NCERT Solutions for Class 11 Physics: Chapter 13 दोलन
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Practice Class 11 Physics Solutions: Chapter 13 दोलन
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Question 13.1: नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन आवर्ती गति को निरूपित करता है?
(i) किसी तैराक द्वारा नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाना और अपनी वापसी यात्रा पूरी करना।
(ii) किसी स्वतंत्रतापूर्वक लटकाए गए दंड चुंबक को उसकी N-S दिशा से विस्थापित कर छोड़ देना।
(iii) अपने द्रव्यमान केंद्र के परितः घूर्णी गति करता कोई हाइड्रोजन अणु।
(iv) किसी कमान से छोड़ा गया तीर।
Answer:
(ii) और (iii) आवर्ती गति को निरूपित करते हैं।
(i) तैराक की गति आवर्ती नहीं होती है। नदी के किनारों के बीच तैराक की गति आगे-पीछे होती है। हालाँकि, इसकी कोई निश्चित अवधि नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि तैराक द्वारा नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाना और अपनी वापसी यात्रा के दौरान लिया गया समय समान नहीं हो सकता है।
(ii) स्वतंत्र रूप से लटके चुंबक की गति, यदि उसकी N-S दिशा से विस्थापित करके छोड़ दिया जाता है, आवर्ती गति होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चुंबक एक निश्चित समयावधि के साथ अपनी स्थिति के सापेक्ष दोनों ओर दोलन करता है।
(iii) जब कोई हाइड्रोजन अणु अपने द्रव्यमान केंद्र के चारों ओर घूमता है, तो वह समान समय अंतराल के बाद बार-बार उसी स्थिति में आ जाता है। ऐसी गति आवर्ती होती है।
(iv) धनुष से छूटा बाण केवल आगे की दिशा में चलता है। यह पीछे नहीं आता है। अतः यह गति आवर्त गति नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• आवर्ती गति वह गति है जो निश्चित अंतराल के बाद स्वयं को दोहराती है।
• तैराक की गति अनियमित होती है क्योंकि समय निश्चित नहीं रहता।
• चुंबक और हाइड्रोजन अणु की घूर्णी या दोलनी गति निश्चित समयावधि रखती है।
आम गलतियाँ:
• सभी आगे-पीछे होने वाली गतियों को आवर्ती समझ लेना।
• समय अंतराल के महत्व को नजरअंदाज करना।
• घूर्णी गति को आवर्ती न मानना।
Exam Tips:
a) आवर्ती गति की परिभाषा स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) प्रत्येक विकल्प के लिए समय अंतराल की निश्चितता की जाँच करें।
c) कारणों को बिंदुवार स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 13.2: नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन (लगभग) सरल आवर्त गति को तथा कौन आवर्ती परंतु सरल आवर्त गति नहीं निरूपित करते हैं?
(i) पृथ्वी के अपने अक्ष के परितः घूर्णन गति।
(ii) किसी U-नली में दोलायमान पारे के स्तंभ की गति।
(iii) किसी चिकने वकीय कटोरे के भीतर एक बॉल बेरिंग की गति जब उसे निम्नतम बिंदु से कुछ ऊपर के बिंदु से मुक्त रूप से छोड़ा जाए।
(iv) किसी बहुपरमाणुक अणु की अपनी साम्यावस्था की स्थिति के परितः व्यापक कंपन।
Answer:
(ii) और (iii) SHMs हैं और (iv) आवर्त हैं, लेकिन सरल आवर्त गति नहीं हैं।
(i) अपनी धुरी पर घूमने के दौरान पृथ्वी समान समय अंतराल में बार-बार एक ही स्थिति में आ जाती है। इसलिए, यह एक आवर्त गति है। हालाँकि, यह गति सरल आवर्त गति नहीं है। इसका कारण यह है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर इधर-उधर गति नहीं करती है।
(ii) U-नली में एक दोलनशील पारा स्तंभ सरल आवर्त गति है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पारा एक निश्चित समय के साथ एक ही पथ पर, निश्चित स्थिति के सापेक्ष आगे और पीछे होता है।
(iii) जब गेंद को छोड़ा जाता है तो गेंद कटोरे के सबसे निचले बिंदु के सापेक्ष इधर-उधर करती है। साथ ही, गेंद समान अवधि में बार-बार अपनी प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाती है। इसलिए, इसकी गति आवर्त होने के साथ-साथ सरल आवर्त गति भी है।
(iv) एक बहुपरमाणुक अणु में दोलन की कई प्राकृतिक आवृत्तियाँ होती हैं। इसका कंपन कई अलग-अलग अणुओं की अलग-अलग सरल आवर्त गतियों का सुपरपोजीशन है। इसलिए, यह सरल आवर्त गति नहीं है, बल्कि आवर्त गति है।
मुख्य बिंदु:
• सरल आवर्त गति के लिए प्रत्यानयन बल विस्थापन के समानुपाती होना चाहिए।
• पृथ्वी का घूर्णन केवल आवर्ती है, सरल आवर्त नहीं।
• बहुपरमाणुक अणुओं के कंपन जटिल और कई आवृत्तियों वाले होते हैं।
आम गलतियाँ:
• आवर्ती गति और सरल आवर्त गति को एक ही मान लेना।
• U-नली के पारे की गति के बल नियम को समझना भूल जाना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करें कि सभी SHM आवर्ती हैं, लेकिन सभी आवर्ती गतियाँ SHM नहीं हैं।
b) उदाहरणों का वर्गीकरण करते समय उनके पुनरावृत्ति काल को ध्यान में रखें।
