NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi

NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

Explore reliable textbook solutions for Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन tailored for Class 9 learners. Utilizing these Science answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final NCERT evaluations.

Practice Class 9 Science Solutions: Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

Access the complete solution PDF for Class 9 Science below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.

Question 1: पारितंत्र में जैव-भूरासायनिक चक्रों की भूमिका का वर्णन करने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त विकल्प चुनिए।
(i) समस्त जीवों को प्रत्यक्ष रूप से भोजन उपलब्ध कराना।
(ii) जैविक और अजैविक घटकों के मध्य आवश्यक पोषक पुनर्चक्रण करना।
(iii) सजीवों के उपयोग के लिए नए तत्वों का निर्माण करना।
(iv) जीव से प्रदूषक और विषाक्त पदार्थों को हटाना।

Answer:

सही विकल्प (ii) है: जैविक और अजैविक घटकों के मध्य आवश्यक पोषक पुनर्चक्रण करना।
पृथ्वी पर सजीव निरंतर अपने आस-पास की वायु, जल, मृदा और चट्टानों के साथ द्रव्य और ऊर्जा का आदान-प्रदान करते रहते हैं। पृथ्वी के निर्जीव (अजैविक) घटकों और सजीव (जैविक) घटकों के मध्य निरंतर अंतःक्रिया होती रहती है। इसी अंतःक्रिया के फलस्वरूप कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे आवश्यक पोषक तत्व बार-बार चक्रित होकर पृथ्वी पर उपलब्ध रहते हैं। यदि यह पुनर्चक्रण न हो, तो पोषक तत्व समाप्त हो जाएँगे और जीवन असंभव हो जाएगा।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
• विकल्प (i) केवल भोजन तक सीमित है, जो चक्र की पूर्ण भूमिका नहीं दर्शाता।
• विकल्प (iii) गलत है क्योंकि नए तत्वों का निर्माण नहीं होता, बल्कि विद्यमान तत्वों का पुनर्चक्रण होता है।
• विकल्प (iv) केवल एक आंशिक प्रक्रिया है।

मुख्य बिंदु:

• जैव-भूरासायनिक चक्र जैविक और अजैविक घटकों को जोड़ते हैं।
• यह पोषक तत्वों के निरंतर पुनर्चक्रण को सुनिश्चित करता है।
• इसके बिना पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व संभव नहीं है।

आम गलतियाँ:

• नए तत्वों के निर्माण वाले विकल्प को सही मान लेना।
• केवल भोजन प्राप्ति को ही चक्र की मुख्य भूमिका समझना।
• अजैविक घटकों की भूमिका को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'पुनर्चक्रण' और 'अजैविक घटक' का सही अर्थ समझें।
c) कारण सहित उत्तर देने का अभ्यास करें।

 

Question 2: निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प पृथ्वी के गर्म होने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है?
(i) सौर विकिरण शीघ्रता से कार्बन डाईआक्साइड द्वारा अवशोषित हो जाती है, जो इसे ऊष्मा के रूप में निर्मुक्त करती है।
(ii) वायुमंडल के सूक्ष्म कण आगामी सौर विकिरण को अवशोषित करते हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को गर्म करते हैं।
(iii) पृथ्वी की सतह, सौर विकिरण का अवशोषण करती है, जो पुन: विकिरित होती है और हरित गृह गैसों द्वारा रोक ली जाती है।
(iv) पृथ्वी का वातावरण बादलों द्वारा परावर्तित सौर विकिरण से ही गर्म होता है।

Answer:

सही विकल्प (iii) है: पृथ्वी की सतह, सौर विकिरण का अवशोषण करती है, जो पुन: विकिरित होती है और हरितगृह गैसों द्वारा रोक ली जाती है।
सूर्य से आने वाला दृश्य प्रकाश पृथ्वी की सतह तक पहुँचता है और सतह को गर्म करता है। पृथ्वी की सतह इस ऊर्जा को अवरक्त विकिरण के रूप में पुनः वायुमंडल में विकिरित करती है। बाहर जाने वाली इस ऊष्मा का कुछ भाग हरितगृह गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड \( (\text{CO}_2) \), मीथेन \( (\text{CH}_4) \) और जलवाष्प द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे यह ऊष्मा अंतरिक्ष में जाने से रुक जाती है और पृथ्वी का ताप जीवन के अनुकूल बना रहता है। यही प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव है।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी की सतह सूर्य के प्रकाश को अवशोषित कर गर्म होती है।
• सतह से निकलने वाली ऊष्मा अवरक्त विकिरण के रूप में होती है।
• हरितगृह गैसें इस ऊष्मा को रोककर पृथ्वी को गर्म रखती हैं।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि \( \text{CO}_2 \) सीधे आने वाले सौर विकिरण को अवशोषित करती है।
• केवल बादलों को पृथ्वी के गर्म होने का मुख्य कारण मानना।
• हरितगृह प्रभाव को पूरी तरह हानिकारक मान लेना (यह प्राकृतिक रूप से आवश्यक है)।

Exam Tips:

a) हरितगृह प्रभाव की प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से याद रखें।
b) दृश्य प्रकाश और अवरक्त विकिरण के अंतर को स्पष्ट समझें।
c) रासायनिक सूत्रों \( (\text{CO}_2, \text{CH}_4) \) का सही प्रयोग करें।

