Official NCERT Solutions for Class 11 Mathematics: Chapter 10 शंकु परिच्छेद
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Chapter-wise Solutions for Mathematics: Chapter 10 शंकु परिच्छेद
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Question 1: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: (x²/36) + (y²/16) = 1
Answer:
दिया गया समीकरण (x²/36) + (y²/16) = 1 है। चूँकि x² का हर, y² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है। दिए गए समीकरण की तुलना मानक समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 से करने पर, a = 6 और b = 4 प्राप्त होता है। अब c = √(a² - b²) के सूत्र से c = √(36 - 16) = √20 = 2√5 प्राप्त होता है। इस प्रकार नाभियों के निर्देशांक (±2√5, 0) अर्थात् (2√5, 0) और (-2√5, 0) हैं तथा शीर्षों के निर्देशांक (±6, 0) अर्थात् (6, 0) और (-6, 0) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 6 = 12 इकाई और लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 4 = 8 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = 2√5/6 = √5/3 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 16)/6 = 32/6 = 16/3 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• दीर्घवृत्त का समीकरण मानक रूप में बदलकर a और b के मान ज्ञात करना।
• c का मान निकालने के लिए c = √(a² - b²) का उपयोग करना।
• दीर्घ अक्ष x-अक्ष या y-अक्ष पर होने की पहचान करना।
आम गलतियाँ:
• a और b के मानों को आपस में बदल देना।
• नाभियों और शीर्षों के निर्देशांकों में चिन्ह की गलती करना।
• नाभिलंबजीवा के सूत्र में मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) हमेशा समीकरण को पहले मानक रूप (x²/a²) + (y²/b²) = 1 में देखें।
b) सभी उत्तरों के साथ उचित इकाइयाँ (जैसे इकाई) लिखें।
c) उत्केंद्रता e का मान हमेशा 1 से कम होना चाहिए।
Question 2: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: (x²/4) + (y²/25) = 1
Answer:
दिया गया समीकरण (x²/4) + (y²/25) = 1 है, जिसे (x²/2²) + (y²/5²) = 1 भी लिख सकते हैं। चूँकि y² का हर, x² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है। समीकरण की तुलना मानक समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 से करने पर b = 2 और a = 5 प्राप्त होता है। अब c = √(a² - b²) से c = √(25 - 4) = √21 प्राप्त होता है। अतः नाभियों के निर्देशांक (0, ±√21) और शीर्षों के निर्देशांक (0, ±5) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 5 = 10 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 2 = 4 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = √21/5 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 4)/5 = 8/5 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• जब y² का हर बड़ा होता है, तब दीर्घ अक्ष y-अक्ष पर होता है और a, y के नीचे होता है।
• c का मान a² और b² के अंतर का वर्गमूल होता है।
• उत्केंद्रता e हमेशा c को a से भाग देकर निकाली जाती है।
आम गलतियाँ:
• बड़े हर वाले को हमेशा a मानना बिना यह देखे कि वह किस चर के नीचे है।
• नाभियों के निर्देशांक लिखते समय x और y के स्थान उलटा लिख देना।
• नाभिलंबजीवा के सूत्र में a और b के मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) y-अक्ष के अनुदिश दीर्घवृत्त के लिए शीर्ष (0, ±a) होते हैं, इसे ध्यान रखें।
b) गणना करते समय वर्गमूल के चिन्ह का सावधानीपूर्वक प्रयोग करें।
c) प्रत्येक भाग के लिए अलग-अलग सूत्र स्पष्ट रूप से समझें।
Question 3: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: (x²/16) + (y²/9) = 1
Answer:
