NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 Earth as a System Energy Matter and Life (पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन) Short Answer Questions in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

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Question 1: विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में कौन-सी तरंगें पृथ्वी के लिए हानिकारक हो सकती हैं और क्यों?

Answer:

उच्च आवृत्ति या लघु तरंगदैर्ध्य विकिरण जैसे गामा किरणें और X-किरणें अत्यधिक ऊर्जा वाली होती हैं, इसलिए ये पृथ्वी पर जीवन के लिए हानिकारक हो सकती हैं。
सौभाग्य से ये किरणें अधिकांशतः पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल द्वारा छान ली जाती हैं, जिससे पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुँच पातीं।

मुख्य बिंदु:

• गामा और X-किरणों में उच्च ऊर्जा होती है।
• ये किरणें जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
• ऊपरी वायुमंडल इन्हें सतह तक पहुँचने से रोकता है।

आम गलतियाँ:

• सभी विद्युत चुंबकीय तरंगों को हानिकारक मान लेना।
• वायुमंडल की सुरक्षात्मक भूमिका का उल्लेख न करना।
• तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति के संबंध को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) उच्च आवृत्ति और हानिकारक विकिरणों के बीच संबंध स्पष्ट करें।
b) वायुमंडल के फिल्टरिंग प्रभाव का संक्षिप्त वर्णन करें।
c) उत्तर में मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।

 

Question 2: पराबैंगनी (UV) किरणों से हमें सुरक्षा कैसे मिलती है और इनका क्या उपयोग है?

Answer:

लघु तरंगदैर्ध्य वाली पराबैंगनी किरणों का अधिकांश भाग ऊपरी वायुमंडल में स्थित ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षा मिलती है。
पराबैंगनी किरणें जल शोधकों में कीटाणुओं को नष्ट करने और प्रतिदीप्त प्रकाश को ऊर्जा प्रदान करने में भी सहायक होती हैं।

मुख्य बिंदु:

• ओजोन परत UV किरणों को अवशोषित करती है।
• जल शोधन में इनका उपयोग होता है।
• प्रतिदीप्त प्रकाश को ऊर्जा प्रदान करती हैं।

आम गलतियाँ:

• ओजोन परत की स्थिति को गलत बताना।
• केवल हानियों का उल्लेख करना और उपयोग छोड़ देना।
• तरंगदैर्ध्य के प्रभाव को न समझाना।

Exam Tips:

a) ओजोन परत के महत्व को विशेष रूप से दर्शाएं।
b) UV किरणों के सकारात्मक उपयोगों के उदाहरण दें।
c) उत्तर को दो स्पष्ट भागों में विभाजित करें (सुरक्षा और उपयोग)।

 

Question 3: अक्षांश और पृथ्वी के आकार के कारण असमान ऊष्मण कैसे होता है?

Answer:

पृथ्वी गोलाकार होने के कारण सूर्य की किरणें विभिन्न अक्षांशों पर भिन्न-भिन्न कोणों पर पड़ती हैं。
भूमध्यरेखीय प्रदेशों के निकट सौर विकिरण छोटे क्षेत्र में केंद्रित रहती है जबकि ध्रुवीय प्रदेशों में यह बड़े क्षेत्रों में फैल जाती है, जिससे भूमध्यरेखीय प्रदेश अधिक गर्म और ध्रुवीय प्रदेश अधिक ठंडे रहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी की गोलाकार आकृति ऊष्मण को प्रभावित करती है।
• भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी और केंद्रित होती हैं।
• ध्रुवों पर किरणें तिरछी और फैली हुई होती हैं।

आम गलतियाँ:

• पृथ्वी के आकार की भूमिका को नजरअंदाज करना।
• भूमध्य रेखा और ध्रुवों के तापमान में अंतर का कारण गलत लिखना।
• सौर विकिरण के फैलाव को न समझाना।

Exam Tips:

a) 'असमान ऊष्मण' शब्द को वैज्ञानिक रूप से परिभाषित करें।
b) सूर्य के किरणों के कोण का प्रभाव स्पष्ट करें।
c) भूमध्यरेखीय व ध्रुवीय क्षेत्रों की तुलना करें।

 

Question 4: वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा में कौन-सी दो मुख्य भूमिकाएँ निभाता है?

