Official NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 06 गति पर बलों का प्रभाव
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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 06 गति पर बलों का प्रभाव
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Question 1: एक क्षैतिज बल का उपयोग करके किसी मेज को फर्श पर नियत वेग से गति प्रदान की जाती है। फर्श द्वारा मेज पर लगाया गया घर्षण बल कितना है?
Answer:
मेज नियत वेग से चल रही है, इसलिए उसका त्वरण शून्य है।
न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार, यदि किसी वस्तु का वेग नियत है तो उस पर लगने वाला परिणामी बल शून्य होता है।
अतः मेज पर आगे की दिशा में लगाया गया बल और फर्श द्वारा पीछे की दिशा में लगाया गया घर्षण बल परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत होंगे।
इसलिए घर्षण बल का परिमाण लगाए गए क्षैतिज बल के बराबर होगा और उसकी दिशा गति की दिशा के विपरीत होगी।
मुख्य बिंदु:
• नियत वेग से गतिमान वस्तु का त्वरण शून्य होता है।
• न्यूटन के प्रथम नियम के अनुसार शून्य त्वरण का अर्थ है कि परिणामी बल शून्य है।
• घर्षण बल हमेशा लगाए गए बल के विपरीत दिशा में कार्य करता है।
आम गलतियाँ:
• छात्र यह मान लेते हैं कि गति के लिए बल अधिक होना चाहिए, जबकि नियत वेग में बल संतुलित होते हैं।
• घर्षण बल की दिशा को गति की दिशा में मान लेना।
• त्वरण और वेग को एक ही समझना।
Exam Tips:
a) न्यूटन के प्रथम नियम के अनुप्रयोग को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) बल के संतुलित होने की शर्त का उल्लेख अवश्य करें।
c) दिशा और परिमाण दोनों को स्पष्ट करें।
Question 2: एक चिकनी घर्षण-रहित सतह पर गतिमान गेंद के लिए सही शब्द का चयन कर निम्नलिखित कथनों को सत्य लिखिए –
(i) यदि गेंद पर कोई परिणामी बल नहीं लगाया जाता है तो गेंद का वेग समान रहेगा/बढ़ेगा/घटेगा।
(ii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/बढ़ेगा/घटेगा।
(iii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/बढ़ेगा/घटेगा।
Answer:
(i) यदि गेंद पर कोई परिणामी बल नहीं लगाया जाता है तो गेंद का वेग समान रहेगा।
(ii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण बढ़ेगा।
(iii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण घटेगा।
कारण:
(i) परिणामी बल शून्य होने पर त्वरण शून्य होता है, इसलिए गेंद नियत वेग से चलती रहेगी।
(ii) गति की दिशा में लगाया गया बल उसी दिशा में त्वरण उत्पन्न करता है जिससे वेग बढ़ता है।
(iii) गति के विपरीत दिशा में लगाया गया बल वस्तु की चाल को कम करता है।
मुख्य बिंदु:
• बल और त्वरण का सीधा संबंध होता है।
• बाह्य बल न होने पर वस्तु अपनी अवस्था बनाए रखती है (जड़त्व)।
• विपरीत बल गति का विरोध करता है।
आम गलतियाँ:
• बिना बल के भी वस्तु के रुकने की गलत धारणा रखना।
• वेग और त्वरण के प्रभाव को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक कथन का वैज्ञानिक कारण एक-एक पंक्ति में दें।
b) जड़त्व और न्यूटन के नियमों के संदर्भ का प्रयोग करें।
