Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 ऊष्मागतिकी
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Question Q1: यदि कोई सामान्य व्यक्ति मंधर गति से चलता है तो वह \( 14.5 \times 10^3 \, \text{cal/min} \) ऊष्मा उत्पन्न करता है। यह ऊष्मा पसीने के वाष्पन से शरीर से निकल जाती है। (यह मानते हुए कि \( 1 \, \text{kg} \) पसीने के वाष्पन के लिए \( 580 \times 10^3 \, \text{cal} \) चाहिए) तब प्रति मिनट वाष्पि त पसीने का परिमाण है:
Answer:
उत्पन्न कुल ऊष्मा प्रति मिनट \( Q = 14.5 \times 10^3 \, \text{cal/min} \)
\( 1 \, \text{kg} \) पसीने के वाष्पन के लिए आवश्यक ऊष्मा \( L = 580 \times 10^3 \, \text{cal} \)
प्रति मिनट वाष्पि त पसीने का परिमाण \( m = \frac{Q}{L} \)
\( m = \frac{14.5 \times 10^3}{580 \times 10^3} \)
\( m = \frac{14.5}{580} = 0.25 \, \text{kg} \)
मुख्य बिंदु:
• शरीर द्वारा उत्पन्न ऊष्मा और पसीने के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा का उपयोग किया जाता है।
• यह प्रश्न ऊष्मागतिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर आधारित है।
• यहाँ ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन होता है।
आम गलतियाँ:
• घातों (\( 10^3 \)) को सही ढंग से न काटना।
• मात्रकों (units) में भ्रमित होना।
• भाग देने में गणितीय त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) गणना करते समय घातों को पहले ही सरल कर लें।
b) अंतिम उत्तर के साथ उचित मात्रक (\( \text{kg} \)) अवश्य लिखें।
c) प्रश्न में दिए गए मानों को सावधानीपूर्वक सूत्र में रखें।
Question Q2: किसी दिए गए आयतन और तापमान पर, गैस का दबाव
[A]. गैस के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती भिन्न होता है।
[B]. गैस के द्रव्यमान के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती भिन्न होता है।
[C]. गैस के द्रव्यमान के रूप में रैखिक रूप से भिन्न होता है।
[D]. गैस के द्रव्यमान से स्वतंत्र है।
Answer:
आदर्श गैस समीकरण के अनुसार, \( PV = nRT \)
जहाँ \( n \) मोलों की संख्या है और \( n = \frac{m}{M} \) (\( m \) = द्रव्यमान, \( M \) = मोलर द्रव्यमान)
अतः समीकरण इस प्रकार लिखी जा सकती है:
\( PV = \frac{m}{M} RT \)
\( P = \left(\frac{RT}{VM}\right) m \)
यहाँ आयतन \( V \) और तापमान \( T \) नियत हैं, इसलिए दबाव \( P \), गैस के द्रव्यमान \( m \) के सीधे समानुपातिक (रैखिक रूप से भिन्न) होता है।
सही विकल्प [C] है।
मुख्य बिंदु:
• आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) का उपयोग।
• मोलों की संख्या द्रव्यमान के समानुपाती होती है।
• नियत आयतन और ताप पर दाब द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• इसे बॉयल के नियम से भ्रमित कर देना जहाँ द्रव्यमान नियत होता है।
• दाब को द्रव्यमान से स्वतंत्र मान लेना।
Exam Tips:
a) आदर्श गैस समीकरण को लिखकर विभिन्न चरों के बीच संबंध स्थापित करें।
b) विकल्पों को ध्यान से पढ़कर सही आनुपातिक संबंध पहचानें।
Question Q3: ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम कहता है कि
[A]. ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है
[C]. निकाय का तापमान होता है
[D]. निकाय काम कर सकता है
Answer:
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है।
यह नियम बताता है कि ऊष्मा ऊर्जा का ही एक अन्य रूप है जिसे कार्य में या कार्य को ऊष्मा में बदला जा सकता है।
सही विकल्प [A] है।
मुख्य बिंदु:
• ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का प्रतिरूप है।
• \( \Delta Q = \Delta U + \Delta W \) इस नियम का गणितीय रूप है।
• ऊष्मा और कार्य दोनों ऊर्जा के रूप हैं।
आम गलतियाँ:
• इसे केवल तापमान या कार्य तक सीमित समझ लेना।
• ऊर्जा संरक्षण के मूल सिद्धांत को भूल जाना।
Exam Tips:
a) ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम को ऊर्जा संरक्षण के रूप में याद रखें।
b) इसके गणितीय समीकरण को हमेशा साथ में ध्यान रखें।
Question Q4: निम्नलिखित में से कौन सा मापदंड पदार्थ की ऊष्मागतिकी स्थिति की विशेषता नहीं है?
