NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 11 Reproduction How Life Continues (जनन जीवन की निरंतरता) Exercise Questions in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 11 जनन जीवन की निरंतरता

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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 11 जनन जीवन की निरंतरता

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Question 1: एक पुष्प के परागकोष को परिपक्व होने से पूर्व ही हटा दिया जाता है। इसके पश्चात उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के परागकण उसके वर्तिकाग्र पर छिड़के जाते हैं और बीज बनते हैं। यहाँ कौन-सी प्रक्रिया सुनिश्चित होती है?
(i) स्व-परागण (ii) पर-परागण (iii) निषेचन (iv) ऊतक संवर्धन

Answer:

(ii) पर-परागण
कारण: परागकोष हटाने से स्व-परागण नहीं हो सकता। दूसरे पौधे के परागकण वर्तिकाग्र पर डालने से पर-परागण सुनिश्चित होता है।

मुख्य बिंदु:

• पुष्प से परिपक्वता से पहले परागकोष हटाने की प्रक्रिया को विपुंसन (Emasculation) कहते हैं。
• इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य स्व-परागण को रोकना और केवल वांछित परागकणों द्वारा पर-परागण कराना होता है。
• यह कृत्रिम परागण तकनीकों का एक महत्वपूर्ण चरण है।

आम गलतियाँ:

• छात्र इसे स्व-परागण समझ लेते हैं क्योंकि बीज उसी प्रजाति में बन रहे हैं。
• निषेचन को मुख्य प्रक्रिया मान लेना जबकि यह परागण की विधि है。
• ऊतक संवर्धन और परागण के बीच अंतर न समझ पाना।

Exam Tips:

a) प्रश्न में दिए गए विकल्पों को ध्यान से पढ़ें。
b) पर-परागण और स्व-परागण के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें。
c) कारण सहित उत्तर लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 2: पौधों में लैंगिक जनन के निम्नलिखित चरणों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(i) वर्तिकाग्र पर पराग का अंकुरण (ii) निषेचन (iii) परागण (iv) युग्मज का निर्माण

Answer:

सही क्रम: (iii) परागण → (i) वर्तिकाग्र पर पराग का अंकुरण → (ii) निषेचन → (iv) युग्मज का निर्माण
• परागण: परागकण परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं (वायु, कीट, जल अथवा पक्षियों द्वारा)।
• वर्तिकाग्र पर परागकण का अंकुरण: परागकण किसी संगत वर्तिकाग्र पर पहुँचकर एक पराग नलिका उत्पन्न करता है जो वर्तिका से होते हुए नीचे की ओर बढ़ते हुए अंडाशय तक पहुँचती है।
• निषेचन: नर युग्मक (शुक्राणु कोशिका) पराग नलिका से होकर गुजरता है और बीजांड के अंदर स्थित अंडकोशिका (मादा युग्मक) के साथ युग्मित हो जाता है।
• युग्मनज का निर्माण: अंडाणु और शुक्राणु के संलयन से युग्मनज बनता है, जो बाद में भ्रूण (और अंततः बीज) में विकसित होता है।

मुख्य बिंदु:

• पौधों में लैंगिक जनन एक क्रमिक प्रक्रिया है जो परागण से शुरू होती है।
• पराग नलिका का विकास निषेचन प्रक्रिया को संभव बनाता है।
• युग्मनज का निर्माण नर और मादा युग्मकों के संलयन का परिणाम है।

आम गलतियाँ:

• चरणों के क्रम को आगे-पीछे लिख देना।
• निषेचन को परागण से पहले मान लेना।
• पराग नलिका के कार्य को भूल जाना।

Exam Tips:

a) पादप जनन के चरणों को हमेशा तार्किक क्रम में याद रखें。
b) प्रत्येक चरण की परिभाषा संक्षिप्त रूप में दें।
c) तीर के निशान (→) का उपयोग करके सही क्रम स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 3: नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए。
अभिकथन: निषेचन के पश्चात निर्मित युग्मज तत्काल गर्भाशय भित्ति से जुड़ जाता है।
कारण: गर्भाशय की भित्ति सदैव युग्मज को ग्रहण करने के लिए तैयार रहती है。
(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं किंतु कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
(iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है।
(iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है।

Answer:

(iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है。
व्याख्या: निषेचन के बाद युग्मज पहले कई बार विभाजित होकर भ्रूण बनता है। इसके बाद ही गर्भाशय की भित्ति में आरोपण होता है, इसलिए युग्मज तत्काल नहीं जुड़ता। गर्भाशय की भित्ति उचित समय पर भ्रूण के आरोपण के लिए तैयार रहती है।

मुख्य बिंदु:

• निषेचन के तुरंत बाद युग्मज गर्भाशय से नहीं जुड़ता है।
• फेलोपियन ट्यूब में विभाजन के बाद भ्रूण गर्भाशय तक पहुँचता है।
• गर्भाशय का आंतरिक स्तर भ्रूण के आरोपण के लिए विशिष्ट समय पर तैयार होता है।

आम गलतियाँ:

• अभिकथन को बिना सोचे-समझे सत्य मान लेना।
• युग्मज और भ्रूण के विकास के समय के अंतर को न समझना।
• गर्भाशय की तैयारी और आरोपण की प्रक्रिया में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) अभिकथन और कारण वाले प्रश्नों में दोनों कथनों की वैज्ञानिक सत्यता की अलग-अलग जाँच करें。
b) जीव विज्ञान की प्रक्रियाओं के समय (Timeline) को ध्यान में रखें。
c) सही विकल्प का क्रमांक और कथन स्पष्ट लिखें।

 

Question 4: अलैंगिक जनन से उत्पन्न संततियाँ आनुवंशिक रूप से जनक के समान क्यों होती हैं?

Answer:

अलैंगिक जनन में केवल एक ही जनक भाग लेता है और नई संतति जनक कोशिका के समसूत्री विभाजन द्वारा उत्पन्न होती है, जिसमें गुणसूत्रों की संख्या और आनुवंशिक पदार्थ जनक के समान रहता है। इसमें कोई नया संयोजन नहीं होता, क्योंकि दो अलग जनकों के गुणसूत्रों का मिश्रण नहीं होता। इसलिए संतति आनुवंशिक रूप से जनक की हूबहू प्रतिकृति (क्लोन) होती है।

मुख्य बिंदु:

• अलैंगिक जनन में एकल-जनक (Single parent) भागीदारी होती है।
• समसूत्री विभाजन (Mitosis) के कारण आनुवंशिक भिन्नता नहीं आती।
• संततियाँ आनुवंशिक रूप से पूर्णतः समरूप या क्लोन होती हैं।

आम गलतियाँ:

• अर्धसूत्री और समसूत्री विभाजन में अंतर स्पष्ट न करना।
• 'क्लोन' शब्द का उल्लेख न करना।
• दो जनकों की भागीदारी मान लेना।

Exam Tips:

a) 'समसूत्री विभाजन' और 'क्लोन' जैसे वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें。
b) उत्तर को बिंदुवार या स्पष्ट पैराग्राफ में लिखें。
c) लैंगिक और अलैंगिक जनन के मुख्य अंतर को ध्यान में रखें।

 

Question 5: गर्भावस्था के दौरान मासिक धर्म क्यों रुक जाता है? स्पष्ट कीजिए।

Answer:

गर्भावस्था के दौरान अंडोत्सर्ग रुक जाता है (हार्मोनल परिवर्तनों के कारण), इसलिए कोई नया अंडाणु निषेचन के लिए उपलब्ध नहीं होता। साथ ही, गर्भाशय की भित्ति (आंतरिक आस्तर) विघटित नहीं होती बल्कि विकासशील भ्रूण/गर्भ को पोषण देने और उसे धारण करने के लिए मोटी और सुदृढ़ बनी रहती है। चूँकि रजोधर्म गर्भाशय आस्तर के निस्तारण से होता है, और यह आस्तर गर्भावस्था में बना रहना आवश्यक है, अतः मासिक धर्म रुक जाता है।

मुख्य बिंदु:

• गर्भावस्था में हॉर्मोनल बदलाव के कारण अंडोत्सर्ग बंद हो जाता है。
• गर्भाशय का आस्तर भ्रूण के पोषण के लिए बना रहता है, टूटता नहीं है。
• मासिक धर्म का मुख्य आधार गर्भाशय आस्तर का रक्त और ऊतकों के रूप में बाहर आना है।

आम गलतियाँ:

• हॉर्मोनल नियंत्रण को न समझाना।
• गर्भाशय आस्तर की भूमिका को भूल जाना。
• सामान्य चक्र और गर्भावस्था के चक्र में अंतर न स्पष्ट करना।

Exam Tips:

a) गर्भाशय की भित्ति के महत्व को अपने उत्तर में प्रमुखता दें。
b) हॉर्मोन्स और अंडोत्सर्ग के संबंध को संक्षिप्त में स्पष्ट करें。
c) वैज्ञानिक शब्दावली का सटीक प्रयोग करें।

 

Question 6: दिन के समय खिलने वाले पुष्पों की तुलना में रात में खिलने वाले पुष्प सफेद या हल्के रंग के क्यों होते हैं?

