NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 04 Carbon and its Compounds (कार्बन एवं उसके यौगिक) in Hindi

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Question 1: एथेन का आणविक सूत्र - C₂H₆ है। इसमें:
(a) 6 सहसंयोजक आबंध हैं
(b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं
(c) 8 सहसंयोजक आबंध हैं
(d) 9 सहसंयोजक आबंध हैं

Answer:

एथेन का सही उत्तर (b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं। एथेन (C₂H₆) के अणु में दो कार्बन परमाणु और छह हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। जब हम इसकी संरचना बनाते हैं, तो प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ एकल सहसंयोजक आबंध (C-H) बनाता है और दोनों कार्बन परमाणु आपस में एक एकल सहसंयोजक आबंध (C-C) द्वारा जुड़े होते हैं। इस प्रकार कुल 6 (C-H आबंध) + 1 (C-C आबंध) = 7 सहसंयोजक आबंध बनते हैं।

मुख्य बिंदु:

• एथेन में कार्बन-कार्बन के बीच एक एकल आबंध होता है।
• प्रत्येक कार्बन तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है।
• कुल सहसंयोजक आबंधों की संख्या गिनने के लिए सभी C-C और C-H आबंधों को जोड़ा जाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या को ही कुल आबंध मान लेना।
• कार्बन-कार्बन के बीच के आबंध को छोड़ देना।
• संरचना बनाए बिना केवल फार्मूले से अनुमान लगाना।

Exam Tips:

a) ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्नों में हमेशा अणु की संरचना (स्ट्रक्चर) रफ में बनाकर आबंध गिनें।
b) याद रखें कि एकल आबंध में 2 इलेक्ट्रॉन (एक युग्म) की साझेदारी होती है।
c) कार्बनिक यौगिकों के सामान्य सूत्रों का अभ्यास करें।

 

Question 2: ब्यूटेनोन चतुर् कार्बन यौगिक है जिसका प्राइमर प्रकारत्मक समूह:
(a) कार्बोक्सिलिक अम्ल
(b) एल्डिहाइड
(c) कीटोन
(d) ऐल्कोहॉल

Answer:

ब्यूटेनोन का सही उत्तर (c) कीटोन है। ब्यूटेनोन नाम के अंत में 'नोन' (one) प्रत्यय जुड़ा हुआ है, जो कीटोन प्रकारत्मक समूह (functional group) को दर्शाता है। कीटोन समूह में कार्बन परमाणु ऑक्सीजन के साथ द्विआबंध (C=O) द्वारा जुड़ा होता है और यह किसी श्रृंखला के मध्य में स्थित होता है। चार कार्बन वाले ब्यूटेन में जब कीटोन समूह जुड़ता है, तो उसे ब्यूटेनोन कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रत्यय '-नोन' (one) आईयूपीएसी (IUPAC) नामकरण पद्धति में कीटोन समूह के लिए प्रयोग होता है।
• कीटोन समूह हमेशा दो कार्बन के बीच (श्रृंखला के मध्य में) पाया जाता है।
• कार्बोक्सिलिक अम्ल के लिए '-ओइक अम्ल', एल्डिहाइड के लिए '-अल' और ऐल्कोहॉल के लिए '-ऑल' का प्रयोग होता है।

आम गलतियाँ:

• 'नोन' प्रत्यय को एल्डिहाइड या ऐल्कोहॉल समझ लेना।
• प्रकारत्मक समूहों के अनुलग्नकों (suffixes) में भ्रमित होना।
• नाम के अंत की ध्वनि पर ध्यान न देना।

Exam Tips:

a) प्रकारत्मक समूहों के नाम और उनके रासायनिक अनुलग्नक की सूची याद रखें।
b) ब्यूटेनोन में 'नोन' शब्द कीटोन की ओर संकेत करता है, इसे नोट कर लें।
c) नामकरण के नियमों का बार-बार अभ्यास करें।

 

Question 3: खाना बनाते समय यदि बर्तन की तली बाहर से काली हो रही है तो इसका मतलब है कि:
(a) भोजन पूरी तरह नहीं पका है।
(b) ईधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है।
(c) ईधन आर्द है।
(d) ईधन पूरी तरह से जल रहा है।

