NCERT Solutions Class 11 Physics Chapter 07 Gravitation (गुरुत्वाकर्षण) in Hindi

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Question Q1: पृथ्वी एक गोले का सन्निकट रूप है। यदि इसके अभ्यंतर में हर स्थान पर एक समान घनत्व का द्रव्य नहीं है, तो पृथ्वी के पृष्ठ पर गुरुत्वीय त्वरण
[A]. केंद्र की ओर निर्दिष्ट होगा, परंतु हर स्थान पर समान नहीं होगा।
[B]. का हर स्थान पर समान मान होगा परंतु केंद्र की ओर निर्दिष्ट नहीं होगा।
[C]. परिमाण में हर स्थान पर समान तथा केंद्र की ओर निर्दिष्ट होगा।
[D]. किसी भी बिंदु पर शून्य नहीं हो सकता।

Answer:

सही विकल्प [A] है: केंद्र की ओर निर्दिष्ट होगा, परंतु हर स्थान पर समान नहीं होगा।
पृथ्वी के अभ्यंतर में घनत्व के एक समान न होने के कारण, गुरुत्वीय त्वरण का परिमाण और दिशा हर स्थान पर भिन्न हो सकते हैं, लेकिन इसका नेट परिणाम हमेशा केंद्र की ओर ही होता है क्योंकि यह केंद्रीय बल है।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी के असमान घनत्व के कारण गुरुत्वीय त्वरण का मान हर जगह अलग होता है।
• गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा केंद्र की दिशा में कार्य करता है।
• इस असामान्यता के बावजूद त्वरण पूरी तरह शून्य नहीं होता।

आम गलतियाँ:

• छात्रों को लगता है कि असमान घनत्व से बल केंद्र की ओर नहीं लगेगा।
• परिमाण को हर जगह समान मान लेना एक सामान्य भूल है।
• गुरुत्वीय त्वरण को शून्य मान लेना गलत है।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) केंद्रीय बलों की प्रकृति को समझें।
c) घनत्व के प्रभाव को पृथ्वी के संदर्भ में याद रखें।

 

Question Q2: पृथ्वी से प्रेक्षण करने पर सूर्य लगभग वृत्ताकार कक्षा में गति करता प्रतीत होता है। बुध जैसे किसी अन्य ग्रह की गति के लिए पृथ्वी से प्रेक्षण करने पर भी यह बात
[A]. इसी प्रकार सत्य होगी।
[B]. सत्य नहीं होगी क्योंकि पृथ्वी एवं बुध के बीच बल व्युत्क्रम वर्ग नियम के अनुसार नहीं होता।
[C]. सत्य नहीं होगी क्योंकि बुध पर प्रमुख गुरुत्वाकर्षण बल सूर्य के कारण है।
[D]. सत्य नहीं होगी क्योंकि बुध गुरुत्वाकर्षण बलों के अतिरिक्त अन्य बलों से भी प्रभावित होता है।

Answer:

सही विकल्प [C] है: सत्य नहीं होगी क्योंकि बुध पर प्रमुख गुरुत्वाकर्षण बल सूर्य के कारण है।
बुध सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता है, और पृथ्वी स्वयं सूर्य का चक्कर लगाती है। इसलिए, पृथ्वी से देखने पर बुध की गति जटिल और वक्रीय प्रतीत होगी, न कि सीधी वृत्ताकार, क्योंकि बुध पर मुख्य आकर्षण बल सूर्य का है।

मुख्य बिंदु:

• बुध सूर्य की परिक्रमा करता है।
• पृथ्वी से देखने पर प्रेक्षक की अपनी गति भी जुड़ जाती है।
• सापेक्ष गति के कारण ग्रह की गति वृत्ताकार नहीं दिखती।

आम गलतियाँ:

• सभी ग्रहों की गति को पृथ्वी के सापेक्ष एक समान मान लेना।
• सूर्य के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• सापेक्ष गति की अवधारणा को न समझना।

Exam Tips:

a) सापेक्ष गति के सिद्धांतों को स्पष्ट रखें।
b) सूर्य और ग्रहों की कक्षाओं की स्थिति समझें।
c) विकल्पों में दिए गए कारणों का तार्किक विश्लेषण करें।

 

Question Q3: पृथ्वी के विभिन्न बिंदु सूर्य से कुछ भिन्न दूरियों पर होते हैं। अतः गुरुत्वाकर्षण के कारण भिन्न बलों का अनुभव करते हैं। एक दृढ़-पिंडों के लिए हम जानते हैं कि यदि इसके भिन्न बिंदुओं पर भिन्न-भिन्न बल कार्य करें, तो इसकी परिणामी गति इस प्रकार होगी। जैसे कि एक नेट बल इसके द्रव्यमान केंद्र पर आरोपित होकर इसमें स्थानांतरित गति उत्पन्न कर रहा हो तथा नेट बल-आघूर्ण द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाले अक्ष के परितः घूर्णी गति उत्पन्न कर रहा हो। पृथ्वी-सूर्य निकाय के लिए पृथ्वी में एक समान घनत्व के गोले के सदृश मानकर
[A]. बल आघूर्ण शून्य है।
[B]. बल आघूर्ण पृथ्वी को चक्रण कराता है।
• [C]. दृढ़-पिड परिणाम यहाँ लागू नहीं होता क्योंकि पृथ्वी दृढ़-पिड के सदृश भी नहीं है।
[D]. बल आघूर्ण पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर गति कराता है।

Answer:

सही विकल्प [A] है: बल आघूर्ण शून्य है।
पृथ्वी को एक समान घनत्व का गोला मानने पर, उस पर लगने वाला ज्वारीय बल या असंतुलित बल आघूर्ण शून्य हो जाता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल केंद्र की ओर केंद्रित होता है।

मुख्य बिंदु:

• समान घनत्व वाले गोले पर नेट बल आघूर्ण शून्य होता है।
• यह सूर्य और पृथ्वी के बीच की आकर्षण प्रकृति पर आधारित है।
• दृढ़ पिंड की गतिकी यहाँ लागू होती है।

आम गलतियाँ:

• बल आघूर्ण और बल में भ्रमित होना।
• पृथ्वी के घनत्व को नजरअंदाज करना।
• घूर्णी गति के कारणों को गलत समझना।

Exam Tips:

a) बल आघूर्ण की परिभाषा याद रखें।
b) सममित पिंडों के लिए गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को समझें।
c) प्रश्न के लंबे विवरण से घबराएं नहीं, मूल बात को समझें।

 

Question Q4: पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रहों की आयु परिमित होती है तथा कभी-कभी उपग्रहों का कचरा पृथ्वी पर गिरता है। इसका कारण यह है कि
[A]. सौर सेल तथा बैटरियाँ समाप्त हो जाती हैं।
[B]. गुरुत्वाकर्षण नियम भीतर की ओर सर्पिल प्रक्षेप का संकेत देता है।
[C]. श्यान बल उपग्रह की चाल को कम करते हैं और इस प्रकार उपग्रह की ऊँचाई धीरे-धीरे घटती है।
[D]. अन्य उपग्रहों से संघर्ष होता है।

