NCERT Solutions Class 8 Hindi Chapter 05 कबीर के दोहे

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Detailed Chapter 05 कबीर के दोहे NCERT Solutions for Class 8 Hindi

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Class 8 Hindi Chapter 05 कबीर के दोहे NCERT Solutions PDF

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मेरी समझ से

Question (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौ पाँय। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय।।” इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है? • श्रम का महत्व • गुरु का महत्व • ज्ञान का महत्व • भक्ति का महत्व
(a) श्रम का महत्व
(b) गुरु का महत्व
(c) ज्ञान का महत्व
(d) भक्ति का महत्व
Answer: (b) गुरु का महत्व तथा (c) ज्ञान का महत्व
कबीरदास जी ने इस साखी में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गुरु से प्राप्त दिव्य ज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य को परमात्मा (गोविंद) का साक्षात्कार करने का अवसर प्राप्त होता है। इसी वजह से दोहे में गुरुदेव के अतुलनीय महत्व और सच्चे ज्ञान की श्रेष्ठता को उजागर किया गया है।
In simple words: इस दोहे में गुरु और ज्ञान को सबसे ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु के ज्ञान से ही हम ईश्वर को पहचान पाते हैं।

Exam Tip: परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर देते समय दोहे के केंद्रीय भाव के अनुसार सही विकल्पों का ही चुनाव करें।

 

Question (क) (2) “अति का भला न बोलना अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना अति की भली न धूप।।” इस दोहे का मूल संदेश क्या है? • हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है • बारिश और धूप से बचना चाहिए • हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है • हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए
(a) हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है
(b) बारिश और धूप से बचना चाहिए
(c) हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है
(d) हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए
Answer: (c) हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है
इस साखी के माध्यम से कबीर हमें यह समझाना चाहते हैं कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में मर्यादा का उल्लंघन करना अथवा किसी चीज़ की अति होना हानिकारक होता है। चाहे वह अत्यधिक बातें करना हो, बिल्कुल मौन धारण कर लेना हो, बहुत भारी वर्षा होना हो या फिर भीषण धूप पड़ना हो। इसलिए संतुलित और संयमित जीवन जीना ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।
In simple words: किसी भी काम को ज़रूरत से ज़्यादा करना नुकसान पहुँचाता है, इसलिए जीवन में हमेशा संतुलन बनाए रखना चाहिए।

Exam Tip: कबीर की साखियों में छिपे व्यावहारिक जीवन के संदेशों को स्पष्ट और संक्षिप्त वाक्यों में समझाएँ।

 

Question (क) (3) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर।।” यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है? • समय का सदुपयोग करना • दूसरों के काम आना • परिश्रम और लगन से काम करना • सभी के प्रति उदार रहना
(a) समय का सदुपयोग करना
(b) दूसरों के काम आना
(c) परिश्रम और लगन से काम करना
(d) सभी के प्रति उदार रहना
Answer: (b) दूसरों के काम आना
कबीरदास जी के अनुसार केवल पद, धन या सामाजिक स्तर में बड़ा हो जाना व्यर्थ है यदि हमारे पास परोपकार की भावना न हो। जैसे खजूर का पेड़ आकार में बहुत विशाल होता है, परंतु वह न तो राहगीरों को ठंडी छाँव दे पाता है और न ही उसके फल आसानी से तोड़े जा सकते हैं। अतः जीवन में दूसरों की सेवा करना और उनके काम आना ही सच्ची श्रेष्ठता है।
In simple words: बड़े होने का असली फायदा तभी है जब हम दूसरों की मदद कर सकें, ठीक वैसे ही जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा होकर भी किसी को छाँव नहीं दे पाता।

Exam Tip: उत्तर में परोपकार और लोक-कल्याण जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करने से आपके उत्तर की गुणवत्ता बढ़ती है।

 

Question (क) (4) “ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय। औरन को सीतल करे आपहुँ सीतल होय।।” इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है? • लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं • दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है • किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है • सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है
(a) लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं
(b) दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
(c) किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है
(d) सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है
Answer: (b) दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
कबीर के वचनों के अनुसार जब हम अपने अहंकार को त्यागकर मीठे स्वर में बात करते हैं, तो हमारे अपने मन का संताप और गुस्सा समाप्त हो जाता है। इसके साथ ही, हमारी मधुर बोली सुनने वाले के हृदय को भी शांति और सुख पहुँचाती है। इससे आपसी भाईचारा बढ़ता है और वातावरण शांतिपूर्ण बनता है।
In simple words: प्यार और मिठास से बात करने से हमारा अपना गुस्सा शांत होता है और दूसरों को भी बहुत खुशी मिलती है।

Exam Tip: मधुर वाणी का वक्ता और श्रोता दोनों पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव को उत्तर में स्पष्टता से दर्शाएँ।

 

Question (क) (5) “साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।।” इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? • सत्य और झूठ में कोई अंतर नहीं होता है • सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है • बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं • सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
(a) सत्य और झूठ में कोई अंतर नहीं होता है
(b) सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है
(c) बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं
(d) सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
Answer: (b) सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है
इस साखी से यह सिद्ध होता है कि जीवन में हमेशा सच की राह पर बने रहना किसी बहुत बड़ी और कठिन तपस्या से कम नहीं है। कबीर कहते हैं कि झूठ बोलना सबसे बड़ा अधर्म है, जबकि सच्चे और निष्कपट हृदय वाले मनुष्य के भीतर स्वयं ईश्वर निवास करते हैं। सत्यनिष्ठा ही मनुष्य के जीवन को सही दिशा देती है।
In simple words: सच्चाई के मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ी पूजा है। जो सच्चे दिल का होता है, भगवान सदा उसके साथ रहते हैं।

Exam Tip: सत्य की तुलना 'तप' और झूठ की तुलना 'पाप' से करने के कबीर के दृष्टिकोण को विस्तार से समझाएँ।

 

Question (क) (6) “निंदक नियरे राखिए आँगँन कुटी छवाय । बिन पानी साबुन बिना निर्मल करै सुभाय।।” यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है? • आलोचना से बचना चाहिए • आलोचकों को दूर रखना चाहिए • आलोचकों को पास रखना चाहिए • आलोचकों की निंदा करनी चाहिए
(a) आलोचना से बचना चाहिए
(b) आलोचकों को दूर रखना चाहिए
(c) आलोचकों को पास रखना चाहिए
(d) आलोचकों की निंदा करनी चाहिए
Answer: (c) आलोचकों को पास रखना चाहिए
कबीरदास जी हमें समझाते हैं कि अपनी कमियाँ बताने वाले लोगों को कभी भी खुद से दूर नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने सबसे नज़दीक रखना चाहिए। वे बिना किसी बाहरी साधन या साबुन-पानी के हमारी भूलों को दिखाकर हमारे आचरण और स्वभाव को स्वच्छ बनाने में हमारी सहायता करते हैं।
In simple words: हमारी गलतियाँ बताने वाले लोगों को पास रखना चाहिए क्योंकि वे बिना किसी खर्चे के हमारी कमियाँ सुधारने में मदद करते हैं।

Exam Tip: उत्तर लिखते समय निंदक की महत्ता और स्वभाव को निर्मल बनाने की प्रक्रिया को जोड़कर लिखें।

 

Question (क) (7) “साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाया।।” इस दोहे में ‘सूप’ किसका प्रतीक है? • मन की कल्पनाओं का • सुख-सुविधाओं का • विवेक और सूझबूझ का • कठोर और क्रोधी स्वभाव का
(a) मन की कल्पनाओं का
(b) सुख-सुविधाओं का
(c) विवेक और सूझबूझ का
(d) कठोर और क्रोधी स्वभाव का
Answer: (c) विवेक और सूझबूझ का
सूप का कार्य अनाज के अच्छे दानों को अपने पास रोककर निरर्थक कचरे और भूसी को अलग फेंकना होता है। कबीरदास जी कहते हैं कि एक सच्चे बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव भी सूप की तरह होना चाहिए, जो संसार की सभी अच्छी और सार्थक बातें ग्रहण कर ले तथा व्यर्थ की बुराइयों को तुरंत त्याग दे। इसलिए सूप यहाँ सही निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक है।
In simple words: सूप जैसे गंदगी बाहर निकालकर अच्छी चीज़ें रख लेता है, वैसे ही बुद्धिमान इंसान को बुरी बातें छोड़कर सिर्फ अच्छी बातें अपनानी चाहिए।