दिया गया समीकरण (x²/16) + (y²/9) = 1 है, जिसे (x²/4²) + (y²/3²) = 1 लिखा जा सकता है। चूँकि x² का हर, y² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है। समीकरण की तुलना (x²/a²) + (y²/b²) = 1 से करने पर a = 4 और b = 3 प्राप्त होता है। यहाँ c = √(16 - 9) = √7 है। इसलिए नाभियों के निर्देशांक (±√7, 0) और शीर्षों के निर्देशांक (±4, 0) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 4 = 8 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 3 = 6 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = √7/4 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 9)/4 = 18/4 = 9/2 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• x² का हर बड़ा होने पर दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश होता है।
• c का मान √((16) - (9)) = √7 प्राप्त होता है।
• नाभिलंबजीवा की लंबाई को सरल भिन्न रूप में व्यक्त किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• हर के वर्गमूल को सीधे a और b मान लेना (जैसे 16 को a मान लेना बजाय 4 के)।
• नाभिलंबजीवा के सूत्र 2b²/a में मान रखते समय गलती करना।
• निर्देशांकों में प्लस-माइनस का चिन्ह छोड़ देना।
Exam Tips:
a) हमेशा हर को किसी संख्या का वर्ग बनाकर a और b निर्धारित करें।
b) अंतिम उत्तर में भिन्नों को न्यूनतम रूप में सरल करें।
c) सभी पाँच मुख्य मानों की सूची स्पष्ट रूप से बनाएँ।
Question 4: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: (x²/25) + (y²/100) = 1
Answer:
दिया गया समीकरण (x²/25) + (y²/100) = 1 है, जिसे (x²/5²) + (y²/10²) = 1 लिखा जा सकता है। चूँकि y² का हर, x² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है। मानक समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 से तुलना करने पर b = 5 और a = 10 प्राप्त होता है। अब c = √(100 - 25) = √75 = 5√3 प्राप्त होता है। अतः नाभियों के निर्देशांक (0, ±5√3) और शीर्षों के निर्देशांक (0, ±10) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 10 = 20 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 5 = 10 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = 5√3/10 = √3/2 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 25)/10 = 50/10 = 5 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• y-अक्ष के अनुदिश दीर्घवृत्त में a हमेशा y के नीचे की संख्या का वर्गमूल होता है।
• √75 को सरल करके 5√3 लिखा जाता है।
• उत्केंद्रता √3/2 प्राप्त होती है जो 1 से कम है।
आम गलतियाँ:
• a और b के मानों को आपस में बदल देना क्योंकि 25 पहले लिखा है।
• वर्गमूल √75 को बिना सरल किए छोड़ देना।
• नाभियों और शीर्षों के अक्ष को x-अक्ष लिख देना।
Exam Tips:
a) बड़े हर को हमेशा a² मानें, चाहे वह पहले लिखा हो या बाद में।
b) वर्गमूल वाली संख्याओं को सरल करने का अभ्यास करें।
c) सूत्रों को हल करते समय हर चरण साफ-सुथरा लिखें।
Question 5: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: (x²/49) + (y²/36) = 1
Answer:
दिया गया समीकरण (x²/49) + (y²/36) = 1 है, जिसे (x²/7²) + (y²/6²) = 1 लिख सकते हैं। चूँकि x² का हर, y² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है। मानक समीकरण से तुलना करने पर a = 7 और b = 6 प्राप्त होता है। अब c = √(49 - 36) = √13 प्राप्त होता है। अतः नाभियों के निर्देशांक (±√13, 0) और शीर्षों के निर्देशांक (±7, 0) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 7 = 14 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 6 = 12 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = √13/7 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 36)/7 = 72/7 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• x-अक्ष के अनुदिश दीर्घवृत्त में दीर्घ अक्ष 2a और शीर्ष (±a, 0) होते हैं।
• c का मान √(49 - 36) = √13 होता है।
