NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 04 Describing Motion Around Us (अपने परिवेश में गति का वर्णन) Long Answer Questions in Hindi

NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 04 अपने परिवेश में गति का वर्णन

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Question 1: स्थिति-समय ग्राफ से हम कौन-कौन सी भौतिक राशियाँ ज्ञात कर सकते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

Answer:

स्थिति-समय ग्राफ से हम समय के प्रत्येक क्षण पर वस्तु की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, ग्राफ की प्रवणता (ढलान) निकालकर हम वस्तु का वेग भी परिकलित कर सकते हैं।
स्थिति में परिवर्तन को समय में परिवर्तन से विभाजित करने पर माध्य वेग प्राप्त होता है।
यदि ग्राफ एक सरल रेखा है, तो इसका अर्थ है कि वेग नियत है।
यदि ग्राफ एक वक्र रेखा है, तो वेग निरंतर परिवर्तित हो रहा है।
दो वस्तुओं के स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता की तुलना करके यह भी निर्धारित किया जा सकता है कि किस वस्तु की चाल अधिक है।

मुख्य बिंदु:

• स्थिति-समय ग्राफ से किसी भी क्षण वस्तु की स्थिति ज्ञात की जा सकती है।
• ग्राफ की प्रवणता (ढलान) वस्तु के वेग को दर्शाती है।
• सरल रेखा का अर्थ एकसमान वेग और वक्र रेखा का अर्थ परिवर्ती वेग होता है।

आम गलतियाँ:

• स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता को त्वरण समझ लेना (जबकि यह वेग दर्शाती है)।
• सरल रेखा और वक्र रेखा के अंतर को न समझना।
• ग्राफ के अक्षों के चयन में गलती करना।

Exam Tips:

a) उत्तर लिखते समय ग्राफ की प्रवणता और वेग के संबंध को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
b) सरल रेखा और वक्र रेखा के उदाहरण का संक्षिप्त उल्लेख करें।
c) परिभाषाओं को सटीक हिंदी शब्दावली में लिखें।

 

Question 2: वेग-समय ग्राफ से त्वरण और विस्थापन कैसे ज्ञात किए जाते हैं? विस्तार से समझाइए।

Answer:

वेग-समय ग्राफ की प्रवणता (ढलान) निकालकर त्वरण ज्ञात किया जाता है।
वेग में परिवर्तन को समय में परिवर्तन से विभाजित करने पर माध्य त्वरण प्राप्त होता है।
यदि वेग-समय ग्राफ X-अक्ष के समांतर एक सरल रेखा है, तो इसका अर्थ है कि त्वरण शून्य है।
वही, ग्राफ रेखा और समय-अक्ष के बीच परिबद्ध (ঘেরা हुआ) क्षेत्रफल उस समयांतराल में वस्तु का विस्थापन निरूपित करता है।
इस क्षेत्रफल को आयत और त्रिभुज के क्षेत्रफलों के योग से आसानी से परिकलित किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• वेग-समय ग्राफ की प्रवणता त्वरण को प्रदर्शित करती है।
• ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल कुल विस्थापन को दर्शाता है।
• X-अक्ष के समांतर रेखा शून्य त्वरण को इंगित करती है।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल को केवल दूरी मान लेना जबकि यह विस्थापन होता है।
• प्रवणता और क्षेत्रफल के उपयोग में संशय रखना।
• इकाई (Units) लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) त्वरण और विस्थापन दोनों के निकालने के तरीकों को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएँ।
b) आयत और त्रिभुज विधि द्वारा क्षेत्रफल निकालने की प्रक्रिया का उल्लेख अवश्य करें।
c) चित्र बनाकर स्पष्टीकरण देना अधिक प्रभावी होता है।

 

Question 3: नियत त्वरण से गति के तीनों शुद्धगतिक समीकरणों को लिखिए और प्रत्येक का उपयोग किस स्थिति में किया जाता है, स्पष्ट कीजिए।

Answer:

नियत त्वरण से गति के तीन प्रमुख शुद्धगतिक समीकरण निम्नलिखित हैं:
(i) \( v = u + at \), जिसका उपयोग तब किया जाता है जब आरंभिक वेग व त्वरण ज्ञात हों और किसी निश्चित क्षण पर वेग निकालना हो।
(ii) \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \), जिसका उपयोग विस्थापन ज्ञात करने के लिए किया जाता है जब आरंभिक वेग, त्वरण और समय के मान ज्ञात हों।
(iii) \( v^2 = u^2 + 2as \), जिसका उपयोग तब किया जाता है जब समय ज्ञात न हो, परंतु वेग और विस्थापन के बीच संबंध स्थापित करना हो।
ये तीनों समीकरण केवल नियत त्वरण की स्थिति में ही वैध होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रथम समीकरण वेग और समय का संबंध बताता है (\( v = u + at \))।
• द्वितीय समीकरण स्थिति और समय का संबंध बताता है (\( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \))。
• तृतीय समीकरण वेग और स्थिति का संबंध बताता है जब समय न दिया हो (\( v^2 = u^2 + 2as \))。