Exam Tip: सूप के व्यावहारिक उदाहरण और ज्ञानी मनुष्य के विवेक की समानता को उत्तर में स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।

 

Question (ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए की आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
Answer:
हमारी समूह चर्चा के दौरान सभी साथियों ने कबीर के दोहों पर अपने-अपने विचार इस प्रकार रखे:
रश्मि: पहले दोहे में मेरा उत्तर 'गुरु का महत्व' है, क्योंकि कबीर जी ने स्पष्ट किया है कि गुरु के ज्ञान के बिना हम कभी भगवान तक पहुँचने का मार्ग नहीं जान पाते।
अमन: दूसरे साखी के लिए मेरा मत 'संतुलन का महत्व' है, क्योंकि अत्यधिक बोलना या अत्यधिक चुप रहना दोनों ही जीवन के सामंजस्य को नष्ट कर देते हैं।
पूजा: तीसरे साखी में खजूर के वृक्ष का सटीक उदाहरण देकर यह समझाया गया है कि केवल धनवान या बड़े होना काफी नहीं है, दूसरों के काम आना ही बड़प्पन है।
रोहन: चौथे दोहे के विषय में मेरा मानना है कि मधुर वाणी बोलने से हमारे मन को गहरी शांति मिलती है और समाज में आपसी कटुता भी खत्म होती है।
रश्मि: पाँचवें दोहे में सत्य के मार्ग को सबसे कठिन साधना बताया गया है, जो मनुष्य के अंतर्मन को उज्ज्वल बनाती है।
अमन: छठे साखी के अनुसार आलोचक हमारे सच्चे हितैषी होते हैं जो बिना किसी शुल्क के हमारा चरित्र सुधारते हैं।
पूजा: अंतिम दोहे में सूप को विवेक का प्रतीक माना गया है, क्योंकि वह केवल ज्ञानवर्धक बातें स्वीकार करता है और निरर्थक बातों को छोड़ देता है।
In simple words: चर्चा के दौरान हमने पाया कि कबीर के दोहे हमें गुरु-भक्ति, परोपकार, मीठी बोली, सत्य, आलोचना का सम्मान और विवेकशील बनने की सीख देते हैं।

Exam Tip: वाद-विवाद या परिचर्चा आधारित प्रश्नों के उत्तर में सभी सहपाठियों के अलग-अलग तर्कों को स्पष्टता से शामिल करें।

 

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मिलकर करें मिलान

Question (क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ में दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

क्रम/स्तंभ 1स्तंभ 2
1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय।1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है।
2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।2. बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए।
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं।
4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।4. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है।
5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।5. जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है।
6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।6. हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके।
7. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।7. विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है।
8. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं।


Answer:

 

क्रम/स्तंभ 1स्तंभ 2 (सही मिलान)
1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय।3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं।
2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।5. जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है।
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।6. हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके।
4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं।
5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।7. विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है।
6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।4. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है।
7. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है।
8. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।2. बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए।

In simple words: प्रत्येक दोहे की पंक्ति को उसके सही अर्थ और कबीर जी के व्यावहारिक उपदेश के साथ मिलाया गया है।

 

 

Exam Tip: परीक्षा में मिलान वाले प्रश्नों के उत्तर सीधे आमने-सामने सही उत्तर लिखकर प्रस्तुत करें, इससे कॉपी जाँचने वाले को आसानी होती है।

 

Question (ख) नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए-

क्रम/स्तंभ 1स्तंभ 2
1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय।1. बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।
2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।2. औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।3. जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।
4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।4. सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाया।।
5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।5. पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।6. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
7. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।7. जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
8. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।8. बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।


Answer:

 

क्रम/स्तंभ 1स्तंभ 2 (सही मिलान)
1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय।8. बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।6. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।2. औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।1. बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।
5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।4. सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाया।।
6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।7. जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
7. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।5. पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
8. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।3. जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।

In simple words: कबीरदास जी के मूल दोहों की पहली और दूसरी पंक्तियों को यहाँ सही क्रम में जोड़ दिया गया है।

 

 

Exam Tip: दोहों की पंक्तियों को आपस में जोड़ने के लिए दोहे कंठस्थ होना आवश्यक है, अतः नियमित रूप से दोहों का सस्वर पाठ करें।

 

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पंक्तियों पर चर्चा

Question (क) “कबिरा मन पंछी भया भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय”
Answer: कबीरदास जी के अनुसार मनुष्य का चंचल मन एक उड़ते हुए पक्षी की तरह होता है, जो हर क्षण अपनी इच्छा के अनुसार भटकता रहता है। इस मन पर नियंत्रण पाना बहुत कठिन है। मनुष्य जैसी संगति में बैठता है, वैसा ही असर उसके विचारों और कार्यों पर दिखाई देता है। यदि हम दुर्जनों के साथ रहेंगे तो हमें अंततः कष्ट ही प्राप्त होगा और यदि हम सज्जनों के साथ समय बिताएँगे तो हमारा आचरण और जीवन बेहतर बनेगा। संगति का प्रभाव हमारे कर्मों का फल तय करता है।
In simple words: हमारा चंचल मन पक्षी की तरह जहाँ चाहे वहाँ उड़ जाता है। हम जैसी संगति में रहेंगे, हमें जीवन में वैसा ही फल मिलेगा।

Exam Tip: संगति के प्रभाव को समझाने के लिए मन की तुलना पक्षी से करने वाले रूपक को स्पष्टता से लिखें।

 

Question (ख) “साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप । जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।।”
Answer: कबीर कहते हैं कि सत्य की राह पर चलना और सत्यनिष्ठ जीवन जीना संसार की सबसे बड़ी तपस्या है, जबकि असत्य का सहारा लेना सबसे बड़ा अपराध या पाप है। जिस मनुष्य के हृदय में कपट या द्वेष नहीं होता और जो सदैव सच बोलता है, उसके निर्मल हृदय में साक्षात् गुरुदेव और ईश्वर का वास होता है। इसलिए सत्य की राह पर चलने वाले को किसी भी बाहरी दिखावे या पाखंड की आवश्यकता नहीं होती।
In simple words: सच बोलना सबसे बड़ी तपस्या है और झूठ बोलना पाप। सच्चे हृदय वाले लोगों के दिल में भगवान स्वयं रहते हैं।

Exam Tip: कबीर के अनुसार 'साँच' और 'गुरु की उपस्थिति' के आपसी संबंध को उत्तर में मुख्य बिंदु के रूप में लिखें।

 

सोच-विचार के लिए

Question (क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौ पाँय।” इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
Answer: हाँ, मैं कबीरदास जी के इस विचार से पूरी तरह सहमत हूँ। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान की ज्योति की ओर ले जाते हैं। गुरु के बिना हम अज्ञानी बने रहते और हमें ईश्वर (गोविंद) की पहचान भी कभी नहीं हो पाती। वे ही हमें जीवन को सार्थक बनाने की दिशा, संस्कार और उद्देश्य प्रदान करते हैं। इसलिए ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाने वाले गुरु का स्थान ईश्वर से भी श्रेष्ठ और पूजनीय है।
In simple words: हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ क्योंकि गुरु ही हमें ज्ञान देकर भगवान को पहचानने और उन तक पहुँचने का रास्ता बताते हैं।

Exam Tip: गुरु को ईश्वर से श्रेष्ठ मानने के पीछे कबीर के 'मार्गदर्शन' वाले तर्क को मुख्य रूप से स्पष्ट करें।

 

Question (ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।” इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए।
Answer: कबीरदास जी इस साखी से यह संदेश देते हैं कि केवल धन-दौलत, ऊँचा पद या सामाजिक रूतबा हासिल कर लेने से कोई व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं बन जाता। जैसे खजूर का पेड़ बहुत लंबा और ऊँचा होता है, परंतु वह न तो किसी थके हुए यात्री को ठंडी छाँव दे पाता है और न ही उसके फल आसानी से तोड़े जा सकते हैं। एक सच्चे श्रेष्ठ और समृद्ध व्यक्ति में दूसरों के प्रति दया की भावना, विनम्रता, परोपकार का भाव और संकट में पड़े लोगों की मदद करने की तत्परता होनी चाहिए।
In simple words: केवल ऊँचा या अमीर होना बड़प्पन नहीं है। मनुष्य को विनम्र और मददगार होना चाहिए, तभी उसका बड़ा होना सचमुच सार्थक माना जाता है।

