NCERT Solutions Class 11 Physics Chapter 08 Mechanical Properties of Solids (ठोसों के यांत्रिक गुण) in Hindi

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Question Q1: किसी आदर्श द्रव का अवरूपण गुणांक होता है [D]. कोई परिमित, छोटा, शून्येतर नियतमान

Answer:

किसी आदर्श द्रव के लिए अपरूपण तनाव सहन करने की क्षमता नहीं होती है, इसलिए इसका अवरूपण गुणांक शून्य होता है।

मुख्य बिंदु:

• आदर्श द्रव में कोई स्थायी रूप से अपरूपण बल सहन करने का गुण नहीं होता।
• अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति का अनुपात अवरूपण गुणांक कहलाता है।
• आदर्श द्रवों का अवरूपण गुणांक शून्य होता है।

आम गलतियाँ:

• छात्र इसे आयतन प्रत्यास्थता गुणांक समझ लेते हैं।
• शून्य के स्थान पर अनंत मान लिख देना।
• परिभाषा को ठीक से न समझना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प पहचानते समय परिभाषाओं को याद रखें।
b) आदर्श द्रव की विशेषताओं को स्पष्ट रूप से समझें।
c) इकाई और विमाओं का विशेष ध्यान रखें।

 

Question Q2: यदि किसी तार की अपनी मूल लंबाई घटकर आधी रह जाती है, तो वह अधिकतम लोड, जो यह तार बिना टूटे सहन कर सकता है,

Answer:

तार द्वारा बिना टूटे सहन किया जाने वाला अधिकतम लोड उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है, न कि उसकी लंबाई पर। अतः लंबाई आधी होने पर भी अधिकतम लोड उतना ही (समान) रहेगा।

मुख्य बिंदु:

• अधिकतम भार केवल तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल और उसकी तन्य सामर्थ्य पर निर्भर करता है।
• लंबाई बदलने से उसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल नहीं बदलता।
• टूटने वाला प्रतिबल पदार्थ का एक निश्चित गुण है।

आम गलतियाँ:

• लंबाई घटने से लोड कम या ज्यादा होने का भ्रम होना।
• यंग गुणांक और लोड का संबंध गलत समझना।
• क्षेत्रफल और लंबाई के प्रभाव को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) ऐसे वैचारिक प्रश्नों में सूत्रों के भौतिक अर्थ को समझें।
b) मुख्य कारकों की पहचान करें जिन पर राशि निर्भर करती है।
c) उत्तर को संक्षिप्त और स्पष्ट रखें।

 

Question Q3: किसी तार का ताप दोगुना कर दिया जाता है तो इसका यंग प्रत्यास्थता गुणांक

Answer:

ताप बढ़ाने पर पदार्थों के अंतर-परमाणुक बल कमजोर हो जाते हैं, जिसके कारण उनकी प्रत्यास्थता घट जाती है। इसलिए, किसी तार का ताप बढ़ाने पर उसका यंग प्रत्यास्थता गुणांक घट जाता है।

मुख्य बिंदु:

• ताप में वृद्धि से अंतर-परमाणुक दूरियाँ बढ़ती हैं।
• अंतरा-आणविक आकर्षण बल कम होने से पदार्थ नरम हो जाता है।
• अधिकांश धातुओं का यंग प्रत्यास्थता गुणांक ताप बढ़ने पर घटता है।

आम गलतियाँ:

• ताप का प्रत्यास्थता पर प्रभाव न समझ पाना।
• इसे लंबाई में परिवर्तन से जोड़ना।
• उल्टा प्रभाव (बढ़ना) मान लेना।

Exam Tips:

a) तापमान और प्रत्यास्थता के संबंध को हमेशा याद रखें।
b) कारण सहित उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
c) महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदुओं को नोट करें।

 

Question Q4: किसी कमानी के एक सिरे पर लोड अनुप्रयुक्त करके इसे खींचा जाता है। कमानी में उत्पन्न विकृति है [C]. अनुदैर्ध्य एवं अवरूपण

Answer:

जब किसी कमानी (spring) को खींचा जाता है, तो उसकी लंबाई में परिवर्तन होता है (अनुदैर्ध्य विकृति) और साथ ही तार की अक्षीय लंबाई के सापेक्ष मरोड़ या एंठन भी उत्पन्न होती है (अवरूपण विकृति)।

मुख्य बिंदु:

• कमानी को खींचने पर अनुदैर्ध्य विकृति उत्पन्न होती है।
• कमानी में तार के ऐंठे जाने के कारण अवरूपण विकृति भी होती है।
• दोनों प्रकार की विकृतियाँ एक साथ कार्य करती हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल अनुदैर्ध्य विकृति को सही मानना।
• कमानी की संरचना और बल के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• दोनों विकृतियों के संयुक्त प्रभाव को न समझना।

Exam Tips:

a) कमानी जैसी जटिल संरचनाओं में उत्पन्न बलों का विश्लेषण करें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी संभावित विकल्पों की जाँच करें।
c) भौतिक घटनाओं के व्यावहारिक पहलुओं को समझें।

 

Question Q5: सर्वसम विमाओं की दो बेलनाकार छड़ें जिनमें – में एक रबड़ की और दूसरी स्टील की है, पर विचार कीजिए। दोनों छड़ों का एक सिरा छत से दृढ़तापूर्वक जड़ दिया गया है। प्रत्येक छड़ के मुक्त सिरे के केंद्र पर कोई द्रव्यमान M संलग्न किया गया है। [D]. स्टील की छड़ में, आकृति में बोधगम्य परिवर्तन हुए बिना वृद्धि होगी, परंतु रबड़ की छड़ में वृद्धि होगी तथा इसका निचला किनारा केंद्र पर पतला होकर नोंक बन जाएगा।

Answer:

स्टील अत्यधिक प्रत्यास्थ है, इसलिए कम द्रव्यमान के कारण उसकी लंबाई में बहुत कम और नगण्य परिवर्तन होता है। इसके विपरीत, रबड़ कम प्रत्यास्थ होने के कारण अधिक विकृत होती है और इसका आयतन नियत रहने के कारण निचला सिरा केंद्र की ओर सिकुड़कर नुकीला हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• स्टील का यंग गुणांक रबड़ की तुलना में बहुत अधिक होता है।
• रबड़ में पॉइजन अनुपात के कारण पार्श्व संकुचन अधिक होता है।
• कम भार के कारण भी रबड़ की आकृति में स्पष्ट परिवर्तन दिखता है।

आम गलतियाँ:

• दोनों सामग्रियों की प्रत्यास्थता के अंतर को न समझना।
• आयतन संरक्षण और पार्श्व संकुचन के प्रभाव को छोड़ देना।
• गलत विकल्प का चयन करना।

Exam Tips:

a) विभिन्न पदार्थों के भौतिक गुणों की तुलना करना सीखें।
b) प्रायोगिक और तार्किक प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें।
c) आकृतियों में होने वाले परिवर्तनों के पीछे के भौतिक सिद्धांतों को समझें।

 

Question Q6: कोई तार छत से लटका है तथा दूसरे सिरे पर लटके भार F के द्वारा तानित है। छत द्वारा तार पर लगाया गया बल लटकाए गए भार के समान एवं विपरीत है। [D]. तार की किसी भी अनुप्रस्थ काट A पर तनन प्रतिबल F है।

Answer:

साम्यावस्था में, तार के किसी भी बिंदु पर नीचे की ओर कुल खींचने वाला बल भार F के बराबर होता है। चूंकि तार का द्रव्यमान नगण्य माना जाता है, अतः अनुप्रस्थ काट A पर तनन प्रतिबल का मान \( \frac{F}{A} \) न होकर यहाँ सीधे बल F के संदर्भ में प्रतिबल की परिभाषा के अनुसार \( F \) (या प्रति इकाई क्षेत्रफल पर F) होता है।

मुख्य बिंदु:

• साम्यावस्था में बल सभी बिंदुओं पर संतुलित रहते हैं।
• भार F के कारण पूरे तार में समान तनाव उत्पन्न होता है।
• अनुप्रस्थ काट पर प्रतिबल आंतरिक पुनर्स्थापक बल के बराबर होता है।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल के साथ बल को गलत तरीके से विभाजित करना।
• प्रतिक्रिया बल की दिशा को गलत समझना।
• न्यूटन के तीसरे नियम का गलत अनुप्रयोग करना।

Exam Tips:

a) मुक्त पिंड आरेख (FBD) बनाकर बलों को समझें।
b) प्रतिबल की मूल परिभाषा को स्पष्ट रखें।
c) विकल्पों को ध्यान से पढ़कर सही निष्कर्ष निकालें।

 

Question Q7: किसी आदर्श द्रव के लिए [D]. अवरूपण गुणांक शून्य होता है।

Answer:

आदर्श द्रव की परिभाषा के अनुसार, वे अपरूपण प्रतिबल को बिल्कुल सहन नहीं कर सकते। यदि उन पर कोई मामूली सा भी अपरूपण बल लगाया जाए, तो वे लगातार प्रवाहित होने लगते हैं, इसलिए आदर्श द्रव का अवरूपण गुणांक शून्य होता है।

मुख्य बिंदु:

• आदर्श द्रवों में श्यानता शून्य होती है।
• वे अपरूपण बलों के विरुद्ध कोई प्रतिरोध उत्पन्न नहीं करते।
• अपरूपण गुणांक अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति का अनुपात है।

आम गलतियाँ:

• आयतन गुणांक और अवरूपण गुणांक में भ्रमित होना।

• मान को अनंत या अपरिमित समझ लेना।
• आदर्श द्रव और वास्तविक द्रव में अंतर न करना।

Exam Tips:

a) आदर्श स्थितियों और वास्तविक स्थितियों के गुणों को अलग-अलग याद रखें।
b) थ्योरी आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का नियमित अभ्यास करें।
c) मुख्य शब्दों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question Q8: समान व्यास के कॉपर एवं स्टील के तारों को सिरे से सिरा मिलाकर जोड़ा गया है। इस संयुक्त तार पर कोई विरूपक बल F आरोपित किया जाता है जो इसमें 1 cm की कुल वृद्धि कर देता है। इन दोनों तारों में [A]. समान प्रतिबल होता है।

Answer:

जब दो तारों को श्रेणीक्रम में (सिरे से सिरा मिलाकर) जोड़ा जाता है, तो दोनों पर लगने वाला खींचने वाला बल (भार) समान होता है। चूँकि दोनों तारों का व्यास भी समान है, इसलिए उनका अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल भी समान होगा, जिसके कारण दोनों में उत्पन्न प्रतिबल समान होगा।

मुख्य बिंदु:

• श्रेणी संयोजन में प्रत्येक तार पर तनाव बल समान रहता है।
• समान व्यास होने के कारण क्षेत्रफल \( A \) समान होता है।
• प्रतिबल \( \sigma = \frac{F}{A} \) होता है, अतः प्रतिबल समान होगा।

आम गलतियाँ:

• लंबाई में कुल वृद्धि को दोनों में समान मान लेना (यह आवश्यक नहीं है)।
• यंग गुणांक भिन्न होने के कारण प्रतिबल भिन्न मान लेना।
• संयोजन के प्रकार को न समझना।

Exam Tips:

a) श्रेणी और समांतर संयोजनों के नियमों को स्पष्ट रखें।
b) यह पहचानें कि कौन सी राशि स्थिर रहती है (यहाँ बल F)।
c) सूत्रों की मदद से तार्किक निष्कर्ष निकालें।

 

Question 8.1: 4.7 m लंबे व \( 3.0 \times 10^{-5}\text{ m}^2 \) अनुप्रस्थ काट के स्टील के तार तथा 3.5 m लंबे व \( 4.0 \times 10^{-5}\text{ m}^2 \) अनुप्रस्थ काट के तांबे के तार पर दिए गए समान परिमाण के भारों को लटकाने पर उनकी लंबाई में समान वृद्धि होती है। स्टील तथा तांबे के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों में क्या अनुपात है?

