NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 07 How do Organisms Reproduce (जीव जनन कैसे करते हैं) in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Science Chapter 07 जीव जनन कैसे करते हैं

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Question 1: डी.एन.ए. प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है?

Answer:

डी.एन.ए. (DNA) जीवों की कोशिकाओं के केंद्रक में पाया जाने वाला वह अणु है जो आनुवंशिक गुणों को जनक से संतति (offspring) पीढ़ी में पहुंचाता है। प्रजनन की मूल घटना डी.एन.ए. की प्रतिकृति (copy) बनाना है। जब कोशिका विभाजित होती है, तो डी.एन.ए. की दो प्रतिकृतियां बनती हैं और दोनों नई कोशिकाओं में जाती हैं। इसके बिना संतति जीवों में अपने माता-पिता के शारीरिक और जैविक लक्षण नहीं आ सकते। रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से डी.एन.ए. की यह प्रतिकृति जीवन की निरंतरता को बनाए रखती है।

मुख्य बिंदु:

• डी.एन.ए. आनुवंशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ले जाता है।
• प्रजनन के दौरान डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनना सबसे आवश्यक और मूल घटना है।
• डी.एन.ए. प्रतिकृति के कारण ही संतति जीव अपने जनकों के समान दिखाई देते हैं।

आम गलतियाँ:

• डी.एन.ए. को केवल प्रोटीन अणु समझना और उसके आनुवंशिक महत्त्व को भूल जाना।
• प्रतिकृति बनने की प्रक्रिया को जनन से अलग मानना।
• संतति में समानता के कारणों को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर लिखते समय डी.एन.ए. का पूरा नाम (डीऑक्सीराइबोक्लिक एसिड) और उसका मुख्य कार्य अवश्य बताएं।
b) यह स्पष्ट करें कि डी.एन.ए. प्रतिकृति न हो तो नई संतति अपने जनकों जैसी नहीं बन सकती।
c) सरल और वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग करें जैसे कि 'आनुवंशिक सूचना' और 'प्रतिकृति'।

 

Question 2: जीवों में विभिन्नता स्पीशीज के लिए तो लाभदायक है परंतु व्यष्टि के लिए आवश्यक नहीं है, क्यों?

Answer:

जीवों में विभिन्नता (variations) डी.एन.ए. प्रतिकृति के दौरान होने वाली मामूली त्रुटियों या लैंगिक जनन के कारण उत्पन्न होती हैं। किसी एक जीव (व्यष्टि) के लिए ये विभिन्नताएँ हमेशा आवश्यक नहीं होतीं, क्योंकि यदि कोई जीव पहले से ही अपने पर्यावरण में अच्छी तरह अनुकूलित है, तो विभिन्नता उसके लिए तुरंत लाभ नहीं देती। परंतु स्पीशीज (समष्टि) के पूरे समूह के लिए यह अत्यंत लाभदायक है। यदि पर्यावरण में अचानक कोई बड़ा परिवर्तन आ जाए, जैसे तापमान बढ़ना, जल की कमी या कोई भयानक रोग, तो केवल वे ही जीव जीवित बच पाते हैं जिनमें अनुकूल विभिन्नताएँ होती हैं। इस प्रकार पूरी स्पीशीज का संपूर्ण विनाश होने से बच जाता है और पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनी रहती है।

मुख्य बिंदु:

• व्यष्टि (एकल जीव) के लिए विभिन्नता तुरंत जीवन के लिए अनिवार्य नहीं होती यदि वह सामान्य स्थिति में जी रहा हो।
• स्पीशीज (समूह) के स्तर पर विभिन्नताएँ पर्यावरण के प्रतिकूल बदलावों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
• पर्यावरण में अचानक संकट आने पर विभिन्नता वाले जीव ही जीवित रहकर स्पीशीज को बचाते हैं।

आम गलतियाँ:

• व्यष्टि और स्पीशीज के अंतर को न समझना।
• यह सोचना कि हर विभिन्नता व्यक्तिगत जीव को तुरंत फायदा पहुंचाती है।
• पर्यावरण परिवर्तन और स्पीशीज के अस्तित्व के संबंध को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) व्यष्टि और समष्टि (स्पीशीज) दोनों शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
b) उदाहरण दें कि तापमान बदलने पर कैसे कुछ जीवों की विभिन्नता उन्हें बचा लेती है।
c) यह एक तार्किक प्रश्न है, इसलिए उत्तर में स्पीशीज के संरक्षण की बात अवश्य लिखें।

 

Question 3: द्विखंडन किस प्रकार भिन्न है?

