Download NCERT Solutions for Class 11 Physics Chapter 12 अणुगति सिद्धांत
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Question Q1: किसी घनाकार पात्र (जिसके पार्श्व क्षैतिज + ऊर्ध्वाधर हैं) में NTP पर आदर्श गैस भरी है। यह पात्र किसी रॉकेट में है, जो \( 500\text{ ms}^{-1} \) की चाल से ऊर्ध्वाधर दिशा में गति कर रहा है। पृथ्वी से देखने पर पात्र के भीतर गैस का दाब
[A]. समान रहता है क्योंकि \( 500\text{ ms}^{-1} \) चाल गैस की \( v_{\text{rms}} \) से बहुत कम है।
[B]. समान रहता है क्योंकि समस्त पात्र की गति दीवारों तथा गैस के अणुओं की गति सापेक्षिक गति को प्रभावित नहीं करती।
[C]. \( \{v_{\text{rms}}^2 + (500)^2\}/ v_{\text{rms}}^2 \) गुना बढ़ जाएगा, यहाँ \( v_{\text{rms}} \) गैस का वर्ग माध्य मूल वेग है।
[D]. पात्र के शीर्ष की दीवार तथा तली की दीवार पर भिन्न-भिन्न होगा।
Answer:
सही विकल्प [B] है।
व्याख्या: जब पात्र किसी रॉकेट के साथ नियत चाल से ऊर्ध्वाधर दिशा में गति करता है, तो पात्र के भीतर गैस के अणुओं और पात्र की दीवारों के बीच की सापेक्षिक गति पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। गैस का दाब अणुओं द्वारा दीवारों पर किए गए संघट्टों पर निर्भर करता है, जो पात्र की गति से अपरिवर्तित रहता है। अतः पृथ्वी के सापेक्ष देखने पर भी पात्र के भीतर गैस का दाब समान रहता है।
मुख्य बिंदु:
• गैस का दाब पात्र की समग्र गति से स्वतंत्र होता है।
• सापेक्षिक वेग अपरिवर्तित रहने के कारण संघट्ट दर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
• दाब केवल आणविक गतिकी और तापमान पर निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• छात्र रॉकेट की गति को गैस के अणुओं के वेग में सीधा जोड़ देते हैं।
• पात्र की गति को आंतरिक दाब परिवर्तन का कारण मान लेना।
• आपेक्षिक गति के सिद्धांत को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) ऐसे वैचारिक प्रश्नों में फ्रेम ऑफ रेफरेंस (निर्देश तंत्र) की अवधारणा को समझें।
b) याद रखें कि कंटेनर की एकसमान गति आंतरिक गैस के दाब को प्रभावित नहीं करती।
c) विकल्पों को ध्यान से पढ़कर सही भौतिक कारण चुनें।
Question Q2: बॉयल का नियम लागू होता है:
[A]. रुद्धोष्म प्रक्रम पर
[B]. समतापीय प्रक्रम पर
Answer:
सही विकल्प समतापीय प्रक्रम है।
व्याख्या: बॉयल के नियम के अनुसार, नियत तापमान पर किसी दी गई गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( PV = \text{नियत} \))। यह स्थिति केवल समतापीय (Isothermal) प्रक्रम में ही संभव है जहाँ तापमान स्थिर रखा जाता है।
मुख्य बिंदु:
• बॉयल का नियम स्थिर तापमान पर कार्य करता है।
• इसमें \( P \propto \frac{1}{V} \) संबंध होता है।
• यह समतापीय प्रक्रम का पालन करता है।
आम गलतियाँ:
• इसे रुद्धोष्म प्रक्रम से भ्रमित करना।
• तापमान को परिवर्तित मान लेना।
Exam Tips:
a) गैसिय नियमों (बॉयल, चार्ल्स, गै-लुसाक) के तापमान और दाब की शर्तों को याद रखें।
b) समतापीय और रुद्धोष्म प्रक्रमों में अंतर स्पष्ट रखें।
c) सूत्र \( PV = \text{नियत} \) का सही उपयोग करें।
Question Q3: किसी सिलेंडर में ऊर्ध्वाधर स्थिति में आदर्श गैस भरी है तथा इस पर \( M \) द्रव्यमान का पिस्टन लगा है जो बिना किसी घर्षण के ऊपर-नीचे गति कर सकता है। यदि ताप में वृद्धि करें तो
[A]. गैस के \( P \) तथा \( V \) दोनों परिवर्तित हो जाएंगे।
[B]. चार्ल्स के नियम के अनुसार केवल \( P \) में वृद्धि होगी।
[C]. \( V \) परिवर्तित होगा परंतु \( P \) नहीं।
[D]. \( P \) परिवर्तित होगा परंतु \( V \) नहीं।
Answer:
सही विकल्प [C] है (\( V \) परिवर्तित होगा परंतु \( P \) नहीं)।
व्याख्या: चूंकि पिस्टन पर वायुमंडलीय दाब और पिस्टन के भार के कारण बल लग रहा है जो कि स्थिर है, इसलिए गैस का दाब \( P \) स्थिर रहता है। जब तापमान बढ़ाया जाता है, तो चार्ल्स के नियम के अनुसार आयतन \( V \) बढ़ जाता है।
मुख्य बिंदु:
• पिस्टन का भार और वायुमंडल दाब नियत दाब सुनिश्चित करते हैं।
• तापमान बढ़ाने पर आयतन में प्रसार होता है।
• यहाँ दाब स्थिर रहता है और आयतन तापमान के समानुपाती होता है।
आम गलतियाँ:
• तापमान बढ़ाने पर दाब और आयतन दोनों को परिवर्तित मान लेना।
• पिस्टन के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) पिस्टन वाले निकाय में दाब की स्थिरता को पहचानना सीखें।
b) चार्ल्स के नियम \( V \propto T \) को ऐसे प्रश्नों में लागू करें।
c) प्रश्न की भाषा को ध्यान से पढ़ें।
Question Q4: 1 मोल \( \text{H}_2 \) गैस \( T = 300\text{ K} \) ताप पर आयतन \( V = 1.00\text{ m}^3 \) के बॉक्स में भरी है। गैस को \( T = 3000\text{ K} \) तक गर्म किया जाता है। तब यह हाइड्रोजन परमाणु में बदल जाती है। अब गैस का दाब क्या होगा?
