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Detailed Chapter 02 दो गौरैया NCERT Solutions for Class 8 Hindi
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Class 8 Hindi Chapter 02 दो गौरैया NCERT Solutions PDF
कक्षा 8 हिंदी मल्हार के अध्याय 2 प्रश्न उत्तर
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मेरी समझ से
Question (क). निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि-
• घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
• घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
• पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
• घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
Answer: * घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं।
पिताजी द्वारा मकान को 'सराय' पुकारने का मुख्य कारण यह है कि वहाँ विभिन्न प्रकार के प्राणी जैसे चूहे, चमगादड़, गौरैया, कबूतर और चींटियाँ आदि बिना किसी रोक-तोक के अपनी मर्जी से प्रवेश करते हैं और घूमते रहते हैं। जिस तरह किसी धर्मशाला या सराय में राहगीर बिना अनुमति के आते-जाते हैं, वैसा ही माहौल इस घर का भी बन गया था।
In simple words: सराय में जैसे कोई भी अजनबी बिना पूछे ठहर सकता है, वैसे ही लेखक के घर में भी तरह-तरह के जानवर और पक्षी बिना इजाजत आते-जाते रहते थे।
Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में 'सराय' और 'अतिथिगृह' की समानता को दर्शाते हुए विभिन्न जीवों के आने-जाने का उल्लेख करें।
Question (2) कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
• माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
• लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
• जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
• मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
Answer: * जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे।
लेखक ने हास्यपूर्ण तरीके से इस बात को रेखांकित किया है कि वे और उनका परिवार तो उस मकान में केवल मेहमानों की भाँति रह रहे हैं, जबकि असल आधिपत्य उन जीव-जंतुओं का हो गया है जिन्होंने वहाँ हर कोने पर कब्जा कर रखा है। यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी उन सभी जीवों के लिए है जो घर में बेधड़क वास करते थे।
In simple words: लेखक का मानना है कि घर में रहने वाले पशु-पक्षी वहाँ अपनी पूरी मर्जी चलाते थे, इसलिए वही उस घर के असली स्वामी जान पड़ते थे।
Exam Tip: व्यंग्य की भावना को समझते हुए 'असली मालिक' के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें।
Question (3) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
• दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
• पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
• दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
• माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
Answer: * पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।
जब चिड़ियाँ घर के अंदर आईं, तो पिताजी उन्हें बाहर खदेड़ने के लिए शोर मचाने लगे और लाठी का सहारा लेने लगे। इसके विपरीत, माँ उनकी इन कोशिशों को देखकर हँसती थीं और अंत में भावुक होकर उन्होंने पिताजी से अनुरोध किया कि अब इन मासूम पक्षियों को परेशान न किया जाए।
In simple words: पिताजी चिड़ियों को भगाने के लिए लाठी और शोर का सहारा लेते थे, जबकि माँ उन पर दया करते हुए उन्हें घर में ही रहने देना चाहती थीं।
Exam Tip: दोनों पात्रों (माँ और पिताजी) के विचारों और स्वभाव में अंतर को दिखाते हुए इस उत्तर को पूरा करें।
Question (4) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुस्कुराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
• माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
• माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
• माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
• माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
Answer: * माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ।
माँ की मुस्कुराहट और व्यंग्यपूर्ण टिप्पणियों से यह स्पष्ट होता है कि वे गौरैया के प्रति मन में स्नेह रखती थीं। वे पिताजी के घोंसला हटाने के प्रयासों से असहमत थीं और चाहती थीं कि पक्षी सुरक्षित रहें, जिसके कारण वे पिताजी का उपहास करती थीं और अंततः चिड़ियों को आश्रय देती हैं।
In simple words: माँ के मन में उन चिड़ियों के लिए बहुत दया और प्यार था, इसलिए वे नहीं चाहती थीं कि उनका घोंसला तोड़ा जाए या उन्हें भगाया जाए।
Exam Tip: माँ की संवेदनशीलता और पशु-पक्षियों के प्रति उनके प्रेम को अपने उत्तर में मुख्य रूप से उजागर करें।
Question (5) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
• दूसरों पर निर्भर रहना
• असफलताओं से हार मान लेना
• अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
• संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
Answer: * अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना।
चिड़ियों को बार-बार बाहर खदेड़े जाने के बावजूद वे हिम्मत नहीं हारतीं और बार-बार कमरे के अंदर आ जाती हैं। उनका यह आचरण उनके भीतर के जुझारू स्वभाव, अटूट जीवटता और कभी हार न मानने की भावना को प्रदर्शित करता है, जो हमें भी जीवन में सतत प्रयास करने की प्रेरणा देता है।
In simple words: बार-बार भगाए जाने पर भी गौरैयों का लौट आना हमें यह सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बाधाएँ आएँ, हमें कोशिश करना नहीं छोड़ना चाहिए।
Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में 'जिजीविषा' (जीने की इच्छा) और 'सतत प्रयास' जैसे शब्दों का उल्लेख अवश्य करें।
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Question (ख). हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
• क्या पाठ में उस उत्तर का कोई संकेत या प्रमाण है?
• कौन-सा उत्तर कहानी के भाव और पात्रों की मनोदशा के अधिक निकट है?
• क्या उत्तर में कहानी की मूल संवेदना (गौरैयों का संघर्ष, माँ की सहानुभूति, पिताजी की झुँझलाहट) को सही से समझा गया है?
Answer: तथ्यों और कहानी के पात्रों के स्वभाव के आधार पर हमारे उत्तरों के चयन के पीछे निम्नलिखित कारण और प्रमाण हैं:
1. पाठ में संकेत और प्रमाण: पाठ में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि जब भी पिताजी गौरैयों को बाहर करने के लिए झाड़ू या लाठी उठाते हैं, माँ उन्हें टोक देती हैं। इससे सिद्ध होता है कि माँ गौरैयों को भगाने के विरुद्ध थीं।
2. पात्रों की मनोदशा और भाव: पिताजी की झुँझलाहट उनके द्वारा गौरैयों को भगाने के अथक प्रयासों से दिखती है, जबकि माँ की मुस्कान उनके प्रति सहानुभूति दर्शाती है। यह कहानी के केंद्रीय भाव के सबसे निकट है।
3. कहानी की मूल संवेदना: गौरैया द्वारा बार-बार घोंसला बनाना उनके जीवन के अस्तित्व और संघर्ष को दिखाता है। माँ का संवेदनशील रवैया प्रकृति के प्रति सह-अस्तित्व की भावना को उजागर करता है।
In simple words: कहानी के पात्रों के स्वभाव और उनके व्यवहार को देखकर ही हमने इन उत्तरों का चयन किया है, जो कहानी के संदेश से मेल खाते हैं।
Exam Tip: चर्चा आधारित प्रश्नों में कहानी की मूल संवेदना जैसे जीव-दया, संवेदनशीलता और आपसी संघर्ष का संदर्भ देकर अपना तर्क प्रस्तुत करें।
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मिलकर करें मिलान