Answer:

द्विखंडन (binary fission) और बहुखंडन (multiple fission) दोनों अलैंगिक जनन की विधियाँ हैं, जिनमें मुख्य अंतर जनक के विभाजन का है। द्विखंडन में एक जनक कोशिका विभाजित होकर दो संतति कोशिकाओं का निर्माण करती है, जैसे कि अमीबा और पैरामीशियम में होता है। यह सामान्य अनुकूल परिस्थितियों में होता है। इसके विपरीत, बहुखंडन में जनक कोशिका का केंद्रक कई भागों में विभाजित होकर एक साथ अनेक संतति कोशिकाओं को जन्म देता है, जो आमतौर पर प्रतिकूल परिस्थितियों में सिस्ट (पुटी) के भीतर होता है, जैसे प्लाज्मोडियम में।

मुख्य बिंदु:

• द्विखंडन में एक जीव से दो संतति बनते हैं, बहुखंडन में एक साथ अनेक संतति बनते हैं।
• द्विखंडन अनुकूल परिस्थितियों में होता है, जबकि बहुखंडन अक्सर प्रतिकूल परिस्थितियों में होता है।
• द्विखंडन का उदाहरण अमीबा और बहुखंडन का उदाहरण प्लाज्मोडियम है।

आम गलतियाँ:

• दोनों विधियों के उदाहरणों को आपस में मिला देना।
• यह भूल जाना कि कौन सी विधि किस परिस्थिति में होती है।
• संतति जीवों की संख्या का स्पष्ट उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) अंतर स्पष्ट करने के लिए तालिका (table) का प्रयोग करें, जिससे परीक्षा में अच्छे अंक मिलें।
b) अमीबा और प्लाज्मोडियम के नाम उदाहरण के रूप में अवश्य दें।
c) 'अनुकूल' और 'प्रकूल' शब्दों का सही संदर्भ में उपयोग करें।

 

Question 4: बीजाุด द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है?

Answer:

बीजाणु (spore) द्वारा जनन करने वाले जीवों (जैसे राइजोपस या कवक) को विशेष लाभ मिलता है क्योंकि बीजाणुओं के चारों ओर एक बहुत ही मोटी और मजबूत सुरक्षात्मक भित्ति (wall) होती है। यह मोटी भित्ति बीजाणुओं को अत्यधिक तापमान, शुष्क वातावरण और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाकर रखती है। जब अनुकूल परिस्थितियां वापस आती हैं, तो ये बीजाणु अंकुरित हो जाते हैं और नए जीव को जन्म देते हैं। इसके अतिरिक्त, एक ही बीजाधानी में अनगिनत बीजाणु बनते हैं, जिससे एक ही बार में बहुत सारे नए जीव उत्पन्न हो जाते हैं और स्पीशीज का विस्तार तेजी से होता है।

मुख्य बिंदु:

• बीजाणु के चारों ओर मोटी भित्ति होती है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में उसकी रक्षा करती है।
• अनुकूल वातावरण मिलते ही बीजाणु आसानी से अंकुरित हो जाते हैं।
• एक बीजाधानी से एक साथ बड़ी संख्या में नए जीव उत्पन्न होते हैं।

आम गलतियाँ:

• बीजाणु भित्ति के कार्य को साधारण त्वचा या झिल्ली बताना।
• प्रतिकूल परिस्थितियों में इनकी उत्तरजीविता के कारण को न समझाना।
• कवक या राइजोपस का उचित संदर्भ न देना।

Exam Tips:

a) 'मोटी भित्ति' और 'प्रतिकूल परिस्थिति' जैसे मुख्य की-वर्ड्स उत्तर में जरूर शामिल करें।
b) बताएं कि यह अलैंगिक जनन की एक अत्यधिक प्रभावी विधि है।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक बिंदुओं में लिखें।

 

Question 5: क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं जिससे पता चलता हो कि जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं कर सकते?

Answer:

जटिल संरचना वाले जीव, जैसे कि मनुष्य या अन्य बहुकोशिकीय उच्च वर्ग के जंतु, पुनरुद्भवन (regeneration) द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं कर सकते क्योंकि उनका शरीर बहुत अधिक श्रम विभाजन और अंग-तंत्र संगठन पर आधारित होता है। हाइड्रा या प्लेनेरिया जैसे सरल जीवों का पूरा शरीर लगभग एक जैसी कोशिकाओं से बना होता है, इसलिए उनके शरीर का कोई भी कटा हुआ हिस्सा नई कोशिकाओं में बदलकर पूरा जीव बना सकता है। परंतु जटिल जीवों में त्वचा, मांसपेशियां, रक्त, तंत्रिकाएं और अंग अलग-अलग प्रणालियों के रूप में एक साथ मिलकर काम करते हैं। यदि जटिल जीव का कोई अंग कट जाए तो वह उसे ठीक (हाइपरट्रॉफी या घाو भरना) तो कर सकता है, लेकिन उस एक अंग से पूरा नया जीव नहीं विकसित कर सकता।

मुख्य बिंदु:

• सरल जीवों (जैसे हाइड्रा) का शरीर समान कोशिकाओं से बना होता है, जिससे वे पुनरुद्भवन कर सकते हैं।
• जटिल जीवों में उच्च स्तर का अंग-तंत्र संगठन और श्रम विभाजन होता है।
• जटिल जीव अंग की मरम्मत कर सकते हैं, पर कटे हुए हिस्से से नया जीव नहीं बना सकते।

