NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 08 Heredity (आनुवंशिकता) in Hindi

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Question 1: यदि के लक्षण - A अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा लक्षण - B उसी समष्टि के 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?

Answer:

जीवों में जो लक्षण पहले उत्पन्न होता है उसकी प्रतिशत मात्रा समष्टि (population) में अधिक होती है। इसका कारण यह है कि पीढ़ियों के गुजरने के साथ-साथ वह लक्षण लगातार आगे की संतति में प्रसारित होता रहता है, जिससे उसकी संख्या बढ़ती जाती है। इसके विपरीत, जो लक्षण बाद में उत्पन्न होता है, उसे पूरी समष्टि में फैलने के लिए समय चाहिए होता है, इसलिए उसका प्रतिशत कम होता है। यहाँ लक्षण - B साठ प्रतिशत जीवों में पाया जाता है जबकि लक्षण - A केवल दस प्रतिशत जीवों में मिलता है। इसलिए, लक्षण - B पहले उत्पन्न हुआ होगा क्योंकि उसने अधिक समय तक प्रजनन के माध्यम से अपनी संतति में वृद्धि की है।

मुख्य बिंदु:

• किसी समष्टि में अधिक प्रतिशत वाला लक्षण पुराना और पहले उत्पन्न माना जाता है।
• कम प्रतिशत वाला लक्षण नया और हाल ही में उत्पन्न हुआ होता है।
• अलैंगिक प्रजनन में विविधताएँ केवल डीएनए (DNA) प्रतिकृति में होने वाली मामूली गलतियों के कारण उत्पन्न होती हैं।

आम गलतियाँ:

• कम प्रतिशत वाले लक्षण को पहले उत्पन्न हुआ समझ लेना।
• अलैंगिक प्रजनन और लैंगिक प्रजनन में विविधता के अंतर को नजरअंदाज करना।
• प्रश्न के प्रतिशत आंकड़ों का सही अर्थ न समझ पाना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि अधिक प्रतिशत का सीधा अर्थ है अधिक समय तक प्रसार होना।
b) उत्तर लिखते समय कारण स्पष्ट करें कि समय के साथ लक्षण कैसे फैलते हैं।
c) यह प्रश्न एक-दो अंकों के तार्किक प्रश्न के रूप में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 2: विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है?

Answer:

विभिन्नताएँ (variations) किसी स्पीशीज (species) के जीवित रहने की संभावना को बहुत अधिक बढ़ा देती हैं क्योंकि पर्यावरण हमेशा एक जैसा नहीं रहता उसमें लगातार बदलाव होते रहते हैं। यदि किसी स्पीशीज में विविधताएँ बहुत कम या बिल्कुल नहीं हैं और अचानक पर्यावरण में कोई बड़ा बदलाव आ जाए, जैसे अत्यधिक तापमान बढ़ जाए या घट जाए, जल स्रोत समाप्त हो जाए या कोई नया रोग फैल जाए, तो पूरी स्पीशीज के नष्ट होने का खतरा पैदा हो जाता है। इसके विपरीत, यदि उस स्पीशीज में पर्याप्त विभिन्नताएँ मौजूद हैं, तो पर्यावरण के बदलने पर कुछ ऐसे जीव भी हो सकते हैं जो बदले हुए हालात का सामना करने में सक्षम होते हैं और वे जीवित रह जाते हैं। इस प्रकार, विभिन्नताएँ स्पीशीज को प्राकृतिक आपदाओं या प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाती हैं और उनका अस्तित्व बनाए रखती हैं।

मुख्य बिंदु:

• पर्यावरण में होने वाले परिवर्तन स्पीशीज के लिए संकट पैदा कर सकते हैं।
• विभिन्नताओं के कारण कुछ जीवों में सहनशीलता विकसित हो जाती है जो उन्हें बचाती है।
• बिना विविधता वाली समष्टि पर्यावरण बदलते ही पूरी तरह समाप्त हो सकती है।

आम गलतियाँ:

• विभिन्नताओं को केवल शारीरिक बनावट तक सीमित समझना।
• यह सोचना कि सभी विभिन्नताएँ हमेशा लाभदायक ही होती हैं।
• पर्यावरण और स्पीशीज के बीच के संतुलन को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) तापमान या रोग का एक सामान्य उदाहरण देकर अपना उत्तर समझाएँ।
b) उत्तर में 'स्पीशीज का अस्तित्व' और 'पर्यावरणीय अनुकूलन' शब्दों का प्रयोग करें।
c) यह दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के रूप में महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे विस्तार से तैयार करें।

 

Question 3: मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?