Question (क). पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।
Answer: सही मिलान वाली तालिका नीचे दी गई है:
| क्रम | वाक्य | सटीक अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं! | पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था। |
| 2 | आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। | आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं। |
| 3 | वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। | चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते। |
| 4 | वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं। | पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं। |
| 5 | पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे। | पिताजी की छाती और साँस फूलने लगी और उन्होंने लाठी एक ओर रख दी। |
| 6 | इतने में रात पड़ गई। | कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया। |
| 7 | जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं। | गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों। |
Exam Tip: वाक्यों का मिलान करते समय पात्रों के हाव-भाव और कहानी के संदर्भ का विशेष रूप से ध्यान रखें।
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पंक्तियों पर चर्चा
Question (क). “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।” इन पंक्तियों का अर्थ और इस पर अपने विचार लिखिए।
Answer: अर्थ और विचार: यह कथन स्थायित्व, लगाव और अपनेपन के गहरे भाव को प्रकट करता है। जब तक गौरैयाँ केवल घर में चक्कर लगा रही थीं, तक तक उन्हें बाहर भगाना सुगम था, परंतु घोंसला बना लेने के बाद वे उस स्थान को अपनी गृहस्थी मानने लगीं। किसी भी स्थान या संबंध से जब जीव का गहरा लगाव हो जाता है, तो उसे वहाँ से विलग करना अत्यंत दुष्कर कार्य हो जाता है। यह शाश्वत नियम केवल पक्षियों पर ही नहीं, अपितु हम मनुष्यों पर भी समान रूप से लागू होता है जब हम किसी नए परिवेश या संबंधों में रच-बस जाते हैं।
In simple words: जब कोई पक्षी या मनुष्य किसी जगह को अपना घर मान लेता है, तो उससे उसका गहरा लगाव हो जाता है और उसे वहाँ से दूर करना बहुत मुश्किल होता है।
Exam Tip: इस उत्तर को लिखते समय 'स्थायित्व', 'अपनापन' और 'भावनात्मक जुड़ाव' जैसे प्रमुख बिंदुओं को अवश्य शामिल करें।
Question (ख). “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।” इन पंक्तियों का अर्थ और इस पर अपने विचार लिखिए।
Answer: अर्थ और विचार: यह वाक्य पिताजी के उस सीमित दृष्टिकोण और रणनीति को दर्शाता है जिसमें वे सोचते हैं कि अस्थायी बाधा उत्पन्न करने से समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा। वे मान रहे थे कि मात्र एक दिन के लिए रास्ता बंद कर देने से गौरैयाँ निराश होकर नया ठिकाना ढूँढ़ लेंगी। यह मनुष्यों की उस संकीर्ण मानसिकता की ओर संकेत करता है जो उपेक्षा या क्षणिक अवरोध को स्थायी हल मान बैठती है। सत्य तो यह है कि प्रकृति के प्राणियों का लगाव और संकल्प किसी एक दिन के व्यवधान से प्रभावित नहीं होता, क्योंकि वे अपनी जीवटता से हर बाधा को पार कर लेते हैं।
In simple words: किसी समस्या को थोड़े समय के लिए टाल देने या एक दिन का रास्ता बंद कर देने से उसका असली और पक्का हल नहीं निकलता।
Exam Tip: पिताजी की सोच के माध्यम से मानवीय भ्रम और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को स्पष्ट करें।
Question (ग). “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।” इन पंक्तियों का अर्थ और इस पर अपने विचार लिखिए।
Answer: अर्थ और विचार: यह पंक्ति अत्यधिक कठोर निर्णय और संवेदनहीनता की चरम सीमा को उजागर करती है। कई असफल प्रयासों के उपरांत पिताजी इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि गौरैयों को खदेड़ने का एकमात्र साधन उनके घोंसले को नष्ट करना ही है। यह विचार अत्यंत पीड़ादायक है, क्योंकि किसी भी प्राणी का घर केवल उसका ठिकाना नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व और जीवन का आधार होता है। यह पंक्ति हमारे समाज की उस कठोर प्रवृत्ति पर प्रहार करती है जहाँ समस्याओं को हल करने के लिए अत्यंत क्रूर रास्ते अपनाए जाते हैं। मनुष्यों के संदर्भ में भी ऐसा देखा जाता है जब किसी को कमजोर करने के लिए उसकी आजीविका, मान-सम्मान या छत छीन ली जाती है।
In simple words: किसी का घर उजाड़ना सबसे बड़ी क्रूरता है। चाहे पक्षी हो या मनुष्य, उसका घर ही उसके जीने का सबसे बड़ा आधार होता है।
Exam Tip: इस उत्तर में 'अस्तित्व पर चोट' और 'असंवेदनशील दृष्टिकोण' का उल्लेख करते हुए मानवीय व्यवहार से इसकी तुलना करें।
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सोच-विचार के लिए
Question (क). आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा - घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?
Answer: इस संपूर्ण कहानी में मुझे सबसे प्रिय पात्र माँ का लगा। उनका स्वभाव अत्यंत संतुलित, कोमल और व्यावहारिक है। वे मूक पशु-पक्षियों के प्रति अपने मन में गहरी संवेदनशीलता और करुणा का भाव रखती हैं। इसके साथ ही, घर के तनावपूर्ण माहौल को वे अपने हास्य और सुंदर व्यंग्य से हल्का कर देती हैं। पिताजी के तीव्र क्रोध और झुँझलाहट के बीच भी वे विचलित नहीं होतीं और अंततः अपनी ममतामयी भावना से पक्षियों के प्रति सह-अस्तित्व की जीत सुनिश्चित करती हैं।
In simple words: कहानी में माँ का स्वभाव सबसे अच्छा है क्योंकि वे दयालु हैं, चिड़ियों से प्यार करती हैं और मुश्किल समय में भी हँसती-मुस्कुराती रहती हैं।
Exam Tip: माँ के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ जैसे 'संवेदनशीलता', 'व्यावहारिकता' और 'सहनशीलता' का बिंदुवार वर्णन करें।
Question (ख). लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
Answer: गौरैया ने लेखक के घर के बैठक कक्ष में छत पर लटके पंखे के मध्य गोल भाग (मोटर के ऊपर) अपना घोंसला तैयार किया था। उन्होंने इस स्थान का चयन सुरक्षा की दृष्टि से किया होगा, क्योंकि वह अत्यधिक ऊँचाई पर होने के कारण बिल्ली जैसे शत्रुओं से सुरक्षित था। साथ ही, वह स्थान पर्याप्त रूप से गर्म और मनुष्यों की सीधी पहुँच से दूर था, जो अंडों को सेने और छोटे बच्चों को पालने के लिए अत्यंत अनुकूल था।
In simple words: चिड़िया ने पंखे के गोल हिस्से के ऊपर घोंसला बनाया क्योंकि वह जगह ऊँची और सुरक्षित थी, जहाँ कोई आसानी से नहीं पहुँच सकता था।
Exam Tip: स्थान की ऊँचाई, तापमान और सुरक्षात्मक पहलुओं को ध्यान में रखकर अपना उत्तर लिखें।
Question (ग). क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्त्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।
Answer: जी हाँ, मूक पशु-पक्षी भी मनुष्यों की ही तरह अपने घर और परिवार के प्रति अत्यधिक लगाव महसूस करते हैं। प्रस्तुत कहानी में इस बात के अनेक प्रमाण मिलते हैं। गौरैया जोड़े ने सबसे पहले घर के विभिन्न स्थानों का भली-भाँति निरीक्षण किया और सुरक्षित स्थान पर घोंसला बनाकर अंडे दिए। अनेक खतरों और पिताजी द्वारा भगाए जाने के बावजूद, वे निरंतर अपने नवजात बच्चों को दाना खिलाने के लिए वापस लौटती रहीं। बच्चों की हल्की सी पुकार सुनते ही उनका तुरंत खिंचे चले आना उनके गहरे पारिवारिक स्नेह और ममता को प्रदर्शित करता है।
In simple words: पशु-पक्षियों को भी अपने बच्चों और घर से बहुत प्यार होता है। वे अपने बच्चों को खिलाने के लिए हर खतरा उठाकर भी वापस घोंसले में आते हैं।