Answer:

सही विकल्प [C] है: श्यान बल उपग्रह की चाल को कम करते हैं और इस प्रकार उपग्रह की ऊँचाई धीरे-धीरे घटती है।
उच्च वायुमंडल में बहुत ही कम घनत्व में वायु मौजूद होती है जिसके कारण उपग्रहों पर घर्षण या श्यान बल (Viscous force) कार्य करता है। इससे उपग्रह की ऊर्जा कम होती जाती है और वह अंततः नीचे गिर जाता है।

मुख्य बिंदु:

• वायुमंडल के अवशेष उपग्रहों की गति का विरोध करते हैं।
• ऊर्जा क्षय के कारण कक्षा की त्रिज्या कम होने लगती है।
• उपग्रह अंततः पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जल जाते हैं या गिरते हैं।

आम गलतियाँ:

• इसे केवल गुरुत्वाकर्षण नियम की कमी मान लेना।
• बैटरियों की समाप्ति को मुख्य कारण समझना।
• वायुमंडलीय प्रभाव को अंतरिक्ष में शून्य मानना।

Exam Tips:

a) उपग्रहों की गति पर वायुमंडल के प्रभाव को समझें।
b) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को उपग्रह की कक्षा से जोड़ें।
c) सही वैज्ञानिक शब्दावली (श्यान बल) का प्रयोग करें।

 

Question Q5: पृथ्वी तथा चंद्रमा दोनों पर सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है, सूर्य से प्रेक्षण करने पर चंद्रमा की कक्षा
[B]. पूर्णरूप से दीर्घवृत्तीय नहीं होगी क्योंकि उस पर लगा कुल गुरुत्वाकर्षण बल केंद्रीय नहीं है।
[C]. दीर्घवृत्तीय नहीं होगी, परंतु आवश्यक रूप से एक बंद वक्र होगी।
[D]. अतिरिक्त अन्य ग्रहों के प्रभाव के कारण दीर्घवृत्तीय से काफी भिन्न होगी।

Answer:

सही विकल्प [B] है: पूर्णरूप से दीर्घवृत्तीय नहीं होगी क्योंकि उस पर लगा कुल गुरुत्वाकर्षण बल केंद्रीय नहीं है।
चंद्रमा पर पृथ्वी और सूर्य दोनों का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है, जिससे परिणामी बल पूरी तरह से सूर्य के केंद्र की ओर केंद्रित नहीं रहता। इसलिए इसकी कक्षा पूर्ण दीर्घवृत्तीय नहीं होती।

मुख्य बिंदु:

• चंद्रमा पर दो बड़े पिंडों (पृथ्वी और सूर्य) का बल लगता है।
• केंद्रीय बल के अभाव में कक्षा दीर्घवृत्तीय नहीं रहती।
• यह तीन-पिंड समस्या (Three-body problem) का उदाहरण है।

आम गलतियाँ:

• केवल पृथ्वी के बल को ही मुख्य मानना।
• केप्लर के नियमों को हर स्थिति में सार्वभौमिक मान लेना।
• केंद्रीय बल की अवधारणा को न समझना।

Exam Tips:

a) केप्लर के नियमों की सीमाएं याद रखें।
b) बहु-पिंड प्रणालियों के आकर्षण को समझें।
c) विकल्पों का सावधानीपूर्वक चयन करें।

 

Question Q6: हमारे सौर परिवार के अंतराग्राहिक क्षेत्र में द्रव्य के टुकड़े (ग्रहों की तुलना में, आमाप में बहुत छोटे) विद्यमान हैं जिन्हें क्षुद्रग्रह कहते हैं।
[A]. सूर्य की तुलना में बहुत कम द्रव्यमान के होने के कारण सूर्य के चारों ओर गति नहीं करेंगे।
[B]. अपने लघु द्रव्यमानों के कारण अनियमित ढंग से गति करेंगे तथा बाह्य अंतरिक्ष में चले जाएँगे।
[C]. बंद कक्षाओं में सूर्य के चारों ओर गति करेंगे, परंतु केप्लर के नियमों का पालन नहीं करेंगे।
[D]. ग्रहों की भाँति कक्षाओं में गति करेंगे तथा केप्लर के नियमों का पालन करेंगे।

Answer:

सही विकल्प [D] है: ग्रहों की भाँति कक्षाओं में गति करेंगे तथा केप्लर के नियमों का पालन करेंगे।
आकार में छोटे होने के बावजूद क्षुद्रग्रहों पर सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल प्रमुख रूप से कार्य करता है। वे भी अन्य ग्रहों की तरह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं और केप्लर के नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• द्रव्यमान छोटा होने से गुरुत्वाकर्षण का नियम नहीं बदलता।
• क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
• केप्लर के नियम सभी ग्रहों और उपग्रहों पर लागू होते हैं।

आम गलतियाँ:

• छोटे आकार के कारण नियमों का पालन न करना सोचना।
• अंतरिक्ष में तैरते रहने का भ्रम होना।
• केप्लर के नियमों को केवल बड़े ग्रहों तक सीमित मानना।

Exam Tips:

a) केप्लर के नियमों की सार्वभौमिकता समझें।
b) क्षुद्रग्रहों की गति के बारे में सही जानकारी रखें।
c) द्रव्यमान और गति के संबंध को स्पष्ट रखें।

 

Question Q7: असत्य (गलत) विकल्प का चयन कीजिए
[A]. जड़त्ीय द्रव्यमान किसी बाह्य बल द्वारा किसी पिंड को त्वरित करने में कठिनाई की माप है जबकि गुरुत्वीय द्रव्यमान उस पर किसी बाह्य द्रव्यमान द्वारा गुरुत्वाकर्षण बल के निर्धारण में प्रासंगिक होता है।
[B]. गुरुत्वीय द्रव्यमान तथा जड़त्ीय द्रव्यमान समान होते हैं यह एक प्रयोगिक परिणाम है।
[C]. गुरुत्वीय द्रव्यमान तथा जड़त्ीय द्रव्यमान समान होने के कारण पृथ्वी पर सभी वस्तुओं के लिए गुरुत्वीय त्वरण समान होता है।
[D]. प्रोटॉन जैसे कणों का गुरुत्वीय द्रव्यमान आस-पास के भारी पिंडों की उपस्थिति पर निर्भर कर सकता है जबकि जड़त्ीय द्रव्यमान ऐसा नहीं कर सकता।

Answer:

सही विकल्प [D] है: यह कथन असत्य है कि प्रोटॉन जैसे कणों का गुरुत्वीय द्रव्यमान आस-पास के भारी पिंडों की उपस्थिति पर निर्भर कर सकता है जबकि जड़त्ीय द्रव्यमान ऐसा नहीं कर सकता।
पिंड का गुरुत्वीय और जड़त्ीय द्रव्यमान दोनों ही आंतरिक और निश्चित गुण हैं, वे बाहरी पिंडों की उपस्थिति पर निर्भर नहीं करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• जड़त्ीय द्रव्यमान \( m = F/a \) से संबंधित है।
• गुरुत्वीय द्रव्यमान गुरुत्वाकर्षण बल तय करता है।
• दोनों प्रकार के द्रव्यमान प्रायोगिक रूप से समान पाए गए हैं।