Answer:
ऊष्मागतिकी स्थिति (state) को व्यक्त करने के लिए दाब, आयतन और तापमान जैसे चरों का उपयोग किया जाता है जिन्हें अवस्था चर (state variables) कहते हैं।
कार्य (work) किसी निकाय की ऊष्मागतिकी स्थिति की विशेषता नहीं है, बल्कि यह एक प्रक्रम चर (path variable) है जो अवस्था परिवर्तन के दौरान किया जाता है।
अतः सही उत्तर 'कार्य' है।
मुख्य बिंदु:
• अवस्था चर (State variables) निकाय की स्थिति तय करते हैं।
• प्रक्रम चर (Path variables) जैसे कार्य और ऊष्मा मार्ग पर निर्भर करते हैं।
• दाब, आयतन, ताप और आंतरिक ऊर्जा अवस्था चर हैं।
आम गलतियाँ:
• अवस्था चरों और प्रक्रम चरों में अंतर न समझ पाना।
• कार्य को निकाय की संपत्ति मान लेना।
Exam Tips:
a) अवस्था चरों और प्रक्रम चरों की सूची याद रखें।
b) अंतर स्पष्ट करने के लिए प्रक्रम पर निर्भरता को समझें।
Question Q5: नीचे वर्णन किए गए प्रक्रमों में कौन-से अनुत्क्रमणीय नहीं है?
[A]. हथौड़े से पीटते समय लोहे की छड़ के ताप में वृद्धि होना।
[B]. \( T_1 \) ताप पर लघु पात्र में भरी किसी गैस को उच्च ताप \( T_2 \) के बड़े पात्रें के संपर्क में लाते हैं जिससे गैस के ताप में वृद्धि हो जाती है।
[C]. घर्षणहीन पिस्टन लगे सिलेंडर में भरी किसी आदर्श गैस की स्थैतिककल्प समतापीय आयतन वृद्धि।
[D]. रुद्धोष्म दीवार की पिस्टन-सिलेंडर व्यवस्था में कोई आदर्श गैस भरी है। पिस्टन पर कोई भार \( W \) रखने के परिणामस्वरूप गैस संपीड़ित होती है।
Answer:
स्थैतिककल्प (Quasistatic) प्रक्रम अत्यंत धीमी गति से होने वाला प्रक्रम होता है जिसमें निकाय प्रत्येक क्षण साम्यावस्था में रहता है।
यह प्रक्रम उत्क्रमणीय (reversible) होता है।
दिए गए विकल्पों में घर्षणहीन पिस्टन के साथ की गई स्थैतिककल्प समतापीय आयतन वृद्धि एक उत्क्रमणीय प्रक्रम है, अतः यह अनुत्क्रमणीय नहीं है।
सही विकल्प [C] है।
मुख्य बिंदु:
• स्थैतिककल्प प्रक्रम अत्यंत धीमी गति से होते हैं।
• आदर्श स्थैतिककल्प प्रक्रम उत्क्रमणीय होते हैं।
• घर्षण और तेजी से होने वाले परिवर्तन अनुत्क्रमणीय होते हैं।
आम गलतियाँ:
• स्थैतिककल्प और वास्तविक प्रक्रमों में भ्रमित होना।
• सभी प्रक्रमों को अनुत्क्रमणीय मान लेना।
Exam Tips:
a) उत्क्रमणीय और अनुत्क्रमणीय प्रक्रमों के उदाहरण याद रखें।
b) 'स्थैतिककल्प' शब्द को उत्क्रमणीयता की पहचान मानें।
Question Q6: एयर कंडीशनर किस सिद्धांत पर आधारित है
[B]. ऊष्मागतिकी का पहला कानून
Answer:
एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर की कार्यप्रणाली ऊष्मागतिकी के सिद्धांतों, विशेष रूप से रेफ्रिजरेटर के चक्र और ऊर्जा संरक्षण (पहला कानून) पर आधारित होती है।
यह कमरे से ऊष्मा को अवशोषित करके बाहर स्थानांतरित करता है।
सही विकल्प [B] है।
मुख्य बिंदु:
• एयर कंडीशनर रेफ्रिजरेटर के सिद्धांत पर काम करता है।