Answer:

रात में खिलने वाले पुष्प सफेद या हल्के रंग के होते हैं क्योंकि रात्रिकालीन परागणकारी (जैसे पतंगे, चमगादड़) मुख्यतः गंध और दृश्यता पर निर्भर करते हैं, दिन के उजाले पर नहीं। हल्के/सफेद रंग के पुष्प कम रोशनी (चांदनी या धुंधलके) में भी अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं और परागणकारियों को आसानी से आकर्षित कर पाते हैं, जबकि चटकीले रंग कम रोशनी में उतने प्रभावी नहीं होते।

मुख्य बिंदु:

• रात्रि के समय परागण करने वाले जीव रंगों की बजाय गंध और हल्की रोशनी में दृश्यता पर निर्भर होते हैं。
• सफेद या हल्के रंग चाँद की रोशनी में अधिक परावर्तन (reflection) करते हैं जिससे वे दूर से दिखाई देते हैं。
• इस प्रकार के पुष्पों में तीव्र गंध भी होती है जो कीटों को आकर्षित करती है।

आम गलतियाँ:

• केवल रंगों की बात करना और परागणकारियों की भूमिका को छोड़ देना।
• रात्रि के कीटों और दिन के कीटों की विशेषताओं को मिला देना।

Exam Tips:

a) कीटों के व्यवहार और पुष्पों के रंगों के बीच के सह-संबंध को समझाएं।
b) 'रात्रिकालीन परागणकारी' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
c) उत्तर को सरल और तार्किक तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Question 7: लैंगिक रूप से उत्पन्न पौधों की तुलना में कायिक रूप से प्रवर्धित पौधे रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों होते हैं?

Answer:

कायिक प्रवर्धन (वर्धी प्रजनन) से उत्पन्न पौधे आनुवंशिक रूप से समान (क्लोन) होते हैं क्योंकि वे केवल एक जनक से अलैंगिक रूप से उत्पन्न होते हैं। इनमें आनुवंशिक विविधता नहीं होती। यदि कोई रोगजनक (रोगाणु) एक पौधे को संक्रमित करने में सक्षम है, तो वह समान आनुवंशिक संरचना के कारण सभी पौधों को संक्रमित कर सकता है। इसके विपरीत, लैंगिक जनन से उत्पन्न पौधों में आनुवंशिक विविधता होती है, जिससे कुछ पौधे रोग-प्रतिरोधी हो सकते हैं और पूरी फसल नष्ट नहीं होती।

मुख्य बिंदु:

• कायिक प्रवर्धन से उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से समरूप (क्लोन) होते हैं।
• आनुवंशिक विविधता के अभाव के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास नहीं हो पाता।
• एक पौधे में रोग लगने पर पूरा बगीचा या फसल प्रभावित हो सकती है।

आम गलतियाँ:

• आनुवंशिक विविधता (Genetic diversity) के महत्व को नजरअंदाज करना।
• केवल कायिक प्रवर्धन के लाभ बताना, हानियों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) 'क्लोन' और 'आनुवंशिक विविधता' शब्दों का सही उपयोग करें。
b) तुलनात्मक रूप से उत्तर दें ताकि दोनों विधियों का अंतर स्पष्ट हो。
c) रोग के संक्रमण के फैलने का कारण स्पष्ट करें।

 

Question 8: यदि किसी प्रकार के पौधों में सभी पुष्प केवल स्व-परागण करने में सक्षम हों, तो आगे आने वाली अनेक पीढ़ियों में आनुवंशिक विविधता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।

Answer:

यदि सभी पुष्प केवल स्व-परागण करते हैं, तो संतति में जनकों के जीन का कोई नया संयोजन नहीं होगा — प्रत्येक पीढ़ी अपने जनक के समान आनुवंशिक पदार्थ को दोहराएगी। इससे अनेक पीढ़ियों में आनुवंशिक विविधता में कमी आएगी, जिससे पौधे बदलते पर्यावरण, नए रोगों या कीटों के प्रति कम अनुकूलनशील हो जाएँगे और जाति की उत्तरजीविता क्षमता घट सकती है।

