NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 05 Life Processes (जैव प्रक्रम) in Hindi

NCERT Solutions for Class 10 Science: Chapter 05 जैव प्रक्रम

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Practice Class 10 Science Solutions: Chapter 05 जैव प्रक्रम

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Question 1: हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?

Answer:

हम जानते हैं कि एककोशिकीय जीवों की पूरी सतह पर्यावरण के संपर्क में रहती है। इन्हें भोजन ग्रहण करने के लिए, गैसों का आदान-प्रदान करने के लिए तथा व्यर्थ पदार्थों के निष्कासन के लिए किसी विशेष अंग की आवश्यकता नहीं होती है। परन्तु बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ अपने आसपास के पर्यावरण के संपर्क में नहीं रह सकती हैं। अतः, साधारण विसरण बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति नहीं कर सकता है।

मुख्य बिंदु:

• एककोशिकीय जीवों में विसरण पर्याप्त है क्योंकि उनकी सभी कोशिकाएँ सीधे पर्यावरण के संपर्क में होती हैं।
• बहुकोशिकीय जीवों का आकार बड़ा होता है और आंतरिक कोशिकाएँ बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में नहीं होतीं।
• साधारण विसरण प्रक्रिया बहुत धीमी होती है जो शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए नाकाफी है।

आम गलतियाँ:

• विसरण की परिभाषा और बहुकोशिकीय जीवों की जटिल शारीरिक संरचना को न समझना।
• यह सोचना कि सभी कोशिकाएँ बाहरी वायु के संपर्क में रहती हैं।
• ऑक्सीजन की आवश्यकता और परिवहन तंत्र के बीच के संबंध को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर लिखते समय एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों की तुलना करें।
b) 'पर्यावरण के सीधे संपर्क में होना' मुख्य शब्दावली का प्रयोग करें।
c) यह प्रश्न अक्सर 2 अंकों में पूछा जाता है, इसलिए संक्षिप्त और सटीक उत्तर दें।

 

Question 2: कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?

Answer:

कोई वस्तु सजीव है या नहीं, इसका निर्धारण करने के लिए हम कई मापदंडों का उपयोग करते हैं। हम जानते हैं कि सजीवों में समय के अनुसार उनमें वृद्धि, प्रजनन एवं श्वसन की क्रिया निरंतर होती है। सजीवों के शरीर के अंदर आणविक गतियाँ लगातार होती रहती हैं चाहे वह बाह्य रूप से स्थिर तथा शांत ही क्यों न हो।

मुख्य बिंदु:

• शरीर के अंदर होने वाली निरंतर आणविक गतियाँ सजीव होने का सबसे मुख्य प्रमाण हैं।
• वृद्धि, विकास, श्वसन और प्रजनन जैसे जैविक प्रक्रम सजीवों की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
• बाह्य रूप से शांत दिखने वाले पौधों या जीवों में भी सूक्ष्म स्तर पर प्रक्रियाएँ चलती रहती हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल चलना-फिरना या गति करना ही सजीव का एकमात्र लक्षण मान लेना।
• आणविक गति के महत्व की उपेक्षा करना।
• श्वसन और प्रजनन को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) आणविक गति (Molecular movement) शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) सजीवों के सभी सामान्य लक्षणों को बिंदुओं के रूप में याद रखें।
c) उत्तर में जीवन की आन्तरिक और बाह्य गतिविधियों का अंतर स्पष्ट करें।

 

Question 3: किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?

Answer:

हम जानते हैं कि जीवों को अपना जीवन यापन करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अतः, ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए प्रत्येक जीव विभिन्न स्रोतों से कच्ची सामग्रियों का उपयोग करते हैं, जो इस प्रकार हैं: वायुमंडल से ऑक्सीजन, पृथ्वी से जल एवं सूर्य प्रकाश इत्यादि।

मुख्य बिंदु:

• जीव बाह्य पर्यावरण से विभिन्न प्रकार की कच्ची सामग्रियों (भोजन, पानी, ऑक्सीजन) को ग्रहण करते हैं।
• ऊर्जा उत्पादन और शरीर के निर्माण के लिए कार्बन आधारित अणुओं (भोजन) की आवश्यकता होती है।
• ऑक्सीजन का उपयोग भोजन से ऊर्जा विमोचित करने (श्वसन) के लिए किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल भोजन को कच्ची सामग्री मानना और ऑक्सीजन व जल को भूल जाना।
• कच्ची सामग्रियों के स्रोतों को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
• ऊर्जा और निर्माण कार्यों के लिए अलग-अलग सामग्रियों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) कच्ची सामग्रियों के तीनों मुख्य स्रोतों (ऑक्सीजन, जल, भोजन) को सूची बद्ध करें।
b) यह दर्शाएं कि ये सामग्रियां जीव के पोषण और श्वसन में कैसे मदद करती हैं।
c) उत्तर को सरल और बिंदुवार लिखें ताकि परीक्षक को आसानी हो।

 

Question 4: जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रमों को आवश्यक मानेंगे?

Answer:

किसी भी जीव में जीवन के अनुरक्षण के लिए ऊर्जा की अहम् भूमिका होती है। इस ऊर्जा को प्रत्येक जीव अपने भोजन के माध्यम से प्राप्त करते हैं। भोजन से ऊर्जा निम्नलिखित प्रक्रम आवश्यक हैं: पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन। इन सभी प्रक्रमों को सम्मिलित रूप से जैव प्रक्रम कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• पोषण (Nutrition) शरीर के लिए ऊर्जा और सामग्री प्राप्त करने का माध्यम है।
• श्वसन (Respiration) प्राप्त भोजन से ऊर्जा को मुक्त करने में सहायता करता है।
• वहन (Transportation) और उत्सर्जन (Excretion) क्रमशः पदार्थों को पहुँचाने और व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करते हैं।

आम गलतियाँ:

• जैव प्रक्रम के सभी चारों मुख्य भागों के नाम न लिखना।
• पोषण और श्वसन को एक ही समझ लेना।
• अनुरक्षण (Maintenance) शब्द के अर्थ को न समझ पाना।

Exam Tips:

a) जैव प्रक्रम की परिभाषा और उसके चारों घटकों के नाम अच्छे से याद रखें।
b) यह प्रश्न अध्याय के नाम (जैव प्रक्रम) से जुड़ा है इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है।
c) उत्तर में सभी प्रक्रमों का क्रमबद्ध उल्लेख करें।

 

Question 5: स्वपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है?

Answer:

स्वपोषी पोषण उन जीवों के पोषण की प्रक्रिया है जो अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा स्वयं बनाते हैं। भोजन के लिए कच्चे पदार्थों जैसे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा सूर्य के प्रकाश आदि का उपयोग कर पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल की सहायता से भोजन बनाते हैं। उदाहरण: हरे पौधे तथा कुछ जीवाणु। विषमपोषी पोषण उन जीवों का पोषण है जो अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते हैं बल्कि अन्य जीवों पर आश्रित रहते हैं। उदाहरण: मानव, पशु, पक्षी आदि।

मुख्य बिंदु:

• स्वपोषी जीव अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (प्रकाश संश्लेषण द्वारा)।
• विषमपोषी जीव अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से स्वपोषियों पर निर्भर रहते हैं।
• स्वपोषी जीवों में क्लोरोफिल पाया जाता है जबकि विषमपोषियों में नहीं।

आम गलतियाँ:

• उदाहरणों में गलती करना (जैसे पौधों को विषमपोषी बता देना)।
• क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश की भूमिका को स्वपोषी पोषण में न लिखना।
• दोनों के बीच मुख्य अंतर (स्वयं भोजन बनाना बनाम दूसरों पर निर्भर रहना) स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) अंतर स्पष्ट करते समय परिभाषा और उदाहरण दोनों अवश्य दें।
b) 'स्वयं' और 'दूसरों पर आश्रित' शब्दों पर मुख्य जोर दें।
c) यह अंतर तालिका (Table) बनाकर लिखने से अधिक प्रभावी लगता है।

 

Question 6: प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?

