Official NCERT Solutions for Class 10 Science: Chapter 06 नियंत्रण एवं समन्वय
Access comprehensive textbook solutions for Chapter 06 नियंत्रण एवं समन्वय using the official curriculum guides for Class 10 Science. Designed to align with the 2026-27 NCERT standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.
Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 06 नियंत्रण एवं समन्वय
Navigate directly to the solved Science textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
Question 1: प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है?
Answer:
प्रतिवर्ती क्रिया पर्यावरण में किसी घटना की अनुक्रिया के फलस्वरूप होने वाली एक अचानक और अनिच्छुक क्रिया है, जैसे किसी गर्म वस्तु पर हाथ पड़ते ही तुरंत पीछे हटा लेना, जिसका नियंत्रण मेरुरज्जु द्वारा किया जाता है। इसके विपरीत, टहलना एक ऐच्छिक क्रिया है जो हमारी सोच-समझ और इच्छा पर निर्भर करती है, तथा इसका नियंत्रण मस्तिष्क द्वारा किया जाता है। प्रतिवर्ती क्रिया हमारे शरीर की सुरक्षा के लिए तुरंत और स्वचालित रूप से होती है, जबकि टहलना एक सोची-समझी और नियंत्रित शारीरिक गतिविधि है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिवर्ती क्रिया अनैच्छिक होती है और इसका नियंत्रण मेरुरज्जु करता है।
• टहलना ऐच्छिक क्रिया है जो मस्तिष्क के नियंत्रण में होती है।
• प्रतिवर्ती क्रिया में समय बहुत कम लगता है और यह सुरक्षा के लिए होती है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिवर्ती क्रिया और ऐच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण केंद्र को मिला देना।
• दोनों के बीच के मुख्य अंतर (स्वचालित बनाम सोच-समझकर) को स्पष्ट न करना।
• उदाहरणों को गलत संदर्भ में समझाना।
Exam Tips:
a) दोनों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए नियंत्रण केंद्र (मेरुरज्जु बनाम मस्तिष्क) का उल्लेख जरूर करें।
b) प्रत्येक का एक स्पष्ट उदाहरण दें।
c) परिभाषा लिखते समय 'अचानक' और 'ऐच्छिक' शब्दों का सही प्रयोग करें।
Question 2: दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतरग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है?
Answer:
दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच के रिक्त स्थान को अंतरग्रथन या सिनेप्स कहते हैं। जब विद्युत आवेग तंत्रिकाक्ष के अंतिम सिरे तक पहुँचता है, तो वहाँ से कुछ रसायन (न्यूरोट्रांसमीटर) छोड़े जाते हैं। ये रसायन सिनेप्स को पार करके अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका तक पहुँचते हैं और वहाँ एक नया विद्युत आवेग उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार, सिनेप्स वह जंक्शन है जो एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक सूचना या संदेश को रासायनिक संकेत के रूप में पहुँचाने में सहायक होता है।
मुख्य बिंदु:
• सिनेप्स दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच का सूक्ष्म रिक्त स्थान है।
• यहाँ विद्युत आवेग रासायनिक संदेश में परिवर्तित होता है।
• यह सुनिश्चित करता है कि आवेग केवल एक ही दिशा में प्रवाहित हो।
आम गलतियाँ:
• सिनेप्स को सीधे शारीरिक जुड़ाव मान लेना जबकि यह एक रिक्त स्थान है।
• रासायनिक संकेतों की जगह केवल विद्युत आवेग का सीधे आगे बढ़ना मानना।
• द्रुमिका और तंत्रिकाक्ष की भूमिका को उलट देना।
Exam Tips:
a) सिनेप्स की परिभाषा में 'रासायनिक संदेश' शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) यह स्पष्ट करें कि आवेग हमेशा द्रुमिका से शुरू होकर तंत्रिकाक्ष तक जाता है और फिर अगले न्यूरॉन में जाता है।
c) इस प्रक्रिया को सरल चरणों में याद रखें।
Question 3: मस्तिष्क का कौन सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?
Answer:
हमारे शरीर की शारीरिक स्थिति और संतुलन बनाए रखने का मुख्य कार्य पश्चमस्तिष्क (Hindbrain) में स्थित अनुमस्तिष्क (Cerebellum) द्वारा किया जाता है। अनुमस्तिष्क हमारे शरीर की ऐच्छिक पेशियों की गति को नियंत्रित करता है और हमें सीधी मुद्रा में खड़े रहने, दौड़ने, साइकिल चलाने जैसी गतिविधियों के दौरान संतुलन प्रदान करता है। यदि अनुमस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो जाए, तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और सीधी रेखा में चलना कठिन हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• अनुमस्तिष्क पश्चमस्तिष्क का एक प्रमुख भाग है।
• यह शरीर के संतुलन और आसन का नियंत्रण करता है।
• ऐच्छिक पेशियों की गतियों की सटीकता इसी से निर्धारित होती है।
आम गलतियाँ:
• अनुमस्तिष्क (Cerebellum) और प्रमस्तिष्क (Cerebrum) के नामों में भ्रमित होना।
• संपूर्ण मस्तिष्क को संतुलन के लिए जिम्मेदार बताना बजाय विशिष्ट भाग अनुमस्तिष्क के।
• पश्चमस्तिष्क के अन्य कार्यों को इसमें मिला देना।
Exam Tips:
a) सही शब्द 'अनुमस्तिष्क' का ही प्रयोग करें, सामान्य 'मस्तिष्क' लिखने से अंक कट सकते हैं।
b) इसे शरीर के संतुलन और शारीरिक मुद्रा से जोड़कर याद रखें।
c) यह एक अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न के रूप में अक्सर पूछा जाता है।
Question 4: हम एक अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं?