Answer:

दिया गया है:
स्टील के तार की लंबाई, \( L_1 = 4.7\text{ m} \)
स्टील के तार का क्षेत्रफल, \( A_1 = 3.0 \times 10^{-5}\text{ m}^2 \)
तांबे के तार की लंबाई, \( L_2 = 3.5\text{ m} \)
तांबे के तार का क्षेत्रफल, \( A_2 = 4.0 \times 10^{-5}\text{ m}^2 \)
लंबाई में समान बदलाव, \( \Delta L_1 = \Delta L_2 = \Delta L \)
लगाया गया बल \( F_1 = F_2 = F \)
यंग गुणांक का सूत्र है: \( Y = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta L} \)
स्टील के लिए यंग मापांक:
\( Y_1 = \frac{F \times 4.7}{3.0 \times 10^{-5} \times \Delta L} \)    --- (i)
तांबे के लिए यंग मापांक:
\( Y_2 = \frac{F \times 3.5}{4.0 \times 10^{-5} \times \Delta L} \)    --- (ii)
समीकरण (i) को (ii) से भाग देने पर:
\( \frac{Y_1}{Y_2} = \frac{4.7 \times 4.0 \times 10^{-5}}{3.0 \times 10^{-5} \times 3.5} \)
\( \frac{Y_1}{Y_2} = \frac{18.8}{10.5} \approx 1.79:1 \)

मुख्य बिंदु:

• यंग प्रत्यास्थता गुणांक का सही सूत्र उपयोग करना।
• दी गई समान राशियों (बल और लंबाई में वृद्धि) को समीकरण से काटना।
• दशमलव भिन्नों को सरल करके अनुपात ज्ञात करना।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल और लंबाई के मानों को आपस में बदल देना।
• समीकरणों के विभाजन में गणितीय गणना की त्रुटि करना।
• इकाइयों को बिना समरूप किए हल करना।

Exam Tips:

a) अनुपात वाले प्रश्नों में मानों को सूत्र में रखकर सीधे समीकरणों का अनुपात लें।
b) गणना करते समय लघुगणक या सीधी भाग विधि का सावधानी से प्रयोग करें।
c) अंतिम उत्तर को अनुपात के रूप में स्पष्ट लिखें।

 

Question 8.2: नीचे चित्र 8.9 में किसी दिए गए पदार्थ के लिए प्रतिबल-विकृति वक्र दर्शाया गया है। इस पदार्थ के लिए (a) यंग प्रत्यास्थता गुणांक, तथा (b) संत्रिकत पराभव सामर्थ्य क्या है?

Answer:

दिए गए ग्राफ से:
(a) यंग प्रत्यास्थता गुणांक, \( Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} \)
रैखिक क्षेत्र में, प्रतिबल \( = 150 \times 10^6\text{ N/m}^2 \) तथा संगत विकृति \( = 0.002 \)
\( Y = \frac{150 \times 10^6}{0.002} = 7.5 \times 10^{10}\text{ N/m}^2 \)
(b) संत्रिकत पराभव सामर्थ्य (Yield strength) वह अधिकतम प्रतिबल है जहाँ तक पदार्थ हुक के नियम का पालन करता है या बिना स्थायी विरूपण के खींचा जा सकता है। ग्राफ से यह मान लगभग \( 300 \times 10^6\text{ N/m}^2 \) (या दिए गए ग्राफ के अनुसार अधिकतम सीमा) है।

मुख्य बिंदु:

• ग्राफ के रैखिक भाग से यंग गुणांक ज्ञात किया जाता है।
• पराभव बिंदु स्थायी विरूपण की शुरुआत को दर्शाता है।
• प्रतिबल और विकृति के मानो को ग्राफ से सही पढ़ना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• ग्राफ के गैर-रैखिक क्षेत्र से यंग गुणांक की गणना करना।
• घात (powers of 10) में गलती करना।
• पराभव सामर्थ्य की परिभाषा न समझना।

Exam Tips:

a) ग्राफ आधारित प्रश्नों में अक्षों पर दी गई इकाइयों और पैमानों को ध्यान से देखें।
b) यंग गुणांक निकालने के लिए हमेशा सीधी रेखा (रैखिक भाग) वाले बिंदुओं को चुनें।
c) उत्तर में उचित SI मात्रक अवश्य लिखें।

 

Question 8.3: दो पदार्थों A और B के लिए प्रतिबल-विकृति ग्राफ चित्र 9.12 में दर्शाए गए हैं। (a) किस पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है? (b) दोनों पदार्थों में कौन अधिक मजबूत है?

Answer:

(a) पदार्थ A का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है क्योंकि दिए गए प्रतिबल के लिए पदार्थ A की विकृति कम है (अर्थात ग्राफ का ढलान अधिक है)।
(b) पदार्थ A दोनों में सबसे मजबूत है क्योंकि यह टूटने से पहले अधिक अधिकतम प्रतिबल (चरम बिंदु) सहन कर सकता है।

मुख्य बिंदु:

• प्रतिबल-विकृति वक्र का ढलान यंग प्रत्यास्थता गुणांक को प्रदर्शित करता है।
• उच्च ढलान का अर्थ है कम विकृति के लिए अधिक प्रतिबल।
• पराभव बिंदु या चरम बिंदु पदार्थ की मजबूती निर्धारित करता है।

आम गलतियाँ:

• ढलान और क्षेत्रफल में भ्रमित होना।
• मजबूती और प्रत्यास्थता को एक ही भौतिक राशि मान लेना।
• ग्राफ के केवल अंतिम बिंदु को देखना।

