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Detailed Chapter 01 स्वदेश NCERT Solutions for Class 8 Hindi
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Class 8 Hindi Chapter 01 स्वदेश NCERT Solutions PDF
कक्षा 8 हिंदी मल्हार अध्याय 1 के प्रश्न उत्तर
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मेरी समझ से
Question 1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है- • सामाजिकता से • संवेदनहीनता से • कठोरता से • नैतिकता से
Answer: * संवेदनहीनता से
कवि इस काव्य पंक्ति में उस मनुष्य की निंदा करते हैं जिसके भीतर अपनी मातृभूमि के लिए कोई स्नेह या दयाभाव नहीं है। ऐसा व्यक्ति केवल सांस लेता है, परंतु उसका मन पत्थर की तरह भावशून्य हो चुका होता है। पत्थर की भाँति ही उसमें कोई संवेदना नहीं बचती, इसलिए यहाँ हृदय को पत्थर के समान संवेदनहीन बताया गया है।
In simple words: जिसके मन में अपने देश के लिए प्यार नहीं होता, उसका दिल पत्थर जैसा कठोर और संवेदनहीन हो जाता है।
Exam Tip: कवि के संदेश को स्पष्ट करने के लिए 'संवेदनहीनता' शब्द का प्रयोग अवश्य करें क्योंकि यह उत्तर का मुख्य आधार है।
Question 2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है? • देश की प्रगति • देश के प्रति प्रेम • देश की सुरक्षा • देश की स्वतंत्रता
Answer: * देश के प्रति प्रेम
प्रस्तुत कविता का मुख्य संदेश राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम और निष्ठा की भावना जगाना है। कवि के अनुसार, मनुष्य का जीवन तभी सफल माना जा सकता है जब वह देश के लिए कुछ करने का जज्बा रखे। यदि किसी के मन में स्वदेश के लिए आदर और कर्तव्य का भाव नहीं है, तो उसका पूरा जीवन ही व्यर्थ साबित होता है।
In simple words: इस कविता का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हमारे मन में अपने देश के प्रति सच्ची भक्ति और प्रेम उत्पन्न करना है।
Exam Tip: विकल्पों में से सही उत्तर चुनते समय कविता के केंद्रीय भाव 'देशप्रेम' पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” . इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है? • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए • देश की शासन व्यवस्था के लिए • देश के समस्त नागरिकों के लिए • देश के सभी प्राणियों के लिए
Answer: * देश के समस्त नागरिकों के लिए
इस पंक्ति के माध्यम से कवि देश के सभी लोगों को संबोधित कर रहे हैं। यहाँ 'हम' का मतलब भारत के हर एक निवासी से है जो इस देश का मालिक और रक्षक है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में देश की बागडोर सीधे तौर पर यहाँ की जनता के हाथों में होती है। कवि इसी स्वाभिमान और जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए प्रत्येक नागरिक को राजा-रानी के रूप में देखते हैं।
In simple words: 'हम' का अर्थ देश के सभी आम लोगों से है जो अपने देश के वास्तविक स्वामी और रक्षक हैं।
Exam Tip: लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक के अधिकारों को ध्यान में रखकर इस उत्तर को स्पष्ट करें।
Question 4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है? • जिसमें साहस की कमी है • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
Answer: * जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
कविता की शुरुआत में ही स्पष्ट किया गया है कि देश के लिए प्रेम न रखने वाला मन किसी बेजान पत्थर जैसा होता है। जिसमें अपनी भूमि के लिए समर्पण और स्नेह की तरंगें नहीं उठतीं, उसका जीवन पूरी तरह शुष्क माना जाता है। कवि के दृष्टिकोण में सच्चे देशप्रेम के बिना मनुष्य के जीवन का कोई सार्थक मोल नहीं रह जाता है।
In simple words: जिस मनुष्य के दिल में अपने देश के लिए प्यार और भावनाएँ नहीं होतीं, उसका दिल पत्थर की तरह कठोर माना जाता है।
Exam Tip: कविता की पहली पंक्ति को ध्यान में रखकर उत्तर लिखें और 'देशप्रेम' को जीवन का सबसे मुख्य तत्व बताएं।
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मिलकर करें मिलान
Question. कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|---|
| 1. | जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 1. जिस देश की ज्ञान- संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 2. | जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
| 3. | जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 4. | सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
सही मिलान वाली तालिका नीचे दी गई है:
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (सही अर्थ) |
|---|---|---|
| 1. | जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 2. | जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
| 3. | जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 1. जिस देश की ज्ञान- संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 4. | सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
Exam Tip: परीक्षा में मिलान वाले प्रश्नों को हल करते समय पंक्तियों के मुख्य शब्दों जैसे 'साहस', 'जोश', 'ज्ञानी' आदि के अर्थ को समझकर मिलान करें।
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पंक्तियों पर चर्चा
Question (क). “निश्चित है निःसंशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को।” इन पंक्तियों का अर्थ और विचार लिखिए।
Answer:
अर्थ: कवि इन पंक्तियों में इस अटल सत्य को दर्शाते हैं कि हर प्राणी की मृत्यु तय है। जिस प्रकार काल रूपी दीपक निरंतर जलता रहता है और पतंगे उसकी लौ में समर्पित हो जाते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य का जीवन भी एक दिन समाप्त होना है। जीवन की इस क्षणभंगुरता में कोई संदेह नहीं है.
