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Detailed Chapter 04 हरिद्वार NCERT Solutions for Class 8 Hindi
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Class 8 Hindi Chapter 04 हरिद्वार NCERT Solutions PDF
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मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
Question 1. “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं” का क्या अर्थ है?
• लेखक के अनुसार सज्जन लोग बिना पूछे स्वादिष्ट रसीले फल देते हैं।
• लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
• लेखक का मानना था कि हरिद्वार के सभी दुकानदार बहुत सज्जन थे।
• लेखक को पत्थर मारकर पके हुए फल तोड़कर खाना पसंद था।
Answer: ★ लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
वृक्षों की तुलना भले लोगों से की गई है जो कष्ट सहने के बाद भी दूसरों का भला ही करते हैं। यहाँ 'पत्थर मारना' वृक्ष की सहनशक्ति और उसके परोपकारी स्वभाव को दर्शाता है, न कि उसे नुकसान पहुँचाना।
In simple words: लेखक ने यहाँ फल देने वाले पेड़ों के जरिए अच्छे और दयालु लोगों के स्वभाव के बारे में बताया है जो हमेशा दूसरों की मदद करते हैं।
Exam Tip: परीक्षा में उत्तर लिखते समय "सज्जन" और "वृक्षों की उदारता" जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग अवश्य करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
Question 2. “वैराग्य और भक्ति का उदय होता था” इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?
• शारीरिक थकान और मानसिक बेचैनी
• आर्थिक संतोष और मानसिक विकास
• मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
• सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक प्रेम
Answer: ★ मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
हरिद्वार का शुद्ध परिवेश, पवित्र गंगा में डुबकी और साधु-संतों का साथ लेखक के हृदय में धर्म और वैराग्य के भाव जगाता है। इस पावन अनुभव से उनके चित्त को अपार सुख और अंदरूनी चैन प्राप्त होता है।
In simple words: गंगा किनारे के धार्मिक माहौल के कारण लेखक का मन बिल्कुल शांत हो गया और उनके अंदर भगवान के प्रति प्रेम जाग उठा।
Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में हरिद्वार की धार्मिकता और लेखक को मिली आंतरिक शांति का संबंध स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. “पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर था” इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?
• संतुष्टि में सुख होता है।
• सुखी लोग पत्थर पर भोजन करते हैं।
• लेखक के पास सोने की थाली नहीं थी।
• पत्थर पर रखा भोजन अधिक स्वादिष्ट होता है।
Answer: ★ संतुष्टि में सुख होता है।
यदि मनुष्य का मन तृप्त और खुश हो, तो साधारण परिस्थितियों में भी आनंद पाया जा सकता है। यह विचार यह स्पष्ट करता है कि असली सुख मन की तृप्ति में छिपा है, किसी बाहरी विलासिता या अमीर बर्तनों में नहीं।
In simple words: सच्ची खुशी मन की संतुष्टि से मिलती है, महंगे साधनों या सोने-चांदी के बर्तनों से नहीं।
Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में संतोष की तुलना बाहरी दिखावे से करते हुए उत्तर को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 4. “एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।” यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?
• अंधविश्वास और लालच
• मानवता और देशप्रेम
• सादगी और आत्मनिर्भरता
• स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
Answer: ★ सादगी और आत्मनिर्भरता
बिना किसी तड़क-भड़क या विशेष उपकरणों के लेखक ने खुद खाना तैयार किया और खाया। यह घटना उनके सीधे-सादे जीवन, खुद पर भरोसा करने की आदत और कुदरत से गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित करती है।
In simple words: लेखक द्वारा स्वयं भोजन पकाना और नदी किनारे खाना यह दिखाता है कि सादा जीवन ही सबसे सुंदर होता है।
Exam Tip: उत्तर में "सादगी", "आत्मनिर्भरता" और "प्रकृति से जुड़ाव" जैसे शब्दों को जरूर रेखांकित करें।
Question 5. लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः किस प्रकार का था?
• राजनीतिक
• आध्यात्मिक
• सामाजिक
• प्राकृतिक
Answer: ★ आध्यात्मिक
लेखक ने गंगा नदी की पावनता, वहां के साधुओं के सत्संग और पवित्र तीर्थों के दर्शन के संस्मरण लिखे हैं। उनके मन में ईश्वर के प्रति गहरा अनुराग और वैराग्य जगा, जिससे यह यात्रा पूरी तरह धर्म और अध्यात्म की बन गई।
In simple words: लेखक को हरिद्वार में गंगा स्नान और संतों के साथ से मन में भगवान की भक्ति महसूस हुई, इसलिए यह एक आध्यात्मिक यात्रा थी।
Exam Tip: यात्रा के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट करने के लिए गंगा और संतों की भूमिका का उल्लेख करें।
Question 6. पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?
• कठिन शब्दों का प्रयोग और बोझिलता
• मुहावरों का अधिक प्रयोग
• सरलता और चित्रात्मकता
• जटिलता और संक्षिप्तता
Answer: ★ सरलता और चित्रात्मकता
पाठ में गंगा के घाटों, पेड़ों और सुंदर पर्वतों का चित्रण बहुत ही सहज शब्दों में किया गया है। पढ़ते ही ये सब सुंदर नज़ारे पाठक की कल्पना में जीवित उठते हैं, जो कि इस पत्र की लेखन शैली की खूबी है।
In simple words: पत्र की भाषा इतनी आसान और सजीव है कि पढ़ते ही हरिद्वार की पूरी तस्वीर हमारी आँखों के सामने आ जाती है।
Exam Tip: "चित्रात्मकता" का अर्थ होता है शब्दों के माध्यम से चित्र प्रस्तुत करना, इस बिंदु को स्पष्ट करके लिखें।
Question (ख). हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
Answer:
• पहले प्रश्न के संबंध में: मैंने अपने मित्रों को बताया कि 'पत्थर मारने' का अर्थ किसी को चोट पहुँचाना नहीं है, बल्कि यह पेड़ों की असीम सहनशक्ति और उनके परोपकारी व्यवहार को प्रकट करता है। पाठ में लेखक ने फलदार वृक्षों की तुलना भले इंसानों से की है।
• दूसरे प्रश्न के संबंध में: यदि कोई साथी 'आर्थिक संतोष' चुनता है, तो मैं उसे समझाऊँगा कि हरिद्वार की पावनता और गंगा के सामीप्य से लेखक को आत्मिक सुख मिला था, पैसों की प्राप्ति से नहीं।
• तीसरे प्रश्न के संबंध में: सच्चा सुख मन की तृप्ति में समाया है, न कि सोने के पात्र में भोजन करने से। इसलिए 'संतुष्टि में सुख है' ही सबसे उचित विकल्प है।
• चौथे प्रश्न के संबंध में: यद्यपि प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना भी यहाँ दिखती है, किंतु स्वयं भोजन पकाने और सादे ढंग से ग्रहण करने के कारण 'सादगी और आत्मनिर्भरता' को विशेष बल मिलता है।
• पाँचवें प्रश्न के संबंध में: प्राकृतिक दृश्य सुंदर अवश्य थे, पर लेखक के मन में उठने वाले भक्ति और वैराग्य के भाव यह सिद्ध करते हैं कि उनका यह अनुभव मूलतः आध्यात्मिक श्रेणी का था।
• छठे प्रश्न के संबंध में: यद्यपि पाठ में कुछ क्लिष्ट शब्द भी प्रयुक्त हुए हैं, तथापि वर्णन शैली इतनी सजीव और प्रवाहमयी है कि पाठक सहजता से उस वातावरण की कल्पना कर लेता है।
In simple words: इस चर्चा में हमने जाना कि हर विकल्प के पीछे पाठ की घटनाओं और लेखक के विचारों का एक ठोस कारण छिपा हुआ है।
Exam Tip: चर्चात्मक प्रश्नों के उत्तर में अपनी बात को तर्क और पाठ के प्रसंगों के आधार पर सिद्ध करना चाहिए।
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मिलकर करें मिलान
Question. पाठ से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनके उपयुक्त संदर्भों से इनका मिलान कीजिए—
Answer:
| क्रम/शब्द | सही संदर्भ |
|---|---|
| 1. हरिद्वार | यह भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। यहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है। |
| 2. गंगा | यह भारतवर्ष की एक प्रधान नदी है जो हिमालय से निकलकर लगभग 1560 मील पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके अनेक नाम हैं, जैसे - भागीरथी, त्रिपथगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, सुरनदी आदि। |
| 3. भगीरथ | ये अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा थे। कहा जाता है कि ये घोर तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। इसीलिए गंगा का एक नाम ‘भागीरथी’ भी है। |
| 4. चण्डिका | मान्यताओं के अनुसार दुर्गा का एक रूप। |
| 5. भागवत | यह अठारह पुराणों में से सर्वप्रसिद्ध एक पुराण है। इसमें अधिकांश श्री कृष्ण कथाएँ हैं। |
| 6. दालचीनी | यह एक पेड़ का नाम है। यह दक्षिण भारत में बहुतायत से मिलता है। इस पेड़ की सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम में आती है। इसे दारचीनी भी कहते हैं। |
In simple words: इस तालिका में पाठ में आए प्रमुख पौराणिक, भौगोलिक और प्राकृतिक शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान किया गया है।
Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में हमेशा सही उत्तर के सामने उसका सही अर्थ या संदर्भ सीधे लिखें, जिससे परीक्षक को जांचने में आसानी हो।
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मिलकर करें चयन
(क) पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं - एक सही और एक भ्रामक। अपने समूह में इन पर विचार कीजिए और उपयुक्त निष्कर्ष पर सही का चिह्न लगाइए।
Question 1. पंक्ति: "पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है।" इसके सामने दिए गए निष्कर्षों में से सही निष्कर्ष का चयन कीजिए:
• लताओं का फैलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं की तरह सौम्यता और सुंदरता को दर्शाता है।
• सज्जनों की शुभ इच्छाएँ लताओं के समान फैल जाती हैं।
Answer: सही निष्कर्ष: ✔️ लताओं का फैलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं की तरह सौम्यता और सुंदरता को दर्शाता है।
पर्वतों पर हरी-भरी लताओं का बढ़ना भले मनुष्यों की अच्छी कामनाओं की कोमलता और उनके सौंदर्य को व्यक्त करता है। दूसरा कथन भ्रामक है।
