NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 07 Work Energy and Simple Machines (कार्य ऊर्जा एवं सरल मशीनें) Short Answer Questions in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 9 Science Chapter 07 कार्य ऊर्जा एवं सरल मशीनें

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Question 1: क्रिकेट की गेंद और गमले के उदाहरण से ऊर्जावान वस्तु की अवधारणा समझाइए।

Answer:

जब क्षेत्ररक्षक गेंद को विकेट की ओर फेंकता है, तो गतिशील गेंद विकेट से टकराकर उसे गिरा देती है।
इसी प्रकार ऊँचाई से गिरता गमला उस वस्तु को क्षतिग्रस्त कर देता है जिस पर वह गिरता है।
इन दोनों प्रकरणों में वस्तु में कार्य करने की क्षमता होती है, अतः इन्हें ऊर्जावान वस्तु कहा जाता है।

मुख्य बिंदु:

• गतिशील या ऊँचाई पर स्थित वस्तुओं में कार्य करने की क्षमता होती है।
• क्रिकेट की गेंद विकेट पर बल लगाकर उसे गिराने का कार्य करती है।
• गमला गिरने पर दूसरी वस्तु को क्षति पहुँचाता है जो ऊर्जा का प्रमाण है।

आम गलतियाँ:

• ऊर्जावान वस्तु का अर्थ केवल सजीवों से समझ लेना।
• कार्य करने की क्षमता और ऊर्जा के संबंध को स्पष्ट न करना।
• उदाहरणों को सही से न समझा पाना।

Exam Tips:

a) उत्तर में 'कार्य करने की क्षमता' शब्द का उल्लेख अवश्य करें।
b) दोनों उदाहरणों (गेंद और गमला) को अलग-अलग स्पष्ट करें।
c) परिभाषा को संक्षिप्त और सटीक रखें।

 

Question 2: गोलरक्षक द्वारा फुटबॉल रोकने में किया गया कार्य ऋणात्मक क्यों होता है?

Answer:

जब गोलरक्षक फुटबॉल की गति की विपरीत दिशा में बल लगाता है, तो बल और विस्थापन विपरीत दिशाओं में होने के कारण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
इससे फुटबॉल की गतिज ऊर्जा कम हो जाती है, जबकि न्यूटन के तृतीय नियमानुसार फुटबॉल गोलरक्षक पर धनात्मक कार्य करती है।

मुख्य बिंदु:

• बल और विस्थापन की दिशाएँ परस्पर विपरीत होती हैं।
• ऋणात्मक कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा को कम करता है।
• यहाँ कार्य का सूत्र \( W = F \cdot d \cos(180^\circ) \) लागू होता है।

आम गलतियाँ:

• बल और विस्थापन की दिशाओं को एक ही मान लेना।
• ऋणात्मक कार्य का कारण ऊर्जा में वृद्धि लिख देना।
• न्यूटन के नियमों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) दिशा के विपरीत बल लगाने की बात जरूर लिखें।
b) गतिज ऊर्जा पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट करें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली का सही प्रयोग करें।

 

Question 3: दीवार को धकेलने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कार्य शून्य क्यों होता है, फिर भी थकान क्यों होती है?

Answer:

यदि दृढ़ दीवार पर बल लगाने पर भी वह विस्थापित नहीं होती, तो विस्थापन शून्य होने के कारण किया गया कार्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शून्य होता है।
थकान का अनुभव शरीर की मांसपेशियों के निरंतर सिकुड़न-फैलाव में आंतरिक ऊर्जा के व्यय होने के कारण होता है, जो वैज्ञानिक कार्य से भिन्न है।

मुख्य बिंदु:

• वैज्ञानिक कार्य के लिए विस्थापन का होना आवश्यक है।
• दीवार के मामले में विस्थापन \( d = 0 \) होता है, अतः \( W = 0 \) ।
• शारीरिक थकान जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं और मांसपेशियों की ऊर्जा व्यय से जुड़ी है।

आम गलतियाँ:

• शारीरिक थकान को वैज्ञानिक कार्य मान लेना।
• विस्थापन के शून्य होने के महत्व को न समझना।
• दोनों प्रकार के कार्यों में अंतर न स्पष्ट करना।

Exam Tips:

a) कार्य के शून्य होने का मुख्य कारण विस्थापन का न होना बताएं।
b) थकान का कारण मांसपेशियों की ऊर्जा का व्यय लिखें।
c) उत्तर को दो स्पष्ट भागों में विभाजित करें।

 

Question 4: सरल लोलक के प्रयोग से यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम कैसे सिद्ध होता है?

