NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी)

Get the most accurate NCERT Solutions for Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest NCERT textbooks for Class 7 Hindi. Our expert-created answers for Class 7 Hindi are available for free download in PDF format.

Detailed Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) NCERT Solutions for Class 7 Hindi

For Class 7 students, solving NCERT textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 7 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) solutions will improve your exam performance.

Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) NCERT Solutions PDF

पेज 62

मेरी समझ से

 

Question 1. बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?
(a) उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
(b) उसका साबूदाने की खीर खाने का मन था।
(c) उसने गृहकार्य नहीं किया था।
(d) उसे बुखार हो गया था।
Answer: (a) उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था। और (c) उसने गृहकार्य नहीं किया था।
In simple words: बच्चे का स्कूल जाने का मन भी नहीं था और उसने अपना होमवर्क भी पूरा नहीं किया था।

Exam Tip: परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्नों में एक से अधिक सही विकल्प होने पर दोनों विकल्पों को ध्यान से चिन्हित करें।

 

Question 2. कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, "इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।" बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि -
(a) घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
(b) बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती।
(c) झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है।
(d) इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
Answer: (a) घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है। और (d) इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
In simple words: बच्चे को लगा कि घर पर अकेले भूखे रहने से बेहतर है कि वह स्कूल जाकर दोस्तों के साथ पढ़ाई और मस्ती करे।

Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्र के विचारों में आए बदलाव को समझने के लिए उसके अंतिम निर्णयों पर ध्यान दें।

 

Question 3. "लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी" इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?
(a) उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।
(b) उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
(c) वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था।
(d) बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।
Answer: (a) उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी। और (b) उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
In simple words: बच्चा बिस्तर पर लेटे-लेटे बहुत बोर हो गया था और उसे बीमारी का कोई डर नहीं था।

Exam Tip: पात्रों के शारीरिक हाव-भाव और कथनों से उनकी मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास करें।

 

Question 4. "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि -
(a) बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
(b) बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।
(c) बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
(d) बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।
Answer: (a) बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है। (b) बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है। और (c) बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
In simple words: बच्चे को लगा कि बीमार होने पर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा, आराम मिलेगा और बढ़िया खाना खाने को मिलेगा।

Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

 

Question 5. हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
Answer: जब हमने अपनी टोली में इन सवालों पर बात की, तब मेरे दोस्तों के जवाब थोड़े भिन्न थे। मैंने उन्हें अपने जवाबों का कारण इस प्रकार स्पष्ट किया:
• प्रथम प्रश्न के उत्तर में मैंने स्पष्ट किया कि बालक विद्यालय नहीं जाना चाहता था और उसका गृहकार्य भी अधूरा था। पाठ में स्पष्ट उल्लेख है कि विद्यालय जाने पर उसे दंड मिलने का भय था।
• द्वितीय प्रश्न के लिए मैंने तर्क दिया कि घर पर पड़े रहने की तुलना में विद्यालय अधिक मनोरंजक है। बहाना बनाने के कारण उसे पूरे दिन भूखा-प्यासा और अकेले बिताना पड़ा, जिससे उसका मन फिर से खेलने-कूदने के लिए मचलने लगा।
• तृतीय प्रश्न के संदर्भ में, लगातार लेटे रहने के कारण उत्पन्न हुई बोरियत को "पीठ दुखने लगी" वाक्यांश दर्शाता है। उसे अब रोग का कोई भय नहीं था क्योंकि अस्वस्थ होने पर कोई बालक खेलकूद और व्यंजनों के बारे में नहीं सोचता।
• चतुर्थ प्रश्न पर मैंने समझाया कि बीमार व्यक्ति को विद्यालय से मुक्ति, विश्राम और बढ़िया भोजन मिलता देखकर ही बालक के मन में यह विचार आया कि बीमार होने के बहुत ठाठ हैं।
In simple words: दोस्तों से चर्चा करने पर पता चला कि सबके विचार अलग हो सकते हैं। मैंने उन्हें समझाया कि कहानी की घटनाओं के आधार पर ही मैंने ये सही उत्तर चुने हैं।

Exam Tip: समूह चर्चा वाले प्रश्नों में हमेशा अपने उत्तर के समर्थन में पाठ से ठोस उदाहरण या तर्क प्रस्तुत करें।

 

पेज 63

मिलकर करें मिलान

 

Question 6. पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों से मिलाइए।
Answer:

शब्दसही अर्थ
1. साबूदानासागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, यह पहले आटे के रूप में होता है और फिर कूटकर दानों के रूप में सुखा लिया जाता है।
2. वार्डकिसी विशिष्ट कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान।
3. नर्सवह व्यक्ति जो रोगियों, घायलों या वृद्धों आदि की देखभाल करे।
4. रजाईएक प्रकार का जाड़े का ओढ़ना जिसका कपड़ा दोहरा होता है और जिसमें रुई भरी होती है।
5. थर्मामीटरशरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र।
6. काढ़ाकई तरह की जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर उनके रस से बना पेय होता है। इसे सर्दी-जुकाम, खाँसी-बुखार और पाचन से जुड़ी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।
7. डाइक्लीनररेशमी, ऊनी, मलमल जैसे नाजुक कपड़ों को पानी, साबुन और डिटर्जेंट के बिना मशीनों से साफ करने वाला व्यक्ति।
8. ताजमहलउत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित 17वीं सदी में निर्मित एक विश्व-प्रसिद्ध स्मारक जो सफेद संगमरमर से बना है।
9. अरहरएक दाल जिसे तुअर भी कहते हैं।
In simple words: यहाँ दिए गए शब्दों को उनके सही अर्थों के साथ मिलाया गया है ताकि हम उनके सही मतलब को समझ सकें।

Exam Tip: शब्दार्थ मिलान वाले प्रश्नों में शब्दों के मुख्य अर्थ और उनके व्यावहारिक उपयोग को याद रखें।

 

पंक्तियों पर चर्चा

 

Question 7. "मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।" इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
Answer: इस कथन से ज्ञात होता है कि बालक का मन विद्यालय जाने का नहीं था क्योंकि उसका गृहकार्य पूर्ण नहीं हुआ था। उसे भय था कि कक्षा में शिक्षक उसे दंडित करेंगे। इसी दंड से रक्षा के लिए उसने बीमारी का झूठा नाटक रचा ताकि उसे घर पर ही रुकने का अवसर मिल जाए।
In simple words: बच्चे ने डांट और सजा से बचने के लिए बीमारी का नाटक किया क्योंकि उसने अपना होमवर्क नहीं किया था।

Exam Tip: परीक्षा में पंक्ति का अर्थ लिखते समय उस समय के पात्र की मनःस्थिति और कारण दोनों को स्पष्ट करें।

 

Question 8. "देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछने पर तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।" इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
Answer: इन वाक्यों द्वारा बालक के भीतर व्याप्त क्रोध और हताशा का पता चलता है। उसने सोचा था कि बीमार होने का स्वांग करने पर उसे सुधाकर काका की भाँति स्वादिष्ट साबूदाने की खीर खाने का अवसर प्राप्त होगा। परंतु इसके विपरीत, उसे अन्न के एक-एक दाने के लिए तरसना पड़ा। उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि परिवार में उसकी कोई चिंता नहीं करता। वह कुंठित था कि एक साधारण सी माँग के बदले उसे उपवास रखना पड़ रहा है। नानाजी के इस तर्क पर भी उसे अत्यंत क्षोभ था कि भूखे रहने से शरीर के रोग शांत हो जाते हैं।
In simple words: बच्चा साबूदाने की खीर खाना चाहता था, लेकिन जब उसे भूखा रखा गया तो उसे बहुत गुस्सा आया और लगा कि कोई उसे प्यार नहीं करता।

Exam Tip: व्याख्यात्मक प्रश्नों में मुख्य शब्दों जैसे "क्रोध", "हताशा", "उपेक्षा" आदि का उपयोग करने से अच्छे अंक मिलते हैं।

 

पेज 64

सोच-विचार के लिए

 

Question 9. अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?
Answer: चिकित्सालय परिसर में बालक को जो चीजें आकर्षित कर पाईं, वे इस प्रकार हैं:
1. स्वच्छता: चारों ओर बिखरी उज्ज्वलता जैसे चमकीला फर्श, धवल दीवारें तथा शय्या पर बिछी स्वच्छ श्वेत चादरें उसे बहुत सुहावनी लगीं।
2. निस्तब्धता: वहाँ वाहनों का कोलाहल, धूल-मिट्टी या कीट-पतंगों का नामोनिशान नहीं था। केवल लोगों की मंद स्वर में होने वाली चर्चा ही सुनाई पड़ रही थी, जो उसे सुखद लगी।
3. प्राकृतिक सौंदर्य: विशाल झरोखों के पार डोलते हरे-भरे वृक्षों के दृश्य ने भी उसका मन मोह लिया।
In simple words: बच्चे को अस्पताल की साफ-सफाई, वहाँ की शांति और खिड़की से दिखने वाले हरे-भरे पेड़ बहुत अच्छे लगे।

Exam Tip: उत्तर को बिंदुओं में विभाजित करके लिखने से प्रस्तुतीकरण स्पष्ट और आकर्षक बनता है।

 