मुख्य बिंदु:

• स्व-परागण लगातार होने से जीन में नयापन या विविधता समाप्त हो जाती है。
• आनुवंशिक एकरूपता पर्यावरण के बदलावों के प्रति पौधों को कमजोर बनाती है。
• प्रजाति की सहनशीलता और उत्तरजीविता खतरे में पड़ सकती है।

आम गलतियाँ:

• केवल यह लिखना कि पौधे जीवित नहीं रहेंगे (जबकि वे कुछ समय तक जीवित रह सकते हैं, पर कमजोर हो जाते हैं)।
• जीन संयोजन (Gene combination) के महत्व को न समझना।

Exam Tips:

a) आनुवंशिक विविधता के घटने के परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
b) पर्यावरण के प्रति अनुकूलन क्षमता पर जोर दें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग करें।

 

Question 9: एक कृषक बड़ी संख्या में आनुवंशिक रूप से एक जैसे पौधे शीघ्रता से उगाना चाहता है। इसके लिए उपयुक्त जनन विधियों का सुझाव दीजिए और समझाइए कि वे प्रभावी क्यों हैं?

Answer:

आनुवंशिक रूप से समान पौधे शीघ्रता से उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन विधियाँ (कर्तन, कलम बाँधना, परतन, ऊतक संवर्धन) उपयुक्त हैं। ये प्रभावी हैं क्योंकि:
• ये अलैंगिक जनन पर आधारित हैं जिसमें केवल एक जनक होता है
• संतति जनक के समरूप (क्लोन) होती है, आनुवंशिक विविधता नहीं आती
• बीज बनने और अंकुरण की धीमी प्रक्रिया से बचा जा सकता है, जिससे पौधे तेजी से और कम समय में तैयार होते हैं
• वांछित गुणों वाली फसल की किस्म को यथावत बनाए रखा जा सकता है

मुख्य बिंदु:

• कायिक प्रवर्धन और ऊतक संवर्धन इसके लिए सर्वोत्तम तकनीकें हैं।
• समय की बचत और वांछित गुणों की सुरक्षा इसके प्रमुख लाभ हैं।
• बीज रहित पौधों को उगाने में भी यह विधि मददगार है।

आम गलतियाँ:

• केवल एक विधि का नाम लिखकर छोड़ देना, सभी उपयुक्त विधियाँ न बताना।
• विधियों के प्रभावी होने के वैज्ञानिक कारण न लिखना।

Exam Tips:

a) बिन्दुओं (Bulleted points) में उत्तर लिखकर अपनी बात को स्पष्ट करें।
b) कृषकों के दृष्टिकोण से उपयोगिता को समझाएं।
c) कायिक प्रवर्धन के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख करें।

 

Question 10: सुरेश परागकणों के अंकुरण का अध्ययन करने के लिए विभिन्न शर्करा सांद्रता (0%, 2.5%, 5%, 7.5%, 10%) में परागकण लेकर स्लाइड तैयार करता है。
(i) इस व्यवस्थापन के उपयोग से किन विभिन्न परिकल्पनाओं की जाँच की जा सकती है?
(ii) इस व्यवस्थापन में कौन-से मानदंडों को समान रखा जाना चाहिए?

Answer:

(i) इस व्यवस्थापन से यह जाँचा जा सकता है कि शर्करा सांद्रता का परागकणों के अंकुरण पर क्या प्रभाव पड़ता है — अर्थात कौन-सी सांद्रता परागकण अंकुरण के लिए सबसे अनुकूल है, और क्या अत्यधिक कम या अधिक सांद्रता अंकुरण को रोकती है。
(ii) समान रखे जाने वाले मानदंड: तापमान, परागकणों की मात्रा/संख्या, स्लाइड पर द्रव की मात्रा, अंकुरण के लिए दिया गया समय, आर्द्रता, प्रकाश की स्थिति और परागकणों का स्रोत (एक ही पौधे/प्रजाति से)।

मुख्य बिंदु:

• प्रयोग का उद्देश्य विभिन्न शर्करा सांद्रता का परागकणों पर प्रभाव देखना है。
• नियंत्रित चर (Controlled variables) प्रयोग की सटीकता के लिए आवश्यक हैं。
• अनुकूलतम सांद्रता (Optimum concentration) की पहचान करना इसका मुख्य निष्कर्ष होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल शर्करा की बात करना और अन्य भौतिक कारकों को भूल जाना।
• परिकल्पना और नियंत्रित मानदंडों में अंतर न समझ पाना।

Exam Tips:

a) दोनों भागों (i) और (ii) के उत्तर अलग-अलग और स्पष्ट रूप से दें।
b) प्रयोग में नियंत्रित किए जाने वाले कारकों की सूची पूरी लिखें।
c) वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रारूप को ध्यान में रखें।

 

Question 11: नीचे दिए गए चित्र को देखिए और दिए गए संकेतों के आधार पर पता लगाइए कि इन पुष्पों में किस प्रकार का परागण हुआ होगा –
टमाटर: पुंकेसर वर्तिकाग्र को ढक लेते हैं।
गेहूँ: पुष्प परागण के पश्चात खुलते हैं।
पपीता: नर और मादा पुष्प प्रायः अलग-अलग पपीते के पेड़ों पर होते हैं।

Answer:

पुष्प | परागण प्रकार | कारण
टमाटर | स्व-परागण | पुंकेसर वर्तिकाग्र को ढक लेते हैं, जिससे परागकण स्वयं वर्तिकाग्र पर गिर जाते हैं。
गेहूँ | स्व-परागण | पुष्प परागण के पश्चात खुलते हैं अर्थात परागण खिलने से पहले ही हो चुका होता है。
पपीता | पर-परागण | नर और मादा पुष्प अलग-अलग पेड़ों पर होते हैं, इसलिए स्व-परागण संभव नहीं, बाहरी माध्यम से परागकण स्थानांतरित होना आवश्यक है।

मुख्य बिंदु:

• पुष्प की संरचना तय करती है कि उसमें स्व-परागण होगा या पर-परागण।
• बंद पुष्पों में अनिवार्य रूप से स्व-परागण होता है।
• एकलिंगी और अलग-अलग पौधों पर पाए जाने वाले पुष्प पर-परागण को बढ़ावा देते हैं।

आम गलतियाँ:

• संकेतों को ठीक से समझे बिना परागण का प्रकार गलत लिख देना।
• कारण स्पष्ट रूप से न लिखना।

Exam Tips:

a) सारणी (Table) बनाकर उत्तर देने से परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
b) प्रत्येक पुष्प के संकेत का वैज्ञानिक कारणज्यों का त्यों लिखें।
c) स्व और पर-परागण की अवधारणा को स्पष्ट रखें।

 

Question 12: उत्तरी भारत के निचले हिमालयी क्षेत्र में सेब एक महत्वपूर्ण नगदी फसल है जो कृषकों की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान करती है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक परागणकारियों की जनसंख्या में अत्यधिक गिरावट के कारण सेब की उपज निरंतर घट रही है। एक शोधकर्त्ता कृषक समूह ने दो अलग-अलग स्थानों स्थान ‘क’ और स्थान ‘ख’ पर परीक्षणार्थ सेब के दो उद्यान लगाए। स्थान ‘क’ के उद्यानों में इन्होंने सेब के पुष्पों का परागण प्राकृतिक परागणकारियों द्वारा होने दिया। स्थान ‘ख’ के उद्यानों में इन्होंने मधुमक्खी पालन की मिश्रित कृषि तकनीक अपनाई। सेब के उत्पादन के साथ-साथ कृषक ने शहद का भी उत्पादन किया। सेबों की उपज को दर्शाया गया है:
(i) शोधकर्त्ता कृषक समूह ने इस शोध कार्य के लिए किन परिकल्पनाओं पर विचार किया होगा?
(ii) प्रयोग में कौन-कौन से विभिन्न मानदंड हैं?
(iii) सेब की अधिक उपज के संदर्भ में परीक्षणार्थ लगाए गए दो उद्यानों ‘क’ और ‘ख’ के आँकड़ों की तुलना और विश्लेषण कीजिए।
(iv) अपने विश्लेषण के आधार पर इन आँकड़ों से आपने क्या निष्कर्ष निकाला?

