Step-by-Step Textbook Solutions for Class 9 Science Chapter 08 एक यात्रा परमाणु के भीतर
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Question 1: टॉमसन के परमाणु मॉडल की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
Answer:
टॉमसन के अनुसार परमाणु धनात्मक आवेश का एक गोला होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन समान रूप से वितरित रहते हैं, जैसे पुडिंग में प्लम्स धँसे होते हैं।
इसी कारण इसे ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ कहा गया।
यह परमाणु में धनावेश और ऋणावेश के संतुलन को दर्शाने वाला प्रथम सार्थक प्रयास था।
मुख्य बिंदु:
• परमाणु को धनात्मक आवेश का गोला माना गया है।
• इलेक्ट्रॉन इसमें धँसे रहते हैं।
• यह मॉडल धनावेश और ऋणावेश के संतुलन को समझाता है।
आम गलतियाँ:
• छात्रों को लगता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चक्कर लगाते हैं, जबकि इस मॉडल में नाभिक की कोई अवधारणा नहीं थी।
• प्लम पुडिंग मॉडल और रदरफोर्ड मॉडल को आपस में मिला देना।
• परमाणु की स्थिरता को सही से न लिख पाना।
Exam Tips:
a) परिभाषा लिखते समय 'प्लम पुडिंग' या 'बूंदी के लड्डू' का उदाहरण अवश्य दें।
b) स्पष्ट करें कि यह मॉडल परमाणु की उदासीनता को समझाने में सफल रहा था।
c) उत्तर को संक्षिप्त और बिंदुओं में लिखें।
Question 2: रदरफोर्ड मॉडल की सीमा क्या थी?
Answer:
रदरफोर्ड मॉडल यह नहीं समझा सका कि जब ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर त्वरित होता है, तो उसकी ऊर्जा में निरंतर ह्रास होकर उसे नाभिक में क्यों नहीं गिरना चाहिए।
यदि ऐसा होता तो परमाणु अस्थायी होता, जबकि वास्तव में परमाणु स्थायी होते हैं।
इसी सीमा को दूर करने के लिए बोर मॉडल प्रस्तावित हुआ था।
मुख्य बिंदु:
• वृत्ताकार कक्षा में घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरित करता है।
• ऊर्जा हानि के कारण इलेक्ट्रॉन को नाभिक में गिर जाना चाहिए।
• परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या इस मॉडल द्वारा नहीं हो सकी।
आम गलतियाँ:
• केवल यह लिखकर छोड़ देना कि यह नाभिक को नहीं समझा पाया।
• त्वरण और ऊर्जा विकिरण के संबंध को स्पष्ट न करना।
• परमाणु के स्थायित्व पर ध्यान न देना।
Exam Tips:
a) 'विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत' के अनुसार ऊर्जा के ह्रास की बात अवश्य उल्लेखित करें।
b) स्थायित्व शब्द का प्रयोग उत्तर में जरूर करें।
c) सीमा के बाद बोर के सुधार का संक्षिप्त जिक्र करें।
Question 3: नाभिक में प्रोटॉन एक-दूसरे को दूर क्यों नहीं धकेलते, जबकि वे समान आवेशित होते हैं?
Answer:
नाभिक के भीतर प्रत्येक प्रोटॉन दूसरे को प्रतिकर्षित करता है क्योंकि वे सभी धनावेशी होते हैं।
परंतु उदासीन न्यूट्रॉन प्रोटॉनों के मध्य दूरी बढ़ाकर प्रतिकर्षण को कम करते हैं और नाभिकीय बल को प्रबल कर देते हैं, जिससे सभी कण नाभिक में दृढ़ता से बँधे रह सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रोटॉनसमान धनावेश के कारण प्रतिकर्षित करते हैं।
• न्यूट्रॉन न्यूक्लियर बल (नाभिकीय बल) प्रदान करने में सहायता करते हैं।
• प्रबल नाभिकीय आकर्षण बल विद्युत प्रतिकर्षण बल पर भारी पड़ता है।
आम गलतियाँ:
• केवल प्रतिकर्षण बल की बात करना और नाभिकीय बल को भूल जाना।
• न्यूट्रॉन की भूमिका को गलत लिखना।
• प्रोटॉन के आवेश को उदासीन मान लेना।
Exam Tips:
a) 'प्रबल नाभिकीय बल' शब्दावली का प्रयोग करें।
b) न्यूट्रॉन की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) उत्तर को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सटीक लिखें।
Question 4: हीलियम का द्रव्यमान हाइड्रोजन से चार गुना अधिक क्यों होता है, दोगुना नहीं?