Question 10. कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
Answer: निश्चित रूप से, बालक का यह सोचना पूरी तरह न्यायसंगत था। घर पर रोग का नाटक रचकर पड़े रहने से वह अत्यंत क्लांत हो गया था, उसके शरीर में शिथिलता आ गई थी और तीखी भूख सताने लगी थी। उसे अपने सहपाठियों के साथ मध्यावकाश में अमरूद का रसास्वादन करना याद आ रहा था। उसने अनुभव किया कि विद्यालय में मिलने वाला लघु दंड, घर की इस नीरसता से कहीं उत्तम है। उसका यह विचार उचित था क्योंकि विद्यालय में ज्ञानार्जन के साथ-साथ मित्रों का सान्निध्य और आनंद भी मिलता है, जो एकाकीपन से कहीं श्रेष्ठ है।
In simple words: हाँ, उसका सोचना सही था क्योंकि स्कूल में पढ़ाई के साथ दोस्तों का साथ और खेलने का मौका मिलता है, जो घर पर अकेले बोर होने से कहीं बेहतर है।

Exam Tip: अपने मत की पुष्टि के लिए व्यावहारिक उदाहरण और कहानी के मुख्य बिंदुओं को आपस में जोड़कर उत्तर लिखें।

 

Question 11. जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
Answer: शय्या पर अस्वस्थता का ढोंग करते समय बालक के हृदय में विभिन्न प्रकार की भावनाएँ जागृत हो रही थीं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
• खिन्नता: निरंतर एक ही स्थान पर बंधे रहने के कारण वह गंभीर रूप से उकता गया था।
• क्षुधा: पेट में उठने वाली भूख के कारण उसे स्वादिष्ट पकवानों की स्मृतियाँ व्याकुल कर रही थीं।
• ईर्ष्या व क्रोध: मुन्नू को रसीले आमों का आनंद लेते देखकर उसका मन ईर्ष्या और रोष से भर उठा।
• अनुताप: अपनी इस चालाकी पर उसे गहरा संताप हो रहा था और वह सोच रहा था कि विद्यालय चले जाना ही बुद्धिमानी होती।
• आशंका: उसे गृहकार्य अधूरा होने की घबराहट भी थी कि अब वह किस सहपाठी की पुस्तिका की सहायता से अपना कार्य पूर्ण करेगा।
In simple words: बिस्तर पर लेटे-लेटे बच्चे को बहुत बोरियत, तेज भूख, मुन्नू को देखकर जलन, अपनी गलती पर पछतावा और स्कूल के होमवर्क की चिंता हो रही थी।

Exam Tip: भावनाओं (जैसे ईर्ष्या, पछतावा, चिंता) को स्पष्ट शीर्षकों के अंतर्गत लिखने से उत्तर अत्यधिक प्रभावशाली बनता है।

 

Question 12. कहानी में बच्चे ने सोचा था कि "ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।" आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?
Answer:
• समानताएँ: बालक की कल्पना और वास्तविक अस्वस्थता में केवल इतनी समानता है कि दोनों दशाओं में मनुष्य को शय्या पर विश्राम की शरण लेनी पड़ती है तथा वह दैनिक कार्यों या पाठशाला जाने में असमर्थ हो जाता है.
• भिन्नताएँ: बालक का सोचना था कि बीमारी में स्वादिष्ट व्यंजन (जैसे साबूदाने की खीर) खाने को मिलते हैं और जीवन सुखमय हो जाता है.
• सच्चाई: वास्तव में बीमार पड़ने पर शरीर रुग्णता, दुर्बलता और घबराहट से घिर जाता है। रोगी को अरुचिकर औषधियों का सेवन करना पड़ता है, भोजन के प्रति अरुचि उत्पन्न हो जाती है और केवल पथ्य भोजन (दलिया अथवा खिचड़ी) ही ग्राह्य होता है। बीमारी वैभव नहीं, अपितु शारीरिक पीड़ा लेकर आती है।
In simple words: समानता यह है कि दोनों हालतों में बिस्तर पर आराम करना पड़ता है। अंतर यह है कि बच्चा बीमारी को मजेदार समझता था, जबकि असल में बीमारी बहुत दर्दनाक और कड़वी दवाओं वाली होती है।

Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में 'समानता' और 'अंतर' दोनों पक्षों को समानांतर रूप से स्पष्ट करना आवश्यक है।

 

Question 13. नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
Answer: हाँ, मेरे दृष्टिकोण से नाना-नानी द्वारा उठाया गया कदम सर्वथा न्यायोचित था। संभवतः उन्हें लगा कि बालक उदर रोग अथवा ज्वर से पीड़ित है। हमारे यहाँ सामान्यतः पेट की अस्वस्थता या बुखार की स्थिति में लंघन (उपवास) रखने अथवा अत्यंत सुपाच्य भोजन ग्रहण करने का परामर्श दिया जाता है। नानाजी का यह कथन कि खाली पेट रहने से आंतरिक विकार दूर होते हैं, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के अनुकूल है। इसके अतिरिक्त, उनका कड़वी औषधि और काढ़ा देना यह सिद्ध करता है कि वे बालक के स्वास्थ्य के प्रति अत्यंत गंभीर थे।
In simple words: हाँ, उन्होंने ठीक किया क्योंकि पेट खराब होने या बुखार होने पर खाली पेट रहना या हल्का खाना ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

Exam Tip: बुजुर्गों के व्यवहार के पीछे छिपे वैज्ञानिक या पारंपरिक स्वास्थ्य कारणों को उजागर करते हुए अपना उत्तर लिखें।

 

पेज 65

अनुमान और कल्पना से

 

Question 14. कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?
Answer: यदि बालक अंत में अपनी इस भूल को स्वीकार कर लेता, तो संभवतः नाना-नानी आरंभ में उस पर तनिक रुष्ट होते, परंतु बाद में उसकी सत्यवादिता की सराहना अवश्य करते। ऐसा होने पर उसकी दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती. उसे अरुचिकर काढ़े और तीखी पुड़ियों का सेवन नहीं करना पड़ता। संभव है कि नानीजी ममतावश उसके लिए सुरुचिपूर्ण दाल-चावल अथवा उसकी प्रिय साबूदाने की खीर तैयार कर देतीं। उसे पूरा दिन क्षुधा और नीरसता में व्यतीत नहीं करना पड़ता। वह खुले प्रांगण में मित्रों के साथ खेल-कूद का आनंद ले पाता और उसका दिन उबाऊ होने के स्थान पर अत्यंत आनंदमयी हो जाता।
In simple words: अगर बच्चा सच बोल देता, तो उसे कड़वी दवा नहीं पीनी पड़ती, नानी उसे स्वादिष्ट खीर बनाकर देतीं और वह दोस्तों के साथ खेल पाता।

Exam Tip: कल्पनाशील प्रश्नों में सकारात्मक और तार्किक परिणामों को दर्शाते हुए कहानी का नया मोड़ प्रस्तुत करें।

 

Question 15. कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे?
Answer: यदि मैं नानीजी के स्थान पर होती और बालक के प्रपंच को ताड़ जाती, तो उससे सत्य स्वीकार कराने हेतु एक कौतुकपूर्ण युक्ति अपनाती। मैं पाकशाला में जाकर उसके प्रिय व्यंजनों जैसे गरमागरम कचौरियों अथवा मधुर हलवे के निर्माण की चर्चा ऊँचे स्वर में करती। तत्पश्चात उसके समीप जाकर अत्यंत सहृदयता से कहती, "आज तो तुम्हारी प्रिय खाद्य सामग्री तैयार की गई है, किंतु दुर्भाग्यवश तुम अस्वस्थ हो। रोगियों के लिए इन गरिष्ठ भोजनों का सेवन निषेध है, अतः तुम्हारे निमित्त केवल सादी खिचड़ी ही उपयुक्त रहेगी।" इस स्वादिष्ट सुगंध और प्रलोभन से उसका धैर्य टूट जाता और वह तुरंत स्वीकार कर लेता कि वह पूर्णतः स्वस्थ है और उस भोजन का अधिकारी है।
In simple words: मैं उसके सामने स्वादिष्ट पकवानों की तारीफ करती और कहती कि बीमार होने के कारण उसे केवल सादी खिचड़ी मिलेगी, जिससे वह खुद ही सच बोल देता।

Exam Tip: व्यावहारिक और बुद्धिमत्तापूर्ण युक्तियों का वर्णन करके अपने उत्तर को अधिक रोचक बनाएँ।

 

Question 16. कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
Answer: यदि बालक के स्थान पर मैं गृह में एकाकी होता और नीरसता का अनुभव करता, तो मनोरंजन हेतु निम्नलिखित गतिविधियों को अपनाता:
1. किसी रुचिकर कथा अथवा सचित्र पुस्तकों का अध्ययन करता।
2. अपनी चित्रकला पुस्तिका में सुंदर आकृतियाँ बनाता अथवा रचनात्मक लेखन का अभ्यास करता।
3. शांत रहकर अपने प्रिय खिलौनों के माध्यम से क्रीड़ा करता।
4. गवाक्ष (खिड़की) के समीप बैठकर मार्ग पर होने वाली हलचल और राहगीरों को निहारता।
In simple words: मैं कहानियों की किताबें पढ़ता, ड्राइंग बनाता, अपने खिलौनों से खेलता या खिड़की से बाहर देखता ताकि मेरा मन लगा रहे।

Exam Tip: एकाकीपन दूर करने के लिए रचनात्मक और सकारात्मक कार्यों को वरीयता देकर उत्तर लिखें।

 

