Official NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 03 क्रियाशील ऊतक
Explore reliable textbook solutions for Chapter 03 क्रियाशील ऊतक tailored for Class 9 learners. Utilizing these Science answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final NCERT evaluations.
Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 03 क्रियाशील ऊतक
View or download the dedicated Chapter 03 क्रियाशील ऊतक solution resource below. Engaging with these textbook answers under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026-27 curriculum for Science.
Question 1: विभज्योतकी ऊतक बार-बार विभाजित होते हैं। इनकी कोशिकाओं की कौन-सी विशेषताएँ इनके लिए ऐसा करना संभव बनाती हैं?
(i) इनमें सुरक्षा के लिए मोटी भित्ति होती है।
(ii) इनमें पोषक तत्वों को संग्रहित करने वाली बड़ी रसधानियाँ होती हैं।
(iii) इनमें पतली भित्तियाँ, सघन कोशिकाद्रव्य और बड़ा और स्पष्ट केंद्रक होता है।
(iv) वे कार्यात्मक रूप से विभेदित कोशिकाएँ हैं।
Answer:
(iii) इनमें पतली भित्तियाँ, सघन कोशिकाद्रव्य और बड़ा और स्पष्ट केंद्रक होता है।
विभज्योतकी कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती रहती हैं, इसलिए इनकी संरचना ऐसी होती है जो शीघ्र और बार-बार विभाजन में सहायक हो – पतली भित्ति और सघन कोशिकाद्रव्य विभाजन को आसान बनाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• विभज्योतकी कोशिकाओं में पतली सेल्युलोस भित्ति होती है।
• इनमें प्रचुर मात्रा में सघन कोशिकाद्रव्य पाया जाता है।
• इनका केंद्रक बहुत बड़ा और स्पष्ट होता है।
आम गलतियाँ:
• मोटी भित्ति को सही मान लेना, जो कि दृढ़ोतक की विशेषता है।
• बड़ी रसधानियों को चुनना, जबकि विभज्योतकी कोशिकाओं में रसधानियाँ अनुपस्थित या बहुत छोटी होती हैं।
• कोशिकाओं के विभेदित होने की बात सोचना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) विभज्योतक ऊतक की विशेषताएँ हमेशा याद रखें क्योंकि यह परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।
c) कारण सहित उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
Question 2: यदि कोई पादप पत्तियों से जड़ों तक भोजन परिवहन करने में असमर्थ है तो ऐसा किस ऊतक की असामान्य प्रणाली के कारण होता है?
(i) जाइलम
(ii) फ्लोएम
(iii) बाह्यत्वचा
(iv) दृढ़ोतक
Answer:
(ii) फ्लोएम
फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को पादप के अन्य भागों (जड़ों सहित) तक पहुँचाता है। इसकी असामान्य प्रणाली से भोजन का परिवहन बाधित होगा।
मुख्य बिंदु:
• फ्लोएम एक जटिल स्थायी ऊतक है।
• यह पादप में भोजन के स्थानांतरण का कार्य करता है।
• जाइलम जल और खनिजों का परिवहन करता है।
आम गलतियाँ:
• जाइलम और फ्लोएम के कार्यों में भ्रमित होना।
• बाह्यत्वचा या दृढ़ोतक को परिवहन ऊतक समझ लेना।
Exam Tips:
a) पादप संवहन ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) के कार्य स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) दिशा याद रखें – जाइलम (नीचे से ऊपर) और फ्लोएम (दोनों दिशाओं में)।
c) प्रश्न को ध्यान से पढ़कर ही सही विकल्प चुनें।
Question 3: जंतुओं के आंतरिक अंगों को आस्तरित करने वाले उपकला ऊतक प्रायः केवल एक या कुछ कोशिकाओं की मोटाई के क्यों होते हैं?
