NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi

Download NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

Explore reliable textbook solutions for Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण tailored for Class 9 learners. Utilizing these Science answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final NCERT evaluations.

Access NCERT Solutions and Answers

Access the complete solution PDF for Class 9 Science below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.

Question 1: द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत (% m/m) और द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (% m/v) में अंतर स्पष्ट कीजिए।

Answer:

द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत यह बताता है कि \( 100\text{ g} \) विलयन में विलेय के कितने ग्राम विद्यमान हैं, जो समांगी ठोस मिश्रणों (जैसे दुग्ध पाउडर) के लिए अत्यंत उपयोगी है।
इसके विपरीत, द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत यह बताता है कि \( 100\text{ mL} \) विलयन में विलेय की कितनी मात्रा ग्राम में उपस्थित है।
इसका उपयोग मुख्य रूप से दवाइयों और प्रयोगशालाओं में किया जाता है जहाँ द्रव का आयतन मापना अधिक सुगम होता है।

मुख्य बिंदु:

• द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत ठोस-ठोस मिश्रणों के लिए उपयुक्त है।
• द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत में विलयन का आयतन मिलीलीटर (\( \text{mL} \)) में लिया जाता है।
• इनका प्रयोग सांद्रता व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• विलायक और विलयन के आयतन या द्रव्यमान में भ्रम होना।
• इकाइयों (ग्राम और मिलीलीटर) का सही उल्लेख न करना।
• प्रतिशत निकालने के सूत्र में मानों को उल्टा रखना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय \( 100\text{ g} \) विलयन और \( 100\text{ mL} \) विलयन का विशेष ध्यान रखें।
b) संबंधित सूत्रों को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) उचित उदाहरण देकर अंतर को स्पष्ट करें।

 

Question 2: विलेयता तापमान से किस प्रकार प्रभावित होती है?

Answer:

ठोस विलेयों की द्रव विलायक में विलेयता प्रायः तापमान में वृद्धि के साथ-साथ बढ़ती है, जैसा कि विलेयता वक्र से देखा जा सकता है।
इसके विपरीत, गैसों को द्रवों में घोलने पर उनकी विलेयता प्रायः तापमान में वृद्धि के साथ घटती है।
यह ताप-निर्भरता का गुणधर्म पदार्थों को मिश्रणों से पृथक करने और क्रिस्टलीकरण में अत्यधिक उपयोगी होता है।

मुख्य बिंदु:

• ठोस पदार्थों की विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
• गैसों की विलेयता तापमान बढ़ने पर घटती है।
• यह विलेयता वक्र द्वारा प्रदर्शित की जाती है।

आम गलतियाँ:

• ठोस और गैसों की विलेयता पर तापमान के प्रभाव को मिला देना।
• केवल तापमान वृद्धि लिखना, दिशा स्पष्ट न करना।
• विलेयता वक्र के महत्व को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) ठोस एवं गैस दोनों के लिए अलग-अलग प्रभाव स्पष्ट करें।
b) दैनिक जीवन के उदाहरण (जैसे ठंडे पेय में गैस की अधिक विलेयता) का संदर्भ दें।
c) मुख्य शब्दों जैसे 'विलेयता वक्र' का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।

 

Question 3: क्रिस्टलीकरण, वाष्पीकरण से किस प्रकार भिन्न है?

Answer:

वाष्पीकरण में विलायक को पूरी तरह वाष्पित होने दिया जाता है जिससे विलेय ठोस अवशेष के रूप में रह जाता है और विलायक नष्ट या विलुप्त हो जाता है।
इसके विपरीत, क्रिस्टलीकरण में किसी अशुद्ध ठोस के संतृप्त विलयन को धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है जिससे अतिरिक्त विलेय शुद्ध क्रिस्टलों के रूप में पृथक हो जाता है, जबकि विलायक की मुख्य मात्रा सुरक्षित रहती है।

मुख्य बिंदु:

• वाष्पीकरण में विलायक सुरक्षित नहीं रहता है।
• क्रिस्टलीकरण में शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं।
• क्रिस्टलीकरण वाष्पीकरण की तुलना में अधिक उत्तम विधि है क्योंकि इसमें ठोस विकृत नहीं होता।

आम गलतियाँ:

• दोनों विधियों को एक ही मान लेना।
• विलायक की सुरक्षा के बिंदु को स्पष्ट न करना।
• क्रिस्टलीकरण को केवल वाष्पीकरण का दूसरा नाम समझना।

Exam Tips:

a) दोनों में मुख्य अंतर विलायक की स्थिति और शुद्धता का है, इसे स्पष्ट लिखें।
b) समुद्री जल से नमक प्राप्त करने (वाष्पीकरण) और फिटकरी के शुद्धिकरण (क्रिस्टलीकरण) का उदाहरण दें।
c) उत्तर को अंतर के बिंदुओं के आधार पर लिखें।

 

Question 4: पृथक्कारी कीप का उपयोग किस प्रकार के मिश्रणों को पृथक करने के लिए किया जाता है?

Answer:

पृथक्कारी कीप का उपयोग दो अमिश्रणीय द्रवों (जो आपस में घुलते नहीं हैं, जैसे सरसों का तेल और जल) के मिश्रण को पृथक करने के लिए किया जाता है।
दोनों द्रव अपने भिन्न घनत्व के कारण अलग-अलग परतें बना लेते हैं।
स्टॉपकॉक को धीरे-धीरे खोलकर अधिक घनत्व वाली निचली परत को अलग पात्र में एकत्रित कर लिया जाता है और ऊपरी परत को ऊपर ही छोड़ दिया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• यह विधि अमिश्रणीय द्रवों के लिए है।
• यह घनत्व के अंतर के सिद्धांत पर कार्य करती है।
• इसमें स्टॉपकॉक का उपयोग नियंत्रण के लिए होता है।

आम गलतियाँ:

• अमिश्रणीय द्रवों के स्थान पर मिश्रणीय द्रव लिख देना।
• घनत्व के सिद्धांत का उल्लेख न करना।
• पृथक्कारी कीप की कार्य-विधि को गलत समझाना।

Exam Tips:

a) तेल और पानी का उपयुक्त उदाहरण दें।
b) घनत्व शब्द का प्रयोग उत्तर में अनिवार्य रूप से करें।
c) प्रक्रिया के चरणों को क्रमबद्ध लिखें।

 

Question 5: कागज वर्णलेखिकी की विधि और उपयोग समझाइए।

Answer:

कागज वर्णलेखिकी (Paper Chromatography) में मिश्रण के घटकों को पृथक करने के लिए उनकी विलायक तथा कागज के साथ अंतर्क्रिया में अंतर का उपयोग किया जाता है।
जब उपयुक्त विलायक कागज पर ऊपर चढ़ता है, तो वह स्याही जैसे मिश्रण के विभिन्न रंगीन घटकों को उनकी गति (सोखने की क्षमता) के आधार पर अलग-अलग ऊंचाइयों पर पृथक कर देता है।
इसका मुख्य उपयोग प्राकृतिक रंजकों, स्याहियों और औषधीय वर्णकों के पृथक्करण में होता है।

मुख्य बिंदु:

• यह विधि भिन्न-भिन्न घटकों की विलायक में अलग-अलग घुलनशीलता पर आधारित है।
• इसमें स्थिर फेज (कागज) और गतिशील फेज (विलायक) होते हैं।
• इसका उपयोग रंगों के मिश्रण को अलग करने में होता है।

आम गलतियाँ:

• वर्णलेखिकी के कार्य करने के मूल सिद्धांत (गति या अवशोषण अंतर) को छोड़ देना।
• केवल स्याही का उदाहरण देना, अन्य उपयोगों का न बताना।
• प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) स्याही से रंगों को अलग करने का प्रयोग स्पष्ट रूप से समझाएं।
b) क्रोमैटोग्राफी शब्द के अंग्रेजी और हिंदी दोनों संदर्भों का ध्यान रखें।
c) इसके अनुप्रयोग (Applications) परीक्षा में जरूर लिखें।

 

Question 6: ऊर्ध्वपातन विधि से किन मिश्रणों को पृथक किया जा सकता है, उदाहरण सहित समझाइए।

Answer:

ऊर्ध्वपातन विधि उन मिश्रणों को पृथक करने के लिए उपयुक्त है जिनमें एक घटक गर्म करने पर सीधे ठोस से वाष्प में बदल जाता है (ऊर्ध्वपातित हो जाता है जैसे कपूर, अमोनियम क्लोराइड या नैप्थलीन), जबकि दूसरा घटक (जैसे रेत या नमक) ऊर्ध्वपातित नहीं होता है।
गर्म करने पर ऊर्ध्वपातित होने वाला पदार्थ वाष्प बनकर ऊपर उठता है और ठंडी सतह पर पुनः ठोस के रूप में जमा हो जाता है, जिससे वह शेष अवाष्पशील मिश्रण से अलग हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• यह विधि ऊर्ध्वपातशील और गैर-ऊर्ध्वपातशील घटकों के मिश्रण के लिए है।
• इसमें पदार्थ बिना द्रव अवस्था में आए सीधे वाष्प में बदलता है।
• कपूर और रेत का मिश्रण इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

आम गलतियाँ:

• ऊर्ध्वपातन की परिभाषा में द्रव अवस्था का उल्लेख करना (जबकि इसमें द्रव नहीं बनता)।
• सही उदाहरण न देना।
• वाष्प के संघनन (ठंडा होकर ठोस बनना) की प्रक्रिया को न समझाना।

Exam Tips:

a) कपूर तथा नमक या रेत के मिश्रण का उदाहरण दें।
b) 'सीधे ठोस से वाष्प में परिवर्तन' इस मुख्य वाक्यांश को रेखांकित करें।
c) नामांकित चित्र का मानसिक या रफ आरेख बना सकते हैं।

 

Question 7: रक्त को कोलॉइड क्यों माना जाता है, विलयन या निलंबन क्यों नहीं?

Answer:

रक्त न तो एक वास्तविक विलयन है क्योंकि इसके घटक (रक्त कोशिकाएँ) इतने बड़े हैं कि वे प्रकाश को फैला सकते हैं और नग्न आँखों से नहीं दिखते फिर भी तली पर बैठते नहीं हैं, और न ही यह एक वास्तविक निलंबन है क्योंकि इसके कण विलयन के कणों से बड़े होने के बावजूद नीचे नहीं बैठते।
इसके कणों का आकार कोलॉइडी परास (\( 1-1000\text{ nm} \)) के अंतर्गत आता है जिसके कारण यह संपूर्ण माध्यम में समान रूप से फैला रहता है, इसलिए इसे कोलॉइड माना जाता है।

मुख्य बिंदु:

• रक्त के कणों का आकार कोलॉइडी परास में होता है।
• इसके कण तली पर नहीं बैठते (स्थायी होते हैं)।
• यह टिंडल प्रभाव प्रदर्शित करता है।

आम गलतियाँ:

• रक्त को केवल द्रव समझकर विलयन मान लेना।
• निलंबन और कोलॉइड के कणों के आकार के अंतर को न समझना।
• टिंडल प्रभाव का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) आकार की सीमा (\( 1-1000\text{ nm} \)) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) कारण स्पष्ट दें कि यह क्यों तली पर नहीं बैठता।
c) रक्त के अतिरिक्त दूध या स्टार्च के घोल का भी उदाहरण दें।

 

Question 8: फिटकरी द्वारा जल शुद्धिकरण की प्रक्रिया को स्कंदन क्यों कहा जाता है?

Answer:

पंकिल (गंदे) जल में फिटकरी मिलाने पर यह एक स्कंदक (Coagulant) के रूप में कार्य करती है।
यह जल में उपस्थित सूक्ष्म निलंबित अशुद्धि के कणों को आपस में चिपकाकर बड़े गुच्छों या फ्लॉक्स के रूप में एकत्रित कर देती है।
ये भारी गुच्छे गुरुत्वाकर्षण के कारण तली पर बैठ जाते हैं (जिसे अवसादन कहते हैं), जिन्हें बाद में निस्तारण या निस्यंदन द्वारा आसानी से पृथक किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• फिटकरी स्कंदक का कार्य करती है।

• यह निलंबित अशुद्धियों को गुच्छों में बदलती है।
• इसके बाद अवसादन और निस्यंदन किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• स्कंदन शब्द का अर्थ न समझना।
• केवल फिटकरी घोलना लिखना, अशुद्धियों का नीचे बैठना स्पष्ट न करना।
• निस्यंदन और अवसादन में अंतर न करना।