Answer:

मेंडल ने अपने प्रयोगों में मटर के पौधों के परस्पर विरोधी लक्षणों (जैसे लंबे और बौने पौधे) के बीच संकरण (cross-breeding) कराया। उन्होंने देखा कि पहली पीढ़ी (F1 पीढ़ी) में दोनों में से केवल एक ही लक्षण दिखाई देता है, जबकि दूसरा लक्षण पूरी तरह छिप जाता है। उदाहरण के लिए, लंबे और बौने पौधों का संकरण कराने पर F1 पीढ़ी में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए, बौनापन दिखाई नहीं दिया। परंतु जब इन F1 पौधों का स्वपरागण कराया गया, तो अगली पीढ़ी (F2 पीढ़ी) में छुपा हुआ बौनापन फिर से प्रकट हो गया। इससे मेंडल ने निष्कर्ष निकाला कि F1 पीढ़ी में जो लक्षण प्रकट होता है वह 'प्रभावी' (dominant) लक्षण है और जो लक्षण छिप जाता है परंतु अगली पीढ़ी में फिर से सामने आता है वह 'अप्रभावी' (recessive) लक्षण है।

मुख्य बिंदु:

• F1 पीढ़ी में केवल एक विरोधी लक्षण दिखाई देता है, जिसे प्रभावी कहते हैं।
• अप्रभावी लक्षण F1 पीढ़ी में छिप जाता है लेकिन F2 पीढ़ी में अनुपात के साथ वापस दिखाई देता है.
• मेंडल के इन प्रयोगों से आनुवंशिकी के बुनियादी नियमों की नींव पड़ी।

आम गलतियाँ:

• F1 और F2 पीढ़ियों के परिणामों को आपस में मिला देना।
• प्रभावी और अप्रभावी शब्दों की सही परिभाषा न लिख पाना।
• संकरण प्रक्रिया को स्पष्ट किए बिना सीधे निष्कर्ष लिखना।

Exam Tips:

a) F1 और F2 पीढ़ी का जिक्र अपने उत्तर में अवश्य करें।
b) लंबे और बौने पौधे का उदाहरण देकर प्रक्रिया को आसान बनाएँ।
c) आनुवंशिक शब्दावली जैसे 'संकरण' और 'स्वपरागण' का सही उपयोग करें।

 

Question 4: मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं?

Answer:

मेंडल ने जब दो जोड़ी विपरीत लक्षणों (जैसे गोल-पीले और झुर्रीदार-हरे बीज) वाले पौधों के बीच संकरण कराया, तो उन्होंने पाया कि F1 पीढ़ी में सभी बीज गोल और पीले थे क्योंकि ये प्रभावी लक्षण थे। परंतु जब F2 पीढ़ी का अध्ययन किया गया, तो उसमें गोल-पीले और झुर्रीदार-हरे बीजों के अलावा नए संयोजन जैसे गोल-हरे और झुर्रीदार-पीले बीज भी प्राप्त हुए। इससे यह सिद्ध हुआ कि एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण की वंशागति को प्रभावित नहीं करती है, यानी दोनों लक्षण एक-दूसरे से पूरी तरह स्वतंत्र होकर अगली पीढ़ी में जाते हैं। इसी को मेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) कहा जाता है।

मुख्य बिंदु:

• द्वि-संकर क्रॉस (dihybrid cross) के माध्यम से स्वतंत्र वंशागति का पता चलता है।
• F2 पीढ़ी में नए लक्षणों के संयोजन (combinations) दिखाई देते हैं।
• एक लक्षण की वंशागति दूसरे से स्वतंत्र होती है।

आम गलतियाँ:

• एक-संकर और द्वि-संकर क्रॉस के परिणामों में भ्रमित होना।
• नए संयोजनों के उत्पन्न होने के कारण को न समझा पाना।
• स्वतंत्र अपव्यूहन नियम का नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) बीज के आकार और रंग का उदाहरण देकर उत्तर को स्पष्ट करें।
b) 'स्वतंत्र रूप से वंशागत' होना इस प्रश्न का मुख्य की-वर्ड है।
c) आनुवंशिक नियमों को स्पष्ट करने के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 5: एक 'A' रुधिर वर्ग वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग 'O' है, से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग - 'O' है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आपसे कहा जाए कि कौन सा विकल्प लक्षण - रुधिर वर्ग - 'A' अथवा 'O' प्रभावी लक्षण है? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।

