NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप विविधता एवं वर्गीकरण
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Practice Class 9 Science Solutions: Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप विविधता एवं वर्गीकरण
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Question 1: मीना और हरी ने अपने उद्यान में एक जंतु देखा। हरी ने उसे कीट कहा जबकि मीना ने कहा कि वह केंचुआ है। उस सही विकल्प को चुनिए जो यह पुष्टि करता है कि वह एक कीट है।
(i) द्विपार्श्व सममिति की काया
(ii) संधित पाद वाली काया
(iii) बेलनाकार काया
(iv) कम खंडीभवन वाली काया
Answer:
सही विकल्प (ii) संधित पाद वाली काया है।
व्याख्या: कीट आर्थ्रोपोडा संघ के सदस्य होते हैं, जिनकी सबसे प्रमुख पहचान संधित (जोड़दार) पाद होते हैं। केंचुए में संधित पाद नहीं पाए जाते हैं। इसलिए यदि किसी जंतु में संधित पाद हों, तो वह कीट होने की पुष्टि करता है।
मुख्य बिंदु:
• कीट आर्थ्रोपोडा संघ के अंतर्गत आते हैं।
• संधित पाद आर्थ्रोपोडा संघ का मुख्य लक्षण है।
• केंचुए एनेलिडा संघ के जीव हैं जिनमें पाद नहीं होते।
आम गलतियाँ:
• सममिति या शरीर के आकार को कीट की मुख्य पहचान मान लेना।
• केंचुआ और कीट को एक ही समूह का मान लेना।
• विकल्पों को बिना पढ़े केवल नाम के आधार पर उत्तर देना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में जंतुओं के शारीरिक लक्षणों (जैसे संधित पाद) पर विशेष ध्यान दें।
b) वर्गीकरण के मुख्य लक्षणों को याद रखें।
c) उत्तर लिखते समय सही विकल्प संख्या और उसका पूरा नाम दोनों लिखें।
Question 2: स्पंज, जंतु जगत की सबसे सरल शरीर-संरचना वाले जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके शरीर में वास्तविक ऊतक और अंग नहीं होते हैं। स्पंज कोशिकाओं की कौन-सी विशेषता उसे जंतु जगत के अंतर्गत वर्गीकृत करने का आधार है?
(i) माइटोकॉन्ड्रिया की अनुपस्थिति
(ii) प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता
(iii) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति
(iv) कोशिका भित्ति की उपस्थिति
Answer:
सही विकल्प (iii) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति है।
व्याख्या: स्पंज जंतु हैं, इसलिए उनकी कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली होती है, जबकि पादप कोशिकाओं की तरह उनमें कोशिका भित्ति नहीं होती है। वे प्रकाश संश्लेषण नहीं करते हैं तथा उनकी कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया उपस्थित होते हैं। इसलिए कोशिका झिल्ली की उपस्थिति उन्हें जंतु जगत में वर्गीकृत करने का महत्वपूर्ण आधार है।
मुख्य बिंदु:
• स्पंज पोरीफेरा संघ के जीव हैं जो सरलतम बहुकोशिकीय जंतु हैं।
• जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति का अभाव होता है।
• स्पंज परपोषी होते हैं और प्रकाश संश्लेषण नहीं करते।
आम गलतियाँ:
• स्पंज को पादप मान लेना क्योंकि वे एक स्थान पर स्थिर रहते हैं।
• कोशिका भित्ति को जंतुओं की विशेषता समझ लेना।
Exam Tips:
a) पादप और जंतु कोशिकाओं के बुनियादी अंतर (जैसे कोशिका भित्ति) को स्पष्ट रखें।
b) पोरीफेरा संघ के सामान्य लक्षणों को अच्छी तरह समझें।
c) कारणों सहित सही विकल्प का चयन करें।
Question 3: अपने आस-पास के वातावरण में दो अलग-अलग जीवों का अवलोकन कीजिए। उनकी कौन-सी विशेषताएँ आपको उनमें अंतर करने में सहायता करती हैं? ये विशेषताएँ किस प्रकार से उन्हें भिन्न समूहों में रखने में सहायता प्रदान करती हैं?
