NCERT Solutions for Class 7 Hindi: Malhar Chapter 08 बिरजू महाराज से साक्षात्कार (साक्षात्कार)
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Practice Class 7 Hindi Solutions: Malhar Chapter 08 बिरजू महाराज से साक्षात्कार (साक्षात्कार)
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मेरी समझ से
Question (क) (1). बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन क्यों किया होगा?
(a) वे गुरु के प्रति शिष्य के निष्ठा भाव को परखना चाहते थे।
(b) वे नृत्य शिक्षण के लिए इस परंपरा को महत्त्वपूर्ण नहीं मानते थे।
(c) वे गुरु के प्रति शिष्य के लगन व समर्पण भाव को जाँचना चाहते थे।
(d) वे शिष्य की भेंट देने की सामर्थ्य को परखना चाहते थे।
Answer: (a) वे गुरु के प्रति शिष्य के निष्ठा भाव को परखना चाहते थे। और (c) वे गुरु के प्रति शिष्य के लगन व समर्पण भाव को जाँचना चाहते थे।
In simple words: महाराज जी यह देखना चाहते थे कि उनका शिष्य उनके प्रति कितना सच्चा, वफादार और सीखने के लिए कितना समर्पित है।
Exam Tip: बहु-विकल्पीय प्रश्नों में सही उत्तर के साथ-साथ पाठ में दिए गए संदर्भ को ध्यान में रखकर ही सही कारण चुनें।
Question (क) (2). “जीवन में उतार-चढ़ाव तो होता ही है।” बिरजू महाराज के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए?
(a) पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा।
(b) कोई भी संस्था नृत्य प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित नहीं करती थी।
(c) किसी समय विशेष में घर में सुख-समृद्धि थी।
(d) नृत्य के औपचारिक प्रशिक्षण के अवसर बहुत ही सीमित हो गए थे।
Answer: (a) पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा। और (c) किसी समय विशेष में घर में सुख-समृद्धि थी।
In simple words: महाराज जी के जीवन में पहले बहुत सुख-सुविधाएँ थीं, लेकिन उनके पिताजी के जाने के बाद उन्हें बहुत तंगी का सामना करना पड़ा।
Exam Tip: बिरजू महाराज के जीवन के दोनों पहलुओं - संपन्नता और संघर्ष - को अच्छी तरह याद रखें।
Question (क) (3). बिरजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए?
(a) संगीत, नृत्य, नाटक और सभी कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं।
(b) कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
(c) कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
(d) वर्तमान समय में कला भी एक सफल माध्यम नहीं है।
Answer: (b) कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। और (c) कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
In simple words: संगीत और कला बच्चों के दिमाग को तेज बनाते हैं और खेल-खेल में बहुत कुछ नया सिखाते हैं।
Exam Tip: बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में कला के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाले विकल्पों को प्राथमिकता दें।
Question (ख). अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने वे उत्तर ही क्यों चुने?
Answer: हमारे द्वारा चुने गए उत्तरों के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
(1) गंडा बाँधने की परंपरा वाला प्रश्न: हमने पहला और तीसरा विकल्प इसलिए चुना क्योंकि महाराज जी के अनुसार केवल उपहार देना पवित्र संबंध नहीं बनाता। गुरु-शिष्य का रिश्ता तभी गहरा होता है जब शिष्य के मन में सच्ची लगन और श्रद्धा हो।
(2) जीवन में उतार-चढ़ाव वाला प्रश्न: हमने पहला और तीसरा विकल्प चुना क्योंकि पाठ में स्पष्ट है कि पहले उनका परिवार काफी संपन्न था, लेकिन पिताजी की मृत्यु के बाद उन्हें भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
(3) लय के साथ खेलने की अनुशंसा वाला प्रश्न: हमने दूसरा और तीसरा विकल्प चुना क्योंकि बिरजू महाराज स्वयं मानते हैं कि कला बच्चों के दिमाग के विकास के लिए जरूरी है और यह एक ज्ञानवर्धक खेल की तरह है।
In simple words: ये सभी उत्तर सीधे पाठ की कहानी और बिरजू महाराज के विचारों से मेल खाते हैं, इसलिए हमने इन्हें चुना।
Exam Tip: चर्चा वाले प्रश्नों में हमेशा अपने उत्तर के समर्थन में पाठ से ठोस उदाहरण या तर्क प्रस्तुत करें।
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मिलकर करें मिलान
Question. पाठ में से चुनकर कुछ शब्द एवं शब्द समूह नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही संदर्भों या अवधारणाओं से मिलाइए।
Answer:
| शब्द | सही संदर्भ या अवधारणा |
|---|---|
| 1. कर्नाटक संगीत शैली | भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचलित है। इसमें स्वर शैली की प्रधानता होती है। जल तरंग, वीणा, मृदंग, मंदलिन वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। |
| 2. घराना | हिंदुस्तानी संगीत में कलाकारों का एक समुदाय या कुटुंब, जो संगीत-नृत्य की विशिष्ट शैली साझा करते हैं। संगीत या नृत्य की परंपरा, जिससे सिद्धांत और शैली पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रशिक्षण के द्वारा आगे बढ़ती है। |
