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Detailed Malhar Chapter 07 वर्षा-बहार (कविता) NCERT Solutions for Class 7 Hindi
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Class 7 Hindi Malhar Chapter 07 वर्षा-बहार (कविता) NCERT Solutions PDF
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मेरी समझ से
Question (क) (1). इस कविता में वर्षा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है?
• दुख और निराशा
• आनंद और प्रसन्नता
• भय और चिंता
• क्रोध और विरोध
Answer: (★) आनंद और प्रसन्नता
In simple words: वर्षा ऋतु का मुख्य भाव खुशी और प्रसन्नता प्रकट करना है क्योंकि इस मौसम में चारों ओर आनंद का माहौल होता है।
Exam Tip: कविता के मूल भाव को ध्यान से समझें और सही विकल्प का चयन करें।
Question (क) (2). “नभ में छटा अनूठी” और “घनघोर छा रही है” पंक्तियों का उपयोग वर्षा ऋतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?
• बादलों के घिरने का दृश्य
• बिजली के गिरने का दृश्य
• ठंडी हवा के चलने का दृश्य
• आमोद छा जाने का दृश्य
Answer: (★) बादलों के घिरने का दृश्य
In simple words: ये पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि आसमान में सुंदर और गहरे बादल छाए हुए हैं।
Exam Tip: पंक्तियों में दिए गए विशेष शब्दों (जैसे 'नभ' और 'घनघोर') से उनके सही अर्थ को पहचानें।
Question (क) (3). कविता में वर्षा को ‘अनूठी बहार’ कहा है क्योंकि -
• कवि वर्षा को विशेष ऋतु मानता है।
• वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।
• वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
• वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है।
Answer: (★) वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं। / (★) वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
In simple words: वर्षा होने से सभी प्राणी खुश और फुर्तीले हो जाते हैं और यह ऋतु हर किसी के मन में सुख भर देती है।
Exam Tip: जब बहु-विकल्पीय प्रश्नों में एक से अधिक सही विकल्प चुनने का निर्देश हो, तो सभी संभावित सही उत्तरों को ध्यानपूर्वक चिह्नित करें।
Question (क) (4). “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
• प्रकृति में सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
• वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
• बादलों की सुंदरता से ही पृथ्वी की शोभा बढ़ती है।
• हमें वर्षा ऋतु से जगत की भलाई की प्रेरणा लेनी चाहिए।
Answer: (★) वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि पूरी पृथ्वी पर जीवन और हरियाली केवल वर्षा के कारण ही बनी रहती है।
Exam Tip: काव्यात्मक पंक्तियों का गद्य अर्थ निकालते समय उनके व्यापक और जीवन रक्षक महत्व को ध्यान में रखें।
Question (ख). हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
Answer: यह मुमकिन है कि मेरे समूह के अन्य सहपाठियों के उत्तर भिन्न हों। मेरे द्वारा इन विकल्पों को चुनने के पीछे निम्नलिखित कारण हैं -
- प्रथम प्रश्न के उत्तर में मैंने प्रसन्नता और उल्लास को चुना है क्योंकि इस पूरी कविता में वर्षा के कारण सभी के आनंदित होने का वर्णन है; जैसे मयूर नृत्य कर रहे हैं, चातक गा रहा है और उपवन महक उठे हैं। यहाँ शोक या भय का कोई स्थान नहीं है।
- द्वितीय प्रश्न के लिए मैंने मेघों के घिरने वाले दृश्य को चुना, क्योंकि "नभ में छटा अनूठी" और "घनघोर छा रही है" जैसी पंक्तियाँ सीधे तौर पर बादलों के आकाश में छा जाने की ओर इशारा करती हैं, न कि पवन या विद्युत की ओर।
- तृतीय प्रश्न के अंतर्गत मैंने दो विकल्पों का चयन किया है: पहला, वर्षा से सभी प्राणी क्रियाशील हो जाते हैं और दूसरा, यह ऋतु सबके जीवन में संतोष व सुख प्रदान करती है। कविता में मोर, दादुर, जलचर और मानव सभी के हर्षोल्लास का सुंदर चित्रण है।
- चतुर्थ प्रश्न में मैंने वर्षा को पृथ्वी पर जीवन तथा हरियाली का मुख्य आधार माना है, क्योंकि जल के बिना कृषि, प्रकृति और किसी भी प्राणी का जीवन संभव नहीं है।
अतः ये विकल्प ही काव्यात्मक भावों के सबसे निकट हैं।
In simple words: मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि कविता में बारिश के समय सभी जीव-जंतुओं के खुश होने, बादलों के छाने और वर्षा से धरती पर जीवन मिलने की बात कही गई है।
Exam Tip: ऐसे वैचारिक और चर्चा आधारित प्रश्नों के उत्तर में अपने तर्कों को कविता की विशिष्ट पंक्तियों और उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
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पंक्तियों पर चर्चा
Question (क). पाठ की निम्नलिखित पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए और इनका अर्थ लिखिए - “फिरते लाखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते करते हैं नृत्य वन में, देखो वे मोर सारे!”
Answer: इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने पावस ऋतु के शुरू होने का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया है। ग्रीष्म ऋतु की तीव्र तपन से परेशान सभी प्राणी और मनुष्य बारिश की शीतल बूंदों के बरसते ही अत्यंत राहत महसूस करते हैं। चातक (पपीहा) खुशी से वर्षा की बूंदों का अभिनंदन कर रहा है और मयूर उल्लास से भरकर जंगल में सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं। यह पूरा मनोरम दृश्य प्रकृति की अद्भुत छटा और खुशी को दर्शाता है।
In simple words: वर्षा आने से गर्मी से परेशान पपीहा राहत पाता है और मोर खुश होकर जंगल में नाचने लगते हैं।
Exam Tip: काव्यात्मक पंक्तियों की व्याख्या करते समय उनमें प्रयुक्त मुख्य प्रतीकों जैसे 'पपीहे' और 'मोर' के आनंद का उल्लेख अवश्य करें।
Question (ख). निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए - “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।”
Answer: प्रस्तुत काव्य पंक्ति में मानव जीवन और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच के गहरे तालमेल को दर्शाया गया है। गगन में पंक्तिबद्ध होकर उड़ते हुए हंसों का झुंड बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। उनकी मीठी आवाज़ें खेतों में काम कर रहे कृषकों के मन को प्रसन्नता और नई ऊर्जा से भर देती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि हमारे किसान भाई प्रकृति के अनूठे रूपों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को उल्लासपूर्ण बनाते हैं।
In simple words: आसमान में कतार बनाकर उड़ते हुए हंसों को देखकर और उनकी मीठी आवाज़ सुनकर किसान बहुत खुश होते हैं।
Exam Tip: प्रकृति और मनुष्य (विशेषकर किसान) के बीच के संबंध को स्पष्ट करने वाले शब्दों का प्रयोग उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
मिलकर करें मिलान
Question. कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं, उनके भावार्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान कीजिए -
Answer:
| स्तंभ 1 (कविता की पंक्तियाँ) | स्तंभ 2 (सही भावार्थ) |
|---|---|
| 1. पानी बरस रहा है, झरने भी बहे बहे हैं | 2. वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं। |
| 2. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब | 6. ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं। |
| 3. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते | 1. वर्षा ॠतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं। |
| 4. फिरते लाखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते | 3. वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं। |
| 5. खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है | 5. वर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं। |
| 6. चलते हैं हंस कहीं पर, बांधे कतार सुंदर | 4. हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं। |
Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में कविता के कठिन शब्दों के अर्थ को समझकर भावार्थ का सही चयन करें।
सोच-विचार के लिए
Question (क). कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए - कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं और क्यों?
Answer: कविता के सूक्ष्म अध्ययन से ज्ञात होता है कि वर्षा ऋतु के उल्लास में निम्नलिखित पात्र मधुर गान कर रहे हैं:
1. **मालिनी:** काव्य में उल्लेखित "बागों में गीत सुंदर, गाती है मालिनी अवा" से पता चलता है कि उपवन की देखभाल करने वाली मालिनी मधुर स्वर में गा रही है। इसका कारण वर्षा के आगमन से बाग-बगीचों में फैली अनुपम हरियाली और नवजीवन को देखकर उसका मन अति प्रसन्न होना है.
2. **मेंढक:** "मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर संगीत प्यारे" पंक्ति दर्शाती है कि मेंढक भी अपनी विशिष्ट टर्र-टर्र की ध्वनि में गा रहे हैं। वर्षाकाल में जलाशय जल से भर जाते हैं, जिससे प्रफुल्लित होकर वे अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए सामूहिक गान करते हैं.
3. **हंस:** कविता की पंक्ति "गाते हैं गीत कैसे, लेते किन मनहर" हंसों की ओर संकेत करती है। वे भी सुहावने मौसम और तालाबों में प्रचुर जल देखकर अपनी प्रसन्नता को मधुर ध्वनियों के माध्यम के व्यक्त कर रहे हैं.
In simple words: बारिश के मौसम में खुश होकर मालिनी, मेंढक और हंस अपनी-अपनी आवाज़ों में मधुर गीत गा रहे हैं।
Exam Tip: सभी पात्रों (मालिनी, मेंढक और हंस) के नाम और उनके गाने के अलग-अलग कारणों को बिंदुवार स्पष्ट रूप से लिखें।
Question (ख). “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” और “कारों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते” दी गई दोनों पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इनमें वर्षा के दो अलग-अलग दृश्य दर्शाए गए हैं। इन दोनों में क्या कोई अंतर है? क्या कोई संबंध है? अपने विचार लिखिए।
Answer: इन दोनों काव्यात्मक पंक्तियों में वर्षा ऋतु के दो पृथक पक्षों को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिनमें स्पष्ट अंतर और गहरा संबंध दोनों निहित हैं:
अंतर:
- **प्रथम दृश्य (आकाशीय उग्रता):** "बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं" पंक्ति गगन में होने वाले बादलों के तीव्र टकराव, गर्जना और विद्युत की चमक को दर्शाती है। यह वर्षा के प्रारंभिक काल का एक अत्यंत प्रभावशाली, गतिशील और कुछ हद तक नाटकीय दृश्य है.
- **द्वितीय दृश्य (धरातलीय शांति):** "तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते" पंक्ति वर्षा होने के बाद पृथ्वी के जलाशयों में शांत भाव से क्रीड़ा करते जलचरों के सुख को प्रकट करती है। यह अत्यंत शांत, कोमल और तृप्तिदायक दृश्य है.
संबंध:
इन दोनों दृश्यों में 'कार्य-कारण' का एक अटूट संबंध है। आकाशीय गर्जना और विद्युत का चमकना (प्रथम दृश्य) वर्षा के होने का **कारण** है। इसी प्राकृतिक प्रक्रिया के फलस्वरूप वर्षा होती है। वहीं दूसरी ओर, जलचरों का प्रफुल्लित होना (द्वितीय दृश्य) उस वर्षा का **परिणाम** है। जब मेघ बरसते हैं, तब तालाबों में नवीन जल संचित होता है और जलीय जीवों को नया जीवन प्राप्त होता है। संक्षेप में, पहली पंक्ति क्रिया को दर्शाती है और दूसरी पंक्ति उसका सुखद प्रभाव व्यक्त करती है.
