Step-by-Step Textbook Solutions for Class 9 Science Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप विविधता एवं वर्गीकरण
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Question 1: जैविक वर्गीकरण से हमें क्या सहायता प्राप्त होती है?
Answer:
जैविक वर्गीकरण सजीवों के अध्ययन को व्यवस्थित और क्रमबद्ध बनाता है।
यह विभिन्न जीवों के बीच की समानताओं और असमानताओं को समझने में सहायता करता है।
यह नए खोजे गए जीवों की पहचान करने में अत्यंत सहायक है।
यह जैव विविधता के संरक्षण में उन जीवों की पहचान करने में मदद करता है जिन पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
मुख्य बिंदु:
• सजीवों के अध्ययन को व्यवस्थित व क्रमबद्ध करना
• समानताओं और असमानताओं की पहचान
• नए जीवों की खोज और संरक्षण में सहायता
आम गलतियाँ:
• छात्रों द्वारा वर्गीकरण के केवल एक लाभ को लिखना
• जैव विविधता संरक्षण की भूमिका को स्पष्ट न करना
• वैज्ञानिक दृष्टिकोण को उत्तर में शामिल न करना
Exam Tips:
a) उत्तर को बिंदुओं के रूप में लिखें ताकि परीक्षक को जाँचने में आसानी हो।
b) 'क्रमबद्ध अध्ययन' और 'संरक्षण' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) उत्तर संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 2: सजीवों को वर्गीकृत करने के कोई चार मानदंड बताइए।
Answer:
सजीवों को वर्गीकृत करने के चार प्रमुख मानदंड निम्नलिखित हैं:
1. बाह्य विशेषताएँ: जैसे शरीर का आकार और आमाप।
2. पोषण की विधि: जीव स्वपोषी हैं या विषमपोषी।
3. आंतरिक संरचनाएँ: कंकाल पैटर्न और अंगों की उपस्थिति।
4. कोशिका संरचना: जीव एककोशिकीय हैं या बहुकोशिकीय, तथा वे पूर्वकेंद्रकी (प्रोकैरियोटिक) हैं या सुकेंद्रकी (यूकैरियोटिक)।
मुख्य बिंदु:
• बाह्य और आंतरिक शारीरिक संरचना
• पोषण प्राप्त करने के तरीके
• कोशिकीय संगठन के प्रकार
आम गलतियाँ:
• केवल बाहरी लक्षणों को मानदंड मान लेना
• कोशिकीय स्तर की जटिलता का उल्लेख न करना
• मानदंडों को स्पष्ट रूप से न समझाना
Exam Tips:
a) चारों मानदंडों को क्रमांक (1, 2, 3, 4) के रूप में लिखें।
b) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'पूर्वकेंद्रकी' और 'सुकेंद्रकी' का सही प्रयोग करें।
c) प्रत्येक बिंदु में संक्षिप्त उदाहरण भी जोड़ सकते हैं।
Question 3: अरस्तू की वर्गीकरण प्रणाली की क्या सीमाएँ थीं?
Answer:
अरस्तू ने जीवों को उनके पर्यावास (भूमि, जल, वायु) और बाहरी स्वरूप के आधार पर समूहित किया था।
इस प्रणाली की मुख्य सीमा यह थी कि यह पूरी तरह से सरलता से दिखाई देने वाली बाहरी विशेषताओं पर आधारित थी।
यह प्रणाली जीवों की आंतरिक जटिलता, कोशिकीय संरचना और उनके वास्तविक विकासवादी संबंधों को दर्शाने में असफल रही।
मुख्य बिंदु:
• पर्यावास और बाहरी स्वरूप पर आधारित वर्गीकरण
• आंतरिक जटिलता की उपेक्षा
• वास्तविक जैविक संबंधों को न दर्शा पाना
आम गलतियाँ:
• अरस्तू के वर्गीकरण के आधार को गलत लिखना
• प्रणाली की कमियों या सीमाओं को स्पष्ट न करना
• केवल पर्यावास शब्द लिखकर उत्तर समाप्त करना
Exam Tips:
a) अरस्तू के आधार और उसकी कमी दोनों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग बताएं।
b) 'आंतरिक जटिलता' और 'वास्तविक संबंध' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
c) उत्तर को दो से तीन वाक्यों में सटीक रूप से समाप्त करें।
Question 4: द्विजगत प्रणाली में क्या समस्या उत्पन्न हुई और इसका समाधान कैसे हुआ?