विचार: मौत से भयभीत होने के बजाय हमें अपने सीमित जीवन को परोपकार और देश के कल्याण में लगाना चाहिए। जब तक जीवन है, उसे समाज और मानवता की सेवा में समर्पित कर सार्थक बनाना ही हमारा ध्येय होना चाहिए।
In simple words: मृत्यु एक अटल सत्य है, इसलिए हमें मौत से डरे बिना अपने इस छोटे से जीवन को देश और समाज की भलाई के कामों में लगाना चाहिए।
Exam Tip: कवि के काल-दीपक और परवाने वाले उदाहरण को समझाते हुए जीवन की क्षणभंगुरता (नश्वरता) का उल्लेख अवश्य करें।
Question (ख). “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।” इन पंक्तियों का अर्थ और विचार लिखिए।
Answer:
अर्थ: इन पंक्तियों के माध्यम से कवि हमारे भीतर के आत्मविश्वास व राष्ट्रभक्ति को जागृत करते हैं। वे कहते हैं कि हमारे पास अपनी खुद की क्षमता, हौसला और संसाधन मौजूद हैं, जिनके बल पर हम अपने देश को प्रगतिशील और स्वतंत्र रख सकते हैं। किंतु यदि किसी मनुष्य के मन में अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम ही न हो, तो उसका हृदय पत्थर की भाँति निर्जीव है।
विचार: देश की सुरक्षा और तरक्की सिर्फ हथियारों से नहीं होती, बल्कि नागरिकों के सच्चे अनुराग से होती है। समाज और राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव तभी आ सकता है जब हर व्यक्ति के दिल में देश के प्रति समर्पण, त्याग और कर्तव्य का भाव जीवित हो।
In simple words: हमारे पास आगे बढ़ने की पूरी शक्ति है। लेकिन अगर हमारे अंदर देश के लिए प्यार नहीं है, तो सब बेकार है - इसलिए सच्चा देशप्रेम ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
Exam Tip: आत्मविश्वास और हथियारों के मुकाबले आत्मबल/देशप्रेम के महत्व को रेखांकित करते हुए उत्तर लिखें।
Question (ग). “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।” इन पंक्तियों का अर्थ और विचार लिखिए।
Answer:
अर्थ: यह काव्य पंक्ति उन लोगों की आलोचना करती है जिनका जीवन भावनाओं और संवेदनाओं से खाली है। कवि का मानना है कि जिसके भीतर प्रेम, दया और देश के प्रति गौरव की भावना नहीं बहती, वह इंसान जीवित होने के बाद भी एक पत्थर की तरह बेजान है।
विचार: मानव जीवन में संवेदनाओं का होना बहुत आवश्यक है, विशेषकर अपनी मातृभूमि के लिए। सिर्फ शारीरिक रूप से जीवित रहना जीवन नहीं है, बल्कि देशप्रेम और संवेदनशीलता से युक्त होकर जीना ही वास्तविक जीवन कहलाता है।
निष्कर्ष रूप में: ये सभी पंक्तियाँ हमें जीवन की नश्वरता का बोध कराती हैं और हमारे भीतर देश के लिए अपार प्रेम व आत्मबल का संचार करती हैं। इनके बिना कोई भी जीवन पूर्ण नहीं हो सकता।
In simple words: जिसके मन में देश के प्रति कोई अच्छी भावना और प्रेम नहीं है, उसका दिल पत्थर जैसा है। सच्चा मनुष्य वही है जो संवेदनशील हो और अपने देश से प्यार करे।
Exam Tip: इस उत्तर में 'भावना' और 'संवेदनशीलता' के महत्व को विशेष रूप से स्पष्ट करें।
कक्षा 8 मल्हार के अन्य प्रश्न उत्तर
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सोच-विचार के लिए
Question (क). “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
Answer: इस काव्य पंक्ति में 'राजा-रानी' शब्द भारत देश के हर एक आम नागरिक को कहा गया है। ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि यह देश हमें भोजन, जल, ज्ञान और मान-सम्मान जैसी सभी महत्वपूर्ण चीजें प्रदान करता है। लोकतांत्रिक भावना के अनुसार इस देश के असली शासक इसके नागरिक ही हैं, जो पूरे गर्व और स्वाभिमान के साथ अपनी मातृभूमि की रक्षा और सम्मान करते हैं।
In simple words: भारत का हर नागरिक अपने देश का राजा और रानी है क्योंकि लोकतंत्र में देश की असली ताकत और सम्मान जनता के हाथों में ही होता है।
Exam Tip: उत्तर में नागरिकों के 'स्वाभिमान' और 'लोकतांत्रिक अधिकार' का उल्लेख अवश्य करें।
Question (ख). ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
Answer: 'संसार-संग चलने' का तात्पर्य वक्त, समाज और दुनिया के बदलते स्वरूप के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए निरंतर प्रगति की राह पर आगे बढ़ना है। जो लोग या राष्ट्र बदलते समय की माँगों के अनुसार खुद को नहीं ढालते, वे विकास की दौड़ में पीछे छूट जाते हैं और समाज में उनका अस्तित्व धुंधला हो जाता है। ऐसे लोगों को दुनिया भी भुला देती है और वे प्रभावहीन हो जाते हैं।
