NCERT Solutions for Class 10 Science: Chapter 09 प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन
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Practice Class 10 Science Solutions: Chapter 09 प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन
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Question 1: अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
Answer:
अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष के समांतर चलने वाली प्रकाश की किरणें परावर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष के जिस बिंदु पर मिलती हैं, वह बिंदु अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहलाता है।
मुख्य बिंदु:
• मुख्य फोकस मुख्य अक्ष पर स्थित एक निश्चित बिंदु है।
• यह अवतल दर्पण के मामले में वास्तविक होता है क्योंकि किरणें वास्तव में मिलती हैं।
• फोकस दूरी (f), ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच की दूरी होती है।
आम गलतियाँ:
• उत्तल और अवतल दर्पण के फोकस की परिभाषा में अंतर न समझना।
• परावर्तन के बाद किरणों के मिलने की बात स्पष्ट न करना।
• मुख्य अक्ष का उल्लेख छोड़ देना।
Exam Tips:
a) परिभाषा लिखते समय 'मुख्य अक्ष के समांतर' और 'परावर्तन के पश्चात' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
b) अवतल दर्पण के लिए फोकस वास्तविक होता है, इसे याद रखें।
c) किरण आरेख बनाकर इस परिभाषा को आसानी से समझा जा सकता है।
Question 2: एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?
Answer:
हमें वक्रता त्रिज्या R = 20 cm दी गई है। हम जानते हैं कि गोलीय दर्पण की फोकस दूरी (f) वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।
f = R ÷ 2
f = 20 ÷ 2 = 10 cm
अतः, गोलीय दर्पण की फोकस दूरी 10 cm है।
मुख्य बिंदु:
• फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या में संबंध f = R/2 होता है।
• वक्रता त्रिज्या हमेशा फोकस दूरी से दोगुनी होती है।
• मान रखते समय मात्रक (cm) लिखना न भूलें।
आम गलतियाँ:
• सूत्र में गुणा और भाग में गलती करना (जैसे 20 को 2 से गुणा कर देना)।
• उत्तर में उचित मात्रक (cm) न लिखना।
• चिह्न परिपाटी का ध्यान न रखना यदि चिह्न आवश्यक हो।
Exam Tips:
a) सबसे पहले दिया गया मान लिखें और सूत्र स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
b) गणना के प्रत्येक चरण को अलग पंक्ति में लिखें।
c) इस प्रकार के छोटे आंकिक प्रश्न एक या दो अंक में जरूर पूछे जाते हैं।
Question 3: उस दर्पण का नाम बताइए जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सके।
Answer:
अवतल दर्पण किसी बिंब का सीधा तथा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बना सकता है। जब बिंब को अवतल दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है, तो दर्पण के पीछे एक आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• केवल अवतल दर्पण ही वास्तविक बिंब का सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बना सकता है।
• यह स्थिति तब बनती है जब वस्तु फोकस और ध्रुव के बीच हो।
• समतल और उत्तल दर्पण कभी भी आवर्धित प्रतिबिंब नहीं बनाते।
आम गलतियाँ:
• उत्तल दर्पण को इसका उत्तर लिख देना (उत्तल दर्पण हमेशा छोटा प्रतिबिंब बनाता है)।
• वस्तु की स्थिति का उल्लेख न करना।
• प्रतिबिंब की प्रकृति (आभासी) को भूल जाना।
Exam Tips:
a) दर्पणों के उपयोग और उनके द्वारा बनने वाले प्रतिबिंबों की सारणी याद रखें।
b) सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब केवल अवतल दर्पण की विशेष स्थिति में बनता है।
c) उत्तर में दर्पण के साथ-साथ वस्तु की स्थिति भी बताएँ तो उत्तर अधिक प्रभावी होता है।
Question 4: हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्य-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?
Answer:
हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्य-दृश्य (rear-view) दर्पण के रूप में वरीयता देते हैं क्योंकि ये सदैव सीधा प्रतिबिंब बनाते हैं और इनका दृष्टि क्षेत्र बहुत अधिक होता है क्योंकि ये बाहर की ओर वक्रित होते हैं। इस प्रकार, उत्तल दर्पण ड्राइवर को अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देखने में समर्थ बनाते हैं, जिससे वाहन चलाना सुरक्षित हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• उत्तल दर्पण हमेशा सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाते हैं।
• इनका दृष्टि-क्षेत्र (field of view) बहुत विस्तृत होता है।
• ये ड्राइवर को पीछे के वाहनों का स्पष्ट और चौड़ा दृश्य दिखाते हैं।
आम गलतियाँ:
• अवतल और उत्तल दर्पण के कार्यों को आपस में मिला देना।
• केवल 'सीधा प्रतिबिंब' लिखकर दृष्टि-क्षेत्र का मुख्य कारण छोड़ देना।
• पश्य-दृश्य दर्पण का अर्थ न समझना।
Exam Tips:
a) कारण स्पष्ट करते समय 'विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र' शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) यह बोर्ड परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैद्धांतिक प्रश्न है।
c) दोनों मुख्य कारण (सीधा प्रतिबिंब + बड़ा दृष्टि-क्षेत्र) बिंदुवार लिखें।
Question 5: उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता-त्रिज्या 32 cm है।
Answer:
हमें उत्तल दर्पण की वक्रता-त्रिज्या R = +32 cm दी गई है (उत्तल दर्पण के लिए वक्रता त्रिज्या धनात्मक होती है)।
हम जानते हैं कि फोकस दूरी f = R ÷ 2
f = 32 ÷ 2 = 16 cm
अतः, गोलीय दर्पण (उत्तल दर्पण) की फोकस दूरी +16 cm है।
मुख्य बिंदु:
• उत्तल दर्पण की फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या दोनों धनात्मक होती हैं।
• सूत्र f = R/2 का उपयोग किया जाता है।
• परिणाम में सही मात्रक लगाना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• चिह्न परिपाटी को नजरअंदाज करना।
• भाग देने में साधारण गणितीय त्रुटि करना।
• सूत्र न लिखना।
Exam Tips:
a) आंकिक प्रश्नों में सबसे पहले 'दिया है' लिखकर मानों को चिह्न के साथ लिखें।
b) सूत्र लिखकर ही मान दर्ज करें।
c) अंत में मात्रक (cm) अवश्य लिखें।
Question 6: कोई अवतल दर्पण अपने सामने 10 cm दूरी पर रखे किसी बिंब का तीन गुना आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है?
