसे महिला शोषण और भेदभाव को उजागर किया गया है।
Exam Tip: समाज की कुप्रथाओं को बिंदुओं के रूप में प्रस्तुत करें।
ग्यांश-आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर
(क) भक्तिन का स्वभाव परिवार में रहकर कैसा हो गया है?
Answer: विषम परिस्थितिजन्य उसके उग्र, हठी और दुराग्रही स्वभाव के बावजूद भक्तिन के भीतर स्नेह और सहानुभूति की आभा फूटती रहती है। उसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति उसमें जीवन की सहज मार्मिकता ही पाते हैं।
In simple words: कठिन परिस्थितियों के कारण उसका स्वभाव भले ही कठोर हो गया था, पर उसके अंदर स्नेह भी था।
Exam Tip: गद्यांश की पंक्तियों के आधार पर ही उत्तर की पुष्टि करें।
(ख) भक्तिन के पास छात्रावास की छात्राएँ क्यों आती हैं?
Answer: भक्तिन के पास कोई छात्रा अपनी चाय बनवाने आती है और देहली पर बैठी रहती है, कोई महादेवी जी के लिए बने नाश्ते को चखकर उसके स्वाद की विवेचना करती रहती है। महादेवी को देखते ही सब छात्राएँ भाग जाती हैं, उनके जाते ही फिर वापस आ जाती हैं। भक्तिन का सहज-स्नेह पाकर चिड़ियों की तरह चहचहाने लगती हैं।
In simple words: छात्राएँ महादेवी जी के यहाँ का नाश्ता चखने और भक्तिन का प्यार पाने के लिए उसके पास आती थीं।
Exam Tip: छात्राओं के आकर्षण और भक्तिन के स्नेह का वर्णन करें।
(ग) छात्राओं के आने में रुकावट न डालने के लिए भक्तिन ने क्या उपाय किया?
Answer: छात्राओं के आने में रुकावट न डालने के लिए भक्तिन ने अपने पाक-छूत के नियम से समझौता कर लिया। भक्तिन अपना दोनों वक्त का खाना बनाकर सुबह ही आले में रख देती और खाते समय चौके का एक कोना धोकर वहाँ बैठकर खा लिया करती ताकि छात्राएँ बिना रोक-टोक के उसके पास आ सकें।
In simple words: उसने छात्राओं के लिए अपने रसोई के कड़े नियमों में ढील दे दी थी।
Exam Tip: 'पाक-छूत के नियम' से समझौता करने वाली बात अवश्य लिखें।
(घ) साहित्यकारों के प्रति भक्तिन के सम्मान का क्या मापदंड है?
Answer: भक्तिन महादेवी के साहित्यिक मित्र के प्रति सद्भाव रखती थी जिसके प्रति महादेवी स्वयं सद्भाव रखती थी। वह सभी से परिचित हैपर उनके प्रति सम्मान की मात्रा महादेवी जी के सम्मान की मात्रा पर निर्भर करती है। वह एक अद्भुत ढंग से जान लेती थी कि कौन कितना सम्मान करता है। उसी अनुपात में उसका प्राप्य उसे देती थी।
In simple words: भक्तिन लेखिका के मेहमानों का आदर वैसे ही करती थी जैसे लेखिका स्वयं करती थीं।
Exam Tip: लेखिका के प्रति सम्मान और अतिथियों के सत्कार के संबंध को स्पष्ट करें।
12 बाजार-दर्शन
प्रश्न 1. पर्चेजिंग पावर किसे कहा गया है, बाजार पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: पर्चेजिंग पावर का अर्थ है खरीदने की शक्ति। पर्चेजिंग पावर के घमंड में व्यक्ति दिखावे के लिए आवश्यकता से अधिक खरीदारीकरता है और बाजार को शैतानी व्यंग्य-शक्ति देता है। ऐसे लोग बाजार का बाजाऱूपन बढ़ाते हैं।
In simple words: खरीदने की क्षमता को पर्चेजिंग पावर कहते हैं, जिसके घमंड में लोग फालतू चीजें खरीदते हैं।
Exam Tip: 'पर्चेजिंग पावर' और 'बाजारूपन' शब्दों का सही प्रयोग करें।
प्रश्न 2. लेखक ने बाजार का जादू किसे कहा है, इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: बाजार की चमक-दमक के चुंबकीय आकर्षण को बाजार का जादू कहा गया है, यह जादू आंखों की राह कार्य करता है। बाजार के इसी आकर्षण के कारण ग्राहक सजी-धजी चीजों को आवश्यकता न होने पर भी खरीदने को विवश हो जाते हैं।
In simple words: बाजार की सजावट और चमक-दमक ही उसका जादू है जो लोगों को अपनी ओर खींचती है।
Exam Tip: चुंबकीय आकर्षण और आँखों के रास्ते प्रभाव पड़ने की बात को स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. आशय स्पष्ट करें।
- मन खाली होना
- मन भरा होना
- मन बंद होना
Answer: मन खाली होना- मन में कोई निश्चित वस्तु खरीदने का लक्ष्य न होना। निरुद्देश्य बाजार जाना और व्यर्थ की चीजों को खरीदकर लाना।
मन भरा होना- मन लक्ष्य से भरा होना। जिसका मन भरा हो वह भलीभांति जानता है कि उसे बाजार से कौन सी वस्तु खरीदनी है, अपनी आवश्यकता की चीज खरीदकर वह बाजार को सार्थकता प्रदान करता है।
मन बंद होना- मन में किसी भी प्रकार की इच्छा न होना अर्थात अपने मन को शून्य कर देना।
In simple words: मन की अलग-अलग स्थितियों (इच्छा न होना, संतुष्ट होना या शून्य होना) को बाजार-दर्शन में दर्शाया गया है।
Exam Tip: तीनों अवस्थाओं (खाली, भरा, बंद) को अलग-अलग परिभाषित करें।
प्रश्न 4. 'जहाँ तृष्णा है, बटोर रखने की स्पृहा है, वहाँ उस बल का बीज नहीं है।' यहां किस बल की चर्चा की गयी है?