c) प्रत्येक कथन का तार्किक कारण दें।
Question 13.3: चित्र 13.18 में किसी कण की रेखिक गति के लिए चार x-t आरेख दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा आरेख आवर्ती गति का निरूपण करता है? उस गति का आवर्तकाल क्या है (आवर्ती गति वाली गति का)।
Answer:
(b) और (d) आवर्ती गति का निरूपण करते हैं।
(a) यह एक आवर्ती गति नहीं है। यह एक दिशात्मक, रेखिक समान गति का प्रतिनिधित्व करता है। इस मामले में गति की पुनरावृत्ति नहीं होती है।
(b) इस स्थिति में, कण की गति \( 2\text{ s} \) के बाद स्वयं को दोहराती है। इसलिए, यह एक आवर्ती गति है, जिसकी अवधि \( 2\text{ s} \) है।
(c) यह एक आवर्ती गति नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कण गति को केवल एक ही स्थिति में दोहराता है। आवर्ती गति के लिए, कण की संपूर्ण गति को समान समय अंतराल में दोहराया जाना चाहिए।
(d) इस स्थिति में, कण की गति \( 2\text{ s} \) के बाद स्वयं को दोहराती है। इसलिए, यह एक आवधिक गति है, जिसकी अवधि \( 2\text{ s} \) है।
मुख्य बिंदु:
• x-t ग्राफ से आवर्तकाल का निर्धारण करना।
• निश्चित अंतराल के बाद ग्राफ की पुनरावृत्ति देखना।
• एकदिशीय गति आवर्ती नहीं होती है।
आम गलतियाँ:
• आरेख (c) को आवर्ती समझ लेना जबकि वह केवल एक बार दोहराता है।
• समय अक्ष पर आवर्तकाल का सही मान न पढ़ना।
Exam Tips:
a) ग्राफ के आवर्ती पैटर्न को ध्यान से देखें।
b) न्यूनतम समय अंतराल पहचानें जिसके बाद पैटर्न दोहराया जाता है।
c) प्रत्येक आरेख की व्याख्या स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 13.4: नीचे दिए गए समय के फलनों में कौन (a) सरल आवर्त गति, (b) आवर्ती परंतु सरल आवर्त गति नहीं, तथा (c) अनावर्त्ती गति का निरूपण करते हैं। प्रत्येक आवर्ती गति का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए: (\( \omega \) कोई धनात्मक अचर है)
(a) \( \sin \omega t - \cos \omega t$
(b) \( \sin^3 \omega t $
(c) \( 3 \cos(\pi/4 - 2\omega t) $
(d) \( \cos \omega t + \cos 3\omega t + \cos 5\omega t $
(e) \( \exp(-\omega^2 t^2) $
(f) \( 1 + \omega t + \omega^2 t^2 $
Answer:
(a) दिया गया फलन है:
\( x = \sin \omega t - \cos \omega t \)
\( = \sqrt{2} \left[ \frac{1}{\sqrt{2}} \sin \omega t - \frac{1}{\sqrt{2}} \cos \omega t \right] \)
\( = \sqrt{2} \left[ \sin \omega t \cos \frac{\pi}{4} - \cos \omega t \sin \frac{\pi}{4} \right] \)
\( = \sqrt{2} \sin \left( \omega t - \frac{\pi}{4} \right) \)
यह फलन SHM का निरूपण करता है क्योंकि इसे \( a \sin(\omega t + \phi) \) के रूप में लिखा जा सकता है।
इसका आवर्तकाल \( T = \frac{2\pi}{\omega} \) है।
(b) आवर्ती परंतु सरल आवर्त नहीं
दिया गया फलन है:
\( \sin^3 \omega t = \frac{1}{4} [3\sin \omega t - \sin 3\omega t] \)
\( \sin \omega t \) और \( \sin 3\omega t \) पद अलग-अलग रूप से सरल आवर्त गति (SHM) को निरूपित करते हैं। तथापि, दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण आवर्त होता है न कि सरल आवर्त।
(c) दिया गया फलन है:
\( 3 \cos\left(\frac{\pi}{4} - 2\omega t\right) = 3 \cos\left(2\omega t - \frac{\pi}{4}\right) \)
यह फलन सरल आवर्त गति का निरूपण करता है क्योंकि इसे इस रूप में लिखा जा सकता है: \( a \cos(\omega t + \phi) \)
इसका आवर्तकाल: \( T = \frac{2\pi}{2\omega} = \frac{\pi}{\omega} \)
आवर्ती परंतु सरल आवर्त नहीं
(d) दिया गया फलन \( \cos \omega t + \cos 3\omega t + \cos 5\omega t \) है। प्रत्येक पद cosine फलन सरल आवर्त गति का निरूपण करता है। हालांकि, तीन सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण आवर्त है, लेकिन सरल आवर्त गति नहीं है।
(e) गैर-आवर्त गति
दिया गया फलन \( \exp(-\omega^2 t^2) \) एक चरघातांकी फलन है। घातीय फलन स्वयं को दोहराते नहीं हैं। इसलिए, यह एक गैर-आवर्त गति है।
(f) दिया गया फलन \( 1 + \omega t + \omega^2 t^2 \) गैर- आवर्त गति है।
मुख्य बिंदु:
• त्रिकोणमितीय पहचानों (Identities) का उपयोग करके फलनों को एकल साइन या कोसाइन में बदलना।
• एकाधिक आवृत्तियों वाले फलनों का योग आवर्ती होता है पर SHM नहीं।
• चरघातांकी और बहुपदीय फलन अनावर्त्ती होते हैं।
आम गलतियाँ:
• \( \sin^3 \omega t \) को सीधे सरल आवर्त गति मान लेना।
• कोष्ठक के अंदर के कोण के चिन्ह को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) त्रिकोणमितीय सूत्रों को अच्छे से याद रखें।
b) आवर्तकाल निकालने के लिए \( t \) के गुणांक का उपयोग करें (\( T = \frac{2\pi}{\text{coefficient of } t} \))।
c) प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से हल करें।