Exam Tips:

a) स्कंदन (Coagulation) प्रक्रिया को चरणों में समझाएं।
b) दैनिक जीवन के इस महत्वपूर्ण जल शोधन अनुप्रयोग का वर्णन करें।
c) मुख्य वैज्ञानिक शब्दों (अवसादन, निस्यंदन) का सही प्रयोग करें।

 

Question 9: परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम में अंतर स्पष्ट कीजिए।

Answer:

कोलॉइड में विलेय जैसे घटक अथवा जो कण पूरे माध्यम में वितरित रहते हैं, उन्हें परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) कहते हैं।
जबकि जिस निरंतर माध्यम में यह परिक्षिप्त प्रावस्था फैली या निलंबित रहती है, उसे परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium) कहा जाता है।
उदाहरण के लिए, दूध में वसा के सूक्ष्म कण परिक्षिप्त प्रावस्था हैं और जल परिक्षेपण माध्यम है।

मुख्य बिंदु:

• परिक्षिप्त प्रावस्था विलेय पदार्थ के समान होती है।
• परिक्षेपण माध्यम विलायक या सतत माध्यम के समान होता है।
• कोलॉइड के दो मुख्य घटक यही हैं।

आम गलतियाँ:

• दोनों परिभाषाओं को आपस में मिला देना।

• उचित उदाहरण न देना।
• विलयन के विलेय-विलायक से इनकी भिन्नता स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय 'वितरित कण' और 'माध्यम' शब्दों का प्रयोग करें।
b) दूध, कोहरा या बादल का उदाहरण देकर समझाएं।
c) अंतर स्पष्ट करने के लिए तालिका या बिंदुवार उत्तर लिखें।

 

Question 10: पेट्रोलियम शोधनशाला में प्रभाजी आसवन का क्या महत्व है?

Answer:

प्रभाजी आसवन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा मिश्रण के ऐसे घटकों को पृथक किया जाता है जिनके क्वथनांकों में अपेक्षाकृत बहुत कम अंतर (\( 25^\circ\text{C} \) से कम) होता है।
पेट्रोलियम शोधनशाला में अपरिष्कृत तेल (क्रूड ऑयल) को इस विधि द्वारा गर्म करके विभिन्न ऊँचाइयों पर पेट्रोल, डीजल, किरोसीन, एलपीजी (\( \text{LPG} \)) आदि विभिन्न उपयोगी प्रभाजों में पृथक किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• प्रभाजी आसवन कम क्वथनांक अंतर वाले द्रवों के लिए है।
• यह प्रभाजी स्तम्भ (Fractionating column) का उपयोग करता है।
• इससे पेट्रोलियम के विभिन्न उपयोगी उत्पाद प्राप्त होते हैं।

आम गलतियाँ:

• साधारण आसवन और प्रभाजी आसवन को एक समान मान लेना।
• क्वथनांक के अंतर (\( 25^\circ\text{C} \) से कम) का उल्लेख न करना।
• पेट्रोलियम उत्पादों के नाम सही क्रम में न लिखना।

Exam Tips:

a) क्वथनांक के अंतर के सिद्धांत को मुख्य रूप से दर्शाएं।
b) पेट्रोलियम से प्राप्त होने वाले उत्पादों के दो-तीन नाम अवश्य लिखें।
c) प्रभाजी स्तम्भ का चित्र अपने उत्तर में मानसिक रूप से ध्यान रखें।

 

NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

Official NCERT Solutions for Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

Review comprehensive exercise answers for Class 9 Science Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण. Fully updated to match current NCERT syllabus guidelines, these textbook solutions help students verify their work and maintain accurate study notes.

Step-by-Step Explanations for Chapter 05 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 9 Science text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.

Next Steps in Your Science Revision

Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 9 Science.

FAQs

Where can I find the latest NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi for the 2026-27 session?

The complete and updated NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Science are as per latest NCERT curriculum.

Are the Science NCERT solutions for Class 9 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 9 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 9 Science. You can access NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science NCERT solutions for Class 9 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 05 Exploring Mixtures and their Separation (मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण) Short Answer Questions in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.