Answer:
वास्तविक प्रतिबिंब के लिए आवर्धन क्षमता ऋणात्मक होती है।
अवतल दर्पण का आवर्धन m = -3
बिंब की दर्पण से दूरी u = -10 cm
हम जानते हैं कि आवर्धन सूत्र m = -v ÷ u होता है
-3 = -(v) ÷ (-10)
-3 = v ÷ 10
v = -30 cm
अतः, प्रतिबिंब दर्पण के सामने 30 cm की दूरी पर है।
मुख्य बिंदु:
• वास्तविक प्रतिबिंब के लिए आवर्धन (m) ऋणात्मक होता है।
• बिंब की दूरी (u) हमेशा ऋणात्मक होती है।
• m = -v/u सूत्र का सही उपयोग करना जरूरी है।
आम गलतियाँ:
• वास्तविक प्रतिबिंब के लिए m को धनात्मक मान लेना।
• चिह्न परिपाटी भूल जाना (u को ऋणात्मक न रखना)।
• पक्षांतर करते समय चिह्न की गलती करना।
Exam Tips:
a) वास्तविक प्रतिबिंब का नाम आते ही m का मान ऋणात्मक (-m) लें।
b) चिह्न परिपाटी के नियमों को हर आंकिक प्रश्न में पहले लागू करें।
c) उत्तर के साथ यह भी बताएँ कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने (ऋणात्मक दिशा में) बन रहा है।
Question 7: वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी? बताइए क्यों?
Answer:
वायु में गमन करती प्रकाश की किरण यदि जल में तिरछी प्रवेश करती है तो वह अभिलंब की ओर झुकेगी। इसका कारण यह है कि वायु विरल माध्यम है और जल सघन माध्यम है। जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह प्रकाश के अपवर्तन के नियमों के अनुसार अभिलंब की ओर झुक जाती है।
मुख्य बिंदु:
• वायु विरल माध्यम है और जल सघन माध्यम है।
• विरल से सघन माध्यम में जाने पर प्रकाश अभिलंब की ओर झुकता है।
• यह घटना प्रकाश के अपवर्तन के कारण होती है।
आम गलतियाँ:
• विरल और सघन माध्यम की पहचान में गलती करना।
• अभिलंब की ओर झुकने के बजाय दूर हटने का लिखना।
• अपवर्तन के कारण को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) माध्यमों के घनत्व (optical density) को हमेशा ध्यान में रखें - विरल से सघन = अभिलंब की ओर।
b) कारण में अपवर्तन और माध्यम के घनत्व का उल्लेख अवश्य करें।
c) इस तरह के वैचारिक प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
Question 8: प्रकाश वायु में 1.50 अपवर्तनांक के कांच की प्लेट में प्रवेश करता है। कांच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है।
Answer:
कांच का अपवर्तनांक n = 1.50
निर्वात में प्रकाश की चाल c = 3 × 10⁸ m/s
अपवर्तनांक का सूत्र है: n = (निर्वात में प्रकाश की चाल) ÷ (माध्यम में प्रकाश की चाल)
1.50 = (3 × 10⁸) ÷ (कांच में प्रकाश की चाल)
कांच में प्रकाश की चाल = (3 × 10⁸) ÷ 1.50
कांच में प्रकाश की चाल = 2 × 10⁸ m/s
अतः, कांच में प्रकाश की चाल 2 × 10⁸ m/s है।
मुख्य बिंदु:
• अपवर्तनांक n = c / v होता है।
• निर्वात में प्रकाश की चाल सर्वाधिक (3 × 10⁸ m/s) होती है।
• चाल का मात्रक m/s लिखना अनिवार्य है।
आम गलतियाँ:
• सूत्र में चाल को ऊपर और अपवर्तनांक को नीचे रखने में भ्रमित होना।
• दशमलव और घात की गणना में गलती करना।
• उत्तर में मात्रक छोड़ देना।
Exam Tips:
a) अपवर्तनांक का यह मूल सूत्र अच्छी तरह याद रखें।
b) गणना को सरल बनाने के लिए दशमलव हटाकर हल करें।
c) आंकिक प्रश्न हल करने के बाद अंतिम उत्तर को बॉक्स में बंद करें।
Question 9: सारणी 9.3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
Answer:
सारणी 9.3 के अनुसार, अधिकतम प्रकाशिक घनत्व का माध्यम 'हीरा' है क्योंकि इसका अपवर्तनांक सबसे अधिक (2.42) है। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व का माध्यम 'वायु' है क्योंकि इसका अपवर्तनांक सबसे कम (लगभग 1.0003) है।
मुख्य बिंदु:
• प्रकाशिक घनत्व सीधे अपवर्तनांक के समानुपाती होता है।
• जिस माध्यम का अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है, उसका प्रकाशिक घनत्व भी सबसे अधिक होता है।
• हीरे का अपवर्तनांक 2.42 और वायु का 1.0003 होता है।
आम गलतियाँ:
• प्रकाशिक घनत्व और द्रव्यमान घनत्व को एक ही समझ लेना।
• सारणी के मानों को गलत पढ़ना।
• न्यूनतम और अधिकतम को आपस में उलट देना।