Question 13.5: कोई कण एक दूसरे से \( 10\text{ cm} \) दूरी पर स्थित दो बिंदुओं A तथा B के बीच रेखीय सरल आवर्त गति कर रहा है। A से B की ओर की दिशा को धनात्मक दिशा मानकर वेग, त्वरण तथा कण पर लगे बल के चिह्न ज्ञात कीजिए जबकि यह कण
(a) A सिरे पर है,
(b) B सिरे पर है,
(c) A की ओर जाते हुए AB के मध्य बिंदु पर है,
(d) A की ओर जाते हुए B से \( 2\text{ cm} \) दूर है,
(e) B की ओर जाते हुए से \( 3\text{ cm} \) दूर है, तथा
(f) A की ओर जाते हुए B से \( 4\text{ cm} \) दूर है।
Answer:
(a) शून्य, धनात्मक, धनात्मक
(b) शून्य, ऋणात्मक, ऋणात्मक
(c) ऋणात्मक, शून्य, शून्य
(d) ऋणात्मक, ऋणात्मक, ऋणात्मक
(e) शून्य, धनात्मक, धनात्मक
(f) ऋणात्मक, ऋणात्मक, ऋणात्मक
व्याख्या:
(a) अंतिम बिंदु A पर, कण क्षण भर के लिए स्थिर है। अतः इस बिंदु पर इसका वेग शून्य है। इसका त्वरण धनात्मक है क्योंकि यह AO के अनुदिश गतिशील है। इस स्थिति में बल भी धनात्मक होता है क्योंकि कण दायीं ओर गतिशील है।
(b) अंतिम बिंदु B पर, कण क्षणिक रूप से स्थिर है। अतः इस बिंदु पर इसका वेग शून्य है। इसका त्वरण ऋणात्मक है क्योंकि यह B से A की ओर निर्देशित है। इस स्थिति में बल भी ऋणात्मक होता है क्योंकि कण बाईं ओर निर्देशित होता है।
(c) कण सरल आवर्त गति कर रहा है। O कण की मध्य स्थिति है। मध्य स्थिति O पर इसका वेग अधिकतम होता है। वेग का मान ऋणात्मक होता है क्योंकि कण बाईं ओर निर्देशित होता है। सरल आवर्त गति क्रियान्वित करने वाले कण का त्वरण और बल मध्य स्थिति पर शून्य होता है।
(d) कण अंत बिंदु B से बिंदु O की ओर बढ़ रहा है। गति की यह दिशा पारंपरिक धनात्मक दिशा के विपरीत है, जो B से तक है। इसलिए, कण का वेग और त्वरण, और उस पर बल सभी ऋणात्मक हैं।
(e) कण अंत बिंदु A से बिंदु O की ओर बढ़ रहा है। गति की यह दिशा A से B ओर है, जो पारंपरिक धनात्मक दिशा है। इसलिए, वेग, त्वरण और बल के मान सभी धनात्मक हैं।
(f) यह स्थिति (d) में दिए गए के समान है।
मुख्य बिंदु:
• चरम बिंदुओं (Extreme points) पर वेग शून्य और त्वरण अधिकतम होता है।
• माध्य स्थिति (Mean position) पर वेग अधिकतम और त्वरण शून्य होता है।
• बल की दिशा हमेशा माध्य स्थिति की ओर होती है।
आम गलतियाँ:
• वेग और त्वरण के चिन्हों में भ्रमित होना।
• कण की गति की दिशा (दाएँ या बाएँ) पर ध्यान न देना।
Exam Tips:
a) दिशाओं (धनात्मक/ऋणात्मक) को मानक निर्देशांक प्रणाली के अनुसार निर्धारित करें।
b) आरेख बनाकर स्थिति को समझें।
c) प्रत्येक भौतिक राशि (वेग, त्वरण, बल) के लिए अलग से विचार करें।
Question 13.6: नीचे दिए गए किसी कण के त्वरण \( a \) तथा विस्थापन \( x \) के बीच संबंधों में से किससे सरल आवर्त गति संबद्ध है:
(a) \( a = 0.7x $
(b) \( a = -200x^2 $
(c) \( a = -10x $
(d) \( a = 100x^3 $
Answer:
(c) फलन \( a = -10x \), सरल आवर्त गति का निरूपण करता है क्योंकि कण पर लगने वाला बल निम्न नियम से निरूपित होता है:
\( F = -kx \) ma = \( -k \)
\( a = -\frac{k}{m} x $
\)
जहाँ, \( F \) बल है, \( m \) द्रव्यमान है (एक पिंड के लिए एक स्थिरांक), \( x \) विस्थापन है, \( a \) त्वरण तथा \( k \) समीकरण के लिए स्थिरांक है। उपरोक्त समीकरणों में केवल समीकरण \( a = -10x \) ही \( a = (k/m)x \) के रूप में लिखा गया है, इसलिए यह संबंध सरल आवर्त गति का निरूपण करता है।
मुख्य बिंदु:
• सरल आवर्त गति की मूल शर्त \( a \propto -x \) है।
• त्वरण हमेशा विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में होना चाहिए।
• उच्च घात वाले संबंध (जैसे \( x^2 \) या \( x^3 \)) SHM नहीं दर्शाते।
आम गलतियाँ:
• ऋणात्मक चिन्ह (Negative sign) की उपेक्षा करना।
• विस्थापन की घात पर ध्यान न देना।
Exam Tips:
a) हमेशा समीकरण \( a = -\omega^2 x \) की तुलना दिए गए विकल्पों से करें।
b) याद रखें कि केवल रैखिक और ऋणात्मक विस्थापन वाले संबंध ही SHM होते हैं।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक लिखें।
Question 13.7: सरल आवर्त गति करते किसी कण की गति का वर्णन नीचे दिए गए विस्थापन फलन द्वारा किया जाता है, \( x(t) = A \cos(\omega t + \phi) \), यदि कण की आरंभिक (\( t = 0 \)) स्थिति \( 1\text{ cm} \) तथा उसका आरंभिक वेग \( \omega\text{ cm/s} \) है, तो कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या है? कण की कोणीय आवृति \( \pi\text{ s}^{-1} \) है। यदि सरल आवर्त गति का वर्णन करने के लिए कोज्या (cos) फलन के स्थान पर हम ज्या (sin) फलन चुनें: \( x = B \sin(\omega t + \alpha) \), तो उपरोक्त आरंभिक प्रतिबंधों में कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या होगा?