Answer:
हीलियम में दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन होते हैं, जबकि हाइड्रोजन में केवल एक प्रोटॉन होता है (न्यूट्रॉन नहीं)।
चूँकि परमाणु का द्रव्यमान मुख्यतः प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के कारण होता है (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान नगण्य है), इसलिए हीलियम का द्रव्यमान हाइड्रोजन से चार गुना अधिक होता है, दोगुना नहीं।
मुख्य बिंदु:
• हीलियम में कुल 4 न्यूक्लियन (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन) होते हैं।
• सामान्य हाइड्रोजन में केवल 1 प्रोटॉन होता है।
• इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान परमाणु द्रव्यमान में योगदान नहीं देता।
आम गलतियाँ:
• परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या में भ्रमित होना।
• हाइड्रोजन में न्यूट्रॉन की उपस्थिति मान लेना।
• इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान को नगण्य न मानना।
Exam Tips:
a) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या लिखकर तुलना करें।
b) स्पष्ट करें कि द्रव्यमान संख्या कणों के कुल योग पर निर्भर करती है।
c) सरल भाषा में कारण स्पष्ट करें।
Question 5: समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान क्यों होते हैं जबकि भौतिक गुण भिन्न होते हैं?
Answer:
समस्थानिकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, और चूँकि रासायनिक गुण मुख्य रूप से संयोजकता इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं, इसलिए इनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने से द्रव्यमान भिन्न होता है, जिससे क्वथनांक और गलनांक जैसे भौतिक गुण भिन्न होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण रासायनिक गुण समान होते हैं।
• भिन्न न्यूट्रॉन संख्या के कारण द्रव्यमान भिन्न होता है।
• द्रव्यमान का अंतर भौतिक गुणों को प्रभावित करता है।
आम गलतियाँ:
• रासायनिक और भौतिक गुणों के कारणों को आपस में मिला देना।
• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की भूमिका को नजरअंदाज करना।
• न्यूट्रॉन का भौतिक गुणों पर प्रभाव न बताना।
Exam Tips:
a) रासायनिक गुणों का संबंध इलेक्ट्रॉनों से और भौतिक गुणों का द्रव्यमान से जोड़कर बताएं।
b) उदाहरण के लिए हाइड्रोजन या क्लोरीन के समस्थानिकों का संदर्भ दें।
c) बिंदुओं में उत्तर लिखने से अंक अच्छे मिलते हैं।
Question 6: भारित औसत परमाणु द्रव्यमान क्या है और यह साधारण औसत से कैसे भिन्न है?
Answer:
भारित औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना प्रत्येक समस्थानिक के द्रव्यमान को उसकी प्राकृतिक प्रतिशत प्रचुरता से गुणा करके तथा दोनों मानों को जोड़कर की जाती है।
यह साधारण औसत से भिन्न है क्योंकि साधारण औसत में समस्थानिकों की सापेक्ष मात्रा की उपेक्षा की जाती है, जबकि भारित औसत तत्व की वास्तविक प्रकृति को सही दर्शाता है (जैसे क्लोरीन का \( 35.5\text{ u} \))।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिशत प्रचुरता को ध्यान में रखा जाता है।
• साधारण औसत में मात्रा का अनुपात नहीं देखा जाता।
• यह प्रकृति में तत्वों के वास्तविक द्रव्यमान को प्रदर्शित करता है।
आम गलतियाँ:
• साधारण औसत और भारित औसत की परिभाषा में अंतर न समझ पाना।
• प्रतिशत प्रचुरता के सूत्र को भूल जाना।
• क्लोरीन के उदाहरण का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) गणना का संक्षिप्त तरीका या सूत्र का उल्लेख करें।
b) क्लोरीन (\( 35.5\text{ u} \)) का उदाहरण अवश्य दें।
c) मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।
Question 7: बोर और बरी के इलेक्ट्रॉन वितरण नियम संक्षेप में बताइए।
Answer:
बोर-बरी नियम के अनुसार किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या \( 2n^2 \) सूत्र से दी जाती है, जहाँ \( n \) कोश की संख्या है।
सबसे बाह्यतम कोश में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं (प्रथम कोश में अधिकतम 2)।
तथा इलेक्ट्रॉन K, L, M, N क्रम में नाभिक के निकटतम कोश से आरंभ कर क्रमबद्ध रूप से भरे जाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• अधिकतम क्षमता \( 2n^2 \) नियम द्वारा निर्धारित होती है।
• बाह्यतम कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं हो सकते।
• कोशों को अंदर से बाहर (K, L, M, N) क्रम में भरा जाता है।
आम गलतियाँ:
• \( 2n^2 \) सूत्र में \( n \) का मान गलत रखना।
• बाह्यतम कोश के अष्टक नियम को भूल जाना।
• कोशों के भरने का क्रम उल्टा लिखना।
Exam Tips:
a) सूत्र \( 2n^2 \) को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) K, L, M, N कोशों के नाम और उनकी क्षमता (2, 8, 18, 32) बताएं।
c) बाह्यतम कोश के नियम का विशेष उल्लेख करें।
Question 8: सोडियम और ऑक्सीजन की संयोजकता का निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से कैसे होता है?