Answer:

इसका सही उत्तर (b) ईधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है। जब बर्तन की तली बाहर से काली होने लगती है, तो इसका अर्थ है कि बर्नर के छिद्र बंद हैं या पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है, जिसके कारण ईधन (जैसे एलपीजी) का अधूरा दहन हो रहा है। अधूरे दहन से कार्बन के काले कण (कजली या धुआँ) उत्पन्न होते हैं जो बर्तन की तली पर जमा हो जाते हैं। पूर्ण दहन होने पर नीली लौ निकलती है और तली काली नहीं होती।

मुख्य बिंदु:

• काले धब्बे अधूरे दहन (incomplete combustion) के प्रतीक हैं।
• पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने पर ईधन का पूर्ण दहन होता है और धुआँ नहीं बनता।
• स्टोव के छिद्रों की सफाई न होने से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि भोजन न पकने के कारण बर्तन काला होता है।
• ईधन के गीले होने को ही एकमात्र कारण मान लेना (जबकि मुख्य कारण अपर्याप्त ऑक्सीजन है)।
• दहन के प्रकार (पूर्ण और अधूरा) में अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) पूर्ण दहन और अपयप्त वायु की स्थिति में अंतर स्पष्ट रखें।
b) दैनिक जीवन के उदाहरणों से जुड़े विज्ञान के प्रश्नों को तार्किक रूप से हल करें।
c) उत्तर लिखते समय 'अधूरा दहन' शब्द का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 4: CH₃Cl में आबंध निर्माण का उपयोग कर सहसंयोजक आबंध की प्रकृति समझाइए।

Answer:

आकृति का विवरण: इसमें कार्बन केंद्र में चारों तरफ तीन हाइड्रोजन और एक क्लोरीन परमाणु के साथ इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना द्वारा एकल सहसंयोजक आबंध बनाते हुए दिखाया गया है।

क्लोरॉमेथेन (CH₃Cl) में कार्बन के पास संयोजकता कोष में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, हाइड्रोजन के पास 1 और क्लोरीन के पास 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं। कार्बन अपना अष्टक (octet) पूरा करने के लिए तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन और एक क्लोरीन परमाणु के साथ एक इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करता है। इस प्रकार इलेक्ट्रॉनों की परस्पर साझेदारी से बनने वाले आबंध को सहसंयोजक आबंध कहते हैं। चूँकि यहाँ इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान नहीं बल्कि केवल साझेदारी होती है, इसलिए ये यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं और इनके गलनांक व क्वथनांक कम होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• सहसंयोजक आबंध इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनते हैं।
• कार्बन अपनी चतुःसंयोजकता (tetravalency) के कारण चार सहसंयोजक आबंध बनाता है।
• क्लोरीन और हाइड्रोजन दोनों इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से अपना निकटतम उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त करते हैं।

आम गलतियाँ:

• आयनिक बंध और सहसंयोजक बंध की प्रक्रिया को मिला देना।
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या को गलत दर्शाना।
• साझेदारी की जगह इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण लिख देना।

Exam Tips:

a) इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाते समय क्रॉस (x) और डॉट (.) का स्पष्ट प्रयोग करें।
b) साझेदारी दिखाने वाले इलेक्ट्रॉनों को दोनों परमाणुओं के बीच साझा क्षेत्र में रखें।
c) सहसंयोजक यौगिकों के गुणधर्म भी संक्षेप में साथ लिख सकते हैं।

 

Question 5: इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए:
(a) एथेनॉईक अम्ल
(b) H₂S
(c) प्रोपेनोन
(d) F₂

Answer:

आकृति का विवरण: इसमें दिए गए चारों यौगिकों की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाएँ प्रदर्शित हैं, जहाँ संयोजी इलेक्ट्रॉनों को क्रॉस तथा डॉट द्वारा दर्शाया गया है।