 

Question 3: स्पष्ट कीजिए कि जलवायु परिवर्तन, जल चक्र को किस प्रकार प्रभावित करता है? उदाहरणों द्वारा दर्शाइए।

Answer:

जल चक्र जल वाष्पन, संघनन, वर्षण, अंतःस्यंदन और अपवाह की प्रक्रियाओं से होकर लगातार परिसंचरित होता रहता है। जलवायु परिवर्तन इस संतुलित चक्र को कई प्रकार से प्रभावित करता है:
1. अधिक वाष्पन और तीव्र वर्षा: अधिक गर्म वायुमंडल अधिक नमी संचित कर सकता है। इस कारण कुछ क्षेत्रों में तीव्र मानसून के रूप में अत्यधिक वर्षा होती है (जैसे भारत के कुछ भागों में बाढ़), जबकि अन्य क्षेत्रों में वर्षा की कमी से सूखा पड़ सकता है।
2. हिमानियों का पिघलना: वैश्विक तापन से हिमानियाँ तेजी से पिघल रही हैं, जिससे नदियों में जल की अधिकता होती है और दीर्घकाल में समुद्र का जलस्तर बढ़ सकता है। इससे मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों पर बाढ़ का खतरा उत्पन्न होता है।
3. आकस्मिक तीव्र वर्षा और अपवाह: अचानक भारी वर्षा से सतही जल का अपवाह बढ़ जाता है, जिससे मृदा क्षरण होता है। साथ ही जल का मृदा में रिसाव (अंतःस्यंदन) कम हो जाता है, जिससे भूजल का पुनर्भरण घट जाता है।
4. कृषि पर प्रभाव: भूजल पुनर्भरण में कमी के कारण शुष्क महीनों के दौरान सिंचाई और कृषि को बनाए रखना कठिन हो जाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो वर्षा पर निर्भर हैं।

मुख्य बिंदु:

• जलवायु परिवर्तन से वाष्पन की दर और वर्षा का पैटर्न बदलता है।
• हिमानियों के पिघलने से जलस्तर में वृद्धि होती है।
• अंतःस्यंदन घटने से भूजल का स्तर गिरता है।

आम गलतियाँ:

• केवल बाढ़ को जलवायु परिवर्तन का परिणाम मानना, सूखे को नजरअंदाज करना।
• जल चक्र के चरणों (वाष्पन, संघनन आदि) को भूल जाना।
• भूजल पुनर्भरण पर पड़ने वाले प्रभाव को न लिखना।

Exam Tips:

a) उत्तर को बिंदुओं में लिखकर स्पष्ट करें।
b) वास्तविक जीवन के उदाहरणों (बाढ़, सूखा) का उल्लेख अवश्य करें।
c) जल चक्र के विभिन्न चरणों के तकनीकी शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 4: वर्णन कीजिए कि एल्बिडो किस प्रकार पृथ्वी की सतह के ताप और इसकी जलवायु को प्रभावित करता है।

Answer:

किसी सतह द्वारा परावर्तित सौर विकिरण के अंश को एल्बिडो कहते हैं। यह शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ 'धवलता' या श्वेतता है।
• उच्च एल्बिडो सतहें: हिम और बर्फ जैसी सतहों का एल्बिडो बहुत अधिक होता है (लगभग \( 0.80 - 0.90 \))। ये सतहें अधिकतर सौर विकिरण को परावर्तित कर देती हैं, इसलिए कम गर्मी अवशोषित करती हैं और ठंडी बनी रहती हैं।
• निम्न एल्बिडो सतहें: काली मृदा और महासागरीय जल का एल्बिडो कम होता है। ये सतहें अधिकांश सौर विकिरण को अवशोषित कर लेती हैं, जिससे वे तेजी से गर्म हो जाती हैं।
• जलवायु पर प्रभाव: एल्बिडो में परिवर्तन जलवायु को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, यदि हिमानियाँ पिघलती हैं तो उच्च एल्बिडो वाली सफेद हिम सतह की जगह निम्न एल्बिडो वाला गहरे रंग का जल या भूमि आ जाती है, जो अधिक ऊष्मा अवशोषित करती है – इससे वैश्विक तापन और तेज़ हो जाता है (धनात्मक फीडबैक चक्र)।

मुख्य बिंदु:

• एल्बिडो परावर्तित सौर विकिरण का माप है।
• हल्की सतहों का एल्बिडो अधिक और गहरी सतहों का कम होता है।
• बर्फ पिघलने से एल्बिडो कम होता है और तापन बढ़ता है।

आम गलतियाँ:

• एल्बिडो और अवशोषण में भ्रमित होना।
• यह सोचना कि गहरे रंग की वस्तुएं कम ऊष्मा अवशोषित करती हैं।
• जलवायु पर पड़ने वाले इसके दीर्घकालिक प्रभाव को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) एल्बिडो की परिभाषा स्पष्ट शब्दों में लिखें।
b) उच्च और निम्न एल्बिडो के उदाहरण (बर्फ बनाम काली मिट्टी) दें।
c) वैश्विक तापन के साथ इसका संबंध अवश्य समझाएं।

 

Question 5: पर्वतीय और घाटी समीर किस प्रकार बनती हैं? मान लीजिए दो पर्वत हैं, एक घास द्वारा आच्छादित है और दूसरा बंजर चट्टानों से, क्या दोनों पर्वतीय समीरों के ताप भिन्न-भिन्न होंगे? यदि ऐसा है तो किस प्रकार?