Answer:

पहली, वायुमंडल पृथ्वी पर आने वाले सौर विकिरण का कुछ भाग अवशोषित कर लेता है, और ओजोन परत हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोक देती है。
दूसरी, यह बाहर जाने वाली ऊष्मा को हरितगृह गैसों (\( \text{CO}_2, \text{CH}_4 \), जलवाष्प) के माध्यम से रोक कर रखता है, जिससे पृथ्वी का ताप जीवन के लिए अनुकूल बना रहता है।

मुख्य बिंदु:

• सौर विकिरण और हानिकारक UV किरणों का अवशोषण।
• हरितगृह प्रभाव द्वारा पृथ्वी का तापमान नियंत्रित रखना।
• जीवन अनुकूल वातावरण का निर्माण।

आम गलतियाँ:

• केवल एक ही भूमिका का उल्लेख करना।
• हरितगृह गैसों के नाम न लिखना।
• ओजोन परत की भूमिका को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) दोनों भूमिकाओं को 'पहली' और 'दूसरी' पॉइंट में लिखें।
b) हरितगृह गैसों के रासायनिक सूत्र (\( \text{CO}_2, \text{CH}_4 \)) का प्रयोग करें।
c) तापमान नियंत्रण के महत्व को स्पष्ट करें।

 

Question 5: ग्रहीय पवनों का निर्माण कैसे होता है?

Answer:

भूमध्य रेखा के पास सूर्य द्वारा तीव्र ऊष्मण से गर्म वायु ऊपर उठती है जिससे भूमध्यरेखीय निम्न दाब पट्टी बनती है।
यह वायु ऊपर उठकर ध्रुवों की ओर गति करती है, ठंडी होकर लगभग \( 30^\circ \) अक्षांशों पर उतरती है, जिससे उपोष्ण उच्च दाब पट्टियाँ बनती हैं और एक परिसंचरण चक्र पूरा होता है।

मुख्य बिंदु:

• भूमध्य रेखा पर वायु का गर्म होकर ऊपर उठना।
• निम्न और उच्च दाब पट्टियों का निर्माण।
• वायु का ध्रुवों की ओर संचलन और \( 30^\circ \) अक्षांश पर उतरना।

आम गलतियाँ:

• दाब पट्टियों (\( 30^\circ \) अक्षांश) के स्थान को गलत बताना।
• परिसंचरण चक्र के चरणों को छोड़ देना।
• तापमान और वायुदाब के संबंध को न समझाना।

Exam Tips:

a) अक्षांशों के मान (\( 30^\circ \)) का सही उल्लेख करें।
b) पवन प्रवाह के क्रम को चरणबद्ध तरीके से लिखें।
c) दाब पट्टियों के निर्माण की प्रक्रिया स्पष्ट करें।

 

Question 6: महासागरीय धाराएँ पृथ्वी की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?

Answer:

महासागरीय धाराएँ भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर ऊष्मा का स्थानांतरण कर भूमंडल के ताप के अंतर को कम करती हैं।
उदाहरण के लिए, उत्तरी अटलांटिक प्रवाह (गल्फ स्ट्रीम का विस्तार) यूरोप के तट को गर्म रखता है और शीतकाल में कई बंदरगाहों को बर्फ से मुक्त रखता है।

मुख्य बिंदु:

• भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक ऊष्मा का स्थानांतरण।
• भूमंडलीय तापमान के अंतर को संतुलित करना।
• गल्फ स्ट्रीम द्वारा यूरोपीय तटों को गर्म रखना।

आम गलतियाँ:

• महासागरीय धाराओं और हवाओं में भ्रमित होना।
• गल्फ स्ट्रीम का उदाहरण न देना।
• जलवायु पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) तापमान संचरण की दिशा स्पष्ट करें।
b) गल्फ स्ट्रीम का विशिष्ट उदाहरण अवश्य दें।
c) बंदरगाहों के बर्फ मुक्त रहने वाले प्रभाव को समझाएं।

 

Question 7: कार्बन चक्र में द्रुत चक्र और मंद चक्र में क्या अंतर है?

Answer:

द्रुत चक्र (कुछ दिनों से वर्षों तक) में पादप प्रकाश संश्लेषण द्वारा \( \text{CO}_2 \) को ग्लूकोस में बदलते हैं और श्वसन द्वारा \( \text{CO}_2 \) वापस लौटती है।
मंद चक्र (लाखों वर्षों तक चलने वाला) में मृत पादप व जंतु मृदा में दबकर जीवाश्म ईंधनों (कोयला, तेल, गैस) में परिवर्तित हो जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• द्रुत चक्र कम समय (दिनों से वर्षों) में पूरा होता है।
• मंद चक्र में लाखों वर्ष लगते हैं और जीवाश्म ईंधन बनते हैं।
• दोनों में प्रकाश संश्लेषण और श्वसन की मुख्य भूमिका होती है।

आम गलतियाँ:

• समय सीमा का सही उल्लेख न करना।
• जीवाश्म ईंधनों के निर्माण को द्रुत चक्र में बता देना।
• कार्बन के रूपों का सही वर्णन न करना।

Exam Tips:

a) दोनों चक्रों को अंतर स्पष्ट करते हुए सारणी या बिंदुओं में लिखें।
b) समय अवधि का विशेष ध्यान रखें।
c) प्रक्रिया में शामिल जैविक घटकों के नाम लिखें।

 

Question 8: नाइट्रोजन चक्र के पाँच मुख्य चरण कौन-से हैं?