In simple words: दुनिया के साथ चलने का मतलब है समय के साथ अपने आप को बदलना और आगे बढ़ते रहना। जो लोग ऐसा नहीं करते, वे पीछे छूट जाते हैं और कोई उनकी परवाह नहीं करता।
Exam Tip: उत्तर में 'समय के साथ तालमेल' और 'प्रगति' जैसे मुख्य बिंदुओं पर जोर दें।
Question (ग). “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
Answer: इस पंक्ति का भाव यह है कि जिस मनुष्य का हृदय अपने देश की समस्याओं, दुखों या उसके प्रति अनुराग से प्रभावित नहीं होता, उसका जीवन इस वसुंधरा पर केवल एक भार के समान है। ऐसा व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ के लिए सांसें लेता है, परंतु समाज अथवा देश के उत्थान के लिए उसका कोई सकारात्मक योगदान नहीं होता।
In simple words: जो व्यक्ति अपने देश और यहाँ के लोगों के सुख-दुख में कोई रुचि नहीं रखता, उसका जीवन इस धरती पर केवल एक बोझ की तरह होता है।
Exam Tip: धरती पर 'बोझ' होने का अर्थ स्पष्ट करते हुए समाज के प्रति निष्क्रियता और संवेदनहीनता को दर्शाएं।
Question (घ). कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
Answer: देश-प्रेम का तात्पर्य केवल मन में अपने राष्ट्र के प्रति आदर रखना ही नहीं है, बल्कि अपने कर्मों से देश की सेवा और उन्नति में योगदान देना है। इसके अंतर्गत देश की सीमाओं व संपदा की रक्षा करना, समाज सुधार के कार्य करना, कुप्रथाओं का विरोध करना तथा सभी देशवासियों के साथ भाईचारे व सहयोग का व्यवहार रखना शामिल है।
In simple words: देश से प्यार करने का मतलब सिर्फ नारे लगाना नहीं है, बल्कि अपने अच्छे कामों से देश को सुंदर बनाना और आपस में मिलजुल कर रहना है।
Exam Tip: देश-प्रेम के व्यावहारिक पक्षों (जैसे सेवा, कर्तव्य व भाईचारा) को भी उत्तर में शामिल करें।
Question (ङ). यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
Answer: इस आह्वान गीत की प्रमुख साहित्यिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. ओजपूर्ण व प्रेरक शैली: यह रचना पाठकों के हृदय में राष्ट्रभक्ति, आत्मविश्वास और वीरता का संचार करती है।
2. प्रभावशाली भाषा व पुनरावृत्ति: "वह हृदय नहीं है, पत्थर है..." जैसी पंक्तियों की आवृत्ति कविता के मूल संदेश को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से स्थापित करती है।
3. गहन भावात्मकता: संपूर्ण काव्य में देश के प्रति गहरी संवेदनशीलता और भावनात्मक जुड़ाव प्रकट होता है।
4. नैतिक चेतना: यह पाठकों को स्वयं का मूल्यांकन करने तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।
5. साहित्यिक सौंदर्य: कविता में अनुप्रास, रूपक तथा प्रतीकात्मक शैली (जैसे काल-दीप, परवाना, रस-धार आदि) का बहुत ही सटीक प्रयोग किया गया है जो इसकी सुंदरता को बढ़ाता है।
In simple words: इस कविता की भाषा बहुत सरल और सुंदर है। इसमें बार-बार आने वाली पंक्तियाँ हमारे मन में जोश भर देती हैं और हमें देश के लिए कुछ अच्छा करने की सीख देती हैं।
Exam Tip: उत्तर लिखते समय काव्य सौंदर्य, भाषा की शैली और अलंकारों (जैसे रूपक, अनुप्रास) का बिंदुवार उल्लेख करें।
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अनुमान और कल्पना से
Question (क). “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
Answer: यहाँ 'खजाने' शब्द का उपयोग किसी भौतिक धन-दौलत या स्वर्ण-मुद्राओं के लिए नहीं, बल्कि भारत की अमूल्य प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और ज्ञान संबंधी समृद्धियों के लिए किया गया है। भारत भूमि पावन नदियों, विशाल पर्वतों, गहन वनों, अद्भुत कला-संगीत, समृद्ध साहित्य और नैतिक मूल्यों का खजाना है, जिसका लोहा पूरा विश्व मानता है।
In simple words: इस कविता में खजाने का मतलब सोना-चाँदी नहीं, बल्कि हमारे देश की नदियाँ, पहाड़, जंगल, पुरानी इमारतें, ज्ञान और अच्छी आदतें हैं।
Exam Tip: उत्तर में भौतिक संपत्ति (सोना-चाँदी) और प्राकृतिक/सांस्कृतिक संपदा के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question (ख). “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
Answer: 'उगे बढ़े' शब्द का प्रयोग भारत के प्रत्येक नागरिक के विकास और पोषण के संदर्भ में हुआ है। हमारी मातृभूमि ने हमें अन्न और जल देकर पाल-पोसकर बड़ा किया है। हमारा संपूर्ण अस्तित्व, संस्कार, पहचान और संस्कृति इसी पावन मिट्टी से जुड़े हैं। इस प्रकार, जन्मभूमि ही हमारे जीवन के विकास की मूल आधारशिला है।