Exam Tip: गौरैयों द्वारा घर का निरीक्षण करने और बच्चों की पुकार पर तुरंत लौट आने वाले उदाहरणों को उत्तर में अवश्य दर्शाएं।
Question (घ). “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
Answer: इस वक्तव्य से पिताजी के स्वभाव के हठी, अत्यधिक जिद्दी और आत्ममुग्ध होने का गुण स्पष्ट होता है। वे किसी भी परिस्थिति में अपने निश्चय से पीछे हटना पसंद नहीं करते और स्वयं को हमेशा विजयी देखना चाहते हैं। गौरैयों के छोटे से जोड़े से लगातार परास्त होने के बाद भी उनका बार-बार प्रयास करना उनकी इसी हठधर्मिता को दिखाता है। हालाँकि, अंत में अपनी असमर्थता को स्वीकार कर वे शांत हो जाते हैं, जो यह भी दर्शाता है कि पराजय के बाद वे वास्तविकता को स्वीकार कर लेते हैं।
In simple words: इस बात से पता चलता है कि पिताजी बहुत जिद्दी स्वभाव के थे और अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी हद तक अड़ सकते थे।
Exam Tip: पिताजी के स्वभाव के नकारात्मक (हठ, जिद) और व्यावहारिक (हार स्वीकार करना) दोनों पक्षों को संतुलित रूप में प्रस्तुत करें।
Question (ङ). कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
Answer: गौरैयों के आचरण में तब गंभीर परिवर्तन देखने को मिला जब घोंसला तोड़ने की कोशिशों के बीच उनके अंडों से छोटे बच्चे बाहर आ गए। घोंसला बनाते समय वे अत्यधिक हर्षित और चहकती हुई लगती थीं, मानो प्रसन्नतापूर्वक राग मल्हार गा रही हों। किंतु, बच्चों के जन्म लेते ही वे अत्यंत गंभीर, शांत, थकी हुई तथा शारीरिक रूप से दुर्बल दिखाई देने लगीं। यह परिवर्तन उनके सिर पर अचानक आई बड़ी जिम्मेदारी, मातृत्व की चिंता व नवजात बच्चों की रक्षा व पोषण के अथक परिश्रम के कारण आया था।
In simple words: जब गौरैयों के अंडे फूटे और बच्चे निकले, तो वे बहुत शांत और कमजोर हो गईं क्योंकि वे अपने बच्चों की सुरक्षा और उनके लिए दाना ढूँढ़ने में बहुत व्यस्त और चिंतित रहने लगी थीं।
Exam Tip: बच्चों के जन्म से पहले की स्थिति (चहकना, मल्हार गाना) और बाद की स्थिति (गुमसुम, दुबली होना) की तुलना करके उत्तर लिखें।
Question (च). कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।
Answer: गौरैयों द्वारा घर के भीतर आने के लिए निम्नलिखित मार्गों का उपयोग किया गया था:
1. मुख्य दरवाजों के नीचे बचे हुए रिक्त छिद्रों से।
2. खंडित अथवा टूटे हुए रोशनदान की झिरी से।
3. रसोई घर के खुले रहने वाले द्वारों से।
4. कमरे के अन्य खुले हुए झरोखों, खिड़कियों अथवा द्वारों से।
In simple words: चिड़ियाँ घर के टूटे हुए रोशनदान, दरवाजों के नीचे की खाली जगह और रसोई के खुले दरवाजों से अंदर आ जाती थीं।
Exam Tip: पाठ में वर्णित चारों प्रवेश द्वारों को बिंदुवार स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
Question (छ). इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
Answer: इस कथा का वाचन स्वयं लेखक द्वारा उत्तम पुरुष शैली ('मैं' के रूप में) किया जा रहा है। इस बात की पुष्टि कहानी में स्थान-स्थान पर आने वाले निम्नलिखित वाक्यों से होती है:
1. "मैंने तत्काल दौड़कर दोनों कपाट बंद कर दिए।"
2. "मैंने अपनी नजरें ऊपर की ओर उठाईं।"
3. "मैंने देखा कि पिताजी स्टूल के ऊपर से नीचे आ रहे हैं।"
इन उदाहरणों से भली-भाँति प्रमाणित होता है कि लेखक स्वयं इस घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी और कथावाचक दोनों हैं।
In simple words: यह कहानी खुद लेखक हमें सुना रहा है, क्योंकि कहानी में बार-बार 'मैंने देखा' या 'मैंने किया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है।
Exam Tip: व्याकरण की दृष्टि से 'प्रथम पुरुष/उत्तम पुरुष' शैली का उल्लेख करते हुए पाठ के कम से कम दो उदाहरण देकर उत्तर की पुष्टि करें।
Question (ज). माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
Answer: माँ को इस बात का पूर्ण विश्वास था कि गौरैयाँ अब इस स्थान को त्यागकर कभी नहीं जाएँगी, क्योंकि उन्होंने वहाँ न केवल घोंसला निर्मित कर लिया था बल्कि अंडे भी सेने लगी थीं। माँ इस प्राकृतिक सत्य से भली-भाँति परिचित थीं कि संसार का कोई भी प्राणी अपने नवजातों अथवा अंडों की सुरक्षा के लिए बड़े से बड़े संकट का सामना कर सकता है पर अपना आशियाना कभी नहीं छोड़ता। इसके अतिरिक्त, माँ के हृदय में पक्षियों के प्रति गहरी ममता व दयाभाव था।
In simple words: माँ जानती थीं कि चिड़ियों ने वहाँ घोंसला बनाकर अंडे दे दिए हैं, और कोई भी माँ अपने बच्चों को किसी भी खतरे में छोड़कर नहीं भागती।
Exam Tip: प्राणियों के मातृत्व भाव, बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और माँ की संवेदनशीलता को उत्तर में उजागर करें।
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अनुमान और कल्पना से
Question (क). कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?
Answer: यदि मैं उस मकान का सदस्य होता, तो मैं उन चिड़ियों को बिना किसी बाधा के अपना घोंसला बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता देता। मैं उन्हें अपने ही परिवार का एक अभिन्न अंग मानता और उनकी सुख-सुविधा के लिए कमरे के कोने में दाना तथा शीतल जल की व्यवस्था करता। मैं पिताजी की भाँति उन मासूम जीवों को भयभीत करने का अथवा भगाने का स्वप्न में भी प्रयास नहीं करता।
In simple words: अगर मेरे घर में चिड़ियाँ घोंसला बनातीं, तो मैं उन्हें प्यार से रहने देता और उनके खाने-पीने के लिए दाना और पानी रखता।
Exam Tip: पशु-पक्षियों के प्रति सह-अस्तित्व और पर्यावरण के अनुकूल अपने मानवीय विचारों को सुंदर शब्दों में व्यक्त करें।
Question (ख). मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों? (प्राणियों के नाम – चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)
Answer: विभिन्न जीवों के घर में प्रवेश करने पर परिवार का व्यवहार निम्न प्रकार का होता:
• चूहा: घर में पहले से ही चूहों का आतंक था और पिताजी उन्हें पकड़ने में असमर्थ सिद्ध हो चुके थे, अतः वे शायद नए चूहे को देखकर भी अनदेखा कर देते।
• कुत्ता: यदि कोई अपरिचित कुत्ता घर में आ जाता, तो सुरक्षा कारणों से सभी उसे तुरंत खदेड़ने का प्रयास करते, क्योंकि बिना प्रशिक्षण के उसे अंदर रखना संकटपूर्ण हो सकता था।
• मच्छर: मच्छरों के प्रवेश पर बीमारियों के भय से लोग तुरंत कीटनाशक दवाइयों, कॉइल अथवा मच्छरदानी का प्रयोग कर उन्हें नष्ट करने का यत्न करते।
• बिल्ली: बिल्ली के आने पर माँ उसे प्रेमवश दूध पीने को देतीं, जबकि पिताजी झुँझलाकर उसे डाँटते। बिल्ली स्वभावानुसार स्वयं ही थोड़ी देर में बाहर निकल जाती।
• कबूतर: पहले से ही कबूतरों की 'गुटर-गूँ' से तंग आ चुके पिताजी नए कबूतर को देखते ही लाठी लेकर उसे खिड़की से बाहर उड़ाने का प्रयास करते।
• कॉकरोच: गंदगी फैलाने वाले इस कीट को देखते ही घर के सदस्य झाड़ू अथवा स्प्रे की सहायता से उसे समाप्त करने का प्रयास करते।
• तितली: तितली के रंग-बिरंगे पंखों को देखकर बच्चे अत्यंत हर्षित होते और उसे पकड़ने या उसके सौंदर्य को निहारने का आनंद लेते।
• मक्खी: मक्खी के भोजन पर बैठने से होने वाली बीमारियों के कारण लोग उसे तुरंत भगाने अथवा मारने का प्रयास करते.
In simple words: हानिकारक जीवों (जैसे मच्छर, मक्खी, कॉकरोच) को लोग तुरंत भगाते या मार देते, जबकि सुंदर जीवों (जैसे तितली) को देखकर खुश होते।
Exam Tip: सभी प्राणियों के स्वभाव और उनसे होने वाले नफे-नुकसान को ध्यान में रखकर मानवीय प्रतिक्रियाओं का तार्किक विश्लेषण करें।
Question (ग). “मैं अवाक उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?