Answer:
उदाहरण के लिए गाय (जंतु) और आम के पौधे (पादप) का अवलोकन किया जा सकता है।
गाय की विशेषताएँ:
• यह चल-फिर सकती है (गमन की क्षमता)।
• यह अपना भोजन स्वयं नहीं बनाती (परपोषी)।
• इसकी कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है।
• यह बहुकोशिकीय जंतु है।
आम के पौधे की विशेषताएँ:
• यह एक स्थान पर स्थिर रहता है।
• यह प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाता है (स्वपोषी)।
• इसकी कोशिकाओं में कोशिका भित्ति उपस्थित होती है।
• यह बहुकोशिकीय पादप है।
इन विशेषताओं के आधार पर वैज्ञानिक जीवों को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत करते हैं। पोषण की विधि, कोशिका की संरचना, शरीर का संगठन तथा गमन की क्षमता के आधार पर जीवों को अलग-अलग जगतों में रखा जाता है।
मुख्य बिंदु:
• पादप और जंतु जगत में पोषण की विधि भिन्न होती है।
• कोशिका भित्ति की उपस्थिति पादपों को जंतुओं से अलग करती है।
• गमनशीलता जंतुओं का एक प्रमुख लक्षण है।
आम गलतियाँ:
• जीवों के केवल बाहरी आकार को अंतर का आधार मानना।
• आंतरिक कोशिकीय संरचना की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में स्पष्ट उदाहरण (जैसे गाय और आम का पौधा) दें।
b) बिंदुओं के रूप में विशेषताएँ लिखने से उत्तर प्रभावी बनता है।
c) पादप और जंतु के बीच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
Question 4: कोई वैज्ञानिक वर्गीकरण करने के लिए जाइलम और फ्लोएम की उपस्थिति की तुलना में कोशिकीय संगठन को अधिक मौलिक आधार बनाना किस प्रकार न्यायसंगत सिद्ध करता है?
Answer:
कोशिकीय संगठन सभी जीवों की मूलभूत विशेषता है। इससे यह ज्ञात होता है कि जीव पूर्वकेंद्रकी (Prokaryotic) है या सुकेंद्रकी (Eukaryotic) तथा एककोशिकीय है या बहुकोशिकीय। जबकि जाइलम और फ्लोएम केवल कुछ विकसित पादपों में पाए जाते हैं। इसलिए कोशिकीय संगठन अधिक व्यापक और मौलिक आधार है तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।
मुख्य बिंदु:
• कोशिकीय संगठन प्रत्येक जीव में पाया जाने वाला सार्वभौमिक लक्षण है।
• जाइलम और फ्लोएम केवल संवहनी पादपों में ही उपस्थित होते हैं।
• कोशिका का प्रकार (केंद्रक की उपस्थिति/अनुपस्थिति) वर्गीकरण का आधारभूत चरण है।
आम गलतियाँ:
• विशिष्ट अंगों (जैसे जाइलम-फ्लोएम) को प्राथमिक वर्गीकरण का आधार मान लेना।
• कोशिकीय संगठन के महत्व को कम आंकना।
Exam Tips:
a) 'मौलिक आधार' शब्द का अर्थ स्पष्ट करें जो सभी जीवों पर लागू हो।
b) तुलनात्मक रूप से उत्तर लिखें ताकि अंतर स्पष्ट हो सके।
c) पूर्वकेंद्रकी और सुकेंद्रकी का संदर्भ अवश्य दें।