Exam Tip: खजूर के वृक्ष के रूपक का विश्लेषण करते हुए परोपकार और विनम्रता जैसे नैतिक मूल्यों पर आधारित उत्तर लिखें।

 

Question (ग) “ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।” क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? उत्तर लिखिए।
Answer: हाँ, मैं इस बात को पूरी तरह मानता हूँ कि हमारे मुख से निकले वचनों का प्रभाव दूसरों के साथ-साथ हमारे अपने ऊपर भी पड़ता है। जब हम अत्यंत विनम्रता, प्रेम और आदर के साथ बात करते हैं, तो सामने वाले का मन तो प्रसन्न होता ही है, साथ ही हमारे भीतर भी एक अनोखी शांति और सकारात्मकता का संचार होता है। इसके विपरीत, कड़वे और कठोर शब्द न केवल दूसरों को आहत करते हैं, बल्कि हमारे स्वयं के मन को भी अशांत, क्रोधित और दुखी कर देते हैं।
In simple words: हाँ, मीठा बोलने से सुनने वाले के साथ-साथ हमारे अपने मन को भी खुशी और गहरी शांति मिलती है, जबकि कड़वे शब्द हमें भी अशांत करते हैं।

Exam Tip: मधुर वाणी के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दोनों पक्षों को संतुलित वाक्यों में प्रस्तुत करें।

 

Question (घ) आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।
Answer: एक बार मेरे एक घनिष्ठ मित्र से कोई बड़ी भूल हो गई थी, जिस पर मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उसे काफी कड़वे और तीखे शब्द कह दिए। इससे वह बहुत दुखी हुआ और उसने मुझसे बात करना बंद कर दिया। बाद में मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मैंने शांत स्वर में उससे प्यार से बात की, अपनी भूल स्वीकार कर माफी मांगी। मेरी मीठी बातों ने उसका मन पिघला दिया और हमारी दोस्ती फिर से गहरी हो गई। इससे मैंने सीखा कि शांत और मीठी वाणी बिगड़े रिश्तों को भी जोड़ देती है।
In simple words: एक बार जब मैंने गुस्से में अपने दोस्त को कड़वा बोला तो वह दुखी हो गया, लेकिन बाद में प्यार से बात करने और माफी माँगने पर सब ठीक हो गया।

Exam Tip: व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित प्रश्नों में एक छोटा और तार्किक उदाहरण देकर अपनी बात को स्पष्ट करें।

 

Question (ड) “जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय।।” हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।
Answer: हम अपना समय जिन लोगों के साथ व्यतीत करते हैं, उनके स्वभाव और आदतों का हमारे आचरण पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यदि हम अच्छे, सकारात्मक और मेहनती मित्रों की संगति में रहेंगे, तो हमारे भीतर भी अच्छे गुणों का विकास होगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र पढ़ाई में रुचि रखने वाले बच्चों के साथ रहता है, तो वह भी समय पर काम करना और मन लगाकर पढ़ना सीख जाता है। इसके विपरीत, बुरी संगति हमें अनुशासनहीनता और गलत आदतों की ओर धकेल देती है।
In simple words: अच्छे लोगों के साथ रहने से हम अच्छी बातें और सफलता सीखते हैं, जबकि बुरे लोगों की संगति हमारा व्यवहार बिगाड़ देती है।

Exam Tip: संगति के प्रभाव को समझाने के लिए विद्यार्थी जीवन से जुड़ा कोई व्यावहारिक उदाहरण देना बहुत उपयोगी होता है।

 

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दोहे की रचना

Question (क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं: (1) एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं। (2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है। (3) लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है एक ही पंक्ति में आए हैं। (4) एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग किया गया है। (5) किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है। (6) किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है। (7) किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है। (8) उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।
Answer:
(1) एक ही अक्षर से शुरू होने वाले दो या दो से अधिक शब्द:
• “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाँय” में 'गुरु गोविंद'।
• “बिन पानी साबुन बिना” में 'बिन पानी बिना' ('ब' वर्ण की आवृत्ति)।
• “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप” में 'साँच' और 'तप' (या 'बराबर' और 'बराबर')।

(2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है:
• “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाँय” में 'दोऊ' (दो और दो)।
• “सार सार को गहि रहै” में 'सार सार' शब्द दोबारा आया है।

(3) लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर है:
• “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप” में 'साँच' और 'पाप'।
• “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय” में 'मन' और 'पंछी'।

(4) एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग:
• “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप” में 'साँच' (सत्य) और 'झूठ' (असत्य) एक-दूसरे के विपरीत हैं।
• “सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाया” में 'सार' (सारगर्भित बात) और 'थोथा' (निरर्थक बात) विलोम शब्द हैं।

(5) किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है:
• “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर” में मनुष्य के बड़प्पन की तुलना खजूर के पेड़ से की गई है।
• “साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय” में साधु के परोपकारी स्वभाव की तुलना सूप से की गई है।

(6) किसी को कोई अन्य नाम (रूपक) दिया गया है:
• “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय” में हमारे मन को 'पंछी' (पक्षी) का नाम दिया गया है।

(7) किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग (काव्यात्मक) है:
• “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप” में मानक वर्तनी 'चुप' के स्थान पर 'चूप' का प्रयोग किया गया है।

(8) उदाहरण द्वारा बात को समझाया गया है:
• “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर” में खजूर के वृक्ष का उदाहरण देकर बड़प्पन का वास्तविक अर्थ समझाया गया है।
• “साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय” में सूप का उदाहरण देकर एक सज्जन व्यक्ति के विवेक को दर्शाया गया है।
In simple words: इन दोहों में कबीरदास जी ने उपमा, अनुप्रास, रूपक अलंकारों और सुंदर लोक-उदाहरणों का उपयोग करके अपनी बात को बहुत प्रभावशाली बनाया है।

Exam Tip: काव्यात्मक विशेषताओं (अलंकार, वर्तनी बदलाव) को पहचानकर लिखने का नियमित अभ्यास करें, इससे भाषा पर आपकी पकड़ मज़बूत होगी।

 

Question (ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
Answer: हमारे समूह ने "दोहे की रचना" के भाग (क) में जो सूची तैयार की थी, उसे हमने कक्षा के सभी विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया। हमने उन्हें समझाया कि किस प्रकार कबीरदास जी ने अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकारों तथा सरल घरेलू उदाहरणों के माध्यम से दोहों को अत्यंत आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनाया है। कक्षा के अन्य समूहों ने भी इसकी सराहना की।
In simple words: हमने अपने साथियों के साथ मिलकर बनाई हुई सूची को पूरी क्लास के साथ शेयर किया और उन्हें दोहों की काव्यगत खूबियाँ समझाईं।

Exam Tip: समूह गतिविधियों की प्रस्तुति को हमेशा आत्मविश्वास और सकारात्मक संवाद शैली में प्रस्तुत करें।

 

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अनुमान और कल्पना से

Question (क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौ पाँय।” • यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों? • यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?
Answer:
• यदि मेरे सामने गुरु और गोविंद (ईश्वर) दोनों एक साथ खड़े होते, तो मैं सबसे पहले अपने आदरणीय गुरु के चरण स्पर्श करता। इसका कारण यह है कि गुरु के दिए ज्ञान के बिना मैं भगवान के बारे में कभी जान ही नहीं पाता। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जिन्होंने मुझे ईश्वर की ओर जाने का सही मार्ग दिखाया।
• यदि इस संसार में कोई शिक्षक या गुरु न होता, तो पूरी मानव जाति अज्ञान के अंधकार में भटकती रहती। हम सही-गलत, उचित-अनुचित और सत्य-असत्य का भेद कभी नहीं समझ पाते। समाज में नैतिक मूल्यों और वैज्ञानिक प्रगति का विकास पूरी तरह रुक जाता और मानव जाति सभ्य नहीं बन पाती।
In simple words: अगर भगवान और गुरु दोनों साथ हों तो मैं पहले गुरु के पैर छूता, क्योंकि उन्होंने ही मुझे भगवान के बारे में सिखाया। बिना गुरु के दुनिया में अज्ञान छा जाता।

Exam Tip: इस तरह के काल्पनिक और नैतिक मूल्य वाले प्रश्नों के उत्तर में गुरु की महत्ता को केंद्र में रखकर अपनी बात स्पष्ट करें।