Answer:
अगरबत्ती की गंध नाक में उपस्थित घ्राण रिसेप्टर्स (ग्राहियों) द्वारा ग्रहण की जाती है। ये घ्राणग्राही गंध के अणुओं को रासायनिक रूप से पहचानकर उन्हें विद्युत आवेग में बदल देते हैं। यह विद्युत आवेग संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क के अग्रभाग में स्थित घ्राण केंद्रों तक पहुँचाया जाता है। अग्रमस्तिष्क में पहले से मौजूद जानकारी और इस संदेश का विश्लेषण करके हम पहचान लेते हैं कि यह अगरबत्ती की गंध है।
मुख्य बिंदु:
• नाक में घ्राणग्राही (Olfactory receptors) पाए जाते हैं जो गंध पहचानते हैं।
• सूचना विद्युत आवेग के रूप में अग्रमस्तिष्क तक जाती है।
• मस्तिष्क गंध की पहचान उसकी पूर्व स्मृति के आधार पर करता है।
आम गलतियाँ:
• केवल नाक का नाम लिखकर तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क की भूमिका छोड़ देना।
• विद्युत आवेग और रासायनिक संकेतों के प्रवाह को गलत क्रम में लिखना।
• अग्रमस्तिष्क की जगह किसी अन्य भाग का उल्लेख करना।
Exam Tips:
a) ग्राही (Receptors), विद्युत आवेग और मस्तिष्क का विश्लेषण—इन तीनों चरणों को स्पष्ट लिखें।
b) घ्राणग्राही (Olfactory receptors) शब्द का वैज्ञानिक रूप में प्रयोग करें।
c) उत्तर को चरणबद्ध तरीके से समझाने का प्रयास करें।
Question 5: प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?
Answer:
प्रतिवर्ती क्रियाओं के संचालन में प्रत्यक्ष रूप से मस्तिष्क की कोई मुख्य भूमिका नहीं होती है, क्योंकि ये क्रियाएँ अत्यधिक तेज गति से होने के लिए सीधे मेरुरज्जु (Spinal cord) द्वारा नियंत्रित की जाती हैं। हालांकि, प्रतिवर्ती क्रिया पूरी होने के तुरंत बाद इसकी सूचना मस्तिष्क तक पहुँच जाती है, जिससे मस्तिष्क को इस घटना की जानकारी हो जाती है और वह भविष्य के लिए इसे याद रखता है। इस प्रकार, प्रतिवर्ती क्रिया का तात्कालिक नियंत्रण मेरुरज्जु करता है, जबकि मस्तिष्क केवल संसूचन और संग्रहण का कार्य करता है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिवर्ती क्रिया का तात्कालिक नियंत्रण मेरुरज्जु द्वारा होता है, मस्तिष्क द्वारा नहीं।
• मस्तिष्क को केवल क्रिया की सूचना बाद में प्राप्त होती है।
• यह व्यवस्था शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने और क्षति से बचाने के लिए विकसित हुई है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क ही आदेश देता है।
• मेरुरज्जु की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज करना।
• मस्तिष्क की कोई भी भूमिका न होना मान लेना (जबकि सूचना वहाँ पहुँचती है)।
Exam Tips:
a) स्पष्ट रूप से लिखें कि तात्कालिक नियंत्रण मेरुरज्जु का होता है।
b) मस्तिष्क की भूमिका को केवल 'सूचना प्राप्त करने' तक सीमित रखें।
c) यह प्रश्न अवधारणा स्पष्ट करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 1: पादप हॉर्मोन क्या हैं?
Answer:
पादप हॉर्मोन वे रासायनिक पदार्थ या कार्बनिक यौगिक हैं जो पौधों के विभिन्न भागों द्वारा संश्लेषित किए जाते हैं और पौधों में वृद्धि, विकास तथा पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया का समन्वय करते हैं। ये हॉर्मोन पौधों की कोशिकाओं तक पहुँचकर उनकी वृद्धि को प्रेरित या संदमित करते हैं। प्रमुख पादप हॉर्मोन ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकैकिनन और एब्सिसिक अम्ल हैं, जो पौधे के अलग-अलग जैविक कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• पादप हॉर्मोन पौधों में समन्वय और नियंत्रण का कार्य करते हैं।
• इन्हें फाइटोहॉर्मोन भी कहा जाता है।
• ये वृद्धि को बढ़ाने या रोकने दोनों में सहायक होते हैं।
आम गलतियाँ:
• पादप हॉर्मोन और जंतु हॉर्मोन की क्रियाविधि को एक समान समझना।
• केवल एक ही हॉर्मोन का नाम लिखकर परिभाषा पूरी मान लेना।
• रासायनिक प्रकृति का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) परिभाषा के साथ कम से कम दो-तीन पादप हॉर्मोन के नाम जरूर लिखें।
b) इन्हें 'समन्वयकारी रसायन' के रूप में परिभाषित करें।
c) पादप और जंतु हॉर्मोन का अंतर स्पष्ट होना चाहिए।
Question 2: छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?