Question 5: यदि आपको एक बिना नाम वाली स्लाइड पर ऐसा एककोशिकीय जीव मिले जिसमें सुस्पष्ट केंद्रक तथा अनेक पक्ष्माभ हों तो उसके किस समूह का सदस्य होने की सर्वाधिक संभावना है? कारण बताइए।
Answer:
वह जीव प्रोटिस्टा जगत का सदस्य होने की सर्वाधिक संभावना रखता है।
कारण:
• वह एककोशिकीय है।
• उसमें स्पष्ट केंद्रक उपस्थित है, इसलिए वह सुकेंद्रकी (Eukaryotic) जीव है।
• अनेक पक्षाभ (Cilia) उसकी गति में सहायता करते हैं।
• ये सभी विशेषताएँ प्रोटिस्टा जगत के जीवों (जैसे पैरामीशियम) की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
मुख्य बिंदु:
• एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीवों को प्रोटिस्टा जगत में रखा जाता है।
• पक्षाभ और कशाभ गति करने वाले अंगक हैं।
• स्पष्ट केंद्रक सुकेंद्रकी कोशिकाओं की पहचान है।
आम गलतियाँ:
• एककोशिकीय देखकर उसे मोनेरा समझ लेना।
• पक्षाभ की भूमिका को गति के अलावा अन्य कार्यों से जोड़ना।
Exam Tips:
a) जीवों के लक्षणों (जैसे पक्षाभ और केंद्रक) को उनके जगत से जोड़कर याद रखें।
b) कारण स्पष्ट करने के लिए बुलेट पॉइंट्स का उपयोग करें।
c) पैरामीशियम का उदाहरण दिमाग में रखें।
Question 6: किसी पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन और स्थायित्व में जीवों की विविधता किस प्रकार योगदान देती है?
Answer:
जीवों की विविधता पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न प्रकार के जीवों के बीच भोजन, ऊर्जा प्रवाह तथा पोषक तत्त्वों के चक्र को संतुलित बनाए रखती है। यदि किसी एक जीव की संख्या घटती है, तो अन्य जीव उसकी भूमिका आंशिक रूप से निभा सकते हैं। इससे पारिस्थितिक तंत्र अधिक स्थिर और संतुलित बना रहता है तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
मुख्य बिंदु:
• जैव विविधता पारिस्थितिक तंत्र की स्थिरता का आधार है।
• खाद्य जाल (Food Web) में विविधता होने से ऊर्जा का प्रवाह सुचारू रहता है।
• एक जीव की कमी होने पर दूसरा विकल्प उपलब्ध रहता है।
आम गलतियाँ:
• विविधता को केवल जीवों की संख्या तक सीमित समझना।
• पारिस्थितिक संतुलन में खाद्य श्रृंखला के महत्व की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) पारिस्थितिक तंत्र, ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्र जैसे वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग करें।
b) उत्तर को संतुलित और तार्किक रूप से प्रस्तुत करें।
Question 7: यदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक ही जगत में रख दिया जाए तो कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होंगी?