In simple words: हरी-भरी बेलें पहाड़ों पर ऐसे सुंदर लग रही हैं जैसे किसी भले इंसान के मन में अच्छे विचार फैलते हैं।
Exam Tip: काव्यात्मक वाक्यों का अर्थ निकालते समय उनके पीछे छिपे सकारात्मक भावों को समझना आवश्यक होता है।
Question 2. पंक्ति: "बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।" इसके सामने दिए गए निष्कर्षों में से सही निष्कर्ष का चयन कीजिए:
• वृक्षों की स्थिति साधुओं जैसी है जो हर मौसम को सहने के लिए विवश हैं।
• वृक्षों की स्थिति साधुओं जैसी है जो हर मौसम को सहते हुए तपस्या करते हैं।
Answer: सही निष्कर्ष: ✔️ वृक्षों की स्थिति साधुओं जैसी है जो हर मौसम को सहते हुए तपस्या करते हैं।
पेड़ बिना हिले-डुले कड़े मौसम का सामना करते हैं, जो संतों की तरह तपस्या में लीन होने के भाव को दिखाता है। वे मौसम सहने के लिए मजबूर नहीं हैं, बल्कि यह उनकी साधना का रूप है।
In simple words: पेड़ धूप और बारिश को सहते हुए वैसे ही चुपचाप खड़े रहते हैं जैसे कोई साधु भगवान की तपस्या में लीन हो।
Exam Tip: संतों और वृक्षों की तुलना उनके परोपकार और सहनशीलता के आधार पर की गई है, इसे ध्यान में रखें।
Question 3. पंक्ति: "इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।" इसके सामने दिए गए निष्कर्षों में से सही निष्कर्ष का चयन कीजिए:
• यहाँ के पक्षी प्रकृति में सुरक्षित अनुभव करते हैं, इसलिए वे निडर होकर कल्लोल करते हैं।
• यहाँ के पक्षी नगर से डरकर इस जगह आ गए हैं इसलिए वे कल्लोल करते हैं।
Answer: सही निष्कर्ष: ✔️ यहाँ के पक्षी प्रकृति में सुरक्षित अनुभव करते हैं, इसलिए वे निडर होकर कल्लोल करते हैं।
पवित्र और प्राकृतिक परिवेश के कारण पक्षी खुद को पूर्णतः सुरक्षित महसूस करते हैं, जिसके कारण वे बिना किसी डर के खुशी से चहचहाते हैं।
In simple words: जंगल के शांत और सुरक्षित माहौल के कारण पक्षी बिना किसी शिकारी के डर के मजे से खेल रहे हैं।
Exam Tip: पक्षियों के निडर होने का मुख्य कारण वहाँ का शांतिपूर्ण वातावरण है, न कि केवल पलायन करना।
Question 4. पंक्ति: "जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।" इसके सामने दिए गए निष्कर्षों में से सही निष्कर्ष का चयन कीजिए:
• गंगाजल की ठंडक और मिठास का अनुभव बहुत मनोहारी है।
• गंगाजल की शीतलता और मिठास से शक्कर और बर्फ बनाई जा सकती है।
Answer: सही निष्कर्ष: ✔️ गंगाजल की ठंडक और मिठास का अनुभव बहुत मनोहारी है।
गंगा के पानी की असाधारण ठंडक और उसका मीठा स्वाद मन को अत्यधिक आनंदित करता है। बर्फ बनाने वाली बात केवल एक भ्रामक और हास्यास्पद निष्कर्ष है।
In simple words: यहाँ का पानी इतना ठंडा और मीठा है कि इसकी तुलना बर्फ वाले मीठे शरबत से की गई है।
Exam Tip: उपमा अलंकार के वाक्यों को समझने के लिए शाब्दिक अर्थ के बजाय उसमें छिपी सुंदर अनुभूति को समझना चाहिए।
Question 5. पंक्ति: "एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।" इसके सामने दिए गए निष्कर्षों में से सही निष्कर्ष का चयन कीजिए:
• लेखक ने भोजन इसलिए बनाया क्योंकि गंगा का पानी बहुत गरम था और वह पकाने में सहायक था।
• लेखक ने गंगा के समीप बैठकर भोजन किया, जिससे उनकी प्रकृति से निकटता झलकती है।
Answer: सही निष्कर्ष: ✔️ लेखक ने गंगा के समीप बैठकर भोजन किया, जिससे उनकी प्रकृति से निकटता झलकती है।
गंगा किनारे बैठकर भोजन पकाना और खाना, कुदरत के प्रति लेखक के गहरे स्नेह और उसके साथ एकाकार होने की भावना को प्रदर्शित करता है।
In simple words: लेखक का गंगा किनारे पत्थरों पर बैठकर भोजन करना दिखाता है कि वे प्रकृति से बहुत प्यार करते थे।
Exam Tip: घटनाओं के पीछे छिपे मानवीय मूल्यों जैसे कि सादगी और पर्यावरण प्रेम को उत्तर में रेखांकित करें।
Question 6. पंक्ति: "निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।" इसके सामने दिए गए निष्कर्षों में से सही निष्कर्ष का चयन कीजिए:
• लेखक चाहता है कि पत्र को महत्व देकर कहीं स्थान दिया जाए, यानी इसे पढ़ा और सँजोया जाए।
• लेखक चाहता है कि पत्र को महत्व देकर प्रकाशित किया जाए।
Answer: सही निष्कर्ष: ✔️ लेखक चाहता है कि पत्र को महत्व देकर कहीं स्थान दिया जाए, यानी इसे पढ़ा और सँजोया जाए।
'स्थानदान' देने से अभिप्राय यह है कि इस यात्रा वृत्तांत के संस्मरणों को सम्मान देकर सहेज कर रखा जाए और उसे रुचिपूर्वक पढ़ा जाए।
In simple words: लेखक चाहते हैं कि उनके द्वारा लिखे इस सुंदर यात्रा पत्र को ध्यान से पढ़ा जाए और संभाल कर रखा जाए।
Exam Tip: पत्र-लेखन में 'स्थानदान' जैसे शब्दों के लाक्षणिक अर्थों को ठीक से समझाकर उत्तर देना चाहिए।
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पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
Question (क). “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।” इसका अर्थ और भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer:
अर्थ: हरिद्वार का क्षेत्र इस कदर पावन और अलौकिक है कि वहाँ की आम कुशा (घास) भी असाधारण सुगंध बिखेरती है, जिसमें से मसालों जैसी सुंदर खुशबू आती है। यह प्राकृतिक चमत्कार यहाँ की पावनता और गरिमा को सिद्ध करता है।
भावार्थ: हरिद्वार की पावन धरा का कण-कण ईश्वरीय सौंदर्य और शुद्धता से ओतप्रोत है। यहाँ की साधारण वनस्पति भी एक विशेष पवित्रता का अनुभव कराती है, जो इस स्थान के प्रति लेखक के मन की अनन्य श्रद्धा और आत्मिक जुड़ाव को रेखांकित करती है।
In simple words: हरिद्वार की पवित्र ज़मीन की वजह से वहाँ की साधारण घास भी महकती है, जिससे इस जगह की धार्मिक महिमा का पता चलता है।
Exam Tip: अर्थ और भावार्थ लिखते समय दोनों को अलग-अलग शीर्षकों में लिखें जिससे उत्तर की स्पष्टता बनी रहे।
Question (ख). “अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।” इसका अर्थ और भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer:
अर्थ: लेखक वृक्षों के महान उपकारी स्वभाव की सराहना करते हुए कहते हैं कि पेड़ों का जीवन धन्य है क्योंकि वे किसी याचक को खाली हाथ नहीं लौटाते। वे अपने जीवन काल में फल, फूल, पत्ते, छाल और जड़ देकर तथा कटने या जलने के बाद भी कोयले व भस्म के रूप में सदा मानव कल्याण करते रहते हैं।
भावार्थ: इस अंश में प्रकृति के निस्वार्थ परोपकार और असीम सेवाभाव को नमन किया गया है। पेड़ सच्चे परोपकारियों के समान हैं जो बिना किसी स्वार्थ के अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। यह मनुष्य को कृतज्ञ होने और प्रकृति का सम्मान करने की सीख देता है।
In simple words: पेड़ अपनी पूरी जिंदगी और यहाँ तक कि मरने के बाद भी इंसानों की भलाई में काम आते हैं, इसलिए उनका जीवन सबसे परोपकारी होता है।
Exam Tip: पेड़ों की बहुमुखी उपयोगिता और परोपकारिता की तुलना सज्जनों से करने वाले बिंदु को अवश्य समझाएं।
कक्षा 8 हिंदी मल्हार अध्याय 4 के सोच-विचार पर आधारित प्रश्न
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सोच-विचार के लिए
Question (क). “और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ…” लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है? क्या आपने कभी किसी स्थान को छोड़कर ऐसा अनुभव किया है? कब?
Answer:
लेखक के इन शब्दों से स्पष्ट होता है कि हरिद्वार के पावन स्वरूप, अद्भुत नज़ारों और वहाँ की असीम शांति का उनके अंतर्मन पर एक अमिट प्रभाव पड़ा था। यद्यपि वे भौतिक रूप से वहाँ से आ चुके थे, पर उनका अंतःकरण उसी स्थान में रमा हुआ था। यह किसी सुंदर स्थल के प्रति अगाध प्रेम और गहरे लगाव को प्रदर्शित करता है।
स्वानुभव: जी हाँ, मुझे भी ऐसा ही अनुभव हुआ था जब मैं अपने दादा जी के गाँव से वापस लौटा था। वहाँ के शांत खेत, ठंडी छाँव और धूल भरे रास्तों की सुखद स्मृतियाँ कई दिनों तक मेरे मानस पटल पर घूमती रहीं और ऐसा लगता रहा कि मेरा मन वहीं छूट गया है।
In simple words: लेखक का शरीर तो लौट आया था पर उनका दिल हरिद्वार की शांति और सुंदरता में ही लगा रहा। ऐसा ही अनुभव हमें भी सुंदर जगहों से लौटने पर होता है।
Exam Tip: इस प्रकार के व्यक्तिगत प्रश्नों में पहले भाग में पाठ की व्याख्या करें और दूसरे भाग में अपने किसी सच्चे अनुभव को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
Question (ख). “पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।” लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है? क्या अब भी ऐसे संतोषी लोग मिलते हैं? अपने विचार उदाहरण सहित लिखिए।
Answer:
यह पंक्ति उस समय के पुरोहितों के सादगीपूर्ण और संतोषी स्वभाव को व्यक्त करती है। आधुनिक युग में भौतिकवादी सोच के कारण ऐसे संतोषी व्यक्ति मिलना अत्यंत दुर्लभ है, क्योंकि आज चारों ओर अधिक धन कमाने की होड़ मची है। फिर भी, कुछ दूर-दराज़ के गाँवों अथवा प्राचीन मंदिरों में आज भी ऐसे निस्पृह पुजारी मिल जाते हैं जो श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई सूक्ष्म राशि में भी पूर्ण संतुष्ट रहते हैं।
उदाहरण: एक बार जब मैं अपने परिवार के साथ एक सुदूर पहाड़ी मंदिर में गया था, तो वहाँ के वयोवृद्ध पुजारी ने पूजा संपन्न होने पर मात्र पांच रुपए की दक्षिणा सहर्ष स्वीकार की। अतिरिक्त राशि देने पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से मना करते हुए कहा कि भगवान के द्वार पर केवल आस्था का मोल होता है, धन का नहीं।
In simple words: आज के समय में संतुष्ट रहने वाले लोग बहुत कम बचे हैं, लेकिन कुछ लोग आज भी कम पैसों में भी बहुत खुश और संतुष्ट रहते हैं।
Exam Tip: वर्तमान समाज की तुलना अतीत के संतोषी भाव से करते हुए अपने उत्तर में दोनों पक्षों का संतुलन बनाए रखें।
Question (ग). “मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है।” आपके विचार से लेखक ने उस स्थान को ‘टिकने योग्य’ क्यों कहा है? उस स्थान में कौन-कौन सी विशेषताएँ होंगी जो उसे ‘टिकने योग्य’ बनाती होंगी?