In simple words: पहली पंक्ति बादलों के गरजने और बिजली चमकने का कारण बताती है, और दूसरी पंक्ति बारिश होने के बाद जीवों को मिलने वाली खुशी का सुखद परिणाम दिखाती है।
Exam Tip: उत्तर में 'कार्य-कारण संबंध' (कारण और परिणाम) जैसे शब्दों का प्रयोग करके दोनों दृश्यों के अंतर्संबंध को अच्छे से स्पष्ट करें।
Question (ग). कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: 'वर्षा-बहार' नामक इस सुंदर रचना में मुख्य रूप से पावस ऋतु के शुभागमन से समस्त सृष्टि, वनस्पति और जीव-जंतुओं के जीवन में आने वाले हर्ष, नव-ऊर्जा और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाया गया है। इसे हम मुख्य रूप से तीन बिंदुओं के अंतर्गत समझ सकते हैं:
1. **असीम प्रसन्नता और स्फूर्ति:** वर्षा ऋतु का आगमन प्राणिमात्र के हृदय को आनंद से भर देता है। वन में मोर नाचने लगते हैं, मेंढक मधुर राग आलापते हैं, और तालाबों में मछलियाँ तथा अन्य जीव खुशी मनाते हैं.
2. **सृष्टि का अनुपम शृंगार:** आसमान में घुमड़ते काले बादल, चमकती बिजली, बहते सुंदर झरने, शीतल समीर का स्पर्श, और उपवन में महकते हुए रंग-बिरंगे फूल पूरी धरा को एक नया और जादुई रूप प्रदान करते हैं.
3. **कल्याणकारी जीवनदायिनी शक्ति:** वर्षा को संपूर्ण संसार की आभा का आधार बताया गया है। ग्रीष्मकाल की भीषण तपन को शांत कर यह बंजर धरती को पुनः हरी-भरी बनाती है, जिससे मानव और अन्य जीवों को जीवन मिलता है.
संक्षेप में कहें तो, यह कविता वर्षा के कल्याणकारी रूप और प्रकृति में उसके सकारात्मक योगदान को बड़े ही जीवंत रूप में हमारे सामने रखती है.
In simple words: इस कविता में बताया गया है कि बारिश आने से पूरी प्रकृति सुंदर हो जाती है और सभी इंसान, जानवर तथा पेड़-पौधे बेहद खुश और ऊर्जावान हो जाते हैं।
Exam Tip: मुख्य संदेश को स्पष्ट करने के लिए उत्तर को प्रकृति, प्रसन्नता और जीवनदायिनी शक्ति जैसे उप-शीर्षकों में विभाजित करके लिखें।
Question (घ). “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” इस पंक्ति को पढ़कर एक खिले हुए गुलाब का सुंदर चित्र मस्तिष्क में बन जाता है। इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अर्थ भी हो सकता है?
Answer: प्रस्तुत पंक्ति का ध्येय मात्र गुलाब के बाह्य सौंदर्य या सुगंध का बखान करना नहीं है, अपितु इसके पीछे एक अत्यंत गहन और व्यापक दार्शनिक संदेश छुपा है। निश्चित रूप से, प्राथमिक स्तर पर यह पंक्ति वर्षा की बूंदों से धुले खिले हुए गुलाब और उसकी चारों ओर फैलती महक का अत्यंत सजीव चित्र प्रस्तुत करती है। परंतु इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि जिस प्रकार अनुकूल परिस्थितियों (वर्षा के जल) को पाकर एक कली सुंदर गुलाब के रूप में विकसित होकर अपनी सुगंध से पूरे वातावरण को सुवासित कर देती है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में आने वाले अनुकूल अवसरों का लाभ उठाकर अपने सद्गुणों, ज्ञान और परोपकार रूपी सुगंध को पूरे समाज में फैलाना चाहिए। यह पंक्ति जीवन में सकारात्मकता, आशा और उमंग के प्रसार का संदेश देती है.
In simple words: गुलाब के खिलने और खुशबू फैलाने का मतलब यह भी है कि हमें भी अपने अच्छे कामों और गुणों से चारों तरफ खुशियाँ और अच्छाई फैलानी चाहिए।
Exam Tip: गुलाब की सुंदरता के साथ-साथ उसके प्रतीकात्मक अर्थ (अच्छे कर्मों और खुशियों का प्रसार) को अवश्य रेखांकित करें।
Question (ङ). कविता में से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें सकारात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे - ‘गीत गाना’, ‘नृत्य करना’ और ‘सुगंध फैलाना’। इन गतिविधियों के आधार पर बताइए कि इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों रखा गया है?
Answer: कविता में वर्णित हर्षोल्लास और सकारात्मक गतिविधियों को दर्शाने वाली प्रमुख काव्य-पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
1. **नृत्य करना:** "करते हैं नृत्य वन में, देखो वे मोर सारे।"
2. **मधुर गान:** "मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर संगीत प्यारे।" तथा "बागों में गीत सुंदर, गाती है मालिनी अवा।"
3. **सुगंध का प्रसार:** "खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है।"
4. **हर्षित होना:** "बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है।" तथा "कारों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते।"
5. **सुंदर लयबद्ध गति:** "चलते हैं हंस कहीं पर, बांधे कतार सुंदर, गाते हैं गीत कैसे, लेते किन मनहर।"
**शीर्षक 'वर्षा-बहार' की सार्थकता:**
'बहार' शब्द का वास्तविक अर्थ उल्लास, नवजीवन, चहुँओर बिखरी रौनक और प्रकृति का चरम सौंदर्य होता है। कविता में केवल बादलों से पानी बरसने का साधारण वर्णन नहीं है, बल्कि वर्षा के आगमन से पूरी धरती पर जो अनुपम खुशियाँ, नृत्य, संगीत और महक फैल जाती है, उसका सजीव चित्रण है। प्रकृति और सभी प्राणी इस मौसम में उत्साह से सराबोर होकर बहार की तरह खिल उठते हैं। अतः इस कविता का नाम 'वर्षा-बहार' रखना सर्वथा उपयुक्त और सटीक है.
In simple words: कविता में मोर के नाचने, मेंढक और मालिनी के गाने तथा गुलाब की खुशबू फैलने जैसी अच्छी गतिविधियों के कारण ही इसका नाम 'वर्षा-बहार' रखा गया है, क्योंकि 'बहार' का मतलब चारों तरफ खुशियाँ छाना होता है।
Exam Tip: उत्तर में कविता की कम से कम 3-4 प्रासंगिक पंक्तियों को लिखकर शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट करें।
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अनुमान और कल्पना से
Question (क). “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” कविता में कहा गया है कि वर्षा पर पूरे संसार की शोभा निर्भर है। वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
Answer: यदि धरातल पर वर्षा का पूर्णतः अभाव हो जाए, तो मानव जाति, वनस्पति और पशु-पक्षियों का संपूर्ण जीवन अत्यधिक संकट में पड़ जाएगा:
- **कृषि और खाद्य संकट:** वर्षा न होने से सूखी धरती बंजर हो जाएगी, खेती पूरी तरह नष्ट हो जाएगी जिससे अन्न का भीषण अकाल पड़ेगा और भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी.
- **पेड़-पौधों का सूखना:** वर्षा के बिना पेड़-पौधे और जंगल सूख जाएँगे। इसके कारण पर्यावरण में जीवनदायिनी प्राणवायु (ऑक्सीजन) की भारी कमी हो जाएगी और वायु प्रदूषण बढ़ेगा.
- **पशु-पक्षियों का कष्ट:** वनों में पेयजल के स्रोत और घास समाप्त होने से मूक पशु-पक्षी प्यास व भूख के कारण तड़प-तड़प कर मरने लगेंगे अथवा जल की खोज में पलायन करने को मजबूर हो जाएँगे.
- **जैव विविधता का ह्रास:** अनेक प्रकार के जलीय जीव, कीड़े-मकोड़े और पेड़-पौधों की प्रजातियाँ सदा के लिए लुप्त हो जाएँगी.
संक्षेप में, वर्षा के बिना धरती से जीवन का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा.
In simple words: अगर बारिश नहीं होगी, तो खेती सूख जाएगी, पीने के लिए पानी नहीं मिलेगा और बिना पानी और खाने के इंसान व पशु-पक्षी जीवित नहीं रह पाएंगे।
Exam Tip: उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए मानव जीवन, वनस्पति और पशु-पक्षियों पर पड़ने वाले प्रभावों को अलग-अलग बिंदुओं में वर्गीकृत करें।
Question (ख). “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” - बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है?
Answer: गगन में विद्युत का कौंधना और बादलों की तीव्र गर्जना जैसी प्राकृतिक परिघटनाओं का जनजीवन पर अनुकूल एवं प्रतिकूल दोनों प्रकार का प्रभाव पड़ता है:
सकारात्मक प्रभाव:
- यह आकाशीय हलचल इस बात का शुभ संकेत होती है कि सूखी धरती को तृप्त करने वाली वर्षा आने वाली है, जिससे ग्रीष्म की तपन से झुलस रहे लोगों को परम शांति मिलती है.
- कृषकों के लिए यह हर्ष का संदेश है, क्योंकि इससे खेतों की सिंचाई के लिए प्रचुर जल प्राप्त होने की आशा जगती है.
नकारात्मक प्रभाव:
- वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) से जान-माल की भारी क्षति हो सकती है, पेड़ जल जाते हैं और कई बार मवेशियों व मनुष्यों की मृत्यु भी हो जाती है.
- बादलों के भयानक गर्जन से नन्हें बालक और पालतू पशु अत्यंत भयभीत हो जाते हैं.
- ऐसी तूफानी परिस्थितियों में विद्युत व्यवस्था ठप हो जाती है तथा सड़कों पर आवागमन और हवाई यात्राओं में गंभीर रुकावटें आती हैं.
In simple words: बिजली चमकने और बादल गरजने से एक तरफ तो बारिश आने की खुशी होती है, लेकिन दूसरी तरफ तेज आवाज से बच्चे डर जाते हैं और बिजली गिरने का खतरा भी रहता है।
Exam Tip: प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को स्पष्ट करते हुए हमेशा सकारात्मक (वर्षा का संकेत) और नकारात्मक (जान-माल की हानि) दोनों पक्षों का संतुलन बनाए रखें।
Question (ग). “करते हैं नृत्य वन में, देखो वे मोर सारे” - इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए कि वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते होंगे?
Answer: रिमझिम फुहारों के पड़ते ही संपूर्ण वन प्रदेश के मूक प्राणियों और पक्षियों में जीवन का एक नया संचार होता है, जिसे वे अत्यंत सुंदर रूपों में प्रकट करते हैं:
- **मोरो का नर्तन:** वन के मयूर बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर अपने अद्भुत सतरंगी पंख फैलाकर झूम-झूम कर मनमोहक नृत्य करने लगते हैं.
- **दादुरों का सामूहिक गान:** वर्षा का शीतल जल पाते ही मेंढक तालाबों के किनारे एकत्र होकर सुर में सुर मिलाकर टर्र-टर्र की मधुर तान छेड़ देते हैं.
- **खगवृंद की चहचहाहट:** नन्ही गौरैया और अन्य पक्षी वृक्षों की डालियों पर चहकने लगते हैं तथा वर्षा की बूंदों में आनंदपूर्वक स्नान कर अपने पंख फड़फड़ाते हैं.
- **मवेशियों और वन्य जीवों का हर्ष:** गजराज (हाथी) जलभराव वाले स्थानों पर जाकर अपनी सूंड से एक-दूसरे पर पानी की बौछारें डालकर अठखेलियाँ करते हैं। गाय और अन्य शाकाहारी पशु ताज़ी उगी हरी घास को चरकर आनंदित होते हैं.
वास्तव में, वर्षा ऋतु इन सभी वन्य प्राणियों के लिए नवजीवन और परम आनंद का उत्सव लेकर आती है.