Answer:
यदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक ही जगत में रख दिया जाए, तो उनके बीच उपस्थित मूलभूत भिन्नताओं की उपेक्षा हो जाएगी। कुछ जीव पूर्वकेंद्रकी (Prokaryotic) होते हैं, जबकि कुछ सुकेंद्रकी (Eukaryotic) होते हैं। उनके पोषण, कोशिकीय संरचना, प्रजनन तथा जीवन-क्रियाओं में भी अत्यधिक अंतर होता है। इसलिए उनका सही अध्ययन, पहचान और वैज्ञानिक वर्गीकरण कठिन हो जाएगा।
मुख्य बिंदु:
• पूर्वकेंद्रकी और सुकेंद्रकी जीवों की कोशिका संरचना में मौलिक अंतर होता है।
• पोषण विधियाँ (स्वपोषी और परपोषी) भिन्न होती हैं।
• वर्गीकरण का उद्देश्य समान लक्षणों वाले जीवों को एक साथ रखना है।
आम गलतियाँ:
• केवल कोशिका की संख्या (एककोशिकीय) को वर्गीकरण का एकमात्र आधार मान लेना।
• केंद्रक और कोशिकांगों की भिन्नता को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) पूर्वकेंद्रकी और सुकेंद्रकी का अंतर मुख्य बिंदु के रूप में लिखें।
b) वैज्ञानिक वर्गीकरण की आवश्यकता को समझाते हुए उत्तर समाप्त करें।
Question 8: विषाणुओं के विषय में आप पहले की कक्षाओं में पढ़ चुके हैं। इन्हें पाँच-जगत में से किसी के भी अंतर्गत क्यों नहीं रखा गया? कारण बताइए।
Answer:
विषाणुओं में कोशिकीय संगठन नहीं होता है। वे केवल आनुवंशिक पदार्थ और प्रोटीन आवरण से बने होते हैं। वे स्वयं जीवन-क्रियाएँ नहीं कर सकते तथा केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही सक्रिय होते हैं। निर्जीव अवस्था में वे किसी प्रकार की जैविक क्रिया नहीं करते हैं। इसलिए उन्हें पाँच-जगत प्रणाली के किसी भी जगत में नहीं रखा गया है।
मुख्य बिंदु:
• विषाणु अकोशिकीय होते हैं।
• वे सजीव और निर्जीव के बीच की योजक कड़ी माने जाते हैं।
• परपोषी कोशिका के बाहर वे निष्क्रिय होते हैं।
आम गलतियाँ:
• विषाणुओं को सूक्ष्मजीव मानकर मोनेरा में रख देना।
• उनके भीतर कोशिकीय संरचना मान लेना।
Exam Tips:
a) 'अकोशिकीय' और 'प्रोटीन आवरण' जैसे शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) सजीव व निर्जीव दोनों के लक्षण प्रदर्शित करने की बात अवश्य लिखें।
Question 9: यदि आप से पाँच वर्गीकरण में संशोधन करने के लिए कहा जाए तो क्या आप विषाणुओं को पृथक श्रेणी में रखेंगे या इस प्रणाली से बाहर रखेंगे? अपने उत्तर को उचित ठहराइए और स्पष्ट कीजिए कि यह वैज्ञानिक वर्गीकरण की विकासशील प्रकृति के संबंध में क्या संकेत देता है?
Answer:
मैं विषाणुओं को एक पृथक श्रेणी में रखना उचित समझूँगा, क्योंकि उनमें जीवित और निर्जीव दोनों प्रकार के गुण पाए जाते हैं। उनकी संरचना और जीवन-क्रियाएँ अन्य जीवों से भिन्न हैं। उन्हें अलग श्रेणी देने से उनका अध्ययन अधिक व्यवस्थित होगा। यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक वर्गीकरण स्थिर नहीं है, बल्कि नए शोध और नई जानकारियों के आधार पर समय-समय पर उसमें परिवर्तन और सुधार किए जाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• विषाणु सजीव और निर्जीव दोनों के लक्षण दर्शाते हैं।
• पृथक श्रेणी से उनका अध्ययन आसान हो जाता है।
• विज्ञान गतिशील है और नई खोजों के साथ प्रणालियाँ बदलती हैं।
आम गलतियाँ:
• विषाणुओं को पूरी तरह से सजीव या पूरी तरह से निर्जीव मान लेना।
• वर्गीकरण प्रणाली को अंतिम व अपरिवर्तनीय मान लेना।
Exam Tips:
a) वैज्ञानिक वर्गीकरण की 'विकासशील प्रकृति' (Dynamic nature) पर विशेष जोर दें।
b) अपने तर्कों को स्पष्ट रूप से बिंदुवार प्रस्तुत करें।
Question 10: विषाणुओं में सजीवों की भाँति आनुवंशिक पदार्थ होता है, परंतु इनमें कोशिकीय संगठन नहीं होता है। इनकी कौन-सी विशेषताएँ इन्हें पाँच जगत प्रणाली के अंतर्गत रखे जाने से रोकती हैं? इस बात से हमें वर्गीकरण प्रणालियों की कमियों के विषय में क्या ज्ञात होता है?