आम गलतियाँ:

• पुनरुद्भवन और अंग की मरम्मत (Healing) में अंतर न समझना।
• जटिल जीवों में ऊतक और अंग प्रणालियों की जटिलता को नजरअंदाज करना।
• सरल और जटिल जीवों के उदाहरणों को मिला देना।

Exam Tips:

a) हाइड्रा और प्लेनेरिया का उदाहरण देकर सरल जीवों की विशेषता समझाएं।
b) 'श्रम विभाजन' और 'अंग-तंत्र' शब्दों का प्रयोग करें।
c) स्पष्ट करें कि छिपकली की पूंछ काकटना पुनरुद्भवन है, नया जीव बनना नहीं।

 

Question 6: कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है?

Answer:

कायिक प्रवर्धन (vegetative propagation) पौधों के तने, जड़ या पत्तियों जैसे कायिक भागों से नए पौधे उगाने की विधि है। इसका उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि कई ऐसे पौधे होते हैं जो बीज उत्पन्न करने की अपनी क्षमता खो चुके होते हैं, जैसे केला, गुलाब, चमेली और अंगूर। इस विधि से उगाए गए पौधों में बीज द्वारा उगाए गए पौधों की तुलना में पुष्प और फल बहुत कम समय में आने लगते हैं। इसके अलावा, कायिक प्रवर्धन द्वारा उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से अपने जनक पौधे के बिल्कुल समान होते हैं, जिससे जनक के अच्छे गुण सुरक्षित रहते हैं और उनकी शुद्धता बनी रहती है।

मुख्य बिंदु:

• बीजहीन पौधे (जैसे केला और गुलाब) केवल कायिक प्रवर्धन द्वारा ही उगाए जा सकते हैं।
• इस विधि से उगाए गए पौधों में फूल और फल बहुत जल्दी आने लगते हैं।
• नए पौधे आनुवंशिक रूप से बिल्कुल जनक पौधे जैसे और गुणवान होते हैं।

आम गलतियाँ:

• कायिक प्रवर्धन की परिभाषा गलत लिखना या इसके अंगों (तने, जड़, पत्ती) का उल्लेख न करना।
• यह भूल जाना कि बीजहीन पौधे इसी विधि से उगाए जाते हैं।
• आनुवंशिक समानता के बिंदु को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) केला, गुलाब और चमेली के उदाहरण अवश्य दें।
b) कम समय में फल-फूल आना और आनुवंशिक समानता - ये दो मुख्य लाभ जरूर लिखें।
c) ब्रायोफाइलम की पत्ती का उदाहरण भी दे सकते हैं जहाँ पत्तियों से कलिकाएँ निकलती हैं।

 

Question 7: डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यों है?

Answer:

जनन की मूल घटना डी.एन.ए. की प्रतिकृति (copy) बनाना है। कोशिका के केंद्रक में पाए जाने वाले गुणसूत्रों में डी.एन.ए. के अणु होते हैं, जिनमें माता-पिता के शारीरिक और जैविक लक्षणों का संदेश निहित रहता है। जब एक कोशिका विभाजित होकर दो नई संतति कोशिकाएं बनाती है, तो दोनों को समान आनुवंशिक सूचना मिलना आवश्यक होता है। यदि डी.एन.ए. की प्रतिकृति न बने, तो संतति कोशिकाओं में जीवन चलाने के लिए आवश्यक निर्देश या गुण नहीं पहुंच पाएंगे। रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से डी.एन.ए. की दो समान प्रतिकृतियां बनती हैं जो संतति में वंशानुगत गुणों को बनाए रखती हैं।

मुख्य बिंदु:

• डी.एन.ए. में जीवों के सभी आनुवंशिक गुणों की जानकारी सुरक्षित रहती है।
• डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनने से दोनों संतति कोशिकाओं को समान आनुवंशिक पदार्थ मिलता है।
• यह प्रक्रिया माता-पिता के लक्षण अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का एकमात्र माध्यम है।

आम गलतियाँ:

• डी.एन.ए. और केंद्रक के संबंध को गलत लिखना।
• केवल कोशिका विभाजन लिखना और डी.एन.ए. की भूमिका भूल जाना।
• रासायनिक प्रतिक्रियाओं के महत्त्व को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) यह प्रश्न पहले प्रश्न से मिलता-जुलता है, इसलिए सटीक और वैज्ञानिक भाषा का प्रयोग करें।
b) 'गुणसूत्र' और 'आनुवंशिक संदेश' शब्दों का उपयोग करें।
c) उत्तर को पैराग्राफ या स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।

 

Question 8: परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है?