Exam Tips:
a) याद रखें: अधिक अपवर्तनांक = अधिक प्रकाशिक घनत्व।
b) हीरा सबसे अधिक और वायु सबसे कम प्रकाशिक घनत्व वाला माध्यम है।
c) यह प्रश्न सारणी आधारित अवलोकन पर आधारित है।
Question 10: आपको किरोसिन, टर्पाइन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है? सारणी 9.3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।
Answer:
प्रकाश की चाल माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है। जिस पदार्थ का अपवर्तनांक सबसे कम होता है, उसमें प्रकाश की चाल सबसे अधिक होती है। सारणी के अनुसार जल का अपवर्तनांक 1.33 है, किरोसिन का 1.44 है तथा टर्पाइन के तेल का 1.47 है। चूंकि जल का अपवर्तनांक सबसे कम है, इसलिए प्रकाश जल में सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है।
मुख्य बिंदु:
• प्रकाश की चाल और अपवर्तनांक में व्युत्क्रमानुसंबंध होता है (चाल अपवर्तनांक के विलोमानुपाती होती है)।
• जल का अपवर्तनांक (1.33) किरोसिन (1.44) और टर्पाइन (1.47) से कम है।
• कम अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रकाश तेज चलता है।
आम गलतियाँ:
• अधिक अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रकाश की चाल अधिक मान लेना।
• सारणी के मानों की तुलना गलत करना।
• अपवर्तनांक और चाल के संबंध को भूल जाना।
Exam Tips:
a) नियम याद रखें: अपवर्तनांक जितना कम होगा, प्रकाश की चाल उतनी ही अधिक होगी।
b) दिए गए माध्यमों के अपवर्तनांक की तुलना पहले लिखें।
c) अपना निष्कर्ष स्पष्ट शब्दों में दें।
Question 11: हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?
Answer:
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का अभिप्राय यह है कि निर्वात में प्रकाश की चाल और हीरे में प्रकाश की चाल का अनुपात 2.42 है। इसका अर्थ यह भी है कि हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात में प्रकाश की चाल की तुलना में 2.42 गुना कम हो जाती है।
मुख्य बिंदु:
• अपवर्तनांक यह बताता है कि प्रकाश की चाल निर्वात की तुलना में किसी माध्यम में कितनी कम हो जाती है।
• हीरे का उच्च अपवर्तनांक 2.42 है।
• सूत्र n = c / v से इसकी पुष्टि होती है।
आम गलतियाँ:
• इसे हीरे के घनत्व से जोड़ देना।
• यह समझ लेना कि हीरे में प्रकाश 2.42 गुना तेज चलता है (जबकि चाल कम होती है)।
• परिभाषा को अपूर्ण लिखना।
Exam Tips:
a) 'अपवर्तनांक का अर्थ' स्पष्ट करते समय निर्वात और माध्यम की चाल के अनुपात का जिक्र करें।
b) यह एक मानक सैद्धांतिक प्रश्न है।
c) उत्तर में 'गुना कम हो जाती है' बात को स्पष्ट लिखें।
Question 12: किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।
Answer:
1 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर होती है।
लेंस की क्षमता (P) = 1 ÷ (फोकस दूरी मीटर में)
अर्थात, यदि किसी लेंस की फोकस दूरी 1 m है, तो उसकी क्षमता 1 D होगी।
मुख्य बिंदु:
• लेंस की क्षमता का मात्रक डाइऑप्टर (D) है।
• P = 1 / f(m) सूत्र होता है।
• फोकस दूरी हमेशा मीटर में होनी चाहिए।
आम गलतियाँ:
• फोकस दूरी सेंटीमीटर में लेकर डाइऑप्टर निकाल देना।
• परिभाषा में '1 मीटर' का उल्लेख न करना।
• मात्रक D लिखना भूल जाना।
Exam Tips:
a) परिभाषा के साथ इसका सूत्र P = 1/f अवश्य लिखें।
b) याद रखें कि सेंटीमीटर को मीटर में बदलना जरूरी है।
c) 1 डाइऑप्टर की परिभाषा बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाती है।
Question 13: कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब उस लेंस से 50 cm दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिंब उसी साइज़ का बन रहा है जिस साइज़ का बिंब है। लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिए।
Answer:
प्रतिबिंब की लेंस से दूरी v = 50 cm
चूंकि प्रतिबिंब उसी साइज का बनता है जिस साइज का बिंब है, इसलिए आवर्धन m = -1 होगा।
हम जानते हैं कि लेंस के लिए आवर्धन m = v ÷ u होता है