Question 17. कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता?
Answer: यदि बालक बीमारी का ढोंग न रचकर समय पर विद्यालय प्रस्थान करता, तो उसका संपूर्ण दिवस अत्यंत हर्षोल्लास के साथ व्यतीत होता। वह कक्षा-कक्ष में सहपाठियों से भेंट करता और पठन-पाठन में भाग लेता। मध्यावकाश के समय मित्रों संग विद्यालय के बाहर विक्रेता से चटपटे अमरूद खरीदकर उसका रसास्वादन करता। वह उनके साथ क्रीड़ा करता और गपशप लड़ाता। संध्या समय गृह वापसी पर यद्यपि वह शारीरिक रूप से श्रमित होता, किंतु उसका मन असीम प्रसन्नता से परिपूर्ण होता। साथ ही, वह किसी मित्र की पुस्तिका की सहायता से अपना अपूर्ण कार्य भी संपन्न कर लेता।
In simple words: अगर बच्चा स्कूल जाता, तो वह दोस्तों के साथ खेलता, पढ़ाई करता, चटपटे अमरूद खाता और शाम को बहुत खुश होकर घर लौटता।

Exam Tip: विद्यालय जीवन की सकारात्मक अनुभूतियों को अपनी कल्पना से जोड़कर विस्तृत उत्तर लिखें।

 

Question 18. अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
Answer: यदि मैं नाना-नानी के स्थान पर होता, तो बालक से अत्यधिक आत्मीयता से संवाद स्थापित कर उसकी वास्तविक समस्या को समझने का यत्न करता। यदि मुझे उसके झूठे बहाने का लेशमात्र भी संदेह होता, तो भी उसे पूर्णतः निराहार नहीं रखता। मैं उसे स्वास्थ्योपयोगी और सुपाच्य आहार जैसे दलिया अथवा पतली खिचड़ी उपलब्ध कराता और स्नेहपूर्वक बोध कराता कि कर्तव्यों से पलायन हेतु रोगों का स्वांग रचना अवांछनीय है।
In simple words: मैं बच्चे से प्यार से बात करके उसकी समस्या जानता, उसे भूखा रखने की बजाय हल्का खाना खिलाता और समझाता कि झूठ बोलना गलत है।

Exam Tip: संवेदनशील और सुधारात्मक दृष्टिकोण दर्शाते हुए अपने उत्तर का अंत करें।

 

पेज 66

कहानी की रचना

 

Question 19. इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।
Answer: इस उत्कृष्ट रचना की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. बालमन का यथार्थ निरूपण: रचनाकार ने अत्यंत सुंदर शैली में बालक के मानसिक द्वंद्व, उसकी चंचलता, लोभ और अंततः ग्लानि की भावना का जीवंत चित्रण किया है।
2. सुगम व गतिशील शैली: कहानी की भाषा अत्यंत प्रवाहमयी और सहज है, जिसे सामान्य पाठक भी सरलतापूर्वक हृदयंगम कर सकता है।
3. बिंब विधान (चित्रात्मकता): अस्पताल और भोज्य पदार्थों का वर्णन ऐसा है कि पढ़ते समय पाठक की आँखों के सम्मुख दृश्य साकार हो उठते हैं।
4. कुतूहल और विनोद प्रियता: कथा में हास्य का पुट और बालक की चेष्टाएँ मनोरंजन का सृजन करती हैं।
5. नैतिक संदेश: कहानी के माध्यम से बालकों को यह अमूल्य सीख मिलती है कि असत्य और कामचोरी का अंत सदा दुखद ही होता है।
In simple words: इस कहानी में बच्चों के मन की बातें, आसान भाषा, सुंदर वर्णन, मजेदार हास्य और एक अच्छी सीख छिपी हुई है।

Exam Tip: साहित्यिक विशेषताओं को स्पष्ट और प्रभावशाली साहित्यिक शब्दावली में प्रस्तुत करें।

 

Question 20. कहानी में से निम्नलिखित विशेष बिंदुओं के लिए उपयुक्त उदाहरण खोजकर लिखिए।
Answer:

विशेष बिंदुकहानी में से उदाहरण
बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जानाअस्पताल में सुधाकर काका से भेंट की पुरानी घटना को बालक द्वारा स्मरण करना।
हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग किया जाना"क्या ठाठ हैं बीमारों के भी। मैंने सोचा... ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो!"
बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आनाप्रारंभ में बालक रोगग्रस्त होने को सुखद मानता है, परंतु अंततः वह अनुभव करता है कि पाठशाला जाना कहीं अधिक उत्तम था।
कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होनानाना-नानी का बालक के पाखंड से अनभिज्ञ प्रतीत होना और वास्तविक उपचार की प्रक्रिया आरंभ करना।
बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना"क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता।"
In simple words: कहानी में से कुछ मुख्य बातें छाँटकर उनके सामने उनके उदाहरण लिखे गए हैं जैसे कि बच्चे का अपने आप से बात करना या पुरानी यादों को सोचना।

Exam Tip: पाठ से उदाहरण खोजते समय सटीक उद्धरणों या प्रसंगों का उल्लेख करें।

 

समस्या और समाधान

 

Question 21. बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
Answer:
• समस्या: बालक के समक्ष मुख्य संकट यह था कि उसका गृहकार्य पूरा न होने के कारण उसे पाठशाला में शिक्षक द्वारा दंड दिए जाने की आशंका थी।
• समाधान: इस विकट स्थिति से बचने के लिए उसने रुग्ण होने का ढोंग रचा ताकि घर पर रहने की अनुमति मिल सके।
In simple words: बच्चे की समस्या यह थी कि होमवर्क न करने के कारण उसे डांट का डर था। उसने बीमारी का नाटक करके घर पर रुकने का हल निकाला।

Exam Tip: समस्या और समाधान को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्टता के साथ अंकित करें।

 

Question 22. नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
Answer:
• समस्या: नाना-नानी के समक्ष यह चुनौती थी कि बालक स्वयं को रुग्ण घोषित कर विद्यालय जाने से कतरा रहा था, जिससे उन्हें उसके आहार और उपचार की व्यवस्था करनी थी।
• समाधान: उन्होंने इस समस्या का निराकरण करने के लिए उसे तीखी दवा और काढ़ा दिया तथा पेट साफ करने के उद्देश्य से उसे पूर्णतः निराहार रखकर आराम करने का निर्देश दिया।
In simple words: नाना-नानी की समस्या यह थी कि बच्चा बीमार होने का दावा कर रहा था। उन्होंने उसे कड़वा काढ़ा पिलाया और दिन भर भूखा रखकर इसका समाधान किया।

Exam Tip: किसी भी प्रसंग में दोनों पक्षों के दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर उत्तर तैयार करें।

 

पेज 67

शब्द से जुड़े शब्द

 

Question 23. नीचे दिए गए स्थानों में 'बीमार' से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए।
Answer: 'बीमार' शब्द से जुड़े विभिन्न सहायक शब्द जो कहानी में प्रयुक्त हुए हैं, वे इस प्रकार हैं: अस्पताल, नर्स, थर्मामीटर, काढ़ा, दवा, और उपवास/भूखे रहना।
बीमार अस्पताल नर्स थर्मामीटर काढ़ा दवा उपवास/भूखे रहना
In simple words: यहाँ 'बीमार' शब्द से संबंधित अन्य शब्दों का एक संजाल (वेब) बनाया गया है।

Exam Tip: शब्द-जाल बनाते समय मुख्य शब्द के सबसे निकट और प्रासंगिक शब्दों को ही चुनें।

 

खोजबीन

 

Question 24. कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।
Answer: पाठ का वाक्य: "मैं रजाई से निकला ही नहीं।" (चूँकि रजाई का प्रयोग मुख्य रूप से शीत ऋतु में ठंड से बचने के लिए किया जाता है, अतः इससे सर्दी के मौसम का पता चलता है।)
In simple words: कहानी में रजाई का ज़िक्र है, जिससे पता चलता है कि यह ठंड का मौसम था।

Exam Tip: पाठ से वाक्य उद्धृत करते समय उद्धरण चिह्नों (" ") का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 25. कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।
Answer: पाठ का वाक्य: "क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता।"
In simple words: बच्चे ने सोचा कि बिस्तर पर पड़े रहने से अच्छा स्कूल चले जाना ही था।

Exam Tip: ऐसे वाक्यों को पहचानें जहाँ पात्र स्वयं की गलतियों का अनुभव कर रहा हो।

 

Question 26. कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
Answer: पाठ का वाक्य: "गरमागरम खस्ता कचौड़ी… मावे की बर्फी… बेसन की चिक्की… गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर!"
In simple words: बच्चा तरह-तरह की मिठाइयों, कचौड़ियों और खीर के बारे में सोचता है, जिससे उसका खाने के प्रति प्यार दिखता है।

Exam Tip: पात्र की रुचियों को प्रदर्शित करने वाले सटीक संवादों को उद्धृत करें।

 

Question 27. कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
Answer: पाठ का वाक्य: "कितना मजा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।" (यह कथन स्पष्ट करता है कि बालक विद्यालय के मध्यावकाश के समय होने वाले आनंद को बहुत याद कर रहा है।)
In simple words: बच्चा स्कूल के रिसेस में दोस्तों के साथ अमरूद खाने के मजे को याद करता है।

Exam Tip: वाक्य के निहितार्थ को संक्षिप्त कोष्ठक में स्पष्ट अवश्य करें।

 

शीर्षक

 

Question 28. आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
Answer: जी हाँ, प्रस्तुत कथा का नाम 'नहीं होना बीमार' अत्यंत न्यायसंगत और सार्थक है। मुख्य पात्र अस्वस्थता के काल्पनिक सुखों की लालसा में बीमारी का ढोंग करता है, परंतु शीघ्र ही दिनभर की क्षुधा और नीरसता के कारण उसे वास्तविकता का ज्ञान हो जाता है। वह समझ जाता है कि रुग्णता में कोई ठाठ नहीं होते। कहानी का समापन भी इसी आत्मज्ञान और संकल्प के साथ होता है कि वह भविष्य में कभी अस्वस्थ होने का स्वांग नहीं रचेगा। इस प्रकार, यह नाम कथा के मूल उपदेश और केंद्रीय विचार को पूर्णतः अभिव्यक्त करता है।
In simple words: यह नाम बिल्कुल सही है क्योंकि कहानी के अंत में बच्चे को समझ आ जाता है कि बीमार होने में कोई मजा नहीं है बल्कि तकलीफ है।