| 3. शास्त्रीय संगीत | भारत की प्राचीन गायन-वादन गीत-नृत्य अभिनय परंपरा का अभिन्न अंग है। इसमें शब्दों की अपेक्षा सुरों का महत्त्व होता है। इसमें नियमों की प्रधानता होती है। |
| 4. हिंदुस्तानी संगीत शैली | भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में प्रचलित है। तबला, सारंगी, सितार, संतूर वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। इसके प्रमुख रागों की संख्या छह है। |
| 5. कनछेदन | हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में एक है, यह कान में सोने या चाँदी का तार पहनने से संबंधित है। |
| 6. लोक नृत्य | किसी क्षेत्र विशेष में लोक द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य। लोक-नृत्य, क्षेत्र विशेष की संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं। ये विशेष रूप से फसल कटाई, उत्सवों आदि के अवसर पर किए जाते हैं। |
Exam Tip: कर्नाटक संगीत (दक्षिण भारत) और हिंदुस्तानी संगीत (उत्तर भारत) के अंतर को हमेशा ध्यान में रखकर मिलान करें।
Question. इस पाठ का शीर्षक “बिरजू महाराज से साक्षात्कार” है। यदि आप इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना चाहते हैं तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? लिखिए।
Answer: मैं इस साक्षात्कार को "कथक सम्राट की जीवन-गाथा" नाम देना पसंद करूँगा। यह नाम सोचने का मुख्य कारण यह है कि यह पाठ केवल उनके नृत्य कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे जीवन की यात्रा, बचपन के संघर्षों, कला के प्रति उनके गहरे समर्पण और विभिन्न अनुभवों को बहुत खूबसूरती से हमारे सामने रखता है।
In simple words: 'कथक सम्राट की जीवन-गाथा' नाम इसलिए सही है क्योंकि इसमें बिरजू महाराज के पूरे जीवन की कहानी और उनके कड़े संघर्ष को दर्शाया गया है।
Exam Tip: शीर्षक बदलने वाले प्रश्नों में नए नाम का औचित्य साबित करने के लिए पाठ की मुख्य घटनाओं का सहारा लें।
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पंक्तियों पर चर्चा
Question 1. “तुम नौकरी में बैठ जाओगे। तुम्हारे अंदर का नर्तक पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।” इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस पंक्ति का आशय यह है कि जब कोई प्रतिभावान कलाकार किसी बंधी-बंधाई नौकरी के बंधनों और समय-सीमाओं में बंध जाता है, तो उसकी स्वतंत्र कलात्मक सोच सीमित हो जाती है। कला और नृत्य को निखारने के लिए पूर्ण स्वतंत्रता, निरंतर अभ्यास और गहरे समर्पण की आवश्यकता होती है, जो नौकरी के व्यस्त जीवन में संभव नहीं हो पाता।
In simple words: नौकरी के बंधनों में फँसने से कलाकार को अपनी कला के रियाज़ के लिए पूरा समय और आज़ादी नहीं मिल पाती, जिससे उसकी कला रुक जाती है।
Exam Tip: "कलाकार" और "नौकरी की सीमाओं" के बीच के विरोधाभास को स्पष्ट रूप से समझाकर पूरे अंक प्राप्त करें।
Question 2. “लय हम नर्तकों के लिए देवता है!” इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन का अर्थ है कि किसी भी नर्तक के लिए ताल और लय ही सर्वोपरि है। लय को नृत्य की आत्मा माना गया है, जिसके बिना कोई भी थिरकन अधूरी और प्रभावहीन है। कलाकार लय को भगवान के समान पूजनीय मानकर उसकी साधना करते हैं क्योंकि यही उनके नृत्य को सजीव बनाती है।
In simple words: जैसे भगवान सब कुछ संभालते हैं, वैसे ही लय नृत्य की जान होती है। इसके बिना नृत्य का कोई वजूद नहीं है।
Exam Tip: उत्तर में "लय को नृत्य की आत्मा" और "पूजनीय साधना" जैसे शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
Question 3. “नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है।” इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि नृत्य केवल शारीरिक अंगों को हिलाने की क्रिया नहीं है। यह मन को एकाग्र करने, ध्यान लगाने और एक कठिन तपस्या की तरह खुद को कला में झोंक देने का नाम है। इस साधना के जरिए ही कलाकार को आंतरिक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।
In simple words: नृत्य करना एक पूजा की तरह है जिसमें शरीर के साथ-साथ मन को भी पूरी तरह से एकाग्र करना पड़ता है।
Exam Tip: नृत्य को केवल व्यायाम न मानकर उसे एक "मानसिक और आत्मिक साधना" के रूप में परिभाषित करें।
Question 4. “कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया जाता है, चिराग की लौ के समान।” इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इसका आशय यह है कि कथक नृत्य में चेहरे और गर्दन की हलचल बहुत ही कोमल, नाजुक और सहज होनी चाहिए। जिस प्रकार एक दीपक की लौ बहुत ही शांत और सुंदर ढंग से हवा में हिलती-डुलती है, ठीक उसी प्रकार नर्तक की गर्दन का संचालन भी अत्यंत सौम्य और आकर्षक होना चाहिए।
In simple words: कथक करते समय गर्दन को बहुत ही आराम से और खूबसूरती से घुमाया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे दीये की लौ आहिस्ता से हिलती है।
Exam Tip: उत्तर को समझाने के लिए "दीपक की लौ" की उपमा और "सौम्यता" शब्द का उल्लेख जरूर करें।
सोच-विचार के लिए
Question 1(क). बिरजू महाराज नृत्य का औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ होने से पहले ही कथक कैसे सीख गए थे?