Answer:

पर्वतीय क्षेत्रों में ढलान और घाटी की निचली सतह समान दर से न तो गर्म होती है और न ही ठंडी होती है, जिससे स्थानीय पवनें उत्पन्न होती हैं:
• घाटी समीर: दिन के समय सूर्य के सामने वाली पर्वतीय ढलानें, घाटी तल की तुलना में अधिक तीव्रता से गर्म होती हैं। इसके परिणामस्वरूप ढलानों के ऊपर की वायु गर्म होकर ऊपर उठती है, जिससे निम्न दाब क्षेत्र बनता है। घाटी से ठंडी वायु ढलान से ऊपर की ओर उठकर इस स्थान की पूर्ति करती है। इसे घाटी समीर कहते हैं।
• पर्वतीय समीर: सूर्यास्त के बाद स्थिति उलट जाती है। पर्वतीय ढलानों से ऊष्मा का क्षय तीव्रता से होता है और वे शीघ्र ठंडी हो जाती हैं, जबकि घाटी का तल अपेक्षाकृत अधिक गर्म रहता है। ढलानों के ऊपर की ठंडी और सघन वायु नीचे घाटी की ओर बहने लगती है – इसे पर्वतीय समीर कहते हैं।
घास वाले और बंजर पर्वत में अंतर: हाँ, दोनों पर्वतीय समीरों के ताप में अंतर होगा। बंजर चट्टानी पर्वत का एल्बिडो कम होता है और वहाँ वाष्पोत्सर्जन नहीं होता, इसलिए यह दिन में अधिक तेजी से गर्म होता है और रात में तेजी से ठंडा होकर अधिक ठंडी व तेज़ पर्वतीय समीर उत्पन्न करता है। इसके विपरीत, घास से आच्छादित पर्वत पौधों की वाष्पोत्सर्जन क्रिया के कारण अपेक्षाकृत ठंडा रहता है और वहाँ ताप परिवर्तन धीमा होता है।

मुख्य बिंदु:

• घाटी समीर दिन में घाटी से पर्वत की ओर चलती है।
• पर्वतीय समीर रात में पर्वत से घाटी की ओर चलती है।
• वनस्पति और एल्बिडो पवन के ताप और तीव्रता को प्रभावित करते हैं।

आम गलतियाँ:

• दिन और रात के समय हवा की दिशा में भ्रम होना।
• वाष्पोत्सर्जन और एल्बिडो के प्रभाव को न समझाना।
• घाटी समीर और पर्वतीय समीर की परिभाषाओं को मिला देना।

Exam Tips:

a) चित्र या आरेख के रूप में समझने का अभ्यास करें।
b) उच्च दाब और निम्न दाब के अंतर को स्पष्ट करें।
c) वनस्पति आवरण के प्रभाव को तार्किक रूप से समझाएं।

 

Question 6: आप पवन, तूफान और वर्षा आदि मौसमी परिघटनाओं के साक्षी रहे हैं। वायुमंडल की कौन-सी परतें इनके लिए उत्तरदायी हैं? और इन परिघटनाओं के होने का प्रमुख कारण क्या है?

Answer:

पृथ्वी का वायुमंडल विभिन्न परतों में विभाजित है – क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, तापमंडल और बहिर्मंडल। इनमें से क्षोभमंडल, जो पृथ्वी की सतह से लगभग \( 12\text{ km} \) की ऊँचाई तक फैला है, लगभग सभी मौसम संबंधी परिघटनाओं जैसे पवन, तूफान और वर्षा के लिए उत्तरदायी है।
कारण: यह परत पृथ्वी की सतह से सीधे गर्म होती है, इसलिए इसमें ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान लगातार घटता जाता है (लगभग \( 6.5^\circ\text{C} \) प्रति किलोमीटर)। जैसे-जैसे सतह के निकट की गर्म वायु ऊपर उठती है, वह तेज़ हवाएँ, आँधी-तूफान और संवहनीय वर्षा उत्पन्न करती है।
मूल कारण: इन सभी मौसमी परिघटनाओं का प्रमुख कारण पृथ्वी की सतह का असमान ऊष्मण है। सूर्य विभिन्न अक्षांशों और सतहों को असमान रूप से गर्म करता है, जिससे वायुदाब में भिन्नता उत्पन्न होती है। वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है, जिससे पवन बनती है।

मुख्य बिंदु:

• क्षोभमंडल मौसम संबंधी सभी घटनाओं का केंद्र है।
• पृथ्वी की सतह का असमान ऊष्मण हवाओं का मुख्य कारण है।
• वायुदाब में अंतर उच्च दाब से निम्न दाब की ओर हवा को चलाता है।

आम गलतियाँ:

• समतापमंडल को मौसमी घटनाओं के लिए उत्तरदायी मान लेना।
• तापमान में कमी और ऊँचाई के संबंध को उल्टा लिख देना।
• दाब प्रवणता (Pressure Gradient) के प्रभाव को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) वायुमंडल की परतों के नाम सही क्रम में याद रखें।
b) 'असमान ऊष्मण' और 'वायुदाब' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
c) क्षोभमंडल की औसत ऊँचाई \( 12\text{ km} \) का उल्लेख करें।

 

Question 7: नाइट्रोजन चक्र में होने वाली प्रक्रियाओं की व्याख्या कीजिए। यदि नाइट्रोजन का चक्रण नहीं हो तो पृथ्वी पर जीवन किस प्रकार प्रभावित होगा?