Answer: लेखक ने संतोषि स्वभाव के व्यक्ति के आत्मबल की चर्चा की है। दूसरे शब्दों में यदि मन में संतोष हो तो व्यक्ति दिखावे और ईर्ष्या की भावना से दूर रहता है उसमें संचय करने की प्रवृत्ति नहीं होती।
In simple words: यहाँ व्यक्ति के आत्मबल और संतोष की शक्ति की बात की गई है।
Exam Tip: आत्मबल और संतोष के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।
प्रश्न 5. अर्थशास्त्र, अनीतिशास्त्र कब बन जाता है?
Answer: जब बाजार में कपट और शोषण बढ़ने लगे, खरीददार अपनी पर्चेजिंग पावर के घमंड में दिखावे के लिए खरीदारी करें| मनुष्यों में परस्पर भाईचारा समाप्त हो जाए| खरीददार और दुकानदार एक दूसरे को ठगने की घात में लगे रहें, एक की हानि में दूसरे को अपना लाभ दिखाई दे तो बाजार का अर्थशास्त्र, अनीतिशास्त्र बन जाता है। ऐसे बाजार मानवता के लिए विडंबना है।
In simple words: जब व्यापार में ठगी, कपट और शोषण होने लगे तो वह अर्थशास्त्र नहीं बल्कि अनीति बन जाता है।
प्रश्न 6. भगतजी बाजार और समाज को किस प्रकार सार्थकता प्रदान कर रहे हैं?
Answer: भगतजी के मन में सांसारिक आकर्षणों के लिए कोई तृष्णा नहीं है। वे संचय, लालच और दिखावे से दूर रहते हैं। बाजार और व्यापार उनके लिए आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन मात्र है। भगतजी के मन का संतोष और निष्पह भाव, उनको श्रेष्ठ उपभोक्ता और विक्रेता बनाते हैं।
In simple words: भगतजी अपनी जरूरत का सामान लेकर और संतोषी स्वभाव रखकर बाजार को सही अर्थ देते हैं।
Exam Tip: भगतजी के संतोष और निष्काम भाव का उल्लेख अवश्य करें।
प्रश्न 7. भगत जी के व्यक्तित्व के सशक्त पहलुओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: निम्नांकित बिंदु उनके व्यक्तित्व के सशक्त पहलू को उजागर करते हैं-
- पंसारी की दुकान से केवल अपनी जरूरत का सामान (जीरा और नमक) खरीदना।
- निश्चित समय पर चूर्ण बेचने के लिए निकलना।
- छह आने की कमाई होते ही चूर्ण बेचना बंद कर देना।
- बचे हुए चूर्ण को बच्चों को मुफ़्त बाँट देना।
- सभी काजय-जय राम कहकर स्वागत करना।
- बाजार की चमक-दमक से आकर्षित न होना।
- समाज को संतोषी जीवन की शिक्षा देना।
In simple words: भगतजी बहुत ही संतोषी, नियम से काम करने वाले और प्रलोभन से दूर रहने वाले व्यक्ति थे।
Exam Tip: चूर्ण बेचने और छह आने की सीमा जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
प्रश्न 8. बाजार की सार्थकता किसमें है?