Answer:

(i) परिकल्पना: मधुमक्खी पालन (कीट-परागण में वृद्धि) सेब के परागण और फल उत्पादन (उपज) को प्राकृतिक परागण की तुलना में बढ़ाता है।
(ii) मानदंड: परागण विधि (प्राकृतिक बनाम मधुमक्खी सहायित), फल लगना (%), फल गिरना (%); अन्य समान रखे मानदंड — पौधों की किस्म, मिट्टी, जलवायु, सिंचाई, आयु आदि。
(iii) तुलना: स्थान ‘ख’ (मधुमक्खी कालोनी सहित) में फल लगने का प्रतिशत (~40%) स्थान ‘क’ (प्राकृतिक परागण, ~26%) की तुलना में अधिक है। इसके विपरीत, फल गिरने का प्रतिशत स्थान ‘ख’ में (~8%) स्थान ‘क’ (~35%) की तुलना में बहुत कम है।
(iv) निष्कर्ष: मधुमक्खी पालन के माध्यम से बेहतर/अधिक परागण होने से फल लगने की दर बढ़ती है और फल गिरने की दर घटती है, जिससे सेब की समग्र उपज में सुधार होता है। अतः मधुमक्खी पालन प्राकृतिक परागणकारियों की कमी की भरपाई कर सेब उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।

मुख्य बिंदु:

• कृत्रिम रूप से मधुमक्खी पालन करने से परागण की दक्षता बढ़ती है।
• बेहतर परागण से फल लगने की दर में वृद्धि और फल गिरने की दर में कमी आती है।
• यह कृषि और बागवानी में सह-उत्पादन (सेب और शहद) का एक बेहतरीन उदाहरण है।

आम गलतियाँ:

• आँकड़ों की तुलना करते समय प्रतिशत के आंकड़ों को गलत पढ़ना।
• परिकल्पना और निष्कर्ष को एक ही समझ लेना।

Exam Tips:

a) उप-प्रश्नों (i) से (iv) के उत्तर क्रमानुसार और स्पष्ट रूप से दें।
b) आँकड़ों का विश्लेषण करते समय प्रतिशत का सही उल्लेख करें।
c) कृषि में वैज्ञानिक तकनीकों के लाभ को अपने शब्दों में अच्छे से समझाएं।

 

Question 13: एक विद्यार्थी का दावा है कि मानवों में अंडोत्सर्ग सदैव मासिक धर्म के 14वें दिन होता है। कथन की विवेचनात्मक रूप से जाँच कीजिए और बताइए कि दावा सही है या नहीं। अपने उत्तर के लिए कम-से-कम दो कारण दीजिए।

Answer:

दावा पूर्णतः सही नहीं है। कारण:
1. मासिक धर्म चक्र (रजोधर्म चक्र) की अवधि सभी महिलाओं में या हर चक्र में एक समान 28 दिन की नहीं होती — यह सामान्यतः 21 से 35 दिनों तक भिन्न हो सकती है। अतः अंडोत्सर्ग का दिन भी तदनुसार बदल जाएगा, हमेशा 14वें दिन नहीं होगा。
2. 14वाँ दिन केवल 28 दिन के आदर्श/प्रारूपिक चक्र पर आधारित एक अनुमानित मान है। तनाव, स्वास्थ्य, आयु और अन्य शारीरिक कारकों के कारण वास्तविक अंडोत्सर्ग का समय व्यक्ति-दर-व्यक्ति और चक्र-दर-चक्र अलग हो सकता है, इसलिए इसे एक निश्चित नियम के रूप में नहीं लिया जा सकता।

मुख्य बिंदु:

• मासिक धर्म चक्र की अवधि हर महिला में भिन्न हो सकती है (21-35 दिन)।
• 14वाँ दिन केवल एक मानक 28 दिवसीय चक्र के लिए है, सार्वभौमिक सत्य नहीं।
• शारीरिक स्वास्थ्य, तनाव और हॉर्मोनल संतुलन अंडोत्सर्ग के समय को प्रभावित करते हैं।

आम गलतियाँ:

• 14वें दिन के नियम को सभी महिलाओं पर अटल सत्य मान लेना।
• चक्र की अवधि में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) विवेचनात्मक प्रश्नों में 'सही नहीं है' लिखकर उसके तार्किक कारण बिंदुवार दें।
b) व्यक्तिगत विभिन्नताओं (Individual variations) का उल्लेख अवश्य करें।
c) जीव विज्ञान की सामान्य अवधारणाओं के अपवादों और सीमाओं को समझें।

 

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