Answer:

यह दी गई सूचना पूरी तरह पर्याप्त नहीं है यह तय करने के लिए कि कौन सा लक्षण प्रभावी है और कौन सा अप्रभावी। रुधिर वर्ग 'A' जीन संयोजन AA या AO से बन सकता है और रुधिर वर्ग 'O' केवल oo संयोजन से बनता है। यदि पुत्री का रुधिर वर्ग 'O' है, तो इसका अर्थ है कि उसे एक 'o' जीन अपनी माता (रुधिर वर्ग 'O' यानी oo) से मिला है और दूसरा 'o' जीन अपने पिता (रुधिर वर्ग 'A') से प्राप्त हुआ है। चूंकि पिता का रुधिर वर्ग 'A' है लेकिन उसके पास एक 'o' जीन भी मौजूद है (यानी उसका जीन संयोजन AO है), इससे यह सिद्ध नहीं होता कि 'A' प्रभावी है या 'O'। इसके अलावा, यदि केवल एक ही संतानों के आधार पर प्रभाविता तय की जाए तो वह वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगी, क्योंकि इसके लिए बड़े पैमाने पर वंशावली विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

मुख्य बिंदु:

• रुधिर वर्ग 'O' का जीन संयोजन हमेशा 'oo' होता है।
• रुधिर वर्ग 'A' का जीन संयोजन 'AA' या 'AO' दोनों हो सकता है।
• केवल एक पुत्री के रुधिर वर्ग से प्रभाविता का पक्का निर्णय नहीं लिया जा सकता।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि 'O' रुधिर वर्ग आते ही 'A' को अप्रभावी मान लेना।
• माता-पिता के जीनोटाइप (जीन प्रारूप) को ठीक से न समझ पाना।
• प्रश्न में पूछी गई 'अपर्याप्त सूचना' के कारण को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) ब्लड ग्रुप के जीनोटाइप (AO, oo) लिखकर उत्तर समझाएँ ताकि परीक्षक को समझ आए।
b) स्पष्ट रूप से लिखें कि सूचना क्यों अपर्याप्त है।
c) यह एक विश्लेषणात्मक प्रश्न है, इसलिए तार्किक तरीके से उत्तर दें।

 

Question 6: मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?

Answer:

आकृति का विवरण: इस आरेख में मानव में लिंग निर्धारण की प्रक्रिया को दिखाया गया है जिसमें पिता के शुक्राणु (X या Y गुणसूत्र वाले) और माता के अंडे (केवल X गुणसूत्र वाले) के मिलने से लड़का या लड़की होने की संभावना को दर्शाया गया है।
मानव में लिंग निर्धारण गुणसूत्रों के आधार पर होता है। मनुष्य की प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें से 22 जोड़े कायिक गुणसूत्र (autosomes) होते हैं और 1 जोड़ा (23वाँ जोड़ा) लिंग गुणसूत्र होता है। स्त्रियों में दोनों लिंग गुणसूत्र समान यानी XX होते हैं, जबकि पुरुषों में यह असमान यानी XY होते हैं। स्त्री द्वारा उत्पन्न सभी अंडे एक ही प्रकार के होते हैं जिनमें केवल X गुणसूत्र होता है। इसके विपरीत, पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु बनाते हैं - आधे शुक्राणुओं में X गुणसूत्र होता है और आधे में Y गुणसूत्र होता है। जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है, तो बनने वाला युग्मज (zygote) XX होता है जिससे लड़की का जन्म होता है। जब Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है, तो युग्मज XY होता है जिससे लड़के का जन्म होता है। इस प्रकार बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता के शुक्राणु पर निर्भर करता है।

मुख्य बिंदु:

• महिलाओं में XX और पुरुषों में XY लिंग गुणसूत्र पाए जाते हैं।
• सभी अंडे X गुणसूत्र वाले होते हैं, जबकि शुक्राणु X और Y दोनों प्रकार के होते हैं।
• बच्चे के लिंग निर्धारण के लिए पूरी तरह पिता का शुक्राणु उत्तरदायी होता है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि बच्चे के लिंग के लिए माता जिम्मेदार होती है।
• X और Y गुणसूत्रों के संयोजन को गलत लिख देना।
• कुल गुणसूत्रों और लिंग गुणसूत्रों की संख्या में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) XX और XY का क्रॉस चार्ट बनाकर उत्तर दें, इससे पूरे अंक मिलते हैं।
b) स्पष्ट करें कि पिता का Y गुणसूत्र ही लड़के के जन्म का कारण बनता है।
c) यह बोर्ड परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न है।