-1 = 50 ÷ u
u = -50 cm
अतः, सुई उत्तल लेंस के सामने 50 cm की दूरी पर रखी है (अर्थात 2F पर)।
लेंस सूत्र 1/f = 1/v - 1/u से:
1/f = 1/50 - 1/(-50) = 1/50 + 1/50 = 2/50 = 1/25
f = 25 cm = 0.25 m
लेंस की क्षमता P = 1 ÷ f(m) = 1 ÷ 0.25 = +4 D
अतः लेंस की क्षमता +4 डाइऑप्टर है।
मुख्य बिंदु:
• समान आकार का वास्तविक प्रतिबिंब मिलने पर m = -1 होता है।
• ऐसी स्थिति में वस्तु 2F पर और प्रतिबिंब दूसरी ओर 2F पर बनता है।
• क्षमता निकालने के लिए फोकस दूरी को मीटर में बदलना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• आवर्धन m का मान धनात्मक ले लेना।
• फोकस दूरी सेंटीमीटर से मीटर में बदले बिना क्षमता निकालना।
• लेंस सूत्र में चिह्नों की गलती करना।
Exam Tips:
a) प्रश्न के दो भाग हैं - पहले वस्तु की स्थिति ज्ञात करें, फिर क्षमता निकालें।
b) उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक होती है, इसे उत्तर में दर्शाएँ।
c) स्टेप-बाय-स्टेप हल करने से पूरे अंक मिलते हैं।
Question 14: 2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
Answer:
अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है, इसलिए f = -2 m
लेंस की क्षमता P = 1 ÷ f(m)
P = 1 ÷ (-2) = -0.5 D
अतः, 2 m फोकस दूरी वाले अवतल लेंस की क्षमता -0.5 डाइऑप्टर है।
मुख्य बिंदु:
• अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।
• लेंस की क्षमता का सूत्र P = 1/f होता है।
• क्षमता का मात्रक डाइऑप्टर (D) है।
आम गलतियाँ:
• अवतल लेंस की फोकस दूरी को धनात्मक मान लेना।
• ऋणात्मक चिह्न (-0.5) लगाना भूल जाना।
• मात्रक न लिखना।
Exam Tips:
a) अवतल लेंस का नाम आते ही फोकस दूरी और क्षमता में ऋण चिह्न का ध्यान रखें।
b) यह बहुत सरल प्रश्न है लेकिन चिह्न की गलती से अंक कट सकते हैं।
c) सूत्र लिखकर मान रखना एक अच्छी आदत है।
Question 15: निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है? (a) जल (b) कांच (c) प्लास्टिक (d) मिट्टी
Answer:
(d) मिट्टी
स्पष्टीकरण: लेंस बनाने के लिए माध्यम का पारदर्शी होना आवश्यक है। जल, कांच और प्लास्टिक पारदर्शी पदार्थ हैं जिनसे अपवर्तन हो सकता है, परंतु मिट्टी अपारदर्शी होती है, इसलिए इससे लेंस नहीं बनाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• लेंस पारदर्शी पदार्थों से बनते हैं।
• जल, कांच और प्लास्टिक पारदर्शी हैं।
• मिट्टी अपारदर्शी होने के कारण प्रकाश को आर-पार नहीं जाने देती।
आम गलतियाँ:
• विकल्प को बिना पढ़े जल्दबाजी में उत्तर देना।
• पारदर्शी और अपारदर्शी का अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) पारदर्शी माध्यम ही लेंस निर्माण के लिए उपयुक्त होते हैं।
c) सही विकल्प के साथ उसका कारण भी दिमाग में स्पष्ट रखें।
Question 16: किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?
Answer:
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच
स्पष्टीकरण: अवतल दर्पण की केवल एक ही स्थिति (जब वस्तु ध्रुव P और फोकस F के बीच होती है) में प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बिंब से बड़ा (आवर्धित) बनता है।
मुख्य बिंदु:
• यह अवतल दर्पण की विशेष स्थिति है।
• वस्तु ध्रुव और फोकस के बीच होने पर दर्पण के पीछे आभासी प्रतिबिंब बनता है।
• अन्य सभी स्थितियों में अवतल दर्पण वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है।
आम गलतियाँ:
• फोकस और वक्रता केंद्र के बीच की स्थिति चुन लेना।
• वास्तविक और आभासी प्रतिबिंब की स्थितियों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) अवतल दर्पण के सभी 6 किरण आरेखों की स्थिति और प्रतिबिंब की प्रकृति याद रखें।
b) आभासी और सीधा प्रतिबिंब केवल तभी बनता है जब वस्तु बहुत पास (F और P के बीच) हो।
c) यह बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाने वाला बहुविकल्पीय प्रश्न है।
Question 17: किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?