Answer:

प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधे निम्नलिखित स्रोतों से प्राप्त करते हैं: वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड, सूर्य से सूर्य का प्रकाश, भूमि से (जाइल्म द्वारा) जल एवं खनिज लवण। इन सभी सामग्रियों तथा पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल की सहायता से पौधे अपना भोजन तैयार करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• कार्बन डाइऑक्साइड स्टोमाटा (रंध्र) के माध्यम से वायुमंडल से ली जाती है।
• जल और खनिज लवण जड़ों द्वारा मिट्टी से अवशोषित किए जाते हैं।
• सूर्य का प्रकाश क्लोरोफिल द्वारा अवशोषित किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• कच्ची सामग्रियों के स्रोतों को गलत लिखना (जैसे जल वायुमंडल से बताना)।
• क्लोरोफिल को कच्ची सामग्री मान लेना (यह उत्प्रेरक/माध्यम है)।
• जाइल्म का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक कच्ची सामग्री के सामने उसका सही स्रोत स्पष्ट लिखें।
b) प्रकाश संश्लेषण का रासायनिक समीकरण भी साथ में याद रखें।
c) यह लघु उत्तरीय प्रश्नों में बार-बार पूछा जाता है।

 

Question 7: हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?

Answer:

हमारे आमाशय में अम्ल की निम्नलिखित भूमिकाएँ हैं: आमाशय की भित्ति में उपस्थित जठर ग्रंथियों द्वारा स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक अम्लीय माध्यम तैयार करता है जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया में भी सहायक होता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं का भी नाश करता है।

मुख्य बिंदु:

• हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) एक अम्लीय माध्यम प्रदान करता है जो पेप्सिन की सक्रियता के लिए आवश्यक है।
• यह भोजन के साथ आने वाले हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणुओं को मारता है।
• यह आमाशय की आंतरिक परत को सुरक्षा प्रदान करने वाले बलगम के साथ संतुलित रहता है।

आम गलतियाँ:

• अम्ल का कार्य केवल भोजन को पचाना लिख देना, पेप्सिन की सक्रियता का जिक्र न करना।
• अम्ल का नाम (HCl) न लिखना।
• इसके जीवाणुनाशक कार्य को भूल जाना।

Exam Tips:

a) HCl और पेप्सिन एंजाइम का संबंध स्पष्ट रूप से समझाएँ।
b) अम्ल के दोनों मुख्य कार्य (अम्लीय माध्यम बनाना और जीवाणु नष्ट करना) बिंदुवार लिखें।
c) रासायनिक नाम (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) का प्रयोग करें।

 

Question 8: पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?

Answer:

जैव उत्प्रेरकों द्वारा भोजन को पचने एवं अवशोषण करने के लिए इसे छोटे-छोटे अणुओं में विखंडित करने की क्रिया को एंजाइम कहते हैं। एमीलेस, लाइपेज, पेप्सिन, ट्रिप्सिन आदि पाचन एंजाइम जटिल पदार्थों कणों को छोटे-छोटे अणुओं में विखंडित करने में मदद करते हैं। ये सरल अणु आसानी से रक्त द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं और शरीर की सभी कोशिकाओं में पहुंचाया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• पाचक एंजाइम जटिल और बड़े खाद्य अणुओं को सरल और छोटे अणुओं में बदलते हैं।
• ये जैव उत्प्रेरक (Biocatalysts) के रूप में कार्य करते हैं जो पाचन की गति को बढ़ाते हैं।
• सरल अणु आसानी से आंतों की भित्ति द्वारा रक्त में अवशोषित किए जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• एंजाइम को भोजन मान लेना या उनका गलत कार्य लिखना।
• जटिल अणुओं से सरल अणुओं में बदलने की प्रक्रिया को न समझाना।
• कुछ प्रमुख एंजाइमों (जैसे एमीलेस, पेप्सिन) के नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) 'जैव उत्प्रेरक' शब्द का प्रयोग परिभाषा में अवश्य करें।
b) विभिन्न एंजाइमों के नाम और उनके कार्य याद रखें।
c) उत्तर को सरल हिंदी में लिखकर वैज्ञानिक शब्दावली का संतुलन बनाए रखें।

 

Question 9: पचे हुए भोजन को अवोषित करने के लिए क्षुद्रंत्र को कैसी अभिकल्पित किया गया है?

Answer:

पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रंत्र के आंतरिक आस्तर पर अनेक अंगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दीर्घरोम कहते हैं। ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। दीर्घरोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचते हैं।

मुख्य बिंदु:

• क्षुद्रंत्र (छोटी आंत) के अंदर दीर्घरोम (Villi) नामक उंगली जैसी संरचनाएँ होती हैं।
• ये प्रवर्ध भोजन के अवशोषण के लिए सतही क्षेत्रफल (Surface area) को अत्यधिक बढ़ा देते हैं।
• दीर्घरोमों में रक्त वाहिकाओं का घना जाल होता है जो अवशोषित भोजन को रक्त में मिलाता है।

आम गलतियाँ:

• दीर्घरोम (Villi) की वर्तनी या नाम गलत लिखना।
• सतही क्षेत्रफल बढ़ाने वाली बात का उल्लेख न करना।
• रक्त वाहिकाओं की भूमिका को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) 'दीर्घरोम' (Villi) शब्द को रेखांकित करें या स्पष्ट लिखें।
b) क्षेत्रफल बढ़ाना और रक्त वाहिकाओं से जुड़ना – ये दो मुख्य बिंदु हर हाल में लिखें।
c) आरेख या चित्र के माध्यम से इसे समझने का अभ्यास करें।

 

Question 10: श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?

Answer:

जलीय जीव जल में घुली ऑक्सीजन को विभिन्न अंगों द्वारा ग्रहण करके श्वसन की क्रिया करते हैं। जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा वायु में ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम हैं इसलिए जलीय जीवों की श्वास दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा द्रुत होती है। इसके विपरीत स्थलीय जीवों की श्वसन की क्रिया आसान तथा धीरे होती है।

मुख्य बिंदु:

• जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन से बहुत कम होती है।
• जलीय जीवों को पर्याप्त ऑक्सीजन पाने के लिए श्वसन दर (Breathing rate) बहुत तेज रखनी पड़ती है।
• स्थलीय जीव वायु से आसानी से भरपूर ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी श्वास दर धीमी होती है।

आम गलतियाँ:

• जलीय और स्थलीय जीवों की श्वास दर (तेज या धीमी) को उल्टा लिख देना।
• जल और वायु में ऑक्सीजन की मात्रा के अंतर को स्पष्ट न करना।
• जीवों के श्वसन अंगों का अनावश्यक रूप से विस्तार करना।

Exam Tips:

a) मुख्य कारण 'जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम होना' को स्पष्ट लिखें।
b) 'द्रुत' (तेज) और 'धीमी' श्वास दर का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करें।
c) यह कारण आधारित प्रश्न (Reasoning question) के रूप में पूछा जाता है।

 

Question 11: ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या है?