Exam Tip: शीर्षक की सार्थकता सिद्ध करने के लिए कहानी की सीख और उसके मुख्य कथ्य का हवाला दें।

 

Question 29. यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा?
Answer: यदि मुझे इस रचना हेतु वैकल्पिक नाम सुझाने हों, तो मैं "बहानेबाजी का परिणाम" अथवा "एक दिवसीय रुग्णता" जैसे शीर्षकों का चयन करता।
• "बहानेबाजी का परिणाम" चुनने का कारण यह है कि यह कहानी स्पष्ट रूप से दिखाती है कि बालक द्वारा की गई आनाकानी का अंत कितना कष्टप्रद रहा और उसे अपनी चालाकी का अत्यंत अरुचिकर फल भुगतना पड़ा।
• "एक दिवसीय रुग्णता" इसलिए भी सटीक रहता क्योंकि पूरी कथा बालक द्वारा मात्र एक दिन के लिए रचे गए रोग के स्वांग और उस दौरान प्राप्त हुए कटु अनुभवों के इर्द-गिर्द ही घूमती है।
In simple words: मैं इस कहानी को "बहानेबाजी का परिणाम" नाम देता क्योंकि इससे पता चलता है कि बहाना बनाने का फल बहुत बुरा होता है।

Exam Tip: नया शीर्षक हमेशा कहानी की मुख्य घटना या उससे मिलने वाली सीख से सीधे जुड़ा होना चाहिए।

 

पेज 68

अभिनय

 

Question 30. कहानी में से चुनकर कुछ संवाद नीचे दिए गए हैं। आपको इन्हें अभिनय के साथ बोलकर दिखाना है। प्रत्येक समूह से बारी-बारी से छात्र/छात्राएँ कक्षा में सामने आएँगे और एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे—
1. "बुखार आ गया।" मैंने कराहते हुए कहा।
2. "आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।" मैंने कहा।
3. "मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।"
4. नानाजी आए। बोले, "ले अब कैसा है सिरदर्द?"
5. फिर नानाजी बोले, "ले आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।"

Answer: विद्यार्थी इस गतिविधि को शिक्षक के निर्देशानुसार अपनी कक्षा में स्वयं हाव-भाव और उचित अभिनय के साथ प्रस्तुत करें।
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए वाक्यों को आपको अपनी कक्षा में एक्टिंग करके बोलना है।

Exam Tip: अभिनय करते समय अपनी आवाज़ के उतार-चढ़ाव और चेहरे के हाव-भाव पर विशेष ध्यान दें।

 

चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी

 

Question 31. इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।
Answer: इस कथा में कई ऐसे हास्यप्रद प्रसंग हैं जो अनायास ही पाठक के चेहरे पर मुस्कान बिखेर देते हैं:
• सर्वप्रथम, वह क्षण अत्यंत मनोरंजक है जब बालक अस्वस्थता को एक ऐश्वर्य मानता है और सोचता है कि "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" वह हृदय से कामना करता है कि वह रुग्ण हो जाए ताकि विद्यालय से मुक्ति मिले और स्वादिष्ट साबूदाने की खीर मिल सके।
• द्वितीय प्रसंग तब आता है जब नानाजी द्वारा नाड़ी परीक्षण करने पर ज्वर न पाए जाने पर बालक अत्यंत आत्मविश्वास से कहता है, "आपको आभास नहीं हो रहा, थर्मामीटर का उपयोग करके जाँचिए।" यह धूर्तता अत्यंत हास्यास्पद लगती है।
• तीसरा और सर्वाधिक विनोदी दृश्य वह है जब गृह के अन्य सदस्य सुरुचिपूर्ण दाल-चावल और पके आमों का रसास्वादन कर रहे होते हैं और बेचारा भूखा बालक केवल सुगंध से तृप्त होने का प्रयास करते हुए क्षोभ में शय्या पर पैर पटकता है। उसकी यह बेबसी हास्य का सुंदर उदाहरण है।
In simple words: कहानी में बच्चे के बीमार होने की अजीब इच्छा, थर्मामीटर लगाने की जिद और भूखे रहकर गुस्से में पैर पटकने वाले दृश्यों को पढ़कर चेहरे पर हँसी आ जाती है।

Exam Tip: उत्तर लिखते समय कहानी के उन विशिष्ट दृश्यों का संदर्भ दें जो पाठक में संवेदना या हास्य जगाते हैं।

 

Question 32. इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।
Answer: कहानी के कुछ विशिष्ट खाद्य वर्णनों को पढ़कर रसेंद्रिय जाग्रत हो उठती है और मुँह लार से भर जाता है:
• पहला उत्कृष्ट वर्णन दाल का है: "अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी। फिर उसमें उन्होंने नींबू निचोड़ा होगा।" इस जीवंत बघार के बिंब को पढ़ते ही गरमागरम भोजन की तीव्र लालसा उठती है।
• दूसरा प्रसंग व्यंजनों की सूची का है: "गरमागरम खस्ता कचौड़ी, मावे की बर्फी, बेसन की चिक्की, गोलगप्पे और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर।" इन विविध स्वादों का केवल नाम स्मरण ही मुँह में पानी ला देता है।
• तीसरा प्रसंग मुन्नू द्वारा आम खाने का है: जब मुन्नू पूर्ण रूप से आम की गुठली को मुख में दबाकर रस का आनंद लेता है, तो उस दृश्य का अनूठा बिंब पके आमों के रसास्वादन की तीव्र इच्छा जगा देता है।
In simple words: हींग-जीरे वाली तड़के की दाल, गरमागरम कचौड़ी, मिठाइयाँ, और मुन्नू के आम चूसने के तरीके को पढ़कर मुँह में पानी आ जाता है।

Exam Tip: खाद्य पदार्थों के अत्यंत सजीव वर्णनों को रेखांकित करके बिंब-योजना को स्पष्ट करें।

 

लेखन के अनोखे तरीके

 

Question 33. कहानी में साधारण बातों को कुछ अलग और अनोखे तरीके से लिखा गया है जिससे लेखन की सुंदरता बढ़ जाती है। नीचे दिए गए साधारण वाक्यों के लिए कहानी में प्रयुक्त वाक्यों को खोजकर लिखिए।
Answer: साधारण वाक्यों और कहानी में उनके लिए प्रयुक्त सुंदर व अनोखे वाक्यों की तुलनात्मक सूची इस प्रकार है:

साधारण वाक्यकहानी में प्रयुक्त वाक्य (अनोखा तरीका)
1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए।"हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।"
2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे।"बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।"
3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजें आ रही थीं।"सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन।"
4. फुसफुसाने की आवाजों के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी।"बाकी एकदम शांति।"
5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं।"क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!"
6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ।"चलो बीमार पड़ जाते हैं।"
In simple words: यहाँ बताया गया है कि कैसे साधारण बातों को लेखक ने बहुत सुंदर और मजेदार तरीके से कहानी में लिखा है।

Exam Tip: भाषा शैली को सुंदर बनाने के लिए साधारण वाक्यों के स्थान पर मुहावरों या बिंबों का प्रयोग सीखें।

 

विराम चिह्न

 

Question 34. अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्न को कहानी में ढूँढ़िए। ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए—
Answer: विराम चिह्नों के नाम, उनके प्रतीक और उनके प्रयोग के नियमों की सूची इस प्रकार है:

विराम चिह्नसंकेत (प्रतीक)कहाँ प्रयोग किया जाता है? (नियम)
पूर्ण विरामकिसी भी साधारण, कथनात्मक या वर्णनात्मक वाक्य के पूर्ण होने पर अंत में इसका उपयोग किया जाता है।
अल्प विराम,पढ़ते अथवा बोलते समय जहाँ अत्यंत न्यून समय के लिए रुकना हो, अथवा अनेक शब्दों/पदों को पृथक दर्शाना हो।
प्रश्नवाचक चिह्न?जिस वाक्य के माध्यम से कोई जिज्ञासा व्यक्त की जाए अथवा प्रश्न पूछा जाए, उसके अंत में इसे लगाते हैं।
विस्मयादिबोधक चिह्न!मन के तीव्र संवेगों जैसे विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा अथवा संबोधन के लिए इस चिह्न का प्रयोग होता है।
उद्धरण चिह्न“ ”किसी वक्ता के मूल वक्तव्य अथवा संवाद को बिना किसी परिवर्तन के जस का तस अंकित करने के लिए।
In simple words: विराम चिह्न हमें बताते हैं कि पढ़ते समय कहाँ कितना रुकना है और वाक्य का भाव (जैसे सवाल पूछना या हैरान होना) क्या है।

Exam Tip: वाक्य संरचना को शुद्ध और अर्थपूर्ण बनाने के लिए उपयुक्त विराम चिह्नों का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

पेज 69

कैसी होगी गली

 