Answer:
प्रारंभ में, \( t = 0 \) पर:
विस्थापन, \( x = 1\text{ cm} \)
आरंभिक वेग, \( v = \omega\text{ cm/sec} \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = \pi\text{ rad/s}^{-1} \)
यह दिया गया है कि:
\( x(t) = A \cos(\omega t + \phi) \)
\( 1 = A \cos(0 \times \omega + \phi) \Rightarrow A \cos\phi = 1 \) ...(i)
\( v = \frac{dx}{dt} \)
\( \omega = -A \omega \sin(\omega t + \phi) \Rightarrow 1 = -A \sin(\omega t + \phi) \Rightarrow A \sin\phi = -1 \) ...(ii)
समीकरण (i) और (ii) का वर्ग करके और जोड़ने पर, हमें प्राप्त होता है:
\( A^2 (\sin^2 \phi + \cos^2 \phi) = 1 + 1 \Rightarrow A^2 = 2 \Rightarrow A = \sqrt{2}\text{ cm} \)
\( \tan\phi = -1 \Rightarrow \phi = \frac{3\pi}{4}, \frac{7\pi}{4} \)
सरल आवर्त गति: \( x = B \sin(\omega t + \alpha) \)
दिए गए मानों को इस समीकरण में रखने पर, हमें प्राप्त होता है:
\( 1 = B \sin(0 + \alpha) \Rightarrow B \sin\alpha = 1 \) ...(iii)
वेग, \( V = \omega B \cos(\omega t + \alpha) \)
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता है:
\( \pi = \pi B \sin\alpha \)
\( B \sin\alpha = 1 \) ...(iv)
समीकरण (iii) और (iv) का वर्ग करने पर और जोड़ने पर, हमें प्राप्त होता है:
\( B^2 [\sin^2 \alpha + \cos^2 \alpha] = 1 + 1 \Rightarrow B^2 = 2 \Rightarrow B = \sqrt{2}\text{ cm} \)
समीकरण (iii) को समीकरण (iv) से विभाजित करने पर, हमें प्राप्त होता है:
\( \frac{B \sin\alpha}{B \cos\alpha} = \frac{1}{1} \)
\( \Rightarrow \tan\alpha = 1 = \tan\frac{\pi}{4} \Rightarrow \alpha = \frac{\pi}{4}, \frac{5\pi}{4} \)
मुख्य बिंदु:
• आरंभिक प्रतिबंधों (\( t = 0 \) पर \( x \) और \( v \)) का उपयोग करके स्थिरांक ज्ञात करना।
• वेग प्राप्त करने के लिए विस्थापन का समय के सापेक्ष अवकलन करना।
• त्रिकोणमितीय समीकरणों को हल करके आयाम और कला कोण निकालना।
आम गलतियाँ:
• अवकलन करते समय ऋणात्मक चिह्न या \( \omega \) छोड़ देना।
• कला कोण के चतुर्थांश (Quadrant) का सही चयन न करना।
Exam Tips:
a) प्रारंभिक शर्तों को समीकरण में सावधानीपूर्वक प्रतिस्थापित करें।
b) \( \sin^2\theta + \cos^2\theta = 1 \) सर्वसमिका का उपयोग करके आयाम निकालें।
c) दोनों फलनों (sine और cosine) के लिए अलग-अलग गणना करें।
Question 13.8: किसी कमानीदार तुला का पैमाना 0 से 50 kg तक अंकित है और पैमाने की लंबाई \( 20\text{ cm} \) है। इस तुला से लटकाया गया कोई पिंड, जब विस्थापित करके मुक्त किया जाता है, \( 0.6\text{ s} \) के आवर्तकाल से दोलन करता है। पिंड का भार कितना है?
Answer:
अधिकतम द्रव्यमान जिसे पैमाना पढ़ सकता है, \( M = 50\text{ kg} \)
कमानी का अधिकतम विस्थापन = पैमाने की लंबाई, \( l = 20\text{ cm} = 0.2\text{ m} \)
आवर्तकाल, \( T = 0.6\text{ s} \)
जहाँ, \( g = \) गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण = \( 9.8\text{ m/s}^2 \)
\( F = 50 \times 9.8 = 490\text{ N} \)
\( \therefore \) कमानी-स्थिरांक, \( k = \frac{F}{l} = \frac{490}{0.2} = 2450\text{ N m}^{-1} \)
द्रव्यमान \( m \), तुला से निलंबित है।
आवर्तकाल, \( T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}} \)
\( \therefore m = \left(\frac{T}{2\pi}\right)^2 \times k = \left(\frac{0.6}{2 \times 3.14}\right)^2 \times 2450 = 22.36\text{ kg} \)
\( \therefore \) पिंड का भार \( mg = 22.36 \times 9.8 = 219.167\text{ N} \)
अतः वस्तु का भार लगभग \( 219\text{ N} \) है।
मुख्य बिंदु:
• कमानी स्थिरांक \( k = \frac{mg}{l} \) सूत्र का उपयोग।
• सरल आवर्त गति में आवर्तकाल का सूत्र \( T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}} \) ।
• द्रव्यमान से भार निकालने के लिए \( W = mg \) का प्रयोग।
आम गलतियाँ:
• सेंटीमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना (\( 20\text{ cm} = 0.2\text{ m} \))।
• द्रव्यमान और भार में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) सभी राशियों को SI मात्रक में बदलें।
b) गणना करते समय पाई (\( \pi \)) के मान का सही उपयोग करें।
c) अंतिम उत्तर उचित मात्रक (N) के साथ लिखें।
Question 13.9: \( 1200\text{ N m}^{-1} \) कमानी-स्थिरांक की कोई कमानी चित्र 13.19 में दर्शाइए अनुसार किसी क्षैतिज मेज से जड़ी है। कमानी के मुक्त सिरे से \( 3\text{ kg} \) द्रव्यमान का कोई पिंड जुड़ा है। इस पिंड को एक ओर \( 2.0\text{ cm} \) दूरी तक खींचकर मुक्त किया जाता है,
(i) पिंड के दोलन की आवृत्ति,
(ii) पिंड का अधिकतम त्वरण, तथा
(iii) पिंड की अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए।
Answer:
कमानी-स्थिरांक, \( k = 1200\text{ N m}^{-1} \)
द्रव्यमान, \( m = 3\text{ kg} \)
विस्थापन, \( A = 2.0\text{ cm} = 0.02\text{ cm} \)
दोलन की आवृत्ति \( v = \frac{1}{T} = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{k}{m}} \), जहाँ \( T \) आवर्तकाल है।
\( v = \frac{1}{2 \times 3.14} \sqrt{\frac{1200}{3}} = 3.18\text{ m/s} \)
इसलिए, दोलनों की आवृत्ति \( 3.18\text{ m/से} \) है।
अधिकतम त्वरण \( a = \omega^2 A \), जहाँ \( \omega = \) कोणीय आवृत्ति = \( \sqrt{\frac{k}{m}} \) तथा \( A = \) अधिकतम विस्थापन
\( \therefore a = \frac{k}{m} A = \frac{1200 \times 0.02}{3} = 8\text{ m/s}^2 \)
इसलिए, पिंड का अधिकतम त्वरण \( 8.0\text{ m/s}^2 \) है।
अधिकतम वेग, \( v_{\max} = A\omega \)
\( v_{\max} = 0.02 \times \sqrt{\frac{1200}{3}} = 0.4\text{ m/s} \)
इसलिए, पिंड का अधिकतम वेग \( 0.4\text{ m/s} \) है।
मुख्य बिंदु:
• आवृत्ति \( v = \frac{1}{2\pi}\sqrt{\frac{k}{m}} \) से ज्ञात करना।
• अधिकतम त्वरण \( a_{\max} = \omega^2 A \) ।
• अधिकतम वेग \( v_{\max} = \omega A \) ।
आम गलतियाँ:
• आयाम को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना भूल जाना।
• कोणीय आवृत्ति और सामान्य आवृत्ति में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) सभी मानों को मानक इकाइयों में रखें।
b) सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें और फिर मान रखें।
c) परिणाम के साथ सही SI मात्रक लिखें।
Question 13.10: अभ्यास 13.9 में, मान लीजिए जब कमानी अतानित अवस्था में है तब पिंड की स्थिति \( x = 0 \) है तथा बाएँ से दाएँ की दिशा \( x \)-अक्ष की धनात्मक दिशा है। दोलन करते पिंड के विस्थापन \( x \) को समय के फलन के रूप में दर्शाइए, जबकि विराम घड़ी का आरंभ (\( t = 0 \)) करते समय पिंड,
(a) अपनी माध्य स्थिति,
(b) अधिकतम तानित स्थिति, तथा
(c) अधिकतम संपीडन की स्थिति पर है।
सरल आवर्त गति के लिए फलन एक दूसरे से आवृत्ति में, आयाम में अथवा आरंभिक कला में किस रूप में भिन्न हैं?