Answer: लेखक को यह असीम आश्चर्य घोंसले के टूटे हुए अवशेषों के बीच से झाँकते गौरैया के नन्हे, कोमल बच्चों को देखकर हुआ जो बार-बार चीं-चीं की कोमल ध्वनि उत्पन्न कर रहे थे। लेखक की हैरानी का मुख्य कारण यह था कि पिताजी द्वारा घोंसला पूर्ण रूप से नष्ट किए जाने के बाद सभी को यह भ्रम हो गया था कि गौरैया जोड़ा भयभीत होकर सदा के लिए प्रस्थान कर चुका है। किंतु बच्चों की जीवित उपस्थिति ने यह प्रमाणित कर दिया कि ममता की डोर किसी भी विनाश से कहीं अधिक शक्तिशाली होती है।
In simple words: लेखक को तब बहुत आश्चर्य हुआ जब उसने घोंसला टूटने के बाद भी वहाँ चिड़िया के नन्हे बच्चों को जीवित और चहकते हुए देखा।
Exam Tip: पिताजी की कथित जीत और ममता की वास्तविक जीत के द्वंद्व को उत्तर में स्पष्ट करें।
Question (घ). “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
Answer: माँ द्वारा पिताजी की सहायता न करने का सबसे बड़ा कारण यह था कि वे स्वयं मन ही मन गौरैयों को उस घर में आश्रय दिए जाने का पूर्ण समर्थन कर रही थीं। उन्हें पिताजी द्वारा चिड़ियों को भगाने के लिए किए जा रहे सभी जतन अत्यंत निरर्थक और हास्यास्पद प्रतीत हो रहे थे। इसके अलावा, माँ को इस बात का भली-भाँति ज्ञान था कि पक्षियों ने अंडे दे दिए हैं और वे किसी भी कीमत पर अपना आशियाना खाली नहीं करेंगी, अतः वे केवल तमाशा देखकर मुस्कुरा रही थीं।
In simple words: माँ खुद चाहती थीं कि चिड़ियाँ घर में ही रहें, इसलिए उन्होंने पिताजी की मदद करने के बजाय उनके प्रयासों पर मुस्कुराना ठीक समझा।
Exam Tip: इस उत्तर में माँ के मौन समर्थन और पिताजी के निष्फल प्रयासों के व्यंग्यात्मक पहलू को उजागर करें।
Question (ङ). “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि।
Answer: यदि मैं किसी सार्वजनिक स्थान जैसे बस स्टैंड पर किसी अपरिचित व्यक्ति को बार-बार अपनी कलाई घड़ी देखते, माथे से पसीना पोंछते और लगातार सड़क की ओर व्याकुल होकर ताकते हुए देखूँ, तो मैं सहज ही यह अनुमान लगा सकता हूँ कि वह व्यक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य के लिए जा रहा है और बस के समय पर न आने के कारण अत्यंत चिंतित व घबराया हुआ है।
In simple words: जैसे घड़ी को बार-बार देखना और परेशान होना यह बताता है कि कोई व्यक्ति बहुत जल्दी में है या किसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
Exam Tip: किसी भी सजीव उदाहरण का चयन कर उसके बाहरी हाव-भाव (Body Language) का तार्किक विश्लेषण करते हुए उत्तर प्रस्तुत करें।
Question (च). “पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
Answer: घर और सराय में निम्नलिखित बुनियादी अंतर पाए जाते हैं:
| आधार | घर | सराय (धर्मशाला) |
|---|---|---|
| निवास की प्रकृति | can be found here... यहाँ परिवार के लोग स्थायी तौर पर जीवन व्यतीत करते हैं। | यह यात्रियों के ठहरने का एक क्षणिक या अस्थायी स्थान होता है। |
| संबंध | सदस्यों के मध्य गहरा स्नेह, अपनत्व और भावनात्मक रिश्ता होता है। | यहाँ रुकने वाले अजनबियों का आपस में कोई संबंध नहीं होता। |
| स्वामित्व | यह परिवार की निजी और सुरक्षित संपत्ति होती है। | यह सार्वजनिक अथवा व्यावसायिक स्थान होता है जहाँ कोई भी शुल्क देकर रह सकता है। |
In simple words: घर में परिवार के लोग प्यार से हमेशा के लिए रहते हैं, जबकि सराय में केवल अजनबी लोग थोड़े समय के लिए रात बिताने आते हैं।
Exam Tip: अंतर को और स्पष्ट बनाने के लिए इसे तालिका (Table) के रूप में प्रस्तुत करें तथा पिताजी के कथन का निहितार्थ भी अंत में स्पष्ट करें।
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संवाद और अभिनय
Question (क). “वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं” नन्हीं दो गौरैया क्या-क्या बोल रही होंगी? संभावित संवाद लिखिए।
Answer: घोंसले से बाहर झाँकती नन्हीं गौरैयों के मध्य संभावित संवाद कुछ इस प्रकार रहा होगा:
पहली नन्हीं गौरैया: "चीं-चीं! बहन देखो, हम कितनी ऊँचाई पर बैठे हैं। नीचे का फर्श कितना विशाल दिखाई दे रहा है, मुझे तो देखकर ही बहुत भय लग रहा है!"
दूसरी नन्हीं गौरैया: "चीं-चीं! भयभीत मत हो। पर हमारे माता-पिता अभी तक भोजन लेकर क्यों नहीं लौटे? क्या वे रास्ता भूल गए हैं?"
पहली नन्हीं गौरैया: "चीं-चीं! मेरी भूख के मारे जान निकल रही है, हमारी कोमल चोंच में दाना कौन डालेगा? ऊपर से यह ठंडी हवा शरीर कँपा रही है।"
दूसरी नन्हीं गौरैया: "चीं-चीं! तनिक देखो, नीचे एक बड़ा सा मनुष्य खड़ा होकर हमारी ओर ही देख रहा है। क्या यह दयालु है? क्या यह हमें खाने को कुछ देगा?"
In simple words: नन्हें बच्चे आपस में डरने, भूख लगने और अपने माता-पिता के देर से आने को लेकर चीं-चीं करके बातें कर रहे होंगे।
Exam Tip: बच्चों की कोमलता, उनकी भूख और उनके डर को ध्यान में रखकर सरल वाक्यों में सुंदर संवादों की रचना करें।
Question (ख). “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” घोंसले से झाँकती गौरैयाँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी? संभावित संवाद लिखिए।
Answer: पिताजी के अजीब व्यवहार (उछल-कूद) को देखकर गौरैया जोड़े के मध्य संभावित संवाद:
पहली गौरैया: "चीं-चीं! अजी सुनती हो, तनिक नीचे तो देखो! यह विचित्र मनुष्य अचानक इस प्रकार ऊँचा-ऊँचा क्यों छटपटा रहा है?"
दूसरी गौरैया: "चीं-चीं! मुझे तो लगता है कि यह हमें डराने वाला कोई नया शिकारी है, पर इसके हाथ-पैर हिलाने का ढंग कितना अजीब है!"
पहली गौरैया: "चीं-चीं! अजी नहीं, यह कोई शिकारी नहीं बल्कि कोई मदारी या नर्तक जान पड़ता है, जो हाथ-पैर पटककर हमारा मनोरंजन कर रहा है।"
दूसरी गौरैया: "चीं-चीं! हाँ, इसका यह हास्यास्पद नृत्य देखकर तो मुझे बहुत हँसी आ रही है। चलो, हम भी चहचहाकर इसके लिए सुर मिलाते हैं!"
In simple words: गौरैया जोड़ा पिताजी के कूदने को कोई अनोखा नाच समझकर आपस में हँसी-मजाक कर रहा होगा।
Exam Tip: पिताजी की झुँझलाहट पर पक्षियों के दृष्टिकोण से हास्य उत्पन्न करने वाले संवाद लिखें।
Question (ग). “एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।” जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया तो उन्होंने आपस में क्या बातें की होंगी? संभावित संवाद लिखिए।
Answer: घर की खोज में निकले गौरैया जोड़े का प्रथम प्रवेश के समय संभावित संवाद:
नर गौरैया: "चीं-चीं! तनिक इस स्थान को देखो, यह कितनी ठंडी हवा और पर्याप्त रोशनी से युक्त सुंदर घर है!"
