Class 9 Hindi Practice Sheet: CBSE Class 9 Hindi Sakhiyan Evam Shabd Kavy Worksheet
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साखियाँ एवं सबद
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के अत्यंत संक्षेप में उत्तर लिखिए-
संतौं भाई आई ग्याँन की आँधी।
भ्रम की टाटी सबै उड़ानी, माया रहै न बाँधी।।
हिति चित्त की द्वै थूँनी गिराँनी, मोह बलिंडा टूटा।
त्रिस्नाँ छाँनि परि घर ऊपरि, कुबधि का भाँडाँ फूटा।।
जोग जुगाति करि संतौँ बाँधी, निरचू चुवै न पाँणी।
कूड़ कपट काया का निकस्या, हरि की गति जब जाँणी।।
आँधी पीछै जो जल बूठा, प्रेम हरि जन भींनाँ।
कहै कबीर, भान के प्रकटे उदित भया तम खीनाँ।।
Question (क). ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: ज्ञान की आँधी आने से भक्त के अंतःकरण से अज्ञान, भ्रम और माया का बंधन पूर्णतः समाप्त हो जाता है। मन में स्थित स्वार्थ, लोभ, मोह तथा दुर्बुद्धि का नाश हो जाता है और भक्त का हृदय छल-कपट से मुक्त होकर प्रभु के ईश्वरीय प्रेम के रस में पूरी तरह सराबोर हो जाता है।
In simple words: ज्ञान मिलते ही मनुष्य के सारे वहम, लोभ और बुराइयाँ नष्ट हो जाती हैं और उसका मन एकदम शुद्ध हो जाता है।
Exam Tip: उत्तर में भ्रम, मोह और कपट के नष्ट होने तथा प्रभु-प्रेम की प्राप्ति जैसे प्रमुख प्रभावों का उल्लेख अवश्य करें।
Question (ख). 'बलिंडा' शब्द का अर्थ क्या है?
Answer: 'बलिंडा' का शाब्दिक अर्थ छप्पर की छत को सहारा देने वाली बाँस या लकड़ी की मुख्य टेक (शहतीर) होता है। काव्यांश के रूपक के अनुसार यह मन के 'मोह' अथवा सांसारिक आसक्ति रूपी सहारे का प्रतीक है।
In simple words: बलिंडा का मतलब छप्पर को टिकाए रखने वाली मुख्य लकड़ी या बल्ली होता है।
Exam Tip: शाब्दिक अर्थ (शहतीर/बाँस की टेक) के साथ इसका रूपक संदर्भ (मोह रूपी आधार) भी संक्षेप में लिखें।
Question (ग). काव्यांश से अनुप्रास अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए
Answer: काव्यांश में अनुप्रास अलंकार के दो प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
1. "कूड़ कपट काया का" - यहाँ 'क' वर्ण की आवृत्ति एक से अधिक बार हुई है।
2. "जोग जुगाति" - यहाँ 'ज' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
In simple words: जहाँ एक ही अक्षर बार-बार आता है वहाँ अनुप्रास होता है, जैसे 'कूड़ कपट काया' में 'क' और 'जोग जुगाति' में 'ज'।
Exam Tip: उदाहरण लिखने के साथ-साथ जिस वर्ण की पुनरावृत्ति हो रही है, उसे भी कोष्ठक या स्पष्ट रूप से अवश्य दर्शाएँ।
Question (घ). काव्य भाषा पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: प्रस्तुत पद की भाषा कबीरदास की प्रामाणिक सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी) भाषा है, जिसमें अवधी, ब्रज, राजस्थानी तथा लोकबोली के तद्भव व देशज शब्दों का स्वाभाविक संगम है। भाषा आडंबरहीन, प्रवाहमयी, संगीतात्मक तथा प्रतीकात्मक है, जिसमें सांगरूपक के माध्यम से ज्ञान की महत्ता का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है।
In simple words: कबीर जी की भाषा जनसाधारण की सरल सधुक्कड़ी भाषा है, जो बहुत प्रभावशाली और प्रतीकों से सजी है।
Exam Tip: भाषा पर टिप्पणी करते समय 'सधुक्कड़ी/पंचमेल खिचड़ी' तथा 'प्रतीकात्मक शैली' शब्दों का उल्लेख परीक्षक विशेष रूप से देखते हैं।
Question (ङ). कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना आँधी से क्यों की है?