Answer:
लेखक ने दीवान कृपा राम के बंगले को रुकने के लिए सर्वोत्तम इसलिए माना क्योंकि वह स्थान न केवल भौतिक सुख-सुविधाओं से संपन्न था, बल्कि वह शांत, शीतल और मन को एकाग्र करने वाला था। वहाँ का वातावरण अध्यात्म, पठन-पाठन और आत्म-मनन के लिए पूर्णतः अनुकूल था, जहाँ बहने वाली ठंडी हवा तन और मन दोनों को तरोताजा कर देती थी।
मुख्य विशेषताएँ:
• अत्यंत प्रशांत और कोलाहल रहित परिवेश
• शीतल, मंद और स्फूर्तिदायक बयार
• पावन तीर्थ स्थल का पवित्र प्रभाव
• पर्याप्त आराम और सुंदर व्यवस्था
• मन को ईश्वरीय चेतना से जोड़ने वाला आध्यात्मिक वातावरण
In simple words: वह बंगला बहुत आरामदायक, शांत और ऐसी जगह पर था जहाँ ठंडी हवा चलती थी और भगवान का ध्यान करने में आसानी होती थी।
Exam Tip: स्थान की भौतिक सुविधाओं के साथ-साथ वहाँ की प्राकृतिक और आध्यात्मिक खूबियों का भी बिंदुवार उल्लेख करें।
Question (घ). “फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।” इस वाक्य के माध्यम से आपको वृक्षों के महत्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सूझ रही हैं?
Answer:
यह कथन वृक्षों की अनुपम उपयोगिता और उनके सर्वस्व दान की महिमा को उजागर करता है। पेड़ न केवल जीवित रहते हुए मानव जाति को फल-फूल, ठंडी हवा और आश्रय प्रदान करते हैं, बल्कि नष्ट होने के पश्चात भी कोयला और राख के रूप में हमारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। वे हमें यह सिखाते हैं कि सच्चा जीवन वही है जो परोपकार में व्यतीत हो।
मुख्य विचारणीय बिंदु:
• पेड़ अपने जीवन के आरंभ से अंत तक मानव समाज की निःस्वार्थ सेवा करते हैं.
• वृक्ष का पत्ता, जड़, छाल और बीज जैसी प्रत्येक वस्तु किसी न किसी रूप में मानवोपयोगी है.
• वे बिना किसी बदले की अपेक्षा के समाज को सुगंध, पोषण और ऊर्जा देते हैं.
• पेड़ों का संपूर्ण अस्तित्व ही परोपकार, सहनशीलता और त्याग की जीवित मिसाल है.
In simple words: पेड़ जीवित रहते हुए भी हमारी मदद करते हैं और सूखने के बाद भी चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी और कोयला देते हैं। उनका पूरा जीवन सिर्फ दूसरों के लिए होता है।
Exam Tip: वृक्षों के महत्व को दर्शाने के लिए उनके त्याग और परोपकार को उदाहरणों सहित बिंदुवार लिखें।
कक्षा 8 हिंदी मल्हार अध्याय 4 के कल्पना पर आधारित प्रश्न
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अनुमान और कल्पना से
Question (क). “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।” कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार में हैं। आप वहाँ क्या-क्या करना चाहेंगे?
Answer:
यदि मुझे हरिद्वार जाने का सुअवसर प्राप्त हो, तो मेरी इच्छाएँ निम्नलिखित होंगी:
• सर्वप्रथम मैं वहाँ की वादियों में स्थित हरे-भरे पर्वतों की अलौकिक छटा को निहारूँगा।
• माँ गंगा के अत्यंत ठंडे और निर्मल प्रवाह में श्रद्धापूर्वक डुबकी लगाऊँगा।
• गंगा किनारे के प्राचीन घाटों पर बैठकर बहते हुए जल की मधुर ध्वनि का आनंद लूँगा।
• लेखक के पदचिह्नों पर चलते हुए मैं भी खुले आकाश के नीचे पत्थरों पर बैठकर सादा भोजन करने का दिव्य सुख प्राप्त करना चाहूँगा।
• वहाँ के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मंदिरों व आश्रमों का भ्रमण कर शांत मन से प्रार्थना करूँगा।
In simple words: अगर मैं हरिद्वार जाऊँगा तो पहाड़ों को देखूँगा, गंगा में नहाऊँगा, घाट पर बैठूँगा और सादा खाना खाकर वहाँ के सुंदर मंदिरों के दर्शन करूँगा।
Exam Tip: अपनी कल्पना के आधार पर की जाने वाली गतिविधियों को व्यवस्थित और सुंदर शीर्षकों के साथ प्रस्तुत करें।
Question (ख). “जल के छलके पास ही ठंढे-ठंढे आते थे।” कल्पना कीजिए कि आप गंगा के तट पर हैं और पानी के छींटे आपके मुँह पर आ रहे हैं। अपने अनुभवों को अपनी कल्पना से लिखिए।
Answer:
मैं आँखें बंद करके यह महसूस कर रहा हूँ कि मैं पवित्र गंगा के किनारे रेतीले तट पर बैठा हूँ। लहरों के टकराने से उठने वाली शीतल जल की नन्हीं बूँदें मंद समीर के साथ आकर कोमलता से मेरे चेहरे को छू रही हैं। उस अलौकिक स्पर्श से मेरे शरीर की समस्त थकान तुरंत लुप्त हो गई है और मन असीम शांति से भर उठा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे माँ गंगा साक्षात् अपनी ममतामयी हथेलियों से मेरे माथे को सहलाकर मुझे समस्त कष्टों से मुक्त कर रही हैं।
In simple words: गंगा किनारे ठंडे पानी की बूँदें जब चेहरे पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे सारी चिंताएँ मिट गईं और मन एकदम पवित्र व खुश हो गया है।
Exam Tip: इंद्रियबोध वाले अनुभवों (स्पर्श, ध्वनि, दृश्य) को शब्दों में उतारते समय विशेषणों का सुंदर प्रयोग करना चाहिए।
Question (ग). “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।” यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो क्या होगा?
Answer:
यदि वृक्ष और वनस्पतियाँ मनुष्यों के समान संवेदी होकर बात और व्यवहार करने लगें, तो संसार का दृश्य पूर्णतः बदल जाएगा। वे अपनी मीठी वाणी से हमें परोपकार, धैर्य और सहनशीलता का जीवंत उपदेश देंगे। यदि हम उनके साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार करेंगे, तो वे सहर्ष हमें मधुर फल और शीतल छाया भेंट करेंगे। परंतु, यदि मनुष्य उन पर कुल्हाड़ी चलाएगा, तो वे शायद दुखी होकर फल-फूल देना बंद कर दें और हमसे रूठ जाएँ। इससे मानव जाति को अपनी गलतियों का अहसास होगा और हम प्रकृति को क्षति पहुँचाना छोड़ उसका आदर करना सीख जाएँगे।
In simple words: अगर पेड़ हमारी तरह बोलने और व्यवहार करने लगें तो वे अच्छे व्यवहार पर हमें फल देंगे, और अगर हम उन्हें काटेंगे तो वे नाराज़ होकर फल-लकड़ी देना बंद कर देंगे।
Exam Tip: इस तरह के विचारात्मक प्रश्नों के उत्तर में रचनात्मकता लाते हुए सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के पहलुओं पर विचार करें।
Question (घ). “यहाँ पर श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं- एक का नाम नील धारा, दूसरी श्री गंगा जी ही के नाम से।” इस पाठ में ‘गंगा’ शब्द के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ लगाया गया है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?
Answer:
भारतीय संस्कृति और परंपरा में पूजनीय विभूतियों, पूज्य व्यक्तियों अथवा आराध्य शक्तियों के प्रति आदर प्रकट करने हेतु नाम के पहले 'श्री' तथा अंत में 'जी' जोड़ने का नियम है। लेखक ने गंगा नदी को महज़ जल का एक प्रवाह न मानकर उन्हें जीवनदायिनी माँ और एक पवित्र आराध्या स्वीकार किया है। अतः गंगा के प्रति अपने गहरे आदर, अटूट विश्वास और भक्ति भावना को प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने 'श्री गंगा जी' संबोधन का प्रयोग किया है।
In simple words: भारत में बड़ों को सम्मान देने के लिए 'श्री' और 'जी' लगाते हैं। लेखक गंगा को केवल नदी नहीं, बल्कि देवी मानते हैं, इसलिए उन्होंने उन्हें सम्मान देने के लिए ऐसा लिखा।
Exam Tip: गंगा को नदी के स्थान पर माता और देवी के रूप में मानने वाली सांस्कृतिक आस्था का विशेष उल्लेख करें।
Question (ङ). कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार एक श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित व्यक्ति के साथ गए हैं। उसकी यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव दीजिए।
Answer:
विशेष आवश्यकता वाले मित्रों के साथ हरिद्वार की यात्रा को आनंदमय बनाने हेतु मेरे प्रयास इस प्रकार होंगे:
• दृष्टिबाधित मित्र के सहयोग हेतु: मैं अपनी वाणी के माध्यम से हरिद्वार के नज़ारों का सजीव और विस्तृत वर्णन करूँगा, जैसे गगनचुंबी हरे पर्वत और मंदिरों की भव्य नक्काशी। उन्हें स्पर्श द्वारा गंगाजल की शीतलता का अनुभव कराऊँगा। साथ ही आरती के समय बजने वाले शंख, घंटियों के मधुर नाद और कल-कल करती तरंगों की आवाज़ों को ध्यानपूर्वक सुनने में उनकी मदद करूँगा।
• श्रवणबाधित मित्र के सहयोग हेतु: मैं उन्हें सुंदर प्राकृतिक दृश्यों, बहते जल के रंगों और गंगा आरती की भव्यता की ओर इशारा करके दिखाऊँगा। बातचीत करने और स्थानों के इतिहास को समझाने के लिए मैं कागज़ पर लिखकर या सांकेतिक भाषा का सहज प्रयोग करूँगा।
• समान सहायता: दोनों ही स्थितियों में, मैं निरंतर उनका हाथ थामकर चलूँगा ताकि वे ऊबड़-खाबड़ रास्तों और घाटों की सीढ़ियों पर पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें।
In simple words: दृष्टिबाधित दोस्त को मैं सब कुछ बोलकर सुनाऊँगा और पानी महसूस कराऊँगा। बहरे दोस्त को इशारों से और लिखकर चीजें समझाऊँगा, और दोनों का हाथ पकड़कर रखूँगा।
Exam Tip: संवेदनशीलता और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार को दर्शाने वाले ठोस व्यावहारिक कदम उत्तर में स्पष्ट करें।
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लिखें संवाद
Question (क). “मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।” लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।
Answer:
लेखक: कल्लू जी, इस हरिद्वार की पावन भूमि पर कदम रखते ही हृदय की सारी चिंताएँ मिट गईं। देखो तो, गंगा का प्रवाह कितना पावन है और यहाँ की बयार कितनी सुगंधित व शीतल है!