Answer: मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में ही बाजार की सार्थकता है। जो ग्राहक अपनी आवश्यकताओं की चीजें खरीदते हैं वे बाजार को सार्थकता प्रदान करते हैं। जो विक्रेता, ग्राहकों का शोषण नहीं करते और छल-कपट से ग्राहकों को लुभाने का प्रयास नहीं करते वे ही बाजार को सार्थक बनाते हैं।
In simple words: बाजार तभी सार्थक है जब वह ग्राहकों की जरूरत पूरी करे, न कि उन्हें ठगे।
Exam Tip: आवश्यकता की पूर्ति और शोषण मुक्त व्यापार को सार्थकता का आधार बताएं।
13 काले मेघा पानी दे
प्रश्न 1. इन्दर सेना घर-घर जाकर पानी क्यों माँगती थी?
Answer: गाँव के लोग बारिश के लिए भगवान इंद्र से प्रार्थना किया करते थे। जब पूजा-पाठ,व्रत आदि उपाय असफल हो जाते थे तो भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए गाँव के किशोर, बच्चे कीचड़ में लथपथ होकर गली-गली घूमकर लोगों से पानी माँगते थे।
In simple words: वर्षा के देवता इंद्र को प्रसन्न करने और बारिश करवाने के लिए बच्चे पानी मांगते थे।
Exam Tip: धार्मिक विश्वास और सूखे की स्थिति का जिक्र करें।
प्रश्न 2. इन्दरसेना को लेखक मेढक-मंडली क्यों कहता है, जीजी के बार-बार कहने पर भी वह इन्दरसेना पर पानी फेंकने को राजी क्यों नहीं होता?
Answer: इन्दरसेना का कार्य आर्यसमाजी विचारधारा वाले लेखक को अंधविश्वास लगता है, उसका मानना है कि यदि इंदरसेना देवता से पानी दिलवा सकती है तो स्वयं अपने लिए पानी क्यों नहीं माँग लेती? पानी की कमी होने पर भी लोग घर में एकत्र किये हुए पानी को इंदरसेना पर फेंकते हैं। लेखक इसे पानी की निर्मम बर्बादी मानता है।
In simple words: लेखक इसे अंधविश्वास और पानी की बर्बादी मानता था, इसलिए वह उन पर पानी नहीं डालना चाहता था।
Exam Tip: आर्यसमाजी सोच और पानी की बर्बादी के तर्कों को स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. रूठे हुए लेखक को जीजी ने किस प्रकार समझाया?
Answer: जीजी ने लेखक को प्यार से लड्डू-मठरी खिलाते हुए निम्न तर्क दिए-
1- त्याग का महत्त्व- कुछ पाने के लिए कुछ देना पड़ता है।
2- दान की महता- ऋषि-मुनियों ने दान को सबसे ऊँचा स्थान दिया है। जो चीज अपने पास भी कम हो और अपनी आवश्यकता को भूलकर वह चीज दूसरों को दान कर देना ही त्याग है।
3- इंदрев को जल का अर्ध्य चढ़ाना- इंदरसेना पर पानी फेंकना पानी की बर्बादी नहीं बल्कि इंद्रदेव को जल का अर्ध्य चढ़ाना है।
4- पानी की बुवाई करना- जिस प्रकार किसान फसल उगाने के लिए जमीन पर बीज डालकर बुवाई करता है वैसे ही पानी वाले बादलों की फसल पाने के लिए इन्दर सेना पर पानी डाल कर पानी की बुवाई की जाती है।
In simple words: जीजी ने त्याग, दान और पानी की 'बुवाई' का सुंदर तर्क देकर लेखक को समझाया।
Exam Tip: 'पानी की बुवाई' और 'त्याग' के बिंदुओं को प्रमुखता से लिखें।
प्रश्न 4. नदियों का भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में क्या महत्व है?
Answer: गंगा भारतीय समाज में सबसे पूज्य सदानारा नदी है। जिसका भारतीय इतिहास में धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व है| वह भारतीयों के लिए केवल एक नदी नहीं अपितु माँ है, स्वर्ग की सीढ़ी, मोक्षदायिनी है। उसमें पानी नहीं अपितु अमृत तुल्य जल बहता है। भारतीय संस्कृति में नदियों के किनारे मानव सभ्यताएँ फली-फूली हैं। बड़े-बड़े नगर, तीर्थस्थान नदियों के किनारे ही स्थित हैं ऐसे परिवेश में भारतवासी सबसे पहले गंगा मैया की जय ही बोलेंगे। नदियाँ हमारे जीवन का आधार है, हमारा देश कृषि प्रधान है। नदियों के जल से ही भारत भूमि हरी-भरी है। नदियों के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते, यही कारण है कि हम भारतीय नदियों की पूजा करते हैं।
In simple words: नदियाँ हमारी संस्कृति, कृषि और जीवन का आधार हैं, इसलिए उन्हें माँ मानकर पूजा जाता है।
Exam Tip: धार्मिक, सांस्कृतिक और कृषि संबंधी महत्व का उल्लेख करें।
प्रश्न 5. आजादी के पचास वर्षों के बाद भी लेखक क्यों दुखी है, उसके मन में कौन से प्रश्न उठ रहे हैं?