Answer:

ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त करने की निम्नलिखित तीन विधियाँ इस प्रकार हैं: ग्लूकोज कोशिका द्रव्य में विघटित होकर पायरूवेट बनता है जो दोबारा यीस्ट में ऑक्सीजन की उपस्थिति में विघटित होकर इथेनॉल, कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है और साथ ही ऊर्जा विमोचित भी होती है। यदि ऑक्सीजन की कमी होती है, तो पायरूवेट विघटित होकर लैक्टिक अम्ल एवं ऊर्जा प्रदान करता है। पायरूवेट ऑक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर विघटित होकर कार्बन डाइऑक्साइड + जल बनाता है और साथ ही ऊर्जा विमोचित भी करता है।

आकृति का विवरण: कोशिका द्रव्य में ग्लूकोज से पायरूवेट बनने तथा विभिन्न मार्गों (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति, ऑक्सीजन का अभाव और ऑक्सीजन की उपस्थिति) द्वारा ऊर्जा उत्पादन को दर्शाने वाला फ्लोचार्ट।

मुख्य बिंदु:

• ग्लूकोज (6-कार्बन अणु) सबसे पहले कोशिका द्रव्य में विघटित होकर पायरूवेट (3-कार्बन अणु) बनाता है।
• यीस्ट में अवायवीय श्वसन द्वारा इथेनॉल, CO₂ और ऊर्जा बनती है।
• हमारी पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन के अभाव में लैक्टिक अम्ल और ऊर्जा बनती है।
• माइटोकॉन्ड्रिया में ऑक्सीजन की उपस्थिति (वायवीय श्वसन) द्वारा CO₂, जल और प्रचुर ऊर्जा बनती है।

आम गलतियाँ:

• पायरूवेट बनने के स्थान (कोशिका द्रव्य) और माइटोकॉन्ड्रिया के स्थान को आपस में मिला देना।
• पेशियों में लैक्टिक अम्ल की जगह इथेनॉल लिख देना।
• फ्लोचार्ट या तीनों मार्गों को स्पष्ट रूप से न दर्शाना।

Exam Tips:

a) इस प्रश्न के उत्तर में एनसीईआरटी का फ्लोचार्ट (पायरुवेट के विघटन के विभिन्न पथ) अवश्य बनाएँ।
b) तीनों स्थितियों (यीस्ट, पेशी कोशिका, माइटोकॉन्ड्रिया) को अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
c) कार्बन अणुओं की संख्या (6-कार्बन और 3-कार्बन) का उल्लेख करने से उत्तर प्रभावशाली बनता है।

 

Question 12: मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?

Answer:

मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के द्वारा होता है। फेफड़ों से रक्त हीमोग्लोबिन को लेकर सम्पूर्ण अंग तक पहुँचती है है तथा ऊतकों से कार्बन डाइऑक्साइड शोषित होकर रक्त द्वारा फेफड़ों तक पहुँचती है। फेफड़ों में कुपिकाएँ होती हैं जहाँ ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का आदान प्रदान होता है। वायुकोषों की कुपिकाएँ इस कार्बन - डाइऑक्साइड को अलग कर देती हैं और अंत में कार्बन डाइऑक्साइड शरीर के बाहर निकल जाती है।

मुख्य बिंदु:

• रक्त में मौजूद लाल वर्णक हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ बंधकर उसका परिवहन करता है।
• कार्बन डाइऑक्साइड पानी में अधिक घुलनशील होने के कारण मुख्य रूप से रक्त में घुलकर (प्लाज्मा द्वारा) फेफड़ों तक लाई जाती है।
• फेफड़ों की कुपिकाओं में गैसों का विनिमय (विसरण द्वारा) होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल ऑक्सीजन के परिवहन की बात करना, कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन को भूल जाना।
• हीमोग्लोबिन की भूमिका को स्पष्ट न करना।
• फेफड़ों और ऊतकों के बीच गैसों की दिशा को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) हीमोग्लोबिन को ऑक्सीजन वाहक के रूप में अवश्य दर्शाएँ।
b) परिवहन की दिशा (फेफड़े से ऊतक, और ऊतक से फेफड़े) स्पष्ट करें।
c) कुपिकाओं (Alveoli) की भूमिका का उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 13: गैसों के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया गया है?

Answer:

गैसों के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अंदर का भाग छोटी छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता है और एक गुब्बारे जैसी संरचना में अंतकृत हो जाता है। इस क्रिया को कुपिका फुफ्फुस कहते हैं। ये कुपिकाएँ गैसों के विनिमय के लिए अधिकतम क्षेत्रफल की सतह उपलब्ध कराती हैं।

मुख्य बिंदु:

• फेफड़ों के अंदर वायुमार्ग छोटी-छोटी नलिकाओं (ब्रॉन्किओल्स) में विभाजित होता है जो अंत में गुब्बारे जैसी रचनाओं (कुपिका/Alveoli) में समाप्त होती हैं।
• ये कुपिकाएँ बहुत अधिक संख्या में होती हैं जो गैसों के आदान-प्रदान के लिए विशाल सतह प्रदान करती हैं।
• कुपिकाओं की भित्ति पर रक्त वाहिकाओं का बारीक जाल होता है जो विनिमय को सुगम बनाता है।

आम गलतियाँ:

• कुपिका (Alveoli) शब्द के स्थान पर केवल फेफड़ा लिख देना।
• क्षेत्रफल बढ़ाने वाली सूक्ष्म संरचनाओं का वर्णन न करना।
• गुब्बारे जैसी संरचना का संदर्भ न देना।

Exam Tips:

a) 'कुपिका' (Alveoli) मुख्य शब्द का प्रयोग करें।
b) इनके गुब्बारे जैसी संरचना होने और अत्यधिक संख्या में होने का कारण बताएं।
c) आरेख के साथ इस उत्तर को तैयार करें।

 

Question 14: मानव में वहन तंत्र के घटक कौन से हैं? घटकों के क्या कार्य हैं?