Answer:

जब लोलक के गोलक को बिंदु P तक ले जाकर छोड़ा जाता है, तो वहाँ उसकी संपूर्ण ऊर्जा स्थितिज होती है।
मध्य बिंदु Q पर स्थितिज ऊर्जा शून्य होकर संपूर्ण ऊर्जा गतिज हो जाती है, तथा अंत में बिंदु R पर वह लगभग उसी ऊँचाई तक पहुँचता है।
इस प्रकार लोलक की कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत बनी रहती है।

मुख्य बिंदु:

• चरम बिंदुओं पर ऊर्जा पूरी तरह स्थितिज होती है।
• मध्य बिंदु पर ऊर्जा पूरी तरह गतिज होती है।
• कुल यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज + गतिज) हमेशा संरक्षित रहती है।

आम गलतियाँ:

• किसी एक बिंदु पर ऊर्जा को नष्ट मान लेना।
• स्थितिज और गतिज ऊर्जा के रूपांतरण को गलत बताना।
• संरक्षण नियम की मूल शर्त का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) बिंदुओं (P, Q, R) के संदर्भ में ऊर्जा के रूपों को समझाएं।
b) ऊर्जा रूपांतरण को क्रमानुसार लिखें।
c) निष्कर्ष में ऊर्जा संरक्षण का नियम स्पष्ट करें।

 

Question 5: चल घिरनी निकाय का यांत्रिक लाभ 1 से अधिक क्यों होता है?

Answer:

चल घिरनी निकाय में भार को चलायमान घिरनी से बाँधा जाता है, जबकि रस्सी का एक सिरा स्थिर बिंदु से बँधा रहता है और दूसरा सिरा आयास लगाने के लिए स्वतंत्र रहता है।
इस व्यवस्था के कारण हम कम आयास से बहुत अधिक भार उठा सकते हैं, जिससे यांत्रिक लाभ 1 से अधिक हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• चल घिरनी में भार दो रस्सियों द्वारा समर्थित होता है।
• लगाया गया बल (आयास) उठाए जाने वाले भार से कम होता है।
• यांत्रिक लाभ \( \text{भार} / \text{आयास} \) का अनुपात होता है जो 1 से अधिक होता है।

आम गलतियाँ:

• स्थिर और चल घिरनी में अंतर न समझना।
• यांत्रिक लाभ का सूत्र गलत लिखना।
• भार और आयास के संबंधों को उलटा लिख देना।

Exam Tips:

a) रस्सियों की स्थिति और व्यवस्था का वर्णन करें।
b) कम बल से अधिक भार उठाने की बात प्रमुखता से लिखें।
c) यांत्रिक लाभ के मान को स्पष्ट करें।

 

Question 6: आनत तल के झुकाव कोण को कम करने पर आवश्यक बल में क्या परिवर्तन आता है?

Answer:

क्रियाकलाप 7.3 से पता चलता है कि जैसे-जैसे आनत तल का झुकाव कोण कम होता जाता है, वैसे-वैसे किसी वस्तु को समान ऊँचाई तक खींचने के लिए आवश्यक बल भी कम होता जाता है।
तथापि, उतनी ही ऊँचाई तक पहुँचाने के लिए यह बल अधिक दूरी तक लगाना पड़ता है।

मुख्य बिंदु:

• झुकाव कोण घटने पर आवश्यक बल घट जाता है।
• कार्य का परिमाण समान रहता है क्योंकि दूरी बढ़ जाती है।
• बल और दूरी का यह व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल बल कम होने की बात लिखना और दूरी का जिक्र न करना।
• झुकाव कोण और बल के संबंध को गलत समझना।
• क्रियाकलाप के निष्कर्ष को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) बल में कमी और दूरी में वृद्धि दोनों का उल्लेख करें।
b) आनत तल के लाभ को स्पष्ट करें।
c) सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग करें।

 

Question 7: उत्तोलक किसी कार्य को करने में आवश्यक बल को कैसे कम करता है?