Answer:
(b) फोकस दूरी की दुगुनी दूरी पर
स्पष्टीकरण: जब किसी बिंब को उत्तल लेंस के सामने उसकी फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर (अर्थात 2F पर) रखा जाता है, तो उसका वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 2F पर बनता है।
मुख्य बिंदु:
• उत्तल लेंस में समान आकार का प्रतिबिंब तभी बनता है जब वस्तु 2F पर हो।
• इस स्थिति में आवर्धन m = -1 होता है।
• प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बिल्कुल बराबर होता है।
आम गलतियाँ:
• मुख्य फोकस पर वस्तु को रख देना (जहाँ अनंत पर प्रतिबिंब बनता है)।
• अनंत पर वस्तु रख देना।
Exam Tips:
a) लेंस और दर्पण दोनों के लिए समान आकार के प्रतिबिंब की स्थिति याद रखें।
b) उत्तल लेंस के लिए यह स्थिति 2F पर होती है।
c) अवधारणा स्पष्ट होने पर ऐसे प्रश्न आसानी से हल हो जाते हैं।
Question 18: किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरीयाँ - 15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं –
(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल
Answer:
(a) दोनों अवतल
स्पष्टीकरण: चिन्ह परिपाटी के अनुसार, अवतल दर्पण और अवतल लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं। चूँकि यहाँ फोकस दूरी -15 cm (ऋणात्मक) दी गई है, अतः दोनों ही अवतल होंगे।
मुख्य बिंदु:
• अवतल दर्पण और अवतल लेंस दोनों की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।
• उत्तल दर्पण और उत्तल लेंस दोनों की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
• चिह्न देखकर यंत्र का प्रकार पहचाना जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• ऋणात्मक चिह्न के नियम को भूल जाना।
• लेंस और दर्पण के चिह्नों को मिला देना।
Exam Tips:
a) हमेशा याद रखें: अवतल = ऋणात्मक फोकस दूरी, उत्तल = धनात्मक फोकस दूरी।
b) प्रश्न में दिया गया ऋण चिह्न ही सही उत्तर की कुंजी है।
c) यह वैचारिक प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 19: किसी दर्पण से आप चाहे जितनी दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है –
(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल
Answer:
(d) या तो समतल अथवा उत्तल
स्पष्टीकरण: समतल दर्पण हमेशा सीधा और समान आकार का प्रतिबिंब बनाता है, जबकि उत्तल दर्पण हमेशा सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। इसलिए दोनों ही स्थितियों में प्रतिबिंब सदैव सीधा बनता है, जबकि अवतल दर्पण उल्टा प्रतिबिंब भी बना सकता है।
मुख्य बिंदु:
• समतल दर्पण और उत्तल दर्पण दोनों सदैव सीधे प्रतिबिंब बनाते हैं।
• अवतल दर्पण वास्तविक और उल्टे प्रतिबिंब भी बनाता है।
• 'चाहे जितनी दूरी पर खड़े हों' यह शर्त समतल और उत्तल दोनों पर लागू होती है।
आम गलतियाँ:
• केवल समतल या केवल उत्तल चुन लेना।
• अवतल दर्पण की विशेषताओं को भूल जाना।
Exam Tips:
a) 'सदैव सीधा' शब्द देखते ही समतल और उत्तल दोनों विकल्पों पर विचार करें।
b) अवतल दर्पण में उल्टे प्रतिबिंब बनने की संभावना होती है।
c) बहुविकल्पीय प्रश्न में सटीक विकल्प चुनें।
Question 20: किसी शब्दकोश (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
Answer:
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
स्पष्टीकरण: छोटे अक्षरों को बड़ा देखने (आवर्धित करने) के लिए आवर्धक लेंस (magnifying glass) की आवश्यकता होती है, जो उत्तल लेंस होता है। जितनी कम फोकस दूरी होगी, लेंस की आवर्धन क्षमता उतनी ही अधिक होगी। इसलिए 5 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस सबसे उपयुक्त है।
मुख्य बिंदु:
• छोटे अक्षरों को पढ़ने के लिए उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है।
• कम फोकस दूरी होने से आवर्धन क्षमता बढ़ जाती है।
• 5 cm फोकस दूरी की क्षमता 50 cm की तुलना में अधिक आवर्धन देगी।
आम गलतियाँ:
• अधिक फोकस दूरी (50 cm) वाला लेंस चुन लेना।
• अवतल लेंस का चयन कर लेना।
Exam Tips:
a) याद रखें कि आवर्धन क्षमता फोकस दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है (P = 1/f)।
b) छोटे अक्षरों को बड़ा देखने के लिए कम फोकस दूरी वाला उत्तल लेंस चाहिए।
c) यह व्यावहारिक अनुप्रयोग पर आधारित प्रश्न है।
Question 21: 15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर (range) क्या होना चाहिए? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी है? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है अथवा छोटा? इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने की एक किरण आरेख बनाइए।
Answer:
आकृति का विवरण: अवतल दर्पण के सामने ध्रुव और फोकस के बीच रखी वस्तु का किरण आरेख, जिसमें दर्पण के पीछे आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बनता हुआ दिखाया गया है।
