NCERT Solutions Class 11 Physics Chapter 10 Thermal Properties of Matter (द्रव्य के तापीय गुण) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 11 Physics: Chapter 10 द्रव्य के तापीय गुण

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Chapter-wise Solutions for Physics: Chapter 10 द्रव्य के तापीय गुण

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Question 10.1: निऑन तथा \( \text{CO}_2 \) के त्रिक बिंदु क्रमशः \( 24.57\text{ K} \) तथा \( 216.55\text{ K} \) हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक-क्रमों में व्यक्त कीजिए।

Answer:

केल्विन और सेल्सियस पैमाने में संबंध:
\( T_C = T_K - 273.15 \)     ...(i)
सेल्सियस और फारेनहाइट पैमाने में संबंध:
\( T_F = \frac{9}{5}T_C + 32 \)     ...(ii)
निऑन के लिए:
\( T_K = 24.57\text{ K} \)
\( \therefore T_C = 24.57 - 273.15 = -248.58^\circ\text{C} \)
\( T_F = \frac{9}{5}T_C + 32 = \frac{9}{5}(-248.58) + 32 = 415.44^\circ\text{F} \)
कार्बन डाइऑक्साइड के लिए:
\( T_K = 216.55\text{ K} \)
\( \therefore T_C = 216.55 - 273.15 = -56.60^\circ\text{C} \)
\( T_F = \frac{9}{5}(T_C) + 32 = \frac{9}{5}(-56.60) + 32 = -69.88^\circ\text{F} \)

मुख्य बिंदु:

• केल्विन और सेल्सियस तापमान पैमानों में \( 273.15 \) का अंतर होता है।
• सेल्सियस से फारेनहाइट परिवर्तन सूत्र \( \frac{9}{5}T_C + 32 \) का उपयोग किया जाता है।
• त्रिक बिंदु वह ताप है जिस पर तीनों अवस्थाएँ संतुलन में होती हैं।

आम गलतियाँ:

• \( 273.15 \) की जगह केवल \( 273 \) घटाना।
• फारेनहाइट सूत्र में गुणा करते समय चिह्न की गलती करना।
• तापमान के मात्रक लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) तापमान रूपांतरण के दोनों सूत्र याद रखें।
b) गणना को चरणबद्ध तरीके से हल करें।
c) अंत में सही मात्रक \( ^\circ\text{C} \), \( ^\circ\text{F} \) या \( \text{K} \) अवश्य लिखें।

 

Question 10.2: दो परम ताप मापकर्मों \( \text{A} \) तथा \( \text{B} \) पर जल के त्रिक बिंदु को \( 200\text{ A} \) तथा \( 350\text{ B} \) द्वारा परिभाषित किया गया है। \( T_{\text{A}} \) तथा \( T_{\text{B}} \) में क्या संबंध है?

Answer:

निरपेक्ष पैमाने A पर पानी का त्रिक बिंदु, \( T_1 = 200\text{ A} \)
निरपेक्ष पैमाने B पर पानी का त्रिक बिंदु, \( T_2 = 350\text{ B} \)
केल्विन पैमाने पर पानी का त्रिक बिंदु, \( T_K = 273.15\text{ K} \)
केल्विन पैमाने पर \( 273.15\text{ K} \) तापमान, निरपेक्ष पैमाने A पर \( 200\text{ A} \) के बराबर है:
\( T_1 = T_K \)
\( 200\text{ A} = 273.15\text{ K} \)
\( \therefore \text{A} = \frac{273.15}{200} \)
केल्विन पैमाने पर \( 273.15\text{ K} \) तापमान, निरपेक्ष पैमाने B पर \( 350\text{ B} \) के बराबर है:
\( T_2 = T_K \)
\( 350\text{ B} = 273.15\text{ K} \)
\( \therefore \text{B} = \frac{273.15}{350} \)
पैमाने A पर \( T_{\text{A}} \) पानी का त्रिक बिंदु है।
पैमाने B पर \( T_{\text{B}} \) पानी का त्रिक बिंदु है।
\( \frac{273.15}{200} \times T_{\text{A}} = \frac{273.15}{350} \times T_{\text{B}} \Rightarrow T_{\text{A}} = \frac{200}{350} T_{\text{B}} \)
इसलिए, अनुपात \( T_{\text{A}} : T_{\text{B}} \) को \( 4 : 7 \) के रूप में दिया गया है।

मुख्य बिंदु:

• किसी भी निरपेक्ष ताप पैमाने पर त्रिक बिंदु का मान उस पैमाने का आधार होता है।
• तापमान किसी भी पैमाने पर हो, केल्विन पैमाने के संगत मान के समानुपाती होता है।
• अनुपातों की तुलना करके दोनों पैमानों में संबंध निकाला जा सकता है।

आम गलतियाँ:

• त्रिक बिंदु के मान को सीधे बिना तुलना किए रखना।
• अनुपात निकालते समय मानों को उल्टा कर देना।

Exam Tips:

a) दोनों पैमानों को मानक केल्विन पैमाने के बराबर रखें।
b) समीकरणों की तुलना करके आवश्यक संबंध प्राप्त करें।
c) अंतिम उत्तर को अनुपात के सरलतम रूप में लिखें।

 

Question 10.3: किसी तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नलिखित सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है \( R = R_0[1 + \alpha(T - T_0)] \)
यदि तापमापी का जल के त्रिक बिंदु \( 273.16\text{ K} \) पर प्रतिरोध \( 101.6\ \Omega \) तथा लैड के सामान्य संगलन बिंदु (\( 600.5\text{ K} \)) पर प्रतिरोध \( 165.5\ \Omega \) है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध \( 123.4\ \Omega \) है।

Answer:

दिया गया समीकरण है: \( R = R_0[1 + \alpha(T - T_0)] \)     (i)
यहाँ, \( R_0 \) और \( T_0 \) क्रमशः प्रारंभिक प्रतिरोध और तापमान हैं। \( R \) और \( T \) अंतिम प्रतिरोध और तापमान हैं तथा \( \alpha \) एक स्थिरांक है।
पानी के त्रिक बिंदु पर, \( T_0 = 273.15\text{ K} \)
लैड का प्रतिरोध, \( R_0 = 101.6\ \Omega \)
लैड के सामान्य गलनांक पर, \( T = 600.5\text{ K} \)
लैड का प्रतिरोध, \( R = 165.5\ \Omega \)
इन मानों को समीकरण (i) में रखने पर:
\( 165.5 = 101.6[1 + \alpha(600.5 - 273.15)] \)
\( 1.629 = 1 + \alpha(327.35) \)
\( \alpha = \frac{0.629}{327.35} = 1.92 \times 10^{-3}\text{ K}^{-1} \)
प्रतिरोध \( R = 123.4\ \Omega \) के लिए, \( R = R_0[1 + \alpha(T - T_0)] \)
जहाँ, \( T \) वह तापमान है जब लैड का प्रतिरोध \( 123.4\ \Omega \) है।
\( 123.4 = 101.6[1 + 1.92 \times 10^{-3}(T - 273.15)] \)
\( 1.214 = 1 + 1.92 \times 10^{-3}(T - 273.15) \)
\( \frac{0.214}{1.92 \times 10^{-3}} = T - 273.15 \)
\( T = 384.61\text{ K} \)

मुख्य बिंदु:

• प्रतिरोध और तापमान के रैखिक संबंध का उपयोग करना।
• पहले अज्ञात स्थिरांक \( \alpha \) का मान ज्ञात करना।
• \( \alpha \) के मान का उपयोग करके अज्ञात तापमान ज्ञात करना।

आम गलतियाँ:

• त्रिक बिंदु के तापमान मान \( 273.16\text{ K} \) के स्थान पर \( 273.15\text{ K} \) का गलत प्रयोग।
• गणना में घातांक (\( 10^{-3} \)) की गलती करना।

Exam Tips:

a) दिए गए मानों को सूत्र में ध्यानपूर्वक प्रतिस्थापित करें।
b) पहले भाग से \( \alpha \) की सही गणना करें।
c) अंतिम उत्तर को केल्विन मात्रक के साथ लिखें।

 

Question 10.4: निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिंदु एक मानक नियत बिंदु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत बिंदु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापकक्रम में किया गया था) क्या दोष है?
(b) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापकर्म में दो नियत बिंदु थे जिनको क्रमशः \( 0^\circ\text{C} \) तथा \( 100^\circ\text{C} \) संख्याएँ निर्धारित की गई थीं। परम ताप मापकक्रम पर दो में से एक नियत बिंदु जल का त्रिक बिंदु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापकक्रम पर संख्या \( 273.16\text{ K} \) निर्धारित की गई है। इस मापकक्रम (केल्विन परम ताप) पर अन्य नियत बिंदु क्या है?
(c) परम ताप (केल्विन मापकक्रम) \( T \) तथा सेल्सियस मापकक्रम पर ताप \( t_c \) में संबंध इस प्रकार है: \( t_c = T - 273.15 \)
इस संबंध में हमने \( 273.15 \) लिखा है \( 273.16 \) क्यों नहीं लिखा?
(d) उस परम ताप मापकक्रम पर, जिसके एकांक अंतराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अंतराल की आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिंदु का ताप क्या होगा?

Answer:

(a) जल का त्रिक बिंदु अद्वितीय होता है और दाब के विशिष्ट मानों पर निर्भर करता है, जबकि हिम का गलनांक और जल का क्वथनांक बाहरी दाब पर निर्भर करते हैं और दाब परिवर्तन से बदल जाते हैं।
(b) केल्विन परम ताप मापकक्रम पर दूसरा निश्चित बिंदु परम शून्य या \( 0\text{ K} \) है।
(c) \( 273.16\text{ K} \) पानी का त्रिक बिंदु है, यह बर्फ का गलनांक बिंदु नहीं है। सेल्सियस पैमाने पर \( 0^\circ\text{C} \) तापमान बर्फ का गलनांक होता है। केल्विन पैमाने पर इसका संगत मान \( 273.15\text{ K} \) है।
(d) फारेनहाइट पैमाने पर अंतराल \( 180 \) भागों में बंटा होता है और केल्विन/सेल्सियस \( 100 \) भागों में। यदि अंतराल फारेनहाइट के बराबर है, तो जल का त्रिक बिंदु \( 273.16 \times \frac{9}{5} = 491.69 \) होगा।

मुख्य बिंदु:

• त्रिक बिंदु दाब और तापमान पर अद्वितीय होता है।
• \( 273.15\text{ K} \) बर्फ के गलनांक का केल्विन मान है।
• तापमान के विभिन्न पैमानों के बीच अंतरालों की संख्या भिन्न होती है।

आम गलतियाँ:

• त्रिक बिंदु और गलनांक को एक ही मान लेना।
• पैमाने के अंतरालों के रूपांतरण में गलती करना।

Exam Tips:

a) सैद्धांतिक प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में लिखें।
b) त्रिक बिंदु की अद्वितीयता का कारण स्पष्ट करें।
c) पैमानों के बीच के अंतर को ध्यान में रखें।

 

Question 10.5: दो आदर्श गैस तापमापियों \( \text{A} \) तथा \( \text{B} \) में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित हैं:
ताप                                  दाब तापमापी A में                  दाब तापमापी B में
जल का त्रिक बिंदु                  \( 1.250 \times 10^5\text{ Pa} \)               \( 0.200 \times 10^5\text{ Pa} \)
सल्फर का सामान्य गलनांक      \( 1.797 \times 10^5\text{ Pa} \)               \( 0.287 \times 10^5\text{ Pa} \)
(a) तापमापियों A तथा B के द्वारा लिए गए पाठ्यांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमाप ताप क्या है?
(b) आपके विचार से तापमापियों A तथा B के उत्तरों में थोड़ा अंतर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है)। दो पाठ्यांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्या प्रावधान आवश्यक है?

Answer:

(a) पानी का त्रिक बिंदु, \( T = 273.16\text{ K} \), इस तापमान पर, थर्मामीटर A में दाब, \( P_A = 1.250 \times 10^5\text{ Pa} \)
मान लें कि पा पर \( T_1 \) सल्फर का सामान्य गलनांक तापमान \( T_1 \) है।
इस तापमान पर, थर्मामीटर A में दाब, \( P_1 = 1.797 \times 10^5\text{ Pa} \)
चार्ल्स के नियम के अनुसार, \( \frac{P_1}{T} = \frac{P}{T_1} \Rightarrow T_1 = \frac{1.797 \times 10^5}{1.250 \times 10^5} \times 273.16 = 392.69\text{ K} \)
त्रिक बिंदु \( 273.16\text{ K} \) पर, थर्मामीटर B में दाब, \( P_B = 0.200 \times 10^5\text{ Pa} \)
तापमान \( T_1 \) पर, थर्मामीटर B में दाब, \( P_2 = 0.287 \times 10^5\text{ Pa} \)
चार्ल्स के नियम के अनुसार, \( T_1 = \frac{0.287 \times 10^5}{0.200 \times 10^5} \times 273.16 = 391.98\text{ K} \)
(b) थर्मामीटर A और B में मौजूद ऑक्सीजन और हाइड्रोजन गैस क्रमशः आदर्श गैस नहीं हैं। इसलिए, थर्मामीटर A और B के पाठ्यांकों में थोड़ा अंतर है।
दो पाठ्यांकों के बीच विसंगति को कम करने के लिए, प्रयोग कम दबाव की स्थिति में किया जाना चाहिए। निम्न दाब पर ये गैसें आदर्श गैसों की भाँति व्यवहार करती हैं।

मुख्य बिंदु:

• चार्ल्स के नियम \( \frac{P}{T} = \text{नियतांक} \) का उपयोग करना।
• वास्तविक गैसें उच्च दाब पर आदर्श गैस व्यवहार से विचलित होती हैं।
• निम्न दाब पर गैसें आदर्श व्यवहार दर्शाती हैं।

आम गलतियाँ:

• दाब और तापमान के मानों को आपस में मिला देना।
• गणना में घातों (\( 10^5 \)) को सही से न काटना।

Exam Tips:

a) चार्ल्स के नियम का सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
b) सैद्धांतिक भाग (b) में गैसों के वास्तविक व्यवहार को कारण के रूप में बताएँ।
c) इकाई का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 10.6: किसी \( 1\text{ m} \) लंबे स्टील के फीते का यथार्थ अंशानकन \( 27.0^\circ\text{C} \) पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप \( 45.0^\circ\text{C} \) था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लंबाई \( 63.0\text{ cm} \) मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लंबाई क्या थी, जिस दिन ताप \( 27.0^\circ\text{C} \) होगा? उस दिन इसी छड़ की लंबाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक = \( 1.20 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \).