Answer:
विषाणुओं में कोशिका, कोशिका द्रव्य, कोशिका झिल्ली तथा अन्य कोशिकीय अंगक नहीं होते हैं। वे स्वयं भोजन नहीं बना सकते, न ही स्वतंत्र रूप से उपापचय या प्रजनन कर सकते हैं। वे केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही सक्रिय होते हैं। इन विशेषताओं के कारण उन्हें पाँच-जगत प्रणाली में सम्मिलित नहीं किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कोई भी वर्गीकरण प्रणाली पूर्ण नहीं होती और नई वैज्ञानिक खोजों के अनुसार उसमें संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।
मुख्य बिंदु:
• कोशिकीय संगठन का अभाव विषाणुओं की मुख्य विशेषता है।
• स्वतंत्र उपापचय और प्रजनन का न होना।
• वर्गीकरण प्रणालियों में सुधार की निरंतर आवश्यकता होती है।
आम गलतियाँ:
• आनुवंशिक पदार्थ होने मात्र से उन्हें जीव मान लेना।
• वर्गीकरण प्रणालियों को पूर्ण और अंतिम समझ लेना।
Exam Tips:
a) स्वतंत्र उपापचय की अनुपस्थिति को मुख्य कारण के रूप में दर्शाएँ।
b) वैज्ञानिक प्रणालियों की सीमाओं को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 11: टेरिडोफाइट और ब्रायोफाइट दोनों में पुष्प और बीज नहीं पाए जाते हैं, तब भी इन्हें अलग-अलग समूहों में रखा गया है। इनकी मुख्य विशेषताओं के आधार पर इस वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
ब्रायोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ नहीं होतीं तथा इनमें जल और भोजन के संवहन के लिए विशेष ऊतक नहीं पाए जाते हैं। ये सामान्यतः नम स्थानों पर उगते हैं।
टेरिडोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ विकसित होती हैं। इनमें जल और भोजन के संवहन के लिए विशेष ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) उपस्थित होते हैं, जिससे इनका शरीर अधिक विकसित होता है।
इन्हीं संरचनात्मक तथा संवहनी ऊतकों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर ब्रायोफाइट और टेरिडोफाइट को अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया गया है।
मुख्य बिंदु:
• ब्रायोफाइटा में संवहनी ऊतक नहीं होते।
• टेरिडोफाइटा में संवहनी ऊतक (जाइलम व फ्लोएम) उपस्थित होते हैं।
• दोनों समूहों में बीज और पुष्प अनुपस्थित होते हैं।
आम गलतियाँ:
• बीज न होने के कारण दोनों को एक ही समूह मान लेना।
• संवहनी ऊतकों की उपस्थिति की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) दोनों पादप समूहों में अंतर स्पष्ट करने के लिए संवहनी ऊतकों का जिक्र अवश्य करें।
b) उत्तर को दो स्पष्ट भागों (ब्रायोफाइट और टेरिडोफाइट) में लिखकर समझाएँ।
Question 12: वर्गीकरण पदानुक्रम में वर्ग अथवा वंश में से किस समूह में सदस्यों की संख्या कम होती है, परंतु वे अधिक विशेषताएँ साझा करते हैं? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
Answer:
वंश में सदस्यों की संख्या वर्ग की अपेक्षा कम होती है, परंतु उसके सदस्य अधिक समान विशेषताएँ साझा करते हैं।
व्याख्या: वर्गीकरण पदानुक्रम में जैसे-जैसे हम उच्च स्तर (जैसे जगत या वर्ग) से निम्न स्तर (जैसे वंश या जाति) की ओर बढ़ते हैं, जीवों की संख्या घटती जाती है और उनकी समानताएँ बढ़ती जाती हैं। वंश के अंतर्गत आने वाले जीव आपस में अधिक निकट संबंध रखते हैं तथा उनकी संरचना, विकास और अन्य लक्षणों में अधिक समानता होती है। इसलिए वंश में सदस्यों की संख्या कम होती है, परंतु वे अधिक विशेषताएँ साझा करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• पदानुक्रम में नीचे जाने पर जीवों में समानता बढ़ती है।
• वंश, वर्ग की तुलना में पदानुक्रम में नीचे का स्तर है।
• निकट संबंधी जीवों को एक वंश में रखा जाता है।
आम गलतियाँ:
• पदानुक्रम के स्तरों (जाति, वंश, कुल, वर्ग) के क्रम को भ्रमित करना।
• संख्या और समानता के संबंध को उल्टा समझ लेना।
Exam Tips:
a) पदानुक्रम के नियमों को स्पष्ट रूप से याद रखें (नीचे जाने पर समानता बढ़ती है)।
b) 'वंश' को सही उत्तर के रूप में पहले लिखकर फिर व्याख्या करें।
Question 13: एक वैज्ञानिक एक नए जीव की खोज करता है जिसमें चलन की क्षमता तथा स्वपोषी पोषण का गुण पाया जाता है। पाँच जगत वर्गीकरण के अनुसार कौन-सी विशेषताएँ वैज्ञानिक को इस जीव को प्रोटिस्टा कुल में रखने में सहायता करेंगी?
Answer:
यदि वह जीव एककोशिकीय तथा सुकेंद्रकी हो, उसमें स्पष्ट केंद्रक उपस्थित हो, वह जल अथवा आर्द्र स्थानों में रहता हो तथा चलन के साथ-साथ स्वपोषी पोषण करने की क्षमता रखता हो, तो उसे प्रोटिस्टा जगत में रखा जाएगा।
प्रोटिस्टा जगत में ऐसे अनेक एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव पाए जाते हैं जिनमें चलन की क्षमता होती है तथा कुछ जीव प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन भी बनाते हैं। इसलिए एककोशिकीय सुकेंद्रकी संगठन तथा स्वपोषी पोषण के साथ चलन की क्षमता इस जीव को प्रोटिस्टा जगत में रखने का आधार बनेगी।
मुख्य बिंदु:
• एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव प्रोटिस्टा के अंतर्गत आते हैं।
• इनमें चलन के लिए कशाभ या पक्षाभ हो सकते हैं।
• कुछ प्रोटिस्टा स्वपोषी (प्रकाशसंश्लेषी) होते हैं।
आम गलतियाँ:
• स्वपोषी देखकर जीव को सीधे पादप जगत में मान लेना।
• एककोशिकीय प्रकृति को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) प्रोटिस्टा जगत के विविध लक्षणों (जैसे चलन और स्वपोषी होना) को शामिल करें।
b) एककोशिकीय सुकेंद्रकी होना मुख्य शर्त के रूप में लिखें।
Question 14: एक शोधकर्ता ने एक एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव की पहचान कवक के रूप में की है। पाँच जगत वर्गीकरण के अनुसार किसी एककोशिकीय जीव को जगत फंजाई में रखने के लिए आप कौन-सी पहचान कुंजी को सुझाएँगे?