• यह प्रशीतन चक्र (refrigeration cycle) का उपयोग करता है।
• यह ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है।
आम गलतियाँ:
• इसे केवल यांत्रिक यंत्र समझना और ऊष्मीय नियमों को न जोड़ना।
Exam Tips:
a) रेफ्रिजरेटर और एसी के कार्य सिद्धांत को समझें।
b) ऊष्मा के स्थानांतर की दिशा को ध्यान में रखें।
Question Q7: कोई आदर्श गैस अपनी किसी आरंभिक अवस्था \( i \) से अंतिम अवस्था \( f \) तक समतापีย प्रक्रम करती है। सही विकल्प का चयन कीजिए:
Answer:
समतापीय प्रक्रम (Isothermal process) में तापमान नियत रहता है (\( \Delta T = 0 \))।
चूंकि आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा केवल तापमान पर निर्भर करती है, इसलिए आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन शून्य होता है:
\( \Delta U = 0 \)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से:
\( \Delta Q = \Delta U + \Delta W \)
चूँकि \( \Delta U = 0 \), इसलिए:
\( \Delta Q = \Delta W \)
मुख्य बिंदु:
• समतापीय प्रक्रम में \( T = \text{नियत} \)
• आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन \( \Delta U = 0 \)
• दी गई ऊष्मा पूर्ण रूप से कार्य में बदलती है (\( \Delta Q = \Delta W \))
आम गलतियाँ:
• समतापीय प्रक्रम में \( \Delta Q = 0 \) मान लेना (जो कि रुद्धोष्म प्रक्रम में होता है)।
Exam Tips:
a) विभिन्न प्रक्रमों (समतापीय, रुद्धोष्म, समआयतनिक) के लिए \( \Delta U \) और \( \Delta Q \) के मान याद रखें।
b) समीकरण \( \Delta Q = \Delta U + \Delta W \) का सही प्रयोग करें।
Question Q8: एक ऊष्मागतिकी प्रणाली की स्थिति द्वारा दर्शाया गया है:
[A]. दबाव, मात्रा और तापमान
Answer:
किसी ऊष्मागतिकी प्रणाली (thermodynamic system) की अवस्था को पूरी तरह से परिभाषित करने के लिए उसके स्थूल चरों जैसे दाब (\( P \)), आयतन (\( V \)) और तापमान (\( T \)) की आवश्यकता होती है।
सही विकल्प [A] है।
मुख्य बिंदु:
• दाब, आयतन और तापमान अवस्था चर हैं।
• ये तीनों चर आदर्श गैस समीकरण से आपस में संबंधित हैं।
• किसी निकाय की स्थिति बताने के लिए इनकी आवश्यकता होती है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक या दो चरों को पर्याप्त मान लेना।
Exam Tips:
a) अवस्था चरों के त्रय (\( P, V, T \)) को अच्छी तरह याद रखें।
Question 11.1: कोई गीज़र \( 3.0 \) लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को \( 27^\circ\text{C} \) से \( 77^\circ\text{C} \) तक गर्म करता है। यदि गीज़र का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंधन की दहन-ऊष्मा \( 4.0 \times 10^4 \, \text{J/g} \) है।
Answer:
जल के बहने की दर \( \frac{m}{t} = 3.0 \, \text{litre/min} = 3000 \, \text{g/min} \)
प्रारंभिक तापमान \( T_1 = 27^\circ\text{C} \)
अंतिम तापमान \( T_2 = 77^\circ\text{C} \)