Answer:

मानव में वहन तंत्र के निम्नलिखित घटक हैं:
• रक्त: रक्त का काम शरीर के सम्पूर्ण भागों में भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों तथा ऑक्सीजन को पहुँचाना है। यह कार्य रक्त में उपस्थित प्लाज्मा के द्वारा होता है।
• हृदय: हृदय के मुख्य चार कोष्ठ होते हैं जो ऑक्सीजनित रक्त तथा विऑक्सीजनित रक्त को अलग करने में सहायक होते हैं। हृदय ऑक्सीजनित रक्त को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने का कार्य करता है।
• नलिकाए: धमनी वे रुधिर वाहिकाएँ हैं जो रुधिर को हृदय से शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाने का कार्य करती हैं तथा शिराएँ विभिन्न अंगों से रुधिर एकत्र करके वापस हृदय में लाने का कार्य करती हैं।
• प्लेटलेट्स: प्लेटलेट्स कोशिकाएँ रक्तस्राव के स्थान पर रुधिर का धक्का बनाकर मार्ग अवरुद्ध कर देती हैं।

मुख्य बिंदु:

• मानव परिसंचरण तंत्र के चार मुख्य भाग हैं: हृदय, रक्त, रक्त वाहिकाएँ (धमनी और शिरा) तथा प्लेटलेट्स।
• हृदय पंपिंग अंग के रूप में कार्य करता है जो शुद्ध और अशुद्ध रक्त को अलग रखता है।
• धमनियाँ शुद्ध रक्त ले जाती हैं और शिराएँ अशुद्ध रक्त वापस लाती हैं।

आम गलतियाँ:

• घटकों के नाम लिखकर उनके कार्य न बताना।
• धमनी और शिरा के कार्यों को आपस में मिला देना।
• प्लेटलेट्स के थक्का जमाने के कार्य को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) सभी चारों घटकों को अलग-अलग बुलेट पॉइंट्स में लिखें।
b) धमनी (Artery) और शिरा (Vein) का अंतर स्पष्ट रखें।
c) यह दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के रूप में आ सकता है, इसलिए सभी बिंदुओं का विस्तार से वर्णन करें।

 

Question 15: स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है?

Answer:

स्तनधारी तथा पक्षियों को विभिन्न कार्यों के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है तथा ऊर्जा इन जीवों के शरीर के तापक्रम को भी बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है। ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर अलग - अलग रहने पर शरीर को उच्च दक्षता पूर्ण ऑक्सीजन उपलब्ध होती है। अतः, स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना आवश्यक है।

मुख्य बिंदु:

• पक्षी और स्तनधारी गर्म रुधिर वाले (Warm-blooded) जीव हैं जिन्हें अपने शरीर का तापमान स्थिर रखना होता है।
• इन्हें शरीर की उच्च ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है।
• रक्त के अलग रहने से शरीर की कोशिकाओं को शुद्ध ऑक्सीजन की अधिकतम आपूर्ति मिलती है।

आम गलतियाँ:

• तापमान नियंत्रण और उच्च ऊर्जा आवश्यकता की बात न लिखना।
• केवल यह कहना कि 'अशुद्ध रक्त मिलने से नुकसान होता है' बिना उचित वैज्ञानिक कारण के।
• स्तनधारी और पक्षियों के विशिष्ट शारीरिक लक्षणों की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) शरीर के तापक्रम को बनाए रखना और उच्च ऊर्जा आवश्यकता – इन दो मुख्य बिंदुओं को उत्तर में शामिल करें।
b) चार-कोष्ठीय हृदय के लाभ के संदर्भ में इस प्रश्न को समझें।
c) वैज्ञानिक तर्क के साथ उत्तर समाप्त करें।

 

Question 16: उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?

Answer:

उच्च संगठित पादपों में वहन तंत्र के मुख्य घटक जाइलम तथा फ्लोएम हैं। जाइलम का काम मृदा से प्राप्त जल एवं खनिज लवणों को पादपों में वहन करना और फ्लोएम का काम पादपों द्वारा प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाए गए भोजन को पादप के संपूर्ण भागों में पहुँचाना।

मुख्य बिंदु:

• पादपों में संवहन बंडल दो प्रमुख ऊतकों से बने होते हैं: जाइलम और फ्लोएम।
• जाइलम का मुख्य कार्य जल और खनिज लवणों का ऊपर की ओर परिवहन करना है।
• फ्लोएम का मुख्य कार्य पत्तियों द्वारा तैयार भोजन को पौधों के सभी अंगों तक पहुँचाना है।

आम गलतियाँ:

• जाइलम और फ्लोएम के कार्यों को आपस में बदल देना।
• खनिज और भोजन के परिवहन में अंतर न करना।
• उच्च पादपों के संवहन ऊतकों के नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) जाइलम = जल, फ्लोएम = भोजन (फूड) - इस आसान ट्रिक से याद रखें।
b) दोनों घटकों के नाम और उनके विशिष्ट कार्य साफ-साफ लिखें।
c) यह बहुत ही सामान्य और बार-बार पूछे जाने वाला प्रश्न है।

 

Question 17: पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?

Answer:

पादपों में जल तथा खनिज लवणों का वहन जाइलम के द्वारा होता है। जाइलम ऊतक में जड़ों, तनों और पत्तियों की वहिनिकाएँ तथा वाहिकाएँ आपस में जुड़कर जल संवहक वाहिकाओं का एक सतत जाल बनाती हैं जो पादप के सभी भागों से सम्बद्ध होता है। जड़ों की कोशिकाएँ मृदा के संपर्क में होती हैं तथा सक्रिय रूप से आयन प्राप्त करती हैं। यह जड़ और मृदा के बीच आयन सांद्रन्द्रण में एक अंतर उत्पन्न करता है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए मृदा से जल तथा खनिज लवण जड़ में प्रवेश कर जाता है। इस प्रकार जल अनवरत गति से जड़ के जाइलम में जाता है और फिर जल के स्तंभ का निर्माण करता है जो लगातार ऊपर की ओर धकेला जाता है।

मुख्य बिंदु:

• जाइलम वाहिकाएँ और वहिनिकाएँ मिलकर जल संवहन का एक सतत तंत्र बनाती हैं।
• जड़ों की कोशिकाएँ सक्रिय रूप से आयन (Ions) अवशोषित करती हैं जिससे सांद्रता में अंतर आता है।
• वाष्पसर्जन (Transpiration) खिंचाव पानी को तने और पत्तियों तक खींचने में मुख्य भूमिका निभाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल जड़ दाब की बात करना और वाष्पसर्जन खिंचाव को भूल जाना।
• जाइलम के आंतरिक घटकों (वाहिनिका और वाहिका) का उल्लेख न करना।
• जल की गति की दिशा (नीचे से ऊपर) स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) 'जाइलम', 'सक्रिय रूप से आयन अवशोषण' और 'वाष्पसर्जन खिंचाव' शब्दों का प्रयोग करें।
b) पादपों में जल परिवहन के दोनों बलों (मूलदाब और वाष्पसर्जन खिंचाव) को समझकर लिखें।
c) उत्तर को चरणों में (जड़ों द्वारा अवशोषण -> तने में ऊपर चढ़ना) विभाजित करें।

 

Question 18: पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?

Answer:

किसी भी पादप में भोजन का स्थानांतरण फ़्लोएम ऊतक द्वारा होता है। फ़्लोएम ऊतक की कोशिकाएँ पादपों के सम्पूर्ण अंगों तक फैली होती हैं। इसका काम पत्तियों द्वारा बनाए गए भोजन को पादपों के समस्त भागों तक पहुँचाना होता है। इसके अलावा फ़्लोएम अमीनो अम्ल तथा अन्य पदार्थों का भी परिवहन करता है। भोजन तथा अन्य पदार्थों का स्थानांतरण संलग्न साथी कोशिका की सहायता से चालनी नलिका में उपरिमुखी तथा अधोमुखी दोनों दिशाओं में होता है। इसमें ऊर्जा का भी प्रयोग होता है जो ऊतक का परासरण दाब भी बढ़ा देता है जिससे जल इसमें प्रवेश करता है और यह दाब पदार्थों को फ़्लोएम से उस ऊतक तक ले जाता है जहाँ दाब कम हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• फ्लोएम द्वारा भोजन (प्रकाश संश्लेषण के उत्पाद) और अन्य पदार्थों का परिवहन होता है।
• यह परिवहन ऊपर और नीचे (दोनों दिशाओं में) हो सकता है।
• इस प्रक्रिया में ऊर्जा (ATP) का उपयोग होता है जो परासरण दाब बढ़ाकर रस (Sap) को गति देता है।