In simple words: वर्षा होने पर मोर पंख फैलाकर नाचने लगते हैं, मेंढक खुशी से टर्राते हैं, चिड़ियाँ चहचहाती हैं और सभी जानवर पानी में खेलकर अपनी खुशी मनाते हैं।
Exam Tip: विभिन्न जीवों (जैसे मोर, मेंढक, चिड़ियाँ और हाथी) की विशिष्ट हरकतों को ध्यान में रखकर उत्तर को चित्रमयी और रोचक भाषा में लिखें।
आपकी रचनाएँ
Question (क). कविता में वर्णित है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक संगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
Answer: जैसे ही नभ से अमृत रूपी जल की बूंदें बरसती हैं, धूल से ढकी वसुंधरा पूरी तरह स्वच्छ और चमकीली होकर हरी मखमली चादर ओढ़ लेती है। इस अत्यंत सम्मोहक और नवजीवन से युक्त वातावरण में, वन का दृश्य अद्भुत हो जाता है। मोर अपने विशाल और मनभावन रंग-बिरंगे पंखों को गोलाकार फैलाकर आनंद विभोर होकर थिरकने लगते हैं। उनके मुख से निकलने वाली मधुर 'केका' की गूँज मानो वर्षा रूपी देव का स्वागत गान गा रही हो.
दूसरी तरफ, वर्षा ऋतु के आते ही तालाबों के तटों और धान के हरे-भरे खेतों में नन्हें दादुरों (मेंढकों) की अनूठी संगीतमयी गोष्ठी आरंभ हो जाती है। वे सब एकत्र होकर अपनी खुरदुरी मगर लयबद्ध 'टर्र-टर्र' की स्वर-लहरी से समूचे परिवेश को गुंजायमान कर देते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं एक विशाल मंच बन चुकी है जहाँ मोर मुख्य नर्तक हैं और मेंढक सुरीले वादक दल के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। यह सुंदर दृश्य प्रकृति और जीवों के आपसी प्रेम और ईश्वर के प्रति उनकी कृतज्ञता को प्रकट करता है.
In simple words: बारिश होने पर मोर अपने सुंदर पंख फैलाकर वन में नाचते हैं और तालाबों के किनारे मेंढक मिलकर टर्र-टर्र गाते हैं, जिससे पूरा जंगल संगीतमय हो जाता है।
Exam Tip: इस तरह के रचनात्मक चित्रण वाले प्रश्नों में विशेषणों (जैसे मखमली चादर, रंग-बिरंगे पंख, संगीतमयी गोष्ठी) का प्रयोग करके दृश्य को सजीव बनाने का प्रयास करें।
Question (ख). वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।
Answer: **कहानी: "देवराज इंद्र की कृपा और ग्रामीणों का सामूहिक प्रयास"**
काफ़ी पुरानी बात है, सघन वनों के बीच बसा एक अत्यंत सुंदर ग्राम था, जिसे लोग 'हरियालीपुर' पुकारते थे। किंतु विडंबना यह रही कि विगत कुछ वर्षों से वहाँ जल की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मच गया। भयंकर सूखे के कारण लहलहाते खेत धूल में मिल गए, जलस्रोत और बावड़ियाँ सूखकर फट गईं। निरीह वन्य जीव और मवेशी प्यास से तड़पने लगे। गाँव के उदास लोग नित्य प्रति गगन की ओर टकटकी लगाए देखते रहते, पर काले बादलों के स्थान पर केवल तपता सूर्य ही दिखाई देता.
इसी ग्राम में एक आदरणीय वयोवृद्ध दादी माँ रहती थीं, जो बच्चों को ज्ञानवर्धक लोककथाएँ सुनाने के लिए अत्यंत विख्यात थीं। एक संध्या उन्होंने मोहल्ले के सभी बालकों को अपने पास बुलाया और स्नेहपूर्वक समझाया, "प्यारे बच्चों, हमारे ज्ञानी पूर्वजों का मत था कि यदि प्रकृति माता हमसे रुष्ट हो जाएँ, तो उन्हें मनाने का एकमात्र मार्ग पूर्ण निष्ठा, भक्ति और निस्वार्थ कर्म है। वर्षा के स्वामी देवराज इंद्र हैं। वे केवल उन्हीं जनों पर अपनी दया दृष्टि रखते हैं जो प्रकृति का आदर करते हैं और मिलजुलकर श्रम करते हैं।"
तत्पश्चात उन्होंने एक प्राचीन कथा का उल्लेख किया कि किस प्रकार एक बार इंद्रदेव के कुपित होने पर पूरी धरा मरुस्थल बन गई थी। उस समय वन के समस्त जीवों, चिड़ियों और प्यासे वृक्षों ने अपने प्राणों की चिंता न करते हुए वन की रक्षा का संकल्प लिया और सच्चे मन से देवराज की आराधना की। उनके इस निस्वार्थ अनुराग और अटूट लगन को देखकर मेघपति पिघल गए और उन्होंने मूसलाधार बारिश कर पूरी धरा को नवजीवन दिया.
इस मर्मस्पर्शी कथा का बच्चों के कोमल मनों पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने तुरंत यह बात अपने अभिभावकों तक पहुँचाई और पूरे गाँव ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने का प्रण लिया। सभी ग्रामीण एकजुट होकर श्रमदान में जुट गए। उन्होंने सूखे पड़े पोखरों और तालाबों की खुदाई कर उन्हें गहरा किया, ताकि बारिश का पानी ठहर सके। साथ ही, उन्होंने भीषण गर्मी के बावजूद गाँव की सीमा पर नए पौधों का रोपण किया.
उनकी इस अनूठी लगन, सेवा भावना और अटूट विश्वास को देखकर आखिरकार एक दिन वरुण देव प्रसन्न हो गए। नील गगन में अचानक सघन और कजरारे बादलों का आगमन हुआ, जिसकी सुंदरता का बखान हमारी 'वर्षा-बहार' कविता में भी "नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है" कहकर किया गया है। देखते ही देखते आसमान में चमचमाती विद्युत रेखा दौड़ने लगी और बादलों के गर्जन के साथ मूसलाधार वर्षा प्रारंभ हो गई.
इस दिव्य बारिश से प्यासी धरती तृप्त हो गई। गाँव के सूखे जलाशय लबालब भर गए। जलचर जीव पानी में थिरकते और आनंद मनाते दिखाई देने लगे। सबसे सुंदर नज़ारा तो तब देखने को मिला जब वन के मयूर अपने इंद्रधनुषी पंख फैलाकर थिरकते मिले और जलाशयों के किनारों से दादुरों की टर्र-टर्र की मधुर ध्वनि गूँज उठी। हरियालीपुर ग्राम पुनः अपने नाम के अनुरूप हरा-भरा और समृद्ध हो गया। यह वर्षा और कुछ नहीं, बल्कि इंसानों के सच्चे पुरुषार्थ और प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम का वरदान थी.
In simple words: जब एक गाँव में सूखा पड़ा, तो दादी माँ की सलाह पर सभी ग्रामीणों ने मिलकर सूखे तालाबों को साफ किया और नए पौधे लगाए। उनके इस अच्छे काम और एकता को देखकर भगवान इंद्र ने खूब बारिश की और पूरा गाँव फिर से हरा-भरा हो गया।
Exam Tip: लोककथा पर आधारित कहानी लिखते समय कविता के मुख्य पात्रों (इंद्र, बादल, मोर, मेंढक) और मुख्य पंक्तियों का संदर्भ अपनी कहानी के कथानक में अवश्य जोड़ें।
Question (ग). इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों?
Answer: मेरे द्वारा कल्पित और निर्मित चित्र में 'वर्षा-बहार' के परम आनंदमयी और सजीव वातावरण को कैनवास पर उतारने का प्रयास किया गया है, जिसके प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं:
- **गगन की छटा:** आसमान में कजरारे घुमड़ते बादल दिखाए गए हैं, जिनके बीच से सुनहरी चमकीली बिजली की रेखा कौंध रही है.
- **रिमझिम बौछारें और तालाब:** बादलों से गिरती नन्हीं बूंदों की बौछारें दिखाई गई हैं, जो एक सुंदर जलाशय में गिर रही हैं। इस जलाशय के स्वच्छ जल में छोटी-छोटी मछलियाँ और कछुए आनंदपूर्वक क्रीड़ा कर रहे हैं.
- **प्राणियों का उल्लास:** जलाशय के समीप वन में एक मयूर अपने पंखों को फैलाकर सुंदर नृत्य की मुद्रा में है, तथा किनारे पर बैठे दो नन्हें मेंढक गाते हुए प्रतीत हो रहे हैं.
- **हंसों की कतार:** बादलों के नीचे आसमान में हंसों का एक सुंदर झुंड कतारबद्ध होकर अनुशासित रूप में उड़ रहा है.
- **पुष्प और पवन:** उपवन में खिला हुआ एक सुंदर लाल गुलाब हवा में झूम रहा है, मानो अपनी महक चारों ओर फैला रहा हो। साथ ही ठंडी पवन के झोंकों से वृक्षों की शाखाएँ हिलती हुई दिखाई दे रही हैं.
- **बालकों का आनंद:** चित्र के निचले हिस्से में कुछ छोटे बच्चे कागज़ की नाव तैराते हुए बारिश के पानी में छप-छप कर हँस रहे हैं.
**यह सब बनाने का कारण:**
मैंने इस चित्र में इन्हीं दृश्यों को इसलिए उकेरा है क्योंकि पूरी कविता इन्हीं प्राकृतिक घटनाओं और जीवों के आनंद के इर्द-गिर्द बुनी गई है। कवि का मूल संदेश यह है कि वर्षा काल में संपूर्ण चराचर जगत नवजीवन और असीम प्रसन्नता से भर उठता है, और मेरा यह चित्र इसी शाश्वत सत्य को रेखांकित करता है.
In simple words: मैंने अपने चित्र में चमकती बिजली वाले बादल, नाचते मोर, गाते मेंढक, पानी में तैरती मछलियाँ और बारिश में खेलते हुए खुश बच्चों को बनाया है, क्योंकि कविता में बारिश के इसी सुंदर नजारे का वर्णन है।
Exam Tip: चित्र के विवरण को स्पष्ट करते समय कविता के विभिन्न प्राकृतिक अंगों (जलचर, थलचर, नभचर, और वनस्पति) को शामिल करके उनका महत्व समझाएं।
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शब्द से जुड़े शब्द
Question. अपने समूह में चर्चा करके ‘वर्षा’ से जुड़े शब्द नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए –
Answer:
‘वर्षा’ शब्द से जुड़े सात प्रमुख सह-संबद्ध शब्द निम्नलिखित हैं:
1. **बूंदें** (बारिश के पानी की नन्ही बूंदें)
2. **उत्साह** (मन में उठने वाला उल्लास)
3. **पानी** (जल का प्रचुर प्रवाह)
4. **बादल** (मेघों का आसमान में घिरना)
5. **हरियाली** (धरती पर फैली घास और पेड़-पौधे)
6. **मौसम** (सुहावना और ठंडा वातावरण)
7. **रिमझिम** (मधुर स्वर में होने वाली हल्की वर्षा)
In simple words: 'वर्षा' सुनते ही हमारे दिमाग में पानी, बादल, बूंदें, हरियाली, रिमझिम, सुहावना मौसम और मन में उत्साह जैसे शब्द आते हैं।
Exam Tip: शब्द-जाल (Word Web) वाले प्रश्नों में दिए गए मुख्य शब्द से सीधे संबंधित संज्ञा, विशेषण और क्रिया शब्दों का चयन करें।
कविता की रचना
Question. “वर्षा-बहार सब के मन को लुभा रही है” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘वर्षा’ एक ऋतु का नाम है। ‘बहार’ ‘बसंत’ का दूसरा नाम है। यहाँ ‘वर्षा’ और ‘बहार’ को एक साथ दिया गया है जिससे वर्षा ऋतु की सुंदरता को स्पष्ट किया जा सके। इस कविता में ऐसी ही अन्य विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे – कविता की कुछ पंक्तियाँ सरल वाक्य के रूप में ही हैं तो कुछ में वाक्य संरचना सरल नहीं है। अपने समूह के साथ मिलकर इस कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
Answer: हमारे समूह ने 'वर्षा-बहार' कविता की साहित्यिक और रचनात्मक विशेषताओं का गहन विश्लेषण कर निम्नलिखित अनूठी विशेषताओं की सूची तैयार की है:
- **संयुक्त एवं नवीन शब्दों की रचना:** कविता में 'वर्षा' और 'बहार' जैसे दो स्वतंत्र एवं पृथक भावों वाले शब्दों को एक साथ जोड़कर 'वर्षा-बहार' जैसा अत्यंत सुंदर सामासिक शब्द बनाया गया है, जो ऋतु के चरम उल्लास को प्रकट करता है.