Answer:
किसी एककोशिकीय जीव को फंजाई जगत में रखने के लिए निम्नलिखित पहचान कुंजी अपनाई जा सकती है:
• जीव एककोशिकीय तथा सुकेंद्रकी हो।
• उसमें कोशिका भित्ति (काइटीन की बनी) उपस्थित हो।
• वह प्रकाश संश्लेषण न करता हो।
• वह परपोषी हो तथा मृत एवं सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करता हो।
• उसका पोषण अवशोषण विधि द्वारा होता हो।
• उसमें हरितलवक उपस्थित न हो।
• उसका प्रजनन सामान्यतः बीजाणुओं द्वारा होता हो।
यदि कोई एककोशिकीय जीव इन विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, तो उसे फंजाई जगत में वर्गीकृत किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• फंजाई (कवक) मृतजीवी और परपोषी होते हैं।
• इनमें कोशिका भित्ति होती है पर हरितलवक नहीं होता।
• अवशोषण द्वारा पोषण इनकी मुख्य विशेषता है।
आम गलतियाँ:
• कवक को पादप मान लेना क्योंकि उनमें कोशिका भित्ति होती है।
• प्रकाश संश्लेषण की उपस्थिति या अनुपस्थिति में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) पहचान कुंजी को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) कवक के पोषण की विधि (अवशोषण) का विशेष उल्लेख करें।
Question 15: एक दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने तीन अलग-अलग पर्यावरणों—एक अलवणीय जल के तालाब, सड़ी-गली लकड़ियों के आस-पास की नमी युक्त मिट्टी तथा जंतुओं के पाचन तंत्र से एकत्रित किए गए जीवों का परीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने जीवों का प्रत्यक्ष नामकरण करने के स्थान पर केवल उनकी संरचनात्मक, कोशिकीय तथा पोषण संबंधी विशेषताओं को नीचे दी गई तालिका के अनुसार अभिलिखित किया।
[तालिका के आधार पर उप-प्रश्न (i) से (vii) के उत्तर दें]
Answer:
(i) किसी एक ऐसे जीव की पहचान कीजिए जो स्पष्ट रूप से जगत फंजाई में सम्मिलित हो। अपने उत्तर के समर्थन में एक अवलोकन लिखिए।
उत्तर: जीव ‘Q’ स्पष्ट रूप से जगत फंजाई में सम्मिलित है।
समर्थन में अवलोकन: यह बहुकोशिकीय, तंतुमय काया वाला है, इसमें कोशिका भित्ति उपस्थित है, पर्णहरित अनुपस्थित है तथा यह मृत कार्बनिक पदार्थों पर वृद्धि करता है।
(ii) कौन-सा जीव जगत मोनेरा में सम्मिलित किया जाएगा? इस वर्गीकरण को संगतपूर्ण ठहराने वाली एक विशेषता लिखिए।
उत्तर: जीव ‘P’ को जगत मोनेरा में सम्मिलित किया जाएगा।
विशेषता: इसमें वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित है, अर्थात यह पूर्वकेंद्रकी जीव है।
(iii) जीव ‘R’ और ‘Q’ दोनों सुकेंद्रकी हैं, तब भी इन्हें अलग-अलग जगतों में सम्मिलित किया गया है। उन मानदंडों का विश्लेषण कीजिए जो इन्हें अलग करते हैं।
उत्तर: जीव ‘R’ एककोशिकीय है, जबकि ‘Q’ बहुकोशिकीय है। जीव ‘R’ में कशाभ द्वारा गति होती है तथा यह प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण और प्रकाश के अभाव में विषमपोषी पोषण करता है। जीव ‘Q’ तंतुमय काया वाला परपोषी जीव है, इसमें पर्णहरित नहीं होता तथा यह मृत कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करता है। इन्हीं विशेषताओं के आधार पर ‘R’ को प्रोटिस्टा तथा ‘Q’ को फंजाई जगत में रखा जाता है।
(iv) समझाइए कि जीव ‘S’ का वर्गीकरण केवल पोषण की विधि के आधार पर क्यों नहीं किया जा सकता।