c) सही विकल्पों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।
Question 3: एक चिकनी क्षैतिज सतह पर विद्यमान दो गुटके P और Q चित्र में दर्शाए गए हैं। गुटके P पर \( 4\text{ N} \) और \( 5\text{ N} \) परिमाण के दो बल विपरीत दिशाओं में कार्य कर रहे हैं, जबकि गुटका Q नियत वेग से गतिमान है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(i) P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है।
(ii) P पर परिणामी बल नहीं लगता है और Q पर परिणामी बल लगता है।
(iii) P और Q दोनों पर परिणामी बल लगता है।
(iv) न तो P और न ही Q पर परिणामी बल लगता है।
Answer:
सही विकल्प – (i) P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है।
स्पष्टीकरण:
गुटके P पर दाईं ओर \( 5\text{ N} \) और बाईं ओर \( 4\text{ N} \) का बल लग रहा है।
परिणामी बल \( = 5\text{ N} - 4\text{ N} \)
\( = 1\text{ N} \)
इस परिणामी बल की दिशा दाईं ओर होगी, अतः P पर परिणामी बल कार्य कर रहा है।
गुटका Q नियत वेग से चल रहा है, जिसका अर्थ है कि उसका त्वरण शून्य है। इसलिए उस पर लगने वाला परिणामी बल भी शून्य है।
मुख्य बिंदु:
• विपरीत दिशाओं में लगने वाले बल आपस में घट जाते हैं।
• नियत वेग का अर्थ शून्य त्वरण और शून्य परिणामी बल होता है।
• असंतुलित बल ही वस्तु में त्वरण उत्पन्न करता है।
आम गलतियाँ:
• गुटके Q के वेग को देखकर उस पर बल मान लेना।
• बलों को आपस में जोड़ देना जबकि वे विपरीत दिशा में हैं।
Exam Tips:
a) परिणामी बल की गणना सूत्र लिखकर करें।
b) नियत वेग और त्वरण के संबंध को स्पष्ट करें।
c) सही विकल्प के साथ उचित कारण अवश्य लिखें।
Question 4: सर्प नौका दौड़ के अभ्यास के समय 100 नाविक एक नौका को एक साथ खे रहे हैं। इनमें से 95 नाविक नौका को आगे बढ़ाने के लिए पीछे की ओर चप्पू चलाते हैं। शेष 5 नाविक विपरीत दिशा में चप्पू चलाते हैं। यदि प्रत्येक नाविक \( 200\text{ N} \) का क्षैतिज बल लगाता है, तो बताइए सर्प नौका पर लगने वाला परिणामी बल कितना है? कर्षण बल, वायु घर्षण आदि की उपेक्षा कीजिए।
Answer:
आगे की दिशा में बल लगाने वाले नाविकों की संख्या \( = 95 \)
एक नाविक द्वारा लगाया गया बल \( = 200\text{ N} \)
आगे की दिशा में कुल बल \( = 95 \times 200 \)
\( = 19000\text{ N} \)
विपरीत दिशा में बल लगाने वाले नाविकों की संख्या \( = 5 \)
विपरीत दिशा में कुल बल \( = 5 \times 200 \)
\( = 1000\text{ N} \)
परिणामी बल \( = 19000 - 1000 \)
\( = 18000\text{ N} \)
अतः, सर्प नौका पर \( 18000\text{ N} \) का परिणामी बल आगे की दिशा में लगेगा।
मुख्य बिंदु:
• विपरीत दिशा में लगने वाले बलों के प्रभाव घट जाते हैं।
• कुल बल निकालने के लिए नाविकों की संख्या को व्यक्तिगत बल से गुणा करते हैं।
• परिणामी बल की दिशा बड़े बल वाली दिशा में होती ਹੈ।
आम गलतियाँ:
• सभी 100 नाविकों के बलों को सीधे जोड़ देना।
• घटाव करते समय बड़ी संख्या में से छोटी संख्या न घटाना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक चरण को अलग-अलग पंक्तियों में हल करें।