आम गलतियाँ:

• दोनों द्रव्यमानों को अलग-अलग राशियाँ मान लेना।
• बाहरी वातावरण का द्रव्यमान पर प्रभाव मानना।
• असत्य कथन की पहचान में गलती करना।

Exam Tips:

a) जड़त्ीय और गुरुत्वीय द्रव्यमान की परिभाषा अंतर सहित याद रखें।
b) प्रयोगिक सत्यों पर ध्यान दें।
c) प्रश्न में 'असत्य' पूछा गया है, इस पर विशेष ध्यान दें।

 

Question Q8: यदि गुरुत्वाकर्षण नियम व्युत्क्रम वर्ग नियम से व्युत्क्रम घन नियम हो जाए, तो
[A]. ग्रहों की कक्षा दीर्घवृत्तीय होंगी।
[B]. ग्रहों की वृत्ताकार कक्षाएँ संभव नहीं होंगी।
[C]. हाथ से पृथ्वी के पृष्ठ पर फेंके गए पत्थर की प्रक्षेप गति लगभग परवलीय होगी।
[D]. एक समान घनत्व के गोलीय खोल के भीतर कोई गुरुत्वाकर्षण बल नहीं होगा।

Answer:

सही विकल्प [C] है: हाथ से पृथ्वी के पृष्ठ पर फेंके गए पत्थर की प्रक्षेप गति लगभग परवलीय होगी।
यदि बल की दूरी पर निर्भरता बदल जाए, तो भी बहुत छोटे क्षेत्रों (जैसे पृथ्वी की सतह के पास) में गुरुत्वीय त्वरण को लगभग एकसमान माना जा सकता है, जिससे प्रक्षेप्य गति परवलीय ही बनी रहती है।

मुख्य बिंदु:

• व्युत्क्रम घन नियम का अर्थ बल का \( 1/d^3 \) होना है।
• छोटे विस्थापन के लिए सतह पर गुरुत्व लगभग स्थिर रहता है।
• प्रक्षेप्य गति परवलीय पथ का अनुसरण करती है।

आम गलतियाँ:

• नियम बदलने पर तुरंत सभी कक्षाओं को असंभव मान लेना।
• स्थानीय गुरुत्वीय क्षेत्र के प्रभाव को भूल जाना।
• गणितीय व्यंजकों का गलत अनुमान लगाना।

Exam Tips:

a) व्युत्क्रम नियमों के परिवर्तनों का अध्ययन करें।
b) स्थानीय और वैश्विक प्रभावों में अंतर समझें।
c) प्रक्षेप्य गति के बुनियादी समीकरणों को याद रखें।

 

Question 7.1: निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आप किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिण्ड का परिक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्вий प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर अथवा किसी अन्य साधनों द्वारा कर सकते हैं?
(b) पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा कोई अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसुचन नहीं कर सकता। यदि पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्ष स्टेशन आकार में बड़ा है, तब क्या वह गुरुत्व बल के संसुचन की आशा कर सकता है?
(c) यदि आप पृथ्वी पर सूर्य के कारण गुरुत्वीय बल की तुलना पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्व बल से करें, तो आप यह पाएंगे कि सूर्य का खिंचाव चन्द्रमा के खिंचाव की तुलना में अधिक है (इसकी जाँच आप आगामी अभ्यासों में दिए गए आंकड़ों की सहायता से कर सकते हैं।) तथापि चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक है। क्यों?

Answer:

(a) आसपास की वस्तुओं पर पदार्थ का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को किसी भी तरह से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विद्युत बलों के विपरीत गुरुत्वाकर्षण बल भौतिक माध्यम की प्रकृति से स्वतंत्र होता है। साथ ही, यह अन्य वस्तुओं की स्थिति से स्वतंत्र है।
(b) हाँ, यदि अंतरिक्ष स्टेशन का आकार काफी बड़ा है, तो अंतरिक्ष यात्री गुरुत्वाकर्षण (g) में परिवर्तन का पता लगा लेगा।
(c) ज्वारीय प्रभाव दूरी के घन पर व्युत्क्रमानुपाती होता है जबकि गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग पर व्युत्क्रमानुपाती होता है। चूंकि चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी से कम है, इसलिए चंद्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के खिंचाव के ज्वारीय प्रभाव से अधिक होता है।

मुख्य बिंदु:

• गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम पर निर्भर नहीं करता।
• बड़े अंतरिक्ष यान में ज्वारीय बल महसूस हो सकते हैं।
• ज्वारीय प्रभाव दूरी के घन (\( 1/r^3 \)) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

आम गलतियाँ:

• वैद्युत और गुरुत्वाकर्षण बलों की प्रकृति को एक समान समझ लेना।
• ज्वारीय बल और सामान्य गुरुत्वाकर्षण बल में अंतर न करना।
• दूरी के वर्ग और घन के नियमों में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) वैचारिक प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट और तार्किक दें।
b) ज्वारीय बल के सूत्र को याद रखें।
c) माध्यम की स्वतंत्रता के बिंदु को अवश्य लिखें।

 

Question 7.2: सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) बढ़ती तुंगता के साथ गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(b) बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व का गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान/पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
(d) पृथ्वी के केन्द्र से \( r_1 \) तथा \( r_2 \) दूरियों के दो बिंदुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा-अन्तर के लिए सूत्र \( G Mm(1/r_1 - 1/r_2) \) सूत्र \( mg(r_1 - r_2) \) से अधिक/कम यथार्थ है।

Answer:

(a) ऊँचाई बढ़ने के साथ गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण कम हो जाता है।
(b) गहराई बढ़ने के साथ गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण कम हो जाता है।
(c) गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण पिंड के द्रव्यमान से स्वतंत्र है।
(d) पृथ्वी के केंद्र से दूर दो बिंदुओं \( r_1 \) और \( r_2 \) दूरी के बीच स्थितिज ऊर्जा के अंतर के लिए सूत्र \( G Mm(1/r_1 - 1/r_2) \) सूत्र \( mg(r_1 - r_2) \) से अधिक सटीक है।

मुख्य बिंदु:

• ऊँचाई और गहराई दोनों के साथ \( g \) घटता है।
• \( g \) का मान वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
• व्यापक स्थितिज ऊर्जा का सूत्र अधिक सटीक है।

आम गलतियाँ:

• गहराई बढ़ने पर \( g \) के बढ़ने का भ्रम होना।
• वस्तु के द्रव्यमान को त्वरण के सूत्र में शामिल करना।
• सन्निकट और सटीक सूत्रों में अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) ऊँचाई और गहराई के सूत्रों (\( g_h \) और \( g_d \)) को याद रखें।
b) स्थितिज ऊर्जा के व्यापक व्यंजक का प्रयोग करें।
c) विकल्पों को चुनते समय सही शब्दों (बढ़ता/घटता) का चयन करें।

 

Question 7.3: मान लीजिए एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दो गुनी चाल से गति करता है, तब पृथ्वी की कक्षा की तुलना में इसका कक्षीय आमाप क्या है?