(i) भोजन को प्रभावी रूप से संग्रहीत करने के लिए
(ii) अधिकतम दृढ़ता प्रदान करने के लिए
(iii) उनसे होकर पदार्थों के त्वरित आदान-प्रदान के लिए
(iv) घर्षण कम करने के लिए
Answer:
(iii) उनसे होकर पदार्थों के त्वरित आदान-प्रदान के लिए
एक या कुछ कोशिकाओं की पतली परत विसरण की दूरी को कम करती है, जिससे पदार्थों (गैसों, पोषक तत्वों) का आदान-प्रदान तेज़ी से हो पाता है।
मुख्य बिंदु:
• उपकला ऊतक सुरक्षात्मक आवरण बनाते हैं।
• पतली परत होने के कारण विसरण प्रक्रिया सरल हो जाती है।
• यह फेफड़ों की कूपिकाओं और रक्त वाहिकाओं में पाया जाता है।
आम गलतियाँ:
• इसे दृढ़ता प्रदान करने वाला ऊतक समझ लेना।
• भोजन संग्रहण इसका मुख्य कार्य मानना।
Exam Tips:
a) उपकला ऊतक के विभिन्न प्रकारों और उनके स्थानों को याद रखें।
b) विसरण और आदान-प्रदान शब्द का संबंध पतली परतों से जोड़कर समझें।
c) उत्तर लिखते समय तार्किक कारण स्पष्ट करें।
Question 4: आप चित्र में दिखाए गए अनुसार दो प्रकार से कूद सकते हैं – टाँग सीधी रखकर कूदना – घुटनों और टखनों को सीधा रखिए। सामान्य रूप से कूदना – घुटनों और टखनों को स्वाभाविक रूप से मोड़िए। दोनों बार कूदने में आपके टखने, घुटने और कूल्हे की स्थिति किस प्रकार भिन्न थीं?
Answer:
दोनों प्रकार से कूदने में अंतर – टाँग सीधी रखकर कूदने पर घुटने और टखने अकड़े रहते हैं (कोर संधि पर कोई गति नहीं होती) जिससे उतरते समय झटका अधिक लगता है। सामान्य रूप से कूदने पर घुटने और टखने मुड़ते हैं, जिससे संधियाँ आघात को अवशोषित कर लेती हैं और उतरना अधिक सहज होता है। कूल्हे की स्थिति में भी हल्का मोड़ आता है ताकि शरीर का संतुलन बना रहे।
मुख्य बिंदु:
• संधियाँ शरीर को लचीलापन और आघात अवशोषण प्रदान करती हैं।
• सीधी टाँग रखने पर झटके का सीधा प्रभाव हड्डियों पर पड़ता है।
• घुटने और टखने की कोर संधि गति को नियंत्रित करती है।
आम गलतियाँ:
• संधियों की भूमिका को नजरअंदाज करना।
• झटके लगने के वैज्ञानिक कारण को न समझना।
Exam Tips:
a) दैनिक जीवन के उदाहरणों को विज्ञान के सिद्धांतों से जोड़कर लिखें।
b) संधियों के प्रकार और उनके कार्यों का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) उत्तर को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करें।
Question 5: जब आप अपने घुटने और टखने मोड़ते हैं तो किस प्रकार की संधि का उपयोग होता है?