Answer: आजादी के पचास वर्षों बाद भी भारतीयों की सोच में सकारात्मक बदलाव न देखकर लेखक दुखी है। उसके मन में कई प्रश्न उठ रहे हैं-
1. क्या हम सच्चे अर्थों में स्वतंत्र हैं?
2. क्या हम अपने देश की संस्कृति और सभ्यता को समझ पाए हैं?
3. राष्ट्र निर्माण में हम पीछे क्यों हैं, हम देश के लिए क्या कर रहे हैं?
4. हम स्वार्थ और भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं, त्याग में विश्वास क्यों नहीं करते?
5. सरकार द्वारा चलाई जा रही सुधारवादी योजनाएँ गरीबों तक क्यों नहीं पहुँचती?
In simple words: देश की आजादी के इतने साल बाद भी व्याप्त भ्रष्टाचार और गरीबी को देखकर लेखक निराश था।
Exam Tip: देश की वर्तमान स्थिति और लेखक के प्रश्नों को बिंदुओं में दर्शाएं।
14 पहलवान की ढोलक
प्रश्न 1. लुटन को पहलवान बनने की प्रेरणा कैसे मिली?
Answer: लुटन जब नौ साल का था तो उसके माता-पिता का देहांत हो गया था। सौभाग्य से उसकी शादी हो चुकी थी। अनाथ लुटन को उसकी विधवा सास ने पाल-पोसर बड़ा किया। उसकी सास को गाँव वाले परेशान करते थे। लोगों से बदला लेने के लिए उसने पहलवान बनने की ठानी। धारोष्ण दूध पीकर, कसरत कर उसने अपना बदन गठीला और ताकतवर बना लिया। कुश्ती के दाँवपेंच सीखकर लुटन पहलवान बन गया।
In simple words: अपने सास-ससुर पर होने वाले अत्याचार का बदला लेने के लिए लुटन ने पहलवानी शुरू की थी।
Exam Tip: बचपन की कठिन परिस्थितियां और सास का संबल मुख्य कारण थे।
प्रश्न 2. रात के भयानक सन्नाटे में लुटन की ढोलक क्या करिश्मा करती थी?
Answer: रात के भयानक सन्नाटे मेंलुटन की ढोलक महामारी से जूझते लोगों को हिम्मत बँधाती थी। ढोलक की आवाज से रात की विभीषिका और सन्नाटा कम होता था। महामारी से पीड़ित लोगों की नसों में बिजली सी दौड़ जाती थी, उनकी आँखों के सामने दंगल का दृश्य साकार हो जाता था और वे अपनी पीड़ा भूल खुशी-खुशी मौत को गले लगा लेते थे। इस प्रकार ढोल की आवाज, बीमार-मृतप्राय गाँववालों की नसों में संजीवनी शक्ति को भर बीमारी से लड़ने की प्रेरणा देती थी।
In simple words: ढोलक की थाप से महामारी से डरे लोगों में जीने की नई हिम्मत और ऊर्जा आ जाती थी।
Exam Tip: 'संजीवनी शक्ति' और 'हिम्मत बँधाने' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
प्रश्न 3. लुटन ने सर्वाधिक हिम्मत कब दिखाई?
Answer: लुटन सिंह ने सर्वाधिक हिम्मत तब दिखाई जब दोनों बेटों की मृत्यु पर वह रोया नहीं बल्कि हिम्मत से काम लेकर अकेले उनका अंतिम संस्कार किया। यही नहीं, जिस दिन पहलवान के दोनों बेटे महामारी की चपेट में आकर मर गए पर उस रात को भी पहलवान ढोलक बजाकर लोगों को हिम्मत बँधा रहा था। श्यामनगर के दंगल में पूरा जनसमुदाय चाँद सिंह के पक्ष में था चाँद सिंह को हराते समय लुटन ने हिम्मत दिखाई और बिना हताश हुए दंगल में चाँद सिंह को चित कर दिया।
In simple words: अपने दोनों बेटों की एक साथ मौत के बाद भी उसने ढोलक बजाना बंद नहीं किया, यह उसकी सबसे बड़ी हिम्मत थी।
Exam Tip: पुत्रों की मृत्यु और दंगल की घटना का प्रसंग दें।
प्रश्न 4. लुटन सिंह राज पहलवान कैसे बना?