Answer:
छुई-मुई (मिमोसा पुडिका) की पत्तियों की गति स्पर्श के प्रति अनुक्रिया है, जो किसी विशेष दिशा में नहीं होती और इसमें पादप कोशिकाओं में पानी की मात्रा (आसस्सरणीय दाब) में परिवर्तन के कारण तुरंत सिकुड़न आती है। इसके विपरीत, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति एक अनुवर्ती गति (फोटोट्रोफिज्म) है, जो धीमी गति से होती है और प्रकाश की दिशा में ही होती है, तथा यह कोशिकाओं की वृद्धि के कारण होती है। छुई-मुई में विद्युत-रासायनिक संकेतों द्वारा तीव्र गति होती है, जबकि प्ररोह की गति वृद्धि आधारित और धीमी होती है।
मुख्य बिंदु:
• छुई-मुई की गति स्पर्श से होती है और यह दिशाहीन तथा तीव्र होती है।
• प्ररोह की गति प्रकाश की दिशा में होती है और यह वृद्धि के कारण धीमी होती है।
• पहली गति जल की मात्रा बदलने से होती है, दूसरी कोशिका विभाजन और वृद्धि से।
आम गलतियाँ:
• दोनों गतियों को वृद्धि आधारित मान लेना।
• दिशा के महत्व को न समझाना।
• पानी की भूमिका (कोशिका स्फीति) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) दोनों गतियों में अंतर स्पष्ट करने के लिए 'गति की दिशा', 'गति का कारण (जल बनाम वृद्धि)' और 'गति की तीव्रता' के आधार पर तुलना करें।
b) छुई-मुई का उदाहरण तीव्र और दिशाहीन गति के लिए दें।
c) प्ररोह का उदाहरण वृद्धि आधारित और दिशानिर्दिष्ट गति के लिए दें।
Question 3: एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
Answer:
ऑक्सिन (Auxin) एक प्रमुख पादप हॉर्मोन है जो पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है। यह हॉर्मोन मुख्य रूप से प्ररोह के अग्रभाग में संश्लेषित होता है और कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि करने में सहायक होता है। इसके अलावा जिबरेलिन और साइटोकैकिनन भी पादप वृद्धि को बढ़ाते हैं, जबकि एब्सिसिक अम्ल वृद्धि को रोकता है।
मुख्य बिंदु:
• ऑक्सिन पौधे की लंबाई और तने की वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाता है।
• यह प्रकाश की अनुपस्थिति वाले भाग में अधिक सांद्रित होकर प्ररोह को मोड़ने में मदद करता है।
• जिबरेलिन तने की वृद्धि और साइटोकैकिनन कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
आम गलतियाँ:
• वृद्धि संदमक हॉर्मोन (जैसे एब्सिसिक अम्ल) का नाम लिख देना।
• हॉर्मोन का कार्य स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) ऑक्सिन या जिबरेलिन में से किसी एक का नाम लिखकर उसका एक मुख्य कार्य भी बताएँ।
b) प्रश्न बहुत संक्षिप्त है इसलिए सटीक उत्तर दें।
c) पादप हॉर्मोन के नाम स्पेलिंग सहित सही लिखें।
Question 4: किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?
Answer:
जब कोई प्रतान (tendril) किसी सहारे के संपर्क में आता है, तो संपर्क वाले भाग में ऑक्सिन हॉर्मोन विपरीत दिशा में यानी बिना संपर्क वाले भाग की ओर विसरत (transfer) हो जाता है। इससे सहारे से दूर वाले भाग में कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि तेजी से होती है, जबकि संपर्क वाले भाग में वृद्धि धीमी हो जाती है। इस असमान वृद्धि के कारण प्रतान सहारे के चारों ओर मुड़ जाता है और वस्तु को कसकर जकड़ लेता है।
मुख्य बिंदु:
• ऑक्सिन का असमान वितरण प्रतान की गति का मुख्य कारण है।
• संपर्क बिंदु के विपरीत दिशा में ऑक्सिन की सांद्रता बढ़ जाती है।
• इससे दूर वाली कोशिकाओं में तेजी से वृद्धि होती है जिससे प्रतान मुड़ जाता है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि ऑक्सिन संपर्क वाले भाग में बढ़ता है जबकि वह विपरीत भाग में जाता है।
• वृद्धि की असमानता को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) 'असमान वृद्धि' और 'ऑक्सिन का विसरण' शब्दों का प्रयोग उत्तर में जरूर करें।
b) प्रतान की इस क्रिया को डायग्राम या सरल शब्दों में समझें।
c) यह अनुवर्ती गति का एक बेहतरीन उदाहरण है।
Question 5: जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।
Answer:
जलानुवर्तन दर्शाने के लिए, एक गमले या ट्रे में मिट्टी भरकर उसमें कुछ अंकुरित बीज लगा दें। गमले के एक तरफ पानी से भरा बर्तन या मिट्टी में नमी बनाए रखने की व्यवस्था करें, जबकि दूसरी तरफ की मिट्टी सूखी रखें। कुछ दिनों बाद जब आप पौधों को उखाड़कर देखेंगे, तो पाएँगे कि पौधों की जड़ें पानी या नमी वाले स्रोत की ओर मुड़ गई हैं और शुष्क भाग से दूर जा रही हैं। इससे सिद्ध होता है कि जड़ें धनात्मक जलानुवर्तन दर्शाती हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रयोग में एक तरफ नमी और दूसरी तरफ सूखी मिट्टी होनी चाहिए।
• अंकुरित बीज की जड़ें पानी की दिशा में वृद्धि करती हैं।
• यह प्रयोग प्रमाणित करता है कि जड़ें जल के प्रति धनात्मक अनुक्रिया करती हैं।