(i) कंदुक खल्लिका
(ii) कोर
(iii) धुराग्र
Answer:
(ii) कोर संधि
घुटने और टखने कोर संधि के उदाहरण हैं जो केवल एक दिशा में गति (मुड़ना-सीधा होना) की अनुमति देते हैं।
मुख्य बिंदु:
• कोर संधि एक ही तल में गति करने में सहायक होती है।
• कोहनी और घुटना इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
• यह दरवाजे के कब्जे की तरह कार्य करती है।
आम गलतियाँ:
• इसे कंदुक खल्लिका संधि मान लेना।
• सभी संधियों को सभी दिशाओं में घूमने वाली समझ लेना।
Exam Tips:
a) शरीर की प्रमुख संधियों और उनके उदाहरणों की सूची याद रखें।
b) प्रत्येक संधि का गति का प्रकार (दिशा) स्पष्ट रूप से याद रखें।
c) सही विकल्प चुनते समय उसकी परिभाषा की जाँच करें।
Question 6: निम्नलिखित में से प्रत्येक स्थिति (I, II, III और IV) के लिए नीचे दिए गए सही विकल्प का चयन कीजिए –
(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं किंतु कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है।
(iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है।
I अभिकथन – उपकला फेफड़ों में गैस विनिमय के लिए अधिक उपयुक्त है। कारण: इसमें लंबी कोशिकाओं की अनेक परतें होती हैं जो विसरण की गति को धीमा कर देती हैं।
II अभिकथन – हृद पेशी बिना थके निरंतर संकुचन कर सकती है। कारण: हृद पेशी कोशिकाओं में अधिक संख्या में माइटोकॉन्ड्रिया और प्रचुर मात्रा में रक्त की आपूर्ति होती है।
III अभिकथन – कंडराएँ एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ती हैं और संधि की गति को संभव बनाती हैं। कारण: कंडराएँ सुदृढ़ संयोजी ऊतक से बनी होती हैं जो पेशी से अस्थि तक बल का संचरण करती हैं।
IV अभिकथन – कोर संधि में गति मुख्यतः एक तल में होती है। कारण: अस्थियों के सिरे सभी दिशाओं में सर्पी गति करने हेतु आकारित होते हैं।
Answer:
I – (iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है। (उपकला वास्तव में पतली, एकल परत के कारण गैस विनिमय हेतु उपयुक्त होती है, अनेक मोटी परतें विसरण को धीमा करेंगी – इसलिए कारण सही है पर अभिकथन में दिया गया औचित्य गलत/असंगत है)
II – (i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण सही व्याख्या करता है।
III – (iv) अभिकथन असत्य है, कारण सत्य है। (कंडराएँ पेशी को अस्थि से जोड़ती हैं, न कि अस्थि को अस्थि से – यह कार्य स्नायु का है; परंतु कारण में दी गई बात सत्य है)
IV – (iv) अभिकथन असत्य है, कारण सत्य है। (कोर संधि में गति सचमुच एक तल में होती है, यह सही है, पर कारण गलत है क्योंकि अस्थियों के सिरे केवल एक दिशा में गति हेतु आकारित होते हैं, सभी दिशाओं में नहीं)
मुख्य बिंदु:
• अभिकथन और कारण वाले प्रश्नों में दोनों कथनों की सत्यता अलग-अलग जाँचनी चाहिए।
• कंडरा (Tendon) पेशी को अस्थि से जोड़ती है और स्नायु (Ligament) अस्थि को अस्थि से जोड़ता है।
• हृद पेशियों में ऊर्जा उत्पादन के लिए अधिक माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं।
आम गलतियाँ:
• कंडरा और स्नायु के कार्यों में भ्रमित होना।
• केवल अभिकथन पढ़कर उत्तर दे देना और कारण की सत्यता न जाँच करना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों को हल करने से पहले दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़ें।
b) देखें कि क्या कारण, अभिकथन की सही वैज्ञानिक व्याख्या करता है या नहीं।
c) संयोजी ऊतकों के सटीक कार्य याद रखें।
Question 7: तालिका 3.7 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग करके X-अक्ष पर वृक्ष की आयु (वर्षों में) और Y-अक्ष पर समय के साथ वृक्ष का व्यास (cm में) तथा निर्मित वार्षिक वलयों की संख्या के मध्य एक ग्राफ बनाइए।
(i) समय के साथ तने के व्यास के संदर्भ में ग्राफ का विश्लेषण कीजिए और अपने निष्कर्ष साझा कीजिए।
(ii) सागवान के वृक्ष के व्यास और निर्मित वार्षिक वलयों के बीच क्या संबंध है?