Answer: श्यामनगर के राजा कुश्ती के शौकीन थे। उन्होंने दंगल का आयोजन किया। पहलवान लुटन सिंह भी दंगल देखने पहुँचा। चांदसिंह नामक पहलवान जो शेर के बच्चे के नाम से प्रसिद्ध था, कोई भी पहलवान उससे भिड़ने की हिम्मत नहीं करता था। चाँदसिंह अखाड़े में अकेला गरज रहा था। लुटन सिंह ने चाँदसिंह को चुनौती दी और चाँदसिंह से भिड़ गया।ढोल की आवाज सुनकर लुटन की नस-नस में जोश भर गया।उसने चाँदसिंह को चारों खाने चित कर दिया। राजासाहब ने लुटन की वीरता से प्रभावित होकर उसे राजप पहलवान बना दिया।
In simple words: प्रसिद्ध पहलवान चाँद सिंह को हराकर लुटन राज पहलवान बन गया था।
Exam Tip: चाँद सिंह को हराने और राजा द्वारा सम्मानित किए जाने का वर्णन करें।
प्रश्न 5. पहलवान की अंतिम इच्छा क्या थी?
Answer: पहलवान की अंतिम इच्छा थी कि उसे चिता पर पेट के बल लिटाया जाए क्योंकि वह जिंदगी में कभी चित नहीं हुआ था। उसकी दूसरी इच्छा थी कि उसकी चिता को आग देते समय ढोल अवश्य बजाया जाए।
In simple words: वह मरते दम तक पहलवान रहना चाहता था, इसलिए पेट के बल लेटने और ढोल बजाने की इच्छा जताई।
Exam Tip: दोनों इच्छाओं (पेट के बल लेटना और ढोल बजाना) का स्पष्ट उल्लेख करें।
प्रश्न 6. ढोल की आवाज और लुटन के दाँवपेंच संबंध बताइए-
Answer: ढोल की आवाज और लुटन के दाँवपेंच में संबंध-
- चट धा, गिड़ धा - आजा भिड़ जा।
- चटाक चट धा - उठाकर पटक दे।
- चट गिड़ धा - मत डरना।
- धाक धधना तिरकट तिनता - दाँव काटो, बाहर हो जाओ।
- धधिना धधिना, धधक धधिना - चित करो।
In simple words: ढोल की हर आवाज के साथ लुटन का शरीर कुश्ती के खास दाँवपेंच और ऊर्जा से भर जाता था।
Exam Tip: ढोल के बोल और उसके संगत दाँवपेंच को सही रूप में लिखें।
15 चार्ली चैप्लिन यानी हम सब
प्रश्न 1. चार्ली के जीवन पर प्रभाव डालने वाली मुख्य घटनाएँ कौन सी थी?
Answer: चार्ली के जीवन में दो ऐसी घटनाएँ घटीं जिन्होंने उनके भावी जीवन पर बहुत प्रभाव डाला।
पहली घटना - जब चार्ली बीमार थे उनकी माँ उन्हें ईसा मसीह की जीवनी पढ़कर सुना रही थी। ईसा के सूली पर चढ़ने के प्रसंग तक आते-आते माँ-बेटी दोनों ही रोने लगे। इस घटना ने चार्ली को स्नेह, करुणा और मानवता जैसे उच्च जीवन मूल्य दिए।
दूसरी घटना है- बालक चार्ली कसाईखाने के पास रहता था। वहाँ सैकड़ों जानवरों को रोज मारा जाता था। एक दिन एक भेड़ वहाँ से भाग निकली। भेड़ को पकड़ने की कोशिश में कसाई कई बार फिसला। जिसे देखकर लोग हंसने लगे, ठहाके लगाने लगे। जब भेड़ को कसाई ने पकड़ लिया तो बालक चार्ली रोने लगा। इस घटना ने उसके भावी फिल्मों में त्रासदी और हास्योत्पादक तत्वों की भूमिका तय कर दी।
In simple words: बचपन की दो घटनाओं (ईसा मसीह की कहानी और कसाईखाने की घटना) ने उनके जीवन और कला को दिशा दी।
प्रश्न 2. आशय स्पष्ट कीजिए-
चैप्लिन ने सिर्फ फिल्मकला को ही लोकतांत्रिक नहीं बनाया बल्कि दर्शकों की वर्ग तथा वर्ण-व्यवस्था को भी तोड़ा।
Answer: लोकतांत्रिक बनाने का अर्थ है कि फिल्म कला को सभी के लिए लोकप्रिय बनाना और वर्ग और वर्ण-व्यवस्था को तोड़ने का आशय है- समाज में प्रचलित अमीर-गरीब, वर्ण, जातिधर्म के भेदभाव को समाप्त करना। चैप्लिन का चमत्कार यह है कि उन्होंने फिल्मकला को बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों तक पहुंचाया। उनकी फिल्मों ने समय भूगोल और संस्कृतियों की सीमाओं को लाँघ कर सार्वभौमिक लोकप्रियता हासिल की। चार्ली ने यह सिद्ध कर दिया कि कला स्वतंत्र होती है, अपने सिद्धांत स्वयं बनाती है।
In simple words: चार्ली ने फिल्मों को जाति-पाँति और अमीरी-गरीबी के बंधनों से मुक्त कर सबके लिए सुलभ बनाया।
Exam Tip: 'लोकतांत्रिक' और 'वर्ग-भेद तोड़ने' के गहरे अर्थ को समझाएं।
प्रश्न 3. चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में निहित त्रासदी/करुणा/हास्य का सामंजस्य भारतीय कला और सौंदर्यशास्त्र की परिधि में क्यों नहीं आता?