Question 35. "मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ" आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं। उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाइए।
Answer: विद्यार्थी पाठ के विवरण और पुस्तक में दी गई चित्रमयी प्रस्तुति के आधार पर अपनी चित्रकला पुस्तिका में एक सुंदर चित्र अंकित कर सकते हैं। इस चित्र में निम्नलिखित तत्वों को समाहित किया जा सकता है:
• गली के मुख्य आकर्षण जैसे "चंदू ड्राईक्लीनर" और "तेजराम घी सेंटर" (महेश घी सेंटर) के साइनबोर्ड लगी दुकानें।
• गली की चौड़ी सड़क पर आनंदपूर्वक क्रीड़ा करते, खेलते और दौड़ते हुए बालकों का समूह।
• दुकानों पर ग्राहकों के साथ व्यस्त दुकानदार तथा मोलभाव करते लोग।
• ऊपर आकाश में जाते बिजली के तारों पर विश्राम करते पक्षियों का जोड़ा।
In simple words: आपको अपनी गली का चित्र बनाना है जिसमें दुकानें, खेलते हुए बच्चे और चहल-पहल दिखाई दे रही हो, जैसी पुस्तक में दिखाई गई है।

Exam Tip: चित्र बनाते समय बारीक विवरणों जैसे दुकानों के नाम, बच्चों की खुशी के चेहरे के हाव-भाव आदि पर विशेष ध्यान दें।

 

आपकी बात

 

Question 36. बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।
Answer: हमारा कक्षा-कक्ष अत्यंत आकर्षक, व्यवस्थित और सज्जित है। यह कमरा काफी विशाल और हवादार है। अग्रिम दीवार पर एक विस्तृत श्यामपट (ब्लैकबोर्ड) स्थापित है, जिस पर हमारे शिक्षक धवल चाक से शिक्षण कार्य करते हैं। उसी के पार्श्व में एक सूचना पट (नोटिस बोर्ड) है, जहाँ हम विद्यार्थियों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, उत्कृष्ट चित्रकला और गृहकार्य की कॉपियाँ प्रदर्शित की जाती हैं।
कमरे में विशाल झरोखे बने हैं जिनसे प्रचुर मात्रा में सूर्य का प्रकाश और मंद समीर प्रवेश करते हैं। इन खिड़कियों पर मनमोहक हल्के हरे रंग के पट (परदे) लटके हैं। बैठने के लिए काष्ठ की मेजें और बेंचेस पंक्तियों में अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से व्यवस्थित हैं। प्रत्येक मेज पर छात्र अपनी पाठ्यसामग्री रखकर एकाग्रता से अध्ययन करते हैं।
कक्षा की दीवारों को ज्ञानवर्धक भित्ति-चित्रों और पोस्टरों से सजाया गया है, जिनमें महापुरुषों के चित्र, गणितीय सूत्र, द्विभाषी सुविचार तथा पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित अमूल्य संदेश अंकित हैं। पिछली दीवार के निकट एक संदूकनुमा अलमारी रखी है जिसमें पाठ्येतर गतिविधियों और रोचक कथाओं का संग्रह सुरक्षित है।
अग्रभाग में गुरुजी के बैठने हेतु एक भव्य काष्ठ की मेज और कुर्सी है, जहाँ वे अपनी संचिकाएँ और पंजी (रजिस्टर) रखते हैं। अध्यापन के साथ-साथ वे हमारे संदेहों का निवारण भी करते हैं।
यद्यपि यहाँ सदैव गरिमामय अनुशासन और पठन-पाठन का वातावरण रहता है, तथापि कभी-कभी होने वाली गुदगुदी और सामूहिक संवाद हमारी कक्षा को अत्यंत उल्लासमय बना देते हैं।
संक्षेप में, हमारी कक्षा ज्ञान, स्वच्छता और सृजनशीलता की त्रिवेणी है जहाँ सीखना एक मनोरम अनुभव बन जाता है।
In simple words: हमारी कक्षा बहुत बड़ी, साफ और हवादार है। यहाँ दीवार पर ब्लैकबोर्ड, सुंदर चार्ट, किताबों की अलमारी और बैठने के लिए साफ बेंच-डेस्क हैं जहाँ हम बहुत मजे से पढ़ते हैं।

Exam Tip: किसी स्थान का वर्णन करते समय वहाँ की भौतिक वस्तुओं, रंगों और वहाँ के वातावरण (माहौल) का सजीव बिंब प्रस्तुत करें।

 

Question 37. कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?
Answer: हाँ, मुझे भी जीवन में एक बार घर पर पूर्णतः एकाकी समय व्यतीत करने का अवसर मिला था। उस विशिष्ट दिवस पर माता-पिता किसी अपरिहार्य पारिवारिक कार्यवश बाहर गए थे और मेरा अनुज भी मित्रों के साथ क्रीड़ारत होने चला गया था। आरंभिक क्षणों में मुझे अत्यधिक हर्ष हुआ कि आज मुझे बिना किसी व्यवधान के दूरदर्शन (टीवी) देखने तथा मनोरंजक कॉमिक्स पढ़ने की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त होगी। मैंने कुछ समय तक हास्य कार्टून धारावाहिक देखे और फिर कथा-पुस्तकों के पन्ने पलटे।
परंतु, समय बीतने के साथ ही सूनेपन ने मुझे घेर लिया। संपूर्ण भवन में एक निस्तब्धता व्याप्त हो गई। बाहर मार्ग से बच्चों के क्रीड़ा कोलाहल को सुनकर मेरे भीतर भी बाहर जाने की तीव्र लालसा जाग्रत हुई। मन में अज्ञात आशंकाएँ और भय भी सिर उठाने लगे कि यदि विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई अथवा कोई अपरिचित ध्वनि आई तो क्या होगा।
तदुपरांत, एकाग्रता भंग करने और भय पर विजय पाने हेतु मैंने अपनी चित्रकला पुस्तिका निकाली और पेंसिल से रेखाचित्र उकेरना आरंभ किया। धीरे-धीरे समय व्यतीत हुआ और संध्या को परिजनों के लौट आने पर मेरा मन असीम शांति से भर गया।
उस अनुभव ने मुझे सिखाया कि अल्प समय का एकांत सुखद हो सकता है, किंतु दीर्घकालिक एकाकीपन नीरस और भयावह बन जाता है।
In simple words: हाँ, एक बार जब मैं अकेला था, पहले तो मुझे मज़ा आया, लेकिन फिर बोरियत और थोड़ा डर लगने लगा। अपना मन बहलाने के लिए मैंने चित्रकारी की।

Exam Tip: व्यक्तिगत अनुभवों को लिखते समय अपने विचारों की क्रमिक यात्रा (खुशी से लेकर अकेलापन और फिर समाधान) को स्पष्टता से उजागर करें।

 

Question 38. कहानी में आम खाने वाले मुन्नू को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?
Answer: हाँ, मानवीय स्वभाव के अनुरूप मुझे भी जीवन में ईर्ष्या के क्षणों का सामना करना पड़ा है। एक समय जब कक्षा परीक्षा में मेरे घनिष्ठ मित्र ने शत-प्रतिशत अंक अर्जित किए और उसे अध्यापकों द्वारा अत्यंत सम्मान प्राप्त हुआ, तो मेरे अंक न्यून होने के कारण मेरे हृदय में ईर्ष्या की हल्की लहर उठी। मुझे ऐसा लगा कि काश! उस सराहना का पात्र मैं भी बन पाता।
परंतु, आत्ममंथन के पश्चात मैंने अनुभव किया कि द्वेष की भावना केवल आत्महानि पहुँचाती है। मैंने साहस कर अपने उस मित्र से उसकी अध्ययन पद्धति के विषय में विमर्श किया। उसने उदारतापूर्वक अपनी तकनीकें मुझसे साझा कीं, जिसके पश्चात मैंने भी अधिक लगन और नियमबद्ध होकर अध्ययन करने का संकल्प लिया।
इसके विपरीत, एक बार जब मुझे एक नवीन क्रीड़ा उपकरण प्राप्त हुआ, तो मेरे एक सहपाठी के मन में ईर्ष्या उत्पन्न हो गई। मैंने इस नकारात्मकता को नष्ट करने हेतु अपनी वस्तु को छिपाने के स्थान पर उसे अपने आवास पर आमंत्रित किया और हम दोनों ने सामूहिक रूप से उसका आनंद लिया। इससे उसकी कुंठा समाप्त हो गई और हमारा आपसी स्नेह अधिक सुदृढ़ हो गया।
इस प्रकार मैंने यह अमूल्य पाठ सीखा कि प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक उद्यम में बदलकर और सहभागिता की भावना अपनाकर ईर्ष्या को समूल नष्ट किया जा सकता है।
In simple words: हाँ, जब मेरे दोस्त के अच्छे नंबर आए तो मुझे ईर्ष्या हुई, पर मैंने उससे जलने के बजाय उसकी तरह मेहनत करना सीखा। जब दोस्त मुझसे जला, तो मैंने अपनी चीजें उसके साथ शेयर कर लीं।

Exam Tip: नैतिक प्रश्नों में ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक प्रयासों (जैसे सहभागिता और कड़ा परिश्रम) में बदलने का उपाय सुझाएँ।

 