बिंब को अवतल दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखना होगा, अर्थात बिंब की दर्पण से दूरी 0 cm से अधिक तथा 15 cm से कम (0 cm - 15 cm के बीच) होनी चाहिए। इस स्थिति में प्रतिबिंब की प्रकृति आभासी तथा सीधी होगी। प्रतिबिंब बिंब से आकार में बड़ा (आवर्धित) होगा।
मुख्य बिंदु:
• सीधा प्रतिबिंब पाने के लिए वस्तु को फोकस (15 cm) के अंदर रखना होगा।
• इस स्थिति में प्रतिबिंब आभासी और बड़ा बनता है।
• किरण आरेख में आभासी किरणों को डॉटेड लाइन से दर्शाया जाता है।
आम गलतियाँ:
• वस्तु को 15 cm से अधिक दूरी पर रख देना (जहाँ वास्तविक प्रतिबिंब बनता है)।
• प्रतिबिंब की प्रकृति आभासी के बजाय वास्तविक लिख देना।
Exam Tips:
a) इस प्रश्न में वस्तु की दूरी, प्रतिबिंब की प्रकृति, आकार और किरण आरेख - चारों भागों का उत्तर देना है।
b) किरण आरेख बनाते समय तीर के निशानों का विशेष ध्यान रखें।
c) फोकस दूरी 15 cm है, इसलिए दूरी 0 से 15 के बीच होगी।
Question 22: निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए –
(a) किसी कार का अग्र-दीप (हैड-लाइट)
(b) किसी वाहन का पार्श्व/पश्य-दृश्य दर्पण
(c) सौर भट्टी
अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।
Answer:
(a) कार के अग्र-दीप (हैड-लाइट) में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है क्योंकि बल्ब को अवतल दर्पण के फोकस पर रखने से परावर्तन के पश्चात प्रकाश की शक्तिशाली समांतर किरण पुंज प्राप्त होती है जो दूर तक प्रकाश डालती है।
(b) वाहन के पश्य-दृश्य दर्पण में उत्तल दर्पण का प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह सदैव सीधा प्रतिबिंब बनाता है और इसका दृष्टि-क्षेत्र बहुत अधिक होता है जिससे पीछे का विस्तृत यातायात दिखाई देता है।
(c) सौर भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह सूर्य से आने वाली समांतर किरणों को एक बिंदु (फोकस) पर केंद्रित कर देता है जिससे अत्यधिक ऊष्मा प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• हैड-लाइट और सौर भट्टी में अवतल दर्पण (अभिसारी) का उपयोग होता है।
• पश्य-दृश्य दर्पण में उत्तल दर्पण (अपसारी) का उपयोग होता है।
• प्रत्येक के उपयोग का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट होना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• दर्पणों के नाम आपस में बदल देना।
• कारण सही से स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) दर्पणों के दैनिक जीवन के उपयोग परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
b) प्रत्येक भाग का कारण एक या दो वाक्यों में जरूर लिखें।
c) अवतल दर्पण केंद्रित करता है और उत्तल दर्पण फैलाता है - इस सिद्धांत को याद रखें।
Question 23: किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बना पाएगा? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
Answer:
हाँ, उत्तल लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बना पाएगा, भले ही उसका आधा भाग काले कागज से ढक दिया गया हो। जब लेंस के आधे भाग को ढका जाता है, तो शेष खुले हुए भाग से आने वाली प्रकाश किरणें अपवर्तन के पश्चात बिंब का पूरा प्रतिबिंब बनाती हैं। हालांकि, लेंस से बनने वाले प्रतिबिंब की तीव्रता (चमक) आधी हो जाएगी क्योंकि अब लेंस से गुजरने वाला प्रकाश आधा ही रह जाता है।
मुख्य बिंदु:
• पूरा प्रतिबिंब बनता है, अधूरा नहीं।
• प्रतिबिंब की चमक या तीव्रता कम हो जाती है।
• लेंस का हर हिस्सा वस्तु के हर भाग का प्रतिबिंब बना सकता है।
आम गलतियाँ:
• यह समझ लेना कि आधा लेंस ढकने से आधा प्रतिबिंब ही बनेगा।
• तीव्रता कम होने और प्रतिबिंब गायब होने में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) मुख्य बात याद रखें: प्रतिबिंब पूरा बनता है लेकिन उसकी तीव्रता (brightness) कम हो जाती है।
b) यह वैचारिक प्रश्न छात्रों की समझ परखने के लिए पूछा जाता है।
c) कारण स्पष्ट रूप से लिखें कि प्रकाश किरणें शेष भाग से अपवर्तित होकर पूरा प्रतिबिंब बनाती हैं।
Question 24: 5 cm लंबा कोई बिंब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति, साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
Answer:
आकृति का विवरण: 25 cm दूर रखी 5 cm लंबी वस्तु का 10 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस द्वारा अपवर्तन दर्शाते हुए वास्तविक, उल्टे और छोटे प्रतिबिंब का किरण आरेख।
बिंब की ऊँचाई h = 5 cm
लेंस की फोकस दूरी f = +10 cm (उत्तल/अभिसारी लेंस)
बिंब की लेंस से दूरी u = -25 cm
लेंस सूत्र 1/f = 1/v - 1/u से:
1/v = 1/f + 1/u
1/v = 1/10 + 1/(-25) = 1/10 - 1/25 = (5 - 2) ÷ 50 = 3 ÷ 50
v = 50 ÷ 3 = 16.67 cm (प्रतिबिंब लेंस के पीछे 16.67 cm पर है)