 

Question 7: मेंडल के एक प्रयोग में लंबे पौधे के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधे जिनके सफेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है कि लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी -
(a) TTWW
(b) TtWW
(c) TtWw
(d) TTww

Answer:

सही उत्तर विकल्प (b) TtWW है। इसका स्पष्टीकरण यह है कि संतति में सभी पुष्प बैंगनी रंग के हैं, जिसका अर्थ है कि बैंगनी रंग का लक्षण प्रभावी है और इसके लिए पौधे समग्मजी (homozygous) या विषमयुग्मजी (heterozygous) हो सकते हैं, लेकिन चूंकि संतति में आधे पौधे बौने (tt) हैं, इसलिए जनक पौधे की लंबाई के लिए जीन संरचना 'Tt' होनी चाहिए। यदि जनक 'TT' होता तो सभी पौधे लंबे होते, लेकिन 'Tt' होने के कारण आधे पौधे लंबे और आधे बौने प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार सभी पुष्पों का बैंगनी होना यह दर्शाता है कि पुष्प के रंग के लिए जनक शुद्ध प्रभावी (WW) था। इसलिए सही आनुवंशिक रचना TtWW होगी।

मुख्य बिंदु:

• संतानों में आधे बौने पौधे होने का अर्थ है कि लंबाई के लिए जनक विषमयुग्मजी (Tt) था।
• सभी पुष्पों का बैंगनी होना यह बताता है कि रंग के लिए जनक शुद्ध प्रभावी (WW) था।
• बहुविकल्पीय प्रश्नों में प्रत्येक विकल्प को ध्यान से जांच कर ही सही उत्तर चुनें।

आम गलतियाँ:

• सभी विकल्पों को बिना समझे तुक्का लगाना।
• लंबेपन और बौनेपन के जीनोटाइप का सही विश्लेषण न कर पाना।
• रंग और लंबाई के लक्षणों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्नों में क्रॉस बनाकर तुरंत जाँच लें।
b) Tt (लंबा/बौना) और WW (बैंगनी) के संयोजन को अलग-अलग हल करें।
c) सही विकल्प (b) को अपनी उत्तर पुस्तिका में स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 8: एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चे के जनक (माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

Answer:

हाँ, इस आधार पर हम कह सकते हैं कि आँखों का हल्का रंग एक अप्रभावी (recessive) लक्षण है। यदि माता-पिता दोनों की आँखें हल्के रंग की हैं (मान लीजिए उनका जीन प्रारूप aa है), तो उनके युग्मकों में केवल हल्के रंग का ही एलील (allele) होगा। परिणामस्वरूप, उनकी संतान को भी माता-पिता दोनों से वही एलील मिलेगा, जिससे संतान की आँखें भी हल्के रंग की (aa) ही होंगी। यदि हल्का रंग प्रभावी होता, तो यह माता-पिता में प्रकट होने के साथ-साथ गहरी आँखों वाले लोगों में भी छिपकर रह सकता था, लेकिन चूँकि हल्के रंग वाले माता-पिता की केवल हल्के रंग वाली संतानें ही होती हैं और वे अपने शुद्ध रूप को बनाए रखते हैं, इससे सिद्ध होता है कि यह अप्रभावी लक्षण है जो केवल समग्मजी अवस्था में ही दिखाई देता है।

मुख्य बिंदु:

• हल्के रंग की आँखों वाले माता-पिता के पास केवल अप्रभावी एलील होते हैं।
• अप्रभावी लक्षण केवल तभी प्रकट होता है जब दोनों एलील समान हों (समग्मजी)।
• ऐसे लक्षणों की वंशागति पीढ़ी-दर-पीढ़ी शुद्ध रूप से बनी रहती है।

आम गलतियाँ:

• प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• माता-पिता के जीनोटाइप (aa × aa) को सही ढंग से प्रदर्शित न करना।
• प्रश्न के तार्किक निष्कर्ष को अधूरा छोड़ देना।

Exam Tips:

a) उदाहरण के रूप में 'aa' जीन प्रारूप का उपयोग करके अपना उत्तर समझाएँ।
b) स्पष्ट करें कि अप्रभावी लक्षण केवल तभी दिखते हैं जब कोई प्रभावी जीन मौजूद न हो।
c) यह वैचारिक प्रश्न है, इसे अपने शब्दों में सहजता से लिखें।