मादा गौरैया: "चीं-चीं! हाँ स्वामी, और सबसे बढ़िया बात तो यह है कि यहाँ कोई शत्रु कौवा या बिल्ली आसानी से नहीं आ सकती। यह पंखा हमारे लिए उपयुक्त है।"
नर गौरैया: "बिलकुल सत्य कहा! पंखे की यह सुरक्षित गोल मोटर हमारे घोंसले के लिए सबसे उत्तम और आरामदायक आधार बनेगी।"
मादा गौरैया: "तो फिर विलंब कैसा? चलिए, कल प्रातः काल से ही तिनके और रूई लाकर सुंदर घोंसला बुनना प्रारंभ करते हैं।"
In simple words: चिड़ियाँ आपस में बातें कर रही होंगी कि यह घर बहुत हवादार और सुरक्षित है और यहाँ बिल्ली या कौवे का डर भी नहीं है।
Exam Tip: पक्षियों की मूलभूत आवश्यकताओं (हवा, सुरक्षा, शत्रुओं से बचाव) को संवादों के माध्यम से प्रदर्शित करें।
Question (घ). “उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुगा डालने लगे।” गौरैयों और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी? संभावित संवाद लिखिए।
Answer: पुनर्मिलन के समय गौरैया परिवार के बीच का अत्यंत भावुक कर देने वाला संभावित संवाद:
नन्हा बच्चा: "चीं-चीं! माँ, आप हमें अकेला छोड़कर कहाँ चली गई थीं? हम डर के मारे काँप रहे थे और पेट में बहुत भूख थी!"
मादा गौरैया (माँ): "चीं-चीं! शांत हो जाओ मेरे लाडलों! बाहर भोजन की खोज में थोड़ी अधिक दूरी तय करनी पड़ी। अब भय की कोई बात नहीं, यह स्वादिष्ट दाना ग्रहण करो।"
दूसरा बच्चा: "चीं-चीं! और पिताजी, आप हमारे लिए क्या लाए हैं? क्या हमारे लिए नरम रूई के फाहे लाए हैं?"
नर गौरैया (पिता): "चीं-चीं! हाँ मेरे प्यारे बच्चों, मैं तुम्हारे बिछौने के लिए मुलायम धागे और स्वादिष्ट कीट लाया हूँ। अब हम तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे।"
In simple words: बच्चे अपनी भूख और डर के बारे में माता-पिता को बता रहे होंगे और माता-पिता उन्हें प्यार से समझाकर दाना खिला रहे होंगे।
Exam Tip: इस संवाद में वात्सल्य रस (माता-पिता का बच्चों के प्रति प्रेम) का पुट अवश्य होना चाहिए।
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बदली कहानी
Question. मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।
Answer: यदि गौरैयों के घोंसले में अंडों से छोटे बच्चे उत्पन्न न हुए होते, तो कहानी का रुख पूरी तरह बदल जाता।
जब पिताजी पूरे क्रोध में स्टूल पर चढ़कर घोंसला तोड़ने आगे बढ़ते, तो उन्हें घोंसले के भीतर से नन्हीं 'चीं-चीं' की रुलाई सुनाई न देती। घोंसले को टटोलने पर उन्हें केवल बेजान तिनके, धागे और रूई के टुकड़े ही मिलते। वे बिना किसी संकोच के उस घोंसले को जड़ से उखाड़कर आँगन में फेंक देते।
माँ इस विनाश को चुपचाप उदासीनता से देखती रहतीं और पिताजी पर तंज कसते हुए कहतीं, "आखिरकार आपने अपनी हठ पूरी कर ही ली, गौरैया वैसे भी यहाँ अधिक दिन नहीं टिकती।" पिताजी अपनी इस सफलता पर गर्व से कहते, "मैंने तो पहले ही कहा था कि मैं पराजित होने वाला व्यक्ति नहीं हूँ!" इसके बाद वे रोशनदान पर कपड़ों को हटाकर कमरे को पुनः व्यवस्थित कर देते।
शाम को जब गौरैया जोड़ा दाना लेकर लौटता, तो अपने आशियाने को नष्ट पाकर वे स्तब्ध रह जाते। कुछ क्षण दीवार के कोने पर बैठकर वे मूक वेदना के साथ इस तबाही को निहारते और फिर पंख फैलाकर नीले आकाश में सदा के लिए विलीन हो जाते। घर में पुनः वही नीरस और उबाऊ सन्नाटा छा जाता। न तो सुबह की मधुर चहचहाहट सुनाई देती और न ही कोई हलचल होती। कुछ समय बीतने के बाद, शायद माँ और स्वयं पिताजी भी उस सूनेपन से व्याकुल हो उठते और उन्हें उन छोटी गौरैयों की बहुत याद आती।
In simple words: अगर चिड़िया के बच्चे न होते, तो पिताजी घोंसला तोड़ देते और चिड़ियाँ हमेशा के लिए घर छोड़कर चली जातीं। घर में शांति तो हो जाती, पर बाद में सबको उनकी बहुत याद आती।
Exam Tip: कहानी के इस वैकल्पिक अंत में पिताजी की क्षणिक जीत और उसके बाद घर में छाने वाले सूनेपन व उदासी के भाव को अच्छे शब्दों में पिरोएं।
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कहने का ढंग / क्रिया विशेषण
Question (क). “माँ खिलखिलाकर हँस दीं।” इस वाक्य में ‘खिलखिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं। कोई कार्य कैसे किया गया है, इसे बताने वाले शब्द ‘क्रियाविशेषण’ कहलाते हैं। ‘खिलखिलाकर’ भी एक क्रियाविशेषण शब्द है। अब नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
• पिताजी ने झिड़ककर कहा...
• माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा...
• उन्होंने गुस्से में कहा...
Answer: रेखांकित क्रियाविशेषण शब्दों का वाक्यों में नवीन प्रयोग इस प्रकार है:
1. झिड़ककर (बोलने का ढंग): गृहस्वामी ने आलसी नौकर को झिड़ककर आदेश दिया, "जल्दी से सारा काम समाप्त करो और बाहर जाओ।"
2. गंभीरता से (गहनता दर्शाने वाला ढंग): डॉक्टर ने मरीज के परिजनों से अत्यंत गंभीरता से कहा, "अब मरीज़ को पूर्ण विश्राम की परम आवश्यकता है।"
3. गुस्से में (क्रोध का ढंग): अपनी कीमती पुस्तक फटी हुई देखकर सोहन ने अत्यंत गुस्से में पूछा, "मेरी यह पुस्तक किसने फाड़ी है?"
In simple words: क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्दों को क्रियाविशेषण कहते हैं, जैसे 'झिड़ककर', 'गंभीरता से' और 'गुस्से में' यह बताते हैं कि कोई बात किस तरह कही गई।
Exam Tip: वाक्यों का निर्माण इस प्रकार करें कि क्रियाविशेषण शब्द का अर्थ और वाक्य का संदर्भ पूरी तरह स्पष्ट हो।
Question (ख). अब आप इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रियाविशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए। (संकेत - धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शर्माकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि।)
Answer: नवीन क्रियाविशेषण शब्दों का वाक्यों में प्रयोग निम्नलिखित है:
1. धीरे से: चोर ने धीरे से खिड़की खोली ताकि गृहस्वामी की नींद न उचट जाए।
2. जोर से: बादलों के जोर से गरजते ही बिजली गुल हो गई।
3. अटकते हुए: मंच पर पहली बार भाषण देते समय रोहन डर के कारण अटकते हुए बोल रहा था।
4. चिल्लाकर: डूबते हुए व्यक्ति ने मदद के लिए नदी के किनारे की ओर चिल्लाकर पुकारा।
5. शर्माकर: नन्ही बच्ची ने अपनी प्रशंसा सुनकर शर्माकर अपना मुँह छिपा लिया।
6. सहमकर: तेज आँधी-तूफान के आते ही पालतू कुत्ता मेज के नीचे सहमकर बैठ गया।
7. फुसफुसाते हुए: पुस्तकालय में बैठकर दोनों मित्र आपस में फुसफुसाते हुए विचार-विमर्श कर रहे थे।
In simple words: 'धीरे से', 'जोर से' आदि शब्द हमें यह बताते हैं कि कोई काम किस तरीके से किया जा रहा है।
Exam Tip: अलग-अलग प्रकार के हावों-भावों को स्पष्ट रूप से दर्शाने के लिए इन क्रियाविशेषण शब्दों का सार्थक प्रयोग करें।
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घर के प्राणी
Question. कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे?