Answer:

परागण और निषेचन पौधों में जनन प्रक्रिया के दो अलग-अलग चरण हैं। परागण वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों के परागकण (नर युग्म) किसी माध्यम जैसे कीट, पक्षी, वायु या जल द्वारा परागकोश से उड़कर या स्थानांतरित होकर पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। दूसरी ओर, निषेचन वह क्रिया है जिसमें नर युग्म का संलयन मादा युग्म (अंडाशय के अंदर मौजूद अंड कोशिका) के साथ होता है, जिससे युग्मज (zygote) का निर्माण होता है। परागण निषेचन से पहले होने वाली एक भौतिक क्रिया है, जबकि निषेचन वास्तविक जनन और युग्मक संलयन की आंतरिक क्रिया है।

मुख्य बिंदु:

• परागण परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है।
• निषेचन नर युग्म और मादा युग्म (अंडाणु) का संलयन है जिससे युग्मज बनता है।
• परागण हमेशा निषेचन से पहले होता है और यह निषेचन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।

आम गलतियाँ:

• परागण और निषेचन को एक ही प्रक्रिया समझ लेना।
• माध्यमों (कीट, वायु) को निषेचन से जोड़ देना।
• युग्मज बनने की सही प्रक्रिया को न समझाना।

Exam Tips:

a) दोनों के बीच का मुख्य अंतर स्पष्ट रूप से एक-एक पंक्ति में परिभाषित करें।
b) बताएं कि परागण के बिना निषेचन संभव नहीं है।
c) नर युग्म और मादा युग्म के मिलने को निषेचन कहें।

 

Question 9: शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भूमिका है?

Answer:

मानव नर जनन तंत्र में शुक्राशय (seminal vesicle) और प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland) महत्वपूर्ण सहायक ग्रंथियाँ हैं। ये दोनों ग्रंथियाँ अपने स्राव (fluid secretions) को शुक्रवाहिनी में डालती हैं, जिससे शुक्राणु एक तरल माध्यम में आ जाते हैं। इस तरल माध्यम के कारण शुक्राणुओं का शरीर से बाहर स्थानांतरण बहुत सरलता से और तेजी से हो पाता है। इसके अलावा, यह स्राव शुक्राणुओं को आवश्यक पोषण भी प्रदान करता है और उन्हें गतिशील बनाए रखता है ताकि वे मादा शरीर के भीतर आसानी से तैर सकें।

मुख्य बिंदु:

• शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथियाँ अपने स्राव से शुक्राणुओं को तरल माध्यम देती हैं।
• यह तरल शुक्राणुओं के स्थानांतरण को आसान बनाता है।
• यह स्राव शुक्राणुओं को पोषण और ऊर्जा प्रदान करता है।

आम गलतियाँ:

• ग्रंथियों के कार्यों को आपस में मिला देना या उनके नाम गलत लिखना।
• यह भूल जाना कि ये ग्रंथियाँ शुक्राणुओं को गतिशीलता और पोषण देती हैं।
• शुक्रवाहिनी और ग्रंथियों की स्थिति में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) 'तरल माध्यम' और 'पोषण' शब्द उत्तर में जरूर लिखें।
b) दोनों ग्रंथियों के संयुक्त लाभ को एक साथ समझाएं।
c) नर जनन तंत्र के नामांकित चित्र का अभ्यास करें।

 

Question 10: यौवनारंभ के समय लड़कियों में कौन से परिवर्तन दिखाई देते हैं?

Answer:

यौवनारंभ (puberty) के समय लड़कियों के शरीर में अनेक हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन होते हैं। स्तनों के आकार में वृद्धि होने लगती है तथा त्वचा का रंग भी कुछ गहरा होने लगता है। इस समय लड़कियों में रजोदर्शन (menarche यानी पहली माहवारी) शुरू होता है और मासिक धर्म चक्र प्रारंभ होता है। इसके साथ ही उनके शरीर में भी कई परिवर्तन आते हैं जैसे पतली या तीखी आवाज होना, शरीर के कुछ हिस्सों में बाल उगना और श्रोणि क्षेत्र (pelvic region) का चौड़ा होना।

मुख्य बिंदु:

• स्तनों के आकार में वृद्धि और त्वचा के रंग में बदलाव होना।
• रजोधर्म (मासिक चक्र) का प्रारंभ होना।
• आवाज में बदलाव और शारीरिक बनावट में परिपक्वता आना।

आम गलतियाँ:

• लड़कों और लड़कियों के यौवनारंभ के परिवर्तनों को मिला देना।

• रजोधर्म या मासिक चक्र की प्रक्रिया को सही शब्दों में न लिख पाना।
• केवल एक या दो सतही परिवर्तन लिखकर छोड़ देना।

Exam Tips:

a) परिवर्तनों को बिंदुओं में या स्पष्ट वाक्यों में लिखें।
b) 'रजोदर्शन' और 'स्तनों के विकास' जैसे मुख्य बिंदु अवश्य शामिल करें।
c) हार्मोन के प्रभाव से होने वाले बदलाव के रूप में इसे समझें।

 

Question 11: माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रूण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?