तापमान में वृद्धि \( \Delta T = T_2 - T_1 = 77 - 27 = 50^\circ\text{C} \)
जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता \( c = 4.2 \, \text{J g}^{-1} \text{^\circ\text{C}}^{-1} \)
प्रति मिनट आवश्यक ऊष्मा \( \Delta Q = m c \Delta T \)
\( \Delta Q = 3000 \times 4.2 \times 50 = 6.3 \times 10^5 \, \text{J/min} \)
ईंधन की दहन-ऊष्मा \( H = 4.0 \times 10^4 \, \text{J/g} \)
ईंधन के व्यय की दर \( = \frac{\Delta Q}{H} \)
\( = \frac{6.3 \times 10^5}{4.0 \times 10^4} = 15.75 \, \text{g/min} \)
मुख्य बिंदु:
• आवश्यक ऊष्मा का सूत्र \( \Delta Q = mc\Delta T \) है।
• ईंधन व्यय दर कुल ऊष्मा और दहन-ऊष्मा का अनुपात होती है।
• मात्रकों को ग्राम और मिनट में एकसमान रखा गया है।
आम गलतियाँ:
• लीटर को ग्राम में बदलते समय \( 1000 \) से गुणा करना भूल जाना।
• विशिष्ट ऊष्मा का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में सभी मात्रकों को एसआई (SI) या एक ही पद्धति में बदलें।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 11.2: स्थिर दाब पर \( 2.0 \times 10^{-2} \, \text{kg} \) नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में \( 45^\circ\text{C} \) वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए? (\( N_2 \) का अणुभार \( = 28 \); \( R = 8.3 \, \text{J mol}^{-1} \text{K}^{-1} \))
Answer:
नाइट्रोजन का द्रव्यमान \( m = 2.0 \times 10^{-2} \, \text{kg} = 20 \, \text{g} \)
तापमान में वृद्धि \( \Delta T = 45^\circ\text{C} \)
अणुभार \( M = 28 \)
मोलों की संख्या \( n = \frac{m}{M} = \frac{2.0 \times 10^{-2} \times 1000}{28} = \frac{20}{28} = 0.714 \, \text{mol} \)
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक गैस है, अतः स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_p = \frac{7}{2} R \)
\( C_p = \frac{7}{2} \times 8.3 = 29.05 \, \text{J mol}^{-1} \text{K}^{-1} \)
आवश्यक ऊष्मा \( \Delta Q = n C_p \Delta T \)
\( \Delta Q = 0.714 \times 29.05 \times 45 = 933.38 \, \text{J} \)
मुख्य बिंदु:
• द्विपरमाणुक गैस के लिए \( C_p = \frac{7}{2}R \) होता है।
• ऊष्मा का सूत्र \( \Delta Q = nC_p\Delta T \) उपयोग किया जाता है।
• द्रव्यमान को ग्राम या मोल में बदलना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• \( C_p \) का मान गलत चुनना (एकपरमाणुक या त्रिपरमाणुक वाला रख देना)।
• मोलों की संख्या निकालते समय इकाइयों का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) गैस की परमाणुकता पहचान कर सही \( C_p \) और \( C_v \) का चयन करें।
b) गणना में दशमलव के दो स्थानों तक मान निकालें।
Question 11.3: व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है:
(a) भिन्न-भिन्न तापों \( T_1 \) व \( T_2 \) के दो पिंडों को यदि ऊष्मीय संपर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उनका अंतिम ताप \( \frac{T_1 + T_2}{2} \) ही हो।
(b) रासायनिक या नाभिकीय संयंत्र में शीतलक (अर्थात् द्रव जो संयम के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
(c) कार को चलाते-चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
(d) किसी बंदरगाह के समीप्य के शहर की जलवायु, समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।
Answer:
(a) दोनों पिंडों का अंतिम ताप उनके द्रव्यमान और विशिष्ट ऊष्मा धारिता पर निर्भर करता है। यदि दोनों की ऊष्मा धारिताएं (\( m_1c_1 \) और \( m_2c_2 \)) समान हों, तभी अंतिम ताप औसत \( \frac{T_1 + T_2}{2} \) होगा, अन्यथा नहीं।
(b) अधिक विशिष्ट ऊष्मा होने पर शीतलक कम तापमान वृद्धि के साथ अधिक मात्रा में ऊष्मा अवशोषित कर सकता है, जिससे संयंत्र सुरक्षित रहता है।
(c) कार चलने पर घर्षण और संपीडन के कारण टायर के अंदर की हवा का तापमान बढ़ जाता है, जिससे गेल-लुसाक नियम के अनुसार दाब भी बढ़ जाता है।
(d) समुद्र के पास जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा के कारण जलवायु समकारी (moderate) रहती है, जबकि रेगिस्तान में तापमान तेजी से बदलता है।
मुख्य बिंदु:
• ऊष्मा धारिता \( (mc) \) का महत्व।
• विशिष्ट ऊष्मा के व्यावहारिक अनुप्रयोग।
• गैस के नियमों और तापमान का संबंध।
आम गलतियाँ:
• केवल तापमान के औसत को ही हर स्थिति में अंतिम तापमान मान लेना।
• विशिष्ट ऊष्मा के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक भाग का उत्तर वैज्ञानिक कारणों के साथ संक्षिप्त और स्पष्ट लिखें।
b) विशिष्ट ऊष्मा और ऊष्मा धारिता की परिभाषा का संदर्भ दें।
Question 11.4: गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलेंडर में मानक ताप व दाब पर \( 3 \, \text{mol} \) हाइड्रोजन भरी है। सिलेंडर की दीवारें ऊष्माविरोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्माविरोधी बनाया गया है। यदि गैस को उसके आरंभिक आयतन के आधे आयतन तक संपीडित किया जाए तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
Answer:
चूँकि सिलेंडर और पिस्टन ऊष्माविरोधी हैं, इसलिए यह प्रक्रम रुद्धोष्म (adiabatic) है।
रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए समीकरण है:
\( P_1 V_1^\gamma = P_2 V_2^\gamma \)
हाइड्रोजन एक द्विपरमाणुक गैस है, जिसके लिए \( \gamma = 1.4 \)
अंतिम आयतन \( V_2 = \frac{V_1}{2} \)
अतः दाब \( P_2 = P_1 \left(\frac{V_1}{V_2}\right)^\gamma \)
\( P_2 = P_1 (2)^{1.4} \)
\( (2)^{1.4} \approx 2.639 \)
इसलिए दाब \( 2.639 \) के गुणक से बढ़ जाता है।
मुख्य बिंदु:
• ऊष्माविरोधी दीवारों के कारण प्रक्रम रुद्धोष्म होता है।
• रुद्धोष्म नियम \( PV^\gamma = \text{नियत} \) का उपयोग किया जाता है।