आवर्धन m = h'/h = v/u
h' = (v ÷ u) × h = (16.67 ÷ (-25)) × 5 = -3.33 cm
अतः, प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा है, इसकी ऊँचाई 3.33 cm है और यह लेंस से 16.67 cm की दूरी पर बनता है।
मुख्य बिंदु:
• अभिसारी लेंस उत्तल लेंस होता है जिसकी फोकस दूरी धनात्मक होती है।
• लेंस सूत्र में मान रखते समय चिह्न परिपाटी का पालन करें।
• ऋणात्मक h' यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब उल्टा और वास्तविक है।
आम गलतियाँ:
• u का मान ऋणात्मक न रखना।
• लेंस सूत्र में बीच में प्लस (+) लिख देना (लेंस सूत्र में माइनस (-) होता है)।
• मात्रक सही से न लिखना।
Exam Tips:
a) आंकिक प्रश्न हल करते समय पहले 'दिया है' लिखकर सभी मान चिह्न सहित लिखें।
b) लेंस सूत्र और आवर्धन सूत्र स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) गणना के हर चरण को अलग लाइन में लिखें ताकि गलती न हो।
Question 25: 15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब लेंस से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है? किरण आरेख खींचिए।
Answer:
आकृति का विवरण: अवतल लेंस के सामने रखी वस्तु और उससे बनने वाले आभासी, सीधे और छोटे प्रतिबिंब को दर्शाता हुआ किरण आरेख।
अवतल लेंस की फोकस दूरी f = -15 cm
प्रतिबिंब की लेंस से दूरी v = -10 cm (अवतल लेंस में आभासी प्रतिबिंब उसी ओर बनता है)
लेंस सूत्र 1/f = 1/v - 1/u से:
1/u = 1/v - 1/f
1/u = 1/(-10) - 1/(-15) = -1/10 + 1/15 = (-3 + 2) ÷ 30 = -1/30
u = -30 cm
अतः, बिंब लेंस से 30 cm की दूरी पर स्थित है।
मुख्य बिंदु:
• अवतल लेंस की फोकस दूरी (f) और प्रतिबिंब दूरी (v) दोनों ऋणात्मक होती हैं।
• वस्तु की दूरी (u) हमेशा ऋणात्मक आनी चाहिए।
• अवतल लेंस सदैव आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
आम गलतियाँ:
• अवतल लेंस के लिए v या f को धनात्मक मान लेना।
• पक्षांतर करते समय चिह्नों की गलती करना।
• किरण आरेख में आभासी किरणों को गलत दिखाना।
Exam Tips:
a) अवतल लेंस के आंकिक प्रश्नों में सभी दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं, इसे नियम बना लें।
b) सूत्र में मान रखते समय ब्रैकेट का प्रयोग करें ताकि चिह्न की गलती न हो।
c) किरण आरेख की प्रैक्टिस जरूर करें।
Question 26: 15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिंब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
Answer:
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी f = +15 cm
बिंब की दर्पण से दूरी u = -10 cm
दर्पण सूत्र 1/f = 1/v + 1/u से:
1/v = 1/f - 1/u
1/v = 1/15 - 1/(-10) = 1/15 + 1/10 = (2 + 3) ÷ 30 = 5 ÷ 30 = 1/6
v = +6 cm
अतः, प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm की दूरी पर बनता है। यह आभासी तथा सीधा है।
मुख्य बिंदु:
• उत्तल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
• दर्पण सूत्र में बीच में प्लस (+) का चिह्न होता है।
• उत्तल दर्पण से बनने वाला प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा होता है।
आम गलतियाँ:
• दर्पण सूत्र में माइनस (-) लगा देना (जो लेंस सूत्र में होता है)।
• u का मान ऋणात्मक न रखना।
• प्रतिबिंब की प्रकृति लिखना भूल जाना।
Exam Tips:
a) दर्पण सूत्र (1/f = 1/v + 1/u) और लेंस सूत्र के अंतर को हमेशा याद रखें।
b) उत्तल दर्पण के लिए v का मान धनात्मक आना चाहिए क्योंकि प्रतिबिंब पीछे बनता है।
c) प्रकृति (आभासी और सीधा) लिखना अनिवार्य है।
Question 27: एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 है। इसका क्या अर्थ है?
Answer:
समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 होने का अर्थ यह है कि समतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब का आकार ठीक उतने ही आकार का है जितनी वस्तु (बिंब) की लंबाई है। यहाँ धनात्मक (+) चिन्ह यह प्रदर्शित करता है कि प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी है, और '1' यह बताता है कि प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बिल्कुल बराबर है।
मुख्य बिंदु:
• आवर्धन m = +1 का मतलब वस्तु और प्रतिबिंब का आकार समान है।
• धनात्मक चिह्न सीधे और आभासी प्रतिबिंब को दर्शाता है।
• समतल दर्पण हमेशा m = +1 का आवर्धन उत्पन्न करता है।
आम गलतियाँ:
• केवल आकार समान लिखना और सीधे/आभासी होने का जिक्र न करना।
• धनात्मक चिह्न के महत्व को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) आवर्धन के मान में संख्या (1) आकार बताती है और चिह्न (+/-) प्रकृति बताता है।
b) यह एक छोटा लेकिन बहुत महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है।
c) उत्तर को स्पष्ट दो भागों में (आकार और प्रकृति) समझाएँ।