उत्तर: जीव ‘S’ का वर्गीकरण केवल पोषण के आधार पर नहीं किया जा सकता, क्योंकि वर्गीकरण में शरीर की संरचना, कोशिकीय संगठन, ऊतकों की उपस्थिति, मेरुदंड की उपस्थिति तथा विकास संबंधी विशेषताओं को भी ध्यान में रखा जाता है। जीव ‘S’ बहुकोशिकीय है, इसमें सुविभेदित ऊतक तथा मेरुदंड उपस्थित हैं।
(v) जीव ‘T’ पाँचों जगतों में से किसी में भी नहीं रखा जा सकता। वर्गीकरण में प्रयुक्त कौन-सी मूलभूत विशेषता इसमें नहीं है और इससे वर्गीकरण प्रणालियों की कमियों के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर: जीव ‘T’ में कोशिकीय संगठन नहीं है। यह अकोशिकीय है तथा केवल आनुवंशिक पदार्थ और प्रोटीन आवरण से बना है। यह परपोषी कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहता है। इससे स्पष्ट होता है कि पाँच-जगत वर्गीकरण सभी प्रकार के जैविक स्वरूपों को समाहित नहीं कर सकता तथा नई वैज्ञानिक खोजों के अनुसार वर्गीकरण प्रणालियों में संशोधन की आवश्यकता पड़ती है।
(vi) यदि वर्गीकरण केवल पर्यावास के आधार पर किया गया होता तो किन जीवों को अनुचित रूप से एक साथ समूहित किया जा सकता था? ऐसे वर्गीकरण के वैज्ञानिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: यदि वर्गीकरण केवल पर्यावास के आधार पर किया जाता, तो समान स्थान पर रहने वाले अनेक असंबंधित जीव एक ही समूह में आ जाते। उदाहरण के लिए तालाब में रहने वाले जीव ‘R’ तथा अन्य जलीय जीवों को उनकी मूलभूत भिन्नताओं के बावजूद एक ही समूह में रखा जा सकता था। ऐसा वर्गीकरण वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं होगा क्योंकि इससे कोशिकीय संगठन, पोषण, शरीर संरचना तथा विकास संबंधी वास्तविक संबंध स्पष्ट नहीं हो पाएँगे।
(vii) कल्पना कीजिए कि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नए जीव की खोज की है जो बहुकोशिकीय तथा सुकेंद्रकी है। उसमें पर्णहरित नहीं है और वह बाहर से किसी परपोषी से पोषक तत्त्व अवशोषित करता है। बताइए इसे फंजाई या एनीमेलिया में से किस जगत में सम्मिलित किया जाना चाहिए? वर्गीकरण के मानदंडों के आधार पर अपने तर्क को उचित ठहराइए।
उत्तर: ऐसे जीव को फंजाई जगत में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
कारण: वह बहुकोशिकीय तथा सुकेंद्रकी है, उसमें पर्णहरित नहीं है और वह बाहर से पोषक तत्त्वों का अवशोषण करके पोषण प्राप्त करता है। यह फंजाई जगत की प्रमुख विशेषता है। इसके विपरीत एनीमेलिया जगत के जीव भोजन का अंतर्ग्रहण करके उसका पाचन करते हैं, जबकि फंजाई बाह्य अवशोषण द्वारा पोषण प्राप्त करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• तालिका आधारित प्रश्नों में दिए गए लक्षणों (जैसे केंद्रक, कोशिका भित्ति, पोषण) का बारीकी से अध्ययन करें।
• मोनेरा, प्रोटिस्टा और फंजाई के मुख्य अंतर पहचानें।
• जीव 'T' विषाणु को दर्शाता है जो अकोशिकीय है।
आम गलतियाँ:
• तालिका के संकेतों को ठीक से समझे बिना उत्तर लिखना।
• अंतर्ग्रहण और बाह्य अवशोषण पोषण में अंतर न समझ पाना।
Exam Tips:
a) उप-प्रश्नों (i) से (vii) के उत्तर क्रमानुसार और स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रत्येक उप-प्रश्न में पूछे गए मुख्य वैज्ञानिक आधार (जैसे केंद्रक या पोषण) का उल्लेख अवश्य करें।
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