Official NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 07 कार्य ऊर्जा एवं सरल मशीनें
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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 07 कार्य ऊर्जा एवं सरल मशीनें
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Question 1: कार्य-ऊर्जा प्रमेय की सहायता से गतिज ऊर्जा का व्यंजक ( K = ½mv² ) व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:
मान लीजिए m द्रव्यमान की कोई वस्तु प्रारंभिक वेग u से चलकर s विस्थापन के पश्चात अंतिम वेग v प्राप्त करती है।
गति के समीकरण \( v^2 = u^2 + 2as \) से विस्थापन का मान प्राप्त होता है:
\( s = \frac{v^2 - u^2}{2a} \)
न्यूटन के द्वितीय नियम \( F = ma \) के अनुसार वस्तु पर किया गया कार्य W इस प्रकार लिखा जाता है:
\( W = F \times s \)
\( W = ma \times \left(\frac{v^2 - u^2}{2a}\right) \)
\( W = \frac{1}{2}m(v^2 - u^2) \)
यदि वस्तु का प्रारंभिक वेग \( u = 0 \) हो, तो कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किया गया यह कुल कार्य ही वस्तु की अंतिम गतिज ऊर्जा (K) के बराबर होगा:
\( K = \frac{1}{2}mv^2 \)
मुख्य बिंदु:
• कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किया गया कुल कार्य परिवर्तन गतिज ऊर्जा के बराबर होता है।
• गति के तृतीय समीकरण \( v^2 = u^2 + 2as \) का उपयोग करके विस्थापन निकाला जाता है।
• विराम अवस्था से गति आरंभ करने पर प्रारंभिक वेग \( u = 0 \) होता है।
आम गलतियाँ:
• गति के समीकरणों का गलत मान रखना।
• न्यूटन के द्वितीय नियम के बल (F) और विस्थापन (s) का गुणनफल भूल जाना।
• प्रारंभिक वेग \( u = 0 \) को अंतिम चरण में न मानना।
Exam Tips:
a) व्युत्पत्ति करते समय प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से अलग लाइनों में लिखें।
b) गति के समीकरण और न्यूटन के नियम का संदर्भ अवश्य दें।
c) अंतिम व्यंजक \( K = \frac{1}{2}mv^2 \) को बॉक्स में बंद करें।
Question 2: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम को गुरुत्वीय बल क्षेत्र में स्वतंत्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु के उदाहरण से सिद्ध कीजिए।
Answer:
मान लीजिए m द्रव्यमान की वस्तु h ऊँचाई पर स्थित बिंदु A से छोड़ी जाती है।
बिंदु A पर स्थितिज ऊर्जा \( = mgh \), गतिज ऊर्जा शून्य तथा कुल यांत्रिक ऊर्जा \( = mgh \) होगी।
t समय पश्चात वस्तु h' ऊँचाई पर स्थित बिंदु B तक पहुँचती है, जहाँ उसका वेग \( v = gt \) होता है।
गतिक समीकरणों से \( h' = h - \frac{1}{2}gt^2 \) प्राप्त होता है, अतः बिंदु B पर:
स्थितिज ऊर्जा \( = mg(h - \frac{1}{2}gt^2) = mgh - \frac{1}{2}mg^2t^2 \)
गतिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2}mv^2 = \frac{1}{2}m(gt)^2 = \frac{1}{2}mg^2t^2 \)
दोनों ऊर्जाओं को जोड़ने पर कुल यांत्रिक ऊर्जा:
\( \text{कुल ऊर्जा} = (mgh - \frac{1}{2}mg^2t^2) + (\frac{1}{2}mg^2t^2) = mgh \)
यह सिद्ध करता है कि गिरती वस्तु की कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत बनी रहती है।
मुख्य बिंदु:
• स्वतंत्रतापूर्वक गिरती वस्तु की कुल यांत्रिक ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है।
• किसी भी बिंदु पर स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा का योग समान रहता है।
• ऊँचाई घटने पर स्थितिज ऊर्जा घटती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
आम गलतियाँ:
• स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा के सूत्रों में मान रखते समय गलती करना।
• दोनों ऊर्जाओं को जोड़ते समय बीजगणितीय चिह्नों में भ्रमित होना।
• ऊर्जा संरक्षण नियम की परिभाषा न लिखना।
Exam Tips:
a) विभिन्न बिंदुओं (जैसे A और B) पर ऊर्जा की अलग-अलग गणना करें।
b) स्पष्ट करें कि कुल योग हर बिंदु पर अचर (constant) रहता है।
c) समीकरणों को क्रमिक रूप से नए चरण में लिखें।
Question 3: आनत तल के यांत्रिक लाभ की गणना कार्य-ऊर्जा प्रमेय के आधार पर कीजिए और स्पष्ट कीजिए कि यह भार उठाने में किस प्रकार सहायक है।
Answer:
मान लीजिए m द्रव्यमान की वस्तु को h ऊँचाई तक उठाने के लिए आनत तल की लंबाई L है और आवश्यक आयास बल \( F' \) है।
वस्तु को आनत तल पर नियत चाल से ऊपर ले जाने पर किया गया कुल कार्य \( = F' \times L \) होगा।