- **सजीव बिंब विधान (चित्रात्मकता):** कवि की लेखनी में ऐसी जादुई शक्ति है कि पढ़ते ही पाठक के नेत्रों के समक्ष प्राकृतिक दृश्य सजीव हो उठते हैं; जैसे कतारबद्ध हंसों का गमन, मोरों का पंख फैलाकर नाचना और जलाशयों में तैरती मछलियाँ.
- **ध्वन्यात्मक शब्दों का सुंदर प्रयोग (ध्वनि-अनुकरण):** कविता में बादलों का 'गरजना', वर्षा की बूंदों का 'रिमझिम' गिरना, और दादुरों का 'टर्र-टर्र' करना जैसे शब्दों का प्रयोग पाठकों को प्रकृति के साक्षात् संगीत का कर्णप्रिय अनुभव कराता है.
- **अलंकारिक मानवीकरण:** जड़ प्रकृति और पेड़-पौधों को मानवीय क्रियाएँ करते दिखाया गया है; जैसे शीतल हवा के बहने से डालियों का झूमना और गुलाब का मुस्कुराकर अपनी सुगंध बिखेरना.
- **गेयता और संगीतमयता:** कविता के छंदों में अत्यंत सुंदर तुकबंदी का निर्वाह किया गया है, जिसके कारण इसे आसानी से अत्यंत मधुर राग में गाया जा सकता है.
- **सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण:** संपूर्ण काव्य रचना में निराशा, शोक अथवा भय का लेशमात्र भी संकेत नहीं है। पूरी कविता केवल आनंद, उल्लास, तृप्ति और जीवन के उत्सव से सराबोर है.
- **वाक्य विन्यास की विविधता:** कविता में कुछ स्थान पर अत्यंत सरल कथनों का प्रयोग किया गया है (जैसे - पानी बरस रहा है), वहीं कुछ पंक्तियाँ गहन वैचारिक और अलंकारिक बनावट से युक्त हैं (जैसे - सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर).
In simple words: इस कविता की खूबियाँ हैं कि इसके शब्द बहुत सुंदर चित्र बनाते हैं, इसमें बादलों की आवाज़ें सुनाई देती हैं, और इसकी भाषा को हम गाने की तरह गुनगुना सकते हैं।
Exam Tip: साहित्यिक विश्लेषण वाले प्रश्नों में व्याकरणिक शब्दावली (जैसे बिंब विधान, मानवीकरण, तुकबंदी, सामासिक शब्द) का प्रयोग अवश्य करें ताकि आपको सर्वोत्तम अंक प्राप्त हों।
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कविता का सौंदर्य
Question (क). नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए। जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं उन पर घेरा बनाइए।
(i) ______________ बहार सब के, मन को लुभा रही है (बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि)
(ii) _______________ में घटा अनूठी, घनघोर छा रही है (आकाश, गगन, अंबर, व्योम, नभ)
(iii) बिजली चमक रही है, ______________ गरज रहे हैं (मेघ, जलधर, घन, जलद)
(iv) ____________ बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं (जल, नीर, सलिल, तोय)
Answer:
(i) **बरखा** बहार सब के, मन को लुभा रही है।
(ii) **नभ** में घटा अनूठी, घनघोर छा रही है।
(iii) बिजली चमक रही है, **मेघ** गरज रहे हैं।
(iv) **जल** बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं।
In simple words: कविता में सही लय और सुंदरता के लिए सामान्य शब्दों की जगह 'बरखा', 'नभ', 'मेघ' और 'जल' जैसे काव्य के अनुकूल शब्दों का प्रयोग किया गया है।
Exam Tip: काव्यात्मक रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय लय (Rhythm) और तुकबंदी के साथ-साथ पर्यायवाची शब्दों के सूक्ष्म अंतर को भी समझें।
Question (ख). अपने समूह में विमर्श करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं और क्यों?
Answer: हमारे समूह में हुई चर्चा के उपरांत अधिकांश साथियों ने रिक्त स्थानों के लिए क्रमशः **बरखा**, **नभ**, **मेघ** और **जल** शब्दों को सर्वाधिक उपयुक्त माना। इन शब्दों को पसंद किए जाने के पीछे निम्नलिखित तर्क हैं:
- **बरखा:** यह शब्द 'बहार' के साथ एक सहज काव्यात्मक लय (Rhythmic Flow) का निर्माण करता है, जिससे पंक्ति का श्रुति-माधुर्य बढ़ जाता है.
- **नभ:** 'घटा' के साथ 'नभ' का प्रयोग करने से कविता की भाषा पारंपरिक और अत्यंत प्रभावशाली लगती है.
- **मेघ:** 'गरजने' की क्रिया के साथ लोकभाषा में 'मेघ' शब्द सर्वाधिक प्रचलित और नैसर्गिक प्रतीत होता है.
- **जल:** 'झरने' के बहने की बात के साथ 'जल' का प्रयोग अत्यंत सरल, स्पष्ट और सहज अर्थ संप्रेषित करता है.
ये सभी शब्द कविता की मूल संवेदना और लयबद्धता के सर्वथा अनुकूल हैं.
In simple words: मेरे दोस्तों को ये शब्द इसलिए अच्छे लगे क्योंकि ये बोलने में सुरीले लगते हैं और कविता की लाइनों को और सुंदर बनाते हैं।
Exam Tip: परिचर्चा आधारित प्रश्नों के उत्तर में सामूहिक सहमति और प्रत्येक शब्द के चयन के पीछे के सटीक भाषाई कारणों को अवश्य स्पष्ट करें।
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विशेषण
Question (क). नीचे दी गई पंक्तियों में से विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए -
Answer:
दी गई पंक्तियों में से चुने गए विशेषण (विशेषता बताने वाले शब्द) और विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जाए) की तालिका इस प्रकार है:
| काव्य पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. नभ में घटा अनूठी, घनघोर छा रही है | अनूठी | घटा |
| 2. चलते हैं हंस कहीं पर, बँधी कतार सुंदर | सुंदर | कतार |
| 3. मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे | प्यारे | सुगीत |
| 4. चलती हवा है ठंडी, hillti हैं डालियाँ सब | ठंडी | हवा |
Exam Tip: परीक्षा में विशेषण और विशेष्य की सटीक पहचान के लिए हमेशा संज्ञा शब्द से पहले "कैसा/कैसी" लगाकर प्रश्न पूछें (जैसे- हवा कैसी है? -> ठंडी)।
Question (ख). नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए -
1. वर्षा __________ __________
2. पानी _______ ________
3. बादल _________ ________
4. डालियाँ __________ ________
5. गुलाब ___________ ________
Answer: दिए गए विशेष्य शब्दों के लिए उपयुक्त और सुंदर विशेषण इस प्रकार हैं:
1. **वर्षा:** मूसलाधार, रिमझिम, शीतल
2. **पानी:** निर्मल, गुनगुना, शीतल
3. **बादल:** कजरारे, घुमड़ते, धवल
4. **डालियाँ:** लचीली, लहलहाती, हरी-भरी
5. **गुलाब:** सुवासित, कटीला, सुर्ख
In simple words: यहाँ हमने संज्ञा शब्दों (जैसे पानी, बादल) के आगे उनकी विशेषता बताने वाले शब्द (जैसे निर्मल, कजरारे) जोड़े हैं।
Exam Tip: संज्ञा शब्दों के लिए विशेषण लिखते समय हमेशा ऐसे शब्दों का चयन करें जो व्यावहारिक और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हों।
ऋतु और शब्द
Question. “फिरते लाखो पपीहे हैं, ग्रीष्म ताप खोते” - ‘ताप’ शब्द ग्रीष्म ऋतु से जुड़ा शब्द है। भारत में मुख्य रूप से छह ऋतुएँ क्रम से आती-जाती हैं। लोग इन ऋतुओं में कुछ विशेष शब्दों का उपयोग करते हैं। नीचे दिए गए शब्दों को पढ़कर कौन-सी ऋतु का स्मरण होता है? इन शब्दों को तालिका में उपयुक्त स्थान पर लिखिए -
Answer: दिए गए ऋतु-संबंधित विशिष्ट शब्दों का छह ऋतुओं के अनुसार वर्गीकरण निम्नलिखित तालिका में प्रस्तुत है:
| ऋतु का नाम | सामान्य समय | सम्बद्ध ऋतु-विशेष शब्द |
|---|---|---|
| **बसंत ऋतु** | मार्च - अप्रैल | बहार, बयार |
| **ग्रीष्म ऋतु** | मई - जून | धूप, लू, ताप, तपन, उमस, आँधी, जेठ |
| **वर्षा ऋतु** | जुलाई - अगस्त | वृष्टि, हरियाली, सावन, रिमझिम, झड़ी, बादल फटना |
| **शरद ऋतु** | सितम्बर - अक्टूबर | शीतलता, ठंड, ओस |
| **हेमंत ऋतु** | नवंबर - दिसंबर | कोहरा, पाला, जाड़ा, धुंध |
| **शिशिर ऋतु** | जनवरी - फरवरी | हिमपात, ठिठुरन, कड़ाके की ठंड, जाड़ा |
Exam Tip: हिंदी महीनों (जैसे जेठ, सावन) और मौसम की भौतिक अवस्थाओं (जैसे हिमपात, ठिठुरन) के आधार पर ऋतुओं को वर्गीकृत करना सीखें।
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अपनी बात
Question (क). वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
Answer: वर्षा ऋतु के आगमन पर हमारे स्थानीय क्षेत्र और परिवेश में कई मनोरम तथा व्यावहारिक बदलाव देखने को मिलते हैं:
- **चहुँओर हरियाली:** धूल और तपन से झुलसे हुए पेड़-पौधों पुनः सजीव होकर नवीन पत्तों से लद जाते हैं, जिससे संपूर्ण वातावरण अत्यंत हरा-भरा और आँखों को सुकून देने वाला हो जाता है.
- **तापमान में गिरावट:** बारिश की फुहारों से झुलसाने वाली गर्मी समाप्त हो जाती है। शीतल और शुद्ध हवा बहने के कारण मौसम सुहावना हो जाता है.
- **जलाशयों का पुनर्जीवन:** आस-पास के सूखे नाले, तालाब और पोखर जल से लबालब भर जाते हैं, जिनमें नन्हें मेंढक और जलीय जीव क्रीड़ा करते दिखाई देते हैं.
- **आवागमन में आंशिक बाधा:** सड़कों और नीची जगहों पर पानी इकट्ठा हो जाता है तथा कीचड़ होने के कारण पैदल चलने वालों और वाहनों को कुछ असुविधा होती है.