 

Question (ख) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” • यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? • यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं? • आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?
Answer:
व्यक्ति का स्वभाव: जो व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है, लोग उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते और अक्सर उसे वाचाल मानकर अनदेखा करते हैं। इसके विपरीत, जो व्यक्ति हर समय चुप रहता है, वह अपनी भावनाएँ दूसरों के सामने खुलकर व्यक्त नहीं कर पाता, जिससे उसका मानसिक तनाव बढ़ता है और वह अकेलापन महसूस करने लगता है।
वर्षा का प्रभाव: यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक हो तो बाढ़ आ जाती है, जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं और जान-माल का भारी नुकसान होता है। इसके उलट, यदि वर्षा बहुत कम हो तो सूखा पड़ जाता है, जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा होता है और खेती बर्बाद हो जाती है।
मोबाइल और मल्टीमीडिया का उपयोग: मोबाइल का बहुत अधिक उपयोग करने से हमारी आँखों की रोशनी कमजोर हो जाती है और सिरदर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं। इससे हमारा ध्यान पढ़ाई, खेलकूद और समाज से हटकर केवल स्क्रीन पर सिमट जाता है, जो मानसिक विकास को रोकता है।
In simple words: ज़रूरत से ज़्यादा बोलना या बिल्कुल चुप रहना दोनों ही गलत हैं। वैसे ही बहुत ज़्यादा बारिश से बाढ़ आती है और कम से सूखा पड़ता है। अत्यधिक मोबाइल चलाना भी सेहत और पढ़ाई खराब करता है।

Exam Tip: प्रत्येक बिंदु (वाणी, वर्षा, मोबाइल) पर आधारित प्रभाव को अलग-अलग पैराग्राफ में सुस्पष्ट शीर्षकों के साथ लिखें।

 

Question (ग) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” • झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? • कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?
Answer:
झूठ बोलने का प्रभाव: जब हम बार-बार झूठ बोलते हैं, तो धीरे-धीरे लोग हम पर भरोसा करना पूरी तरह बंद कर देते हैं। एक झूठ को छुपाने के लिए हमें कई और झूठ बोलने पड़ते हैं, जिससे हमारे मन में हमेशा पकड़े जाने का भय बना रहता है और हमारी मानसिक शांति नष्ट हो जाती है।
गलत उत्तर पर अंक मिलने पर: यदि शिक्षक गलती से मेरे किसी गलत उत्तर के लिए मुझे अंक दे देते हैं, तो मैं पूरी ईमानदारी के साथ उनके पास जाऊँगा और उन्हें सच बताकर अपने अंक ठीक करने का आग्रह करूँगा। ऐसा मैं इसलिए करूँगा क्योंकि अनुचित तरीके से प्राप्त अंक वास्तविक सफलता नहीं हैं और जीवन में ईमानदारी ही सबसे बड़ा गुण है। इससे मुझे अपनी कमजोरी का पता चलेगा और मैं आगे बेहतर तैयारी कर सकूँगा।
In simple words: झूठ बोलने से हमारा भरोसा खत्म होता है और मन में डर बना रहता है। अगर टीचर गलती से गलत जवाब के नंबर दे दें, तो हमें ईमानदारी से सच बता देना चाहिए।

Exam Tip: नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा जैसे शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question (घ) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।” • यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं? • क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो? अनुमान लगाइए।
Answer:
मधुर वाणी का प्रभाव: यदि संसार के सभी लोग मीठा और शांत स्वर में बात करना शुरू कर दें, तो समाज से आपसी लड़ाई-झगड़े, मनमुटाव, नफरत और तनाव पूरी तरह समाप्त हो जाएँगे। चारों ओर प्रेम, सहयोग और भाईचारे का वातावरण विकसित होगा और लोग एक-दूसरे का अधिक सम्मान करेंगे।
कटु वचन बोलने की परिस्थिति: हाँ, जीवन में कुछ ऐसी परिस्थितियाँ हो सकती हैं जहाँ कड़े शब्द बोलना आवश्यक हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति बहुत बड़ा गलत काम या अपराध कर रहा हो और उसे तुरंत रोकना ज़रूरी हो। इसके अलावा, किसी को बुराई या गलत रास्ते पर जाने से बचाने के लिए भी कई बार डांटना और कड़े शब्दों का प्रयोग करना अनिवार्य हो जाता है।
In simple words: मीठी बोली से दुनिया से नफरत और झगड़े खत्म हो जाएँगे। परंतु, किसी को गलत काम करने से रोकने के लिए कभी-कभी कड़े शब्दों की आवश्यकता होती है।

Exam Tip: व्यावहारिक जीवन को ध्यान में रखते हुए संतुलित और तार्किक दृष्टिकोण से अपना उत्तर लिखें।

 

Question (ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” • यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे? • खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए। • आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मॉनिटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?
Answer:
बड़प्पन का अर्थ समझाना: मैं उस अभिमानी व्यक्ति को खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर समझाऊँगा कि केवल ऊँचे पद पर होने या अत्यधिक धनवान होने से कोई श्रेष्ठ नहीं बनता। सच्चा बड़प्पन दूसरों की सहायता और सेवा करने में है। यदि आपकी संपत्ति या शक्ति से किसी जरूरतमंद का भला नहीं होता, तो आपका बड़ा होना व्यर्थ है।
ऊँचे वृक्षों की उपयोगिता: खजूर और नारियल के वृक्ष पूरी तरह उपयोगी होते हैं। खजूर से हमें स्वादिष्ट फल मिलते हैं और नारियल से पौष्टिक पानी व गरी प्राप्त होती है। इनके पत्तों और लकड़ियों से झाड़ू, चटाई, टोकरियाँ और घरों की छतें बनाई जाती हैं। इनकी जटाओं से मजबूत रस्सियाँ भी बनती हैं।
मॉनिटर के गुण: कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए मैं ऐसे छात्र पर ध्यान दूँगा जो अनुशासित रहता हो, सभी सहपाठियों के साथ विनम्रतापूर्वक व्यवहार करता हो, अपनी ज़िम्मेदारियों को समय पर निभाता हो और अध्यापकों व सहपाठियों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहता हो।
In simple words: दूसरों की भलाई करने वाला ही असली बड़ा इंसान होता है। खजूर और नारियल के पेड़ फल, पत्ते और लकड़ी देकर बहुत उपयोगी साबित होते हैं। क्लास का मॉनिटर मेहनती और मददगार होना चाहिए।

Exam Tip: तीनों भागों का उत्तर स्पष्ट रूप से अलग-अलग उप-शीर्षकों (bullets) के साथ क्रमवार दें।

 

Question (च) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।” • यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा? • यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?
Answer:
कमियाँ जानने के लाभ: यदि कोई व्यक्ति हमें हमारी कमियाँ बताता है, तो हमें अपने भीतर सुधार करने का एक बेहतरीन मौका मिलता है। इससे हम अपनी गलत आदतों को बदलकर खुद को एक बेहतर, सभ्य और समझदार इंसान बना सकते हैं।
गलतियाँ न बताने के नुकसान: यदि समाज में कोई किसी की गलतियाँ नहीं बताएगा, तो लोग कभी जान ही नहीं पाएँगे कि वे कहाँ गलत हैं। इसके परिणामस्वरूप समाज में अनुशासनहीनता, अपराध और गलत आदतें बढ़ती चली जाएँगी और सामाजिक सुधार पूरी तरह रुक जाएगा।
In simple words: कमियाँ बताने वाले लोग हमारा भला करते हैं क्योंकि वे हमें खुद को सुधारने का अवसर देते हैं। अगर कोई किसी की गलती नहीं बताएगा, तो दुनिया में कोई सुधार नहीं होगा।

Exam Tip: निंदक या आलोचक की उपयोगिता को सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास करें।

 