Answer: लेखक के घर में रहने वाले विभिन्न जीव और उनके मानवीय क्रियाकलाप निम्नलिखित हैं:
| प्राणी का नाम | मनुष्यों जैसे किए जाने वाले कार्य |
|---|---|
| बिल्ली | वह अत्यंत चालाकी से घर में आती है और 'फिर आऊँगी' कहकर आश्वासन देती हुई चली जाती है। |
| चूहे | वे रात भर कमरों में धमाचौकड़ी (उछल-कूद) मचाते हैं। एक बूढ़ा चूहा बुजुर्गों की तरह अँगीठी के पीछे सर्दी से बचने बैठता है, जबकि दूसरा चूहा गर्मी से बचने के लिए टंकी के ऊपर चढ़कर आराम करता है। |
| चमगादड़ | शाम होते ही वे कसरत करने वाले पहलवानों की भाँति कमरे में पंख फैलाकर व्यायाम (कसरत) करना शुरू कर देते हैं। |
| कबूतर | वे दिन भर मधुर सुर में 'गुटर-गूँ' की तान छेड़कर संगीतज्ञों की तरह घर के लोगों को अपना गायन सुनाते हैं। |
| गौरैयाँ | वे बिना आज्ञा घर में प्रवेश कर किसी कुशल इंजीनियर या मकान खरीदार की तरह पूरे कमरे का गहन 'निरीक्षण' करती हैं और प्रसन्न होकर राग मल्हार गाती हैं। |
In simple words: लेखक ने अपने घर के जानवरों का वर्णन ऐसे किया है जैसे बिल्ली बातें करती हो, चूहे सर्दी-गर्मी महसूस करते हों और चमगादड़ कसरत करते हों।
Exam Tip: इस उत्तर को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रत्येक जीव के सामने उसके द्वारा किए जाने वाले विशिष्ट मानवीय कार्य को सारणीबद्ध (Table) रूप में दर्शाएं।
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हेर-फेर मात्रा का
Question. “माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।” “पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।” उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक मात्रा-भर के अंतर से उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाता है। अब नीचे दिए गए शब्दों की मात्राओं और अर्थों के अंतर पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
• नाच-नाचा-नचा
• हार-हरा-हारा
• पिता-पीता
• चूक-चुक
• नीचा-नीचे
• सहसा-साहस
Answer: मात्रा बदलने से उत्पन्न होने वाले नए शब्दों के अर्थपूर्ण वाक्य इस प्रकार हैं:
1. नाच - नाचा - नचा
• नाच: भारत के शास्त्रीय नाच (नृत्य) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।
• नाचा: वर्षा ऋतु के पहले मेघों को देखकर मोर जंगल में खूब नाचा।
• नचा: कठपुतली का खेल दिखाने वाला कलाकार धागों के सहारे गुड़ियों को उँगलियों पर नचा रहा था।
2. हार - हरा - हारा
• हार: दीपावली के शुभ अवसर पर माँ ने मुख्य द्वार के लिए गेंदे के फूलों का एक सुंदर हार बनाया।
• हरा: इस वर्ष अच्छी वर्षा होने के कारण संपूर्ण गाँव में हरा-भरा दृश्य दिखाई दे रहा है।
• हारा: कठिन प्रतियोगिता में बार-बार पराजित होने के बाद भी वह हिम्मत नहीं हारा।
3. पिता - पीता
• पिता: मेरे पूज्य पिता जी सदैव मुझे जीवन में सत्य के मार्ग पर चलने की शिक्षा देते हैं।
• पीता: स्वास्थ्य लाभ के लिए सोहन नियमित रूप से सुबह ताज़ा नारियल पानी पीता है।
4. चूक - चुक
• चूक: निशानेबाज की एक छोटी सी चूक के कारण स्वर्ण पदक उसके हाथों से निकल गया।
• चुक: राशन की दुकान बंद होने से पहले ही घर में रखा आटा पूरी तरह समाप्त हो (चुक) गया था।
5. नीचा - नीचे
• नीचा: किसी भी निर्धन व्यक्ति को उसके पहनावे के आधार पर कभी भी नीचा नहीं दिखाना चाहिए।
• नीचे: तेज धूप से बचने के लिए पथिक बरगद के विशाल वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगा।
6. सहसा - साहस
• सहसा: घने जंगल के शांत वातावरण में सहसा ही सूखे पत्तों के खड़कने की डरावनी ध्वनि गूँज उठी।
• साहस: रानी लक्ष्मीबाई ने अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों की सेना से लोहा लिया था।
In simple words: हिंदी में एक छोटी सी मात्रा (जैसे 'इ' की जगह 'ई') बदलने से पूरे शब्द का मतलब बदल जाता है, जैसे 'पिता' का अर्थ पिता जी है और 'पीता' का अर्थ पानी पीना है।
Exam Tip: मात्रा बदलने से बने दोनों शब्दों के उच्चारण और अर्थ के अंतर को भली-भाँति समझकर ही वाक्य निर्माण करें।
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वाद-विवाद
Question. कहानी में माँ द्वारा कही गई कुछ बातें नीचे दी गई हैं – “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।” “एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।” “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।” वाद-विवाद का विषय है – “माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।” इस कथन के पक्ष और विपक्ष में तर्क दीजिए।
Answer: इस विषय के पक्ष और विपक्ष में मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:
पक्ष में तर्क (यह दर्शाने के लिए कि माँ चिड़ियों को निकालना चाहती थीं):
• पहला तर्क: माँ ने स्वयं पिताजी को यह सुझाव दिया था कि केवल एक किवाड़ खुला रखकर बाकी सारे मार्ग अवरुद्ध कर दिए जाएँ ताकि गौरैयाँ बाहर निकल सकें।
• दूसरा तर्क: कहानी के आरंभ में जब गौरैयाँ घर का मुआयना कर रही थीं, तब माँ ने कहा था कि "पहले ही इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।" इससे संकेत मिलता है कि वे आरंभिक दौर में पक्षियों के वास के विरुद्ध थीं।
• तीसरा तर्क: घर में रहने वाले विभिन्न अनचाहे प्राणियों (चूहों, चमगादड़ों) की धमाचौकड़ी और कोलाहल से माँ भी परेशान थीं और वे एक शांत परिवेश चाहती थीं।
विपक्ष में तर्क (यह दर्शाने के लिए कि माँ चिड़ियों को नहीं निकालना चाहती थीं):
• पहला तर्क: जब पिताजी गौरैयों को बलपूर्वक खदेड़ रहे थे, तब माँ ने दृढ़तापूर्वक उन्हें रोका और कहा, "देखो जी, अब इन बेजुबानों को बाहर मत निकालो।"
• दूसरा तर्क: माँ ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि चिड़ियों ने अंडे दे दिए हैं और अब वे अपने बच्चों को छोड़कर कभी नहीं जाएँगी, जो उनके प्रति उनकी ममता को दर्शाता है।
• तीसरा तर्क: वे पिताजी द्वारा गौरैयों को खदेड़ने के हिंसक जतन (लाठी भाँजना आदि) पर हँसती थीं, जिससे स्पष्ट है कि वे इन प्रयासों को व्यर्थ और अनुपयुक्त मानती थीं।
• चौथा तर्क: घोंसले के टूटने के बाद, बच्चों की मूक पुकार सुनकर माँ ने तुरंत कपाट खोल दिए ताकि विलग हुए माता-पिता पुनः अपने नन्हों से मिल सकें, जो उनके दयालु हृदय का सबसे बड़ा प्रमाण है।
In simple words: शुरू में माँ भी चिड़ियों के शोर से परेशान होकर उन्हें बाहर निकालना चाहती थीं, लेकिन बाद में बच्चों और अंडों के प्रति दया भाव के कारण वे उन्हें घर में रखने के पक्ष में आ गईं।
Exam Tip: वाद-विवाद वाले प्रश्नों में हमेशा पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्कों को संतुलित और ठोस रूप में बिंदुवार प्रस्तुत करें।
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कहानी की रचना
Question (क). “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देख कर केवल मुस्कुराते रहे।” इस पंक्ति में बताया गया है कि पिताजी का दृष्टिकोण कैसे बदल गया। इस प्रकार यह विशेष वाक्य है। इस तरह के वाक्यों से कहानी और अधिक प्रभावशाली बन जाती है। आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
• कल्पना और बढ़ा-चढ़ा कर कहना...