Answer:

उत्तोलक का वह सिरा जहाँ कम बल (\( F_1 \)) लगाया जाता है, वह अधिक दूरी (\( d_1 \)) तक विस्थापित होता है, जबकि भारी वस्तु को उठाने वाला सिरा जिस पर अधिक बल (\( F_2 \)) चाहिए, वह कम दूरी (\( d_2 \)) तक विस्थापित होता है।
इस प्रकार \( F_1 \times d_1 = F_2 \times d_2 \) के सिद्धांत से बल कम करना संभव होता है।

मुख्य बिंदु:

• बल आघूर्ण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
• कम बल को अधिक दूरी तक चलाना पड़ता है।
• \( F_1 d_1 = F_2 d_2 \) समीकरण का पालन होता है।

आम गलतियाँ:

• बल और दूरी के अनुपात को गलत समझना।
• सूत्र में मानों को गलत व्यवस्थित करना।
• उत्तोलक के सिद्धांतों को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) सूत्र \( F_1 \times d_1 = F_2 \times d_2 \) अवश्य लिखें।
b) कम बल और अधिक दूरी के संबंध को स्पष्ट करें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 8: बचाव ढलान किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

Answer:

बचाव ढलान रेत या बजरी से भरे आनत पथ होते हैं जो ब्रेक फेल हो जाने पर वाहनों को रोकने में सहायक होते हैं।
जब वाहन ढलान पर चढ़ता है, तो कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार उसकी गतिज ऊर्जा रेत के प्रतिरोधी बल के विरुद्ध कार्य में परिवर्तित होकर धीरे-धीरे शून्य हो जाती है, जिससे वाहन रुक जाता है।

मुख्य बिंदु:

• यह कार्य-ऊर्जा प्रमेय पर आधारित होते हैं।
• वाहन की गतिज ऊर्जा का व्यय प्रतिरोधी बल के विरुद्ध होता है।
• रेत का घर्षण बल वाहन को सुरक्षित रूप से रोकता है।

आम गलतियाँ:

• ढलान के उद्देश्य को गलत समझ लेना।
• कार्य-ऊर्जा प्रमेय का उल्लेख न करना।
• प्रतिरोधी बल की भूमिका को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) कार्य-ऊर्जा प्रमेय का नाम अवश्य लिखें।
b) गतिज ऊर्जा के शून्य होने की प्रक्रिया समझाएं।
c) बचाव ढलान के वास्तविक उपयोग को स्पष्ट करें।

 

Question 9: पनचक्की (घराट) में ऊर्जा का रूपांतरण किस प्रकार होता है?

Answer:

पहाड़ी क्षेत्रों में ऊपर स्थित जल में स्थितिज ऊर्जा होती है।
पाइप से नीचे आते समय यह स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती जाती है।
जल की गतिज ऊर्जा पहिए को घुमाती है, जो ऊपर स्थित चक्की के पत्थर से जुड़ा होता है और अनाज पीसने का कार्य करता है।

मुख्य बिंदु:

• सबसे पहले जल में स्थितिज ऊर्जा संचित होती है।
• नीचे गिरते समय यह गतिज ऊर्जा में बदलती है।
• अंत में यह यांत्रिक ऊर्जा के रूप में अनाज पीसने का कार्य करती है।

आम गलतियाँ:

• ऊर्जा के क्रम को उलटा लिख देना।
• स्थितिज ऊर्जा को सीधे कार्य में बदलते दिखाना।
• पहिया और चक्की के संबंध को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) चरणों के अनुसार ऊर्जा रूपांतरण (स्थितिज → गतिज → यांत्रिक) दर्शाएं।
b) पनचक्की की कार्यप्रणाली को संक्षेप में लिखें।
c) उदाहरण को स्पष्ट रूप से समझाइए।

 

Question 10: गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

Answer:

किसी वस्तु की गति के कारण उसमें विद्यमान ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं (जैसे चलती साइकिल)।
जबकि किसी वस्तु के विरूपण अथवा वस्तुओं के निकाय में उनकी सापेक्ष स्थिति के कारण संचित ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं (जैसे ऊँचाई पर रखी गेंद या तनी हुई स्प्रिंग)।

मुख्य बिंदु:

• गतिज ऊर्जा वस्तु की गति पर निर्भर करती है।
• स्थितिज ऊर्जा वस्तु की स्थिति या विरूपण पर निर्भर करती है।
• दोनों ऊर्जाओं के उदाहरण भिन्न होते हैं।

आम गलतियाँ:

• दोनों की परिभाषाओं को आपस में मिला देना।
• उपयुक्त उदाहरणों का उल्लेख न करना।
• स्थितिज ऊर्जा में स्थिति और विरूपण की बात न लिखना।

Exam Tips:

a) दोनों की स्पष्ट परिभाषा अलग-अलग पैराग्राफ में लिखें।
b) प्रत्येक के लिए कम से कम एक सटीक उदाहरण दें।
c) मुख्य अंतर को बिंदुवार या तुलनात्मक रूप में स्पष्ट करें।

 

Science Class 9 Curriculum Solutions: Chapter 07 कार्य ऊर्जा एवं सरल मशीनें

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