Question 39. कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते हैं। आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे?
Answer: मेरे गृह तथा विद्यालय दोनों ही स्थानों पर अनेक स्नेहीजन मेरे चहुँमुखी विकास और स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, जिनका विवरण निम्नवत है:
पारिवारिक परिवेश में:
• मेरी पूजनीय माता जी नियत समय पर सुपाच्य और पौष्टिक भोजन तैयार करती हैं तथा मेरी स्वच्छता और अध्ययन की निरंतर निगरानी करती हैं।
• पिता जी मेरे पठन-पाठन और खेल गतिविधियों में मेरा मार्गदर्शन करते हैं। जटिल प्रश्नों और समस्याओं का वे अत्यंत सरल ढंग से निराकरण करते हैं।
• दादी माँ नित्य नवीन ज्ञानवर्धक तथा मनोरम कथाएँ सुनाती हैं और अस्वस्थ होने पर जड़ी-बूटियों व घरेलू उपचारों का विशेष ध्यान रखती हैं।
शैक्षणिक परिवेश में:
• हमारे शिक्षकगण ज्ञान का दीप जलाते हैं तथा जटिल विषयों को तब तक स्नेहपूर्वक समझाते हैं जब तक वे हमारे मस्तिष्क में स्पष्ट न हो जाएँ।
• हमारी कक्षा अध्यापिका हमारे आचरण, अनुशासन और व्यवहार को परिमार्जित करती हैं तथा अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करती हैं।
• खेल प्रशिक्षक शारीरिक क्रीड़ाओं में सक्रिय भागीदारी हेतु हमारा उत्साहवर्द्धन करते हैं और स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पाठ पढ़ाते हैं।
इस प्रकार, दोनों ही स्थानों पर मुझे अत्यंत सुरक्षित और स्नेहिल वातावरण प्राप्त होता है, जो मुझे एक सजग नागरिक बनने में सहायता करता है।
In simple words: घर पर माता-पिता और दादी मेरे खाने, पढ़ने और स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं। स्कूल में हमारे शिक्षक और खेल गुरु हमें अच्छे से पढ़ाते हैं और अच्छी बातें सिखाते हैं।

Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में "घर" और "विद्यालय" दोनों पक्षों को अलग-अलग उपशीर्षक देकर लिखना चाहिए ताकि उत्तर स्पष्ट दिखे।

 

Question 40. आप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं? क्या-क्या करते हैं या क्या-क्या नहीं करते हैं ताकि उन्हें कम से-कम परेशानी हो?
Answer: मैं अपने प्रियजनों और सहपाठियों के प्रति सदैव संवेदनशील रहता हूँ तथा उनका ध्यान रखने हेतु निरंतर प्रयासरत रहता हूँ:
घर पर आचरण:
• मैं यह सुनिश्चित करता हूँ कि मेरे कार्यों से माता-पिता को अतिरिक्त श्रम न करना पड़े। मैं अपनी पाठशाला का थैला (बैग) स्वयं तैयार करता हूँ, नियमित रूप से गृहकार्य करता हूँ और अपने विश्राम कक्ष को सुसज्जित व स्वच्छ रखता हूँ।
• माताजी की क्लांति दूर करने के लिए मैं पेयजल की व्यवस्था करने, निकटवर्ती बाजार से आवश्यक वस्तुएँ लाने अथवा अपने छोटे भाई-बहन के शैक्षणिक कार्यों में सहयोग करने जैसे छोटे-मोटे कार्यों में हाथ बँटाता हूँ।
मित्रों के प्रति व्यवहार:
• मैं सदैव शिष्टता और मधुर वाणी का प्रयोग करता हूँ। कभी भी किसी मित्र की कमियों का उपहास नहीं करता।
• लेखन सामग्री अथवा कॉपियों की अनुपलब्धता होने पर मैं सहर्ष अपनी वस्तुओं को उनके साथ साझा करता हूँ। क्रीड़ामग्न होने के समय धक्का-मुक्की जैसी अमर्यादित गतिविधियों से बचता हूँ ताकि किसी को शारीरिक क्षति न पहुँचे।
व्यक्तिगत सतर्कता:
• मैं अपनी किसी भी गतिविधि से दूसरों को पीड़ा पहुँचाने से बचता हूँ। उदाहरणार्थ, तीव्र स्वर में दूरदर्शन (टीवी) का संचालन न करना, सदा सत्य का मार्ग अपनाना तथा किसी अन्य की संपत्ति को अनुमति के बिना कभी भी स्पर्श न करना।
In simple words: मैं अपना बैग खुद जमाता हूँ, मम्मी की छोटे कामों में मदद करता हूँ, दोस्तों का मज़ाक नहीं उड़ाता, और कोई भी ऐसी हरकत नहीं करता जिससे दूसरों को तकलीफ हो।

Exam Tip: उत्तर में अपने व्यावहारिक जीवन के सकारात्मक पहलुओं को बिंदुओं में स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करें।

 

पेज 70

बहाने

 

Question 41. कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?
Answer: हाँ, मैंने भी एक अवसर पर विद्यालय न जाने की चेष्टा में शिरःशूल (सिरदर्द) का मिथ्या स्वांग रचा था। उस कालखंड में मेरे हृदय में यह भय व्याप्त था कि सत्य प्रकट होने पर गुरुजनों अथवा माता-पिता की प्रताड़ना झेलनी पड़ेगी। मेरे मन में संशय और संकोच की लहरें निरंतर उठ-गिर रही थीं। यद्यपि बहाने की स्वीकृति मिलने पर क्षणिक राहत की अनुभूति हुई, तथापि अंतरात्मा में एक गहरा आत्मग्लानि और अपराधबोध का भाव जाग्रत हो गया। मुझे अनुभव हुआ कि धोखे की नींव पर मिली स्वतंत्रता निरर्थक है और सत्यभाषण ही सर्वोत्तम मार्ग है। इस लघु प्रसंग ने मुझे अमूल्य नैतिक सीख प्रदान की।
In simple words: हाँ, मैंने एक बार सिरदर्द का बहाना बनाया था। पहले तो मुझे डर लग रहा था, और बहाना चल जाने पर राहत तो मिली पर मन में बहुत पछतावा भी हुआ।

Exam Tip: व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित प्रश्नों में अपनी मानवीय भूलों को स्वीकारते हुए उनसे मिली सकारात्मक सीख को विशेष रूप से रेखांकित करें।

 

Question 42. आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाइए।
Answer: दैनिक जीवन में विभिन्न कठिनाइयों अथवा टालमटोल की प्रवृत्ति के कारण लोग अनेक प्रकार के बहाने गढ़ते हैं, जिनकी सूची निम्न प्रकार है:
• शारीरिक अस्वस्थता का मिथ्या स्वांग - जैसे सिर का भारी होना, ज्वर की शिकायत अथवा सर्दी-जुकाम होना।
• पाठ्यसामग्री या गृहकार्य पुस्तिका के विस्मरण/गुम होने का दावा करना।
• आवागमन में विलंब का कारण बताना - जैसे यातायात जाम, वाहन की खराबी अथवा सार्वजनिक परिवहन का अनुत्पादक होना।
• कार्य की अत्यधिक व्यस्तता का बहाना बनाना।
• विस्मृति का तर्क देना - जैसे किसी कार्य का स्मरण न रहना।
• ऊर्जा संकट (बिजली गुल होना) का तर्क देना ताकि अध्ययन न करने की भूल छिप सके।
• गृह में अप्रत्याशित अतिथियों के आगमन का बहाना।
• किसी अन्य परिजन के रुग्ण होने का नाटक करना।
In simple words: लोग स्कूल न जाने या काम से बचने के लिए बीमारी, ट्रैफिक, बिजली जाने या मेहमान आने जैसे कई तरह के बहाने बनाते हैं।

Exam Tip: बहानों की सूची को स्पष्ट श्रेणियों में वर्गीकृत करके लिखना एक बेहतर प्रस्तुतीकरण माना जाता है।

 

Question 43. बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?
Answer: मनुष्य को मिथ्या बहानों का आश्रय तब लेना पड़ता है जब वह अपने दायित्वों को नियत अवधि में निष्पादित नहीं कर पाता अथवा अपने कर्तव्यों से विमुख होने की चेष्टा करता है। इसके अतिरिक्त, भय, शिथिलता (आलस्य), आत्मविश्वास का अभाव तथा संभावित दंड से सुरक्षा की भावना भी इसका मार्ग प्रशस्त करती है।
इस टालमटोल की प्रवृत्ति को रोकने और बहानों से मुक्ति पाने हेतु निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
• अपने कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों को समय रहते निष्ठापूर्वक पूर्ण करना।
• दीर्घसूत्रता (काम टालने की आदत) का समूल त्याग करना।
• सत्य को स्वीकार करने और ईमानदारी से अपनी बात रखने का नैतिक साहस विकसित करना।
• समय सारणी बनाकर कठोर अनुशासन एवं काल-प्रबंधन का अनुपालन करना।
In simple words: हम काम से बचने या डांट के डर से बहाने बनाते हैं। अगर हम अपना काम समय पर करें और सच बोलने की हिम्मत रखें, तो हमें बहाने नहीं बनाने पड़ेंगे।

Exam Tip: निबंधात्मक या विचारात्मक प्रश्नों के उत्तर में कारण और सुधारात्मक सुझाव दोनों को ठोस रूप से प्रस्तुत करें।

 

अनुमान

 

Question 44. "मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।" कहानी में बच्चे ने अनेक प्रकार के अनुमान लगाए हैं। क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति/वस्तु/पशु-पक्षी/स्थान आदि के विषय में अनुमान लगाए हैं? किसके बारे में? क्या? कब? विस्तार से बताइए।
Answer: जी हाँ, मैंने भी अनेक प्रसंगों में अदृष्ट वस्तुओं अथवा ऐतिहासिक स्थलों के विषय में अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर कयास लगाए हैं। एक बार हमारे आचार्य जी ने कक्षा में ताजमहल की स्थापत्य कला का अत्यंत सजीव चित्रण किया था। उस कालखंड तक मैंने उस ऐतिहासिक स्मारक का प्रत्यक्ष दर्शन नहीं किया था। मेरे बालमन ने कल्पना की कि वह संगमरमर का एक भव्य, कांतिमय और अलौकिक प्रासाद होगा, जिसके गुंबद शरद पूर्णिमा की धवल चाँदनी में जगमगाते होंगे। मैंने अनुमान लगाया कि वहाँ का वातावरण असीम शांति और अपूर्व सौंदर्य से आपूरित होगा। कालांतर में जब मुझे आगरा जाकर उसे साक्षात देखने का अवसर मिला, तो मेरा वह मानसिक बिंब पूर्णतः सत्य के अत्यंत निकट सिद्ध हुआ। इस रोचक प्रसंग से मुझे ज्ञात हुआ कि हमारे अनुमान हमारी बौद्धिक रचनात्मकता को विस्तार देते हैं और कौतूहल को जाग्रत करते हैं।
In simple words: हाँ, मैंने स्कूल में ताजमहल के बारे में सुनकर कल्पना की थी कि वह चाँदनी रात में बहुत सुंदर चमकता होगा, और जब मैं वहाँ गया तो वह वैसा ही निकला।