कल्लू जी: सत्य कह रहे हो मित्र! जीवन में ऐसी अपूर्व शांति का अनुभव पहले कभी नहीं हुआ। इन गगनचुंबी पर्वतों और हरी-भरी वादियों को देखकर नयन धन्य हो गए हैं।
लेखक: और वह क्षण तो अद्वितीय था, जब हमने गंगा मैया की गोद में पत्थरों के ऊपर बैठकर भोजन पकाया और खाया। उस साधारण भोजन का रस किसी राजसी भोज से भी अनंत गुना उत्तम था।
कल्लू जी: बिल्कुल सही! उस भोजन में जो सादगी और आनंद था, वह संतोष की पराकाष्ठा थी। यह यात्रा हमारे मानस पटल पर सदैव अंकित रहेगी।
लेखक: सच कहूँ तो, मेरा तन भले वापस लौटने की तैयारी कर रहा है, परंतु मेरा मन यहीं घाटों पर रम गया है।
In simple words: लेखक और कल्लू जी आपस में बातें कर रहे हैं कि हरिद्वार की शांति, गंगा स्नान और पत्थरों पर बैठकर खाए सादे भोजन का आनंद वे कभी नहीं भूल सकते।
Exam Tip: संवाद लिखते समय पात्रों के स्वभाव के अनुकूल सरल, छोटे और भावपूर्ण वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए।
Question (ख). “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।” लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए- जैसे पर्वत बोल रहे हों।
Answer:
लेखक: वाह! प्रकृति का कैसा विहंगम दृश्य है। ये ऊँचे-ऊँचे हरे पहाड़ चारों ओर प्रहरी की भाँति खड़े कितने मनोहारी प्रतीत हो रहे हैं!
पर्वत (समीर के झोंकों की गूँज में): स्वागत है हे पथिक! हम युगों-युगों से इसी प्रकार एक पैर पर खड़े होकर मौन साधना कर रहे हैं। ऋतुओं के थपेड़े - कड़ी धूप, पाला और मूसलाधार वर्षा को हम संतों की तरह चुपचाप सहन करते हैं।
लेखक: आपकी यह सहनशक्ति वंदनीय है। आप स्वयं कष्ट सहकर मानव जाति को मधुर फल, सुगंधित फूल और प्राणवायु रूपी जीवन प्रदान करते हैं।
पर्वत: परोपकार ही हमारा परम धर्म है। इस पावन तीर्थ की मर्यादा और स्वच्छता को बनाए रखना ही हमारी तपस्या का मुख्य उद्देश्य है।
लेखक: आपकी शीतल गोद में आते ही मेरी अंतरात्मा पवित्रता का अनुभव कर रही है।
पर्वत: हमारी यही कामना है कि जो भी यहाँ आए, वह कुदरत के साथ एकाकार होकर अपने भीतर की बुराइयों का त्याग करे और निर्मल मन लेकर लौटे।
In simple words: लेखक पहाड़ों की तारीफ करते हैं और पहाड़ हवा के जरिए कहते हैं कि वे संतों की तरह सारी मुसीबतें सहकर भी हमेशा सबका भला करते हैं।
Exam Tip: मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करते हुए प्रकृति के अंगों (जैसे पर्वत) को सजीव पात्रों की तरह संवाद करते हुए दिखाएं।
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‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग
विशेष आश्चर्य का विषय यह “है” कि यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं। यों तो वैरागियों ने मठ मंदिर कई बना लिए “हैं”। आप जानते ही हैं कि एकवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘है’ का प्रयोग किया किया जाता है और बहुवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘हैं’ का। सोचिए, ‘गंगा’ शब्द एकवचन है, फिर भी इसके साथ ‘हैं’ क्यों लिखा गया है? इसका कारण यह है कि कभी-कभी हम आदर-सम्मान प्रदर्शित करने के लिए एकवचन संज्ञा शब्दों को भी बहुवचन के रूप में प्रयोग करते हैं। इसे ‘आदरार्थ बहुवचन’ प्रयोग कहते हैं। जैसे- मेरे पिता जी सो रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री भाषण दे रहे हैं। अब ‘आदरार्थ बहुवचन’ को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
Question. 'है' और 'हैं' के नियम तथा आदरार्थ बहुवचन को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं __________, वे अभी सभा में उपस्थित __________।
2. माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते __________, हमें उनका कहना मानना चाहिए।
3. मेरी बहन बाजार जा रही __________, वहाँ से किताबें ले आएगी।
4. बाहर फेरीवाला __________। उसे बुला लाओ।
5. डाकिया जी आए __________ उन्हें भी बुला लाओ।
6. आप तो बहुत दिन बाद आए __________, __________ स्वागत है।
7. डॉक्टर साहब बहुत विद्वान __________, उन से परामर्श लेना चाहिए।
8. आपके माता-पिता कहाँ __________? क्या मैं __________ से मिल सकता हूँ?
9. ये हमारे हिंदी के अध्यापक __________, हम __________ से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।
10. बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर __________।
Answer:
1. प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं हैं, वे अभी सभा में उपस्थित हैं। (प्रधानाचार्य जी आदरणीय हैं, इसलिए बहुवचन 'हैं' का प्रयोग हुआ है)
2. माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं, हमें उनका कहना मानना चाहिए। (माता-पिता के सम्मान में बहुवचन क्रिया प्रयुक्त हुई है)
3. मेरी बहन बाजार जा रही है, वहाँ से किताबें ले आएगी। (एकवचन साधारण वाक्य)
4. बाहर फेरीवाला आया है। उसे बुला लाओ। (एकवचन साधारण वाक्य)
5. डाकिया जी आए हैं, उन्हें भी बुला लाओ। (आदर सूचक बहुवचन)
6. आप तो बहुत दिन बाद आए हैं, आपका स्वागत है। ('आप' सर्वनाम के साथ बहुवचन 'हैं' और सम्मानजनक 'आपका' शब्द आएगा)
7. डॉक्टर साहब बहुत विद्वान हैं, उनसे परामर्श लेना चाहिए। (सम्मान प्रकट करने के लिए 'हैं' का प्रयोग किया गया है)
8. आपके माता-पिता कहाँ हैं? क्या मैं उन से मिल सकता हूँ? (माता-पिता के आदर के लिए 'हैं' और 'उन' का प्रयोग किया गया है)
9. ये हमारे हिंदी के अध्यापक हैं, हम उन से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं। (शिक्षक के प्रति आदर दिखाने हेतु 'हैं' और 'उन' प्रयुक्त हुआ है)
10. बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर रहा है। (एकवचन कर्ता के साथ साधारण एकवचन क्रिया 'रहा है')
In simple words: जब हम किसी अकेले व्यक्ति को सम्मान देते हैं (जैसे माता-पिता, गुरु या डॉक्टर), तो हम 'है' की जगह आदर दिखाने के लिए 'हैं' लिखते हैं। साधारण एकवचन के लिए 'है' का प्रयोग होता है।
Exam Tip: परीक्षाओं में आदर देने वाले वाक्यों में 'है' पर बिंदी (अनुस्वार) लगाना न भूलें, क्योंकि यह 'हैं' व्याकरण की दृष्टि से सही होता है।
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भावों की पहचान
प्रेम, करुणा, संतोष, हास्य, भक्ति, शांति, श्रद्धा, परोपकार, वैराग्य, दया, आश्चर्य, दुख
Question. नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। सोचिए कि इनमें कौन-सा भाव प्रकट हो रहा है? पहचानिए और चुनकर लिखिए-
1. उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।
2. चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।
3. पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं।
4. हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।
5. सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।
Answer:
1. भाव: संतोष (यह वाक्य दिखाता है कि सादे भोजन में भी कितना आनंद मिल सकता है यदि मन संतुष्ट हो।)
2. भाव: वैराग्य, श्रद्धा (हरिद्वार के पवित्र माहौल में लेखक का मन ईश्वर भक्ति और वैराग्य के भावों से ओतप्रोत हो रहा था।)
3. भाव: संतोष (पंडों के कम में भी सुखी रहने के असाधारण गुण को यहाँ संतोष के रूप में दिखाया गया है।)
4. भाव: शांति, प्रसन्नता (चारों ओर फैले पावन और निर्मल वातावरण से चित्त में हर्ष और असीम शांति का संचार हो रहा था।)
5. भाव: परोपकार, दया (कष्ट देने वाले को भी सुख पहुँचाना परोपकार की उत्कृष्ट भावना और दयालु स्वभाव को प्रदर्शित करता है।)
In simple words: इन वाक्यों को पढ़कर हमें मन के अलग-अलग भावों जैसे संतोष, भक्ति, शांति और दयालुता का पता चलता है।
Exam Tip: भावों की पहचान करते समय वाक्य के मुख्य शब्द (जैसे सुख, भक्ति, संतोषी) को पकड़ें, इससे सही भाव पहचानना आसान हो जाता है।
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काल की पहचान
Question (क). नीचे दी गई पाठ की इन पंक्तियों को पढ़कर बताइए, इनमें क्रिया कौन-से काल को प्रदर्शित कर रही है? (भूतकाल/वर्तमान/भविष्य)
1. निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।
2. यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।
3. वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं।
4. चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।
5. मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था।
Answer:
1. भविष्य काल (यहाँ 'दीजिएगा' क्रिया आने वाले समय में कार्य संपन्न होने का संकेत कर रही है।)
2. वर्तमान काल (क्रिया 'घिरी है' वर्तमान स्थिति का बोध करा रही है।)
3. वर्तमान काल (यहाँ पेड़ों की सदैव रहने वाली स्थिति और फल देने के वर्तमान गुण को दिखाया गया है।)
4. भूतकाल (क्रिया 'उदय होता था' बीते हुए समय की भावना को दर्शा रही है।)
5. भूतकाल (क्रिया 'टिका था' अतीत में लेखक के ठहरने की बात स्पष्ट करती है।)
In simple words: बीती हुई बात को भूतकाल, आज की बात को वर्तमान काल और आने वाले समय की बात को भविष्य काल कहते हैं।
Exam Tip: काल पहचानने के लिए हमेशा वाक्य के अंत में आने वाली मुख्य क्रिया (था, है, गा) को ध्यान से देखें।
Question (ख). अब इन वाक्यों के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए और नए वाक्य बनाइए।
Answer:
1. वाक्य: "निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।" (मूल: भविष्य काल)
• वर्तमान काल: निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान देते हैं।
• भूतकाल: निश्चय था कि आप इस पत्र को स्थानदान देंगे।
2. वाक्य: "यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।" (मूल: वर्तमान काल)
• भूतकाल: यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी थी।
• भविष्य काल: यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी रहेगी।
3. वाक्य: "वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं।" (मूल: वर्तमान काल)
• भूतकाल: वृक्ष ऐसे थे कि पत्थर मारने से फल देते थे।