[A]. आरंभ के दाब के बराबर
[B]. आरंभ के दाब का दोगुना
[C]. आरंभ के दाब का 10 गुना
[D]. आरंभ के दाब का 20 गुना
Answer:
सही विकल्प [D] है (आरंभ के दाब का 20 गुना)।
व्याख्या: आदर्श गैस समीकरण \( PV = \mu RT \) के अनुसार, दाब \( P = \frac{\mu RT}{V} \) होता है।
आरंभ में मोरों की संख्या \( \mu_1 = 1 \text{ mol} \) (\( \text{H}_2 \) अणु के रूप में), तापमान \( T_1 = 300\text{ K} \) ।
जब तापमान \( 3000\text{ K} \) तक बढ़ाया जाता है, तो \( \text{H}_2 \) अणु वियोजित होकर हाइड्रोजन परमाणुओं में बदल जाते हैं। चूँकि प्रत्येक \( \text{H}_2 \) अणु 2 हाइड्रोजन परमाणु देता है, अतः मोरों की नई संख्या \( \mu_2 = 2 \times 1 = 2 \text{ mol} \) हो जाती है।
नया दाब \( P_2 \) और प्रारंभिक दाब \( P_1 \) का अनुपात:
\( \frac{P_2}{P_1} = \frac{\mu_2 T_2}{\mu_1 T_1} \)
\( \frac{P_2}{P_1} = \frac{2 \times 3000}{1 \times 300} = \frac{6000}{300} = 20 \)
अतः नया दाब आरंभिक दाब का 20 गुना होगा।
मुख्य बिंदु:
• वियोजन के कारण मोलों की संख्या दुगुनी हो जाती है।
• तापमान में 10 गुना वृद्धि होती है।
• दाब \( P \) मोलों की संख्या और तापमान दोनों पर निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• वियोजन के बाद मोलों की संख्या को अपरिवर्तित मान लेना।
• केवल तापमान के परिवर्तन से उत्तर देना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में अणुओं के परमाणुओं में वियोजन को ध्यान से देखें।
b) मोलों की संख्या \( \mu \) में परिवर्तन की गणना अवश्य करें।
c) अनुपात विधि का प्रयोग करके समय बचाएं।
Question Q5: किसी फूले हुए रबड़ के गुब्बारे में भरी 1 मोल गैस का दाब \( P \), आयतन \( V \) तथा ताप \( T \) है। यदि ताप बढ़कर \( 1.1\text{ T} \) तथा आयतन बढ़कर \( 1.05\text{ V} \) हो जाता है तो अंतिम दाब होगा
Answer:
अंतिम दाब \( P \) एवं \( 1.1\text{ P} \) के बीच होगा।
व्याख्या: आदर्श गैस समीकरण \( PV = \mu RT \) से, अंतिम दाब \( P' = \frac{\mu RT'}{V'} \)
यहाँ \( T' = 1.1\text{ T} \) तथा \( V' = 1.05\text{ V} \) रखने पर:
\( P' = \frac{\mu R (1.1 T)}{1.05 V} = \frac{1.1}{1.05} P \)
चूँकि \( \frac{1.1}{1.05} > 1 \), दाब बढ़ेगा और यह \( 1.05 \text{ या } 1.1 \) के गुणांक के बीच यानी \( P \) एवं \( 1.1P \) के मध्य होगा।
मुख्य बिंदु:
• आदर्श गैस समीकरण का अनुप्रयोग।
• अनुपात निकालकर दाब में परिवर्तन की जाँच करना।
• \( P' = \left(\frac{1.1}{1.05}\right)P \) की गणना।
आम गलतियाँ:
• आनुपातिक परिवर्तन को सीधे जोड़ना या घटाना।
• समीकरण में मानों को गलत प्रतिस्थापित करना।
Exam Tips:
a) \( P' = P \left(\frac{T'}{T}\right)\left(\frac{V}{V'}\right) \) संबंध का उपयोग करें।
b) भिन्नात्मक मानों की तुलना सावधानी से करें।
c) इकाई और चरों के परिवर्तन पर ध्यान दें।
Question Q6: हाइड्रोजन जैसे द्विपरमाणुक अणुओं में स्थानान्तरणीय तथा घूर्णन दोनों गतियों के कारण ऊर्जा होती है। अणुगति सिद्धांत के समीकरण \( pV = \frac{2}{3}E \) में \( E \) व्यक्त करता है:
[A]. प्रति एकांक आयतन कुल ऊर्जा
[B]. ऊर्जा का केवल स्थानान्तरणीय भाग क्योंकि घूर्णी ऊर्जा स्थानान्तरणीय ऊर्जा की तुलना में बहुत कम है।
[C]. ऊर्जा का केवल स्थानान्तरणीय भाग क्योंकि दीवार से संघट्ट के समय दाब का संबंध रैखिक संवेग में अंतर से होता है।
[D]. ऊर्जा का स्थानान्तरणीय भाग क्योंकि घूर्णी ऊर्जाएँ दोनों चिन्हों की हो सकती है तथा सभी अणुओं के लिए इसका औसत शून्य है।
Answer:
सही विकल्प [C] है।
व्याख्या: अणुगति सिद्धांत में दाब की व्युत्पत्ति दीवार के साथ अणुओं के प्रत्यास्थ संघट्टों के आधार पर की जाती है। संघट्ट के दौरान केवल रेखीय संवेग (स्थानान्तरणीय गति) में परिवर्तन होता है, इसलिए समीकरण \( pV = \frac{2}{3}E \) में \( E \) गैस की कुल स्थानान्तरणीय गतिज ऊर्जा को व्यक्त करता है।
मुख्य बिंदु:
• दाब का संबंध केवल स्थानान्तरणीय गति से है।
• दीवार से संघट्ट रैखिक संवेग परिवर्तन पर आधारित है।
• घूर्णन ऊर्जा का दाब में सीधा योगदान नहीं होता।
आम गलतियाँ:
• \( E \) को कुल आंतरिक ऊर्जा (स्थानान्तरणीय + घूर्णी) मान लेना।
• दाब के मूल सिद्धांतों को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) अणुगति सिद्धांत के व्युत्पत्ति चरणों को याद रखें।
b) समझें कि घूर्णन गति दीवार के संवेग परिवर्तन को प्रभावित नहीं करती।
c) वैचारिक प्रश्नों को ध्यान से पढ़कर उत्तर दें।
Question Q7: किसी द्वि-परमाणुक अणु में किसी दिए गए ताप पर घूर्णी ऊर्जा