Answer:

दिया गया है कि ग्रह की चाल पृथ्वी की तुलना में दोगुनी है।
केप्लर के गति के तीसरे नियम का प्रयोग करने पर:
\( \left(\frac{R_e}{R_p}\right)^3 = \left(\frac{T_e}{T_p}\right)^2 \)
यहाँ कक्षीय त्रिज्याओं का अनुपात ज्ञात करने के लिए चाल और आवर्तकाल के संबंध का उपयोग करते हैं।
हल करने पर:
\( R_p = 0.63 R_e \)
अतः ग्रह की कक्षीय त्रिज्या पृथ्वी की तुलना में 0.63 गुना छोटी होगी।

मुख्य बिंदु:

• केप्लर के तीसरे नियम का अनुप्रयोग।
• कक्षीय चाल और आवर्तकाल का संबंध।
• त्रिज्याओं की तुलनात्मक गणना।

आम गलतियाँ:

• अनुपात निकालते समय घात (Power) में गलती करना।
• चाल और त्रिज्या के व्युत्क्रम संबंध को न समझना।
• इकाई प्रणालियों में असंगति रखना।

Exam Tips:

a) केप्लर के तीसरे नियम \( T^2 \propto R^3 \) को हमेशा याद रखें।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक या अनुपात का सही रूप लिखें।

 

Question 7.4: बृहस्पति के एक उपग्रह, आयो (Io) की कक्षीय अवधि 1.769 दिन तथा कक्षा की त्रिज्या \( 4.22 \times 10^8 \text{ m} \) है। यह दर्शाइए कि बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग \( \frac{1}{1000} \) गुना है।

Answer:

बृहस्पति के लिए कक्षीय अवधि \( T = 1.769 \text{ days} = 1.769 \times 24 \times 60 \times 60 \text{ s} \)
कक्षा की त्रिज्या \( R = 4.22 \times 10^8 \text{ m} \)
गुरुत्वाकर्षण बल और अभिकेंद्र बल को संतुलित करने पर:
\( M_j = \frac{4\pi^2 R^3}{G T^2} \)
मान रखने पर:
\( M_j = \frac{4 \times (3.14)^2 \times (4.22 \times 10^8)^3}{6.67 \times 10^{-11} \times (1.769 \times 24 \times 3600)^2} \)
इसकी गणना करने पर बृहस्पति का द्रव्यमान लगभग \( 1.9 \times 10^{27} \text{ kg} \) प्राप्त होता है, जो सूर्य के द्रव्यमान का लगभग \( \frac{1}{1000} \) भाग है।

मुख्य बिंदु:

• आवर्तकाल और त्रिज्या से द्रव्यमान ज्ञात करना।
• SI मात्रकों में सभी मानों को बदलना।
• सूर्य और बृहस्पति के द्रव्यमानों की तुलना।

आम गलतियाँ:

• दिनों को सेकंड में बदलते समय गणना की भूल।
• सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक \( G \) का मान गलत रखना।
• त्रिज्या का घन करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) सूत्र \( M = \frac{4\pi^2 R^3}{GT^2} \) को अच्छी तरह याद रखें।
b) कैलकुलेशन में घातों (Powers) का सही हिसाब लगाएं।
c) अंत में तुलनात्मक अनुपात स्पष्ट रूप से दिखाएं।

 

Question 7.5: मान लीजिए कि हमारी आकाशगंगा में एक सौर द्रव्यमान के \( 2.5 \times 10^{11} \) तारे हैं। मन्दाकिनी केन्द्र से \( 50,000 \text{ ly} \) दूरी पर स्थित कोई तारा अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में कितना समय लेगा? आकाशगंगा का व्यास \( 10^5 \text{ ly} \) लीजिए।

Answer:

कुल द्रव्यमान \( M = 2.5 \times 10^{11} \times \text{सौर द्रव्यमान} = 2.5 \times 10^{11} \times 2 \times 10^{30} \text{ kg} = 5 \times 10^{41} \text{ kg} \)
त्रिज्या \( r = 50,000 \text{ ly} = 50,000 \times 9.46 \times 10^{15} \text{ m} = 4.73 \times 10^{20} \text{ m} \)
परिक्रमण काल का सूत्र:
\( T = 2\pi \sqrt{\frac{r^3}{GM}} \)
मान रखने पर:
\( T = 2 \times 3.14 \times \sqrt{\frac{(4.73 \times 10^{20})^3}{6.67 \times 10^{-11} \times 5 \times 10^{41}}} \)
इसे हल करने पर समय लगभग \( 1.12 \times 10^{16} \text{ s} \) या लगभग \( 3.55 \times 10^8 \text{ years} \) प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• प्रकाश वर्ष (ly) को मीटर में बदलना।
• आकाशगंगा के कुल द्रव्यमान की गणना।
• कक्षीय आवर्तकाल के सूत्र का उपयोग।

आम गलतियाँ:

• तारों की संख्या को एक तारे के द्रव्यमान से गुणा न करना।
• प्रकाश वर्ष के मान में मात्रक की भूल।
• सेकंड से वर्षों में बदलते समय भाग देने में गलती।

Exam Tips:

a) खगोलीय इकाइयों (ly) के मान याद रखें।
b) बड़े अंकों की गणना में वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) का प्रयोग करें।
c) समय के मात्रक को सेकंड से वर्षों में बदलना न भूलें।

 

Question 7.6: सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) यदि स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनन्त पर है, तो कक्षा में परिक्रमा करते किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज/स्थिति ऊर्जा का ऋणात्मक है।
(b) कक्षा में परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्पीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान ऊँचाई (जितनी उपग्रह की है) के किसी स्थिर पिण्ड को पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से अधिक/कम होती है।

Answer:

(a) गतिज ऊर्जा का (गतिज ऊर्जा का मान कुल ऊर्जा के ऋणात्मक के बराबर होता है)।
(b) कम होती है। (परिक्रमा करने वाले उपग्रह को पहले से ही गतिज ऊर्जा प्राप्त होती है, इसलिए उसे बाहर निकालने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।)

मुख्य बिंदु:

• उपग्रह की कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है।
• गतिज ऊर्जा = -(कुल ऊर्जा)।
• परिक्रमा करने वाले पिंड को कम ऊर्जा चाहिए क्योंकि उसके पास पहले से कक्षीय वेग होता है।

आम गलतियाँ:

• कुल ऊर्जा को धनात्मक मान लेना।
• स्थिर और गतिशील पिंडों की आवश्यक ऊर्जा को एक समान समझना।
• अनंत पर स्थितिज ऊर्जा के संदर्भ को भूल जाना।

Exam Tips:

a) उपग्रह की ऊर्जा के तीनों सूत्र (गतिज, स्थितिज, कुल) याद रखें।
b) बंधन ऊर्जा (Binding energy) की अवधारणा को समझें।
c) विकल्पों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही शब्द चुनें।

 

Question 7.7: क्या किसी पिण्ड की पृथ्वी से पलायन चाल (a) पिण्ड के द्रव्यमान, (b) प्रेक्षण बिन्दु की अवस्थिति, (c) प्रक्षेपण की दिशा, (d) पिण्ड के प्रमोचन की अवस्थिति की ऊँचाई पर निर्भर करती है?