Exam Tip: अपनी कल्पना के विषय को विस्तार देते समय विशेषणों (जैसे अलौकिक, भव्य, कांतिमय) का समुचित प्रयोग करें।

 

घर का सामान

 

Question 45. "बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।" कहानी में बच्चे के घर पर थर्मामीटर (तापमापी) खोजने पर वह नहीं मिलता। आमतौर पर हमारे घरों में कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है जिसे खोजने पर भी वह नहीं मिलती, जिसे कोई माँगकर ले जाता है या हम किसी से माँगकर ले आते हैं। अपने घर को ध्यान में रखते हुए ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए —
Answer: घरेलू आवश्यकताओं के अनुसार सामान्यतः खो जाने वाली तथा माँगकर लाई/दी जाने वाली वस्तुओं की वर्गीकृत सूची इस प्रकार है:

जो खोजने पर भी नहीं मिलती हैंजो कोई माँगकर ले जाते हैंजो आप किसी से माँगकर लाते हैं
• दूरदर्शन (टीवी) का रिमोट
• कैंची व काटने वाले उपकरण
• मापन पैमाना (स्केल) और रबर
• चलभाष (मोबाइल) का चार्जर
• चाबियों का गुच्छा
• अध्ययन हेतु पुस्तकें और कापियाँ
• क्रिकेट का बल्ला और गेंद • लेखनी (पेन) तथा पेंसिल
• सीडी अथवा यूएसबी ड्राइव
• उत्सवों में पड़ोसियों द्वारा माँगे जाने वाले बर्तन
• अपूर्ण गृहकार्य हेतु सहपाठियों से गणित की कॉपी
• मनोरंजक कथा व कहानियों की पुस्तकें
• खेलने के लिए क्रिकेट की गेंद
• चित्रकारी हेतु रंग और तूलिका (पेंटिंग ब्रश)
• बैडमिंटन खेलने के लिए रैकेट
In simple words: हमारे घरों में अक्सर टीवी का रिमोट या चाबी खो जाती है, पड़ोसी कभी-कभी बर्तन या खेल का सामान माँगकर ले जाते हैं और हम भी कभी दोस्तों से कॉपी माँगकर लाते हैं।

Exam Tip: सूची को अत्यंत स्पष्ट स्तंभों (कॉलम) में प्रदर्शित करके प्रत्येक स्तंभ में कम से कम 4-5 प्रासंगिक उदाहरण अवश्य लिखें।

 

पेज 71

खान-पान और आप

 

Question 46. कहानी में सुधाकर काका को बीमार होने पर साबूदाने की खीर दी गई थी। आपके घर में किसी के बीमार होने पर उसे क्या-क्या खिलाया जाता है?
Answer: हमारे पारिवारिक परिवेश में जब कोई सदस्य रुग्ण (अस्वस्थ) होता है, तो उसके पोषण हेतु अत्यंत सुपाच्य तथा पोषक तत्वों से भरपूर लघु आहार की व्यवस्था की जाती है। इस अवस्था में प्रायः सादी मूँग दाल की खिचड़ी, जौ अथवा गेहूँ का दलिया, हल्की मूँग की दाल, सुपाच्य दही-चावल या सूजी की पतली लपसी (हलवा) परोसी जाती है। इसके अतिरिक्त, रोगी की शारीरिक शक्ति को पुनर्जीवित करने तथा पाचन तंत्र को सुचारू रखने के उद्देश्य से नारियल का जल, ताजे फलों का रस अथवा औषधीय सब्जियों का गर्मागर्म सूप भी प्रदान किया जाता है।
In simple words: हमारे घर में बीमार होने पर खिचड़ी, दलिया, मूँग दाल, नारियल पानी या सूप जैसी हल्की और आसानी से पचने वाली चीजें खिलाई जाती हैं।

Exam Tip: भोजन की सुपाच्यता और स्वास्थ्य लाभ के वैज्ञानिक पहलुओं को जोड़ते हुए उत्तर लिखें।

 

Question 47. कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजें खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?
Answer: मुख्य पात्र की भाँति मेरे मन में भी विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवानों को चखने की तीव्र आकांक्षा बनी रहती है। विशेष रूप से गृह निर्मित गरमागरम पूड़ी संग रसेदार सब्जी, खस्ता कचौरियाँ, कुरकुरे पकौड़े, चाशनी से सराबोर जलेबी तथा चटपटी चाट मेरे मुख में लार उत्पन्न कर देते हैं। इन पारंपरिक व्यंजनों के अतिरिक्त, आधुनिक पिज़्ज़ा, विविध रसों की मलाईदार आइसक्रीम तथा मक्खन युक्त आलू के पराठे भी मेरी जीभ को अत्यंत सुहाते हैं।
In simple words: मेरा भी मन कचौड़ी, पूड़ी-सब्जी, जलेबी, चाट, पिज़्ज़ा और आइसक्रीम जैसी स्वादिष्ट और चटपटी चीजें खाने का करता है।

Exam Tip: रुचिकर पकवानों का वर्णन करने के लिए रसपूर्ण और सजीव भाषा का चयन करें।

 

Question 48. कहानी में बच्चा सोचता है कि साबूदाने की खीर केवल बीमारी या उपवास में क्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है?
Answer: हमारे गृह में भी अनेक ऐसे विशिष्ट व्यंजन हैं जो केवल राष्ट्रीय अथवा सांस्कृतिक पर्वों व विशेष समारोहों पर ही पकाए जाते हैं। उदाहरणस्वरूप, दीपोत्सव (दीपावली) के शुभ अवसर पर खस्ता गुजिया तथा बेसन के लड्डू बनते हैं, जबकि होली के हुड़दंग में रसीले मालपुए और चटपटे दही-भल्ले तैयार होते हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पारंपरिक खीर-पूरी का भोग लगता है, श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर पंचामृत के साथ सोंधी माखन-मिश्री बनती है, तथा विजयादशमी पर चने की सूखी सब्जी व पूड़ियाँ बनाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त, वैवाहिक प्रसंगों अथवा बड़ी देव-पूजा में विशेष पुलाव, कचौड़ी और अनेक प्रकार की मिष्ठान्न सामग्रियाँ तैयार की जाती हैं जो उत्सव की गरिमा को द्विगुणित कर देती हैं।
In simple words: हमारे घर में दीवाली पर गुजिया-लड्डू, होली पर मालपुआ-दही बड़े और त्योहारों या शादियों पर पूरी-कचौड़ी, पुलाव और मिठाइयाँ बनती हैं।

Exam Tip: भारतीय त्योहारों और उनसे जुड़े विशिष्ट पारंपरिक पकवानों का मिलान करते हुए एक विस्तृत उत्तर तैयार करें।

 

Question 49. कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीते हैं? विद्यालय में आपका रुचिकर भोजन क्या है?
Answer: हमारी पाठशाला की कैंटीन (अल्पाहार गृह) में सामान्यतः समोसे, कचौरियाँ, ब्रेड-पकौड़े, गरमागरम इडली-सांभर, चटपटी आलू-चाट, विविध बिस्कुट तथा शीतल पेय उपलब्ध रहते हैं। इसके अतिरिक्त, हम सभी छात्र दैनिक रूप से अपने गृह से टिफिन में भरवा पराठे, मौसमी सब्जियाँ, चटपटा आचार एवं मधुर मिष्ठान्न लेकर आते हैं। इन समस्त खाद्य पदार्थों में मेरा परम प्रिय अल्पाहार आलू-चाट और दक्षिण भारतीय इडली-सांभर है, क्योंकि यह सुरुचिपूर्ण होने के साथ-साथ अत्यंत तृप्तिदायक भी होता है।
In simple words: हमारे स्कूल में समोसा, कचौड़ी, इडली-सांभर और बिस्कुट मिलते हैं। मुझे अपने टिफिन के पराठे के अलावा इडली-सांभर और आलू-चाट खाना सबसे ज्यादा पसंद है।

Exam Tip: उत्तर में घर से लाए जाने वाले स्वस्थ टिफिन और विद्यालय की कैंटीन के भोजन दोनों का संतुलन दर्शाएँ।

 

Question 50. इस कहानी में भोजन से जुड़ी बच्चे की कई रोचक बातें बताई गई हैं। आपके बचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?
Answer: मेरे शैशव काल (बचपन) की भोजन से संबद्ध एक अत्यंत मधुर स्मृति ग्रीष्म ऋतु की छुट्टियों से जुड़ी है। उन दिनों दोपहर के समय पूजनीय माता जी सोंधा और शीतल आमरस तैयार करती थीं, जिसे हम सब सहोदर (भाई-बहन) आपस में मिल-बैठकर गरमागरम पराठों के साथ बड़े चाव से खाते थे। कभी-कभार पूजनीय दादी जी चूल्हे पर पकी गुड़ की मीठी रोटी अथवा भुने हुए चने का सत्तू तैयार कर देती थीं। उन दिव्य स्वादों की स्मृतियाँ और संपूर्ण परिवार के साथ बैठकर किया गया वह सामूहिक भोजन आज भी मेरे मानस पटल पर अंकित है और मुझे असीम शांति प्रदान करता है।
In simple words: मुझे याद है कि गर्मियों में मेरी माँ आमरस बनाती थीं जिसे हम सब मिलकर पराठे के साथ खाते थे, और दादी की बनाई गुड़ की मीठी रोटी का स्वाद आज भी याद है।