Answer: बिरजू महाराज के घर का माहौल पूरी तरह से कथक और संगीत से सराबोर था। उनके पूज्य पिताजी अच्छन महाराज और चाचा शंभू तथा लच्छू महाराज जैसे महान गुरु उनके घर में ही मौजूद थे। उनके अभ्यास को लगातार देखते रहने के कारण वे बिना किसी औपचारिक ट्यूशन के ही कथक सीख गए थे और कम उम्र में दरबार में भी थिरकने लगे थे।
In simple words: घर में संगीत का माहौल होने के कारण वे अपने पिता और चाचा के अभ्यास को देखकर बहुत ही कम उम्र में खुद ही कथक सीख गए थे।
Exam Tip: बिरजू महाराज के पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनके पितातुल्य गुरुओं के नामों का वर्णन अपने उत्तर में अवश्य करें।
Question 1(ख). नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ होना क्यों अनिवार्य है?
Answer: संगीत के मुख्य अंग - गाना, बजाना और नाचना हैं। नृत्य पूरी तरह से ताल और लय पर आधारित होता है, जिसके बिना कोई भी प्रस्तुति संभव नहीं है। यदि नर्तक को संगीत के सुरों और तालों की गहरी समझ नहीं होगी, तो वह सही समय पर थिरक नहीं पाएगा और न ही नृत्य के सही भावों को दर्शकों तक पहुँचा पाएगा।
In simple words: नृत्य पूरी तरह से ताल और धुन पर चलता है, इसलिए संगीत को जाने बिना अच्छा नृत्य करना नामुमकिन है।
Exam Tip: संगीत के तीनों अंगों (गायन, वादन, नृत्य) के अंतर्संबंध को समझाते हुए उत्तर लिखें।
Question 1(ग). नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज को और किन-किन कार्यों में रुचि थी?
Answer: नृत्य के अलावा बिरजू महाराज की गहरी रुचि तरह-तरह के कल-पुर्जों और मशीनों को ठीक करने में थी। वे स्वयं को एक मैकेनिक या इंजीनियर की तरह मानते थे और अपने पास हमेशा आवश्यक औजार रखते थे। इसके अतिरिक्त, उन्हें सुंदर चित्रकारी करने का भी बहुत शौक था।
In simple words: वे मशीनों को खोलने और उन्हें ठीक करने के बहुत शौकीन थे। साथ ही उन्हें पेंटिंग करने में भी बहुत मजा आता था।
Exam Tip: महाराज जी के तकनीकी शौक (इंजीनियरिंग/मैकेनिक) और कलात्मक शौक (पेंटिंग) दोनों को अलग-अलग बिंदु में स्पष्ट करें।
Question 1(घ). बिरजू महाराज ने बच्चों की शिक्षा और रुचियों के बारे में अभिभावकों से क्या कहा है?
Answer: बिरजू महाराज ने माता-पिता से विनम्र अनुरोध किया है कि यदि बच्चों की रुचि कला या संगीत में है, तो उन्हें इसमें अवश्य भाग लेने दें। उनके अनुसार, यह भी दूसरे खेलों की तरह एक सुंदर माध्यम है, जिससे बच्चों का मानसिक व बौद्धिक विकास होता है और वे जीवन का संतुलन व समय का सही मूल्य सीखते हैं।
In simple words: उन्होंने अभिभावकों से कहा कि कला सीखने से बच्चों का दिमाग तेज होता है, इसलिए बच्चों को उनकी पसंद की कला सीखने की छूट मिलनी चाहिए।
Exam Tip: उत्तर में अभिभावकों के प्रति "अनुरोध" और बच्चों के "बौद्धिक विकास" के बिंदुओं को मुख्य रूप से लिखें।
Question 2(क). पाठ में से उन प्रसंगों को पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि - बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
Answer: बिरजू महाराज के बहुमुखी प्रतिभा के धनी होने का प्रमाण पाठ की कई बातों से मिलता है। वे न केवल विश्वप्रसिद्ध कथक नर्तक थे, बल्कि बहुत अच्छे गायक और वादक भी थे। वे स्वयं के नृत्य नाटकों के लिए संगीत भी तैयार करते थे। इसके अलावा मशीनों को खोलने-जोड़ने की उनकी कला और रात के समय सुंदर चित्र बनाना, उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को बखूबी दर्शाता है।