b) इकाइयों जैसे N (न्यूटन) का सही प्रयोग करें।
c) अंतिम उत्तर में बल की दिशा का उल्लेख जरूर करें।
Question 5: जब किसी वस्तु पर परिणामी बल लगता है, तो हम देखते हैं कि वस्तु त्वरित होती है –
(i) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।
(ii) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती होता है।
(iii) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
(iv) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।
Answer:
सही विकल्प – (iv) त्वरण बल की दिशा में होता है और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।
स्पष्टीकरण:
न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार:
\( F = m \times a \)
अतः \( a = \frac{F}{m} \)
किसी निश्चित द्रव्यमान वाली वस्तु पर जितना अधिक परिणामी बल लगाया जाएगा, उसमें उतना ही अधिक त्वरण उत्पन्न होगा और त्वरण की दिशा हमेशा लगाए गए बल की दिशा में होती है।
मुख्य बिंदु:
• बल, द्रव्यमान और त्वरण का संबंध न्यूटन के दूसरे नियम से दिया जाता है।
• त्वरण हमेशा बल की दिशा में ही उत्पन्न होता है।
• बल बढ़ाने पर त्वरण बढ़ता है (समानुपाती)।
आम गलतियाँ:
• त्वरण और बल की दिशा को विपरीत मान लेना।
• व्युत्क्रमानुपाती और समानुपाती में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) गणितीय व्यंजक \( F = ma \) लिखकर समझाएँ।
b) सही विकल्प चुनकर उसका संक्षिप्त कारण दें।
c) परिभाषाओं को सटीक रूप से याद रखें।
Question 6: एक सीधी रेखा के अनुदिश गतिमान चार वस्तुओं A, B, C और D के लिए स्थिति–समय ग्राफ दर्शाए गए हैं। इनमें से किस पर एक परिणामी बल कार्य करता है –
(i) वस्तु A
(ii) वस्तु B
(iii) वस्तु C
(iv) वस्तु D
Answer:
सही विकल्प – (iii) वस्तु C
स्पष्टीकरण:
स्थिति–समय आलेख की ढाल वस्तु के वेग को दर्शाती है।
• वस्तु A का आलेख सीधी झुकी हुई रेखा है, जिसकी ढाल नियत है, अतः वेग नियत और त्वरण शून्य है (परिणामी बल शून्य)।
• वस्तु B का आलेख क्षैतिज रेखा है, जिसका अर्थ है कि वस्तु विरामावस्था में है (त्वरण और बल शून्य)।
• वस्तु C का आलेख वक्र है जिसकी ढाल समय के साथ बढ़ रही है, अतः वेग बदल रहा है और उसमें त्वरण उत्पन्न हो रहा है (इस पर परिणामी बल कार्य कर रहा है)।
• वस्तु D का आलेख नीचे की ओर झुकी हुई सीधी रेखा है, जिसकी ढाल नियत है, अतः नियत वेग है और त्वरण शून्य है।
मुख्य बिंदु:
• स्थिति-समय ग्राफ की ढाल वेग को दर्शाती है।
• वक्र रेखा त्वरित गति को दर्शाती है।
• त्वरित वस्तु पर ही परिणामी बल कार्य करता है।
आम गलतियाँ:
• वक्र ग्राफ और सीधी रेखा के अंतर को न समझ पाना।
• ढाल से वेग और त्वरण का अनुमान गलत लगाना।
Exam Tips:
a) ग्राफ के प्रत्येक प्रकार (सरल रेखा, वक्र, क्षैतिज) का अर्थ याद रखें।
b) त्वरण की उपस्थिति का पता लगाने के लिए ढाल के परिवर्तन को देखें।
c) प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाएँ।
Question 7: कोई नाविक किसी छोटी नौका से तट पर कूदता है। जैसे ही नाविक आगे की ओर कूदता है तो क्या नौका गति करेगी? यदि हाँ, तो किस दिशा में और क्यों?