Answer:

(a) पृथ्वी से किसी पिंड की पलायन गति पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती।
(b) पृथ्वी से किसी पिंड की पलायन गति उस स्थान पर निर्भर नहीं करती है जहाँ से इसे प्रक्षेपित किया जाता है।
(c) पृथ्वी से किसी पिंड की पलायन गति प्रक्षेप्य की दिशा पर निर्भर नहीं करती है।
(d) पृथ्वी से किसी पिंड की पलायन गति उस स्थान की ऊँचाई पर निर्भर करती है जहाँ से पिंड को लॉन्च किया जाता है।
पलायन वेग का सूत्र: \( v_{esc} = \sqrt{2gR} \)

मुख्य बिंदु:

• पलायन वेग वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
• यह प्रमोचन बिंदु की त्रिज्या और ग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
• प्रक्षेप की दिशा का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

आम गलतियाँ:

• भारी वस्तुओं के लिए पलायन वेग अधिक मानना।
• दिशा बदलने से वेग बदलने का भ्रम होना।
• सतह से ऊँचाई के प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) पलायन वेग का व्यंजक \( v = \sqrt{\frac{2GM}{R}} \) याद रखें।
b) प्रत्येक कारक (द्रव्यमान, दिशा, ऊँचाई) के प्रभाव को अलग से स्पष्ट करें।
c) वैับद्ध उत्तर बिंदुओं में दें।

 

Question 7.8: कोई धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में कर रहा है। क्या अपनी कक्षा में धूमकेतु की शूून्य से अन्त तक (a) रैखिक चाल, (b) कोणीय चाल, (c) कोणीय संवेग, (d) गतिज ऊर्जा, (e) स्थितिज ऊर्जा, (f) कुल ऊर्जा नियत रहती है? सूर्य के अति निकट आने पर धूमकेतु के द्रव्यमान में ह्रास को नगण्य मानिए।

Answer:

(a) नहीं
(b) नहीं
(c) हाँ
(d) नहीं
(e) नहीं
(f) हाँ
सूर्य के चारों ओर अत्यधिक अंडाकार कक्षा में घूमने वाले धूमकेतु की कक्षा के सभी बिंदुओं पर कोणीय संवेग और कुल ऊर्जा स्थिर होती है। इसकी रैखिक गति, कोणीय गति, गतिज और स्थितिज ऊर्जा कक्षा में एक बिंदु से दूसरे बिंदु पर भिन्न होती है।

मुख्य बिंदु:

• केंद्रीय बलों के अंतर्गत कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।
• संरक्षी बल के कारण कुल ऊर्जा नियत रहती है।
• सूर्य के पास आने पर चाल और गतिज ऊर्जा बढ़ती है।

आम गलतियाँ:

• ऊर्जा और चाल को हर जगह एक समान मान लेना।
• कोणीय संवेग और कोणीय चाल में अंतर न समझना।
• स्थितिज ऊर्जा को स्थिर मान लेना।

Exam Tips:

a) संरक्षण के नियमों (ऊर्जा और कोणीय संवेग) को अच्छी तरह समझें।
b) दीर्घवृत्तीय कक्षा में वेग के परिवर्तन को ध्यान में रखें।
c) हाँ और नहीं के रूप में स्पष्ट उत्तर दें।

 

Question 7.9: निम्नलिखित में से कौन से लक्षण अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री के दुःखदायी हो सकते हैं? (a) पैरों में सूजन, (b) चेहरे पर सूजन, (c) सिरदर्द, (d) दिक्विन्यास समस्या।

Answer:

(b), (c), और (d)
पैरों में सूजन अंतरिक्ष में नहीं होती क्योंकि भारहीनता के कारण गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव नहीं रहता। चेहरे पर सूजन, सिरदर्द और दिक्विन्यास समस्या (Orientation problem) अंतरिक्ष यात्रियों में सामान्यतः देखी जाती है।

मुख्य बिंदु:

• भारहीनता के कारण शरीर के तरल पदार्थों का वितरण बदल जाता है।
• चेहरे पर सूजन और सिरदर्द दबाव परिवर्तन के कारण होते हैं।
• अंतरिक्ष में ओरिएंटेशन की समस्या आम है।

आम गलतियाँ:

• पृथ्वी के गुरुत्व और अंतरिक्ष की भारहीनता के प्रभावों को मिला देना।
• सभी विकल्पों को सही मान लेना।
• शारीरिक तरल गतिकी को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) अंतरिक्ष में भारहीनता के प्रभावों को समझें।
b) मानव शरीर पर गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति के परिणाम याद रखें।
c) सही विकल्पों के संयोजन को चुनें।

 

Question 7.10: एकसमान द्रव्यमान घनत्व की अर्धगोलीय खोल्हों द्वारा परिभाषित ढोल के पृष्ठ के केन्द्र पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा (देखिए चित्र 8.10) (i) a, (ii) b, (iii) c, (iv) d.

Answer:

सही विकल्प (iii) c है।
गोलाकार कोष के अंदर सभी बिंदुओं पर गुरुत्वीय विभव स्थिर रहता है। इसलिए, गोलाकार खोल के अंदर हर जगह गुरुत्वाकर्षण स्थितिज प्रवणता शून्य होती है। परिणामी गुरुत्वाकर्षण बल नीचे की दिशा में कार्य करता है, जिसे तीर 'c' द्वारा दर्शाया गया है।

मुख्य बिंदु:

• खोखले गोले के अंदर विभव नियत रहता है।
• स्थितिज प्रवणता शून्य होती है।
• तीर 'c' सही गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा को इंगित करता है।

आम गलतियाँ:

• तीव्रता की दिशा को बाहर की ओर मान लेना।
• प्रवणता और विभव के संबंध में भ्रमित होना।
• आरेख के तीरों को गलत पढ़ना।

Exam Tips:

a) गोलीय कोष के भीतर गुरुत्वीय क्षेत्र के गुणों को याद रखें।
b) आलेख आधारित प्रश्नों का उत्तर देते समय तीरों की दिशा ध्यान से देखें।
c) मानक NCERT आरेखों का अभ्यास करें।

 

Question 7.11: उपरोक्त समस्या में किसी यादृच्छिक बिन्दु p पर गुरुत्वीय तीव्रता किस तीर (i) d, (ii) e, (iii) f, (iv) g द्वारा व्यक्त की जाएगी?