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाने के लिए सबसे पहले परमाणुओं के बाहरी कोष (संयोजी इलेक्ट्रॉनों) को दर्शाया जाता है। (a) एथेनॉईक अम्ल (CH₃COOH) में दो कार्बन, चार हाइड्रोजन और दो ऑक्सीजन परमाणु सहसंयोजक आबंध बनाते हैं जहाँ कार्बन-ऑक्सीजन के बीच द्विआबंध भी होता है। (b) H₂S (हाइड्रोजन सल्फाइड) में सल्फर के बाहरी कोष में 6 और दो हाइड्रोजन के पास 1-1 इलेक्ट्रॉन होता है, जो एकल आबंध बनाते हैं। (c) प्रोपेनोन (CH₃COCH₃) में तीन कार्बन होते हैं, जिसमें बीच वाला कार्बन ऑक्सीजन के साथ द्विआबंध बनाता है। (d) F₂ (फ्लोरीन) अणु में दो फ्लोरिन परमाणु अपने एक-एक इलेक्ट्रॉन का साझा करके एकल आबंध बनाते हैं और अपना अष्टक पूरा करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• हाइड्रोजन अपना द्विक (duet) पूरा करता है, जबकि अन्य परमाणु अष्टक (octet) पूरा करते हैं।
• द्विआबंध (double bond) में दो-दो इलेक्ट्रॉनों का युग्म साझा होता है।
• एकल आबंध (single bond) में एक-एक इलेक्ट्रॉन का युग्म साझा होता है।

आम गलतियाँ:

• संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या गलत गिनना (जैसे ऑक्सीजन में 6 के बजाय कुछ और लिखना)।
• संरचना में अष्टक पूरा न होना।
• द्विआबंध वाले स्थानों पर केवल एक लकीर खींचना।

Exam Tips:

a) संरचना बनाने का अभ्यास परीक्षा से पहले कई बार करें।
b) साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों को वृत्ताकार घेरे में स्पष्ट दिखाएँ।
c) प्रत्येक तत्व के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज़ुबानी याद रखें।

 

Question 6: समजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण के साथ समझाइए।

Answer:

यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें कार्बन श्रृंखला में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का प्रकारत्मक समूह प्रतिस्थापित करने की विधि को समजातीय श्रेणी (homologous series) कहते हैं। इस श्रेणी के सभी यौगिकों का सामान्य सूत्र एक जैसा होता है और दो क्रमिक सदस्यों के बीच हमेशा -CH₂- इकाई का अंतर तथा आणविक द्रव्यमान में 14u का अंतर होता है। उदाहरण के लिए, ऐल्कोहॉल की समजातीय श्रेणी: मेथनॉल (CH₃OH), एथेनॉल (CH₃CH₂OH), प्रोपेनॉल (CH₃CH₂CH₂OH) आदि। रासायनिक गुण समान प्रकार के होते हैं क्योंकि प्रकारत्मक समूह समान रहता है।

मुख्य बिंदु:

• क्रमिक सदस्यों के बीच हमेशा -CH₂- समूह का अंतर होता है।
• सभी सदस्यों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं क्योंकि उनका प्रकारत्मक समूह एक ही होता है।
• अणुभार बढ़ने के साथ भौतिक गुणों (जैसे क्वथनांक और गलनांक) में क्रमिक परिवर्तन देखा जाता है।

आम गलतियाँ:

• -CH₂- अंतर के स्थान पर केवल कार्बन की संख्या का अंतर लिख देना।
• समजातीय श्रेणी और समावयवता (isomerism) को एक समझ लेना।
• उदाहरण में अलग-अलग प्रकारत्मक समूह के यौगिक लिख देना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय '-CH₂-' और '14u द्रव्यमान अंतर' का उल्लेख ज़रूर करें।
b) एल्केन, एल्कीन या एल्कोहॉल में से किसी एक का स्पष्ट उदाहरण दें।
c) यह प्रश्न अक्सर दो या तीन अंकों में पूछा जाता है, इसलिए परिभाषा और उदाहरण दोनों आवश्यक हैं।

 

Question 7: भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर एथेनॉल एवं एथेनॉईक अम्ल में आप कैसे अंतर करेंगे?