• नाभिलंबजीवा की गणना 2b²/a सूत्र से की जाती है।
आम गलतियाँ:
• √13 को किसी अन्य संख्या से विभाजित करने का प्रयास करना।
• दीर्घ अक्ष और लघु अक्ष की लंबाई में 2 से गुना करना भूल जाना।
• समीकरण के हरों को सीधे c निकालने में उपयोग करना।
Exam Tips:
a) अभाज्य संख्या के वर्गमूल (जैसे √13) को वैसे ही छोड़ दें।
b) प्रत्येक मान के साथ उसके सही मात्रक या 'इकाई' शब्द का प्रयोग करें।
c) तुलना करते समय मानक समीकरण को हमेशा अपने मन में रखें।
Question 6: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: (x²/100) + (y²/400) = 1
Answer:
दिया गया समीकरण (x²/100) + (y²/400) = 1 है, जिसे (x²/10²) + (y²/20²) = 1 लिखा जा सकता है। चूँकि y² का हर, x² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है। मानक समीकरण से तुलना करने पर b = 10 और a = 20 प्राप्त होता है। अब c = √(400 - 100) = √300 = 10√3 प्राप्त होता है। अतः नाभियों के निर्देशांक (0, ±10√3) और शीर्षों के निर्देशांक (0, ±20) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 20 = 40 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 10 = 20 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = 10√3/20 = √3/2 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 100)/20 = 200/20 = 10 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• y² का हर बड़ा होने के कारण यह y-अक्ष के अनुदिश दीर्घवृत्त है।
• √300 को अभाज्य गुणनखंडन द्वारा 10√3 लिखा जाता है।
• a = 20 और b = 10 मान प्राप्त होते हैं।
आम गलतियाँ:
• a और b के मानों को समीकरण में देखकर भ्रमित होना।
• √300 को सरल न करना।
• नाभिलंबजीवा की गणना में गलत संख्या रखना।
Exam Tips:
a) बड़ी संख्याओं के वर्गमूल को हमेशा सरल करें (जैसे √300 = 10√3)।
b) परीक्षा में सभी सूत्र साफ-साफ लिखें ताकि स्टेप मार्किंग मिले।
c) अक्षों की लंबाई निकालते समय 2 का गुणा करना न भूलें।
Question 7: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: 3x² + 4y² = 144
Answer:
दिया गया समीकरण 3x² + 4y² = 144 है। समीकरण को मानक रूप में बदलने के लिए दोनों पक्षों को 144 से भाग देने पर (3x²/144) + (4y²/144) = 1 प्राप्त होता है, जिसे सरल करने पर (x²/48) + (y²/36) = 1 या (x²/(4√3)²) + (y²/6²) = 1 लिखा जा सकता है। चूँकि x² का हर, y² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है। तुलना करने पर a² = 48 (अतः a = 4√3) और b² = 36 (अतः b = 6) प्राप्त होता है। अब c = √(48 - 36) = √12 = 2√3 है। अतः नाभियों के निर्देशांक (±2√3, 0) और शीर्षों के निर्देशांक (±4√3, 0) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 8√3 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 12 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = 2√3/4√3 = 1/2 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 36)/(4√3) = 72/(4√3) = 18/√3 = 6√3 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• समीकरण को मानक रूप में लाने के लिए अचर पद से पूरे समीकरण को भाग देना पड़ता है।
• c का मान √(48 - 36) = √12 = 2√3 प्राप्त होता है।
• नाभिलंबजीवा के हर का परिमेयकरण करके 6√3 प्राप्त किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• 144 से भाग दिए बिना सीधे गुणांकों को a और मान लेना।
• √12 को सरल न करना।
• हर में √3 रखकर छोड़ देना, परिमेयकरण न करना।
Exam Tips:
a) यदि समीकरण '= 1' के रूप में नहीं है, तो सबसे पहले उसे मानक रूप में बदलें।
b) उत्तर में करणी (root) का परिमेयकरण करना न भूलें।
c) गणना के प्रत्येक चरण को ध्यान से जाँचें।
Question 8: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: 16x² + y² = 16
Answer:
दिया गया समीकरण 16x² + y² = 16 है। समीकरण के दोनों पक्षों को 16 से भाग देने पर मानक रूप (x²/1) + (y²/16) = 1 प्राप्त होता है, जिसे (x²/1²) + (y²/4²) = 1 लिख सकते हैं। चूँकि y² का हर, x² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है। तुलना करने पर b = 1 और a = 4 प्राप्त होता है। अब c = √(16 - 1) = √15 है। अतः नाभियों के निर्देशांक (0, ±√15) और शीर्षों के निर्देशांक (0, ±4) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 4 = 8 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 1 = 2 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = √15/4 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 1)/4 = 2/4 = 1/2 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• 16 से भाग देने पर x² का हर 1 और y² का हर 16 प्राप्त होता है।
• दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है क्योंकि a = 4 बड़ा है।
• c का मान √15 प्राप्त होता है।
आम गलतियाँ:
• x² के नीचे 1 होने पर उसे अनदेखा कर देना।
• a और b के मानों को गलत पहचानना।
• नाभिलंबजीवा की गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) जब x² या y² के साथ गुणांक हो, तो आरम्भ में ही उसे हर में भेजकर मानक रूप बनाएँ।
b) y-अक्ष के दीर्घवृत्त के लिए निर्देशांकों में x का मान शून्य होता है।
c) भिन्नों को हमेशा सरलतम रूप में लिखें।
Question 9: निम्नलिखित दीर्घवृत्तों में नाभियों और शीर्षों के निर्देशांक, दीर्घ और लघु अक्ष की लंबाई, उत्केंद्रता तथा नाभिलंबजीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए: 4x² + 9y² = 36
Answer:
दिया गया समीकरण 4x² + 9y² = 36 है। समीकरण के दोनों पक्षों को 36 से भाग देने पर मानक रूप (x²/9) + (y²/4) = 1 अर्थात् (x²/3²) + (y²/2²) = 1 प्राप्त होता है। चूँकि x² का हर, y² के हर से बड़ा है, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है। तुलना करने पर a = 3 और b = 2 प्राप्त होता है। अब c = √(9 - 4) = √5 है। अतः नाभियों के निर्देशांक (±√5, 0) और शीर्षों के निर्देशांक (±3, 0) हैं। दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a = 2 × 3 = 6 इकाई तथा लघु अक्ष की लंबाई 2b = 2 × 2 = 4 इकाई है। उत्केंद्रता e = c/a = √5/3 है। नाभिलंबजीवा की लंबाई (2b²/a) = (2 × 4)/3 = 8/3 इकाई है।
मुख्य बिंदु:
• 36 से भाग देने पर हर 9 और 4 प्राप्त होते हैं।
• a = 3 और b = 2 से c = √5 प्राप्त होता है।
• दीर्घ अक्ष x-अक्ष पर स्थित है।
आम गलतियाँ:
• भाग देने में गलती करके हर गलत लिख देना।
• c निकालते समय योग कर देना जबकि यहाँ अंतर होता है।
• अक्षों की लंबाई निकालते समय 2 से गुणा न करना।
Exam Tips:
a) दीर्घवृत्त के समीकरण में c² = a² - b² का ही प्रयोग करें (परवलय या अतिपरवलय से न मिलाएँ)।
b) सभी पाँचों भागों के नाम स्पष्ट रूप से लिखकर उनके उत्तर दें।
c) अंतिम परिणामों को भिन्न या करणी के रूप में सटीक छोड़ें।
Question 10: निम्नलिखित दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: शीर्ष (±5, 0), नाभियाँ (±4, 0)
Answer:
दी गई जानकारी के अनुसार शीर्ष (±5, 0) हैं और नाभियाँ (±4, 0) हैं। इससे स्पष्ट है कि शीर्ष x-अक्ष पर स्थित हैं, अतः दीर्घवृत्त का दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है। दीर्घवृत्त का मानक समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 होगा। दिए गए शीर्षों से a = 5 और नाभियों से c = 4 प्राप्त होता है। दीर्घवृत्त के लिए संबंध a² = b² + c² होता है, जिससे 5² = b² + 4² प्राप्त होता है। इसे हल करने पर 25 = b² + 16, जिससे b² = 25 - 16 = 9 अर्थात् b = 3 प्राप्त होता है। a² और b² के मानों को मानक समीकरण में रखने पर दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/25) + (y²/9) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• शीर्ष (±a, 0) से a का मान सीधे प्राप्त होता है।