In simple words: 'उगे बढ़े' का मतलब हम सभी देशवासी हैं, क्योंकि इसी धरती पर हमारा जन्म हुआ, और यहीं का अन्न-पानी खाकर हम बड़े हुए हैं।
Exam Tip: जन्मभूमि को जीवन का आधार और पोषण का स्रोत बताते हुए अपनी बात रखें।
Question (ग). “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
Answer: यहाँ 'पत्थर' शब्द को एक रूपक की तरह इस्तेमाल किया गया है, क्योंकि पत्थर कठोर, निर्जीव और भावनाहीन होता है। जिस प्रकार पत्थर पर किसी सुख या दुख का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, उसी प्रकार देश के प्रति प्रेम और संवेदना से रहित मनुष्य का दिल भी पूरी तरह संवेदनहीन, जड़ और निष्क्रिय होता है। ऐसा व्यक्ति समाज के विकास में कोई रुचि नहीं दिखाता।
In simple words: पत्थर में कोई जान या भावना नहीं होती। उसी तरह जिस इंसान को अपने देश से प्यार नहीं होता, उसका दिल भी बेजान और पत्थर जैसा माना जाता है।
Exam Tip: पत्थर की मुख्य विशेषताओं (कठोरता, संवेदनहीनता, जड़ता) की तुलना मनुष्य के असंवेदनशील स्वभाव से करें।
Question (घ). कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?
Answer:
पत्थर: "मेरा सफर बहुत लंबा और अनोखा रहा है। जब मैं बहती नदी की गोद में था, तब तेज लहरें मुझसे टकराकर मुझे सुंदर आकार देती थीं। इंसानों ने मेरा कई रूपों में उपयोग किया - कभी किसी मंदिर का देवता बनाया, तो कभी मकानों की बुनियाद में जगह दी। मगर अफसोस, जब भी मनुष्य मेरी गहराई और स्थिरता को समझ नहीं पाता, तो मुझे बेजान और कठोर मान लेता है।"
मैं: "हे पाषाण! तुम वास्तव में कठोर नहीं हो, अपितु तुम तो सहनशीलता और अडिगता के प्रतीक हो। तुमने सदा चुपचाप संघर्षों को झेला है और दूसरों का आधार बने हो। असल में पत्थर तो वह इंसान है जो अपने देश की मिट्टी और समाज के प्रति कोई संवेदना नहीं रखता और पूरी तरह संवेदनहीन बन चुका है।"
In simple words: पत्थर अपनी यात्रा के बारे में बताता है कि कैसे वह नदी से निकलकर मूर्ति बना। हम उसे सांत्वना देते हैं कि असली कठोर वह नहीं, बल्कि वह इंसान है जिसके मन में अपनों के लिए प्यार नहीं है।
Exam Tip: संवादात्मक शैली (Dialogue form) का उपयोग करते हुए दोनों पक्षों (पत्थर और मनुष्य) की भावनाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question (ङ). देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
Answer: राष्ट्रभक्ति का अर्थ मात्र देश की सरहदों की रखवाली करना नहीं है, बल्कि उसके आंतरिक गौरव, पर्यावरण और संपदा को भी बचाना है। हमें निम्नलिखित अमूल्य धरोहरों का संरक्षण करने की आवश्यकता है:
1. नैसर्गिक संपदा: नदियां, वन, स्वच्छ वायु और उपजाऊ भूमि, जो हमारे जीवित रहने के मुख्य स्रोत हैं।
2. ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें: प्राचीन मंदिर, किले, गुफाएं, स्मारक और शिलालेख, जो हमारे समृद्ध इतिहास को दर्शाते हैं।
3. भाषा, साहित्य और लोक कलाएँ: हमारी मातृभाषा और क्षेत्रीय लोक संस्कृतियाँ जो हमारे समाज की पहचान हैं।
4. पारंपरिक व देशी ज्ञान: औषधीय ज्ञान और जनजातीय परंपराएं जो लुप्त होने की कगार पर हैं।
5. मानव संसाधन: देश के बच्चों और नागरिकों को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रदान करना।
संरक्षण का महत्व: यदि हम आज इन अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित नहीं रखेंगे, तो भविष्य की पीढ़ियों के पास न तो अपनी विशिष्ट पहचान बचेगी और न ही आगे बढ़ने के संसाधन। देश को शक्तिशाली और समृद्ध बनाए रखने के लिए इन सब की सुरक्षा परम आवश्यक है।
In simple words: देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ हमें अपने पानी, जंगलों, ऐतिहासिक इमारतों और अपनी भाषा को भी बचाना चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी सुखी रह सके।
Exam Tip: संसाधनों के संरक्षण के विभिन्न आयामों (प्राकृतिक, सांस्कृतिक और मानव संसाधन) को अलग-अलग बिंदुओं में वर्गीकृत करके लिखें।
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कविता की रचना
तुकबंदी (Rhyming Words) की समझ
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी।” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों ‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ की अंतिम ध्वनि एक समान है। इस काव्य विशेषता को ‘तुक मिलाना’ (Rhyming) कहा जाता है।
