NCERT Solutions Class 11 Maths Chapter 10 Conic Sections (शंकु परिच्छेद) Exercise 10.4 in Hindi

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Question 1: निम्नलिखित में अतिपरवलयों के शीर्ष, नाभियों के निर्देशांक, उत्केंद्रता और नाभिलंब जीव की लंबाई ज्ञात कीजिए: x² / 16 - y² / 9 = 1

Answer:

दिए गए अतिपरवलय का समीकरण x² / 16 - y² / 9 = 1 है। मानक समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 से तुलना करने पर, a = 4 और b = 3 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² के प्रयोग से, c² = 4² + 3² = 16 + 9 = 25, जिससे c = 5 प्राप्त होता है। इसलिए, नाभियों के निर्देशांक (±5, 0) हैं और शीर्षों के निर्देशांक (±4, 0) हैं। उत्केंद्रता e = c / a = 5 / 4 होती है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a = (2 × 9) / 4 = 9 / 2 प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• अतिपरवलय का मानक समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 होता है।
• संबंध c² = a² + b² का उपयोग करके नाभि ज्ञात की जाती है।
• उत्केंद्रता e का मान हमेशा 1 से बड़ा होता है (e = c / a)।
• नाभिलंब जीव की लंबाई का सूत्र (2b²) / a होता है।

आम गलतियाँ:

• a और b के मानों की तुलना करते समय उनके वर्गमूल में गलती करना।
• दीर्घवृत्त और अतिपरवलय के संबंध सूत्रों (c² = a² - b² और c² = a² + b²) में भ्रमित होना।
• निर्देशांकों में धन और ऋण चिह्न लगाना भूल जाना।

Exam Tips:

a) हमेशा समीकरण की मानक रूप से तुलना करके a और b के मान स्पष्ट रूप से लिखें।
b) सभी सूत्रों (शीर्ष, नाभि, उत्केंद्रता, नाभिलंब) को अलग-अलग स्पष्ट चरणों में हल करें।
c) गणना की अंतिम जाँच अवश्य करें ताकि चिह्न की गलती न हो।

 

Question 2: निम्नलिखित में अतिपरवलयों के शीर्ष, नाभियों के निर्देशांक, उत्केंद्रता और नाभिलंब जीव की लंबाई ज्ञात कीजिए: y² / 9 - x² / 27 = 1

Answer:

दिए गए अतिपरवलय का समीकरण y² / 9 - x² / 27 = 1 है। मानक समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 से तुलना करने पर, a = 3 और b = √27 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² के प्रयोग से, c² = 3² + (√27)² = 9 + 27 = 36, जिससे c = 6 प्राप्त होता है। इसलिए, नाभियों के निर्देशांक (0, ±6) हैं और शीर्षों के निर्देशांक (0, ±3) हैं। उत्केंद्रता e = c / a = 6 / 3 = 2 होती है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a = (2 × 27) / 3 = 18 प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• यह ऊर्ध्वाधर (vertical) अतिपरवलय है जिसमें y² का पद पहले आता है।
• इस स्थिति में शीर्ष और नाभि y-अक्ष पर स्थित होते हैं।
• c² ज्ञात करने के लिए a² और b² को जोड़ा जाता है।
• उत्केंद्रता e = c / a सूत्र से निकाली जाती है।

आम गलतियाँ:

• क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर अतिपरवलय के सूत्रों में अंतर न समझना।
• (√27)² को हल करते समय वर्गमूल हटाने में गलती करना।
• शीर्षों और नाभियों के निर्देशांकों में x और y के स्थान को आपस में बदल देना।

Exam Tips:

a) समीकरण देखते ही पहचानें कि यह x-अक्ष के अनुदिश है या y-अक्ष के।
b) ऊर्ध्वाधर अतिपरवलय के लिए निर्देशांक (0, ±a) और (0, ±c) लिखे जाते हैं।
c) हर चरण में इकाई और चिह्नों का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 3: निम्नलिखित में अतिपरवलयों के शीर्ष, नाभियों के निर्देशांक, उत्केंद्रता और नाभिलंब जीव की लंबाई ज्ञात कीजिए: 9y² - 4x² = 36