Exam Tip: भोजन की स्मृतियों का वर्णन करते समय उसमें निहित पारिवारिक प्रेम और पुरानी यादों के भावनात्मक पहलू को भी उजागर करें।

 

Question 51. कहानी में बच्चा भोजन की सुगंध से रजाई फेंककर रसोई में झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुगंध से आप भी रसोई में जाकर तुरंत देखना चाहते हैं कि क्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुगंध सबसे अधिक पसंद है?
Answer: निश्चित रूप से, कई बार पाकशाला (रसोई) से उठने वाली सुवास मुझे अपनी ओर खींच ले जाती है। जब भी कोई विशेष पकवान बनता है, तो उसकी तीव्र महक मुझे अपनी पढ़ाई छोड़कर तुरंत यह देखने के लिए विवश कर देती है कि आज क्या विशेष पक रहा है। जब भी रसोई घर से हींग और जीरे के बघार की तीव्र गंध उठती है, तो मेरा मन तुरंत कयास लगाता है कि निश्चित रूप से रसेदार आलू अथवा अरहर की दाल पक रही है। वर्षा ऋतु के आगमन पर छनने वाले गरमागरम पकौड़ों की खुशबू संपूर्ण गृह में व्याप्त हो जाती है, जो पैर खुद-ब-खुद रसोई की ओर बढ़ा देती है। पनीर की गरिष्ठ सब्जी के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले खड़े मसालों की भीनी-भीनी सुगंध मुझे अत्यंत प्रिय है। शीतकाल में जब घर पर गुड़, सोंठ और देसी घी के मेल से पौष्टिक पिन्नियाँ अथवा गजक तैयार की जाती है, तो उसकी सोंधी मिठास अंतरात्मा को तृप्त कर देती है। इसके अतिरिक्त, इलायची युक्त गाढ़ी खीर तथा ताजे आमों के रस की भीनी सुगंध मुझे इतनी विचलित कर देती है कि मेरा धैर्य समाप्त हो जाता है और मैं भोजन परोसने की प्रतीक्षा नहीं कर पाता।
In simple words: हाँ, जब भी रसोई से हींग-जीरे के तड़के, बारिश में गरमागरम पकौड़ों, पनीर की सब्जी या सर्दियों में गुड़ की पिन्नी की सुगंध आती है, तो मैं भी तुरंत रसोई की तरफ दौड़ पड़ता हूँ।

Exam Tip: संवेदी अंगों (जैसे सूंघने की शक्ति) द्वारा भोजन के प्रति उत्साह के वर्णन में अत्यधिक सुंदर एवं काव्यात्मक भाषा का प्रयोग करें।

 

आज की पहेली

 

Question 52. कहानी में आपने खाने-पीने की अनेक वस्तुओं के बारे में पढ़ा है। अब हम आपके सामने खाने-पीने की वस्तुओं या व्यंजनों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ लाए हैं। इन्हें बूझिए और उत्तर लिखिए।
Answer: भोजन से संबंधित विभिन्न पहेलियों के सही उत्तरों की तालिका निम्नलिखित है:

पहेलीउत्तर
1. रोटी जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भरा / घी-तेल साथी हैं इसके, वही चटनी से हरा-हराआलू पराठा
2. दाल-चावल का मेल है यह तो, भारत भर में तुम इसे पाओ, दक्षिण में ये खूब है बनता, चटनी-सांभर संग-संग खाओ, गोल-तिकोना इसका आकार, गरम-गरम तुम इसे बनाओ, कौन-सा व्यंजन होता है यह, बोलो बोलो नाम बताओ।डोसा
3. नाश्ते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट्र में इसका वास, मिर्च-मसाले से भरपूर, संग बटाट भी मशहूर, चटपटी चटनी लगी किसे? बूझो नाम तो खाएँ इसे!वड़ा पाव
4. बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात में बड़ा है बोल। खाने में नर्म, पानी भरे, धनिया मिर्ची संग सजे।ढोकला
5. गोल-गोल पानी से भरके, चटनी सोंठ सांग संग इसे खाओ उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम, गली-मुहल्लों में भी पाओ। खट्टी-मीठी, तीखी हाय, खाना तो इसे हर कोई चाहे !पानी-पूरी
6. हरे साग संग मुझको पाओ, मक्खन के संग मुझको खाओ। आटा मेरा हल्का पीला, स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला।मक्के की रोटी
7. आग में पकती हूँ, सोंधा-सा स्वाद, साथ में खाओ चूरमा, बन जाए फिर बात, गरम दाल से मुझको प्यार, राजस्थान का मैं उपहार।बाटी
8. गोल-गोल और श्वेत रंग का / रस से भरा हुआ हूँ खूब। / मीठी दुनिया का महाराजा / चाशनी मीठी डूब - डूबरसगुल्ला
In simple words: यहाँ दी गई पहेलियों को हल करके स्वादिष्ट व्यंजनों जैसे आलू पराठा, डोसा, वड़ा पाव, ढोकला, पानी-पूरी आदि के नाम लिखे गए हैं।

Exam Tip: पहेलियों में दिए गए भौगोलिक संकेतों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान) और स्वाद संबंधी शब्दों पर विशेष ध्यान दें।

 

अध्याय से मिली शिक्षा

 

नहीं होना बीमार कहानी से मिली मुख्य शिक्षा:

  • रोगों का झूठा ढोंग रचना सर्वथा अनुचित है क्योंकि अंततः इसका परिणाम केवल शारीरिक कष्ट, तीव्र भूख और उबाऊपन के रूप में सामने आता है।
  • असत्य का सहारा लेने पर हम केवल परिवारजनों के विश्वास को ही आघात नहीं पहुँचाते, बल्कि स्वयं को भी भारी संकट व अपराधबोध की स्थिति में डाल देते हैं।
  • सदा सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और सरलता का मार्ग अपनाना ही जीवन की सर्वोत्कृष्ट नीति है।
  • विद्यालय जाकर अध्ययन करना और मित्रों के साथ समय बिताना, रोग के स्वांग द्वारा घर पर अकेले पड़े रहने से सहस्त्र गुना अधिक सुखदायी और लाभप्रद है।

संक्षेप में, यह कहानी हमें सचेत करती है कि कामचोरी, झूठ और आलस्य का अंत सदा अवांछनीय होता है, जबकि सत्यनिष्ठा तथा कर्तव्यपरायणता ही सुखी जीवन का आधार हैं।

 

अध्याय के मुख्य बिंदु

 

कक्षा 7 हिंदी मल्हार अध्याय 5 के मुख्य बिंदु:

  • अस्पताल का नवीन अनुभव: बालक जीवन में प्रथम बार अपनी नानीजी के साथ चिकित्सालय जाता है। वहाँ की अनुकरणीय स्वच्छता और नीरवता उसे अत्यंत प्रभावित करती है।
  • सुधाकर काका और अस्वस्थता का वैभव: चिकित्सालय में उपचाराधीन सुधाकर काका को देखकर बालक के कोमल मन में यह धारणा बनती है कि रुग्ण होने पर अत्यधिक सुख-सुविधाएँ जैसे धवल शय्या, विश्राम तथा स्वादिष्ट भोजन प्राप्त होते हैं।
  • अस्वस्थता का स्वांग: पाठशाला जाने से बचने और अधूरे गृहकार्य की मार से रक्षा हेतु वह रोगग्रस्त होने का मिथ्या नाटक रचता है।
  • नाना-नानी की पारंपरिक सतर्कता: नानाजी द्वारा उसकी नाड़ी देखकर कड़वा काढ़ा व तीखी पुड़िया दी जाती है तथा आंतरिक विकारों के शोधन हेतु उसे निराहार रहने की आज्ञा दी जाती है, जिसमें नानीजी भी सहयोग करती हैं।
  • नीरसता व एकांत का संताप: पूरा दिन रजाई में सिमटे रहने के कारण बालक घोर उबाऊपन का शिकार हो जाता है और बाह्य क्रीड़ाओं हेतु लालायित उठता है।
  • भोज्य सुगंध की प्रताड़ना: पाकशाला से उठने वाली स्वादिष्ट पकवानों की सुवास और अनुज मुन्नू द्वारा रसीले आमों को चूसना भूखे बालक को गंभीर मानसिक संताप देता है।
  • अंतिम आत्मबोध: दिनभर की क्षुधा, एकाकीपन और दुविधा से वह यह अनुभव कर लेता है कि आनाकानी करने का दुष्परिणाम कष्टप्रद होता है। अंततः वह सदैव के लिए अस्वस्थता का बहाना न बनाने का दृढ़ निश्चय करता है।

NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी)

Students can now access the NCERT Solutions for Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 7 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest NCERT syllabus.

Detailed Explanations for Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी)

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 7 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 7 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these NCERT Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Hindi Class 7 Solved Papers

Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 7 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) for the 2026-27 session?

The complete and updated NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 7 Hindi are as per latest NCERT curriculum.

Are the Hindi NCERT solutions for Class 7 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 7 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 7 Hindi. You can access NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi NCERT solutions for Class 7 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 7 Hindi Malhar Chapter 05 नहीं होना बीमार (कहानी) in printable PDF format for offline study on any device.