Answer:
(a) \( x = 2 \sin 20t \)
(b) \( x = 2 \cos 20t \)
(c) \( x = -2\cos 20t \)
सभी फलनों में समान आवृत्ति और आयाम हैं, लेकिन विभिन्न प्रारंभिक कला हैं।
द्रव्यमान द्वारा पार्श्व में तय की गई दूरी, \( A = 2.0\text{ सेमी} \)
कमानी का बल नियतांक, \( k = 1200\text{ N m}^{-1} \) तथा द्रव्यमान, \( m = 3\text{ किलो} \)
दोलन की कोणीय आवृत्ति: \( \omega = \sqrt{\frac{k}{m}} \Rightarrow \omega = \sqrt{\frac{1200}{3}} = \sqrt{400} = 20\text{ rad s}^{-1} \)
जब पिंड मध्य स्थिति में होता है, तब प्रारंभिक कला \( 0 \) होती है। विस्थापन, \( x = A\sin \omega t = 2\sin 20t \)
अधिकतम तनी हुई स्थिति में, पिंड अधिकतम बाईं ओर होता है। इसलिए, प्रारंभिक कला \( \frac{\pi}{2} \) है।
\( x = A\sin\left(\omega t + \frac{\pi}{2}\right) = 2\sin\left(20t + \frac{\pi}{2}\right) = 2\cos 20t \)
अधिकतम संपीडन की स्थिति में, पिंड अधिकतम बाईं ओर होता है। इसलिए, प्रारंभिक कला \( \frac{3\pi}{2} \) है।
\( x = A\sin\left(\omega t + \frac{3\pi}{2}\right) = 2\sin\left(20t + \frac{3\pi}{2}\right) = -2\cos 20t \)
फलनों में समान आवृत्ति \( \left(\frac{20}{2\pi}\right) \) और आयाम (\( 2\text{ सेमी} \)), लेकिन विभिन्न कला चरण \( \left(0, \frac{\pi}{2}, \frac{3\pi}{2}\right) \) हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रारंभिक स्थिति के आधार पर कला कोण निर्धारित करना।
• माध्य स्थिति के लिए sine फलन और चरम स्थितियों के लिए cosine फलन का उपयोग।
• सभी फलनों की आवृत्ति समान होना।
आम गलतियाँ:
• प्रारंभिक कला कोण गलत चुनना।
• साइन और कोसाइन फलनों के बीच अंतर न समझ पाना।
Exam Tips:
a) देखें कि घड़ी कब शुरू होती है (माध्य स्थिति या चरम स्थिति)।
b) मानक समीकरण \( x = A\sin(\omega t + \phi) \) का उपयोग करें।
c) कला कोण को रेडियन में व्यक्त करें।
Question 13.11: चित्र 13.20 में दिए गए दो आरेख दो वर्तुत गतियों के तदनुरूपी हैं। प्रत्येक आरेख पर वृत्त की त्रिज्या, परिक्रमण-काल, आरंभिक स्थिति और परिक्रमण की दिशा दर्शायी गई है। प्रत्येक प्रकरण में, परिक्रमण करते कण के त्रिज्य-सदिश के \( x \)-अक्ष पर प्रक्षेप की तदनुरूपी सरल आवर्त गति ज्ञात कीजिए।
Answer:
आवर्तकाल, \( T = 2\text{ s} \)
आयाम, \( A = 3\text{ cm} \)
समय \( t = 0 \) पर, त्रिज्या सदिश OP धनात्मक \( x \)-अक्ष के साथ एक कोण \( \frac{\pi}{2} \) बनाता है, अर्थात कला कोण \( \phi = +\frac{\pi}{2} \)
इसलिए, समय \( t \) पर OP के \( x \)-प्रक्षेपण के लिए सरल आवर्त गति का समीकरण विस्थापन समीकरण द्वारा इस प्रकार दिया जा सकता है:
\( x = A\cos\left(\frac{2\pi t}{T} + \phi\right) = 3\cos\left(\frac{2\pi t}{2} + \frac{\pi}{2}\right) = -3\sin\left(\frac{2\pi t}{2}\right) \Rightarrow x = -3\sin\pi t\text{ cm} \)
आवर्तकाल, \( T = 4\text{ s} \)
आयाम, \( a = 2\text{ m} \)
समय \( t = 0 \) पर, OP, \( x \)-अक्ष के साथ वामावर्त दिशा में \( \pi \) कोण बनाता है। इसलिए, कला कोण, \( \phi = \pi + \pi \) इसलिए, \( t \) समय पर OP के \( x \)-प्रक्षेपण के लिए सरल आवर्त गति का समीकरण इस प्रकार दिया गया है:
\( x = a\cos\left(\frac{2\pi t}{T} + \phi\right) = 2\cos\left(\frac{2\pi t}{4} + \pi\right) \Rightarrow x = -2\cos\left(\frac{\pi t}{2}\right)\text{ m} \)
मुख्य बिंदु:
• वृत्त की त्रिज्या सरल आवर्त गति का आयाम बनती है।
• परिक्रमण काल आवर्तकाल होता है।
• प्रारंभिक कोण कला कोण को निर्धारित करता है।