Answer:

दिए गए अतिपरवलय का समीकरण 9y² - 4x² = 36 है। इसे मानक रूप में बदलने के लिए दोनों पक्षों को 36 से विभाजित करते हैं, जिससे y² / 4 - x² / 9 = 1 प्राप्त होता है। मानक समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 से तुलना करने पर, a = 2 और b = 3 प्राप्त होते हैं। संबंध c² = a² + b² के प्रयोग से, c² = 2² + 3² = 4 + 9 = 13, जिससे c = √13 प्राप्त होता है। अतः नाभियों के निर्देशांक (0, ±√13) हैं और शीर्षों के निर्देशांक (0, ±2) हैं। उत्केंद्रता e = c / a = √13 / 2 होती है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a = (2 × 9) / 2 = 9 प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• समीकरण को मानक रूप (दाएं पक्ष में 1) में लाना पहला आवश्यक चरण है।
• y² का गुणांक पहले होने के कारण यह y-अक्ष का अतिपरवलय है।
• c का मान वर्गमूल के रूप में प्राप्त हो सकता है।
• नाभिलंब की लंबाई सरल करने पर एक पूर्ण संख्या 9 प्राप्त होती है।

आम गलतियाँ:

• 36 से भाग देते समय पदों को गलत काटना।
• a और b के मानों को समीकरण में गलत जगह रखना।
• उत्केंद्रता के सूत्र में c और a का अनुपात उल्टा लिख देना।

Exam Tips:

a) सबसे पहले दिए गए समीकरण को मानक रूप में परिवर्तित करें।
b) तुलना करते समय a² और b² के मानों को सावधानी से पहचानें।
c) अंतिम उत्तर में सभी चारों भागों (शीर्ष, नाभि, उत्केंद्रता, नाभिलंब) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 4: निम्नलिखित में अतिपरवलयों के शीर्ष, नाभियों के निर्देशांक, उत्केंद्रता और नाभिलंब जीव की लंबाई ज्ञात कीजिए: 16x² - 9y² = 576

Answer:

दिए गए अतिपरवलय का समीकरण 16x² - 9y² = 576 है। दोनों पक्षों को 576 से भाग देकर मानक रूप में बदलने पर x² / 36 - y² / 64 = 1 प्राप्त होता है। मानक समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 से तुलना करने पर, a = 6 और b = 8 प्राप्त होते हैं। संबंध c² = a² + b² के प्रयोग से, c² = 36 + 64 = 100, जिससे c = 10 प्राप्त होता है। इसलिए नाभियों के निर्देशांक (±10, 0) हैं और शीर्षों के निर्देशांक (±6, 0) हैं। उत्केंद्रता e = c / a = 10 / 6 = 5 / 3 होती है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a = (2 × 64) / 6 = 64 / 3 प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• यह क्षैतिज अतिपरवलय है क्योंकि x² का पद धनात्मक है।
• 576 से भाग देने पर 16x² / 576 सरल होकर x² / 36 बनता है।
• c = 10 एक पूर्ण वर्ग संख्या है जिससे गणना सरल होती है।
• उत्केंद्रता को न्यूनतम भिन्न 5/3 के रूप में लिखा जाता है।

आम गलतियाँ:

• भाग देते समय गणना में त्रुटि करना।
• a और b के मानों को आपस में बदल देना।
• नाभिलंब जीव के सूत्र में मान रखते समय गलती करना।

Exam Tips:

a) बड़ी संख्याओं वाले समीकरणों में भाग की प्रक्रिया ध्यान से करें।
b) भिन्न को हमेशा सरलतम रूप में बदलें।
c) सभी मानों को क्रमानुसार लिखकर स्पष्ट उत्तर दें।

 

Question 5: निम्नलिखित में अतिपरवलयों के शीर्ष, नाभियों के निर्देशांक, उत्केंद्रता और नाभिलंब जीव की लंबाई ज्ञात कीजिए: 5y² - 9x² = 36

Answer:

दिए गए अतिपरवलय का समीकरण 5y² - 9x² = 36 है। दोनों पक्षों को 36 से भाग देकर मानक रूप में लिखने पर y² / (36 / 5) - x² / 4 = 1 प्राप्त होता है। मानक समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 से तुलना करने पर, a² = 36 / 5 जिससे a = 6 / √5 और b² = 4 जिससे b = 2 प्राप्त होता है। संबंध c² = a² + b² से, c² = (36 / 5) + 4 = (36 + 20) / 5 = 56 / 5, जिससे c = 2√14 / √5 प्राप्त होता है। शीर्ष (0, ±6 / √5) और नाभियाँ (0, ±2√14 / √5) हैं। उत्केंद्रता e = c / a = (2√14 / √5) / (6 / √5) = √14 / 3 होती है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a = (2 × 4) / (6 / √5) = (4√5) / 3 प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• यहाँ a² का मान एक भिन्न (36/5) के रूप में आता है।
• वर्गमूल वाली संख्याओं का जोड़ सावधानी से करना चाहिए।
• उत्केंद्रता निकालते समय √5 दोनों अंश और हर से कट जाता है।
• नाभिलंब के सूत्र में हर के अंश में संख्या ऊपर जाती है।

आम गलतियाँ:

• भिन्न के साथ c² निकालते समय लघुत्तम (LCM) लेने में गलती करना।
• वर्गमूल को हल करते समय हर का परिमेयकरण न करना।
• a और b के वर्गमूल निकालते समय चिह्न की भूल होना।

Exam Tips:

a) भिन्नों वाले प्रश्नों में एलसीएम की प्रक्रिया को रफ कार्य में स्पष्ट हल करें।
b) उत्केंद्रता के सूत्र में हर में समान पद होने पर उन्हें सीधे काटें।
c) अंतिम उत्तर में वर्गमूल और भिन्नों को मानक रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 6: निम्नलिखित में अतिपरवलयों के शीर्ष, नाभियों के निर्देशांक, उत्केंद्रता और नाभिलंब जीव की लंबाई ज्ञात कीजिए: 49y² - 16x² = 784

Answer:

दिए गए अतिपरवलय का समीकरण 49y² - 16x² = 784 है। दोनों पक्षों को 784 से भाग देकर मानक रूप में बदलने पर y² / 16 - x² / 49 = 1 प्राप्त होता है। मानक समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 से तुलना करने पर, a = 4 और b = 7 प्राप्त होते हैं। संबंध c² = a² + b² से, c² = 16 + 49 = 65, जिससे c = √65 प्राप्त होता है। इसलिए नाभियों के निर्देशांक (0, ±√65) हैं और शीर्षों के निर्देशांक (0, ±4) हैं। उत्केंद्रता e = c / a = √65 / 4 होती है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a = (2 × 49) / 4 = 49 / 2 प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• 784 में 49 और 16 का पूरा भाग जाता है जिससे हर क्रमशः 16 और 49 बनते हैं।
• y² का पद पहले होने के कारण यह y-अक्ष का अतिपरवलय है।
• c का मान √65 प्राप्त होता है जिसका पूरा वर्गमूल नहीं निकलता।
• नाभिलंब जीव की लंबाई को भिन्न 49/2 के रूप में लिखा जाता है।

आम गलतियाँ:

• 784 से भाग देते समय काटने में गलती करना।
• x और y के गुणांकों को उल्टा समझ लेना।
• नाभिलंब जीव के सूत्र में a और b के मान गलत रखना।

Exam Tips:

a) बड़ी संख्याओं के समीकरणों में भागफल की जांच अवश्य करें।
b) यदि वर्गमूल पूरी तरह न निकले, तो उसे वैसे ही (√65) छोड़ दें।
c) सभी उत्तरों को क्रमानुसार लिखकर स्पष्ट करें।

 

Question 7: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: शीर्ष (±2, 0), नाभियाँ (±3, 0)