Answer:

माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रूण को पोषण प्लेसेंटा (placenta) नामक विशेष संरचना के माध्यम से प्राप्त होता है। प्लेसेंटा एक तश्तरीनुमा संरचना होती है जो गर्भशय की दीवार में धँसी होती है। इसमें भ्रूण के ऊतक एक तरफ होते हैं और माँ के ऊतक दूसरी तरफ होते हैं। माँ के रक्त से ग्लूकोज, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व प्लेसेंटा के रास्ते से भ्रूण तक पहुँचते हैं। इसी प्रकार, भ्रूण द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थ और कार्बन डाइऑक्साइड भी प्लेसेंटा के माध्यम से ही माँ के रक्त में छोड़ दिए जाते हैं, जिससे उनका निष्कासन होता है।

मुख्य बिंदु:

• प्लेसेंटा एक तश्तरी जैसी संरचना है जो गर्भाशय की दीवार और भ्रूण को जोड़ती है।
• यह माँ के रक्त से ग्लूकोज और ऑक्सीजन भ्रूण को पहुँचाती है।
• भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में भी प्लेसेंटा मदद करती है।

आम गलतियाँ:

• प्लेसेंटा की संरचना और उसके कार्य को ठीक से न समझाना।
• केवल पोषण लिखना और अपशिष्ट पदार्थों के बाहर जाने की प्रक्रिया भूल जाना।
• माँ और भ्रूण के रक्त के सीधे संपर्क में होने की गलतफहमी पालना।

Exam Tips:

a) 'प्लेसेंटा' (अपरा) शब्द का प्रयोग अंग्रेजी या हिंदी दोनों में सही से करें।
b) ग्लूकोज और ऑक्सीजन के आदान-प्रदान का उल्लेख जरूर करें।
c) यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है, इसे चित्र के साथ समझकर याद रखें।

 

Question 12: यदि कोई महिला कॉपर-T का प्रयोग कर रही है तो क्या यह उसकी यौन-संचारित रोगों से रक्षा करेगा?

Answer:

नहीं, कॉपर-T (Copper-T) का प्रयोग करने से महिला की यौन-संचारित रोगों (STDs) से रक्षा नहीं होती है। कॉपर-T एक गर्भनिरोधक युक्ति है जिसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। इसका मुख्य कार्य शुक्राणुओं को अंडे तक पहुँचने से रोकना और निषेचन को विफल करना है, जिससे केवल अनचाहा गर्भधारण रोका जा सकता है। यह किसी भी प्रकार के जीवाणु या विषाणु जनित यौन-संचारित रोगों (जैसे एच.आई.वी., एड्स, सिफलिस आदि) को फैलने से नहीं रोक सकती। इसके लिए कंडोम जैसे शारीरिक अवरोधकों का उपयोग करना आवश्यक होता है।

मुख्य बिंदु:

• कॉपर-T केवल गर्भधारण को रोकने में सहायक है, रोगों से बचाने में नहीं।
• यह गर्भाशय में लगाई जाने वाली एक गर्भनिरोधक युक्ति है।
• यौन-संचारित रोगों से बचने के लिए कंडोम जैसे बैरियर तरीकों की आवश्यकता होती है।

आम गलतियाँ:

• कॉपर-T को सभी प्रकार के संक्रमणों से बचाने वाली दवा या युक्ति समझ लेना।
• गर्भनिरोधक और यौन-संचारित रोगों से सुरक्षा के अंतर को न समझना।
• गलत हाँ या ना में उत्तर देना बिना कारण बताए।

Exam Tips:

a) स्पष्ट रूप से 'नहीं' लिखकर उत्तर शुरू करें।
b) समझाएं कि कॉपर-T केवल निषेचन रोकती है, संक्रमण नहीं।
c) स्वास्थ्य और स्वच्छता के दृष्टिकोण से यह व्यावहारिक प्रश्न है।

 

Question 13: अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है:
(a) अमीबा
(b) यीस्ट
(c) प्लाज्मोडियम
(d) लेस्मानिया

Answer:

(b) यीस्ट
स्पष्टीकरण: यीस्ट एक एककोशिकीय कवक है जिसमें अलैंगिक जनन मुकुलन (budding) द्वारा होता है। इसमें कोशिका से एक छोटा उभार (मुकुल) निकलता है जो बाद में अलग होकर नया जीव बनता है। अमीबा में द्विखंडन, प्लाज्मोडियम में बहुखंडन और लेस्मानिया में द्विद्विभाजन होता है।

मुख्य बिंदु:

• यीस्ट में मुकुलन (budding) विधि से जनन होता है।
• अमीबा और लेस्मानिया में द्विखंडन होता है।
• प्लाज्मोडियम में बहुखंडन होता है।

आम गलतियाँ:

• अमीबा और यीस्ट की जनन विधियों को आपस में मिला देना।
• मुकुलन शब्द का अर्थ न समझना।

Exam Tips:

a) सभी विकल्पों के जीवों की जनन विधियाँ याद रखें।
b) यीस्ट का नाम आते ही मुकुलन पर टिक करें।