(iii) तने की परिधि में वृद्धि के लिए कौन-सा विशेषीकृत ऊतक उत्तरदायी है और यह कहाँ स्थित होता है?
Answer:
(i) आयु बढ़ने के साथ तने का व्यास भी लगातार बढ़ता जाता है – दोनों में सीधा संबंध दिखता है।
(ii) व्यास और वार्षिक वलयों की संख्या में सीधा (धनात्मक) संबंध है – जितने अधिक वलय बनेंगे, व्यास उतना ही अधिक होगा।
(iii) पार्श्व विभज्योतक उत्तरदायी है, जो तने की परिधि में (जाइलम व फ्लोएम के बीच) स्थित होता है।
मुख्य बिंदु:
• पादप की आयु बढ़ने के साथ द्वितीयक वृद्धि होती है।
• वार्षिक वलय पादप की आयु का सटीक अनुमान लगाने में मदद करते हैं।
• पार्श्व विभज्योतक (कैम्बियम) मोटाई में वृद्धि करता है।
आम गलतियाँ:
• व्यास और आयु के संबंध को उल्टा समझ लेना।
• पार्श्व विभज्योतक की स्थिति गलत बताना।
Exam Tips:
a) ग्राफ आधारित प्रश्नों में डेटा का विश्लेषण ध्यानपूर्वक करें।
b) ऊतकों के नाम और उनकी सटीक स्थिति याद रखें।
c) उत्तर बिंदुवार लिखें ताकि स्पष्टता बनी रहे।
Question 8: एक वन में देखा गया कि एक हाथी ने अपनी भोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए एक वृक्ष की छाल को बुरी तरह उखाड़ दिया क्योंकि छाल पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत होती है (चित्र 3.22)। अपने अधिगम के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(i) छाल उखड़ने से वृक्ष का/के कौन-सा/से कार्य बाधित होता/होते है/हैं?
(ii) छाल उखड़ने के बाद भी वृक्ष के तने को और क्षति होने पर पादप का कौन-सा ऊतक प्रभावित होगा?
(iii) यदि छाल के नीचे के ऊतक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाएँ तो वृक्ष का कौन-सा कार्य बाधित होगा?
(iv) उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर देने के लिए आप क्या पूर्वानुमान लगाते हैं? यदि आपके पूर्वानुमानों में परिवर्तन हो तो उत्तर में क्या अंतर आएगा?
Answer:
(i) छाल हटने से जाइलम और फ्लोएम दोनों प्रभावित होंगे, जिससे जल, खनिज और भोजन का परिवहन बाधित होगा।
(ii) पार्श्व विभज्योतक और संवहन ऊतक प्रभावित होंगे, जिससे तने की वृद्धि भी रुक सकती है।
(iii) वृक्ष का पोषण और परिवहन कार्य बुरी तरह बाधित होगा, वृक्ष सूख भी सकता है।
(iv) क्षति जितनी गहरी होगी उतना अधिक कार्य बाधित होगा; यदि क्षति हल्की हो तो वृक्ष स्वयं ठीक हो सकता है, इसलिए पूर्वानुमान बदलने पर उत्तर भी बदल जाएगा।
मुख्य बिंदु:
• छाल के अंतर्गत फ्लोएम और कैम्बियम जैसे महत्वपूर्ण ऊतक होते हैं।
• पादप का परिवहन तंत्र छाल और उसके भीतर के भागों पर निर्भर करता है।
• गंभीर क्षति से पादप की मृत्यु भी हो सकती है।
आम गलतियाँ:
• केवल फ्लोएम को प्रभावित मानना और जाइलम की अनदेखी करना।
• वृक्ष के पुनर्जीवित होने की संभावना पर ध्यान न देना।
Exam Tips:
a) व्यावहारिक परिस्थितियों पर आधारित प्रश्नों में जैविक तंत्र के कार्यों का तार्किक विश्लेषण करें।
b) संवहन ऊतकों की स्थिति और उनकी महत्ता समझें।
c) उत्तर को उप-भागों (i, ii, iii, iv) के अनुसार क्रमानुसार लिखें।
Question 9: आम्रपाली ने देखा कि आम के एक नवोद्भिद पौधे का तना मानसून की हवाओं में लचीला होकर मुड़ जाता है किंतु टूटता नहीं। इस लचीलेपन के लिए कौन-सा ऊतक उत्तरदायी है? यदि विद्यमान ऊतक को दृढ़ोतक से प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका पूर्वानुमान लगाइए और व्याख्या कीजिए।
Answer:
लचीलेपन के लिए श्लेषोतक (कोलेंकाइमा) उत्तरदायी है, क्योंकि इसकी कोशिकाएँ जीवित तथा असमान रूप से मोटी भित्ति वाली होती हैं जो लचीलापन देती हैं। यदि इसे दृढ़ोतक (स्लेरेन्काइमा) से बदल दिया जाए तो तना कठोर हो जाएगा और हवा में मुड़ने के बजाय टूट सकता है, क्योंकि दृढ़ोतक की कोशिकाएँ मृत और लिग्निनयुक्त होकर कठोर तो होती हैं परंतु लचीली नहीं होतीं।
मुख्य बिंदु:
• श्लेषोतक (कोलेंकाइमा) पौधों को यांत्रिक सहायता और लचीलापन देता है।
• दृढ़ोतक (स्लेरेन्काइमा) पौधों को कठोरता और मजबूती प्रदान करता है।
• दृढ़ोतक की कोशिकाएँ मृत और लिग्निनयुक्त होती हैं।
आम गलतियाँ:
• श्लेषोतक और दृढ़ोतक के कार्यों को आपस में मिला देना।
• जीवित और मृत कोशिकाओं के अंतर को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) पादप ऊतकों के नाम और उनके विशिष्ट गुणों (लचीलापन या कठोरता) को याद रखें।
b) काल्पनिक परिवर्तन (प्रतिस्थापन) वाले प्रश्नों में ऊतकों के भौतिक गुणों के आधार पर उत्तर दें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'लिग्निनयुक्त' और 'जीवित' का प्रयोग अवश्य करें।
Question 10: सोहन ने गन्ने के पुनरुद्भवन के लिए एक प्रयोग अभिकल्पित किया जिसमें उसने गन्ना उगाने के लिए कलम (cutting) का उपयोग किया। उसने दो प्रकार की कलम, प्रकार ‘क’ और प्रकार ‘ख’ (चित्र 3.23) का उपयोग किया। कुछ सप्ताह बाद, प्रकार ‘ख’ की कलम में अंकुर दिखाई दिए और वे गन्ने के पादप में विकसित हो गए जबकि प्रकार ‘क’ की कलम में अंकुरण नहीं हुआ。
(i) प्रकार ‘ख’ की कलम ने गन्ने के रूप में क्यों वृद्धि की किंतु प्रकार ‘क’ ने क्यों नहीं की?
(ii) प्रकार ‘ख’ में प्रकार ‘क’ की तुलना में क्या अंतर था?
(iii) इस परिवर्तन के प्रभाव का निर्धारण करने के लिए कौन-सा प्रेक्षण अथवा मापन किया गया?
(iv) उचित तुलना सुनिश्चित करने के लिए दोनों प्रकार की कलम में कौन-से मानदंड समान रखने चाहिए?