Answer:
सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है; यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर अष्टक प्राप्त कर सकता है, अतः इसकी संयोजकता 1 है।
ऑक्सीजन का विन्यास 2, 6 है; यह अष्टक पूर्ण करने के लिए दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, अतः इसकी संयोजकता 2 है।
मुख्य बिंदु:
• सोडियम बाह्यतम कोश का 1 इलेक्ट्रॉन त्यागता है।
• ऑक्सीजन बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है।
• संयोजकता बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान पर निर्भर करती है।
आम गलतियाँ:
• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास गलत लिखना।
• त्यागने और ग्रहण करने की प्रक्रिया में भ्रमित होना।
• संयोजकता को केवल बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या मान लेना (जब यह 4 से अधिक हो)।
Exam Tips:
a) दोनों तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अलग-अलग लिखकर दिखाएं।
b) अष्टक नियम का संदर्भ दें।
c) संयोजकता का मान स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 9: क्रमवीक्षण सुरंगन सूक्ष्मदर्शी (STM) और संचरण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (TEM) का क्या उपयोग है?
Answer:
क्रमवीक्षण सुरंगन सूक्ष्मदर्शी (STM) पदार्थों की सतहों का परमाण्विक स्तर पर अध्ययन करने के लिए उपयोग होता है।
जबकि संचरण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (TEM) यह दर्शाता है कि अति सूक्ष्म प्रतिदर्श के भीतर परमाणु किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं।
दोनों परमाणुओं की विस्तारित छवि बनाने में सहायक हैं।
मुख्य बिंदु:
• STM सतह के परमाण्विक अध्ययन के लिए है।
• TEM आंतरिक व्यवस्था को देखने में मदद करता है।
• दोनों नैनो-स्तर पर संरचना देखने में उपयोगी हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों सूक्ष्मदर्शियों के कार्यों को मिला देना।
• 'सतह' और 'आंतरिक व्यवस्था' के अंतर को स्पष्ट न करना।
• उपकरणों के नाम सही न लिख पाना।
Exam Tips:
a) दोनों के पूरे नाम (फुल फॉर्म) याद रखें।
b) दोनों के मुख्य कार्यों को अंतर करके बिंदुवार लिखें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक शब्दावली में ही लिखें।
Question 10: कैल्सियम, पोटैशियम और आर्गन समभारिक क्यों कहलाते हैं?
Answer:
कैल्सियम (परमाणु क्रमांक 20), पोटैशियम (परमाणु क्रमांक 19) और आर्गन (परमाणु क्रमांक 18) में प्रोटॉनों की संख्या भिन्न होती है।
परंतु इन सभी की द्रव्यमान संख्या 40 है।
चूँकि इनके परमाणु क्रमांक भिन्न परंतु द्रव्यमान संख्या समान है, अतः ये समभारिक कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन संख्या) भिन्न होते हैं।
• द्रव्यमान संख्या (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) समान होती है।
• समभारिक तत्वों के रासायनिक गुण भी भिन्न होते हैं।
आम गलतियाँ:
• समस्थानिक और समभारिक की परिभाषा को आपस में बदलना।
• परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या के मानों में गलती करना।
• तीनों तत्वों के परमाणु क्रमांक गलत लिखना।
Exam Tips:
a) समभारिक की परिभाषा (भिन्न परमाणु क्रमांक, समान द्रव्यमान संख्या) स्पष्ट लिखें।
b) तीनों तत्वों के उदाहरण देकर उनके क्रमांक और द्रव्यमान संख्या को कोष्ठक में दर्शाएं।
c) उत्तर को सटीक और स्पष्ट रखें।
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