Answer: कबीरदास जी ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य वायु से न करके आँधी से इसलिए की है, क्योंकि साधारण हवा में पुरानी व्यवस्था को बदलने की शक्ति नहीं होती। जिस प्रकार तीव्र आँधी छप्पर, तिनकों और कमजोर ढाँचे को समूल उखाड़ फेंकती है, उसी प्रकार सच्चा ज्ञान साधक के अंतर्मन में व्याप्त सदियों पुराने अज्ञान, भ्रम, संशय और मोह-माया को पूरी तरह नष्ट कर देता है।
In simple words: आँधी जिस प्रकार सब कूड़ा-कचरा उड़ा ले जाती है, उसी तरह सच्चा ज्ञान भी मन के सारे भ्रम और बुराइयों को जड़ से मिटा देता है।
Exam Tip: उत्तर में साधारण वायु और आँधी के प्रभाव का अंतर बताते हुए अज्ञान के संपूर्ण विनाश का भाव स्पष्ट करें।
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अत्यन्त संक्षेप में लिखिए :
हिंदू मूआ राम कहि, मुसलमान खुदाइ।
कहै कबीर सो जीवता, जो दुहुँ के निकटि न जाइ।।
Question (i). कबीर ने किनको मरे हुए व्यक्तियों के समान माना है ?
Answer: कबीर ने उन लोगों को मृत समान माना है जो ईश्वर को 'राम' और 'खुदा' के नाम पर बाँटकर धार्मिक कट्टरता, संकीर्णता तथा आपसी वैमनस्य में पड़कर अपना अनमोल जीवन नष्ट कर लेते हैं।
In simple words: जो लोग धर्म और पूजा के नाम पर आपस में लड़ते-झगड़ते रहते हैं, कबीर ने उन्हें जीते जी मरे हुए के समान कहा है।
Exam Tip: 'धार्मिक संकीर्णता' अथवा 'सांप्रदायिक भेदभाव' में उलझकर जीवन व्यर्थ करने का बिंदु उत्तर में अनिवार्य रूप से शामिल करें।
Question (ii). 'जीवता' शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया है ?
Answer: 'जीवता' (जीवित) शब्द उस विवेकशील और सच्चे साधक के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो हिंदू और मुस्लिम दोनों के संकीर्ण धार्मिक पाखंडों तथा भेदभाव से परे रहकर निष्पक्ष भाव से एक ही निराकार प्रभु की आराधना करता है।
In simple words: 'जीवता' यानी सच्चे अर्थों में जीवित वह व्यक्ति है, जो जाति और संप्रदाय के झगड़ों से दूर रहता है।
Exam Tip: स्पष्ट करें कि यहाँ 'जीवता' का तात्पर्य शारीरिक जीवन से नहीं, बल्कि वैचारिक व आध्यात्मिक जागरूकता से है।
Question (iii). उपर्युक्त साखी से हमें क्या सीख मिलती है ?
Answer: इस साखी से यह संदेश मिलता है कि ईश्वर एक है और राम व खुदा उसी परम चेतना के भिन्न नाम हैं। मनुष्य को संकीर्ण सांप्रदायिक भेदभाव और कट्टरता को त्यागकर निष्पक्ष भाव से मानवता और ईश्वरीय प्रेम को अपनाना चाहिए।
In simple words: हमें धर्म और नाम के फेर में न पड़कर सभी से प्रेम करना चाहिए क्योंकि परमात्मा एक ही है।
Exam Tip: सीख के रूप में 'सांप्रदायिक सौहार्द' और 'ईश्वर की एकता' का भाव स्पष्ट शब्दों में व्यक्त करें।
Question (iv). 'मूआ' विशेषण का कौन सा शब्द विरोधी विशेषण हो सकता है ?
Answer: 'मूआ' (मृत/मरा हुआ) का विरोधी विशेषण 'जीवता' (जीवित) है।
In simple words: 'मूआ' का विलोम शब्द 'जीवता' यानी जीवित होता है।
Exam Tip: साखी में दिए गए शब्द के संदर्भ में ही सटीक विरोधी शब्द 'जीवता' लिखें।
Question (v). अनुप्रास अलंकार का प्रयोग उपर्युक्त दोहे में समझाइए।
Answer: प्रस्तुत दोहे में "कहै कबीर" में 'क' वर्ण की आवृत्ति तथा "निकटि न" में 'न' वर्ण की क्रमिक आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार उपस्थित है।
In simple words: 'कहै कबीर' में 'क' और 'निकटि न' में 'न' अक्षर बार-बार आने से अनुप्रास अलंकार बनता है।
Exam Tip: वर्णों की समानता स्पष्ट करने के लिए दोनों शब्द-युग्म ("कहै कबीर" और "निकटि न") उद्धृत करें।
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