Answer: चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में निहित त्रासदी/करुणा/हास्य का सामंजस्य भारतीय कला और सौंदर्यशास्त्र की परिधि में नहीं आता क्योंकि भारतीय रस-सिद्धांत में करुणा और हास्य का मेल नहीं दिखाया जाता क्योंकि भारतीय सौंदर्यशास्त्र में करुण रस और हास्य रस को परस्पर विरोधी माना गया है अर्थात जहाँ करुणा है वहाँ हास्य नहीं हो सकता। भारत में स्वयं पर hँसने की परंपरा नहीं है परंतु चार्ली के पात्र अपने पर हँसते-हँसते हैं। चार्ली की फिल्मों के दृश्य हँसाते-हँसाते रुला देते हैं तो कभी करुण दृश्य के बाद अचानक ही हँसने पर मजबूर कर देते हैं।
In simple words: भारतीय कला में करुणा और हँसी को एक साथ नहीं माना जाता, जबकि चार्ली दोनों को साथ दिखाते हैं।
प्रश्न 4. चार्ली की फिल्मों की विशेषताएँ बताइए।
Answer: चार्ली की फिल्मों में हास्य और करुणा का अद्भुत सामंजस्य है। उनकी फिल्मों में भाषा का प्रयोग बहुत कम है। चार्ली की फिल्मों में बुद्धि की अपेक्षा भावना का महत्त्व अधिक है। उनकी फिल्मों में सार्वभौमिकता है। चार्ली किसी भी संस्कृति को विदेशी नहीं लगते। चार्ली सबको अपने लगते हैं। चार्ली ने फिल्मों को लोकतांत्रिक बनाया और फिल्मों में वर्गथावर्ण-व्यवस्था को तोड़ा। अपनी फिल्मों में चार्ली सदैव चिर युवा दिखता है।
In simple words: चार्ली की फिल्मों में भावनाओं का प्रधान होना, मूक अभिनय और सार्वभौमिक अपील मुख्य विशेषताएँ हैं।
प्रश्न 1. 'नमक' पाठ के आधार पर बताइए कि सफिया और उसके भाई के विचारों में क्या अंतर था?
Answer: 1-सफिया भावनाओं को बहुतमहत्त्व देती है पर उसका भाई बौद्धिक प्रवृत्ति का है, उसकी दृष्टि में कानून भावनाओं से ऊपर है।
2-सफिया मानवीय संबंधों को बहुत महत्त्व देती है जबकि उसका भाई अलगाववादी विचारधारा का है, हिस्से-बखरे की बात करता है।
3-सफिया का भाई कहता है कि अदीबों(साहित्यकार) का दिमाग घुमा हुआ होता है जबकि सफिया जो स्वयं अदीब है उसका मानना है कि अगर सभी लोगों का दिमाग अदीबों की तरह घुमा हुआ होता तो दुनिया कुछ बेहतर हो जाती।
In simple words: जहाँ भाई कानून और सरहदों को मानता था, वहीं सफिया इंसानी रिश्तों और भावनाओं को अहमीयत देती थी।
Exam Tip: भाई की व्यावहारिक/कानूनी सोच और सफिया की भावनात्मक सोच का अंतर बताएं।
प्रश्न 2. नमक ले जाते समय सफिया के मन में क्या दुविधा थी?