Answer:
द्विजगत प्रणाली में यह भ्रम उत्पन्न हुआ कि अमीबा और पैरामीशियम जैसे जीवों को किस जगत में रखा जाए, क्योंकि वे गतिशील होने के साथ-साथ एककोशिकीय और विषमपोषी थे।
वे पौधे और जंतु दोनों के गुणों से मेल नहीं खाते थे।
इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने एक तीसरा जगत 'प्रोटिस्टा' जोड़ा, जिसमें इन सभी एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीवों को स्थान दिया गया।
मुख्य बिंदु:
• अमीबा और पैरामीशियम के वर्गीकरण का भ्रम
• द्विजगत प्रणाली की अपूर्णता
• तीसरे जगत 'प्रोटिस्टा' का जोड़ा जाना
आम गलतियाँ:
• जीवों के नाम (अमीबा, पैरामीशियम) का उल्लेख न करना
• समस्या के कारण को गलत समझाना
• समाधान के रूप में सही जगत का नाम न लिखना
Exam Tips:
a) समस्या और समाधान दोनों को अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदुओं में लिखें।
b) 'प्रोटिस्टा' जगत का नाम स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) जीवों की विशेषता (गतिशील, एककोशिकीय, विषमपोषी) का उल्लेख अवश्य करें।
Question 5: कवक (फंजाई) को पौधों से अलग जगत में क्यों रखा गया?
Answer:
कवक पौधों की तरह अचल रहते हैं, परंतु इनमें पोषण की विधि पौधों से भिन्न होती है।
कवक विषमपोषी होते हैं और ये मृत या सड़े-गले पदार्थों से अवशोषण द्वारा अपने पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।
इसके विपरीत, पौधे स्वपोषी होते हैं और प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
इसी पोषण संबंधी मुख्य अंतर के कारण कवकों को पौधों से अलग एक स्वतंत्र जगत 'फंजाई' में रखा गया।
मुख्य बिंदु:
• कवकों में विषमपोषी पोषण का पाया जाना
• मृतोपजीवी रूप से भोजन का अवशोषण
• पौधों के स्वपोषी स्वभाव से भिन्नता
आम गलतियाँ:
• केवल गतिशीलता के आधार पर पौधों के समान मान लेना
• पोषण की विधि (स्वपोषी बनाम विषमपोषी) का अंतर स्पष्ट न करना
• फंजाई जगत का सही कारण न बताना
Exam Tips:
a) 'स्वपोषी' और 'विषमपोषी' शब्दों का स्पष्ट अंतर दर्शाएं।
b) मृतोपजीवी पोषण विधि का उल्लेख करना न भूलें।
c) उत्तर को तुलनात्मक तरीके से लिखें।
Question 6: टेरिडोफाइटा की विशेषताएँ बताइए और यह ब्रायोफाइटा से किस प्रकार भिन्न है?
Answer:
टेरिडोफाइटा की मुख्य विशेषताएँ:
इनमें वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ पाई जाती हैं।
इनमें जल और भोजन के परिवहन के लिए संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) उपस्थित होते हैं।
ब्रायोफाइटा से भिन्नता:
ब्रायोफाइटा के विपरीत, टेरिडोफाइटा के पौधे स्थल पर पूरी तरह से अनुकूलित होते हैं, हालांकि दोनों को अपने जनन के लिए जल की आवश्यकता होती है।
मुख्य बिंदु:
• वास्तविक जड़, तना और पत्तियों की उपस्थिति
• संवहनी ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) का होना
• ब्रायोफाइटा की तुलना में स्थल पर बेहतर अनुकूलन
आम गलतियाँ:
• संवहनी ऊतकों का नाम न लिखना
• ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा में अंतर स्पष्ट न करना
• जनन के लिए जल की आवश्यकता वाले बिंदु को छोड़ देना
Exam Tips:
a) टेरिडोफाइटा की विशेषताएँ और अंतर को स्पष्ट उप-शीर्षकों के साथ लिखें।
b) 'संवहनी ऊतक' शब्द का उल्लेख अवश्य करें।
c) दोनों के बीच तुलना करते समय मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 7: जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म में मुख्य अंतर क्या है?
Answer:
जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी):
इनके बीज फलों में बंद नहीं होते हैं बल्कि शंकुओं पर अनावृत (खुले) रहते हैं।
इनमें निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती है।
एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी):
ये पुष्पी पौधे होते हैं जो पुष्प और फल उत्पन्न करते हैं।
इनके बीज हमेशा फलों के अंदर बंद रहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• बीजों का खुला रहना (जिम्नोस्पर्म) बनाम फलों के अंदर बंद होना (एंजियोस्पर्म)
• शंकुओं का निर्माण और पुष्पों की उपस्थिति
• पौधों की प्रजनन संरचनाओं में अंतर
आम गलतियाँ:
• बीजों की स्थिति (अनावृत बनाम आवृत्त) को स्पष्ट न करना
• उदाहरण (जैसे चीड़) का उल्लेख न करना
• दोनों समूहों की संरचना में अंतर न समझाना
Exam Tips:
a) उत्तर को अंतर स्पष्ट करने वाली तालिका या दो अलग बिंदुओं के रूप में लिखें।
b) 'अनावृत' और 'आवृत' शब्दों का सही अर्थ समझकर लिखें।
c) उचित उदाहरण (चीड़, पुष्पी पौधे) जोड़कर उत्तर को प्रभावी बनाएँ।
Question 8: अकशेरुकी जीवों में पोरीफेरा और नाइडेरिया के शरीर संगठन में क्या अंतर है?