Answer:
हाँ, नौका गति करेगी।
जब नाविक आगे की ओर कूदता है, तब वह नौका पर पीछे की ओर बल लगाता है। न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर तथा विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।
इसलिए नाविक के आगे की ओर कूदने की क्रिया के परिणामस्वरूप नौका पर पीछे की ओर प्रतिक्रिया बल लगता है और नौका नाविक की गति की विपरीत दिशा में चलने लगती है।
अतः नाविक के आगे की ओर कूदते ही नौका पीछे की ओर गति करती है।
मुख्य बिंदु:
• यह घटना न्यूटन के गति के तृतीय नियम पर आधारित है।
• क्रिया और प्रतिक्रिया बल बराबर और विपरीत होते हैं।
• बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
आम गलतियाँ:
• नौका और नाविक पर लगने वाले बलों की दिशा में भ्रम होना।
• न्यूटन के तृतीय नियम को ठीक से न लिख पाना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'क्रिया और प्रतिक्रिया' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
b) दैनिक जीवन के अन्य उदाहरणों से जोड़कर समझ सकते हैं।
c) दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 8: ऊँची कूद प्रतियोगिता में खिलाड़ी सुरक्षित गिरें इसके लिए रेत या फोम के गद्दे की व्यवस्था की जाती है। इसके पीछे का कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer:
जब खिलाड़ी ऊँचाई से नीचे गिरता है, तब उसका संवेग बदलकर शून्य हो जाता है।
रेत या फोम का गद्दा खिलाड़ी के रुकने का समय बढ़ा देता है। न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार:
परिणामी बल \( = \frac{\text{संवेग में परिवर्तन}}{\text{समय}} \)
संवेग में परिवर्तन समान रहने पर यदि रुकने का समय बढ़ जाता है, तो खिलाड़ी पर लगने वाला परिणामी बल कम हो जाता है।
इसी कारण चोट लगने की संभावना बहुत कम हो जाती है और खिलाड़ी सुरक्षित रहता है।
अतः ऊँची कूद प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए रेत या फोम के गद्दे का उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• समय बढ़ने से बल का मान कम हो जाता है।
• यह संवेग परिवर्तन की दर (बल) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
• गद्दे झटके को सहन करने का समय बढ़ा देते हैं।
आम गलतियाँ:
• संवेग परिवर्तन और समय के संबंध को स्पष्ट न करना।
• केवल गद्दे के नरम होने को ही कारण बताना।
Exam Tips:
a) संवेग और समय के व्युत्क्रमानुपाती संबंध को सूत्र के साथ लिखें।
b) क्रिकेट में कैच लेते समय हाथ पीछे खींचने के उदाहरण से तुलना करें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करें।
Question 9: सब्जियों से भरी हुई एक ठेलागाड़ी किसी अन्य प्रत्येक दृष्टि से उसी के समान परंतु खाली ठेलागाड़ी से टकराती है। टकराव के समय –
(i) भरी हुई ठेलागाड़ी, खाली ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है।
(ii) खाली ठेलागाड़ी, भरी हुई ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है।
(iii) दोनों में से कोई भी ठेलागाड़ी दूसरी ठेलागाड़ी पर बल नहीं लगाती है।
(iv) भरी हुई ठेलागाड़ी और खाली ठेलागाड़ी दोनों एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं।