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, शीर्ष (±2, 0) हैं और नाभियाँ (±3, 0) हैं। चूँकि शीर्ष और नाभियाँ x-अक्ष पर स्थित हैं, अतिपरवलय का मानक समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 के रूप में होगा। शीर्षों से a = 2 और नाभियों से c = 3 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, 2² + b² = 3², जिससे 4 + b² = 9 और b² = 5 प्राप्त होता है। a² और b² के इन मानों को मानक समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण x² / 4 - y² / 5 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• शीर्ष (±a, 0) से a का मान सीधे प्राप्त होता है।
• नाभियाँ (±c, 0) होने पर c का मान ज्ञात होता है।
• समीकरण ज्ञात करने के लिए a² और b² के मानों की आवश्यकता होती है।
• x-अक्ष के अतिपरवलय में x² का पद धनात्मक होता है।

आम गलतियाँ:

• c के मान से सीधे b का मान निकाल लेना (b² = c² - a² का उपयोग न करना)।
• समीकरण में a और b के वर्गों के स्थान पर केवल उनके सादे मान रख देना।
• अक्षों की स्थिति की पहचान में गलती करना।

Exam Tips:

a) सबसे पहले पहचानें कि शीर्ष किस अक्ष पर हैं ताकि सही समीकरण का चयन हो सके।
b) a और c के मानों से संबंध सूत्र लगाकर b² का मान निकालें।
c) अंतिम समीकरण में a² और b² के मान स्थापित करके ही उत्तर दें।

 

Question 8: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: शीर्ष (0, ±5), नाभियाँ (0, ±8)

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, शीर्ष (0, ±5) हैं और नाभियाँ (0, ±8) हैं। चूँकि शीर्ष और नाभियाँ y-अक्ष पर स्थित हैं, अतिपरवलय का मानक समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 के रूप में होगा। शीर्षों से a = 5 और नाभियों से c = 8 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, 5² + b² = 8², जिससे 25 + b² = 64 और b² = 64 - 25 = 39 प्राप्त होता है। a² = 25 और b² = 39 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण y² / 25 - x² / 39 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• y-अक्ष पर शीर्ष होने के कारण y² वाला पद समीकरण में पहले आता है।
• a = 5 और c = 8 सीधे दिए गए निर्देशांकों से मिलते हैं।
• b² का मान निकालने के लिए c² - a² का सूत्र प्रयोग होता है।
• समीकरण में हर के स्थान पर a² और b² के वर्ग लिखे जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• x-अक्ष और y-अक्ष के समीकरणों को आपस में बदल देना।
• घटाव (subtraction) करते समय गणना में गलती करना।
• शीर्ष के मान को c मान लेना।

Exam Tips:

a) निर्देशांकों में शून्य की स्थिति देखकर अक्ष का चयन करें।
b) b² निकालते समय हमेशा c² में से a² को घटाएं।
c) मानक समीकरण लिखकर उसमें मानों को प्रतिस्थापित करें।

 

Question 9: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: शीर्ष (0, ±3), नाभियाँ (0, ±5)

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, शीर्ष (0, ±3) हैं और नाभियाँ (0, ±5) हैं। चूँकि शीर्ष और नाभियाँ y-अक्ष पर हैं, अतिपरवलय का मानक समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 होगा। शीर्ष से a = 3 और नाभि से c = 5 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, 3² + b² = 5², जिससे 9 + b² = 25 और b² = 25 - 9 = 16 प्राप्त होता है। a² = 9 और b² = 16 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण y² / 9 - x² / 16 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• y-अक्ष पर स्थित शीर्ष और नाभि के लिए मानक समीकरण y² / a² - x² / b² होता है।
• a = 3 और c = 5 सीधे मान दिए गए हैं।
• b² ज्ञात करने के लिए 25 में से 9 घटाया जाता है।
• अंतिम समीकरण में a² = 9 और b² = 16 रखे जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• समीकरण में x² और y² के पदों का क्रम गलत लिखना।
• a² और b² के स्थान पर सीधे a और b के मान रख देना।
• पक्षांतर करते समय चिह्नों की गलती करना।

Exam Tips:

a) प्रश्न में दिए गए निर्देशांकों को ध्यान से पढ़कर अक्ष निर्धारित करें।
b) गणना के चरणों को साफ-सुथरा लिखें।
c) अंतिम समीकरण को हमेशा बॉक्स में या स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 10: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: नाभियाँ (±5, 0), अनुप्रस्थ अक्ष की लंबाई 8 है।