Answer: सफिया सैयद मुसलमान थी जो हर हाल में अपना वायदा निभाते हैं। पाकिस्तान से लाहौर नमक ले जाकर वह अपना वायदा पूरा करना चाहती परन्तु जब उसे पता चला कि कस्टम के नियमों के अनुसार सीमापार नमक ले जाना वर्जित है तो वह दुविधा में पड़ गई। सफिया का द्वंद्व यह था कि वह अपनी सिख माँ के लिए नमक, कस्टम अधिकारियों को बताकरले जाए या छिपाकर।
In simple words: वह अपनी माँ से किया वादा निभाना चाहती थी, लेकिन कानूनन नमक ले जाना मना होने के कारण वह असमंजस में थी।
प्रश्न 3. पाठ के आधार पर सफिया की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
Answer: संकेत-
१- भावुक
२- ईमानदार
३- दृढ़निश्चयी
४- निडर
५- वायदे को निभाने वाली
६- मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि मानने वाली साहित्यकार
In simple words: सफिया एक संवेदनशील, ईमानदार और अपने वचनों को पूरी निष्ठा से निभाने वाली महिला थी।
Exam Tip: विशेषताओं के नाम लिखकर एक-दो पंक्तियों में उनकी व्याख्या करें।
प्रश्न 4. 'नमक' पाठ में आए किरदारों के माध्यम से स्पष्ट कीजिए कि आज भी भारत और पाकिस्तान की जनता के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद घुला है।
Answer: भले ही राजनीतिक और धार्मिक आधार पर भारत और पाकिस्तान को भौगोलिक रूप से विभाजित कर दिया गया है लेकिन दोनों देशों के लोगों के हृदय में आज भी पारस्परिक भाईचारा, सौहार्द, स्नेह और सहानुभूति विद्यमान है। राजनीतिक तौर पर भले ही संबंध तनावपूर्ण हों पर सामाजिक तौर पर आज भी जनता के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद घुला हुआ है। अमृतसर में रहने वाली सिख बीबी लाहौर को अपना वतन कहती है और लाहौर नमक का स्वाद नहीं भुला पाती। पाकिस्तान का कस्टम अधिकारी नमक की पुड़िया सफिया को वापस देते हुए कहता है "जामा मस्जिद की सीढ़ियों को मेरा सलाम कहना।" भारतीय सीमा पर तैनात कस्टम अधिकारी ढाका की जमीन और वहाँ के पानी के स्वाद को नहीं भूल पाता।
In simple words: राजनीति ने देशों को बाँट दिया है, लेकिन आम लोगों के दिलों में आज भी एक-दूसरे के लिए प्यार और अपनापन है।
Exam Tip: कस्टम अधिकारियों और सिख बीबी के उदाहरणों के माध्यम से उत्तर को पुख्ता करें।
17 शिरीष के फूल
प्रश्न 1. सिद्ध कीजिए कि शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजयता के मंत्र का प्रचार करता है ?
Answer: शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजयता के मंत्र का प्रचार करता है। जब पृथ्वी अग्नि के समान तप रही होती है वह तब भी कोमल फूलों से लदा लहलहाता रहता है।बाहरी गर्मी, धूप, वर्षा आँधी, लू उसे प्रभावित नहीं करती। इतना ही नहीं वह लंबे समय तक खिला रहता है। शिरीष विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्यशील रहने तथा अपनी अजय जिजीविषा के साथ निष्प्रह भाव से प्रचंड गर्मी में भी अविचल खड़ा रहता है।
In simple words: शिरीष हर मौसम की मार झेलते हुए भी हंसता रहता है, जो कठिन समय में जीने की प्रेरणा देता है।
Exam Tip: 'अवधूत' और 'जिजीविषा' शब्दों का उचित प्रयोग करें।
प्रश्न 2. आरग्वध अमलतास की तुलना शिरीष से क्यों नहीं की जा सकती?
Answer: शिरीष के फूल भयंकर गर्मी में खिलते हैं और आषाढ़ तक खिलते रहते हैं जबकि अमलतास का फूल केवल पन्द्रह-बीस दिनों के लिए खिलता है। उसके बाद अमलतास के फूल झड़ जाते हैं और पेड़ फिर से ठूँठ का ठूँठ हो जाता है। अमलतास अल्पजीवी है। विपरीत परिस्थितियों को झेलता हुआ ऊष्ण वातावरण को हँसकर झेलता हुआ शिरीष दीर्घजीबी रहता है। यही कारण है कि शिरीष की तुलना अमलतास से नहीं की जा सकती।
In simple words: अमलतास कुछ ही दिनों के लिए खिलता है जबकि शिरीष पूरे मौसम में डटा रहता है।
प्रश्न 3. शिरीष के फलों को राजनेताओं का रूपक क्यों दिया गया है?
Answer: शिरीष के फल उन बूढ़े, ढीठ और पुराने राजनेताओं के प्रतीक हैं जो अपनी कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते। अपनी अधिकार-लिपसा के लिए नए युवा नेताओं को आगे नहीं आने देते। शिरीष के नए फलों को जबरदस्ती पुराने फलों को धकियाना पड़ता है। राजनीति में भी नई युवा पीढ़ी, पुरानी पीढ़ी को हराकर स्वयं सत्ता संभाल लेती है।
In simple words: पुराने फल पेड़ पर टिके रहते हैं और नए आने पर ही हटते हैं, जो जिद्दी राजनेताओं की याद दिलाते हैं।
Exam Tip: राजनेताओं की कुर्सी मोह और युवा पीढ़ी के संघर्ष से तुलना करें।
प्रश्न 4. काल देवता की मार से बचने का क्या उपाय बताया गया है?