Answer:
सही विकल्प – (iv) भरी हुई ठेलागाड़ी और खाली ठेलागाड़ी दोनों एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं।
स्पष्टीकरण:
न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर परिमाण का तथा विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया बल उत्पन्न होता है।
अतः टक्कर के समय भरी हुई और खाली दोनों ठेलागाड़ियाँ एक-दूसरे पर समान परिमाण का तथा विपरीत दिशा में बल लगाती हैं, चाहे उनके द्रव्यमान कुछ भी हों।
मुख्य बिंदु:
• न्यूटन का तीसरा नियम द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
• क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा बराबर होते हैं।
• दोनों वस्तुएँ एक-दूसरे पर समान बल लगाती हैं।
आम गलतियाँ:
• भारी वस्तु द्वारा अधिक बल लगाने का भ्रम पालना।
• द्रव्यमान को बल के परिमाण से जोड़ देना।
Exam Tips:
a) न्यूटन के तृतीय नियम का हवाला दें।
b) स्पष्ट करें कि द्रव्यमान अलग होने पर भी बल समान रहते हैं।
c) सही विकल्प को चुनकर कारण सहित लिखें।
Question 10: विभिन्न द्रव्यमानों वाली वस्तुओं पर लगाए गए किसी बल द्वारा उत्पन्न त्वरण के संगत त्वरण–द्रव्यमान ग्राफ दर्शाया गया है। इस स्थिति के लिए बल–द्रव्यमान ग्राफ आलेखित कीजिए।
Answer:
चित्र से स्पष्ट है कि द्रव्यमान बढ़ने पर त्वरण उसी अनुपात में घट रहा है। इसका अर्थ है कि सभी वस्तुओं पर लगाया गया बल समान है।
न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार:
बल \( = \text{द्रव्यमान} \times \text{त्वरण} \)
चित्र से मान लेने पर:
द्रव्यमान \( = 1\text{ kg} \), त्वरण \( = 10\text{ m/s}^2 \)
बल \( = 1 \times 10 = 10\text{ N} \)
द्रव्यमान \( = 2\text{ kg} \), त्वरण \( = 5\text{ m/s}^2 \)
बल \( = 2 \times 5 = 10\text{ N} \)
अतः प्रत्येक द्रव्यमान के लिए बल का मान \( 10\text{ N} \) है।
इसलिए बल–द्रव्यमान आलेख में द्रव्यमान अक्ष के समानांतर \( 10\text{ N} \) पर एक क्षैतिज सरल रेखा प्राप्त होगी।
मुख्य बिंदु:
• \( F = ma \) का उपयोग करके बल की गणना की जाती है।
• नियत बल के लिए बल-द्रव्यमान ग्राफ एक सीधी क्षैतिज रेखा होती है।
• द्रव्यमान और त्वरण का गुणनफल हर बिंदु पर समान रहता है।
आम गलतियाँ:
• ग्राफ से मान लेते समय गलती करना।
• बल को परिवर्ती मान लेना।
Exam Tips:
a) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
b) ग्राफ की प्रकृति (क्षैतिज रेखा) का उल्लेख अवश्य करें।
c) यूनिट्स का सही ध्यान रखें।
Question 11: सरल रेखा में गतिमान \( 10\text{ kg} \) द्रव्यमान की किसी वस्तु का वेग–समय ग्राफ दर्शाया गया है। ग्राफ का उपयोग करके वस्तु पर लगने वाले बल का परिकलन कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
द्रव्यमान \( m = 10\text{ kg} \)
आलेख से:
प्रारंभिक वेग \( u = 10\text{ m/s} \)
\( 8 \) सेकंड बाद वेग \( v = 30\text{ m/s} \)
समय \( t = 8\text{ s} \)
त्वरण \( a = \frac{v - u}{t} \)
\( a = \frac{30 - 10}{8} \)
\( a = \frac{20}{8} \)
\( a = 2.5\text{ m/s}^2 \)
अब, बल \( F = m \times a \)