आम गलतियाँ:

• परिवर्ती त्वरण के प्रश्नों में इन समीकरणों का सीधा प्रयोग करना।
• चरों के संकेतों (\( u, v, a, t, s \)) का गलत अर्थ निकालना।
• समीकरणों के गलत सूत्रों का प्रयोग करना।

Exam Tips:

a) तीनों समीकरणों को स्पष्ट रूप से लिखकर उनके प्रत्येक संकेत का अर्थ बताएँ।
b) उपयोग की जाने वाली स्थितियों को बुलेट पॉइंट्स में लिखें।
c) यह शर्त अवश्य लिखें कि ये समीकरण केवल नियत त्वरण के लिए मान्य हैं।

 

Question 4: उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए कि एकसमान वृत्तीय गति वास्तविक जगत का एक आदर्श प्रतिरूपण क्यों है?

Answer:

व्यावहारिक जगत में एकसमान वृत्तीय गति के पूर्ण प्रतिबंध, जैसे अचर चाल और पूर्ण वृत्ताकार पथ, प्रायः सीधे अनुभव में नहीं आते हैं।
उदाहरण के लिए, किसी धावक द्वारा वृत्ताकार पथ पर दौड़ना वास्तव में एक बहुभुजाकार पथ (जैसे आयताकार या षट्भुजाकार) का सीमांत रूप होता है, जिसमें भुजाओं की संख्या अनंत होने पर पथ वृत्ताकार प्रतीत होने लगता है।
तथापि, यह एक अत्यंत उपयोगी प्रतिरूपण है क्योंकि यह सूर्य के चारों ओर घूमते ग्रहों की गति या किसी वाहन के वृत्तीय मोड़ पर मुड़ने जैसी जटिल वास्तविक स्थितियों का विश्लेषण करने के लिए सैद्धांतिक आधार प्रदान करता है।

मुख्य बिंदु:

• व्यावहारिक जीवन में पूर्णतः वृत्ताकार पथ मिलना कठिन है।
• बहुभुज की भुजाएँ अनंत होने पर पथ वृत्त बन जाता है।
• यह मॉडल खगोलीय गतियों और वाहनों की मोड़ पर गति को समझने में सहायक है।

आम गलतियाँ:

• आदर्श प्रतिरूपण के वास्तविक अर्थ को न समझना।
• केवल वृत्ताकार पथ की परिभाषा लिखकर छोड़ देना।
• ग्रहों की गति और वृत्तीय गति के संबंध को न स्पष्ट करना।

Exam Tips:

a) बहुभुज के सीमांत रूप वाले उदाहरण का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) खगोलीय उदाहरण (जैसे ग्रहों की गति) देकर उत्तर को प्रभावशाली बनाएँ।
c) प्रतिरूपण की उपयोगिता पर विशेष बल दें।

 

Question 5: क्रियाकलाप 4.5 (छल्ले के भीतर गतिमान कंचा) के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि वृत्तीय गति में वेग की दिशा किस प्रकार निर्धारित होती है?

Answer:

जब किसी कंचे को छल्ले के भीतर गति में रखा जाता है, तो यह एक वृत्ताकार पथ पर घूमता रहता है।
परंतु, जैसे ही छल्ले को हटाकर कंचे को मुक्त किया जाता है, वह वक्र पथ को छोड़कर एक सरल रेखा में चलने लगता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मुक्त होने के ठीक क्षण कंचा अपनी गति की दिशा को उसी रूप में बनाए रखता है जिस दिशा में वह छल्ला हटाने के समय गतिमान था, अर्थात उस बिंदु पर वृत्त की स्पर्श रेखा के अनुदिश।
इससे यह सिद्ध होता है कि वृत्त के किसी भी बिंदु पर वेग की दिशा सदैव स्पर्श रेखा के अनुदिश होती है।

मुख्य बिंदु:

• कंचा छल्ला हटने के बाद सरल रेखा में गति करता है।
• गति की दिशा वृत्त के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा के समान होती है।
• वृत्तीय गति में प्रत्येक बिंदु पर वेग की दिशा बदलती है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि कंचा बाहर निकलते समय भी वृत्ताकार पथ पर ही घूमता रहता है।
• स्पर्श रेखा (Tangent) की अवधारणा को स्पष्ट न करना।
• क्रियाकलाप के निष्कर्ष को गलत शब्दों में लिखना।

Exam Tips:

a) क्रियाकलाप का संदर्भ देते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
b) 'स्पर्श रेखा के अनुदिश' शब्द का प्रयोग मुख्य निष्कर्ष के रूप में करें।
c) भौतिकीय कारण को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

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