Answer:

सही विकल्प (ii) e है।
यदि एक गोलाकार कोष के ऊपरी आधे हिस्से को काट दिया जाए, तो एक कण पर एक यादृच्छिक बिंदु P पर कार्य करने वाला गुरुत्वाकर्षण बल नीचे की दिशा में होगा। चित्र में तीर 'e' सही दिशा को प्रदर्शित करता है।

मुख्य बिंदु:

• के के केन्द्रीकृत बल का प्रभाव यादृच्छिक बिंदु पर।
• बचे हुए हिस्से के कारण परिणामी बल की दिशा।
• तीर 'e' सही तीव्रता को दर्शाता है।

आम गलतियाँ:

• केन्द्रीकरण के प्रभाव को गलत दिशा में समझना।
• आरेख के गलत विकल्प का चयन करना।

Exam Tips:

a) असममित पिंडों के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का विश्लेषण करें।
b) सदिश योग के नियमों को ध्यान में रखें।
c) आरेख के प्रतीकों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 7.12: पृथ्वी से किसी रॉकेट को सूर्य की ओर दागा गया है। पृथ्वी के केन्द्र से किस दूरी पर रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है? (सूर्य का द्रव्यमान = \( 2 \times 10^{30} \text{ kg} \), पृथ्वी का द्रव्यमान = \( 6 \times 10^{24} \text{ kg} \), अन्य ग्रहों आदि के प्रभावों की उपेक्षा कीजिए, कक्षीय त्रिज्या = \( 1.5 \times 10^{11} \text{ m} \))

Answer:

मान लीजिए पृथ्वी के केंद्र से x दूरी पर उपग्रह P पर कार्य करने वाला गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है।
न्यूटत के गुरुत्वाकर्षण के नियम से सूर्य और पृथ्वी के प्रभाव में उपग्रह पर लगने वाले बल बराबर होंगे:
\( \frac{G M_s m}{(r-x)^2} = \frac{G M_e m}{x^2} \)
मान रखने पर:
\( \frac{2 \times 10^{30}}{(r-x)^2} = \frac{6 \times 10^{24}}{x^2} \)
इसे हल करने पर:
\( \frac{r-x}{x} = \sqrt{\frac{2 \times 10^{30}}{6 \times 10^{24}}} = \sqrt{3.33 \times 10^5} \approx 577.35 \)
\( r - x = 577.35 x \implies r = 578.35 x \)
\( x = \frac{1.5 \times 10^{11}}{578.35} = 2.59 \times 10^8 \text{ m} \)

मुख्य बिंदु:

• उदासीन बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल बराबर होते हैं।
• दोनों बलों को संतुलित करके समीकरण बनाया जाता है।
• वर्गमूल लेकर दूरी की गणना की जाती है।

आम गलतियाँ:

• दूरियों के अंतर (\( r-x \)) को सही ढंग से न लिखना।
• द्रव्यमान के मानों में घात की गलती करना।
• समीकरण हल करते समय गणना की त्रुटि।

Exam Tips:

a) संतुलन बिंदु वाले प्रश्नों के लिए हमेशा दोनों बलों को आमने-सामने रखें।
b) लघुगणक या वर्गमूल निकालते समय सावधानी बरतें।
c) अंतिम उत्तर के साथ उचित मात्रक (\( \text{m} \)) लिखें।

 

Question 7.13: आप सूर्य को कैसे तोलेंगे, अर्थात् उसके द्रव्यमान का आकलन कैसे करेंगे? सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या \( 1.5 \times 10^8 \text{ km} \) है।

Answer:

सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षीय त्रिज्या \( r = 1.5 \times 10^{11} \text{ m} \)
परिक्रमण काल \( T = 1 \text{ year} = 365.25 \text{ days} = 365.25 \times 24 \times 60 \times 60 \text{ s} \)
केप्लर के नियम से सूर्य के द्रव्यमान का सूत्र:
\( M = \frac{4\pi^2 r^3}{G T^2} \)
मान रखने पर:
\( M = \frac{4 \times (3.14)^2 \times (1.5 \times 10^{11})^3}{6.67 \times 10^{-11} \times (365.25 \times 24 \times 3600)^2} \)
इसे हल करने पर:
\( M = \frac{133.24 \times 10^{33}}{6.64 \times 10^4} = 2.0 \times 10^{30} \text{ kg} \)
अतः सूर्य का द्रव्यमान \( 2 \times 10^{30} \text{ kg} \) है।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी के परिक्रमण काल और त्रिज्या का उपयोग करना।
• गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियतांक \( G \) का मान प्रयोग करना।
• सूर्य के द्रव्यमान का मानक मान प्राप्त करना।

आम गलतियाँ:

• किलोमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना।
• वर्ष को सेकंड में बदलते समय त्रुटि करना।
• सूत्र में त्रिज्या का घन करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) खगोलीय डेटा आधारित सूत्रों को याद रखें।
b) स्टेप-बाय-स्टेप गणना करें ताकि गलती न हो।
c) उत्तर को मानक वैज्ञानिक रूप में लिखें।

 

Question 7.14: एक शनि वर्ष एक पृथ्वी-वर्ष का 29.5 गुना है। यदि पृथ्वी सूर्य से \( 1.50 \times 10^8 \text{ km} \) दूरी पर है, तो शनि सूर्य से कितनी दूरी पर है?

Answer:

दिया गया है:
पृथ्वी की सूर्य से दूरी \( r_e = 1.5 \times 10^8 \text{ km} \)
पृथ्वी का आवर्तकाल \( T_e = 1 \text{ year} \)
शनि का आवर्तकाल \( T_s = 29.5 \times T_e \)
केप्लर के तीसरे नियम से:
\( \left(\frac{r_s}{r_e}\right)^3 = \left(\frac{T_s}{T_e}\right)^2 \)
मान रखने पर:
\( r_s = r_e \left(\frac{T_s}{T_e}\right)^{2/3} \)
\( r_s = 1.5 \times 10^8 \times (29.5)^{2/3} \)
इसे हल करने पर:
\( r_s = 1.5 \times 10^8 \times 9.55 = 1.43 \times 10^{10} \text{ m} \)

मुख्य बिंदु:

• केप्लर के आवर्तकाल के नियम का प्रयोग।
• दूरियों और समय का अनुपात निकालना।
• भिन्नात्मक घात (\( 2/3 \)) को हल करना।

आम गलतियाँ:

• घातों को गलत तरीके से जोड़ना या गुणा करना।
• अनुपात निकालते समय इकाइयों में गड़बड़ी करना।
• अंतिम गणना में गलती होना।

Exam Tips:

a) केप्लर के नियम का सूत्र \( T^2 \propto r^3 \) स्पष्ट रूप से लिखें।
b) लघुगणक या कैलकुलेटर विधि का सही प्रयोग करें।
c) मात्रक को किलोमीटर या मीटर में स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 7.15: पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार \( 63 \text{ N} \) है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर पृथ्वी के कारण इस वस्तु पर गुरुत्वीय बल कितना है?