• भविष्य काल: वृक्ष ऐसे होंगे कि पत्थर मारने से फल देंगे।
4. वाक्य: "चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।" (मूल: भूतकाल)
• वर्तमान काल: चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता है।
• भविष्य काल: चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होगा।
5. वाक्य: "मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था।" (मूल: भूतकाल)
• वर्तमान काल: मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका हूँ।
• भविष्य काल: मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका रहूँगा।
In simple words: किसी भी वाक्य को क्रिया बदलकर हम आसानी से भूतकाल (था/थी), वर्तमान काल (है/हूँ) और भविष्य काल (गा/गी/गे) में बदल सकते हैं।
Exam Tip: काल परिवर्तन करते समय वाक्य के मूल अर्थ को न बदलें, केवल क्रिया का रूप ही बदलें जिससे काल सही से परिवर्तित हो सके।
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पत्र की रचना
“और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ…” इस पंक्ति में लेखक संपादक महोदय को संबोधित करके अपनी बात लिख रहे हैं। आप जानते ही होंगे कि पत्र जिस व्यक्ति के लिए लिखा जाता है, उसे संबोधित किया जाता है। पत्र के अंत में अपना नाम लिखा जाता है ताकि पत्र पाने वाले को पता चल सके कि पत्र किसने लिखा है। नीचे इस पत्र की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं से जुड़े वाक्यों से इनका मिलान कीजिए-
Question. पत्र की प्रमुख विशेषताओं को पत्र में आए उपयुक्त उदाहरणों से मिलान कीजिए:
Answer:
| पात्र/पत्र की विशेषताएँ | पत्र से सही उदाहरण |
|---|---|
| 1. व्यक्तिपरकता | और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ.. |
| 2. संवादात्मकता | मुझे हरिद्वार का समाचार लिखने में बड़ा आनंद होता है... |
| 3. स्वाभाविक शैली | एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके... |
| 4. व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन | “ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया....” |
| 5. अभिवादन या संबोधन | श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु! |
| 6. हस्ताक्षर | आपका मित्र यात्री |
| 7. उपसंहार और निवेदन | निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा। |
| 8. मुख्य विषय-वस्तु | हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिकता, साधु-संन्यासियों का जीवन, नदी, पर्वत, जल, गंगा स्नान आदि का अत्यंत विस्तार से वर्णन। जैसे- “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है.. |
In simple words: पत्र के विभिन्न अंगों जैसे संबोधन, विषय-वस्तु, व्यक्तिगत अनुभव और हस्ताक्षर को उनके सही उदाहरणों के साथ मिलाया गया है।
Exam Tip: औपचारिक और अनौपचारिक पत्र लिखते समय संबोधन, मुख्य विषय और उपसंहार जैसे प्रारूपों का सही स्थान पर प्रयोग सुनिश्चित करें।
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Question. आपने जो यात्रा-वर्णन पढ़ा है, इसे भारतेंदु हरिश्चंद्र ने एक संपादक को पत्र के रूप में लिखकर भेजा था। आप भी अपनी किसी यात्रा के विषय में अपने किसी परिचित को पत्र लिखकर बताइए।
Answer:
25, विकास नगर,
नई दिल्ली।
दिनांक: 5 अगस्त, 2025
प्रिय मित्र अमित,
सस्नेह नमस्कार।
आशा है तुम सकुशल होगे। मैं तुम्हें अपनी इस वर्ष की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों की शिमला यात्रा के विषय में बताने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। वहाँ का मौसम मैदानी इलाकों के मुकाबले अत्यंत शीतल और मनभावन था। चारों ओर घने देवदार के ऊँचे-ऊँचे वृक्ष और हरी-भरी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं, जो बहुत ही मनमोहक थीं।
हमने वहाँ पहाड़ी रास्तों पर लंबी पैदल सैर (ट्रेकिंग) का भी आनंद लिया। रास्ते में बहने वाली एक पहाड़ी नदी के बर्फीले पानी में पैर डालकर बैठने से जो शीतलता मिली, उसने पूरी थकान दूर कर दी। शिमला की प्राकृतिक सुंदरता को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है, वह सचमुच देखने योग्य है। यह यात्रा मेरे जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई है। मेरी इच्छा है कि अगली बार हम दोनों मिलकर किसी ऐसी सुंदर जगह पर घूमने जाएँ।
तुम्हारा मित्र,
योगेश भंडारी
In simple words: योगेश ने अपने दोस्त अमित को पत्र लिखकर अपनी शिमला यात्रा के बारे में बताया, जहाँ ठंडी हवा, देवदार के पेड़ और पहाड़ों की सुंदरता ने उसका मन मोह लिया।
Exam Tip: अनौपचारिक पत्रों में भेजने वाले का पता, तिथि, उचित संबोधन और अंत में प्रेषक का संबंध लिखना आवश्यक होता है।
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शब्द से जुड़े शब्द
Question. ‘हरिद्वार’ शब्द सुनते ही आपके मन में कौन-कौन से संबंधित शब्द आते हैं? उन्हें लिखिए:
Answer:
हरिद्वार शब्द से जुड़े प्रमुख शब्द निम्नलिखित हैं:
• गंगा नदी
• हर की पौड़ी
• तीर्थयात्रा
• पावन स्नान
• भव्य मंदिर
• साधु-संत
• कुंभ मेला
• गंगा आरती के घाट
• कांवड़ यात्रा
• धार्मिक अनुष्ठान
• पर्वतों की श्रृंखला
• निर्मल जल
In simple words: हरिद्वार का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में गंगा जी, मंदिर, पूजा-पाठ, साधु-संत और वहाँ के सुंदर घाटों की तस्वीरें उभरने लगती हैं।
Exam Tip: शब्द-जाल (Word Web) वाले प्रश्नों में दिए गए मुख्य शब्द से सीधे जुड़े संज्ञा और विशेषण शब्दों को लिखना चाहिए।
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लेखन के अनोखे तरीके
Question (क) 1. पाठ में ढूँढ़िए कि इन तुलनात्मक वाक्यों को लेखक ने किस प्रकार विशिष्ट तरीके से लिखा है यानी विशिष्टता प्रदान की है? वृक्षों की तुलना साधुओं से की गई है।
Answer:
लेखक ने इसे इस प्रकार विशिष्टता दी है: “बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।” (पेड़ों के स्थिर खड़े रहने और कड़े मौसम को बर्दाश्त करने की तुलना साधुओं की मौन साधना और कष्ट सहन से की गई है।)
In simple words: लेखक ने पेड़ों की तुलना उन संतों से की है जो एक पैर पर खड़े होकर हर तरह के मौसम में तपस्या करते हैं।
Exam Tip: विशिष्ट वाक्य ढूंढते समय पाठ में प्रयुक्त उपमा या उत्प्रेक्षा अलंकारों वाले वाक्यों को ध्यान से पहचानें।
Question (क) 2. पाठ में ढूँढ़िए कि किस तुलनात्मक वाक्य को लेखक ने विशिष्टता प्रदान की है? गंगाजल की मिठास की तुलना चीनी से की गई है।
Answer:
लेखक ने इसे इस विशिष्ट शैली में लिखा है: “जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।” (यहाँ जल की अत्यधिक मिठास और ठंडक को व्यक्त करने के लिए बर्फीले शर्बत का रूपक दिया गया है।)
In simple words: गंगाजल की मिठास और ठंडक को लेखक ने बर्फ में जमे हुए मीठे शर्बत जैसा बताया है।
Exam Tip: काव्यात्मक तुलनाओं को लिखते समय वाक्य को यथावत उद्धरण चिह्नों (“ ”) में लिखना चाहिए।
Question (क) 3. पाठ में ढूँढ़िए कि किस तुलनात्मक वाक्य को लेखक ने विशिष्टता प्रदान की है? हरियाली की तुलना गलीचे से की गई है।
Answer:
पाठ में प्रयुक्त विशिष्ट वाक्य: “वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दिखाई पड़ती थी मानो हरे गलीचा की यात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।” (बरसात के बाद धरती पर उगी मखमली घास को देखकर ऐसा लगता है जैसे यात्रियों के आराम के लिए हरा कालीन बिछाया गया हो।)
In simple words: चारों ओर फैली घास को देखकर ऐसा लगता है जैसे यात्रियों के बैठने के लिए कुदरत ने हरा कालीन बिछा दिया हो।
Exam Tip: प्राकृतिक दृश्यों की तुलना मानव निर्मित सुंदर वस्तुओं (जैसे गलीचा) से करके लेखक ने भाषा को समृद्ध बनाया है।
Question (क) 4. पाठ में ढूँढ़िए कि किस तुलनात्मक वाक्य को लेखक ने विशिष्टता प्रदान की है? नदी की धारा की तुलना राजा भगीरथ के यश (कीर्ति) से की गई है।
Answer:
लेखक ने इस अद्भुत रूप में तुलना की है: “त्रिभुवन पावनी श्री गंगा जी की पवित्र धारा बहती है जो राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता-सी दिखाई देती है।” (गंगा की उज्ज्वल जलधारा को राजा भगीरथ के महान और निर्मल यश की सफेद लता के समान बताया गया है।)
In simple words: बहती हुई सफेद गंगा की धारा ऐसी लगती है मानो राजा भगीरथ की महान सफलता और यश की कोई सुंदर बेल फैल रही हो।
Exam Tip: ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों का उपयोग कर तुलना करने से वाक्य अत्यधिक प्रभावशाली बन जाता है।
Question (ख) 1. प्राचीन हिंदी की इस पंक्ति को आज की आधुनिक हिंदी में लिखिए: “इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।”
Answer:
आधुनिक हिंदी रूपांतरण: "इन पेड़ों पर रंग-बिरंगे पक्षी चहचहाते हैं और शहर के निर्दयी शिकारियों से बेखौफ होकर आनंदपूर्वक क्रीड़ा करते हैं।"
In simple words: इन पेड़ों पर कई तरह के पक्षी बिना किसी शिकारी के डर के मजे से खेल रहे हैं और चहक रहे हैं।
Exam Tip: प्राचीन शब्दों जैसे 'बधिक' को 'शिकारी' और 'कल्लोल' को 'क्रीड़ा' या 'मस्ती' में बदलकर आज की हिंदी बनाई जाती है।
Question (ख) 2. प्राचीन हिंदी की इस पंक्ति को आज की आधुनिक हिंदी में लिखिए: “वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दृष्टि पड़ती थी मानो हरे गलीचा की यात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।”
Answer:
आधुनिक हिंदी रूपांतरण: "बारिश की वजह से सब तरफ केवल हरियाली ही नज़र आ रही थी, ऐसा लगता था जैसे मुसाफिरों के विश्राम के लिए मखमली हरी कालीन बिछाई गई हो।"
In simple words: बारिश के कारण चारों तरफ हरी घास ऐसी दिख रही थी मानो चलने वालों के आराम के लिए हरा कालीन बिछा हो।
Exam Tip: 'दृष्टि पड़ती थी' का आधुनिक रूप 'दिखाई देती थी' या 'नज़र आती थी' और 'बिछायत' का अर्थ 'कालीन' या 'बिछौना' होता है।
Question (ख) 3. प्राचीन हिंदी की इस पंक्ति को आज की आधुनिक हिंदी में लिखिए: “यह ऐसा निर्मल तीर्थ है कि इच्छा क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं।”