Answer: काल देवता कि मार से बचने का अर्थ है- मृत्यु से बचना। इसका एकमात्र उपाय यह है कि मनुष्य स्थिर न हो। गतिशील, परिवर्तनशील रहे। लेखक के अनुसार जिनकी चेतना सदा ऊर्ध्वमुख (आध्यात्म की ओर) रहती है, वे टिक जाते हैं।
In simple words: जो व्यक्ति समय के साथ बदलते और आगे बढ़ते रहते हैं, वे जीवन की कठिनाइयों से पार पा लेते हैं।
Exam Tip: गतिशीलता और ऊर्ध्वमुख चेतना के विचार को स्पष्ट करें।
प्रश्न 5. गाँधीजी और शिरीष की समानता प्रकट कीजिए।
Answer: जिस प्रकार शिरीष चिलचिलाती धूप, लू, वर्षा और आँधी में भी अविचल खड़ा रहता है, अनासक्त रहकर अपने वातावरण से रस खींचकर सरस, कोमल बना रहता है, उसी प्रकार गाँधीजी ने भी अपनी आँखों के सामने आजादी के संग्राम में अन्याय, भेदभाव और हिंसा को झेला। उनके कोमल मन में एक ओर निरीह जनता के प्रति असीम करुणा जागी वहीं वे अत्याचारी शासन के विरोध में डटकर खड़े हो गए।
In simple words: गांधीजी की तरह शिरीष भी कठिन परिस्थितियों में कोमलता और अटूट दृढ़ता का प्रतीक है।
Exam Tip: अनासक्ति और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की समानता बताएं।
18 श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा
प्रश्न 1. डॉ० भीमराव अंबेडकर जातिप्रथा को श्रम-विभाजन का ही रूप क्यों नहीं मानते हैं?
Answer: 1- क्योंकि यह विभाजन अस्वाभाविक है।
2- यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है।
3- व्यक्ति की क्षमताओं की उपेक्षा की जाती है।
4- व्यक्ति के जन्म से पहले ही उसका पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।
5- व्यक्ति को अपना व्यवसाय बदलने की अनुमति नहीं देती।
In simple words: जाति प्रथा लोगों की इच्छा के बिना उन पर जबरन काम थोपती है, इसलिए यह सही श्रम-विभाजन नहीं है।
Exam Tip: जन्म आधारित और रुचि की उपेक्षा जैसे बिंदुओं को आधार बनाएं।
प्रश्न 2. दासता की व्यापक परिभाषा दीजिए।
Answer: दासता केवल कानूनी पराधीनता नहीं है। सामाजिक दासता की स्थिति में कुछ व्यक्तियों को दूसरे लोगों के द्वारा तय किए गए व्यवहार और कर्तव्यों का पालन करने को विवश होना पड़ता है। अपनी इच्छा के विरुद्ध पैतृक पेशे अपनाने पड़ते हैं।
In simple words: गुलामी सिर्फ जेल में रहना नहीं है, बल्कि अपनी मर्जी के बिना दूसरों के तय किए काम करने के लिए मजबूर होना भी दासता है।
प्रश्न 3. मनुष्य की क्षमता किन बातों पर निर्भर रहती है?
Answer: मनुष्य की क्षमता मुख्यतः तीन बातों पर निर्भर रहती है-
१- शारीरिक वंश परंपरा
२- सामाजिक उत्तराधिकार
३- मनुष्य के अपने प्रयत्न
लेखक का मत है कि शारीरिक वंश परंपरा तथा सामाजिक उत्तराधिकार किसी के वश में नहीं हैं परन्तु मनुष्य के अपने प्रयत्न उसके अपने वश में हैं। अतः मनुष्य की मुख्य क्षमता- उसके अपने प्रयत्नों को बढ़ावा मिलना चाहिए।
In simple words: व्यक्ति की योग्यता उसके जन्म, समाज और सबसे बढ़कर उसके अपने खुद के प्रयासों पर निर्भर करती है।
Exam Tip: तीनों कारकों का उल्लेख कर स्वयं के प्रयत्नों को सबसे महत्वपूर्ण बताएं।
प्रश्न 4. समता का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि राजनीतिज्ञ पुरुष के संदर्भ में समता को कैसे स्पष्ट किया गया है?
Answer: जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता अर्थात् मानव मात्र के प्रति समान व्यवहार ही समता है। नेता के पास असंख्य लोग आते हैं, उसके पास पर्याप्त जानकारी नहीं होती सबकी सामाजिक पृष्ठभूमि क्षमताएँ, आवश्यकताएँ जान पाना उसके लिए संभव नहीं होतातः उसे समता और मानवता के आधार पर व्यवहार के प्रयास करने चाहिए।
In simple words: सभी मनुष्यों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान और मानवीय व्यवहार करना ही समता है।
Exam Tip: राजनेताओं की व्यावहारिक विवशता और समानता के आदर्श के संतुलन को समझाएं।
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Revision Assignment: Aroh Gadhya Khand (CBSE)
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