 

Question 14: निम्न में से कौन-कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है?
(a) अंडाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिनी
(d) डिंबवाहिनी

Answer:

(c) शुक्रवाहिनी
स्पष्टीकरण: शुक्रवाहिनी (vas deferens) मानव नर जनन तंत्र का भाग है, जो शुक्राणुओं को वृषण से आगे पहुँचाती है। अंडाशय, गर्भाशय और डिंबवाहिनी (oviduct) तीनों मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंग हैं।

मुख्य बिंदु:

• शुक्रवाहिनी नर जनन तंत्र से संबंधित है।
• अंडाशय, गर्भाशय और डिंबवाहिनी मादा जनन तंत्र के भाग हैं।

आम गलतियाँ:

• डिंबवाहिनी और शुक्रवाहिनी के नाम में भ्रमित होना।
• मादा अंगों की सूची को ठीक से न पढ़ना।

Exam Tips:

a) नर और मादा दोनों तंत्रों के अंगों की सूची अलग से याद करें।
b) प्रश्न ध्यान से पढ़ें कि 'भाग नहीं है' पूछा गया है।

 

Question 15: परागकोश में होते हैं:
(a) बाह्यदल
(b) अंडाशय
(c) अंडप
(d) पराग कण

Answer:

(d) पराग कण
स्पष्टीकरण: परागकोश पुष्प के पुंकेसर (नर जनन अंग) का ऊपरी भाग होता है, जिसके अंदर परागकण (pollen grains) बनते हैं। बाह्यदल रक्षात्मक भाग है, जबकि अंडाशय और अंडप मादा जनन अंग के भाग हैं।

मुख्य बिंदु:

• परागकोश पुंकेसर का हिस्सा है जिसमें परागकण पाए जाते हैं।
• बाह्यदल, अंडाशय और अंडप दूसरे अंगों से संबंधित हैं।

आम गलतियाँ:

• परागकोश और अंडाशय के अंतर को भूल जाना।
• नर और मादा अंगों के भागों की अदला-बदली करना।

Exam Tips:

a) पुंकेसर = परागकोश + तंतु, और परागकोश के अंदर परागकण होते हैं।
b) यह बहुविकल्पीय प्रश्न परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 16: अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं?

Answer:

लैंगिक जनन एक अधिक विकसित और उन्नत प्रक्रिया है जिसका अलैंगिक जनन की तुलना में बहुत बड़ा लाभ है। लैंगिक जनन में दो भिन्न जीवों (नर तथा मादा) के युग्मकों का संलयन होता है, जिससे संतानों में गुणों की विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होती हैं। विभिन्नताओं के कारण नई पीढ़ियों में नए संयोजन बनते हैं जो विभिन्न और कठिन परिस्थितियों में भी स्पीशीज के अस्तित्व को बचाए रखने में सहायता करते हैं। इसके विपरीत, अलैंगिक जनन में लगभग एक जैसी प्रतिकृतियां बनती हैं जिससे विभिन्नताओं की संभावना बहुत कम होती है।

मुख्य बिंदु:

• लैंगिक जनन में दो जनकों के मिलने से विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
• विभिन्नताएँ स्पीशीज को पर्यावरण के संकटों से लड़ने की क्षमता देती हैं।
• यह अलैंगिक जनन की तुलना में अधिक विविधता और अनुकूलन क्षमता प्रदान करता है।

आम गलतियाँ:

• अलैंगिक और लैंगिक जनन के लाभों को उल्टा लिख देना।
• विभिन्नताओं के महत्त्व को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) 'विभिन्नता' (Variations) शब्द का प्रयोग उत्तर में जरूर करें।
b) दो जनकों की भागीदारी और युग्मक संलयन को मुख्य अंतर के रूप में बताएं।

 

Question 17: मानव में वृषण के क्या कार्य हैं?

Answer:

मानव में वृषण (testes) नर जनन तंत्र का मुख्य अंग है, जो शरीर के बाहर वृषण कोष में स्थित होता है। वृषण के दो प्रमुख कार्य हैं: पहला, यह नर युग्मक अर्थात शुक्राणुओं (sperms) का उत्पादन करता है; और दूसरा, यह टेस्टोस्टेरोन (testosterone) नामक हार्मोन उत्पन्न करता है। यह हार्मोन लड़कों में यौवनारंभ के लक्षणों (जैसे चेहरे पर बालों का उगना, आवाज का भारी होना आदि) को नियंत्रित और प्रेरित करता है।

मुख्य बिंदु:

• वृषण में शुक्राणुओं का निर्माण होता है।
• यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है।
• यह लड़कों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों को नियंत्रित करता है।

आम गलतियाँ:

• शुक्राणु उत्पादन और हार्मोन के नाम (टेस्टोस्टेरोन) को भूल जाना।
• वृषण की स्थिति (वृषण कोष) का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) दोनों कार्यों (शुक्राणु बनाना + हार्मोन बनाना) को अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
b) टेस्टोस्टेरोन की स्पेलिंग और कार्य अच्छी तरह याद रखें।

 

Question 18: ऋतुस्राव क्यों होता है?