Answer:

नाइट्रोजन सभी सजीवों में प्रोटीन और न्यूक्लीक अम्लों के संश्लेषण के लिए एक आवश्यक तत्व है। वायुमंडल में यह लगभग \( 78\% \) पाई जाती है, परंतु \( \text{N}_2 \) गैस कम अभिक्रियाशील होने के कारण पादप व जंतु इसका सीधे उपयोग नहीं कर सकते। इसे घुलनशील यौगिकों में बदलना पड़ता है। नाइट्रोजन चक्र के पाँच मुख्य चरण हैं:
1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण: फलीदार पादपों की जड़ों की ग्रंथियों में पाए जाने वाले राइजोबियम और मृदा में उपस्थित एजोटोबैक्टर जैसे जीवाणु वायुमंडलीय \( \text{N}_2 \) को अमोनिया \( (\text{NH}_3) \) में बदलते हैं। तड़ित (बिजली चमकना) भी इसमें सहायक है।
2. नाइट्रीकरण: नाइट्रोसोमोनास जीवाणु अमोनिया को नाइट्राइट \( (\text{NO}_2^-) \) में और नाइट्रोबैक्टर इसे नाइट्रेट \( (\text{NO}_3^-) \) में बदलते हैं।
3. स्वांगीकरण: पादप मृदा से नाइट्रोजन यौगिकों का अवशोषण करते हैं, और जंतु पादपों या अन्य जीवों को खाकर इसे प्राप्त करते हैं।
4. अमोनीकरण: मृत जीवों और अपशिष्टों को अपघटक (जीवाणु और कवक) अपघटित कर अमोनिया के रूप में पुनः मृदा में लौटाते हैं।
5. विनाइट्रीकरण: स्यूडोमोनास जैसे जीवाणु नाइट्रेट को पुनः नाइट्रोजन गैस में बदलकर वायुमंडल में लौटाते हैं।
यदि नाइट्रोजन का चक्रण न हो, तो पादपों को प्रोटीन निर्माण के लिए नाइट्रोजन नहीं मिलेगी, जिससे पौधों और जीवों की वृद्धि रुक जाएगी और अंततः पृथ्वी पर जीवन समाप्त हो जाएगा।

मुख्य बिंदु:

• वायुमंडल में नाइट्रोजन की प्रचुरता \( (78\%) \) है लेकिन जीव इसका सीधा उपयोग नहीं कर सकते।
• राइजोबियम और एजोटोबैक्टर स्थिरीकरण में मदद करते हैं।
• चक्रण रुकने से प्रोटीन और डीएनए का संश्लेषण असंभव हो जाएगा।

आम गलतियाँ:

• प्रत्यक्ष नाइट्रोजन उपयोग और स्थिरीकरण में भ्रम होना।
• नाइट्रीकरण और अमोनीकरण के चरणों को आपस में मिला देना।
• विनाइट्रीकरण की प्रक्रिया का महत्व न लिखना।

Exam Tips:

a) नाइट्रोजन चक्र के पाँचों चरणों को क्रमबद्ध रूप से लिखें।
b) महत्वपूर्ण जीवाणुओं (राइजोबियम, स्यूडोमोनास) के नाम सही लिखें।
c) रासायनिक संकेतों \( (\text{N}_2, \text{NH}_3, \text{NO}_3^-) \) का सही प्रयोग करें।

 

Question 8: वनोन्मूलन का पृथ्वी के ऑक्सीजन और कार्बन चक्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है? वनोन्मूलन के अन्य परिणाम क्या हैं?

Answer:

• कार्बन चक्र पर प्रभाव: वन प्रकाश संश्लेषण द्वारा वायुमंडलीय \( \text{CO}_2 \) का अवशोषण करते हैं और कार्बन को कार्बनिक पदार्थों के रूप में संचित करते हैं। वनोन्मूलन से यह अवशोषण क्षमता घट जाती है। साथ ही, काटे गए वृक्षों के जलने या सड़ने से संचित कार्बन पुनः \( \text{CO}_2 \) के रूप में वायुमंडल में मुक्त होता है, जिससे वैश्विक तापन बढ़ता है।
• ऑक्सीजन चक्र पर प्रभाव: वन प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं। वनोन्मूलन से ऑक्सीजन का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे श्वसन और दहन के मुकाबले उत्पादन-उपभोग का संतुलन बिगड़ जाता है।
• अन्य परिणाम:
1. वाष्पोत्सर्जन में कमी: वृक्षों की कमी से स्थानीय वर्षा कम होती है और जल चक्र प्रभावित होता है।
2. एल्बिडो में परिवर्तन: सतही एल्बिडो बदलने से स्थानीय ताप-संतुलन बिगड़ जाता है।
3. मृदा अपरदन: वृक्षों के अभाव में मृदा को बाँधने वाला आवरण हट जाता है, जिससे अपरदन बढ़ता है।
4. पर्यावास हानि: जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने से जैव विविधता में भारी कमी आती है।