Answer:

\( 27^\circ\text{C} \) तापमान पर स्टील के फीते की लंबाई, \( l = 1\text{ m} = 100\text{ cm} \)
तापमान \( T_1 = 45^\circ\text{C} \) पर, स्टील की छड़ की लंबाई, \( l_1 = 63\text{ cm} \)
स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक, \( \alpha_1 = 1.20 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
मान लीजिए \( 45^\circ\text{C} \) पर स्टील की छड़ की वास्तविक लंबाई \( l_2 \) है और स्टील के फीते की लंबाई \( l' \) है।
\( l' = l + \alpha_1(T_1 - T) \)
\( \therefore l' = 100 + 1.20 \times 10^{-5} \times 100(45 - 27) = 100.0216\text{ cm} \)
इसलिए, स्टील की फीती द्वारा \( 45^\circ\text{C} \) पर मापी गई स्टील की छड़ की वास्तविक लंबाई की गणना इस प्रकार की जा सकती है:
\( l_2 = \frac{100.0216}{100} \times 63 = 63.0136\text{ cm} \)
अतः, \( 45.0^\circ\text{C} \) पर छड़ की वास्तविक लंबाई \( 63.0136 \) सेमी है। \( 27.0^\circ\text{C} \) पर इसकी लंबाई \( 63.0 \) सेमी है।

मुख्य बिंदु:

• तापीय प्रसार के कारण पैमाने और वस्तु दोनों की लंबाई बदलती है।
• वास्तविक लंबाई = (मापी गई लंबाई) \( \times \) (फीते की फैली हुई लंबाई / मूल लंबाई)।
• रेखीय प्रसार सूत्र \( \Delta l = l\alpha\Delta T \) का प्रयोग करना।

आम गलतियाँ:

• फीते के प्रसार को नजरअंदाज करना।
• तापमान परिवर्तन \( \Delta T \) की सही गणना न करना।

Exam Tips:

a) फीते और छड़ दोनों के लिए प्रसार अलग से समझें।
b) गणना में दशमलव के बाद के अंकों का सही ध्यान रखें।
c) परिणाम को उचित मात्रक (सेमी) में व्यक्त करें।

 

Question 10.7: किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठना है। \( 27^\circ\text{C} \) पर धुरी का बाहरी व्यास \( 8.70\text{ cm} \) तथा पहिए के केंद्रीय छिद्र का व्यास \( 8.69\text{ cm} \) है। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक नियत रहता है: \( \alpha_{\text{स्टील}} = 1.20 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \).

Answer:

दिए गए तापमान, \( T = 27^\circ\text{C} \) को केल्विन में इस प्रकार लिखा जा सकता है: \( 27 + 273 = 300\text{ K} \)
तापमान \( T \) पर स्टील धुरी का बाहरी व्यास, \( d_1 = 8.70\text{ cm} \)
तापमान \( T \) पर पहिए के केंद्रीय छिद्र का व्यास, \( d_2 = 8.69\text{ cm} \)
स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक, \( \alpha_{\text{स्टील}} = 1.20 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
शाफ्ट को 'शुष्क बर्फ' से ठंडा करने के बाद, इसका तापमान \( T_1 \) हो जाता है।
व्यास में परिवर्तन होने पर पहिया धुरी पर फिसल जाएगा, \( \Delta d = 8.69 - 8.70 = -0.01\text{ cm} \)
तापमान \( T_1 \) की संबंध से गणना की जा सकती है:
\( \Delta d = d_1 \alpha_{\text{स्टील}} (T_1 - T) = 8.70 \times 1.20 \times 10^{-5} (T_1 - 300) \)
\( \Rightarrow (T_1 - 300) = 95.78 \)
\( \therefore T_1 = 204.21\text{ K} = 204.21 - 273.16 = -68.95^\circ\text{C} \)
इसलिए, जब धुरी का तापमान \(-69^\circ\text{C}\) होगा, तो पहिया धुरी पर फिसल जाएगा।

मुख्य बिंदु:

• तापीय संकुचन से छड़ या धुरी का व्यास कम हो जाता है।
• व्यास में परिवर्तन \( \Delta d = d\alpha\Delta T \) सूत्र से ज्ञात करते हैं।
• केल्विन और सेल्सियस तापमान में आपसी संबंध का उपयोग करना।

आम गलतियाँ:

• व्यास परिवर्तन का चिह्न ऋणात्मक न लेना।
• केल्विन से सेल्सियस बदलते समय घटाने में गलती करना।

Exam Tips:

a) ठण्डा करने पर वस्तु का आकार घटता है, अतः \( \Delta T \) ऋणात्मक होगा।
b) सभी मानों को एसआई पद्धति या सुसंगत इकाई में रखें।
c) अंतिम तापमान को सेल्सियस में भी बदल कर दिखाएँ।

 

Question 10.8: ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। \( 27.0^\circ\text{C} \) पर छिद्र का व्यास \( 4.24\text{ cm} \) है। इस धातु की चादर को \( 227^\circ\text{C} \) तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = \( 1.70 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \).

Answer:

प्रारंभिक तापमान, \( T_1 = 27.0^\circ\text{C} \)
तापमान \( T_1 \) पर छिद्र का व्यास, \( d_1 = 4.24\text{ cm} \)
अंतिम तापमान, \( T_2 = 227^\circ\text{C} \)
ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक, \( \alpha_{\text{Cu}} = 1.70 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
क्षेत्रीय प्रसार गुणांक, \( \beta = 2\alpha_{\text{Cu}} = 2 \times 1.70 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
क्षेत्रफल में परिवर्तन \( (\Delta A)/\text{वास्तविक क्षेत्रफल } (A) = \beta\Delta T \)
\( \frac{\frac{\pi}{4}d_2^2 - \frac{\pi}{4}d_1^2}{\frac{\pi}{4}d_1^2} = \beta\Delta T \)
\( \frac{d_2^2 - d_1^2}{d_1^2} = 2\alpha\Delta T \)
\( \frac{d_2^2}{d_1^2} - 1 = 2\alpha(T_2 - T_1) \)
\( \frac{d_2^2}{(4.24)^2} = 2 \times 1.7 \times 10^{-5} (227 - 27) + 1 \)
\( d_2^2 = 17.98 \times 1.0068 = 18.1 \Rightarrow d_2 = 4.2544\text{ cm} \)
व्यास में परिवर्तन = \( d_2 - d_1 = 4.2544 - 4.24 = 0.0144\text{ cm} \)
अतः, व्यास \( 1.44 \times 10^{-2} \) सेमी बढ़ जाता है।

मुख्य बिंदु:

• किसी चादर में बने छिद्र का प्रसार भी धातु के प्रसार की तरह ही होता है (छिद्र बड़ा होता है)।
• क्षेत्रीय प्रसार गुणांक \( \beta \) रेखीय प्रसार गुणांक \( \alpha \) का दोगुना होता है (\( \beta = 2\alpha \))。
• क्षेत्रफल और व्यास के संबंधों का उपयोग करना।

आम गलतियाँ:

• \( \beta \) के स्थान पर सीधे \( \alpha \) का प्रयोग करना।
• तापमान परिवर्तन निकालते समय गलतियाँ करना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि गर्म करने पर छिद्र का आकार भी बढ़ता है।
b) \( \beta = 2\alpha \) संबंध का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) गणना को सटीक रूप से हल करें।

 

Question 10.9: \( 27^\circ\text{C} \) पर \( 1.8\text{ m} \) लंबे किसी पीतल के तार को दो दृढ़ टेकों के बीच अल्प तनाव रखकर थोड़ा कसा गया है। यदि तार को \(-39^\circ\text{C}\), ताप तक शीतित करें तो तार में कितना तनाव उत्पन्न हो जाएगा? तार का व्यास \( 2.0\text{ mm} \) है। पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक = \( 2.0 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \); पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = \( 0.91 \times 10^{11}\text{ Pa} \).