Answer:

वस्तु का भार \( W = 63 \text{ N} \)
ऊँचाई \( h = \frac{R_e}{2} \)
ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण का सूत्र:
\( g' = \frac{g}{(1 + \frac{h}{R_e})^2} \)
\( h \) का मान रखने पर:
\( g' = \frac{g}{(1 + \frac{R_e/2}{R_e})^2} = \frac{g}{(1 + 1/2)^2} = \frac{g}{(3/2)^2} = \frac{4}{9} g \)
नया भार \( W' = m g' = m \times \left(\frac{4}{9} g\right) = \frac{4}{9} W \)
\( W' = \frac{4}{9} \times 63 = 28 \text{ N} \)

मुख्य बिंदु:

• ऊँचाई के साथ गुरुत्वीय त्वरण में परिवर्तन का सूत्र।
• भार \( W = mg \) का संबंध।
• अनुपात निकालकर नए भार की गणना।

आम गलतियाँ:

• सूत्र में \( h \) का मान सीधे जोड़ने में गलती।
• वर्ग करते समय हर (Denominator) की गलती।
• द्रव्यमान और भार में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) ऊँचाई और गहराई के साथ \( g \) के परिवर्तन के सूत्र याद रखें।
b) भिन्नात्मक गणना को सावधानी से हल करें।
c) अंतिम उत्तर के साथ बल का मात्रक (\( \text{N} \)) लिखें।

 

Question 7.16: यह मानते कि पृथ्वी एकसमान घनत्व का एक गोला है तथा इसके पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार \( 250 \text{ N} \) है, यह ज्ञात कीजिए कि पृथ्वी के केन्द्र की ओर आधी दूरी पर इस वस्तु का भार क्या होगा?

Answer:

पृथ्वी की सतह पर भार \( W = mg = 250 \text{ N} \)
गहराई \( d = \frac{R_e}{2} \)
गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण का सूत्र:
\( g' = g \left(1 - \frac{d}{R_e}\right) \)
मान रखने पर:
\( g' = g \left(1 - \frac{R_e/2}{R_e}\right) = g \left(1 - \frac{1}{2}\right) = \frac{1}{2} g \)
नया भार \( W' = mg' = m \left(\frac{1}{2} g\right) = \frac{1}{2} W \)
\( W' = \frac{1}{2} \times 250 = 125 \text{ N} \)

मुख्य बिंदु:

• गहराई के साथ \( g \) का सूत्र \( g' = g(1 - d/R) \) ।
• केंद्र की ओर आधी दूरी पर गहराई \( d = R/2 \) ।
• भार आधा हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• ऊँचाई और गहराई के सूत्रों को आपस में मिला देना।
• मान रखते समय त्रिज्या के अनुपात में भूल करना।
• गणना की प्रक्रिया अधूरी छोड़ना।

Exam Tips:

a) गहराई वाले सूत्र को हमेशा याद रखें।
b) स्पष्ट रूप से दिखाएं कि भार किस प्रकार परिवर्तित होता है।
c) इकाई न्यूटन (\( \text{N} \)) लिखना न भूलें।

 

Question 7.17: पृथ्वी के पृष्ठ से ऊर्ध्वाधरः ऊपर की ओर कोई रॉकेट \( 5 \text{ km s}^{-1} \) की चाल से दागा जाता है। पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट पृथ्वी से कितनी दूरी तक जाएगा? पृथ्वी का द्रव्यमान = \( 6.0 \times 10^{24} \text{ kg} \); पृथ्वी की माध्य त्रिज्या = \( 6.4 \times 10^6 \text{ m} \); तथा \( G = 6.67 \times 10^{-11} \text{ N m}^2 \text{ kg}^{-2} \).

Answer:

रॉकेट का वेग \( v = 5 \times 10^3 \text{ m/s} \)
पृथ्वी का द्रव्यमान \( M_e = 6.0 \times 10^{24} \text{ kg} \)
त्रिज्या \( R_e = 6.4 \times 10^6 \text{ m} \)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से (सतह पर कुल ऊर्जा = अधिकतम ऊँचाई पर कुल ऊर्जा):
\( \frac{1}{2}mv^2 - \frac{GM_e m}{R_e} = 0 - \frac{GM_e m}{R_e + h} \)
इसे हल करने पर:
\( \frac{GM_e}{R_e} - \frac{1}{2}v^2 = \frac{GM_e}{R_e + h} \)
मान रखकर गणना करने पर ऊँचाई \( h \) का मान प्राप्त होता है:
\( h \approx 1.6 \times 10^6 \text{ m} = 1600 \text{ km} \)

मुख्य बिंदु:

• ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत।
• गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग।
• अधिकतम ऊँचाई पर वेग का शून्य होना।

आम गलतियाँ:

• स्थितिज ऊर्जा के सूत्रों में ऋणात्मक चिह्न छोड़ देना।
• त्रिज्या में ऊँचाई जोड़ते समय कोष्ठक की गलती।
• मात्रकों (km और m) का रूपांतरण न करना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा संरक्षण समीकरण को सही ढंग से सेट करें।
b) गणना के चरणों को विस्तार से लिखें।
c) परिणामी दूरी को उचित मात्रک में व्यक्त करें।

 

Question 7.18: पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी प्रक्षेप्य का पलायन चाल \( 11.2 \text{ km s}^{-1} \) है। किसी वस्तु को इस चाल की तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वी से अत्यधिक दूर जाने पर इस वस्तु की चाल क्या होगी? सूर्य तथा अन्य ग्रहों की उपस्थिति की उपेक्षा कीजिए।

Answer:

पलायन वेग \( v_{esc} = 11.2 \text{ km/s} \)
प्रक्षेपण वेग \( v_p = 3 v_{esc} \)
अनंत पर पहुँचने पर ऊर्जा संरक्षण नियम से:
\( \frac{1}{2} m v_p^2 - \frac{1}{2} m v_{esc}^2 = \frac{1}{2} m v_f^2 \)
जहाँ \( v_f \) अंतिम वेग है।
मान रखने पर:
\( v_f^2 = v_p^2 - v_{esc}^2 = (3 v_{esc})^2 - v_{esc}^2 = 8 v_{esc}^2 \)
\( v_f = \sqrt{8} v_{esc} = \sqrt{8} \times 11.2 \approx 31.68 \text{ km/s} \)

मुख्य बिंदु:

• ऊर्जा संरक्षण का उपयोग।
• अनंत पर अतिरिक्त गतिज ऊर्जा का बचना।
• पलायन वेग के पदों में अंतिम वेग की गणना।

आम गलतियाँ:

• वर्ग करते समय गलती करना (\( 3 \times v \) का वर्ग \( 9v^2 \) होता है)।
• ऊर्जा समीकरण में गलत चिह्न लगाना।
• वर्गमूल सही से न निकालना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा संरक्षण समीकरण को स्पष्ट रूप से समझें।
b) पलायन वेग के संबंध का उपयोग करें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक \( \text{km/s} \) लिखना न भूलें।

 

Question 7.19: कोई उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से \( 400 \text{ km} \) ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इस उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने में कितनी ऊर्जा खर्च होगी? उपग्रह का द्रव्यमान = \( 200 \text{ kg} \); पृथ्वी का द्रव्यमान = \( 6.0 \times 10^{24} \text{ kg} \); पृथ्वी की त्रिज्या = \( 6.4 \times 10^6 \text{ m} \); तथा \( G = 6.67 \times 10^{-11} \text{ N m}^2 \text{ kg}^{-2} \).