Answer:
आधुनिक हिंदी रूपांतरण: "यह स्थान इतना पवित्र और निर्मल तीर्थ है कि जिन मनुष्यों के भीतर लालसा और अत्यधिक क्रोध भरा होता है, वे वहाँ टिक ही नहीं पाते।"
In simple words: यह तीर्थ इतना पावन है कि यहाँ वासना और गुस्सा रखने वाले बुरे लोग रुक ही नहीं सकते।
Exam Tip: 'खानि' शब्द का आधुनिक हिंदी पर्याय 'खान' या 'भंडार' होता है, इसे ध्यान में रखकर अनुवाद करें।
Question (ख) 4. प्राचीन हिंदी की इस पंक्ति को आज की आधुनिक हिंदी में लिखिए: “मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाह्रर है।”
Answer:
आधुनिक हिंदी रूपांतरण: "उस स्थान पर पहुँचते ही मेरा मन इतना हर्षित और पवित्र हो गया कि शब्दों में उसकी व्याख्या करना असंभव है।"
In simple words: वहाँ जाते ही मेरा दिल इतना खुश और शांत हो गया कि मैं उसे शब्दों में बता भी नहीं सकता।
Exam Tip: 'चित्त' का अर्थ 'मन' या 'हृदय' और 'वर्णन के बाहर' का अर्थ 'वर्णनातीत' या 'वर्णन से परे' होता है।
Question (ख) 5. प्राचीन हिंदी की इस पंक्ति को आज की आधुनिक हिंदी में लिखिए: “यहाँ रात्रि को ग्रहण हुआ और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागवत का पारायण भी किया।”
Answer:
आधुनिक हिंदी रूपांतरण: "यहाँ रात के समय चंद्रग्रहण लगा, जिसमें हम सभी ने अत्यंत श्रद्धा और हर्ष के साथ स्नान किया और अगले दिन श्रीमद्भागवत महापुराण का विधिपूर्वक पाठ सुना।"
In simple words: रात को यहाँ ग्रहण लगा तो हमने गंगा जी में स्नान किया, और दिन में भागवत कथा का पाठ किया।
Exam Tip: 'पारायण' शब्द का अर्थ 'धार्मिक ग्रंथ का श्रद्धापूर्वक पाठ करना' होता है, इसे सरल रूप में लिखें।
Question (ख) 6. प्राचीन हिंदी की इस पंक्ति को आज की आधुनिक हिंदी में लिखिए: “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।”
Answer:
आधुनिक हिंदी रूपांतरण: "उस समय गंगा किनारे शिला पर बैठकर भोजन ग्रहण करने का जो असीम आनंद मिला, वह किसी राजमहल में स्वर्ण पात्र में भोजन करने के सुख से कहीं अधिक उत्तम था।"
In simple words: नदी किनारे पत्थर पर सादा खाना खाने में जो मजा आया, वह सोने की थाली के बड़े भोजन से भी बहुत ज्यादा था।
Exam Tip: 'थाल' का आज का रूप 'थाली' है। तुलना को स्पष्ट करते हुए आधुनिक रूपांतरण करें।
Question (ख) 7. प्राचीन हिंदी की इस पंक्ति को आज की आधुनिक हिंदी में लिखिए: “निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।”
Answer:
आधुनिक हिंदी रूपांतरण: "मुझे पूरा विश्वास है कि आप इस पत्र को अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र/पत्रिका में अवश्य ही प्रकाशित करेंगे।"
In simple words: मुझे पक्का भरोसा है कि आप मेरे इस पत्र को अपनी पत्रिका में छपने की जगह जरूर देंगे।
Exam Tip: 'स्थानदान' देना पत्रकारिता के संदर्भ में 'लेख या पत्र को छापना/प्रकाशित करना' होता है।
Question (ग). इस रचना में भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने कई स्थानों पर प्राचीन वर्तनी का प्रयोग किया है। नीचे दिए गए शब्दों की प्राचीन वर्तनी को उनके आधुनिक रूपों से मिलान करते हुए तालिका बनाइए:
Answer:
| पाठ में प्रयुक्त प्राचीन शब्द (वर्तनी) | आधुनिक हिंदी शब्द (वर्तनी) |
|---|---|
| शिषर | शिखर |
| जात्रियों | यात्रियों |
| वल्ली | बेल |
| घाम | धूप |
| मिष्ट | मीठा |
| बिछायत | बिछौना |
| बधिकों | शिकारियों |
| विल्वपर्वत | बिल्वपर्वत |
In simple words: पुराने समय में लिखे गए हिंदी शब्दों को आज की सरल और शुद्ध आधुनिक हिंदी वर्तनी में बदलकर दिखाया गया है।
Exam Tip: भाषा के ऐतिहासिक विकास को समझने के लिए प्राचीन वर्तनी (जैसे 'श' के स्थान पर 'ष' का प्रयोग) पर विशेष ध्यान दें।
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अपनी बात (आपकी बात)
Question 1. “मैंने गंगा जी के तट पर रसोई करके… भोजन किया।” क्या आपने कभी खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है? वह अनुभव घर के खाने से कैसे भिन्न था?
Answer:
हाँ, मुझे एक बार अपने परिजनों के साथ वन क्षेत्र में स्थित एक सुंदर उपवन में बैठकर मध्याह्न का भोजन करने का अवसर मिला था। वह पिकनिक का अनुभव घर के नियमित भोजन से पूर्णतः अलग और अद्भुत था:
• घर पर हम प्रायः डाइनिंग टेबल या सोफे पर बैठकर भोजन करते हैं, जबकि वहाँ हम स्वच्छ हरी मखमली घास पर चटाई बिछाकर पालथी मारकर बैठे थे।
• घर में खाते समय ध्यान टीवी या मोबाइल की स्क्रीन पर होता है, पर वहाँ प्रकृति की गोद में शीतल मंद पवन, उड़ती तितलियों और चिड़ियों के कलरव को सुनते हुए अत्यंत शांत मन से भोजन का स्वाद लिया गया।
• खुले आसमान के नीचे ताज़ी हवा के साए में खाने से मन अत्यंत प्रफुल्लित और चिंतामुक्त हो गया, जिससे साधारण पूड़ी-सब्जी भी छप्पन भोग से अधिक तृप्तिदायक और स्वादिष्ट लगी।
In simple words: हाँ, एक बार पिकनिक पर घास पर बैठकर, चिड़ियों की चहचहाहट और ताज़ी हवा के बीच खाना खाने का मज़ा घर में बैठकर टीवी देखते हुए खाने से बहुत अलग और प्यारा था।
Exam Tip: अनुभवों की तुलना करते समय वातावरण, बैठने की व्यवस्था और मन की स्थिति जैसे अंतरों को बिंदुवार स्पष्ट करें।
Question 2. “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।” आपके जीवन में ऐसा कोई क्षण आया, जब किसी सामान्य-सी वस्तु ने आपको गहरा सुख दिया हो? उसके बारे में बताइए।
Answer:
जी हाँ, मेरे जीवन में भी ऐसा एक अत्यंत भावुक कर देने वाला क्षण आया था। मेरे जन्मदिन पर मेरे एक परम मित्र ने बाजार का कोई महंगा खिलौना या उपहार देने के बजाय मुझे अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर मिट्टी की छोटी सी प्रतिमा भेंट की थी। उसने उसे स्वयं सुखाकर प्यारे रंगों से सजाया था। उस साधारण सी मिट्टी की कलाकृति में उसकी सच्ची मित्रता, कठिन परिश्रम और स्नेह की जो मिठास छिपी थी, उसने मेरे हृदय को छू लिया। वह उपहार किसी भी कीमती वस्तु से कई गुना श्रेष्ठ था और उसे पाकर मुझे अपार आंतरिक प्रसन्नता मिली।
In simple words: एक बार मेरे मित्र ने मुझे अपने हाथ से मिट्टी की मूर्ति बनाकर दी थी। उस सादे तोहफे में उसका बहुत प्यार था, इसलिए वह मुझे किसी भी महंगे उपहार से ज्यादा प्यारा लगा।
Exam Tip: भावनात्मक मूल्य वाली वस्तुओं के महत्व को दर्शाने के लिए सरल एवं हृदयसर्शी भाषा का प्रयोग करें।
Question 3. “हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।” आपको किस स्थान पर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है? क्या कोई ऐसा स्थान है जहाँ जाते ही मन शांत हो गया हो? उस स्थान की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?
Answer:
मुझे अपने दादा जी के गाँव में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर के प्रांगण में असीम पवित्रता और सुखद प्रसन्नता की अनुभूति होती है। वहाँ जाते ही मन का सारा कोलाहल शांत हो जाता है और हृदय भक्तिमय हो उठता है। उस स्थान की जो बातें मुझे अत्यंत प्रिय हैं, वे निम्नलिखित हैं:
• विशाल बरगद के वृक्षों की ठंडी और गहरी छाँव तथा वहाँ गूँजती पवन की मधुर ध्वनि।
• मंदिर में सुबह-शाम होने वाली शंखध्वनि, घंटियों की गूँज और धूप-लोबान की पवित्र सुवास जो पूरे वातावरण को पावन कर देती है।
• वहाँ चहचहाते अनेक पक्षियों का झुंड जो बिना किसी भय के मंदिर के चबूतरों पर फुदकता रहता है। वहाँ बैठकर मैं अपनी पढ़ाई की सारी चिंताएँ भूल जाता हूँ।
In simple words: मुझे अपने गाँव के पुराने शिव मंदिर में बहुत शांति मिलती है। वहाँ बरगद के पेड़ की छाँव, घंटियों की आवाज़ और ताज़ी हवा मेरे मन को बिल्कुल शांत कर देती हैं।
Exam Tip: मन को शांत करने वाले स्थान के प्राकृतिक और आध्यात्मिक दोनों वातावरणों का विस्तार से वर्णन करें।
Question 4. पाठ में वर्णित है, यहाँ के वृक्ष “फल, फूल, गंध… जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।” क्या आपके जीवन में कोई पेड़, फूल या प्राकृतिक वस्तु है जिससे आप विशेष जुड़ाव महसूस करते हैं? क्यों?
Answer:
जी हाँ, मेरे घर के पिछले हिस्से में लगा नीम का एक पुराना वृक्ष मेरे जीवन की यादों से बेहद गहराई से जुड़ा हुआ है। मैं उसे केवल एक पौधा न मानकर अपने परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य के रूप में देखता हूँ क्योंकि:
• शैशवकाल से ही मैं उसकी घनी, ठंडी और आरोग्यप्रद छाँव में अपने मित्रों के साथ लुका-छिपी खेलता रहा हूँ।
• भीषण गर्मियों के दौरान उसकी डालियों पर रस्सी बाँधकर झूला झूलने का आनंद अतुलनीय होता था।
• उसकी शाखाओं पर कोयल, गौरैया और गिलहरियों के बसेरे हैं, जिन्हें चहकते हुए देखना मन को शांति देता है। वह हमारे घर को शुद्ध हवा देता है और मुझे प्रतीत होता है कि उसने मेरे बड़े होने के हर सफर को नज़दीक से देखा है।
In simple words: मेरे आँगन में नीम का एक पुराना पेड़ है। बचपन से उसकी छाँव में खेलने, उस पर झूला झूलने और चिड़ियों की आवाज़ सुनने के कारण मुझे उससे बहुत लगाव है।
Exam Tip: प्राकृतिक वस्तु से लगाव के कारणों को अपने बचपन की स्मृतियों से जोड़कर सुंदरता से प्रस्तुत करें।
Question. “यह भूमि सुघटित और सुंदर पर्वतों से लिपटी है…” हरिद्वार के प्राकृतिक सौंदर्य को अक्षुण्ण रखने में मानव की भूमिका पर चर्चा कीजिए तथा “तीर्थों ही नहीं, पृथ्वी पूज्यवान हो!” विषय पर एक जन-जागरूकता पोस्टर तैयार कीजिए।
Answer:
सामूहिक चर्चा का सारांश:
• राहुल के विचार: पाठ के अनुसार हरिद्वार की पावन भूमि सुंदर पर्वतों और पतित-पावनी गंगा के प्रवाह से सुशोभित है। इस अप्रतिम सौंदर्य की सुरक्षा और उसे भविष्य के लिए बचाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है.
• सोनिया के विचार: गंगा मैया के निर्मल जल में प्लास्टिक की वस्तुएं या अपशिष्ट पदार्थ फेंकने से उसका पावन जल प्रदूषित हो जाता है। हमें नदियों की स्वच्छता के प्रति अत्यधिक जागरूक रहने की आवश्यकता है.