Exam Tips:

a) ग्राफ के ढलान \( (\tan \theta) \) और यंग गुणांक के संबंध को समझें।
b) मजबूती (Strength) और प्रत्यास्थता (Elasticity) के बीच अंतर स्पष्ट रखें।
c) कारणों सहित संक्षिप्त उत्तर दें।

 

Question 8.4: निम्नलिखित दो कथनों को ध्यान से पढ़िए और कारण सहित बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य: (a) इस्पात की अपेक्षा रबड़ का यंग गुणांक अधिक है। (b) किसी कुण्डली का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है।

Answer:

(a) असत्य। इस्पात का यंग गुणांक रबड़ की तुलना में बहुत अधिक होता है क्योंकि इस्पात को खींचने के लिए रबड़ से अधिक बल की आवश्यकता होती है।
(b) सत्य। जब किसी कुण्डली (spring) को खींचा जाता है, तो तार की लंबाई बढ़ने के साथ-साथ उसमें मरोड़ या ऐंठन उत्पन्न होती है, जो अपरूपण विकृति और अपरूपण गुणांक से संबंधित होती है।

मुख्य बिंदु:

• इस्पात रबड़ की तुलना में अधिक प्रत्यास्थ है।
• कुण्डली का तनन मुख्य रूप से तार के मरोड़ (अपरूपण) पर निर्भर करता है।
• तनन और अपरूपण के भौतिक सिद्धांतों को समझना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• रबड़ को अधिक प्रत्यास्थ मान लेना (दैनिक जीवन में लोग लचीलेपन को प्रत्यास्थता समझ लेते हैं)।
• कुण्डली के खिंचाव में केवल अनुदैर्ध्य विकृति मानना।
• कथनों के भौतिक कारणों की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) भौतिकी में 'प्रत्यास्थता' शब्द के वैज्ञानिक अर्थ को समझें, न कि सामान्य बोलचाल के अर्थ को।
b) प्रत्येक कथन के लिए स्पष्ट कारण दें।
c) सत्य/असत्य के साथ सही स्पष्टीकरण लिखना आवश्यक है।

 

Question 8.5: \( 0.25\text{ cm} \) व्यास के दो तार, जिनमें एक इस्पात का तथा दूसरा पीतल का है, चित्र 9.13 के अनुसार भारित हैं। बिना भार लटकाये इस्पात तथा पीतल के तारों की लंबाइयाँ क्रमशः \( 1.5\text{ m} \) तथा \( 1.0\text{ m} \) हैं। यदि इस्पात तथा पीतल के यंग गुणांक क्रमशः \( 2.0 \times 10^{11}\text{ Pa} \) तथा \( 0.91 \times 10^{11}\text{ Pa} \) हों तो इस्पात तथा पीतल के तारों में विस्तार की गणना कीजिए।

Answer:

तारों की त्रिज्या, \( r = \frac{d}{2} = \frac{0.25}{2} = 0.125\text{ cm} = 0.125 \times 10^{-2}\text{ m} \)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, \( A = \pi r^2 = \pi (0.125 \times 10^{-2})^2\text{ m}^2 \)
(अ) इस्पात के तार के लिए:
लटकाया गया कुल बल, \( F_1 = (4 + 6)g = 10 \times 9.8 = 98\text{ N} \)
लंबाई, \( L_1 = 1.5\text{ m} \)
यंग गुणांक, \( Y_1 = 2.0 \times 10^{11}\text{ Pa} \)
विस्तार, \( \Delta L_1 = \frac{F_1 \cdot L_1}{A \cdot Y_1} \)
\( \Delta L_1 = \frac{98 \times 1.5}{\pi (0.125 \times 10^{-2})^2 \times 2.0 \times 10^{11}} = 1.49 \times 10^{-4}\text{ m} \)
(ब) पीतल के तार के लिए:
लटकाया गया कुल बल, \( F_2 = 6g = 6 \times 9.8 = 58.8\text{ N} \)
लंबाई, \( L_2 = 1.0\text{ m} \)
यंग गुणांक, \( Y_2 = 0.91 \times 10^{11}\text{ Pa} \)
विस्तार, \( \Delta L_2 = \frac{F_2 \cdot L_2}{A \cdot Y_2} \)
\( \Delta L_2 = \frac{58.8 \times 1.0}{\pi (0.125 \times 10^{-2})^2 \times 0.91 \times 10^{11}} = 1.3 \times 10^{-4}\text{ m} \)

मुख्य बिंदु:

• प्रत्येक तार पर नीचे लटके हुए कुल भारों की सही गणना करना।
• लंबाई में वृद्धि का सूत्र \( \Delta L = \frac{FL}{AY} \) प्रयोग करना।
• इकाइयों को SI पद्धति (मीटर, न्यूटन) में बदलना।

आम गलतियाँ:

• पीतल के तार पर केवल नीचे वाले भार को मानना (ऊपर के तार का भार भी जुड़ता है)।
• त्रिज्या को व्यास के रूप में उपयोग करना।
• पास्कल और न्यूटन प्रति मीटर वर्ग की इकाइयों में गड़बड़ी करना।

Exam Tips:

a) संयुक्त निकायों में प्रत्येक भाग पर लगने वाले बलों का अलग से फ्री-बॉडी आरेख बनाएँ।
b) गणना के चरणों को साफ-सुथरा लिखें ताकि परीक्षा में अंक न कटें।
c) अंत में परिणाम के साथ सही मात्रक अवश्य लिखें।

 

Question 8.6: एल्युमिनियम के किसी घन के किनारे \( 10\text{ cm} \) लंबे हैं। इसकी एक फलक किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से कसकर जड़ी हुई है। इस घन के सम्मुख फलक से \( 100\text{ kg} \) का एक द्रव्यमान जोड़ दिया गया है। एल्युमिनियम का अपरूपण गुणांक \( 25\text{ GPa} \) है। इस फलक का ऊर्ध्वाधर विस्थापन कितना होगा?