आम गलतियाँ:
• कोण को डिग्री और रेडियन में बदलते समय गलती करना।
• प्रक्षेपण लेते समय साइन और कोसाइन का गलत चुनाव करना।
Exam Tips:
a) आरेख से सीधे आयाम और आवर्तकाल निकालें।
b) घूर्णन की दिशा के अनुसार कला कोण का चिह्न तय करें।
c) उत्तर को मानक रूप में लिखें।
Question 13.12: नीचे दी गई प्रत्येक सरल आवर्त गति के लिए तदनुरूपी निर्देश वृत्त का आरेख खींचिए। घूर्णी कण की आरंभिक (\( t = 0 \)) स्थिति, वृत्त की त्रिज्या तथा कोणीय चाल दर्शाइए (सुगमता के लिए प्रत्येक प्रकरण में پرिक्रमण की दिशा वामावर्त लीजिए।)
(\( x \) को cm में तथा \( t \) को s में लीजिए।)
(a) \( x = -2\sin(3t + \pi/3) $
(b) \( x = \cos(\pi/6 - t) $
(c) \( x = 3\sin(2\pi t + \pi/4) $
(d) \( x = 2\cos\pi t $
Answer:
(a) \( x = -2\sin\left(3t + \frac{\pi}{3}\right) = +2\cos\left(3t + \frac{\pi}{3} + \frac{\pi}{2}\right) = 2\cos\left(3t + \frac{5\pi}{6}\right) \)
यदि इस समीकरण की तुलना मानक सरल आवर्त गति समीकरण \( x = A\cos\left(\frac{2\pi}{T}t + \phi\right) \) से की जाए, तो हमें यह प्राप्त होता है:
आयाम, \( A = 2\text{cm} \), कला कोण, \( \phi = \frac{5\pi}{6} = 150^\circ \)
कोणीय वेग, \( \omega = \frac{2\pi}{T} = 3\text{rad/sec} \)
कण की गति को निम्न आकृति में दर्शाए अनुसार चित्रित किया जा सकता है।
(b) \( x = \cos\left(\frac{\pi}{6} - t\right) = \cos\left(t - \frac{\pi}{6}\right) \)
यदि इस समीकरण की तुलना मानक सरल आवर्त गति समीकरण \( x = A\cos\left(\frac{2\pi}{T}t + \phi\right) \) से की जाए, तो हमें यह प्राप्त होता है:
आयाम, \( A = 1 \), कला कोण, \( \phi = -\frac{\pi}{6} = -30^\circ \) तथा कोणीय वेग, \( \omega = \frac{2\pi}{T} = 1\text{rad/s} \)
कण की गति को निम्न आकृति में दर्शाए अनुसार चित्रित किया जा सकता है।
(c) \( x = 3\sin\left(2\pi t + \frac{\pi}{4}\right) = -3\cos\left[2\pi t + \frac{\pi}{4} + \frac{\pi}{2}\right] = -3\cos\left(2\pi t + \frac{3\pi}{4}\right) \)
यदि इस समीकरण की तुलना मानक सरल आवर्त गति समीकरण \( x = A\cos\left(\frac{2\pi}{T}t + \phi\right) \) से की जाए, तो हमें यह प्राप्त होता है:
आयाम, \( A = 3\text{ cm} \)
कला कोण, \( \phi = \frac{3\pi}{4} = 135^\circ \)
कोणीय वेग, \( \omega = \frac{2\pi}{T} = 2\pi\text{rad/s} \)
मुख्य बिंदु:
• निर्देश वृत्त (Reference circle) की त्रिज्या आयाम के बराबर होती है।
• साइन फलन को कोसाइन में बदलकर कला कोण निकालना।
• कोणीय वेग t के गुणांक से सीधे प्राप्त होता है।
आम गलतियाँ:
• कला कोण के रूपांतरण में ऋणात्मक चिह्नों की गलती करना।
• रेडियन को डिग्री में बदलते समय त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक फलन को मानक \( A\cos(\omega t + \phi) \) रूप में बदलें।
b) आरेख बनाते समय त्रिज्या और कोण को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) वामावर्त दिशा को मानक मानकर चलें।
Question 13.13: चित्र 13.21 (a) में \( k \) बल-स्थिरांक की किसी कमानी के एक सिरे को किसी दृढ आधार से जकड़ा तथा दूसरे मुक्त सिरे से एक द्रव्यमान \( m \) जुड़ा दर्शाया गया है। कमानी के मुक्त सिरे पर बल \( F \) आरोपित करने से कमानी तन जाती है। चित्र 13.21 (b) में उसी कमानी के दोनों मुक्त सिरों से द्रव्यमान \( m \) जुड़ा दर्शाया गया है। कमानी के दोनों सिरों को चित्र 13.21 में समान बल \( F \) द्वारा तानित किया गया है। (a) दोनों प्रकरणों में कमानी का अधिकतम विस्तार क्या है?