आम गलतियाँ:
• प्रयोग की सामग्री या चरणों को स्पष्ट रूप से न लिखना।
• निष्कर्ष (धनात्मक जलानुवर्तन) को स्पष्ट रूप से न बताना।
Exam Tips:
a) प्रयोग लिखते समय 'आवश्यक सामग्री', 'विधि' और 'प्रेक्षण व निष्कर्ष' के रूप में लिखें।
b) चित्र के माध्यम से भी इसे दर्शाने का अभ्यास करें।
c) जड़ें पानी की ओर मुड़ती हैं—इस बात को मुख्य रूप से रेखांकित करें।
Question 1: जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
Answer:
जंतुओं में रासायनिक समन्वय अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine glands) द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स के माध्यम से होता है। ये ग्रंथियाँ अपने हॉर्मोन्स सीधे रक्त में स्रावित करती हैं, जो पूरे शरीर में प्रवाहित होकर विशिष्ट लक्ष्य अंगों (target organs) तक पहुँचते हैं। उदाहरण के लिए, अधिवृक्क ग्रंथि से स्रावित एड्रिनलीन हॉर्मोन आपातकालीन स्थिति में शरीर को तैयार करता है, और थायरॉक्सिन हॉर्मोन शरीर की चयापचय क्रियाओं व विकास को नियंत्रित करता है। इस प्रकार रासायनिक समन्वय तंत्रिका तंत्र के साथ मिलकर शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
मुख्य बिंदु:
• जंतुओं में रासायनिक समन्वय अंतःस्रावी ग्रंथियों और हॉर्मोन द्वारा होता है।
• हॉर्मोन सीधे रक्तधारा में छोड़े जाते हैं।
• यह तंत्रिका तंत्र की तुलना में थोड़ा धीमा लेकिन लंबे समय तक प्रभाव रखने वाला तंत्र है।
आम गलतियाँ:
• रासायनिक समन्वय को केवल तंत्रिका तंत्र से जोड़ देना।
• वाहिकाहीन ग्रंथियों (अंतःस्रावी) और हॉर्मोन की भूमिका को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और रक्त संचार—इन दोनों का उल्लेख उत्तर में जरूर करें।
b) उदाहरण के लिए एड्रिनलीन या थायरॉक्सिन का नाम दें।
c) यह तंत्रिका तंत्र के पूरक के रूप में कार्य करता है।
Question 2: आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
Answer:
आयोडीन हमारे शरीर में थायराइड ग्रंथि द्वारा थायरॉक्सिन हॉर्मोन के संश्लेषण के लिए अनिवार्य खनिज है। थायरॉक्सिन हॉर्मोन हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के चयापचय (metabolism) को नियंत्रित करता है जो शारीरिक वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। यदि हमारे आहार में आयोडीन की कमी हो जाए, तो थायरॉक्सिन का निर्माण कम होता है जिससे थायराइड ग्रंथि फूल जाती है और 'घेंघा' (Goitre) नामक रोग हो जाता है। इसलिए आयोडीन युक्त नमक खाने की सलाह दी जाती है।
मुख्य बिंदु:
• आयोडीन थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनाने के लिए आवश्यक है।
• इसकी कमी से गॉयटर या घेंघा रोग हो सकता है।
• यह शरीर की सामान्य वृद्धि और चयापचय को बनाए रखता है।
आम गलतियाँ:
• केवल घेंघा रोग का नाम लिखकर चयापचय और थायरॉक्सिन का उल्लेख न करना।
• थायराइड ग्रंथि और आयोडीन के संबंध को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) थायरॉक्सिन हॉर्मोन और घेंघा रोग दोनों शब्दों का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
b) यह एक बहुत सामान्य और महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रश्न है।
c) उत्तर को वैज्ञानिक कारणों के साथ संक्षिप्त रखें।
Question 3: जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होता है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
Answer:
जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होता है, तो यह शरीर को आपातकालीन या तनावपूर्ण स्थिति (जैसे डर या गुस्से) का सामना करने के लिए तैयार करता है। इसके प्रभाव से हृदय की धड़कन तेज हो जाती है ताकि पेशियों को अधिक ऑक्सीजन मिल सके, पाचन तंत्र और त्वचा में रुधिर का प्रवाह कम होकर कंकाल पेशियों की ओर बढ़ जाता है, तथा श्वसन दर बढ़ जाती है क्योंकि पसलियों और डायाफ्राम की पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। ये सभी परिवर्तन मिलकर शरीर को तेजी से निर्णय लेने और लड़ने या भागने की शक्ति प्रदान करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• एड्रीनलीन को आपातकालीन हॉर्मोन कहा जाता है।
• हृदय की धड़कन और श्वसन दर बढ़ जाती है।
• ऊर्जा का पुनर्वितरण पेशियों की ओर होता है।
आम गलतियाँ:
• केवल दिल की धड़कन बढ़ना लिखकर अन्य शारीरिक परिवर्तनों (पाचन, श्वसन आदि) को छोड़ देना।
• हॉर्मोन का नाम गलत लिखना।
Exam Tips:
a) शारीरिक परिवर्तनों को बिंदुओं में या स्पष्ट वाक्यों में लिखें (हृदय गति, श्वसन दर, रक्त प्रवाह)।
b) इसे 'संकटकालीन स्थिति' से जोड़कर समझाएँ।
c) यह प्रश्न दीर्घ उत्तरीय या लघु उत्तरीय दोनों में आ सकता है।
Question 4: मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?
