NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 03 Tissues in Action (क्रियाशील ऊतक) Long Answer Questions in Hindi

NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 03 क्रियाशील ऊतक

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Question 1: पादप में तीन प्रकार के विभज्योतकी ऊतकों (शीर्षस्थ, पार्श्व, अंतर्वेशी) का वर्णन उनके स्थान और कार्य सहित कीजिए।

Answer:

शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ और प्ररोह के अग्रभाग पर स्थित होता है और पौधों की लंबाई में वृद्धि के लिए उत्तरदायी है।
पार्श्व विभज्योतक तने की परिधि के अनुदिश स्थित होकर तने के व्यास (मोटाई) में वृद्धि करता है, जिससे वृक्षों में वार्षिक वृद्धि वलय बनते हैं।
अंतर्वेशी विभज्योतक पर्व के आधार या पर्वसंधि के ठीक ऊपर स्थित होता है और घास जैसे पौधों को काटने या चरने के पश्चात उनके पुनरुद्भवन में सहायता करता है।
ये तीनों मिलकर पौधों में लंबाई, परिधि और शाखाओं में वृद्धि के लिए उत्तरदायी हैं।

मुख्य बिंदु:

• शीर्षस्थ विभज्योतक पौधों की प्राथमिक लंबाई बढ़ाता है।
• पार्श्व विभज्योतक द्वितीयक वृद्धि यानी मोटाई के लिए जिम्मेदार है।
• अंतर्वेशी विभज्योतक घास और अन्य पौधों के क्षतिग्रस्त भागों की पुनरावृत्ति करता है।

आम गलतियाँ:

• छात्रों द्वारा तीनों ऊतकों के सही स्थानों के नाम में भ्रम होना।
• पार्श्व विभज्योतक को लंबाई वृद्धि से जोड़ देना।
• कार्यों का स्पष्ट अंतर न लिखना।

Exam Tips:

a) तीनों ऊतकों के नाम, स्थिति और कार्य का चार्ट बनाकर याद करें।
b) परीक्षा में उत्तर लिखते समय मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।
c) पादप वृद्धि में इनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 2: सरल स्थायी ऊतक (मृदूतक, श्लेषोतक, दृढ़ोतक) की संरचना व कार्यों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

Answer:

मृदूतक पतली भित्तियों वाली सजीव कोशिकाओं से बना होता है जो विरल रूप से व्यवस्थित होती हैं और मुख्यतः भोजन के भंडारण व प्रकाश-संश्लेषण में सहायक होता है।
श्लेषोतक सजीव कोशिकाओं से बना होता है जिनके कोने पेक्टिन के निक्षेपण से असमान रूप से मोटे होते हैं और यह तने को सहारा व लचीलापन देता है।
दृढ़ोतक की कोशिकाएँ लिग्निन के निक्षेपण के कारण मोटी भित्ति वाली होती हैं, अधिकांश मृत होती हैं और यह तनों, बीजों के कठोर आवरणों में कठोरता प्रदान करता है।

मुख्य बिंदु:

• मृदूतक सरलतम जीवित पादप ऊतक है।
• श्लेषोतक पौधों को बिना टूटे लचीलापन देता है।
• दृढ़ोतक की कोशिकाएँ लिग्निनयुक्त होने के कारण मृत होती हैं।

आम गलतियाँ:

• श्लेषोतक और दृढ़ोतक की कोशिकाओं की प्रकृति (सजीव/मृत) में गलती करना।
• पेक्टिन और लिग्निन के निक्षेपण स्थानों को मिला देना।
• कार्यों का गलत उल्लेख करना।

Exam Tips:

a) तीनों सरल स्थायी ऊतकों की तुलनात्मक तालिका बनाकर अध्ययन करें।
b) रासायनिक निक्षेपण (पेक्टिन और लिग्निन) को विशेष रूप से याद रखें।
c) संरचना और कार्य दोनों के आधार पर अंतर स्पष्ट करें।

 

Question 3: जाइलम और फ्लोएम में कोई पाँच अंतर लिखिए।

Answer:

जाइलम जल और खनिजों का जड़ों से पौधे के अन्य भागों तक परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम पत्तियों से तैयार भोजन का परिवहन करता है।
जाइलम में वाहिनिकाएँ व वाहिकाएँ प्रायः मृत होती हैं जबकि फ्लोएम अधिकांशतः सजीव कोशिकाओं से बना होता है।
जाइलम में जल का प्रवाह एकदिशीय (जड़ से ऊपर) होता है जबकि फ्लोएम में भोजन का प्रवाह द्विदिशीय हो सकता है।
जाइलम पादप को दृढ़ता भी प्रदान करता है जबकि फ्लोएम में सहचर कोशिकाएँ चालनी नलिकाओं के कार्यों का नियमन करती हैं।
जाइलम जटिल ऊतक है जो खनिज लवणों और जल के संवहन का मुख्य माध्यम है, जबकि फ्लोएम खाद्य पदार्थों के वितरण का कार्य करता है।

मुख्य बिंदु:

• जाइलम का मुख्य कार्य जल संवहन है।
• फ्लोएम का मुख्य कार्य भोजन का स्थानांतरण है।
• जाइलम एकदिशीय और फ्लोएम द्विदिशीय परिवहन करता है।

आम गलतियाँ:

• दिशा के अंतर (एकदिशीय और द्विदिशीय) को उल्टा लिख देना।
• मृत और सजीव कोशिकाओं के वितरण में भ्रम होना।
• पाँच पूरे अंतर न लिखकर संख्या कम करना।

Exam Tips:

a) अंतर हमेशा बिंदुओं के रूप में और तुलनात्मक तरीके से लिखें।
b) परिवहन की दिशा और पदार्थों के नाम स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) पादप संवहन तंत्र में दोनों की महत्ता समझें।

 

Question 4: उपकला ऊतक के विभिन्न प्रकारों (विनिमय, सुरक्षा, स्रवण, संवेदी, अवशोषण) का उनकी संरचना व स्थान सहित वर्णन कीजिए।

Answer:

विनिमय प्रकार्य वाली उपकला पतली, चपटी कोशिकाओं की एकल परत से बनी होती है और रक्त वाहिकाओं व फेफड़ों में द्रवों-गैसों के द्रुत विसरण में सहायक है।
सुरक्षात्मक उपकला (त्वचा, मुँह) कोशिकाओं की अनेक परतों से बनी होती है।
स्रवण करने वाली उपकला (लार ग्रंथियाँ, स्वेद ग्रंथियाँ) घनाकार या स्तंभाकार कोशिकाओं से बनी विशेषीकृत होती है।
संवेदी उपकला (नासाछिद्र, स्वाद-कलिकाएँ) रोम जैसी पक्ष्माभ युक्त होती है।
अवशोषी उपकला (छोटी आँत) लंबी स्तंभाकार कोशिकाओं की एकल परत से बनी होती है।

मुख्य बिंदु:

• उपकला ऊतक शरीर के अंगों की रक्षा और आवरण का कार्य करता है।
• कोशिकाओं की परत (एकल या बहुपरत) कार्य के अनुसार बदलती है।
• विनिमय, स्रवण और अवशोषण विशिष्ट उपकलाओं के मुख्य कार्य हैं।

आम गलतियाँ:

• विभिन्न उपकलाओं के उचित स्थानों के नाम भूल जाना।
• घनाकार और स्तंभाकार कोशिकाओं के कार्यों में अंतर न कर पाना।
• बहुपरतीय सुरक्षात्मक उपकला को एकल परत लिख देना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक प्रकार की उपकला के साथ उसके विशिष्ट स्थान का उदाहरण जरूर दें।
b) संरचना (चपटी, घनाकार, स्तंभाकार) का उनके कार्य से संबंध स्पष्ट करें।
c) आरेख या फ्लोचार्ट के माध्यम से उत्तर को प्रभावी बनाएं।

 

Question 5: पेशी-कंकाल तंत्र क्या है? इसमें शामिल विभिन्न पेशियों (कंकाल, चिकनी, हृदय) के प्रकार व कार्यों का वर्णन कीजिए।

Answer:

पेशी-कंकाल तंत्र अस्थियों, पेशियों, संधियों, उपास्थियों, कंडराओं और स्नायुओं से मिलकर बना होता है जो शरीर को सीधे खड़े होने, गति करने और कोमल अंगों की रक्षा करने में सहायता करता है।
कंकाल पेशियाँ लंबी, बेलनाकार, बहुकेंद्रकी और रेखित होती हैं जो ऐच्छिक गति (जैसे दौड़ना) के लिए उत्तरदायी हैं।
चिकनी पेशियाँ तर्कुरूप, एकल केंद्रक वाली होती हैं जो आमाशय और आँत जैसी अनैच्छिक धीमी गतियों में सहायक हैं।
हदय पेशियाँ बेलनाकार व शाखित होती हैं जो अथक रूप से लयबद्ध संकुचन कर जीवनपर्यंत हदय स्पंदन बनाए रखती हैं।

मुख्य बिंदु:

• पेशी-कंकाल तंत्र शरीर को आकार, सुरक्षा और गतिशीलता प्रदान करता है।
• कंकाल पेशियाँ ऐच्छिक और रेखित होती हैं।
• हृदय पेशियाँ जीवनभर बिना थके कार्य करती हैं।

आम गलतियाँ:

• चिकनी पेशियों और कंकाल पेशियों के लक्षणों को आपस में मिला देना।
• हृदय पेशियों की शाखित संरचना का उल्लेख करना भूल जाना।
• कंकाल तंत्र के घटकों (अस्थि, स्नायु, कंडरा) को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) पेशियों के तीनों प्रकारों को उनकी संरचना, केंद्रकों की संख्या और कार्य के आधार पर वर्गीकृत करें।
b) ऐच्छिक और अनैच्छिक गतियों का अंतर स्पष्ट रूप से लिखें।
c) डायग्राम या स्पष्ट बिंदुओं से उत्तर को सुव्यवस्थित करें।

 

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