Answer:

गर्भशय प्रत्येक माह भ्रूण को ग्रहण करने एवं उसके पोषण के लिए अपनी तैयारी करता है, जिसके लिए गर्भाशय की आंतरिक भित्ति मांसल एवं स्पंजी हो जाती है। परंतु यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता है, तो गर्भाशय की इस आंतरिक परत की अब कोई आवश्यकता नहीं रहती। इसलिए यह परत धीरे-धीरे टूटकर योनि मार्ग से रुधिर एवं म्यूकस के रूप में बाहर निकल जाती है। इस चक्र को ऋतुस्राव (menstruation या मासिक धर्म) कहते हैं, जिसकी सामान्य अवधि 2 से 8 दिनों की होती है।

मुख्य बिंदु:

• गर्भाशय हर महीने निषेचित अंडे के स्वागत के लिए स्पंजी परत बनाता है।
• निषेचन न होने पर यह परत रक्त और म्यूकस के रूप में बाहर निकल जाती है।
• इस पूरी प्रक्रिया को ऋतुस्राव या मासिक चक्र कहा जाता है।

आम गलतियाँ:

• निषेचन न होने की स्थिति को स्पष्ट न करना।
• गर्भाशय की आंतरिक भित्ति के टूटने की प्रक्रिया को गलत बताना।

Exam Tips:

a) 'गर्भाशय की आंतरिक भित्ति' और 'निषेचन का न होना' मुख्य कारण के रूप में लिखें।
b) सामान्य अवधि (2 से 8 दिन) का उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 19: पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।

आकृति का विवरण: यह आरेख एक द्विलिंगी पुष्प की अनुदैर्ध्य काट को दर्शाता है, जिसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय, परागकोश, तंतु, दल और बाह्यदल स्पष्ट रूप से नामांकित हैं।

Answer:

पुष्प पौधों का जनन अंग होता है जिसमें नर और मादा दोनों भाग हो सकते हैं। पुंकेसर (नर जनन अंग) में परागकोश और तंतु होते हैं, जबकि स्त्रीकेशर या अंडप (मादा जनन अंग) में वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं। इसके अलावा पुष्प में रंग-बिरंगे दल (पंखुड़ियाँ) जो कीटों को आकर्षित करते हैं और बाह्यदल होते हैं जो कली अवस्था में पुष्प की रक्षा करते हैं। परीक्षा में इसका नामांकित चित्र बनाना होता है।

मुख्य बिंदु:

• पुष्प के मुख्य भाग: पुंकेसर (नर) और स्त्रीकेशर (मादा)।
• स्त्रीकेशर के तीन भाग: वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय।
• पुंकेसर के दो भाग: परागकोश और तंतु।

आम गलतियाँ:

• नामांकित चित्र बनाते समय वर्तिकाग्र और वर्तिका के नाम उल्टे लिख देना।
• परागकोश और तंतु को सही स्थान पर न दर्शाना।

Exam Tips:

a) पेंसिल से साफ-सुथरा नामांकित चित्र बनाने का अभ्यास करें।
b) सभी मुख्य भागों (अंडाशय, वर्तिकाग्र, परागकोश) के नाम सही तीर के साथ दर्शाएं।

 

Question 20: गर्भनिरोध की विभिन्न विधियाँ कौन सी हैं?

Answer:

गर्भधारण को रोकने के लिए कई प्रकार की विधियाँ अपनाई जाती हैं, जिन्हें मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
1. यांत्रिक अवरोध (Mechanical barriers): इस विधि में कंडोम या डायफ्राम का उपयोग किया जाता है ताकि शुक्राणु अंडे तक न पहुँच सकें।
2. रासायनिक अवरोध (Chemical methods): इसमें गोलियों (पिल्स) का उपयोग किया जाता है जिससे हार्मोन संतुलन बदलकर अंडमोचन (ovulation) रोक दिया जाता है।
3. अंतर्गर्भाشی युक्तियाँ (IUDs): कॉपर-T जैसी युक्तियों को गर्भाशय में स्थापित किया जाता है जो निषेचन को रोकती हैं।
4. शल्यक्रिया विधियाँ (Surgical methods): पुरुषों में शुक्रवाहिनी को अवरुद्ध करना (नसबंदी) या महिलाओं में डिंबवाहिनी को अवरुद्ध करना (ट्यूबेक्टमी), जिससे युग्मों का स्थानांतरण रुक जाता है।

मुख्य बिंदु:

• गर्भनिरोधक विधियों में यांत्रिक, रासायनिक, आई.यू.डी. और शल्यक्रिया शामिल हैं।
• यांत्रिक विधियाँ शुक्राणु और अंडे को मिलने से रोकती हैं।
• शल्यक्रिया विधियाँ स्थायी रूप से जनन मार्ग को अवरुद्ध करती हैं।

आम गलतियाँ:

• विधियों के नाम और उनके कार्य करने के तरीके में भ्रमित होना।
• शल्यक्रिया विधियों (नसबंदी) के सही वैज्ञानिक नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) विधियों को श्रेणियों में बाँटकर (1, 2, 3, 4) लिखें ताकि उत्तर स्पष्ट लगे।
b) कंडोम, कॉपर-T और गोलियों का उदाहरण अवश्य दें।

 

Question 21: एक-कोशिक एवं बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति क्या अंतर है?