Answer:
मधुमेह (Diabetes) के रोगियों में अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा इंसुलिन हॉर्मोन का पर्याप्त मात्रा में स्रावण नहीं होता है, या शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाती हैं। इंसुलिन रुधिर में शर्करा (glucose) के स्तर को नियंत्रित करने का कार्य करता है। जब इंसुलिन की कमी होती है, तो रुधिर में शर्करा का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है जो शरीर के विभिन्न अंगों के लिए हानिकारक होता है। इस शर्करा स्तर को नियंत्रित करने और सामान्य बनाए रखने के लिए ऐसे रोगियों को बाहर से इंसुलिन का इंजेक्शन दिया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• इंसुलिन रुधिर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
• मधुमेह रोगियों में इंसुलिन का पर्याप्त उत्पादन नहीं होता।
• इंजेक्शन द्वारा शर्करा की मात्रा को संतुलित रखा जाता है।
आम गलतियाँ:
• इंसुलिन बनाने वाली ग्रंथि (अग्न्याशय) का नाम न लिखना।
• शर्करा नियंत्रण के स्थान पर केवल बीमारी का नाम लिख देना।
Exam Tips:
a) अग्न्याशय और रुधिर शर्करा—इन दोनों मुख्य बिंदुओं को उत्तर में शामिल करें।
b) कारण और निवारण दोनों स्पष्ट रूप से लिखें।
c) यह दैनिक जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण जैविक प्रश्न है।
Question 1: निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है?
(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकैकिनन
Answer:
(d) साइटोकैकिनन।
स्पष्टीकरण: दिए गए विकल्पों में इंसुलिन, थायरॉक्सिन और एस्ट्रोजन जंतु हॉर्मोन हैं, जबकि साइटोकैकिनन एक पादप हॉर्मोन है जो मुख्य रूप से पौधों में कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
मुख्य बिंदु:
• साइटोकैकिनन पादप हॉर्मोन है जो कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है।
• अन्य तीनों विकल्प जंतुओं से संबंधित हॉर्मोन हैं।
• यह फलों और बीजों में उच्च सांद्रता में पाया जाता है।
आम गलतियाँ:
• बिना सोचे-समझे किसी भी हॉर्मोन पर टिक लगा देना।
• पादप और जंतु हॉर्मोन की सूची में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) पादप हॉर्मोन (ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकैकिनन, एब्सिसिक अम्ल) की सूची याद रखें।
b) जंतु हॉर्मोन के नाम अलग से पहचानना सीखें।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प को ध्यान से चुनें।
Question 2: दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं—
(a) द्रुमिका
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) आवेग
Answer:
(b) सिनेप्स।
स्पष्टीकरण: दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच के सूक्ष्म रिक्त स्थान को सिनेप्स (अंतरग्रथन) कहते हैं, जहाँ से रासायनिक संदेशों द्वारा सूचना एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक प्रवाहित होती है।
मुख्य बिंदु:
• सिनेप्स तंत्रिका तंत्र का वह जंक्शन है जहाँ दो न्यूरॉन मिलते हैं।
• द्रुमिका सूचना ग्रहण करती है और एक्सॉन आगे भेजता है।
• आवेग विद्युत संकेत है।
आम गलतियाँ:
• द्रुमिका और सिनेप्स के अर्थ को मिला देना।
• एक्सॉन को रिक्त स्थान समझ लेना।
Exam Tips:
a) न्यूरॉन के विभिन्न भागों के नाम और उनके कार्य स्पष्ट याद रखें।
b) रिक्त स्थान के लिए हमेशा 'सिनेप्स' शब्द चुनें।
c) यह बोर्ड परीक्षा का एक अत्यंत पसंदीदा प्रश्न है।
Question 3: मस्तिष्क उत्तरदायी है—
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपरोक्त सभी
Answer:
(d) उपरोक्त सभी।
स्पष्टीकरण: मस्तिष्क हमारे शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र है। प्रमस्तिष्क सोचने और याद रखने के लिए, मेडुला हृदय स्पंदन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं के लिए, और अनुमस्तिष्क शरीर का संतुलन बनाने के लिए उत्तरदायी है। इसलिए ये सभी कार्य मस्तिष्क द्वारा ही नियंत्रित होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• मस्तिष्क के विभिन्न भाग शरीर के अलग-अलग कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
• सोचना, हृदय स्पंदन और संतुलन—सभी मस्तिष्क के नियंत्रण में हैं।
• अतः 'उपरोक्त सभी' सही विकल्प है।
आम गलतियाँ:
• केवल सोचने वाले विकल्प पर टिक कर देना और बाकी कार्यों को भूल जाना।
• अनैच्छिक क्रियाओं को मस्तिष्क से बाहर मानना।
Exam Tips:
a) मस्तिष्क के तीनों मुख्य भागों (अग्र, मध्य, पश्च) के कार्य याद रखें।
b) प्रश्न में दिए गए तीनों कार्य मस्तिष्क के ही अंग करते हैं।
c) बहुविकल्पीय प्रश्न में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