• नाभियाँ (±c, 0) से c का मान प्राप्त होता है।
• सूत्र a² = b² + c² का उपयोग करके b² ज्ञात किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• c के मान को a मान लेना।
• समीकरण में a² और b² के स्थान पर a और b के सीधे मान रख देना (वर्ग करना भूल जाना)।
• अक्ष की स्थिति को गलत पहचानना।
Exam Tips:
a) दिए गए शीर्षों और नाभियों के निर्देशांकों से पहचानें कि दीर्घ अक्ष किस अक्ष पर है।
b) समीकरण बनाते समय हमेशा हर में a² और b² (वर्ग) का प्रयोग करें।
c) अंतिम समीकरण को मानक रूप में ही छोड़ें।
Question 11: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: शीर्ष (0, ±13), नाभियाँ (0, ±5)
Answer:
दिए गए शीर्ष (0, ±13) और नाभियाँ (0, ±5) हैं। चूँकि शीर्ष y-अक्ष पर हैं, इसलिए दीर्घवृत्त का दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है। इसका मानक समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 होगा। दिए गए शीर्षों से a = 13 और नाभियों से c = 5 प्राप्त होता है। संबंध a² = b² + c² से, 13² = b² + 5² प्राप्त होता है। इसे हल करने पर 169 = b² + 25, जिससे b² = 169 - 25 = 144 अर्थात् b = 12 प्राप्त होता है। a² = 169 और b² = 144 के मान समीकरण में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/144) + (y²/169) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• शीर्ष (0, ±a) होने पर दीर्घ अक्ष y-अक्ष पर होता है और समीकरण में y² के नीचे a² आता है।
• a = 13 और c = 5 से b² = 144 ज्ञात किया जाता है।
• समीकरण में मान सही स्थान पर रखना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• y-अक्ष के दीर्घवृत्त में भी x² के नीचे a² रख देना।
• a² और c² के मानों का गलत पक्षांतर करना।
• वर्ग निकालने में गणना की गलती करना।
Exam Tips:
a) y-अक्ष के दीर्घवृत्त के लिए समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 का ही प्रयोग करें।
b) बड़ी संख्याओं के वर्ग (जैसे 13² = 169) याद रखें।
c) उत्तर को मानक रूप में लिखकर समाप्त करें।
Question 12: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: शीर्ष (±6, 0), नाभियाँ (±4, 0)
Answer:
दिए गए शीर्ष (±6, 0) और नाभियाँ (±4, 0) हैं। चूँकि शीर्ष x-अक्ष पर हैं, इसलिए दीर्घवृत्त का दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है। इसका मानक समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 होगा। शीर्षों से a = 6 और नाभियों से c = 4 प्राप्त होता है। संबंध a² = b² + c² से, 6² = b² + 4² प्राप्त होता है। इसे हल करने पर 36 = b² + 16, जिससे b² = 36 - 16 = 20 अर्थात् b = √20 प्राप्त होता है। a² = 36 और b² = 20 के मान समीकरण में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/36) + (y²/20) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• शीर्ष x-अक्ष पर होने से a, x² के नीचे आता है।
• a = 6 और c = 4 से b² = 20 प्राप्त होता है।
• समीकरण (x²/36) + (y²/20) = 1 बनता है।
आम गलतियाँ:
• b निकालने के चक्कर में b की जगह b² का मान समीकरण में न रखना।
• घटाव में गलती करना (36 - 16 = 20)।
• अक्ष की पहचान गलत करना।
Exam Tips:
a) समीकरण में सीधे a² और b² के मान रखे जाते हैं, अतः b का पूरा वर्गमूल निकालने की आवश्यकता नहीं होती।
b) प्रश्न में दिए गए बिंदुओं के निर्देशांकों को ध्यान से पढ़ें।
c) अंतिम समीकरण में '= 1' लिखना न भूलें।
Question 13: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: दीर्घ अक्ष के अंत बिंदु (±3, 0), लघु अक्ष के अंत बिंदु (0, ±2)
Answer:
दीर्घ अक्ष के अंत बिंदु (±3, 0) हैं, जिससे स्पष्ट है कि दीर्घ अक्ष x-अक्ष पर है और a = 3 है। लघु अक्ष के अंत बिंदु (0, ±2) हैं, जिससे b = 2 प्राप्त होता है। चूँकि दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है, इसलिए दीर्घवृत्त का मानक समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 होगा। a = 3 और b = 2 के मान समीकरण में रखने पर a² = 9 और b² = 4 प्राप्त होता है। अतः अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/9) + (y²/4) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• दीर्घ अक्ष के अंत बिंदु (±a, 0) होते हैं जिससे सीधे a का मान मिलता है।
• लघु अक्ष के अंत बिंदु (0, ±b) होते हैं जिससे सीधे b का मान मिलता है।
• समीकरण सीधे a² और b² के मान रखकर प्राप्त किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• अंत बिंदुओं के मानों को a और b की जगह a² और b² मान लेना।
• अक्षों की स्थिति को आपस में बदल देना।
• समीकरण में मान गलत रख देना।
Exam Tips:
a) यदि दीर्घ अक्ष के अंत बिंदु x-अक्ष पर हैं, तो a हमेशा x के नीचे आएगा।
b) यह इस प्रश्नावली के सबसे सरल प्रश्नों में से एक है, इसमें समय बचाएं।
c) उत्तर को स्पष्ट रूप से बॉक्स में बंद करें।
Question 14: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: दीर्घ अक्ष के अंत बिंदु (0, ±√5), लघु अक्ष के अंत बिंदु (±1, 0)
Answer:
दीर्घ अक्ष के अंत बिंदु (0, ±√5) हैं, जिससे स्पष्ट है कि दीर्घ अक्ष y-अक्ष पर है और a = √5 है। लघु अक्ष के अंत बिंदु (±1, 0) हैं, जिससे b = 1 प्राप्त होता है। चूँकि दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है, इसलिए दीर्घवृत्त का मानक समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 होगा। a = √5 और b = 1 के मान रखने पर a² = 5 और b² = 1 प्राप्त होता है। इन्हें समीकरण में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/1) + (y²/5) = 1 अर्थात् x² + (y²/5) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• दीर्घ अक्ष के अंत बिंदु y-अक्ष पर होने से a, y के नीचे आता है।
• a = √5 का वर्ग करने पर a² = 5 प्राप्त होता है।
• समीकरण (x²/1) + (y²/5) = 1 बनता है।
आम गलतियाँ:
• √5 का वर्ग करते समय करणी न हटाना (√5 का वर्ग 5 होता है)।
• y-अक्ष के दीर्घवृत्त में x² के नीचे a² रख देना।
• b का मान 1 होने पर उसे समीकरण में लिखना भूल जाना।
Exam Tips:
a) अंत बिंदुओं के निर्देशांकों से सीधे a और b के मान पहचानें।
b) समीकरण लिखते समय हर में वर्ग (Square) लिखना न भूलें।
c) y-अक्ष के दीर्घवृत्त के मानक रूप को अच्छी तरह याद रखें।
Question 15: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: दीर्घ अक्ष की लंबाई 26, नाभियाँ (±5, 0)
Answer:
दीर्घ अक्ष की लंबाई 26 दी गई है, जिसका अर्थ है 2a = 26, जिससे a = 13 प्राप्त होता है। नाभियाँ (±5, 0) दी गई हैं, जिससे c = 5 प्राप्त होता है। चूँकि नाभियाँ x-अक्ष पर हैं, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है और समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 होगा। संबंध a² = b² + c² से, 13² = b² + 5² प्राप्त होता है। इसे हल करने पर 169 = b² + 25, जिससे b² = 169 - 25 = 144 अर्थात् b = 12 प्राप्त होता है। a² = 169 और b² = 144 के मान समीकरण में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/169) + (y²/144) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• दीर्घ अक्ष की लंबाई 2a होती है, न कि केवल a।
• नाभियों (±5, 0) से c = 5 मिलता है।
• संबंध a² = b² + c² से b² ज्ञात किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• दीर्घ अक्ष की लंबाई 26 को सीधा a = 26 मान लेना।
• c और a के मानों का स्थान बदल देना।
• घटाव में गलती करना।
Exam Tips:
a) हमेशा ध्यान रखें कि दीर्घ अक्ष की लंबाई '2a' होती है और लघु अक्ष की लंबाई '2b' होती है।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) अंतिम समीकरण मानक रूप में ही दें।