(b) यदि (a) का द्रव्यमान तथा (b) के दोनों द्रव्यमानों को मुक्त छोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक प्रकरण में दोलन का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer:
जब स्प्रिंग के मुक्त सिरे पर बल \( F \) लगाया जाता है, तो एक विस्तार \( l \) उत्पन्न होता है। अधिकतम विस्तार के लिए, इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\( F = kl \)
जहाँ \( k \) कमानी स्थिरांक है
इसलिए, कमानी में उत्पादित अधिकतम विस्तार, \( l = \frac{F}{k} \)
दो ब्लॉक निकाय के लिए:
इस स्थिति में उत्पन्न विस्थापन \( x = \frac{l}{2} \)
शुद्ध बल, \( F = +2kx = 2k \frac{l}{2} \)
\( \therefore l = \frac{F}{K} \)
एक ब्लॉक निकाय के लिए: ब्लॉक के द्रव्यमान (\( m \)) के लिए, बल \( F = ma = m \frac{d^2 x}{dt^2} \)
जहाँ, \( x \) समय \( t \) में गुटके का विस्थापन है。
\( \therefore m \frac{d^2 x}{dt^2} = -kx \)
यह ऋणात्मक है क्योंकि प्रत्यास्थ बल की दिशा विस्थापन की दिशा के विपरीत है।
\( \frac{d^2 x}{dt^2} = -\left(\frac{k}{m}\right) x = -\omega^2 x \)
जहाँ, \( \omega^2 = \frac{k}{m} \)
\( \therefore \) दोलन की आवर्तकाल, \( T = \frac{2\pi}{\omega} = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}} \)
दो ब्लॉक निकाय के लिए: \( F = m \frac{d^2 x}{dt^2} \Rightarrow m \frac{d^2 x}{dt^2} = -2kx \)
यह ऋणात्मक है क्योंकि प्रत्यास्थ बल की दिशा विस्थापन की दिशा के विपरीत है।
\( \frac{d^2 x}{dt^2} = -\frac{2kx}{m} = -\omega^2 x \)
जहाँ, कोणीय आवृत्ति, \( \omega = \sqrt{\frac{2k}{m}} \)
\( \therefore \) आवर्तकाल, \( T = \frac{2\pi}{\omega} = 2\pi \sqrt{\frac{m}{2k}} \)
मुख्य बिंदु:
• एक सिरे पर बल लगाने और दोनों सिरों पर बल लगाने में अंतर समझना।
• दो-ब्लॉक प्रणाली के लिए प्रभावी बल स्थिरांक \( 2k \) हो जाता है।
• आवर्तकाल का सूत्र \( T = 2\pi\sqrt{\frac{m}{\text{eff. } k}} \) उपयोग करना।
आम गलतियाँ:
• दोनों सिरों पर बल लगाने पर विस्तार को आधा न मानना।
• प्रभावी बल स्थिरांक की गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) न्यूटन के गति के दूसरे नियम और हूक के नियम का संयोजन करें।
b) दोनों स्थितियों (a) और (b) के समीकरणों को अलग-अलग हल करें।
c) अंतिम व्यंजकों को स्पष्ट रूप से बॉक्स में बंद करें।
Question 13.14: किसी रेलगाड़ी के इंजन के सिलिंडर हेड में पिस्टन का स्ट्रोक (आयाम का दो गुना) \( 1.0\text{ m} \) का है। यदि पिस्टन \( 200\text{ rad/min} \) की कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति करता है, तो उसकी अधिकतम चाल कितनी है?
Answer:
पिस्टन की कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 200\text{ rad/min} \)
स्ट्रोक = \( 1.0\text{ m} \)
आयाम, \( A = \frac{1.0}{2} = 0.5\text{ m} \)
पिस्टन की अधिकतम गति \( v_{\max} = A\omega = 200 \times 0.5 = 100\text{ m/min} \)
मुख्य बिंदु:
• स्ट्रोक का आधा हिस्सा आयाम (\( A \)) होता है।
• अधिकतम चाल \( v_{\max} = A\omega \) से निकाली जाती है।
• इकाइयों का विशेष ध्यान रखें (मिनट या सेकंड)।
आम गलतियाँ:
• स्ट्रोक को ही सीधा आयाम मान लेना।
• मात्रकों को ठीक से न बदलना।
Exam Tips:
a) पहले दिए गए मानों को लिखें।
b) सूत्र \( v_{\max} = A\omega \) का उल्लेख करें।
c) गणना को सावधानी से पूरा करें।
Question 13.15: चंद्रमा के पृष्ठ पर गुरुــत्वीय त्वरण \( 1.7\text{ m s}^{-2} \) है। यदि किसी सरल लोलक का पृथ्वी के पृष्ठ पर आवर्तकाल \( 3.5\text{ s} \) है, तो उसका चंद्रमा के पृष्ठ पर आवर्तकाल कितना होगा? (पृथ्वी के पृष्ठ पर \( g = 9.8\text{ m s}^{-2} \))
Answer:
चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण, \( g' = 1.7\text{ m s}^{-2} \)
पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण, \( g = 9.8\text{ m s}^{-2} \)
पृथ्वी पर सरल लोलक का आवर्तकाल, \( T = 3.5\text{ s} \)
\( T = 2\pi \sqrt{\frac{l}{g}} \), जहाँ, \( l \) पेंडुलम की लंबाई है।
\( \therefore l = \frac{T^2}{(2\pi)^2} \times g = \frac{(3.5)^2}{4 \times (3.14)^2} \times 9.8 \)
पेंडुलम की लंबाई स्थिर रहती है।
\( T' = 2\pi \sqrt{\frac{l}{g'}} \)
चंद्रमा की सतह पर, आवर्तकाल, \( T' = \sqrt{\frac{(3.5)^2}{4 \times (3.14)^2} \times 9.8} \times \frac{4 \times (3.14)^2}{1.7} = 8.4\text{ s} \)
अतः, चंद्रमा की सतह पर सरल लोलक का आवर्तकाल \( 8.4\text{ s} \) है।
मुख्य बिंदु:
• सरल लोलक की लंबाई दोनों स्थानों पर समान रहती है।
• आवर्तकाल का सूत्र \( T = 2\pi\sqrt{\frac{l}{g}} \) का उपयोग।
• \( g \) बदलने से आवर्तकाल बदल जाता है।
आम गलतियाँ:
• पेंडुलम की लंबाई को बदल देना।
• वर्गमूल (Square root) निकालते समय गणना की गलती करना।
Exam Tips:
a) लंबाई के लिए समीकरण बनाकर उसे स्थिर रखें।
b) अनुपात विधि (Ratio method) का उपयोग करने से गणना आसान हो जाती है।
c) उत्तर को सही सार्थक अंकों में लिखें।
Question 13.16: किसी कार की छत से \( l \) लंबाई का कोई सरल लोलक, जिसके लोलक का द्रव्यमान \( m \) है, लटकाया गया है। कार \( R \) त्रिज्या की वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल \( v \) से गतिमान है। यदि लोलक त्रिज्य दिशा में अपनी साम्यावस्था की स्थिति के इधर-उधर छोटे दोलन करता है, तो इसका आवर्तकाल क्या होगा?