इन छोटी दिक्कतों के बावजूद, यह मौसम हमें प्रकृति की जादुई शक्ति के बेहद निकट ले आता है.
In simple words: बारिश होने पर चारों तरफ हरियाली छा जाती है, हवा ठंडी हो जाती है और गर्मी से राहत मिलती है, हालांकि सड़कों पर थोड़ा पानी और कीचड़ भी हो जाता है।
Exam Tip: अपने क्षेत्र के विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिवर्तनों (जैसे ट्रैफिक, कृषि कार्य, तापमान) का वास्तविक वर्णन उत्तर में जोड़ें।
Question (ख). बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। किसी रोचक घटना को भी साझा कीजिए।
Answer: वर्षाकाल में विद्यालय जाते या लौटते समय का अनुभव हमेशा ही रोमांच और आनंद से परिपूर्ण होता है। एक बार की अत्यंत मनोरम घटना मुझे आज भी स्मरण है। मध्याह्न के समय जब हमारी छुट्टी हुई और हम घर लौट रहे थे, तभी आसमान में काले मेघ घिर आए और अचानक मूसलाधार बारिश होने लगी। तेज़ हवा के कारण मेरी छतरी उलट गई और उसका तना टूट गया, जिसके कारण मैं सिर से पैर तक भीग गया। मुसीबत को अवसर में बदलते हुए, मेरे सहपाठी और मैं रास्ते में एक सुरक्षित किनारे पर रुक गए और पानी के बहते प्रवाह में कागज़ की नावें तैराने लगे। हमने बारिश में जमकर नृत्य किया और ठंडे पानी की बौछार का भरपूर मज़ा लिया। जब मैं घर पहुँचा, तो भीगा देखकर माता जी थोड़ा चिंतित हुईं, पर मेरे चेहरे की अपार खुशी देखकर वे भी मुस्कुरा दीं। वह दिन मेरे जीवन की सबसे सुंदर और सुनहरी यादों में से एक बन गया है.
In simple words: एक बार स्कूल से आते समय अचानक बहुत तेज बारिश हुई, मेरी छतरी टूट गई और मैं भीग गया। पर मैंने अपने दोस्तों के साथ बारिश में खूब मस्ती की, जो मुझे हमेशा याद रहेगा।
Exam Tip: व्यक्तिगत अनुभवों और संस्मरणों को लिखते समय अपनी भावनाओं (खुशी, डर, रोमांच) को सरल और प्रवाहपूर्ण शब्दों में व्यक्त करें।
Question (ग). वर्षा ऋतु में आपको क्या-क्या अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते हैं?
Answer: वर्षाकाल जहाँ ढेरों खुशियाँ और सुहावनापन लाता है, वहीं हमारी कुछ दैनिक गतिविधियों पर विराम भी लगा देता है:
जो मुझे अच्छा लगता है:
- **मिट्टी की सोंधी गंध:** सूखी वसुंधरा पर जब बारिश की पहली बूंदें गिरती हैं, तो उससे उठने वाली मनमोहक सुगंध मुझे बेहद प्रिय है.
- **व्यंजनों का स्वाद:** रिमझिम बरसते पानी के बीच घर में बने गरमा-गरम आलू-प्याज के पकौड़े और अदरक वाली चाय का स्वाद लेना अत्यंत सुखद लगता है.
- **प्राकृतिक दृश्यावली:** चारों ओर खिली हरी-भरी चादर और पेड़ों से टपकते पानी को निहारना आँखों को अद्भुत शांति प्रदान करता है.
जो मैं इस मौसम में नहीं कर पाता:
- **आउटडोर खेल बंद होना:** मैदान गीले और कीचड़युक्त हो जाने के कारण मित्रों के साथ क्रिकेट या फुटबॉल जैसे खेल खेलना पूरी तरह बंद हो जाता है.
- **बाहर घूमना सीमित होना:** गलियों में जलभराव के कारण शाम को टहलने या साइकिल चलाने का आनंद नहीं ले पाते.
- **तकनीकी व्यवधान:** तेज़ आंधी-पानी के कारण अक्सर बिजली चली जाती है और इंटरनेट का कनेक्शन भी ठप हो जाता है, जिससे पढ़ाई और मनोरंजन प्रभावित होते हैं.
In simple words: मुझे बारिश में मिट्टी की खुशबू और पकौड़े खाना बहुत पसंद है, लेकिन पानी भरने के कारण हम बाहर मैदान में खेल नहीं पाते और कभी-कभी बिजली भी चली जाती है।
Exam Tip: इस प्रकार के तुलनात्मक प्रश्नों में सकारात्मक (पसंदीदा) और नकारात्मक (बाधित गतिविधियाँ) दोनों पक्षों को अलग-अलग शीर्षकों में स्पष्ट करें।
Question (घ). बारिश के मौसम में आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं?
Answer: वर्षाकाल में हमारे आस-पास रहने वाले मूक पशु-पक्षियों को जीवित रहने और स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है:
सुरक्षा के उपाय:
- **खगवृंद (पक्षी):** चिड़ियाँ और कबूतर भीगने से बचने के लिए घने वृक्षों के पत्तों के बीच अथवा घरों की खिड़कियों और छज्जों के कोनों में दुबक कर बैठ जाते हैं.
- **लघु जीव (गिलहरी व कीड़े):** गिलहरियाँ अपने पेड़ों के कोटरों या बिलों में सुरक्षित चली जाती हैं.
- **श्वान और मार्जार (कुत्ते-बिल्लियाँ):** गली के बेसहारा कुत्ते और बिल्लियाँ वर्षा से बचने के लिए बंद दुकानों के तख्तों के नीचे, सीढ़ियों के नीचे अथवा खड़ी गाड़ियों के टायरों के पास शरण लेते हैं.
उनकी मुख्य समस्याएँ:
- **भोजन का संकट:** मूसलाधार बारिश के कारण पक्षी उड़कर दाना नहीं चुग पाते और आवारा जानवरों को भी भोजन की तलाश में भटकने का अवसर नहीं मिलता, जिससे उन्हें कई दिनों तक भूखा रहना पड़ता है.
- **ठंड और रोग:** भीगने और गीले स्थानों पर सोने के कारण इन जीवों को ठंड लग जाती है, जिससे वे निमोनिया व अन्य संक्रामक रोगों की चपेट में आ जाते हैं.
In simple words: बारिश में चिड़ियाँ पेड़ों और छज्जों के नीचे छिपती हैं, और कुत्ते-बिल्लियाँ गाड़ियों या दुकानों के नीचे बैठते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी खाना ढूँढने और बीमार होने से होती है।
Exam Tip: बेसहारा पशुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके संघर्ष और मानवीय मदद की आवश्यकता को भी अपने उत्तर में संक्षेप में शामिल कर सकते हैं।
Question (ङ). अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा ऋतु पर आधारित एक कविता की रचना कीजिए। उसमें अपने घर और आस-पड़ोस से जुड़ी हुई बातें सम्मिलित कीजिए।
Answer: हमारे समूह द्वारा रचित वर्षा ऋतु पर एक सुंदर और सहज कविता इस प्रकार है:
रिमझिम-रिमझिम सावन आया, धरती ने सिंगार सजाया।
सोंधी-सोंधी महकी माटी, महक उठी बगिया की घाटी।
टप-टप टपके घर का छज्जा, भीग रहा बाहर का सज्जा।
टिन शेड पर जब पानी गिरता, जल-तरंग का बाजा बजता।
कागज़ की नैया ले हाथ, दौड़े बच्चे अपनी जमात।
कीचड़ में छप-छप कर खेलते, पानी की बौछारें झेलते।
पड़ोसी खिड़की से मुस्काते, गरमा-गरम पकौड़े खाते।
नभ में कजरारे बादल छाए, मोर-पपीहे मन हर्षाए।
बिजली चमके चम-चम-चम, सुख लाया सावन हरदम।
In simple words: इस कविता में बारिश आने पर घर की टपकती छत, टिन पर गिरते पानी की आवाज़, बच्चों का कागज़ की नाव तैराना और पड़ोसियों का मिलकर पकौड़े खाने का आनंद दिखाया गया है।
Exam Tip: कविता लेखन वाले प्रश्नों में सरल और तुकबंदी वाले शब्दों का प्रयोग करें ताकि भाव आसानी से समझ आ सकें।
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साक्षात्कार
Question (क). मान लीजिए कि आप अपने विद्यालय की पत्रिका के पत्रकार हैं। आप एक किसान का साक्षात्कार कर रहे हैं जो वर्षा के आने पर अपने खेतों में गीत गा रहा है। अपने समूह के साथ मिलकर उस किसान के साक्षात्कार के लिए कुछ प्रश्न लिखिए।
Answer: एक कृषक भाई का साक्षात्कार लेने के लिए हमारे समूह द्वारा तैयार की गई प्रश्नावली निम्नलिखित है:
1. राम-राम किसान भाई! हम आपके बारे में जानना चाहते हैं - आपका नाम क्या है और आप इस कृषि कार्य से कितने वर्षों से जुड़े हुए हैं?
2. इस मौसम में आप अपने खेतों में कौन-कौन से अनाज या फसलें बो रहे हैं, और आपकी खेती के लिए बारिश का पानी कितना महत्वपूर्ण है?
3. जब आसमान से पानी बरसता है, तो आप खेतों में बड़े चाव से गाते हैं। इस खुशी और गीत के पीछे क्या रहस्य है? क्या गाने से आपका थका देने वाला काम आसान हो जाता है?
4. कृषि कार्य करते समय ग्रामीण अंचलों में गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत कौन-से हैं? क्या इन गीतों का फसलों की बुआई या कटाई से कोई विशेष संबंध होता है?
In simple words: एक पत्रकार के रूप में हमने किसान भाई से उनका नाम, खेती का अनुभव, फसलों के लिए बारिश का महत्व और खेतों में गाए जाने वाले गीतों के बारे में कुछ सवाल पूछे हैं।
Exam Tip: साक्षात्कार के प्रश्नों को हमेशा सम्मानजनक संबोधन (जैसे 'राम-राम', 'किसान भाई') से प्रारंभ करें और प्रश्न सीधे एवं सरल रखें।
Question (ख). अपने समूह के साथ मिलकर इस साक्षात्कार का अभिनय प्रस्तुत कीजिए। आपके समूह का कोई सदस्य किसान की भूमिका निभा सकता है। अन्य सदस्य पत्रकारों की भूमिका निभा सकते हैं।
Answer: **साक्षात्कार नाटक: "धरतीपुत्र और युवा पत्रकार"**
- **पत्रकार:** प्रणाम चाचा जी! इस वर्ष वर्षा की स्थिति को देखते हुए आपकी फसलों का क्या हाल है?
- **किसान (मुस्कुराते हुए):** प्रणाम बेटा! इस साल बादलों ने अच्छी दया दिखाई है। चारों तरफ धान की फसल लहलहा रही है। अगर मौसम ऐसा ही अनुकूल रहा, तो इस बार बहुत अच्छी पैदावार होगी.
- **पत्रकार:** क्या इस भारी वर्षा के कारण आपको खेतों में किसी तरह की समस्या या असुविधा का सामना भी करना पड़ा है?
- **किसान:** हाँ बेटा, सिक्कों के दो पहलू होते हैं। कभी-कभी जब एक साथ बहुत तेज़ पानी बरस जाता है, तो खेतों में जलभराव हो जाता है। यदि समय पर पानी बाहर न निकाला जाए, तो खड़ी फसल सड़ने का डर रहता है.