In simple words: वे नाचने के साथ-साथ गाते थे, वाद्ययंत्र बजाते थे, नृत्य नाटकों की रचना करते थे, चित्र बनाते थे और खराब मशीनें भी ठीक कर लेते थे।
Exam Tip: बहुमुखी प्रतिभा को सिद्ध करने के लिए उनके नृत्य, संगीत, मैकेनिकल कार्य और पेंटिंग के प्रसंगों को संक्षेप में अवश्य लिखें।
Question 2(ख). पाठ में से उन प्रसंगों को पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि - बिरजू महाराज को नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत योगदान रहा।
Answer: बिरजू महाराज के जीवन के कठिन समय में उनकी माताजी उनकी सबसे बड़ी संबल बनीं। जब उनके पूज्य पिताजी ने कहा कि पैसे होने पर ही गंडा बंधेगा, तो उनकी माँ ने महाराज जी के दो कार्यक्रमों की पूरी कमाई बाबूजी को भेंट के रूप में दे दी ताकि उनकी शिक्षा शुरू हो सके। वे महाराज जी को हमेशा प्रेरित करती थीं कि चाहे खाने के लिए कुछ भी न हो, लेकिन अभ्यास कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
In simple words: माँ ने अपनी कमाई देकर महाराज जी की तालीम शुरू करवाई और तंगी के दिनों में भी उन्हें लगातार रियाज़ करने का हौसला दिया।
Exam Tip: माँ के योगदान के संदर्भ में "गंडा बाँधने के लिए पैसे जुटाना" और "रियाज़ जारी रखने की सीख" का प्रसंग लिखना अनिवार्य है।
Question 2(ग). पाठ में से उन प्रसंगों को पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि - बिरजू महाराज महिलाओं के लिए समानता के पक्षधर थे।
Answer: जब साक्षात्कार में उनसे पूछा गया कि क्या उनके परिवार की लड़कियों ने कथक सीखा, तो उन्होंने बेबाकी से माना कि उनकी बहनों को यह अवसर नहीं मिल पाया था। परंतु उन्होंने इस पुरानी परंपरा को बदलते हुए अपनी बेटियों को कथक की भरपूर तालीम दी। वे इस बात पर ज़ोर देते थे कि लड़कियों को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षा और कोई न कोई कलात्मक हुनर अवश्य मिलना चाहिए।
In simple words: उन्होंने अपनी बेटियों को कथक सिखाया और माना कि महिलाओं को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के समान अवसर मिलने चाहिए।
Exam Tip: "बेटियों को तालीम देना" और "महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के विचार" वाले प्रसंगों को उत्तर में उजागर करें।
शब्दों की बात
मूल शब्द के आगे जुड़ने वाले शब्दांश उपसर्ग कहलाते हैं (जैसे - अ + दृश्य = अदृश्य) और शब्द के पीछे जुड़ने वाले शब्दांश प्रत्यय कहलाते हैं (जैसे - सीमा + इत = सीमित)।
Question (ख). नीचे दो तबले हैं, एक में कुछ शब्दांश (उपसर्ग व प्रत्यय) हैं, दूसरे तबले में मूल शब्द हैं। इनकी सहायता से नए शब्द बनाइए-
Answer:
| संयोजन (मूल शब्द + शब्दांश) | नया निर्मित शब्द |
|---|---|
| आ + गमन | आगमन |
| आ + श्रम | आश्रम |
| अ + साधारण | असाधारण |
| अ + खंड | अखंड |
| अ + कर्म | अकर्म |
| गमन + ईय | गमनीय |
| राष्ट्र + ईय | राष्ट्रीय |
| सु + गमन | सुगमन |
| सु + कर्म | सुकर्म |
| मर्म + इक | मार्मिक |
| श्रम + इक | श्रमिक |
| संस्कृति + इक | सांस्कृतिक |
| अ + खंड + ता | अखंडता |
| खंड + इत | खंडित |
Exam Tip: जब 'संस्कृति' में 'इक' प्रत्यय जुड़ता है, तो पहला अक्षर 'सं' बदलकर 'सां' (सांस्कृतिक) हो जाता है। इस वर्तनी नियम का विशेष ध्यान रखें।
Question (ग). इस पाठ में से उपसर्ग व प्रत्यय की सहायता से बने कुछ और शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाइए।
Answer:
(1) उपसर्ग से बने शब्द और वाक्य:
• अनुशासन (अनु + शासन) - विद्यार्थियों को अपने जीवन में अनुशासन का सदैव पालन करना चाहिए।
• अपूर्व (अ + पूर्व) - बिरजू महाराज की अपूर्व कला ने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
• अधिकार (अधि + कार) - हमारे समाज में प्रत्येक बच्चे को शिक्षा पाने का पूरा अधिकार है।
• प्रसिद्ध (प्र + सिद्ध) - बनारस शहर अपने सुंदर घाटों और संस्कृति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
• समर्पण (सम् + अर्पण) - किसी भी क्षेत्र में बड़ी सफलता पाने के लिए मन में गहरा समर्पण होना आवश्यक है।
(2) प्रत्यय से बने शब्द और वाक्य:
• नर्तकी (नृत्य + की) - रंगमंच पर नृत्य कर रही नर्तकी के हाव-भाव बहुत ही मनमोहक थे।
• शिक्षक (शिक्षा + क) - एक अच्छे शिक्षक हमेशा अपने छात्रों को सही और उन्नति की राह दिखाते हैं।
• कलाकार (कला + कार) - सच्चा कलाकार अपनी अद्भुत कला से हर किसी का दिल आसानी से जीत लेता है।
• विद्यार्थी (विद्या + अर्थी) - हमारी कक्षा का प्रत्येक विद्यार्थी बहुत ही होनहार और परिश्रमी है।
• चित्रकार (चित्र + कार) - उस विख्यात चित्रकार ने कैनवास पर प्रकृति का अत्यंत सुंदर चित्र उकेरा है।
In simple words: पाठ से चुने गए उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्दों का प्रयोग करके सरल और स्पष्ट वाक्य बनाए गए हैं।
Exam Tip: वाक्य बनाते समय चुने गए मुख्य शब्द को रेखांकित करना न भूलें, इससे परीक्षक को जाँचने में आसानी होती है।
पेज 107 - शब्दों का प्रभाव
Question. पाठ में आए नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए - "कुछ कथिक डर गए किंतु उन कथिकों की कला में इतना दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।" इस वाक्य में से 'इतना' शब्द हटाकर वाक्य पढ़िए और पहचानिए कि क्या परिवर्तन आया है? पाठ में आए हुए वाक्यों में से ऐसे ही कुछ और शब्द ढूँढ़कर उन्हें रेखांकित कीजिए जिनके प्रयोग से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न होता है?
Answer: यदि हम इस वाक्य से 'इतना' शब्द हटा देते हैं, तो वाक्य अत्यंत साधारण बन जाता है और कथक नृत्य के जादुई प्रभाव की गहराई कम हो जाती है। 'इतना' जैसे विशेषण शब्द वाक्य की बात पर अधिक ज़ोर देते हैं।
पाठ में प्रयुक्त कुछ अन्य प्रभावशाली शब्द व उनके उदाहरण निम्नलिखित हैं:
• 'भले ही' और 'जरूर' - “खाने को भले ही चना मिले या कुछ भी न मिले पर अभ्यास जरूर करो।” (यह वाक्य अभ्यास की अनिवार्यता पर विशेष बल देता है)
• 'लय' - “लय हम नर्तकों के लिए देवता है!” (यह वाक्य में लय के महत्व को रेखांकित करता है)
• 'भी' - “नींद में भी हाथ चलता रहता है।” (यह दर्शाता है कि नृत्य महाराज जी के जीवन में कितना गहरा रचा-बसा था)
• 'तंबू' - “घुँघट उठा रहे हो या तंबू?” (यह शब्द वाक्य में हास्य और व्यंग्य का पुट पैदा करता है)
In simple words: 'इतना', 'भी', 'जरूर' जैसे शब्द साधारण वाक्यों को बहुत ही खास और वजनदार बना देते हैं, जिससे बात का महत्व बढ़ जाता है।
Exam Tip: हिंदी व्याकरण में इन शब्दों को 'निपात' या 'विशेषण' कहा जाता है जो वाक्य के अर्थ को अतिरिक्त बल प्रदान करते हैं।
पेज 108 - कला का संसार
Question (क). बिरजू महाराज- “कथक की पुरानी परंपरा को तो कायम रखा ही है, उसके प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए हैं।” इस कथन को ध्यान में रखते हुए लिखिए कि कथक की प्रस्तुतियों में किस प्रकार के परिवर्तन आए हैं?