Question (क). शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
Answer: कविता में समान तुक वाले शब्दों (जैसे 'दाना-पानी', 'राजा-रानी') का प्रयोग करने से उसमें एक सुंदर प्रवाह और गेयता (लय) आ जाती है। यह संगीतात्मक लय पाठकों और श्रोताओं को आकर्षित करती है, जिससे कविता आसानी से याद हो जाती है। इसके अतिरिक्त, तुकबंदी से काव्य का मूल संदेश अधिक गहराई और प्रभाव के साथ लोगों के दिलों को छूता है।
In simple words: कविता में तुक मिलाने से उसमें गाने जैसा एक सुंदर ताल आ जाता है, जिसे पढ़ने और सुनने में बहुत आनंद आता है और वह जल्दी याद हो जाती है।
Exam Tip: तुकबंदी के मुख्य लाभ जैसे 'गेयता', 'संगीतात्मकता' और 'स्मरणशीलता' का उल्लेख अपने उत्तर में करें।
Question (ख). कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
Answer: इस रचना को अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाने के लिए कवि ने निम्नलिखित साहित्यिक विधाओं का सहारा लिया है:
1. ओजस्वी आह्वान शैली: संपूर्ण काव्यपाठ में पाठकों को राष्ट्र के प्रति जागरूक करने के लिए एक प्रेरणादायक पुकार है।
2. पुनरुक्ति प्रकाश: मुख्य पंक्ति "वह हृदय नहीं है, पत्थर है..." का बार-बार दोहराव पाठकों के मन पर अमिट छाप छोड़ता है।
3. रूपक तथा प्रतीकों का प्रयोग: जैसे 'पत्थर' का उपयोग भावनाहीनता दिखाने के लिए तथा 'परवाना' का उपयोग देश पर न्योछावर होने वाले वीरों के प्रतीक के रूप में किया गया है।
4. संतुलित वाक्य गठन: सभी पंक्तियों की लंबाई और प्रवाह लगभग एक समान है, जिससे एक सुंदर संगीतात्मक संतुलन बना रहता है।
5. हृदयस्पर्शी भाषा: सरल और मधुर शब्दावली के उपयोग से राष्ट्रभक्ति की भावनाएं सहज रूप से उभर कर सामने आती हैं।
In simple words: इस कविता को सुंदर बनाने के लिए इसमें वीर रस की भाषा का प्रयोग किया गया है, और मुख्य बातों को बार-बार दोहराया गया है ताकि वे हमारे मन में बैठ सकें।
Exam Tip: साहित्यिक सौंदर्य को स्पष्ट करने के लिए आह्वान शैली, पुनरुक्ति, रूपक तथा प्रतीकों जैसे तकनीकी शब्दों का प्रयोग करें।
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आपकी कविता
Question. देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए- वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
Answer:
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।
जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं।
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं।
जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी।।
जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिये हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।।
उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निःसंशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।।
सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
In simple words: इस कविता में देश के प्रति समर्पण, समय के साथ आगे बढ़ने और राष्ट्र की सेवा करने के महत्व को काव्यात्मक रूप में दर्शाया गया है।
Exam Tip: इस कविता को लिखते समय तुकबंदी (समान ध्वनि वाले शब्द जैसे सार-संसार, पानी-रानी, दीवानी-लासानी) का विशेष ध्यान रखें।
कक्षा 8 मल्हार अध्याय 1 अंतर्गत प्रश्न उत्तर
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भाषा की बात
Question (क). शब्द से जुड़े शब्द: नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए –
Answer:
‘स्वदेश’ (मातृभूमि) से जुड़े प्रमुख शब्द निम्नलिखित हैं:
• प्यार (Love)
• जोश (Enthusiasm)
• भाव (Emotion)
• रस-धार (Flow of essence)
• साहस (Courage)
• मिट्टी (Soil)
• दाना-पानी (Sustenance)
• माता-पिता (Parents)
• बंधु (Kinsmen)
In simple words: 'स्वदेश' यानी हमारे अपने देश से कई प्यारी चीजें जुड़ी हैं, जैसे हमारी मिट्टी, माता-पिता, भाई-बंधु, साहस, जोश और देशप्रेम।
Exam Tip: परीक्षा में इस प्रकार के शब्द-जाल (Word-web) को बनाते समय केंद्र में मुख्य शब्द रखकर उससे सीधे संबंधित शब्दों को तीर या रेखाओं द्वारा जोड़ें।
Question (ख). विराम चिह्नों को समझें: निम्नलिखित पंक्तियों में योजक चिह्न (-) लगा है। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके? लिखिए।