• हास्य और व्यंग्य...
• सोचा कुछ और हुआ कुछ और...
• मनुष्य-जैसे व्यवहार...
• संवाद लेखन...
• भावनाओं का अनुमान लगाना...
Answer: इस सुंदर कहानी की प्रमुख साहित्यिक विशेषताएँ और उनके उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1. अतिशयोक्ति अलंकार (बढ़ा-चढ़ाकर कहना): पाठ में सामान्य बातों को बहुत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जैसे - "शोर से कानों के पर्दे फट जाना", "घर का सराय बन जाना" अथवा "बूढ़े चूहे को अधिक ठंड लगना।"
2. व्यंग्य व हास्य का अद्भुत पुट: माँ द्वारा पिताजी के पुरुषार्थ पर कसा गया तंज - "चूहों से तो पार पा नहीं सके, चले हैं चिड़ियाँ खदेड़ने!" पूरी कहानी में हास्य का संचार करता है।
3. अप्रत्याशित घटनाक्रम (सोचा कुछ और, हुआ कुछ और): पिताजी प्रत्येक बार यह मान बैठते हैं कि उन्होंने गौरैयों को परास्त कर दिया है, परंतु अगले ही पल वे पुनः कमरे में मजे से चहकती हुई दिखाई देती हैं।
4. मानवीकरण अलंकार (मनुष्यों जैसा व्यवहार): मूक पशु-पक्षियों में इंसानी प्रवृत्तियाँ दर्शाई गई हैं, जैसे - बिल्ली का 'फिर आऊँगी' कहना, गौरैयों का मकान पसंद करना और कबूतरों का संगीत सुनाना।
5. सटीक संवाद गठन: पात्रों के बीच होने वाले सूक्ष्म संवाद उनके अंतर्मन के भावों व विचारों को सीधे पाठकों के समक्ष उजागर कर देते हैं।
6. मनोवैज्ञानिक समझ (दूसरों की भावना ताड़ना): पात्र एक-दूसरे की मनःस्थिति का अनुमान सहज ही लगा लेते हैं, जैसे पिताजी का यह सोचना कि माँ उनकी खिल्ली उड़ा रही हैं।
In simple words: इस कहानी में जानवरों को इंसानों जैसा व्यवहार करते हुए दिखाया गया है, और हँसी-मजाक की बातें लिखी गई हैं जो कहानी को मजेदार बनाती हैं।
Exam Tip: साहित्यिक विशेषताओं को लिखते समय भाषा के अलंकारों (जैसे मानवीकरण, अतिशयोक्ति) का उल्लेख अवश्य करें।
Question (ख). इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।
Answer: कहानी की विशेषताओं के उपयुक्त उदाहरणों की पूर्ण तालिका नीचे दी गई है:
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी में से सटीक उदाहरण |
|---|---|
| 1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना | "जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो।" |
| 2. हास्य यानी हँसी मजाक का उपयोग किया जाना | माँ को ऐसे मौकों पर हमेशा मजाक सूझता है। हँसकर बोलीं, "चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?" |
| 3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और | पिताजी ने गौरैयों को बाहर निकाला, लेकिन थोड़ी ही देर बाद वे फिर कमरे में शान से मौजूद थीं। |
| 4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना | "एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।" |
| 5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना | "एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।" |
| 6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना | "वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।" यहाँ "धमा-चौकड़ी" चूहों के भागने और शोर मचाने के लिए प्रयुक्त हुआ है। |
| 7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना | "क्या मतलब? मैं कालीन बरबाद करवा लूँ?" पिताजी बोले... |
In simple words: इस तालिका में कहानी के अलग-अलग साहित्यिक रूपों को उनके सही उदाहरणों के साथ मिलाकर दिखाया गया है।
Exam Tip: इस प्रकार के अभ्यास वाले प्रश्नों को हल करने के लिए पाठ को दो-तीन बार बहुत बारीकी से पढ़ना आवश्यक होता है।
पाठ से आगे
Question (क). “गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
Answer: मैंने अपने घर के आस-पास गौरैया, कौवा, कबूतर और तोते जैसे अनेक पक्षियों की निम्नलिखित गतिविधियों को देखा है, जिनमें विभिन्न मानवीय भाव परिलक्षित होते हैं:
1. प्रातःकाल चहचहाना (प्रसन्नता): सुबह-सुबह सूर्योदय के समय पेड़ों पर कलरव करना उनके मन के उल्लास और नवजीवन की खुशी को दर्शाता है।
2. बच्चों को दाना खिलाना (वात्सल्य और ममता): अपनी चोंच से छोटे बच्चों के मुँह में दाना डालना उनके गहरे मातृ-प्रेम, सुरक्षा और समर्पण के भाव को उजागर करता है।
3. दूसरे पक्षियों को खदेड़ना (क्रोध व सुरक्षा की भावना): अपने घोंसले या भोजन के समीप किसी अन्य पक्षी को देखकर आक्रामक रूप धारण करना उनके भीतर अपने क्षेत्र की रक्षा और अधिकार जताने का भाव दिखाता है।
4. शिकारी को देखकर शोर मचाना (भय व सामूहिक सतर्कता): बिल्ली अथवा बाज को देखकर चीखना-चिल्लाना उनके भीतर के भय तथा अपने साथियों को सचेत करने की जिम्मेदारी के भाव को दर्शाता है।
In simple words: पक्षी भी हमारी तरह खुश होते हैं, अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं, दुश्मनों से अपनी रक्षा करते हैं और खतरा आने पर शोर मचाकर सबको सावधान करते हैं।
Exam Tip: पक्षियों की गतिविधियों के साथ उनसे जुड़े भावों (जैसे प्रसन्नता, भय, ममता) को अलग-अलग शीर्षकों में स्पष्ट करें।
Question (ख). “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देख कर केवल मुस्कुराते रहे।” कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?