Question 28: 5.0 cm लंबाई का कोई बिंब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखा gaya है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।
Answer:
बिंब की लंबाई h = 5.0 cm
वक्रता त्रिज्या R = +30 cm (उत्तल दर्पण)
फोकस दूरी f = R ÷ 2 = +30 ÷ 2 = +15 cm
बिंब की दर्पण से दूरी u = -20 cm
दर्पण सूत्र 1/f = 1/v + 1/u से:
1/v = 1/f - 1/u = 1/15 - 1/(-20) = 1/15 + 1/20 = (4 + 3) ÷ 60 = 7 ÷ 60
v = 60 ÷ 7 = 8.6 cm (दर्पण के पीछे)
आवर्धन m = h'/h = -v/u
m = -(60 ÷ 7) ÷ (-20) = 3 ÷ 7 = +0.428
प्रतिबिंब का साइज h' = m × h = (3 ÷ 7) × 5 = 15 ÷ 7 = 2.14 cm
अतः, प्रतिबिंब दर्पण से 8.6 cm की दूरी पर पीछे बनता है, यह सीधा, आभासी है तथा इसकी ऊँचाई 2.14 cm है।
मुख्य बिंदु:
• उत्तल दर्पण के लिए फोकस दूरी धनात्मक होती है।
• प्रतिबिंब दर्पण کے पीछे (धनात्मक दिशा में) बनता है।
• प्रतिबिंब का आकार वस्तु से छोटा (2.14 cm) आता है।
आम गलतियाँ:
• वक्रता त्रिज्या को ही सीधे फोकस दूरी मान लेना (आर को आधा करना भूल जाना)।
• चिह्नों की गड़बड़ी करना।
• प्रतिबिंब की ऊँचाई निकालना भूल जाना।
Exam Tips:
a) बड़े आंकिक प्रश्नों को क्रमानुसार हल करें: पहले f निकालें, फिर v, फिर h'।
b) अंत में सभी तीन बातें (स्थिति, प्रकृति, साइज) स्पष्ट रूप से लिखें।
c) गणना को भिन्न के रूप में रखकर अंत में दशमलव में बदलें ताकि सटीकता रहे।
Question 29: 7.0 cm साइज का कोई बिंब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी पर्दे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकस किया जा सके? प्रतिबिंब का साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
Answer:
बिंब का साइज h = 7.0 cm
अवतल दर्पण की फोकस दूरी f = -18 cm
बिंब की दर्पण से दूरी u = -27 cm
दर्पण सूत्र 1/f = 1/v + 1/u से:
1/v = 1/f - 1/u = 1/(-18) - 1/(-27) = -1/18 + 1/1/27 = (-3 + 2) ÷ 54 = -1/54
v = -54 cm
अतः, पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए।
आवर्धन m = h'/h = -v/u
h' = -(v ÷ u) × h = -(-54 ÷ (-27)) × 7 = -2 × 7 = -14 cm
अतः, प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा है तथा इसका साइज 14 cm है।
मुख्य बिंदु:
• पर्दे पर प्राप्त होने वाला प्रतिबिंब हमेशा वास्तविक होता है।
• अवतल दर्पण के लिए f और u दोनों ऋणात्मक होते हैं।
• ऋणात्मक h' उल्टे प्रतिबिंब को दर्शाता है।
आम गलतियाँ:
• पर्दे की स्थिति का मतलब न समझ पाना (पर्दे पर प्रतिबिंब तभी बनता है जब वह वास्तविक हो, यानी v का मान निकालना है)।
• आवर्धन निकालते समय चिह्नों का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) 'पर्दे पर प्राप्त करना' शब्द का अर्थ है कि प्रतिबिंब वास्तविक है।
b) अवतल दर्पण के इस प्रकार के आंकिक प्रश्न 5 अंकों में पूछे जाते हैं, अतः सभी चरण साफ-साफ लिखें।
c) अंत में निष्कर्ष (स्थिति, साइज, प्रकृति) जरूर लिखें।
Question 30: उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है?
Answer:
لेंस की क्षमता P = -2.0 D
लेंस की फोकस दूरी f = 1 ÷ P
f = 1 ÷ (-2.0) = -0.5 m = -50 cm
चूँकि लेंस की फोकस दूरी (और क्षमता) ऋणात्मक है, अतः यह एक अवतल लेंस है।
मुख्य बिंदु:
• क्षमता और फोकस दूरी में संबंध f = 1/P होता है।
• ऋणात्मक क्षमता अवतल लेंस को दर्शाती है।
• फोकस दूरी मीटर में निकलती है जिसे सेंटीमीटर में भी बदला जा सकता है (-50 cm)।
आम गलतियाँ:
• क्षमता को फोकस दूरी समझ लेना या सूत्र उल्टा लगा देना।
• ऋणात्मक चिह्न छोड़ देना।
• मात्रक न लिखना।
Exam Tips:
a) क्षमता दी हो तो फोकस दूरी निकालने के लिए 1 को क्षमता से भाग दें।
b) ऋणात्मक चिह्न देखते ही तुरंत पहचान लें कि लेंस अवतल है।
c) यह बहुत ही सरल और स्कोरिंग प्रश्न है।
Question 31: कोई डॉक्टर +1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी?
Answer:
लेंस की क्षमता P = +1.5 D
लेंस की फोकस दूरी f = 1 ÷ P
f = 1 ÷ 1.5 = 10 ÷ 15 = 0.666 m = 66.67 cm
चूँकि लेंस की क्षमता और फोकस दूरी धनात्मक (+1.5 D) है, अतः यह एक अभिसारी (उत्तल) लेंस है।
मुख्य बिंदु:
• धनात्मक क्षमता उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस) की होती है।
• फोकस दूरी f = 1 / P सूत्र से निकाली जाती है।
• उत्तर मीटर या सेंटीमीटर दोनों में मान्य है।
आम गलतियाँ:
• भाग देते समय दशमलव की गलती करना।
• अभिसारी और अपसारी की पहचान में गलती करना (धनात्मक = अभिसारी)।
Exam Tips:
a) धनात्मक क्षमता = उत्तल लेंस = अभिसारी लेंस - इस नियम को अच्छी तरह याद रखें।
b) गणना को दो दशमलव स्थान तक निकालें।
c) यह अभ्यास का अंतिम और बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है।
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