- **पत्रकार:** हमारे किसान भाइयों की भलाई के लिए आप शासन या प्रशासन से क्या अपेक्षा रखते हैं?
- **किसान:** हमारी सरकार से बस यही विनती है कि खेतों से अतिरिक्त जल निकासी के लिए नालियों की उत्तम व्यवस्था हो, और हमें समय पर अच्छी गुणवत्ता के बीज और जैविक खाद उचित दाम पर मिल जाएँ.
- **पत्रकार:** किसान भाई, अपना बहुमूल्य समय देने और अपने विचार साझा करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! ईश्वर करे आपकी फसल खूब समृद्ध हो.
In simple words: इस छोटे से नाटक में पत्रकार और किसान मिलकर खेती के फायदे, बारिश से होने वाली दिक्कतों और सरकार से मिलने वाली मदद पर चर्चा कर रहे हैं।
Exam Tip: नाटक या संवाद लेखन में भाषा को बोलचाल के अनुरूप और दोनों किरदारों के हाव-भाव को कोष्ठक में लिखकर दर्शाना चाहिए।
वर्षा के दृश्य
Question (क). वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइये, जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है। जैसे आकाश में इंद्रधनुष।
Answer: कविता 'वर्षा-बहार' में वर्षा ऋतु के कई सुंदर दृश्यों का वर्णन है, परंतु कुछ ऐसे भी अद्भुत दृश्य हैं जो इसमें शामिल नहीं हैं, उनकी सूची निम्नलिखित है:
1. **कागज़ की नौकाएँ तैराना:** बारिश थमते ही गलियों में बहते पानी के छोटे-छोटे नालों में बच्चों द्वारा रंग-बिरंगे कागज़ की नावें बनाकर बहाना और उनके पीछे दौड़ना.
2. **नभ में सतरंगी इंद्रधनुष:** मूसलाधार बारिश के रुकने के पश्चात जब बादलों की ओट से सूर्यदेव प्रकट होते हैं, तो गगन में सात रंगों का अत्यंत मनमोहक धनुष दिखाई देना.
3. **धरा से उठती सोंधी सुगंध:** तपी हुई सूखी मिट्टी पर जब वर्षा की पहली शीतल बूंदें गिरती हैं, तो उससे उठने वाली मन को मन्त्रमुग्ध करने वाली भीनी-भीनी खुशबू.
4. **जल के चंचल बुलबुले:** सड़कों पर जमा पानी में जब बारिश की बूंदें ज़ोर से गिरती हैं, तो पानी की सतह पर सुंदर गोल-गोल बुलबुलों का बनना और तुरंत फूट जाना.
5. **गर्म पकवानों का आनंद:** घरों की बालकनी या खिड़की के पास बैठकर परिवार के साथ बारिश की बौछारों को देखते हुए गरमा-गरम पकौड़ों और चाय का स्वाद लेना.
In simple words: बारिश में कागज़ की नाव तैराना, आसमान में सात रंगों का इंद्रधनुष देखना और मिट्टी से उठने वाली मीठी खुशबू जैसे सुंदर नज़ारों का कविता में ज़िक्र नहीं है।
Exam Tip: अपनी व्यक्तिगत कल्पना और दैनिक जीवन के अनुभवों का उपयोग करके कविता से अलग नवीन दृश्यों की रचनात्मक सूची तैयार करें।
Question (ख). वर्षा के समय आकाश में बिजली पहले दिखाई देती है या बिजली कड़कने की ध्वनि पहले सुनाई देती है या दोनों साथ-साथ दिखाई-सुनाई देती हैं? कृपा पता कीजिए।
Answer: वर्षा काल के दौरान बादलों के आपसी घर्षण से उत्पन्न बिजली की चमक हमें पहले दिखाई देती है, जबकि बादलों के गरजने (कड़कने) की आवाज़ उसके कुछ सेकंड पश्चात सुनाई पड़ती है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण कार्य करता है। भौतिक विज्ञान के अनुसार, **प्रकाश की चाल (गति)** अत्यंत तीव्र होती है जो लगभग \( 3 \times 10^8 \) मीटर प्रति सेकंड (या लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड) है। इसके विपरीत, **ध्वनि की चाल** हवा में बहुत धीमी होती है, जो केवल लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड होती है। चूंकि प्रकाश की गति ध्वनि की तुलना में लाखों गुना अधिक है, इसलिए बिजली चमकते ही उसका प्रकाश बिना किसी विलंब के तत्क्षण हमारी आँखों तक पहुँच जाता है, जबकि उसी समय उत्पन्न हुई ध्वनि को हमारे कानों तक पहुँचने में कुछ समय लग जाता है.
In simple words: प्रकाश (रोशनी) की रफ़्तार आवाज़ की रफ़्तार से बहुत ज़्यादा तेज़ होती है। इसीलिए हमें बिजली की चमक पहले दिखाई देती है और उसकी कड़कने की आवाज़ बाद में सुनाई देती है।
Exam Tip: इस वैज्ञानिक तथ्य को समझाते समय 'प्रकाश की गति' (3 लाख किमी/सेकंड) और 'ध्वनि की गति' (343 मीटर/सेकंड) के निश्चित आंकड़ों का उल्लेख अवश्य करें।
Question (ग). आपने वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे को ध्यान से अवश्य देखा होगा। आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए?
Answer: वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व और उसके पश्चात पेड़-पौधों के रूप-रंग में आने वाला भारी अंतर इस प्रकार है:
वर्षा से पहले की स्थिति:
- ग्रीष्म की तीव्र धूप और धूल भरी आँधियों के कारण पेड़-पौधों के पत्तों पर मिट्टी की मोटी मटमैली परत जम जाती है, जिससे उनका स्वाभाविक हरा रंग ढक जाता है और वे बेहद फीके व बेजान दिखते हैं.
- जल की कमी के कारण टहनियाँ और पत्तियाँ मुरझाकर नीचे की ओर लटक जाती हैं, मानो वे अत्यंत प्यासी और थकी हुई हों.
वर्षा के बाद की स्थिति:
- तेज़ बारिश की बौछारों से पत्तों पर जमी धूल पूरी तरह धुल जाती है, जिससे उनका वास्तविक चमकीला और गहरा हरा रंग निखर उठता है.
- जड़ों द्वारा प्रचुर मात्रा में जल सोखने के कारण पौधों की कोशिकाओं में नई जान आ जाती है। उनकी डालियाँ पुनः तनकर हवा में लहलहाने लगती हैं.
- पूरी वनस्पति अत्यधिक ताज़ी, स्वस्थ और प्रफुल्लित दिखाई देती है, तथा कई पौधों पर नन्हीं कलियाँ और रंग-बिरंगे फूल मुस्कुराने लगते हैं.
In simple words: बारिश से पहले पेड़-पौधों धूल से ढके और मुरझाए हुए दिखते हैं, लेकिन बारिश के पानी से धुलकर वे एकदम साफ, चमकदार, हरे-भरे और ताज़े हो जाते हैं।
Exam Tip: 'वर्षा से पूर्व' और 'वर्षा के पश्चात' दो स्पष्ट अनुभाग बनाकर तुलनात्मक बिंदुओं (जैसे धूल का हटना, पत्तियों का रंग, टहनियों का सीधा होना) को प्रस्तुत करें।
Question (घ). “चलते हैं हंस कहीं पर, बँधी कतार सुंदर” कविता में हंसों के कतार में अर्थात् प्रतिबद्ध रूप से चलने का वर्णन किया गया है। आपने किन-किन को और कब-कब प्रतिबद्ध चलते हुए देखा है? (संकेत - चींटी, गाड़ियाँ, बच्चे आदि)
Answer: 'प्रतिबद्ध रूप से चलने' का अभिप्राय पूर्ण अनुशासन, मर्यादा और एक निश्चित कतार या क्रम का पालन करते हुए गमन करना है। हंसों की सुंदर पंक्ति के अतिरिक्त, मैंने अपने दैनिक जीवन में निम्नलिखित को इस प्रकार चलते देखा है:
- **नन्हीं चींटियाँ:** भोजन की खोज में अथवा अपने बिल की ओर लौटते समय चींटियाँ सदा एक अत्यंत सटीक और सीधी रेखा में बिना क्रम तोड़े चलती हैं। यह अद्भुत अनुशासन विशेष रूप से वर्षा ऋतु में देखने को मिलता है.
- **सड़क पर वाहन (यातायात):** महानगरों की व्यस्त सड़कों पर अथवा लाल बत्ती (ट्रैफिक सिग्नल) होने पर सभी कारें और गाड़ियाँ अपनी-अपनी निर्धारित लेन में एक के पीछे एक बहुत ही व्यवस्थित ढंग से चलती हैं.
- **विद्यालय के छात्र:** प्रार्थना सभा के उपरांत अपनी कक्षाओं में जाते समय अथवा छुट्टी के समय विद्यालय के छोटे बच्चे शिक्षक के निर्देशन में कतारबद्ध होकर चलते हैं.
- **सुरक्षा बल (सेना की टुकड़ी):** राष्ट्रीय पर्वों या परेड के अवसरों पर हमारे देश के वीर सैनिक अत्यंत गर्व और कठोर अनुशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर कतार में मार्च करते हैं.
In simple words: मैंने चींटियों को हमेशा एक सीधी लाइन में चलते देखा है। इसके अलावा परेड में सैनिक, सड़क पर गाड़ियाँ और स्कूल में बच्चे भी लाइन बनाकर अनुशासित तरीके से चलते हैं।
Exam Tip: उत्तर में 'प्रतिबद्धता' शब्द का अर्थ (अनुशासन और निश्चित क्रम) स्पष्ट करते हुए विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों को शामिल करें।
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वर्षा में ध्वनियाँ
Question (क). कविता में वर्षा की अनेक ध्वनियाँ दी गए हैं। इन दृश्यों में कौन-कौन सी ध्वनियाँ सुनाई दे रही होंगी? अपनी कल्पना से उन ध्वनियों को कक्षा में सुनाइए।
Answer: वर्षा ऋतु के आगमन पर हमारे आस-पास के वातावरण में प्रकृति का एक अनूठा और मधुर संगीत गूँजने लगता है, जिसमें निम्नलिखित ध्वनियाँ प्रमुख हैं:
1. **रिमझिम की स्वर-लहरी:** जब आकाश से कोमल और छोटी बूंदें बरसती हैं, तो हवा के साथ मिलकर उनकी धीमी व कर्णप्रिय 'शू-शू' और 'सर-सर' की ध्वनि सुनाई देती है.
2. **मेघों का गंभीर गर्जन:** गगन में काले बादलों के टकराने से होने वाली गहरी और भारी 'गुम-गुम' या 'गड़गड़-गड़गड़' की आवाज़, जो बहुत शक्तिशाली प्रतीत होती है.
3. **तड़तड़ाती आकाशीय विद्युत:** मेघ गर्जन के ठीक बाद बिजली के कड़कने की अचानक होने वाली तीखी 'कड़क-कड़ाक' की तीव्र आवाज़.
4. **टिन शेड और छतों का संगीत:** जब पानी की मोटी बूंदें मकानों की टिन की छतों या खिड़कियों के काँच पर गिरती हैं, तो तीव्र 'टप-टप-टप' या 'टपटप-टपटप' की लयबद्ध आवाज़ सुनाई देती है.
5. **कलकल बहती जलधारा:** वर्षा का प्रचुर जल जब नालियों, सड़कों के किनारों और पहाड़ी पत्थरों के बीच से तेज़ी से गुजरता है, तो पानी की गूँजती 'कल-कल', 'छल-छल' की मधुर ध्वनि सुनाई देती है.