• द्विपरमाणुक गैस के लिए \( \gamma = 1.4 \) होता है।
आम गलतियाँ:
• इसे समतापीय प्रक्रम मानकर \( PV = \text{नियत} \) का उपयोग करना।
• \( \gamma \) का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) 'ऊष्माविरोधी' शब्द देखते ही रुद्धोष्म प्रक्रम के समीकरणों का प्रयोग करें।
b) लघुगणक या घात की गणना सावधानी से करें।
Question 11.5: रुद्धोष्म विधि द्वारा किसी गैस की अवस्था परिवर्तन करते समय उसकी एक साम्यावस्था \( A \) से दूसरी साम्यावस्था \( B \) तक ले जाने में निकाय पर \( 22.3 \, \text{J} \) कार्य किया जाता है। यदि गैस को दूसरी प्रक्रिया द्वारा अवस्था \( A \) से अवस्था में लाने में निकाय द्वारा अवशोषित नेट ऊष्मा \( 9.35 \, \text{cal} \) है तो बाद के प्रक्रम में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य कितना है? (\( 1 \, \text{cal} = 4.19 \, \text{J} \))
Answer:
प्रथम प्रक्रम (रुद्धोष्म) में:
\( \Delta Q_1 = 0 \)
किए गए कार्य \( W_1 = -22.3 \, \text{J} \) (निकाय पर कार्य)
आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन \( \Delta U = \Delta Q_1 - W_1 = 0 - (-22.3) = +22.3 \, \text{J} \)
चूँकि आंतरिक ऊर्जा अवस्था फलन है, इसलिए अवस्था \( A \) से \( B \) तक जाने में \( \Delta U \) समान रहेगा।
द्वितीय प्रक्रम में अवशोषित ऊष्मा \( \Delta Q_2 = 9.35 \, \text{cal} = 9.35 \times 4.19 = 39.18 \, \text{J} \)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से:
\( \Delta Q_2 = \Delta U + W_2 \)
\( 39.18 = 22.3 + W_2 \)
\( W_2 = 39.18 - 22.3 = 16.88 \, \text{J} \)
मुख्य बिंदु:
• आंतरिक ऊर्जा एक अवस्था फलन है जो मार्ग पर निर्भर नहीं करती।
• रुद्धोष्म प्रक्रम में \( \Delta Q = 0 \) होता है।
• कैलोरी को जूल में बदलने के लिए \( 4.19 \) से गुणा करते हैं।
आम गलतियाँ:
• कार्य और ऊष्मा के चिन्हों (+/-) में गलती करना।
• जूल और कैलोरी के रूपांतरण में चूक होना।
Exam Tips:
a) अवस्था फलन होने के कारण \( \Delta U \) दोनों रास्तों के लिए समान रहेगा।
b) प्रथम नियम का समीकरण \( \Delta Q = \Delta U + \Delta W \) सही चिन्हों के साथ लगाएं।
Question 11.6: समान धारिता वाले दो सिलेंडर \( A \) तथा \( B \) एक-दूसरे से स्टॉपकॉक के द्वारा जुड़े हैं। \( A \) में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि \( B \) पूर्णतः निर्वातित है। स्टॉपकॉर्क पकायक खोल दी जाती है। निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) सिलेंडर \( A \) तथा \( B \) में अंतिम दाब क्या होगा?
(b) गैस की आंतरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
(c) गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा?
(d) गैस की माध्यमिक अवस्थाएँ (अतिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व) इसके \( P-V-T \) पृष्ठ पर होंगी?