\( F = 10 \times 2.5 \)
\( F = 25\text{ N} \)
अतः वस्तु पर लगने वाले बल का परिमाण \( 25\text{ N} \) है।
मुख्य बिंदु:
• वेग-समय ग्राफ की ढाल से त्वरण निकाला जाता है।
• \( F = ma \) सूत्र का उपयोग करके बल ज्ञात करते हैं।
• प्रारंभिक और अंतिम वेग को ग्राफ से सही पढ़ना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• त्वरण निकालते समय समय से भाग देना भूल जाना।
• वेग के मान गलत पढ़ना।
Exam Tips:
a) दिए गए मानों को पहले अलग से लिखें।
b) सूत्र लिखकर स्टेप-बाय-स्टेप हल करें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक (न्यूटन) अवश्य लिखें।
Question 12: \( 100\text{ ms}^{-1} \) के वेग से गतिमान \( 50\text{ g} \) द्रव्यमान की कोई गोली एक स्थिर भारी लकड़ी के गुटके में प्रवेश करती है और \( 50\text{ cm} \) की दूरी तक भेदने के पश्चात रुक जाती है। गोली पर लगने वाले अवरोधक बल का आकलन कीजिए। मान लीजिए कि गुटके के भीतर गोली का त्वरण अचर है।
Answer:
दिया गया है:
गोली का प्रारंभिक वेग \( u = 100\text{ m/s} \)
गोली का अंतिम वेग \( v = 0\text{ m/s} \)
गोली का द्रव्यमान \( m = 50\text{ g} = 0.05\text{ kg} \)
तय की गई दूरी \( s = 50\text{ cm} = 0.5\text{ m} \)
गति के तृतीय समीकरण के अनुसार:
\( v^2 = u^2 + 2as \)
\( 0^2 = 100^2 + 2 \times a \times 0.5 \)
\( 0 = 10000 + a \)
\( a = -10000\text{ m/s}^2 \)
अब, बल \( F = m \times a \)
\( F = 0.05 \times (-10000) \)
\( F = -500\text{ N} \)
ऋण चिह्न दर्शाता है कि बल गोली की गति की दिशा के विपरीत है।
अतः, गोली पर लगने वाले अवरोधक बल का परिमाण \( 500\text{ N} \) है।
मुख्य बिंदु:
• ग्राम को किलोग्राम और सेंटीमीटर को मीटर में बदलना आवश्यक है।
• गति के समीकरण का उपयोग करके त्वरण ज्ञात किया जाता है।
• ऋणात्मक चिह्न मंदन या अवरोधक बल को दर्शाता है।
आम गलतियाँ:
• इकाइयों (Units) को एसआई प्रणाली में न बदलना।
• त्वरण निकालते समय गणितीय चिन्हों में गलती करना।
Exam Tips:
a) सभी मानों को एसआई मात्रक में बदल कर ही गणना शुरू करें।
b) गति के सही समीकरण का चयन करें।
c) बल के ऋणात्मक चिह्न के महत्व को स्पष्ट करें।
Question 13: एक श्रेष्ठ फुटबॉलर ने फुटबॉल पर \( 108\text{ km h}^{-1} \) के वेग से प्रहार करके उसको मिले क्षतिपूरक निशाने (penalty shot) को गोल में परिवर्तित कर दिया। उसके द्वारा लगाया गया अनुमानित बल \( 800\text{ N} \) था। फुटबॉल का द्रव्यमान \( 0.4\text{ kg} \) था। उसके पैर और गेंद के मध्य संपर्क समय की गणना कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
फुटबॉल का प्रारंभिक वेग \( u = 0\text{ m/s} \)
अंतिम वेग \( v = 108\text{ km/h} \)
मीटर प्रति सेकंड में बदलने पर:
\( v = 108 \times \frac{5}{18} = 30\text{ m/s} \)
फुटबॉल का द्रव्यमान \( m = 0.4\text{ kg} \)
लगाया गया बल \( F = 800\text{ N} \)
संवेग में परिवर्तन \( \Delta p = m(v - u) \)
\( \Delta p = 0.4 \times (30 - 0) \)
\( \Delta p = 12\text{ kg}\cdot\text{m/s} \)
बल \( F = \frac{\text{संवेग में परिवर्तन}}{\text{संपर्क समय}} \)