6. **दादुरों का कलरव (टर्र-टर्र):** जलाशयों के निकट गीली घास में छिपे मेंढकों द्वारा निकाली जाने वाली सामूहिक 'टर्र-टर्र, टर्र-टर्र' की अनूठी ध्वनि.
In simple words: बारिश के समय हमें बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की कड़क, पानी की बूंदों की टप-टप, नालियों में बहते पानी की कल-कल और मेंढकों की टर्र-टर्र जैसी सुंदर आवाजें सुनाई देती हैं।
Exam Tip: ध्वन्यात्मक शब्दों (जैसे कल-कल, गड़-गड़, टप-टप) को उद्धरण चिह्नों में लिखकर उत्तर को अधिक सजीव और प्रभावशाली बनाएँ।
Question (ख). “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” कविता में मेंढकों की टर्र-टर्र को भी प्यारा गीत कहा गया है। आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं?
Answer: यद्यपि कुछ विशिष्ट ध्वनियाँ संगीत के नियमों के अनुसार कर्णकटु या बेसुरी मानी जाती हैं, परंतु विशेष मानसिक दशा, संदर्भ और प्राकृतिक परिवेश के कारण वे हमारे हृदय को अत्यंत प्रिय लगने लगती हैं। इसके कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- **दादुरों की टर्र-टर्र:** साधारण दिनों में मेंढकों की आवाज़ कर्कश लगती है, परंतु भीषण ग्रीष्मकाल के बाद जब पहली फुहारें पड़ती हैं, तब उनकी यह आवाज़ वर्षा के शुभ आगमन और धरती की तृप्ति का मंगल-गीत बन जाती है, जो हमें बहुत भाती है.
- **शिशुओं की तुतलाहट और शोर:** खेलते समय छोटे बच्चों की चिल्लाहट और रोने-हँसने की बेतरतीब आवाज़ें घर के बड़ों को असीम सुख देती हैं, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य और मासूमियत का प्रतीक है.
- **निशाकाल में रेल की सीटी:** रात्रि के सन्नाटे में दूर पहाड़ी या मैदान से गूँजती हुई रेलगाड़ी की तीखी सीटी मन में एक अजीब सा सुकून और यात्रा का रोमांच पैदा करती है.
- **झरझराते पत्तों की सरसराहट:** वन में हवा के झोंकों से जब सूखे पत्ते आपस में टकराकर सूखी खड़खड़ाहट पैदा करते हैं, तो वह एकांत वातावरण को अत्यंत ध्यानमग्न और शांत बना देती है.
संक्षेप में, जब कोई ध्वनि हमारे मन की सुंदर भावनाओं, प्रिय यादों अथवा प्रकृति के सुंदर बदलावों से जुड़ जाती है, तो वह बेसुरी होने पर भी हमें मधुर प्रतीत होने लगती है.
In simple words: जब कोई आवाज़ हमें किसी अच्छी बात या याद की याद दिलाती है, तो वह बेसुरी होने पर भी अच्छी लगने लगती है (जैसे बारिश के मौसम में मेंढकों का टर्राना या खेलते हुए बच्चों का शोर)।
Exam Tip: इस वैचारिक प्रश्न में 'परिप्रेक्ष्य' (Perspective) और 'संदर्भ' (Context) के महत्व को समझाते हुए दैनिक जीवन के उदाहरणों से अपनी बात सिद्ध करें।
सृजन
Question. “बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है” - ‘आमोद’ या ‘मोद’ दोनों शब्दों का अर्थ होता है - आनंद, हर्ष, खुशी, प्रसन्नता। कविता में वर्षा ऋतु में ‘आमोद’ के दृश्यों का वर्णन किया गया है। नीचे दिए गए ‘आमोद’ से जुड़े विभिन्न दृश्यों में से किसी एक पर एक सुंदर अनुच्छेद लिखिए -
Answer: दिए गए आठ 'आमोद' (आनंद) के प्रसंगों पर लिखे गए सुंदर अनुच्छेद इस प्रकार हैं:
**1. बारिश के बाद उपवन में सैर:**
वर्षा के रुकने के तुरंत बाद किसी उपवन या बगीचे में भ्रमण करना एक अलौकिक सुख प्रदान करता है। हवा में एक अनोखी शीतलता और ताजगी घुल जाती है, जिससे साँस लेना अत्यंत स्फूर्तिदायक लगता है। धुले-धुले हरे-भरे पेड़ों के पत्तों से पानी की बूँदें मोतियों की तरह टपकती हैं और उन पर जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं, तो वे चमक उठती हैं। रंग-बिरंगे फूलों पर भँवरे मँडराने लगते हैं और कोयल की कूक पूरे बगीचे को गुंजायमान कर देती है। गीली मिट्टी की वह भीनी-भीनी सुगंध पूरे मन-मस्तिष्क को शांति और अपार प्रसन्नता से भर देती है.
**2. परिवार के किसी प्रिय सदस्य या मित्र से वर्षों बाद मिलना:**
जब हम अपने किसी बहुत पुराने और प्रिय मित्र या परिवार के सदस्य से लंबी अवधि के बाद अचानक मिलते हैं, तो वह क्षण भावनाओं के समंदर की तरह उमड़ पड़ता है। आँखों में खुशी के आँसू आ जाते हैं और दिल जोर से धड़कने लगता है। पुरानी सुनहरी यादों का पिटारा खुल जाता है, बचपन की शरारतें, हँसी-मज़ाक और सुख-दुख की बातें फिर से ताज़ा हो जाती हैं। समय जैसे वहीं ठहर जाता है। यह अनूठा मिलन हमारे आपसी रिश्तों में एक नया प्राण फूँक देता है और मन को असीम संतोष व तृप्ति से भर देता है.
**3. सर्दियों का पहला हिमपात:**
शीत ऋतु की पहली बर्फबारी देखना किसी जादुई स्वप्न के सच होने जैसा होता है। जब रुई के फाहे जैसे सफेद और हल्के हिमखंड आसमान से धीरे-धीरे नीचे गिरते हैं, तो ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने श्वेत मखमली चादर ओढ़ ली हो। चारों ओर एक असीम शांति छा जाती है। पहाड़ों, पेड़ों की डालियों और घरों की छतों पर जमी बर्फ का नज़ारा मन को मंत्रमुग्ध कर देता है। बच्चे और बड़े सभी बाहर निकलकर बर्फ के गोले बनाकर एक-दूसरे पर फेंकते हैं और इस बर्फीले उत्सव का भरपूर आनंद लेते हैं.
**4. कोई उत्सव:**
कोई भी त्यौहार या सामाजिक उत्सव अपने साथ खुशियों का एक विशाल सागर लेकर आता है। घरों की सुंदर सजावट, रंग-बिरंगी रोशनियाँ, नए परिधान और स्वादिष्ट व्यंजनों की सुगंध पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। जब सभी रिश्तेदार और मित्र मिलकर एक जगह एकत्रित होते हैं, तो आपसी गिले-शिकवे मिट जाते हैं और भाईचारे की भावना सुदृढ़ होती है। उत्सव हमें सामूहिक रूप से जीवन का जश्न मनाने और खुशियाँ बाँटने का एक पावन अवसर प्रदान करते हैं.
**5. मित्रों संग खेलना:**
अपने अजीज दोस्तों के साथ खेल के मैदान में समय बिताना जीवन के सबसे आनंदमयी अनुभवों में से एक है। चाहे वह क्रिकेट की रोमांचक भिड़ंत हो, लुका-छिपी का खेल हो या कोई अन्य खेल, मैदान में लगने वाले ठहाके और आपसी नोंक-झोंक मन के सारे तनाव को दूर कर देती है। खेल के दौरान जीतने का साझा प्रयास और हारने पर एक-दूसरे को सँभालना हमें सच्ची खेल भावना और अटूट मित्रता की सीख देता है। यह पल हमें सदा ऊर्जावान और खुशहाल बनाए रखते हैं.
**6. किसी प्रिय पुस्तक को पढ़ना:**
अपनी मनपसंद पुस्तक के पन्नों में खो जाना एक अत्यंत शांत और गहरा मानसिक सुख प्रदान करता है। एकांत कमरे में बैठकर जब हम किसी अच्छी किताब को खोलते हैं, तो हम एक नई और काल्पनिक दुनिया की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। कहानी के पात्रों के साथ हँसना, रोना और उनके संघर्षों से सीख लेना हमारे ज्ञान और संवेदना को समृद्ध करता है। यह स्वाध्याय न केवल हमारे विचारों को निखारता है, बल्कि मानसिक शांति और बौद्धिक संतोष भी देता है.
**7. किसी कार्य को पूरा करना या सफल प्रदर्शन करना:**
कठिन परिश्रम और अटूट लगन के बल पर किसी जटिल कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करना अथवा किसी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना एक अद्वितीय गौरव का अहसास कराता है। जब हमारी महीनों की मेहनत रंग लाती है, तो मन में उठने वाली प्रसन्नता की लहर हमारी सारी थकान को एक पल में दूर कर देती है। दूसरों से मिलने वाली सराहना और पुरस्कार हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और हमें भविष्य में और अधिक ऊँचे लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं.
**8. समुद्र के किनारे शांत सवेरा या शाम:**
विशाल समुद्र के रेतीले तट पर बैठकर उगते हुए सूर्य की लालिमा देखना अथवा ढलते सूरज की सुनहरी किरणों को लहरों पर बिखरते देखना एक अविस्मरणीय अनुभव है। लहरों की शांत और निरंतर गूँजती आवाज़ मन के सारे कोलाहल को शांत कर देती है। पैरों को छूकर जाने वाली नमकीन हवा और पानी का स्पर्श रोम-रोम को प्रफुल्लित कर देता है। प्रकृति के इस विशाल रूप को देखकर मनुष्य अपनी सारे चिंताएँ भूलकर ईश्वर की इस अनुपम रचना के साथ एकाकार हो जाता है.
In simple words: यहाँ हमने हमारे जीवन के आठ सबसे प्यारे और खुशी देने वाले पलों का सुंदर वर्णन किया है, जैसे बारिश में घूमना, दोस्तों के साथ खेलना, त्यौहार मनाना या समुद्र किनारे बैठना।
Exam Tip: अनुच्छेद लिखते समय अपनी भाषा को सरल, प्रभावशाली और भावनाओं से युक्त रखें ताकि पाठक आपके अनुभव को महसूस कर सके।
वर्षा से जुड़े गीत
Question (क). “बागों में गीत सुंदर, गाती है मालिनें अब” – हमारे देश के वर्षा के आने पर अनेक गीत और लोकप्रिय गीत गाए जाते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँढ़िए और लिखिए।
Answer: भारत में पावस ऋतु के शुभागमन पर विभिन्न अंचलों में गाए जाने वाले अत्यंत लोकप्रिय लोकगीत और रागों का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है:
1. **बरस-बरस आयो सावनवा:** यह लोकगीत ग्रामीण किसानों द्वारा खेतों में भरपूर हरियाली और धान की रोपाई देखकर अत्यंत हर्षोल्लास के साथ गाया जाता है.
2. **कजरी लोकगीत:** मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार के क्षेत्रों में सावन व भादों के महीनों में गाया जाने वाला यह अत्यंत मीठा गीत है। इसमें प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य और विरह-मिलन के भाव व्यक्त होते हैं.
3. **झूला गीत (सावनी):** सावन के सुहावने दिनों में जब पेड़ों की मजबूत शाखाओं पर बड़े-बड़े झूले डाले जाते हैं, तब स्त्रियाँ और बालिकाएँ सामूहिक रूप से झूलते हुए गाती हैं, जैसे - *"झूला किनारे जमुना झूले रसिया, बरसे बदरिया सावन की।"*
4. **राग मल्हार:** यह भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अत्यंत गौरवशाली राग है, जिसे गाने से मेघों के बरसने और मन में वर्षा काल का अद्भुत आनंद जाग्रत होने की मान्यता है.