Answer:

दिया गया है:
घन की कोर की लंबाई, \( L = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} \)
क्षेत्रफल, \( A = L \times L = 0.1 \times 0.1 = 0.01\text{ m}^2 \)
द्रव्यमान, \( m = 100\text{ kg} \)
बल, \( F = mg = 100 \times 9.8 = 980\text{ N} \)
अपरूपण गुणांक, \( \eta = 25\text{ GPa} = 25 \times 10^9\text{ Pa} \)
अपरूपण गुणांक का सूत्र: \( \eta = \frac{F/A}{\Delta x/L} \)
ऊर्ध्वाधर विस्थापन \( \Delta x = \frac{F \cdot L}{A \cdot \eta} \)
\( \Delta x = \frac{980 \times 0.1}{0.01 \times 25 \times 10^9} \)
\( \Delta x = 3.92 \times 10^{-7}\text{ m} \)

मुख्य बिंदु:

• अपरूपण गुणांक के सूत्र में बल, क्षेत्रफल और लंबाई का सही मान रखना।
• सेंटीमीटर को मीटर में बदलना।
• विस्थापन \( \Delta x \) को अपरूपण विकृति के सूत्र से व्युत्पन्न करना।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल निकालते समय केवल एक भुजा की लंबाई लेना।
• गीगापास्कल (GPa) को पास्कल में न बदलना।
• बल की गणना में गुरुत्वीय त्वरण \( g \) छोड़ देना।

Exam Tips:

a) अपरूपण और अनुदैर्ध्य विकृति के सूत्रों के अंतर को पहचानें।
b) सभी मानों को मानक इकाइयों (SI units) में रखकर ही हल करें।
c) गणना के हर चरण को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 8.7: मृदु इस्पात के चार समरूप खोखले बेलनाकार स्तम्भ \( 50,000\text{ kg} \) द्रव्यमान के किसी बड़े ढाँचे को आधार दिये हुए हैं। प्रत्येक स्तम्भ की भीतरी तथा बाहरी त्रिज्याएँ क्रमशः \( 30\text{ cm} \) तथा \( 60\text{ cm} \) हैं। भार वितरण को एकसमान मानते हुए प्रत्येक स्तम्भ की संपीड़न विकृति की गणना कीजिये।

Answer:

कुल द्रव्यमान, \( M = 50,000\text{ kg} \)
कुल बल, \( F = Mg = 50,000 \times 9.8 = 4.9 \times 10^5\text{ N} \)
चूँकि चार समरूप स्तम्भ हैं, प्रत्येक स्तम्भ पर लगने वाला बल \( F' = \frac{F}{4} = \frac{4.9 \times 10^5}{4} = 122500\text{ N} \)
आंतरिक त्रिज्या, \( r = 30\text{ cm} = 0.3\text{ m} \)
बाहरी त्रिज्या, \( R = 60\text{ cm} = 0.6\text{ m} \)
स्तम्भ के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, \( A = \pi (R^2 - r^2) = \pi (0.6^2 - 0.3^2) = \pi (0.36 - 0.09) = 0.27\pi\text{ m}^2 \)
इस्पात का यंग गुणांक, \( Y = 2 \times 10^{11}\text{ Pa} \)
संपीड़न प्रतिबल \( = \frac{F'}{A} \)
संपीड़न विकृति \( = \frac{\text{प्रतिबल}}{Y} = \frac{F'}{A \cdot Y} \)
\( \text{विकृति} = \frac{122500}{0.27\pi \times 2 \times 10^{11}} \approx 7.22 \times 10^{-7} \)

मुख्य बिंदु:

• कुल भार को स्तंभों की संख्या (4) से विभाजित करना।
• खोखले बेलन के क्षेत्रफल का सूत्र \( \pi(R^2 - r^2) \) उपयोग करना।
• विकृति मात्रकहीन राशि होती है।

आम गलतियाँ:

• चारों स्तंभों के भार को एक ही स्तंभ पर मान लेना।
• क्षेत्रफल निकालते समय त्रिज्याओं के वर्गों का अंतर न लेकर योग कर देना।
• इकाइयों को मीटर में न बदलना।

Exam Tips:

a) बहु-स्तंभ या संयुक्त भार वाले प्रश्नों में कुल भार को समान रूप से विभाजित करें।
b) खोखले बेलन या पाइप के क्षेत्रफल के ज्यामितीय सूत्र को याद रखें।
c) गणना में \( \pi \) के मान का सही उपयोग करें।

 

Question 8.8: तांबे का एक टुकड़ा, जिसका अनुप्रस्थ परिच्छेद \( 15.2\text{ mm} \times 19.1\text{ mm} \) का है \( 44,500\text{ N} \) बल के तनाव से खींचा जाता है, जिससे केवल प्रत्यास्थ विरूपण उत्पन्न हो। उत्पन्न विकृति की गणना कीजिये।

Answer:

दिया गया है:
अनुप्रस्थ काट की विमाएँ: \( 15.2\text{ mm} \) और \( 19.1\text{ mm} \)
क्षेत्रफल, \( A = 15.2 \times 10^{-3}\text{ m} \times 19.1 \times 10^{-3}\text{ m} = 2.9 \times 10^{-4}\text{ m}^2 \)
तनाव बल, \( F = 44500\text{ N} \)
तांबे का यंग गुणांक (या लोच का मापांक), \( Y = 42 \times 10^9\text{ N/m}^2 \)
हुक के नियम से विकृति \( = \frac{\text{प्रतिबल}}{Y} = \frac{F}{A \cdot Y} \)
\( \text{विकृति} = \frac{44500}{2.9 \times 10^{-4} \times 42 \times 10^9} \)
\( \text{विकृति} = 3.65 \times 10^{-3} \)

मुख्य बिंदु:

• मिलीमीटर को मीटर में बदलकर क्षेत्रफल निकालना।
• तांबे के लिए मानक यंग मापांक का मान उपयोग करना।
• प्रतिबल और यंग मापांक के अनुपात से विकृति प्राप्त करना।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल की गणना में \( 10^{-3} \) का वर्ग या सही गुणा न करना।
• यंग गुणांक का मान गलत रखना।
• विकृति के साथ कोई गलत मात्रक लिख देना (विकृति विमाहीन है)।

Exam Tips:

a) सीधी गणना वाले प्रश्नों में सूत्रों को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) घातांकों (Powers of 10) को हल करते समय सावधानी बरतें।
c) उत्तर को मानक वैज्ञानिक संकेतन में लिखें।

 

Question 8.9: \( 1.5\text{ cm} \) त्रिज्या का एक इस्पात का केबिल भार उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि इस्पात के लिए अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल \( 10^8\text{ N m}^{-2} \) है, तो उस अधिकतम भार की गणना कीजिए जिसे केबिल उठा सकता है।

Answer:

दिया गया है:
केबिल की त्रिज्या, \( r = 1.5\text{ cm} = 0.015\text{ m} \)
अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल \( = 10^8\text{ N/m}^2 \)
क्षेत्रफल, \( A = \pi r^2 = \pi (0.015)^2 = \pi \times 2.25 \times 10^{-4}\text{ m}^2 \)
अधिकतम भार (बल) \( F = \text{प्रतिबल} \times \text{क्षेत्रफल} \)
\( F = 10^8 \times \pi \times 2.25 \times 10^{-4} \)
\( F = 2.25 \times 10^4 \times \pi \)     (जहाँ \( \pi \approx 3.14 \))
\( F \approx 7.065 \times 10^4\text{ N} \)

मुख्य बिंदु:

• अधिकतम भार, अधिकतम प्रतिबल और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल का गुणनफल होता है।
• त्रिज्या को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना आवश्यक है।
• केबिल का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल वृत्ताकार होता है \( (\pi r^2) \).

आम गलतियाँ:

• व्यास और त्रिज्या में भ्रम होना।
• क्षेत्रफल के सूत्र में \( r \) का वर्ग न करना।
• इकाइयों के रूपांतरण में भूल करना।

Exam Tips:

a) 'अधिकतम भार' पूछे जाने पर प्रतिबल और क्षेत्रफल के संबंध का उपयोग करें।
b) गणना में \( \pi \) का मान \( 3.14 \) रखकर अंत में सही उत्तर प्राप्त करें।
c) बल का मात्रक न्यूटन (N) स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 8.10: \( 15\text{ kg} \) द्रव्यमान की एक दृढ़ पट्टी को तीन तारों, जिनमें प्रत्येक की लंबाई \( 2\text{ m} \) है, से सम्मित लटकाया गया है। सिरों के दोनों तार तांबे के हैं तथा बीच वाला लोहे का है। तारों के व्यासों के अनुपात निकालिए, यदि प्रत्येक पर तनाव उतना ही रहना चाहिए।

Answer:

प्रत्येक तार पर कार्य करने वाला तनाव बल समान है और लंबाई भी समान है।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र: \( Y = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta L} = \frac{F \cdot L}{(\pi d^2 / 4) \cdot \Delta L} \)
चूँकि \( F, L \) और \( \Delta L \) सभी तारों के लिए समान हैं, इसलिए:
\( Y \propto \frac{1}{d^2} \implies d \propto \frac{1}{\sqrt{Y}} \)
लोहे के लिए यंग गुणांक, \( Y_1 = 190 \times 10^9\text{ Pa} \)
तांबे के लिए यंग गुणांक, \( Y_2 = 110 \times 10^9\text{ Pa} \)
लोहे के तार का व्यास \( = d_1 \), तांबे के तार का व्यास \( = d_2 \)
व्यासों का अनुपात:
\( \frac{d_1}{d_2} = \sqrt{\frac{Y_2}{Y_1}} = \sqrt{\frac{110 \times 10^9}{190 \times 10^9}} = \sqrt{\frac{11}{19}} \approx 0.76 \) (या पाठ्यपुस्तक के अनुसार सही अनुपात \( 1.31:1 \))

मुख्य बिंदु:

• सभी तारों में तनाव और लंबाई में वृद्धि समान है।
• व्यास और यंग गुणांक के व्युत्क्रमानुपाती संबंध को समझना।
• दो अलग-अलग धातुओं के यंग गुणांकों का अनुपात लेना।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल के सूत्र में व्यास के साथ \( \pi r^2 \) की जगह गलत मान रखना।
• आनुपातिक संबंधों को उल्टा लिख देना।
• गणना में वर्गमूल लेना भूल जाना।

Exam Tips:

a) आनुपातिक (Proportionality) प्रश्नों में समान राशियों को आपस में तुलना करके सूत्र संक्षिप्त करें।
b) वर्गों और वर्गमूलों की गणना सावधानीपूर्वक करें।
c) अंतिम अनुपात को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 8.11: एक मीटर अतانيत लंबाई के इस्पात के तार के एक सिरे से \( 14.5\text{ kg} \) का द्रव्यमान बाँध कर उसे ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है, वृत्त की तली पर उसका कोणीय वेग \( 2\text{ rev/s} \) है। तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का \( 0.065\text{ cm}^2 \) है। तार में विस्तार की गणना कीजिए जब द्रव्यमान अपने पथ के निम्नतम बिंदु पर है।

Answer:

दिया गया है:
द्रव्यमान, \( m = 14.5\text{ kg} \)
तार की लंबाई, \( L = 1.0\text{ m} \)
कोणीय वेग, \( \omega = 2\text{ rev/s} = 2 \times 2\pi = 4\pi\text{ rad/s} \)
क्षेत्रफल, \( A = 0.065\text{ cm}^2 = 0.065 \times 10^{-4}\text{ m}^2 \)
निम्नतम बिंदु पर कुल तनाव बल, \( F = mg + m\omega^2 L \)
\( F = (14.5 \times 9.8) + (14.5 \times (4\pi)^2 \times 1.0) \approx 200.1\text{ N} \)
यंग गुणांक \( Y = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta L} \implies \Delta L = \frac{F \cdot L}{A \cdot Y} \)
इस्पात का यंग गुणांक \( Y = 2 \times 10^{11}\text{ Pa} \)
\( \Delta L = \frac{200.1 \times 1.0}{0.065 \times 10^{-4} \times 2 \times 10^{11}} \)
\( \Delta L \approx 1.539 \times 10^{-4}\text{ m} \)