Question (छ) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” • कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएंगे? • यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer:
सूप जैसी विशेषता आने पर: यदि मेरे भीतर सूप जैसी विवेकशीलता आ जाए, तो मैं केवल अच्छी, सकारात्मक और ज्ञान की बातों को ही अपने जीवन में अपनाऊँगा तथा व्यर्थ की अफवाहों, बुराइयों और नकारात्मकता को तुरंत छोड़ दूँगा। इससे मेरा मन हमेशा साफ रहेगा और मैं सही समय पर सही निर्णय ले सकूँगा।
बिना सोचे-समझे स्वीकार करने के प्रभाव: यदि हम बिना सोचे-समझे दूसरों की हर बात मान लें, तो लोग हमें आसानी से धोखा दे सकते हैं और गुमराह कर सकते हैं। हम गलत संगति या गलत रास्तों पर चल सकते हैं, जिससे हमारा समय, धन और भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।
In simple words: सूप जैसी बुद्धि होने पर हम केवल अच्छी बातें सीखेंगे और बुराइयों को तुरंत त्याग देंगे। बिना सोचे-समझे सब मानने से हम गलत रास्ते पर जा सकते हैं।

Exam Tip: 'सूप के स्वभाव' को मानव जीवन की 'निर्णय क्षमता और विवेक' से जोड़कर स्पष्ट उत्तर लिखें।

 

Question (ज) कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” • यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों? • संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
Answer:
मन का उड़ना: यदि मेरा मन सचमुच एक स्वतंत्र पक्षी की तरह उड़ सकता, तो मैं उसे हिमालय की ऊँची, शांत और बर्फ़ीली चोटियों तथा निर्मल नदियों के किनारे ले जाता। वहाँ की शांत, प्रदूषण रहित और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मेरे मन को सच्ची शांति और अत्यधिक खुशी मिलती।
संगति का प्रभाव: संगति का हमारे जीवन और चरित्र पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छे मित्रों के साथ रहने से हमारे भीतर अच्छे संस्कार, पढ़ने की आदत और अनुशासन विकसित होते हैं। वहीं दूसरी ओर, बुरी संगति हमें असभ्य, आलसी बनाती है और हमारा भविष्य अंधकार की ओर ले जाती है।
In simple words: शांत और प्राकृतिक जगहों पर जाने से मन को बहुत खुशी और सुकून मिलता है। हम जैसी संगति करेंगे, वैसे ही हमारे विचार और आदतें बनेंगी।

Exam Tip: कल्पनाशीलता पर आधारित प्रश्नों में अपनी पसंद का कारण स्पष्ट और तार्किक रूप से लिखें।

 

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वाद-विवाद

Question (क) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।” इस दोहे का आज के समय में क्या महत्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।
Answer: कबीरदास जी का यह दोहा आज के आधुनिक और डिजिटल युग में भी अत्यंत प्रासंगिक है। विशेषकर आज के सोशल मीडिया के दौर में, जहाँ लोग बिना सोचे-समझे लगातार अपनी टिप्पणियाँ साझा करते रहते हैं, यह साखी हमें अपनी वाणी और विचारों पर आत्म-नियंत्रण रखने की सीख देती है। यह हमें संदेश देता है कि जिस प्रकार सीमा से अधिक भारी वर्षा बाढ़ लाती है और अत्यधिक तेज़ धूप सूखा लाती है, उसी प्रकार बहुत अधिक बोलना या बिल्कुल चुप बैठना दोनों ही जीवन के सामंजस्य को नष्ट करते हैं। जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और संयम बनाए रखना ही हितकर है।
In simple words: आज के समय में यह दोहा सिखाता है कि सोशल मीडिया पर कुछ भी बोलने से पहले सोचना चाहिए। जीवन के हर काम में संतुलन रखना ही सबसे अच्छा है।

Exam Tip: साखी की प्रासंगिकता को आज के डिजिटल समाज और सोशल मीडिया के संदर्भ से जोड़कर लिखें।

 

Question (ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे, जैसे- • पक्ष – वाणी पर संयम रखना आवश्यक है। • विपक्ष – अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।
Answer:
पक्ष (वाणी पर संयम रखने के समर्थन में):
• हमारी बातचीत में संयम और मर्यादा का होना बेहद ज़रूरी है।
• बिना सोचे-समझे बहुत अधिक बोलने से अक्सर आपसी मतभेद, विवाद और कड़वाहट पैदा होती है जो दूसरों को ठेस पहुँचाती है।
• जब हम संतुलित और मीठा बोलते हैं, तो हमारी बातों की गंभीरता और सामाजिक सम्मान दोनों बढ़ जाते हैं।
• आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन विवादों और साइबर-बुलिंग से बचने के लिए भी शांत और नियंत्रित वाणी बहुत आवश्यक है।

विपक्ष (अत्यधिक चुप रहने के विरोध में):
• हर समय पूरी तरह मौन या चुप रहना भी सही निर्णय नहीं है।
• यदि समाज में कहीं कुछ गलत, अन्याय या अत्याचार हो रहा हो, तो उसके खिलाफ अपनी आवाज़ उठाना हमारा कर्तव्य है; वहाँ शांत रहना कायरता माना जाएगा।
• बहुत अधिक चुप रहने के कारण हम अपनी सही भावनाओं और रचनात्मक विचारों को दूसरों के सामने प्रकट नहीं कर पाते, जिससे हमारा मानसिक तनाव बढ़ता है।
• आवश्यकता पड़ने पर दूसरों को सही रास्ता दिखाने या अपनी निर्दोषता साबित करने के लिए बोलना अत्यंत अनिवार्य हो जाता है।
In simple words: पक्ष का मानना है कि सोच-समझकर बोलने से आपसी झगड़े टल जाते हैं। विपक्ष का कहना है कि अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने और अपनी बात रखने के लिए बोलना ज़रूरी है।

Exam Tip: वाद-विवाद के उत्तरों को हमेशा 'पक्ष' और 'विपक्ष' के अलग-अलग उप-शीर्षकों के अंतर्गत स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें।

 

Question (ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए।
Answer:
मधुर व नियंत्रित वाणी के पक्ष में तर्क:
• इससे हमारी बातों की गंभीरता और आदर बढ़ता है।
• बातचीत और व्यवहार में मधुरता व शांति बनी रहती है।
• लोग हमारी बातों को ध्यानपूर्वक और रुचि से सुनते हैं।
• शांत और संयमित स्वभाव गंभीर विवादों को टालने में सहायक होता है।

अत्यधिक बोलने या बिल्कुल चुप रहने के विपक्ष में तर्क:
• लगातार निरर्थक बातें करने से लोग हमारी बातों पर ध्यान देना बंद कर देते हैं।
• बिना सोचे-समझे बोलने से अनावश्यक मनमुटाव और शत्रुता बढ़ने की संभावना रहती है।
• कड़वे शब्द दूसरों के आत्मसम्मान और भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाते हैं।
• बिल्कुल मौन रहने से कई बार बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं और लोग हमें कमजोर समझने लगते हैं।
In simple words: मीठा और कम बोलने से सम्मान मिलता है और झगड़े नहीं होते, जबकि बहुत ज़्यादा बोलने से गलतियाँ होती हैं और बिल्कुल चुप रहने से लोग हमारा शोषण कर सकते हैं।

Exam Tip: परीक्षा में तर्कों को अंकवार (bullet points) प्रस्तुत करने से आपका उत्तर अधिक प्रभावशाली और स्पष्ट दिखाई देता है।

 

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शब्द से जुड़े शब्द

Question नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और मित्रों के साथ चर्चा कीजिए-
Answer:
कबीरदास जी के जीवन, उनके दर्शन और उनके दोहों से जुड़े प्रमुख शब्द निम्नलिखित हैं:
वाणी / बानी: मधुर और अहंकार रहित वचनों का महत्व दर्शाने के लिए।
सत्य / साँच: सच्चाई के मार्ग को सबसे कठिन साधना और ईश्वर का रूप मानने के लिए।
गुरु: अज्ञानता दूर कर ईश्वर तक पहुँचाने वाले सबसे बड़े मार्गदर्शक।
भक्ति: आडंबर और दिखावे से दूर, सच्चे मन से की जाने वाली ईश्वर साधना।
संत / साधु: सज्जन, उदार और विवेकशील पुरुषों के गुणों को बताने के लिए।
समता / समानता: बिना किसी जाति-भेद या अमीर-गरीब के अंतर के सभी इंसानों को एक समान समझने की सीख।
In simple words: कबीर जी के दोहों में गुरु, सच्चाई, मीठी बोली, भक्ति, सज्जनता और सबको एक समान समझने की बातों को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

Exam Tip: इन मुख्य शब्दों को कबीर के विचारों के रूप में याद रखें, जो उनके दोहों के अर्थ को गहराई से समझने में मदद करते हैं।

 