संपर्क समय \( t = \frac{\text{संवेग में परिवर्तन}}{F} \)
\( t = \frac{12}{800} \)
\( t = 0.015\text{ s} \)
अतः खिलाड़ी के पैर और फुटबॉल के मध्य संपर्क समय \( 0.015\text{ सेकंड} \) था।
मुख्य बिंदु:
• किमी/घंटा को मीटर/सेकंड में बदलने के लिए \( \frac{5}{18} \) से गुणा करते हैं।
• संवेग में परिवर्तन द्रव्यमान और वेग के अंतर का गुणनफल होता है।
• समय निकालने के लिए संवेग परिवर्तन को बल से विभाजित करते हैं।
आम गलतियाँ:
• वेग को बिना बदले सीधे गणना में उपयोग करना।
• संवेग परिवर्तन के सूत्र में गलती करना।
Exam Tips:
a) इकाइयों का रूपांतरण सबसे पहले करें।
b) प्रत्येक सूत्र को लिखकर मान रखें।
c) दशमलव की गणना सावधानीपूर्वक करें।
Question 14: \( 2\text{ kg} \) द्रव्यमान की एक वस्तु \( 10\text{ ms}^{-1} \) के नियत वेग से गतिमान है। यह एक खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करती है जहाँ वस्तु पर घर्षण बल \( 7\text{ N} \) है। उसी समय वस्तु पर उसकी गति का विरोध करते हुए \( 3\text{ N} \) का एक अतिरिक्त नियत बल लगाया जाता है। खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करने के पश्चात वस्तु विरामावस्था में आने से पूर्व कितनी दूरी तय करती है?
Answer:
दिया गया है:
वस्तु का द्रव्यमान \( m = 2\text{ kg} \)
प्रारंभिक वेग \( u = 10\text{ m/s} \)
अंतिम वेग \( v = 0\text{ m/s} \)
घर्षण बल \( = 7\text{ N} \)
अतिरिक्त विरोधी बल \( = 3\text{ N} \)
कुल विरोधी बल \( F = 7 + 3 = 10\text{ N} \)
त्वरण \( a = \frac{\text{परिणामी बल}}{m} \)
\( a = \frac{-10}{2} = -5\text{ m/s}^2 \)
गति के समीकरण से:
\( v^2 = u^2 + 2as \)
\( 0^2 = 10^2 + 2 \times (-5) \times s \)
\( 0 = 100 - 10s \)
\( 10s = 100 \)
\( s = 10\text{ m} \)
अतः वस्तु विरामावस्था में आने से पूर्व \( 10\text{ मीटर} \) की दूरी तय करेगी।
मुख्य बिंदु:
• एक ही दिशा में लगने वाले विरोधी बल आपस में जुड़ जाते हैं।
• कुल बल से त्वरण ज्ञात किया जाता है जो ऋणात्मक होता है।
• गति के तीसरे समीकरण से दूरी की गणना की जाती है।
आम गलतियाँ:
• दोनों बलों को आपस में घटा देना।
• त्वरण के ऋणात्मक चिह्न को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) कुल बल की गणना स्पष्ट रूप से दिखाएँ।
b) गति का सही समीकरण चुनें।
c) दूरी का मात्रक मीटर में लिखें।
Question 15: कोई ट्रैक्टर \( m_1 \) द्रव्यमान के हैरो (जुताई उपकरण) को परिणामी बल F से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप हैरो में \( a_1 \) त्वरण उत्पन्न होता है। वही ट्रैक्टर \( m_2 \) द्रव्यमान की किसी ट्रॉली को F बल से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप ट्रॉली में \( a_2 \) त्वरण उत्पन्न होता है। यदि ट्रैक्टर अब हैरो को ट्रॉली पर रखकर उसे उसी बल F से खींचता है, तो \( a_1 \) और \( a_2 \) के पदों में परिणामी त्वरण का व्यंजक प्राप्त कीजिए। घर्षण को नगण्य मान लीजिए।
Answer:
हैरो के लिए:
\( F = m_1 \times a_1 \)
अतः \( m_1 = \frac{F}{a_1} \)
ट्रॉली के लिए:
\( F = m_2 \times a_2 \)