Answer:

नाइट्रोजन चक्र के पाँच मुख्य चरण हैं –
1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण (वायुमंडलीय \( \text{N}_2 \) का अमोनिया में परिवर्तन),
2. स्वांगीकरण (पादपों द्वारा अवशोषण),
3. अमोनीकरण (अपघटन द्वारा अमोनिया का निर्माण),
4. नाइट्रीकरण (अमोनिया से नाइट्रेट का निर्माण),
5. विनाइट्रीकरण (नाइट्रेट का पुनः नाइट्रोजन गैस में परिवर्तन)।

मुख्य बिंदु:

• स्थिरीकरण से वायुमंडलीय नाइट्रोजन यौगिकों में बदलती है।
• नाइट्रीकरण और अमोनीकरण रासायनिक परिवर्तन हैं।
• विनाइट्रीकरण चक्र को वायुमंडल में संतुलित रखता है।

आम गलतियाँ:

• चरणों का क्रम गलत लिखना।
• विनाइट्रीकरण और नाइट्रीकरण के कार्यों को आपस में मिला देना।
• पांचों चरणों के नाम स्पष्ट न लिखना।

Exam Tips:

a) पाँचों चरणों को क्रमानुसार लिखें।
b) प्रत्येक चरण का एक-एक शब्द में कार्य स्पष्ट करें।
c) रासायनिक प्रतीकों (\( \text{N}_2 \) आदि) का प्रयोग करें।

 

Question 9: ऑक्सीजन चक्र में उपभोग और उत्पादन के बीच संतुलन कैसे बना रहता है?

Answer:

पादप और जंतु श्वसन तथा ईंधनों के दहन (उपभोग) के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और \( \text{CO}_2 \) उत्सर्जित करते हैं।
वहीं पादप प्रकाश संश्लेषण (उत्पादन) के माध्यम से \( \text{CO}_2 \) और जल का उपयोग करके ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं।
यह संतुलन वायुमंडल, स्थल, महासागरों और सजीवों के बीच ऑक्सीजन का परिसंचरण बनाए रखता है।

मुख्य बिंदु:

• श्वसन और दहन द्वारा ऑक्सीजन का उपभोग होता है।
• प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन का उत्पादन होता है।
• विभिन्न मंडलों के बीच यह निरंतर परिसंचरण है।

आम गलतियाँ:

• उपभोग और उत्पादन की प्रक्रियाओं को उलटा लिख देना।
• ईंधनों के दहन को छोड़ देना।
• संतुलन बनाने वाले घटकों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) उपभोग और उत्पादन को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएं।
b) प्रकाश संश्लेषण और श्वसन को मुख्य आधार बनाएं।
c) चक्र की निरंतरता पर बल दें।

 

Question 10: वनोन्मूलन के पृथ्वी पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं?

Answer:

वनोन्मूलन से प्रकाश संश्लेषण में कमी आती है और वाष्पोत्सर्जन घटता है जिससे स्थानीय वर्षा में कमी हो सकती है।
यह सतही एल्बिडो को बदल देता है, वृक्षों की जड़ों के अभाव में मृदा अपरदन बढ़ता है, और परिणामस्वरूप पर्यावास नष्ट होने से जैव विविधता में कमी आती है।

मुख्य बिंदु:

• प्रकाश संश्लेषण और वाष्पोत्सर्जन में गिरावट।
• मृदा अपरदन में वृद्धि और एल्बिडो में परिवर्तन।
• जैव विविधता का ह्रास और पर्यावास का नष्ट होना।

आम गलतियाँ:

• केवल वर्षा की कमी तक उत्तर सीमित रखना।
• एल्बिडो और मृदा अपरदन जैसे वैज्ञानिक प्रभावों को छोड़ देना।
• जैव विविधता पर पड़ने वाले असर को न समझाना।

Exam Tips:

a) वनों के कटने के पर्यावरणीय प्रभावों को बिंदुवार लिखें।
b) 'मृदा अपरदन' और 'जैव विविधता' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग करें।
c) जलवायु और वर्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करें।

 

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