Answer:

प्रारंभिक तापमान, \( T_1 = 27^\circ\text{C} \), तापमान \( T_1 \) पर पीतल के तार की लंबाई, \( l = 1.8\text{ m} \)
अंतिम तापमान, \( T_2 = -39^\circ\text{C} \)
तार का व्यास, \( d = 2.0\text{ mm} = 2 \times 10^{-3}\text{ m} \)
तार में उत्पन्न तनाव = \( F \)
पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक, \( \alpha = 2.0 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक, \( Y = 0.91 \times 10^{11}\text{ Pa} \)
यंग प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र: \( Y = \frac{\text{Stress}}{\text{Strain}} = \frac{F/A}{\Delta L/L} \)     (i)
जहाँ, \( F = \) तार में उत्पन्न तनाव, \( A = \) तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल तथा \( \Delta L = \) लंबाई में बदलाव
लंबाई में बदलाव \( \Delta L = \alpha L(T_2 - T_1) \)     (ii)
समीकरण (i) और (ii) की तुलना करने पर, हम प्राप्त करते हैं:
\( \alpha L(T_2 - T_1) = \frac{FL}{\pi(d/2)^2 Y} \Rightarrow F = \alpha(T_2 - T_1)\pi Y \left(\frac{d}{2}\right)^2 \)
\( F = 2 \times 10^{-5} \times (-39 - 27) \times 3.14 \times 0.91 \times 10^{11} \times \left(\frac{2 \times 10^{-3}}{2}\right)^2 = -3.8 \times 10^2\text{ N} \)
ऋणात्मक चिन्ह इंगित करता है कि तनाव अंदर की ओर निर्देशित है।
इसलिए, तार में विकसित तनाव \( 3.8 \times 10^2\text{ N} \) है।

मुख्य बिंदु:

• तापीय प्रतिबल और यंग प्रत्यास्थता गुणांक के बीच संबंध का उपयोग करना।
• लंबाई में परिवर्तन \( \Delta L = \alpha L\Delta T \) का सूत्र लगाना।
• अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \) ज्ञात करना।

आम गलतियाँ:

• व्यास को त्रिज्या में न बदलना।
• तापमान परिवर्तन में ऋण चिन्ह की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) यंग प्रत्यास्थता गुणांक और प्रसार के सूत्रों को संयोजित करें।
b) SI मात्रकों का ही प्रयोग करें।
c) बल (तनाव) का मान निकालते समय गणना सावधानी से करें।

 

Question 10.10: \( 50\text{ cm} \) लंबी तथा \( 3.0\text{ mm} \) व्यास की किसी पीतल की छड़ को उसी लंबाई तथा व्यास की किसी स्टील की छड़ से जोड़ा गया है। यदि ये मूल लंबाईयाँ \( 40.0^\circ\text{C} \) पर हैं, तो \( 250^\circ\text{C} \), पर संयुक्त छड़ की लंबाई में क्या परिवर्तन होगा? क्या संधि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न होगा? छड़ के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है। (पीतल तथा स्टील के रेखीय प्रसार गुणांक क्रमशः = \( 2.0 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \), स्टील = \( 1.2 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)).

Answer:

प्रारंभिक तापमान, \( T_1 = 40^\circ\text{C} \), अंतिम तापमान, \( T_2 = 250^\circ\text{C} \)
तापमान में बदलाव, \( \Delta T = T_2 - T_1 = 210^\circ\text{C} \)
तापमान \( T_1 \) पर पीतल की छड़ की लंबाई, \( l_1 = 50\text{ cm} \)
तापमान \( T_1 \) पर पीतल की छड़ का व्यास, \( d_1 = 3.0\text{ mm} \)
तापमान \( T_2 \) पर स्टील की छड़ की लंबाई, \( l_2 = 50\text{ cm} \)
तापमान \( T_2 \) पर स्टील की छड़ का व्यास, \( d_2 = 3.0\text{ mm} \)
पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक, \( \alpha_1 = 2.0 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक, \( \alpha_2 = 1.2 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
पीतल की छड़ में प्रसार के लिए: \( \Delta l_1 = l_1 \alpha_1 \Delta T \)
\( \Delta l_1 = 50 \times (2.1 \times 10^{-5}) \times 210 = 0.2205\text{ cm} \)
स्टील की छड़ में प्रसार के लिए: \( \Delta l_2 = l_2 \alpha_2 \Delta T \)
\( \Delta l_2 = 50 \times (1.2 \times 10^{-5}) \times 210 = 0.126\text{ cm} \)
पीतल और स्टील की लंबाई में कुल परिवर्तन, \( \Delta l = \Delta l_1 + \Delta l_2 = 0.2205 + 0.126 = 0.346\text{ cm} \)
संयुक्त छड़ की लंबाई में कुल परिवर्तन = \( 0.346\text{ सेमी} \)
चूंकि छड़ दोनों सिरों से स्वतंत्र रूप से फैलती है, इसलिए जंक्शन पर कोई थर्मल स्ट्रेस विकसित नहीं होता है।

मुख्य बिंदु:

• संयुक्त छड़ का कुल प्रसार दोनों छड़ों के अलग-अलग प्रसार के योग के बराबर होता है।
• प्रसार के लिए सिरे स्वतंत्र होने पर कोई तापीय प्रतिबल (Thermal Stress) उत्पन्न नहीं होता।
• सूत्र \( \Delta l = l\alpha\Delta T \) का अलग-अलग प्रयोग करना।

आम गलतियाँ:

• दोनों छड़ों के प्रसार को अलग-अलग न निकालकर औसत निकालना।
• तापमान अंतर \( \Delta T \) की गलत गणना करना।

Exam Tips:

a) संयुक्त छड़ों के प्रश्नों में प्रत्येक भाग का प्रसार अलग से निकालें।
b) स्वतंत्रता की स्थिति में प्रतिबल शून्य होता है, इसे स्पष्ट रूप से लिखें।
c) परिणाम को उचित मात्रक (सेमी) में दें।

 

Question 10.11: ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक \( 49 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \) है। ताप में \( 30^\circ\text{C} \) की वृद्धि होने पर इसके घनत्व में क्या आंशिक परिवर्तन होगा?