• आरव के विचार: पर्वतों पर वृक्षों की कटाई को रोकना बेहद ज़रूरी है। अधिक से अधिक पौधे रोपने से ही पर्यावरण शुद्ध और धरती हरी-भरी बनी रहेगी.
• नेहा के विचार: सभी सैलानियों और श्रद्धालुओं को तीर्थ स्थलों के स्वच्छता नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए, जिससे धार्मिक स्थलों की दिव्यता और गरिमा खंडित न हो.
• रचना के विचार: स्थानीय प्रशासन और सरकारों द्वारा सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण रोक तथा कचरा फैलाने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाने जैसे कठोर कदम उठाए जाने चाहिए.
• सामूहिक निष्कर्ष: प्राकृतिक विरासत को संजोना केवल प्रशासनिक तंत्र का कार्य नहीं है, बल्कि यह हर एक नागरिक का सामाजिक दायित्व है। सबके सम्मिलित प्रयासों से ही पृथ्वी की शुचिता बनी रह सकती है.
Exam Tip: पोस्टर निर्माण वाले प्रश्नों में आकर्षक नारों (Slogans) और मुख्य संदेशों को स्पष्ट व बड़े अक्षरों में बक्से (Box) के अंदर लिखना चाहिए।
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स्वास्थ्य और योग
“चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।” अनेक लोग आज भी मन की शांति, स्वास्थ्य लाभ और भक्ति के लिए तीर्थ और पर्वतीय स्थानों की यात्रा करते हैं। मन की शांति और स्वास्थ्य के लिए हमारे देश में हजारों वर्षों से योग भी किया जाता रहा है।
Question (क). 5 मिनट ध्यान लगाकर या मौन बैठकर अपने आस-पास की ध्वनियों को सुनिए, अपनी श्वास पर ध्यान दीजिए तथा ध्यान को केंद्रित करने का प्रयास कीजिए। इस अनुभव के विषय में एक अनुच्छेद लिखिए।
Answer:
मैंने शांत स्थान पर बैठकर अपनी आँखें मूँद लीं और ध्यान मुद्रा में पाँच मिनट बिताए। प्रारंभ में मेरा ध्यान भटक रहा था और कल-आज के अनेक विचार मस्तिष्क में निरंतर आ-जा रहे थे। तदुपरान्त, मैंने अपना ध्यान धीरे-धीरे आती-जाती श्वास की गति पर केंद्रित करना शुरू किया। जैसे-जैसे श्वास की गति मंद हुई, मुझे आस-पास की सूक्ष्म ध्वनियाँ अत्यंत स्पष्ट रूप से सुनाई देने लगीं; जैसे मेरे कमरे के कोने में रखी घड़ी की टिक-टिक और आँगन के पेड़ों से आती गौरैया की मधुर चहक। कुछ ही समय में विचारों का प्रवाह थमा, चित्त में अपूर्व शांति व्याप्त हुई और संपूर्ण शरीर तरोताजा महसूस करने लगा। यह मानसिक विश्राम का एक अत्यंत सुखद और विलक्षण अनुभव था।
In simple words: पाँच मिनट आँखें बंद करके ध्यान लगाने से शुरू में मन भटका, पर फिर अपनी साँसों और चिड़ियों की आवाज़ पर ध्यान देने से मन बिल्कुल शांत और हल्का हो गया।
Exam Tip: ध्यान के अनुभव पर अनुच्छेद लिखते समय विचारों के भटकने से लेकर एकाग्रता प्राप्त होने तक के चरणों का क्रमिक वर्णन करें।
सज्जन वृक्ष
Question (क). एक पौधा लगाइए और उसकी देखभाल कीजिए ताकि वह कुछ वर्षों में बड़ा पेड़ बन सके। उसे एक नाम दीजिए और उसका मित्र बनिए। इस अनुभव को संक्षेप में लिखिए।
Answer:
मैंने अपने घर के बगीचे के मध्य में आम का एक सुंदर सा नन्हा पौधा रोपित किया है। मैंने बड़े प्यार से उसका नाम 'मिठाई' रखा है। मेरी दिनचर्या में अब उसे सुबह-शाम नियम से सींचना, उसकी सूखी पत्तियों को हटाना और उसकी सुरक्षा करना शामिल हो गया है। वह छोटा सा पौधा अब मेरा सबसे प्यारा मित्र बन गया है, जिसे रोज़ बढ़ता देखना मुझे बहुत खुशी देता है।
In simple words: मैंने अपने आँगन में आम का एक पौधा लगाकर उसका नाम 'मिठाई' रखा है। मैं हर रोज़ उसमें पानी डालता हूँ और उसका पूरा ध्यान रखता हूँ।
Exam Tip: पेड़ लगाने के अनुभव में पौधे के नाम और उसके प्रति अपने सेवा भाव को आत्मीयता के साथ व्यक्त करें।
Question (ख). अपने लगाए पौधे के बारे में अपनी दैनंदिनी (डायरी) में नियमित रूप से लिखिए।
Answer:
डायरी लेखन (दैनंदिनी)
दिनांक: 5 अक्टूबर, 2025
प्रिय डायरी,
आज का दिन मेरे लिए अत्यंत विशेष था क्योंकि आज मैंने अपने घर के प्रांगण में अपने मित्र पौधे 'मिठाई' को रोपा। यद्यपि वह अभी बहुत कोमल और छोटा सा है, परंतु मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरी स्नेहपूर्ण देखभाल से वह शीघ्र ही एक विशाल छायादार वृक्ष बनेगा। उसे मिट्टी में रोपने के बाद जब मैंने पहली बार पानी दिया, तो मुझे असीम आत्मिक संतोष मिला। मैंने उसकी जड़ों के पास की फालतू घास-फूस भी साफ़ कर दी है ताकि उसे बढ़ने के लिए पर्याप्त पोषण और ताज़ी हवा मिल सके। उसे लहलहाते देखना मेरी शाम को खुशनुमा बना देता है।
In simple words: डायरी के पन्ने में पौधे लगाने के पहले दिन की खुशी और उसके बड़े होने की उम्मीद को सुंदर ढंग से लिखा गया है।
Exam Tip: डायरी लेखन में तिथि, दिन और अनौपचारिक रूप से अपने मन की सच्ची अनुभूतियों को प्रथम पुरुष (मैं/मुझे) शैली में लिखना चाहिए।
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अपने शब्द
Question. 'शीतल' शब्द को केंद्र में रखते हुए उसका अर्थ, विपरीतार्थक शब्द, समानार्थी शब्द तथा वाक्य प्रयोग लिखिए:
Answer:
• शब्द: शीतल
• अर्थ: अत्यंत ठंडा, मन को शांति और ठंडक पहुँचाने वाला।
• समानार्थी शब्द (Synonyms): शीत, ठंडा, पावन, शांत, ठंडकदार।
• विपरीतार्थक शब्द (Antonyms): उष्ण, तपता हुआ, तप्त, गर्म।
• वाक्य प्रयोग: ग्रीष्म ऋतु के तपने वाले दिनों में गंगा नदी का शीतल जल स्नानार्थियों के तन-मन को असीम ताजगी और सुख प्रदान करता है।
In simple words: 'शीतल' का मतलब ठंडा होता है। इसका उल्टा गर्म होता है, और इसके समान अर्थ वाले शब्द शीत व ठंडे हैं।
Exam Tip: व्याकरण संबंधी प्रश्नों में समानार्थी और विपरीतार्थक लिखते समय दिए गए शब्द के तत्सम या तद्भव रूप के अनुकूल ही शब्दों का चयन करना चाहिए।
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यात्रा के व्यय की गणना
Question (क). मान लीजिए कि यात्रा के लिए आपको Rs. 1000 दिए गए हैं। यात्रा, खाना आदि सब मिलाकर एक व्यय विवरण बनाइए।
Answer:
मैं अपने सहपाठियों के साथ कुल Rs. 1000 के सीमित बजट में दिल्ली के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल 'कुतुब मीनार' के भ्रमण की योजना तैयार करूँगा। इस संक्षिप्त एकदिवसीय शैक्षिक यात्रा का व्यवस्थित बजट विवरण निम्नलिखित तालिका के अनुसार होगा:
| व्यय का मद (खर्च का विवरण) | राशि (Rs.) |
|---|---|
| यातायात व्यय (मेट्रो किराया) | Rs. 104 |
| जलपान एवं भोजन का व्यय | Rs. 400 |
| कुतुब मीनार प्रवेश शुल्क (टिकट) | Rs. 200 |
| ऐतिहासिक स्मृति चिह्न (सोवेनियर) | Rs. 100 |
| आकस्मिक एवं अन्य फुटकर व्यय | Rs. 196 |
| कुल अनुमानित व्यय | Rs. 1000 |
In simple words: Rs. 1000 के बजट में दिल्ली के कुतुब मीनार घूमने जाने का एक पूरा हिसाब-किताब बनाया गया है, जिसमें आने-जाने, खाने और टिकट का खर्च शामिल है।
Exam Tip: बजट सूची (Expense Statement) बनाते समय हमेशा मदों को अलग-अलग लिखकर उनका योग कुल दी गई राशि के बराबर अवश्य दिखाएं।
Question (ख). मान लीजिए कि आप इस यात्रा में एक छोटी वस्तु (स्मृति चिह्न) खरीदना चाहते हैं। आप क्या खरीदेंगे और क्यों?
Answer:
इस संक्षिप्त यात्रा की सुखद यादों को संजोने के लिए मैं स्मारक के बाहर मिलने वाला कुतुब मीनार का एक सुंदर लकड़ी या धातु से निर्मित छोटा सा प्रतिरूप (मॉडल) खरीदना पसंद करूँगा। इसे अपने अध्ययन कक्ष की मेज पर सजाकर रखने से जब भी मेरी दृष्टि इस पर पड़ेगी, मुझे मित्रों के साथ बिताए गए वे आनंदमय पल और यात्रा के संस्मरण पुनः ताज़ा हो जाएँगे।
In simple words: मैं वहाँ से कुतुब मीनार का एक छोटा सा खिलौना खरीदूँगा ताकि उसे देखकर मुझे दोस्तों के साथ बिताई यह यात्रा हमेशा याद रहे।
Exam Tip: स्मृति चिह्न खरीदने का कारण स्पष्ट करते समय यात्रा की यादों को सहेजने वाले दृष्टिकोण को सरल शब्दों में दर्शाएं।
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यात्रा सबके लिए
Question (क). कल्पना कीजिए कि कुछ मित्रों का समूह एक यात्रा पर जा रहा है। आप एक मार्गदर्शक या टूरिस्ट गाइड हैं। आप इन सबकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे?