Answer: बिरजू महाराज ने कथक की प्राचीन शुद्धता को बनाए रखते हुए इसके मंचन के तरीकों में कई महत्वपूर्ण और आधुनिक बदलाव किए:
(1) उन्होंने कथक की प्रस्तुतियों में संक्षिप्तता लाई। पहले जहाँ कहानियों का बहुत लंबा वर्णन होता था, वहीं अब केवल मुख्य हाव-भाव जैसे 'पनघट की गत' दिखाकर बाकी हिस्सा दर्शकों की कल्पना पर छोड़ दिया जाता है।
(2) उन्होंने कथक नृत्य नाटकों के लिए रवींद्रनाथ टैगोर और संत त्यागराज जैसे महान कवियों की रचनाओं को शामिल कर कथक को नई विषय-वस्तु प्रदान की।
(3) पुराने समय में कथक फर्श पर चाँदनी बिछाकर किया जाता था और दर्शक चारों तरफ बैठते थे। अब इसे आधुनिक लाइटों, ध्वनि प्रणालियों और बड़े रंगमंच (थिएटर) पर भव्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
In simple words: पहले कथक बहुत लंबे समय तक जमीन पर बैठकर देखा जाता था। महाराज जी ने इसे बड़े आधुनिक स्टेज पर पहुँचाया और कहानियों को छोटा व असरदार बनाया।
Exam Tip: उत्तर में प्रस्तुतीकरण के तीन मुख्य आयामों - समय की संक्षिप्तता, नए कवियों का जुड़ाव और आधुनिक मंच तकनीक - को अलग-अलग लिखें।
Question (ख). लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है? लिखिए।
Answer: लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में मुख्य अंतर निम्नलिखित तालिका के माध्यम से समझे जा सकते हैं:
| विशेषताएँ | लोकनृत्य | शास्त्रीय नृत्य |
|---|---|---|
| 1. प्रकृति | यह पूरी तरह सामूहिक होता है। लोग मिलकर अपनी खुशी व्यक्त करने और थकान मिटाने के लिए नाचते हैं। | यह अक्सर एकल (अकेले कलाकार द्वारा) किया जाता है और इसमें कलाकार की व्यक्तिगत श्रेष्ठता महत्वपूर्ण होती है। |
| 2. उद्देश्य | इसका मुख्य उद्देश्य मन बहलाना, आनंद उठाना और सामाजिक उत्सव मनाना होता है। | यह कला की साधना, रस की अभिव्यक्ति और दर्शकों के सम्मुख भव्य प्रदर्शन के लिए होता है। |
| 3. विकास | यह पारंपरिक कहानियों और प्राकृतिक जीवन से सहज रूप से विकसित हुआ है। इसके नियम कड़े नहीं होते। | यह प्राचीन शास्त्रों के कड़े नियमों, मुद्राओं और निश्चित व्याकरण के आधार पर विकसित हुआ है। |
| 4. लय और भाव | यह किसी विशेष क्षेत्र की अनूठी संस्कृति, लोकगीतों और रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में दिखाता है। | इसकी अपनी विशिष्ट लय, ताल और मुद्राएँ होती हैं जो प्राचीन मूर्तिकला या धार्मिक ग्रंथों से प्रेरित होती हैं। |
| 5. अवसर | यह फसल कटाई, विवाह, बच्चे के जन्म और लोक त्योहारों के सामाजिक अवसरों पर किया जाता है। | यह विशेष रंगमंचों और सांस्कृतिक महोत्सवों पर गहन अभ्यास व साधना के बाद ही प्रस्तुत किया जाता है। |
Exam Tip: तुलनात्मक उत्तरों को हमेशा तालिका (Table) के रूप में प्रस्तुत करें, इससे अंक मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
Question (ग). “बैरगिनाला नाला जुल्म जोर, नौ कथिक नचवें तीन चोर। जब तबला बोले धीन-धीन, तब एक-एक पर तीन-तीन।” इस पाठ में हरिया गाँव में गाए जाने वाले उपर्युक्त पद का उल्लेख है। आप अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले किसी लोकगीत को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
Answer: मैं राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र का एक बेहद ही प्रसिद्ध और कर्णप्रिय लोकगीत प्रस्तुत करना चाहूँगा, जिसके बोल हैं - "केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देस"।
इस लोकगीत में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, वहाँ की अतुल्य मेहमाननवाज़ी और शूरवीरता की अनूठी झलक मिलती है। यह गीत परदेस गए प्रियतम को वापस बुलाने और मेहमानों के आदर-सत्कार के लिए पारंपरिक मांड शैली में गाया जाता है। पारंपरिक वेशभूषा में इसकी प्रस्तुति दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।
In simple words: हमारे मारवाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध गीत 'केसरिया बालम' है, जिसमें बहुत ही प्यार से मेहमानों का अपने घर और देश में स्वागत किया जाता है।
Exam Tip: अपने क्षेत्र के किसी भी वास्तविक लोकगीत का नाम लिखकर उसकी एक या दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख उत्तर में करें।
पेज 109 - साक्षात्कार की रचना
Question (क). साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी?
Answer: इस बेहतरीन साक्षात्कार को तैयार करने से पहले निम्नलिखित महत्वपूर्ण तैयारियाँ की गई होंगी:
(1) गहन शोध: बिरजू महाराज के बचपन, उनके पूज्य गुरुओं, उनके जीवन के उतार-चढ़ाव और कथक के क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में पहले से गहरी जानकारी जुटाई गई होगी।
(2) प्रश्नों का निर्माण: पाठकों की आयु और रुचि को ध्यान में रखते हुए महाराज जी के संपूर्ण जीवन को छूने वाले अर्थपूर्ण प्रश्नों की एक सूची बनाई गई होगी।
(3) सरल भाषा का चयन: बातचीत बच्चों के लिए सहज और मनोरंजक रहे, इसलिए बहुत ही आसान और बोधगम्य भाषा का चुनाव किया गया होगा।
(4) प्रस्तुतीकरण का क्रम: प्रश्नों को पूछने का एक सही क्रम तय किया गया होगा ताकि बातचीत के दौरान विचारों का प्रवाह बना रहे।
In simple words: इंटरव्यू से पहले बिरजू महाराज के बारे में सारी बातें पढ़ी गई होंगी, आसान सवाल लिखे गए होंगे और बातचीत का एक सही क्रम तय किया गया होगा।
Exam Tip: साक्षात्कार की तैयारियों को बिंदुओं (Points) में लिखकर स्पष्टता लाएं, जिससे उत्तर आकर्षक दिखे।
Question (ख). आप इस साक्षात्कार में और क्या-क्या प्रश्न जोड़ना चाहेंगे?