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, नाभियाँ (±5, 0) हैं और अनुप्रस्थ अक्ष की लंबाई 8 है। चूँकि नाभियाँ x-अक्ष पर हैं, अतिपरवलय का समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 के रूप में होगा। नाभियों से c = 5 प्राप्त होता है। अनुप्रस्थ अक्ष की लंबाई 2a होती है, इसलिए 2a = 8, जिससे a = 4 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, 4² + b² = 5², जिससे 16 + b² = 25 और b² = 25 - 16 = 9 प्राप्त होता है। a² = 16 और b² = 9 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण x² / 16 - y² / 9 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• अनुप्रस्थ अक्ष (transverse axis) की लंबाई 2a के बराबर होती है।
• नाभि के निर्देशांकों से c का मान सीधे प्राप्त होता है।
• b² निकालने के लिए c² - a² सूत्र का प्रयोग किया जाता है।
• x-अक्ष का समीकरण होने के कारण x² वाला पद पहले आता है।

आम गलतियाँ:

• अनुप्रस्थ अक्ष की लंबाई 2a को केवल a मान लेना।
• c और a के मानों में भ्रमित होना।
• समीकरण बनाते समय a² और b² के हर आपस में बदल देना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि अनुप्रस्थ अक्ष 2a और संयुग्मी अक्ष 2b होता है।
b) c, a और b के बीच का संबंध हमेशा सही रूप (c² = a² + b²) में उपयोग करें।
c) समीकरण में मान रखते समय वर्गों का ध्यान रखें।

 

Question 11: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: नाभियाँ (0, ±13), संयुग्मी अक्ष की लंबाई 24 है।

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, नाभियाँ (0, ±13) हैं और संयुग्मी अक्ष की लंबाई 24 है। चूँकि नाभियाँ y-अक्ष पर हैं, अतिपरवलय का समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 के रूप में होगा। नाभियों से c = 13 प्राप्त होता है। संयुग्मी अक्ष की लंबाई 2b होती है, इसलिए 2b = 24, जिससे b = 12 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, a² + 12² = 13², जिससे a² + 144 = 169 और a² = 169 - 144 = 25 प्राप्त होता है। a² = 25 और b² = 144 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण y² / 25 - x² / 144 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• संयुग्मी अक्ष (conjugate axis) की लंबाई 2b होती है।
• नाभियाँ y-अक्ष पर होने के कारण समीकरण में y² का पद पहले आता है।
• a² ज्ञात करने के लिए c² में से b² को घटाया जाता है।
• मानक समीकरण में मान रखकर अंतिम हल प्राप्त किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• संयुग्मी अक्ष की लंबाई 2b को केवल b मान लेना।
• y-अक्ष के स्थान पर गलती से x-अक्ष का समीकरण लिख देना।
• वर्ग निकालने में गणना की त्रुटि करना।

Exam Tips:

a) अक्षों की लंबाई (2a और 2b) से हमेशा a और b के आधे मान निकाले जाते हैं।
b) नाभि की स्थिति देखकर अतिपरवलय का सही मानक रूप चुनें।
c) प्रत्येक चरण को सुव्यवस्थित ढंग से हल करें।

 

Question 12: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: नाभियाँ (±3√5, 0), नाभिलंब जीव की लंबाई 8 है।

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, नाभियाँ (±3√5, 0) हैं और नाभिलंब जीव की लंबाई 8 है। चूँकि नाभियाँ x-अक्ष पर हैं, अतिपरवलय का समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 होगा। नाभियों से c = 3√5 प्राप्त होता है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a होती है, इसलिए (2b²) / a = 8, जिससे b² = 4a प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, a² + 4a = (3√5)² = 45, जिससे द्विघात समीकरण a² + 4a - 45 = 0 प्राप्त होता है। इसे हल करने पर (a + 9)(a - 5) = 0 मिलता है, जिससे a = -9 या a = 5 प्राप्त होता है। चूँकि a एक धनात्मक संख्या है, a = 5 लिया जाता है। इससे b² = 4(5) = 20 प्राप्त होता है। a² = 25 और b² = 20 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण x² / 25 - y² / 20 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• नाभिलंब की लंबाई का सूत्र (2b²) / a होता है।
• b² का मान निकालने के बाद उसे a² + b² = c² में प्रतिस्थापित करते हैं।
• द्विघात समीकरण को गुणनखंड विधि से हल किया जाता है।
• a का मान हमेशा धनात्मक (positive) होता है।