आम गलतियाँ:

• भोजन के स्थानांतरण की दिशा केवल ऊपर की ओर बता देना (जबकि यह दोनों दिशाओं में होता है)।
• ऊर्जा (ATP) के उपयोग की बात न लिखना।
• जाइलम और फ्लोएम की क्रियाविधि को मिला देना।

Exam Tips:

a) 'दोनों दिशाओं में' (Bi-directional) शब्द पर विशेष ध्यान दें।
b) एटीपी (ATP) ऊर्जा के उपयोग का उल्लेख अवश्य करें।
c) जाइलम (केवल ऊपर) और फ्लोएम (दोनों दिशाओं में) के परिवहन का मुख्य अंतर याद रखें।

 

Question 19: वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।

Answer:

वृक्काणु मानव के उत्सर्जन तंत्र में एक महत्व पूर्ण अंग है। प्रत्येक वृक में वृक्क में आधारी निस्यंदन एकक, फुफ्फुस की तरह ही, बहुत पतली भित्ति वाली रुधिर केशिकाओं का गुच्छा होता है। वृक्क में प्रत्येक गुच्छ, एक नलिका के कप के आकार के सिरे के अंदर होता है। यह नलिका छनें हुए मूत्र को एकत्र करती है। प्रत्येक वृक्क में ऐसे अनेक निस्यंदन एकक होते हैं जिन्हें वृक्काणु (नेफ्रॉन) कहते हैं जो आपस में निकटता से पैक रहते हैं। प्रारंभिक निस्यंदन में कुछ पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण और प्रचुर मात्रा में जल रह जाते हैं। जैसे - जैसे मूत्र इस नलिका में प्रवाहित होता है इन पदार्थों का चयनित पुनरशोषण हो जाता है। जल की मात्रा पुनरशोषण शरीर में उपलब्ध जल की मात्रा पर तथा कितना विलेय व्यर्थ उत्सर्जित करना है, पर निर्भर करता है। प्रत्येक वृक्क में बनने वाला मूत्र एक लंबी नलिका, मूत्रवाहिनी में प्रवेश करता है जो मूत्रशय को जोड़ती है। मूत्राशय में मूत्र भंडारित रहता है जब तक कि फैले हुए मूत्राशय का दाब मूत्रमार्ग द्वारा उसे बाहर न कर दे।

आकृति का विवरण: नेफ्रॉन (वृक्काणु) की विस्तृत संरचना जिसमें बोमन संपुट, केशिकागुच्छ, वृक्क धमनी की शाखा, वृक्क शिरा की नलिका तथा संग्राहक वाहिनियाँ दर्शायी गई हैं।

मुख्य बिंदु:

• वृक्काणु (Nephron) वृक्क की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है।
• इसके मुख्य भाग केशिकागुच्छ (Glomerulus), बोमन संपुट (Bowman's capsule) और वृक्क नलिका हैं।
• इसमें रक्त का निस्यंदन (Filtration) होता है और फिर आवश्यक पदार्थों (जल, ग्लूकोज, लवण) का चयनित पुनरावशोषण (Reabsorption) होता है।

आम गलतियाँ:

• नेफ्रॉन और वृक्क (Kidney) को एक ही समझ लेना।
• पुनरशोषण (Reabsorption) प्रक्रिया का वर्णन न करना।
• बोमन संपुट और केशिकागुच्छ के नामों में गलती करना।

Exam Tips:

a) नेफ्रॉन का नामांकित चित्र बनाने का अभ्यास करें, यह दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में पूछा जाता है।
b) निस्यंदन, पुनरशोषण और संग्रहण - इन तीनों चरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) वृक्क की कार्यात्मक इकाई के रूप में इसका परिचय दें।

 

Question 20: उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं?

Answer:

उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के पादप निम्नलिखित विधियों का उपयोग करते हैं: प्रकाश संश्लेषण क्रिया के दौरान अतिरिक्त जल तथा ऑक्सीजन को बाहर निकाल कर। अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा बाहर निकालकर। पौधे गिरने वाली पत्तियों में अपशिष्ट उत्पाद संचित रखते हैं और मृत पत्तियों को अलग कर अपशिष्ट पदार्थ को अलग करते हैं। पौधे गोंद तथा रेजिन के रूप में अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हैं। पुराने जाइलम जो अपशिष्ट पदार्थ है यह पादपों से छाल के रूप में बाहर निकलता है। पौधे कुछ अपशिष्ट पदार्थों को अपने आसपास की मृदा में उत्सर्जित करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• पौधे अतिरिक्त ऑक्सीजन और जल को वाष्पोत्सर्जन व प्रकाश संश्लेषण द्वारा छोड़ते हैं।
• बेकार हो चुकी पत्तियाँ गिर जाती हैं जिनमें अपशिष्ट पदार्थ संचित रहते हैं।
• रेजिन और गोंद (Resins and Gums) के रूप में पुराने जाइलम में अपशिष्ट जमा होते हैं।
• कुछ अपशिष्ट पदार्थों को पौधे अपनी जड़ों के आसपास की मिट्टी में छोड़ देते हैं।

आम गलतियाँ:

• पादपों में जंतुओं जैसा उत्सर्जन तंत्र मान लेना।
• केवल वाष्पोत्सर्जन लिखकर अन्य विधियों (रेजिन, गोंद, पत्तियाँ गिरना) को छोड़ देना।
• बिंदुओं को स्पष्ट रूप से न लिखना।

Exam Tips:

a) पादप उत्सर्जन की सभी 4-5 विधियों को अलग-अलग बुलेट पॉइंट्स में लिखें।
b) रेजिन, गोंद और पत्तियों का गिरना - इन विशेष उदाहरणों का उल्लेख अवश्य करें।
c) यह प्रश्न पादप और जंतु उत्सर्जन के अंतर को समझने में मदद करता है।

 

Question 21: मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है?

Answer:

मूत्र बनने की मात्रा शरीर में उपस्थित अतिरिक्त जल और शरीर में घुली अपशिष्ट की मात्रा पर निर्भर करती है। कुछ अन्य कारक जैसे जीव के निवास स्थान तथा उसमें उपस्थित हार्मोन भी बनने वाले मूत्र की मात्रा को नियंत्रित करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• मूत्र की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि शरीर में कितना अतिरिक्त पानी और घुले हुए वर्ज्य पदार्थ मौजूद हैं।
• हॉर्मोन्स (जैसे एंटीडाईयूरेटिक हॉर्मोन - ADH) शरीर में जल के पुनरशोषण को नियंत्रित करते हैं।
• जीव का पर्यावरण और खान-पान भी मूत्र की मात्रा को प्रभावित करता है।

आम गलतियाँ:

• केवल पानी की मात्रा लिखना, हार्मोनल नियंत्रण की भूमिका भूल जाना।
• उत्तर को बहुत अधिक संक्षिप्त कर देना।
• अपशिष्ट पदार्थों के प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) जल की मात्रा, वर्ज्य पदार्थों और हॉर्मोन्स - इन तीनों कारकों का उल्लेख करें।
b) नियमन (Regulation) शब्द का अर्थ समझाते हुए उत्तर दें।
c) यह लघु उत्तरीय प्रश्न के रूप में महत्वपूर्ण है।