Answer:
(a) चूँकि \( B \) निर्वातित है और आयतन दोगुना हो जाता है, अतएव मुक्त प्रसार के कारण दाब आधा यानी \( 0.5 \, \text{atm} \) हो जाएगा।
(b) आदर्श गैस के मुक्त प्रसार में कोई कार्य नहीं होता और न ही ऊष्मा दी जाती है, अतः आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन शून्य (\( 0 \)) होगा।
(c) आंतरिक ऊर्जा नियत रहने के कारण आदर्श गैस के ताप में कोई परिवर्तन नहीं होगा (\( \Delta T = 0 \))।
(d) यह एक मुक्त प्रसार (free expansion) है जो अत्यंत तीव्र और अनियंत्रित होता है, इसलिए माध्यमिक अवस्थाएँ साम्यावस्था में नहीं होतीं और वे \( P-V-T \) पृष्ठ पर नहीं होंगी।
मुख्य बिंदु:
• मुक्त प्रसार (Free expansion) में \( W = 0 \) और \( Q = 0 \) होता है।
• आदर्श गैस के लिए आंतरिक ऊर्जा केवल ताप पर निर्भर करती है।
• निर्वात में प्रसार के दौरान तापमान अपरिवर्तित रहता है।
आम गलतियाँ:
• इसे समतापीय प्रक्रम समझकर अन्य नियमों को लगाना।
• मध्यवर्ती अवस्थाओं को साम्यावस्था मान लेना।
Exam Tips:
a) 'निर्वात में प्रसार' (Free expansion) के सभी विशिष्ट गुणधर्म याद रखें।
b) प्रत्येक उप-प्रश्न का उत्तर वैचारिक स्पष्टता के साथ दें।
Question 11.7: एक हीटर किसी निकाय को \( 100 \, \text{W} \) की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय \( 75 \, \text{J s}^{-1} \) की दर से कार्य करता है, तो आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी?
Answer:
दी गई ऊष्मा की आपूर्ति की दर \( Q = 100 \, \text{J/s} \)
कार्य करने की दर \( W = 75 \, \text{J/s} \)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से:
\( Q = \Delta U + W \)
जहाँ \( \Delta U \) आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन की दर है:
\( \Delta U = Q - W \)
\( \Delta U = 100 - 75 = 25 \, \text{J/s} \)
मुख्य बिंदु:
• यहाँ दर (per second) दी गई है, इसलिए सीधे शक्ति (power) का समीकरण उपयोग होगा।
• प्रथम नियम \( Q = \Delta U + W \) का सीधा अनुप्रयोग।
आम गलतियाँ:
• मानों को घटाने में गलती करना।
• मात्रक वाट (\( \text{W} \)) या \( \text{J/s} \) न लिखना।
Exam Tips:
a) यदि दर दी गई हो तो प्रति सेकंड के हिसाब से ही समीकरण हल करें।
b) अंतिम उत्तर में सही मात्रक (\( \text{W} \) या \( \text{J/s} \)) लिखें।
Question 11.8: किसी ऊष्मागतिकी निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक चित्र (11.11) में दर्शाये अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है। एक समदाबी प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को \( E \) से \( F \) तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा \( D \) से \( E \) तथा वहाँ से \( F \) तक कुल किए गए कार्य का आकलन कीजिए।
Answer:
\( D \) से \( E \) तक गैस द्वारा किया गया कार्य \( = \Delta DEF \) का क्षेत्रफल
\( \Delta DEF \) का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई} \)
यहाँ आधार \( \text{EF} = 5.0 - 2.0 = 3.0 \, \text{m}^3 \)
ऊँचाई \( \text{DF} = 600 - 300 = 300 \, \text{N/m}^2 \)
क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times 3.0 \times 300 = 450 \, \text{J} \)
चूँकि \( E \) से \( F \) तक आयतन कम होता है (संपीडन), इस दौरान कार्य शून्य होगा क्योंकि आयतन में परिवर्तन केवल \( D \) से \( E \) के प्रक्रम में मान्य क्षेत्र को दर्शाता है।
कुल किया गया कार्य \( = 450 \, \text{J} \)
मुख्य बिंदु:
\( P-V \) आरेख के अंतर्गत का क्षेत्रफल किया गया कार्य देता है।
त्रिभुज का क्षेत्रफल सूत्र \( \frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई} \) का प्रयोग।
चक्रीय प्रक्रम में कुल कार्य बंद वक्र के क्षेत्रफल के बराबर होता है।
आम गलतियाँ:
• त्रिभुज के क्षेत्रफल का सही सूत्र न लगाना।
• आधार और ऊँचाई के मान आरेख से गलत पढ़ना।
Exam Tips:
a) \( P-V \) ग्राफ वाले प्रश्नों में हमेशा आरेख का क्षेत्रफल ज्ञात करें।
b) अक्षों के मानों (scale) को ध्यान से देखें।
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