Question 16: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: लघु अक्ष की लंबाई 16, नाभियाँ (0, ±6)
Answer:
लघु अक्ष की लंबाई 16 दी गई है, जिसका अर्थ है 2b = 16, जिससे b = 8 प्राप्त होता है। नाभियाँ (0, ±6) दी गई हैं, जिससे c = 6 प्राप्त होता है। चूँकि नाभियाँ y-अक्ष पर हैं, इसलिए दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश है और समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 होगा। संबंध a² = b² + c² से, a² = 8² + 6² प्राप्त होता है। इसे हल करने पर a² = 64 + 36 = 100 अर्थात् a = 10 प्राप्त होता है। a² = 100 और b² = 64 के मान समीकरण में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/64) + (y²/100) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• लघु अक्ष की लंबाई 2b होती है जिससे b = 8 प्राप्त होता है।
• नाभियाँ y-अक्ष पर होने से दीर्घ अक्ष y-अक्ष के अनुदिश होता है।
• a² ज्ञात करने के लिए b² और c² को जोड़ा जाता है।
आम गलतियाँ:
• लघु अक्ष 2b = 16 से b निकालने के बजाय b = 16 मान लेना।
• y-अक्ष के दीर्घवृत्त में समीकरण का मानक रूप गलत लिखना।
• a² निकालने के लिए घटा देना जबकि यहाँ जोड़ा जाता है।
Exam Tips:
a) याद रखें कि a² हमेशा b² और c² से बड़ा होता है, इसलिए a² निकालते समय जोड़ होता है।
b) प्रश्न में दी गई जानकारी से तुरंत अक्ष की स्थिति पहचानें।
c) समीकरण लिखते समय x² और y² के हरों का सही चयन करें।
Question 17: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: नाभियाँ (±3, 0), a = 4
Answer:
दी गई नाभियाँ (±3, 0) हैं, जिससे c = 3 प्राप्त होता है। दीर्घ अक्ष की अर्ध-लंबाई a = 4 दी गई है। चूँकि नाभियाँ x-अक्ष पर हैं, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है और समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 होगा। संबंध a² = b² + c² से, 4² = b² + 3² प्राप्त होता है। इसे हल करने पर 16 = b² + 9, जिससे b² = 16 - 9 = 7 प्राप्त होता है। a² = 16 और b² = 7 के मान समीकरण में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/16) + (y²/7) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• नाभियों (±3, 0) से c = 3 प्राप्त होता है।
• a = 4 दिया गया है जिससे a² = 16 होता है।
• b² निकालने के लिए a² में से c² घटाया जाता है।
आम गलतियाँ:
• a के मान को सीधा समीकरण में बिना वर्ग किए रख देना।
• b² के स्थान पर b का मान समीकरण में रख देना।
• पक्षांतर करते समय चिन्ह की गलती करना।
Exam Tips:
a) संबंध a² = b² + c² को अच्छी तरह याद रखें और आवश्यकतानुसार पक्षांतर करें।
b) समीकरण में हमेशा a² और b² के मान रखे जाते हैं।
c) अपने उत्तर की जाँच एक बार पुनः अवश्य करें।
Question 18: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: b = 3, c = 4, केंद्र मूल बिंदु पर, नाभियाँ x-अक्ष पर
Answer:
दिया गया है कि b = 3 और c = 4 है तथा नाभियाँ x-अक्ष पर स्थित हैं। चूँकि नाभियाँ x-अक्ष पर हैं, इसलिए दीर्घ अक्ष x-अक्ष के अनुदिश है और दीर्घवृत्त का मानक समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 होगा। संबंध a² = b² + c² का उपयोग करने पर a² = 3² + 4² प्राप्त होता है। इसे हल करने पर a² = 9 + 16 = 25 अर्थात् a = 5 प्राप्त होता है। a² = 25 और b² = 9 के मान समीकरण में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/25) + (y²/9) = 1 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• नाभियाँ x-अक्ष पर होने से समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 का प्रयोग होता है।
• b और c के मान दिए होने पर a² की गणना की जाती है।
• a² = 9 + 16 = 25 प्राप्त होता है।
आम गलतियाँ:
• a² निकालने के लिए c² में से b² घटा देना।
• b = 3 का वर्ग 9 करने के बजाय 6 लिख देना।
• समीकरण में मान उल्टे रख देना।
Exam Tips:
a) संबंध a² = b² + c² दीर्घवृत्त का मूल आधार है, इसे कभी न भूलें।
b) वर्ग निकालते समय गणना सावधानी से करें।
c) अंतिम रूप में समीकरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।
Question 19: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: केंद्र (0, 0) पर, दीर्घ-अक्ष, y-अक्ष पर और बिंदुओं (3, 2) और (1, 6) से जाता है।
Answer:
चूँकि दीर्घ-अक्ष y-अक्ष पर है, इसलिए दीर्घवृत्त का मानक समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 होगा ...(1)। यह दीर्घवृत्त बिंदु (3, 2) और (1, 6) से होकर जाता है, इसलिए ये बिंदु समीकरण को संतुष्ट करेंगे। बिंदु (3, 2) को समीकरण (1) में रखने पर (9/b²) + (4/a²) = 1 ...(2) प्राप्त होता है। इसी प्रकार बिंदु (1, 6) को रखने पर (1/b²) + (36/a²) = 1 ...(3) प्राप्त होता है। समीकरण (3) को 9 से गुणा करके समीकरण (2) में से घटाने पर या विलोपन विधि से हल करने पर b² = 10 और a² = 40 प्राप्त होता है। इनके मान समीकरण (1) में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/10) + (y²/40) = 1 अर्थात् 4x² + y² = 40 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• y-अक्ष पर दीर्घ अक्ष होने के कारण समीकरण (x²/b²) + (y²/a²) = 1 होता है।
• दिए गए बिंदुओं को समीकरण में रखकर दो रैखिक समीकरण बनाए जाते हैं।
• (1/b²) और (1/a²) को चर मानकर समीकरण हल किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• x और y के निर्देशांकों को समीकरण में उल्टा रख देना।
• युगपत समीकरण (Simultaneous equations) को हल करने में गणना की भूल करना।
• अंतिम समीकरण को मानक रूप से आगे सरल न करना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में 1/b² और 1/a² को क्रमशः कोई अन्य चर (जैसे u और v) मानकर आसानी से हल किया जा सकता है।
b) बिंदुओं के मान रखते समय x की जगह x का और y की जगह y का मान ही रखें।
c) दोनों संतुष्ट करने वाले बिंदुओं से दो समीकरण प्राप्त करना अनिवार्य है।
Question 20: निम्नलिखित में दिए प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हुए दीर्घवृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए: केंद्र (0, 0) पर, दीर्घ-अक्ष, x-अक्ष पर और बिंदुओं (4, 3) और (6, 2) से जाता है।
Answer:
चूँकि दीर्घ-अक्ष x-अक्ष पर है, इसलिए दीर्घवृत्त का मानक समीकरण (x²/a²) + (y²/b²) = 1 होगा ...(1)। यह दीर्घवृत्त बिंदुओं (4, 3) और (6, 2) से होकर जाता है। बिंदु (4, 3) को समीकरण में रखने पर (16/a²) + (9/b²) = 1 ...(2) प्राप्त होता है। बिंदु (6, 2) को समीकरण में रखने पर (36/a²) + (4/b²) = 1 ...(3) प्राप्त होता है। अब मान लेते हैं कि (1/a²) = u और (1/b²) = v है। समीकरण (2) और (3) बन जाते हैं: 16u + 9v = 1 और 36u + 4v = 1। इन दोनों समीकरणों को हल करने पर u = 1/52 अर्थात् a² = 52 और v = 1/13 अर्थात् b² = 13 प्राप्त होता है। a² और b² के इन मानों को समीकरण (1) में रखने पर अभीष्ट दीर्घवृत्त का समीकरण (x²/52) + (y²/13) = 1 अर्थात् x² + 4y² = 52 प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• दीर्घ अक्ष x-अक्ष पर होने से x² के नीचे a² आता है।
• बिंदुओं को संतुष्ट कराकर दो नए समीकरण प्राप्त किए जाते हैं।
• प्रतिस्थापन या विलोपन विधि से a² और b² के मान निकाले जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• समीकरण हल करते समय भिन्नों के लघुत्तम (LCM) में गलती करना।
• a² और b² के मानों को अंत में समीकरण में गलत जगह रखना।
• x और y के मानों का वर्ग करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) (1/a²) और (1/b²) को चर मानकर हल करने से बड़ी संख्याएँ सरल हो जाती हैं।
b) परीक्षा में सभी चरणों को विस्तार से लिखें ताकि गणना की गलती न हो।
c) अंत में समीकरण को सरल रूप में लिखकर ही छोड़ें।
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