Answer:

एथेनॉल और एथेनॉईक अम्ल में भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर निम्नलिखित अंतर हैं: भौतिक गुणों में एथेनॉल की गंध शराब जैसी और स्वाद तीखा नहीं होता है, जबकि एथेनॉईक अम्ल की गंध सिरके जैसी और स्वाद खट्टा होता है। एथेनॉल का क्वथनांक 78.2°C है और यह उदासीन होता है, जबकि एथेनॉईक अम्ल का क्वथनांक 118°C है और यह नीले लिटमस को लाल कर देता है। रासायनिक गुणों में एथेनॉल सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करता, जबकि एथेनॉईक अम्ल NaOH के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाता है। इसके अतिरिक्त, एथेनॉईक अम्ल सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO₃) के साथ अभिक्रिया करके CO₂ गैस निकालता है, जो एथेनॉल नहीं करता।

मुख्य बिंदु:

• एथेनॉल उदासीन है, जबकि एथेनॉईक अम्ल अम्लीय प्रकृति का होता है।
• एथेनॉईक अम्ल सोडियम कार्बोनेट या हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ बुदबुदाहट के साथ CO₂ गैस देता है।
• दोनों के क्वथनांक और गंध में स्पष्ट अंतर होता है।

आम गलतियाँ:

• भौतिक और रासायनिक अंतरों को आपस में मिला देना।
• लिटमस पत्र के प्रभाव को गलत लिख देना।
• सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट परीक्षण को केवल एथेनॉल का गुण बता देना।

Exam Tips:

a) अंतर स्पष्ट करने के लिए हमेशा तालिका (table) का उपयोग करें।
b) रासायनिक समीकरण (chemical equations) भी साथ में लिखकर आएं ताकि पूरे अंक मिल सकें।
c) लिटमस परीक्षण और NaHCO₃ परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण हैं।

 

Question 8: जब साबुन को जल में डाला जाता है तो मिसेल का निर्माण क्यों होता है? क्या एथेनॉल जैसे दूसरे विलायकों में भी मिसेल का निर्माण होगा?

Answer:

जब साबुन को पानी में मिलाया जाता है, तो इसके अणु परस्पर एकत्रित होकर गोल गुच्छों का रूप धारण कर लेते हैं, जिसे मिसेल (micelle) कहते हैं। साबुन के अणु का एक लंबा हाइड्रोकार्बन सिरा जल-विरोधी (hydrophobic) होता है जो मैल (तेल) की ओर आकर्षित होता है और आयनिक सिरा जल-रागी (hydrophilic) होता है जो पानी की ओर रहता है। एथेनॉल जैसे दूसरे विलायकों में मिसेल का निर्माण नहीं होता है, क्योंकि एथेनॉल एक ध्रुवीय विलायक नहीं है और साबुन के हाइड्रोकार्बन तथा आयनिक दोनों भाग एथेनॉल में घुलनशील होते हैं, जिससे गुच्छे बनने की आवश्यकता ही नहीं रहती।

मुख्य बिंदु:

• मिसेल केवल जल जैसे ध्रुवीय विलायकों में ही बनता है।
• साबुन के अणु में एक जल-रागी और एक जल-विरोधी सिरा होता है।
• एथेनॉल में साबुन पूरी तरह घुल जाता है, अतः मिसेल नहीं बनता।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि हर विलायक में मिसेल बन सकता है।
• जल-रागी और जल-विरोधी सिरों के कार्यों को उल्टा लिख देना।
• मिसेल की संरचना को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) हाइड्रोफिलिक (जल-रागी) और हाइड्रोफोबिक (जल-विरोधी) शब्दों का सही प्रयोग करें।
b) कारण स्पष्ट रूप से लिखें कि एथेनॉल में साबुन घुल जाता है इसलिए मिसेल नहीं बनता।
c) साबुन की सफाई की क्रियाविधि से जुड़ा यह महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 9: कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में ईधन के रूप में क्यों किया जाता है?