[A]. मैक्सवेल वितरण के अनुसार नहीं होती है।
[B]. प्रत्येक अणु के लिए समान होती है।
[C]. प्रत्येक अणु के लिए स्थानान्तरणीय गतिज ऊर्जा के बराबर होती है।
[D]. प्रत्येक अणु के लिए स्थानान्तरणीय गतिज ऊर्जा की \( \frac{2}{3} \) होती है।
Answer:
सही विकल्प [D] है।
व्याख्या: ऊर्जा के समविभाजन के नियम के अनुसार, प्रत्येक स्वतंत्रता कोटि से संबंधित औसत ऊर्जा प्रति अणु \( \frac{1}{2}k_BT \) होती है। द्विपरमाणुक अणु के लिए स्थानान्तरणीय स्वतंत्रता कोटियाँ 3 होती हैं (अतः स्थानान्तरणीय गतिज ऊर्जा \( E_{\text{trans}} = \frac{3}{2}k_BT \)) और घूर्णी स्वतंत्रता कोटियाँ 2 होती हैं (अतः घूर्णी ऊर्जा \( E_{\text{rot}} = \frac{2}{2}k_BT = k_BT \))। इस प्रकार घूर्णन ऊर्जा, स्थानान्तरणीय गतिज ऊर्जा की \( \frac{2}{3} \) होती है।
मुख्य बिंदु:
• स्वतंत्रता कोटियों की संख्या (स्थानान्तरणीय = 3, घूर्णी = 2)।
• ऊर्जा के समविभाजन का नियम।
• \( E_{\text{rot}} = \frac{2}{3} E_{\text{trans}} \) का संबंध।
आम गलतियाँ:
• सभी स्वतंत्रता कोटियों की ऊर्जा को समान मान लेना।
• द्विपरमाणुक अणु की स्वतंत्रता कोटियाँ गलत गिनना।
Exam Tips:
a) एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक और त्रिपरमाणुक अणुओं की स्वतंत्रता कोटियाँ याद रखें।
b) ऊर्जा के समविभाजन नियम का सूत्र स्पष्ट रखें।
c) अनुपातिक संबंधों को सीधे हल करना सीखें।
Question Q8: जब कोई गैस रुद्धोष्मत्तः संपीडित की जाती है, तो इसके ताप में वृद्धि होती है। अणुओं में पहले की तुलना में औसतन अधिक गतिज ऊर्जा होती है। गतिज ऊर्जा में वृद्धि का कारण है:
[A]. केवल दीवार के गतिक भाग से संघट्ट।
[B]. समस्त दीवार से संघट्ट।
[C]. आयतन के भीतर अणुओं की अपनी गति त्वरित होना।
[D]. अणुओं के बीच ऊर्जा का पुनः वितरण।
Answer:
सही विकल्प [A] है।
व्याख्या: जब पिस्टन को अंदर की ओर गति कराके गैस को रुद्धोष्म रूप से संपीडित किया जाता है, तो पिस्टन (दीवार का गतिक भाग) अणुओं की ओर गति करता है। जब अणु इस गतिशील दीवार से टकराते हैं, तो उनकी चाल और गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे गैस का तापमान बढ़ जाता है।
मुख्य बिंदु:
• गतिक दीवार (पिस्टन) से संघट्ट के कारण ऊर्जा में वृद्धि।
• रुद्धोष्म संपीडन में कार्य ऊर्जा में बदलता है।
• अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
आम गलतियाँ:
• इसे अणुओं के आपसी संघर्ष का परिणाम मान लेना।
• स्थिर दीवारों और गतिक दीवारों के प्रभाव को एक समझना।
Exam Tips:
a) रुद्धोष्म संपीडन की सूक्ष्मदर्शीय (microscopic) प्रक्रिया को समझें।
b) याद रखें कि गतिक पिस्टन अणुओं को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है।
c) विकल्पों में 'गतिक भाग' शब्द पर विशेष ध्यान दें।
Question 12.1: ऑक्सीजन के अणुओं के आयतन और STP पर इनके द्वारा घेरे गए कुल आयतन का अनुपात ज्ञात कीजिए। ऑक्सीजन के एक अणु का व्यास \( 3\text{ \AA} \) लीजिए।
Answer:
ऑक्सीजन अणु का व्यास, \( d = 3\text{ \AA} = 3 \times 10^{-8}\text{ cm} \)
त्रिज्या, \( r = \frac{d}{2} = \frac{3}{2}\text{ \AA} = 1.5 \times 10^{-8}\text{ cm} \)
STP पर 1 मोल ऑक्सीजन गैस का वास्तविक आयतन = \( 22400\text{ cm}^3 \)
ऑक्सीजन गैस की आणविक आयतन, \( V = \frac{4}{3} \pi r^3 N \)
जहाँ \( N \) आवोगाद्रो की संख्या = \( 6.023 \times 10^{23}\text{ अणु/मोल} \) है।
\( V = \frac{4}{3} \times 3.14 \times (1.5 \times 10^{-8})^3 \times 6.023 \times 10^{23} = 8.51\text{ cm}^3 \)
आणविक आयतन का ऑक्सीजन के वास्तविक आयतन से अनुपात:
\( = \frac{8.51}{22400} = 3.8 \times 10^{-4} \)
मुख्य बिंदु:
• गोले के आयतन का सूत्र \( \frac{4}{3}\pi r^3 \) का प्रयोग।
• आवोगाद्रो संख्या और 1 मोल गैस के आयतन (\( 22.4 \text{ लीटर} \)) का उपयोग।
• इकाइयों को एकसमान (cgs या SI) रखना।
आम गलतियाँ:
• व्यास को त्रिज्या मान लेना (\( r = d \) कर देना)।
• इकाइयों को मीटर से सेंटीमीटर में बदलते समय घात की गलती करना।
Exam Tips:
a) एंग्स्ट्रम (\( \text{ \AA} \)) को सेंटीमीटर या मीटर में बदलना अच्छी तरह अभ्यास करें।
b) गणना करते समय लघुगणक (Log) या सटीक कैलकुलेशन का प्रयोग करें।
c) अंतिम उत्तर में अनुपात निकालते समय इकाई नहीं बचती, यह ध्यान रखें।
Question 12.2: मोलर आयतन, STP पर किसी गैस (आदर्श) के 1 मोल द्वारा घेरा गया आयतन है। (STP: \( 1\text{ atm} \) दाब \( 0^\circ\text{C} \)) दर्शाइये कि यह \( 22.4 \) लीटर है।
Answer:
दाब (\( P \)), आयतन (\( V \)), और पूर्ण तापमान (\( T \)) से संबंधित आदर्श गैस समीकरण निम्नानुसार दिया गया है:
\( PV = nRT \)
जहाँ, \( R \) सार्वत्रिक गैस नियतांक है = \( 8.314\text{ J mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
\( n \) = मोरों की संख्या = \( 1 \)
\( T \) = मानक तापमान = \( 273\text{ K} \)
\( P \) = मानक दाब = \( 1\text{ atm} = 1.013 \times 10^5\text{ Nm}^{-2} \)
सूत्र में मान रखने पर:
\( V = \frac{nRT}{P} \)
\( V = \frac{1 \times 8.314 \times 273}{1.013 \times 10^5} \)
\( V = 0.0224\text{ m}^3 = 22.4\text{ लीटर} \)
इसलिए, STP पर गैस का मोलर आयतन \( 22.4 \) लीटर है।
मुख्य बिंदु:
• आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) का उपयोग।
• STP मानक मान: \( P = 1.013 \times 10^5\text{ Pa} \), \( T = 273\text{ K} \) ।
• \( 1\text{ m}^3 = 1000\text{ लीटर} \) का रूपांतरण।
आम गलतियाँ:
• दाब को केवल \( 1\text{ atm} \) लिखकर छोड़ देना और \( \text{N/m}^2 \) में परिवर्तित न करना।
• तापमान \( 0^\circ\text{C} \) को सेल्सियस में ही उपयोग करना (\( 273\text{ K} \) न जोड़ना)।
Exam Tips:
a) मानक तापमान और दाब के मान हमेशा याद रखें।
b) \( \text{m}^3 \) को लीटर में बदलने का कन्वर्जन याद रखें।
c) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 12.3: चित्र 12.8 में ऑक्सीजन के \( 1.00 \times 10^{-3}\text{ kg} \) द्रव्यमान के लिए \( PV/T \) एवं \( P \) में, दो अलग-अलग तापों पर ग्राफ दर्शाये गए हैं।
(a) बिंदुंकित रेखा क्या दर्शाती है?
(b) क्या सत्य है: \( T_1 > T_2 \) अथवा \( T_1 < T_2 \)?
(c) \( y \)-अक्ष पर जहाँ वक्र मिलते हैं वहाँ \( PV/T \) का मान क्या है?
(d) यदि हम ऐसे ही ग्राफ \( 1.00 \times 10^{-3}\text{ kg} \) हाइड्रोजन के लिए बनाएँ तो भी क्या उस बिंदु पर जहाँ वक्र \( y \)-अक्ष से मिलते है का मान यही होगा? यदि नहीं तो हाइड्रोजन के कितने द्रव्यमान के लिए \( PV/T \) का मान (कम दाब और उच्च ताप के क्षेत्र के वही होगा)? \( \text{H}_2 \) का अणु द्रव्यमान = \( 2.02\text{ u} \), \( \text{O}_2 \) का अणु द्रव्यमान = \( 32.0\text{ u} \), \( R = 8.31\text{ J mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \).
Answer:
(a) ग्राफ में बिंदुंकित रेखा गैस के आदर्श व्यवहार को दर्शाती है, अर्थात् \( \frac{PV}{T} \) अनुपात बराबर है \( \mu R \) (\( \mu \) मोरों की संख्या है और \( R \) सार्वत्रिक गैस नियतांक है) एक स्थिर गुण है। यह गैस के दबाव पर निर्भर नहीं है।
(b) दिए गए ग्राफ में बिंदुंकित आरेख आदर्श गैस को दर्शाता है। तापमान \( T_1 \) पर गैस का वक्र तापमान \( T_2 \) पर गैस के वक्र की तुलना में बिंदुंकित आरेख के अधिक निकट होता है। जब तापमान बढ़ता है तो एक वास्तविक गैस एक आदर्श गैस के व्यवहार की ओर अग्रसर होती है। इसलिए, दिए गए आरेख के लिए \( T_1 > T_2 \) सत्य है।
(c) \( PV/T \) अनुपात का मान, जहाँ दो वक्र मिलते हैं, वह \( \mu R \) है। ऐसा इसलिए क्योंकि आदर्श गैस समीकरण इस प्रकार दिया गया है:
\( PV = \mu RT \)
\( \frac{PV}{T} = \mu R \)
जहाँ, \( P = \text{दाब} \), \( T = \text{तापमान} \), \( V = \text{आयतन} \), \( \mu = \text{मोलों की संख्या} \), \( R = \text{सार्वत्रिक गैस नियतांक} \)。
ऑक्सीजन का आणविक द्रव्यमान = \( 32.0\text{ g} \)
ऑक्सीजन का द्रव्यमान = \( 1 \times 10^{-3}\text{ kg} = 1\text{ g} \)
\( R = 8.31\text{ J mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
\( \frac{PV}{T} = \frac{1}{32} \times 8.314 = 0.26\text{ J K}^{-1} \)
इसलिए, अनुपात \( PV/T \), का मान \( 0.26\text{ J K}^{-1} \) है। जहाँ वक्र \( y \)-अक्ष पर मिलते हैं।
(d) यदि हम \( 1.00 \times 10^{-3}\text{ kg} \) हाइड्रोजन के लिए समान आरेख प्राप्त करते हैं, तो हमें उस बिंदु पर जहाँ \( PV/T \) का मान एकसमान नहीं मिलेगा जहाँ वक्र \( y \)-अक्ष से मिलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हाइड्रोजन का आणविक द्रव्यमान (\( 2.02\text{ u} \)) ऑक्सीजन (\( 32.0\text{ u} \)) से भिन्न होता है। हमारे पास है:
\( \frac{PV}{T} = \mu R = \frac{m}{M} R \)
जहाँ \( M \) आणविक द्रव्यमान (\( M = 2.02\text{ u} \)), \( \frac{PV}{T} = 0.26\text{ J K}^{-1} \) (स्थिर तापमान पर) जहाँ, \( \mu = \frac{m}{M} \) तथा \( m = \text{H}_2 \) का द्रव्यमान
\( m = \frac{PV}{T} \frac{M}{R} = \frac{0.26 \times 2.02}{8.31} = 6.3 \times 10^{-2}\text{ g} = 6.3 \times 10^{-5}\text{ kg} \)