आम गलतियाँ:

• (3√5)² को हल करते समय 3 का वर्ग करना भूल जाना (3² × 5 = 45)।
• a के ऋणात्मक मान को भी स्वीकार कर लेना।
• नाभिलंब के सूत्र में 2 भूल जाना या गलत मान रखना।

Exam Tips:

a) वर्गमूल वाली संख्या का वर्ग करते समय बाहर और अंदर दोनों संख्याओं का वर्ग करें।
b) द्विघात समीकरण बनने पर उसके दोनों मूल निकालें और भौतिक रूप से असंभव मान को छोड़ दें।
c) अंतिम समीकरण में a² और b² के मान रखें, न कि केवल a का।

 

Question 13: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: नाभियाँ (±4, 0), नाभिलंब जीव की लंबाई 12 है।

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, नाभियाँ (±4, 0) हैं और नाभिलंब जीव की लंबाई 12 है। चूँकि नाभियाँ x-अक्ष पर हैं, अतिपरवलय का समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 होगा। नाभियों से c = 4 प्राप्त होता है। नाभिलंब जीव की लंबाई (2b²) / a = 12 दी गई है, जिससे सरल करने पर 2b² = 12a या b² = 6a प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, a² + 6a = 4² = 16, जिससे द्विघात समीकरण a² + 6a - 16 = 0 प्राप्त होता है। इसके गुणनखंड करने पर (a + 8)(a - 2) = 0 मिलता है, जिससे a = -8 या a = 2 प्राप्त होता है। चूँकि a धनात्मक होता है, a = 2 लिया जाता है। इससे b² = 6(2) = 12 प्राप्त होता है। a² = 4 और b² = 12 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण x² / 4 - y² / 12 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• नाभिलंब की लंबाई (2b²) / a से b² का मान a के पदों में प्राप्त किया जाता है।
• c = 4 का वर्ग 16 होता है।
• a² + 6a - 16 = 0 एक द्विघात समीकरण है जिसे गुणनखंड से हल किया जाता है।
• a का मान धनात्मक होने के कारण a = 2 चुना जाता है।

आम गलतियाँ:

• द्विघात समीकरण के गुणनखंड करते समय चिह्नों की गलती करना।
• a के ऋणात्मक मान को ले लेना।
• b² का मान निकालने के बाद उसे a² में गलती से जोड़ देना।

Exam Tips:

a) नाभिलंब के सूत्र से b² का मान निकालकर उसे संबंध समीकरण में प्रतिस्थापित करें।
b) द्विघात समीकरण को हल करते समय मध्य पद को सावधानी से विभाजित करें।
c) समीकरण लिखते समय a और b के वर्गों का उपयोग करें।

 

Question 14: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: शीर्ष (±7, 0), e = 4 / 3

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, शीर्ष (±7, 0) हैं और उत्केंद्रता e = 4 / 3 है। चूँकि शीर्ष x-अक्ष पर हैं, अतिपरवलय का समीकरण x² / a² - y² / b² = 1 के रूप में होगा। शीर्षों से a = 7 प्राप्त होता है। उत्केंद्रता का सूत्र e = c / a होता है, इसलिए 4 / 3 = c / 7, जिससे c = 28 / 3 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, 7² + b² = (28 / 3)², जिससे 49 + b² = 784 / 9 प्राप्त होता है। इसे हल करने पर b² = (784 / 9) - 49 = (784 - 441) / 9 = 343 / 9 प्राप्त होता है। a² = 49 और b² = 343 / 9 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण x² / 49 - y² / (343 / 9) = 1 प्राप्त होता है, जिसे x² / 49 - 9y² / 343 = 1 लिखा जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• शीर्ष (±a, 0) से सीधे a का मान ज्ञात होता है।
• उत्केंद्रता e और a के गुणन से c का मान निकाला जाता है (c = a × e)।
• b² ज्ञात करने के लिए c² में से a² को घटाया जाता है।
• भिन्न के रूप में आए b² के मान को समीकरण में सही प्रकार से व्यवस्थित किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• e = c / a के सूत्र में c और a को उल्टा रख देना।
• भिन्न का वर्ग करते समय अंश और हर दोनों का वर्ग न करना।
• लघुत्तम (LCM) लेकर घटाने में गणना की गलती करना।