Answer:
(i) प्रकार ‘ख’ में शायद पर्वसंधि उपस्थित थी जहाँ विभज्योतक और कलिकाएँ होती हैं, इसलिए अंकुरण हुआ; प्रकार ‘क’ में पर्वसंधि या कलिका अनुपस्थित रही होगी, अतः अंकुरण नहीं हुआ।
(ii) प्रकार ‘ख’ में सक्रिय कलिका/पर्वसंधि उपस्थित थी, प्रकार ‘क’ में यह अनुपस्थित थी।
(iii) अंकुर या जड़ों का दिखना/न दिखना (अवलोकन) तथा अंकुरण में लगा समय (मापन)।
(iv) कलम की लंबाई, मोटाई, आयु, पानी-मिट्टी की मात्रा, तापमान, प्रकाश आदि परिस्थितियाँ समान रखनी चाहिए ताकि तुलना निष्पक्ष हो।
मुख्य बिंदु:
• पौधों के वर्धि जनन में पर्वसंधि (Node) और कलिकाओं का होना आवश्यक है।
• विभज्योतक ऊतक नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं।
• नियंत्रित प्रयोगों में अन्य सभी कारकों को समान रखा जाता है।
आम गलतियाँ:
• पर्वसंधि की भूमिका को नजरअंदाज करना।
• प्रयोग के दौरान नियंत्रण चर (Controlled variables) को न समझना।
Exam Tips:
a) वैज्ञानिक प्रयोगों से जुड़े प्रश्नों में प्रेक्षण और निष्कर्ष स्पष्ट रूप से लिखें।
b) पादप वृद्धि में पर्वसंधि और कलिकाओं के महत्व को समझें।
c) उत्तर को उप-प्रश्नों के क्रमानुसार ही हल करें।
Question 11: कक्षा में चर्चा के समय रोहन कहता है – “ऊतक समान कोशिकाओं का एक समूह है जो समान कार्य करता है” किंतु राजीव इसका प्रतिवाद करते हुए कहता है – “यह सरल ऊतकों की स्थिति में सत्य है किंतु जटिल ऊतकों की स्थिति में थोड़ा भिन्न है” कक्षा में हुई चर्चा के संदर्भ में अपना स्पष्टीकरण दीजिए।
Answer:
राजीव सही है – सरल ऊतक (जैसे मृदूतक) में सभी कोशिकाएँ संरचना में समान होती हैं और एक ही कार्य करती हैं। परंतु जटिल ऊतकों (जैसे जाइलम, फ्लोएम) में विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ (जैसे वाहिकाएँ, वाहिनिकाएँ, मृदूतक, तंतु) मिलकर एक साझा कार्य (जल/भोजन परिवहन) करती हैं, इसलिए यहाँ रोहन की परिभाषा (समान कोशिकाओं का समूह) पूरी तरह लागू नहीं होती।
मुख्य बिंदु:
• सरल ऊतक एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं।
• जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं।
• जटिल ऊतकों की कोशिकाएँ अलग होने के बावजूद एक साझा कार्य करती हैं।
आम गलतियाँ:
• सभी ऊतकों को समान कोशिकाओं से बना मान लेना।
• जटिल ऊतकों के घटकों (जैसे वाहिकाएँ और तंतु) को भूल जाना।
Exam Tips:
a) सरल और जटिल ऊतकों की परिभाषा और अंतर भली-भांति याद रखें।
b) वैज्ञानिक तर्कों और उदाहरणों (जाइलम और फ्लोएम) के साथ उत्तर दें।
c) चर्चा वाले प्रश्नों में सही पक्ष का समर्थन कारण सहित करें।
Question 12: नारियल के कठोर और रेशेदार तंतुओं का उपयोग चटाई बनाने के लिए किया जाता है। कौन-से ऊतक में यह दृढ़ता प्रदान करने के लिए उपयुक्त संरचनात्मक विशेषताएँ होती हैं? स्पष्ट कीजिए कि सजीव मृदूतक से इस उद्देश्य की पूर्ति क्यों नहीं हो सकती है।