 

Question 22: मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है -
(a) पोषण
(b) श्वसन
(c) उत्सर्जन
(d) परिवहन

Answer:

(c) उत्सर्जन
स्पष्टीकरण: मनुष्य में वृक्क (Kidney) उत्सर्जन तंत्र का एक प्रमुख अंग है, जो रक्त से नाइट्रोजनयुक्त वर्ज्य पदार्थों (जैसे यूरिया) को छानकर मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकालने का कार्य करता है।

मुख्य बिंदु:

• वृक्क मानव उत्सर्जन तंत्र का मुख्य अंग है।
• यह रक्त को छानकर यूरिया और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को अलग करता है।
• इसका पोषण, श्वसन या परिवहन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

आम गलतियाँ:

• वृक्क को परिवहन तंत्र (वहन तंत्र) से समझ लेना क्योंकि इसमें रक्त आता है।
• विकल्पों को बिना पढ़े जल्दबाजी में उत्तर देना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प चुनने के बाद एक लाइन का कारण या स्पष्टीकरण जरूर लिखें।
b) उत्सर्जन तंत्र के अन्य अंगों (मूत्रवाहिनी, मूत्राशय) को भी याद रखें।
c) ऐसे सीधे प्रश्नों में अंक आसानी से मिलते हैं।

 

Question 23: पादप में जाइलम उत्तरदायी है -
(a) जल का वहन
(b) भोजन का वहन
(c) अमीनो अम्ल का वहन
(d) ऑक्सीजन का वहन

Answer:

(a) जल का वहन
स्पष्टीकरण: पादपों में जाइलम एक संवहन ऊतक है जो जड़ों से जल और खनिज लवणों को अवशोषित करके पौधे के अन्य ऊपरी भागों तक पहुँचाने के लिए उत्तरदायी होता है।

मुख्य बिंदु:

• जाइलम केवल जल और खनिज लवणों के परिवहन का कार्य करता है।
• भोजन का वहन फ्लोएम द्वारा होता है।
• यह पादप का एक महत्वपूर्ण संवहन ऊतक है।

आम गलतियाँ:

• जाइलम और फ्लोएम के कार्यों में भ्रमित होना।
• भोजन और जल के वहन को मिला देना।

Exam Tips:

a) जाइलम = जल (ज से जाइलम, ज से जल) इस सरल ट्रिक से याद रखें।
b) परीक्षा में सही विकल्प चुनकर उसका संक्षिप्त कारण भी लिखें।

 

Question 24: स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है -
(a) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल
(b) क्लोरोफिल
(c) सूर्य का प्रकाश
(d) उपरोक्त सभी

Answer:

(d) उपरोक्त सभी
स्पष्टीकरण: स्वपोषी पोषण (प्रकाश संश्लेषण) के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, जल, क्लोरोफिल और सूर्य का प्रकाश—ये सभी घटक अनिवार्य रूप से आवश्यक होते हैं, इसलिए सही विकल्प (d) है।

मुख्य बिंदु:

• प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए दिए गए चारों तत्व आवश्यक हैं।
• कार्बन डाइऑक्साइड और जल कच्ची सामग्री हैं, सूर्य ऊर्जा का स्रोत है और क्लोरोफिल सौर ऊर्जा को अवशोषित करता है।
• इनमें से किसी एक की भी अनुपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण संभव नहीं है।

आम गलतियाँ:

• केवल क्लोरोफिल या केवल सूर्य के प्रकाश को ही आवश्यक मान लेना।
• 'उपरोक्त सभी' विकल्प को ध्यान से न पढ़ना।

Exam Tips:

a) प्रकाश संश्लेषण की आवश्यक शर्तों को हमेशा एक साथ याद रखें।
b) समीकरण के माध्यम से इन सभी घटकों की उपस्थिति को दर्शाएँ।

 

Question 25: पायरूवेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है -
(a) कोशिका द्रव्य
(b) माइटोकॉन्ड्रिया
(c) हरित लवक
(d) केन्द्रक

Answer:

(b) माइटोकॉन्ड्रिया
स्पष्टीकरण: ग्लूकोज से पायरूवेट का बनना कोशिका द्रव्य में होता है, परन्तु पायरूवेट का पूर्ण विखंडन (ऑक्सीजन की उपस्थिति में) जिससे कार्बन डाइऑक्साइड, जल और प्रचुर ऊर्जा मिलती है, कोशिका के अंगक माइटोकॉन्ड्रिया में संपन्न होता है।

मुख्य बिंदु:

• ग्लूकोज से पायरूवेट का टूटना कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में होता है।
• पायरूवेट का पूर्ण ऑक्सीकरण माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में होता है।
• माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का 'ऊर्जा गृह' (Powerhouse) कहा जाता है।

आम गलतियाँ:

• कोशिका द्रव्य और माइटोकॉन्ड्रिया के स्थानों को आपस में उलझा देना।
• हरित लवक को श्वसन का स्थल समझ लेना (हरित लवक प्रकाश संश्लेषण से संबंधित है)।

Exam Tips:

a) कोशिका द्रव्य = ग्लूकोज से पायरूवेट, माइटोकॉन्ड्रिया = पायरूवेट का पूर्ण ऑक्सीकरण – यह अंतर स्पष्ट याद रखें।
b) यह प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा दोनों में बहुत बार पूछा जाता है।

 

Question 26: हमारे भोजन में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?

Answer:

हमारे भोजन में वसा का पाचन मुख्य रूप से क्षुद्रंत्र में होता है। इस कार्य के लिए क्षुद्रंत्र, यकृत तथा अग्न्याशय से स्रावण प्राप्त करती है। यहाँ पित्त लवण द्वारा भोजन में उपस्थित वसा की बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में खंडित कर दिया जाता है जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। अग्न्याशय से आने वाला अग्न्याशयिक रस इन छोटी गोलिकाओं वाली वसा को लाइपेज एंजाइम के माध्यम से पचाता है। एंजाइम अंत में वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरोल में परिवर्तित कर देते हैं।

मुख्य बिंदु:

• वसा का पाचन मुख्य रूप से छोटी आंत (क्षुद्रंत्र) में होता है।
• यकृत से स्रावित पित्त रस वसा का इमल्सीकरण (बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में तोड़ना) करता है।
• अग्न्याशय से स्रावित लाइपेज एंजाइम इमल्सीकृत वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरोल में बदलता है।

आम गलतियाँ:

• पित्त रस को एंजाइम समझ लेना (पित्त रस में कोई एंजाइम नहीं होता, यह केवल इमल्सीकरण करता है)।
• वसा के पाचन का स्थान गलत बताना।
• लाइपेज एंजाइम का नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) 'इमल्सीकरण' (Emulsification) और 'पित्त लवण' शब्दों का प्रयोग करें।
b) वसा के अंतिम उत्पाद (वसा अम्ल और ग्लिसरोल) को अवश्य लिखें।
c) यकृत, अग्न्याशय और क्षुद्रंत्र के आपसी तालमेल को स्पष्ट करें।

 

Question 27: भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?