Question 4: हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
Answer:
हमारे शरीर में ग्राही (receptors) ज्ञानेंद्रियों में स्थित विशेष कोशिकाएँ होती हैं जो पर्यावरण से सभी प्रकार की सूचनाओं (जैसे प्रकाश, गंध, स्वाद, स्पर्श, ऊष्मा) को ग्रहण करती हैं और उन्हें विद्युत आवेग में बदलकर मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं। यदि ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों, तो पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों की सूचना हमारे मस्तिष्क तक समय पर नहीं पहुँच पाएगी। परिणामस्वरूप, हम ठंड, गर्मी, दर्द या किसी खतरे का अनुभव नहीं कर पाएंगे, जिससे हमारा शरीर किसी दुर्घटना या नुकसान से अपनी रक्षा नहीं कर पाएगा और शरीर बाहरी संवेदनाओं के प्रति संवेदनहीन हो जाएगा।
मुख्य बिंदु:
• ग्राही पर्यावरण से संवेदनाओं को ग्रहण करने का कार्य करते हैं।
• ये ज्ञानेंद्रियों (जैसे आँख, कान, नाक, त्वचा, जीभ) में पाए जाते हैं।
• इनके खराब होने पर मस्तिष्क को सूचना नहीं मिलेगी और शरीर खतरे से सुरक्षित नहीं रह पाएगा।
आम गलतियाँ:
• केवलग्राहियों की परिभाषा लिखकर समस्या वाले भाग को छोड़ देना।
• यह न समझा पाना कि ग्राही के बिना शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
Exam Tips:
a) उत्तर के दोनों भागों (कार्य और समस्या) का अलग-अलग और स्पष्ट उत्तर दें।
b) 'संवेदनहीनता' और 'खतरे से सुरक्षा न होना' जैसे बिंदुओं का उल्लेख करें।
c) ज्ञानेंद्रियों के उदाहरण के साथ उत्तर को पूर्ण बनाएँ।
Question 5: एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer:
आकृति का विवरण: यह एक न्यूरॉन का नामांकित आरेख है जिसमें ताराकार कोशिकाकाय, उससे निकली शाखाओं जैसी द्रुमिकाएँ, एक लंबा तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) जिस पर मियेलिन आवरण है, और अंत में तंत्रिका का अंतिम सिरा दर्शाया गया है।
एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं: कोशिकाकाय (Cyton), द्रुमिका (Dendrites), और तंत्रिकाक्ष (Axon)। द्रुमिका पर्यावरण से सूचनाएँ या संकेत प्राप्त करती हैं, कोशिकाकाय उन संकेतों को विद्युत आवेग में बदलती है, और तंत्रिकाक्ष उस विद्युत आवेग को अपनी लंबाई से होते हुए अगले न्यूरॉन या पेशी तक पहुँचाता है। इस प्रकार न्यूरॉन पूरे शरीर में सूचनाओं के संप्रेषण और समन्वय का कार्य करता है।
मुख्य बिंदु:
• न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई है।
• इसके मुख्य तीन भाग: द्रुमिका, कोशिकाकाय और तंत्रिकाक्ष हैं।
• यह शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक विद्युत रासायनिक आवेगों को ले जाता है।
आम गलतियाँ:
• चित्र बनाते समय नामांकन (द्रुमिका, एक्सॉन, केंद्रक) गलत करना।
• कार्यों का वर्णन करते समय संकेतों के प्रवाह की दिशा (द्रुमिका से एक्सॉन) भूल जाना।
Exam Tips:
a) नामांकित चित्र बनाने का नियमित अभ्यास करें क्योंकि यह प्रश्न चित्र के साथ पूछा जाता है।
b) कार्यों को न्यूरॉन के भागों के अनुसार अलग-अलग बिंदुवार लिखें।
c) आवेग हमेशा द्रुमिका से प्रवेश करता है और एक्सॉन से बाहर जाता है—यह नियम न भूलें।
Question 6: पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
Answer:
पादपों में प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) ऑक्सिन हॉर्मोन की सहायता से होता है। जब पौधे पर एक तरफ से प्रकाश पड़ता है, तो प्ररोह के अग्रभाग में मौजूद ऑक्सिन हॉर्मोन प्रकाश से दूर वाली छायांकित दिशा में विसरत हो जाता है। छाया वाले भाग में ऑक्सिन की सांद्रता अधिक होने के कारण वहाँ की कोशिकाएँ प्रकाश वाले भाग की तुलना में अधिक तेजी से लंबी होती हैं। इस असमान वृद्धि के कारण पौधे का प्ररोह प्रकाश की दिशा में मुड़ जाता है, जिसे धनात्मक प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रकाशानुवर्तन में ऑक्सिन हॉर्मोन मुख्य भूमिका निभाता है।
• ऑक्सिन हमेशा प्रकाश की विपरीत दिशा (छाया वाले भाग) में संकेंद्रित होता है।
• छाया वाले भाग में तेज वृद्धि होने से तना प्रकाश की ओर झुक जाता है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि ऑक्सिन प्रकाश वाली तरफ इकट्ठा होता है।
• असमान वृद्धि के सिद्धांत को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) 'ऑक्सिन का छाया वाले भाग में संकेंद्रण' और 'असमान वृद्धि' शब्दों का प्रयोग जरूर करें।
b) इसे प्रकाश की ओर प्ररोह की गति का वैज्ञानिक कारण मानकर याद रखें।
c) चित्र बनाकर समझाने से अंक अच्छे मिलते हैं।
Question 7: मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों के आने में व्यवधान होगा?