Answer:
दृढ़ोतक ऊतक में यह विशेषताएँ होती हैं – मोटी, लिग्निनयुक्त भित्ति, मृत कोशिकाएँ, जो अत्यधिक कठोरता और दृढ़ता देती हैं। सजीव मृदूतक की भित्ति पतली और कोशिकाएँ जीवित होती हैं, जिनमें दृढ़ता का अभाव होता है, इसलिए वे चटाई जैसी वस्तु बनाने के लिए आवश्यक मजबूती प्रदान नहीं कर सकतीं।
मुख्य बिंदु:
• दृढ़ोतक (स्लेरेन्काइमा) पादपों को अत्यधिक यांत्रिक शक्ति देता है।
• इसकी कोशिका भित्ति पर लिग्निन का जमाव होता है।
• मृदूतक मुख्य रूप से भोजन भंडारण का कार्य करता है, मजबूती का नहीं।
आम गलतियाँ:
• मृदूतक को मजबूत ऊतक समझ लेना।
• लिग्निन के महत्व और उसकी उपस्थिति को भूल जाना।
Exam Tips:
a) पादप ऊतकों के रासायनिक घटकों (जैसे लिग्निन) का उल्लेख उत्तर में अवश्य करें।
b) संरचना और कार्य के संबंध को स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) उत्तर को वैज्ञानिक रूप से सटीक शब्दों में लिखें।
Question 13: विभा अपनी सहेली नेहा से कहती है – “विभज्योतकी कोशिकाएँ केवल जड़ और प्ररोह के अग्रभाग (शीर्ष) पर स्थित होती हैं” आप इस कथन के विषय में क्या सोचते हैं? यदि कथन असत्य है तो नेहा विभा से कौन-सा प्रश्न पूछ सकती है जिससे वह इसे भली-भाँति समझ सके?
Answer:
विभा का कथन पूर्णतः सत्य नहीं है – शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ और प्ररोह के अग्रभाग पर होता है, परंतु पार्श्व विभज्योतक (तने की परिधि में) और अंतर्वेशी विभज्योतक (पर्वसंधियों पर) भी विभज्योतकी ऊतक के प्रकार हैं। नेहा पूछ सकती है – “क्या पौधे केवल लंबाई में बढ़ते हैं या मोटाई/परिधि में भी वृद्धि होती है और घास कटने के बाद पुनः कैसे उगती है?” – इससे विभा को पार्श्व और अंतर्वेशी विभज्योतक का पता चलेगा।
मुख्य बिंदु:
• विभज्योतक तीन प्रकार के होते हैं – शीर्षस्थ, पार्श्व और अंतर्वेशी।
• शीर्षस्थ ऊतक लंबाई बढ़ाता है, पार्श्व मोटाई और अंतर्वेशी लंबाई व पुनः वृद्धि में सहायक है।
• पादप वृद्धि के विभिन्न आयामों को समझना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• केवल शीर्षस्थ विभज्योतक को ही एकमात्र विभज्योतक मान लेना।
• अंतर्वेशी और पार्श्व विभज्योतक के कार्यों की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) विभज्योतक के तीनों प्रकारों और उनके स्थानों को अच्छी तरह याद रखें।
b) संवादात्मक या तार्किक प्रश्नों के उत्तर में वैज्ञानिक तथ्यों को प्रमुखता दें।
c) प्रश्न के दोनों भागों (कथन की सत्यता और सही प्रश्न पूछना) का उत्तर दें।
Question 14: एक पादप कोशिका और एक जंतु कोशिका का आमाप समान है।
(i) किस कोशिका में रसधानी अपेक्षाकृत बड़ी होगी? कारण बताइए।
(ii) उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देने के लिए आप क्या पूर्वानुमान लगाते हैं?