मुख्य बिंदु:

• वन कार्बन सिंक (अवशोषक) के रूप में कार्य करते हैं।
• वनों के कटने से \( \text{CO}_2 \) बढ़ती है और ऑक्सीजन घटती है।
• जैव विविधता और मृदा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।

आम गलतियाँ:

• केवल कार्बन चक्र का उल्लेख करना, ऑक्सीजन चक्र को भूल जाना।
• वनोन्मूलन के पर्यावरणीय प्रभावों को सीमित रूप में लिखना।
• मृदा अपरदन और जल चक्र पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को कार्बन चक्र, ऑक्सीजन चक्र और अन्य परिणामों की श्रेणियों में विभाजित करें।
b) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'कार्बन सिंक' और 'जैव विविधता' का प्रयोग करें।
c) बुलेट पॉइंट्स का उपयोग करके उत्तर को आकर्षक बनाएं।

 

Question 9: उपयुक्त चित्र से उस पथ की व्याख्या कीजिए जिससे कार्बन पुनः वायुमंडल में जाता है। इस चित्र का आरंभ आप पादपों द्वारा वायुमंडलीय \( \text{CO}_2 \) के उपयोग से कर सकते हैं।

Answer:

कार्बन चक्र में कार्बन विभिन्न मार्गों से पुनः वायुमंडल में लौटता है, जिसकी शुरुआत इस प्रकार होती है:
1. प्रकाश संश्लेषण: पादप सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण द्वारा वायुमंडलीय \( \text{CO}_2 \) को ग्लूकोस में परिवर्तित करते हैं, जिससे कार्बन पादप के शरीर में संचित हो जाता है।
2. श्वसन द्वारा: पादप और जंतु दोनों श्वसन क्रिया के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और \( \text{CO}_2 \) को वापस वायुमंडल में छोड़ते हैं।
3. खाद्य श्रृंखला द्वारा: जंतु पादपों को और अन्य जंतुओं को खाते हैं, जिससे कार्बन खाद्य श्रृंखला में आगे बढ़ता है।
4. अपघटन द्वारा: पादपों और जंतुओं की मृत्यु के पश्चात अपघटक (जीवाणु, कवक) कार्बनिक द्रव्य का अपघटन करते हैं, जिससे कार्बन \( \text{CO}_2 \) के रूप में पुनः वायु में मिल जाता है।
5. दहन द्वारा: मृत पादप-जंतु मृदा में दबकर लाखों वर्षों में जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम) में बदल जाते हैं। जब मानव इन्हें जलाता है, तो संचित कार्बन अल्प समय में \( \text{CO}_2 \) के रूप में वायुमंडल में मुक्त हो जाता है।
6. महासागरों से विनिमय: वायुमंडल और महासागरों के बीच भी \( \text{CO}_2 \) का आदान-प्रदान होता है, और महासागर आवश्यकतानुसार इसे पुनः वायुमंडल में मुक्त कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रकाश संश्लेषण द्वारा \( \text{CO}_2 \) पौधों में प्रवेश करती है।
• श्वसन, अपघटन और दहन प्रक्रियाएं कार्बन को वायुमंडल में वापस भेजती हैं।
• जीवाश्म ईंधनों का जलना चक्र में अतिरिक्त कार्बन जोड़ता है।

आम गलतियाँ:

• चक्र की शुरुआत गलत चरण से करना।
• दहन और श्वसन के अंतर को स्पष्ट न करना।
• महासागरीय विनिमय की भूमिका को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) प्रक्रियाओं को क्रम संख्या (1, 2, 3...) में लिखें।
b) द्रुत चक्र (श्वसन) और मंद चक्र (जीवाश्म ईंधन) का अंतर स्पष्ट करें।
c) \( \text{CO}_2 \) के रासायनिक सूत्र का सही उपयोग करें।

 

Question 10: वायुमंडल में \( \text{CO}_2 \) की अधिकता को अवांछनीय क्यों माना जाता है जबकि पादपों को इसकी आवश्यकता होती है?