Answer:

ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक, \( \alpha_V = 49 \times 10^{-5}\text{ K}^{-1} \)
ताप में वृद्धि, \( \Delta T = 30^\circ\text{C} \)
इसके आयतन में आंशिक परिवर्तन \( \frac{\Delta V}{V} \)
यह परिवर्तन तापमान में परिवर्तन से संबंधित है:
\( \frac{\Delta V}{V} = \alpha_V \Delta T = V_2 - V_1 = V_1 \alpha_V \Delta T \)
\( \frac{\rho_1 - \rho_2}{\rho_2} = \alpha_V \Delta T \) (जहाँ \( \rho_1 = \) प्रारंभिक घनत्व तथा \( \rho_2 = \) ंतिम घनत्व)
\( \frac{\Delta \rho}{\rho_f} = \alpha_V \Delta T \)
\( \therefore \) ग्लिसरीन के घनत्व में भिन्नात्मक परिवर्तन = \( 49 \times 10^{-5} \times 30 = 1.47 \times 10^{-2} \)

मुख्य बिंदु:

• आयतन प्रसार गुणांक \( \alpha_V \) और घनत्व परिवर्तन में संबंध होता है।
• घनत्व आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( \rho \propto \frac{1}{V} \))।
• आंशिक परिवर्तन \( \frac{\Delta \rho}{\rho} = \alpha_V \Delta T \) से निकाला जाता है।

आम गलतियाँ:

• रेखीय प्रसार गुणांक और आयतन प्रसार गुणांक को एक मान लेना।
• घनत्व और आयतन के व्युत्क्रम संबंध को भूल जाना।

Exam Tips:

a) घनत्व और आयतन के संबंध को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
b) गणना में घातांकों का सही गुणन करें।
c) आंशिक परिवर्तन एक विमाहीन राशि है।

 

Question 10.12: \( 8.0\text{ kg} \) द्रव्यमान के किसी एलुमिनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए किसी \( 10\text{ kW} \) की बरमी का उपयोग किया गया है। \( 2.5 \) मिनट में ब्लॉक के ताप में कितनी वृद्धि हो जाएगी? यह मानिए कि \( 50\% \) शक्ति तो स्वयं बरमी को गर्म करने में खर्च हो जाती है अथवा परिवेश में लुप्त हो जाती है। एलुमिनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = \( 0.91\text{ J g}^{-1}\text{ K}^{-1} \).

Answer:

बरमी (ड्रिलिंग मशीन) की शक्ति, \( P = 10\text{ kW} = 10 \times 10^3\text{ W} \)
एलुमिनियम ब्लॉक का द्रव्यमान, \( m = 8.0\text{ kg} = 8 \times 10^3\text{ g} \)
वह समय जिसके लिए मशीन का उपयोग किया जाता है, \( t = 2.5\text{ min} = 2.5 \times 60 = 150\text{ s} \)
एलुमिनियम की विशिष्ट ऊष्मा, \( c = 0.91\text{ J g}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
छिद्र करने के बाद ब्लॉक के तापमान में वृद्धि = \( \delta T \)
ड्रिलिंग मशीन की कुल ऊर्जा = \( P_t = 10 \times 10^3 \times 150 = 1.5 \times 10^6\text{ J} \)
यह दिया गया है कि केवल \( 50\% \) शक्ति उपयोगी है।
उपयोगी शक्ति, \( \Delta Q = \frac{50}{100} \times 1.5 \times 10^6 = 7.5 \times 10^5\text{ J} \)
किन्तु \( \Delta Q = mc\Delta T \)
\( \therefore \Delta T = \frac{\Delta Q}{mc} = \frac{7.5 \times 10^5}{8 \times 10^3 \times 0.91} = 103^\circ\text{C} \)
इसलिए, ड्रिलिंग के \( 2.5 \) मिनट में, ब्लॉक के तापमान में \( 103^\circ\text{C} \) की वृद्धि होती है।

मुख्य बिंदु:

• कुल ऊर्जा \( E = P \times t \) होती है।
• दी गई दक्षता (\( 50\% \)) के अनुसार प्रभावी ऊष्मा ज्ञात करना।
• ऊष्मा का सूत्र \( \Delta Q = mc\Delta T \) का प्रयोग करना।

आम गलतियाँ:

• समय को मिनट से सेकंड में न बदलना।
• द्रव्यमान की इकाइयों (किलोग्राम से ग्राम) में गलती करना।

Exam Tips:

a) समय को हमेशा सेकंड में बदलें।
b) विशिष्ट ऊष्मा के मात्रक के अनुसार द्रव्यमान को ग्राम में रखें।
c) अंतिम तापमान वृद्धि को सही मात्रक में लिखें।

 

Question 10.13: \( 2.5\text{ kg} \) द्रव्यमान के ताँबे के गुटके को किसी भट्टी में \( 500^\circ\text{C} \) तक तप्त करने के पश्चात् किसी बड़े हिम-ब्लॉक पर रख दिया जाता है। गलित हो सकने वाली हिम की अधिकतम मात्रा क्या है? ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = \( 0.39\text{ J g}^{-1}\text{ K}^{-1} \); बर्फ की संगलन ऊष्मा = \( 335\text{ J g}^{-1} \).

Answer:

तांबे के गुटके का द्रव्यमान, \( m = 2.5\text{ kg} = 2500\text{ g} \)
कॉपर गुटके के तापमान में वृद्धि, \( \Delta \theta = 500^\circ\text{C} \)
तांबे की विशिष्ट ऊष्मा, \( C = 0.39\text{ J g}^{-1}\text{ C}^{-1} \)
बर्फ की संगलन ऊष्मा, \( L = 335\text{ J g}^{-1} \)
तांबे के गुटके अधिकतम ऊष्मा क्षय हो सकती है, \( Q = mC\Delta \theta \)
\( = 2500 \times 0.39 \times 500 = 487500\text{ J} \)
माना कि \( m_1\text{ g} \) बर्फ की वह मात्रा है जो तब पिघलती है जब तांबे के ब्लॉक को बर्फ के ब्लॉक पर रखा जाता है।
बर्फ के पिघलने में व्यय हुई ऊष्मा, \( Q = m_1 L \)
\( \therefore m_1 = \frac{Q}{L} = \frac{487500}{335} = 1455.22\text{ g} \)
इसलिए, बर्फ की अधिकतम मात्रा जो पिघल सकती है वह \( 1.45 \) किग्रा है।

मुख्य बिंदु:

• तांबे द्वारा दी गई ऊष्मा = बर्फ द्वारा अवशोषित ऊष्मा।
• \( Q = mC\Delta T \) और \( Q = m_1L \) सूत्रों का उपयोग करना।
• द्रव्यमान को ग्राम में बदलकर सही गणना करना।

आम गलतियाँ:

• ग्राम और किलोग्राम की इकाइयों में सामंजस्य न बिठाना।
• संगलन ऊष्मा का मान गलत रखना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का उपयोग करें।
b) द्रव्यमान को ग्राम में रखकर गणना आसान करें।
c) अंत में उत्तर को किग्रा में बदलें।

 

Question 10.14: किसी धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के प्रयोग में \( 0.20\text{ kg} \) के धातु के गुटके को \( 150^\circ\text{C} \) पर तप्त करके, किसी ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक = \( 0.025\text{ kg} \)) जिसमें \( 150\text{ cm}^3 \) जल भरा है, में गिराया जाता है। अंतिम ताप \( 40^\circ\text{C} \) है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता परिकलित कीजिए। यदि परिवेश में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानकर परिकलन किया जाता है, तब क्या आपका उत्तर धातु की विशिष्ट ऊष्मा के वास्तविक मान से अधिक मान दर्शाएगा अथवा कम?