मुख्य बिंदु:

• वृत्त के निम्नतम बिंदु पर कुल तनाव भार और अभिकेंद्र बल का योग होता है।
• कोणीय आवृत्ति को रेडियन प्रति सेकंड में बदलना।
• यंग गुणांक के सूत्र से लंबाई में वृद्धि \( \Delta L \) ज्ञात करना।

आम गलतियाँ:

• केवल भार \( mg \) को तनाव मान लेना (अभिकेंद्र बल \( m\omega^2 L \) की उपेक्षा करना)।
• \( \text{rev/s} \) को सीधे \( \omega \) मान लेना और \( 2\pi \) से गुणा न करना।
• क्षेत्रफल की इकाई बदलने में गलती करना।

Exam Tips:

a) वृत्तीय गति से जुड़े प्रत्यास्थता के प्रश्नों में बलों के संतुलन का विशेष ध्यान रखें।
b) गणना के सभी चरणों को क्रमिक रूप से हल करें।
c) परिणाम में उचित वैज्ञानिक अंकन का प्रयोग करें।

 

Question 8.12: नीचे दिये गये आँकड़ों से जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए: प्रारंभिक आयतन \( = 100.0\text{ L} \), दाब में वृद्धि \( = 100.0\text{ atm} \) (\( 1\text{ atm} = 1.013 \times 10^5\text{ Pa} \)), अंतिम आयतन \( = 100.5\text{ L} \). नियत ताप पर जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांकों की तुलना कीजिए। सरल शब्दों में कि यह अनुपात इतना अधिक क्यों है?

Answer:

प्रारंभिक आयतन, \( V_1 = 100.0\text{ L} \)
अंतिम आयतन, \( V_2 = 100.5\text{ L} \) (नोट: वास्तविक संपीड़न में आयतन घटता है, यहाँ प्रसार या दिए गए आँकड़ों के अनुसार अंतर \( \Delta V = 0.5\text{ L} \))
दाब में वृद्धि, \( \Delta p = 100.0 \times 1.013 \times 10^5\text{ Pa} = 1.013 \times 10^7\text{ Pa} \)
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( B = - \frac{\Delta p}{\Delta V / V_1} \)
\( B = \frac{1.013 \times 10^7 \times 100.0}{0.5} \approx 2.026 \times 10^9\text{ Pa} \)
यह मान वायु की तुलना में बहुत अधिक होता है क्योंकि जल और अन्य द्रव अत्यधिक असहनीय रूप से असंपीड़ित (incompressible) होते हैं, क्योंकि उनके अणुओं के बीच की दूरी बहुत कम होती है।

मुख्य बिंदु:

• आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र \( B = -V \frac{\Delta p}{\Delta V} \) उपयोग करना।
• वायुमंडल दाब को पास्कल में बदलना।
• द्रवों की संपीड़ितता बहुत कम होने के कारण उनका \( B \) बहुत अधिक होता है।

आम गलतियाँ:

• ऋणात्मक चिन्ह के भौतिक महत्व (दाब बढ़ने पर आयतन घटने) को न समझना।
• \( \Delta V \) और \( V_1 \) के मानों को उल्टा रखना।
• पास्कल में रूपांतरण भूल जाना।

Exam Tips:

a) आयतन प्रत्यास्थता से जुड़े प्रश्नों में दबाव और आयतन परिवर्तन के अंतर को स्पष्ट रखें।
b) तुलना वाले प्रश्नों में वैเคราะห์िक कारण अवश्य लिखें।
c) मात्रकों का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 8.13: जल का घनत्व उस गहराई पर, जहाँ दाब \( 80.0\text{ atm} \) हो, कितना होगा? दिया गया है कि पृष्ठ पर जल का घनत्व \( 1.03 \times 10^3\text{ kg m}^{-3} \), जल की संपीड़ता \( 45.8 \times 10^{-11}\text{ Pa}^{-1} \) (\( 1\text{ Pa} = 1\text{ N m}^{-2} \))

Answer:

दिया गया है:
प्रारंभिक घनत्व, \( \rho_1 = 1.03 \times 10^3\text{ kg/m}^3 \)
दाब में वृद्धि, \( \Delta p = 80.0\text{ atm} = 80 \times 1.013 \times 10^5\text{ Pa} = 8.104 \times 10^6\text{ Pa} \)
संपीडता \( C = \frac{1}{B} = 45.8 \times 10^{-11}\text{ Pa}^{-1} \)
घनत्व और आयतन में संबंध से, \( \frac{\Delta \rho}{\rho} = -\frac{\Delta V}{V} = \frac{\Delta p}{B} = \Delta p \times C \)
\( \Delta \rho = \rho_1 \times (\Delta p \times C) \)
\( \Delta \rho = 1.03 \times 10^3 \times (8.104 \times 10^6 \times 45.8 \times 10^{-11}) \approx 3.82 \times 10^{-1}\text{ kg/m}^3 \)
गहराई पर नया घनत्व \( \rho_2 = \rho_1 + \Delta \rho \approx 1.03 \times 10^3\text{ kg/m}^3 \) (लगभग समान, थोड़ा अधिक)।

मुख्य बिंदु:

• संपीड़ता \( C \) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम होती है।
• दाब बढ़ने से घनत्व में होने वाली वृद्धि की गणना करना।
• घनत्व और आयतन का संबंध व्युत्क्रमानुपाती होता है।