Answer:

एक-कोशिक जीवों में जनन की अलैंगिक विधियाँ होती हैं (जैसे द्विखंडन या बहुखंडन), जिनमें पूरी कोशिका या उसका केंद्रक विभाजित होकर नई संतति कोशिकाओं का निर्माण करता है। इस प्रकार के जनन में केवल एक ही जनक की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, बहुकोशिक जीवों में जनन अधिक जटिल होता है जिसमें अलैंगिक के साथ-साथ लैंगिक जनन भी पाया जाता है। बहुकोशिक जीवों में नर तथा मादा दोनों प्रकार के जीवों या विशेष अंगों की आवश्यकता होती है, और उनके शरीर में जनन के लिए विशेष कोशिकाएँ तथा ऊतक होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• एक-कोशिक जीवों में पूरी कोशिका ही विभाजित होकर संतति बनाती है (एक जनक)।
• बहुकोशिक जीवों में विशेष जनन अंग और ऊतक होते हैं, और अक्सर लैंगिक जनन होता है।
• एक-कोशिक जीवों में जनन सरल और तेज होता है, बहुकोशिक जीवों में अधिक जटिल होता है।

आम गलतियाँ:

• दोनों प्रकार के जीवों में जनन के स्तर को समान समझ लेना।
• विशेष अंगों की उपस्थिति के बिंदु को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) दोनों जीवों के जनन में 'सरਲता' और 'जटिलता' का अंतर स्पष्ट करें।
b) उदाहरण के रूप में अमीबा (एक-कोशिक) और मनुष्य/पौधे (बहुकोशिक) का उल्लेख करें।

 

Question 22: जनन किसी स्पीशीज की समष्टि के स्थायित्व में किस प्रकार सहायक है?

Answer:

जनन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान नए जीवों की उत्पत्ति करते हैं। प्रकृति में प्रत्येक जीव की एक निश्चित जीवन अवधि होती है और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है। यदि जीव जनन न करें, तो उस स्पीशीज के सभी जीव मर जाएंगे और पृथ्वी से उस प्रजाति का नाम-निशान मिट जाएगा। जनन प्रक्रिया मृत जीवों की कमी को नए जीवों द्वारा पूरा करती है, जिससे जीवों की संख्या संतुलित बनी रहती है और किसी स्पीशीज की समष्टि (population) का स्थायित्व लंबे समय तक बना रहता है।

मुख्य बिंदु:

• जीवों की मृत्यु से होने वाली कमी को जनन द्वारा नए जीव पूरा करते हैं।
• यह प्रक्रिया किसी स्पीशीज को विलुप्त होने से बचाती है।
• जनन के कारण ही पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता और संतुलन कायम रहता है।

आम गलतियाँ:

• समष्टि के स्थायित्व और व्यक्तिगत जीवन के अंतर को न समझना।
• विलुप्त होने के खतरे को जनन से न जोड़ना।

Exam Tips:

a) 'निरंतरता' और 'विलुप्त होने से बचाव' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
b) उत्तर को तार्किक और सरल भाषा में लिखें।

 

Question 23: गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?

Answer:

गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:
1. अनचाहे गर्भ से बचने के लिए, ताकि परिवार का आकार नियंत्रित रखा जा सके।
2. दो बच्चों के जन्म के बीच उचित अंतराल (spacing) बनाए रखने के लिए, जिससे माता और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे।
3. एच.आई.वी. और अन्य यौन-संचारित रोगों (STDs) के संक्रमण से बचाव के लिए (विशेषकर कंडोम का उपयोग)।
4. वित्तीय और पारिवारिक कारणों से बच्चों की अच्छी परवरिश और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए।

मुख्य बिंदु:

• परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के लिए।
• बच्चों के जन्म में उचित अंतर रखने और स्वास्थ्य सुधार के लिए।
• यौन-संचारित रोगों से सुरक्षा पाने के लिए।

आम गलतियाँ:

• केवल जनसंख्या नियंत्रण लिखना और स्वास्थ्य या रोगों से बचाव को छोड़ देना।
• बिंदुओं के रूप में स्पष्ट उत्तर न लिखना।

Exam Tips:

a) कारणों को बिंदुओं (1, 2, 3, 4) में लिखें ताकि परीक्षक को आसानी हो।
b) स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और रोगों से बचाव - तीनों पहलुओं को शामिल करें।

 

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