Answer:

कार्बन और उसके अधिकांश यौगिकों को जलाने पर प्रचुर मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश (ऊर्जा) की प्राप्ति होती है। अधिकांश कार्बन यौगिकों के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड और जल उत्पन्न होते हैं और यह एक ऊष्माक्षेपी (exothermic) प्रक्रिया है। इसके अलावा, इनका ज्वलन ताप उपयुक्त होता है, इन्हें आसानी से भंडारित किया जा सकता है और इनसे मिलने वाली ऊर्जा की मात्रा बहुत अधिक होती है। इन सभी सुविधाजनक गुणों के कारण कार्बन और उसके यौगिकों (जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) का उपयोग बड़े पैमाने पर ईधन के रूप में किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• कार्बन यौगिक दहन पर भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
• इनका रख-रखाव और परिवहन करना आसान होता है।
• यह दहन क्रिया आसानी से नियंत्रित की जा सकती है।

आम गलतियाँ:

• केवल ऊष्मा उत्पन्न होने की बात लिखना, ऊर्जा के नियंत्रण और भंडारण का उल्लेख न करना।
• इसे रासायनिक अभिक्रिया के बजाय केवल भौतिक प्रक्रिया बता देना।

Exam Tips:

a) 'ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया' शब्द का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
b) जीवाश्म ईधन (Fossil fuels) का उदाहरण देकर उत्तर को प्रभावी बनाएं।
c) बिंदुवार कारण लिखने से परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

Question 10: कठोर जल को साबुन से उपचारित करने पर झाग के निर्माण को समझाइए।

Answer:

कठोर जल में कैल्शियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) के घुलनशील लवण (जैसे क्लोराइड और सल्फेट) प्रचुर मात्रा में होते हैं। जब कठोर जल में साबुन (जो सोडियम या पोटेशियम लवण होता है) मिलाया जाता है, तो साबुन इन कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ अभिक्रिया करके एक अघुलनशील पदार्थ बनाता है जिसे फेन या स्कम (scum) कहते हैं। इस अघुलनशील अवक्षेप के बनने के कारण साबुन की बड़ी मात्रा नष्ट हो जाती है और जब तक सारे कैल्शियम-मैग्नीशियम लवण अवक्षेपित नहीं हो जाते, तब तक पानी में झाग उत्पन्न नहीं होता है।

मुख्य बिंदु:

• कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण होते हैं।
• साबुन इन लवणों के साथ मिलकर अघुलनशील स्कम (अवक्षेप) बनाता है।
• जब तक पूरा लवण समाप्त नहीं होता, तब तक झाग नहीं बनता।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि कठोर जल में साबुन घुल ही नहीं सकता।
• स्कम (अघुलनशील पदार्थ) के निर्माण का जिक्र न करना।
• केवल यह कहना कि गंदे पानी में झाग नहीं बनता।

Exam Tips:

a) कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों की भूमिका को मुख्य रूप से दर्शाएँ।
b) 'स्कम' या 'अवक्षेप' शब्द का प्रयोग करना न भूलें।
c) यह रासायनिक अभिक्रिया पर आधारित तार्किक प्रश्न है।

 

Question 11: यदि आप लिटमस पत्र (लाल एवं नीला) से साबुन की जाँच करें तो आपका प्रेक्षण क्या होगा?

Answer:

साबुन प्रकृति में क्षारीय (alkaline) होता है, क्योंकि यह सामान्यतः प्रबल क्षार (जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड) और दुर्बल अम्ल की प्रतिक्रिया से बनता है। जब हम साबुन के जलीय विलयन की जाँच लाल लिटमस पत्र से करते हैं, तो लाल लिटमस नीला हो जाता है, जो यह दर्शाता है कि साबुन क्षारीय है। यदि हम नीले लिटमस पत्र से इसकी जाँच करेंगे, तो नीले लिटमस के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होगा क्योंकि नीला लिटमस क्षार में अपरिवर्तित रहता है।

मुख्य बिंदु:

• साबुन की प्रकृति क्षारीय होती है।
• लाल लिटमस पत्र नीले रंग में बदल जाता है।
• नीला लिटमस पत्र अपने नीले रंग को ही बनाए रखता है।

आम गलतियाँ:

• साबुन को अम्लीय समझ लेना।
• दोनों लिटमस पत्रों पर एक जैसा प्रभाव बता देना।
• रंग परिवर्तन को उल्टा लिख देना (जैसे नीले का लाल होना)।

Exam Tips:

a) अम्ल और क्षार के लिटमस पर प्रभाव का नियम हमेशा याद रखें (अनिला = अम्ल नीले को लाल करता है, छिला = क्षार लाल को नीला करता है)।
b) प्रेक्षण और उसका कारण दोनों स्पष्ट लिखें।
c) एक-दो वाक्यों में सटीक उत्तर दें।

 

Question 12: हाइड्रोजनीकरण क्या है? इसका औद्योगिक अनुप्रयोग क्या है?