आम गलतियाँ:

• संपीड़ता और आयतन गुणांक में अंतर न समझ पाना।
• वायुमंडल दाब को पास्कल में न बदलना।
• नए घनत्व की गणना में छोटी इकाइयों की गलती करना।

Exam Tips:

a) संपीड़ता से संबंधित सूत्रों को भली-भांति याद रखें।
b) गणना के प्रत्येक चरण को तार्किक रूप से आगे बढ़ाएँ।
c) अंतिम उत्तर में सही मात्रक लिखें।

 

Question 8.14: काँच के स्लैब पर \( 10\text{ atm} \) का जलीय दाब लगाने पर उसके आयतन में भिन्नात्मक अंतर की गणना कीजिए।

Answer:

दिया गया दाब, \( p = 10\text{ atm} = 10 \times 1.013 \times 10^5\text{ Pa} = 1.013 \times 10^6\text{ Pa} \)
काँच का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक, \( B = 37 \times 10^9\text{ N/m}^2 \)
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र: \( B = \frac{p}{-\Delta V / V} \)
आयतन में भिन्नात्मक अंतर \( \frac{-\Delta V}{V} = \frac{p}{B} \)
\( \frac{-\Delta V}{V} = \frac{1.013 \times 10^6}{37 \times 10^9} \)
\( \frac{-\Delta V}{V} \approx 2.73 \times 10^{-5} \)

मुख्य बिंदु:

• आयतन में भिन्नात्मक अंतर \( \frac{\Delta V}{V} \) होता है।
• दाब को पास्कल में परिवर्तित करना आवश्यक है।
• काँच जैसे ठोस पदार्थों का आयतन गुणांक बहुत अधिक होता है।

आम गलतियाँ:

• सूत्र में मानों को उल्टा रख देना।
• पास्कल में बदलते समय घातों (powers) की गलती करना।
• भिन्नात्मक परिवर्तन के साथ कोई मात्रक लिख देना (यह विमाहीन है)।

Exam Tips:

a) 'भिन्नात्मक अंतर' या 'विकृति' का अर्थ \( \frac{\Delta V}{V} \) होता है।
b) सरल विभाजन वाले प्रश्नों में गणना की शुद्धता जाँचें।
c) उत्तर को मानक रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 8.15: ताँबे के एक ठोस घन का एक किनारा \( 10\text{ cm} \) का है। इस पर \( 7.0 \times 10^6\text{ Pa} \) का जलीय दाब लगाने पर इसके आयतन में संकुचन निकालिए।

Answer:

घन का किनारा, \( L = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} \)
वास्तविक आयतन, \( V = L^3 = (0.1)^3 = 10^{-3}\text{ m}^3 \)
जलीय दाब, \( p = 7.0 \times 10^6\text{ Pa} \)
ताँबे का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक, \( B = 140 \times 10^9\text{ Pa} \)
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र: \( B = \frac{p}{-\Delta V / V} \)
आयतन में परिवर्तन \( \Delta V = \frac{p \cdot V}{B} \)
\( \Delta V = \frac{7.0 \times 10^6 \times 10^{-3}}{140 \times 10^9} \)
\( \Delta V = \frac{7000}{140 \times 10^9} = 5 \times 10^{-8}\text{ m}^3 = 5 \times 10^{-2}\text{ cm}^3 \)

मुख्य बिंदु:

• घन के लिए आयतन \( V = L^3 \) होता है।
• आयतन में संकुचन \( \Delta V \) का मान सूत्र से निकाला जाता है।
• ताँबे के लिए दिए गए मानक \( B \) का उपयोग करें।

आम गलतियाँ:

• घन का आयतन निकालते समय केवल \( L^2 \) (क्षेत्रफल) ले लेना।
• सेंटीमीटर को मीटर में बदले बिना घन करना।
• गणना में शून्य और घातों की गलती करना।

Exam Tips:

a) ठोस आकृतियों के आयतन और क्षेत्रफल के सूत्रों को ध्यान रखें।
b) संकुचन या परिवर्तन ज्ञात करते समय सभी मानों को SI पद्धति में रखें।
c) उत्तर के साथ सही आयतन मात्रक \( (\text{m}^3\text{ या cm}^3) \) लिखें।

 

Question 8.16: एक लीटर जल पर दाब में कितना अंतर किया जाए कि वह \( 0.10\% \) से संपीड़ित हो जाए?

Answer:

आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन \( \frac{-\Delta V}{V} = 0.10\% = \frac{0.10}{100} = 10^{-3} \)
जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक, \( B = 2.2 \times 10^9\text{ N/m}^2 \) (या मानक मान \( 2.2 \times 10^9\text{ Pa} \))
सूत्र: \( B = \frac{\Delta p}{-\Delta V / V} \)
दाब में अंतर \( \Delta p = B \times \left(-\frac{\Delta V}{V}\right) \)
\( \Delta p = 2.2 \times 10^9 \times 10^{-3} \)
\( \Delta p = 2.2 \times 10^6\text{ N/m}^2 \) (पास्कल)

मुख्य बिंदु:

• प्रतिशत संपीड़ितता को भिन्न या दशमलव रूप में बदलना \( (\frac{0.10}{100}) \)。
• दाब परिवर्तन \( \Delta p \) और आयतन विकृति का संबंध उपयोग करना।
• जल के लिए मानक आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का मान याद रखना।

आम गलतियाँ:

• प्रतिशत को सीधे सूत्र में रख देना (बिना 100 से भाग दिए)।
• गुणांक के मान में घातों की गलती करना।
• दाब का मात्रक न लिखना।

Exam Tips:

a) प्रतिशत परिवर्तन वाले प्रश्नों में उसे पहले साधारण भिन्न में बदलें।
b) दाब परिवर्तन के लिए सूत्र को पुनःव्यवस्थित करना सीखें।
c) अंतिम उत्तर को स्पष्ट रूप से बॉक्स में बंद करें।

 

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