Answer: हाँ, मैं अपने घर में अपना शयनकक्ष (कमरा) और अध्ययन की मेज अपने छोटे भाई/बहन के साथ साझा (Share) करता हूँ। इसके अतिरिक्त हम अपने खिलौने, कहानी की पुस्तकें और रंग-पेन भी आपस में मिलकर उपयोग करते हैं।
साझेदारी के दौरान कभी-कभी हमारे बीच चीजों के पहले उपयोग को लेकर अथवा खिलौने पर अधिकार जताने को लेकर मनमुटाव या छोटा-मोटा झगड़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति आने पर हम आपसी बातचीत द्वारा समस्या का शांतिपूर्ण समाधान ढूँढ़ते हैं। हम दोनों मिलकर यह नियम बना लेते हैं कि प्रत्येक सदस्य बारी-बारी से निश्चित समय के लिए उस वस्तु का उपयोग करेगा। यदि विवाद सुलझता नहीं है, तो हम अपने माता-पिता के पास जाकर निष्पक्ष मध्यस्थता का सहारा लेते हैं।
In simple words: मैं अपने खिलौने और कमरा अपने भाई-बहन के साथ बाँटता हूँ। जब हमारा कोई झगड़ा होता है, तो हम बारी-बारी से चीजों का इस्तेमाल करने का नियम बना लेते हैं।
Exam Tip: व्यक्तिगत जीवन के उदाहरण के साथ-साथ साझेदारी की समस्याओं को सुलझाने के व्यावहारिक तरीकों (जैसे आपसी बातचीत, बारी-बारी से उपयोग, बड़ों की मदद) को स्पष्ट करें।
Question (ग). परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
Answer: हाँ, मेरे जीवन में भी एक बार ऐसी घटना घटित हुई थी जब मात्र एक मुलाकात ने मेरी धारणा को पूरी तरह बदल दिया।
हमारे पड़ोस में एक नए व्यक्ति रहने आए थे जो स्वभाव से अत्यंत मूक, गंभीर और किसी से न मिलने वाले प्रतीत होते थे। उनकी इस चुप्पी के कारण मैंने मन ही मन यह धारणा बना ली थी कि वे अत्यधिक अभिमानी और क्रोधी स्वभाव के व्यक्ति हैं। परंतु एक दिन, जब हमारे पालतू डॉगी को चोट लग गई और घर पर कोई बड़ा सदस्य उपस्थित नहीं था, तब वे तुरंत सहायता के लिए आगे आए। उन्होंने न केवल डॉगी का प्राथमिक उपचार किया बल्कि अपनी गाड़ी से उसे अस्पताल भी ले गए। उनके इस अत्यंत परोपकारी और संवेदनशील व्यवहार को देखकर मेरी गलतफहमी सदा के लिए समाप्त हो गई और उनके प्रति मेरा दृष्टिकोण बदल गया।
In simple words: कई बार हम किसी को बिना जाने उसे गलत समझ लेते हैं, लेकिन जब हम उससे बात करते हैं या उसकी मदद देखते हैं, तो हमारी सोच बदल जाती है।
Exam Tip: इस उत्तर में अपनी किसी वास्तविक या काल्पनिक घटना का सुंदर व शिक्षाप्रद विवरण प्रस्तुत करें जो दृष्टिकोण में आए सकारात्मक बदलाव को स्पष्ट करे।
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चिड़ियों का घोंसला
Question (क). अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूँढ़िए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (सावधानी - उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है)
Answer: पक्षियों के घोंसलों से संबंधित प्रेक्षण तालिका नीचे दी गई है:
| क्रम संख्या | घोंसले को कहाँ देखा | घोंसला किन चीजों से बनाया गया था | घोंसला खाली था या नहीं | घोंसला किस पक्षी का था |
|---|---|---|---|---|
| 1. | हमारे घर की बालकनी में | सूखी टहनियाँ और घास | नहीं, उसमें अंडे थे | कबूतर |
| 2. | स्कूल के मैदान में लगे आम के पेड़ पर | तिनके, धागे और कुछ पत्ते | हाँ, खाली था | गौरैया |
| 3. | पड़ोस के घर की छत पर | मिट्टी और घास के रेशे | नहीं, उसमें दो छोटे चूजे थे | कोयल |
| 4. | हमारे गाँव में एक बहुत ऊँचे पेड़ पर | सूखी टहनियाँ और लोहे के तार | नहीं, उसमें एक पक्षी बैठा था | कौवा |
| 5. | रसोई की खिड़की के पास एक पौधे पर | पत्तों को धागे से सिलकर | नहीं, उसमें छोटे बच्चे थे | दर्जी चिड़िया (दर्जिल) |
In simple words: अलग-अलग पक्षी अपना घोंसला बनाने के लिए अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे कबूतर सूखी लकड़ियाँ इस्तेमाल करता है और दर्जिल चिड़िया पत्तों को सिलकर घोंसला बनाती है।
Exam Tip: इस तालिका को पूरा करते समय अपने वास्तविक प्रेक्षणों का विवरण दें और पक्षियों की सुरक्षा सम्बन्धी चेतावनी का विशेष ध्यान रखें।
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हास्य-व्यंग्य
Question (क). आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए।
Answer: इस हास्य और व्यंग्य से परिपूर्ण कहानी में मुझे निम्नलिखित वाक्यों को पढ़कर अत्यधिक हँसी आई:
1. "इतना भयंकर कोलाहल मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, परंतु संसार के लोग इसे मधुर पक्षी-गान कहते हैं!"
2. "एक चूहा सदैव अँगीठी के पीछे दुबककर बैठता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो वह वृद्ध हो चुका है और उसे अत्यधिक ठंड लगती है।"
3. "छोड़िए भी स्वामी! जो चूहों को तो घर से खदेड़ नहीं पाए, वे अब इन फुर्तीली चिड़ियों को बाहर निकालेंगे!"
4. "गौरैयाँ घोंसले से उड़कर दूसरे पंखे के डैने पर विश्राम करने लगीं, मानो उन्हें नीचे खड़े पिताजी का यह अनूठा नृत्य बहुत भा रहा हो।"
5. "तुम तो परम बुद्धिमान हो जी! घर के सभी कपाट खोल रखे हैं और चिड़ियों को बाहर भगा रहे हो। पहले बाकी द्वार बंद करो, तभी तो वे बाहर का रास्ता ढूँढ़ेंगी!"
6. "चलो, आपके कठोर प्रयास से घोंसले के दो तिनके तो बाहर आ गए, बाकी बचे दो हजार तिनके भी जल्द ही बाहर आ जाएँगे!"
In simple words: कहानी में माँ द्वारा पिताजी के बेअसर प्रयासों पर कही गई हँसी-मजाक की बातें और चूहों व चिड़ियों की हरकतें पढ़कर बहुत हँसी आती है।
Exam Tip: हास्य और व्यंग्य वाले वाक्यों को उद्धरण चिह्नों (" ") के भीतर लिखकर स्पष्ट करें ताकि वे प्रभावशाली दिखें।
Question (ख). अब चुने हुए वाक्यों में से कौन-कौन से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं? उन पर सही (✔) का चिह्न लगाइए।
Answer: कहानी में से चुने गए विशुद्ध 'व्यंग्य' वाले प्रमुख वाक्य निम्नलिखित हैं (जिनके सम्मुख सही का चिह्न अंकित किया गया है):
✔ “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” माँ ने व्यंग्य से कहा। (अक्षमता पर सीधा व्यंग्य)
✔ माँ को ऐसे मौकों पर हमेशा मजाक सूझता है। हँसकर बोली, “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” (पिताजी की कूद-फाँद का उपहास)
✔ “इतनी तकलीफ करने की क्या जरूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।” माँ ने हँसकर कहा। (पिताजी की मेहनत का मजाकिया समाधान)
✔ माँ फिर हँस दी। “तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो।” (पिताजी की बुद्धिमानी पर गहरा तंज)
✔ “चलो, दो तिनके तो निकल गए” माँ हँसकर बोलीं, “अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे!” (पिताजी के निष्फल परिश्रम का परिहास)
✔ “दरवाजे के नीचे से आ गई हैं,” माँ बोलीं। (पिताजी की जीत के दावों को तुरंत झुठलाना)
In simple words: व्यंग्य वह बात है जो सीधे न कहकर घुमाकर कही जाए और जिसमें हल्का सा मजाक छिपा हो, जैसे माँ का पिताजी को बहुत 'समझदार' कहना।
Exam Tip: व्यंग्य वाक्यों की पहचान करते समय यह ध्यान दें कि किस वाक्य में साधारण अर्थ के विपरीत कोई चुटीली बात कही गई है।
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आज की पहेली
Question. चित्र-पहेली में बिल्ली को चूहे तक पहुँचाइए।
Answer: बिल्ली से चूहे तक पहुँचने का सही मार्ग चित्र में जामुनी रंग (Purple line) द्वारा दर्शाया गया है। बिल्ली को नीचे बाईं ओर से प्रवेश करके भूल-भुलैया के घुमावदार रास्तों से होते हुए ऊपर दाईं ओर कोने में स्थित चूहे के बिल तक पहुँचाया जा सकता है।
In simple words: बिल्ली को चूहे तक पहुँचाने का सही रास्ता भूल-भुलैया के बीच से होकर जाता है, जिसे चित्र में नीली/बैंगनी रेखा से दिखाया गया है।
Exam Tip: भूल-भुलैया को हल करते समय हमेशा अंतिम छोर (चूहे) से उल्टी दिशा में शुरुआत करने पर सही रास्ता जल्दी मिल जाता है।
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