Answer: यदि मुझे इस साक्षात्कार में प्रश्न जोड़ने का अवसर मिले, तो मैं निम्नलिखित प्रश्न जोड़ना चाहूँगा:
(1) आज के इंटरनेट और डिजिटल युग में बच्चों को शास्त्रीय नृत्य और संगीत की तरफ आकर्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
(2) क्या कथक में पाश्चात्य या आधुनिक संगीत के साथ नए प्रयोग किए जा सकते हैं, या इसे पूरी तरह से अपनी पारंपरिक शुद्धता में ही रखना चाहिए?
(3) नृत्य की साधना के दौरान जब आप पूरी तरह मग्न हो जाते हैं, तो आपको मानसिक रूप से कैसा अनुभव होता है?
In simple words: मैं उनसे पूछना चाहूँगा कि आज के बच्चों को कथक सीखने के लिए कैसे प्रेरित करें और डांस करते समय उनके मन को कैसी शांति मिलती है।
Exam Tip: प्रश्न हमेशा रचनात्मक और कला के वर्तमान परिदृश्य से जुड़े हुए होने चाहिए।
Question (ग). यदि आपकी किसी सखी विजेता, रिक्शा चालक, घरेलू सहायक या महाप्रबंधक का साक्षात्कार लेना हो तो आपके प्रश्न किस प्रकार के होंगे?
Answer: विभिन्न व्यक्तियों के जीवन और उनके अनुभवों को जानने के लिए मेरे प्रश्न इस प्रकार होंगे:
• सखी विजेता से साक्षात्कार के प्रश्न:
- तुम्हें खेलकूद या पढ़ाई में से किस गतिविधि में सबसे अधिक आनंद मिलता है?
- इस बड़ी सफलता को हासिल करने के पीछे तुम्हारा सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत कौन रहा है?
• रिक्शा चालक से साक्षात्कार के प्रश्न:
- आप कितने वर्षों से रिक्शा चला रहे हैं और इस काम में रोज़ाना किस तरह की कठिनाइयाँ आती हैं?
- दिनभर की कड़ी मेहनत और थकान के बाद आप अपने मनोरंजन और आराम के लिए क्या करते हैं?
• घरेलू सहायक से साक्षात्कार के प्रश्न:
- आप सुबह से शाम तक औसतन कितने घरों में काम करते हैं और वहाँ आपका अनुभव कैसा रहता है?
- क्या आप अपने बच्चों को पढ़ा-लिखाकर किसी बड़े पद पर पहुँचाने का सपना देखते हैं?
• महाप्रबंधक (मैनेजर) से साक्षात्कार के प्रश्न:
- आपके इस बड़े पद पर सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी क्या होती है और आप तनाव को कैसे संभालते हैं?
- आप अपने व्यस्त दफ्तर के काम और अपने परिवार के बीच किस प्रकार संतुलन बनाए रखते हैं?
In simple words: हर व्यक्ति के काम और संघर्ष के अनुसार अलग-अलग सवाल होने चाहिए ताकि हम उनके जीवन और खुशियों को अच्छे से समझ सकें।
Exam Tip: प्रत्येक श्रेणी के व्यक्ति के अनुसार संवेदनशीलता और उनके कार्यक्षेत्र से जुड़े सटीक प्रश्न ही तैयार करें।
पेज 109 - सृजन
Question (क). आपके विद्यालय में कथक नृत्य का आयोजन हो रहा है। आप दर्शकों को कथक नृत्यकला के बारे में क्या-क्या बताएँगे? लिखिए।
Answer: मैं दर्शकों को संबोधित करते हुए कथक के बारे में ये मुख्य बातें बताऊँगा:
(1) कथक हमारे भारत देश की अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है, जिसका जन्म उत्तर भारत में हुआ था।
(2) इसमें पैरों की अद्भुत थाप, सैकड़ों घुँघरूओं की झंकार, सुंदर चक्र (घूमर) और चेहरे के बारीक हाव-भाव का बेजोड़ मेल देखने को मिलता है।
(3) इस नृत्य के माध्यम से कलाकार प्राचीन पौराणिक कथाओं, देवी-देवताओं के चरित्र और प्रेम की सुंदर कहानियों को मंच पर सजीव कर देते हैं।
(4) कथक केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी महान संस्कृति और ईश्वर की भक्ति का एक जीवंत रूप है।
In simple words: कथक भारत का एक बहुत ही पुराना नाच है जिसमें पैरों की ताल, घुँघरू की आवाज़ और चेहरे के सुंदर इशारों से भगवान की कहानियाँ दिखाई जाती हैं।
Exam Tip: कथक के शास्त्रीय महत्व और इसकी मुख्य विशेषताओं (जैसे घुँघरू, चक्कर, भाव-भंगिमा) को अपने भाषण में ज़रूर शामिल करें।
Question (ख). इस कार्यक्रम की सूचना देने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
Answer:
★ कथक संध्या - सांस्कृतिक कार्यक्रम की सूचना ★
प्रिय छात्र-छात्राओं एवं आदरणीय अभिभावकगण,
आपको सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि हमारे विद्यालय के प्रांगण में एक भव्य कथक नृत्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
इस पावन अवसर पर देश के सुप्रसिद्ध कथक गुरु अपनी अद्भुत और मनमोहक प्रस्तुतियाँ देंगे तथा इस प्राचीन कला से हमें रूबरू कराएंगे।
दिनांक: 25 अगस्त 2025 | समय: प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
स्थान: विद्यालय का मुख्य सभा भवन
विशेष आकर्षण: घुँघरूओं की झंकार, सुंदर भाव-भंगिमाएँ और सजीव नृत्य नाटिका
आप सभी सादर आमंत्रित हैं!