Answer:

उपग्रह का द्रव्यमान \( m = 200 \text{ kg} \)
पृथ्वी का द्रव्यमान \( M = 6.0 \times 10^{24} \text{ kg} \)
त्रिज्या \( R = 6.4 \times 10^6 \text{ m} \)
ऊँचाई \( h = 400 \text{ km} = 0.4 \times 10^6 \text{ m} \)
बँधन ऊर्जा (Binding energy) का सूत्र:
\( E = \frac{GMm}{2(R+h)} \)
मान रखने पर:
\( E = \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 6.0 \times 10^{24} \times 200}{2 \times (6.4 \times 10^6 + 0.4 \times 10^6)} \)
इसे हल करने पर आवश्यक ऊर्जा लगभग \( 5.9 \times 10^9 \text{ J} \) प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• उपग्रह की कुल ऊर्जा का ऋणात्मक मान उसकी बंधन ऊर्जा होती है।
• बाहर भेजने के लिए उतनी ही धनात्मक ऊर्जा देनी पड़ती है।
• कक्षीय ऊँचाई को त्रिज्या में जोड़ा जाता है।

आम गलतियाँ:

• सूत्र में हर (Denominator) में 2 से भाग देना भूल जाना।
• ऊँचाई को मीटर में न बदलना।
• ऊर्जा के ऋणात्मक चिह्न को बाहर भेजने के संदर्भ में न समझना।

Exam Tips:

a) उपग्रह की बंधन ऊर्जा का व्यंजक याद रखें।
b) सभी मानों को SI पद्धति में रखें।
c) ऊर्जा का मात्रक जूल (\( \text{J} \)) लिखें।

 

Question 7.20: दो तारे, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान (\( = 2 \times 10^{30} \text{ kg} \)) के बराबर है, एक दूसरे की ओर सम्मुख टक्कर के लिए आ रहे हैं। जब वे \( 10^9 \text{ km} \) दूरी पर हैं तब इनकी चाल उपेक्षणीय हैं। ये तारे किस चाल से टकराएंगे? प्रत्येक तारे की त्रिज्या \( 10^4 \text{ km} \) है। यह मानिए कि टकराने के पूर्व तक तारों में कोई विरूपण नहीं होता (\( G \) के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए)।

Answer:

प्रत्येक तारे का द्रव्यमान \( M = 2 \times 10^{30} \text{ kg} \)
प्रत्येक तारे की त्रिज्या \( R = 10^4 \text{ km} = 10^7 \text{ m} \)
प्रारंभिक दूरी \( r = 10^9 \text{ km} = 10^{12} \text{ m} \)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से (प्रारंभिक कुल ऊर्जा = टक्कर के समय कुल ऊर्जा):
\( -\frac{GM^2}{r} = \frac{1}{2} Mv^2 + \frac{1}{2} Mv^2 - \frac{GM^2}{2R} \)
\( Mv^2 = GM^2 \left(\frac{1}{2R} - \frac{1}{r}\right) \)
मान रखने और हल करने पर वेग \( v \) प्राप्त होता है:
\( v \approx 2.58 \times 10^4 \text{ m/s} \)

मुख्य बिंदु:

• निकाय की प्रारंभिक और अंतिम कुल ऊर्जा का संरक्षण।
• टक्कर के समय दोनों केंद्रों के बीच की दूरी \( 2R \) होती है।
• दोनों तारों की गतिज ऊर्जा जुड़ती है।

आम गलतियाँ:

• टक्कर के समय की दूरी को केवल \( R \) मान लेना (यह \( 2R \) होती है)।
• ऊर्जा समीकरण में दोनों तारों की गतिज ऊर्जा शामिल न करना।
• किलोमीटर को मीटर में न बदलना।

Exam Tips:

a) द्विपिंड निकाय की स्थितिज ऊर्जा के समीकरण को ध्यान से समझें।
b) ऊर्जा संरक्षण का नियम पूरी स्पष्टता से लिखें।
c) गणना के चरणों में घातांकों का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 7.21: दो भारी गोले जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान \( 100 \text{ kg} \) त्रिज्या \( 0.10 \text{ m} \) है किसी क्षैतिज मेज पर एक दूसरे से \( 1.0 \text{ m} \) दूरी पर स्थित हैं। दोनों गोलों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा के मध्य-बिन्दु पर गुरुत्वीय बल तथा विभव क्या है? क्या इस बिन्दु पर रखा कोई पिण्ड संतुलन में होगा? यदि हाँ, तो यह संतुलन स्थायी होगा अथवा अस्थायी?

Answer:

प्रत्येक गोले का द्रव्यमान \( M = 100 \text{ kg} \)
बीच की दूरी \( r = 1 \text{ m} \)
मध्य-बिंदु पर दोनों गोलों द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल विपरीत दिशाओं में होने के कारण परस्पर निरस्त हो जाता है, अतः नेट बल शून्य होता है।
गुरुत्वीय विभव का मान:
\( V = -\frac{GM}{r/2} - \frac{GM}{r/2} = -4 \frac{GM}{r} \)
मान रखने पर:
\( V = -4 \times \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 100}{1} = -2.67 \times 10^{-8} \text{ J/kg} \)
पिंड संतुलन में होगा लेकिन यह संतुलन अस्थायी (Unstable) है।

मुख्य बिंदु:

• मध्य-बिंदु पर गुरुत्वीय बल शून्य होता है।
• गुरुत्वीय विभव अदिश राशि है, इसलिए दोनों जुड़ जाते हैं।
• संतुलन की स्थिति अस्थायी होती है क्योंकि थोड़ा विस्थापन करने पर बल एक तरफ खींच लेता है।

आम गलतियाँ:

• विभव को सदिश राशि मानकर शून्य बता देना।
• संतुलन के प्रकार (स्थायी/अस्थायी) की पहचान गलत करना।
• दूरी का आधा भाग (\( r/2 \)) सूत्र में न रखना।

Exam Tips:

a) बल और विभव में अंतर (सदिश बनाम अदिश) स्पष्ट रखें।
b) संतुलन की स्थिरता की जाँच करने का तरीका समझें।
c) मात्रक सहित अपने उत्तर को पूर्ण करें।

 

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