Answer:
मेरुरज्जु हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है जो प्रतिवर्ती क्रियाओं को नियंत्रित करता है और शरीर के विभिन्न अंगों से आने-जाने वाली संवेदी तथा प्रेरक सूचनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाता है। यदि मेरुरज्जु में आघात (चोट) लग जाए, तो ग्राही अंगों से आने वाली संवेदी सूचनाएँ मस्तिष्क तक नहीं पहुँच पाएँगी, और मस्तिष्क से आने वाले प्रेरक निर्देश मांसपेशियों तक नहीं जा सकेंगे। इसके परिणामस्वरूप प्रतिवर्ती क्रियाएँ बाधित हो जाएगी, मस्तिष्क का अंगों पर नियंत्रण टूट जाएगा, और लकवा (Paralysis) जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
मुख्य बिंदु:
• मेरुरज्जु संवेदी और प्रेरक संकेतों के आदान-प्रदान का मार्ग है।
• आघात होने पर मस्तिष्क और अंगों के बीच संपर्क टूट जाता है।
• प्रतिवर्ती क्रियाएँ और संदेशों का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• केवल मस्तिष्क के आघात से इसकी तुलना करना।
• संवेदी और प्रेरक संकेतों के प्रवाह में व्यवधान को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) संकेत के प्रवाह (अंग से मस्तिष्क और मस्तिष्क से अंग) के रुकने की बात स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रतिवर्ती क्रियाओं के बंद होने का उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तर को सरल और वैज्ञानिक भाषा में लिखें।
Question 8: पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?
Answer:
पादपों में किसी भी प्रकार का तंत्रिका तंत्र नहीं होता है, इसलिए उनमें समन्वय पूरी तरह से रासायनिक पदार्थों यानी पादप हॉर्मोन्स (फाइटोहॉर्मोन्स) द्वारा होता है। पौधे अपने विभिन्न भागों में विशिष्ट रासायनिक यौगिकों का संश्लेषण करते हैं जो वृद्धि, विकास और पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन और जिबरेलिन वृद्धि को बढ़ाते हैं, साइटोकैकिनन कोशिका विभाजन को प्रेरित करते हैं, और एब्सिसिक अम्ल वृद्धि को संदमित (रोकने) का कार्य करता है। इस प्रकार रासायनिक संकेतों के माध्यम से पौधे विभिन्न उद्दीपनों के प्रति समन्वित रूप से प्रतिक्रिया करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• पादपों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, केवल रासायनिक समन्वय होता है।
• यह समन्वय पादप हॉर्मोन्स (ऑक्सिन, जिबरेलिन आदि) द्वारा किया जाता है।
• ये हॉर्मोन पौधों की वृद्धि को बढ़ाते या घटाते हैं।
आम गलतियाँ:
• पादपों में भी जंतुओं की तरह तंत्रिका तंत्र होना मान लेना।
• केवल एक हॉर्मोन का नाम लिखकर उत्तर समाप्त कर देना।
Exam Tips:
a) 'तंत्रिका तंत्र का अभाव' और 'पादप हॉर्मोन्स की भूमिका' दोनों बातें स्पष्ट करें।
b) वृद्धि को प्रेरित और संदमित करने वाले दोनों प्रकार के हॉर्मोन्स के नाम दें।
c) उत्तर संक्षिप्त और बिंदुवार होना चाहिए।
Question 9: एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र की क्या आवश्यकता है?
Answer:
किसी भी बहुकोशिकीय जीव के शरीर में विभिन्न अंग और अंगतंत्र अलग-अलग कार्य करते हैं, जिन्हें सुचारू रूप से चलाने के लिए नियंत्रण और समन्वय की आवश्यकता होती है। जीव को जीवित रहने के लिए पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है और उनके अनुसार उचित प्रतिक्रिया देनी होती है। इसके अलावा, शरीर के भीतर होने वाली विभिन्न जैविक क्रियाओं (जैसे पाचन, श्वसन, रुधिर परिसंचरण) के बीच आपसी तालमेल बनाए रखना भी आवश्यक है। यदि नियंत्रण और समन्वय न हो, तो शरीर के अंग स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे जिससे जीवन संभव नहीं हो पाएगा।
मुख्य बिंदु:
• शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों में तालमेल बनाए रखने के लिए।
• पर्यावरण के परिवर्तनों और खतरों के प्रति सही अनुक्रिया करने के लिए।
• सभी जैविक प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए।
आम गलतियाँ:
• केवल बाहरी पर्यावरण को कारण बताना और आंतरिक अंगों के तालमेल को भूल जाना।
• उत्तर को बहुत अधिक संक्षिप्त कर देना।
Exam Tips:
a) आंतरिक समन्वय और बाहरी पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया—दोनों पक्षों को लिखें।
b) बहुकोशिकीय जीवों के संदर्भ में इस आवश्यकता को समझाएँ।
c) यह वैचारिक प्रश्न है, इसे अपने शब्दों में अच्छे से लिख सकते हैं।
Question 10: अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
Answer:
अनैच्छिक क्रियाएँ वे जैविक क्रियाएँ हैं जिन पर हमारा सीधा नियंत्रण नहीं होता है और जो स्वतः होती रहती हैं, जैसे दिल की धड़कन, रक्तचाप, उल्टी आना आदि, और इनका नियंत्रण मुख्य रूप से मस्तिष्क (मध्य और पश्चमस्तिष्क) द्वारा किया जाता है। इसके विपरीत, प्रतिवर्ती क्रियाएँ पर्यावरण में किसी अचानक उद्दीपन के प्रति होने वाली तीव्र, स्वचालित और अनिच्छुक अनुक्रियाएँ हैं, जैसे गर्म वस्तु से हाथ हटाना, और इनका मुख्य नियंत्रण मेरुरज्जु द्वारा किया जाता है। संक्षेप में कहें तो सभी प्रतिवर्ती क्रियाएँ अनैच्छिक होती हैं, लेकिन सभी अनैच्छिक क्रियाएँ प्रतिवर्ती नहीं होतीं और उनके नियंत्रण केंद्र भी भिन्न होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण मस्तिष्क (मेडुला आदि) द्वारा होता है।
• प्रतिवर्ती क्रियाओं का तात्कालिक नियंत्रण मेरुरज्जु द्वारा होता है।