• “जो चल न सका संसार-संग”
• “बहती जिसमें रस-धार नहीं”
• “पाया जिसमें दाना-पानी”
• “हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
• “हम हैं जिसके राजा-रानी”
• “जिससे न जाति-उद्धार हुआ”
Answer:
योजक चिह्नों को हटाकर अर्थ को स्पष्ट करने वाले संबंध-सूचक और अव्यय शब्द निम्नलिखित हैं:
• संसार-संग ➔ संसार के संग (के)
• रस-धार ➔ रस की धार (की)
• दाना-पानी ➔ दाना और पानी (और)
• माता-पिता बंधु ➔ माता-पिता और भाई-बंधु (और)
• राजा-रानी ➔ राजा और रानी (और)
• जाति-उद्धार ➔ जाति का उद्धार (का)
In simple words: योजक चिह्न (-) दो शब्दों को आपस में जोड़ता है। जब हम इसे हटाते हैं, तो उनके बीच 'और', 'की', 'के' या 'का' जैसे शब्द जोड़कर अर्थ को साफ़ करते हैं।
Exam Tip: योजक चिह्न का विग्रह करते समय दोनों शब्दों के आपसी संबंध के अनुसार सही कारक चिह्न या समुच्चयबोधक (जैसे 'और') का चयन करें।
Question (ग). शब्द-मित्र: “है जान एक दिन जाने को” “है काल-दीप जलता हरदम” उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे- ‘जान एक दिन जाने को है।’ ‘काल-दीप हरदम जलता है।’ अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए। इसके अतिरिक्त नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।।”
Answer:
1. 'है' को अंत में लिखकर गद्य रूप में परिवर्तन (मूल पंक्तियाँ):
• है जान एक दिन जाने को ➔ जान एक दिन जाने को है।
• है काल-दीप जलता हरदम ➔ काल-दीप हरदम जलता है।
2. 'है, हैं' का प्रयोग पंक्ति के प्रारंभ में करके पुनर्गठन:
• "जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी" ➔ हैं जिस पर ज्ञानी भी मरते, जिस पर है दुनिया दीवानी।
• "सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं" ➔ हैं सब कुछ अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
सौंदर्य में परिवर्तन: 'है' अथवा 'हैं' शब्द को पंक्ति की शुरुआत में रखने से कविता का प्रवाह और अधिक संगीतमय हो जाता है। इससे काव्य में ओज और सुनने में मधुरता का अनूठा प्रभाव उत्पन्न होता है, जो साधारण गद्य वाक्यों में नहीं मिल पाता।
In simple words: जब हम 'है' या 'हैं' को वाक्य के शुरू में लगाते हैं तो वह कविता की तरह सुंदर और संगीतमय लगता है। अंत में लगाने पर वह सामान्य बातचीत की भाषा (गद्य) जैसा बन जाता है।
Exam Tip: कविता की गेयता (लय) बढ़ाने के लिए शब्द-क्रम (अन्वय) में जो फेरबदल किया जाता है, उसे समझकर उत्तर स्पष्ट करें।
Question (घ). समानार्थी शब्द: कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।
(विकल्प: दिल, पाहन, प्रदीप, धरा, जग, असि, संसार, कृपाण, जी, दीपक, पाषाण, पृथ्वी)
Answer:
दिए गए शब्दों के सही समानार्थी शब्दों की तालिका नीचे दी गई है:
| मूल शब्द | समानार्थी शब्द 1 | समानार्थी शब्द 2 |
|---|---|---|
| भू | पृथ्वी | धरा |
| दीप | दीपक | प्रदीप |
| हृदय | दिल | जी |
| तलवार | कृपाण | असि |
| दुनिया | संसार | जग |
| पत्थर | पाषाण | पाहन |
Exam Tip: समानार्थी शब्दों को याद रखने से आपकी भाषा और लेखन शैली अधिक समृद्ध और प्रभावशाली बनती है।
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कविता का शीर्षक
Question. “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
Answer: यदि मुझे इस सुंदर कविता के लिए एक नया शीर्षक चुनना हो, तो मैं "जिस देश पर है दुनिया दीवानी" पंक्ति का चयन करूँगा।
इस शीर्षक का चुनाव करने का मुख्य कारण यह है कि हमारा देश भारत अपनी अनूठी संस्कृति, ज्ञान और महान मूल्यों के कारण सदियों से पूरे विश्व को आकर्षित करता रहा है। यह पंक्ति न केवल देशवासियों में गर्व की भावना भरती है, बल्कि दुनिया भर में हमारे देश के सम्मान और प्रभाव को भी बहुत सुंदर तरीके से दर्शाती है।
In simple words: हम अपनी कविता का नाम "जिस देश पर है दुनिया दीवानी" रख सकते हैं क्योंकि हमारा देश इतना महान और सुंदर है कि पूरी दुनिया इसकी दीवानी है।
Exam Tip: शीर्षक का चुनाव हमेशा कविता के केंद्रीय विचार और सबसे प्रभावशाली पंक्ति को ध्यान में रखकर करें।
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पाठ से आगे
आपकी बात
Question (क). नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✔) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?