 

Question 9: कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।

Answer:

कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के लिए एक प्रोजेक्ट निम्नलिखित चरणों के आधार पर तैयार किया जा सकता है। सबसे पहले, हम काले रंग की खाल वाले नर कुत्ते और सफेद रंग की खाल वाले मादा कुत्ते का चयन करेंगे (जैसा कि आरेख में WW और ww द्वारा दर्शाया गया है)। जब इनका संकरण कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी में सभी पिल्ले काले रंग की खाल वाले प्राप्त होते हैं। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि काले रंग की खाल का जीन सफेद रंग पर प्रभावी (dominant) है, क्योंकि F1 पीढ़ी में केवल काला रंग ही प्रकट होता है और सफेद रंग छिप जाता है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट में हम आनुवंशिक चार्ट, Punnett Square (पुनet वर्ग) और F1 तथा F2 पीढ़ियों के आंकड़ों को शामिल करेंगे ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि कौन सा लक्षण प्रभावी है।

मुख्य बिंदु:

• प्रोजेक्ट में माता-पिता (जनक), F1 पीढ़ी और F2 पीढ़ी का पूरा विवरण होना चाहिए।
• प्रभावी लक्षण वह होता है जो F1 पीढ़ी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है।
• आरेखीय निरूपण (Diagrammatic representation) प्रोजेक्ट को आकर्षक बनाता है।

आम गलतियाँ:

• प्रोजेक्ट को केवल थ्योरी मानकर बिना चरणों के लिख देना।
• काले और सफेद रंगों के एलील (W और w) को गलत दर्शाना।
• निष्कर्ष स्पष्ट रूप से न लिखना।

Exam Tips:

a) प्रोजेक्ट में उद्देश्य, सामग्री, कार्यप्रणाली और निष्कर्ष जैसी हेडिंग बनाएँ।
b) चित्र या फ्लोचार्ट का उपयोग अवश्य करें।
c) प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों की परिभाषा से प्रोजेक्ट की शुरुआत करें।

 

Question 10: संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबरी की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है?

Answer:

संतति में माता और पिता दोनों की आनुवंशिक योगदान की बराबरी उनके द्वारा दिए जाने वाले डीएनए (DNA) की मात्रा से सुनिश्चित होती है। लैंगिक प्रजनन के दौरान, प्रत्येक जनक (नर और मादा) अपनी जनन कोशिकाओं (युग्मकों) के माध्यम से गुणसूत्रों का एक पूरा सेट संतति को भेजता है। मानव या अन्य जीवों की प्रत्येक कायिक कोशिका में गुणसूत्र जोड़े के रूप में होते हैं, लेकिन जब जनन कोशिकाएँ (शुक्रणु और अंडाणु) बनती हैं, तो अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) के कारण गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है। इस प्रकार, पिता के शुक्राणु में आधे गुणसूत्र और माता के अंडाणु में आधे गुणसूत्र होते हैं। जब निषेचन की प्रक्रिया में ये दोनों युग्मक आपस में मिलते हैं, तो बनने वाले युग्मज (zygote) में गुणसूत्रों की संख्या फिर से उतनी ही हो जाती है जितनी माता-पिता में थी। चूँकि एक सेट नर जनक से और दूसरा सेट मादा जनक से आता है, इसलिए संतति में दोनों जनकों की आनुवंशिक भागीदारी बिल्कुल बराबर होती है।

मुख्य बिंदु:

• अर्धसूत्री विभाजन द्वारा युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है।
• निषेचन के समय नर और मादा युग्मकों के संलयन से गुणसूत्रों की संख्या पुनः पूरी हो जाती है।
• संतति को आधा डीएनए माता से और आधा पिता से प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• अर्धसूत्री और समसूत्री विभाजन के अंतर को भूल जाना।
• यह सोचना कि माता या पिता में से किसी एक का योगदान अधिक होता है।
• निषेचन प्रक्रिया का सही वर्णन न करना।

Exam Tips:

a) 'अर्धसूत्री विभाजन' और 'निषेचन' शब्दों का प्रयोग अपने उत्तर में मुख्य रूप से करें।
b) समझाइए कि कैसे आधे-आधे गुण मिलकर पूरा सेट बनाते हैं।
c) यह एक वैचारिक और महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है।

 

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