Answer:

भोजन के पाचन में लार की अहम् भूमिका है। आहार का आस्तर बहुत कोमल होता है। लार सम्पूर्ण भोजन में फैल कर उसे चबाने एवं गीला करने में मदद करता है ताकि इसका मार्ग आसान हो जाए। लार में उपस्थित एंजाइम जिसे ऐमिलेस कहते हैं स्टार्च के जटिल अणुओं को शर्करा में विखंडित कर देता है।

मुख्य बिंदु:

• लार भोजन को गीला और चिकना बनाती है जिससे उसे निगलना आसान हो जाता है।
• लार ग्रंथियों से स्रावित लार में 'लार एमाइलेज' (Salivary amylase) नामक एंजाइम होता है।
• यह एंजाइम भोजन में मौजूद जटिल स्टार्च को सरल शर्करा में बदल देता है।

आम गलतियाँ:

• लार का कार्य केवल भोजन को गीला करना बताना, पाचन संबंधी कार्य (स्टार्च को शर्करा में बदलना) छोड़ देना।
• एमाइलेज एंजाइम का नाम न लिखना।
• मुंह में पाचन की शुरुआत को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) लार के दोनों कार्य (भोजन को गीला करना और स्टार्च का पाचन) स्पष्ट रूप से लिखें।
b) एमाइलेज एंजाइम का उल्लेख करना न भूलें।
c) यह पाचन तंत्र के पहले चरण (मुख गुहा) से जुड़ा प्रश्न है।

 

Question 28: स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन सी हैं और उसके उपोत्पाद क्या है?

Answer:

स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कार्बन डाइऑक्साइड, सूर्य का प्रकाश, जल तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति है। कार्बोहाइड्रेट तथा ऑक्सीजन स्वपोषी पोषण के मुख्य उपोत्पाद हैं।
(समीकरण: 6CO₂ + 6H₂O —(क्लोरोफिल तथा सूर्य का प्रकाश)—> C₆H₁₂O₆ + 6O₂)

मुख्य बिंदु:

• स्वपोषी पोषण (प्रकाश संश्लेषण) के लिए आवश्यक चार मुख्य घटक CO₂, जल, सूर्य का प्रकाश और क्लोरोफिल हैं।
• इस प्रक्रिया के मुख्य उत्पाद ग्लूकोज (कार्बोहाइड्रेट) और उपोत्पाद ऑक्सीजन हैं।
• रासायनिक समीकरण लिखकर इसे आसानी से समझाया जा सकता है।

आम गलतियाँ:

• उत्पाद और उपोत्पाद में अंतर न समझना।
• प्रकाश संश्लेषण का समीकरण गलत लिखना या संतुलित न करना।
• आवश्यक परिस्थितियों के नाम छूट जाना।

Exam Tips:

a) उत्तर के साथ संतुलित रासायनिक समीकरण अवश्य लिखें।
b) आवश्यक परिस्थितियाँ और उपोत्पाद दोनों की अलग-अलग हेडिंग या बिंदु बनाएं।
c) यह परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 29: वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय होता है।

Answer:

वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में अंतर:
1. यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। | यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है।
2. गैसों का आदान - प्रदान वातावरण से होता है। | गैसों का आदान - प्रदान नहीं होता है।
3. श्वसन के उपरांत CO₂ तथा H₂O उत्सर्जित होते हैं। | श्वसन के उपरांत CO₂ तथा C₂H₅OH उत्सर्जित होते हैं।
4. अधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। | अपेक्षाकृत कम ऊर्जा उत्पन्न होती है।
अवायवीय श्वसन कुछ जलमुक्त पौधों की जड़ों में, कुछ परजीवी कीड़े में, जानवर की मांसपेशियों में और कुछ सूक्ष्म जीवों जैसे कि खमीर (यीस्ट) में होता है।

मुख्य बिंदु:

• वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकॉन्ड्रिया में होता है और अधिक ऊर्जा देता है।
• अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन के बिना होता है और इसमें कम ऊर्जा निकलती है।
• यीस्ट, कुछ बैक्टीरिया और भारी व्यायाम के दौरान हमारी पेशियाँ अवायवीय श्वसन करती हैं।

आम गलतियाँ:

• दोनों प्रकार के श्वसन में ऊर्जा की मात्रा (कम या ज्यादा) को गलत लिखना।
• उपपादों (Products) में अंतर स्पष्ट न करना।
• अवायवीय श्वसन करने वाले जीवों के नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) अंतर हमेशा तालिका (Table) बनाकर लिखें।
b) वायवीय में अधिक ऊर्जा और अवायवीय में कम ऊर्जा - इस बिंदु को विशेष रूप से दर्शाएँ।
c) यीस्ट और पेशियों का उदाहरण अवायवीय श्वसन के लिए जरूर दें।

 

Question 30: गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कुपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित है?

Answer:

फेफड़ों के अंदर गुब्बारे जैसी एक संरचना होती है जिसे कुपिका कहते हैं। इसका भीतरी भाग छोटी-छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाती है और ये नलिकाएँ एक विस्तृत सतह का निर्माण करती हैं जिससे गैसों का अधिकतम विनिमय हो सके। कुपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तृत जाल होता है। जब हम सांस लेते हैं तो हमारी वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है और वायु विस्तृत कुपिकाओं में भर जाती है। ये कुपिकाएँ फेफड़ों में बहुत कम जगह में स्थिति होती हैं लेकिन जब इनमें हवा भर जाती है तो ये फूलकर बड़े क्षेत्रफल में फैल जाती हैं और गैसों के विनिमय के लिए अधिकतम क्षेत्रफल प्रदान करती हैं।

मुख्य बिंदु:

• कुपिकाएँ गुब्बारे जैसी सूक्ष्म संरचनाएँ होती हैं जो फेफड़ों के भीतर सतही क्षेत्रफल बहुत अधिक बढ़ा देती हैं।
• इनकी दीवारें बहुत पतली होती हैं और उन पर रक्त केशिकाओं का घना जाल होता है।
• हवा भरने पर ये फैल जाती हैं जिससे गैसों (O₂ और CO₂) का विसरण आसानी से होता है।

आम गलतियाँ:

• कुपिकाओं की संरचना और रक्त वाहिकाओं के जाल का उल्लेख न करना।
• क्षेत्रफल बढ़ाने वाली विशेषता को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) 'पतली भित्ति', 'रक्त वाहिकाओं का जाल' और 'बड़ा क्षेत्रफल' - इन तीन मुख्य बिंदुओं को लिखें।
b) कुपिकाओं की संरचना को चित्र के साथ समझें।

 

Question 31: हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं?

Answer:

हीमोग्लोबिन का मुख्य कार्य हमारे शरीर की समस्त कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाना है। हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में समस्त भागों तक ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँचाया जा सकता है। जिसके कारण शरीर के विभिन्न अंगों को कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा नहीं मिल पाएगी और हमें कमजोरी तथा थकान का अनुभव होने लगता है।

मुख्य बिंदु:

• हीमोग्लोबिन रक्त का लाल वर्णक है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचाता है।
• इसकी कमी से रक्त की ऑक्सीजन वहन क्षमता घट जाती है जिसे एनीमिया (रक्तलल्पता) कहते हैं。
• ऊर्जा उत्पादन कम होने के कारण शरीर में थकान, कमजोरी और सुस्ती बनी रहती है।

आम गलतियाँ:

• हीमोग्लोबिन के कार्य को केवल 'रंग देना' मान लेना, ऑक्सीजन परिवहन न लिखना।
• एनीमिया रोग या थकान के वैज्ञानिक कारण को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) हीमोग्लोबिन को 'ऑक्सीजन वाहक' के रूप में परिभाषित करें।
b) इसकी कमी से होने वाले लक्षणों (थकान, कमजोरी, ऑक्सीजन की कमी) को स्पष्ट लिखें।

 

Question 32: मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?