Answer:

यह सत्य है कि पादपों को प्रकाश संश्लेषण के लिए \( \text{CO}_2 \) आवश्यक है और पृथ्वी पर जीवन को गर्म रखने के लिए प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव हेतु इसकी कुछ मात्रा ज़रूरी है। परंतु समस्या इसकी अत्यधिक मात्रा से है। मानव गतिविधियों जैसे जीवाश्म ईंधनों के दहन और वनोन्मूलन ने वर्ष 1960 से वायुमंडलीय \( \text{CO}_2 \) की मात्रा को लगभग \( 35\% \) तक बढ़ा दिया है (\( 315\text{ ppm} \) से \( 420\text{ ppm} \))। यह वृद्धि अत्यधिक तीव्र है। \( \text{CO}_2 \) की यह अधिकता हरितगृह प्रभाव को बहुत अधिक बढ़ा देती है, जिसके गंभीर परिणाम होते हैं:
• वैश्विक तापन में निरंतर वृद्धि होती है।
• हिमानियों और आर्कटिक क्षेत्र की बर्फ तेजी से पिघलती है।
• समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्रों पर बाढ़ का खतरा मंडराता है।
• मौसम की चरम परिस्थितियाँ (अतिवृष्टि, सूखा, तीव्र मानसून) उत्पन्न होती हैं।
• महासागरों द्वारा अधिक \( \text{CO}_2 \) अवशोषित करने से जल अधिक अम्लीय हो जाता है, जिससे प्रवाल भित्तियों को खतरा होता है।

मुख्य बिंदु:

• सीमित मात्रा में \( \text{CO}_2 \) जीवन और तापमान के लिए आवश्यक है।
• अत्यधिक वृद्धि से वैश्विक तापन और जलवायु असंतुलन होता है।
• महासागरों का अम्लीकरण जलीय जीवन को प्रभावित करता है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि \( \text{CO}_2 \) पूरी तरह हानिकारक गैस है।
• प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव और मानव जनित तापन में अंतर न समझना।
• \( \text{ppm} \) (parts per million) के आंकड़ों को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) आवश्यकता और अधिकता के अंतर को तार्किक रूप से समझाएं।
b) वैश्विक तापन और महासागरीय अम्लीकरण जैसे प्रभावों का उल्लेख करें।
c) सटीक आँकड़ों (\( 315\text{ ppm} \) से \( 420\text{ ppm} \)) का प्रयोग करें।

 

Question 11: पृथ्वी की सतह से ऊष्मा का क्षय किस प्रकार होता है? इसकी क्या सार्थकता है?

Answer:

सभी वस्तुएँ ऊष्मा का विकिरण करती हैं। पृथ्वी की सतह सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करती है और इस ऊर्जा को अवरक्त विकिरण के रूप में पुनः वायुमंडल में विकिरित करती है – इसी प्रक्रिया को ऊष्मा का क्षय कहते हैं।
इस बाहर जाने वाली ऊष्मा का कुछ भाग हरितगृह गैसों (\( \text{CO}_2, \text{CH}_4 \), जलवाष्प) द्वारा रोक लिया जाता है ताकि यह पूरी तरह अंतरिक्ष में न चली जाए, और शेष भाग अंतरिक्ष में चला जाता है। विभिन्न पदार्थों में ऊष्मा क्षय की दर भिन्न होती है (जैसे कंक्रीट रात में अधिक ऊष्मा छोड़ता है जबकि पारंपरिक मिट्टी के घर ठंडे रहते हैं)।
सार्थकता: यह प्रक्रिया पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन को बनाए रखती है। यदि सारी ऊष्मा अंतरिक्ष में चली जाए, तो पृथ्वी अत्यधिक ठंडी हो जाएगी और जीवन असंभव होगा। यदि पूरी ऊष्मा रोक ली जाए, तो पृथ्वी अत्यधिक गर्म हो जाएगी। अतः ऊष्मा क्षय और हरितगृह गैसों के बीच का संतुलन ही पृथ्वी के ताप को जीवन के अनुकूल बनाए रखता है।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी सूर्य से ऊर्जा लेकर उसे अवरक्त विकिरण के रूप में छोड़ती है।
• हरितगृह गैसें इस ऊष्मा का एक निश्चित भाग रोककर रखती हैं।
• यह संतुलन पृथ्वी के औसत तापमान को बनाए रखता है।

आम गलतियाँ:

• ऊष्मा क्षय को केवल एक नकारात्मक प्रक्रिया समझना।
• अवरक्त विकिरण के स्थान पर दृश्य प्रकाश लिख देना।
• ऊर्जा संतुलन के महत्व को न समझाना।

Exam Tips:

a) 'ऊष्मा का क्षय' और 'हरितगृह प्रभाव' के परस्पर संबंध को स्पष्ट करें।
b) पृथ्वी के तापमान संतुलन का महत्व अवश्य लिखें।
c) दैनिक जीवन का उदाहरण (कंक्रीट बनाम मिट्टी के घर) दें।

 

Question 12: यदि पृथ्वी गोलाकार न होकर एक तश्तरी के समान चपटी होती तब सौर विकिरण और ताप के पैटर्न किस प्रकार भिन्न होते?