Answer:

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जिसमें द्विआबंध या त्रिआबंध होते हैं) में निकेल या पैलेडियम जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस जोड़कर उन्हें संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एकल आबंध वाले) में बदलने की प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण (hydrogenation) कहते हैं। इसका सबसे बड़ा औद्योगिक अनुप्रयोग वनस्पति तेलों से वनस्पति घी (डालडा) का निर्माण करना है। असंतृप्त वनस्पति तेल स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छे माने जाते हैं, किंतु तरल होते हैं; हाइड्रोजनीकरण के द्वारा इन्हें ठोस या अर्ध-ठोस वनस्पति घी में बदला जाता है जो बाजार में आसानी से बिकता है।

मुख्य बिंदु:

• यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को संतृप्त हाइड्रोकार्बन में बदलने की विधि है।
• इसमें निकेल (Ni) या पैलेडियम (Pd) उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है।
• मुख्य औद्योगिक उपयोग वनस्पति तेल से वनस्पति घी बनाना है।

आम गलतियाँ:

• संतृप्त से असंतृप्त बनाने की प्रक्रिया लिख देना (जो कि इसके विपरीत है)।
• उत्प्रेरक का नाम (निकेल) लिखना भूल जाना।
• औद्योगिक अनुप्रयोग स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) अभिक्रिया का सामान्य समीकरण अवश्य बनाएं जिसमें उत्प्रेरक (Ni) ऊपर लिखा हो।
b) वनस्पति तेल (असंतृप्त) से वनस्पति घी (संतृप्त) का यह उदाहरण परीक्षा में जरूर लिखें।
c) यह बहुत बार पूछा जाने वाला महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 13: दिए गए हाइड्रोकार्बन: C₂H₆, C₃H₈, C₃H₆, C₂H₂ एवं CH₄ में किसने संकलन अभिक्रिया होती है?

Answer:

संकलन अभिक्रिया (addition reaction) केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्वनों (अर्थात जिनमें द्विआबंध या त्रिआबंध होते हैं) में होती है। दिए गए यौगिकों में C₃H₆ (प्रोपलीन - एल्कीन) और C₂H₂ (एथाइन - एल्काइन) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं, इसलिए इनमें संकलन अभिक्रिया होगी। इसके विपरीत, C₂H₆, C₃H₈ और CH₄ सभी संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) हैं, जो केवल प्रतिस्थापन अभिक्रिया देते हैं और संकलन अभिक्रिया नहीं दर्शाते।

मुख्य बिंदु:

• संकलन अभिक्रिया केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन और एल्काइन) देते हैं।
• संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) संकलन अभिक्रिया नहीं दिखाते हैं।
• C₃H₆ और C₂H₂ में क्रमशः द्विआबंध और त्रिआबंध उपस्थित होते हैं।

आम गलतियाँ:

• सभी यौगिकों में संकलन अभिक्रिया होना मान लेना।
• संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन की पहचान में गलती करना।
• फार्मूले देखकर उनके आबंधों का अनुमान न लगा पाना।

Exam Tips:

a) संतृप्त (CnH2n+2) और असंतृप्त (CnH2n या CnH2n-2) के सामान्य सूत्र याद रखें।
b) याद रखें कि 'कलन' या 'जोड़' केवल वहीं संभव है जहाँ आबंध टूटने की गुंजाइश (द्वि/त्रि आबंध) हो।
c) यौगिकों के नाम और प्रकार अलग से लिखकर दिखाएँ।

 

Question 14: मक्खन एवं खाना बनाने वाले तेल के बीच रासायनिक अंतर समझने के लिए एक परीक्षण बताइए।

Answer:

मक्खन एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन है जबकि खाना बनाने वाला तेल एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है। इस अंतर को समझने के लिए ब्रोमीन जल परीक्षण (Bromine water test) किया जाता है। जब हम तेल (असंतृप्त) में कुछ बूँदें ब्रोमीन जल की डालते हैं और हिलाते हैं, तो ब्रोमीन जल का भूरा/लाल रंग उड़ जाता है (रंगहीन हो जाता है), क्योंकि ब्रोमीन तेल के द्विआबंध के साथ जुड़ जाती है। इसके विपरीत, जब हम मक्खन (संतृप्त) में ब्रोमीन जल मिलाते हैं, तो ब्रोमीन जल का रंग उड़ता नहीं है और लाल रंग सुरक्षित रहता है।

मुख्य बिंदु:

• ब्रोमीन जल परीक्षण संतृप्त और असंतृप्त यौगिकों में अंतर करने का सबसे अच्छा तरीका है।
• असंतृप्त तेल ब्रोमीन जल के रंग को गायब (रंगहीन) कर देता है।
• संतृप्त मक्खन ब्रोमीन जल के रंग को प्रभावित नहीं करता।

आम गलतियाँ:

• मक्खन और तेल दोनों को एक ही प्रकार का यौगिक मान लेना।
• ब्रोमीन जल के रंग में होने वाले बदलाव को उल्टा लिख देना।
• परीक्षण का नाम (ब्रोमीन जल परीक्षण) स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्रायोगिक आधारित प्रश्नों में परीक्षण का नाम, प्रेक्षण और निष्कर्ष तीनों स्पष्ट लिखें।
b) तेल = असंतृप्त (रंग उड़ेगा), मक्खन = संतृप्त (रंग नहीं उड़ेगा) - यह बात गांठ बांध लें।
c) यह बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 15: साबुन की सफाई प्रक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।

Answer:

साबुन की सफाई प्रक्रिया मिसेल निर्माण पर आधारित होती है। जब साबुन को गंदे कपड़ों पर लगाया जाता है, तो साबुन के अणुओं का जल-विरोधी सिरा (हाइड्रोकार्बन पूँछ) तैलीय मैल की तरफ चिपक जाता है और जल-रागी सिरा (आयनिक सिरा) बाहर पानी की ओर रहता है। इससे एक गोलीय संरचना बनती है जिसे मिसेल कहते हैं। जब कपड़े को रगड़ा जाता है या पानी से धोया जाता है, तो ये मिसेल मैल के छोटे टुकड़ों को अपने अंदर जकड़कर पानी में खींच लेते हैं और पानी के साथ बह जाते हैं। इस प्रकार मैल कपड़े से अलग हो जाता है और कपड़ा साफ हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• सफाई क्रिया का मुख्य आधार 'मिसेल निर्माण' (micelle formation) है।
• हाइड्रोकार्बन सिरा मैल (तेल) से जुड़ता है और आयनिक सिरा पानी से जुड़ता है।
• रगड़ने या हिलाने से मैल मिसेल के रूप में पानी में घुल जाता है।

आम गलतियाँ:

• दोनों सिरों (जल-रागी और जल-विरोधी) के कार्य को आपस में बदल देना।
• मिसेल की भूमिका को स्पष्ट न करना।
• केवल यह लिख देना कि साबुन मैल को घोल देता है (जबकि यह मिसेल के माध्यम से खींचता है)।

Exam Tips:

a) इस प्रश्न का उत्तर हमेशा बिंदुवार या क्रमबद्ध चरणों में लिखें।
b) 'जल-रागी' और 'जल-विरोधी' शब्दों का प्रयोग उत्तर को और सटीक बनाता है।
c) डायग्राम (चित्र) यदि संभव हो तो मानसिक रूप से ध्यान रखें, हालांकि वर्णन ही मुख्य है।

 

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FAQs

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Are the Science NCERT solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 04 Carbon and its Compounds (कार्बन एवं उसके यौगिक) in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 04 Carbon and its Compounds (कार्बन एवं उसके यौगिक) in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 04 Carbon and its Compounds (कार्बन एवं उसके यौगिक) in Hindi in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Science. You can access NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 04 Carbon and its Compounds (कार्बन एवं उसके यौगिक) in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science NCERT solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 04 Carbon and its Compounds (कार्बन एवं उसके यौगिक) in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.