Answer:

मनुष्य तथा अन्य कोशकीय जीवों में रक्त हृदय में दो बार प्रवाहित होता है इसलिए इस प्रक्रिया को दोहरा परिसंचरण कहते हैं। हृदय में चार कोष्ठकीय अंग होते हैं। इसके ऊपर दो कोष्ठ अंगों को अलिंद तथा नीचे के दो कोष्ठ अंगों को निलय कहते हैं।
आकृति का विवरण: मानव हृदय का योजनात्मक काट दृश्य जिसमें महाधमनी, फुफ्फुस धमनियां, महाशिरा, दायां और बायां अलिंद, दायां और बायां निलय तथा विभाजिका स्पष्ट रूप से दर्शाए गए हैं।
ऑक्सीजन प्रचुर रुधिर फुफ्फुस से हृदय में बाई ओर स्थित कोष्ठ (बायाँ अलिंद) में आता है। इस रुधिर को एकत्रित करते समय बायाँ अलिंद शिथिल रहता है। जब अगला कोष्ठ (बायाँ निलय) फैलता है तब यह संकुचित होता है जिससे रुधिर इसमें स्थानांतरित होता है। जब पेशीय बायाँ निलय संकुचित होता है, तब रुधिर शरीर में पंप हो जाता है। इस प्रकार जब दायाँ अलिंद फैलता है तो शरीर से विऑक्सीजनित रुधिर इसमें आ जाता है। जैसे ही दायाँ अलिंद संकुचित होता है, दायाँ निलय फैल جاتا है। यह रुधिर को दाहिने निलय में स्थानांतरित कर देता है। इस प्रकार सम्पूर्ण शरीर में हृदय से रक्त संचरण होता रहता है। यह इसलिए आवश्यक है ताकि शुद्ध और अशुद्ध रक्त आपस में न मिलें और शरीर को उच्च ऊर्जा मिल सके।

मुख्य बिंदु:

• एक चक्कर में रक्त हृदय से दो बार गुजरता है: एक बार फेफड़ों से (शुद्ध होने के लिए) और दूसरी बार शरीर के अंगों से।
• इसमें चार कोष्ठीय हृदय (दो अलिंद और दो निलय) होता है।
• यह प्रणाली ऑक्सीजनयुक्त और विऑक्सीजनित रक्त को मिलने से रोकती है, जिससे ऊर्जा दक्षता बढ़ती है.

आम गलतियाँ:

• दोहरे परिसंचरण का मार्ग (अलिंद और निलय के बीच का संचरण) ठीक से न समझाना।
• इसकी आवश्यकता (शुद्ध-अशुद्ध रक्त का अलग रहना) का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) 'दोहरा परिसंचरण' (Double circulation) को परिभाषित करते समय हृदय के चार कक्षों का जिक्र करें।
b) हृदय का नामांकित आरेख बनाने का अभ्यास करें।
c) यह दीर्घ उत्तरीय महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 33: जाइलम तथा फ़्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है?

Answer:

जाइलम तथा फ़्लोएम में पदार्थों के वहन में अंतर:
1. जाइलम पौधों में जल तथा खनिज लवण का वहन करता है। | फ़्लोएम पौधों में तैयार भोजन को विभिन्न भागों तक पहुँचाता है。
2. जल का वहन जड़ से ऊपर की ओर होता है। | पत्तियों में तैयार भोजन का वहन सभी दिशाओं में होता है。
3. जाइलम द्वारा जल का वहन साधारण भौतिक बलों जैसे वाष्पोत्सर्जन आदि द्वारा होता है। | फ़्लोएम द्वारा भोजन के वहन में ऊर्जा (ATP के रूप में) की आवश्यकता होती है।

मुख्य बिंदु:

• जाइलम जल और खनिजों को जड़ से पत्तियों तक ले जाता है; फ्लोएम भोजन को सभी दिशाओं में ले जाता है।
• जाइलम में परिवहन मुख्य रूप से भौतिक बलों (जैसे वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) से होता है।
• फ्लोएम में परिवहन के लिए ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता होती है।

आम गलतियाँ:

• जाइलम और फ्लोएम के पदार्थों और दिशाओं को आपस में मिला देना।
• ऊर्जा के उपयोग (ATP) का अंतर स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) अंतर हमेशा तालिका के रूप में लिखें।
b) पदार्थ, दिशा और ऊर्जा की आवश्यकता - इन तीन आधारों पर अंतर स्पष्ट करें।

 

Question 34: फुफ्फुस में कुपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना कीजिए।

Answer:

फुफ्फुस में कुपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि में तुलना:
1. फुफ्फुस में कुपिकाएँ छोटे - छोटे गुब्बारे जैसी संरचनाएँ होती हैं। | वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) नलिका के आकार के निस्यंदन एकक होते हैं。
2. कुपिकाओं की दीवारें एक कोशिका जितनी ही मोटी होती हैं और इसमें रक्त केशिकाओं का एक गुच्छा होता है। | फुफ्फुस की तरह ही, बहुत पतली भित्ति वाली रुधिर केशिकाओं का गुच्छा होता है。
3. कुपिकाएँ एक सतह उपलब्ध कराती हैं जिससे गैसों (CO₂ और O₂) का विनिमय होता है। | नाइट्रोजनई वर्ज्य पदार्थ जैसे यूरिया या यूरिक अम्ल आदि को छानकर अलग किया जाता है। ग्लूकोज, एमीनो अम्ल, लवण और प्रचुर मात्रा में जल का पुनरशोषण होता है।

आकृति का विवरण: फेफड़ों की कुपिकाओं (Alveoli) और नेफ्रॉन (वृक्काणु) की संरचनाओं का तुलनात्मक चित्रण।

मुख्य बिंदु:

• दोनों ही संरचनाएँ अपने-अपने तंत्र (श्वसन और उत्सर्जन) की कार्यात्मक और संरचनात्मक इकाइयाँ हैं।
• दोनों की भित्तियाँ बहुत पतली होती हैं और उन पर रक्त केशिकाओं का घना जाल होता है।
• कुपिकाएँ गैसों के विनिमय (O₂ और CO₂) का कार्य करती हैं, जबकि नेफ्रॉन रक्त को छानकर वर्ज्य पदार्थों को बाहर निकालते हैं और उपयोगी पदार्थों का पुनरशोषण करते हैं।

आम गलतियाँ:

• कुपिका और नेफ्रॉन के कार्यों को आपस में मिला देना।
• संरचनात्मक और क्रियात्मक अंतर को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) इस तुलना को तालिका के रूप में लिखें ताकि अंतर स्पष्ट दिखे।
b) कुपिका का संबंध श्वसन से और नेफ्रॉन का संबंध उत्सर्जन से है - यह मुख्य बात न भूलें।
c) दोनों के कार्य (गैस विनिमय बनाम निस्यंदन/पुनरशोषण) को स्पष्ट रूप से बिंदुवार लिखें।

 

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