Answer: ‘स्वदेश प्रेम’ दर्शाने वाली प्रमुख गतिविधियाँ निम्नलिखित हैं (जिन्हें चित्रों में सही का चिह्न दिया गया है):
1. पौधों को पानी देना और पर्यावरण की रक्षा करना (✔)
2. बुजुर्गों को रास्ता पार कराना और उनकी मदद करना (✔)
3. सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई रखना व कूड़ा कचरा उठाना (✔)
4. राष्ट्रध्वज (तिरंगे) को आदरपूर्वक सलामी देना (✔)
5. सीमा पर तैनात देश के वीर सैनिक का सम्मान करना (✔)
6. नियमों का पालन करना (जैसे बैंक या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कतार में खड़े होना) (✔)
7. सार्वजनिक बाग-बगीचों के नियमों का पालन करना (जैसे 'फूल न तोड़ें' का निर्देश मानना) (✔)
8. किसान द्वारा खेत में कठिन परिश्रम करके देश के लिए अन्न उपजाना (✔)
In simple words: देश के नियम मानना, साफ-सफाई रखना, दूसरों की मदद करना, और अपने तिरंगे व सैनिकों का सम्मान करना ही असली स्वदेश प्रेम है।
Exam Tip: चित्रों पर आधारित प्रश्नों में हमेशा उन गतिविधियों को चुनें जो नागरिक कर्तव्यों, नैतिकता और देश के कल्याण से जुड़ी हों।
Question (ख). अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
Answer: हमारे द्वारा चुने गए चित्रों के पीछे के प्रमुख तर्क निम्नलिखित हैं:
1. पौधों को जल देना और साफ-सफाई: यह कार्य पर्यावरण संरक्षण और हमारे सार्वजनिक संसाधनों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी को प्रकट करता है।
2. सैनिकों का आदर: सरहद पर अपनी जान की बाजी लगाने वाले जवानों का सम्मान करना हमारे भीतर कृतज्ञता और सम्मान का भाव दिखाता है।
3. आपसी सहायता एवं बुजुर्गों की सेवा: समाज में मिलकर काम करना और बड़ों की सेवा करना आपसी एकता, प्रेम और सांस्कृतिक भाईचारे को सुदृढ़ बनाता है।
4. कृषि कार्य (किसान): कठिन परिश्रम से अन्न उपजाना देश को आत्मनिर्भर और खाद्य सुरक्षा के मामले में मजबूत बनाता है।
5. सार्वजनिक नियमों व संपत्ति की सुरक्षा: अनुशासन में रहना तथा राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना एक सच्चे और सभ्य नागरिक के कर्तव्य का प्रमाण है।
6. राष्ट्रध्वज फहराना: यह राष्ट्रीय स्वाभिमान, संप्रभुता और देश के गौरव के प्रति हमारी निष्ठा को व्यक्त करता है।
In simple words: देश की सफाई करना, बुजुर्गों की मदद करना, पौधों को बचाना और देश के नियमों को मानना ही हमारी देशभक्ति को साबित करता है।
Exam Tip: तर्क देते समय प्रत्येक गतिविधि को सीधे तौर पर 'देश के हित' और 'नागरिक कर्तव्य' से जोड़कर लिखें।
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हमारे अस्त्र-शस्त्र
Question. “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं। आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे? • विद्यार्थी • अध्यापक • कृषक • चिकित्सक • वैज्ञानिक • श्रमिक • पत्रकार
Answer: विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत राष्ट्रभक्तों के 'अस्त्र-शस्त्र' इस प्रकार हैं:
• विद्यार्थी: उनकी सच्ची शिक्षा, लगन और उत्कृष्ट ज्ञान।
• अध्यापक: विद्यार्थियों को दिया जाने वाला श्रेष्ठ ज्ञान और अच्छे नैतिक संस्कार।
• कृषक: उनका कठोर परिश्रम, हल-ट्रैक्टर और खेतों में लहलहाती फसलें।
• चिकित्सक: रोगियों का उपचार, उनकी दवाएं और निष्काम सेवा की भावना।
• वैज्ञानिक: उनकी गहरी खोज (अनुसंधान), आधुनिक तकनीक और नए-नए लोक-कल्याणकारी आविष्कार।
• श्रमिक: उनका शारीरिक श्रम, ईमानदारी, पसीना और काम के प्रति सच्ची लगन।
• पत्रकार: उनकी निष्पक्ष कलम, सत्य बोलने का साहस और समाज को जागरूक करने वाली सच्चाई।