अतः \( 6.3 \times 10^{-5}\text{ kg } \text{H}_2 \) से \( PV/T \) का समान मान प्राप्त होगा।
मुख्य बिंदु:
• आदर्श गैस आरेख \( \frac{PV}{T} \) दाब से स्वतंत्र और नियत \( \mu R \) होता है।
• उच्च तापमान पर वास्तविक गैसें आदर्श व्यवहार दर्शाती हैं (\( T_1 > T_2 \))।
• \( \frac{PV}{T} \) का मान मोलों की संख्या पर निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• तापमान के प्रभाव को उल्टा समझ लेना (\( T_1 < T_2 \) मान लेना)।
• \( \mu \) (मोल) की गणना में द्रव्यमान और आणविक द्रव्यमान का अनुपात गलत रखना।
Exam Tips:
a) ग्राफ आधारित प्रश्नों में आदर्श रेखा और वास्तविक रेखा के अंतर को समझें।
b) \( \frac{PV}{T} = \mu R \) संबंध का उपयोग करके मान निकालें।
c) इकाइयों के रूपांतरण (\( \text{kg} \) से \( \text{g} \)) में सावधानी बरतें।
Question 12.4: एक ऑक्सीजन सिलेंडर जिसका आयतन \( 30 \) लीटर है, में ऑक्सीजन का आरंभिक दाब \( 15\text{ atm} \) एवं ताप \( 27^\circ\text{C} \) इसमें से कुछ गैस निकाल लेने के बाद प्रमापी (गेज) दाब गिर कर \( 11\text{ atm} \) एवं ताप गिर कर \( 17^\circ\text{C} \) हो जाता है। ज्ञात कीजिए कि सिलेंडर से ऑक्सीजन की कितनी मात्रा निकाली गई है? (\( R = 8.31\text{ J mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \), ऑक्सीजन का अणु द्रव्यमान = \( 32\text{ u} \)).
Answer:
ऑक्सीजन का आयतन, \( V_1 = 30\text{ लीटर} = 30 \times 10^{-3}\text{ m}^3 \)
प्रमापी (गेज) दाब, \( P_1 = 15\text{ atm} = 15 \times 1.013 \times 10^5\text{ Pa} \)
तापमान, \( T_1 = 27^\circ\text{C} = 27 + 273 = 300\text{ K} \)
सार्वत्रिक गैस नियतांक, \( R = 8.31\text{ J mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
माना सिलेंडर में ऑक्सीजन गैस के मोलों की प्रारंभिक संख्या \( n_1 \) है।
गैस समीकरण के अनुसार: \( P_1V_1 = n_1RT_1 \)
\( n_1 = \frac{P_1V_1}{RT_1} \)
\( n_1 = \frac{15.195 \times 10^5 \times 30 \times 10^{-3}}{8.314 \times 300} = 18.276 \text{ मोल} \)
किन्तु, \( n_1 = \frac{m_1}{M} \)
जहाँ, \( m_1 \) = ऑक्सीजन का प्रारंभिक द्रव्यमान, \( M \) = ऑक्सीजन का आणविक द्रव्यमान = \( 32\text{ g} \)
\( m_1 = n_1M = 18.276 \times 32 = 584.84\text{ g} \)
सिलेंडर से कुछ ऑक्सीजन निकालने के बाद, दाब, दाब और तापमान कम हो जाता है:
आयतन, \( V_2 = 30\text{ लीटर} = 30 \times 10^{-3}\text{ m}^3 \)
प्रमापी (गेज) दाब, \( P_2 = 11\text{ atm} = 11 \times 1.013 \times 10^5\text{ Pa} \)
तापमान, \( T_2 = 17^\circ\text{C} = 290\text{ K} \)
मान लीजिए कि सिलेंडर में शेष ऑक्सीजन के मोलों की संख्या \( n_2 \) है।
गैस समीकरण के अनुसार: \( P_2V_2 = n_2RT_2 \)
\( n_2 = \frac{P_2V_2}{RT_2} \)
\( n_2 = \frac{11.143 \times 10^5 \times 30 \times 10^{-3}}{8.314 \times 290} = 13.86 \text{ मोल} \)
किन्तु, \( n_2 = \frac{m_2}{M} \), जहाँ, \( m_2 \) शेष ऑक्सीजन का द्रव्यमान है।
\( m_2 = n_2M = 13.86 \times 32 = 453.1\text{ g} \)
सिलेंडर से निकाले गए ऑक्सीजन का द्रव्यमान निम्न संबंध द्वारा दिया जाता है:
सिलेंडर में ऑक्सीजन का प्रारंभिक द्रव्यमान - सिलेंडर में ऑक्सीजन का अंतिम द्रव्यमान
\( = m_1 - m_2 = 584.84\text{ g} - 453.1\text{ g} = 131.74\text{ g} = 0.131\text{ kg} \)
अतः \( 0.131 \) किग्रा ऑक्सीजन सिलेंडर से बाहर निकाली जाती है।
मुख्य बिंदु:
• प्रारंभिक और अंतिम अवस्था के लिए आदर्श गैस समीकरण का उपयोग।
• तापमान को केल्विन (\( \text{K} \)) में बदलना।
• मोलों की संख्या से द्रव्यमान की गणना करना।
आम गलतियाँ:
• गेज दाब को निरपेक्ष दाब (Absolute pressure) में बदलते समय वायुमंडलीय दाब को जोड़ना भूल जाना (नोट: यहाँ गेज दाब दिया है तो सटीक गणना के लिए \( P + P_a \) का ध्यान रखें)।
• तापमान सेल्सियस में ही रखना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों को दो भागों (प्रारंभिक और अंतिम स्थिति) में हल करें।
b) द्रव्यमान निकालने के लिए \( m = n \times M \) सूत्र का प्रयोग करें।
c) इकाई रूपांतरण (\( \text{atm} \) से \( \text{Pa} \), लीटर से \( \text{m}^3 \)) सावधानी से करें।
Question 12.5: वायु का एक बुलबुला, जिसका आयतन \( 1.0\text{ cm}^3 \) है, \( 40\text{ m} \) गहरी झील की तली से जहाँ ताप \( 12^\circ\text{C} \) है, उठकर ऊपर पृष्ठ पर आता है जहाँ ताप \( 35^\circ\text{C} \) है। अब इसका आयतन क्या होगा?