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दोहे और कहावतें

Question “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।” इस दोहे को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह बात तो हमने पहले भी अनेक बार सुनी है । यह दोहा इतना अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय है कि इसकी दूसरी पंक्ति लोगों के बीच कहावत – ‘जैसा संग वैसा रंग’ की तरह प्रयुक्त होती है । कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं । इसमें सामान्यतः जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप में बता दिया जाता है । • अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।
Answer:
जीवन के गहरे अनुभवों को समेटे हुए कुछ प्रमुख हिंदी कहावतें और उनके सटीक वाक्य प्रयोग इस प्रकार हैं:

1. कहावत: जैसा देश वैसा भेष
*वाक्य प्रयोग:* सुरेश जब उच्च शिक्षा के लिए विदेश गया, तो उसने वहाँ के लोगों के अनुसार अपनी वेशभूषा और दिनचर्या बदल ली; सच ही कहा गया है कि जैसा देश वैसा भेष रखना ही बुद्धिमानी है।

2. कहावत: बूँद-बूँद से घड़ा भरता है
*वाक्य प्रयोग:* रीता ने अपनी पॉकेट मनी से रोज़ थोड़े-थोड़े पैसे बचाए और साल के अंत में उसने एक बहुत अच्छी साइकिल खरीद ली। सच है कि बूँद-बूँद से ही घड़ा भरता है।

3. कहावत: जिसकी लाठी उसकी भैंस
*वाक्य प्रयोग:* गाँव के शक्तिशाली ज़मींदार ने एक गरीब किसान की उपजाऊ ज़मीन पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा कर लिया और कोई कुछ न कर सका, इसे ही कहते हैं - जिसकी लाठी उसकी भैंस।

4. कहावत: लालच बुरी बला है
*वाक्य प्रयोग:* अधिक पैसे कमाने के लालच में सोहन ने अपनी सारी जमापूंजी एक फर्जी योजना में लगा दी और बाद में उसे बहुत नुकसान उठाना पड़ा; तब उसे समझ आया कि लालच सचमुच बुरी बला है।

5. कहावत: एक पंथ दो काज
*वाक्य प्रयोग:* मैं बाज़ार से अपनी पढ़ाई के लिए पुस्तकें लेने गया था और वहाँ से लौटते समय दादी माँ के लिए दवाइयाँ भी लेता आया, इसे कहते हैं एक पंथ दो काज होना।
In simple words: कहावतें हमारे बड़े-बुजुर्गों के अनुभवों की बातें होती हैं। इन्हें बातचीत में इस्तेमाल करने से हमारी बात अधिक प्रभावी और सुंदर लगती है।

Exam Tip: परीक्षा में कहावतों का वाक्य प्रयोग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वाक्य बहुत सरल हो और उससे कहावत का अर्थ पूरी तरह स्पष्ट होता हो।

 

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सबकी प्रस्तुति

Question पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए- • गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में। • भाव-नृत्य प्रस्तुति। • कविता पाठ करना। • संगीत के साथ प्रस्तुत करना। • अभिनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से में आकर कुछ गलत कह देता है लेकिन दूसरा दोस्त उसे समझाता है कि मधुर भाषा का कितना प्रभाव पड़ता है। (ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोल।)
Answer:
हमारे समूह ने कबीरदास जी के प्रसिद्ध दोहे “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय” को एक लघु नाटक (अभिनय) के माध्यम से कक्षा के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्णय लिया:

दृश्य 1 (खेल का मैदान): नाटक की शुरुआत में दो छात्र खेल के मैदान में हारने पर आपस में बहस करने लगते हैं। एक छात्र गुस्से में आकर अपने साथी को बहुत कड़वे और बुरे शब्द बोल देता है, जिससे खेल रुक जाता है और आपसी संबंध बिगड़ने लगते हैं।
दृश्य 2 (मित्र का समझाना): तभी दूसरा समझदार मित्र वहाँ आता है। वह दोनों को शांत करता है और प्यार से समझाता है कि गुस्सा केवल हमारा ही नुकसान करता है। वह कबीर का दोहा सस्वर गाकर सुनाता है कि मीठी बोली बोलने से न केवल हमारा मन शांत रहता है बल्कि सुनने वाले को भी असीम सुख मिलता है।
दृश्य 3 (सुधार और तालियाँ): कड़वे शब्द बोलने वाला छात्र अपनी गलती स्वीकार कर अपने साथी से गले मिलता है। पूरी कक्षा इस नाट्य प्रस्तुति की सराहना करते हुए तालियाँ बजाती है।
In simple words: हमने नाटक के माध्यम से दिखाया कि कैसे गुस्से में कड़वा बोलने से काम और रिश्ते दोनों खराब होते हैं, और मीठी वाणी से बिगड़ी बातें भी बन जाती हैं।

Exam Tip: गतिविधि या अभिनय आधारित प्रश्नों के उत्तर में प्रस्तुति के प्रमुख दृश्यों और उनके पीछे की सीख को संक्षिप्त रूप में लिखें।

 

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आपकी बात

Question (क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय।” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।
Answer: हाँ, मेरे जीवन में मेरे आदरणीय पिताजी ही वह मार्गदर्शक व्यक्ति हैं जिन्होंने मुझे हमेशा सही दिशा दिखाई है। जब भी मैं पढ़ाई या किसी अन्य समस्या को लेकर दुविधा में होता हूँ, तो वे मेरे पास बैठकर मुझे सही और गलत का अंतर बहुत धैर्य से समझाते हैं। वे न केवल मुझे मुश्किलों से बाहर निकलने का रास्ता बताते हैं बल्कि जीवन में ईमानदारी और सच्चाई के मार्ग पर चलने के संस्कार भी देते हैं।
In simple words: मेरे पिताजी ने मुझे हमेशा सही राह दिखाई है और जीवन में हर मुश्किल समय में सही निर्णय लेना सिखाया है।

Exam Tip: इस प्रकार के व्यक्तिगत अनुभवों वाले प्रश्नों में अपने जीवन के सच्चे आदर्श व्यक्ति (माता-पिता या शिक्षक) का सजीव वर्णन करें।

 

Question (ख) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।” क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए।
Answer: हाँ, मुझे ऐसा रचनात्मक अनुभव प्राप्त हुआ है। एक बार मेरे एक घनिष्ठ मित्र ने मुझे बहुत ही शालीनता से एकांत में बताया कि जब मैं अपनी बात रखता हूँ, तो बहुत जल्दी-जल्दी बोलने लगता हूँ, जिससे लोग मेरी बात पूरी तरह समझ नहीं पाते। शुरुआत में मुझे थोड़ा संकोच हुआ, लेकिन मैंने उसकी बात पर विचार किया। इसके बाद मैंने अपनी बोलने की गति पर ध्यान दिया और अब मैं बहुत स्पष्ट और धीरे बोलने का प्रयास करता हूँ। इस रचनात्मक आलोचना ने मेरे बात करने के तरीके में बहुत सुधार किया है।
In simple words: मेरे मित्र ने मुझे टोका था कि मैं बहुत तेज़ बोलता हूँ। मैंने उसकी बात मानकर अपनी आदत में सुधार किया, जिससे मेरी बातचीत का ढंग बहुत बदल गया।

Exam Tip: अपनी कमी बताने वाले निंदक की आलोचना को सकारात्मक रूप में लेकर खुद में आए बदलाव को साफ शब्दों में लिखें।

 

Question (ग) कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे – मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
Answer: हाँ, मैंने स्वयं यह अनुभव किया है कि हमारी संगति का हमारे चरित्र पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। जब मैं कक्षा सात में आया, तो मेरे कुछ ऐसे नए मित्र बने जो पढ़ाई के प्रति बहुत अनुशासित और गंभीर थे। उनके साथ रहकर मेरे भीतर भी समय पर गृहकार्य पूरा करने और पुस्तकालय जाकर नई पुस्तकें पढ़ने की अच्छी आदत विकसित हुई। उनकी अच्छी संगति के कारण मेरी परीक्षा के परिणाम में भी बहुत सकारात्मक सुधार आया। इससे सिद्ध होता है कि अच्छे मित्रों की संगति हमें हमेशा आगे बढ़ाती है।
In simple words: हाँ, जब मैं पढ़ाई में मन लगाने वाले अच्छे दोस्तों के साथ रहने लगा, तो मेरी आदतें भी सुधर गईं और मेरे परीक्षा के नंबर भी काफी अच्छे हो गए।