5. **मेघ-प्रार्थना लोकगीत (पंवरिया या राजस्थानी लोकगीत):** राजस्थान जैसे मरुस्थलीय प्रदेशों में मेघों को रिझाने और जल की वर्षा करने के लिए सामूहिक रूप से लोक-कलाकारों द्वारा गाया जाता है.
In simple words: हमारे देश में बारिश आने पर कई पारंपरिक लोकगीत जैसे कजरी, झूला गीत, राजस्थानी लोकगीत और राग मल्हार गाए जाते हैं, जो बारिश की खुशी को और बढ़ा देते हैं।
Exam Tip: उत्तर में लोकगीतों के क्षेत्रीय संदर्भ (जैसे उत्तर प्रदेश की कजरी, राजस्थान के गीत) को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ ताकि आपके सामान्य ज्ञान का भी परिचय मिले।
Question (ख). सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को संकलित करके वर्षा-गीतों की एक पुस्तिका भी तैयार कीजिए।
Answer: हमारे कक्षा के सभी समूहों द्वारा संकलित गीतों के आधार पर तैयार की गई **"वर्षा-गीत पुस्तिका"** की रूपरेखा इस प्रकार है:
### **पुस्तिका का नाम: पावस मल्हार**
**1. प्रस्तावना:**
भारतवर्ष के जनमानस में वर्षा ऋतु केवल मौसम का परिवर्तन नहीं है, अपितु यह जीवन के उल्लास, संतोष और आनंद का महा-उत्सव है। इस पावन बेला में हमारे देश के गाँवों से लेकर शहरों तक, सदियों से लोकगीतों और शास्त्रीय संगीत की अत्यंत समृद्ध परंपरा रही है। यह पुस्तिका उन्हीं पारंपरिक गीतों का एक सुंदर संग्रह है.
**2. बरसात का स्वागत (लोकगीत):**
*खेतों में काम करते समय गुनगुनाया जाने वाला सरल लोकगीत:*
> "बरस-बरस आयो सावनवा,
> हरियाली छायो गवनवा।"
*(अर्थ: हे सावन के मेघों! तुम झूमकर बरसो ताकि हमारे खेतों में पुनः हरी-भरी बहार आ जाए।)*
**3. कजरी की मिठास (पूर्वी लोकगीत):**
*उत्तर प्रदेश और बिहार का प्रसिद्ध वर्षा गीत:*
> "सावन की बदरिया छाई,
> पी को बुलाने आई।"
*(अर्थ: सावन के काले बादलों ने आसमान घेर लिया है, जो अपनों की याद दिला रहा है।)*
**4. झूला गीत (सावनी मल्हार):**
*पेड़ों पर डले झूलों पर सखियों द्वारा गाया जाने वाला मधुर गान:*
> "झूला किनारे जमुना झूले रसिया,
> बरसे बदरिया सावन की।"
*(अर्थ: यमुना के पावन तट पर सुंदर झूला डला हुआ है और सावन के बादल रिमझिम बरस रहे हैं।)*
**5. राग मल्हार (शास्त्रीय राग):**
*संगीत की शास्त्रीय परंपरा की सुंदर प्रस्तुति:*
> "गरज-गरज घनवा बरसे,
> भिगो दे धरती प्यासी।"
*(अर्थ: हे बादलों! तुम खूब गरज-गरज कर बरसो ताकि इस सूखी धरती की प्यास बुझ सके।)*
**6. राजस्थानी मेघ-मल्हार (मरुस्थलीय लोकगीत):**
*रेतीले टीलों पर पानी की गुहार लगाता पारम्परिक गीत:*
> "घन-घन गाजे रे मेघा,
> बरसो रे सुख देवे मेघा।"
*(अर्थ: हे मेघराज! तुम गगन में जोर से गर्जन करो और बरसकर हम सबको सुख प्रदान करो।)*
**7. उपसंहार:**
इन सुंदर वर्षा-गीतों का संकलन हमें यह सीख देता है कि हमारा जीवन प्रकृति के साथ कितना गहराई से जुड़ा हुआ है। ये लोकगीत न केवल हमारा मनोरंजन करते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखते हैं। यह लघु पुस्तिका हमारी सामूहिक लगन और साहित्यिक प्रयास का एक सुंदर परिणाम है.
In simple words: इस पुस्तिका में हमने बारिश के स्वागत के लिए गाए जाने वाले लोकगीतों, कजरी, झूला गीतों और बादलों से बरसने की प्रार्थना करने वाले राजस्थानी गीतों को इकट्ठा करके एक सुंदर संग्रह बनाया है।
Exam Tip: पुस्तिका निर्माण वाले प्रश्नों में 'प्रस्तावना', 'गीतों के बोल', 'भावार्थ' and 'उपसंहार' जैसे विभिन्न अंगों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करें।
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आज की पहेली
Question. आपने वर्षा से जुड़ी एक कविता पढ़ी है। अब भारत की विभिन्न ऋतुओं से जुड़ी कुछ पहेलियाँ पढ़िए और इन्हें बूझिए—
Answer: विभिन्न ऋतुओं से संबंधित पहेलियों के सही उत्तर निम्नलिखित हैं:
**पहेली 1:**
> *"जाने कैसा मौसम आया, सूरज ने सबको झुलसाया।
> आम पके तो रस ढलके, समय कौन-सा ये झलके?"*
**उत्तर:** **ग्रीष्म ऋतु** (गर्मी का मौसम)
**पहेली 2:**
> *"पानी बरसे, बादल गरजे, धरती का हर कोना हरसे।
> नदियाँ नाले भरे हर ओर, बूझो किसका है ये जोर?"*
**उत्तर:** **वर्षा ऋतु** (बारिश का मौसम)
**पहेली 3:**
> *"हवा में ठंडक बढ़ती जाए, धूप सुहानी सबको भाए।
> नई फसल खेतों में लाए, बूझो कौन-सा मौसम आए?"*
**उत्तर:** **शिशिर ऋतु** (शीतकाल)
**पहेली 4:**
> *"फूल खिले, हर पक्षी गाए, चारों ओर हरियाली छाए।
> बागों में खुशबू छा जाए, बूझो ऋतु ये क्या कहलाए?"*
**उत्तर:** **बसंत ऋतु** (वसंत का मौसम)
**पहेली 5:**
> *"बर्फ गिरे, सर्दी बढ़ जाए, ऊनी कपड़े सबको भाए।
> धुंध की चादर लाए रात, बूझो किस ऋतु की बात?"*
**उत्तर:** **शरद ऋतु** (ठंड का मौसम)
**पहेली 6:**
> *"पत्ता-पत्ता गिरता जाए, सूनी डाली बहुत सताए।
> पेड़ करें खुद को तैयार, कौन-सी ऋतु का है ये सार?"*
**उत्तर:** **पतझड़ ऋतु** (पतझड़ का मौसम)
In simple words: यहाँ दी गई पहेलियों को हल करके हमने भारत की छह अलग-अलग ऋतुओं (गर्मी, बारिश, ठंड, बसंत, शिशिर और पतझड़) की पहचान की है।
Exam Tip: पहेलियों में दिए गए विशिष्ट संकेतों (जैसे आम का पकना -> ग्रीष्म, पत्तों का गिरना -> पतझड़) से ऋतुओं की पहचान करना अत्यंत सरल हो जाता है।
झरोखे से (साझी समझ)
Question. “आपने जो कविता इस पाठ में पढ़ी है, उसे लिखा है मुकुटधर पाण्डेय ने। आइए, अब पढ़ते हैं इन्हीं की लिखी एक अन्य कविता ‘ग्रीष्म’ का अंश—” कविता ‘ग्रीष्म’ को पढ़िए तथा दिए गए बिंदुओं के आधार पर साथियों के साथ विचार-विमर्श कीजिए—
Answer: मुकुटधर पाण्डेय जी की कविता 'ग्रीष्म' के अंशों के आधार पर ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव, कठिनाइयों तथा उनसे निपटने के पारंपरिक उपायों पर हमारे समूह की सामूहिक चर्चा के निष्कर्ष बिंदुवार निम्नलिखित हैं:
**1. ग्रीष्म ऋतु का स्वरूप और उसका प्रभाव:**
- ग्रीष्म ऋतु का स्वरूप अत्यंत उग्र, प्रचंड और दाहक (तपता हुआ) होता है। वसंत ऋतु के बीतते ही ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में सूर्यदेव अत्यंत उग्र हो जाते हैं। उनकी किरणें धरती पर आग के समान बरसती हैं, जिससे पूरी धरा तपने लगती है और दिन के समय घरों से बाहर निकलना अत्यंत कठिन हो जाता है.
**2. मनुष्य, पशु-पक्षी और प्रकृति पर इसके दुष्प्रभाव:**
- **प्रकृति पर प्रभाव:** प्रचंड गर्मी के कारण नदियों, तालाबों और कुओं का जल पूरी तरह सूख जाता है। धरती सूखी और बंजर दिखने लगती है। वन-उपवन झुलस जाते हैं और पेड़ों के पत्ते पीले पड़कर गिर जाते हैं.
- **जीव-जंतुओं पर प्रभाव:** पशु-पक्षी पानी के अभाव में व्याकुल और त्रस्त हो जाते हैं। दोपहर के समय पशु घने पेड़ों की छाँव में छिप जाते हैं और पक्षी चहकना बंद कर शांत बैठ जाते हैं.
- **मनुष्यों पर प्रभाव:** अत्यधिक तपन और पसीने के कारण लोग आलस और थकान महसूस करते हैं। दिन के समय चलने वाली गर्म हवा (लू) से लोग अस्वस्थ और बीमार हो जाते हैं.
**3. इस ऋतु में सहनी पड़ने वाली प्रमुख कठिनाइयाँ:**
- जल की भारी कमी हो जाती है, जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है.
- जंगलों में सूखे के कारण 'दावानल' (जंगल की आग) लगने का भय रहता है जिससे वन्य संपदा नष्ट हो जाती है.
- लू लगने से उल्टी, सिरदर्द और बुखार जैसी बीमारियाँ फैलती हैं.
**4. ग्रीष्म ऋतु से निपटने के पारंपरिक भारतीय उपाय:**
- **आहार-विहार:** हमारे बुजुर्ग गर्मी से बचने के लिए ठंडे पेय पदार्थों जैसे आम का पना, सत्तू, छाछ, नींबू-पानी और लस्सी का सेवन करते थे, जो शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं.
- **रहने की व्यवस्था:** दोपहर में धूप से बचने के लिए खस के पर्दों का प्रयोग, मिट्टी के घड़े का ठंडा पानी पीना और घरों की छतों पर चूना पोतकर कमरों को ठंडा रखना.
- **सूती परिधान:** हल्के और सफेद सूती वस्त्र पहनना ताकि शरीर को पर्याप्त हवा मिल सके और पसीना आसानी से सूख सके.
In simple words: इस चर्चा में हमने बताया है कि गर्मी के मौसम में तेज धूप से नदियाँ सूख जाती हैं, पशु-पक्षी व्याकुल हो जाते हैं और इंसानों को लू का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए हम घड़े का पानी, लस्सी और सूती कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं।
Exam Tip: ग्रीष्म ऋतु के प्रभावों को समझाने के लिए जैविक (Biological) और पर्यावरणीय (Environmental) पक्षों को अलग-अलग शीर्षकों में प्रस्तुत करें।
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