Answer:
हवा के बुलबुले का आयतन, \( V_1 = 1.0\text{ cm}^3 = 1.0 \times 10^{-6}\text{ m}^3 \)
बुलबुले द्वारा प्राप्त ऊँचाई है, \( d = 40\text{ m} \)
40 मीटर की गहराई पर तापमान, \( T_1 = 12^\circ\text{C} = 285\text{ K} \)
झील की सतह पर तापमान, \( T_2 = 35^\circ\text{C} = 308\text{ K} \)
झील की सतह पर दाब \( P_2 = 1\text{ atm} = 1 \times 1.013 \times 10^5\text{ Pa} \)
40 मीटर की गहराई पर दाब \( P_1 = 1\text{ atm} + \text{d} \rho \text{g} \)
जहाँ, पानी का घनत्व है, \( \rho = 10^3\text{ kg/m}^3 \)
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है, \( g = 9.8\text{ m/s}^2 \)
\( P_1 = 1.013 \times 10^5 + 40 \times 10^3 \times 9.8 = 493300\text{ Pa} \)
इसलिए, \( \frac{P_1V_1}{T_1} = \frac{P_2V_2}{T_2} \), जहाँ, \( V_2 \) सतह पर पहुँचने पर हवा के बुलबुले का आयतन है।
\( V_2 = \frac{P_1V_1T_2}{T_1P_2} \)
\( V_2 = \frac{(493300)(1.0 \times 10^{-6})308}{285 \times 1.013 \times 10^5} = 5.263 \times 10^{-6}\text{ m}^3 \text{ or } 5.263\text{ cm}^3 \)
इसलिए, जब हवा का बुलबुला सतह पर पहुंचता है, तो इसका आयतन \( 5.263\text{ cm}^3 \) हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• झील की तली पर कुल दाब = वायुमंडलीय दाब + जलस्तंभ का दाब (\( P_1 = P_0 + h\rho g \))।
• संयुक्त गैस नियम \( \frac{P_1V_1}{T_1} = \frac{P_2V_2}{T_2} \) का प्रयोग।
• तापमान का सेल्सियस से केल्विन में परिवर्तन।
आम गलतियाँ:
• तली पर केवल जलस्तंभ का दाब लेना, वायुमंडलीय दाब को छोड़ देना।
• तापमान को केल्विन में न बदलना।
Exam Tips:
a) तरल के भीतर गहराई पर कुल दाब निकालते समय \( P_0 + h\rho g \) का सूत्र प्रयोग करें।
b) दोनों अवस्थाओं के लिए संयुक्त गैस समीकरण लगाएं।
c) गणना में घातों का विशेष ध्यान रखें।
Question 12.6: एक कमरे में, जिसकी धारिता \( 25.0\text{ m}^3 \) है, \( 27^\circ\text{C} \) ताप और \( 1\text{ atm} \) दाब पर, वायु के कुल अणुओं (जिनमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, जलवाष्प और अन्य सभी अवयवों के कण सम्मिलित हैं) की संख्या ज्ञात कीजिए।
Answer:
कमरे का आयतन, \( V = 25.0\text{ m}^3 \)
कमरे का तापमान, \( T = 27^\circ\text{C} = 300\text{ K} \)
कमरे में दाब, \( P = 1\text{ atm} = 1 \times 1.013 \times 10^5\text{ Pa} \)
दाब (\( P \)), आयतन (\( V \)), और पूर्ण तापमान (\( T \)) से संबंधित आदर्श गैस समीकरण को निम्न रूप में लिखा जा सकता है:
\( PV = k_BNT \)
जहाँ, \( k_B \) बोल्ट्जमैन स्थिरांक है = \( 1.38 \times 10^{-23}\text{ m}^2\text{ kg s}^{-2}\text{ K}^{-1} \)
\( N \) कमरे में हवा के अणुओं की संख्या है।
\( N = \frac{PV}{k_BT} \)
\( N = \frac{1.013 \times 10^5 \times 25}{1.38 \times 10^{-23} \times 300} = 6.11 \times 10^{26} \)
अतः दिए गए कमरे में वायु के अणुओं की कुल संख्या \( 6.11 \times 10^{26} \) है।
मुख्य बिंदु:
• आदर्श गैस समीकरण का आणविक रूप \( PV = N k_B T \) का उपयोग।
• बोल्ट्जमैन स्थिरांक \( k_B \) का मान।
• तापमान को केल्विन में बदलना।
आम गलतियाँ:
• आवोगाद्रो संख्या और बोल्ट्जमैन स्थिरांक के प्रयोग में भ्रमित होना।
• इकाइयों को SI पद्धति में न रखना।
Exam Tips:
a) अणुओं की संख्या निकालने के लिए \( N = \frac{PV}{k_B T} \) या \( n \times N_A \) दोनों विधियों का अभ्यास करें।
b) मानों को प्रतिस्थापित करते समय घातों की गणना सावधानी से करें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रकहीन संख्या (अणुओं की संख्या) सही घातांक के साथ लिखें।
Question 12.7: हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा का आकलन कीजिए
(i) कमरे के ताप (\( 27^\circ\text{C} \)), पर।
(ii) सूर्य के पृष्ठीय ताप (\( 6000\text{ K} \)), पर।
(iii) लाख केल्विन ताप (तारे के क्रोड का प्रारूपिक ताप) पर।
Answer:
(i) कमरे के तापमान पर, \( T = 27^\circ\text{C} = 300\text{ K} \) पर हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा = \( \frac{3}{2}k_BT \)
जहाँ \( k \) बोल्ट्जमैन स्थिरांक है = \( 1.38 \times 10^{-23}\text{ m}^2\text{ kg s}^{-2}\text{ K}^{-1} \)
\( \frac{3}{2}kT = \frac{3}{2} \times 1.38 \times 10^{-23} \times 300 = 6.21 \times 10^{-21}\text{ J} \)
इसलिए, कमरे के तापमान (\( 27^\circ\text{C} \)) पर हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा \( 6.21 \times 10^{-21}\text{ J} \) है।
(ii) सूर्य की सतह पर, \( T = 6000\text{ K} \)