Answer:
सरल लोलक का गोलक गुरुत्व के कारण त्वरण और कार के वृत्तीय पथ पर गति द्वारा प्रदान किया गया अभिकेन्द्र त्वरण का अनुभव करेगा।
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण = \( g \)
अभिकेन्द्र त्वरण = \( \frac{v^2}{R} \), जहाँ, \( v \) कार की एकसमान गति है तथा \( R \) ट्रैक की त्रिज्या है।
प्रभावी त्वरण \( a_{\text{eff}} = \sqrt{g^2 + \left(\frac{v^2}{R}\right)^2} \)
आवर्तकाल, \( T = 2\pi \sqrt{\frac{l}{g^2 + \frac{v^2}{R^2}}} \)
जहाँ, \( l \) पेंडुलम की लंबाई है।
मुख्य बिंदु:
• कार की वृत्तीय गति के कारण अभिकेंद्र त्वरण उत्पन्न होता है।
• प्रभावी त्वरण \( g \) और अभिकेंद्र त्वरण का सदिश योग होता है।
• आवर्तकाल के सूत्र में \( g \) के स्थान पर प्रभावी त्वरण रखा जाता है।
आम गलतियाँ:
• अभिकेंद्र त्वरण के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• प्रभावी त्वरण का सही सूत्र न लिखना।
Exam Tips:
a) बलों और त्वरणों का सदिश आरेख समझें।
b) प्रभावी त्वरण का व्यंजक स्पष्ट रूप से निकालें।
c) अंतिम सूत्र में मान प्रतिस्थापित करें।
Question 13.17: आधार क्षेत्रफल \( A \) तथा ऊँचाई \( h \) के एक कॉर्क का बेलनाकार टुकड़ा \( \rho_1 \) घनत्व के किसी द्रव में तैर रहा है। कॉर्क को थोड़ा नीचे दबाकर स्वतंत्र छोड़ देते हैं, यह दर्शाइए कि कॉर्क ऊपर-नीचे सरल आवर्त दोलन करता है जिसका आवर्तकाल \( T = 2\pi \sqrt{\frac{hp}{\rho g}} \) है। यहाँ \( \rho \) कॉर्क का घनत्व है (द्रव की श्यानता के कारण अवमंदन को नगण्य मानिए)।
Answer:
कॉर्क का आधार क्षेत्र = \( A \), कॉर्क की ऊँचाई = \( h \), द्रव का घनत्व = \( \rho_1 \) तथा कॉर्क का घनत्व = \( \rho \)
साम्यावस्था में: कॉर्क का भार = फ्लोटिंग कॉर्क द्वारा विस्थापित द्रव का भार
बता दें कि कॉर्क को \( x \) से थोड़ा दबा दिया जाता है। नतीजतन, एक निश्चित मात्रा के अतिरिक्त मात्रा में पानी विस्थापित होता है। इसलिए, एक अतिरिक्त उत्क्षेप ऊपर की ओर कार्य करता है और कॉर्क के लिए प्रत्यानयन बल प्रदान करता है।
उत्क्षेप बल = प्रत्यानयन बल, \( F = \) विस्थापित अतिरिक्त पानी का भार
\( F = -(\text{आयतन} \times \text{घनत्व} \times g)
\)
आयतन = क्षेत्रफल \( \times \) दूरी जितना कॉर्क दब जाता है = \( Ax \)
\( \therefore F = -Ax\rho_1 g \) ...(i)
बल नियम के अनुसार: \( F = kx \Rightarrow k = \frac{F}{x} \), जहाँ \( k \) एक स्थिरांक है।
\( k = \frac{F}{x} = -A\rho_1 g $ ...(ii)
\)
कॉर्क के दोलनों का आवर्तकाल \( T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}} \) ...(iii)
जहाँ, \( m = \) कॉर्क का द्रव्यमान है
= कॉर्क का आयतन \( \times \) घनत्व = कॉर्क के आधार का क्षेत्रफल \( \times \) कॉर्क की ऊँचाई \( \times \) कॉर्क का घनत्व = \( Ah\rho \)
इसलिए, आवर्तकाल \( T = 2\pi \sqrt{\frac{Ah\rho}{Ah\rho_1 g}} = 2\pi \sqrt{\frac{hp}{\rho_1 g}} \)
मुख्य बिंदु:
• आर्किमिडीज के सिद्धांत का उपयोग करके उत्क्षेप बल निकालना।
• विस्थापित अतिरिक्त आयतन \( Ax \) का उपयोग करना।
• प्रभावी बल स्थिरांक \( k = A\rho_1 g \) प्राप्त करना।
आम गलतियाँ:
• कॉर्क के घनत्व और द्रव के घनत्व में अंतर न करना।
• द्रव्यमान निकालते समय सही आयतन का उपयोग न करना।
Exam Tips:
a) उत्क्षेप बल और भार को संतुलित करके शुरुआत करें।
b) विस्थापन \( x \) देने पर अतिरिक्त बल की गणना करें।
c) आवर्तकाल के मानक सूत्र में मान रखें।
Question 13.18: पारे से भरी किसी U-नली का एक सिरा किसी चूषण पंप से जुड़ा है, तथा दूसरा सिरा वायुमंडल में खुला छोड़ दिया गया है। दोनों स्तंभों में कुछ दाاباتार बनाए रखा जाता है। यह दर्शाइए कि जब चूषण पंप को हटा देते हैं, तब U नली में पारे का स्तंभ सरल आवर्त गति करता है।
Answer:
U-नली के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल का क्षेत्रफल = \( A \)
पारे स्तंभ का घनत्व = \( \rho \)
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण = \( g \)
प्रत्यानयन बल, \( F = \) एक निश्चित ऊँचाई के पारे के स्तंभ का वजन
\( F = -(\text{आयतन} \times \text{घनत्व} \times g)
\)
= -(A \times 2h \times \rho \times g)
= -2Apgh = -k \times \) एक भुजा में विस्थापन (\( h \))
जहाँ, \( 2h \) दो भुजाओं में पारे के स्तंभ की ऊँचाई है।
\( k \) एक स्थिरांक है, जिसे लिख सकते हैं, \( k = \frac{F}{h} = 2A\rho g \)
आवर्तकाल, \( T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}} = 2\pi \sqrt{\frac{m}{2A\rho g}} \), जहाँ, \( m \) पारे के स्तंभ का द्रव्यमान है।
मान लीजिए कि U नली में पारे की कुल लंबाई है।
पारे का द्रव्यमान, \( m = \) पारे का आयतन \( \times \) पारे का घनत्व = \( Al\rho \)
मुख्य बिंदु:
• U-नली में पारे के स्तर का विस्थापन दोनों भुजाओं में होता है।
• प्रत्यानयन बल विस्थापित पारे के भार के कारण उत्पन्न होता है।
• आवर्तकाल द्रव के कुल द्रव्यमान और अनुप्रस्थ काट पर निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• पारे की कुल लंबाई और विस्थापन की ऊँचाई को मिला देना।
• बल के व्यंजक में ऋणात्मक चिह्न छोड़ देना।
Exam Tips:
a) पारे के स्तंभ के संतुलन और विस्थापन को चित्र द्वारा समझें।
b) प्रत्यानयन बल का व्यंजक सावधानी से व्युत्पन्न करें।
c) अंत में आवर्तकाल का सूत्र प्राप्त करें।
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