Exam Tips:

a) उत्केंद्रता दिए होने पर c का मान तुरंत a × e करके निकालें।
b) भिन्नों के वर्गों की गणना सावधानी से करें।
c) अंतिम समीकरण में हर के रूप में आए भिन्न को मानक रूप में बदलें।

 

Question 15: निम्नलिखित में दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए: नाभियाँ (0, ±√10), बिंदु (2, 3) से होकर जाता है।

Answer:

दिए गए प्रतिबंधों के अनुसार, नाभियाँ (0, ±10 के वर्गमूल) हैं और अतिपरवलय बिंदु (2, 3) से होकर जाता है। चूँकि नाभियाँ y-अक्ष पर हैं, अतिपरवलय का समीकरण y² / a² - x² / b² = 1 के रूप में होगा। नाभियों से c = √10 प्राप्त होता है। संबंध a² + b² = c² का उपयोग करने पर, a² + b² = (√10)² = 10, जिससे b² = 10 - a² प्राप्त होता है। अतिपरवलय बिंदु (2, 3) से होकर जाता है, इसलिए यह बिंदु इसके समीकरण को संतुष्ट करेगा। समीकरण में x = 2 और y = 3 रखने पर 3² / a² - 2² / b² = 1 अर्थात 9 / a² - 4 / b² = 1 प्राप्त होता है। b² का मान रखने पर 9 / a² - 4 / (10 - a²) = 1 प्राप्त होता है। इसे हल करने के लिए a² = t मान लेते हैं, जिससे 9 / t - 4 / (10 - t) = 1 बनता है। इसे सरल करने पर द्विघात समीकरण t² - 18t + 45 = 0 प्राप्त होता है। गुणनखंड करने पर (t - 15)(t - 3) = 0 मिलता है, जिससे t = 15 या t = 3 प्राप्त होता है। अतिपरवलय के प्रतिबंध c > a के अनुसार c² > a² होना चाहिए (अर्थात 10 > a²), इसलिए t = 15 को अमान्य कर देते हैं और a² = 3 लेते हैं। इससे b² = 10 - 3 = 7 प्राप्त होता है। a² = 3 और b² = 7 के मानों को समीकरण में रखने पर अतिपरवलय का अभीष्ट समीकरण y² / 3 - x² / 7 = 1 प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• बिंदु अतिपरवलय पर स्थित होने के कारण समीकरण को संतुष्ट करता है।
• c² = a² + b² से b² का मान a² के पदों में निकाला जाता है।
• चर बदलकर (t मानकर) द्विघात समीकरण को हल किया जाता है।
• c² > a² की शर्त के आधार पर अमान्य मान को छोड़ दिया जाता है।

आम गलतियाँ:

• बिंदु (2, 3) के मानों को समीकरण में x और y की जगह उल्टा रख देना।
• द्विघात समीकरण को हल करते समय लघुत्तम लेने में गलती करना।
• c > a की शर्त की अनदेखी करके गलत a² का मान चुन लेना।

Exam Tips:

a) जब अतिपरवलय किसी बिंदु से होकर जाए, तो x और y के मान समीकरण में प्रतिस्थापित करें।
b) गणना को सरल बनाने के लिए a² को किसी अन्य चर (जैसे t या k) मान सकते हैं।
c) अतिपरवलय की मूल शर्तों (c > a) की हमेशा जाँच करें।

 

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