Exam Tip: संगति के सकारात्मक असर को दिखाने के लिए अपने जीवन का कोई व्यावहारिक उदाहरण देना सबसे अच्छा होता है।

 

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सृजन

Question (क) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा।
Answer:
कहानी: खेल भावना और सच्चाई का मार्ग
हमारे विद्यालय की फुटबॉल टीम का फाइनल मुकाबला पड़ोसी विद्यालय की मजबूत टीम के साथ चल रहा था। खेल अपने अंतिम दौर में था और दोनों टीमें एक-एक गोल की बराबरी पर थीं। मैच समाप्त होने में केवल दो मिनट बचे थे। अचानक हमारी टीम के एक खिलाड़ी ने विरोधी टीम के घेरे में प्रवेश कर गोल दाग दिया। सभी दर्शक और खिलाड़ी खुशी से झूम उठे। रेफरी ने भी इसे सही गोल मान लिया। लेकिन मैंने बहुत करीब से देखा था कि गोल करते समय गेंद अनजाने में हमारे खिलाड़ी के हाथ से छू गई थी, जो खेल नियमों के विरुद्ध था।
मैंने तुरंत अपने कप्तान के पास जाकर कहा कि हमें रेफरी को सच बता देना चाहिए। कप्तान और कुछ अन्य साथी पहले तो बहुत नाराज़ हुए क्योंकि सच बताने पर हम मैच हार सकते थे, लेकिन मैंने ज़ोर देकर कहा कि अनुचित तरीके से जीती गई ट्रॉफी से ईमानदारी की हार कहीं बेहतर है। मैंने रेफरी के पास जाकर सच्चाई बता दी। रेफरी ने हमारा गोल निरस्त कर दिया और हमारी टीम मैच हार गई। परंतु मैच समाप्त होने के बाद, दोनों स्कूलों के कोच और प्रधानाचार्य ने हमारी खेल भावना और सच्चाई की जमकर प्रशंसा की और हमें 'फेयर प्ले' की ट्रॉफी दी गई।
In simple words: फुटबॉल मैच में हमारी टीम से अनजाने में नियम टूट गया था, जिसे किसी ने नहीं देखा। हमने ईमानदारी से सच बता दिया, जिससे हम मैच हार गए पर सबने हमारी सच्चाई की तारीफ की।

Exam Tip: कहानी लेखन में आकर्षक शीर्षक, घटनाक्रम का सही विकास और अंत में एक अच्छी नैतिक सीख अवश्य शामिल करें।

 

Question (ख) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय।” इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।
Answer:
निबंध: मेरे जीवन की मार्गदर्शक विज्ञान शिक्षिका
मैंने अपने विद्यालय की वरिष्ठ विज्ञान शिक्षिका से उनके जीवन और शिक्षण यात्रा के विषय में एक छोटा साक्षात्कार किया। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में साझा किया कि उनके जीवन में भी कई कठिन मोड़ आए, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक सच्चे शिक्षक का कर्तव्य केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों के भीतर छिपे गुणों को पहचानना और उन्हें जीवन जीने की सही राह दिखाना है।
वे हमेशा हमें विज्ञान के कठिन प्रयोगों को बहुत ही सरल और व्यावहारिक ढंग से खेल-खेल में सिखाती हैं। वे कहती हैं कि जीवन की समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि तार्किक दृष्टिकोण अपनाकर उनका समाधान खोजना चाहिए। उनके इस अमूल्य योगदान और निस्वार्थ प्रेम को देखकर मुझे कबीर का यह दोहा याद आता है कि गुरु का स्थान सचमुच ईश्वर से भी ऊपर है, क्योंकि गुरु के ज्ञान के बिना हम ईश्वर को कभी नहीं पा सकते थे। वे हमारे चरित्र की सच्ची शिल्पी हैं।
In simple words: मैंने अपनी विज्ञान की टीचर का इंटरव्यू लिया। उन्होंने बताया कि टीचर का काम सिर्फ पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों को जीवन जीने की सही राह दिखाना और अच्छा इंसान बनाना है।

Exam Tip: शिक्षक के साक्षात्कार पर निबंध लिखते समय उनके स्वभाव, शिक्षण शैली और छात्रों के प्रति उनके निस्वार्थ योगदान को मुख्य रूप से उजागर करें।

 

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कबीर हमारे समय में

Question (क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं । वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।
Answer:
यदि संत कबीरदास जी आज के आधुनिक युग में उपस्थित होते, तो वे वर्तमान समाज की कुरीतियों और आधुनिक समस्याओं को देखकर निम्नलिखित समसामयिक विषयों पर अपने दोहे लिख सकते थे:
• सोशल मीडिया और इंटरनेट का अत्यधिक और अनावश्यक उपयोग।
• बढ़ता हुआ वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण (पर्यावरण संकट)।
• प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में फैला भ्रष्टाचार।
• साइबर सुरक्षा, अफवाहें फैलाना और ऑनलाइन धोखाधड़ी।
• नैतिक मूल्यों, पारिवारिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं में आती गिरावट।
• डिजिटल दुनिया में मनुष्य का बढ़ता अकेलापन।
• समाज में बढ़ती महँगाई और अमीर-गरीब के बीच का बढ़ता फासला।
In simple words: अगर कबीर जी आज होते, तो वे मोबाइल की लत, प्रदूषण, भ्रष्टाचार, महँगाई और इंटरनेट पर फैलने वाली अफवाहों जैसी समस्याओं पर अपने दोहे लिखते।

Exam Tip: आधुनिक विषयों की सूची बनाते समय आज के डिजिटल और सामाजिक परिवेश की वास्तविक समस्याओं को प्राथमिकता दें।

 

Question (ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।
Answer:
वर्तमान सामाजिक विसंगतियों पर स्वरचित दो-दो पंक्तियाँ (दोहे) इस प्रकार हैं:

सोशल मीडिया और इंटरनेट:
मोबाईल में जग बसै, लोग हुए हैं दूर।
मुख से बोलें मीठा सब, मन में भरा गुरूर।।

भ्रष्टाचार:
साँच-झूठ का भेद ना रहा, पाप-पुण्य का योग।
कबीर कहैं, इस जग में, रिश्वत का है भोग।।

पर्यावरण प्रदूषण:
सूखे पेड़ और ज़हरीली हवा, प्रकृति का अब हो रहा नाश।
मानव लालच में अंधा हुआ, कौन करे अब इसका इलाज।।

साइबर सुरक्षा:
अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
इंटरनेट के जग में, कहीं खो न जाए तेरा रूप।।

नैतिक मूल्यों में कमी:
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, मान-सम्मान गया भूल।
अब जग में धन ही बड़ा, बाकी सब है धूल।।
In simple words: ये कविताएँ हमें सचेत करती हैं कि तकनीक की वजह से हम अपनों से दूर हो रहे हैं, पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं और अपने नैतिक संस्कार भूलते जा रहे हैं।

Exam Tip: दोहों या काव्यात्मक पंक्तियों की रचना करते समय तुकांत शब्दों (rhyming words) के सही तालमेल पर विशेष ध्यान दें।

 

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साइबर सुरक्षा और दोहे

Question (क) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” इंटरनेट पर अनावश्यक बोलने से क्या-क्या संकट हो सकते हैं?
Answer: आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के युग में बिना सोचे-समझे कुछ भी लिखने, किसी पर अभद्र टिप्पणी करने या अनावश्यक रूप से अपनी निजी बातें साझा करने से कई प्रकार के संकट खड़े हो सकते हैं। इससे हम ऑनलाइन विवादों, साइबर-बुलिंग और नकारात्मक ट्रोलिंग के शिकार हो सकते हैं। कई बार हमारी गोपनीय व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक हो जाने से साइबर अपराध और हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, हमारी वास्तविक और डिजिटल प्रतिष्ठा को भी भारी नुकसान पहुँच सकता है।
In simple words: इंटरनेट पर बिना सोचे-समझे बहुत ज़्यादा पोस्ट या कमेंट करने से हम ऑनलाइन झगड़ों में फँस सकते हैं और हमारी निजी जानकारी लीक हो सकती है।

Exam Tip: इंटरनेट के खतरों को समझाने के लिए 'साइबर सुरक्षा' और 'डिजिटल फुटप्रिंट' जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं का ज़िक्र करें।

 