अतः \( m_2 = \frac{F}{a_2} \)
जब हैरो को ट्रॉली पर रख दिया जाता है, तब कुल द्रव्यमान:
\( m = m_1 + m_2 \)
\( m = \frac{F}{a_1} + \frac{F}{a_2} \)
\( m = F \times \left(\frac{a_1 + a_2}{a_1 \times a_2}\right) \)
मान लीजिए संयुक्त निकाय का त्वरण \( a \) है।
तब, \( F = m \times a \)
\( a = \frac{F}{m} \)
\( a = \frac{F}{F \times \left(\frac{a_1 + a_2}{a_1 \times a_2}\right)} \)
अतः, \( a = \frac{a_1 \times a_2}{a_1 + a_2} \)
मुख्य बिंदु:
• प्रत्येक उपकरण के लिए द्रव्यमान को बल और त्वरण کے पदों में व्यक्त किया जाता है।
• कुल द्रव्यमान दोनों के योग के बराबर होता है।
• बीजगणितीय हल द्वारा बल F निरस्त हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• भिन्नों के जोड़ने में लघुत्तम (LCM) लेने में गलती करना।
• समीकरण को उल्टा कर देना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक स्थिति के समीकरण अलग-अलग लिखें।
b) बीजगणितीय चरणों को साफ-सुथरा हल करें।
c) अंतिम व्यंजक को डिब्बे में बंद करें।
Question 16: जब किसी दंड चुंबक के ध्रुव को चुंबकीय दिक्सूचक (magnetic compass) के निकट लाया जाता है, तो दंड चुंबक और दिक्सूचक सुई (जो स्वयं भी एक चुंबक है) एक-दूसरे पर चुंबकीय बल लगाते हैं। न्यूटन के गति के तृतीय नियमानुसार दोनों बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं। तथापि दिक्सूचक सुई (compass needle) गति करती है जबकि दंड चुंबक गति नहीं करता है। ऐसा क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।
Answer:
दंड चुंबक और दिक्सूचक सुई एक-दूसरे पर परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत चुंबकीय बल लगाते हैं। ये दोनों बल अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त नहीं करते।
दिक्सूचक सुई एक धुरी पर स्वतंत्रतापूर्वक घूम सकती है। उसका द्रव्यमान कम होता है और उसके घूमने में बहुत कम घर्षण होता है। इसलिए चुंबकीय बल के प्रभाव से उसमें पर्याप्त त्वरण उत्पन्न होता है और वह घूम जाती है।
दूसरी ओर, दंड चुंबक सामान्यतः हाथ से पकड़ा हुआ या किसी सतह पर रखा होता है। हाथ अथवा सतह द्वारा लगाया गया बल चुंबकीय बल को संतुलित कर देता है। इसके अतिरिक्त दंड चुंबक का द्रव्यमान दिक्सूचक सुई की तुलना में अधिक होता है, इसलिए समान बल से उसमें बहुत कम त्वरण उत्पन्न होता है।
अतः दिक्सूचक सुई स्पष्ट रूप से घूमती है, जबकि दंड चुंबक की गति दिखाई नहीं देती।
मुख्य बिंदु:
• न्यूटन का तीसरा नियम अलग-अलग वस्तुओं पर लागू होता है।
• कम द्रव्यमान और कम घर्षण के कारण सुई आसानी से घूम जाती है।
• बाह्य बल (हाथ या सतह का घर्षण) चुंबक की गति को रोक देता है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि दोनों पर बल अलग-अलग हैं।
• द्रव्यमान और घर्षण की भूमिका को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) न्यूटन के तृतीय नियम और जड़त्व/द्रव्यमान दोनों का उल्लेख करें।
b) घर्षण और धुरी की स्वतंत्रता का कारण स्पष्ट रूप से समझाएँ।
c) उत्तर को तार्किक बिंदुओं में लिखें।
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