CBSE Class 10 Hindi Unseen Passage H

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CBSE Class 10 Hindi Unseen Passage H. Students should do unseen passages for class 10 Hindi which will help them to get better marks in Hindi class tests and exams. Unseen passages are really scoring and practicing them on regular basis will be very useful. Refer to the unseen passage below with answers.

अपठित गद्यांश 

नारद जी भी ब्रह्मचारी थे| उन्होंने सत्य के बारे में शब्दों पर चिपकने नहीं सबके हित या कल्याण को अधिक जरूरी समझा था|

सत्यस्य वचन श्रये: सतयदपि हित वदेत|

भीष्म ने दूसरे पक्ष की उपेक्षा की थी| वह ‘सत्यस्य वचनम’ को ‘हित’ से अधिक महत्व दे गए| श्रीकृष्ण ने ठीक उलटा आचरण किया| प्रतिज्ञा में ‘सत्यस्य वचनम’ की अपेक्षा ‘हितम’ को अधिक महत्व दिया| क्या भारतीय सामूहिक चित ने भी उन्हें पूर्णावतार मानकर इसी पक्ष को अपना मौन समर्थन दिया है? एक बार गलत-सही जो कह दिया उसी से चिपट जाना ‘भीषण’ हो सकता है, हितकर नहीं| भीष्म ने ‘भीषण’ को ही चुना था|

भीष्म और द्रोण भी ,द्रौपदी का अपमान देखकर भी क्यों चुप रह गए? द्रोण गरीब अध्यापक थे, बाल-बच्चे वाले थे| गरीब ऐसे की गाय भी नहीं पाल सकते थे| बिचारी ब्राह्मणी को चावल का पानी देकर दूध मांगने वाले बच्चे को फुसलाना पड़ा था| उसी अवस्था में फिर लौट जाने का साहस कम लोगों में होता है, पर भीष्म तो पितामह थे| उन्हें बाल-बच्चों की फिक्र भी नहीं थी, भीष्म को क्या परवाह थी? एक कल्पना यह की जा सकती है कि महाभारत की कहानी जिस रूप में प्राप्त है, वह उसका बाद का परिवर्तित रूप है| शायद पूरी कहानी जैसी थी वैसी नहीं मिली है| लेकिन आजकल के लोगों को आप जो चाहे कह ले, पुराने इतिहासकार इतने गिरे हुए नहीं होंगे कि पूरा इतिहास ही पलट दें| इस कल्पना से भी भीष्म की चुप्पी समझ में नहीं आती| इतना सच जान पड़ता है कि भीष्म में कर्तव्य-अकर्तव्य के निर्णय में कहीं कोई कमजोरी थी| वह उचित अवसर पर उचित निर्णय नहीं ले पाते थे| यद्यपि वह जानते बहुत थे, तथापि कुछ निर्णय नहीं ले पाते थे| उन्हें अवतार ने मानना ठीक ही हुआ| आजकल भी ऐसे विद्वान मिल जाएंगे, जो जानते बहुत है, करते कुछ भी नहीं करने वाला इतिहास-निर्माता होता है, सिर्फ सोचते रहने वाला इतिहास के भयंकर रथ-चक्र के नीचे पिस जाता है| इतिहास का रथ वह हाँकता है जो सोचता है और सोचे हुए को करता भी है|

उपरोक्त गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नो के उत्तर लिखिए |

1.इतिहास का रथ हांकने से क्या तात्पर्य है? इतिहास का रथ कौन हाँकता है?

2.भीष्म ने किस पक्ष की उपेक्षा की थी?

3.उपयुक्त गद्यांश का एक संक्षिप्त शीर्षक लिखिए|

4.‘इतिहासकार’ में कौन-सा प्रत्यय जुड़ा है? इस प्रत्यय को प्रयोग करके दो नए शब्द बनाइए|

उपरोक्त प्रश्नो के संभावित उत्तर:-

1.इतिहास का रथ हांकने का तात्पर्य है युग-निर्माण के कार्य करना, ऐसे कार्य करना जो समाज को आगे ले जा सके| इतिहास का रथ वह हाँकता है जो भविष्य के लिए योजनाएं बनाने में कुशल नहीं होता अपितु उनके अनुकूल काम भी करता है| जो सोचता है और सोचे हुए को करता भी है वही इतिहास हाँकता है|

2.भीष्म ने परहित तथा जनहित के पक्ष की उपेक्षा की| उन्होंने अपना विवाह न करने की प्रतिज्ञा के सत्य को ही महत्वपूर्ण माना| उन्होंने अपने भाइयों के लिए कन्या अपहरण किया था| उनके भाई अयोग्य थे| राज्य के हित के लिए उनको प्रतिज्ञा के सत्य की उपेक्षा करनी चाहिए थी| उस समय के नियम के अनुसार अपहृता कन्या से उनको ही विवाह करना चाहिए था| परंतु भीष्म ने सत्य के भीषण पक्ष को चुना और सत्य के जनहितकारी पक्ष की उपेक्षा की|

3.उचित शीर्षक- ‘अनिर्णय के शिकार भीष्म पितामह|’

4.‘इतिहासकार’ में ‘कार’ प्रत्यय जुड़ा है| ‘कार’ प्रत्यय से निर्मित दो शब्द हैं- कहानीकार 2.उपन्यासकार|

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