• प्रतिवर्ती क्रियाएँ अचानक होने वाली सुरक्षात्मक अनुक्रियाएँ हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों को एक ही मान लेना क्योंकि दोनों पर हमारी इच्छा का नियंत्रण नहीं होता।
• नियंत्रण केंद्रों (मस्तिष्क बनाम मेरुरज्जु) का अंतर स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) दोनों के नियंत्रण केंद्र (मस्तिष्क और मेरुरज्जु) को मुख्य अंतर के रूप में प्रस्तुत करें।
b) दोनों के एक-एक स्पष्ट उदाहरण दें (हृदय की धड़कन बनाम हाथ हटाना)।
c) यह तुलनात्मक प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 11: जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (contrast) कीजिए।
Answer:
जंतुओं में नियंत्रण और समन्वय तंत्रिका तंत्र और हॉर्मोन (अंतःस्रावी) तंत्र दोनों के माध्यम से होता है। तंत्रिका तंत्र में सूचनाओं का संचरण विद्युत आवेगों के रूप में तंत्रिका तंतुओं द्वारा बहुत तेजी से होता है, जिसका प्रभाव अल्पकालिक होता है। इसके विपरीत, हॉर्मोन तंत्र में सूचनाओं का संचरण रासायनिक संदेशवाहकों (हॉर्मोन) के रूप में रक्त के माध्यम से अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है, लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। तंत्रिका तंत्र केवल उन कोशिकाओं तक पहुँचता है जो तंत्रिकाओं से जुड़ी हैं, जबकि हॉर्मोन रुधिर के माध्यम से शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँच सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• तंत्रिका तंत्र विद्युत आवेगों का उपयोग करता है जो अति तीव्र होते हैं।
• हॉर्मोन तंत्र रासायनिक संदेशों का उपयोग करता है जो धीमे लेकिन दीर्घकालिक होते हैं।
• तंत्रिका तंत्र का प्रभाव अल्पकालिक और हॉर्मोन का प्रभाव दीर्घकालिक होता है।
आम गलतियाँ:
• केवल अंतर लिखना और दोनों की समानता (समन्वय का कार्य) को भूल जाना।
• गति और प्रभाव की अवधि के अंतर को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर को बिंदुओं या तालिका के रूप में (वेग, माध्यम, गति, प्रभाव की अवधि) लिखें।
b) विद्युत आवेग बनाम रासायनिक संदेश—यह मुख्य व्यतिरेक है।
c) दोनों तंत्र मिलकर जंतु शरीर का पूर्ण नियंत्रण करते हैं—यह निष्कर्ष जरूर दें।
Question 12: छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या अंतर है?
Answer:
छुई-मुई पादप में होने वाली गति स्पर्श के प्रति अनुक्रिया है, जिसमें कोई विशेष तंत्रिका ऊतक या पेशी नहीं होती है। इसमें पौधे की कोशिकाएँ अपनी कोशिकाओं के अंदर पानी (आसस्सरणीय दाब) की मात्रा को बदलकर अपनी आकृति बदलती हैं और विद्युत-रासायनिक संकेतों को एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक पहुँचाती हैं। इसके विपरीत, हमारी टाँग में होने वाली गति एक ऐच्छिक गति है जिसमें जंतुओं की पेशी कोशिकाएँ विशेष प्रोटीनों की सहायता से अपनी आकृति और लंबाई बदलकर गति उत्पन्न करती हैं, और इसके लिए मस्तिष्क तथा तंत्रिका तंत्र प्रत्यक्ष रूप से संदेश भेजते हैं।
मुख्य बिंदु:
• छुई-मुई की गति पानी की मात्रा (आसस्सरणीय दाब) में परिवर्तन से होती है।
• टाँग की गति पेशीय कोशिकाओं और विशेष प्रोटीनों के संकुचन से होती है।
• पादप में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, जबकि जंतुओं में तंत्रिका और पेशी तंत्र दोनों कार्य करते हैं।
आम गलतियाँ:
• पौधों में भी मांसपेशियों जैसा तंत्र होना मान लेना।
• गति के मूल कारण (जल परिवर्तन बनाम पेशीय संकुचन) को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) पादप गति (जल आधारित/बिना पेशी) और जंतु गति (पेशी और तंत्रिका आधारित) का तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करें।
b) छुई-मुई और मानव टाँग के उदाहरण से उत्तर को प्रभावी बनाएँ।
c) यह अध्याय का अंतिम और बहुत ही सुंदर वैचारिक प्रश्न है।
Free study material for Science
Free NCERT Textbook Explanations: Class 10 Science Chapter 06 नियंत्रण एवं समन्वय
Chapter Exercise Answers for Class 10 Science
Access structured NCERT textbook solutions for Chapter 06 नियंत्रण एवं समन्वय. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 10 Science, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.
Detailed Answer Guides for Chapter 06 नियंत्रण एवं समन्वय
Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 10 Science text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.
Complete Preparation Kit for Class 10 Exams
Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 10 Science.
FAQs
The complete and updated NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 06 Control and Coordination (नियंत्रण एवं समन्वय) in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Science are as per latest NCERT curriculum.
Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 06 Control and Coordination (नियंत्रण एवं समन्वय) in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 06 Control and Coordination (नियंत्रण एवं समन्वय) in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 10 Science. You can access NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 06 Control and Coordination (नियंत्रण एवं समन्वय) in Hindi in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 06 Control and Coordination (नियंत्रण एवं समन्वय) in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.