Question (ख) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छाने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?
Answer: इंटरनेट पर असीमित ज्ञान के साथ-साथ भ्रामक, झूठी खबरें और अफवाहें भी बहुत भारी मात्रा में उपलब्ध हैं। इसलिए हमें 'सूप' की तरह विवेकी बनकर सही और प्रामाणिक सूचनाओं को ही स्वीकार करना चाहिए और निरर्थक भ्रामक बातों को छोड़ देना चाहिए।
यह तय करने के लिए कि कौन सी जानकारी हमारे लिए उपयोगी है, हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
स्रोत की सत्यता जाँचें: देखें कि क्या जानकारी किसी विश्वसनीय समाचार चैनल, सरकारी वेबसाइट अथवा प्रामाणिक शिक्षा पोर्टल से आई है।
तुलना करें: किसी भी खबर पर तुरंत विश्वास करने से पहले उसे दो-तीन अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से मिलाकर देखें।
तार्किक सोच अपनाएँ: किसी भी संवेदनशील या भड़काऊ संदेश पर बिना सोचे-समझे विश्वास न करें और न ही उसे आगे साझा करें, बल्कि उसके पीछे के सच को जानने की कोशिश करें।
In simple words: इंटरनेट पर बहुत सी झूठी बातें भी होती हैं। हमें सूप की तरह काम करना चाहिए - केवल अच्छी और सच्ची जानकारियाँ अपनानी चाहिए और झूठी अफवाहों से दूर रहना चाहिए।

Exam Tip: सूचनाओं को जाँचने की प्रामाणिक विधियों को परीक्षा में हमेशा स्पष्ट रूप से बुलेट पॉइंट्स में लिखें ताकि उत्तर सुव्यवस्थित दिखाई दे।

 

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आज के समय में

Question नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए- (i) अमित का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था और वह गलत संगति में चल गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया - “संगति का असर जीवन पर पड़ता है।” (ii) एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा - “हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।” (iii) आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते हैं, लेकिन फिर आपने सोचा - आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इस बात का बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। (iv) रीमा ने अपने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया। बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती। (v) कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान कर दिया, जबकि रमेश बिलकुल चुप रहा। गुरूजी ने कहा - “बोलचाल में संतुलन आवश्यक है, न अधिक बोलो, न अधिक चुप रहो।” (vi) सुरेश को जब ‘प्रतिभा सम्मान’ मिला तो उसने कहा - “इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है।”
Answer:
(i) दोहा:
"कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।"

(ii) दोहा:
"साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाया।।"

(iii) दोहा:
"निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।"

(iv) दोहा:
"ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।"

(v) दोहा:
"अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।"

(vi) दोहा:
"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।"
In simple words: हमारे व्यावहारिक जीवन की हर छोटी-बड़ी परिस्थिति में कबीरदास जी के दोहे हमें बिल्कुल सही मार्गदर्शन और सीख प्रदान करते हैं।

Exam Tip: परीक्षा में कबीर के दोहे लिखते समय वर्तनी (spelling) और मात्राओं की शुद्धता पर विशेष ध्यान दें ताकि पूरे अंक प्राप्त हो सकें।

 

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खोजबीन के लिए

Question अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजन, गीत, लोकगीत खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
Answer:
मैंने अपने शिक्षकों और इंटरनेट की सहायता से कबीरदास जी के प्रसिद्ध भजनों को सुना। मुझे उनका एक बहुत ही लोकप्रिय भजन अत्यंत प्रेरणादायक लगा, जो निम्नलिखित है:

कबीर का भजन:
"साँच कहै तो मारन धावै, झूठ जग पतियाना।
हिंदू कहत है राम हमारा, मुसलमान रहमाना।
आपस में दोउ लड़े मरत हैं, मरम न काहू जाना।।"

भजन का मुख्य अर्थ:
इस भजन में कबीरदास जी कहते हैं कि समाज में यदि किसी को सच्ची बात बताई जाए, तो लोग नाराज़ होकर मारने दौड़ते हैं, जबकि वे झूठी अफवाहों पर बहुत आसानी से विश्वास कर लेते हैं। वे धर्म और जाति के नाम पर आपस में लड़ने वाले लोगों को समझाते हैं कि भगवान एक ही है और इस मूल सत्य को जाने बिना आपस में लड़ना पूरी तरह व्यर्थ है।
हमारी कक्षा के सभी समूहों ने मिलकर कबीर के ऐसे ही सुंदर भजनों और गीतों को एकत्रित करके एक हस्तलिखित पुस्तिका तैयार की और उसे कक्षा के पुस्तकालय में सुरक्षित रख दिया।
In simple words: हमने कबीर जी का एक भजन लिखा जिसमें उन्होंने बताया है कि लोग सच सुनकर गुस्सा हो जाते हैं और भगवान को जाने बिना धर्म के नाम पर आपस में लड़ते रहते हैं।

Exam Tip: कोई भी भजन या लोकगीत लिखते समय उसके नीचे उसका मुख्य केंद्रीय भाव (संदेश) संक्षेप में ज़रूर लिखें।

 

कबीर के दोहे का सरल भावार्थ

1. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।
भावार्थ: संसार में सच्चाई के मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ी तपस्या है, जबकि असत्य (झूठ) बोलना सबसे बड़ा पाप कर्म है। जिस मनुष्य के हृदय में कपट नहीं होता और जो हमेशा सच बोलता है, उसके हृदय में साक्षात् गुरु और ईश्वर का वास होता है।

2. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
भावार्थ: केवल धन-दौलत या ऊंचे पद पर होने से ही कोई व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं बन जाता। खजूर का पेड़ बहुत लंबा और ऊँचा होता है, परंतु वह न तो किसी राहगीर को ठंडी छाया दे पाता है और न ही उसके फल आसानी से तोड़े जा सकते हैं। सच्चा श्रेष्ठ वही है जो दूसरों के काम आए।

3. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
भावार्थ: यदि हमारे सामने हमारे शिक्षक (गुरु) और ईश्वर (गोविंद) दोनों एक साथ खड़े हों, तो हमारे मन में यह असमंजस हो सकता है कि पहले किसके पैर छुएँ। कबीर कहते हैं कि हमें पहले गुरु का आदर करना चाहिए, क्योंकि उनके दिए ज्ञान के कारण ही हमें ईश्वर के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

4. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
भावार्थ: मनुष्य के जीवन में किसी भी चीज़ की अति होना नुकसानदायक होता है। न तो बहुत अधिक बातें करना अच्छा होता है और न ही पूरी तरह शांत बैठ जाना। जिस प्रकार सीमा से अधिक बारिश होना बाढ़ लाता है और अत्यधिक तेज़ धूप सूखा लाती है, उसी प्रकार जीवन में संतुलन ही सर्वोत्तम है।

5. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
भावार्थ: हमें अपने मुख से हमेशा ऐसे मधुर और विनम्र वचन बोलने चाहिए जिससे सुनने वाले का क्रोध और अहंकार समाप्त हो जाए। मीठी बोली से न केवल दूसरों का मन शांत और शीतल होता है, बल्कि हमें स्वयं भी आंतरिक प्रसन्नता और मानसिक संतोष प्राप्त होता है।

6. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।
भावार्थ: हमारी आलोचना करने वाले व्यक्ति को हमेशा अपने पास रखना चाहिए। कबीर कहते हैं कि जो व्यक्ति हमारी कमियों को हमें बताता रहता है, वह बिना साबुन या पानी के ही हमारे भीतर की बुराइयों को दूर करके हमारे स्वभाव को पूरी तरह शुद्ध और निर्मल बना देता है।

7. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार-सार को gahi रहै, थोथा देइ उड़ाया।।
भावार्थ: एक सच्चे ज्ञानी पुरुष का स्वभाव सूप (अनाज छानने वाले पात्र) की तरह होना चाहिए। जिस प्रकार सूप केवल अच्छे दानों को अपने भीतर रख लेता है और हल्की भूसी व कचरे को उड़ा देता है, उसी प्रकार सज्जन पुरुष को केवल अच्छी बातें अपनानी चाहिए और बुराइयों को तुरंत त्याग देना चाहिए।

8. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
भावार्थ: हमारा चंचल मन एक उड़ते हुए पक्षी की तरह होता है जो बिना रोक-टोक के जहाँ चाहे वहाँ उड़ जाता है। मनुष्य जैसी संगति में अपना समय व्यतीत करता है, उसके चरित्र और जीवन पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है और उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है।

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