Answer:
(i) पादप कोशिका में रसधानी अपेक्षाकृत बड़ी होगी। कारण – पादप कोशिका में एक बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है जो जल, पोषक तत्व संग्रहीत करती है तथा स्फीति दाब बनाए रखने में सहायता करती है, जबकि जंतु कोशिका में रसधानियाँ छोटी और कम होती हैं।
(ii) पूर्वानुमान – यदि दोनों कोशिकाओं में जल अवशोषण/संग्रहण की तुलना करें तो पादप कोशिका अधिक जल संग्रहीत कर पाएगी, जिससे उसका आकार स्थिर रहेगा।
मुख्य बिंदु:
• पादप कोशिकाओं में बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है।
• रसधानी पादप कोशिका को दृढ़ता और स्फीति प्रदान करती है।
• जंतु कोशिकाओं में रसधानियाँ या तो अनुपस्थित होती हैं या बहुत छोटी होती हैं।
आम गलतियाँ:
• जंतु और पादप कोशिकाओं के अंतर में रसधानी की स्थिति को भूल जाना।
• स्फीति दाब के महत्व को न समझना।
Exam Tips:
a) पादप और जंतु कोशिका के मुख्य अंतरों की सूची हमेशा तैयार रखें।
b) पूर्वानुमान और कारण वाले प्रश्नों में वैज्ञानिक शब्दावली (जैसे स्फीति दाब) का प्रयोग करें।
c) उत्तर को स्पष्ट और बिंदुवार लिखें।
Question 15: एक पाठ्यपुस्तक में यह कहा गया है, “प्रत्येक पादप ऊतक केवल एक विशिष्ट कार्य करता है।” इस कथन की सत्यता की विवेचनात्मक जाँच करने के लिए आप कौन-से प्रश्न पूछेंगे? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए आप किन ऊतकों के उदाहरण लेंगे?
Answer:
क्या कोई ऊतक एक से अधिक कार्य करता है? (जैसे मृदूतक – भंडारण भी करता है और प्रकाश-संश्लेषण भी)
क्या जटिल ऊतकों (जाइलम, फ्लोएम) में विभिन्न कोशिकाएँ अलग-अलग उप-कार्य करती हैं?
उदाहरण के लिए मृदूतक (भोजन भंडारण + प्रकाश-संश्लेषण + जलीय पौधों में उत्प्लावन) और जाइलम (जल परिवहन + यांत्रिक दृढ़ता प्रदान करना) – दोनों उदाहरण दिखाते हैं कि एक ऊतक कई कार्य कर सकता है।
मुख्य बिंदु:
• कई पादप ऊतक एक से अधिक कार्य करते हैं (जैसे क्लोरेन्काइमा और एरेन्काइमा)।
• जटिल ऊतकों की विभिन्न कोशिकाएँ मिलकर और व्यक्तिगत रूप से भी कार्य करती हैं।
• वैज्ञानिक कथनों की विवेचनात्मक जाँच करना महत्वपूर्ण है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि प्रत्येक ऊतक का केवल एक ही कार्य होता है।
• उप-प्रकारों (जैसे क्लोरेन्काइमा) के बहुकार्यीय स्वभाव को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) विवेचनात्मक प्रश्नों के उत्तर में बहुमुखी उदाहरण प्रस्तुत करें।
b) मृदूतक के विभिन्न रूपों (पैरेन्काइमा, क्लोरेन्काइमा, एरेन्काइमा) को याद रखें।
c) उत्तर को तार्किक और विश्लेषणात्मक रूप में लिखें।
Free study material for Science
Step-by-Step Textbook Answers: Class 9 Science Chapter 03 क्रियाशील ऊतक
Textbook Solutions for Class 9 Science Chapter 03 क्रियाशील ऊतक
Explore reliable textbook solutions for Chapter 03 क्रियाशील ऊतक tailored for Class 9 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official NCERT standards for Science.
Mastering Theoretical and Practical Questions
Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 9 Science text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.
Effective Self-Study and Homework Assistance
Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 9 Science.
FAQs
The complete and updated NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 03 Tissues in Action (क्रियाशील ऊतक) Exercise Questions in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Science are as per latest NCERT curriculum.
Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 03 Tissues in Action (क्रियाशील ऊतक) Exercise Questions in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 03 Tissues in Action (क्रियाशील ऊतक) Exercise Questions in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 9 Science. You can access NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 03 Tissues in Action (क्रियाशील ऊतक) Exercise Questions in Hindi in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 03 Tissues in Action (क्रियाशील ऊतक) Exercise Questions in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.