प्रधानाचार्य
तिवारी एकेडमी विद्यालय
Exam Tip: विज्ञापन या सूचना बनाते समय दिनांक, समय, स्थान और मुख्य आकर्षण जैसी जानकारियों को साफ और बड़े अक्षरों में लिखें।
Question (ग). यदि इस नृत्य कार्यक्रम में दृष्टिबाधित दर्शक हैं और वह नृत्य का आनन्द लेना चाहे तो इसके लिए विद्यालय की ओर से क्या व्यवस्था की जानी चाहिए?
Answer: दृष्टिबाधित दर्शकों को नृत्य का भरपूर आनंद देने के लिए विद्यालय द्वारा निम्नलिखित विशेष प्रबंध किए जाने चाहिए:
(1) सजीव आँखों देखा हाल (लाइव कमेंट्री): मंच के ठीक पास से एक उद्घोषक द्वारा माइक पर नर्तक की हर एक शारीरिक मुद्रा, चेहरे के भाव और गति का बारीकी से सजीव वर्णन किया जाए।
(2) स्पष्ट ध्वनि व्यवस्था: तबला, पखावज की थाप और घुँघरूओं की रुनझुन की आवाज़ को बहुत ही स्पष्ट और मधुर रखा जाए ताकि वे केवल सुनकर ही ताल का आनंद उठा सकें।
(3) सहयोगी स्वयंसेवक: प्रत्येक दृष्टिबाधित दर्शक के समीप एक छात्र स्वयंसेवक बैठाया जाए जो समय-समय पर उन्हें मंच की हलचल समझाता रहे।
(4) स्पर्श आधारित अनुभव: कार्यक्रम शुरू होने से पहले उन्हें घुँघरू, वाद्ययंत्र और नर्तकों की सुंदर पोशाकों को छूकर महसूस करने का अवसर दिया जाए।
In simple words: दृष्टिबाधित लोगों के लिए माइक पर नाच का पूरा हाल सुनाया जाए, वाद्ययंत्रों की आवाज़ बहुत साफ़ रखी जाए और उन्हें नृत्य की पोशाक व घुँघरू छूने की सुविधा दी जाए।
Exam Tip: इस संवेदनशील प्रश्न का उत्तर देते समय समावेशी शिक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं (ऑडियो विवरण) के बिंदुओं पर ध्यान दें।
पेज 111 - आज की पहेली
Question. नीचे दी गई शब्द पहेली में से संगीत की उन तालों के नाम ढूँढ़कर लिखिए जो इस पाठ/विवरण में आए हैं-
Answer: दी गई शब्द पहेली की ग्रिड में से ढूँढे गए प्रमुख तालों के नाम इस प्रकार हैं:
(1) दीपचंदी (ग्रिड में पांचवीं पंक्ति में क्षैतिज रूप से: दी - प - चं - दी)
(2) कहरवा (ग्रिड में तीसरी पंक्ति में क्षैतिज रूप से: क - ह - र - वा)
(3) झूमरा (ग्रिड में चौथी पंक्ति में क्षैतिज रूप से: झू - म - रा)
(4) तिलवाड़ा (ग्रिड में छठे कॉलम में लंबवत रूप से ऊपर से नीचे: ति - ल - वा - ड़ा)
(5) दादरा (ग्रिड में पांचवें कॉलम में लंबवत रूप से ऊपर से नीचे: दा - द - रा)
(6) रूपक (ग्रिड में तीसरे कॉलम में लंबवत रूप से ऊपर से नीचे: रू - प - क)
In simple words: इस पहेली के खानों को आपस में जोड़कर संगीत के छः प्रसिद्ध तालों - दीपचंदी, कहरवा, झूमरा, तिलवाड़ा, दादरा और रूपक के नाम खोजे गए हैं।
Exam Tip: ग्रिड आधारित पहेलियों को हल करते समय शब्दों को आड़े (क्षैतिज) और खड़े (लंबवत) दोनों तरीकों से ध्यानपूर्वक ढूँढना चाहिए।
Hindi Class 7 Curriculum Solutions: Malhar Chapter 08 बिरजू महाराज से साक्षात्कार (साक्षात्कार)
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