Answer:
एक कुशल मार्गदर्शक (टूरिस्ट गाइड) के रूप में मेरी प्राथमिकता समूह के प्रत्येक सदस्य की सुरक्षा और सुविधा होगी। इसके लिए मैं निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करूँगा:
• यात्रा आरंभ करने से पूर्व मैं समूह के सभी यात्रियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं और स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करूँगा।
• शारीरिक रूप से अक्षम अथवा व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले सदस्यों के लिए मैं ढलान वाले रास्तों (रैंप) का चयन करूँगा ताकि उन्हें सीढ़ियों पर न चढ़ना पड़े।
• बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए यात्रा की गति धीमी रखूँगा और उनके विश्राम के लिए पर्याप्त अंतराल की व्यवस्था करूँगा।
• भोजन, स्वच्छ पेयजल और विश्राम के लिए पूर्व-नियोजित सुरक्षित स्थानों पर रुकने का प्रबंध करूँगा जिससे कोई भी यात्री अत्यधिक थकावट महसूस न करे।
• सामूहिक भ्रमण के समय लगातार उपस्थिति की जाँच करता रहूँगा जिससे कि भीड़भाड़ में कोई भी व्यक्ति अपने साथियों से बिछड़ न पाए।
In simple words: एक गाइड के रूप में मैं सबको साथ लेकर चलूँगा, बीमार या कमज़ोर लोगों के लिए आसान रास्ते चुनूँगा और समय-समय पर आराम व भोजन की अच्छी व्यवस्था करूँगा।
Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर में संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills) को दर्शाने वाले व्यावहारिक कदमों को लिखें।
Question (ख). अपने किसी मित्र के साथ बिना बोले संवाद कीजिए- संकेतों से। अब सोचिए कि यात्रा में श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए क्या-क्या आवश्यक होगा?
Answer:
संकेतों के माध्यम से बातचीत करने के अभ्यास के बाद, यह स्पष्ट होता है कि श्रवणबाधित मित्रों की यात्रा को सुगम व आनंदमयी बनाने हेतु निम्नलिखित व्यवस्थाएँ आवश्यक हैं:
• तत्काल संवाद स्थापित करने के लिए उनके पास सदैव एक छोटी नोटबुक और पेन उपलब्ध होना चाहिए जिससे लिखकर बातें की जा सकें।
• समूह के अन्य सदस्यों और उस मित्र को कुछ सामान्य और उपयोगी सांकेतिक भाषा (Sign Language) का ज्ञान होना चाहिए ताकि वे आपातकाल में अपनी बात कह सकें।
• यात्रा के दौरान उन्हें समूह के मध्य रखना चाहिए जिससे वे स्वयं को उपेक्षित न महसूस करें और हर गतिविधि में शामिल रह सकें।
• गाइड अथवा टूरिस्ट लीडर को यात्रा के प्रारंभ में ही उनकी विशेष स्थिति से अवगत करा दिया जाए ताकि वह दिशा-निर्देश देते समय सचित्र नक्शों, लिखित पर्चियों अथवा संकेतों का कुशल प्रयोग कर सके।
In simple words: श्रवणबाधित (जो सुन नहीं सकते) मित्र के लिए लिखने के लिए डायरी-पेन, इशारों की समझ और गाइड द्वारा लिखित पर्चियों का प्रयोग बहुत ज़रूरी होता है।
Exam Tip: दिव्यांगजनों की सहायता से संबंधित प्रश्नों में उनके स्वाभिमान और पूर्ण समावेश (Inclusion) की भावना को ध्यान में रखकर उत्तर लिखें।
Question (ग). यात्रा करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों या भवनों की सुरक्षा के लिए आप किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे?
Answer:
हमारे देश की ऐतिहासिक धरोहरें राष्ट्रीय गौरव की अमूल्य प्रतीक हैं। इनकी सुरक्षा और सुंदरता को बनाए रखने के लिए मैं निम्नलिखित सावधानियाँ बरतूँगा:
• प्राचीन इमारतों और स्मारकों की दीवारों पर अपना नाम लिखना अथवा खुरच कर उन्हें विकृत करना जैसी असभ्य हरकतों से पूर्णतः दूर रहूँगा।
• स्मारकों के परिसर में किसी भी प्रकार का कूड़ा-कचरा या प्लास्टिक बैग नहीं फेंकूँगा, केवल कूड़ेदान का ही उपयोग करूँगा।
• प्राचीन मूर्तियों, भित्तिचित्रों या कलाकृतियों को हाथ लगाकर उन्हें गंदा होने अथवा क्षतिग्रस्त होने से बचाऊँगा।
• यदि कोई अन्य व्यक्ति धरोहर को नुकसान पहुँचा रहा हो, तो उसे अत्यंत विनम्रता के साथ रोकूँगा और इस राष्ट्रीय संपत्ति के संरक्षण का महत्व समझाऊँगा।
• पुरातत्व विभाग और स्मारक प्रबंधन द्वारा निर्धारित सभी कड़े सुरक्षा नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करूँगा।
In simple words: ऐतिहासिक स्मारकों की दीवारों पर कुछ न लिखें, वहाँ कचरा न फैलाएँ, पुरानी मूर्तियों को हाथ न लगाएँ और वहाँ के नियमों का पालन करके हमारी धरोहरों को बचाएँ।
Exam Tip: राष्ट्रीय धरोहरों के प्रति एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्यों को बिंदुवार और प्रभावशाली ढंग से लिखें।
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आज की पहेली
Question. पाठ के आधार पर नीचे दी गई पहेलियों के सही उत्तर खोजकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. एक मसाले का नाम: _______________
2. कपास से जुड़ा एक शब्द: _______________
3. जहाँ स्नान होता है: _______________
4. वृक्ष के किसी अंग का नाम: _______________
5. एक नगर या तीर्थ का नाम: _______________
6. व्यापार से जुड़ा स्थान: _______________
7. एक नदी का नाम: _______________
8. एक पर्वत का नाम: _______________
9. एक धार्मिक ग्रंथ का नाम: _______________
Answer:
1. एक मसाले का नाम: दालचीनी, जावित्री
2. कपास से जुड़ा एक शब्द: जनेऊ
3. जहाँ स्नान होता है: स्नान घाट (हर की पौड़ी)
4. वृक्ष के किसी अंग का नाम: जड़, फल, फूल, पत्ते, छाल, बीज
5. एक नगर या तीर्थ का नाम: हर हरिद्वार, कनखल, ज्वालापुर
6. व्यापार से जुड़ा स्थान: दुकानें
7. एक नदी का नाम: गंगा
8. एक पर्वत का नाम: विल्वपर्वत
9. एक धार्मिक ग्रंथ का नाम: भागवत
In simple words: इस पहेली में पाठ से खोजे गए शब्दों जैसे गंगा, हरिद्वार, जनेऊ और दालचीनी को उनके सही विवरण के सामने लिखा गया है।
Exam Tip: पहेली हल करते समय पाठ में प्रयुक्त विशिष्ट संज्ञाओं और भौगोलिक नामों को ध्यान में रखकर शब्दों का चयन करें।
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झरोखे से
भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखे एक और पत्र का एक अंश नीचे दिया गया है। इसे पढ़िए और आपस में विचार कीजिए।
हरिद्वार के मार्ग में अनेक प्रकार के वृक्ष और पक्षी देखने में आए। एक पीले रंग का पक्षी छोटा बहुत मनोहर देखा गया। बया एक छोटी चिड़िया है उसके घोंसले बहुत मिले। ये घोंसले सूखे बबूल काँटे के वृक्ष में हैं और एक एक डाल में लड़ी की भाँति बीस-बीस, तीस-तीस लटकते हैं। इन पक्षियों की शिल्पविद्या तो प्रसिद्ध ही है, लिखने का कुछ काम नहीं है। इसी से इनका सब चातुर्य प्रगट है कि सब वृक्ष छोड़ के काँटे के वृक्ष में घर बनाया है। इसके आगे ज्वालापुर और कनखल और हरिद्वार हैं, जिसका वृत्तांत अगले नंबरों में लिखूँगा।
Question. दिए गए अंश के आधार पर लेखक के विचारों और प्रमुख प्रेक्षणों का विश्लेषण कीजिए:
1. लेखक ने हरिद्वार के रास्ते में अनेक प्रकार के वृक्ष और पक्षी देखे।
2. उन्होंने एक छोटा, बहुत ही सुंदर पीले रंग का पक्षी देखा।
3. लेखक ने एक छोटी चिड़िया, जिसे बया कहते हैं, के घोंसले देखे जो सूखे बबूल के काँटेदार पेड़ में थे।
4. बया चिड़िया के घोंसले एक-एक डाल में बीस-बीस, तीस-तीस की संख्या में लड़ी की तरह लटक रहे थे।
5. लेखक बया चिड़िया की कारीगरी और चालाकी से बहुत प्रभावित थे।
6. लेखक का मानना था कि बया की कारीगरी इस बात से ज़ाहिर होती है कि उसने सभी पेड़ छोड़कर काँटेदार पेड़ में अपना घर बनाया।
7. लेखक ने यह भी बताया है कि इसके आगे ज्वालापुर, कनखल और हरिद्वार हैं, जिनके बारे में वह अगले अंकों में लिखेंगे।
Answer:
• प्रथम प्रेक्षण (वृक्ष और पक्षी): हरिद्वार की यात्रा के दौरान लेखक ने मार्ग में विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों और सुंदर पक्षियों को देखा, जो वहाँ की समृद्ध जैव-विविधता को प्रकट करते हैं।
• द्वितीय प्रेक्षण (पीला पक्षी): उन्होंने एक लघु आकार के अत्यंत आकर्षक पीले रंग के पक्षी को देखा, जिसने अपनी सुंदरता से लेखक का मन मोह लिया।
• तृतीय प्रेक्षण (बया का घोंसला): लेखक को बया नामक नन्हीं चिड़िया के अनेक घोंसले सूखे बबूल के कँटीले वृक्षों पर टंगे हुए मिले, जो बया की सुरक्षात्मक सोच को प्रदर्शित करते हैं।
• चतुर्थ प्रेक्षण (घोंसलों की लड़ी): बबूल की एक-एक शाखा पर बया के लगभग 20 से 30 घोंसले किसी सुंदर माला की लड़ी की भाँति लटके हुए थे, जो एक अद्भुत प्राकृतिक दृश्य था।
• पंचम प्रेक्षण (शिल्पकला की प्रशंसा): लेखक बया चिड़िया की बेजोड़ निर्माण शैली, उसकी असाधारण बुद्धिमत्ता और घोंसला बनाने की अद्भुत कला से अत्यधिक चकित और प्रभावित थे।
• षष्ठ प्रेक्षण (काँटों में घर का रहस्य): बया का अन्य सभी पेड़ों को छोड़कर काँटेदार बबूल पर घोंसला बनाना उसकी चतुराई को सिद्ध करता है, क्योंकि कँटीली झाड़ियों के कारण शिकारी जानवर उसके बच्चों और अंडों तक आसानी से नहीं पहुँच सकते।
• सप्तम प्रेक्षण (भविष्य का यात्रा वृत्तांत): पत्र के अंत में लेखक स्पष्ट करते हैं कि यात्रा के अगले पड़ावों - ज्वालापुर, कनखल और हरिद्वार के मुख्य संस्मरणों का विस्तृत वर्णन वे आगामी अंकों (पत्रों) में करेंगे।
In simple words: लेखक ने बया चिड़िया की तारीफ की है कि वह बहुत समझदार और कुशल कारीगर होती है, जो अपने बच्चों को शिकारियों से बचाने के लिए बबूल के काँटेदार पेड़ों पर बेहद सुंदर घोंसले बनाती है।
Exam Tip: गद्यांश (Passage) पर आधारित विश्लेषणात्मक प्रश्नों के उत्तर लिखते समय गद्यांश के मुख्य संदेश (जैसे बया चिड़िया की सुरक्षात्मक चतुराई) को केंद्र में रखकर उत्तर दें।
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