Answer:
पोरीफेरा (स्पंज):
ये बहुकोशिकीय जीव होते हैं, परंतु इनमें किसी प्रकार का ऊतक और अंग संगठन नहीं पाया जाता है।
इनका शरीर जल के प्रवाह पर पूरी तरह निर्भर रहता है।
नाइडेरिया (हाइड्रा, जेलीफिश):
इन जीवों में ऊतक-स्तरीय शरीर संगठन पाया जाता है।
ये अपने स्पर्शकों की सहायता से सक्रिय रूप से अपना शिकार पकड़ते हैं।
मुख्य बिंदु:
• ऊतक संगठन की अनुपस्थिति (पोरीफेरा) और उपस्थिति (नाइडेरिया)
• जल प्रवाह पर निर्भरता बनाम सक्रिय शिकार पकड़ना
• शारीरिक जटिलता में अंतर
आम गलतियाँ:
• दोनों में ऊतक संगठन के स्तर को समान समझना
• स्पर्शकों की भूमिका का उल्लेख न करना
• जीवों के उदाहरण गलत लिखना
Exam Tips:
a) दोनों संघों (Phylum) की विशेषताओं की तुलना स्पष्ट रूप से करें।
b) 'ऊतक-स्तरीय संगठन' और 'स्पर्शक' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।
c) उदाहरणों के साथ उत्तर लिखने से अंक अच्छे मिलते हैं।
Question 9: आर्थ्रोपोडा (संधिपाद जीव) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
Answer:
आर्थ्रोपोडा में कीट, केकड़े और मकड़ियाँ सम्मिलित हैं।
इनकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. इनके शरीर खंडयुक्त (Segmented) होते हैं।
2. इनमें कठोर बहिःकंकाल पाया जाता है जो सुरक्षा प्रदान करता है।
3. बहिःकंकाल शरीर से जल की हानि को कम करता है और मांसपेशियों को अवलंब प्रदान करता है, जिससे ये शुष्क वातावरण में भी आसानी से जीवित रह पाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• खंडयुक्त शरीर और जुड़े हुए appendages (संधिपाद)
• कठोर बहिःकंकाल की उपस्थिति
• शुष्क वातावरण में जीवित रहने का अनुकूलन
आम गलतियाँ:
• बहिःकंकाल के कार्यों (सुरक्षा, जल हानि रोकना) को अधूरा छोड़ना
• जीवों के सही उदाहरण न देना
• शरीर के खंडयुक्त होने का उल्लेख न करना
Exam Tips:
a) विशेषताओं को बिंदुओं में लिखकर समझाएँ।
b) 'बहिःकंकाल' और 'खंडयुक्त शरीर' मुख्य शब्दावली का प्रयोग करें।
c) कीटों और मकड़ियों का उदाहरण अवश्य दें।
Question 10: वैज्ञानिक नाम लिखने के तीन मुख्य नियम बताइए।
Answer:
वैज्ञानिक नाम लिखने के तीन प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं:
1. प्रत्येक वैज्ञानिक नाम के दो भाग होते हैं – वंश (Genus) और जाति (Species)।
2. वंश का नाम पहले लिखा जाता है और उसका पहला अक्षर हमेशा बड़े (Capital) वर्ण में होता है, जबकि जाति का नाम छोटे वर्णों में लिखा जाता है।
3. छपाई में पूरा वैज्ञानिक नाम तिरछे (Italics) अक्षरों में लिखा जाता है तथा हाथ से लिखते समय वंश और जाति के नामों को अलग-अलग रेखांकित (Underline) किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• द्विपद नामपद्धति (वंश और जाति)
• बड़े और छोटे अक्षरों का प्रयोग (Capital & Small letters)
• मुद्रण में तिरछे अक्षर और हस्तलेखन में रेखांकन
आम गलतियाँ:
• वंश के नाम का पहला अक्षर छोटा लिख देना
• हाथ से लिखते समय रेखांकित न करना
• दोनों भागों के क्रम को बदल देना
Exam Tips:
a) तीनों नियमों को क्रमबद्ध 1, 2, 3 के रूप में लिखें।
b) कैरोलस लीनियस की द्विनाम पद्धति से संबंधित नियमों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) एक उचित उदाहरण (जैसे Homo sapiens) देकर नियम को समझा सकते हैं।
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NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप विविधता एवं वर्गीकरण
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