Answer:

धातु का द्रव्यमान, \( m = 0.20\text{ kg} = 200\text{ g} \)
धातु का प्रारंभिक तापमान, \( T_1 = 150^\circ\text{C} \) तथा अंतिम तापमान, \( T_2 = 40^\circ\text{C} \)
कैलोरीमीटर में द्रव्यमान के बराबर पानी होता है, \( m' = 0.025\text{ kg} = 25\text{ g} \)
पानी का आयतन, \( V = 150\text{ cm}^3 \)
तापमान \( T = 27^\circ\text{C} \) पर पानी का द्रव्यमान \( (M) = 150 \times 1 = 150\text{ g} \)
धातु के तापमान में गिरावट: \( \Delta T = T_1 - T_2 = 150 - 40 = 110^\circ\text{C} \)
पानी की विशिष्ट ऊष्मा, \( C_w = 4.186\text{ J/g/}^\circ\text{C} \)
धातु की विशिष्ट ऊष्मा = \( C \)
धातु द्वारा क्षय हुई ऊष्मा, \( \theta = mc\Delta T \)     (i)
पानी और कैलोरीमीटर प्रणाली के तापमान में वृद्धि: \( \Delta T'' = 40 - 27 = 13^\circ\text{C} \)
पानी और कैलोरीमीटर प्रणाली द्वारा प्राप्त गर्मी: \( = (M + m') C_w \Delta T'' \)     (ii)
धातु द्वारा खाई गई ऊष्मा = पानी और कैलोरीमीटर प्रणाली द्वारा प्राप्त ऊष्मा
\( mc\Delta T = (M + m') C_w \Delta T'' \)
\( 200 \times C \times 110 = (150 + 25) \times 4.186 \times 13 \)
\( C = \frac{175 \times 4.186 \times 13}{110 \times 200} = 0.43\text{ J g}^{-1}\text{K}^{-1} \)
यदि परिवेश में कुछ ऊष्मा क्षय हो जाती है, तो \( C \) का मान वास्तविक मान से छोटा होगा।

मुख्य बिंदु:

• कैलोरीिमिति का सिद्धांत: दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा।
• जल तुल्यांक कैलोरीमीटर की ऊष्माधारिता को व्यक्त करता है।
• ऊष्मा क्षय होने पर परिकलित मान प्रभावित होता है।

आम गलतियाँ:

• जल तुल्यांक और पानी के द्रव्यमान को जोड़ते समय गलती करना।
• तापमान परिवर्तन \( \Delta T \) के अंतर को गलत लेना।

Exam Tips:

a) कैलोरीिमिति के मुख्य समीकरण को स्पष्ट लिखें।
b) जल और कैलोरीमीटर दोनों द्वारा अवशोषित ऊष्मा को जोड़ें।
c) सैद्धांतिक निष्कर्ष को स्पष्ट शब्दों में उत्तर दें।

 

Question 10.15: कुछ सामान्य गैसों के कक्ष ताप पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओ के प्रेक्षण नीचे दिए गए हैं:
गैस                                  मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता \( (C_v) \) (\( \text{cal mo1}^{-1}\text{ K}^{-1} \))
हाइड्रोजन                            \( 4.87 \)
नाइट्रोजन                            \( 4.97 \)
ऑक्सीजन                             \( 5.02 \)
नाईट्रिक ऑक्साइड                 \( 4.99 \)
कार्बन मोनोक्साइड                \( 5.01 \)
क्लोरीन                             \( 6.17 \)
इन गैसों की मापी गई मोलर विशिष्ट ऊष्मािताएँ एक परमाणुुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मािताओं से सुस्पष्ट रूप से से भिन्न हैं। प्रतीकात्मक रूप में किसी एक परमाणुुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( 2.92\text{ cal/mol K} \) होती है। इस अंतर का स्पष्टीकरण कीजिए। क्लोरीन के लिए कुछ अधिक मान (शेष की अपेक्षा) होने से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

Answer:

दी गई तालिका में सूचीबद्ध गैसें परमाणुुक हैं। गैसों में स्वतंत्र स्थानांतरीय गति के अतिरिक्त, उनके पास गति करने के अन्य स्वतंत्र रूप (गति के तरीके हैं)।
इन गैसों के तापमान को बढ़ाने के लिए ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए। यह गति के सभी तरीकों की औसत ऊर्जा को बढ़ाता है। अतः द्विपरमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा एकपरमाणुक गैसों की तुलना में अधिक होती है।
यदि गति के केवल घूर्णन प्रकार पर विचार किया जाए तो, द्विपरमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा:
\( C_v = \frac{5}{2}R = \frac{5}{2} \times 1.98 = 4.95\text{ cal mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
क्लोरीन के अपवाद के साथ, तालिका में दिए गए सभी प्रेक्षण \( \frac{5}{2}R \) से सहमत हैं।
ऐसा इसलिए है क्योंकि कमरे के तापमान पर, क्लोरीन में गति के घूर्णन और स्थानांतरीय तरीके के अलावा गति के कंपन रूप भी होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• स्वतंत्रता की कोटि (Degrees of Freedom) मोलर विशिष्ट ऊष्मा को निर्धारित करती है।
• एकपरमाणुक गैस के लिए \( C_v = \frac{3}{2}R \) और द्विपरमाणुक के लिए \( \frac{5}{2}R \) होती है।
• उच्च तापमान या जटिल अणुओं में कंपन ऊर्जा भी जुड़ जाती है।

आम गलतियाँ:

• स्वतंत्रता की कोटि की अवधारणा को गलत समझना।
• क्लोरीन के उच्च मान के कारण (कंपन ऊर्जा) को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) स्वतंत्रता की कोटि के आधार पर विशिष्ट ऊष्मा की व्याख्या करें।
b) द्विपरमाणुक गैसों के मानक मान \( \frac{5}{2}R \) का उल्लेख करें।
c) क्लोरीन के अपवाद का कारण कंपन गति को बताएँ।

 

Question 10.16: \( 101^\circ\text{F} \) ताप ज्वर से पीड़ित किसी बच्चे को एन्टीपायरीन (ज्वर कम करने की दवा) दी गई जिसके कारण उसके शरीर से पसीने के वाष्पन की दर में वृद्धि हो गई। यदि 20 मिनट में ज्वर \( 98^\circ\text{F} \) तक गिर जाता है तो दवा द्वारा होने वाले अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर क्या है? यह मानिए कि उष्णता का एकमात्र उपाय वाष्पन ही है। बच्चे का द्रव्यमान \( 30\text{ kg} \) है। मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के लगभग बराबर है तथा उस ताप पर जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा \( 580\text{ cal g}^{-1} \) है।

Answer:

बच्चे के शरीर का प्रारंभिक तापमान, \( T_1 = 101^\circ\text{F} \) तथा अंतिम तापमान, \( T_2 = 98^\circ\text{F} \)
तापमान में बदलाव, \( \Delta T = (101 - 98) \times \frac{5}{9} = \frac{5}{3}^\circ\text{C} \)
तापमान कम करने में लगने वाला समय, \( t = 20\text{ min} \) तथा बच्चे का द्रव्यमान, \( m = 30\text{ kg} = 30 \times 10^3\text{ g} \)
मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा = जल की विशिष्ट ऊष्मा \( c = 1000\text{ cal/kg}/^\circ\text{C} \)
जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा, \( L = 580\text{ cal g}^{-1} \)
बच्चे के शरीर में ऊष्मा हास को इस प्रकार दिया जाता है:
\( \Delta Q = mc\Delta T = 30 \times 1000 \times \left(101 - 98\right) \times \frac{5}{9} = 50000\text{ cal} \)
मान लीजिए 20 मिनट में बच्चे के शरीर से वाष्पित पानी का द्रव्यमान \( m_1 \) है। पानी के माध्यम से ऊष्मा में कमी इस प्रकार दिया जा सकता है:
\( \Delta Q = m_1 L \Rightarrow m_1 = \frac{\Delta Q}{L} = \frac{50000}{580} = 86.2\text{ g} \)
\( \therefore \) दवा के कारण होने वाले अतिरिक्त वाष्पीकरण की औसत दर = \( \frac{m_1}{t} = \frac{86.2}{200} = 4.3\text{ g/min} \)