वस्तु द्वारा अर्जित स्थितिज ऊर्जा \( = mgh \) होगी।
घर्षण की उपेक्षा करते हुए कार्य-ऊर्जा प्रमेय से:
\( F' \times L = mgh \)
यांत्रिक लाभ \( = \frac{\text{भार}}{\text{आयास}} = \frac{mg}{F'} = \frac{L}{h} \)
चूँकि L का मान h से हमेशा अधिक होता है, इसलिए \( F' \) का मान mg से कम होता है और यांत्रिक लाभ 1 से अधिक प्राप्त होता है। इसी कारण कम बल लगाकर भारी वस्तु ऊपर चढ़ाई जा सकती है।
मुख्य बिंदु:
• आनत तल एक सरल मशीन है जो भारी वस्तु को उठाने में मदद करती है।
• यांत्रिक लाभ \( \text{MA} = \frac{L}{h} \) होता है।
• आनत तल की लंबाई जितनी अधिक होगी, आयास बल उतना ही कम लगेगा।
आम गलतियाँ:
• भार और आयास के अनुपात को उल्टा लिख देना।
• L और h के संबंध को स्पष्ट न करना।
• घर्षण बल को बिना बताए उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) यांत्रिक लाभ का सूत्र \( \frac{\text{भार}}{\text{आयास}} \) स्पष्ट रूप से लिखें।
b) पहाड़ी सड़कों और सीढ़ियों का व्यावहारिक उदाहरण अवश्य दें।
c) गणितीय पदों को स्पष्ट चरणों में हल करें।
Question 4: उत्तोलकों को उनकी तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करते हुए प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए और यांत्रिक लाभ के सूत्र की व्याख्या कीजिए।
Answer:
उत्तोलक तीन प्रकार के होते हैं:
1. प्रथम श्रेणी: इसमें आलंब (Fulcrum) बीच में होता है (जैसे- संडासी, कैंची, दंड-तुला)।
2. द्वितीय श्रेणी: इसमें भार बीच में होता है (जैसे- नींबू निचोड़ने की मशीन, बोतल खोलने की मशीन, हथठेला)।
3. तृतीय श्रेणी: इसमें आयास (Effort) बीच में होता है (जैसे- चिमटा, झाड़ू, हथौड़ी)।
दंड-तुला के क्रियाकलाप से यह सिद्ध होता है कि दंड क्षैतिज रहता है जब:
\( \text{आयास} \times \text{आयास भुजा} = \text{भार} \times \text{भार भुजा} \)
यानि \( n_1 \times L_1 = n_2 \times L_2 \)
इससे यांत्रिक लाभ \( = \frac{\text{भार}}{\text{आयास}} = \frac{\text{आयास भुजा}}{\text{भार भुजा}} \) प्राप्त होता है, जिससे स्पष्ट है कि आयास भुजा बढ़ाकर कम बल से अधिक भार उठाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• उत्तोलक तीन श्रेणियों में विभाजित हैं: आलंब, भार और आयास की स्थिति के आधार पर।
• प्रथम श्रेणी में आलंब मध्य में होता है।
• यांत्रिक लाभ भुजाओं के अनुपात से निर्धारित होता है।
आम गलतियाँ:
• श्रेणियों के बीच भार और आयास की स्थिति को मिला देना।
• यांत्रिक लाभ के सूत्र में भुजाओं का उल्टा अनुपात लिखना।
• उदाहरणों को गलत श्रेणी में रख देना।
Exam Tips:
a) तीनों श्रेणियों को अलग-अलग बुलेट पॉइंट में लिखें।
b) प्रत्येक श्रेणी के कम से कम दो सटीक उदाहरण दें।
c) आघूर्ण के सिद्धांत \( (\text{आयास} \times \text{आयास भुजा} = \text{भार} \times \text{भार भुजा}) \) को जरूर दर्शाएं।
Question 5: शक्ति की अवधारणा को उदाहरण सहित समझाइए और इसका SI मात्रक बताते हुए किसी संख्यात्मक उदाहरण से इसकी गणना कीजिए।
Answer:
शक्ति को कार्य करने की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है। गणितीय रूप से इसे इस प्रकार लिखा जाता है:
\( P = \frac{W}{t} \)
समान कार्य को कम समय में करने के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है, जैसे सीढ़ियों पर दौड़कर चढ़ना और धीरे-धीरे चलकर चढ़ना।
शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है, जहाँ \( 1\text{ W} = 1\text{ J s}^{-1} \)
संख्यात्मक उदाहरण: यदि कोई भारोत्तोलक 5 सेकंड में 75 kg द्रव्यमान को 2 m ऊपर उठाता है, तो किया गया कार्य:
\( W = mgh \)
\( W = 75 \times 10 \times 2 = 1500\text{ J} \)
आवश्यक शक्ति:
\( P = \frac{1500\text{ J}}{5\text{ s}} \)
\( P = 300\text{ W} \)
मुख्य बिंदु:
• शक्ति कार्य करने की दर है जिसका मात्रक वाट है।
• सूत्र \( P = \frac{W}{t} \) का उपयोग करके गणना की जाती है।
• समय कम होने पर शक्ति का मान बढ़ जाता है।
आम गलतियाँ:
• शक्ति और ऊर्जा को एक ही भौतिक राशि मान लेना।
• SI मात्रक लिखना भूल जाना या गलत मात्रक लिखना।
• संख्यात्मक गणना में त्वरण (g) का मान न रखना या गलत रखना।
Exam Tips:
a) परिभाषा और सूत्र को सबसे पहले लिखें।
b) संख्यात्मक प्रश्न हल करते समय मानों को इकाई सहित लिखें।
c) उत्तर के साथ मात्रक (वाट) अवश्य लिखें।
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