Answer:

पृथ्वी के गोलाकार होने के कारण सूर्य की किरणें विभिन्न अक्षांशों पर भिन्न कोणों पर पड़ती हैं, जिससे भूमध्य रेखा पर गर्मी अधिक और ध्रुवों पर ठंड अधिक होती है। यही ताप-अंतर वैश्विक पवन और महासागरीय धाराओं को चलाता है। यदि पृथ्वी चपटी (तश्तरीनुमा) होती, तो:
1. सूर्य की किरणें लगभग पूरे भाग पर समान कोण (लंबवत् के निकट) पर पड़तीं, जिससे सौर विकिरण का वितरण बहुत अधिक एकसमान होता।
2. भूमध्य रेखा और ध्रुवों जैसा वर्तमान अत्यधिक तीव्र ताप-अंतर उत्पन्न नहीं होता।
3. वैश्विक पवन तंत्र और महासागरीय धाराएँ (जैसे गल्फ स्ट्रीम) जो ताप-अंतर के कारण चलती हैं, उनका वर्तमान स्वरूप पूरी तरह बदल जाता या वे उत्पन्न ही न होतीं।
4. ऋतु-परिवर्तन का चक्र प्रभावित होता, क्योंकि वर्तमान ऋतुएँ पृथ्वी की गोलीय आकृति और उसके अक्ष के झुकाव का परिणाम हैं।
5. चपटी सतह के किनारों और केंद्र में भिन्न वायुमंडलीय परिस्थितियाँ उत्पन्न होतीं, जो वर्तमान जलवायु प्रणाली से पूर्णतः भिन्न होतीं।

मुख्य बिंदु:

• गोलाकार आकृति के कारण अक्षांशों पर सूर्य के कोण बदलते हैं।
• चपटी सतह होने पर सौर विकिरण का वितरण एकसमान होता।
• पवन तंत्र और महासागरीय धाराएं ताप-अंतर पर निर्भर करती हैं।

आम गलतियाँ:

• पृथ्वी की आकृति और सौर कोण के संबंध को न समझना।
• वैश्विक पवनों के निर्माण के मूल कारण (ताप-अंतर) को छोड़ देना।
• काल्पनिक स्थिति के प्रभावों को सतही रूप से लिखना।

Exam Tips:

a) बिंदुओं (1, 2, 3...) में तार्किक उत्तर दें।
b) 'ताप-अंतर' शब्द को मुख्य आधार बनाकर उत्तर लिखें।
c) काल्पनिक परिस्थितियों के वैज्ञानिक परिणाम स्पष्ट करें।

 

Question 13: कल्पना कीजिए कि पृथ्वी पर वायुमंडलीय ताप बढ़ जाता है। यह किस प्रकार हिममंडल, जलमंडल और जैवमंडल को प्रभावित करेगा?

Answer:

वायुमंडल में ताप वृद्धि पृथ्वी के सभी प्रमुख मंडलों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी:
• हिममंडल पर प्रभाव: हिमालयी हिमानियों, लद्दाख की बर्फ और ध्रुवीय हिम छत्रकों के पिघलने की दर अत्यधिक बढ़ जाएगी। स्थायी हिम आवरण घटेगा, जिससे भविष्य में हिमानियों के लुप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा। बर्फ घटने से एल्बिडो कम होगा और तापन और तेज़ हो जाएगा।
• जलमंडल पर प्रभाव: हिमानियों के पिघलने से नदियों में जल की अधिकता होगी और दीर्घकाल में समुद्र का जलस्तर बढ़ जाएगा, जिससे मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों में बाढ़ का गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। महासागरीय जल अधिक अम्लीय और गर्म हो जाएगा, जिससे वाष्पीकरण बढ़कर मानसून चक्र में असंतुलन (बाढ़ या सूखा) लाएगा।
• जैवमंडल पर प्रभाव: समुद्र के गर्म व अम्लीय होने से सूक्ष्म प्लवक और प्रवाल भित्तियों को नष्ट होने का खतरा होगा। स्थलीय पारितंत्रों में पर्यावास हानि के कारण जैव विविधता घटेगी। अनियमित वर्षा और सूखे के कारण कृषि और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी।

मुख्य बिंदु:

• ताप वृद्धि से हिममंडल सिकुड़ता है और समुद्र का जलस्तर बढ़ता है।
• जलमंडल में मानसून चक्र और जल की अम्लता प्रभावित होती है।
• जैवमंडल में जैव विविधता और कृषि संकट में आ जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल एक मंडल (जैसे जलमंडल) तक उत्तर सीमित रखना।
• मंडलों के आपसी अंतःसंबंधों को न दर्शाना।
• दीर्घकालिक प्रभावों (जैसे जैव विविधता की हानि) को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) तीनों मंडलों (हिममंडल, जलमंडल, जैवमंडल) की अलग-अलग हेडिंग बनाकर उत्तर लिखें।
b) एक मंडल के परिवर्तन का दूसरे पर पड़ने वाला प्रभाव स्पष्ट करें।
c) पर्यावरणीय परिणामों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उल्लेख करें।

 

Question 14: व्याख्या कीजिए कि किस प्रकार पृथ्वी का वायुमंडल, इसका ताप उपयुक्त बनाए रखने के लिए सहायता करता है जो कि पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है।

Answer:

पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा और उपयुक्त ताप बनाए रखने में वायुमंडल दो महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है:
1. हानिकारक विकिरण से सुरक्षा: वायुमंडल सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को समतापमंडल में स्थित ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर लेता है, जिससे जीवों को त्वचा कैंसर जैसी क्षतियों से सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा, बादल और गैसें कुछ सौर प्रकाश को सतह पर पहुँचने से पहले ही प्रकीर्णित या अवशोषित कर लेती हैं।
2. ऊष्मा को बनाए रखना (हरितगृह प्रभाव): पृथ्वी की सतह सूर्य के प्रकाश को अवशोषित कर उसे अवरक्त विकिरण के रूप में पुनः विकिरित करती है। वायुमंडल में उपस्थित हरितगृह गैसें (\( \text{CO}_2, \text{CH}_4 \), जलवाष्प) इस ऊष्मा का एक भाग रोक लेती हैं, जिससे यह अंतरिक्ष में पूरी तरह नहीं जा पाती। यदि वायुमंडल न होता, तो पृथ्वी अत्यधिक ठंडी होती और जीवन असंभव होता।
इसके अतिरिक्त, वायुमंडल में \( 78\% \) नाइट्रोजन और \( 21\% \) ऑक्सीजन जैसी जीवन-दायिनी गैसें हैं जो जैविक प्रक्रियाओं को चलाती हैं। शुक्र ग्रह इसका उदाहरण है, जहाँ अत्यधिक हरितगृह प्रभाव के कारण वह बुध से भी अधिक गर्म है।

मुख्य बिंदु:

• ओजोन परत हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है।
• हरितगृह गैसें ऊष्मा रोककर पृथ्वी का तापमान जीवन के अनुकूल रखती हैं।
• वायुमंडल का संतुलन बिगड़ने से शुक्र जैसी चरम स्थिति बन सकती है.

आम गलतियाँ:

• केवल तापमान नियंत्रण लिखना और विकिरण सुरक्षा को छोड़ देना।
• ओजोन परत की स्थिति (समतापमंडल) का उल्लेख न करना।
• हरितगृह प्रभाव को पूरी तरह हानिकारक बताना।

Exam Tips:

a) उत्तर को दो मुख्य बिंदुओं (विकिरण सुरक्षा और हरितगृह प्रभाव) में विभाजित करें।
b) शुक्र ग्रह के उदाहरण का संक्षेप में उल्लेख करें।
c) आवश्यक गैसों के प्रतिशतों का सही संदर्भ दें।

 

Question 15: पृथ्वी के विभिन्न मंडलों के मध्य अंतःसंबंधों का वर्णन कीजिए। उदाहरण सहित समझाइए कि ये मंडल किस प्रकार एक सूक्ष्म संतुलन में कार्य करते हैं।

Answer:

पृथ्वी को एक तंत्र के रूप में समझने के लिए पाँच परस्पर संबंधित मंडलों पर विचार किया जाता है: भूमंडल (ठोस चट्टानें और मृदा), जलमंडल (सतही जल), हिममंडल (बर्फ), वायुमंडल (वायु) और जैवमंडल (जीव)। ये सभी मंडल एक सूक्ष्म संतुलन में कार्य करते हैं:
1. हिम, जलमंडल और जैवमंडल का संबंध: यदि शीतकाल में हिमपात कम होता है (हिममंडल में परिवर्तन), तो ग्रीष्मकाल में झीलों का जलस्तर घट जाता है (जलमंडल प्रभावित)। इससे मैदानों में घास के लिए जल की कमी हो जाती है, जिससे पशुओं के चारे पर असर पड़ता है (जैवमंडल प्रभावित)।
2. जलमंडल और वायुमंडल का संबंध: अरब सागर के गर्म जल के कारण अधिक वाष्पीकरण होता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून (वायुमंडलीय परिघटना) प्रभावित होती है। इससे देश के कुछ भागों में बाढ़ तो कुछ में सूखा पड़ता है – अर्थात जलमंडल में परिवर्तन वायुमंडल और अंततः भूमंडल (कृषि भूमि) को प्रभावित करता है।
3. वायुमंडल, हिममंडल और जलमंडल की श्रृंखला: वायुमंडलीय ताप में वृद्धि से हिममंडल में हिमानियों के पिघलने की दर बढ़ती है, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा होता है और जैवमंडल के पारितंत्र विक्षोभित होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी के सभी पाँच मंडल आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
• एक मंडल में होने वाला परिवर्तन अन्य मंडलों को भी प्रभावित करता है।
• यह अंतःसंबंध पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखता है।

आम गलतियाँ:

• मंडलों के नाम केवल लिखकर छोड़ देना और उनके अंतःसंबंधों को न समझाना।
• उचित और तार्किक उदाहरणों का प्रयोग न करना।
• कारण और प्रभाव के संबंध को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) सभी पाँचों मंडलों के नाम संक्षेप में लिखकर शुरुआत करें।
b) कम से कम दो-तीन स्पष्ट उदाहरण (जैसे जल-वायु-जैव संबंध) दें।
c) यह दिखाएं कि कैसे एक छोटी सी जलवायु परिवर्तन की घटना पूरी श्रृंखला को प्रभावित करती है।

 

Step-by-Step Textbook Answers: Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

Official NCERT Solutions for Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

Access structured NCERT textbook solutions for Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 9 Science, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.

Step-by-Step Explanations for Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 9 Science text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.

Next Steps in Your Science Revision

Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 9 Science.

FAQs

Where can I find the latest NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi for the 2026-27 session?

The complete and updated NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Science are as per latest NCERT curriculum.

Are the Science NCERT solutions for Class 9 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 9 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 9 Science. You can access NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science NCERT solutions for Class 9 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Exercise Questions in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.