In simple words: सैनिक हथियारों से देश बचाते हैं, पर डॉक्टर इलाज से, शिक्षक बच्चों को अच्छी बातें सिखाकर, और किसान मेहनत से देश की सेवा करते हैं। यही उनके असली हथियार हैं।
Exam Tip: इस प्रश्न में 'अस्त्र-शस्त्र' का प्रतीकात्मक अर्थ (कार्यशैली और योगदान) समझकर प्रत्येक पेशे के अनुसार सटीक उत्तर लिखें।
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अपनी भाषा अपने गीत
Question (क). कक्षा में सभी विद्यार्थी कविताओं और गीतों का संकलन करें।
Answer: मैंने राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत निम्नलिखित प्रसिद्ध गीतों और कविताओं का संकलन किया है:
1. 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा' (मोहम्मद इक़बाल)
2. 'ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा' (कवि प्रदीप)
3. 'हम होंगे कामयाब एक दिन' (गिरिजाकुमार माथुर)
मैं आने वाले समय में अपने स्थानीय साहित्य और अपनी मातृभाषा के अन्य प्रेरणादायक देशभक्ति गीतों को भी इस संकलन में शामिल करूँगा।
In simple words: हमने कक्षा के लिए कुछ बहुत सुंदर और प्रसिद्ध देशभक्ति गीत जैसे 'सारे जहाँ से अच्छा' और 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को इकट्ठा किया है।
Exam Tip: गीतों के संकलन के साथ-साथ उनके मूल रचनाकारों के नाम भी याद रखने का प्रयास करें।
Question (ख). किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
Answer: हमारी टोली कक्षा में 'सारे जहाँ से अच्छा' गीत की सस्वर संगीतमय प्रस्तुति देगी। हमारे समूह के सदस्य मिलकर इस गीत के सुर मिलाएंगे और हमारे एक सहपाठी हारमोनियम व तबले की संगत से इस प्रस्तुति को और अधिक लयबद्ध व आकर्षक बनाएंगे।
In simple words: हम सब दोस्त मिलकर अपनी क्लास में हारमोनियम और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ 'सारे जहाँ से अच्छा' गाना गाएंगे।
Exam Tip: कक्षा में प्रस्तुति देते समय लय, सुर और सामूहिक तालमेल (Group Coordination) पर विशेष ध्यान दें।
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तिरंगा झंडा - कब प्रसन्न और कब उदास
Question. राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी। लिखिए।
Answer: हमारे दैनिक जीवन के व्यवहार और कार्यों का राष्ट्रीय स्वाभिमान पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मेरे कार्यों से तिरंगे की प्रसन्नता और उदासी की स्थिति निम्नलिखित है:
तिरंगा झंडा प्रसन्न हुआ होगा जब:
1. मैंने विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखने में अपना योगदान दिया।
2. मैंने अपने सहपाठी को गृहकार्य करने व समझने में सहयोग किया।
3. मैंने अपने अध्यापकों तथा परिवार के बुजुर्गों के प्रति आदर भाव प्रकट किया।
4. मैंने बहुमूल्य जल और बिजली को अनावश्यक व्यर्थ होने से बचाया।
तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा जब:
1. मैंने छोटी सी बात पर अपने मित्र से विवाद व लड़ाई की।
2. मेरे मन में परीक्षा के दौरान अनुचित साधन (नकल) अपनाने का विचार आया।
3. मैंने डस्टबिन का प्रयोग न करके सड़क पर कचरा डाल दिया।
4. मैंने किसी गलती को छिपाने के लिए अपने माता-पिता से असत्य बोला।
In simple words: जब हम अच्छे काम करते हैं (जैसे सफाई रखना और बड़ों का आदर करना), तो हमारे देश का तिरंगा खुश होता है। जब हम गलत काम करते हैं (जैसे झूठ बोलना या कचरा फैलाना), तो तिरंगा उदास होता है।
Exam Tip: दैनिक जीवन के छोटे-छोटे नैतिक कार्यों को सीधे तौर पर राष्ट्रीय गौरव और तिरंगे के सम्मान से जोड़ते हुए रचनात्मक ढंग से उत्तर दें।
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