औसत तापीय ऊर्जा = \( \frac{3}{2}kT = \frac{3}{2} \times 1.38 \times 10^{-23} \times 6000 = 1.241 \times 10^{-19}\text{ J} \)
अतः सूर्य की सतह पर एक हीलियम परमाणु की औसत ऊष्मीय ऊर्जा \( 1.241 \times 10^{-19}\text{ J} \) है।
(iii) तापमान, \( T = 10^7\text{ K} \) पर
औसत तापीय ऊर्जा = \( \frac{3}{2}kT = \frac{3}{2} \times 1.38 \times 10^{-23} \times 10^7 = 2.07 \times 10^{-16}\text{ J} \)
इसलिए, एक तारे के क्रोड में एक हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा \( 2.07 \times 10^{-16}\text{ J} \) है।
मुख्य बिंदु:
• तापीय ऊर्जा का सूत्र \( E = \frac{3}{2}k_BT \) (एकपरमाणुक गैस के लिए)।
• तापमान प्रत्यक्ष रूप से केल्विन में दिया गया हो या सेल्सियस से बदलना हो।
• बोल्ट्जमैन स्थिरांक \( k_B \) का सही उपयोग।
आम गलतियाँ:
• स्वतंत्रता कोटि 3 की जगह द्विपरमाणुक मान लेना (हीलियम एकपरमाणुक है, अतः कोटि 3 होगी)।
• तापमान को केल्विन में न बदलना।
Exam Tips:
a) याद रखें कि औसत तापीय ऊर्जा केवल तापमान पर निर्भर करती है, अणु के द्रव्यमान पर नहीं।
b) सूत्र \( \frac{3}{2}k_BT \) को अच्छी तरह याद रखें।
c) घातांकों की गणना ध्यान से करें।
Question 12.8: समान धारिता के तीन बर्तन में एक ही ताप और दाब पर गैसें भरी हैं। पहले बर्तन में नियॉन (एकपरमाणुक) गैस है, दूसरे में क्लोरीन (द्विपरमाणुक) गैस है और तीसरे में यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (बहुपरमाणुक) गैस है। क्या तीनों बर्तनों में गैसों के संगत अणुओं की संख्या समान है? क्या तीनों प्रकरण में अणुओं की \( v_{\text{rms}} \) (वर्ग माध्य मूल चाल) समान है?
Answer:
हाँ, सभी में संबंधित अणुओं की संख्या समान है।
नहीं, निर्वात की वर्ग माध्य मूल चाल सबसे अधिक है।
चूँकि तीनों जहाजों की क्षमता समान है, इसलिए उनका आयतन भी समान है।
इसलिए, प्रत्येक गैस का दाब, आयतन और तापमान समान होगा।
आवोगाद्रो के नियम के अनुसार, तीन जहाजों में संबंधित अणुओं की संख्या समान होगी। यह संख्या आवोगाद्रो की संख्या के बराबर है:
\( N = 6.023 \times 10^{23} \)
द्रव्यमान \( m \) और तापमान \( T \) की गैस की वर्ग माध्य मूल चाल (\( v_{\text{rms}} \)), निम्न संबंध द्वारा दी गई है: \( v_{\text{rms}} = \sqrt{\frac{3kT}{m}} \)
जहाँ, \( k \) बोल्ट्जमैन स्थिरांक है दी गई गैसों के लिए, \( k \) और \( T \) स्थिर हैं।
इसलिए \( v_{\text{rms}} \) केवल अणुओं के द्रव्यमान पर निर्भर करता है, अर्थात् \( v_{\text{rms}} \propto \frac{1}{\sqrt{m}} \)
इसलिए, तीनों मामलों में अणुओं की वर्ग माध्य मूल चाल समान नहीं है। नियॉन, क्लोरीन और यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड में नियॉन का द्रव्यमान सबसे कम होता है।
इसलिए, दी गई गैसों में नियॉन की वर्ग माध्य मूल चाल सबसे अधिक है।
मुख्य बिंदु:
• आवोगाद्रो का नियम: समान P, V, T पर समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।
• वर्ग माध्य मूल चाल \( v_{\text{rms}} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \) द्रव्यमान पर निर्भर करती है।
• कम आणविक द्रव्यमान वाली गैस की \( v_{\text{rms}} \) अधिक होती है।
आम गलतियाँ:
• सभी गैसों की \( v_{\text{rms}} \) को समान मान लेना यह सोचकर कि तापमान और दाब समान हैं।
• आणविक द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती संबंध को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) आवोगाद्रो के नियम की शर्तें (समान P, V, T) अच्छी तरह समझें।
b) \( v_{\text{rms}} \) का द्रव्यमान के साथ संबंध याद रखें।
c) सैद्धांतिक प्रश्नों के स्पष्ट और तार्किक उत्तर दें।
Question 12.9: किस ताप पर आर्गन गैस सिलेंडर में अणुओं की \( v_{\text{rms}} \), \(-20^\circ\text{C}\) पर हीलियम गैस परमाणु की \( v_{\text{rms}} \) के बराबर होगी? (\( \text{Ar} \) का परमाणु द्रव्यमान = \( 39.9\text{ u} \), एवं हीलियम का परमाणु द्रव्यमान \( He = 4.0\text{ u} \))
Answer:
हीलियम परमाणु का तापमान, \( T_{\text{He}} = -20^\circ\text{C} = 253\text{ K} \)
आर्गन का परमाणु द्रव्यमान, \( M_{\text{Ar}} = 39.9\text{ u} \)
हीलियम का परमाणु द्रव्यमान, \( M_{\text{He}} = 4.0\text{ u} \)
माना, \( (v_{\text{rms}})_{\text{Ar}} \) आर्गन की \( \text{rms} \) गति है।
माना, \( (v_{\text{rms}})_{\text{He}} \) हीलियम की \( \text{rms} \) गति है।
आर्गन की \( \text{rms} \) गति निम्न द्वारा दी जाती है:
\( (v_{\text{rms}})_{\text{Ar}} = \sqrt{\frac{3RT_{\text{Ar}}}{M_{\text{Ar}}}} \dots(i) \)
जहाँ, \( R \) सार्वत्रिक गैस नियतांक है।