मुख्य बिंदु:

• तापमान परिवर्तन को फारेनहाइट से सेल्सियस में बदलना \( (\Delta T_{\text{C}} = \frac{5}{9}\Delta T_{\text{F}}) \) ।
• शरीर द्वारा छोड़ी गई ऊष्मा \( \Delta Q = mc\Delta T \) का उपयोग करना।
• वाष्पन द्वारा ऊष्मा हानि \( \Delta Q = m_1L \) से वाष्पीकृत जल की मात्रा ज्ञात करना।

आम गलतियाँ:

• फारेनहाइट अंतर को सीधे सेल्सियस में उपयोग करना।
• समय (मिनट) को दर निकालते समय ध्यान न रखना।

Exam Tips:

a) फारेनहाइट से सेल्सियस का रूपांतरण सही सूत्र से करें।
b) ऊर्जा संरक्षण का नियम लगाकार वाष्पीकृत पानी का द्रव्यमान निकालें।
c) दर ज्ञात करने के लिए समय से भाग देना न भूलें।

 

Question 10.17: थर्मोकोल का बना हिम बॉक्स विशषेकर गर्मियों में कम मात्र के पक्के भोजन के भंडारण का सस्ता तथा दक्ष साधन है। \( 30\text{ cm} \) भुजा के किसी हिम बॉक्स की मोटाई \( 5.0\text{ cm} \) है। यदि इस बॉक्स में \( 4.0\text{ kg} \) हिम रखा है तो \( 6\text{ h} \) के पश्चात् बचे हिम की मात्रा का आकलन कीजिए। बाहरी ताप \( 45^\circ\text{C} \), है तथा थर्मोकोल की ऊष्मा चालकता \( 0.01\text{ J s}^{-1}\text{ m}^{-1}\text{ K}^{-1} \). है। (हिम की संगलन ऊष्मा = \( 335 \times 10^3\text{ J kg}^{-1} \)).

Answer:

दिए गए घनाकार हिम बॉक्स की भुजा, \( s = 30\text{ cm} = 0.3\text{ m} \), हिम बॉक्स की मोटाई, \( l = 5.0\text{ cm} = 0.05\text{ m} \)
हिम बॉक्स में रखे बर्फ का द्रव्यमान, \( m = 4\text{ kg} \) तथा समय अंतराल, \( t = 6\text{ h} = 6 \times 60 \times 60\text{ s} \)
बाहर का तापमान, \( T = 45^\circ\text{C} \)
थर्मोकोल की ऊष्मा चालकता, \( K = 0.01\text{ J s}^{-1}\text{ m}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
हिम की संगलन ऊष्मा, \( L = 335 \times 10^3\text{ J kg}^{-1} \)
माना \( m' \) बर्फ की कुल मात्रा है जो 6 घंटे में पिघलती है।
भोजन द्वारा क्षय की गई ऊष्मा की मात्रा: \( \theta = \frac{KA(T - 0)t}{l} \)
जहाँ, \( A = \) बॉक्स का सतह क्षेत्र = \( 6s^2 = 6 \times (0.3)^2 = 0.54\text{ m}^3 \)
शेष बर्फ का द्रव्यमान = \( 4 - 0.313 = 3.687\text{ kg} \)
\( \theta = \frac{0.01 \times 0.54 \times (45) \times 6 \times 60 \times 60}{0.05} = 104976\text{ J} \)
\( \therefore \theta = m'L \Rightarrow m' = \frac{104976}{335 \times 10^3} = 0.313\text{ kg} \)
शेष बर्फ का द्रव्यमान = \( 4 - 0.313 = 3.687\text{ kg} \)
अतः, 6 घंटे के बाद शेष बर्फ की मात्रा \( 3.687\text{ kg} \) है।

मुख्य बिंदु:

• ऊष्मा चालन का नियम: \( Q = \frac{KA\Delta T t}{l} \) ।
• कुल सतह क्षेत्र \( 6s^2 \) होता है।
• पिघली हुई बर्फ की मात्रा \( m' = \frac{Q}{L} \) से निकाली जाती है।

आम गलतियाँ:

• सतह क्षेत्रफल निकालते समय घन के 6 फलकों को न जोड़ना।
• समय को घंटों से सेकंड में न बदलना।

Exam Tips:

a) ऊष्मा चालन के सूत्र का सावधानी से प्रयोग करें।
b) सभी भौतिक राशियों को SI पद्धति में बदलें।
c) प्रारंभिक बर्फ में से पिघली बर्फ घटाकर शेष बर्फ ज्ञात करें।

 

Question 10.18: किसी पीतल के बॉयलर की पेंदी का क्षेत्रफल \( 0.15\text{ m}^2 \) तथा मोटाई \( 1.0\text{ cm} \) है। किसी गैस स्टोव पर रखने पर इसमें \( 6.0\text{ kg/min} \) की दर से जल उबलता है। बॉयलर के संपर्क की ज्वाला के भाग का ताप आकलित कीजिए। पीतल की ऊष्मा चालकता = \( 109\text{ J s}^{-1}\text{ m}^{-1}\text{ K}^{-1} \); जल की वाष्पन ऊष्मा = \( 2256 \times 10^3\text{ J kg}^{-1} \).

Answer:

बॉयलर का आधार क्षेत्रफल, \( A = 0.15\text{ m}^2 \) बॉयलर की मोटाई, \( l = 1.0\text{ cm} = 0.01\text{ m} \)
पानी के उबलने की दर, \( R = 6.0\text{ kg/min} \)
द्रव्यमान, \( m = 6\text{ kg} \) तथा समय, \( t = 1\text{ min} = 60\text{ s} \)
पीतल की ऊष्मा चालकता, \( K = 109\text{ J s}^{-1}\text{ m}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
जल की वाष्पन ऊष्मा, \( L = 2256 \times 10^3\text{ J kg}^{-1} \)
बॉयलर के पीतल के आधार के माध्यम से पानी में प्रवाहित होने वाली ऊष्मा की मात्रा निम्न द्वारा दी जाती है:
\( \theta = \frac{KA(T_1 - T_2)t}{l} \)     (i)
जहाँ, \( T_1 = \) बॉयलर के संपर्क में तلا का तापमान तथा \( T_2 = \) पानी का कथनांक = \( 100^\circ\text{C} \)
पानी उबालने के लिए आवश्यक गर्मी: \( \theta = mL \)     (ii)
समीकरण (i) और (ii) को बराबर करने पर, \( mL = \frac{KA(T_1 - T_2)t}{l} \Rightarrow T_1 - T_2 = \frac m L l K A t \)
\( T_1 - 100 = \frac{6 \times 2256 \times 10^3 \times 0.01}{109 \times 0.15 \times 60} = 137.98^\circ\text{C} \)
इसलिए, बॉयलर के संपर्क वाले भाग में तلا का तापमान \( 237.98^\circ\text{C} \) है।

मुख्य बिंदु:

• चालन द्वारा स्थानांतरित ऊष्मा \( \frac{KA\Delta T t}{l} \) और गुप्त ऊष्मा \( mL \) को बराबर करना।
• पानी के उबलने की दर से प्रति सेकंड ऊष्मा की आवश्यकता निकालना।
• तापीय संतुलन समीकरण का उपयोग करना।

आम गलतियाँ:

• वाष्पन ऊष्मा के मान में घातों की गलती करना।
• समय को सेकंड में परिवर्तित न करना।

Exam Tips:

a) ऊष्मा चालन और गुप्त ऊष्मा के सूत्रों का सही संयोजन करें।
b) तापमान अंतर से \( T_1 \) का मान निकालते समय क्वथनांक (\( 100^\circ\text{C} \)) जोड़ना न भूलें।
c) गणना को दो चरणों में हल करें।

 

Question 10.19: स्पष्ट कीजिए कि क्यों-
(a) अधिक परावर्तकता वाला पिंड अल्प उत्सर्जक होता है।
(b) कंकुपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास अधिक शीतल प्रतीत होता है।
(c) कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशानकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है, खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्टी में रखते हैं, तो वह ताप का सही मान मापता है।
(d) बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।
(e) भाप के परिचलन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचलन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को ऊष्मा बनाने में अधिक दक्ष हैं।

Answer:

(a) एक अधिक परावर्तकता वाला पिंड प्रकाश विकिरणों का एक अल्प अवशोषक होता है। एक अल्प अवशोषक साथ में विकिरणों का एक अल्प उत्सर्जक भी होता है। इसलिए, एक अधिक परावर्तकता वाला पिंड एक अल्प उत्सर्जक है।
(b) पीतल उष्मा का सुचालक है। जब कोई पीतल के गिलास को छूता है, तो शरीर से ऊष्मा पीतल के गिलास आसानी से संचालित हो जाती है। इसलिए, शरीर का तापमान कम हो जाता है और व्यक्ति ठंडक महसूस करता है। लकड़ी उष्मा की कुचालक है। जब कोई लकड़ी की ट्रे को छूता है, तो शरीर से लकड़ी की ट्रे में बहुत कम उष्मा का संचालन होता है। इसलिए, शरीर के तापमान में केवल एक नगण्य गिरावट होती है और व्यक्ति को ठंडक का अनुभव नहीं होता है।
(c) एक आदर्श कृष्णिका विकिरण के लिए एक से अंशानकन प्रकाशतापमापी खुले में रखे लाल गर्म लोहे के टुकड़े के तापमान के लिए बहुत कम मान देता है। ब्लैक बॉडी रेडिएशन निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त किया जा सकता है: \( E = \sigma(T^4 - T_0^4) \)
(d) वायुमंडल के बिना, पृथ्वी असहनीय रूप से ठंडी होगी। वायुमंडल की गैसों की अनुपस्थिति में कोई अतिरिक्त ऊष्मा रोक नहीं पायेगी। इस प्रकार पृथ्वी की सतह से सारी गर्मी वापस विकीर्ण हो जाएगी।
(e) गर्म पानी के परिचलन के अपेक्षा भाप के परिचलन पर आधारित एक तापन निकाय एक इमारत को उष्ण रखने में अधिक दक्ष होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि भाप में गुप्त ऊष्मा (\( 540 \) कैलोरी/ग्राम) के रूप में अतिरिक्त ऊष्मा होती है।

मुख्य बिंदु:

• किरचॉफ का नियम: अच्छा अवशोषक ही अच्छा उत्सर्जक होता है।
• ऊष्मीय चालकता के कारण धातुओं और लकड़ी का अलग अनुभव होना।
• भाप में गुप्त ऊष्मा के कारण अधिक ऊष्मा देने की क्षमता होती है।

आम गलतियाँ:

• उत्सर्जक और अवशोषक के संबंध को उल्टा समझ लेना।
• गुप्त ऊष्मा के महत्व को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक कथन का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट और सटीक शब्दों में लिखें।
b) विकिरण और चालन के नियमों का संदर्भ दें।
c) व्यावहारिक उदाहरणों से तर्कों को पुष्ट करें।

 

Question 10.20: किसी पिंड का ताप 5 मिनट में \( 80^\circ\text{C} \) से \( 50^\circ\text{C} \) हो जाता है। यदि परिवेश का ताप \( 20^\circ\text{C} \) है, तो उस समय का परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप \( 60^\circ\text{C} \) से \( 30^\circ\text{C} \) हो जाएगा।

Answer:

न्यूटन के शीतलन के नियम के अनुसार,
\( \frac{dT}{dt} = -K(T - T_0) \Rightarrow \frac{dT}{K(T - T_0)} = -Kdt \)     (i)
जहाँ, पिंड का तापमान = \( T \) तथा परिवेश का तापमान, \( T_0 = 20^\circ\text{C} \), \( K \) एक नियतांक है।
समय \( t = 5 \) मिनट = \( 300\text{ s} \) के साथ पिंड का तापमान \( 80^\circ\text{C} \) से \( 50^\circ\text{C} \) तक गिर जाता है।
समीकरण (i) का समाकलन करने पर हम प्राप्त करते हैं:
\( \int_{80}^{50} \frac{dT}{K(T - T_0)} = -\int_0^{300} Kdt \)
\( \Rightarrow [\log_e(T - T_0)]_{80}^{50} = -K[t]_0^{300} \)
\( \frac{2.3026}{K} \log_{10} \frac{50 - 20}{80 - 20} = -300 \)
\( \Rightarrow \frac{2.3026}{K} \log_{10} 2 = -300 \)
\( \Rightarrow \frac{-2.3026}{300} \log_{10} 2 = K \)     (ii)
समय \( t' \) में पिंड का तापमान \( 60^\circ\text{C} \) से \( 30^\circ\text{C} \) तक गिर जाता है इसलिए, हम प्राप्त करते हैं:
\( \frac{2.3026}{K} \log_{10} \frac{60 - 20}{30 - 20} = -t' \)
\( \Rightarrow \frac{-2.3026}{t'} \log_{10} 4 = K \)     (iii)
समीकरण (ii) और (iii) को समान करते हुए, हम प्राप्त करते हैं:
\( \frac{-2.3026}{t'} \log_{10} 4 = \frac{-2.3026}{300} \log_{10} 2 \)
\( \therefore t' = 300 \times 2 = 600\text{ s} = 10\text{ min} \)
इस प्रकार, पिंड को \( 60^\circ\text{C} \) से \( 30^\circ\text{C} \) तक ठंडा करने में 10 मिनट का समय लगता है।

मुख्य बिंदु:

• न्यूटन का शीतलन नियम: \( \frac{dT}{dt} = -K(T - T_0) \) ।
• समाकलन विधि का प्रयोग करके तापमान और समय का संबंध स्थापित करना।
• लॉगरिथम के गुणों का उपयोग करके समय ज्ञात करना।

आम गलतियाँ:

• परिवेश के तापमान \( T_0 \) को सूत्र में घटाना भूल जाना।
• समाकलन करते समय सीमाओं (Limits) को गलत रखना।

Exam Tips:

a) न्यूटन के शीतलन नियम का समाकलित रूप याद रखें।
b) दोनों स्थितियों के समीकरण बनाकर उनकी तुलना करें।
c) गणना में लघुगणक (Logarithm) के सूत्रों का सही प्रयोग करें।

 

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