\( T_{\text{Ar}} \) आर्गन गैस का तापमान है।
हीलियम की \( \text{rms} \) गति निम्न द्वारा दी जाती है:
\( (v_{\text{rms}})_{\text{He}} = \sqrt{\frac{3RT_{\text{He}}}{M_{\text{He}}}} \dots(ii) \)
यह दिया गया है कि \( (v_{\text{rms}})_{\text{Ar}} = (v_{\text{rms}})_{\text{He}} \)
\( \sqrt{\frac{3RT_{\text{Ar}}}{M_{\text{Ar}}}} = \sqrt{\frac{3RT_{\text{He}}}{M_{\text{He}}}} \)
\( \frac{T_{\text{Ar}}}{M_{\text{Ar}}} = \frac{T_{\text{He}}}{M_{\text{He}}} \)
\( T_{\text{Ar}} = \frac{T_{\text{He}}}{M_{\text{He}}} \times M_{\text{Ar}} = \frac{253}{4} \times 39.9 = 2523.675 = 2.52 \times 10^3\text{ K} \)
अतः आर्गन परमाणु का तापमान \( 2.52 \times 10^3\text{ K} \) है।
मुख्य बिंदु:
• वर्ग माध्य मूल चाल का सूत्र \( v_{\text{rms}} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \) का प्रयोग।
• दोनों गैसों की \( v_{\text{rms}} \) को बराबर रखना।
• तापमान और आणविक द्रव्यमान का आनुपातिक संबंध \( T \propto M \) ।
आम गलतियाँ:
• तापमान को सेल्सियस में ही रखकर गणना करना (केल्विन में बदलना अनिवार्य है)।
• आणविक द्रव्यमान के अनुपात में गलती करना।
Exam Tips:
a) तुलना वाले प्रश्नों में दोनों समीकरणों को आमने-सामने रखकर वर्गमूल हटाएं।
b) \( \text{K} \) में तापमान की गणना सावधानी से करें।
c) परिणाम को वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) में व्यक्त करें।
Question 12.10: नाइट्रोजन गैस के एक सिलेंडर में \( 2.0\text{ atm} \) दाब एवं \( 17^\circ\text{C} \) ताप पर, नाइट्रोजन अणुओं के माध्य मुक्त पथ एवं संघट्ट आवृत्ति का आकलन कीजिए। नाइट्रोजन अणु की त्रिज्या लगभग \( 1.0\text{ \AA} \) लीजिए। [संघट्ट - काल की तुलना अणुओं द्वारा दो संघट्टों के बीच स्वतंत्रतापूर्वक चलने में लगे समय से कीजिए।] (नाइट्रोजन का आणविक द्रव्यमान = \( 28.0\text{ u} \))
Answer:
माध्य मुक्त पथ = \( 1.11 \times 10^{-7}\text{ m} \)
संघट्ट आवृत्ति = \( 4.58 \times 10^9\text{ s}^{-1} \)
क्रमिक संघट्ट का समय \( \approx 500 \times \) (संघट्ट - काल)
नाइट्रोजन युक्त सिलेंडर के अंदर दाब, \( P = 2.0\text{ atm} = 2.026 \times 10^5\text{ Pa} \)
सिलेंडर के अंदर का तापमान, \( T = 17^\circ\text{C} = 290\text{ K} \)
नाइट्रोजन अणु की त्रिज्या, \( r = 1.0\text{ \AA} = 1 \times 10^{-10}\text{ m} \)
व्यास, \( d = 2 \times 1 \times 10^{10} = 2 \times 10^{10}\text{ m} \)
नाइट्रोजन का आणविक द्रव्यमान, \( M = 28.0\text{ g} = 28 \times 10^{-3}\text{ kg} \)
नाइट्रोजन की वर्ग माध्य मूल चाल \( v_{\text{rms}} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \)
जहाँ, सार्वत्रिक गैस नियतांक, \( R = 8.314\text{ j mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
\( v_{\text{rms}} = \sqrt{\frac{3 \times 8.314 \times 290}{28 \times 10^{-3}}} = 508.26\text{ m/s} \)
जहाँ, \( k \) बोल्ट्जमैन स्थिरांक है = \( 1.38 \times 10^{-23}\text{ kg m}^2\text{ s}^{-2}\text{ K}^{-1} \)
\( l = \frac{1}{\sqrt{2} \times 3.14 \times (2 \times 10^{-10})^2 \times 2.026 \times 10^5} = 1.11 \times 10^{-7}\text{ m} \)
संघट्ट आवृत्ति = \( \frac{v_{\text{rms}}}{l} = \frac{508.26}{1.11 \times 10^{-7}} = 4.58 \times 10^9\text{ S}^{-1} \)
संघट्ट -काल इस प्रकार दिया गया है:
\( T = \frac{d}{v_{\text{rms}}} = \frac{2 \times 10^{-10}}{508.26} = 3.93 \times 10^{-13}\text{ s} \)
क्रमिक संघट्ट का समय:
\( T' = \frac{l}{v_{\text{rms}}} = \frac{1.11 \times 10^{-7}}{508.267\text{ m/s}} = 2.18 \times 10^{-10}\text{ s} \)
\( \frac{T'}{T} = \frac{2.18 \times 10^{-10}}{3.93 \times 10^{-13}} = 500 \)
इसलिए, क्रमिक संपतों के बीच लिया गया समय एक संघट्ट में लगने वाले समय का \( 500 \) गुना है।
मुख्य बिंदु:
• माध्य मुक्त पथ का सूत्र \( l = \frac{1}{\sqrt{2}n\pi d^2} \) का उपयोग।
• संघट्ट आवृत्ति \( \nu = \frac{v_{\text{rms}}}{l} \) ।
• संघट्ट काल और दो संघट्टों के बीच के समय की तुलना।
आम गलतियाँ:
• त्रिज्या और व्यास के मान में प्रतिस्थापन की गलती करना।
• जटिल गणनाओं में घातांकों का सही प्रबंधन न करना।
Exam Tips:
a) माध्य मुक्त पथ, \( v_{\text{rms}} \) और संघट्ट आवृत्ति के सूत्रों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखें।
b) प्रत्येक चरण की गणना अलग-अलग लिखकर करें ताकि गलती न हो।
c) इकाइयों को एसआई (SI) पद्धति में रखना न भूलें।
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